Home Blog Page 4975

शाहीन बाग: मजमा उठा तो फट पड़ी वायर की आरफा, कहा- आवाज दबाने के लिए प्राकृतिक आपदाओं का इस्तेमाल

सीएए विरोध के नाम पर दिल्ली के शाहीन बाग में शुरू हुआ राजनीतिक धरना करीब 100 दिन बाद दिल्ली पुलिस ने हटा दिया। इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने भले ही राहत की साँस ली हो, लेकिन वामियों और खबर के नाम पर प्रोपेगेंडा चलाने वाले कुछ लोगों के पेट में दर्द शुरू हो गया है। यहाँ तक कि ‘द लायर’ जैसे ग्रुप के लोग ‘इस मौके का इस्तेमाल कर’ शाहीन बाग धरने के हटने पर आँसू बहा रहे हैं। प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर की कथित पत्रकार आरफा ख़ानम ने एक विडियो वीडियो जारी कर आखिरी में प्रार्थना की कि मैं चाहती हूँ कि जल्द ही देशभर में सीएए के खिलाफ आंदोलन शुरू हो और यह तब तक जारी रहे जब तक कि मोदी सरकार इस काले कानून को वापस नहीं ले लेती।

देश में कोरोना महामारी की बढ़ती रफ्तार के बाद दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग की महिलाओं को पहले तो स्थान खाली करने की अपील की। इसके बाद भी धरना स्थल खाली नहीं करने पर पुलिस ने जगह को खाली करा दिया था। मौके से 10 प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया गया था, जिनमें कुछ महिलाएँ भी शामिल थीं। उसी दिन यानी की 24 मार्च को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के संबोधन में रात 12 बजे से लॉकडाउन की घोषणा की थी।

इस मौके का इस्तेमाल करते हुए आरफा ख़ानम ने एक विडियो जारी की। कहा कि सीएए के खिलाफ दर्जनों महिलाओं ने जो धरना शुरू किया था, उसमें पहले सैकड़ों फिर हजारों और बाद में तो लाखों की संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। सीएए को स्वीकार नहीं करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। इसे बाद में दिल्ली पुलिस ने जबरन अलोकतांत्रिक तरीके से हटा दिया। हालाँकि ख़ानम ने यह नहीं बताया कि जिस धरने में कथित तौर पर हजारों, लाखों की भीड़ जुटती थी वह दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद दर्जनों में क्यों सिमट गई? दिल्ली चुनावों के बाद शाहीन बाग लगातार क्यों दम तोड़ता चला गया? इस बात का खुलासा जब इंडिया टीवी की पत्रकार ने लाइव कवरेज में की तो उन पर वहाँ मौजूद प्रदर्शनकारी भड़क गईं थी।

‘द वायर’ की आरफा खानम ने शाहीन बाग की महिलाओं को किया सलाम

चौंकाने वाली बात यह कि जो बीमारी देश में 19 से अधिक और पूरे विश्व में 27, 000 से अधिक लोगों की जान ले चुकी है, जिस महामारी से आज देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व जूझ रहा है और लॉकडाउन जैसे कठिन फैसलों को लेने के लिए मजबूर है, ऐसी बीमारी आरफा को शाहीन बाग हटाने के लिए एक बहाना नजर आई। उसके मुताबिक सरकार ने कोरोना का बहाना लेकर शाहीन बाग की महिलाओं को पुलिस की मदद से जबरन और अलोकतांत्रिक तरीके से हटा दिया। प्रदर्शनकारी महिलाओं को पीड़ित साबित करते हुए कहा कि जिन महिलाओं ने जनता कर्फ्यू का पूरी तरह से पालन किया, उनके प्रदर्शन का गलत तरीके से अंत कर दिया गया।

आरफा ने विडियो में एक कथित प्रत्यक्षदर्शी को पेश किया। उसने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने धरना स्थल को खाली कराने के दौरान महिलाओं के साथ बदसलूकी की। उस निशानी यानी टेंट को भी हटा दिया, जिसके नीचे भारत के झंडे लगे हुए थे। जिसके नीचे लोकतंत्र की बातें होती थीं। इस पर आरफा ने कहा कि प्रदर्शन ने कई सारे इतिहास बनाए। लेकिन आरफा ने यह नहीं बताया कि कितनी बार धरने में जिन्ना वाली आजादी माँगी गई, शरजील जैसे देशद्रोहियों को समर्थन मिला, उल्टा तिरंगा करके महिला को हिजाब पहनाया गया और स्वास्तिक को उल्टा कर दिखाया गया वगैरह। इसके बाद आरफा ने तीन महीनों से धरने पर बैठी महिलाओं को उठाने के बहाने कुछ आँसू बहाए, जब कोई उन्हें पोंछने वाला दिखाई नहीं दिया तो खुद ही पोंछ कर फिर से शाहीन बाग को सलाम करने लगी।

आरफा ने आगे अल्पसंख्यकों का हितैषी बनने की कोशिश करते हुए कहा कि धरने ने पिछले पाँच-छ सालों से बहुसंख्यकवाद की हो रही राजनीति को तोड़ने की एक बेहतर और सफल कोशिश की। इतना ही नहीं शाहीन बाग ने पहली बार मोदी सरकार को जनता की तरफ से बेहतर पुश किया। आरफा ने अपना दर्द बयाँ करते हुए कहा कि तीन महीने से कड़कड़ाती ठंड में बैठी प्रदर्शनकारी महिलाओं से देश के प्रधानमंत्री ने बात तक करना उचित नहीं समझा, जो ट्रिपल तलाक जैसे कानून लाकर मुस्लिम महिलाओं के हमदर्द बनते हैं। आरफा को तीन महीने से प्रदर्शन कर रही महिलाओं का दर्द तो दिखाई दे गया, लेकिन 30 साल से अपने ही देश में शरणार्थी बने कश्मीरी पंडितों का दर्द आज तक दिखाई नहीं दिया, खैर!

आरफा ने आगे अपनी मूर्खता के साथ चाटुकारिता का परिचय देते हुए कहा कि ये जो सीएए का काला कानून है यह देश को बाँटने वाला कानून है। इससे संविधान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। सरकार को तानाशाह करार देते हुए और नीचता की सारी हदों को पार करते हुए कहा कि ऐसी सरकारें आवाजों को दबाने के लिए प्राकृतिक आपदाओं का इस्तेमाल करती है। आखिर में आरफा ने कहा कि शाहीन बाग के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। साथ ही भगवान से प्रार्थना की कि जल्द ही भारत इस महामारी से उभरे और वह चाहती हैं कि फिर से सीएए, एनआरसी के खिलाफ देशभर में आंदोलन शुरू हो। यह तब तक जारी रहे जब तक कि सरकार इसे वापस नहीं ले लेती।

आश्चर्य की बात यह कि आरफा ने एक बार भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि प्रदर्शनकारी महिलाओं ने 100 दिनों तक बिना किसी इजाजत के सड़क जाम कर रखा था। इसके कारण महीनों तक नोएडा आने-जाने वाले लोगों ने भीषण जाम का सामना किया। यहाँ तक कि इस बीच जाम में फँसने से जान भी गई।

कोरोना से जंग: सुपर एक्टिव मोड में PM मोदी, कैबिनेट मंत्रियों को सौंपी जनपदों की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए घोषित देशव्यापी लॉकडाउन को दृष्टिगत रखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 15 मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का दायित्व 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान देश के प्रत्येक हिस्से में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को सुनिश्चित करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोदी ने देश के सभी जनपदों को कवर करते हुए प्रत्येक कैबिनेट मंत्री को न्यूनतम 15 जनपदों की जिम्मेदारी सौंपी है, जो सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन से इस विषय में जानकारी लेता रहेगा तथा तद्नुरूप कार्यवाहियाँ करेगा।

इस उच्च स्तरीय कमेटी के मंत्रियों को देश के प्रत्येक राज्य के प्रत्येक जनपद के डीएम और अधिकारियों से रोजाना बात कर संघ सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के पालन के संबंध में जानकारी जुटानी होगी। जारी गाइडलाइंस के पालन में आने वाली दिक्क्तों को दूर करने के प्रयास करने होंगे। कमेटी की जिम्मेदारी में प्रत्येक जनपद में कोरोना संक्रमित और क्वारन्टाइन में भेजे गए मामलों की जानकारी जुटाना भी शामिल होगा।

यह उच्च स्तरीय कमेटी, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की अध्यक्षता में बने मंत्री समूह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बने इकोनॉमिक टॉस्क फ़ोर्स तथा मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन और नीति आयोग के सदस्य डॉ.विनोद पॉल की संयुक्त अध्यक्षता में साइंटिफिक रिस्पॉन्स के लिए बनाई गई कमेटी के अतिरिक्त है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पास उत्तर प्रदेश के 20 जनपद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास आंध्र के 13 और तमिलनाडु के 9 जनपद, विदेश मंत्री जयशंकर के पास पश्चिम बंगाल के 23 जनपद, परिवहन मंत्री गडकरी के पास मुम्बई समेत महाराष्ट्र के 18 जनपद तथा कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के पास तमिलनाडु के 20 जनपदों का दायित्व है। इसी प्रकार देश के बाकी जनपद, अन्य मंत्रियों के हवाले किए गए हैं।

केंद्र सरकार कोरोना के खिलाफ जारी जंग में प्रत्येक वर्ग का ध्यान रखते हुए लगातार कदम उठा रही है। केंद्र की सरकार ने लॉकडाउन में गरीबों को सहायता करने के उद्देश्य से 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस राहत पैकेज की घोषणा की थी।

आर्थिक पैकेज की राशि का इस्तेमाल 10 करोड़ गरीबों के खाते में सीधे रकम ट्रांसफर करने और उद्योगों को राहत देने के लिए किया जाएगा। साथ ही गरीब वरिष्‍ठ नागरिकों, विधवाएँ और दिव्‍यांगों को तीन महीने तक एक्‍स्‍ट्रा 1,000 रुपए डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए दिया जाएगा। महिला जन-धन खाताधारकों को 500 रुपए की राशि तीन महीने तक जाएगी। इससे 20 करोड़ महिलाओं को लाभ होगा। उज्‍ज्‍वला स्‍कीम के तहत 8 करोड़ से ज्‍यादा बीपीएल महिलाओं को इस कठिन समय में तीन महीने तक एलपीजी सिलेंडर भी मुफ्त में दिया जाएगा।

J&K में कोरोना संक्रमण: एक मजहबी जुटान से जुड़े 11 मामले, 6 सऊदी से लौटे, एक मौलवी की मौत

जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 33 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 13 शनिवार (मार्च 28, 2020) को सामने आए। इनमें से 31 सक्रिय मामले हैं। एक मरीज ठीक हो गया है और एक की मृत्यु हो गई है। जम्मू-कश्मीर के प्लानिंग सचिव रोहित कंसल ने बताया कि सरकार हर एक मामले को ट्रेस करने में लगी हुई है और सभी मरीजों से एक-एक कर संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कश्मीर के 11 मामले एक मजहबी फंक्शन के कारण हुए।

प्लानिंग सचिव ने बताया कि कुल मामलों में से 6 ऐसे हैं, जो सऊदी अरब गए थे। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये मजहबी फंक्शन कहाँ पर हुआ था। पूरे भारत में अब तक कोरोना वायरस के 918 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 79 ठीक हो गए हैं, वहीं 19 की मृत्यु हुई है। फ़िलहाल देश में कुल 819 सक्रिय मामले हैं। इनमें से 108 मामले तो आज ही मिले हैं। दिल्ली से मजदूरों के यूपी-बिहार पलायन से कई लोगों के मन में शंका है कि भारत में हालात और बिगड़ सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर में जिस व्यक्ति की कोरोना वायरस के कारण मौत हुई है, वो भी मजहबी प्रचारक ही था। 65 वर्षीय मौलवी की मौत श्रीनगर चेस्ट हॉस्पिटल में हुई। जिस मजहबी कार्यक्रम की बात प्लानिंग सचिव कर रहे थे, उसमें ये मौलवी भी उपस्थित था। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि वो जाँच में सहयोग भी नहीं कर रहा था। उसने स्क्रीनिंग के लिए भी इनकार कर दिया था। पुलिस अन्य मरीजों को ट्रेस करने में लगी हुई है।

कोरोना से लड़ने के लिए BCCI ने दिए ₹51 करोड़: सौरव गांगुली और जय शाह ने किया ऐलान

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने प्रधानमंत्री राहत कोष में कोरोना से लड़ने के लिए 51 करोड़ रुपए दिए हैं। बीसीसीआई के अध्यक्ष गांगुली और सचिव जय शाह ने इसका ऐलान किया। बीसीसीआई ने यह रकम ‘प्राइम मिनिस्टर सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सीचुएशन्स फण्ड’ में दिया है। इससे पहले सचिन तेंदुलकर और सुरेश रैना सहित कई खिलाड़ी सहायता का ऐलान कर चुके हैं। इसके बाद सभी की निगाहें बीसीसीआई की तरफ़ टिकी हुई थी।

नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर ‘पीएम केयर्स फण्ड’ को लेकर जानकारी साझा की थी और लोगों से आह्वान किया था कि इस विकट परिस्थिति में वे क्षमतानुसार वित्तीय सहयोग करें। पीएम मोदी ने बताया था कि इस फंड में माइक्रो-डोनेशंस, अर्थात छोटी राशि भी डाली जा सकती है। उन्होंने बताया कि इससे भारत की ‘आपदा प्रबंधन क्षमताओं’ को मज़बूती मिलेगी। इससे नागरिकों को बचाने और इस क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने अपील करते हुए कहा कि हम सबको एक स्वस्थ भारत बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए, ताकि अगला जनरेशन ज्यादा समृद्ध और स्वस्थ हो। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद छात्रों से लेकर सेलिब्रिटीज तक ने रुपए डोनेट किए।

विदेश से पंजाब आए 1330 लोगों को तलाश रही सरकार, क्वारंटाइन से बचने के लिए गायब होने का अंदेशा

पिछले दो महीनों में बाहर से आए 55,000 लोगों में से 1,330 को ट्रेस कर पाने में पंजाब सरकार असफल रही है। पता चला है कि इन लोगों ने क्वारन्टाइन के संबंध में दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लापता 1,330 लोगों में जालंधर (ग्रामीण) से 204, लुधियाना से 172, मोहाली के 128, गुरदासपुर के 118, बटाला और अमृतसर (ग्रामीण) से 84-84 और होशियारपुर के 63 लोग शामिल हैं। राज्य के गृह विभाग ने अब फिर से सभी डिविजनल, डिप्टी और पुलिस कमिश्नरों को उन सभी लोगों को ट्रेस करने को कहा है जो राज्य में 30 जनवरी के बाद दाखिल हुए हैं। राज्य सरकार ने इन सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन यात्रियों को ट्रैक करने के लिए जिलों को सेक्टरों में विभाजित कर, प्रत्येक 8-10 गाँवों के लिए एक सेक्शन ऑफिसर नियुक्त करें।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने टेस्टिंग बढ़ा दी है पर विदेशों से लौट कर आए हुए लोग और एनआरआई 14 दिन के होम क्वारन्टाइन से बचने के लिए यहाँ-वहाँ छिपे घूम रहे हैं। उन्हें स्वयं तथा समाज के हित में स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार आचरण करने की जरूरत है।” रिपोर्ट में पंजाब के चीफ सेक्रेटरी करण ए सिंह के हवाले से कहा गया है, “आज की तारीख़ तक राज्य में 48,000 से ज्यादा लोग दूसरे देशों से आए हैं। इनमें से लगभग सभी को ट्रेस कर लिया गया है। सिर्फ उनको अब तक ट्रेस नहीं किया जा सका है जिनके पासपोर्ट में दिया गया पता सही नहीं है।”

चीफ सेक्रेटरी ने आगे कहा, “देश में हम पहले ऐसे राज्य हैं जिसने सभी एनआरआई को ट्रैक किया हुआ है। हमने न केवल ज्यादातर एनआरआई को ट्रैक कर के उन्हें होम क्वारन्टाइन किया है, बल्कि उनसे मिलने वालों को भी आइसोलेट किया गया है। इनमें से कुछ इस कदम से खुश नहीं हैं पर हमने उनसे अपील की है कि फिलहाल वे सभी अपने-अपने घरों में ही बने रहें।”

कल (27 मार्च) को ही कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने सभी राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों से कहा था कि बीते 18 जनवरी से 23 मार्च के बीच 15 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री भारत आए हैं। इनकी सही प्रकार से निगरानी की जानी चाहिए थी। किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि जितने यात्रियों की निगरानी अपेक्षित थी और जितनों की मॉनिटरिंग की गई उस के बीच एक बड़ा फासला रह गया है, जो कोरोना महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को काफी क्षति पहुँचा सकता है।

उन्होंने राज्य सरकारों से यह भी कहा था कि भारत में बाहर से आने वाली कॉमर्शियल फ्लाइट्स पर बैन लगाने के पहले जितने अंतरराष्ट्रीय यात्री बाहर से आए थे उनकी मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए। मीडिया के अनुसार ये पहली बार नहीं है कि केंद्र ने राज्यों को उन भारतीय तथा गैर भारतीय लोगों पर निगाह रखने को कहा है जो बीते दिनों बाहर से आए हैं।

विदेश से आने वाले लोगों द्वारा क्वारंटाइन होने से बचने के लिए गड़बड़ी करने के कई मामले सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूपी के 37 लोगों का एक दल जब मक्का से मुंबई एयरपोर्ट पर उतरा तो उन्हें क्वारंटाइन की मुहर लगाई गई थी। लेकिन, इनलोगों ने बाद में एक विशेष इत्र के जरिए मुहर मिटा दी और ट्रेन तथा बसों के जरिए अपने घर पहुॅंच गए ताकि जॉंच से बच सकें। ट्रैवल हिस्ट्री छिपाने के कई मामले कश्मीर से भी सामने आए हैं। मीडिया में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि विदेशों से आने वाले कुछ यात्री कोरोना संक्रमण छिपाने के लिए की जाने वाली थर्मल जाँच से पहले पैरासिटामॉल ले रहे थे। जानकारों के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज का यह बर्ताव न सिर्फ उनके खुद के लिए बल्कि सारे समाज और देश के लिए बेहद खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार 28 मार्च की शाम तक भारत में 819 कोरोना पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। इनमें से 19 की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 79 स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। वहीं दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के मरीजों का आँकड़ा 6 लाख पार कर चुका है। इसमें से 27,000 से ज्यादा की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 1.30 लाख से ज्यादा कोरोना के मरीज संक्रमण से ठीक होकर घर जा चुके हैं।

ये मेरी माँ की तरफ़ से भारत माता के लिए है: कोरोना से लड़ने के लिए ₹25 करोड़ दे बोले अक्षय कुमार

बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने कोरोना से लड़ने के लिए 25 करोड़ रुपए की सहायता की है। इस संकट की घड़ी में किसी भी सेलिब्रिटी द्वारा दी गई ये सबसे बड़ी रकम है। नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर ‘पीएम केयर्स फण्ड’ को लेकर जानकारी साझा की थी और लोगों से आह्वान किया था कि इस विकट परिस्थिति में वे क्षमतानुसार वित्तीय सहयोग करें। पीएम मोदी ने बताया कि इस फंड में माइक्रो-डोनेशंस, अर्थात छोटी राशि भी डाली जा सकती है। उन्होंने बताया कि इससे भारत की ‘आपदा प्रबंधन क्षमताओं’ को मज़बूती मिलेगी।

इससे नागरिकों को बचाने और इस क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने अपील करते हुए कहा कि हम सबको एक स्वस्थ भारत बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए, ताकि अगला जनरेशन ज्यादा समृद्ध और स्वस्थ हो। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद छात्रों से लेकर सेलिब्रिटीज तक ने रुपए डोनेट किए। इसी क्रम में अक्षय कुमार ने पीएम केयर्स फंड में 25 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ ने कहा कि इस परिस्थिति में एक ही चीज महत्व रखती है और वो है लोगों की जान। उन्होंने लिखा कि वो अपने बचत में से पीएम केयर्स फंड में डोनेट कर रहे हैं।

अक्षय ने सभी से आगे आकर डोनेट करने की अपील की और समझाया कि जान है तो जहान है। जब अक्षय कुमार से पूछा गया कि इतने रुपए दान करने के पीछे उनकी कौन सी भावना है तो उन्होंने कहा कि इसे उनकी मज़बूरी कह लीजिए या फिर कमजोरी, वो ऐसे कार्यों के पीछे की सोच को जाहिर नहीं कर सकते। हिंदुस्तान टाइम्स’ से बात करते हुए एक के बाद एक हिट फ़िल्में दे रहे अक्षय कुमार ने कहा:

“मैं कौन होता हूँ चैरिटी या डोनेट करने वाला? दूसरी बात ये कि हम अपने देश को भारत माता कहते हैं। मेरा ये योगदान असल में मेरा नहीं है। ये मेरी माँ की तरफ से भारत माता के लिए है। पूरी दुनिया में कह रहा है कि वरिष्ठ नागरिकों को नज़रअंदाज़ किया जाएगा और कोरोना वायरस की आपदा के बीच अकेला छोड़ दिया जाएगा। हम ये सोच भी कैसे सकते हैं? माँ-बाप की जान महत्वपूर्ण है। मेरी माँ की जान महत्वपूर्ण है। जो कोई जहाँ भी हो, इस समय एक-एक व्यक्ति की जान बचाना बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने तो बस इसकी तरफ अपना छोटा सा फर्ज अदा किया है।”

अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना ने भी कहा कि उन्हें अपने पति पर गर्व है। उन्होंने बताया कि जब इतनी बड़ी राशि डोनेट करने को लेकर उन्होंने अक्षय से पूछा तो उनके पति ने कहा कि जब उन्होंने अपना करियर शुरू किया था, तब उनके पास कुछ नहीं था। अब मैं उनलोगों के लिए कुछ करने के लिए कैसे पीछे हट सकता हूँ, जिनके पास कुछ भी नहीं है। इससे पहले तेलुगु स्टार प्रभास ने 4 करोड़ रुपए डोनेट किए थे।

केजरीवाल के MLA राघव चड्ढा ने फैलाई फर्जी खबर, कार्रवाई करेगी UP सरकार

कोरोना वायरस संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। बावजूद दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर गॉंव लौटने वाले लोगों की भीड़ अचानक जमा हो गई। पैदल ही लोगों के कूच करने की तस्वीरें सामने आने लगी। अब कहा जा रहा है कि दिल्ली में इन लोगों के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए और केजरीवाल सरकार के अधिकारियों ने उनसे कहा कि बॉर्डर पर उनको घर ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। फिर भी आम आदमी पार्टी के नेता अफवाहों को हवा देने से बाज नहीं आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के एक बयान से पता चला है कि किस प्रकार से दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने ना सिर्फ उन्हें घर भेजने के नाम पर छल किया बल्कि उनके घरों की बिजली-पानी भी काट दी। उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्वांचल के लोगों को लक्ष्य बनाकर इन्हीं दो मुद्दों, बिजली-पानी पर ही विशाल बढ़त के साथ जीत हासिल की थी।

सहायक अध्यापक (ट्विटर अकाउंट द्वारा उपलब्ध जानकारी) महेंद्र सिंह ने दिल्ली से UP-बिहार की ओर पलायन कर रहे लोगों की स्थिति को लेकर एक ट्वीट करते हुए लिखा, “दिल्ली में रह रहे मजदूरों के घर का पानी, बिजली काट दिया गया। अफ़वाह फैलाई कि लॉकडाउन 3 महीने का होगा। अफ़रातफ़री मच गई। बसों में भर कर लोगों को यूपी बॉर्डर पर भेज दिया। रात भर गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़ में 1000 से ज्यादा बसें लगाकर इनको गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था की गई।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि दिल्ली ने प्रवासी मजदूरों को निराश किया है।

महेंद्र सिंह के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए आम आदमी पार्टी विधायक और दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने लिखा, “सूत्रों के मुताबिक़ योगी जी दिल्ली से UP जाने वाले लोगों को दौड़ा-दौड़ा के पिटवा रहे हैं। योगी जी बोल रहे हैं कि तुम क्यों दिल्ली गए थे। अब तुम लोगों को कभी दिल्ली जाने नहीं दिया जाएगा। मेरी यूपी सरकार से अपील है ऐसा न करें, इस मुश्किल की घड़ी में लोगों की समस्याओं को बढ़ाइए मत।”

जाने अनजाने में ही आम आदमी पार्टी विधायक राघव चड्ढा ने इस ट्वीट के जारिए ना सिर्फ दिल्ली में रह रहे उत्तर प्रदेश के लोगों पर कटाक्ष किया है, बल्कि लॉकडाउन के दौरान अफवाह फैलाने का भी काम किया है। राघव चड्ढा के इस ट्वीट को शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने लिखा है, “यह सरासर झूठी ख़बर है, ऐसी महामारी के समय भी इनकी पार्टी गंदी राजनीति खेलने से बाज़ नहीं आ रही है, इतना नीचे कैसे गिर सकती है आम आदमी पार्टी? इस ट्वीट पर उत्तरप्रदेश सरकार और पुलिस निश्चित कार्यवाही करेगी।”

गौरतलब है कि दिल्ली से उत्तर प्रदेश लौटे लोगों ने घर पहुँचकर लॉकडाउन के दौरान दिल्ली सरकार के कारनामों से यूपी सरकार को अवगत कराते हुए बताया कि उनके घरों की बिजली और पानी काट दिया गया था और उन्हें डीटीसी बसों में यह कहकर बॉर्डर पर छोड़ दिया गया कि उन्हें उनके घर पहुँचाया जा रहा है। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बयान जारी कर इस बात को सार्वजानिक किया जिससे केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी के तमाम नेता अब सफाई दे रहे हैं। इसी कड़ी में केजरीवाल ने कहा है कि यूपी-बिहार के लोगों को कहीं जाने की जरूरत नहीं है। दिल्ली सरकार उनका पूरा इंतजाम कर रही है।

इस बार मुसीबत सबसे बड़ी: TATA ने ₹1500 करोड़ की मदद का ऐलान किया, स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर

रतन टाटा के नेतृत्व वाले ‘टाटा समूह’ ने भी कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वित्तीय मदद सहित कई अन्य घोषणाएँ की हैं। किसी भी कॉर्पोरेट समूह की ओर से कोरोना के ख़िलाफ़ ये सबसे बड़ी मदद है। रतन टाटा ने 500 करोड़ रुपए की मदद का ऐलान किया। इसके कुछ ही देर बाद ‘टाटा संस’ ने भी 1000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मदद की घोषणा की। टाटा ट्रस्ट ने घोषणा की है कि उसके द्वारा दी गई रकम 5 चीजों पर ख़र्च किया जाएगा। पहला, मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के लिए। यानी, कोरोना से बचाव व इलाज हेतु कार्यरत मेडिकल कर्मचारियों के निजी सुरक्षा उपकरणों के लिए।

दूसरा, कोरोना पीड़ित मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या के कारण उन्हें रेस्पिरेटरी सिस्टम मुहैया कराने के लिए। तीसरा, ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग के लिए टेस्टिंग किट उपलब्ध कराने हेतु। चौथा, उन मरीजों के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए, जो संक्रमण से जूझ रहे हैं। पाँचवाँ, स्वास्थ्य कर्मचारियों और आम नागरिकों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक बनाने के लिए। इन पाँचों के लिए 500 करोड़ रुपए ख़र्च किए जाएँगे। टाटा ने कहा है कि पहले भी जब देश में मुसीबतें आई हैं तो उसने आगे बढ़ कर काम किया है, लेकिन इस बार मुसीबत सबसे बड़ी है।

वहीं ‘टाटा संस’ ने अतिरिक्त 1000 करोड़ की सहायता का ऐलान करते हुए बताया कि कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए वेंटिलेटर्स से लेकर सारे मेडिकल उपकरणों का निर्माण भारत में हो, ये सुनिश्चित किया जाएगा। टाटा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में सभी को साथ रह कर मुसीबत का सामना करना चाहिए। टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने कहा कि जल्द से जल्द इमरजेंसी सेवाओं में तेज़ी आए और संसाधन जुटाए जाएँ, ये प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता सबसे बड़े संकटों में से एक झेल रही है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वित्तीय सहयोग के लिए लोगों से निवेदन किया है। कई बड़े सेलिब्रिटी और कॉर्पोरेट जगत के लोगों ने मदद का ऐलान किया है। रिलायंस ने मुंबई में देश का पहला ‘कोरोना वायरस डेडिकेटेड अस्पताल’ कुछ ही दिनों में बना दिया, जहाँ लोगों का इलाज शुरू हो गया है। इसी तरह टाटा ने भी ज़रूरी सुविधाओं और उपकरणों की उपलब्धता पर ज़्यादा ज़ोर दिया है।

लेख कोरोना पर, गाली CAA को: ‘The Atlantic’ के लेख में तिरंगा का अपमान, लॉकडाउन को कोसा

कुछ ऐसे भारतीय पत्रकार हैं, जिनका पेशा बड़ा ही ‘निराला’ है। उनका एक ही काम है- विदेशी मीडिया संस्थानों में भारत और मोदी को इतनी गालियाँ दो कि हमारे देश की भी सीरिया जैसी इमेज बन जाए। विदेश में बैठे लोगों को लगे कि यहाँ कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा। ये ऐसा माहौल बनाने के लिए लिखते हैं, जिससे लगे कि मोदी सरकार लोकतान्त्रिक नहीं। तानाशाही सरकार है। इनमें बरखा दत्त, सदानंत धुमे और राणा अयूब शामिल हैं। इनमें एक विद्या कृष्णन भी हैं, जिनके लेख में भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया है।

उन्होंने ‘द अटलांटिक’ में एक लेख लिखा है, जिसमें बताया गया है कि सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए बेरहम तरीके अपना रही है। इस लेख को लिखा तो गया है कोरोना के ऊपर लेकिन इसकी शुरुआत होती है सीएए को गाली देने से। साथ ही मोदी सरकार को ‘हिन्दू राष्ट्रवादी सरकार’ कह कर सम्बोधित किया गया है, जो इनलोगों का फेवरिट टर्म है। दिल्ली में हुए दंगों का भी जिक्र किया गया है। बताया गया है कि ये एक सुनियोजित दंगा था, जिसमें मरने वाले अधिकतर समुदाय विशेष से थे। हालाँकि, ये नहीं बताया गया है कि कट्टरपंथियों ने अपने छतों से किस तरह पत्थर और बम बरसाए।

शरजील इमाम की चर्चा नहीं की गई है, जिसे भड़काऊ बयान दिए। ताहिर हुसैन की चर्चा नहीं की गई है, जिसने हज़ारों की भीड़ के साथ दंगे किए और अंकित शर्मा सहित कइयों को मार डाला। शाहरुख़ की चर्चा नहीं की गई है, जो बन्दूक लहराते हुए सड़कों पर घूम रहा था। फैसल फ़ारूक़ के राजधानी स्कूल की चर्चा नहीं की गई है, जिसे भीड़ ने अटैक बेस बनाया। कॉन्स्टेबल रतन लाल के हत्यारों की चर्चा नहीं की गई है। मंदिरों पर हमले के बारे में चुप्पी साध ली गई है। इसका अर्थ है कि बिना सोचे-समझे, बिना किसी सबूत के, प्रोपेगंडा फैलाने की कोशिश की गई है।

कहा गया है कि जनवरी 30 को भारत में पहला मामला आया लेकिन सरकार जाएगी नहीं। लेकिन, इससे पहले ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ भी तो कह रहा था कि इससे कोई खतरा नहीं है? सच्चाई ये है कि 7 जनवरी को चीन ने इसके बारे सूचना सार्वजनिक की और 8 जनवरी को भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के टेक्निकल एक्सपर्ट्स कमिटी की बैठक हुई। सबसे बड़ी बात कि तुलनात्मक रूप से भारत सभी देशों से काफ़ी बेहतर कर रहा है, फिर भी इस लेख में जबरदस्ती कहा गया है कि मोदी ने कुछ नहीं किया।

साथ ही पहले कहा गया है कि मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया, बाद में पूछा गया है कि मोदी सरकार ने क्यों किया? लॉकडाउन के निर्णय को गाली दी गई है और कहा गया है कि बिना किसी चेतावनी के लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। ऐसे में इस सवाल का उठना ज़रूरी है कि लॉकडाउन से पहले अगर चेतावनी दी जाती तो क्या और बड़े स्तर पर पलायन नहीं होता? लोग एक जगह से दूसरे जगह भागने लगते और जिसे नहीं भी ज़रूरत थी, वो भी घर जाना चाहता और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल होता। लेकिन, विद्या का दावा है कि सब जल्दी-जल्दी में किया गया जबकि ‘जनता कर्फ्यू’ के दिन एक तरह से प्रैक्टिकल हो चुका था।

अगर आप इस लेख में लगी तस्वीर को देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि इसमें तिरंगे झंडे का अपमान किया गया है। बीच में सफ़ेद पट्टी पर अशोक चक्र की जगह कोरोना वायरस को दिखाया गया है। यानी अशोक चक्र की तुलना कोरोना वायरस से की गई है। लेखिका लोगों के घरों में रहने, ट्रांसपोर्ट बंद होने और दफ्तरों पर ताला लगने को भयावह बता रही हैं। जबकि अगर ये क़दम नहीं उठाए जाते और कोरोना के कारण लाशें गिर रही होतीं, तब भी ये पत्रकार ऐसे ही लेख लिख कर फलाँ-चिलाँ देशों से भारत को सीखने की सलाह दे रहे होते।

विद्या ने दावा किया है कि भारत में दवा की दुकानें बंद हैं, जबकि फ्रांस वगैरह में खुली हैं। सच्चाई ये है कि दवाओं और ज़रूरी वस्तुओं की दुकानें खुली हुई हैं। दवा की दुकानों को तो पूरे 24 घंटे खुले रहने की अनुमति है। बावजूद इसके झूठ फैलाया गया है। साथ ही ब्रिटेन और स्पेन सरकार के पैकेजों का जिक्र करते हुए दावा किया गया है कि भारत सरकार ने काफ़ी कम राहत पैकेज की घोषणा की। हालाँकि, ये नहीं बताया गया है कि ब्रिटेन और स्पेन की जनसंख्या और भारत को जनसंख्या व जीडीपी में क्या अंतर है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है अन्य देशों का पैकेज अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने के लिए है, जबकि भारत सरकार ने गरीबों को राहत देने के लिए इसकी घोषणा की है। अर्थव्यवस्था सहित अन्य मोर्चे की परेशानी देने के लिए लगातार फैसले लिए जा रहे हैं। मुमकिन है कि आने वाले वक्त में सरकार किसी कंप्लीट पैकेज का ऐलान करेंगे।

लेख के एकाध पैराग्राफ में विद्या ने अपनी बड़ाई करते हुए बताया है कि कैसे वो ‘द हिन्दू’ के लिए हेल्थ कवर करती रही हैं और उनके पास 17 सालों का अनुभव है, इसीलिए उनकी बातें सही हैं। साथ ही पीएम मोदी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने पर सवाल उठाया गया है जबकि पीएम ने मीडिया, जनता और प्रबुद्ध जनों से लगातार संवाद किया है और सबसे सीधे जुड़ कर हालचाल जाना है। भारत ने किस तरह अपने नागरिकों को विदेश से निकाला, इस बारे में भी पूरी तरह चुप्पी साध ली गई है।

केजरीवाल की खुली पोल: बिजली-पानी काट बॉर्डर पर छोड़ा, UP सरकार की बसें बनी सहारा

मुफ्त बिजली और पानी का सपना दिखाकर दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने वाली अरविंद केजरीवाल सरकार की संवेदनहीनता और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही की पोल कोरोना वायरस संक्रमण से पैदा हुए संकट ने खोल दी है। 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली और नजदीकी इलाकों से लोग उत्तर प्रदेश और अपने गृह राज्य की तरफ पैदल निकलने लगे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि इन लोगों के दिल्ली सरकार ने बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए। लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन, दूध नहीं मिला जिस कारण भूखे लोग सड़कों पर उतरे। यहाँ तक कि दिल्ली सरकार के अधिकारी बक़ायदा एनाउंसमेंट कर अफ़वाह फैलाते रहे कि यूपी बॉर्डर पर बसें खड़ी हैं, जो उन्हें यूपी और बिहार ले जाएँगी।

इसके बाद बहुत सारे लोगों को मदद के नाम पर डीटीसी की बसों से बॉर्डर तक पहुँचाकर छोड़ दिया गया। वहीं, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात भर जाग कर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, हापुड़ आदि इलाकों में 1000 से ज्यादा बसें लगाकर इन लोगों को गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था कराई। रात में ही मजदूरों और बच्चों के लिए भोजन का इंतज़ाम कराया गया। 

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी बयान में दिल्ली सरकार पर लोगों के साथ लॉकडाउन के दौरान किए गए व्यवहार पर आपत्ति जताई गई है। इसमें कहा गया है कि लोगों को ना ही दूध और न ही बिजली-पानी उपलब्ध करवाया गया। यही नहीं, उन्हें डीटीसी बसों पर बिठाकर बॉर्डर तक इस आश्वासन के साथ भेज दिया गया कि वहाँ उनके घर जाने का प्रबंध किया गया है। हालात देखते हुए यूपी सरकार ने कानपुर, बलिया, बनारस, गोरखपुर, आजमगढ़, फैजाबाद, बस्ती, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, गोंडा, इटावा, बहराइच, श्रावस्ती सहित कई जिलों की बसें यात्रियों को बैठाकर भेजी। प्रशासन लोगों को खाने-पीने की व्यवस्था भी कर रहा है।

आज ही एक अन्य खबर में बताया गया है कि केजरीवाल अब गाँव की ओर लौट रहे यूपी-बिहार के लोगों से दिल्ली में ही रुकने की अपील कर रहे हैं। इसे डैमेज कंट्रोल की केजरीवाल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।