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तबलीगी जमात के ख़िलाफ़ मत बोलो, टीवी पर आ रही सब न्यूज फेक है: रेडियो मिर्ची RJ सायमा ने किया मरकज के ‘मानव बम’ का बचाव

भारत में पूरे समाज के लिए खतरा बन चुके तबलीगी जमात की हकीकत अब सबके सामने आ चुकी हैं। ऐसे में कुछ मीडिया गिरोह के लोग सोशल मीडिया पर इनका समर्थन कर रहे हैं और अब भी इन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं। रेडियो मिर्ची की आरजे सायमा उन्हीं में से एक हैं। जो जमातियों की हरकतों पर न केवल सफाई पेश कर रही हैं। बल्कि उनके गुनाह को फेक न्यूज़ कहकर उसपर लीपापोती भी कर रही हैं। उनका कहना है कि तबलीगी जमातियों ने गलती की। मगर जो उनकी गलती को मुद्दा बना रहे हैं वो इस देश में ज्यादा खतरनाक हैं।

दरअसल, आरजे सायमा ने दि प्रिंट के शेखर गुप्ता के एक ट्वीट को रीट्वीट किया। जिसमें शेखर गुप्ता ने तबलीगी जमात के मुस्लिम स्कॉलर की बात पोस्ट की थी कि तबलीगी जमात की हरकत को गलती कहिए। साजिश नहीं।

अब इसी को रीट्वीट करते हुए आरजे सायमा लिखती हैं, “वास्तव में ये यही है। एक गलती। शायद एक बहुत बड़ी गलती। लेकिन इसके पीछे मंशा गलत नहीं थी। जो लोग इसपर राजनीति कर रहे हैं वे इस देश के लिए खतरा हैं। वे कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक हैं।”

अब हालाँकि, इस समय सायमा जैसे लोगों की ये बातें ट्विटर पर किसी जहर से कम नहीं है। जो आम जनता से ये कहना चाहती हैं कि गलत को गलत मत बोलो, बल्कि जो उसे गलत बोले, जो ऐसे अपराधियों के अपराध को उजागर करे, उनके ख़िलाफ़ बोलो।

आरजे सायमा ये बात अच्छे से जानती होंगी कि इस समय जमाती जगह-जगह कितनी गंदगी मचा रहे हैं। मगर फिर भी वे हर पहलू से अंजान बन रही हैं और कह रही हैं कि तबलीगी जमात की हरकतें गलती हैं, उन्होंने सब कुछ जानबूझ कर नहीं किया। 

अब इसी कारण  सोशल मीडिया पर इस समय लोग उन्हें घेरने लगे हैं और उनका भ्रम मिटाने के लिए वे सभी हरकतें एक के बाद एक बता रहे हैं, जो तबलीगी जमाती पकड़े जाने के बाद और क्वारंटाइन सेंटर में कर रहे हैं। इसी क्रम में एक ऐसा प्रयास संजय नाम के यूजर ने भी किया। 

संजय ने सायमा का ट्वीट देखकर प्रतिक्रिया में सायमा के लिए लिखा, “स्वास्थ्य अधिकारियों पर थूकना, सड़कों पर बस से बाहर थूकना, महिला कर्मचारियों के सामने अर्ध नग्न हो, भद्दी टिप्पणी करना, अस्पतालों में अनुचित माँग करना, केवल पुरुष कर्मचारियों को उनके लिए उपस्थित होने के लिए हंगामा करना और आप कितनी आसानी से कह रही हो कि इनके इरादे खराब नहीं हैं। हद है।”

यहाँ संजय ने इस ट्वीट के जरिए जमातियों की हरकतों को उजागर करने की कोशिश की। मगर, सायमा कहाँ समझने वाली थीं। उन्होंने उन सभी बातों को फेक न्यूज बता दिया और संजय को सलाह दी कि वे अपने भीतर मौजूद घृणा से ऊपर उठें। क्योंकि एक जीवन मिला है उसे इतनी नकारात्मकता के साथ जीने में न व्यर्थ करें।

हैरानी की बात ये देखने को मिली कि उन्होंने टीवी पर दिखाई जा रही खबरों को फेक न्यूज़ कहकर खारिज कर दिया। साथ ही फेक न्यूज बनाने वाले ऑल्ट न्यूज का प्रचार किया। सायमा ने ऑल्ट न्यूज की तारीफ करते हुए संजय को सलाह दी कि वह ऑल्ट न्यूज को फ़ॉलो करें। ताकि उन्हें पता चले कि आखिर फेक क्या होता हैं। 

गौरतलब है कि जिस ऑल्ट न्यूज की खबर शेयर करते हुए आरजे सायमा यूजर से ऑल्ट न्यूज फॉलो करने की बात करती हैं। वो खबर उस वायरल वीडियो से संबंधित है। जिसमें एक मुस्लिम फल विक्रेता थूक लगाकर उसे बेचने के लिए रेड़ी पर रख रहा था। हालाँकि, इसके वायरल होने के पीछे फल विक्रेता की हरकत मुख्य कारण थी। मगर ऑल्ट न्यूज़ का फैक्ट चेक इस बात पर था कि वीडियो अप्रैल में वायरल होनी शुरू हुई है। लेकिन वास्तविकता में ये घटना फरवरी की है।

बता दें, देश में इस समय कोरोना वायरस के कारण हाहाकार मचा हुआ है। हर राज्य की सरकार इस समय दो मुसीबतों से जूझ रही हैं। एक तो ये कि कोरोना संक्रमितों के बढ़ते आँकड़ो को कैसे कंट्रोल किया जाए। दूसरा ये कि इन्हें फैलाने का मुख्य स्त्रोत बन चुके तबलीगी जमातियों को कैसे पकड़ा जाए। हालाँकि, ये बात सब जानते हैं कि अगर तबलीगी जमाती समय रहते अपनी बेवकूफी का प्रदर्शन न करते तो देश में ये आँकड़े अब तक 5 हजार पार नहीं करते और हो सकता था कि कुछ राज्य इससे अछूते भी रह जाते। मगर, इनकी नासमझी और मनमानियों के कारण ये गंभीर विषय बन गया। यहाँ तक की कई नेताओं ने नियमों का पालन न करने वाले ऐसे कोरोना पॉजिटिव जमातियों को ‘मानव बम‘ भी कहा।

जैश आतंकी सज्जाद अहमद डार के जनाजे में शामिल हुई भारी भीड़: सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियाँ, बढ़ा कोरोना संक्रमण का खतरा

जम्मू-कश्मीर में कल बुधवार (अप्रैल 8, 2020) को सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराए गए जैश ए मुहम्मद के एक आंतकी सज्जाद अहमद डार के जनाजे में 400 से ज़्यादा स्थानीय लोग शामिल हुए। सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करते हुए जनाजे में शामिल लोगों ने खुद के साथ अपने परिवार के जीवन को भी संकट में डाल दिया है। इसके बाद पुलिस ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में जनाजे में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

एक तरफ कोरोना महामारी के बीच लोग देश में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में इसकी अनदेखी कर सैकड़ों लोगों ने एक आतंकी के जनाजे में हिस्सा लिया। सुरक्षाबलों द्वारा जैश आतंकी सज्जाद अहमद डार को बुधवार को मार गिराने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया इस हिदायत के साथ कि जनाजे में ज्यादा लोग एकत्र न हों, लेकिन इसके बाद भी जैसे ही आतंकी के शव को परिजनों को सौंप दिया गया। नियमों और कोरोना से खतरे को ताक पर रखकर एक के बाद एक भारी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ उसके जनाजे में जुटने लगी।

इसकी जानकारी जैसे ही पुलिस-प्रशासन को हुई उन्होंने जनाजे में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ में आईपीसी की धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। जम्मू कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने बताया कि सज्जाद को संगठन में स्थानीय युवाओं की भर्ती का काम सौंपा गया था। वह लगातार इलाके के युवाओं को संगठन में भर्ती करने के काम में लगा हुआ था। उस पर कई अन्य मामले भी दर्ज थे।

आपको बता दें कि कल बुधवार को सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि बारामुला जिले के सोपोर इलाके में जैश के तीन से चार आतंकी छिपे हुए हैं। इस पर सेना की 22 राष्ट्रीय राइफल्स, 179 बटालियन सीआरपीएफ और एसओजी के जवानों ने सोपोर, आरमपुरा के गुलबड़ इलाके की घेराबंदी कर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया था। करीब 14 घंटे तक इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान के बाद आतंकियों के साथ शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने स्थानीय आतंकी सज्जाद डार को मार गिराया था।

गौरतलब है कि यह कोई पहल मौका नहीं कि जब किसी आतंकी के जनाजे में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जुटे हों। यहाँ पहले से ही यह सिलसिला जारी है, जिसमें लोग आतंकी को हीरो की तरह पेश करते हुए भारत विरोधी नारी लगाते हैं। इसे लेकर सुरक्षाबलों ने भी कई तरह की गाइडलाइन जारी की हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में बुधवार को कोरोना के 19 नए मामले सामने आए। अब तक प्रदेश में कुल 144 कोरोना मरीज पाए गए हैं, जिनमें 134 एक्टिव केस हैं।

‘मानव बम जैसे हैं दिल्ली से लौटे तबलीगी जमाती, महाराष्ट्र सरकार जानबूझकर नहीं पेश कर रही मरकज से जुड़े संक्रमितों के आँकड़े’

महाराष्ट्र में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या को देख परेशान हुए पूर्व सीएम देवेन्द्र फडनवीस ने तबलीगी जमातियों को लेकर बढ़ा बयान दिया है। फडनवीस ने कहा है कि दिल्ली के मरकज में शामिल हुए तबलीगी जमात के लोग संक्रमित होकर पूरे देश में घूम रहे हैं, जो कि एक मानव बम की तरह है। इनको पकड़कर इनकी जाँच की जानी चाहिए और इन्हें जल्दी से जल्दी क्वारंटाइन किया जाना चाहिए। फडनवीस ने यह बातें बीते दिन राज्यपाल से मुलाकात के बाद एक वीडियो जारी कर कहीं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार शाम को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया, वीडियो संदेश में फडणवीस ने कहा, “नई दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित मजहबी कार्यक्रम में कोरोना वायरस से संक्रमित होकर आए लोग ‘मानव बम’ जैसे हैं। वे बड़ी आबादी को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए सरकार को इन लोगों का पता लगाकर जल्दी से इलाज किया जाना चाहिए।”

वीडियो में फडनवीस ने राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। फडनवीस ने आगे कहा कि सरकार जानबूझकर तबलीगी जमात से जुड़े संक्रमित लोगों के आँकड़े पेश नहीं कर रही है। इतना ही नहीं सरकार के मंत्री तरह-तरह के बयान देकर भ्रामक बातें कर गंदी राजनीति कर रहे हैं। सरकार दिल्ली मरकज में शामिल होकर लौटकर आए लोगों को पकड़ने में असमर्थ है। जरूरी है कि इन लोगों का पता लगाकर जल्दी से जाँच की जाए और फिर इन्हें क्वारंटाइन किया जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने जो राशन लोगों के लिए दिया है वह यहाँ के लोगों को नहीं मिल रहा है। वह भुखमरी के कगार पर हैं। यहाँ तक कि सरकार डॉक्टरों को पीपीई किट भी उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं। इस तरह से ऐसे लोगों का मनोबल कम होता है, जो लोग सामने आकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।

आपको बता दें कि देश में सबसे अधिक कोरोना से मरने वालों और इससे संक्रमिल लोगों की संख्या महाराष्ट्र में सबसे अधिक है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाईट के मुताबित महाराष्ट्र में अब तक कोरोना की चपेट में आने से 72 लोगों की मौत, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1135 से अधिक हो चुकी है।

चौंकाने वाली बात यह कि अकेले मुंबई शहर ही कोरोना का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है यहाँ अकेले लगभग 700 कोरोना संक्रमित मरीज हैं और करीब 40 की मौत हो चुकी है। मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों में जमात के कनेक्शन के चलते कोरोना वायरस फैला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुंबई के अस्पतालों में 90 फीसदी मरीजों का तबलीगी जमात से कनेक्शन सामने आया है।

गौरतलब है कि इससे पहले बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में कहा था कि इस दिल्ली मरकज में शामिल और फिर वहाँ से कोरोना संक्रमित हुए तबलीगी जमात के लोग मानव बम की तरह घूम रहे। इन लोगों को खुद ही प्रशासन को सौंप देना चाहिए, ताकि समाज में यह बीमारी न फेंला सकें।

अब भी अगर छिपे मिले तबलीगी जमाती तो होगा हत्या के प्रयास में केस दर्ज: कोरोना को लेकर हरियाणा सरकार हुई बेहद सख्‍त

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ से निकलकर हरियाणा में जाकर छिपे जमातियों के ख़िलाफ़ राज्य सरकार का रुख सख्त हो गया है। सरकार का कहना है कि अब राज्य में छिपे जमातियों के ख़िलाफ़ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने जमात से लौटे सभी लोगों को बुधवार तक सरेंडर करने का समय दिया था। इसके बाद 200 तबलीगी जमातियों ने खुद को अलग-अलग जिलों में प्रशासन के सामने पेश किया। अब आने वाले समय में जो भी जमाती पकड़ा जाएगा, उसपर हत्या का प्रयास करने का मामला दर्ज होगा। बता दें, राज्य में अब तक मिले जमातियों की संख्या 1562 हो गई है। इनमें से 82 जमाती ऐसे हैं जिन्हें कोरोना पॉजिटिव पाया गया और 590 की रिपोर्ट नेगेटिव आई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया है कि बुधवार शाम 5 बजे के बाद किसी भी जिले में छिपे हुए तबलीगी जमाती के पकड़े जाने पर उसके खिलाफ़ हत्या के प्रयास (आईपीसी धारा 307) में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। फिर उसका कोरोना टेस्ट होगा। यदि टेस्ट पॉजिटिव रहा तो यह मुकदमा चलता रहेगा। रिपोर्ट निगेटिव आने की स्थिति में उसपर से धारा 307 हटा दी जाएगी

हरियाणा में छिपे तब्‍लीगी जमातियों पर अब होंगे हत्या के प्रयास के केस, सरकार हुई सख्‍त
साभार: दैनिक जागरण

दैनिक जागरण के मुताबिक, इस खबर की पुष्टि खुद राज्य के गृह मंत्री अनिल विज ने की है। माना जा रहा कि अब पुलिस हर जिले में छिपे हुए तबलीगी जमातियों की धरपकड़ करेगी, ताकि उनके जरिए कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सके।

इसके अलावा राज्य में पकड़े जा चुके 1562 जमातियों के कोरोना टेस्ट कराने का निर्णय भी राज्य सरकार ने लिया है। इनमें से अब तक 884 का टेस्ट हो चुका है। 590 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। 212 लोगों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बाकी जमातियों के भी टेस्ट चल रहे हैं। जो शुक्रवार तक पूरे होने की संभावना है। बता दें, 1562 जमातियों में 1036 दूसरे राज्यों के, 419 हरियाणा के और 107 जमाती विदेशी हैं।

जमातियों के प्रति अपने कड़े रुख पर गृह मंत्री अनिल विज ने इन्हें समाज का दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि इनके कारण पूरे प्रदेश की जिंदगी को दाव पर नहीं लगाया जा सकता। बड़ी संख्या में इनपर काबू किया जा चुका है। अब आगे किसी के पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। उनका कहना है कि हमने इन जमातियों को बाहर आने का काफी समय दिया। अब और समय नहीं दिया जा सकता। 

वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री ने भी जमातियों को लेकर बयान दिया है। उन्होंने तबलीगी जमातियों के लिए कहा कि छिपना किसी समस्या का समाधान नहीं है। अभी भी यदि कोई सामने आएगा तो कानूनी तौर तरीकों का इस्तेमाल करते हुए क्वारंटाइन के बाद उसे जाने दिया जाएगा। उन्होंने माना कि राज्य में कोरोना पाजीटिव मामलों की संख्या इन तबलीगी जमातियों की वजह से बढ़ी है, लेकिन अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा। उन्हें बाहर निकलना चाहिए।

डोनॉल्ड ट्रंप ने PM मोदी को कहा- धन्यवाद! भारत की इस मदद को कभी भुलाया नहीं जाएगा

कोरोना महामारी के भयानक प्रकोप से इस समय पूरा विश्व त्रस्त है। मगर, अमेरिका उन देशों में से एक है जिनपर इस बीमारी का असर सबसे ज्यादा पड़ा है। ऐसे में भारत द्वारा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को मंजूरी मिलने के बाद वे फूले नहीं समा रहे। जी हाँ, मीडिया में चले लंबे बवाल के बीच जब भारत सरकार ने दवाई के निर्यात की मंजूरी दी तो वहाँ के राष्ट्रपति ट्रंप बेहद खुश हो गए। उन्होंने जानकारी पाते ही भारत के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की और पीएम समेत सभी देशवासियों को धन्यवाद कहा। उन्होंने लिखा कि भारत की इस मदद को भुलाया नहीं जा सकेगा।

बुधवार को ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “असाधारण समय में दोस्तों में घनिष्ठ सहयोग की जरूरत होती है। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर भारत और भारत के लोगों को धन्यवाद। यह भुलाया नहीं जाएगा। इस लड़ाई में न सिर्फ भारत के लोगों की मदद के लिए बल्कि मानवता की मदद में शक्तिशाली नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद।”

ट्रंप ने इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद माँगी थी। मगर, इसके बाद एक पत्रकार के सवाल में उन्होंने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यात न करने पर भारत पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही थी। जिसे मीडिया ने खूब भुनाया था और सबके सामने इस तरह पेश किया था, जैसे उन्होंने भारत के आगे करो या मरो की स्थिति रखी है। लेकिन बता दें, डोनॉल्ड ट्रंप ने भारत को धमकाया नहीं था। उन्होंने केवल एक सवाल के जवाब में सामान्य प्रतिक्रिया दी थी। जो शायद मुश्किल की घड़ी में कोई भी बड़े पद पर बैठा अधिकारी या मंत्री अपने देश की जनता को देता है।

उन्होंने इस दौरान ये भी कहा था, “अगर वे प्रतिबंध न हटाने का निर्णय लेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मुझे अभी उनका निर्णय नहीं पता। मुझे मालूम है कि उन्होंने दवाई अन्य देशों के लिए प्रतिबंधित की हैं। मैंने उनसे कल बात की। हमारी अच्छे से बात हुई। हम देखेंगे कि अब आगे क्या होगा। मुझे बहुत हैरानी होगी कि अगर ऐसा होता है। क्योंकि आप जानते हैं कि भारत हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अच्छा व्यवहार करता है।”

सिर्फ़ ट्विटर ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देने के दौरान भी पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने मोदी को महान नेता बताया।

बता दें कि वैश्विक महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस का संक्रमण विश्व के कई देशों में तेजी से फैल रहा है। इटली, स्पेन जैसे विकसित सुपर पावर देशों ने भी इस वायरस के आगे घुटने टेक दिए हैं। खुद अमेरिका की नजरें अब मदद की आस में भारत पर टिकी हैं। ट्रंप के मुताबिक कोरोना से इलाज में भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के अच्‍छे परिणाम सामने आए हैं। इसलिए वे इसे एक आस की तरह देख रहे हैं।

व्यंग्य: तबलीगी जमातियों ने की क्वारंटाइन में टट्टी, ‘स्वच्छता अभियान है फेल’ बोले ध्रुव लाठी

समय बीतता जाता है और मात्र 99% तबलीगी जमातियों के कारण बचे हुए पूरे एक प्रतिशत का नाम खराब होता जाता है। ताजा खबर, उत्तर प्रदेश के नरेला का है जहाँ नरेन्द्र मोदी के तमाम ‘स्वच्छता अभियान’ के दावे के, कि भारत खुले में शौच से मुक्त हो चुका है, नया मामला सामने आया है, जहाँ तब्लीगी जमात के कोरोना संदिग्ध लोगों ने कमरे के बाहर शौच कर दी।

अब आप सोचिए कि कोई भला क्यों ऐसा करेगा? अल्पसंख्यकों पर इतना ज्यादा अत्याचार हो रहा है कि कई खबरों में उन्हें बाहर से सेक्स आदि का भी प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा, तो वो बताते हैं कि मरकज़ निज़ामुद्दीन में उन्हें साथ खाने से ले कर सेक्स कैसे करना चाहिए, ये भी सिखाया जाता है।

आप दोबारा सोचिए कि आज के दौर में जहाँ भारत जैसी रूढ़िवादी सभ्यता में, कहीं कोई संस्था अपने अनुयायियों को सेक्स एजुकेशन दे रही है, तो उसे आप कोरोना के नाम पर छापे मारी कर रोक देंगे? उन्हें तमाम मीडिया वाले मिल कर बदनाम करेंगे?

कोरोना का क्या है, वो तो मौलाना शाद ने खुद कहा है कि ऊपर वाले ने जब दे दिया, और उसने 70,000 फरिश्ते भी तुम्हारी हिफाजत के लिए दिए हैं, तब भी अगर तुम डॉक्टरों की वाहियात बातों पर विश्वास रखोगे और मस्जिदों को आबाद नहीं करोगे, तो तुम्हें तो वैसे भी बीमारी होनी ही है। इसलिए मस्जिद में जमा होने का, उसे आबाद करने का समय है कि जब तुम आओगे, फरिश्ते उतरेंगे और वो तुम्हें ठीक करेंगे।

लेकिन हुआ क्या? मौलाना शाद की इस तकनीक का परीक्षण तक नहीं होने दिया गया और उनसे कहलवाया गया कि वो लोगों से अपील करें कि डॉक्टरों की बात मानी जाए, सरकार की अपील सुनी जाए। उसके बाद मीडिया ट्रायल शुरू हो गया कि तबलीगी ने कहीं थूक दिया, कहीं पेशाब इकट्ठा कर रहे हैं, कहीं शौच कर दिया…

एक मर्द के तौर पर आप सोचिए कि ये सारी चीजें क्या कुदरती नहीं हैं? यहाँ शाहीन बाग में जब कहा गया कि खाना तो कुदरती तौर पर आ रहा है तब तो सब ने मान लिया। लेकिन किसी को कुदरती तौर पर थूक आ जाए, पेशाब लग जाए, गुदाद्वार पर विष्ठा दस्तक देने लगे, तो क्या वो किसी पर थूक भी नहीं सकता? बोतलों में पेशाब नहीं कर सकता? दरवाजे पर शौच नहीं कर सकता?

अरे, जिनके खानदान के लोगों ने एक हजार साल तक राज किया है यहाँ के हिन्दुओं पर, वो क्या मुँह में थूक आने पर डॉक्टरों पर फेंक नहीं सकते? क्या हो जाएगा? थूक में कोरोना है? बिना जाँचे कैसे पता? और अगर है भी तो डॉक्टर ने तो पीपीई सूट पहना हुआ है न। उसे अगर फिर भी हो गया तो तुम्हारा मोदी ही जिम्मेदार है कि कैसे सूट दे रहा है जो तबलीगियों के मुँह से निकली कुदरती थूक तक नहीं झेल पा रहा?

क्या यही है गंगा-जमुनी तहजीब कि अनंतकाल से खेतों में मल त्यागने जाने वाले समाज में, आज एक तबलीगी गेट पर बैठ कर विष्ठा कर रहा है, तो उसे यहाँ के बहुसंख्यक बर्दाश्त नहीं कर पा रहे! क्या ऐसे होगी विविधता में एकता कि हम तुम्हारे घर के सामने टट्टी तक नहीं कर सकते?

आप बताइए कि पेशाब बोतल में रखने पर रोक है! अरे! आज क्या मजहबी इन्सान इतना पराया हो गया कि अपना ही पेशाब बोतल में नहीं रख सकता? मतलब थूकने पर मनाही है, शौच करने पर मनाही है, तब हमने बोतलों में पेशाब रख लिया, तो भी दिक्कत! अरे भाई बता दो कि थूक, पेशाब और शौच को पास में रखें, या बाहर फेंके। माइंड मेक अप कर लो। ऐसे नहीं चलेगा कि दोनों साइड से तुम ही बजाओ।

इंदौर में कुछ भाइयों ने डॉक्टर और पुलिस पर पत्थरबाजी कर दी। क्या हो गया? आपको नहीं पता कि फेंकने पर अगर हम आ गए तो क्या-क्या फेंक देते हैं। पत्थर तो कुदरती चीज है, पड़ी थी, हथेली में खुजली हुई, फेंक दिया। जब एक बार इलाके में बता दिया कि हमें नहीं हो रहा कोरोना, तो पुलिस क्यों दिमाग लगाने आती है?

कभी नमाज पढ़ने पर रोक लगाने की बात होती है, कभी जाँचने आ जाते हैं। क्या इस देश का संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी नहीं देता? हिन्दुओं की शादियों में बंदूकें चले तो वो भावनात्मक बात हो जाती है कि खुशी में फायर कर दिया, और हमने मधुबनी में गोली चला दी थोड़ी सी, तो उसे आपराधिक कह दिया! अरे, हमने गम में फायर कर दिया, हमारे भी जज्बात हैं, हम भी भावनात्मक लोग हैं, हम भी अपने आप को ऐसे अभिव्यक्त करते हैं।

बिजनौर में अंडा करी और बिरयानी माँग ली तो बवाल हो गया कि देखो जमाती क्या-क्या माँग रहे हैं! क्या करें, देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद होते देखें हम? मुर्गीपालन और अंडेवालों पर तो रवीश जी ने भी प्राइम टाइम कर दिया था कि हालत खराब हो जाएगी व्यवसायियों की। तो क्या एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हम डिमांड क्रिएट कर, सप्लाई चेन में स्फूर्ति नहीं ला सकते?

कानपुर के हमारे भाइयों ने जब थूक-थूक कर पूरे गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल अस्पताल के क्वारंटाइन वार्ड को सैनिटाइज करने की कोशिश की तब भी न्यूज बना दिया गया। हमने देखा है सैनिटाइजर। बोतल में पारदर्शी चीज होती है। हाथ पर लगाते हैं, और कहते हैं कि कीड़ा मर जाता है। हमारे मुँह में भी तो कुदरती पारदर्शी लार है।

हमने वही फेंका, हमारी मंशा पाक थी, लेकिन लोग क्या कह रहे हैं कि तबलीगियों ने थूक कर गंदा कर दिया! क्या विज्ञान नहीं कहता कि घाव पर थूक लगाओ, उसमें एंटीबैक्टेरियल गुण होते हैं? कर लोग गूगल, फिर बताना की पाँच वक्त का नमाजी तुमसे झूठ बोल रहा था! लाहौलविलाकुवत! जो चीज साबित नहीं कर सकते, कि धरती गोल है, तो उस पर हमारा मजाक बनाओगे जिसे मात्र सौ-पचास लोगों ने देखा है, लेकिन थूक में जो मेडिकल चीजें हैं, उसको झुठला दोगे?

ग़ाज़ियाबाद वाला मामला कितना तूल पकड़ा कि नर्सों पर अश्लील टिप्पणी कर दी, गंदे गाने सुने, बीड़ी माँग रहे थे। आप यह तो मानते हैं कि आदमी अकेले पड़े-पड़े बोर हो जाता है? नर्सें लगातार काम कर रही थी, हमने माहौल हल्का करने के लिए बोला कि हैदराबाद चलो, फूल वाले बुर्के में रखेंगे, झीनी-झीनी जरीदार जाली से हवा आएगी तो मई के महीने में जो आँखों पर ठंढी लगेगी कि एसी भूल जाओगी। ये तो जेनरल नॉलेज की बात है, शेयर की, हमें कह दिया गया कि तबलीगी ठरकी हैं, तबलीगी वाले औरतों का सम्मान नहीं करते।

आप ये भी तो मानेंगे कि गरमी का मौसम है। ऐसे में हमने सोचा कि गमगीनी के इस माहौल को थोड़ा लाइट किया जाए, हम नंगे हो कर घूमने लगे। किसी को क्या परेशानी हो सकती है? आप बाथरूम में नंगे हो कर नहाते हैं, वो ठीक, यहाँ एक आदमजात गरमी में नंगा हो गया, तो क्या परेशानी हो गई? आँख बंद कर लो, दिक्कत है तो। कमाल की बात ये है कि खुद कुछ नहीं करना, सामने वाले की हर बात को नकारात्मक तरीके से देखना।

बात यह है कि अल्पसंख्यकों की हर बात में देश के कुछ लोगों को परेशानी है। हम अपने फलों के ठेले पर रखे फल पर थूक लगाएँ, तब परेशानी है। हम थूक लगा कर तरबूज काटें तब परेशानी है। हमारी आलोचना कोई करे तो उसे गोली मार दें, तब परेशानी है! मतलब थूक हमारा, फल हमारा, तरबूज हमारा, चाकू हमारा, गोली हमारी… और उसे कैसे इस्तेमाल करेंगे, वो हमें कोई और बताएगा!

ये है भारत का निजाम जिसके लिए लेहरू जी और गान्ही बाबा इतनी लड़ाई किए? क्या इसी निजाम के लिए संविधान सभा बैठा करती थी जिसमें अल्पसंख्यकों को अपनी थूक पर ही हक नहीं, देश का तो खैर छोड़ ही दीजिए! हम क्या करें, कहाँ जाएँ? कोई कहता है पाकिस्तान चले जाओ। पागल समझ रखा है क्या कि पाकिस्तान चले जाएँ, हमें क्या पता नहीं था कि उधर के मजहबी कैसे होंगे। उनके देश का बाप दाढ़ी तक नहीं रखता था, वहाँ तो नहीं ही जाना।

और हाँ, ये जो शौच वाली बात है न, उससे तो यही साबित होता है कि मोदी का शौचालय वाला अभियान फुस्स है। उसने ताल ठोक कर कहा था कि भारत खुले में शौच से मुक्त है। अगर मुक्त हो गया होता तो कैसे हमारे भाई कर लेते? कुछ तो सिस्टम होगा ना कि आदमी खुले में जाए तो ‘मुक्त’ होने के कारण उतरे ही नहीं। अरे, जैसे सड़क क्रॉस करने पर रेड लाइट होती है, ट्रैफिक वाला होता है, रेलवे फाटक होता है, वैसा कुछ सिस्टम होना चाहिए कि नहीं।

तभी तो जुगराफिया से ले कर अलगंजा, अलपंचर और अलझबरा की समझ रखने वाले ध्रुव लाठी ने कहा कि तबलीगियों का शौच कर पाना बताता है कि मोदी का स्वच्छता अभियान एक असफल कैम्पेन है। लाठी ने आगे कहा, कि यूँ तो मोदी का आईटी सेल क्वारंटाइन सेंटर में मल त्यागने को ‘ओपन’ नहीं मानते हुए, अपने वादे की सफलता की बात करेगा, लेकिन हम सब जानते हैं कि वो झूठ है और मोदी एक्सपोज हो चुके हैं।

इसको और अलग तरीके से देखना है तो आप यह भी देखिए कि भारत के स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई कैसे सामने आती? अगर तबलीगी मरकज दिल्ली में न हुआ होता और हमने अपने सैकड़ों दीनी लोग पूरे भारत के मस्जिदों में न भेजे होते, तो पता कैसे चलता कि हमारी राज्य सरकारें तैयार हैं। हमने तो देश का भला किया है कि जब सब कुछ ठीक चल रहा था, तो हमने अपने लोग उतारे कि हालात बदल दो, जज्बात बदल दो, और दिखा दो कि तुम कौन हो।

आप इसे एक मॉक ड्रिल कह सकते हैं कि हमारे तबलीगी भाइयों के कारण, अलहमदुलिल्ला, हमने भारत की सोई स्वास्थ्य व्यवस्था को ऐसा तमाचा मारा है कि अब ये आँखों में टेप साटे घूम रहे हैं। इसलिए, हमें तो धन्यवाद देने, हमारा शुक्रगुजार होने के अलावा और कुछ बनता ही नहीं है भारत के लोगों का।

कुल मिला कर बात यही है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत, अपने ही भीतर के कुदरती थूक, कुदरती पेशाब और कुदरती टट्टी को अपने मन के हिसाब से यहाँ-वहाँ फेंकने वाले मासूम तबलीगियों को उनके मजहब होने के कारण बदनाम किया जा रहा है। आज देश कोरोना से लड़ रहा है, ऐसे में हमें मजहब-मजहब करने से बचना चाहिए। तभी एक समाज के तौर पर हम आगे बढ़ पाएँगे।

बॉलीवुड गैंग के ‘पेड ट्वीट्स’ की हवा फुस्स: जानिए, गरीबों की मौत से कितनी चिंतित उद्धव सरकार

महाराष्ट्र में 117 नए मामलों के साथ कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 1,135 हो चुकी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस के संक्रमण से आठ लोगों की मौत हुई है। इसके साथ राज्य में संक्रमण से कुल मृतकों की संख्या 72 हो गई है। लेकिन महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की सोशल मीडिया सेना कुछ और ही कह रही है। यह सेना रोजाना ट्विटर पर दिन के कम से कम 3 टाइम एक ही सन्देश ट्वीट करती है, जिसमें महाराष्ट्र सरकार की कोरोना महामारी से निपटने के प्रयासों को लेकर पीठ थपथपाई गई होती है।

सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि सोशल मीडिया पर एक सुर में महाराष्ट्र सरकार के गुणगान में भक्तिगीत गाती हुई इस सेना के ट्वीट महाराष्ट्र के मंत्रियों की प्रेस वार्ता से कहीं भी मेल नहीं खाते हैं। जमीनी आँकड़ों से इतर, कोरोना पर महाराष्ट्र सरकार की वाह-वाही करने वाला यह गिरोह कई दिनों से एक ही प्रकार के ट्वीट कर रहा था।

इस गिरोह में मौजूद लोगों के नाम देखकर ही इसके दावों की विश्वसनीयता स्पष्ट हो जाती है, क्योंकि इसमें वो नाम हैं, जो अक्सर अपने जन्मदिन की पार्टी से लेकर हर दूसरे फंक्शन में पटाखे फोड़ने के बाद ट्विटर पर पर्यावरण बचाने की अपील वाले ट्वीट किया करते हैं। यही नहीं, ये गिरोह जनता कर्फ्यू से लेकर मोमबत्ती और दीपक जलाने जैसी बातों से भी असहमत नजर आता है।

बहुत दिनों से सोनम कपूर, जावेद अख्तर, स्वर भास्कर, स्वाति चतुर्वेदी, आदि ट्विटर पर महाराष्ट्र सरकार को शाबासी देते हुए देखे जा रहे थे। इनका दावा है कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार कोरोना से निपटने में कहीं ज्यादा सफल रही है।

लेकिन आज की ही फ्री प्रेस जरनल की एक रिपोर्ट में आँकड़े एकदम उलट है। यह रिपोर्ट बताती है कि महाराष्ट्र सरकार कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित नहीं है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवा पर पैसा खर्च करने में सभी बड़े राज्यों में यह सबसे पीछे रहा है। यह आँकड़े अप्रैल 07, 2020 को CARE रेटिंग्स द्वारा निकाले गए एक शोध पत्र द्वारा सामने लाए गए हैं।

सरकार द्वारा पैसे खर्च करने के तरीके के विश्लेषण पर जरा सा ध्यान देने पर आप पाएँगे कि स्वास्थ्य सेवाओं की तुलना में पुनर्वास पर अधिक खर्च किया है। जैसा कि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गरीबों की झुग्गियाँ चुनाव के समय वोटबैंक की तरह इस्तेमाल की जाती हैं और आखिर में रियल स्टेट की अपार सम्भावनाएँ तैयार करती हैं। यदि आपको ध्यान होगा तो दिल्ली विधानसभा चुनावों में यही झुग्गियाँ अरविन्द केजरीवाल का सबसे बड़ा टारगेट रहती आई हैं। महाराष्ट्र में इन झुग्गियों की संख्या पूरे भारतवर्ष में सर्वाधिक हैं।

यह भी पाया गया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) कुछ इमारतों में सैनिटाइजर्स इस्तेमाल करती रही, जबकि कुछ को उसने छोड़ दिया। दूसरा तरीका यह है कि आप BMC को पत्र लिखें और कोरोना की महामारी के टाइम में लाइन में लगकर अपने नम्बर आने का इन्तजार करें।

इस चार्ट में आप देख सकते हैं कि महाराष्ट्र ने अपने जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के प्रतिशत के रूप में किसी भी बड़े राज्यों की तुलना में सबसे कम पैसे खर्च किए हैं। एक और बात यह कि स्वास्थ्य सेवाओं पर अपने कुल राजस्व का सबसे कम प्रतिशत खर्च करने वाला अभी तक सिर्फ तेलंगाना ही था। तो क्या अब इस मामले में महाराष्ट्र ने अपनी प्रतिस्पर्धा तेलंगाना से शुरू कर दी है?

इतनी बड़ी आपदा के समय भी यदि महाराष्ट्र सरकार झुग्गियों की अनदेखी कर रही है तो यहाँ हर हाल में एक बड़े संकट की और इशारा करता है। वह भी तब, जब महाराष्ट्र कोरोना संक्रमितों की संख्या में एक अग्रणी राज्य है।

लेकिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके पुत्र आदित्य ठाकरे का सारा ध्यान शायद सिर्फ सोशल मीडिया पर छवि को दुरुस्त रखने में है। बॉलीवुड की वे ‘हस्तियाँ’ जिन्होंने रोजगार की कमी के चलते केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार-विरोधी एजेंडा अपनाकर अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखी है, वह इस काम उनके सहायक की भूमिका में नज़र आ रही हैं।

लॉकडाउन में एक बीवी के साथ घिरा हूँ, दूसरी के घर जा सकता हूँ: पुलिस से माँगी इजाजत

दुबई के एक रेडियो स्टेशन में एक पुलिस अधिकारी के सामने तब अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक श्रोता ने अजीब सा सवाल पूछ दिया। दरअसल, कोरोना वायरस को लेकर वहाँ भी अन्य देशों की तरह लोगों को सेल्फ-क्वारंटाइन में रहने को कहा गया है। उक्त श्रोता ने पूछा कि क्या उसे क्वारंटाइन के दौरान अपनी दोनों बीवियों के घर में बारी-बारी से रहने की इजाजत मिल सकती है? चूँकि वहाँ लोगों को घर में रख कर बाहरी इलाक़ों को सैनिटाइज किया जा रहा है, उक्त व्यक्ति ने बताया कि वो एक ही बीवी के साथ घिरा हुआ है।

कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि उसने दो शादी की है। उसने इस बात की अनुमति माँगी कि वो जब चाहे अपनी दोनों बीवियों के घर जा सके। ब्रिगडियर सैफ मुहैर अल मज़रूई ने उस व्यक्ति के इस सवाल पर ठहाका लगाया। वो वहाँ के ट्रैफिक विभाग के डायरेक्टर भी हैं। उन्होंने कहा कि अनुमति न मिलने की बात बोल कर अपनी दूसरी बीवी के सामने बहाना मार सकता है, जिसके पास वो नहीं जा पा रहा है।

हालाँकि, ब्रिगेडियर ने इस चीज की अनुमति देने से इनकार कर दिया, क्योंकि वहाँ की सरकार ने कहा है कि सिर्फ़ ज़रूरी चीजों के लिए ही लोग बाहर निकल सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास रोज इस तरह के फोन कॉल्स आते हैं और लोगों को एक बार ही निकलने की अनुमति है। इसका इस्तेमाल वे सिर्फ़ ज़रूरी वस्तुएँ खऱीदने या फिर कोई आवश्यक काम करने के लिए कर सकते हैं।

ब्रिगेडियर ने बताया कि जिन क्षेत्रों को पहले सैनिटाइज करने में 1 सप्ताह लगते थे, अब वहाँ 1 दिन में ही काम हो जाता है। यूएई में अब तक 2500 के क़रीब कोरोना वायरस के मामले आए हैं।

6 जिले 66 मौलाना: मस्जिदों को सैनिटाइज तो मौलवियों को क्वारंटाइन कर रहा बिहार

तबलीगी जमात वालों ने पूरे भारत में कोरोना वायरस के प्रकोप को और बढ़ा दिया। एक तरह से दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ मस्जिद से निकल कर जमाती भारत के विभिन्न राज्यों में पहुँचे और वो वहाँ के मुस्लिम बहुल इलाक़ों में छिपे रहे। बिहार में भी कई मस्जिदों में जमाती छिपे हुए थे, जिन्हें एक-एक कर निकाला गया। इस दौरान मस्जिदों ओर मुस्लिम बहुल इलाक़ों में सर्च के लिए गई पुलिस टीम पर हमले भी हुए। मधुबनी में फायरिंग की गई।

सबसे पहले तो बात पटना की। यहाँ 14 विदेशी नागरिक एक मस्जिद में छिपे मिले। पटना का नूरी मस्जिद एक तरह से बिहार में जमातियों का मुख्यालय है। जब पुलिस-प्रशासन वहाँ पहुँचा तो वो सभी ख़ुद को स्वस्थ बताने लगे और मेडिकल टेस्ट से भी आनाकानी की। बाद में सभी विदेशी नागरिकों का मेडिकल टेस्ट कराया गया। ये सभी 15 दिनों तक उस मस्जिद में छिपे हुए थे। इनमें से कई ने बताया कि वो दिल्ली से पटना पहुँचे थे। उन सभी का पुराना ट्रेवल रिकॉर्ड मिला था।

इसी तरह बारा में भारत-नेपाल बॉर्डर पार करने की कोशिश कर रहे 9 मौलानाओं को पुलिस ने पकड़ लिया था। पता चला था कि ये सभी आसपास के इलाकों की मस्जिदों में छिपे हुए थे। सभी मौलाना तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों में हिस्‍सा लेकर लौटे थे। उन्होंने बहाना बनाया था कि वो लॉकडाउन की वजह से यहाँ पर फँस गए हैं। जिन मौलानाओं को पकड़ा गया, वो सभी मटीअरवा गाँव के नजदीक ‘नो मैंस लैंड’ पार कर नेपाल में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। इन सबको आइसोलेट किया गया।

अररिया के जामा मस्जिद से भी 9 लोग पकड़े गए थे। मेडिकल टेस्ट कराने के बाद सबको क्वारंटाइन किया गया। एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी लेकिन बाद में पता चला कि उसकी मौत कोरोना के कारण नहीं बल्कि प्राकृतिक मृत्यु हुई थी। ये सभी मलेशिया से आए थे। इसी तरह किशनगंज के 13 लोग मिले थे, जिन्हें वहीं के एक मस्जिद में क्वारंटाइन किया गया था।

मधुबनी की बात करें तो वहाँ अंधराठाढ़ी थाना के गीदरगंज गाँव से चार जमाती और रुद्रपुर थाना क्षेत्र के हरना गाँव की एक मस्जिद से 11 बंगाली जमातियों को क्वारंटाइन किया गया था। अंधारठाढ़ी में पुलिस पर हमला भी किया गया था। इन सभी को क्वारंटाइन करने के बाद पुलिस ने मस्जिद को भी सैनिटाइज किया। ब्लीचिंग पाउडर और केमिकल्स के साथ पूरे इलाक़े में अग्निशमन विभाग को लगाया गया था।

मधुबनी से सटे दरभंगा जिले में भी 10 मौलवी आए थे, जिन्होंने क़रीब एक दर्जन मस्जिदों में भाषण दिया था। ये सभी 15 मार्च के आसपास दिल्ली से ट्रेन के माध्यम से दरभंगा पहुँचे थे। इन लोगों को स्थानीय स्तर पर सुविधा दिलाने और ठहराने में शामिल एक वार्ड पाषर्द समेत कुछ नामी लोगों को भी पुलिस ने अपने रडार पर लिया था। इसी तरह मोतिहारी के भी एक मौलवी को पकड़ के क्वारंटाइन किया गया था।

मरकज से निकल तबलीगी जमातियों ने किए 12 अनूठे कारनामे, 10वाँ तो… खुदा खैर करे

निजामुद्दीन स्थित मरकज से निकले तबलीगी जमात के सदस्य देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मुख्य स्रोत बनकर ही नहीं उभरे। अपने कारनामों से ये लगातार चर्चा में भी बने हुए हैं। चाहे वह क़्वारंटाइन किए जाने के बाद डॉक्टरों पर थूकना हो या फिर अश्लील वीडियो देखते हुए नर्सों के सामने नंगा होना।

इनमें जमात के देसी सदस्यों के साथ-साथ पर्यटक वीजा पर आकर मजहबी गतिविधियों में शामिल होने वाले ‘धर्म प्रचारक’ भी हैं। थूकने और नंगई से ऊबने के बाद अस्पताल में 25-25 रोटियों और स्वादिष्ट बिरयानी की डिमांड भी इन्होंने की। मामला चाहे मस्जिद, मदरसों में इनकी बिरादरी की खोजबीन का हो, या फिर इन्हें आइसोलेशन में रखने का, जमात के सदस्यों ने व्यवस्था में बाधा डालने की हर मुमकिन कोशिश की है।

अस्पताल में शौच करने से लेकर संक्रमण फैलाने के उद्देश्य से डॉक्टर्स पर थूकने और हमला करने तक, भारत से लेकर पाकिस्तान तक तबलीगी जमातियों में विचित्र एकरूपता देखी जा रही है। परिस्थितियाँ ऐसी बन गई हैं कि स्वास्थ्यकर्मी और पुलिसकर्मियों के बड़े हिस्से का कीमती वक़्त इनकी बदसलूकी से निपटने में जाया हो रहा है।

क्वारंटाइन से लेकर पुलिस की खोज में तबलीगी जमातियों और समर्थकों का हंगामा

एक ओर जहाँ क्वारंटाइन किए गए जमातियों का हंगामा जारी था, उसी समय देश के विभिन्न हिस्सों में इनकी तलाश में जुटी पुलिस पर मजहबी लोगों का हमला भी चालू हो गया। इन हमलों के पीछे उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ निजामुद्दीन मरकज के आयोजन में शामिल जमातियों को पुलिस से दूर रखना था। हालाँकि, पुलिस सिर्फ इनकी तलाश सिर्फ इसलिए कर रही है ताकि ये अन्य लोगों को भी संक्रमित ना कर दें।

ऐसे ही कुछ मामलों पर एक नजर –

1. असम-महाराष्ट्र-बिहार-गुजरात में पुलिस पर पत्थरबाजी और फायरिंग

गुजरात के अहमदाबाद स्थित गोमतीपुर में भीड़ द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई जबकि बिहार के मधुबनी जिले में मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था। मधुबनी में समुदाय विशेष की भीड़ ने पुलिस को करीब एक किलोमीटर तक खदेड़ा। उन पर पत्थरबाजी और फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस की जीप तालाब में पलट दी। जमातियों को तलाश रही पुलिस पर महाराष्ट्र के सोलापुर में पत्थरबाजी की गई। 28 मार्च को असम के बोंगाईगाँव में पुलिस पर पत्थरबाजी की गई।

2. मस्जिद में छुपे हुए तबलीगी जमात के विदेशी सदस्य

पुलिस की जाँच में तबलीगी मरकज के लोगों के नए ठिकाने भी सामने आते रहे। 31 मार्च को ही पटना, राँची, दिल्ली और महाराष्ट्र के मस्जिद से मौलवियों के मिलने की खबर के बाद UP की राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में डीएम के छापे के बाद इस खबर का खुलासा हुआ कि वहाँ के मरकजी मस्जिद में 6 विदेशी लोग रह रहे थे। ये किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के नागरिक थे और वो भी निजामुद्दीन के जलसे में भाग लेने आए थे।

3. जान-बूझकर इधर-उधर थूक रहे तबलीग़ी जमात के लोग

घटना का पता चलने के बाद दिल्ली के निजामुद्दीन से ले जाए जा रहे सभी जमाती लोग बदतमीजी पर उतर आए। उनके द्वारा वो सारी हरकतें की जा रही हैं, जिनसे संक्रमण फैलने का ख़तरा हो सकता था। एक डॉक्टर ने बताया कि बस से ले जाए जा रहे ये सभी लोग इधर-उधर थूक रहे थे और अधिकारियों की बात नहीं मान रहे हैं। ये सभी बस की खिड़कियों की तरफ़ से थूक रहे थे, जिससे अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का ख़तरा हो सकता था।

4. पाकिस्तान में पुलिस अधिकारी पर जमातियों का चाकू से हमला

31 March, 2020 को ही पाकिस्तान से एक खबर सामने आई जिसमें इस्लामिक प्रचारक तबलीगी जमात के 27 सदस्यों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। जब क्वारंटाइन सेंटर में सभी तबलीगी जमातियों का टेस्ट किया जा रहा था तो उनमें से एक प्रचारक ने क्वारंटाइन से बचने के लिए पुलिस ऑफिसर SHO अशरफ मलिक माखी पर चाकू से हमला कर दिया और भागने की कोशिश की। इसमें जो एक विशेष प्रकार का पैटर्न देखा गया, वह यह था कि संक्रमित जमातियों द्वारा पुलिस और डॉक्टर्स पर हमला सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत में भी किया जा रहा था।

5. डॉक्टर्स पर थूकने वाले जमाती

1 अप्रैल को आइसोलेशन में रखे तबलीगी जमातियों के डॉक्टर्स पर थूकने का अजीबोगरीब मामला सामने आया। वो अस्पताल ले जाते हुए खाने की चीजों की अनुचित माँग करते रहे। जमाती, क्वारंटाइन सेंटर में कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के साथ ही वहाँ पर मौजूद डॉक्टरों समेत अन्य काम करने वाले सभी लोगों पर थूकने लगे।

6. नर्सों पर अश्लील टिप्पणी, क्वारंटाइन में अश्लील विडियो, डॉक्टर्स से बदसलूकी

2 अप्रैल को गाजियाबाद के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए संभावित कोरोनावायरस तबलीगी जमाती मरीजों के खिलाफ सीएमओ गाजियाबाद ने बताया कि आइसोलेशन में रखे गए तबलीगी जमाती बिना कपड़ों, पैंट के नंगे घूम रहे थे। यही नहीं, आइसोलेशन में रखे गए ये जमाती अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही नर्सों को गंदे-गंदे इशारे भी कर रहे थे। स्टाफ के साथ हर प्रकार की बदसलूकी के साथ ही बीड़ी-सिगरेट की माँग भी की।

7. छुपे हुए जमातियों की सूचना देने वाले की पिटाई

इंदौर-महाराष्ट्र में ऐसे मामले सामने आने लगे, जिनमें जाँच करने वाले या फिर जमातियों के छुपे होने की जानकारी देने वालों पर हमले किए गए। महाराष्ट्र में एक 56 वर्षीय व्यक्ति ने जब सूचना दी कि वहॉं के सात लोग दिल्ली निजामुद्दीन में जमात के कार्यक्रम में शामिल होकर गॉंव लौटे हैं तो नाराज जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने उसकी पिटाई कर दी। हालात ये थे कि अस्पताल में ही पुलिस तैनात करनी पड़ी और कुछ जमातियों को जेल में आइसोलेट करना पड़ा।

8. क्वारंटाइन वार्ड में जमातियों ने थूक-थूक कर गंदगी

4 अप्रैल 2020 की एक रिपोर्ट में कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के क्वारंटाइन वार्ड में जमातियों ने थूक-थूक कर गंदगी फैलाने का मामला सामने आया। यह सोशल डिस्टेंसिंग का एकदम भद्दा मजाक था। जमाती अस्पताल में एक ही बेड पर बैठे रहते और डॉक्टरों से जाँच कराने से भी इंकार कर रहे थे।

9. नर्स और स्वास्थयकर्मियों के साथ बदसलूकी

गाजियाबाद के सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज की महिला कर्मियों के साथ अभद्रता की। जमाती नर्सों के साथ बदतमीजी करने के साथ ही अश्लील टिप्पणियाँ भी कर रहे थे। कोई उनसे कहता कि हैदराबाद चलो, वहाँ जन्नत की सैर कराएँगे, तो कोई अन्य अश्लील टिप्पणियाँ कर रहे थे।

10. अस्पताल में उपद्रव: बिरियानी-अंडा करी की डिमांड

बिजनौर में 8 इंडोनेशियाई जमातियों ने अंडा-करी और बिरयानी की माँग की। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की थी। बस्ती और आगरा में भी बिरयानी माँग कर हॉस्पिटल कर्मचारियों को परेशान किया।

मुरादाबाद में जमातियों ने दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया। जमातियों ने ऐसी ही माँग उत्तरखंड की राजधानी देहरादून स्थित दून अस्पताल में भी की, साथ ही यह भी पता चला कि जमाती एक बार में 25-25 रोटियाँ हजम कर जाते हैं और तब भी संतुष्ट नहीं होते।

11. जमातियों का हॉस्पिटल में हंगामा

अहमदाबाद के सोला अस्पताल में तबलीगी जमात के सदस्यों ने हंगामा खड़ा करते हुए दवाएँ और इंजेक्शंस लेने से मना कर दिया। इनका आरोप था कि सरकार इन्हें जान से मारने की कोशिश कर रही है।

जमातियों ने खुद की इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखे जाने का आरोप लगाया और एक कोने में इकट्ठा हो गए। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को एक मुस्लिम डॉक्टर को बुलाना पड़ा। 5 घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद मुस्लिम डॉक्टर की काउन्सिलिंग के बाद जाकर जमातियों ने हंगामा बंद किया।

12. कमरे के बाहर शौच, क्वारंटाइन सेंटर में सफाईकर्मी से बदसलूकी

उत्तर प्रदेश नरेला के क्वारंटाइन सेंटर में जहाँ कई जमातियों को कोरोना संदिग्ध होने पर रखा गया था, उनमें से 2 जमातियों ने अपने कमरे के बाहर ही शौच कर दी और जब सफाईकर्मी वहाँ पहुँचे तो ये लोग उनसे भी बदसलूकी करने लगे। इस हरकत की खबर फौरन नरेला इंडस्ट्रियल थाना पुलिस को दी गई और पुलिस ने बाराबंकी निवासी मो. फहद और अदनान जहीर के खिलाफ सरकारी आदेश का उल्लंघन समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।