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कोरोना से जंग लड़ने के लिए भारतीय सेना तैयार: ‘ऑपरेशन नमस्ते’ का ऐलान, मात्र 6 घंटे का प्लान

भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने आज कहा कि भारतीय सेना कोरोना महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। जनरल नरवणे ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आर्मी की भूमिका को रेखांकित करते कहा कि इस घड़ी में सेना का दायित्व है कि वह देश की सरकार और नागरिक प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर यह लड़ाई लड़े।

मीडिया के अनुसार देश के आर्मी चीफ ने आज कोरोना के खिलाफ सेना की तैयारियों को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि सेना के पास 6 घंटे का एक प्लान तैयार है जिसके अंतर्गत आवश्यकता पड़ने पर तुरंत ही आइसोलेशन सेंटर और आईसीयू आदि तैयार किए जा सकते हैं। आर्मी ने COVID 19 के खिलाफ अपने ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन नमस्ते’ नाम दिया है। सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना आज तक अपने सभी ऑपरेशन्स में सफल हो कर निकली है और इस कोरोना वायरस के खिलाफ शुरू किए गए ‘ऑपरेशन नमस्ते’ में भी भारतीय सेना सफलता प्राप्त करेगी। यहाँ यह भी बताना जरुरी है कि अबतक सेना ने देशभर में 8 क्वारंटाइन सेंटर पूरे देश में शुरू कर दिए हैं।

जनरल नरवणे ने कहा- कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हम अलग-अलग स्तर पर तैयारियों में जुटे हैं। हमें नहीं पता कि आगे स्थितियाँ कैसी बनेंगीं लेकिन हम हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं। सेना ने जवानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की हुई है, उन्हें कोरोना से बचने के दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त हम बेहद कम नोटिस पर मेडिकल सुविधाएँ, बेड, आइसोलेशन सेंटरों आदि भी तैयार कर के देने को पाबंद हैं।

याद रहे कि देश में अब तक कोरोना से संक्रमित होने वालों की संख्या 700 पार कर गई है जिसमें सबसे बुरे हाल महाराष्ट्र और केरल राज्यों के हैं, जहाँ मरीजों की संख्या 100 से ज्यादा हो चुकी है। जबकि पूरे देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 20 पहुँच चुकी है।

विदेश से भारत आए कोरोना संक्रमितों में से आधे इस्लामी मुल्कों से लौटे, सबसे ज्यादा 105 दुबई से

कोरोना वायरस का संक्रमण चीन के वुहान से शुरू होकर पूरी दुनिया में फैला। भारत में पहला मामला 30 जनवरी को केरल में सामने आया। वुहान यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे एक छात्र के देश लौटने के बाद संक्रमण का यह पहला मामला दर्ज हुआ। इसके बाद से अब तक देश में 724 संक्रमित सामने आ चुके हैं। इनमें से 66 पीड़ित रिकवर कर चुके हैं। 17 मरीज इस संक्रमण से नहीं लड़ पाए और उनकी मृत्यु हो गई।

भारत में इस संक्रमण के आँकड़ों का विश्लेषण करने पर एक चौंकाने वाले बात सामने आती है। भारत में 300+ संक्रमण के मामले उन लोगों के हैं, जिनका प्रत्यक्ष रूप से विदेश यात्राओं का इतिहास रहा है। इन 300 मामलों में से भी 142 पॉजिटिव मामले उन लोगों के हैं, जो मध्य-पूर्व के इस्लामी मुल्कों से लौटे हैं। 

दरअसल, covid19indiaOrg द्वारा इकट्ठा किए गए डाटा का दिल्ली के डॉ. अनुपम सिंह ने विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया कि करीब 300 मामले ऐसे मरीजों के थे, जिनका ऐसे देशों में ट्रैवल करने का इतिहास सामने आया, जो संक्रमण की जकड़ में बुरी तरह फँसे हैं। नमें 142 मामले ऐसे थे जो मिडिल ईस्ट की यात्रा करके लौटे थे। यानी दुबई, कतर, सऊदी अरब, मक्का और ईरान। इनमें भी दुबई टॉप पर है। जहाँ से करीब 105 लोग संक्रमित होकर देश लौटे। लेकिन इनमें संक्रमण की पहचान भारत आने के बाद हुई।

यहाँ बता दें इससे पहले कई लोगों ने इस बात का अनुमान लगाया था कि विदेश से लौटे संक्रमित लोगों में अधिकतर दुबई से हो सकते हैं, क्योंकि दुबई अन्य देशों के मुकाबले भारत वापस आने वाले कई लोगों के लिए पारगमन बिंदु है। मगर, उन दावों के बीच पॉजिटिव केसों की साफ तस्वीर साफ नहीं हुई थी। पर अब ये तस्वीर आँकड़ों के साथ साफ है।

डॉ. सिंह द्वारा किए गए विश्लेषण के परिणामों से ये भी मालूम चलता है कि भारत में इस आपदा के कारण मृत्यु दर वरिष्ठ नागरिकों में लगभग 2 प्रतिशत हैं। वही पुरुषों और महिलाओं में इसके होने का अनुपात, 60:40 का है।

डॉ. सिंह ने वापस लौटे संक्रमित मरीजों के डाटा में से ऐसे लोगों की भी शिनाख्त की है जिन्होंने भारत आकर कोरोना वायरस को अन्य 16 लोगों में फैलाया और घातक साबित हुए।

बता दें, डॉ. सिंह ने अपना अध्य्यन जिस आधार पर किया है, उसे covid19org ने सबसे लिए उपलब्ध कराया है। इसे आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

डॉ. सिंह द्वारा किए गए अध्य्यन से कुछ बातें और भी शीशे की तरह साफ होती हैं। सबसे पहले ये कि जो भारत सरकार ने पूरे देश को 21 दिन के लॉकडाउन करने का फैसला लिया है, वो फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। इसे इस वायरस के संक्रमण को देश में फैलने से रोकने में मदद मिलेगी। बावजूद इसके किसी को लॉकडाउन के पीछे का कॉन्सेप्ट समझने में दिक्कत हो तो वह डॉ. सिंह की रिसर्च में सामने आए परिणामों को देखकर समझ सकता है कि आखिर किस तरह ये वायरस फैलता है और 2 से 27 लोगों को इंफेक्ट करता है।

यहाँ ये भी बता दें कि मध्य-पूर्व से लौटे संक्रमित मरीजों के आँकड़े और उनसे संक्रमित हुए लोगों की संख्या देखकर ये भी स्पष्ट होता है कि लॉकडाउन के अलावा 14 अप्रैल तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भारत में आने-जाने से रोकने का फैसला भी बेहद अहम है। इससे यक़ीनन कोरोना के बढ़ते प्रभाव को रोकने में मदद मिलेगी।

हम केले के लिए बाहर हैं, शहर में घूम रहे, डरने की कोई बात नहीं, मेरा नाम है काला दादा: जलगाँव पुलिस ने किया गिरफ्तार

एक तरफ लोग कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लॉकडाउन के दौरान घरों में कैद हैं। तो वहीं कुछ लोग बेवजह की बेहूदगी दिखाते लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए सड़क पर घूम रहे हैं। कुछ ऐसी ही एक वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल महाराष्ट्र के जलगाँव में एक व्यक्ति ने लॉकडाउन के दौरान पूरे शहर में बाईक घुमाते हुए वीडियो बनाई थी। इसके बाद इलाका पुलिस ने आरोपित व्यक्ति को शहर में कर्फ्यू के आदेशों की अवहेलना के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया।

वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि आरोपित व्यक्ति बिना हेलमेट के एक हाथ से तो बाइक चला रहा है और दूसरे हाथ से खुद की वीडियो बना रहा है, जबकि पीछे एक छोटा बच्चा भी बैठा हुआ है, जो कि केले का एक गुच्छा हाथ में लिए हुए है।

ट्विटर हैंडल पर पॉलिटिकल कीड़ा द्वारा अपलोड किए गए एक वीडियो में, आरोपित व्यक्ति यह कहते हुए दिखाई दे रहा है कि हम केले खरीदने के लिए बाहर हैं और हम शहर में घूम रहे हैं। हमें डरने की कोई बात नहीं है। हम निडर हैं क्योंकि मेरा नाम काला दादा है। अब ऐसे में पूरी दुनिया लॉकडाउन के तहत अपने-अपने घरों में कैद है और ये पिता-पुत्र बिना किसी चिंता के लॉकडाउन के बाद भी बाइक से शहर में घूम रहे हैं।

वहीं दूसरी वीडियो में आप देख सकते हैं कि आरोपित व्यक्ति एक पुलिस स्टेशन के अंदर पुलिस की गिरफ्त में दिखाई दे रहा है, जो कि कान पकड़े पुलिस की मौजूदगी में कहता है मैंने बहुत बड़ी गलती की है। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। मुझे अब अपनी गलती का एहसास हुआ। मैं फिर कभी ऐसा काम नहीं करूँगा और जैसी गलती मैंने की है ऐसी कोई गलती आप मत करना। साथ ही आरोपित ने कहा कि मैं उन पुलिस कर्मियों का शुक्रगुजार हूँ, जो 24 घंटे ड्यूटी पर हैं।

आपको बता दें कि लॉकडाउन के दौरान आदेशों की अवहेलना करने वाले कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। तो वहीं कई ऐसे भी केस सामने आए जब ऐसे लोगों पर पुलिस ने सख्ती की तो उन लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। कुछ ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों कोलकाता से आया था, जहाँ एक लड़की को एक पुलिसकर्मी को गाली देते और उस पर थूकते हुए देखा गया था। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान पुलिसस ने लड़की की कार को रोक लिया था। वहीं बुधवार को बेंगलुरु के संजय नगर से दो उपद्रवियों को पुलिस कर्मियों पर हमला करने और उनकी बाइक रोकने पर उन पर पथराव करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना से अब तक 4 मौतें, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 130 हो गई है। वहीं बात करें पूरे भारत की तो अब तक इससे 16 मौतें और इससे संक्रमित लोगों की संख्या 700 से अधिक हो गई है। वहीं 14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन जारी है। साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से 21 दिनों तक घरों में रहने की ही अपील की है।

तरन्नुम ने नवजात बेटे का नाम रखा रणविजय: लॉकडाउन में मसीहा बनी खाकी को बरेली के दंपती का सलाम

कोरोना वायरस की विश्‍वव्‍यापी महामारी की वजह से पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। घरों में कैद लोगों की जिंदगी की रफ्तार जैसे थम सी गई लगती है। लेकिन जिंदगी की जरूरतें कभी नहीं थमतीं। संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश पुलिस का ऐसा सहृदय और मददगार रूप सामने आया है। पुलिस के इस जज्बे को सलाम करते हुए बरेली के दपंती ने अपने नवजात बेटे का नाम नोएडा के एडिशनल DCP रणविजय के नाम पर रखने का फैसला किया है।

असल में बरेली की रहने वाली तरन्नुम उर्फ़ तमन्ना अली खान को 25 मार्च को लेबर पेन शुरू हो गया। उसकी हालत बेहद खराब थी। उसका शौहर नोएडा में था। लॉकडाउन की वजह से उसका बरेली पहुॅंचना मुमकिन नहीं था और तमन्ना को कोई अस्पताल ले जाने वाला भी नहीं था। संकट की इस घड़ी में तमन्ना के लिए पुलिस मसीहा बनी। खाकी ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए बरेली में मौजूद गर्भवती महिला के पास नोएडा में फँसे उसके पति को पहुँचाया। प्रसव पीड़ा से परेशान महिला ने सोशल मीडिया पर विडियो जारी कर अपना दर्द बयाँ किया। बरेली पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए नोएडा पुलिस से संपर्क किया। फिर नोएडा पुलिस ने तमन्ना के शौहर अनीस खान को सकुशल बरेली पहुँचा दिया।

तमन्‍ना की डिलिवरी सकुशल हुई और उसने एक बेटे को जन्‍म दिया। होश में आने के बाद उन्‍होंने सबसे पहले बरेली और नोएडा पुलिस का आभार जताया। तमन्‍ना ने कहा, “सचमुच आप लोग खाकी में भगवान हैं।’ तमन्ना ने डिलीवरी के बाद एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “मेरा नाम तमन्ना है, मैं बरेली की रहने वाली हूँ। अब से कुछ ही वक्त पहले शायद चार या पाँच घंटे पहले मैं मौत और जिंदगी से लड़ रही थी। मेरे हसबैंड नोएडा में फँसे हुए थे और यहाँ मुझे लेबर पेन हो रहा था। मुझे हॉस्पिटल पहुँचाने वाला भी कोई नहीं था और आज मेरा प्यारा सा बेटा है और मेरे हसबैंड मेरे पास हैं और ये सब पॉसिबल हुआ एसएसपी बरेली, बरेली पुलिस, कमिश्नर सर और एडिशनल DCP रणविजय सर। वैरी स्पेशल थैंक्स यू टू ऑल ऑफ यू आप लोगों के प्रयास की वजह से मेरे हसबैंड बरेली आ पाए और मुझे हॉस्पिटल में एडमिट कर पाए और मैंने प्यारे से बेटे को जन्म दिया है। खाकी में भगवान हैं आप लोग सचमुच, बहुत-बहुत शुक्रिया। आज आप लोगों की वजह से ही शायद मैं जिंदा हूँ।”

तमन्ना ने अपने नवजात बेटे का नाम एडिशनल DCP रणविजय सिंह के नाम पर रणविजय खान रखा है। बता दें कि इससे पहले तमन्‍ना ने नोएडा के अडिशनल डीसीपी कुमार रणविजय का धन्‍यवाद देते हुए एक मैसेज में इच्‍छा जताई थी कि अगर उनका बेटा हुआ तो वह उसका नाम रणविजय रखेंगी।

तमन्ना के शौहर अनीस ने एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में कहा, “जब मेरी बीबी ने मुझे देखा तब उसकी आँखों के आँसू रुके। उसने तुरंत रणविजय सर को मैसेज किया कि अगर बेटा हुआ तो वह उसका नाम रणविजय ही रखेगी। मेरे बरेली पहुँचने के करीब 45 मिनट के बाद मैं पिता बना। हमने उसका नाम रणविजय खान रखा है। मेरी बीबी को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मैं उसके पास पहुँच पाऊँगा लेकिन पुलिस की मदद से पहुँच गया।”

मोदी ताली बजवा सकता है तो तुम कोरोना रोकने के लिए करो अजान: ममता का पार्षद अख्तर हुसैन

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दुनिया भर की सरकारें इसे रोकने के हरसंभव प्रयास में जुटी हैं। भारत में भी व्यापक स्तर पर इससे निपटने के उपाय किए जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर 14 अप्रैल तक देशव्यापी लॉकडाउन भी किया गया है। लोगों को घरों से ना निकलने की हिदायत दी गई है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक नेता अपने क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के लोगों से अजान के लिए एक जगह पर इकट्ठा होने की अपील कर रहे हैं।

इस टीएमसी नेता का नाम है अख्तर हुसैन। अख्तर हुसैन पश्चिम बंगाल के आसनसोल में पार्षद हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के लॉकडाउन के आदेश की खिल्ली उड़ाते हुए लोगों से अपील की है, “अगर मोदी ताली बजाकर कोरोना को रोक सकते हैं तो क्यों न हमें इसे हराने के लिए प्रार्थना (अजान) में जुटना चाहिए।” बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दौरान शाम 5 बजे स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिस का हौसला बढ़ाने के लिए लोगों से पाँच मिनट तक ताली, घंटी या थाली बजाने की अपील की थी। लेकिन यहाँ पार्षद उनके नाम से दुष्प्रचार कर रहा है।

जब टाइम्स नाउ ने अख्तर हुसैन से उनकी इस अपील के बारे में पूछा तो उन्होंने ढिठाई के साथ कहा, “क्या अब तक कोरोना बीमारी का कोई इलाज पता चला है? अगर हम अजान के जरिए इससे लड़ना चाहते हैं तो उसमें बुराई क्या है। मैंने कहा है कि कोरोना को अजान से रोका जा सकता है। लोग किसी न किसी तरह सड़क पर आ-जा रहे हैं। तो अगर अजान में लोग आते हैं तो हर्ज ही क्या है?” बता दें कि गुरुवार (मार्च 26, 2020) को आसनसोल में अजान के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे। यहाँ पर कोई पुलिस भी नजर नहीं आ रही थी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सड़क पर कुछ सब्जी वालों के ठीक सामने पहुँचती है। जिसके बाद वो हाथ में चॉक लेकर सड़क पर गोले बनाना शुरू कर देती हैं। ममता एक साथ कुछ दूरी पर कई गोले बनाती है। ऐसा करके ममता ने लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग सिखाने की कोशिश की।

हालाँकि, जब वह सड़क पर चॉक से गोले बना रही थीं, तब उन्हें देखने के लिए पीछे काफी लोग खड़े हो गए। लोग एक दूसरे से काफी करीब खड़े थे। जो वीडियो में साफ देखा जा सकता है। इसीलिए ट्विटर यूजर्स ने इसे लेकर ममता की खूब खिंचाई भी की कि ममता के पीछे जमा लोग कौन सी सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो कर रहे हैं?

बता दें कि लॉकडाउन के तहत किसी को भी सामूहिक धार्मिक आयोजन करने की मनाही है। तमाम मुस्लिम संगठनों ने भी कोरोना के संक्रमण को देखते हुए जुमे की नमाज के लिए मस्जिदों में ना इकट्ठा होने की अपील की है। सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर पीएम मोदी की पहल की उनके विरोधी नेता भी तारीफ कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी के अलावा पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी कोरोना की चेन को तोड़ने के लिए पीएम की मुहिम का समर्थन किया है। लेकिन टीएमसी नेता का यह रवैया उनके राज्य में कोरोना के खतरे को बढ़ा रहा है।

जानकारी के मुताबिक देश भर में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो मई तक 13 लाख लोग संक्रमित हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक कोरोना के मामलों में मृत्यु दर 3.4 फीसदी है, जबकि आम फ्लू के संक्रमण में मृत्यु दर 1 फीसदी ही है। बात अगर भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की करें तो अब तक 727 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जबकि इस वायरस की वजह से पूरे देश में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। 

27 सिखों का हत्यारा ISIS आतंकी भारत का, कश्मीरी मुस्लिमों का बदला लेने के लिए गुरुद्वारे पर हमला

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले में कश्मीर कनेक्शन निकला है। मालूम चला है कि 150 सिखों पर हमला करने वाले आतंकियों में से एक भारत का जिहादी था जिसने कश्मीर मुस्लिमों का बदला लेने की नियति से इसको अंजाम दिया। इतना ही नहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट में खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ये आतंकी पहले भारतीयों को मारने के लिए काबुल स्थित इंडियन एंबेसी को निशाना बनाने आए थे। लेकिन वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखकर आतंकियों ने गुरुद्वारे को निशाना बनाया।

इस हमले की जिम्मेदारी IS ने ली है। जिस बंदूकधारी ने गुरुद्वारे में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पर ताबड़तोड़ गोली चलाई वो भारत से था। आतंकी की पहचान अबु खालिद अल हिंदी के रूप में हुई है। इंटेलीजेंस ग्रुप SITE के मुताबिक खालिद ने कश्मीर का बदला लेने के लिए इस हमले को अंजाम दिया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने इस तरह के हमले को लेकर आगाह कर रखा था। इसमें कहा गया था कि अफगानिस्तान से भारत को बाहर ​निकालने के मकसद से आतंकी साजिशें रची जा रही है। इन इनपुट के आधार पर एंबेसी की सुरक्षा के इंतजाम सख्त कर दिए गए थे। इसके कारण आतंकी अपने मूल उद्देश्य को अंजाम नहीं दे पाए।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गुरुद्वारे को इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि ये एक सॉफ्ट टारगेट था। उनके मुताबिक, उनके मुताबिक, काबुल में भारतीय दूतावास पर और जलालाबाद में वाणिज्य दूतावास पर आतंकी हमले को लेकर काफी समय से अलर्ट जारी है। जिसके कारण वहाँ सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था और एंबेसी के बाहर अधिक सैन्य टुकड़ी तैनात की गई थी। इसलिए यह उनके लिए आसान लक्ष्य नहीं था। तभी उन्होने गुरुद्वारे को हमले के लिए अपना टारगेट बनाया।

बता दें, 25 मार्च की सुबह अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सिखों को निशाना बनाकर भीषण आतंकी हमला किया गया था। सुबह के करीब 7:45 बजे ये हमला हुआ। उस वक्त वहॉं 150 श्रद्धालु मौजूद थे। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए। यहाँ सबसे पहले एक फिदायीन हमलावर ने खुद को उड़ाया। फिर उसके बंदूकधारी साथियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। घटना की सूचना मिलते ही अफगान सुरक्षाबल एक्शन में आ गए। 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया। गुरुद्वारे में फँसे लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया और थोड़ी देर में हमले की जिम्मेदारी आईएस ने ले ली।

महाराष्ट्र में एक ही परिवार के 12 सदस्य कोरोना पॉजिटिव, 4 हज करके लौटे थे

भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र है। राज्य में एक ही परिवार के 12 लोग कोरोना पॉजीटिव पाए गए हैं। इस परिवार के चार सदस्य पिछले दिनों हज कर लौटे थे। इसी के साथ राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 124 हो गई है। इस मामले के सामने आने के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है। उन लोगों को चिह्नित कर आइसोलेट किया जा रहा है, जो लोग किसी न किसी तरह से इन लोगों के संपर्क में आए।

जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के सांगली जिले के इस्लामपुर गॉंव के रहने वाले एक ही परिवार के 12 लोगों को कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। बीते दिनों इस परिवार के हज से लौटे 4 सदस्यों को आइसोलेशन में रखा गया था। जब 23 मार्च को इनकी रिपोर्ट आई तो सभी कोरोना पॉजीटिव पाए गए। इसके बाद परिवार के 5 अन्य सदस्यों का भी टेस्ट किया गया। वे सभी भी कोरोना पॉजीटिव निकले। फिर मेडिकल टीम ने परिवार के शेष 3 अन्य लोगों को टेस्ट के लिए बुलाया। जाँच में ये तीनों भी पॉजिटिव पाए गए।

अब इस गाँव के साथ पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है और मेडिकल टीम पूरे गाँव मे घूम-घूम कर लोगों से सैंपल ले रही है। डॉक्टरों की टीम ने 23 लोगों के सैंपल लिए हैं। इन सभी लोगों को उनके घरों में ही क्वारेंटाइन किया गया है। डॉक्टरों को इस बात का डर है कि कोरोना की ये कड़ी काफी लंबी भी हो सकती है। साथ ही डॉक्टरों ने परिवार के साथ कई सारे करीबी रिश्तेदारों को भी आइसोलेट कर दिया है। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण से अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। मुंबई के अस्पतालों से मंगलवार को 12 लोगों को सफलतापूर्वक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई थी।

सस्ते लोन-EMI पर तीन महीने की छूट, RBI ने कोरोना संकट में खोले राहत के दरवाजे

कोरोना वायरस और उसके कारण हुए लॉकडाउन से नुकसान को देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री के पैकेज के बाद अब RBI ने कई राहत दी है। लॉकडाउन की वजह से इनकम लॉस हो रहा है और ऐसे में आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती कर ईएमआई और घटने का रास्ता साफ कर दिया है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने पहले से चले आ रहे लोन के ईएमआई के भुगतान पर भी 3 महीने का मोरेटोरियम लगा दिया है। इससे तीन महीने तक लोगों को ईएमआई के भुगतान से राहत मिल गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को घोषणा की कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों, NBFC (हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों सहित) और ऋण संस्थानों सहित सभी वाणिज्यिक बैंकों को 1 मार्च को बकाया सभी ऋणों के लिए किश्तों के भुगतान पर 3 महीने की मोहलत देने की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा सभी लोन देने वाली संस्थाओं को वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज के भुगतान पर भी 3 महीने की अनमुति दी गई है। 

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने नीतिगत ब्याज दरों में बड़ी कटौती की है। रेपो रेट 0.75 फीसदी की कटौती के साथ 4.4% हो गया है। कटौती के इस ऐलान से लोन की मासिक किस्तें घटेंगी, जो आम लोगों के लिए राहत की बात है। आरबीआई की रेपो रेट कटौती का फैसला ऐतिहासिक है। यह कटौती आरबीआई इतिहास की सबसे बड़ी है। बता दें कि बीते दो मौद्रिक समीक्षा बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को लेकर कोई फैसला नहीं लिया था।

रेपो रेट कटौती का फायदा होम, कार या अन्य तरह के लोन सहित कई तरह के ईएमआई भरने वाले करोड़ों लोगों को मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही नए लोन लेने वाले ग्राहकों को भी फायदा मिलेगा। वहीं आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में भी 90 बेसिस प्वाइंट कटौती करते हुए 4 फीसदी कर दी है।

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर 3 प्रतिशत कर दिया गया है। यह एक साल तक की अवधि के लिए किया गया है। गवर्नर के मुताबिक सभी कमर्शियल बैंकों को ब्याज और कर्ज अदा करने में 3 महीने की छूट दी जा रही है। इस फैसले से 3.74 लाख करोड़ रुपए की नकदी सिस्टम में आएगी। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से डिजिटल बैंकिंग की सलाह दी है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और मजबूत है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और मजबूत है। हाल के दिनों में शेयर बाज़ार में कोरोना वायरस से संबंधित अस्थिरता ने बैंकों के शेयर की कीमतों को प्रभावित किया, जिसका नतीजा ये हुआ कि लोगों ने घबराकर कुछ निजी क्षेत्र के बैंकों से जमा राशि निकाल ली। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बात की काफी संभावना है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के कई हिस्से मंदी में जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुरुवार (मार्च 26, 2020) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर गरीबों के लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि आर्थिक पैकेज की राशि का इस्तेमाल 10 करोड़ गरीबों के खाते में सीधे रकम ट्रांसफर करने और उद्योगों को राहत देने के लिए किया जाएगा।

इंडिया टुडे की फिर हुई बेइज्जती: मोदी सरकार के राहत पैकेज के पोस्टमॉर्टम में गणित से छेड़छाड़

भारत में कोरोना महामारी को रोकने के लिहाज़ से 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित हुआ है। केंद्र सरकार ने इस बंदी के कारण होने वाली परेशानियों पर खुलकर बात की है। सरकार ने बताया है कि वो मानती है कि गरीबों के लिए ये संकट की घड़ी है, लेकिन इसके अलावा देश को बचाने का कोई उपाय भी नहीं है। सरकार ने देश के गरीबों को इस स्थिति से लड़ने के लिए सिर्फ़ घर में बंद नहीं किया, बल्कि उनकी बुनियादी जरूरतों का भी ख्याल रखा है। इस कड़ी में गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1.70 लाख करोड़ रुपए का पैकेज रिलीज करने का ऐलान किया ताकि इस परिस्थिति से लड़ा जा सके। मगर, जिन्हें सरकार का विरोध ही करना है, वो किसी सराहनीय काम पर भी चुप क्यों रहें… जैसे ही सरकार ने इस फंड की घोषणा की, इंडिया टुडे की पत्रकार गीता मोहन ने एक चार्ट शेयर किया। चार्ट में यह दर्शाया गया कि अन्य देशों के मुकाबले ये फंड कितना कम है।

मगर, ये चार्ट बनाया किसने? तो बता दें इस चार्ट को डाटा इंटेलिजेंस यूनिट ने बनाया। इसमें दर्शाया गया कि 1.70 लाख करोड़ रुपए का फंड या फिर $22.5 बिलियन का मतलब हर व्यक्ति के हिस्से केवल $19 आता है, जो अन्य देशों द्वारा जारी किए गए फंड से बेहद कम है। जैसे जर्मनी में $7.281, यूके में $ 6,246 और यूएसए में $6,042 आदि।

इस चार्ट में कई तरह से दूसरे देशों की भारत से तुलना की गई ताकि ये साबित किया जाए कि सरकार अन्य देशों के मुकाबले कोरोना से लड़ने के लिए कम प्रयास कर रही है। लेकिन बता दें विभिन्न देशों द्वारा घोषित पैकेजों में और भारत द्वारा जारी पैकेज में कोई कम्पैटिबिलटी नहीं है, ये किसी भी रूप में तुलनीय नहीं हैं। अन्य देशों द्वारा घोषित अधिकांश पैकेज COVID-19 के प्रकोप के कारण होने वाले नुकसान से निपटने के लिए और अर्थव्यवस्था की मदद करने के लिए व्यापक उपाय के रूप में हैं। मगर भारत का पैकेज एक आर्थिक पैकेज नहीं है, ये एक कल्याणकारी पैकेज है जो केवल समाज के एक वर्ग को लक्षित करता है।

भारत के कल्याण पैकेज में रियायती खाद्यान्न, प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण, मनरेगा मजदूरी में वृद्धि, पेंशन, मुफ्त खाना, रसोई की गैस आदि शामिल हैं। इसके अलावा इसमें महामारी से लड़ने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बीमा के सिवा किसी वेतनभोगी वर्ग, या व्यापारियों के लिए कुछ भी नहीं है। दूसरी ओर, यूके द्वारा घोषित 424 बिलियन डॉलर का पैकेज व्यवसायों के लिए एक बचाव पैकेज है। इसमें व्यवसायों के लिए ऋण और अनुदान, एयरलाइनों, दुकानों और आतिथ्य उद्योग के लिए समर्थन शामिल हैं। इसके अलावा, आम नागरिकों के लिए मॉर्टेज पेमेंट सहायता भी इसी में शामिल है।

इसी तरह, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा घोषित $2 ट्रिलियन पैकेज भी एक बेहद व्यापक पैकेज है। इसमें व्यक्तियों को सीधे भुगतान, छात्र ऋण का निलंबन, बेरोजगारी, COVID-19 महामारी, अनुदान द्वारा प्रभावित व्यवसायों के लिए $ 500 बिलियन का कर्ज जैसे कार्यक्रम शामिल है। एयरलाइंस और हवाई अड्डों के लिए और अस्पतालों के लिए $ 117 बिलियन का अनुदान भी इसी पैकेज का भाग है।

इंडिया टुडे के चार्ट में सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि उसमें दावा किया गया है कि फ्रांस ने 335 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पैकेज की घोषणा की है। मगर, फ़्राँसीसी मीडिया की रिपोर्ट है कि पैकेज वास्तव में $50 बिलियन (€ 45 बिलियन) का है और इस पैकेज का उद्देश्य व्यवसायों और कर्मचारियों की मदद करना है। रही बात 335 बिलियन डॉलर की तो वो बैंक गारंटी है।

इसी प्रकार, अन्य देश, जिनका उल्लेख इंडिया टुडे ने किया, उन सभी ने अपने देश की अर्थव्यवस्था बचाने के लिए इस तरह के पैकेजों की घोषणा की, जो अभी भारत को करना बाकी है। इसकी तुलना अन्य देशों से केवल अजेंडा चलाने के लिए किया जा रहा है। इतना ही नहीं अन्य देशों के साथ भारत की सीधी तुलना में एक और समस्या है, जो है क्रय शक्ति समता यानी ppp (purchasing power parity)। विभिन्न देशों की मुद्राओं में अलग-अलग क्रय शक्तियाँ होती हैं।

इन सबसे अतिरिक्त विरोधियों को ये ध्यान देने की जरूरत है कि आज कोरोना से सबसे शक्तिशाली देश तक प्रभावित हैं और बड़ी तादाद में वहाँ इसे फैलने से रोकने में विफलता मिली है। लेकिन हमारे देश में अब तक इसके 700 मामले आए हैं। अब तक 13 लोगों की मौत हुई है। इसे सरकार की लापरवाही नहीं कही जा सकती, क्योंकि देश में पहला कोरोना का मामला आने के बाद से सरकार ने हर मुमकिन कदम उठाए। फिलहाल भारत की परिस्थिति अन्य देशों से अलग है।

फिर भी अगर इंडिया टुडे के डेटा की बात करें, तो गौर रखिए कि अन्य देशों ने व्यापक स्तर पर नुकसान देखने के बाद इन पैकेजों की घोषणा की, जबकि भारत ने स्थिति हाथ से निकलने से पहले एक कल्याणकारी पैकेज की घोषणा की। अब आगे भी मुमकिन है कि सरकार अर्थव्यवस्था को पहुँचे नुकसान के लिए किसी पैकेज की घोषणा करे। जब सरकार ऐसा करेगी तब जाकर कहीं उसकी तुलना अन्य देशों द्वारा रिलीज किए फंड से करना उचित होगा।

इंडिया टुडे के इस चार्ट पर सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स ने सवाल उठाए, जिसे देखते हुए राहुल कंवल ने इसे अपने हिसाब से सही करके फिर पोस्ट किया। मगर, अफसोस कि इस बार भी इसमें कई गलती रह गई और राहुल कंवल को भी फजीहत का सामना करना पड़ा। यूजर ने दोबारा उन्हें उनकी गलतियाँ इंगित की।

मेरी 3 साल की बेटी के सिर में गोली मारी, वो बार-बार बोल रही थी- डैडी मुझे बचा लो…

एक बच्ची, जो 10 दिन बाद 4 साल की होने वाली थी। अपने चौथे जन्मदिन के लिए केक लाने की तैयारियों में जुटी थी। उसकी आवाज को एक झटके में गोली मारकर हमेशा के लिए चुप करा दिया गया। आखिरी वक़्त में वो सिर्फ़ यही बोल पाई- ‘डैडी, मुझे बचा लो, मुझे बचा लो डैडी…।’ सोचिए कितना दर्दनाक मंजर होगा उस पिता के लिए जिसने अपनी बिटिया को ऐसे दम तोड़ते देखा होगा।

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक गुरुद्वारे पर 25 मार्च को आतंकी हमला हुआ। 26 सिखों की मौत हो गई। इनमें 3 साल की तान्या और उसकी माँ सुरपाल कौल भी शामिल हैं। तान्या को याद करते हुए उसके पिता हरिंदर सिंह सोनी (40) ने बताया कि 10 दिन बाद उसका जन्मदिन था। वो चार साल की होने वाली थी। वो तो अपने जन्मदिन पर केक लाने की तैयारी कर रही थी।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस दर्दनाक पल को याद करते हुए हर राय साहिब गुरुद्वारे के कीर्तन सेवादार हरिंदर सिंह सोनी ने बताया कि कैसे एक हमले ने उनकी पूरी जिंदगी उजाड़ दी। उनका परिवार उनसे छीन लिया। वे बताते हैं कि इस हमले में उन्होंने सिर्फ अपनी बेटी तान्या और पत्नी सुरपाल कौर को ही नहीं खोया। अपने पिता निर्मल सिंह को भी खो दिया, जो कि गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी थे। ससुर भगत सिंह (75), भतीजा कुलविंदर सिंह खालसा और उनकी माँ बुरी तरह घायल हो गए। हमले के समय गुरुद्वारे में मौजूद न होने के कारण वे, उनके दो बच्चे (गगनदीप सिंह, गुरजीत कौर) और चार भाई ही परिवार में अब बाकी बचे हैं।

आज पूरे परिवार की स्थिति देखकर हरिंदर कहते हैं कि मैंने अफगानिस्तान में जन्म लिया है लेकिन अब समय आ गया है कि मैं अपनी माँ, बच्चों और भाइयों के साथ ये देश छोड़ दूँ। इससे पहले कि वे भी किसी हमले में मार दिए जाएँ। वो बताते हैं कि उनकी बिटिया के सिर में गोली मारी गई थी। वो बार-बार बोल रही थी, “डैडी मुझे बचा लो, मुझे बचा लो डैडी…” 

हरिंदर के मुताबिक, “उस दिन साढ़े 6 बजे रोज की तरह अरदास करने के लिए सब गुरुद्वारे में एकत्रित हुए। मैं स्टेज पर था। वहाँ 100 से ज्यादा श्रद्धालु थे। तभी एक श्रद्धालु की चिल्लाने की आवाज आई, चोर आ गए हैं, डाकू आए हैं। बस इसके बाद वहाँ हड़कंप मच गया।” वे कहते हैं कि गुरुद्वारे में 4 आतंकी घुसे और ताबड़तोड़ गोली चलानी शुरू कर दी। मैं स्टेज पर था। मेरे भतीजे ने मुझे नीचे उतारा। मगर जैसे ही मैं नीचे आया मेरी बेटी और पत्नी का शव मुझ पर आ गिरा। उनके अनुसार, आतंकियों का कहर 4 घंटे जारी रहा। इस दौरान उन आतंकियों ने कोशिश की कि हर श्रद्धालु के सिर पर गोली मारी जाए। लेकिन उनकी पत्नी और पिता के छाती में गोली लगी। इस बीच मोहर्रम अली नाम का सुरक्षा गार्ड भी भेंट चढ़ा। वो गुरुद्वारे में 5 साल से काम करता था, सबसे पहले उसे ही गोली मारी गई।

हरिंदर के अनुसार, अफगानिस्तान में करीब 80 सिख परिवार बचे हैं। ज्यादातर काबुल, जलालाबाद और गजनी में रहते हैं। इनमें से अधिकतर ने आतंकी हमले में किसी न किसी अपने को खोया है। अब शायद ही कोई परिवार यहाँ हो जिनका कोई अपना इस हमले में नहीं मरा। इसलिए सब यहाँ से जाना चाहते हैं। खुद 40 वर्ष उस देश में गुजार चुके हरिंदर कहते हैं, “पहले मुझे लगता था कि अफगानिस्तान मेरा देश हैं। पर अब नहीं। मैं यहाँ बिलकुल नहीं रहना चाहता।” उनसे जब पूछा गया कि वे कहाँ जाएँगे तो उन्होंने सिर्फ़ यही कहा, जहाँ पनाह मिलेगी चले जाएँगे पर अब यहाँ नहीं रहेंगे।