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वृन्दावन-कन्याकुमारी बोल के निकले… और मजे किए थाईलैंड में! कोरोना के कारण पकड़े गए, 42 घरों में झोटम-झोटी

कोरोना महामारी भिन्न-भिन्न प्रकार के लोगों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्या ले कर आई है। इन लॉकडाउन और क्वारन्टाइन जैसे शब्दों और प्रक्रियाओं ने जहाँ कुछ लोगों के सामने जीवन की आधारभूत जरूरतों जैसे रोजी-रोटी और छत का संकट पैदा किया है तो कुछ की रंगीन मिजाजी को सरेआम कर दिया है।

इसका सटीक उदाहरण हिंदुस्तान दैनिक के कानपुर संस्करण की एक खबर है, जो सोशल मीडिया में वायरल हो रखी है। इस रिपोर्ट के अनुसार जब स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने विदेश घूम कर आए लोगों की लिस्ट बना उनका चेकअप और होम क्वारन्टाइन करने की प्रक्रिया शुरू की तो कई घरों में हड़कंप मच गया। असल में बहुत सारे लोगों ने घर वालों से, अपनी पत्नियों से छुपा कर थाईलैंड में मौज-मस्ती की, फुकेट, पटाया और बैंकॉक में कइयों की शामें रंगीन हुईं। अब जब उनकी ट्रेवल हिस्ट्री इस कोरोना के कारण बाहर आ गई है तो घरों में क्लेश चालू है।

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब तक ऐसे 827 लोगों की ट्रेवल हिस्ट्री निकाल चुका है, जो 14 फरवरी के बाद विदेश घूमने गए थे। इनमें से भी आधे होली के दौरान विदेश जा मौज मस्ती कर के आने वाले हैं। 42 लोग ऐसे हैं, जो मुम्बई और कन्याकुमारी के बहाने थाईलैंड घूम कर चुपचाप घर आए थे, अब तक बात छुपा रखे थे। इन छुपे रुस्तमों के ये रंगीन कारनामे देख घरों में अब सिर फुटौव्वल की नौबत आनी ही थी।

हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर

कुछ का ‘बिजनेस टूर’ जहाँ बैंकॉक पटाया और मकाऊ में पूरा हुआ तो कुछ वृन्दावन को दिल में याद करते फुकेट उड़ लिए। रिपोर्ट के अनुसार कानपुर शहर के बिरहाना रोड और जनरलगंज के तीन व्यापारी कृष्ण जन्मस्थली व लीला स्थली के दर्शन का बहाना कर खुद ही फुकेट में लीला करते पकड़े गए हैं। अब घरों में कोरोना से ज्यादा उनके कारनामों की चर्चा है। ऐसा ही एक किस्सा निकल कर आया है सिविल लाइन्स क्षेत्र के 55 वर्षीय एक व्यापारी का। ‘एज इज जस्ट अ नंबर’ को चरितार्थ ऐसे ही लोग करते हैं शायद! इन सज्जन ने 14 फरवरी की शाम बैंकॉक में गुजारी, जबकि घर से 5 दिन के कोच्चि बिजनस टूर के साथ कन्याकुमारी के दर्शन कह कर निकले थे। अब मालुम पड़ा कि दर्शन कहीं और ही कर रहे थे शायद! सुनने में आ रहा है कि अब ये महाशय अपने सिर के बचे खुचे बाल पत्नी से बचाने में व्यस्त हैं, जो इनके बाल नोंच लेने पर आमादा हैं!

किराना बाजार के दो व्यापारी तो और ही गुरु निकलें हैं, जो पिछले सालों में थाईलैंड के साथ-साथ कजाखस्तान के भी दो राउंड लेकर बैठे हैं। बताते चलें कि कजाखस्तान पूर्व के सोवियत संघ के टूटने से बना एक देश है, जो अपनी खूबसूरत स्त्रियों और रोमांटिक माहौल के लिए विख्यात है। कोरोना के चक्कर में ट्रेवल हिस्ट्री खुलने से, अब तक मौनी बाबा बने घूमते इन लोगों की भी शामत आ रखी है। शादी टूटने और तलाक की नौबत सिर पर है।

रिपोर्ट के अनुसार घरवालों का गुस्सा इनके ट्रेवल ऑपरेटर्स पर भी निकल रहा है, जो बेचारे कहते घूम रहे हैं कि हमारा क्या दोष है इसमें जब आपके पति को ही भजन-कीर्तन करने थाईलैंड जाना था!

दिल्ली को और झटके मत दीजिए केजरीवाल जी! ताहिर, शाहरुख़ और शरजील अभी भी लोगों के जेहन में हैं

सबसे पहले तो जानते हैं कि दिल्ली में क्या हुआ। जैसा कि आरोप है, अरविन्द केजरीवाल ने कई बसों में मजदूरों को भर के उन्हें दिल्ली बॉर्डर तक छोड़ दिया। वहाँ उन्हें भगवान भरोसे ढाह दिया गया। कपिल मिश्रा ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें अनाउंस किया जा रहा है कि मजदूरों को बसों से आनंद विहार छोड़ा जाएगा। यहाँ हमारा सवाल ये है कि अगर 23-24 मार्च को ही मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने घोषणा की थी कि दिल्ली में बसें नहीं चलेंगी, फिर रातोंरात उन्हें क्यों चलाया गया? आख़िर बिना किसी सार्वजनिक घोषणा किए बसों को अचानक से सक्रिय कर दिया गया, किसके आदेश पर?

घटना का दूसरा पहलू सामने आता है राजेंद्र नगर के आम आदमी पार्टी विधायक राघव चड्ढा के बयान से। चड्ढा ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली से लौटे मजदूरों को दौड़ा-दौड़ा कर पिटवा रहे हैं और उनसे पूछा जा रहा है कि वो दिल्ली क्यों गए थे? क्या बिना किसी सबूत के ये आरोप मानने लायक है? योगी छोड़िए, किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री मजदूरों पर बिना मतलब लाठी क्यों चलवाएगा, वो भी इस विकट परिस्थिति में? चड्ढा ने ये भी आरोप लगाया कि सीएम योगी उन मजदूरों को धमका रहे हैं कि वो दोबारा दिल्ली न जाएँ।

हम सबने देखा है कि योगी आदित्यनाथ किस तरह लगातार जनता के लिए समुचित व्यवस्थाएँ करने में प्रयासरत हैं, ताकि लॉकडाउन के दौरान किसी को कोई परेशानी न हो। वो रात में जाग कर ज़रूरी सामग्रियों के वितरण का निरीक्षण कर रहे हैं और लोगों के घरों तक चीजें पहुँचाई जा रही हैं। कमजोर आय वर्ग के श्रमजीवी जनों के भोजन के लिए ‘कम्युनिटी किचन’ प्रारंभ किए गए हैं। लखनऊ में हॉस्पिटलों का दौरा कर उन्होंने ख़ुद तैयारियों का निरीक्षण किया। 12 राज्यों में नोडल अधिकारी तैनात किए गए, ताकि यूपी के लोगों को अन्य राज्यों में कोई समस्या न हो।

ऐसे में क्या मजदूरों को दिल्ली-यूपी सीमा पर छोड़ने वाले अरविन्द केजरीवाल ने यूपी सीएम से बात की? संकट के इस माहौल में जब सभी दलों को मिलजुल कर और सभी राज्यों को समन्वय बना कर काम करना चाहिए (जैसा कि अधिकांश मामलों में हो ही रहा है), केजरीवाल की पार्टी के नेताओं द्वारा आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू कर देना भारत में इटली जैसा माहौल पैदा कर सकता है। मनीष सिसोदिया का बयान भी काफ़ी विरोधाभाषी है। एक तरफ़ उन्होंने कहा कि जो जहाँ है वहीं रहे, दूसरी तरफ उन्होंने बसों का इंतजाम करने की भी बात कही। आख़िर केजरीवाल सरकार अपने ही लॉकडाउन के आदेश पर अमल क्यों नहीं कर रही?

विपक्षी राजनीति के स्तर का इस तरह गिरने के पीछे एक और कारण ये हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संकट की परिस्थिति में देश के एक कमांडर की तरह नेतृत्व कर रहे हैं। सार्क देशों ने भी उन्हें ध्यान से सुना। ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाईजेशन’ उनसे प्रभावित है। कई देशों के अध्यक्ष उनकी नेतृत्व क्षमता की तारीफ कर चुके हैं। उनके एक इशारे पर लोगों ने जनता कर्फ्यू’ के दौरान ख़ुद को घरों में बंद रखा। उन्होंने जिस सम्बोधन में लॉकडाउन की घोषणा की, वो सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रमों में से एक बन गया। इसका अर्थ है कि लोग उन्हें सुनते हैं और उनका कहा मानते हैं। फिर मजदूरों को किसने भड़काया?

आरोप लगाया गया है कि दिल्ली सरकार ने इन मजदूरों के घरों का बिजली-पानी कनेक्शन काट लिया, जिससे वो दिल्ली छोड़ने को विवश हुए। दिल्ली में राजस्थान के भी मजदूर रहते हैं। उत्तर प्रदेश के ईंट-भट्ठे के कारोबार में छत्तीसगढ़ के न जाने कितने ही मजदूर हैं। इन सबका पलायन क्यों नहीं हुआ? सिर्फ़ यूपी-बिहार के मजदूर ही क्यों घर से निकलने को विवश हुए? जिस तरह सीएम योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाया गया, उससे तो यही लगता है कि इस घड़ी में भी हिटजॉब की राजनीति चल रही है, जो देश के लिए सही नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में जनसमर्थन देख कर विपक्ष अब उन पर सीधा हमला करने से बच रहा है। इसीलिए दूसरे नेताओं को चुन कर निशाना बनाया जा रहा है। इसी क्रम में राघव चड्ढा जैसे नेताओं ने सीएम योगी पर वार किया लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ क्योंकि यूपी में मजदूरों के रहने और खाने-पीने के साथ उनके मेडिकल टेस्ट व स्क्रीनिंग की भी समुचित व्यवस्था कराई गई। मनीष सिसोदिया मजदूरों से मिलने पहुँचे थे लेकिन उन्होंने इस सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा कि क्या उनके मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद ही राज्य से बाहर भेजा जा रहा है या सब कुछ यूपी सरकार पर ही छोड़ दिया गया है?

भारत में अब तक कोरोना वायरस का प्रकोप तुलनात्मक रूप से नियंत्रण में है। अब तक 1050 लोगों को इसका संक्रमण हुआ है, जिनमें से 86 ठीक हो गए हैं और 27 की मृत्यु हो गई है। अभी कुल 937 सक्रिय मामले हैं, जिनका इलाज जारी है। पीएम मोदी ने भी ‘मन की बात’ में कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और इस संक्रमण से उबरे लोगों से बातचीत कर उनका अनुभव दुनिया के सामने रखा। ऐसे समय में सभी नेताओं को अपने-अपने प्रदेशों में कुछ ऐसा ही करना चाहिए, जिससे सकारात्मकता से चीजे आगे बढ़े, नकारात्मकता न फैले। लेकिन, कुछ नेता इसके उलट काम कर रहे हैं।

दिल्ली अभी-अभी हिन्दू-विरोधी दंगों से उबरी है। सड़क पर पिस्टल लहरा कर गोलीबारी करते शाहरुख़ को देश भुला नहीं है। शरजील इमाम और वारिस पठान जैसे नेताओं के बयान अभी भी जेहन में हैं। फैसल फ़ारूक़ के स्कूल को दंगाइयों द्वारा अटैक बेस बनाया जाना याद ही होगा। ताहिर हुसैन ने अपने हजारों लोगों के साथ मिल कर जो कत्लेआम मचाया, उसकी जाँच जारी है। अमानतुल्लाह ख़ान ने जिस तरह दंगाइयों का बचाव किया, वो सभी को पता ही है। ऐसे माहौल में कोरोना के आने से जनता पर क्या बीत रही है, ये सोचा जा सकता है। अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप्प है। दिल्ली को लगातार दो बड़े झटके लगे हैं, शाहीन बाग़ के बाद।

अभी ज़रूरत है संवेदनशीलता से काम करने की। तब भी कुछ नेता पीएम मोदी पर हमले से बचते हुए भाजपा के अन्य नेताओं पर किसी न किसी तरह निशाना साध रहे हैं। भाजयुमो और संघ के कर्मठ कार्यकर्ता लोगों तक राशन-पानी और राहत पहुँचाने में लगे हुए हैं। हो सकता है सरकार की कुछ कमियाँ हों लेकिन इसे लेकर सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक आरोप-प्रत्यारोप करने का समय अभी नहीं है। अभी समय है जनता की समस्याओं को सुनने का, लॉकडाउन में जिन्हें परेशानी हो रही है उनकी समस्याएँ दूर करने का। हारे हुए नेता तजिंदर बग्गा और कपिल मिश्रा से काफ़ी कुछ सीखा जा सकता है।

जिन्हें नहीं मिला दिल्ली में आसरा, उनके रहने-खाने के लिए योगी सरकार द्वारा यमुना एक्सप्रेस वे टाउनशिप का अधिग्रहण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस के कारण घोषित लॉकडाउन के दौरान जिस नेतृत्व का उदाहरण दिया है, वह आने वाले समय के लिए और समकालीन नेताओं के लिए उदाहरण बनने जा रहा है। आज ही योगी सरकार ने जेपी स्पोर्ट्स सिटी यमुना एक्सप्रेस वे टाउनशीप का अधिग्रहण करते हुए फैसला लिया है कि इसे प्रवासियों के शेल्टर होम के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही रहने-खाने और चिकित्सकीय सुविधाओं का भी इंतजाम किया जाएगा। इस विकराल समस्या को देखते हुए यमुना एक्सप्रेस-वे को टोल फ्री कर दिया गया है।

योगी सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब दिल्ली में रहने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के लोग बड़ी संख्या में अपने घरों की ओर पलायन कर रहे हैं। कुछ लोगों ने अपने घर पहुँचने के बाद यह भी खुलासा किया कि किस प्रकार से 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली में उनके घरों में बिजली-पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। इसके बाद केजरीवाल सरकार को लगातार घेरा जा रहा है।

दरअसल, दिल्ली में डीटीसी बसों में बिठा कर भारी संख्या में लोगों को यह कहकर बॉर्डर पर छोड़ दिया गया कि वहाँ से उन्हें घर ले जाने के प्रबंध किए गए हैं जबकि ऐसा कुछ भी प्रबंध दिल्ली सरकार द्वारा नहीं किया गया था। इसका नतीजा यह हुआ कि लॉकडाउन के बावजूद बड़ा जनसैलाब दिल्ली के आनंद विहार में इकट्ठा हो गया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फैसला लिया कि बॉर्डर इलाकों में एक लाख प्रवासी लोगों के रहने की व्यवस्था की जाएगी।

कोरोना वायरस को लेकर देशभर में घोषित लॉकडाउन में कामगारों और मजदूरों के सामने बेरोजगारी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार इन मजदूरों के लिए एक के बाद एक बड़े और त्वरित फैसले ले रही है।

एक अन्य आदेश में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि प्रदेश भर में अब कोई भी मकान मालिक किसी भी कामगार या मजदूर से किराया (लॉकडाउन की अवधि तक किराए की माँग नहीं करनी है) नहीं लेगा। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने इस बात की जानकारी दी है।

वहीं, लॉकडाउन के दौरान यमुना एक्सप्रेसवे को टोल फ्री कर दिया गया है। यमुना अथॉरिटी के अधिकारियों का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे के टोल फ्री रहने से आवश्यक वस्तुएँ और आपातकालीन सुविधा मिलने में आसानी होगी। फल, सब्जी, दूध और अन्य खाद्य सामग्री की ढुलाई करने वाले वाहनों से टोल नहीं वसूले जाने पर जरूरी चीजों की कीमतों को नियंत्रित करने में आसानी होगी।

कोरोना के शक में परिवार के नाम चिट्ठी लिखकर खुद को लगाई फाँसी, पोस्टमॉर्टम में निकला निगेटिव

कोरोना को लेकर लोगों के मन में डर किस हद तक घर कर सकता है, ये कर्नाटक में उडुपी जिले में हुई एक घटना से समझ सकते हैं। यहाँ एक शख्स ने कोरोना संक्रमण होने की आशंका के चलते खुदकुशी कर ली। हालाँकि बाद में यह बात सामने आई कि वह संक्रमित नहीं था, उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। 

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, उडुपी में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमॉर्टम टेस्ट रिपोर्ट से पता चला है कि शख्स कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं था। साथ ही उस इलाके में रह रहे लोगों से कहा है कि उन्हें घबराने की जरुरत नहीं है। गोपालकृष्ण मड़ीवाला (56) ने खुद को फाँसी लगा ली थी क्योंकि उन्हें यह शक था कि वह कोरोना वायरस की चपेट में आ गए हैं। मरने से पहले उन्होंने एक चिट्ठी भी लिखी है, जिसमें उन्होंने अपने परिवार से सुरक्षित रहने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि दुनिया भर में अब तक छह लाख से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं जबकी मरने वालों की संख्या 30,000 के पार हो चुकी है। वहीं, भारत में कोविड-19 के मामलों की संख्या 979 से अधिक हो चुकी है और वायरस के संक्रमण के कारण अब तक 25 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी है।

भारत में 22 राज्यों के 75 ज़िलों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें से महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित हैं। फिलहाल कोरोवा वायरस के प्रसार को कम करने के लिए सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया है ताकि, ये राज्यों में तेजी से ना फैल सके। 

संवेदनशील इलाके में जाँच करने गए डॉक्टर्स पर थूकने के साथ गाली-गलौच, लोगों ने कहा- ‘अब थूक जिहाद शुरू’

कोरोना COVID-19 की लड़ाई में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ सहित चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी दिन-रात इस वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज करने में जुटे हैं। लेकिन समाज के एक वर्ग ने मानो ठान रखी है कि वो मुश्किल से मुश्किल समय में भी व्यवस्था और सरकार के खिलाफ ही रहेगा। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो को देखने के बाद काफी लोगों की यही राय सामने आ रही है।

सोशल मीडिया पर जो वीडियो शेयर किया जा रहा है, उसमें डॉक्टर्स को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वहाँ के लोग उनका सहयोग नहीं कर रहे हैं और उन पर थूक रहे हैं।

संयम जैन ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “इंदौर के रानीपुरा इलाके में जहाँ से सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, वहाँ पर ‘मुसलमान’ लोग बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। सहयोग करने की बजाय चेक करने गए डॉक्टर की टीम के साथ गली गलौच और उन पर थूक रहे है… अब इन्होंने ‘थूक जिहाद’ फैलाना शुरू कर दिया है।”

विडियो में डॉक्टर को पुलिस से कहते हुए सुना जा सकता है कि वहाँ एक लेडी है, जिसका बेटा फैजान थूक रहा है। जब डॉक्टर ने उसे मना किया तो ऊपर से गाली देने लगी और कहा कि वो डॉक्टर की वर्दी उतरवा देंगे। हालाँकि ऑपइंडिया इस ट्वीट में किए गए दावों की पुष्टि नहीं करता है लेकिन इस वीडियो में डॉक्टर द्वारा कही जा रही बातों को आप सुन सकते हैं।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, रानीपुरा, निपानिया, खातीवाला टैंक, चंदननगर और खजराना के तीन किलोमीटर के हिस्से को पुलिस-प्रशासन ने पूरी तरह सील कर दिया है और वहाँ रहने वालों की जाँच के साथ ही सेनिटाइजर्स का छिड़काव किया जा रहा है। लेकिन रविवार को स्क्रीनिंग के लिए रानीपुरा इलाके में पहुँची एक टीम के साथ स्थानीय लोगों ने बदसलूकी की और टीम के सामने ही मुँह में पानी भरकर उनके ऊपर जूठा पानी फेंका गया और थूका गया। यही नहीं, जाँच टीम द्वारा उन्हें समझाने पर उनके साथ गाली-गलौज भी की गई। विडियो में देखा जा सकता है कि डॉक्टर्स की टीम वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों से इसकी शिकायत कर रही है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के रानीपुरा और इससे लगे इलाकों में कोरोना वायरस से संक्रमित ज्यादा मरीज मिलने से प्रशासन चिंतित है। जिस कारण रानीपुरा को लेकर प्रशासन ने सख्त निर्णय लेते हुए वहाँ आने-जाने के सभी रास्ते बंद करने का फैसला लिया है। हालाँकि, लोगों की सुविधा के लिए अत्यावश्यक चीजों की होम डिलिवरी किए जाने का भी फैसला लिया गया है और जिन इलाकों में कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं, शहर के ऐसे 11 इलाकों को प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन बनाया है। इनमें रानीपुरा भी शामिल है। शहर में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 24 हो गई है, इनमें से इंदौर और उज्जैन के एक-एक मरीज की मौत हो चुकी है।

देशभर में कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोगों को लॉकडाउन के ऐलान के बाद भी मनमर्जी करते हुए और शासन-व्यवस्था के साथ सहयोग ना करते हुए देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, रविवार को ही अपने ‘मन की बात’ रेडियो प्रसारण में कहा कि लोगों को अव्यवस्था जरूर हो रही है, लेकिन यह हम सबके लिए है और हमें सहयोग करना चाहिए।

हरम की 20 लड़कियों के साथ थाईलैंड के रंगीन मिजाज राजा ‘सेल्फ आइसोलेशन’ में, 4 बीवियों का पता नहीं

जहाँ एक तरफ ज्यादातर दुनिया सेल्फ आइसोलेशन में पड़े-पड़े बोर हो रही है, तो कहीं किसी के लिए यह जीवन को और रंगीन कर देने का एक सही अवसर लाया है। सेल्फ आइसोलेशन हो तो ऐसा हो, जिसमें आप अपने देश से दूर कहीं किसी शानदार होटेल को बुक कर अपनी सहवासनियों (ऐसी स्त्रियाँ जिनका आपके साथ शारीरिक संबध तो होता है लेकिन वैवाहिक नहीं) को ले सेल्फ आइसोलेशन में चले जाएँ। जहाँ कोई आपको नाहक परेशान करने वाला न हो, फिजूल की धमाचौकड़ी न हो, कोई स्ट्रेस न हो, इससे बेहतर जीवन रस कहाँ होगा किसी रसिक मिजाज के लिए!

पढ़ते हुए आपको लग सकता है कि लिखने वाला शायद अपने घर में बंद पड़े-पड़े, अपनी अधूरी फंतासियों के महल बनाने में लगा है। तो आपको बता दूँ कि आखिर सबकी जिंदगी में सेल्फ आइसोलेशन का मतलब घर में घुसे-घुसे दाल रोटी सब्जी खाना, बर्तन धोना, लैपटॉप में किटपिट-किटपिट करते रहने तक ही सीमित नहीं होता। दुनिया में आज भी राजे महाराजे जिन्दा हैं, ख़ुशहाल हैं और बाकायदा हरम रखने वाले हैं।

मैं बात कर रहा हूँ थाईलैंड के किंग की, जो न्यूज़ रिपोर्ट्स के अनुसार दक्षिणी जर्मनी के शानदार व भव्य होटेल में अपनी 20 सहवासनियों के साथ सेल्फ आइसोलेट हैं। माना जा रहा है कि थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोरन जिन्हें रामा ‘दशम’ के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने हरम के साथ सेल्फ आइसोलेशन में जाने के लिए बवेरिया के शानदार होटेल सोनेनबिचल को पूरा बुक किया हुआ है।

जर्मन टेबलायड बिल्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 67 साल के थाई राजा ने स्थानीय डिस्ट्रिक्ट कॉउन्सिल की आज्ञा लेने के बाद इस पूरे होटेल को बुक कर लिया है। अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि थाई राजा की चारों पत्नियाँ उनके साथ इस आइसोलेशन में हैं या नहीं।

बताते चलें कि थाई किंग के लिए जर्मनी दूसरे घर की तरह है, जहाँ वह अपना अधिकतर समय बिताते हैं। थाई किंग फरवरी के बाद से अपने मूल देश में पब्लिक के बीच नहीं देखे गए हैं। हालाँकि थाई किंग का यह “आइसोलेशन” उनकी साधारण प्रजा को बिल्कुल नहीं सुहाया, जिसने राजा की आलोचना करने पर तयशुदा 15 सालों की कैद को भी नजरअंदाज कर ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लगातार अपना गुस्सा जाहिर किया। जिस कारण 24 घंटे के भीतर “व्हाई वी नीड अ किंग” 12 लाख बार ट्ववीट किया गया।

थाई किंग के इस सेल्फ आइसोलेशन की खबर से पहले मलेशिया के राजा और रानी के सेल्फ क्वारन्टाइन में जाने की रिपोर्ट आई थी। रिपोर्ट के अनुसार मलेशिया के राजमहल के 7 सदस्यों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद, राजा और रानी को सेल्फ क्वारन्टाइन में रखा गया है। हालाँकि दोनों के टेस्ट्स निगेटिव आए हैं, पर सावधानी बरतते हुए उन्हें 14 दिनों के लिए आयसोलेट किया गया है।

सनकी शासकों से अभिशप्त रही ढिल्लिका: ‘तुगलक’ केजरीवाल के कारण लंदन की जगह वुहान बनने के कगार पर

दिल्ली की हवाओं और पानी की तासीर में ऐसी जरूर कोई बेग़ैरती है कि उसके हिस्से अक्सर धूर्त, बर्बर और विखंडनकारी शासक आए। एक बड़े समय तक यह ढिल्लिका इस्लामिक आक्रांताओं और औपनिवेशिक राज का गवाह बनी, लेकिन इसके बाद भी इसके भाग्य में सुकून नहीं था। जब तक इतिहासकार अपनी राय बदलते, 2013 में एक ऐसा समय आया जब दोबारा दिल्ली में धूर्त और कपट से लोगों की भावनाओं से छल कर के एक इंसान ने सत्ता को हथिया लिया और यह क्रम जारी रखा।

दिल्ली इस बार इस अति महत्वाकांक्षी शासक के हाथों बर्बाद होने के कगार पर खड़ी है। कल शाम दिल्ली के आनंद विहार की जो तस्वीरें सामने आई हैं, कम से कम उन्हें देखने के बाद तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तुलना मध्यकालीन भारत के इतिहास के बर्बर मुस्लिम आक्रांताओं से करने में कोई झिझक नहीं हो सकती है। लेकिन केजरीवाल ने गरीब लोगों को बिना व्यवस्था के बॉर्डर पर छोड़ आने का जो ऐतिहासिक कांड इस बार किया है, उससे उनकी तुलनाओं का दायरा और बड़ हो जाता है।

कारण यह है कि पूरे विश्व के मानचित्र पर अपने पैर पसार चुके जिस चाइनीज कोरोना वायरस की महामारी के लिए चीन के शी जिनपिंग को कई लोग अपराधी मान रहे हैं तो वहीं दिल्ली में रोजगार के लिए गए हुए UP-बिहार के कामगारों के साथ धोखा कर उनकी जिंदगी को खतरे में डालने के लिए अरविंद केरजीवाल और उनकी ही सरकार के विधायक राघव चड्ढा जैसे लोग अपराधी हैं।

मुफ्त बिजली और पानी का सपना दिखाकर दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने वाली अरविंद केजरीवाल सरकार की संवेदनहीनता और उनकी जनता के प्रति जवाबदेही की हकीकत कोरोना की महामारी के दौरान सामने आ गई है।

चुनाव जीतने के समय अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को लंदन बनाने की बात कही थी लेकिन प्रतीत होता है कि लंदन से पहले केजरीवाल पूरे भारत को ही चीन के वुहान प्रान्त में तब्दील करने की योजना बना चुके हैं। खास बात यह है कि पहले जहाँ वो अपनी नाकामयाबी के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया करते थे, इस बार उन्होंने कोरोना वायरस में दिल्ली सरकार के इंतजाम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को दोषी ठहराने का फैसला कर लिया है।

आनंद विहार में अपने घर जाने के लिए उमड़ी इस भीड़ से किस स्तर की त्रासदी जन्म ले सकती है, इसका हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं, और उससे भी बड़ी बात यह है कि घर जाने की उम्मीद लगाए बैठे ये लोग किस मानसिक तनाव से गुजर रहे होंगे।

केजरीवाल की इस योजना में उनका साथ देने के लिए देश की मीडिया का वह ‘आदर्श लिबरल’ गिरोह तो हमेशा से ही उनके साथ खड़ा रहा है। दी क्विंट जैसे प्रपंचकारियों ने कल रात केजरीवाल सरकार के MLA राघव चड्ढा का धूर्त चेहरा सामने आते ही यह कोशिशें शुरू भी कर दी और निरंतर यह साबित करने का प्रयास कर रहा है कि दिल्ली के आनंद विहार में जमा UP-बिहार के कामगारों की यह भीड़, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कहने पर वहाँ जमा हुई थी।

वास्तव में हक़ीक़त यह है कि लॉकडाउन के दौरान जिस विराट स्वरूप का प्रदर्शन योगी आदित्यनाथ ने किया है, वह पूरे देश के नेताओं और नीति निर्माताओं के लिए आदर्श है। 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद सबसे पहले योगी आदित्यनाथ ने ही गरीबों के लिए सरकारी खजाने खोले। यहाँ तक कि कल रात ही दिल्ली से UP की ओर पलायन कर रहे लोगों को कोई समस्या न हो, इसके लिए 1 लाख लोगों के आइसोलेशन का बॉर्डर पर ही इंतजाम की घोषणा कर दी है। योगी आदित्यनाथ की तत्परता और सेवाभाव के सामने अरविंद केजरीवाल कितने बौने साबित हो चुके हैं!

21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली और नजदीकी इलाकों से लोग उत्तर प्रदेश और अपने गृह राज्य की तरफ पैदल निकलने लगे हैं। दिल्ली से उत्तर प्रदेश पहुँचे इन लोगों ने बताया कि दिल्ली सरकार ने बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए, और लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन, दूध नहीं मिला। भूखे लोग सड़कों पर उतरे। यहाँ तक कि दिल्ली सरकार के अधिकारी बक़ायदा एनाउंसमेंट कर अफ़वाह फैलाते रहे कि यूपी बार्डर पर बसें खड़ी हैं, जो उन्हें यूपी और बिहार ले जाएँगी।

यह अरविंद केजरीवाल बाबा भारती और खड़ग सिंह की कहानी वाला खड़ग सिंह ही है, यह बात देर से ही सही लेकिन खुद केजरीवाल साबित करते जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी देखा जा रहा है कि जब सभी बड़े और छोटे समूह गरीब लोगों को होने वाली अव्यवस्थाओं में उनकी मदद करने का प्रयास कर रहे हैं, उस समय केजरीवाल सरकार के मंत्री और वो मीडिया, जिसने केजरीवाल को गोद में बिठाकर पाला है, सिर्फ और सिर्फ दिल्ली में केजरीवाल सरकार को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं।

ध्यान देने की बात यह है कि जिन लोगों को मुफ्त बिजली-पानी का सपना दिखाकर अरविंद केजरीवाल तीसरी बार सत्ता में लौटे हैं, कोरोना की आपदा में सबसे पहले उन्हीं को बिजली-पानी से वंचित कर उन्हें यह सोचने पर विवश किया गया कि ऐसे में उनके पास अब सिर्फ दिल्ली छोड़कर अपने मूल को लौटना ही एकमात्र विकल्प शेष रह गया है।

उम्मीद है कि कोरोना के कहर पर समस्त देशवासी मिल जुलकर लगाम लगा देंगे, लेकिन कम से कम यह तय है कि अभिशप्त दिल्ली अभी और कई वर्षों तक केजरीवाल जैसे निरंकुश विखंडनकारियों के कपट का शिकार बनती रहेगी।

केरल में भी दिल्ली सा हाल: सड़क पर उतरे हजारों मजदूरों ने कहा- घर जाना है, 3 दिन से भूखे हैं

कोरोना वायरस संकट के बीच लॉकडाउन के चलते केंद्र और राज्य सरकारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। प्रवासी मजदूरों का पलायन और कोरोना वायरस को फैलने से रोकना इस समय सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। देश भर से ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं जिसमें देखा जा सकता है कि प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला केरल के कोट्टयम जिले से सामने आया है। यहाँ सैंकड़ों की संख्या में उत्तर भारत के प्रवासी मजदूर सड़क पर धरना दे रहे हैं। मजदूरों की माँग है कि सरकार उन्हें उनके घर भेजने का पुख्ता इंतजाम करे।

पत्रकार पद्मजा जोशी के मुताबिक यहाँ के प्रवासी मजदूर पिछले 2-3 दिनों से भूखे हैं। उन्हें पिछले 2-3 दिनों से खाना नहीं मिल रहा है। ये मजदूर मूल रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार और छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। यह दिल्ली के बाद दूसरा राज्य है जहाँ राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर एकत्रित हुए हैं। 

जानकारी के मुताबिक केरल के प्रवासी मजदूर दिल्ली सरकार द्वारा राज्य के प्रवासी मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था करते हुए देखने के बाद यहाँ पर एकत्रित हुए। बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार ने प्रवासी मजदूरों को बसों से सीमा के पास ले जाती है और फिर वहाँ उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है। इसके बाद इनमें से अधिकांश मजदूर सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने गाँवों की तरफ पैदल ही निकल पड़े। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब केरल के प्रवासी मजदूर भी अपने गाँवों की तरफ पैदल ही जाने का फैसला किया है।

बता दें कि देश भर में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता ही जा रहा है और अगर स्थितियाँ इसी तरह बनीं रहीं, लॉकडाउन का पालन नहीं हुआ तो परिणाम और भी गंभीर होने की आशंका है। केरल कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला दूसरा राज्य है। यहाँ पर कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 174 है। वहीं सबसे अधिक कोरोना के केस महाराष्ट्र से सामने आए हैं। यहाँ पर कोरोना मरीजों की संख्या 183 है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को देशभर में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की। लॉकडाउन का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से घरों में ही रहने की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि इस खतरनाक वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं खोजा गया है। इसलिए लॉकडाउन और एक-दूसरे से दूरी ही इससे बचाव का उपाय है।

‘चूहा-चमगादड़ हजारों साल से खा रहे चाइनीज, फिर अचानक से यह वायरस कैसे? US-UK-इजरायल की साजिश है यह’

एक देश है। देश क्या, देश के नाम पर मजाक है। नाम है पाकिस्तान। वहाँ के पूर्व विदेश मंत्री कोरोना वायरस संक्रमण पर कुछ अनोखा लेकर आए हैं। वो इसके पीछे एक मूर्खतापूर्ण, हास्यास्पद लेकिन षड्यंत्र भरी थ्योरी लेकर सामने आए हैं। अपनी इस षड्यंत्र थ्योरी में वो अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कोरोना वायरस को अमेरिकी लैब में बना हुआ घोषित करते हैं और दुनिया भर में इसे फ़ैलाने के दोषी चीन को इस मामले में क्लीन चिट देते हैं।

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्लाह हुसैन हरुन, ऐसा लगता है जैसे किसी लम्बे व्हाट्सअप मैसेज को पढ़ते हुए, अपनी फंतासी थ्योरी साझा करते हुए दावा करते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण प्राकृतिक न होकर अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और इजरायल की एक सोची-समझी चाल है, जिन्होंने उभरते हुए चीन को थामने के लिए इसे लैब में ईजाद किया है।

पागलों की तरह एक ही बात की रट लगाए हुए यह आदमी अपनी षड्यंत्र थ्योरी में आगे कहता है कि अमेरिका ने इस वायरस को सीरिया में रसायनिक हथियारों के रूप में प्रयोग करने के लिए ईजाद किया था। वह कहते हैं कि इस वायरस को पैदा करने का उद्देश्य ऐसी बीमारी पैदा करना था, जो विश्व भर में लोगों के दिलों में खौफ भर दे।

हरुन अपने इस दावे की क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहते हैं- इस वायरस का पेटेंट एक अमेरिकी कम्पनी शिरॉन ने अमेरिकी सरकार से 2006 में प्राप्त किया था। 2014 में इसकी वैक्सीन के पेटेंट के लिए उन्होंने यूरोप में अप्लाई किया था। इसका पेटेंट कुछ वर्षों में दे देना चाहिए था जो कि नवंबर 2019 तक नहीं दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रह चुके हरुन अपने अनर्गल प्रलाप को जारी रखते हुए आगे कहते हैं कि इस वायरस की वैक्सीन को इजरायल में बना लिया गया है, जो सिर्फ उन्हीं देशों को यह वैक्सीन देगा जो इजरायल को संप्रभु देश की मान्यता देंगे। हरून इस वायरस के पीछे के कारण पर जोर देते हुआ कहते हैं कि अमेरिका चीन के शक्तिशाली होते जाने से कई वर्षों से बेहद चिंतित था और उसने चीन को रोकने के लिए सारे तरीके आजमा लिए थे, जो अब तक नाकाम ही सिद्ध हुए। अपनी मूर्खतापूर्ण फंतासी को आगे घसीटते हुए वह कहते हैं कि इस वायरस को मेलिंडा और गेट्स फाउंडेशन से फंडेड एक ब्रिटिश लैब में बनाया गया था, जहाँ से इसको अमेरिका के जॉन हॉपकिंस और ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने एयर कनाडा के जरिए वुहान पहुँचाया।

हरुन अपनी मनगढ़ंत कहानी में आगे जोड़ते हैं कि इस वायरस को बनाने में मेलिंडा फाउंडेशन, जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के साथ-साथ वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम तक ने वित्तीय मदद की थी, जिसका सबसे बड़ा फायदा इजरायल को हुआ क्योंकि इसकी वैक्सीन उसी ने बनाई थी।

मजेदार बात यह है कि इनकी बातों को कुछ पाकिस्तानी गंभीरता से लेते देखे गए, जो कहते हैं कि अगर हरुन ने कोई बात कही है तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए। तो वहीं कुछ का मानना है कि अल्लाह इस ‘कुफ़्र’ पर भारी पड़ेगा।

हालाँकि कुछ पाकिस्तानियों ने इस अजीबोगरीब फंतासी पर सवाल भी उठाए हैं। इसके बाद हरुन ने एक नया वीडियो पोस्ट किया और अपने दावों को दोहराया। हरुन ने कहा कि यह वायरस चूहा और चमगादड़ खाने से आया है, से ज्यादा तार्किक है यह स्वीकारना कि यह वायरस लैब में पैदा किया गया है। वह पूछते हैं कि चूहा और चमगादड़ तो चीनी हजारों साल से खा रहे हैं फिर अचानक से यह वायरस कहाँ से आ गया?

इसके अलावा हरुन अपने दूसरे वीडियो में यह भी स्वीकारते हैं कि उन्होंने जो पेटेंट नंबर पहले वीडियो में साझा किया था, वह अमेरिकी रिकॉर्ड में नहीं मिलता और इस तरह खुद ही अपने दावे को झुठलाते नजर आते हैं। हालाँकि वह अपने झूठे प्रोपेगेंडा से तनिक भी पीछे न हटते हुए दावा करते हैं कि पेटेंट नंबर को नवंबर 2019 में कैंसिल कर दिया गया था।

हरुन को लगता था कि उनके इस दावे (यह वायरस चीन की देन नहीं बल्कि पश्चिमी देशों की घृणात्मक करतूत है) को, पाकिस्तान में गंभीरता से लिया जाएगा, लेकिन कुछ मूर्ख और कट्टरपंथी पाकिस्तानियों के अलावा वहाँ की बाकी जनता ने ही उन पर विश्वास नहीं किया। बेचारे हरुन अब अपने देश पाकिस्तान में एक हास्यास्पद वस्तु बनाकर रह गए हैं।

याद रहे कि अब तक पाकिस्तान में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1500 से ऊपर पहुँच गई है। जबकि अमेरिका में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या सवा लाख के लगभग है और जो दुनिया में इस वायरस से संक्रमित लोगों में सबसे ज्यादा है। अमेरिका में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 2200 का आँकड़ा पार कर चुकी है तो वहीं ब्रिटेन में उसके प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत 17000 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं, वहाँ अब तक मरने वालों की संख्या 1000 पार कर गई है।

वायनाड में पादरी, नन समेत 9 गिरफ्तार, लॉकडाउन के बावजूद रविवार की प्रार्थना करने गए थे चर्च

केरल में वायनाड के समीप एक गिरजाघर पादरी को गिरफ्तार किया गया है। लॉकडाउन के बावजूद रविवार को सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित करने को लेकर यह कार्रवाई की गई। पादरी के अलावा दो नन सहित आठ अन्य भी गिरफ्तार किए गए हैं।

कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित किया गया है। लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग इसकी गंभीरता को नकारते हुए मनमर्जी से दैनिक क्रियाकलाप में व्यस्त हैं। ऐसा ही एक मामला केरल की चर्च से सामने आया है।

केरल में वायनाड के समीप एक गिरजाघर (चर्च) के एक पादरी और दो नन समेत नौ अन्य लोगों को लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए रविवार (मार्च 29, 2020) को गिरफ्तार कर लिया गया। मनंथवाडी पुलिस थाने से प्राप्त सूचना के अनुसार, नजदीक के वेमाम के ही मिशनरीज ऑफ फेथ माइनर चर्च के पादरी टॉम जोसेफ, दो नन और सात अन्य पर IPC की धारा 269 (किसी बीमारी को फैलाने के लिए किया गया लापरवाही भरा काम जिससे किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है) और 188 (महामारी के संबंध में सरकारी आदेश न मानना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन लोगों ने आज सुबह धार्मिक सभा में भाग लिया था। उन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए लगाए गए 21 दिनों के लॉकडाउन के बावजूद पलायन को लेकर भी केंद्र सरकार ने सख्ती दिखाई है। केंद्र सरकार ने कहा है कि लॉकडाउन का पालन करवाना जिला मजिस्ट्रेट और एसपी की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार की तरफ से आदेश दिया गया है कि सभी राज्यों और जिलों की सीमाएँ सील कर दी जाएँ और बाहर से आने वाले लोगों को राज्य की सीमाओं पर ही कैंपों में रखा जाए।

बता दें कि आज, रविवार को कोरोना से जम्मू-कश्मीर, गुजरात और महाराष्ट्र में एक-एक लोगों की मौत हो गई। इसी के साथ देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 25 हो गई है।