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शादी समारोह, मस्जिद, अस्पताल… पूरा मेरठ घूम गया महाराष्ट्र का कोरोना + शख्स, बीवी-साले भी संक्रमित

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन जारी है। बावजूद इसके संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पहुँचा एक शख्स कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। हाल ही में महाराष्ट्र के अमरावती से मेरठ पहुँचे शख्स में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। साथ ही परिवार के 4 अन्य लोगों में भी कोरोना वायरस का संक्रमण मिला है। इस तरह मेरठ में संक्रमण के 5 नए मामले एक ही परिवार में सामने आए हैं।

मेरठ में एक ही परिवार से कोरोना वायरस के 5 मरीज मिलने से हड़कंप मच गया है। मरीजों की संख्‍या सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे ने 38 लोग की पहचान की है। बताया जा रहा है कि इन 38 मरीजों में किसी को भी कोरोना हो सकता है। कोरोना का यह संक्रमित मरीज महाराष्ट्र के अमरावती से 19 मार्च को मेरठ पहुँचा था। 

जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति का मेरठ में ससुराल है। वह अपनी पत्नी के साथ महाराष्ट्र से मेरठ आया था। शुक्रवार को मेरठ मेडिकल अस्पताल में उसके कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई थी। इसके बाद संपर्क में रह रही पत्नी और 3 सालों को भी शुक्रवार को भर्ती कराया गया। अब उसकी पत्नी और तीन सालों को भी कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। इस तरह मेरठ में अभी तक 2 दिन में 5 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना मरीज मेरठ में एक शादी में आया था। उन्होंने बताया कि मरीज में संक्रमण की पुष्टि की रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार और अमरावती प्रशासन को भी भेज दी गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि 19 से 26 मार्च के बीच मरीज ने दो मस्जिदों में नमाज अदा की थी। 27 मार्च को उसके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। इससे पहले उसने दो दिनों तक निजी अस्पताल में इलाज भी करवाया था। इसके बाद विभाग को आशंका है कि दर्जनों अन्य भी कोरोना संक्रमित पाए जा सकते हैं। मरीज ने जिस अस्पताल में इलाज करवाया था, अब उसके डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की भी जाँच की जाएगी। मरीज कहाँ-कहाँ गया, इसकी पड़ताल करने के लिए 110 टीमों का गठन किया गया है।

‘राघव चड्ढा की हरकत आतंकवाद से कम नहीं’: झूठी खबर को लेकर केजरीवाल के विधायक पर FIR

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने और उनकी मानहानि करने के आरोप में आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज किया गया है। चड्ढा के ख़िलाफ़ वकील प्रशांत पटेल उमराव ने मामला दर्ज कराया है। उन पर वैमनस्य का माहौल बनाने, घृणा व द्वेष फैलाने और सीएम योगी आदित्यनाथ की मानहानि करने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर नोएडा में दर्ज कराई गई है।

दिल्ली के राजेंद्र नगर से विधायक राघव चड्ढा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 500 (किसी की मानहानि करना), धारा 505 (2) (विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाएँ पैदा करने के आशय से झूठ बोलना) और आईटी एक्ट 66 (आपत्तिनजक पोस्ट या ट्वीट करना) का आरोप लगाया गया है। प्रशांत पटेल उमराव ने हर्षवर्धन त्रिपाठी के एक ट्वीट को रीट्वीट भी किया है, जिसमें कहा गया है कि राघव चड्ढा ने जो हरकत की है, वो आतंकवाद से कम नहीं है।

बता दें कि राघव चड्ढा ने ट्वीट किया था कि उन्हें सूत्रों से पता चला है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली से जाने वाले मजदूरों को दौड़ा-दौड़ा कर पिटवा रहे हैं। बकौल चड्ढा, सीएम योगी ने मजदूरों से पूछा कि वो दिल्ली क्यों गए थे और साथ ही धमकाया कि उन्हें आगे से दिल्ली नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने यूपी सरकार पर संकट की घड़ी में समस्याओं को बढ़ाने का आरोप मढ़ा था। चड्ढा ने अपनी बात को साबित करने के लिए कुछ नहीं किया। उनके आरोप का आधार क्या था, ये भी उन्होंने नहीं बताया।

राघव चड्ढा के इस ट्वीट को शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने लिखा है, “यह सरासर झूठी ख़बर है, ऐसी महामारी के समय भी इनकी पार्टी गंदी राजनीति खेलने से बाज़ नहीं आ रही है, इतना नीचे कैसे गिर सकती है आम आदमी पार्टी? इस ट्वीट पर उत्तरप्रदेश सरकार और पुलिस निश्चित कार्यवाही करेगी।”

बता दें कि दिल्ली सरकार पर प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन के नाम पर गुमराह करने का आरोप है। कहा जा रहा है कि इनलोगों के बिजली-पानी कनेक्शन काट उन्हें यूपी बॉर्डर पर छोड़ दिया गया था। यह अफवाह फैलाई गई बॉर्डर पर उनको घर ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। इसको लेकर ट्विटर पर सहायक अध्यापक (ट्विटर अकाउंट द्वारा उपलब्ध जानकारी) महेंद्र सिंह ने दिल्ली से UP-बिहार की ओर पलायन कर रहे लोगों की स्थिति को लेकर एक ट्वीट करते हुए लिखा, “दिल्ली में रह रहे मजदूरों के घर का पानी, बिजली काट दिया गया। अफ़वाह फैलाई कि लॉकडाउन 3 महीने का होगा। अफ़रातफ़री मच गई। बसों में भर कर लोगों को यूपी बॉर्डर पर भेज दिया। रात भर गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़ में 1000 से ज्यादा बसें लगाकर इनको गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था की गई।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि दिल्ली ने प्रवासी मजदूरों को निराश किया है। चड्ढा ने उनके ट्वीट को रिट्वीट करते हुए यूपी सरकार पर आरोप लगाए थे।

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत को अमेरिका देगा 2.9 मिलियन डॉलर की मदद

दुनिया के करीब 200 देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे हैं। अब तक लाखों लोगों की जान जा चुकी है। इसी बीच लोगों की जिंदगियाँ बचाने के लिए अमेरिका आगे आया है। अमेरिका ने भारत सहित दुनिया के 64 देशों की आर्थिक रूप से मदद करने के लिए 174 मिलियन डॉलर के पैकेज का ऐलान किया है। अमेरिका ने कोरोना से निपटने के लिए भारत को 2.9 मिलियन डॉलर (करीब 22 करोड़ रुपए) की राशि देने की घोषणा की है।

बता दें कि यह राशि फरवरी में अमेरिका की ओर से घोषित 10 करोड़ डॉलर की मदद के अलावा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक लेबोरेटरी सिस्टम, ऐक्टिव केस ढूँढने, निगरानी और टेक्निकल एक्सपर्ट्स की मदद संबंधी तैयारियों आदि को दुरुस्त करने के काम में इस पैसे का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

अमेरिका ने भारत के अलावा बांग्लादेश को 3.4 बिलियन डॉलर, अफगानिस्तान को 5 मिलियन डॉलर, श्रीलंका को 1.3 मिलियन डॉलर और नेपाल को 1.8 डॉलर की राशि देने का ऐलान किया है। अमेरिका ने कहा है कि वो दशकों से स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दुनिया में मदद देता रहा है। स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, “अमेरिका लोगों की जिंदगियाँ बचाने में आगे रहा है, हम वैसे लोगों की रक्षा करते रहे हैं, जिन्हें बीमारियों की चपेट में आने का खतरा है, हम स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित संस्थान बनाते रहे हैं और समुदायों और राष्ट्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करते रहे हैं।” बता दें कि इस वक्त अमेरिका खुद भी कोरोना महामारी से जूझ रहा है। वहाँ पर अभी एक लाख से ज्यादा कोरोना मरीज हैं, जिनका देश के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, अब तक कोरोना के 918 केस की पुष्टि हुई है। इन 918 संक्रमितों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें से 79 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं। जबकि 19 लोगों की मौत हो गई है। कोरोना वायरस के मामले लगातार दुनियाभर में बढ़ रहे हैं। दुनिया भर में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमण के छह लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 28,812 लोगों की इस संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। वहीं, अकेले इटली में अब तक 9,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 80 हज़ार से अधिक लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं। इटली में संक्रमण से होने वाली मौत के आँकड़े चीन और USA से कहीं आगे निकल चुके हैं।

‘रोहिंग्या सुरक्षित, मजदूरों को भगा दिया’: सोशल मीडिया में फूटा गुस्सा, ट्रेंड में #ArrestKejariwal

जब पूरा देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा है, दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। दिल्ली के मुखिया अरविंद केजरीवाल को लेकर सोशल मीडिया में खासी नाराजगी दिख रही है। #ArrestKejariwal ट्रेंड कर रहा है। असल में यूपी सरकार ने एक बयान जारी कर बताया था कि किस तरह प्रवासी मजूदरों को दिल्ली में गुमराह किया गया। बिजली-पानी के कनेक्शन काट कर उन्हें बॉर्डर पर छोड़ दिया गया। इसके बाद से ‘द क्विंट’ जैसे प्रोपेगेंडा पोर्टल दिल्ली के मुखिया को क्लीन चिट देकर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार पर दोष मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। ‘द क्विंट’ ने लिखा कि यूपी सरकार ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए बसों का इंतजाम किया जा रहा है, तभी इतने लोग जुटे।

यहाँ ये बताना ज़रूरी है कि तमाम विपक्षी नेता और मीडिया का एक बड़ा वर्ग मजदूरों के पलायन को लेकर मोदी सरकार पर लॉकडाउन के लिए आधी-अधूरी तैयारी होने और योगी सरकार पर उन्हें पिटवाने का आरोप लगा रहे थे। लगातार आ रही ऐसी ख़बरों के बीच योगी सरकार ने उन मजदूरों के लिए सैनिटाइजस बसों का इंतजाम किया। मजदूरों की स्क्रीनिंग की गई और उनके खाने-पीने का इंतजाम किया गया। यानी, बसों का इंतजाम भीड़ जुटने और मीडिया द्वारा हाइप बनाने के बाद हुआ, न कि पहले। इस हिसाब से ‘द क्विंट’ ने केजरीवाल को बचाने के लिए योगी आदित्यनाथ पर हिटजॉब किया है।

उधर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी कई विडियो जारी कर केजरीवाल सरकार की पोल खोली है। एक विडियो में दिख रहा है कि दिल्ली की गलियों में माइक से अनाउंसमेंट किए जा रहे हैं। इस अनाउंसमेंट में कहा जा रहा है कि आनंद विहार के लिए बसें जा रही हैं, उससे आगे यूपी-बिहार के लिए बसें मिलेंगी। सोते हुए लोगों को उठा-उठा कर बसों से उप्र बॉर्डर पर भेजा गया। कपिल मिश्रा ने इसे सोची-समझी साजिश करार दिया। शनिवार (मार्च 28, 2020) की रात को भी जगह-जगह से आनंद विहार के लिए बसें चलाई गईं। इन्हीं बसों से वहाँ हज़ारों की भीड़ जुटी। कपिल मिश्रा ने पूछा कि आखिर केजरीवाल चाहते क्या हैं?

सोशल मीडिया पर भी लोगों का आक्रोश फूटा, जहाँ उन्होंने केजरीवल को गिरफ़्तार करने की माँग की। लोगों ने कहा कि उनकी इस हरकत को देखते हुए उनके लिए कोई संसदीय शब्द का इस्तेमाल किया ही नहीं जा सकता। कई लोगों ने पूछा कि दिल्ली में तो राजस्थान और हरियाणा के भी लोग रहते हैं, उन्हें अपने घरों में क्यों नहीं भेजा गया? कई लोगों ने पूछा कि दिल्ली से सिर्फ बिहारी और यूपी के मजदूर ही क्यों पलायन कर रहे हैं, जबकि रोहिंग्या और अन्य घुसपैठिए सुरक्षित हैं? कुछ लोगों के सवाल थे कि जब केजरीवाल ने बसें उपलब्ध कराई ही थी तो गंतव्य तक क्यों नहीं छोड़ा? बॉर्डर पर ही क्यों छोड़ दिया?

उधर, उत्तर प्रदेश में मजदूरों के लौटने से संकट पैदा हो गया है। आशंका है कि इनमें से कई कैरियर हो सकते हैं, जिसके कारण महामारी फ़ैल सकती है। ‘नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल’ ने इसके लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सरकार को पता है कि ग्रामीण इलाक़ों में कोविड-19 से लड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और अगर वहाँ स्थिति बिगड़ती है तो भारत में माहौल ख़राब हो जाएगा। ऐसे में सरकार इन राज्यों में अब ‘रैपिड रिस्पांस टीम’ के जरिए निगरानी में जुटी है।

मौत के बाद पता चला कोरोना+ था सैफ, तब तक हो गई थी भारी चूक: बिहार में सामुदायिक संक्रमण का खतरा

बिहार के मुंगेर जिले के 38 वर्षीय व्यक्ति सैफ की 21 मार्च को कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पटना के एम्स में मौत हो गई थी। वह कतर से लौटा था। इस मामले में अब जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार सैफ के परिवार के 2 सदस्य और पटना के जिस प्राइवेट अस्पताल में इसका इलाज हो रहा था, वहाँ के दो कर्मचारी भी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इस नए घटनाक्रम के बाद आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग संक्रमित हो सकते हैं, जो मृतक के परिवार के इन दो सदस्यों अथवा प्राइवेट अस्पताल के उन दो कर्मचारियों के संपर्क में आए थे। इसके कारण बिहार में सामुदायिक संक्रमण की आशंका पैदा हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आने के बावजूद भी अस्पताल के इन दोनों कर्मचारियों ने भयानक लापरवाही दिखाई। इन दोनों में से एक लैब टेक्नीशियन अलग-अलग जगहों पर जहाँ करीब 50 लोगों के संपर्क में आया था, वहीं वार्ड बॉय ने पटना में एक शादी समारोह में शिरकत की थी जिसमें करीब 80 लोग शामिल हुए थे।

इन 130 लोगों में से 110 लोग आइसोलेशन में रखे गए हैं, जबकि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने की आशंका वाले लोगों की पहचान और निगरानी के प्रयास जारी हैं। शरणम् अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य मेडिकल स्टॉफ को भी आइसोलेशन में रखा गया है। अस्पताल ने अब तक किसी और कोरोना पॉजिटिव केस पाए जाने की जानकारी नहीं दी है। इनके अलावा सैफ परिवार के अन्य सदस्य व रिश्तेदार भी संक्रमण के खतरे से बाहर नहीं हैं, क्योंकि एम्स पटना ने जाँच रिपोर्ट आने से पहले ही उसका शव अंत्येष्टि के लिए परिवार को सौंप दिया था।

पटना के एक डॉक्टर ने बताया कि बिहार के ये चार COVID-19 मामले इस तरफ संकेत करते हैं कि बिहार में वायरस का सामुदायिक संक्रमण हुआ है, जो क्वारन्टाइन कदम उठाने के लिए प्रशासन को पर्याप्त वजह देता है। आशंका है कि कोरोना संक्रमित मामलों में वृद्धि हो सकती है। कोरोना से मरने वाले इस व्यक्ति को पहले मुंगेर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उसके बाद उसे पटना के शरणम अस्पताल लाया गया। तबीयत और बिगड़ने पर उसे 20 मार्च को पटना के एम्स में भर्ती करवाया गया था, जहाँ 21 मार्च को उसकी मौत हो गई थी।

सैफ पहले से ही किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था, इसलिए एम्स में उसकी डायलिसिस की जा रही थी। बाद में मेडिकल स्टॉफ ने उसमें श्वसन संबंधी दिक्क्तों को भी नोटिस किया और उसकी ट्रैवल हिस्ट्री को देखते हुए, जाँच के लिए नमूनों को 20 मार्च को भेजा। लेकिन इन टेस्ट्स के अंतिम परिणाम आने से पहले ही इसकी मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही का परिचय देते हुए सैफ का शव उसके परिवार को सौंप दिया जो उसको पटना से मुंगेर अंत्येष्टि के लिए ले गए। इस लापरवाही का खामियाजा किस हद तक भुगतना होगा यह आने वाले दिनों में साफ़ हो सकेगा।

शाहीन बाग: मजमा उठा तो फट पड़ी वायर की आरफा, कहा- आवाज दबाने के लिए प्राकृतिक आपदाओं का इस्तेमाल

सीएए विरोध के नाम पर दिल्ली के शाहीन बाग में शुरू हुआ राजनीतिक धरना करीब 100 दिन बाद दिल्ली पुलिस ने हटा दिया। इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने भले ही राहत की साँस ली हो, लेकिन वामियों और खबर के नाम पर प्रोपेगेंडा चलाने वाले कुछ लोगों के पेट में दर्द शुरू हो गया है। यहाँ तक कि ‘द लायर’ जैसे ग्रुप के लोग ‘इस मौके का इस्तेमाल कर’ शाहीन बाग धरने के हटने पर आँसू बहा रहे हैं। प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर की कथित पत्रकार आरफा ख़ानम ने एक विडियो वीडियो जारी कर आखिरी में प्रार्थना की कि मैं चाहती हूँ कि जल्द ही देशभर में सीएए के खिलाफ आंदोलन शुरू हो और यह तब तक जारी रहे जब तक कि मोदी सरकार इस काले कानून को वापस नहीं ले लेती।

देश में कोरोना महामारी की बढ़ती रफ्तार के बाद दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग की महिलाओं को पहले तो स्थान खाली करने की अपील की। इसके बाद भी धरना स्थल खाली नहीं करने पर पुलिस ने जगह को खाली करा दिया था। मौके से 10 प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया गया था, जिनमें कुछ महिलाएँ भी शामिल थीं। उसी दिन यानी की 24 मार्च को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के संबोधन में रात 12 बजे से लॉकडाउन की घोषणा की थी।

इस मौके का इस्तेमाल करते हुए आरफा ख़ानम ने एक विडियो जारी की। कहा कि सीएए के खिलाफ दर्जनों महिलाओं ने जो धरना शुरू किया था, उसमें पहले सैकड़ों फिर हजारों और बाद में तो लाखों की संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। सीएए को स्वीकार नहीं करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। इसे बाद में दिल्ली पुलिस ने जबरन अलोकतांत्रिक तरीके से हटा दिया। हालाँकि ख़ानम ने यह नहीं बताया कि जिस धरने में कथित तौर पर हजारों, लाखों की भीड़ जुटती थी वह दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद दर्जनों में क्यों सिमट गई? दिल्ली चुनावों के बाद शाहीन बाग लगातार क्यों दम तोड़ता चला गया? इस बात का खुलासा जब इंडिया टीवी की पत्रकार ने लाइव कवरेज में की तो उन पर वहाँ मौजूद प्रदर्शनकारी भड़क गईं थी।

‘द वायर’ की आरफा खानम ने शाहीन बाग की महिलाओं को किया सलाम

चौंकाने वाली बात यह कि जो बीमारी देश में 19 से अधिक और पूरे विश्व में 27, 000 से अधिक लोगों की जान ले चुकी है, जिस महामारी से आज देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व जूझ रहा है और लॉकडाउन जैसे कठिन फैसलों को लेने के लिए मजबूर है, ऐसी बीमारी आरफा को शाहीन बाग हटाने के लिए एक बहाना नजर आई। उसके मुताबिक सरकार ने कोरोना का बहाना लेकर शाहीन बाग की महिलाओं को पुलिस की मदद से जबरन और अलोकतांत्रिक तरीके से हटा दिया। प्रदर्शनकारी महिलाओं को पीड़ित साबित करते हुए कहा कि जिन महिलाओं ने जनता कर्फ्यू का पूरी तरह से पालन किया, उनके प्रदर्शन का गलत तरीके से अंत कर दिया गया।

आरफा ने विडियो में एक कथित प्रत्यक्षदर्शी को पेश किया। उसने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने धरना स्थल को खाली कराने के दौरान महिलाओं के साथ बदसलूकी की। उस निशानी यानी टेंट को भी हटा दिया, जिसके नीचे भारत के झंडे लगे हुए थे। जिसके नीचे लोकतंत्र की बातें होती थीं। इस पर आरफा ने कहा कि प्रदर्शन ने कई सारे इतिहास बनाए। लेकिन आरफा ने यह नहीं बताया कि कितनी बार धरने में जिन्ना वाली आजादी माँगी गई, शरजील जैसे देशद्रोहियों को समर्थन मिला, उल्टा तिरंगा करके महिला को हिजाब पहनाया गया और स्वास्तिक को उल्टा कर दिखाया गया वगैरह। इसके बाद आरफा ने तीन महीनों से धरने पर बैठी महिलाओं को उठाने के बहाने कुछ आँसू बहाए, जब कोई उन्हें पोंछने वाला दिखाई नहीं दिया तो खुद ही पोंछ कर फिर से शाहीन बाग को सलाम करने लगी।

आरफा ने आगे अल्पसंख्यकों का हितैषी बनने की कोशिश करते हुए कहा कि धरने ने पिछले पाँच-छ सालों से बहुसंख्यकवाद की हो रही राजनीति को तोड़ने की एक बेहतर और सफल कोशिश की। इतना ही नहीं शाहीन बाग ने पहली बार मोदी सरकार को जनता की तरफ से बेहतर पुश किया। आरफा ने अपना दर्द बयाँ करते हुए कहा कि तीन महीने से कड़कड़ाती ठंड में बैठी प्रदर्शनकारी महिलाओं से देश के प्रधानमंत्री ने बात तक करना उचित नहीं समझा, जो ट्रिपल तलाक जैसे कानून लाकर मुस्लिम महिलाओं के हमदर्द बनते हैं। आरफा को तीन महीने से प्रदर्शन कर रही महिलाओं का दर्द तो दिखाई दे गया, लेकिन 30 साल से अपने ही देश में शरणार्थी बने कश्मीरी पंडितों का दर्द आज तक दिखाई नहीं दिया, खैर!

आरफा ने आगे अपनी मूर्खता के साथ चाटुकारिता का परिचय देते हुए कहा कि ये जो सीएए का काला कानून है यह देश को बाँटने वाला कानून है। इससे संविधान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। सरकार को तानाशाह करार देते हुए और नीचता की सारी हदों को पार करते हुए कहा कि ऐसी सरकारें आवाजों को दबाने के लिए प्राकृतिक आपदाओं का इस्तेमाल करती है। आखिर में आरफा ने कहा कि शाहीन बाग के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। साथ ही भगवान से प्रार्थना की कि जल्द ही भारत इस महामारी से उभरे और वह चाहती हैं कि फिर से सीएए, एनआरसी के खिलाफ देशभर में आंदोलन शुरू हो। यह तब तक जारी रहे जब तक कि सरकार इसे वापस नहीं ले लेती।

आश्चर्य की बात यह कि आरफा ने एक बार भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि प्रदर्शनकारी महिलाओं ने 100 दिनों तक बिना किसी इजाजत के सड़क जाम कर रखा था। इसके कारण महीनों तक नोएडा आने-जाने वाले लोगों ने भीषण जाम का सामना किया। यहाँ तक कि इस बीच जाम में फँसने से जान भी गई।

कोरोना से जंग: सुपर एक्टिव मोड में PM मोदी, कैबिनेट मंत्रियों को सौंपी जनपदों की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए घोषित देशव्यापी लॉकडाउन को दृष्टिगत रखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 15 मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का दायित्व 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान देश के प्रत्येक हिस्से में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को सुनिश्चित करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोदी ने देश के सभी जनपदों को कवर करते हुए प्रत्येक कैबिनेट मंत्री को न्यूनतम 15 जनपदों की जिम्मेदारी सौंपी है, जो सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन से इस विषय में जानकारी लेता रहेगा तथा तद्नुरूप कार्यवाहियाँ करेगा।

इस उच्च स्तरीय कमेटी के मंत्रियों को देश के प्रत्येक राज्य के प्रत्येक जनपद के डीएम और अधिकारियों से रोजाना बात कर संघ सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के पालन के संबंध में जानकारी जुटानी होगी। जारी गाइडलाइंस के पालन में आने वाली दिक्क्तों को दूर करने के प्रयास करने होंगे। कमेटी की जिम्मेदारी में प्रत्येक जनपद में कोरोना संक्रमित और क्वारन्टाइन में भेजे गए मामलों की जानकारी जुटाना भी शामिल होगा।

यह उच्च स्तरीय कमेटी, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की अध्यक्षता में बने मंत्री समूह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बने इकोनॉमिक टॉस्क फ़ोर्स तथा मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन और नीति आयोग के सदस्य डॉ.विनोद पॉल की संयुक्त अध्यक्षता में साइंटिफिक रिस्पॉन्स के लिए बनाई गई कमेटी के अतिरिक्त है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पास उत्तर प्रदेश के 20 जनपद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास आंध्र के 13 और तमिलनाडु के 9 जनपद, विदेश मंत्री जयशंकर के पास पश्चिम बंगाल के 23 जनपद, परिवहन मंत्री गडकरी के पास मुम्बई समेत महाराष्ट्र के 18 जनपद तथा कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के पास तमिलनाडु के 20 जनपदों का दायित्व है। इसी प्रकार देश के बाकी जनपद, अन्य मंत्रियों के हवाले किए गए हैं।

केंद्र सरकार कोरोना के खिलाफ जारी जंग में प्रत्येक वर्ग का ध्यान रखते हुए लगातार कदम उठा रही है। केंद्र की सरकार ने लॉकडाउन में गरीबों को सहायता करने के उद्देश्य से 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस राहत पैकेज की घोषणा की थी।

आर्थिक पैकेज की राशि का इस्तेमाल 10 करोड़ गरीबों के खाते में सीधे रकम ट्रांसफर करने और उद्योगों को राहत देने के लिए किया जाएगा। साथ ही गरीब वरिष्‍ठ नागरिकों, विधवाएँ और दिव्‍यांगों को तीन महीने तक एक्‍स्‍ट्रा 1,000 रुपए डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए दिया जाएगा। महिला जन-धन खाताधारकों को 500 रुपए की राशि तीन महीने तक जाएगी। इससे 20 करोड़ महिलाओं को लाभ होगा। उज्‍ज्‍वला स्‍कीम के तहत 8 करोड़ से ज्‍यादा बीपीएल महिलाओं को इस कठिन समय में तीन महीने तक एलपीजी सिलेंडर भी मुफ्त में दिया जाएगा।

J&K में कोरोना संक्रमण: एक मजहबी जुटान से जुड़े 11 मामले, 6 सऊदी से लौटे, एक मौलवी की मौत

जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 33 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 13 शनिवार (मार्च 28, 2020) को सामने आए। इनमें से 31 सक्रिय मामले हैं। एक मरीज ठीक हो गया है और एक की मृत्यु हो गई है। जम्मू-कश्मीर के प्लानिंग सचिव रोहित कंसल ने बताया कि सरकार हर एक मामले को ट्रेस करने में लगी हुई है और सभी मरीजों से एक-एक कर संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कश्मीर के 11 मामले एक मजहबी फंक्शन के कारण हुए।

प्लानिंग सचिव ने बताया कि कुल मामलों में से 6 ऐसे हैं, जो सऊदी अरब गए थे। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये मजहबी फंक्शन कहाँ पर हुआ था। पूरे भारत में अब तक कोरोना वायरस के 918 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 79 ठीक हो गए हैं, वहीं 19 की मृत्यु हुई है। फ़िलहाल देश में कुल 819 सक्रिय मामले हैं। इनमें से 108 मामले तो आज ही मिले हैं। दिल्ली से मजदूरों के यूपी-बिहार पलायन से कई लोगों के मन में शंका है कि भारत में हालात और बिगड़ सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर में जिस व्यक्ति की कोरोना वायरस के कारण मौत हुई है, वो भी मजहबी प्रचारक ही था। 65 वर्षीय मौलवी की मौत श्रीनगर चेस्ट हॉस्पिटल में हुई। जिस मजहबी कार्यक्रम की बात प्लानिंग सचिव कर रहे थे, उसमें ये मौलवी भी उपस्थित था। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि वो जाँच में सहयोग भी नहीं कर रहा था। उसने स्क्रीनिंग के लिए भी इनकार कर दिया था। पुलिस अन्य मरीजों को ट्रेस करने में लगी हुई है।

कोरोना से लड़ने के लिए BCCI ने दिए ₹51 करोड़: सौरव गांगुली और जय शाह ने किया ऐलान

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने प्रधानमंत्री राहत कोष में कोरोना से लड़ने के लिए 51 करोड़ रुपए दिए हैं। बीसीसीआई के अध्यक्ष गांगुली और सचिव जय शाह ने इसका ऐलान किया। बीसीसीआई ने यह रकम ‘प्राइम मिनिस्टर सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सीचुएशन्स फण्ड’ में दिया है। इससे पहले सचिन तेंदुलकर और सुरेश रैना सहित कई खिलाड़ी सहायता का ऐलान कर चुके हैं। इसके बाद सभी की निगाहें बीसीसीआई की तरफ़ टिकी हुई थी।

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर ‘पीएम केयर्स फण्ड’ को लेकर जानकारी साझा की थी और लोगों से आह्वान किया था कि इस विकट परिस्थिति में वे क्षमतानुसार वित्तीय सहयोग करें। पीएम मोदी ने बताया था कि इस फंड में माइक्रो-डोनेशंस, अर्थात छोटी राशि भी डाली जा सकती है। उन्होंने बताया कि इससे भारत की ‘आपदा प्रबंधन क्षमताओं’ को मज़बूती मिलेगी। इससे नागरिकों को बचाने और इस क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने अपील करते हुए कहा कि हम सबको एक स्वस्थ भारत बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए, ताकि अगला जनरेशन ज्यादा समृद्ध और स्वस्थ हो। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद छात्रों से लेकर सेलिब्रिटीज तक ने रुपए डोनेट किए।

विदेश से पंजाब आए 1330 लोगों को तलाश रही सरकार, क्वारंटाइन से बचने के लिए गायब होने का अंदेशा

पिछले दो महीनों में बाहर से आए 55,000 लोगों में से 1,330 को ट्रेस कर पाने में पंजाब सरकार असफल रही है। पता चला है कि इन लोगों ने क्वारन्टाइन के संबंध में दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लापता 1,330 लोगों में जालंधर (ग्रामीण) से 204, लुधियाना से 172, मोहाली के 128, गुरदासपुर के 118, बटाला और अमृतसर (ग्रामीण) से 84-84 और होशियारपुर के 63 लोग शामिल हैं। राज्य के गृह विभाग ने अब फिर से सभी डिविजनल, डिप्टी और पुलिस कमिश्नरों को उन सभी लोगों को ट्रेस करने को कहा है जो राज्य में 30 जनवरी के बाद दाखिल हुए हैं। राज्य सरकार ने इन सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन यात्रियों को ट्रैक करने के लिए जिलों को सेक्टरों में विभाजित कर, प्रत्येक 8-10 गाँवों के लिए एक सेक्शन ऑफिसर नियुक्त करें।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने टेस्टिंग बढ़ा दी है पर विदेशों से लौट कर आए हुए लोग और एनआरआई 14 दिन के होम क्वारन्टाइन से बचने के लिए यहाँ-वहाँ छिपे घूम रहे हैं। उन्हें स्वयं तथा समाज के हित में स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार आचरण करने की जरूरत है।” रिपोर्ट में पंजाब के चीफ सेक्रेटरी करण ए सिंह के हवाले से कहा गया है, “आज की तारीख़ तक राज्य में 48,000 से ज्यादा लोग दूसरे देशों से आए हैं। इनमें से लगभग सभी को ट्रेस कर लिया गया है। सिर्फ उनको अब तक ट्रेस नहीं किया जा सका है जिनके पासपोर्ट में दिया गया पता सही नहीं है।”

चीफ सेक्रेटरी ने आगे कहा, “देश में हम पहले ऐसे राज्य हैं जिसने सभी एनआरआई को ट्रैक किया हुआ है। हमने न केवल ज्यादातर एनआरआई को ट्रैक कर के उन्हें होम क्वारन्टाइन किया है, बल्कि उनसे मिलने वालों को भी आइसोलेट किया गया है। इनमें से कुछ इस कदम से खुश नहीं हैं पर हमने उनसे अपील की है कि फिलहाल वे सभी अपने-अपने घरों में ही बने रहें।”

कल (27 मार्च) को ही कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने सभी राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों से कहा था कि बीते 18 जनवरी से 23 मार्च के बीच 15 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री भारत आए हैं। इनकी सही प्रकार से निगरानी की जानी चाहिए थी। किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि जितने यात्रियों की निगरानी अपेक्षित थी और जितनों की मॉनिटरिंग की गई उस के बीच एक बड़ा फासला रह गया है, जो कोरोना महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को काफी क्षति पहुँचा सकता है।

उन्होंने राज्य सरकारों से यह भी कहा था कि भारत में बाहर से आने वाली कॉमर्शियल फ्लाइट्स पर बैन लगाने के पहले जितने अंतरराष्ट्रीय यात्री बाहर से आए थे उनकी मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए। मीडिया के अनुसार ये पहली बार नहीं है कि केंद्र ने राज्यों को उन भारतीय तथा गैर भारतीय लोगों पर निगाह रखने को कहा है जो बीते दिनों बाहर से आए हैं।

विदेश से आने वाले लोगों द्वारा क्वारंटाइन होने से बचने के लिए गड़बड़ी करने के कई मामले सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूपी के 37 लोगों का एक दल जब मक्का से मुंबई एयरपोर्ट पर उतरा तो उन्हें क्वारंटाइन की मुहर लगाई गई थी। लेकिन, इनलोगों ने बाद में एक विशेष इत्र के जरिए मुहर मिटा दी और ट्रेन तथा बसों के जरिए अपने घर पहुॅंच गए ताकि जॉंच से बच सकें। ट्रैवल हिस्ट्री छिपाने के कई मामले कश्मीर से भी सामने आए हैं। मीडिया में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि विदेशों से आने वाले कुछ यात्री कोरोना संक्रमण छिपाने के लिए की जाने वाली थर्मल जाँच से पहले पैरासिटामॉल ले रहे थे। जानकारों के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज का यह बर्ताव न सिर्फ उनके खुद के लिए बल्कि सारे समाज और देश के लिए बेहद खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार 28 मार्च की शाम तक भारत में 819 कोरोना पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। इनमें से 19 की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 79 स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। वहीं दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के मरीजों का आँकड़ा 6 लाख पार कर चुका है। इसमें से 27,000 से ज्यादा की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 1.30 लाख से ज्यादा कोरोना के मरीज संक्रमण से ठीक होकर घर जा चुके हैं।