कोरोना वायरस के प्रकोप की मार झेल रहे भारत के सामने इस समय पलायन एक गंभीर संकट बनकर खड़ा हो गया है। लॉकडाउन के बावजूद सैंकड़ों की संख्या में मजदूर अपने गाँवों की तरफ भाग रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए हैं। केंद्र ने राज्यों से लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को रोकने के लिए राज्य और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करने को कहा है।
Center directs States to ensure no movement of people across cities. All arrangements be made for migrant labourers at their place of work including timely payment of wages. Action should be taken against those asking students/labourers to vacate: Govt of India. #COVID19pic.twitter.com/8sXiiHvfIo
इसके साथ ही केंद्र ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रवासी मजदूरों के लिए उनके काम करने की जगह पर ही सभी तरह की सुविधाएँ मुहैया कराई जाए। इतना ही नहीं, मजदूरों को समय पर उनके वेतन का भुगतान हो। इसके लिए भी राज्यों को निर्देश जारी किए गए हैं। केंद्रीय कैबिनेट सचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने इस विषय पर शनिवार की देर शाम और आज सुबह राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशक के साथ लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। दिशा-निर्देशों में कहा गया कि जिले के डीएम और एसपी को इन निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए, जो आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं।
Centre asks sates to effectively seal state and dist borders to stop movement of migrant workers during lockdown: Officials
केंद्र का कहना है कि इस बारे में शनिवार को यह दिशा-निर्देश दे दिया गया था कि सरकार इस काम के लिए आपदा प्रबंधन के लिए दी गई राशि का प्रयोग भी कर सकती हैं। इसके अलावा यह निर्देश दिया गया कि इस अवधि के लिए मजदूरों से किसी भी तरह के किराए (मकान/घर किराया) की माँग नहीं की जानी चाहिए। साथ ही उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, जो मजदूरों या छात्रों को किराया ना देने पर परिसर या मकान खाली करने को कह रहे हैं।
#CoronaUpdate In view of movement of migrant workers in some parts of the country, Centre directs States to enforce strict implementation of #lockdown21.
— PIB India ?? #StayHome #StaySafe (@PIB_India) March 29, 2020
देश के कुछ हिस्सों में प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही को लेकर भी केंद्र ने राज्यों को उचित कदम उठाने को कहा है। राज्यों को बताया गया कि यह निर्देश जारी किए गए थे कि जिला और राज्य की सीमाओं को प्रभावी रूप से सील किया जाएगा और केवल माल की आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। ये संदेश भी दिया गया है कि जिन लोगों ने लॉकडाउन का उल्लंघन किया है और लॉकडाउन की अवधि के दौरान यात्रा की है, उन्हें सरकारी नियम के मुताबिक सरकारी सुविधाओं में न्यूनतम 14 दिनों के लिए रहना होगा।
Violators of lockdown to be sent to 14 days' quarantine: Govt
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को देशभर में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की। लॉकडाउन का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से जहां हैं वहीं रहने की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि इस खतरान वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं खोजा गया है। इसलिए लॉकडाउन और एक दूसरे से दूरी ही सबसे सफल उपाय है। मगर शनिवार (मार्च 28, 2020) को शहरों से लोगों के पलायन के चलते लॉकडाउन फेल होता दिखा। दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में भारी भीड़ देखी गई। इस दौरान सोशल डिस्टेंस नहीं होने से कोरोना का खतरा भी और बढ़ गया है। दिल्ली के सभी बार्डर पर शनिवार को अफरा-तफरी का माहौल दिखा।
जहाँ एक तरफ़ देश वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ आतंकी फिर से अपना सिर उठाने की कोशिश में लगे हुए हैं। भारत कोरोना वायरस से निपटने में लगा हुआ है और पूरा प्रशासनिक तंत्र भी इसी में व्यस्त है, ऐसे में आतंकी इस अवधि का फायदा उठा कर किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फ़िराक में हैं। जम्मू कश्मीर के शोपियाँ में अपनी गतिविधि संचालित करने वाले दो आतंकियों ने दिल्ली का रुख किया है, जिससे ख़ुफ़िया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।
ये दोनों पाकिस्तानी आतंकवादी हैं, जो टेलीग्राम के माध्यम से खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से लगातार संपर्क में थे। आईएसआईएस की मैगजीन्स ‘अल नबा’ और ‘वॉइस ऑफ हिन्द’ में भारत को लेकर आतंकियों को भड़काते हुए लिखा गया था कि कोरोना वायरस आपदा का फायदा उठा कर कश्मीर को ‘कब्जे’ से मुक्त कराया जाए। मैगजीन में लिखा गया था कि भारत सरकार फिलहाल लोगों को ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराने और मेडिकल व्यवस्था करने में लगी हुई है, ऐसे में मौके का फायदा उठा कर हमला कर देना चाहिए।
आईएसआईएस का मानना है कि आतंकवाद से निपटने की भारत की शक्ति घटी है क्योंकि देश पूरी ऊर्जा कोरोना वायरस से लड़ने में ख़र्च कर रहा है। आईएसआईएस का कहना है कि भारत में हॉस्पिटलों पर पहले से ही अतिरिक्त बोझ लदा हुआ है, ऐसे में कत्लेआम मचाने के लिए ये सबसे सही समय है। बता दें कि अनुच्छेद 370 निरस्त होने और अयोध्या राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला आने के बाद से लगातार आतंकी किसी न किसी मौके की तलाश में लगे हुए हैं।
Intelligence agency warns of terror threat in Delhi | Delhi News – Times of India https://t.co/m105pC6Z74
दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और मुंबई व पंजाब पुलिस को भी अलर्ट रहने कहा गया है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस धमकी को काफ़ी गम्भीरता से ले रही हैं। हाल ही में अफ़ग़निस्तान में गुरुद्वारे पर हुए हमले में आईएसआईएस का ही हाथ सामने आया है। केरल के मोहम्मद साजिद ने इस हमले को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई थी। अब शोपियाँ से सड़क मार्ग से निकले आतंकियों को ट्रैक करने में जुटी पुलिस और सतर्कता से काम ले रही है।
कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देशभर में 21 दिन का लॉकडाउन है। बावजूद इसके दिल्ली-यूपी बॉर्डर से हैरान करने वाली तस्वीरें आ रही है। यूपी-बिहार के अपने गॉंवों की ओर लौटने के लिए जुटे लोगों की भारी भीड़ से लॉकडाउन की सार्थकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस स्थिति के लिए अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। कहा जा रहा है कि मजदूरों को गुमराह कर बॉर्डर पर भेजा गया।
इस मामले को लेकर केजरीवाल चौतरफा घिरते जा रहे हैं। न केवल विपक्षी दल बीजेपी के कपिल मिश्रा, मनोज तिवारी, गौतम गंभीर प्रवेश वर्मा जैसे नेताओं ने मुख्यमंत्री पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आशुतोष जैसे पत्रकार जो आप में रह चुके हैं ने भी केजरीवाल सरकार को घेरा है।
दिल्ली की जनता ने @ArvindKejriwal को औरों पे आरोप लगाने के लिए चुना है क्या ? इस स्थिति में भी सारी जवाबदेही PM और बाकी राज्यों के CM पे डाल दी ! 500 करोड़ के advertisement budget में 2 लाख लोगों का खाना आ जायेगा अगर दिल्ली ही नहीं रहेगी तो कहाँ बेचोगे अपने झूठ को?
पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने इसे शर्मनाक कृत्य करार देते हुए ट्विटर पर लिखा, “दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को औरों पर आरोप लगाने के लिए चुना है क्या? इस स्थिति में भी सारी जवाबदेही PM और बाकी राज्यों के CM पे डाल दी! 500 करोड़ के advertisement budget में 2 लाख लोगों का खाना आ जाएगा। अगर दिल्ली ही नहीं रहेगी तो कहाँ बेचोगे अपने झूठ को?”
•@ArvindKejriwal जी DTC बसों में लोगों को भर दिल्ली बॉर्डर पर इकट्ठा तो करवा दिए आप,CM साहेब हाथ जोड़ ?के विनम्र निवेदन है कि 15 दिनों का राशन हर परिवार को दें और उन्ही बसों में इनको वापिस दिल्ली में ही जहाँ रहते हैं वहां छुड़वा दें, नहीं तो ये गंभीर समस्या का रूप ले लेगा..??
वहीं दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने लिखा, “अरविंद केजरीवाल जी DTC बसों में लोगों को भर दिल्ली बॉर्डर पर इकट्ठा तो करवा दिए आप। CM साहेब हाथ जोड़ कर विनम्र निवेदन है कि 15 दिनों का राशन हर परिवार को दें और उन्हीं बसों में इनको वापिस दिल्ली में जहाँ रहते हैं वहाँ छुड़वा दें, नहीं तो ये गंभीर समस्या का रूप ले लेगा।”
दिल्ली के गरीबों में भगदड़ क्यूं
क्योंकि ग्राउंड पे सरकार गायब हैं
दिल्ली सरकार सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस, विज्ञापनों में बिजी है
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इसको लेकर केजरीवाल से एक के बाद एक कई सवाल दागे। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, “दिल्ली के गरीबों में भगदड़ क्यूँ? क्योंकि ग्राउंड पे सरकार गायब है। दिल्ली सरकार सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस, विज्ञापनों में बिजी है। लेबर्स गए तो राशन और दवाई की सप्लाई भी ठप्प होगी।”
दिल्ली यूपी बॉर्डर कौशाम्बी
ये तस्वीरें देखकर रोना भी आ रहा हैं और गुस्सा भी
एक फेल दिल्ली सरकार जो गरीबों को भरोसा ही नहीं दे पाई
चंद एजेंडा पत्रकार जिन्होंने 24 घण्टे हौवा खड़ा किया और इन गरीबों में दहशत पैदा की
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने दिल्ली-यूपी बॉर्डर के कौशाम्बी की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि ये तस्वीरें देखकर रोना भी आ रहा है और गुस्सा भी। एक फेल दिल्ली सरकार जो गरीबों को भरोसा ही नहीं दे पाई। चंद एजेंडा पत्रकार जिन्होंने 24 घंटे हौवा खड़ा किया और इन गरीबों में दहशत पैदा की। देश की कोरोना के खिलाफ लड़ाई कहीं यहीं से फेल ना हो जाए। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा कि अभी इस समय आनंद विहार दिल्ली में 2 लाख से ज्यादा की भीड़ है। दिल्ली की निकम्मी राज्य सरकार और चंद एजेंडा पत्रकारों ने पूरे देश को इस आग में झोंक दिया है। इसी तरह एक ट्वीट में कपिल मिश्रा ने पूछा कि आखिर केजरीवाल चाहते क्या हैं?
अभी रात को भी दिल्ली में जगह जगह से आनंद विहार के लिए डीटीसी की बसें चलाई जा रही हैं
इन्हीं बसों से लाखो की भीड़ आनंद विहार में इकठ्ठा हो रही हैं
कपिल मिश्रा ने कई विडियो जारी कर केजरीवाल सरकार की पोल खोली है। एक वीडियो में दिख रहा है कि दिल्ली की गलियों में माइक से अनाउंसमेंट किए जा रहे हैं। इस अनाउंसमेंट में कहा जा रहा है कि आनंद विहार के लिए बसें जा रही हैं, उससे आगे यूपी-बिहार के लिए बसें मिलेंगी। सोते हुए लोगों को उठा-उठा कर बसों से उप्र बॉर्डर पर भेजा गया। कपिल मिश्रा ने इसे सोची-समझी साजिश करार दिया। इसी के साथ उन्होंने केजरीवाल को डीटीसी बसें बन्द करने, झूठी प्रेस कॉन्फ्रेंस और विज्ञापन बन्द करने के साथ ही बेसिक सुविधाओं को मैनेज करने की सलाह देते हुए कहा कि लोगों को खाना, राशन सच में बँटवाएँ।
क्या आपने आनंद विहार पर दिल्ली सरकार के किसी नुमाइंदे को देखा ? कहाँ है दिल्ली के मुख्य मंत्री ? ये सारे लोग वहीं है जो वहां इकट्टा है जिन्होंने एक महीना पहले केजरीवाल को वोट दिया । आज ये अपने को अनाथ महसूस कर रहे हैं ! ये पार्टी कहती है कि ये आम आदमी की बात करती है ।
वहीं पत्रकार आशुतोष ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए हुए ट्वीट किया, “क्या आपने आनंद विहार पर दिल्ली सरकार के किसी नुमाइंदे को देखा? कहाँ है दिल्ली के मुख्यमंत्री? ये सारे वही लोग वहाँ इकट्ठा हैं, जिन्होंने एक महीना पहले केजरीवाल को वोट दिया। आज ये अपने को अनाथ महसूस कर रहे हैं! ये पार्टी कहती है कि ये आम आदमी की बात करती है।”
22 मार्च ऐलान किया मुख्यमंत्री @ArvindKejriwal ने कि 31मार्च तक दिल्ली के बॉर्डर सील रहेंगे।किसने अफवाह फैलाई और कौन बसें भर भर के लोगों को बॉर्डर पर छुड़वा रहा है?
दिल्ली में अलग ही आपातकालीन स्तिथि उत्पन्न करके करोड़ों लोगों की ज़िन्दगियों से खेलने का मतलब? pic.twitter.com/mDHOmg4QmV
बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने भी सीएम पर सवाल खड़े करते हुए कहा, 22 मार्च को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि 31मार्च तक दिल्ली के बॉर्डर सील रहेंगे। किसने अफवाह फैलाई और कौन बसें भर-भर के लोगों को बॉर्डर पर छुड़वा रहा है? दिल्ली में अलग ही आपातकालीन स्थिति उत्पन्न कर करोड़ों लोगों की ज़िन्दगियों से खेलने का क्या मतलब है?
बीते 4 दिनों से दिल्ली से बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों का पलायन हो रहा है। हालत ये है कि दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। ऐसी हालत तब है, जब देश में लॉकडाउन है। लोगों को घरों में रखने के लिए देश में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हैं।
फिर सवाल उठता है, आखिर दिल्ली से इतनी बड़ी भीड़ पैदल ही सौ-हजार या हजार से ज्यादा किलोमीटर की यात्रा कर घर जाने को क्यों मजबूर हुई? उन दावों का क्या हुआ, जिसमें कहा जा रहा था कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने कोरोना वायरस की स्थिति सँभालने के लिए बढ़िया काम किया है?
इन प्रश्नों को जानने-समझने की जरूरत है।
खाने-रुकने की बेहाल व्यवस्था
दिल्ली सरकार द्वारा कहा गया कि दिल्ली पूरी तरह तैयार है। बीते एक सप्ताह से यह कहा जा रहा है कि दिल्ली के विश्वस्तरीय शेल्टर होम में खाने-रहने की व्यवस्था की गई है। लेकिन आँकड़े इसकी गवाही नहीं देते।
शेल्टर होम के आँकड़े बताते हैं कि दिल्ली सरकार के पास 223 शेल्टर होम हैं। यहाँ जाने वाले कुल लोगों की संख्या में 4 दिनों में 2 से 3 गुना इजाफ़ा हुआ है। लेकिन रोचक बात ये है कि लोगों की संख्या सभी शेल्टर होम में नहीं बढ़ी है। 223 में से 30 से भी कम शेल्टर होम में लोगों की आवाजाही ज्यादा बढ़ी, बाकी जगहों पर आज भी जाने वाले लोगों की संख्या 20 से 50 ही है।
यही नहीं, बीते 4 दिनों में शेल्टर होम में भीड़ में खाना खिलाने और खाने की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे थे। स्थिति ये थी कि जब आलोचना अधिक होने लगी तो केजरीवाल के मीडिया सलाहकार रहे नागेन्द्र शर्मा ने कहा कि यमुना विहार में अभी तक 2000 लोगों को खाना खिलाने की व्यवस्था थी लेकिन उस दिन अचानक से 7000 लोग आ पहुँचे। इसलिए ऐसी नौबत आई।
जबकि आँकड़े बताते हैं कि यमुना पुश्ता नाम के शेल्टर होम में सबसे अधिक लोग पहुँचे, लेकिन वहाँ भी आँकड़ा एक समय में 7000 का नहीं हुआ, जैसा बताया गया। कई शेल्टर होम में तो खाने की व्यवस्था भी नहीं थी, जहाँ दिल्ली पुलिस की मदद से भोजन के पैकेट पहुँचाए गए।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केजरीवाल सरकार
को अंदाजा हो गया था कि उसे लोगों को खिलाने की व्यवस्था करनी पड़ेगी, इसलिए
शुरुआती 4 दिनों में कम लोगों की व्यवस्था की और लोगों को दिल्ली से भागने दिया
गया?
यहाँ पर गौर करने वाली बात ये भी है कि जब 223 शेल्टर होम में महज 20000 लोगों की ही व्यवस्था हो सकती है तो सरकार कैसे यह दावा कर रही है कि 235 स्कूलों में 2 लाख लोगों तक उसने खाना पहुँचाया! कहा यह भी गया कि लंच और डिनर दोनों दिए जा रहे है लेकिन भीड़ में खिचड़ी परोसते विडियो वायरल हुए।
अब ऐसे में दिल्ली के लाखों दिहाड़ी मजदूर क्या करते, जब राज्य सरकार की ओर से कोई इंतजाम ही नहीं किया गया!
गैर-निवासियों के साथ भेदभाव
राज्य सरकार द्वारा जितनी भी घोषणाएँ की गईं, वे सब दिल्ली के नागरिकों के लिए थे। कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के मजदूरों के लिए सहायता राशि की घोषणा में वे दिहाड़ी मजदूर शामिल नहीं थे, जो बड़ी संख्या में गैर पंजीकृत थे लेकिन कंस्ट्रक्शन कंपनी अथवा ठेकेदारों के साथ कार्य करते थे। दिल्ली छोड़कर जा रहे मजदूरों ने यह इल्जाम भी लगाया कि हेल्पलाइन नंबरों पर उन्हें न तो कोई मदद मिली, न कोई आश्वासन। यहाँ तक कि आवासीय प्रमाण पत्रों की माँग की गई और जो दिल्ली के नहीं थे, उनके साथ भेदभाव किया गया, उन्हें खाने को नहीं मिला।
बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से मुँह छिपाने की कोशिश
कोरोना वायरस जहाँ से शुरू हुआ, उस वुहान (चीन) में हुए एक अध्ययन से ये बात सामने आई कि वायरस की चपेट में आए लोगों में साँस लेने की दिक्कत होती है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों में से 5 प्रतिशत मरीजों को ICU अर्थात इंटेंसिव केयर यूनिट की आवश्यकता पड़ती है। वही 2.3 प्रतिशत मरीजों को वेंटिलेटर की नितांत जरूरत पड़ती है। नार्मल साँस लेने की दर प्रति मिनट 15 होती है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति 28 साँस/मिनट के आँकड़े को छू ले तो उसकी स्थिति सँभालने के लिए वेंटिलेटर अवश्य चाहिए होता है।
बात अगर दिल्ली के पास उपलब्ध वेंटिलेटर की करें तो 2 दिसंबर 2019 को दिल्ली विधानसभा में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि केवल 466 वेंटिलेटर हैं दिल्ली में, जिनमें से 23 काम नहीं कर रहे, वहीं 11 को ठीक करवाने की प्रक्रिया चल रही थी। यानी केवल 432 वेंटीलेटर काम के हैं। बीते तीन महीनों में इजाफ़ा नहीं हुआ, क्योंकि इसी जबाब में यह कहा गया कि कोई माँग लंबित नहीं है।
बात यहीं खत्म नहीं हो जाती। दिल्ली के किन-किन अस्पतालों में ICU की सुविधा उपलब्ध है, इस प्रश्न के जबाब में दिल्ली सरकार के दिए आँकड़े और अचंभित करते हैं। दिसंबर, 2019 में ही विधानसभा के पटल पर दिए जबाब के मुताबिक दिल्ली के 28 अस्पतालों की सूची दी गई, जिनमें से 12 में ICU ही नहीं हैं। वही 6 अस्पतालों में वेंटिलेटर की कोई सुविधा नहीं है। 28 में से एक अस्पताल के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आज न्यू यॉर्क जैसे बेहतरीन हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर वाले शहर की कमर टूट चुकी है। वहाँ हालत ये है कि वेंटिलेटर की आवश्यकता पूरी करने के लिए अमेरिकी सरकार को निजी कंपनियों से मदद लेनी पड़ रही है। ऐसे में कोरोना वायरस से लड़ने की तैयारी को दिल्ली की आबादी के साथ जोड़कर देखें तो भले ही मुख्यमंत्री केजरीवाल बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, 434 वेंटिलेटर और 16 ICU वाले अस्पतालों से कोरोना की जंग कितना लड़ पाएँगे, कहना मुश्किल नहीं है।
ICU और वेंटिलेटर तक ही बात सीमित नहीं है। दिल्ली सरकार ने कोरोना की जाँच के बाद अच्छी सुविधाएँ मुहैया न होने से झल्लाए मिडल क्लास के लिए तो 3100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से प्राइवेट आलिशान होटल मुहैया करवा कर उनका मुँह बंद करवा दिया लेकिन अगर गरीब लोग बड़ी संख्या में कोरोना के मरीज बने या मरीजों के चपेट में आ गए तो उन्हें रखेंगे कहाँ, यह समस्या भी दिल्ली सरकार के सामने खड़ी है।
हाल में जारी दिल्ली सरकार के इकॉनमिक सर्वे (2019-20) की मानें तो वर्तमान में यहाँ के सरकारी अस्पतालों में केवल 11770 बेड हैं। दिल्ली के सभी अस्पतालों में उपलब्ध बेड की बात करें तो कुल 57709 बेड मरीजों के लिए उपलब्ध है। प्रतिशत में देखें तो 52 प्रतिशत बेड प्राइवेट अस्पतालों में है, वहीं केंद्र सरकार, MCD के अस्पतालों में 28 प्रतिशत। महज 20 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली सरकार के अस्पतालों में है।
सभी तरह के अस्पतालों में उपलब्ध बेड को दिल्ली की आबादी के हिसाब से देखें तो 2011 में प्रति हजार लोगों पर 2.50 बेड उपलब्ध थे, यह संख्या 2018 तक आते-आते 2.94 हुआ। यानी एक हजार लोगों के ऊपर अस्पतालों में आज भी 3 ही बेड उपलब्ध है। इसलिए दो करोड़ की आबादी में 11770 बेड वाले अस्पतालों के मालिक प्रवासी लोगों से भयभीत हों तो स्थिति समझना कठिन नहीं है।
यही नहीं। दिसंबर 2019 तक दिल्ली में चल रहे जिन 315 मोहल्ला क्लिनिक को वर्ल्ड क्लास कहा गया, वहाँ न तो कोरोना का टेस्ट हो सकता है, न ही वहाँ कोरोना के मरीजों के इलाज अथवा रुकने की व्यवस्था है। अफ़सोस, जब पूरा देश कोरोना से जंग लड़ रहा है, मोहल्ला क्लिनिक से कोरोना के मरीज ही निकले, वे कोरोना से लड़ने की जगह नहीं बन पाए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आज हालत यह है कि जबसे यह पता चला है एक डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव निकला है, कई मोहल्ला क्लिनिकों में डॉक्टर ही नहीं आ रहे। अधिकांश मोहल्ला क्लिनिक न साफ़-सुथरे हैं, न ही कोरोना वायरस से बचने के वहाँ कोई उपाय!
बिहार विरोधी राजनीतिक षड्यंत्र
24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद जहाँ देश एकतरफ लोगों को घरों में रखने के लिए प्रेरित करने में जुटा था, उपलब्ध संसाधनों के साथ वायरस को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा था, केजरीवाल के सलाहकार प्रशांत किशोर और आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया के बड़े चेहरे अंकित लाल #ShameOnNitishKumar का ट्रेंड चलाने और आपदा के समय बिहार की सर्वविदित कमियों को उजागर करने में व्यस्त थे। यहाँ तक कि 27 मार्च को अंकित लाल गाज़ियाबाद के पास जाकर प्रवासी मजदूरों के पलायन का लाइव स्ट्रीमिंग करने और प्रशासनिक विफलता की बात कर रहा था। यह समझना कठिन नहीं है कि सोशल मीडिया ट्रेंड और लाइव स्ट्रीमिंग क्यों और किसके कहने पर चलाए गए होंगे।
जब बड़ी संख्या में पलायन की ख़बरें 24 मार्च से ही आने शुरू हुए, तबसे लेकर अगले 4 दिनों तक किसी भी तरह के उपाय की घोषणा दिल्ली सरकार द्वारा नहीं की गई, जो प्रवासी श्रमिकों के भले के लिए हो, उन्हें राहत पहुँचाए। पलायन रोकने के लिए भी कोई पहल नहीं की गई। जब स्थिति आउट ऑफ़ कंट्रोल होने लगी तो पहले स्कूलों में लंगर चलाने के आँकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का काम हुआ, फिर पब्लिसिटी बटोरने के लिए सिसोदिया प्रवासी मजदूरों के साथ विडियो शेयर करके अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर रफू-चक्कर हो गए। दिल्ली सरकार चलाने वाले इस बात को भी समझते हैं कि जिस तरीके से दुनिया के बड़े शहरों जैसे न्यू यॉर्क, न्यूजर्सी में कोरोना का दहशत पैदा हुआ है, अस्पताल परेशान है, संसाधन नहीं है, वैसी स्थिति दिल्ली में बनी तो केजरीवाल की बनी बनाई छवि बर्बाद हो जाएगी। इसलिए गरीबों की मौत का ठीकरा किसी और पर फूटे, इसलिए भी लोगों को दिल्ली से भगाने की कोशिशों को अंजाम दिया गया।
देश भर के सभी शहरों में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने 14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर रखा है। लेकिन फिर भी लोग खासकर दिल्ली से बिहार और उत्तर प्रदेश के अपने गाँवों की ओर लौट रहे हैं। इनके समूह में निकलने के कारण संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में ये अगर अपने घर पहुॅंचे तो संक्रमण गॉंवों में भी फैल सकता है। इसे देखते हुए बिहार सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाले सभी लोगों को राज्य की सीमा पर ही 14 दिन के लिए क्वारंटाइन करने का फैसला किया है।
Migrant workers coming back from neighbouring states to Bihar will be kept in quarantine in relief centres at state borders, where they will be provided food and other essential amenities. They will be kept here for 14 days: Bihar Minister Sanjay Kumar Jha (file pic) #Coronaviruspic.twitter.com/RTrRObp2eG
यानी कि अब शहरों से पलायन करने वाले प्रवासी मजदूर बिहार पहुँचने पर सीधे अपने गाँव नहीं जा सकेंगे। बिहार के मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि दूसरे राज्यों से पहुँचने वाले सभी प्रवासी मजदूरों को 14 दिन तक बॉर्डर पर राहत केंद्रों में क्वारंटाइन किया जाएगा। क्वारंटाइन सेंटर में सभी को खाने-पीने के साथ जरूरी सुविधाएँ दी जाएँगी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दूसरे राज्यों से बिहार आ रहे प्रवासी मजदूरों के रहने के लिए कैंप बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि ये कैंप बिहार के सीमावर्ती जिलों में बनाए जाएँगे। यहाँ दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को रखा जाएगा। इस कैंप में भोजन-कपड़े और डॉक्टरी जाँच की सुविधा होगी। सीएम नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव दीपक कुमार को ‘आपदा सीमा राहत शिविर’ बनाने के निर्देश दिए है। ये शिविर नेपाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से सटे जिलों में बनाए जाएँगे।
सीएम नीतीश कुमार ने कहा, “लोग यदि अपने घर तक पहुँच गए तो लॉकडाउन का उद्देश्य निरर्थक साबित हो जाएगा। अगले कुछ दिन में इससे वायरस ज्यादा तेजी से फैलेगा। लोगों को वापस घर भेजने की बजाय, बेहतर यही होगा कि लोकल लेवल पर कैम्प लगाएँ जाएँ। राज्य सरकार उन कैम्पों का खर्च वहन करेगी।”
इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (मार्च 28, 2020) को अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि दूसरे राज्यों से प्रदेश में आ रहे करीब 1 लाख लोगों को क्वारंटाइन में रखा जाए। योगी सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि जो भी लोग पिछले तीन दिनों में दूसरे राज्यों से यूपी में आए हैं, उनके नाम, पते और फोन नंबर अलग-अलग जिलों के डीएम को मुहैया करा दिए गए हैं। उनकी निगरानी का काम भी शुरू हो गया है। खुद मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि जिन्हें भी क्वारंटाइन में रखा जाएगा, उनके लिए खाने और रोज की जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाएगा। सीएम योगी ने कहा कि राज्य में लॉकडाउन के दौरान किसी को भी भूखा नहीं रहना पड़ेगा। उन्होंने अफसरों को जल्द से जल्द सप्लाई चेन मजबूत करने के भी आदेश दिए हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण से आम आदमी से लेकर खास तक हलकान हैं। राजपरिवार के लोग भी इससे अछूते नहीं हैं। हाल ही में ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे। अब स्पेन की राजकुमारी की इस खतरनाक वायरस की वजह से मृत्यु हो गई है। 86 वर्षीय प्रिंसेस मारिया टेरेसा इस संक्रमण संक्रमण से जान गॅंवाने वाली किसी भी राजपरिवार की पहली सदस्य हैं। वो बर्बन-परमा रॉयल परिवार की प्रिंसेज थीं। उनके भाई प्रिंस सिक्सटस हेनरी ने बहन की मृत्यु की जानकारी दी है।
स्पेन में कोरोना वायरस की वजह से हालात काफ़ी बिगड़े हुए हैं। अभी तक वहाँ लगभग 6000 लोगों की मौत हो चुकी है। हालाँकि, 12,000 से अधिक मरीज ठीक भी हुए हैं, लेकिन 73,235 कोरोना मामलों के साथ स्पेन इस वायरस के संक्रमण से दुनिया का चौथा सबसे ज्यादा प्रभावित देश बन गया है। एक दिन पहले सिर्फ़ 24 घंटे में स्पेन में 834 लोगों की मौत ने पूरे यूरोप को दहला दिया था। अधिकारियों का कहना है कि अब नए मामले नहीं मिल रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी काफ़ी ख़राब है।
जहाँ तक राजकुमारी टेरेसा की बात है, उनका जन्म जुलाई 28, 1933 को पेरिस में हुआ था। वो प्रिंस जेवियर और मैडेलिन की 6 संतानों में से एक थीं। बर्बन-परमा रॉयल परिवार स्पेन के राजपरिवार का कैडेट ब्रांच है। ये लोग ‘फ्रेंच कैपेटियन डायनेस्टी’ से ताल्लुक रखते हैं। रॉयल परिवार के उन सदस्यों को कैडेट कहा जाता है, जो गद्दी के उत्तराधिकारी नहीं होते। उन्हें संपत्ति और पदवी दी जाती है।
प्रिंसेस मारिया की कोई संतान नहीं हैं। लेकिन उनके कई भतीजा-भतीजी और भाँजे-भाँजियाँ हैं। उनका अंतिम संस्कार रॉयल फैमिली के प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में किया जाएगा। कोरोना वायरस के खतरों को देखते हुए ज्यादा जुटान नहीं होगा। बता दें कि स्पेन में भी अभी लॉकडाउन चल रहा है, जिसे कुछ और दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया था। वहाँ की अर्थव्यवस्था ठप्प पड़ी हुई है और बाजार वगैरह बंद होने के कारण लोग परेशान हैं।
पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने संपूर्ण भारत में लॉकडाउन कर दिया है। लॉकडाउन में घरों से बेवजह बाहर निकलने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कॉन्ग्रेस नेता सचिन चौधरी व दो अन्य को धारा 144 के उल्लंघन करने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया।
अमरोहा से कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके और उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के सचिव सचिन चौधरी पर हंगामा करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक शनिवार देर रात हाईवे पर जीरो प्वाइंट के पास भारी भीड़ जमा थी। भीड़ देख पुलिस वहाँ पर पहुँची। भीड़ हटाने की कोशिश की तो वहाँ पर कॉन्ग्रेस नेता और उनके दोस्तों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस के साथ अभद्रता की।
जानकारी के मुताबिक चिकित्सीय परीक्षण में शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद पुलिस ने उन पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और लॉकडाउन का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया। बाद में उन्हें थाने से जमानत पर रिहा कर दिया गया।
कॉन्ग्रेस नेता ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें मुरादाबाद में सड़क पर लोगों की मदद करते हुए SSP अमित पाठक ने गिरफ्तार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि SSP का कहना किसी की मदद मत करो सरकार का आदेश है, जो मर रहा है मरने दो। आगे उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सड़कों पर लोगों को मारना चाहती है। क्या किसी की मदद करना भी अपराध है?
तुम साले मदद कर रहे हो या कालाबाजारी….
पुलिस उसी को गिरफ्तार कर रही है जो कर्फ्यू का उल्लंघन करके 10 रुपये की चीज 20में बेच रहे है।
हालाँकि सोशल मीडिया यूजर्स को सचिन चौधरी की ये सफाई रास नहीं आई और उन्होंने उनको आड़े हाथों लेते हुए कई तंज कसे। एक यूजर ने लिखा, तुम मदद कर रहे हो या कालाबाजारी….पुलिस उसी को गिरफ्तार कर रही है जो कर्फ्यू का उल्लंघन करके 10 रुपए की चीज 20 में बेच रहे हैं। बाकी तू रात को 1 बजे क्या करने गया था?
झूठ … इस विकट समय में भी कांग्रेसी चरण चाटुकार झूठ बोलने से बाज नही आ रहे ,
पुलिस खुद खाना बांट रही है, पैदल यात्रियों के लिए व्यवस्था करने का काम भी शुरू हो चुका है,
एक अन्य यूजर ने लिखा, “झूठ… इस विकट समय में भी कॉन्ग्रेसी चरण चाटुकार झूठ बोलने से बाज नही आ रहे। पुलिस खुद खाना बाँट रही है, पैदल यात्रियों के लिए व्यवस्था करने का काम भी शुरू हो चुका है। तुम्हारे झूठ के जूते तुम्हे 2022 में पड़ जाएँगे।”
घर पर बैठने का आदेश मिला है क्यों नहीं बैठ रहे? यही सबसे बड़ी मदद है इस वक़्त pic.twitter.com/A52Of0cifX
स्वाती सनातनी नाम के एक यूजर ने लिखा, “दिल्ली, पंजाब, राजस्थान की कॉन्ग्रेस मर गई जो वहाँ से जनता भाग रही, वही रोक लेते सुविधा दे देते। वहाँ पर मरने छोड़ दिए, जब यहाँ योगी जी 1000 बसें लगा उन लोगो को सुरक्षित पहुँचाने लगे तो आ गए गन्दी राजनीति चमकाने। रस्सी जल गई पर ऐंठन नही गई। विश्व की 4थी धनी महिला ने कितनी दान दी।”
मदद कर रहे थे या लोगों को भड़का रहे थे, खांग्रेसियों से तो मदद की उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि मेरी भी एक बार एक खांग्रेसी ने 1984 मे मदद की थी, लोगों को पेट्रोल दिया था मेरी दुकान जलाने के लिए.
गुरदीप सिंह नाम के शख्स ने लिखा, “मदद कर रहे थे या लोगों को भड़का रहे थे, खॉन्ग्रेसियों से तो मदद की उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि मेरी भी एक बार एक खॉन्ग्रेसी ने 1984 मे मदद की थी, लोगों को पेट्रोल दिया था मेरी दुकान जलाने के लिए।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में कोरोना वायरस से जुड़े ख़तरों पर बात की और देश में चल रहे लॉकडाउन को लेकर जनता से अपनी बात साझा की। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसे लोगों से भी बातचीत की, जो कोरोना वायरस से अभी-अभी उबरे हैं। उन्होंने डॉक्टर नीतीश गुप्ता से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि उनके अस्पताल में कोरोना के 16 मरीज ठीक होकर जा चुके हैं। डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि मरीज कोरोना के बारे में सुनकर डर जाते हैं, इसलिए उनकी काउंसलिंग भी करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि हमारा एक ही कर्तव्य है, सभी लोगों को ठीक कर के घर भेजने के प्रयास में लगे रहना।
कोरोना के संक्रमण से हल ही में उबरे अशोक कपूर ने पीएम मोदी से बातचीत के दौरान बताया कि वो और उनके परिवार के 6 लोग पीड़ित थे। उन्हें आगरा से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि पूरे परिवार को 14 दिन अस्पताल में रखा गया। उन्होंने डॉक्टरों व अन्य मेडिकल कर्मचारियों का धन्यवाद किया और कहा कि उन्होंने काफ़ी अच्छे से सबका ख्याल रखा। वहीं कोरोना से ठीक हुए रामगम्पा तेजा ने बताया कि वो काम की वजह से दुबई गए थे, लेकिन संक्रमित हो गए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें डर लग रहा था लेकिन बाद में डॉक्टरों और नर्सों ने उनका हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी ने पीड़ितों की बात सुनने के बाद अपनी बात रखते हुए कहा:
मैं जानता हूँ कि कोई कानून नहीं तोड़ना चाहता है, लेकिन कई लोग कानून तोड़ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, लॉकडाउन को तोड़ेंगे तो कोरोना वायरस से नहीं बच पाएँगे। नियम तोड़ने वाले अपने जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आपको होने वाली असुविधा और कठिनाई के लिए मैं क्षमा माँगता हूँ। बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निपटना पड़ता है, नहीं तो बाद में यह असाध्य हो जाता है। भारत आज यही कर रहा है। भारत जैसे 130 करोड़ लोगों के देश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए कोई और रास्ता नहीं था, कठोर कदम उठाना जरूरी था।
पीएम मोदी ने कहा कि अन्य देशों का उदाहरण देखें तो कोरोना के मामलों में मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ जाती है। भारत में ऐसी स्थिति ना हो, इसका हमें ध्यान रखना है। उन्होंने माना कि लॉकडाउन की वजह से लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा है। साथ ही इस क़दम को ज़रूरी भी बताया। प्रधानमंत्री ने संकट की घड़ी में गरीबों, भूखे लोगों की मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने कोरोना के पीड़ितों और संदिग्धों के साथ भेदभाव न करने की सलाह देते हुए कहा कि ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ रखना है, ‘इमोशनल डिस्टेंसिंग’ नहीं।
पीएम ने कहा कि आज के कठिन समय में दुकानदार, ड्राइवर्स, वर्कर्स, बैंकिग क्षेत्र के लोग जोखिम उठाकर काम कर रहे हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों के लोग भी ऐसे वक्त डिलिवरी के काम में लगे हैं। फोन और इंटरनेट आदि सेवाओं में भी कई लोग लगे हैं। उन्होंने इन सभी लोगों को धन्यवाद दिया। पीएम ने डॉक्टरों के त्याग व समर्पण को देखते हुए आचार्य चरक की इन पंक्तियों की उद्धृत किया:
“धन और किसी खास कामना के लिए नहीं, बल्कि मरीज की सेवा के लिए दयाभाव रखकर काम करता है, वही सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक होता है।“
पाकिस्तान में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 1500 के पार पहुँच गई है। 12 लोगों की मौत भी हो चुकी है। स्थिति भयावह है, क्योंकि अस्पतालों में समुचित व्यवस्था नहीं है। लोगों की स्क्रीनिंग की भी सुविधा काफ़ी कम है। वहाँ की सरकार ने अर्थव्यवस्था के गिरने के डर से लॉकडाउन जैसे बचाव के उपायों की घोषणा करने में भी कोताही दिखाई है। मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान में कोरोना वायरस के शुरुआती मामले ईरान से लौटे उन मजहबी तीर्थयात्रियों के हैं, जो तफ्तान सीमा से होकर देश में घुसे। ये सभी शिया समुदाय से थे, जो ईरान गए थे।
इन इस्लामी तीर्थयात्रियों में से अधिकतर 15 मार्च को वापस लौटे और उसके बाद से ही पाकिस्तान में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा होना शुरू हो गया। इसके बाद कुछ पाकिस्तानी तुरंत ट्विटर पर गए और उन्होंने शिया समुदाय को खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। प्रोफेसर खालिद शेख ने लिखा कि कोरोना वायरस का प्रकोप ख़त्म होने तक देश भर में शिया समुदाय को किसी भी कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उन्होंने इसे शर्म की बात बताते हुए दावा किया कि शिया समुदाय ही ईरान से कोरोना वायरस पाकिस्तान लाया है।
Shia community should be restricted from organizing gatherings all over the country even after the end of #COVID19. They have brought the virus to Pakistan from #Iran which should have #COVID19SelfIsolate. What a shame!
कुछ पाकिस्तानियों ने तो चीन को क्लीनचिट देते हुए दावा किया कि उससे ज्यादा तो कोरोना को फैलाने के लिए शिया जिम्मेदार हैं। सैयद अज़ीम ने लिखा कि इसे ‘चाइनीज वायरस’ कहने की बजाय ‘शिया वायरस’ कहना चाहिए।
कुछ पाकिस्तानियों ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि शिया समुदाय ने जान-बूझकर कोरोना वायरस को फैलाया है। उन्होंने दावा किया कि शियाओं ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ईरान से वायरस लाकर यहाँ फैलाया। अन्य पाकिस्तानियों ने ईरान से लौटे शियाओं को देशद्रोही करार दिया। एक अन्य व्यक्ति ने माँग करते हुए कहा कि सभी शिया समुदाय वालों को गिरफ़्तार कर सज़ा देनी चाहिए और उन्हें क्वारंटाइन किया जाना चाहिए।
In Pakistan Corona virus is spreading due to Shia Zaireen who came from iran. Now they’re openly doing this and creating trouble for whole Pakistan. They must be arrested, punished and quarantined immediately. Sindh is alwats on top in every disease. Either its HIV or Covid.
पाकिस्तान कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहा है, इसीलिए वह पूरे दक्षिण एशिया के लिए ख़तरा बन गया है। वहाँ मुल्ले-मौलवी अभी भी मजहबी कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और उन्हें खुली छूट मिली हुई है। इसके उलट भारत में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई है। यहाँ सभी प्रकार के धार्मिक व मजहबी कार्यक्रमों पर रोक लगी हुई है, ताकि भीड़ न जुटे।
गुजरात में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 58 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1 विदेशी है। 4 की मौत हो चुकी है। संक्रमण के बढ़ते मामलों पर काबू पाने के लिए राज्य की मशीनरी काफी तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में केवल 6 दिनों में ही 2200 बेड के अस्पताल तैयार किए गए हैं।
3 more people test positive for #Coronavirus in Ahmedabad, a total of 58 people have tested positive till now in the state: Gujarat Health Department
मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने 21 मार्च को राज्य के चार महानगरों 2,200 बिस्तर के कोविड-19 अस्पताल का निर्माण करने की घोषणा की थी। अथॉरिटीज ने इस पर तत्काल अमल किया और केवल 6 दिनों में यह काम पूरा कर दिया।
6 दिनों में राज्य के 4 शहरों में 2200 बेड का कोविड हॉस्पिटल तैयार किया गया है। अहमदाबाद में 1,200 बेड और 50 ऑपरेशन थियेटर की सुविधा वाला नया सिविल अस्पताल। सूरत में 500 बेड का अस्पताल। वडोदरा में 250 बेड का अस्पताल और राजकोट में 250 बेड की सुविधा है।
इन अस्पतालों ने काम भी करना शुरू कर दिया है। 2200 बेड वाले इन अस्पतालों में सभी तरह की सुविधाएँ और दवाइयॉं मौजूद हैं। डॉक्टरों ने बाताया कि कोरोना पॉजीटिव मरीज से किसी और को संक्रमण न हो, इसलिए इन हॉस्पिटल में केवल कोरोना से संक्रमित मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। ये हॉस्पिटल सभी तरह की सुविधाओं और दवाओं के साथ विश्व सवास्थ्य संगठन (WHO) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार काम कर रहा है।
सूरत में कोविड-19 के लिए स्पेशल अस्पताल में ICU के 40 और जनरल के 140 बेड्स की व्यवस्था है। वहीं वडोदरा में ICU में 50 और जनरल में 200 बेड्स का बंदोबस्त है। राजकोट में ICU के 40 और जनरल के 160 बेड्स की व्यवस्था है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक अब तक कोरोना के 918 केस की पुष्टि हुई है। इन 918 संक्रमितों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें से 79 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं। जबकि 19 लोगों की मौत हो गई है। वहीं दुनिया भर में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमण के 6 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 28,812 लोगों की इस संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। अकेले इटली में अब तक 9,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 80 हज़ार से अधिक लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं।