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दुबई से लौटकर था क़्वारन्टाइन, गर्लफ्रेंड को मिलने के लिए भागा, कहा- घरवाले नहीं मान रहे थे

ऐसे समय में, जब सरकार देशभर में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लोगों के बाहर न निकलने की अपील कर रही है, कुछ लोग बेहद मूर्खतापूर्ण हरकतें करते हुए देखे जा रहे हैं और अपने साथ-साथ पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों की जान को भी खतरे में डाल रहे है। खासतौर पर विदेशों से लौट रहे लोग अन्य लोगों के लिए खतरा बन चुके हैं। ऐसा ही एक किस्सा मदुरै में देखने को मिला है, जहाँ क़्वारंटाइन किया हुआ एक युवक सिर्फ अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए भाग निकला।

22 साल के इस युवक को कोरोना वायरस होने की आशंका के कारण मदुरै जिले में क्‍वारंटाइन किया गया था, लेकिन वह वहाँ से फरार होकर अपनी गर्लफ्रेंड के घर जा पहुँचा। यह युवक हाल ही में दुबई से लौटा था, जिसके बाद उसे यहाँ पर संक्रमण से सुरक्षा के कारण पृथक रखा गया था। क्‍वारंटाइन सेंटर से उसके फरार होने की खबर मिलते ही पुलिस और तमाम स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों की चिंताएँ बढ़ गई हैं, जो इस संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने और रोगियों के इलाज में दिन-रात एक किए हुए हैं।

पुलिस ने इस शख्‍स को शिवगंगा जिले में उसकी गर्लफ्रेंड के घर में पाया, जिसके बाद उसे वहाँ से वापस पृथक केंद्र लाया। युवक से मिलने के बाद अब लड़की को भी आइसोलेशन में (अलग) रखा गया है। यह युवक दुबई से 21 मार्च को मदुरै पहुँचा था।

युवक से पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि लड़की (गर्लफ्रेंड) के माता-पिता उनके रिश्‍ते के लिए तैयार नहीं है और वो उसकी शादी जबरदस्ती किसी अन्य युवक से करा रहे थे, जिस कारण उसे अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए क़्वारंटाइन से भागना पड़ा। युवक के खिलाफ क्‍वारंटाइन के नियमों की अवहेलना करने को लेकर केस दर्ज किया गया है। दरअसल, सरकार इस संक्रमण को रोकने के लिए हर कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है और निरंतर लोगों से अपील कर रही है कि वह कुछ दिनों के लिए अपने दैनिक कार्यक्रमों को छोड़कर अपने घर पर रहें क्योंकि कोरोना वायरस के कम्युनिटी संक्रमण का सबसे ज्यादा ख़तरा मानव-से-मानव में होने वाला संक्रमण है।

देश में कोरोना से पीड़ित लोगों की संख्या 700 के पार पहुँच गई है। इस बीच इससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया है, उसका आज तीसरा दिन है। लॉकडाउन के चलते आम जनमानस को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और हजारों मजदूर अपने घरों के लिए पैदल ही निकल रहे हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी कोरोना पॉजिटिव, प्रिंस चार्ल्स पहले से ही हैं संक्रमित

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इसकी जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट के जरिए दी है। उन्होंने बताया कि उनमें कोरोना के हल्के लक्षण हैं और डाउनिंग स्ट्रीट में उन्हें क्वारंटाइन कर दिया गया है। इससे पहले प्रिंस चार्ल्स भी कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। अब उनका स्वास्थ्य बेहतर है।

बता दें यूके में कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या बुधवार (25 मार्च) सुबह तक बढ़कर कुल 11,600 हो गई है। वहीं मरने वालों की संख्या 578 है।

इससे पहले यूके के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड सोशल केयर ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा था कि मंगलवार (24 मार्च) के आधिकारिक आँकड़ों की तुलना में कुल 1,452 मामलों की वृद्धि देखने को मिली।

गौरतलब है कि सरकार के पिछले एक बयान के अनुसार, अधिकारी कोविड-19 संक्रमण के टेस्ट की संख्या बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड और नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) एक दिन में 25 हजार तक टेस्ट कर सकता है। डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड सोशल केयर ने कहा कि पूरे देशभर के स्थानीय अस्पतालों में मंगलवार (24 मार्च) तक 1.5 करोड़ फेस मास्क वितरित किए गए थे।

‘चायनीज कोरोना’ के खिलाफ लड़ाई में स्पेन और चेक रिपब्लिक को चीन ने बेंचे घटिया टेस्टिंग किट्स, मरने वालों की संख्या बढ़ी

‘एव्री रियल क्राइसिस इज अ ऑपर्च्युनिटी’ ऐसी कुछ कहावत कहते हैं अंग्रेजी में जिसका मतलब है कि संकट हमेशा एक बढ़िया अवसर होता है जिसे भुनाने से चूकना नहीं चाहिए! यह कहावत वैश्विक कोरोना महामारी के इस कठिन दौर में चीन के क्रियाकलापों को देखते हुए, उस पर खरी उतरती है। एक तरफ उसने नोवेल कोरोना वायरस को दबाने की कोशिश कीं जबकि सही समय पर इस घातक वायरस से दुनिया को चेता कर वह दुनिया भर को इस महामारी से बचा सकता था, दूसरी तरफ वह इस संकट की घड़ी में दुनिया भर के सामने यह जताने की फ़िराक में लगा हुआ है कि वह इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में उनके साथ है, उन्हें मेडिकल टीम्स, उपकरणों आदि के जरिए मदद कर रहा है।

हालाँकि मीडिया में आ रहीं रिपोर्ट्स के अनुसार सच्चाई इससे ठीक उलट है और चीन इस मौके को भी सिर्फ अपना धंधा बढ़ाने, मुनाफे कमाने के तौर पर देख रहा है। वह भी घटिया क्वालिटी के उपकरण बेंच कर जिनमें से ज्यादातर किसी काम के नहीं है। उदाहरण के लिए कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या में इटली के बाद आने वाले स्पेन के स्वास्थ्य मंत्री ने बुधवार को बताया था कि उनके देश ने चीन से 467 मिलियन यूरो के चिकित्सा उपकरण खरीदे हैं, जिसमें 950 वेंटिलेटर्स, 5.5 मिलियन टेस्टिंग किट्स, 11 मिलियन ग्लव्स और 50 करोड़ से ज्यादा फेस मास्क्स शामिल हैं।

अब रिपोर्ट्स आ रहीं कि इन खरीदी गईं मेडिकल टेस्टिंग किट्स में से ज्यादातर किसी काम की नहीं हैं। कुल 55 लाख टेस्टिंग किट्स में से अबतक खराब किट्स की संख्या 6,40,000 पहुँच चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बकौल स्पेन की लैब्स ये रैपिड टेस्टिंग किट्स मात्र 10 में से 3 मामलों में कोरोना संक्रमित व्यक्ति की पहचान कर पा रहीं हैं। यानी अगर 10 कोरोना संक्रमित व्यक्तियों का टेस्ट इन किट्स के जरिए होता है तो उसमें से महज 3 मामलों में ये किट सही परिणाम दे पातीं हैं। जानकारों के अनुसार जबकि टेस्ट परिणाम 80% होना चाहिए यानी हर 10 संक्रमित मरीज में से कम से कम 8 के टेस्ट सही आने चाहिए।

चीन ने इन घटिया किट्स के आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा है कि जो टेस्टिंग किट्स उसने स्पेन को बेंची हैं वो Bioeasy नामक कम्पनी ने बनाई हैं जिसे ऐसी किट्स बनाने का लाइसेंस नहीं मिला हुआ है। यहाँ पर सवाल उठता है कि फिर उसने ऐसी लापरवाही की कैसे? जितना पैसा और जो समय स्पेन ने चीन से इन मेडिकल उपकरणों को हासिल करने में जाया किया है उसका बेहद बुरा प्रभाव उस पर पड़ सकता है जहाँ अभी तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 4100 से ज्यादा हो चुकी है जो इटली के बाद सबसे ज्यादा है।

ठीक यही हाल चेक रिपब्लिक का है जिसने 300,000 रैपिड कोरोना वायरस किट्स चीन से मँगवायीं थीं पर अब मालूम पड़ रह कि इनमें से 80 फीसदी किसी काम की नहीं है। 1.83 मिलियन यूरो कीमत की ये किट्स कोरोना संक्रमण के नतीजे गलत तरह से दर्शा रहीं हैं यानी कोरोना पॉजिटिव को निगेटिव और कोरोना निगेटिव को पॉजिटिव। रिपोर्ट्स के अनुसार चेक रिपब्लिक से इन खराब किट्स के बावत यह सूचना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ओस्त्रावा के हाईजिनिस्ट्स के द्वारा सामने लाई गई है।

याद रहे कि अबतक विश्व में ‘चायनीज कोरोना वायरस’ से संक्रमित लोगों की संख्या 5 लाख 42 हजार से ज्यादा हो चुकी है जिनमें से 24,000 से ज्यादा लोग मर चुके हैं।

केरल: कोरोना पर जागरूकता फैलाने जा रहे स्वास्थ्यकर्मियों की मदद करने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को पीटा, 4 जख्मी

केरल में स्थानीय लोगों द्वारा पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की खबर सामने आई है। केरल के कासरगोड जिले के डेलमपेडी में एक उप-निरीक्षक समेत चार पुलिसकर्मियों पर उस वक्त हमला किया गया जब ये लोग स्वास्थ्य विभाग की एक टीम की कॉलोनी में प्रवेश करने में मदद कर रहे थे। स्थानीय लोगों द्वारा किए गए इस हमले में पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। 

केरल के एक दैनिक समाचारपत्र केरल कौमुदी ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमण के बचाव को लेकर जागरुकता अभियान के लिए कालीदुकु कॉलोनी में जा रहे थे, तभी स्थानीय लोगों का एक समूह इनके ऊपर टूट पड़ा। जिला कलेक्टर के आदेश पर पुलिस की एक टीम स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मदद और बचाव के लिए वहाँ पर गई, लेकिन पुलिस की टीम भी हमले की चपेट में आ गई। स्थानीय लोगों ने उन्हें भी पीटना शुरू कर दिया। सभी घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वहीं इस घटना के सिलसिले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।

गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है। हर रोज कोरोना के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस महामारी की चपेट में लगभग 775 लोग आ चुके हैं, जबकि 20 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य केरल और महाराष्ट्र है। केरल में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 137 है, जबकि महाराष्ट्र में कोरोना के मरीजों की संख्या 130 है। इस महामारी ने यहाँ पर 3 लोगों की जान ले ली है। सबसे पहले केरल में ही कोरोना का संक्रमित मरीज मिला था।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने गुरुवार (मार्च 26, 2020) को कोरोना वायरस पर समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से कहा था कि कन्नूर से सबसे अधिक नौ मामले सामने आए। इसके बाद कासरगोड और मलप्पुरम जिलों से तीन-तीन, जबकि इडुक्की और वायनाड से एक-एक मामला सामने आया। उन्होंने कहा कि राज्य में 1.20 लाख से अधिक लोगों को निगरानी में रखा गया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस के मद्देनजर केन्द्र सरकार की ओर से जारी राहत पैकेज का स्वागत किया।

भोपाल: पाबंदी के बावजूद कहीं मस्जिद तो कहीं घर में सामूहिक नमाज करवा रहे थे इमाम, 60 पर FIR

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। एक जगह लोगों से इकट्ठा नहीं होने को कहा जा रहा है। खुद प्रधानमंत्री सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की है। असल में इस संक्रमण से बचाव का सबसे बेहतर उपाय सोशल डिस्टेंसिंग ही है। कई उलेमा ने भी समुदाय के लोगों से घर में ही नमाज पढ़ने और एक जगह जमा नहीं होने की अपील की है। साथ ही पुलिस-प्रशासन के निर्देशों को मानने की अपील की है। बावजूद समुदाय विशेष के एक वर्ग को यह बात समझ नहीं आ रही। वे सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं और रोके जाने पर प्रशासन से भिड़ने को तैयार हो जाते हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से इसी तरह की दो घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 60 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। इनमें से एक मामले में मस्जिद में नमाज पढ़ी जा रही थी तो दूसरे मामले में इमाम अपने घर में लोगों को इकट्ठा कर नमाज पढ़वा रहा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार रात शहर के टीला जमालपुरा इलाके में मस्जिद के इमाम शाहीद नासिर के घर में लोग इकट्ठा होकर नमाज अदा कर रहे थे। इसकी सूचना मिली तो पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269, 270 के तहत केस दर्ज किया और इनमें से 20 का टेस्ट भी करवाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस इलाके में गश्त कर रही थी। इसी दौरान देखा कि एक घर में सामूहिक रूप से 25 से लेकर 30 लोग नमाज अदा कर रहे हैं। इस मामले के सामने आने से पहले शहर के काजी ने इकट्ठा होकर नमाज नहीं पढ़ने की अपील की थी।

दूसरी घटना में भोपाल के तलैया स्थित जैनब मस्जिद इस्लामपुरा में इमाम सहित करीब 30 लोग रात के वक़्त जमा होकर नमाज अदा कर रहे थे। पुलिस ने इनके खिलाफ़ 144 धारा का उल्लंघन करने पर मामला दर्ज किया। जानकारी के अनुसार लॉकडाउन और कर्फ्यू आदेश का उल्लंघन करने पर भोपाल ज़िले में अब तक कुल 61 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से गुरुवार देर रात से लेकर शुक्रवार सुबह तक कुल 8 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। 22 मार्च से आज तक धारा 188, 269, 270ipc एवं धारा 51 राष्ट्रीय आपदा अधिनियम के तहत कुल 61 मामले पुलिस ने दर्ज किए हैं। इनमें सरकारी आदेश का उल्लंघन कर दुकान खोलने, बेवजह रोड पर घूमने, सामूहिक नमाज़ अदा करने, दुकान के सामने भीड़ और सोशल डिस्टेंस का पालन न करना शामिल है।

पाक का खौफनाक चेहरा: कोरोना मरीजों को जबरन भेज रही PoK, गिलगिट-बाल्टिस्तान, स्थानीय कश्मीरियों ने किया विरोध

एक तरफ पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में भी पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान इन दिनों कोरोना की मार झेल रहा है और खबर यह आ रही है कि पाक अपने कोरोना के मरीजों को पाक अधिकृत कश्मीर भेज रहा है। अब महामारी से डरे सहमे स्थानीय लोग पाक सेना के इस कदम का जमकर विरोध कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद पाक की यह हरकत अभी जारी है। वहीं POK के राजनीतिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अंतर्राष्ट्रीय मदद पाने के लिए पाकिस्तान संक्रमण को पूरे देश में फैलाना चाहता है।

पाकिस्तान के मीरपुर इलाके में स्थानीय लोग पाक सेना के इस कदम का खूब विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी लोगों का आरोप है कि पंजाब के कोरोना पॉजिटिव मरीजों को सेना से दूर करने के लिए पंजाब से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान भेजा जा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान के मीरपुर और दूसरे शहरों में स्पेशल क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ पंजाब के मरीजों को लाया जा रहा है। वहीं पाक सेना के टॉप अफसरों ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी कोरोना पॉजिटिव मरीज को आर्मी के घरों के करीब न रखा जाए। नतीजन बड़ी संख्या में गाड़ियों में बंद करके ये मरीज POK और गिलगिट-बल्टिस्तान में भेजे जा रहे हैं।

वहीं कैंप में रखे गए एक मरीज का आरोप है कि कोरोना मरीजों के लिए क्वॉरंटीन के नाम पर बनाए गए कैंप्स में सीमित मेडिकल सुविधाएँ हैं। जैसे हालात यहाँ हैं उनसे लोगों के मन में बीमारी के और फैलने का डर भी पैदा हो गया है। युवक ने दावा किया कि अगर उन्हें कैंप पहुँचने से पहले वायरस इन्फेक्शन नहीं हुआ होगा और कैंप पहुँचने के बाद वह पॉजिटिव निकले तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। यहाँ तक कि कैंपों में पानी या फ्लश की भी सुविधा नहीं है।

बताया जाता है कि पाकिस्तान में पीओके और गिलगिट-बाल्टिस्तान ये दोनों ही सबसे ज्यादा पिछड़े इलाके हैं। इस इलाके का इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से ही बहुत खराब है और ट्रेन्ड मेडिकल स्टाफ की भी कमी है। लोगों को डर है कि पूरे इलाके में वायरस फैल जाएगा और स्थानीय कश्मीरियों को खतरे में डाल दिया जाएगा। मुजफ्फराबाद के लोगों का कहना है कि पाक सेना को सिर्फ पंजाब की चिंता है। जानकारों का कहना है कि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से पंजाब के बराबर अहम नहीं है।

वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में कोरोना का कहर तेजी से फैल रहा है, क्योंकि पाकिस्तान ने भारत की तरह पहले से ही इसे लेकर बेहतर इंतजाम नहीं किए थे। पाकिस्तान में अब तक कोरोना के चलते 9 लोगों की मौत हो चुकी है साथ ही इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1190 हो गई है। इतना ही नहीं चीन से लौटे पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी खुद को 5 दिन सेल्फ- क्वारंटाइन कर लिया है। पाक की माली हालत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पाकिस्तान में कोरोना की पहली मौत के तीन दिन बाद ही पाकिस्तान सरकार ने विश्व बिरादरी से आह्वान किया था कि कोरोना की चपेट में आने वाले गरीब देशों के कर्जे को माफ कर देना चाहिए।

उत्तराखंड: लॉकडाउन में निकाली बारात, पुलिस ने रुकवाया निकाह, दुल्हा व काजी समेत 8 गिरफ्तार

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन है। इस दौरान किसी भी प्रकार के सामाजिक व धार्मिक आयोजनों पर बिना अनुमति के रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद भी कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और लगातार इसका उल्लंघन कर रहे हैं।

ऐसा ही मामला सामने आया है उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के सीमांत क्षेत्र खटीमा से। पुलिस को गुरुवार देर रात सूचना मिली कि इस्लाम नगर वार्ड नंबर तीन में अब्दुल रज्जाक के घर में भीड़ इकट्ठी है। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर बिना अनुमति के हो रहे निकाह को रुकवा दिया। काजी व दूल्हे समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही उनकी कार को भी जब्त कर लिया है।

खटीमा पुलिस जब मौके पर पहुँची तो देखा कि अब्दुल रज्जाक के घर में उसकी बेटी नजाकत की बारात आई है। बारात किच्छा तहसील के सिरौलीकला गाँव आई थी। मौके पर पुलिस ने भीड़ देखी और लोगों को फटकार लगाई। पुलिस को देखकर मौके से कई लोग भाग खड़े हुए। पुलिस ने दूल्हे सलीम, उसके पिता फहीम और निकाह करा रहे काजी समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि धारा 188 का उल्लंघन करने पर सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हालाँकि, बाद में उन्हें सख्त चेतावनी के साथ जमानत दे दी गई।

पुलिस ने बताया कि इस्लाम नगर क्षेत्र कोरोना संक्रमण के लिहाज से काफी संवेदनशील है। ये वही जगह है जहाँ दो दिन पहले आठ कोरोना संदिग्ध मिले थे। इन सभी को आइसोलेशन में रखा गया है। इसके बाद इस्लामनगर में किसी भी व्यक्ति को बाहर से जाने और वहाँ के लोगों के बाहर जाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।

गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से घर में रहने को कहा है और सोशल डिस्टेंसिंग करने को कहा है। कोरोनावायरस के चलते कई लोगों ने अपनी शादी स्थगित कर दी है, लेकिन कुछ लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं। इनके खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है।

लॉकडाउन के दौरान शिया वक्फ की मस्जिदों में पढ़ी नमाज तो होगी जेल: शिया वक्फ बोर्ड चीफ वसीम रिजवी

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने ऐलान किया है कि लॉकडाउन के दौरान बोर्ड की किसी भी मस्जिद में जुमे या रोजाना की नमाज जमात में नहीं पढ़ी जाएगी। बोर्ड ने अपने सभी मुतवल्लियों (मस्जिद का केयरटेकर) को निर्देश दिए है कि इस निर्देश की अवहेलना करने पर बोर्ड की ओर से संबंधित मुतवल्ली और मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज करा कर जेल भेजा जाएगा।

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को बताया कि शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपने सभी मुतवल्ली को अवगत करा दिया है कि लॉकडाउन के दौरान किसी भी मस्जिद में जुमे की नमाज या रोजमर्रा की नमाज जमात के साथ नहीं पढ़ी जाएगी। अगर कोई भी मुतवल्ली बोर्ड के इस निर्देशों की अनदेखी करता है या धार्मिक भावनाओं में बहकर कर चोरी-छिपे नमाज जमात से करवा कर भीड़ जमा करता है, तो बोर्ड उस मुतवल्ली और नमाज पढ़ाने वाले मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज करा कर जेल भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि जब तक लॉकडाउन है, तब तक यह नियम लागू रहेगा और सख्ती से पालन किया जाएगा। जनहित से जुड़े इस मामले में नियम तोड़ने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। गौरतलब है कि कोरोना लॉकडाउन शुरु होने से वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी लगातार लोगों को मदद देने और वायरस को फैलने से रोकने के लिए सहयोग कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने सरकार से पेशकश की थी कि सरकार चाहे तो यूपी में जितनी भी शिया वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है, उन धार्मिक स्थलों, स्कूलों, मदरसों को अस्पताल में तब्दील कर उनमें आइसोलेशन वॉर्ड बना सकती है।

बोर्ड ने प्रदेश के सभी जिलों में करीब तीन हजार से ज्यादा गरीब परिवारों के मुफ्त राशन की व्यवस्था की है। वसीम रिजवी ने 50 हजार रुपए या इससे अधिक सालाना आमदनी वाली वक्फ संपत्तियों के मुतवल्ली से 25 परिवार, एक लाख रुपए या इससे ज्यादा आमदनी वाले से 50 परिवार और 5 लाख या इससे ज्यादा आमदनी वाली संपत्ति के मुतवल्लियों से 100 गरीब परिवारों में से प्रत्येक को डेढ़ किलो दाल, चार किलो चावल, पाँच किलो आटा, एक किलो नमक और एक किलो तेल मुफ्त बाँटने के लिए कहा है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले वसीम रिजवी ने संक्रमण का प्रसार रोकने को लेकर समुदाय को एक बड़ी सलाह देते हुए कहा था कि अगर कोरोना वायरस से समुदाय विशेष किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसे कब्रिस्तान में दफनाने की जगह उसे शव को जलाकर उसका अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि अगर उस शव को दफनाया जाता है तो कोरोना वायरस के फैलने की आशंका बनी रहती है।

दुनिया लॉकडाउन में लेकिन लल्लनटॉप अपने कर्मपथ से डिगा नहीं है

अगर आपको लगता है कि जब आप 21 दिन तक कोरोना के संक्रमण के खतरे से घर पर बैठे हुए हैं, और ऐसे में सिर्फ पुलिस और प्रशासन ही आम आदमी की मदद कर रहे हैं तो आप एक सौ एक प्रतिशत गलत हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपने दिमाग और हुनर का सौ प्रतिशत इस्तेमाल करके आजकल लोगों को घर बैठे मारक मजा दे रहे हैं। इनमें से कुछ चुनिन्दा नाम हैं- इन्टरनेट का हाशमी दवाखाना ये, दी लल्लनटॉप, छुपी हुई प्रतिभाओं का मंच टिकटोक और शाहीन बाग़ से गानों की प्रेक्टिस कर हाल ही में घर पर कैद हो चुके लेफ्टिस्ट सुर-कोकिलाएँ।

सबसे पहले बात करते हैं हाशमी दवाखाना की। हिटलर के लिंग की सटीक नाप बताकर चर्चा में आए दी लल्लनटॉप आजकल किलोमीटर के हिसाब से (लोकोक्ति) यूट्यूब पर वीडियो बनाते हुए देखे जा रहा है, इनमें से एक सबसे ज्यादा जोशीला वीडियो, जिसने घर पर बंद बैठे युवाओं का ध्यान आकर्षित किया, वो था – “सेक्स पावर बढ़ाने जैसी चाहत से आया कोरोना वायरस”

इस वीडियो की गहराई में जाने की जरूरत तो नहीं है लेकिन इस वीडियो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस वायरस के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने में जुटे हुए वैज्ञानिकों को तो दे ही देना चाहिए। अगर यह सम्भव ना हो तो इस विडियो की यूट्यूब लिंक कम से कम से कम नॉर्थ कोरिया को तो दे ही देनी चाहिए। क्योंकि जो लोग हिटलर की मौत के इतने वर्षों बाद भी उसके गुप्तांग पर पीएचडी कर सकते हैं, वो कोरोना के लिए कोई एंटीडॉट भी जरूर तैयार कर देंगे।

यही नहीं, दी लल्लनटॉप अपनी ऑडियंस का ख़ास ध्यान रखते हुए उनके मतलब का फैक्ट चेक करते हुए यह भी साबित करते हुए देखा गया है कि सरसों के तेल से कोरोना वायरस से बचाव नहीं हो पाता है। यह वो ऑडियंस है जो दैनिक सस्ते इन्टरनेट की पूरी डेढ़ जीबी या तो टिकटॉक, या फिर दी लल्लनटॉप के चरणों में ही समर्पित करती है।    

दी लल्लनटॉप के बाद नम्बर आता है उसी की सम्पादकीय नीतियों से मिलते-जुलते एक अन्य वैचारिक मंच का, जिसे ‘फाल्ट न्यूज़’ के वैज्ञानिकों ने मानव सभ्यता के लिए हुई सबसे बड़ी खोज में शरीक माना है- TikTok। किसने सोचा था कि ट्विटर और फेसबुक पर दिन-रात टिकटोकवासियों पर चुटकुले बनाने वाले लॉकडाउन की घोषणा के अगले ही मिनट पहली फुर्सत में अपने मोबाइल पर टिकटॉक इनस्टॉल करते हुए देखे जाएँगे।

यदि टिकटॉक सभ्यता का समय पर पता न चलता तो विश्व की कुछ चुनिन्दा उन्नत सभ्यताओं में से एक यह टिकटॉक भी आज विलुप्त हो चुकी होती। कुछ सूत्रों का तो यह भी कहना है कि चीन ने हमें सिर्फ वामपंथ और कोरोना जैसे वायरस ही नहीं दी बल्कि टिकटॉक भी दिया है इसलिए हमें उनका शुक्रगुजार होना चाहिए। एवेंजर्स फिल्म में थानोस ने भी कहा था कि यही ब्रह्माण्ड का संतुलन है।

इसके बाद नम्बर आता है उस हस्ती का जिसके आप दीवाने हैं। यह नाम है उस स्वर कोकिला का, जिसने तीन महीने तक शाहीन बाग़ में कुछ कविताओं की रिहर्सल तो की लेकिन करमजले कोरोना ने उसकी इस सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया। अब उन्होंने इसका बदला लेने का खुद को वचन दे दिया है और लॉकडाउन के दौरान रोजाना ट्विटर पर अपनी सुरीली नज्में पोस्ट कर के लोगों को लॉकडाउन की बोर जिन्दगी में बाहर लाने की कोशिश कर रही हैं। हालाँकि, राष्ट्रवादी किसी का एहसान मानते नहीं हैं लेकिन वह अनवरत रूप से अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ रही हैं।

एक नाम, जिसने सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस जितना ही समानांतर आपदा को जारी रख रखा है, वह है वाट्सएप यूनिवर्सिटी के कुलपति रवीश कुमार। रवीश कुमार ने जिस महामारी का नेतृत्व किया है, वह कोरोना से भी कई वर्ष पहले से सोशल मीडिया पर मौजूद थी, बस लोग इसकी मारक क्षमता से अनजान थे। यकीन ना हो तो खुद देख लो –

घर से निकलते ही –

कुछ दूर चलते ही –

अगर आपको लॉकडाउन के दौरान रवीश कुमार के समाज के लिए दी गए योगदान पर यकीन नहीं हो रहा है, तो उन लोगों से पूछिए जिन्हें रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज और प्रोफाइल से ब्लॉक कर रखा है। उनकी हालत आजकल कुछ ऐसी है –

इन सबमें सबसे दुखभरी हालात में आजकल अगर कोई है तो वो हैं देश के हर वर्ग के चहेते ‘लव मशीन शशि थरूर।’ इससे बड़ी विपत्ति क्या होगी कि आजकल उनकी तस्वीरें अकेले ही देखने को मिल रही हैं। स्वयं विचार करें।

सऊदी अरब: शॉपिंग ट्रॉली पर थूकने वाला युवक निकला कोरोना पॉजिटिव, मिल सकती है सजा-ए-मौत

सऊदी अरब में एक युवक को शॉपिंग ट्रॉली पर थूककर कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने के अपराध में गिरफ्तार किया गया। युवक को इस हरकत के लिए मौत की सजा हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक को ट्रॉली पर थूकते हुए वहाँ मौजूद कर्मचारियों ने देखा। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। सुरक्षा लिहाज से जब उसका टेस्ट किया गया तो वह कोरोना संक्रमित पाया गया।

जानकारी के अनुसार, युवक विदेशी नागरिक है। वह सऊदी अरब के बलजुराशी शहर में रहता था। उसने ऐसा क्यों किया इसकी पड़ताल की जा रही है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने उस स्टोर में जाने वाले हर शख्स को अस्पताल जाकर अपना चेकअप कराने की सलाह दी है। इसके अलावा सीसीटीवी के जरिए हर उस जगह की पहचान की जा रही है, जहाँ-जहाँ इस युवक ने जगह को इंफेक्ट किया।

गौरतलब है कि सऊदी अरब में इस हरकत को एक बड़ा अपराध माना गया है और अरब के ऑनलाइन पोर्टल के मुताबिक उसे सख्त सजा हो सकती है। अजेल पोर्टल के अनुसार, “यह व्यवहार धार्मिक और कानूनी रूप से निंदनीय है। इसे समाज के सदस्यों के बीच जान-बूझकर कोरोनोवायरस महामारी फैलाने और उनके बीच दहशत फैलाने के रूप में माना जाता है।”

सऊदी अधिकारियों ने बताया कि उसके कार्यों को एक तरह की प्रथम श्रेणी की हत्या माना जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, जिस समय उसने ये किया उस समय उसे बुखार, खाँसी थी और उसकी ये हरकत केवल अन्य लोगों को मारने के उद्देश्य से थी। बता दें कि सऊदी अरब के अधिकारियों ने घातक कोरोना वायरस के कारण अपने देश में 900 मामले सामने आने की पुष्टि की हैं। 2 लोगों के मौत की बात भी सामने आई है। परिस्थितियों को देखते हुए वहाँ देश भर में कर्फ्यू लगाया जा चुका है। शुरुआत में केवल 13 शहरों में कर्फ्यू लगाया गया था।