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कोरोना से स्पेनी राजकुमारी की मौत, संक्रमण से जान गॅंवाने वाली पहली शाही सदस्य हैं मारिया टेरेसा

कोरोना वायरस के संक्रमण से आम आदमी से लेकर खास तक हलकान हैं। राजपरिवार के लोग भी इससे अछूते नहीं हैं। हाल ही में ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए थे। अब स्पेन की राजकुमारी की इस खतरनाक वायरस की वजह से मृत्यु हो गई है। 86 वर्षीय प्रिंसेस मारिया टेरेसा इस संक्रमण संक्रमण से जान गॅंवाने वाली किसी भी राजपरिवार की पहली सदस्य हैं। वो बर्बन-परमा रॉयल परिवार की प्रिंसेज थीं। उनके भाई प्रिंस सिक्सटस हेनरी ने बहन की मृत्यु की जानकारी दी है।

स्पेन में कोरोना वायरस की वजह से हालात काफ़ी बिगड़े हुए हैं। अभी तक वहाँ लगभग 6000 लोगों की मौत हो चुकी है। हालाँकि, 12,000 से अधिक मरीज ठीक भी हुए हैं, लेकिन 73,235 कोरोना मामलों के साथ स्पेन इस वायरस के संक्रमण से दुनिया का चौथा सबसे ज्यादा प्रभावित देश बन गया है। एक दिन पहले सिर्फ़ 24 घंटे में स्पेन में 834 लोगों की मौत ने पूरे यूरोप को दहला दिया था। अधिकारियों का कहना है कि अब नए मामले नहीं मिल रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी काफ़ी ख़राब है।

जहाँ तक राजकुमारी टेरेसा की बात है, उनका जन्म जुलाई 28, 1933 को पेरिस में हुआ था। वो प्रिंस जेवियर और मैडेलिन की 6 संतानों में से एक थीं। बर्बन-परमा रॉयल परिवार स्पेन के राजपरिवार का कैडेट ब्रांच है। ये लोग ‘फ्रेंच कैपेटियन डायनेस्टी’ से ताल्लुक रखते हैं। रॉयल परिवार के उन सदस्यों को कैडेट कहा जाता है, जो गद्दी के उत्तराधिकारी नहीं होते। उन्हें संपत्ति और पदवी दी जाती है।

प्रिंसेस मारिया की कोई संतान नहीं हैं। लेकिन उनके कई भतीजा-भतीजी और भाँजे-भाँजियाँ हैं। उनका अंतिम संस्कार रॉयल फैमिली के प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में किया जाएगा। कोरोना वायरस के खतरों को देखते हुए ज्यादा जुटान नहीं होगा। बता दें कि स्पेन में भी अभी लॉकडाउन चल रहा है, जिसे कुछ और दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया था। वहाँ की अर्थव्यवस्था ठप्प पड़ी हुई है और बाजार वगैरह बंद होने के कारण लोग परेशान हैं।

लॉकडाउन में हाईवे पर हंगामा करते कॉन्ग्रेस नेता गिरफ्तार, अमरोहा से लड़ चुके हैं चुनाव

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने संपूर्ण भारत में लॉकडाउन कर दिया है। लॉकडाउन में घरों से बेवजह बाहर निकलने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कॉन्ग्रेस नेता सचिन चौधरी व दो अन्य को धारा 144 के उल्लंघन करने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया।

अमरोहा से कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके और उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के सचिव सचिन चौधरी पर हंगामा करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक शनिवार देर रात हाईवे पर जीरो प्वाइंट के पास भारी भीड़ जमा थी। भीड़ देख पुलिस वहाँ पर पहुँची। भीड़ हटाने की कोशिश की तो वहाँ पर कॉन्ग्रेस नेता और उनके दोस्तों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस के साथ अभद्रता की।

जानकारी के मुताबिक चिकित्सीय परीक्षण में शराब पीने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद पुलिस ने उन पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और लॉकडाउन का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया। बाद में उन्हें थाने से जमानत पर रिहा कर दिया गया।

कॉन्ग्रेस नेता ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें मुरादाबाद में सड़क पर लोगों की मदद करते हुए SSP अमित पाठक ने गिरफ्तार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि SSP का कहना किसी की मदद मत करो सरकार का आदेश है, जो मर रहा है मरने दो। आगे उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सड़कों पर लोगों को मारना चाहती है। क्या किसी की मदद करना भी अपराध है?

हालाँकि सोशल मीडिया यूजर्स को सचिन चौधरी की ये सफाई रास नहीं आई और उन्होंने उनको आड़े हाथों लेते हुए कई तंज कसे। एक यूजर ने लिखा, तुम मदद कर रहे हो या कालाबाजारी….पुलिस उसी को गिरफ्तार कर रही है जो कर्फ्यू का उल्लंघन करके 10 रुपए की चीज 20 में बेच रहे हैं। बाकी तू रात को 1 बजे क्या करने गया था?

एक अन्य यूजर ने लिखा, “झूठ… इस विकट समय में भी कॉन्ग्रेसी चरण चाटुकार झूठ बोलने से बाज नही आ रहे। पुलिस खुद खाना बाँट रही है, पैदल यात्रियों के लिए व्यवस्था करने का काम भी शुरू हो चुका है। तुम्हारे झूठ के जूते तुम्हे 2022 में पड़ जाएँगे।”

वहीं एक यूजर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि घर पर बैठने का आदेश मिला है तो क्यों नहीं बैठे रहे घर पर? यही सबसे बड़ी मदद है इस वक्त।

स्वाती सनातनी नाम के एक यूजर ने लिखा, “दिल्ली, पंजाब, राजस्थान की कॉन्ग्रेस मर गई जो वहाँ से जनता भाग रही, वही रोक लेते सुविधा दे देते। वहाँ पर मरने छोड़ दिए, जब यहाँ योगी जी 1000 बसें लगा उन लोगो को सुरक्षित पहुँचाने लगे तो आ गए गन्दी राजनीति चमकाने। रस्सी जल गई पर ऐंठन नही गई। विश्व की 4थी धनी महिला ने कितनी दान दी।”

गुरदीप सिंह नाम के शख्स ने लिखा, “मदद कर रहे थे या लोगों को भड़का रहे थे, खॉन्ग्रेसियों से तो मदद की उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि मेरी भी एक बार एक खॉन्ग्रेसी ने 1984 मे मदद की थी, लोगों को पेट्रोल दिया था मेरी दुकान जलाने के लिए।”

कोरोना से जंग जीतने वालों से PM मोदी की मन की बात, कहा- लॉकडाउन तोड़ने वाले जीवन से कर रहे खिलवाड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में कोरोना वायरस से जुड़े ख़तरों पर बात की और देश में चल रहे लॉकडाउन को लेकर जनता से अपनी बात साझा की। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसे लोगों से भी बातचीत की, जो कोरोना वायरस से अभी-अभी उबरे हैं। उन्होंने डॉक्टर नीतीश गुप्ता से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि उनके अस्पताल में कोरोना के 16 मरीज ठीक होकर जा चुके हैं। डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि मरीज कोरोना के बारे में सुनकर डर जाते हैं, इसलिए उनकी काउंसलिंग भी करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि हमारा एक ही कर्तव्य है, सभी लोगों को ठीक कर के घर भेजने के प्रयास में लगे रहना।

कोरोना के संक्रमण से हल ही में उबरे अशोक कपूर ने पीएम मोदी से बातचीत के दौरान बताया कि वो और उनके परिवार के 6 लोग पीड़ित थे। उन्हें आगरा से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि पूरे परिवार को 14 दिन अस्पताल में रखा गया। उन्होंने डॉक्टरों व अन्य मेडिकल कर्मचारियों का धन्यवाद किया और कहा कि उन्होंने काफ़ी अच्छे से सबका ख्याल रखा। वहीं कोरोना से ठीक हुए रामगम्पा तेजा ने बताया कि वो काम की वजह से दुबई गए थे, लेकिन संक्रमित हो गए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें डर लग रहा था लेकिन बाद में डॉक्टरों और नर्सों ने उनका हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी ने पीड़ितों की बात सुनने के बाद अपनी बात रखते हुए कहा:

मैं जानता हूँ कि कोई कानून नहीं तोड़ना चाहता है, लेकिन कई लोग कानून तोड़ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, लॉकडाउन को तोड़ेंगे तो कोरोना वायरस से नहीं बच पाएँगे। नियम तोड़ने वाले अपने जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आपको होने वाली असुविधा और कठिनाई के लिए मैं क्षमा माँगता हूँ। बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निपटना पड़ता है, नहीं तो बाद में यह असाध्य हो जाता है। भारत आज यही कर रहा है। भारत जैसे 130 करोड़ लोगों के देश में कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए कोई और रास्ता नहीं था, कठोर कदम उठाना जरूरी था।

पीएम मोदी ने कहा कि अन्य देशों का उदाहरण देखें तो कोरोना के मामलों में मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ जाती है। भारत में ऐसी स्थिति ना हो, इसका हमें ध्यान रखना है। उन्होंने माना कि लॉकडाउन की वजह से लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा है। साथ ही इस क़दम को ज़रूरी भी बताया। प्रधानमंत्री ने संकट की घड़ी में गरीबों, भूखे लोगों की मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने कोरोना के पीड़ितों और संदिग्धों के साथ भेदभाव न करने की सलाह देते हुए कहा कि ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ रखना है, ‘इमोशनल डिस्टेंसिंग’ नहीं।

पीएम ने कहा कि आज के कठिन समय में दुकानदार, ड्राइवर्स, वर्कर्स, बैंकिग क्षेत्र के लोग जोखिम उठाकर काम कर रहे हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों के लोग भी ऐसे वक्त डिलिवरी के काम में लगे हैं। फोन और इंटरनेट आदि सेवाओं में भी कई लोग लगे हैं। उन्होंने इन सभी लोगों को धन्यवाद दिया। पीएम ने डॉक्टरों के त्याग व समर्पण को देखते हुए आचार्य चरक की इन पंक्तियों की उद्धृत किया:

“धन और किसी खास कामना के लिए नहीं, बल्कि मरीज की सेवा के लिए दयाभाव रखकर काम करता है, वही सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक होता है।“

शिया देशद्रोही, जान-बूझकर कोरोना वायरस फैलाया, उन्हें गिरफ़्तार कर सज़ा दो: Pak में आपस में ही सिर-फुटव्वल

पाकिस्तान में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 1500 के पार पहुँच गई है। 12 लोगों की मौत भी हो चुकी है। स्थिति भयावह है, क्योंकि अस्पतालों में समुचित व्यवस्था नहीं है। लोगों की स्क्रीनिंग की भी सुविधा काफ़ी कम है। वहाँ की सरकार ने अर्थव्यवस्था के गिरने के डर से लॉकडाउन जैसे बचाव के उपायों की घोषणा करने में भी कोताही दिखाई है। मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान में कोरोना वायरस के शुरुआती मामले ईरान से लौटे उन मजहबी तीर्थयात्रियों के हैं, जो तफ्तान सीमा से होकर देश में घुसे। ये सभी शिया समुदाय से थे, जो ईरान गए थे।

इन इस्लामी तीर्थयात्रियों में से अधिकतर 15 मार्च को वापस लौटे और उसके बाद से ही पाकिस्तान में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा होना शुरू हो गया। इसके बाद कुछ पाकिस्तानी तुरंत ट्विटर पर गए और उन्होंने शिया समुदाय को खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। प्रोफेसर खालिद शेख ने लिखा कि कोरोना वायरस का प्रकोप ख़त्म होने तक देश भर में शिया समुदाय को किसी भी कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उन्होंने इसे शर्म की बात बताते हुए दावा किया कि शिया समुदाय ही ईरान से कोरोना वायरस पाकिस्तान लाया है।

कुछ पाकिस्तानियों ने तो चीन को क्लीनचिट देते हुए दावा किया कि उससे ज्यादा तो कोरोना को फैलाने के लिए शिया जिम्मेदार हैं। सैयद अज़ीम ने लिखा कि इसे ‘चाइनीज वायरस’ कहने की बजाय ‘शिया वायरस’ कहना चाहिए।

कुछ पाकिस्तानियों ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि शिया समुदाय ने जान-बूझकर कोरोना वायरस को फैलाया है। उन्होंने दावा किया कि शियाओं ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ईरान से वायरस लाकर यहाँ फैलाया। अन्य पाकिस्तानियों ने ईरान से लौटे शियाओं को देशद्रोही करार दिया। एक अन्य व्यक्ति ने माँग करते हुए कहा कि सभी शिया समुदाय वालों को गिरफ़्तार कर सज़ा देनी चाहिए और उन्हें क्वारंटाइन किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहा है, इसीलिए वह पूरे दक्षिण एशिया के लिए ख़तरा बन गया है। वहाँ मुल्ले-मौलवी अभी भी मजहबी कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और उन्हें खुली छूट मिली हुई है। इसके उलट भारत में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई है। यहाँ सभी प्रकार के धार्मिक व मजहबी कार्यक्रमों पर रोक लगी हुई है, ताकि भीड़ न जुटे।

गुजरात: 6 दिन में 2200 बेड के 4 कोविड हॉस्पिटल तैयार, राज्य में संक्रमण के अब तक 58 मामले

गुजरात में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 58 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1 विदेशी है। 4 की मौत हो चुकी है। संक्रमण के बढ़ते मामलों पर काबू पाने के लिए राज्य की मशीनरी काफी तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में केवल 6 दिनों में ही 2200 बेड के अस्पताल तैयार किए गए हैं।

मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने 21 मार्च को राज्य के चार महानगरों 2,200 बिस्तर के कोविड-19 अस्पताल का निर्माण करने की घोषणा की थी। अथॉरिटीज ने इस पर तत्काल अमल किया और केवल 6 दिनों में यह काम पूरा कर दिया।

6 दिनों में राज्य के 4 शहरों में 2200 बेड का कोविड हॉस्पिटल तैयार किया गया है। अहमदाबाद में 1,200 बेड और 50 ऑपरेशन थियेटर की सुविधा वाला नया सिविल अस्पताल। सूरत में 500 बेड का अस्पताल। वडोदरा में 250 बेड का अस्पताल और राजकोट में 250 बेड की सुविधा है।

इन अस्पतालों ने काम भी करना शुरू कर दिया है। 2200 बेड वाले इन अस्पतालों में सभी तरह की सुविधाएँ और दवाइयॉं मौजूद हैं। डॉक्टरों ने बाताया कि कोरोना पॉजीटिव मरीज से किसी और को संक्रमण न हो, इसलिए इन हॉस्पिटल में केवल कोरोना से संक्रमित मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। ये हॉस्पिटल सभी तरह की सुविधाओं और दवाओं के साथ विश्व सवास्थ्य संगठन (WHO) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार काम कर रहा है।

सूरत में कोविड-19 के लिए स्पेशल अस्पताल में ICU के 40 और जनरल के 140 बेड्स की व्यवस्था है। वहीं वडोदरा में ICU में 50 और जनरल में 200 बेड्स का बंदोबस्त है। राजकोट में ICU के 40 और जनरल के 160 बेड्स की व्यवस्था है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक अब तक कोरोना के 918 केस की पुष्टि हुई है। इन 918 संक्रमितों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें से 79 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं। जबकि 19 लोगों की मौत हो गई है। वहीं दुनिया भर में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमण के 6 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 28,812 लोगों की इस संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। अकेले इटली में अब तक 9,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 80 हज़ार से अधिक लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं।

शादी समारोह, मस्जिद, अस्पताल… पूरा मेरठ घूम गया महाराष्ट्र का कोरोना + शख्स, बीवी-साले भी संक्रमित

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन जारी है। बावजूद इसके संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पहुँचा एक शख्स कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। हाल ही में महाराष्ट्र के अमरावती से मेरठ पहुँचे शख्स में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। साथ ही परिवार के 4 अन्य लोगों में भी कोरोना वायरस का संक्रमण मिला है। इस तरह मेरठ में संक्रमण के 5 नए मामले एक ही परिवार में सामने आए हैं।

मेरठ में एक ही परिवार से कोरोना वायरस के 5 मरीज मिलने से हड़कंप मच गया है। मरीजों की संख्‍या सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे ने 38 लोग की पहचान की है। बताया जा रहा है कि इन 38 मरीजों में किसी को भी कोरोना हो सकता है। कोरोना का यह संक्रमित मरीज महाराष्ट्र के अमरावती से 19 मार्च को मेरठ पहुँचा था। 

जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति का मेरठ में ससुराल है। वह अपनी पत्नी के साथ महाराष्ट्र से मेरठ आया था। शुक्रवार को मेरठ मेडिकल अस्पताल में उसके कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई थी। इसके बाद संपर्क में रह रही पत्नी और 3 सालों को भी शुक्रवार को भर्ती कराया गया। अब उसकी पत्नी और तीन सालों को भी कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। इस तरह मेरठ में अभी तक 2 दिन में 5 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना मरीज मेरठ में एक शादी में आया था। उन्होंने बताया कि मरीज में संक्रमण की पुष्टि की रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार और अमरावती प्रशासन को भी भेज दी गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि 19 से 26 मार्च के बीच मरीज ने दो मस्जिदों में नमाज अदा की थी। 27 मार्च को उसके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। इससे पहले उसने दो दिनों तक निजी अस्पताल में इलाज भी करवाया था। इसके बाद विभाग को आशंका है कि दर्जनों अन्य भी कोरोना संक्रमित पाए जा सकते हैं। मरीज ने जिस अस्पताल में इलाज करवाया था, अब उसके डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की भी जाँच की जाएगी। मरीज कहाँ-कहाँ गया, इसकी पड़ताल करने के लिए 110 टीमों का गठन किया गया है।

‘राघव चड्ढा की हरकत आतंकवाद से कम नहीं’: झूठी खबर को लेकर केजरीवाल के विधायक पर FIR

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने और उनकी मानहानि करने के आरोप में आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज किया गया है। चड्ढा के ख़िलाफ़ वकील प्रशांत पटेल उमराव ने मामला दर्ज कराया है। उन पर वैमनस्य का माहौल बनाने, घृणा व द्वेष फैलाने और सीएम योगी आदित्यनाथ की मानहानि करने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर नोएडा में दर्ज कराई गई है।

दिल्ली के राजेंद्र नगर से विधायक राघव चड्ढा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 500 (किसी की मानहानि करना), धारा 505 (2) (विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाएँ पैदा करने के आशय से झूठ बोलना) और आईटी एक्ट 66 (आपत्तिनजक पोस्ट या ट्वीट करना) का आरोप लगाया गया है। प्रशांत पटेल उमराव ने हर्षवर्धन त्रिपाठी के एक ट्वीट को रीट्वीट भी किया है, जिसमें कहा गया है कि राघव चड्ढा ने जो हरकत की है, वो आतंकवाद से कम नहीं है।

बता दें कि राघव चड्ढा ने ट्वीट किया था कि उन्हें सूत्रों से पता चला है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली से जाने वाले मजदूरों को दौड़ा-दौड़ा कर पिटवा रहे हैं। बकौल चड्ढा, सीएम योगी ने मजदूरों से पूछा कि वो दिल्ली क्यों गए थे और साथ ही धमकाया कि उन्हें आगे से दिल्ली नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने यूपी सरकार पर संकट की घड़ी में समस्याओं को बढ़ाने का आरोप मढ़ा था। चड्ढा ने अपनी बात को साबित करने के लिए कुछ नहीं किया। उनके आरोप का आधार क्या था, ये भी उन्होंने नहीं बताया।

राघव चड्ढा के इस ट्वीट को शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने लिखा है, “यह सरासर झूठी ख़बर है, ऐसी महामारी के समय भी इनकी पार्टी गंदी राजनीति खेलने से बाज़ नहीं आ रही है, इतना नीचे कैसे गिर सकती है आम आदमी पार्टी? इस ट्वीट पर उत्तरप्रदेश सरकार और पुलिस निश्चित कार्यवाही करेगी।”

बता दें कि दिल्ली सरकार पर प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन के नाम पर गुमराह करने का आरोप है। कहा जा रहा है कि इनलोगों के बिजली-पानी कनेक्शन काट उन्हें यूपी बॉर्डर पर छोड़ दिया गया था। यह अफवाह फैलाई गई बॉर्डर पर उनको घर ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। इसको लेकर ट्विटर पर सहायक अध्यापक (ट्विटर अकाउंट द्वारा उपलब्ध जानकारी) महेंद्र सिंह ने दिल्ली से UP-बिहार की ओर पलायन कर रहे लोगों की स्थिति को लेकर एक ट्वीट करते हुए लिखा, “दिल्ली में रह रहे मजदूरों के घर का पानी, बिजली काट दिया गया। अफ़वाह फैलाई कि लॉकडाउन 3 महीने का होगा। अफ़रातफ़री मच गई। बसों में भर कर लोगों को यूपी बॉर्डर पर भेज दिया। रात भर गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़ में 1000 से ज्यादा बसें लगाकर इनको गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था की गई।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि दिल्ली ने प्रवासी मजदूरों को निराश किया है। चड्ढा ने उनके ट्वीट को रिट्वीट करते हुए यूपी सरकार पर आरोप लगाए थे।

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत को अमेरिका देगा 2.9 मिलियन डॉलर की मदद

दुनिया के करीब 200 देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहे हैं। अब तक लाखों लोगों की जान जा चुकी है। इसी बीच लोगों की जिंदगियाँ बचाने के लिए अमेरिका आगे आया है। अमेरिका ने भारत सहित दुनिया के 64 देशों की आर्थिक रूप से मदद करने के लिए 174 मिलियन डॉलर के पैकेज का ऐलान किया है। अमेरिका ने कोरोना से निपटने के लिए भारत को 2.9 मिलियन डॉलर (करीब 22 करोड़ रुपए) की राशि देने की घोषणा की है।

बता दें कि यह राशि फरवरी में अमेरिका की ओर से घोषित 10 करोड़ डॉलर की मदद के अलावा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक लेबोरेटरी सिस्टम, ऐक्टिव केस ढूँढने, निगरानी और टेक्निकल एक्सपर्ट्स की मदद संबंधी तैयारियों आदि को दुरुस्त करने के काम में इस पैसे का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

अमेरिका ने भारत के अलावा बांग्लादेश को 3.4 बिलियन डॉलर, अफगानिस्तान को 5 मिलियन डॉलर, श्रीलंका को 1.3 मिलियन डॉलर और नेपाल को 1.8 डॉलर की राशि देने का ऐलान किया है। अमेरिका ने कहा है कि वो दशकों से स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दुनिया में मदद देता रहा है। स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, “अमेरिका लोगों की जिंदगियाँ बचाने में आगे रहा है, हम वैसे लोगों की रक्षा करते रहे हैं, जिन्हें बीमारियों की चपेट में आने का खतरा है, हम स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित संस्थान बनाते रहे हैं और समुदायों और राष्ट्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करते रहे हैं।” बता दें कि इस वक्त अमेरिका खुद भी कोरोना महामारी से जूझ रहा है। वहाँ पर अभी एक लाख से ज्यादा कोरोना मरीज हैं, जिनका देश के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, अब तक कोरोना के 918 केस की पुष्टि हुई है। इन 918 संक्रमितों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें से 79 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं। जबकि 19 लोगों की मौत हो गई है। कोरोना वायरस के मामले लगातार दुनियाभर में बढ़ रहे हैं। दुनिया भर में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमण के छह लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 28,812 लोगों की इस संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। वहीं, अकेले इटली में अब तक 9,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 80 हज़ार से अधिक लोग संक्रमित बताए जा रहे हैं। इटली में संक्रमण से होने वाली मौत के आँकड़े चीन और USA से कहीं आगे निकल चुके हैं।

‘रोहिंग्या सुरक्षित, मजदूरों को भगा दिया’: सोशल मीडिया में फूटा गुस्सा, ट्रेंड में #ArrestKejariwal

जब पूरा देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा है, दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। दिल्ली के मुखिया अरविंद केजरीवाल को लेकर सोशल मीडिया में खासी नाराजगी दिख रही है। #ArrestKejariwal ट्रेंड कर रहा है। असल में यूपी सरकार ने एक बयान जारी कर बताया था कि किस तरह प्रवासी मजूदरों को दिल्ली में गुमराह किया गया। बिजली-पानी के कनेक्शन काट कर उन्हें बॉर्डर पर छोड़ दिया गया। इसके बाद से ‘द क्विंट’ जैसे प्रोपेगेंडा पोर्टल दिल्ली के मुखिया को क्लीन चिट देकर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार पर दोष मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। ‘द क्विंट’ ने लिखा कि यूपी सरकार ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए बसों का इंतजाम किया जा रहा है, तभी इतने लोग जुटे।

यहाँ ये बताना ज़रूरी है कि तमाम विपक्षी नेता और मीडिया का एक बड़ा वर्ग मजदूरों के पलायन को लेकर मोदी सरकार पर लॉकडाउन के लिए आधी-अधूरी तैयारी होने और योगी सरकार पर उन्हें पिटवाने का आरोप लगा रहे थे। लगातार आ रही ऐसी ख़बरों के बीच योगी सरकार ने उन मजदूरों के लिए सैनिटाइजस बसों का इंतजाम किया। मजदूरों की स्क्रीनिंग की गई और उनके खाने-पीने का इंतजाम किया गया। यानी, बसों का इंतजाम भीड़ जुटने और मीडिया द्वारा हाइप बनाने के बाद हुआ, न कि पहले। इस हिसाब से ‘द क्विंट’ ने केजरीवाल को बचाने के लिए योगी आदित्यनाथ पर हिटजॉब किया है।

उधर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी कई विडियो जारी कर केजरीवाल सरकार की पोल खोली है। एक विडियो में दिख रहा है कि दिल्ली की गलियों में माइक से अनाउंसमेंट किए जा रहे हैं। इस अनाउंसमेंट में कहा जा रहा है कि आनंद विहार के लिए बसें जा रही हैं, उससे आगे यूपी-बिहार के लिए बसें मिलेंगी। सोते हुए लोगों को उठा-उठा कर बसों से उप्र बॉर्डर पर भेजा गया। कपिल मिश्रा ने इसे सोची-समझी साजिश करार दिया। शनिवार (मार्च 28, 2020) की रात को भी जगह-जगह से आनंद विहार के लिए बसें चलाई गईं। इन्हीं बसों से वहाँ हज़ारों की भीड़ जुटी। कपिल मिश्रा ने पूछा कि आखिर केजरीवाल चाहते क्या हैं?

सोशल मीडिया पर भी लोगों का आक्रोश फूटा, जहाँ उन्होंने केजरीवल को गिरफ़्तार करने की माँग की। लोगों ने कहा कि उनकी इस हरकत को देखते हुए उनके लिए कोई संसदीय शब्द का इस्तेमाल किया ही नहीं जा सकता। कई लोगों ने पूछा कि दिल्ली में तो राजस्थान और हरियाणा के भी लोग रहते हैं, उन्हें अपने घरों में क्यों नहीं भेजा गया? कई लोगों ने पूछा कि दिल्ली से सिर्फ बिहारी और यूपी के मजदूर ही क्यों पलायन कर रहे हैं, जबकि रोहिंग्या और अन्य घुसपैठिए सुरक्षित हैं? कुछ लोगों के सवाल थे कि जब केजरीवाल ने बसें उपलब्ध कराई ही थी तो गंतव्य तक क्यों नहीं छोड़ा? बॉर्डर पर ही क्यों छोड़ दिया?

उधर, उत्तर प्रदेश में मजदूरों के लौटने से संकट पैदा हो गया है। आशंका है कि इनमें से कई कैरियर हो सकते हैं, जिसके कारण महामारी फ़ैल सकती है। ‘नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल’ ने इसके लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सरकार को पता है कि ग्रामीण इलाक़ों में कोविड-19 से लड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और अगर वहाँ स्थिति बिगड़ती है तो भारत में माहौल ख़राब हो जाएगा। ऐसे में सरकार इन राज्यों में अब ‘रैपिड रिस्पांस टीम’ के जरिए निगरानी में जुटी है।

मौत के बाद पता चला कोरोना+ था सैफ, तब तक हो गई थी भारी चूक: बिहार में सामुदायिक संक्रमण का खतरा

बिहार के मुंगेर जिले के 38 वर्षीय व्यक्ति सैफ की 21 मार्च को कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पटना के एम्स में मौत हो गई थी। वह कतर से लौटा था। इस मामले में अब जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार सैफ के परिवार के 2 सदस्य और पटना के जिस प्राइवेट अस्पताल में इसका इलाज हो रहा था, वहाँ के दो कर्मचारी भी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इस नए घटनाक्रम के बाद आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग संक्रमित हो सकते हैं, जो मृतक के परिवार के इन दो सदस्यों अथवा प्राइवेट अस्पताल के उन दो कर्मचारियों के संपर्क में आए थे। इसके कारण बिहार में सामुदायिक संक्रमण की आशंका पैदा हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आने के बावजूद भी अस्पताल के इन दोनों कर्मचारियों ने भयानक लापरवाही दिखाई। इन दोनों में से एक लैब टेक्नीशियन अलग-अलग जगहों पर जहाँ करीब 50 लोगों के संपर्क में आया था, वहीं वार्ड बॉय ने पटना में एक शादी समारोह में शिरकत की थी जिसमें करीब 80 लोग शामिल हुए थे।

इन 130 लोगों में से 110 लोग आइसोलेशन में रखे गए हैं, जबकि कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने की आशंका वाले लोगों की पहचान और निगरानी के प्रयास जारी हैं। शरणम् अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य मेडिकल स्टॉफ को भी आइसोलेशन में रखा गया है। अस्पताल ने अब तक किसी और कोरोना पॉजिटिव केस पाए जाने की जानकारी नहीं दी है। इनके अलावा सैफ परिवार के अन्य सदस्य व रिश्तेदार भी संक्रमण के खतरे से बाहर नहीं हैं, क्योंकि एम्स पटना ने जाँच रिपोर्ट आने से पहले ही उसका शव अंत्येष्टि के लिए परिवार को सौंप दिया था।

पटना के एक डॉक्टर ने बताया कि बिहार के ये चार COVID-19 मामले इस तरफ संकेत करते हैं कि बिहार में वायरस का सामुदायिक संक्रमण हुआ है, जो क्वारन्टाइन कदम उठाने के लिए प्रशासन को पर्याप्त वजह देता है। आशंका है कि कोरोना संक्रमित मामलों में वृद्धि हो सकती है। कोरोना से मरने वाले इस व्यक्ति को पहले मुंगेर के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उसके बाद उसे पटना के शरणम अस्पताल लाया गया। तबीयत और बिगड़ने पर उसे 20 मार्च को पटना के एम्स में भर्ती करवाया गया था, जहाँ 21 मार्च को उसकी मौत हो गई थी।

सैफ पहले से ही किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था, इसलिए एम्स में उसकी डायलिसिस की जा रही थी। बाद में मेडिकल स्टॉफ ने उसमें श्वसन संबंधी दिक्क्तों को भी नोटिस किया और उसकी ट्रैवल हिस्ट्री को देखते हुए, जाँच के लिए नमूनों को 20 मार्च को भेजा। लेकिन इन टेस्ट्स के अंतिम परिणाम आने से पहले ही इसकी मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही का परिचय देते हुए सैफ का शव उसके परिवार को सौंप दिया जो उसको पटना से मुंगेर अंत्येष्टि के लिए ले गए। इस लापरवाही का खामियाजा किस हद तक भुगतना होगा यह आने वाले दिनों में साफ़ हो सकेगा।