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UP के 157 लोग भी गए थे निजामुद्दीन मरकज, 18 जिलों की पुलिस ने सबको कर लिया ट्रेस, मेडिकल जाँच जारी

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज यानी इस्लामिक धार्मिक केंद्र के आयोजन में उत्तर प्रदेश के 157 लोगों के शामिल होने की खबर है। इसकी सूचना के बाद शासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद तब्लीगी मरकज में गए उत्तर प्रदेश के लोगों के बारे जानकारी जुटाने के लिए डीजीपी मुख्यालय ने एक पत्र जारी कर सभी जिलों से जानकारी माँगी।

डीजीपी ऑफिस ने संबंधित जिलाधिकारियों को निजामुद्दीन मरकज में ठहरे यूपी के लोगों की लिस्ट देकर उनसे संपर्क करने और उनका कोरोना वायरस टेस्ट कराने का निर्देश दिया। 18 जिलों के पुलिस अधीक्षकों से कहा गया है कि जमात में शामिल लोगों की पहचान कर उनकी मेडिकल जाँच कराई जाए। 

आदेश के बाद तेजी से हरकत में आई उत्तर प्रदेश पुलिस ने बताया है कि उन सभी 157 लोगों को ट्रेस कर लिया गया है, जो कि निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात में शामिल हुए थे।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हितेश चंद्र अवस्थी की ओर से जारी पत्र के मुताबिक, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, बिजनौर, बागपत, वाराणसी, भदोही, मथुरा, आगरा, सीतापुर, बाराबंकी, प्रयागराज, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर के लोग तब्लीगी जमात में शामिल होने गए थे। इसमें शामिल लोगों की लिस्ट इन जिले के पुलिस अधीक्षकों को भेजी गई है। डीजीपी ने सभी एसपी ने मंगलवार (मार्च 31, 2020) दोपहर 3 बजे तक रिपोर्ट तलब की है। 

बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में हुए तब्लीगी जमात में अलग-अलग राज्यों के लोग शामिल हुए थे। इस आयोजन में लोगों को धर्म की शिक्षा देकर इसके प्रचार-प्रसार के लिए देश के अलग-अलग मस्जिदों में भेजा गया था। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में देश विदेश से तकरीबन 1500 से 1700 लोग जुटे थे। लॉकडाउन के बाद भी ये लोग छिपकर मरकज में ही रह रहे थे। निजामुद्दीन स्थित मरकज बिल्डिंग में मौजूद अब तक 24 लोग कोरोना वायरस से पॉजिटिव निकले हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने बताया कि मरकज में शामिल 300 लोगों को अब तक अस्पताल में शिफ्ट किया गया है, जबकि करीब 700 से 800 लोगों को आइसोलेट किया गया है।

उल्लेखनीय है कि निजामुद्दीन का यह मरकज इस्लामी शिक्षा का दुनिया में सबसे बड़ा केंद्र है। यहाँ कई देशों के लोग आते रहते हैं। मरकज से कुछ ही दूर सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह है। तबलीगी जमात के मरकज में 1 से 15 मार्च तक 5 हजार से ज्यादा लोग आए थे। इनमें इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड के लोग भी शामिल थे। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली पुलिस से निजामुद्दीन मरकज के मौलाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा है।

पटना, राँची के बाद अब अहमदनगर के मस्जिद से मिले 10 विदेशी, ट्रस्टी हुए गिरफ्तार

पटना, राँची और दिल्ली के बाद महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा नगर स्थित एक मस्जिद से 10 विदेशियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इस खबर की जानकारी मराठी समाचार पोर्टल देशदूत में प्रकाशित हुई। देशदूत के मुताबिक इन दसों लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया है और मस्जिद के ट्रस्टियों पर महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन कानून के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस कॉन्स्टेबल प्रताप सिंह भगवान ने इस संबंध में एफआईआऱ दर्ज की है। उन्होंने बताया कि 30 मार्च को नेवासा में पट्रोलिंग के दौरान रणजीत देर को एक खबरी से मालूम हुआ कि नेवासा के मरकूस मस्जिद में कुछ विदेशी ठहरे हैं। पुलिस ने जब इस सूचना के आधार पर पड़ताल की तो खबर सच्ची निकली। 

पूछताछ में पता चला कि इनमें से 5 नागरिक पूर्वी अफ्रीका के डिजबूती (जिबूती) शहर के हैं। जबकि एक बेनिन, 3 डेकॉर्ट और एक घाना का है। पुलिस ने मस्जिद के ट्रस्टी जुम्माखान नवाबखान पठान और सलीम बाबूलाल पठान को कोरोना फैलाने के आरोप में और आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में कई धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार की राजधानी पटना से भी 12 विदेशियों को छिपाने का मामला सामने आया था। उस दौरान पड़ताल पर मालूम हुआ था कि पकड़े गए सभी लोग तजाकिस्तान के हैं और भारत में धर्म प्रचार करने आए थे। मगर, बिन कोरोना की जाँच करे सबसे छिपकर घूम रहे थे।

पटना में विदेशी मौलवी

इसके बाद झारखंड की राजधानी राँची के स्थित मस्जिद से भी 11 विदेशी मौलवियों को पुलिस प्रशासन ने हिरासत में लिया था। ये भी जाँच में मजहब प्रचारक के तौर पर ही सामने आए थे। इनमें से 3 मौलवी चीन से थे जबकि 4-4 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से थे। 

राँची में विदेशी

इसी तरह दिल्ली में भी कल निजामुद्दीन के पास मरकज भवन में कई विदेशियों के मिलने की सूचना सामने आई। जहाँ मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समेत कई देशों के करीब 2500 से अधिक लोगों ने 1 से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लिया और बाद में उनमें से कई यहीं रुके रहे। चिंताजनक बात ये है कि इनमें से 24 की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है।

दिल्ली निजामुद्दीन का दृश्य

800 विदेशी इस्लामिक प्रचारक होंगे ब्लैकलिस्ट: गृह मंत्रालय का फैसला, नियम के खिलाफ घूम-घूम कर रहे थे प्रचार

इंडोनेशिया के लगभग 800 इस्लामिक प्रचारकों को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लिया है। ये सारे पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और इस महीने दिल्ली में तीन दिवसीय मजहबी सम्मेलन में भाग लिया था।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने द हिंदू को बताया कि दक्षिण दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय अलमी मरकज बंगलेवाली मस्जिद में इस महीने की शुरुआत में देश भर से लगभग 8,000 लोग शामिल हुए थे। अधिकारी ने बताया कि देश भर से कई लोग, जिनका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव निकला, उन लोगों ने या तो इस मजहबी सभा में हिस्सा लिया था या फिर इसमें शामिल होने वाले लोगों के संपर्क में आए थे।

अधिकारी ने कहा, “वे पर्यटक वीजा पर यहाँ आए थे लेकिन मजहबी सम्मेलनों में भाग ले रहे थे, यह वीजा नियमों के शर्तों का उल्लंघन है। हम लगभग 800 इंडोनेशियाई प्रचारकों को ब्लैकलिस्ट करने जा रहे हैं ताकि भविष्य में वे देश में प्रवेश न कर सकें।” बता दें कि भारत और इंडोनेशिया के बीच वीजा की व्यवस्था है। इसके तहत और नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा की अनुमति है।

योगी सरकार ने UP में सभी निजी अस्पतालों को तत्काल खोलने के दिए आदेश, नहीं तो होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन सभी प्राइवेट अस्पतालों को तत्काल खोलने का आदेश दिया है, जो लॉकडाउन के कारण बंद हैं। राज्य सरकार की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों को एक आदेश जारी कर कहा गया है कि यदि निजी अस्पताल नहीं खोले गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में मुख्य सचिव आरके तिवारी का कहना है कि उन्हें कई जिलों से इस बात की शिकायत मिली है कि उनके यहाँ प्राइवेट हाॅस्पिटल बंद होने से काफी परेशानी हाे रही है। बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए भटक रहे हैं, जबकि लाॅकडाउन के दाैरान अस्पताल बंद करने का काेई आदेश नहीं था। अस्पतालों में चिकित्सा कर्मचारियों और दवाओं की उपलब्धता आवश्यक है और निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आरके तिवारी ने कहा कि अस्पताल में सोशल डिस्टेसिंग को अपनाकर इलाज किया जा सकता है। 

इस संबंध में कई हाॅस्पिटल के मालिकों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते स्टाफ नहीं आ पा रहा है। लिहाजा अस्पताल बंद हैं। जबकि अस्पताल अत्यावश्यक सर्विस के तहत आते हैं। 

वहीं नोएडा के सेक्टर 135 में स्थित में सीजफायर नाम की से जुड़े 16 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के बाद इसे सील कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज किया है। सीज फायर कंपनी में बीते दिनों लंदन से एक ऑडिटर आया था और कंपनी ने इसकी बात प्रशासन से छुपाई। वह ऑडिटर पास के ही एक फाइव स्टार होटल में भी ठहरा था। कंपनी की लापरवाही से 11 कर्मचारी समेत कुल 16 लोगों में कोरोना का संक्रमण फैला है।

सोमवार को नोएडा पहुँचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉकडाउन के बावजूद वहाँ कोरोना फैलने की वजहों की पड़ताल की तो अधिकारियों के जवाब पर उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने जिलाधिकारी बीएन सिंह से जवाब माँगा तो संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने बैठक में मौजूद अफसरों पर नाराजगी जताई। इस बीच सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए नोएडा के डीएम को हटा दिया है और उनकी जगह सुहास एल वाई को गौतम बुद्ध नगर का नया डीएम बनाया गया है। 

निजामुद्दीन मरकज में मौजूद 24 लोग कोरोना+: तेलंगाना में यहीं आए 6 की मौत, अंडमान के सभी 10 मामले यहीं के

दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लेने वालों के कारण सरकार की मुश्किलें और कोरोना का कहर राजधानी में बढ़ता चला जा रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मरकज भवन में मौजूद 24 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने की सूचना है। खुद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इसकी जानकारी दी है।

बता दें कि दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समेत कई देशों के करीब 2500 से अधिक लोगों ने 1 से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लिया था। अब इनका पता लगने के बाद पूरे इलाके की कड़ी निगरानी की जा रही है और हर संदिग्ध को अस्पताल में एहतियात के तौर पर भर्ती किया जा रहा है। इनमें से 24 लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकल आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निजामुद्दीन के मरकज भवन में मेडिकल टीम और पुलिस मौजूद है। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार इस महीने के शुरू में मरकज में लगभग 2500 लोग एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इनमें से करीब 1400 लोग पूरा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी यहीं रुके रहे थे। अब सोमवार को खुलासा होने के बाद इनमें से 860 लोगों को बिल्डिंग से अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है और 300 को शिफ्ट करना बाकी है। इस समय वहाँ ड्रोन की मदद से निगरानी की जा रही है।

बता दें कि दिल्ली में सोमवार को 25 और नए मरीज सामने आए थे। इनमें 18 कोरोना पीड़ित निजामुद्दीन में तब्लीगी मरकज में शामिल होने वाले निकले। आज के 24 लोग अब इस संख्या में और जुड़ गए। मतलब दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव के हालिया मामले में से 50% से ज्यादा मामले सिर्फ इस एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग हैं।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार को निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल होने वाले छह लोगों की तेलंगाना में कोरोना वायरस से मौत हो गई। वहीं अंडमान में 10 लोगों की रिपोर्ट में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। इन 10 में 9 लोग वह हैं, जो दिल्ली की मरकज में शामिल हुए थे। 10वीं संक्रमित महिला भी इन्हीं में से एक पत्नी है, जो दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल हुए थे।

गौरतलब है कि निजामुद्दीन के मरकज भवन के कारण ना केवल दिल्ली सरकार बल्कि अन्य राज्य सरकारों की मुश्किलें भी काफी बढ़ गई हैं। इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि दो लोगों की मौत गाँधी अस्पताल में हुई। एक-एक व्यक्ति की मौत दो निजी अस्पतालों में और एक व्यक्ति की मौत निजामाबाद और एक व्यक्ति की मौत गडवाल शहर में हुई।

अमेरिका जितना अमीर नहीं हम… लेकिन हमारे पास इस्लाम है: कोरोना से जंग पर इमरान का लॉकडाउन से साफ मना

कोरोना का संक्रमण इस समय हर देश को प्रभावित कर रहा है और हर देश की जनता इससे पीड़ित है। मगर, बावजूद इसके पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का रवैया देखकर लग रहा है कि वे अब भी इस बीमारी को गंभीरता से नहीं ले रहे। कल मुल्क को संबोधित करते हुए उनका एक विडियो सामने आया। वि़डियो में उन्होंने कोरोना वायरस को आधार रखकर अपने देशवासियों से बात की। यहाँ उन्होंने चीन की तारीफ करने से अपने बात की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि चीन एक ऐसा मुल्क है, जिसने लॉकडाउन करके इस समस्या से निजात पा लिया और अगर उनके देश (पाकिस्तान) में भी ऐसी हालात होते तो वो शहर बंद कर देते। मगर, इससे कुछ नहीं होगा।

एक ओर जहाँ पूरा विश्व लॉकडाउन को अंतिम विकल्प की तरह मान रहा है, वहीं पाक पीएम इस कॉन्सेप्ट को ही खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये उपाय उनके देश के लिए सही नहीं है। उनकी परेशानी ये है कि अगर लॉकडाउन होगा तो करीब 8-9 करोड़ लोग दो वक्त की रोटी नहीं खा पाएँगे। वे कहते हैं कि अगर वे देश के लोगों को खाना उपलब्ध नहीं करा सकते, तो यह लॉकडाउन सफल नहीं हो सकता।

इसके बाद इमरान खान करीब पाँच मिनट तक अपनी देश की जनता को यही समझाते नजर आए कि वो लॉकडाउन क्यों नहीं कर रहे। इस बीच उन्होंने हिंदुस्तान का उदाहरण दिया और कहा यहाँ हालत ऐसे हैं कि पहले लॉकडाउन लगा दिया गया, बाद में प्रधानमंत्री जनता से माफी माँग रहे हैं। इस दौरान इमरान अपनी जनता को ये बताते नजर आए कि पाकिस्तान और अमेरिका में कितना फर्क है।

इस गंभीर समय में भी जब हर किसी का मानना है कि धर्म, मजहब से ऊपर उठकर इस वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी जानी चाहिए, तब इमरान खान अपने देशवासियों को मजहब का हवाला देते हैं, इमान का पाठ पढ़ाते हैं। वे उन्हें उन इस्लामिक देशों के बारे में बताते हैं, जो सबसे ज्यादा खैरात देते हैं। इसके बाद इस लड़ाई को लड़ने के लिए वो जागरूक करने से ज्यादा अपने देश के युवाओं पर विश्वास जताते हैं और कहते हैं कि अब इन दोनों ताकतों (इमान और युवा) का उन्हें इस्तेमाल करना है ताकि कोरोना से लड़ा जा सके। वे कहते हैं कि अब युवा ही उनकी कमियों को पूरा करेगी। इसके लिए वे युवाओं की टाइगर फोर्स की घोषणा करते हैं। वे बताते हैं कि अब यही युवा कभी सेना के साथ मिलकर तो कभी प्रशासन के साथ मिलकर उनकी मदद करेंगे।

अब इमरान खान की सबसे हैरान करने वाली बात सुनिए। एक ओर जहाँ विश्व जल्द से जल्द इसके हर आयामों को अवलोकन करने के लिए प्रयासरत हैं। वहाँ इमरान खान इतने फिक्रमंद हैं कि वो कहते हैं कि उनकी एक टीम जो पीएमओ में बैठी है, वो यही डेटा एनालाइज कर रही है और एक हफ्ते के अंदर उन्हें सब पता चल जाएगा। आज भारत ने जिस कार्य को हर नागरिक के कंधे पर सौंपा है और कई संस्थाएँ खुद जागरूकता फैलाने का जिम्मा उठा रही हैं, वहीं पाकिस्तान में इसके लिए अलग से फोर्स बनी है। खुद सोचिए उस देश के लोग क्या जागरूक होंगे, जिनके प्रधानमंत्री पहले खुद कहते हैं कि कई घरों में 7-8 लोग साथ में रहते हैं। मगर थोड़ी देर बाद कहते हैं कि जरूरी नहीं स्वास्थ्य सुविधाएँ ली जाएँ। हम चाहें तो घर में रहकर भी ठीक हो सकते हैं।

अपनी बात को जोर देते हुए इमरान खान ये भी कहते हैं कि ये कोरोना वायरस केवल बुजुर्गों और बीमारों पर हमला करता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। जबकि वास्तविकता ये है कि कोरोना हर वर्ग और हर श्रेणी के लोगों के लिए खतरनाक है। क्योंकि ये संक्रामक है। हाँ, इससे लड़ेंगे कैसे ये हम पर और हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम पर निर्भर करता है। लेकिन इमरान खान की बातें सुनकर लगता है कि उन्होंने विश्वव्यापी प्रकोप पर जानकारी भी कम जुटाई है। वे खुद बताते हैं कि उनकी टीम अब भी आँकड़ों का अवलोकन करने में ही जुटी है ताकि कोरोना के कारण पीड़ित मरीजों की संख्या में उछाल जान सके।

वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह अपने मुल्क में पीएम राहत कोष की घोषणा करते हैं। लेकिन यहाँ भी हमेशा की तरह अपने गैर जिम्मेदारी दिखाते हुए कहते हैं कि इस अकॉउंट में हर कोई पैसे डाल सकता है। मगर ये परसों से खुलेगा और तब लोग जितना चाहें उसमें उतना दान कर सकते हैं। उनसे पैसों को लेकर कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। बल्कि वो चाहेंगे तो उन्हें टैक्स रिलीफ दिया जाएगा। इसके बाद वे इसी पैसे से अपने देश की जनता की मदद करेंगे।

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए इमरान खान कहते हैं कि जो भी व्यापारी अपने मजदूरों को इस मुश्किल की घड़ी में वेतन देने से मना नहीं करेंगे, उन्हें वे सस्ते दरों पर लोन देगा। अब इसके बाद एक और हास्यास्पद बात- प्रधानमंत्री इमरान खान इस विडियो में चैरिटी का भी तरीका समझाते हैं और कहते हैं कि इसके लिए उन्होंने फेसबुक पर इंतजाम किया है, वे वहाँ रजिस्टर करें। जिसके बाद एनालाइज करके बताएँगे कि किसे कहाँ कौन सी चीज की जरूरत है।

सलमान के 38 वर्षीय भतीजे की मौत, लीलावती अस्पताल में थे भर्ती: मीडिया रिपोर्ट में कोरोना की बात, परिवार ने नकारा

कोरोना वायरस के कहर के बीच बॉलीवुड जगत से एक बेहद बुरी खबर सामने आई है। ये खबर बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान से संबंधित है। बॉलीवुड एक्टर सलमान के भतीजे अब्दुल्लाह खान का निधन हो गया है।

खबरों के अनुसार उनके फेफड़ों में संक्रमण था। उन्हें साँस की दिक्कत होने के कारण दो दिन पहले ही लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया था। मौत की खबर सुनते ही सलमान का परिवार सदमे में है। सलमान खान ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अब्दुल्ला के साथ अपनी तस्वीर शेयर कर शोक जाहिर किया है। उन्होंने लिखा, “हमेशा तुम्हें प्यार करूँगा।”

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जानकारी के मुताबिक, अब्दुल्ला को हेल्थ से जुड़ी परेशानियों के बाद कुछ दिनों पहले ही हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। अब्दुल्ला इंदौर से थे और उनका मुंबई से इंदौर आना-जाना होता रहता था। चूँकि इंदौर में कोरोना का संक्रमण चरम पर है, इसलिए कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके कोरोना जाँच की भी बात की गई है। लेकिन इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सलमान के परिवार के सूत्रों के हवाले से इसे (कोरोना जाँच या संक्रमण) नकार दिया गया है।

बता दें कि अब्दुल्ला, सलीम खान की छोटी बहन का बेटा था। वे भले ही बॉलिवुड इंडस्ट्री से नहीं थे, लेकिन उन्हें कई बार सलमान के कुछ वीडियोज में देखा गया है। इसके साथ ही अब्दुल्लाह को भी सलमान की तरह हमेशा फिट रहने की हैबिट थी।

योगी ने किया गौतम बुद्ध नगर के डीएम का तबादला, शुरू की विभागीय जाँच, कोरोना संबंधी तैयारियों में पाई थी चूक

योगी के नॉएडा दौरे के बाद प्रदेश सरकार ने गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी बृजेश नारायण सिंह से जिले का चार्ज लेकर उन्हें राजस्व विभाग भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गौतम बुद्ध नगर के नए जिलाधिकारी अब एशियन पैरालंपिक बैडमिंटन में गोल्ड मेडल जीत चुके सुहास एल वाई होंगे। याद रहे कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच आज सोमवार को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौतम बुद्ध नगर पहुँचे थे जहाँ उन्होंने जिले के अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई थी। जिसके बाद बी.एन सिंह ने सरकार से तीन महीने की छुट्टी माँगी थी, जो पत्र मीडिया में लिक हो गया था। जिस पर तुरंत कार्यवाही करते हुए योगी ने न केवल बीएन सिंह को गौतम बुद्ध नगर से स्थानांतरित कर दिया बल्कि उनके खिलाफ विभागीय जाँच के भी आदेश जारी कर दिए।

यूपी के नॉएडा में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या प्रदेश में सबसे ज्यादा है। जिसके कारण आज योगी ने खुद नॉएडा आकर जिले की तैयारियों की समीक्षा की। कोरोना के खिलाफ तैयारियों और राज्य सरकार के निर्देशों के पालन में हुई हीलाहवाली के बाद उन्होंने डीएम बीएन सिंह समेत सभी अधिकारियों से सख्ती से बात की। योगी ने कहा- आप काम कम करते हैं और शोर ज्यादा करते हैं।

जिसके बाद गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी बीएन सिंह ने योगी से कहा कि वह गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी नहीं रहना चाहते हैं, उन्हें व्यक्तिगत कारणों के चलते छुट्टी दे दी जाए। प्रदेश के मुख्य सचिव ने डीएम को स्थानांतरित करने पर कहा, “गौतम बुद्ध नगर में कोरोना वायरस को लेकर तैयारियों की समीक्षा में पाया गया कि जिलाधिकारी के स्तर पर समन्वय में काफी कमी रही, पॉजिटिव पाए गए लोगों को क्वारंटाइन करने में भी कमी पाई गई, जिसके कारण पॉजिटिव मामले बढ़े हैं।” मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि डीएम बीएन सिंह के खिलाफ विभागीय जाँच अलोक टंडन करेंगे।

योगी ने सवाल किए कि जब दो महीने पहले कंट्रोल रूम शुरू करने का आदेश था तो अब तक कंट्रोल रूम शुरू क्यों नहीं किया गया। इन आरोपों पर जब डीएम ने सफाई देनी चाही तो सीएम योगी ने भड़कते हुए कहा कि यह सब बकवास बंद करिए अपना, आप लोगों ने बकवास कर कर के माहोल सब खराब कर दिया है। याद रहे कि उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर कोरोना संक्रमित मामलों की संख्या के संदर्भ में सबसे आगे है।

मंदिर और सेवा भारती के कम्युनिटी किचेन को ‘आज तक’ ने बताया केजरीवाल का, रोज 30 हजार लोगों को मिल रहा खाना

‘आजतक’ ने एक बार फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का महिमामंडन करने के लिए एक मंदिर के योगदान को छिपा दिया। दरअसल, आजतक ने एक मंदिर द्वारा चलाए जा रहे कम्युनिटी किचेन को ‘केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन’ कह कर न सिर्फ़ प्रचारित किया बल्कि इस उपलब्धि के लिए दिल्ली सरकार की ही पीठ थपथपाई। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप आजतक की वो ख़बर देख सकते हैं, जिसमें मंदिर के कम्युनिटी किचेन के लिए केजरीवाल की वाहवाही की गई है:

आजतक ने लिखा कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद अपने गाँव को पलायन करने वाले मजदूरों और गरीबों की भारी भीड़ बॉर्डर पर रोजाना देखने को मिलती है। इन्ही मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने पूरा जोर लगा दिया है। इसके बाद लिखा गया कि केजरीवाल सरकार मजदूरों के रहन-सहन के इंतजाम में जुटी है और ऐसे ही एक कम्युनिटी किचेन को झंडेवालान में चलाया जा रहा है।

जबकि सच्चाई ये है कि इस कम्युनिटी किचेन को ‘झंडेवालान मंदिर कमिटी’ और समाजसेवा संगठन ‘सेवा भारती’ मिल कर चला रही है। इसीलिए आजतक ने बाद में हेडिंग को बदल दिया और ‘कैसा है केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन’ की जगह ‘कैसा है मंदिर का कम्युनिटी किचेन’ कर दिया। साथ ही लेख के भीतर भी लिख दिया गया कि पलायन करने वाले मजदूरों के रहने-खाने के इंतजामों में कई गैर सरकारी संस्थान भी सरकार की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।

सेवा भारती का बयान

‘सेवा भारती’ ने भी साफ कर दिया है कि इस कम्युनिटी किचेन को चलाने में उसे सिर्फ़ झंडेवालान मंदिर का सहयोग प्राप्त है और उसके अलावा किसी का भी सहयोग नहीं मिला है। वहाँ प्रतिदिन 30,000 लोगों को खाना खिलाया जा रहा है।

बता दें कि इस आपदा के समय देश भर के मंदिर आगे आकर न सिर्फ़ वित्तीय सहयोग कर रहे हैं बल्कि ग़रीबों तक समुचित संसाधन पहुँचाने में भी लगे हुए हैं। कई समाजिक संगठन भी जनसेवा में रत हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी लगातार इसी काम में लगा हुआ हैं। जबकि अरविन्द केजरीवाल की पार्टी के नेता आरोप-प्रत्यारोप खेल रहे हैं और मीडिया इससे इतर दिल्ली सरकार के महिमामंडन में लगा है। साथ ही मंदिरों के योगदान को भी जानबूझ कर छिपाया जा रहा है।

केरल में विकराल होती नई समस्या: आत्महत्याओं का सिलसिला जारी, कोरोना ने 1 तो शराबबंदी ने लिए 9 जान

कोरोना महामारी के चलते 21 दिनों के घोषित देशव्यापी लॉकडाउन ने केरल में एक दूसरी ही त्रासदी को जन्म दे दिया है, जहाँ शराब की दुकानें बंद होने के कारण होतीं आत्महत्याओं का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। केरल में अब तक कोरोना संक्रमण के चलते जहाँ सिर्फ एक मौत हुई है वहीं शराब न मिलने के कारण नौ लोगों की जानें जा चुकीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन नौ में से सात लोगों ने जहाँ आत्महत्या की है, तो एक-एक जान क्रमशः कार्डियक अरेस्ट और आफ्टर शेव लोशन पीने के कारण गई है। केरल में अब तक 234 COVID-19 केसेस में से सिर्फ एक की मौत हुई है। लेकिन हर तरह की शराब की दुकानों, बार, होटल्स, देशी दारु की दुकानों आदि को बंद किए जाने से राज्य एक अलग ही संकट में फँसता दिख रहा है। केरल में प्रति व्यक्ति अल्कोहल की खपत देश में सबसे ज्यादा है।

शुक्रवार को त्रिशूर के सनोज और कोच्चि के मुरली ने शराब न मिलने से पैदा हुए अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली थी। दारू न मिलने के कारण प्रदेश में शुरू हुआ आत्महत्याओं का दौर इन्हीं दो दुर्भाग्यपूर्ण मौतों के साथ शुरू हुआ। जिसके बाद शनिवार को कन्नूर के विजिल, कोल्लम के बीजू और सुरेश तथा कोच्चि के वासु के सुसाइड की खबर आई। जबकि तिरुवनंतपुरम के कृष्णनन कुट्टी ने रविवार को आत्महत्या कर ली।

शराब बंदी की जाए या नहीं, इस पर हफ्तों तक पशोपेश में रहने के बाद केरल की वामपंथी सरकार ने पिछले हफ्ते ही बार और राज्य सरकार से लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों को बंद किया था। जिसके बाद राज्य के अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा पर, जो कि पहले से ही कोरोना संक्रमण के चलते दबाव में है- आजकल शराब के लती लोगों में, शराब न मिल पाने के कारण आई मानसिक समस्याओं से भी जूझ रही है।

जिसके कारण पी.विजयन सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई गाइडलाइन्स जारी की हैं। जिनके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कहा गया है कि वे इस तरह शराब की लत से संबंधित अवसाद के ज्यादातर मामलों को देखें जिससे बड़े अस्पतालों में इनके कारण बोझ न बढ़े। इसके साथ-साथ राज्य के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की नोडल अधिकारी किरण पी.एस ने बताया कि प्रत्येक जिला अस्पताल में 10-20 बेड शराब की लत छुड़वाने के लिए आए मरीजों के लिए तैयार रखने होंगे।

इसके अलावा पी विजयन ने शनिवार को यह भी कहा है कि शराब के आदी लोगों को डॉक्टर के पर्चे पर सरकार दारू उपलब्ध करवाएगी।