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कोरोना एज में भी मेड इन चाइना फ्लॉप: स्पेन को 6 लाख किट बेच लगाया चूना, संक्रमित को भी बता रहा स्वस्थ

‘मेड इन चाइना’ उत्पाद अक्सर अपनी घटिया गुणवत्ता के कारण चर्चा का विषय होते हैं। लेकिन शायद किसी ने यह नहीं सोचा होगा कि पूरी दुनिया को कोरोना महामारी देने वाला चीन आपदा के दौरान भी अन्य देशों के साथ ऐसे छल करेगा। दुनिया में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सबसे बड़ा सवाल ‘मेड इन चाइना’ कोरोना टेस्ट किट की गुणवत्ता पर उठ रहे हैं।

दरअसल चीन ने कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहे स्पेन को तेजी से जाँच के लिए ‘मेड इन चाइना’ कोरोना टेस्ट किट दिया था। लेकिन स्पेन की तरफ से आ रही शिकायत के मुताबिक वह किट कोरोना पॉजिटिव मरीजों को डिटेक्ट ही नहीं कर पा रही है। इससे स्पेन को बड़ा झटका लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 10 से 15 मिनट में नतीजे देने का दावा करने वाली इस चीनी जाँच किट को स्पेन के माइक्रोबायलॉजी के विशेषज्ञों ने रिजेक्ट कर दिया है। उनके मुताबिक यह किट सही रिजल्ट देने में असमर्थ है। बता दें कि चीनी जाँच किटों ने ऐसे समय पर स्पेन को धोखा दिया है, जब स्पेन में तेजी से मामले बढ़ रहे हैं।

कोरोना वायरस संक्रमण से इटली के बाद सबसे ज्यादा मौतें स्पेन में ही हुई है। अभी तक स्पेन में करीब 5,138 लोगों की जान जा चुकी है। स्पेन ने दक्षिण कोरिया और चीन से छह लाख 40 हजार जाँच किट खरीदे हैं। चीनी जाँच किट चीन की कंपनी बायोइजी ने बनाए हैं। इससे पहले चेक रिपब्लिक भी चीनी किट्स की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा चुका है।

पता चला है कि इन टेस्टिंग किट्स का एक्यूरेसी प्रतिशत सिर्फ 30% है। 70% बार ये टेस्टिंग किट्स किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी नहीं दे पाते हैं। स्पेन ने शिकायत की है कि ये टेस्टिंग किट्स कोरोना वायरस को डिटेक्ट करने में अक्षम है। कोरोना संक्रमितों की रिपोर्ट भी इनमें नेगेटिव आ रही है। इसके कारण कोरोना ज़्यादा से ज़्यादा लोगों में फैलता जा रहा है।

स्पेन के स्वास्थ्य विभाग ने अब चीनी जाँच किट के आँकड़ों को इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया है। स्पे‍न के एक स्वास्थ्य अधिकारी फेरनांडो सिमोन ने बताया कि स्पेन में इन चीनी किट से 9 हजार जाँच की गई है, लेकिन उनके परिणाम सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हम इन जाँच किट को लौटाने जा रहे हैं। उधर, चीन ने जाँच किट बनाने वाली कंपनी से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि बायोइजी कंपनी के पास आधिकारिक लाइसेंस ही नहीं है। हालाँकि स्पेन के स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने यह जाँच किट चीन से प्रत्यक्ष रूप से नहीं खरीदे थे, बल्कि स्पेन की ही एक सप्लाई चेन द्वारा ऑर्डर करवाई थी।

स्पेन में कोरोना वायरस से 65,719 से अधिक नागरिक इससे संक्रमित हैं। स्वास्थ्य अधिकारी फेरनांडो सिमोन ने बताया है कि आने वाले समय में इसकी संख्या और बढ़ने की आशंका है। स्पेन में 14 मार्च से ही लॉकडाउन है। बावजूद इसके आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। वहीं चीन दुनियाभर में अपनी छवि सुधारने के लिए तमाम देशों को मेडिकल उपकरण दे रहा है, लेकिन अब इस पर से सभी देशों का भरोसा डगमगा रहा है।

कोरोना से निपटने में PM मोदी ने की दान की अपील, भारी ट्रैफिक से वेबसाइट क्रैश: यहाँ जाकर आप कर सकते हैं डोनेट

PM मोदी के वक्तव्य अब शायद वाकई में देश में कानून बन चुके हैं। क्योंकि शायद ही उनकी किसी बात को मानने से देशवासी पीछे हटते नजर आते हैं। 21 दिन के लॉकडाउन की अपील के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से एक और अपील की है और उसका नतीजा यह रहा कि लोग बड़ी मात्र में उनकी अपील में अपना सहयोग देने के लिए टूट पड़े।

दरअसल, कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति में राहत का गठन किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से कोरोना के खिलाफ जारी जंग में लोगों मदद की अपील की। इसके लिए पीएम केयर्स (PM-CARES) फंड बनाया गया है, जिसमें हर कोई स्वेच्छा से मदद कर सकता है।

एक ट्वीट के माध्यम से पीएम ने कहा- “मैं अपने देशवासियों से अनुरोध करता हूँ कि वे पीएम केयर फंड में दान करें। इसकी मदद से हम इस लड़ाई को जीतेंगे। आने वाले दिनों में भी ऐसे डिजास्टर से लड़ने में सरकार की मदद होगी। जो लोग बढ़-चढ़ कर दान कर रहे हैं, मैं उनकी भावनाओं का सम्मान करता हूँ। आप लोगों की मदद से भारत ज्यादा हेल्दी होगा।”

पीएम ने दूसरे ट्वीट में कहा, “देशवासियों से मेरी अपील है कि वह कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध में PM-CARES फंड में अंशदान के लिए आगे आएँ। इस फंड का उपयोग आगे भी आपदा की स्थिति में किया जा सकता है।”

PM मोदी की इस अपील का नतीजा यह रहा कि इस घोषणा के तुरंत बाद लोग अपना योगदान करने के लिए लिंक क्लिक करने लगे, जिस कारण यह वेबसाईट ही क्रैश हो गई।

अगर आप भी इस फंड में कुछ डोनेट करना चाहते हैं तो नीचे अकाउंट नंबर समेत तमाम जानकारियाँ दी गई हैं। डोनेशन का काम घर बैठे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और RTGS/NEFT की मदद से किया जा सकता है।

आज ही PM मोदी ने देश के तमाम रेडियो जॉकी से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बात की और उन्हें इस मुहिम में शामिल होने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि रेडियो जॉकी की मदद से हम देश के हर नागरिक को कोरोना को लेकर जागरूक करना चाहते हैं।

अफगानिस्तान से एयरलिफ्ट किए जाएँ सिख: काबुल गुरुद्वारे हमले के बाद मोदी सरकार से कैप्टन

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अफगानिस्तान में फँसे सिख परिवारों को भारत लाने की गुहार मोदी सरकार से लगाई है। उन्होंने ट्वीट के जरिए विदेश मंत्री एस जयशंकर से कहा है, “प्रिय जयशंकर वहाँ बड़ी संख्या में सिख परिवार हैं जो अफगानिस्तान से निकलना चाहते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमरिंदर सिंह ने कहा, “मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि शीघ्रता से उन्हें एयरलिफ्ट किया जाए। यह हमारा कर्तव्य है कि इस संकट के समय में हम उनकी सहायता करें।” उन्होंने काबुल के गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले को दुर्भाग्यशाली बताया है। इस घटना के बाद अमरिंदर सिंह केंद्र सरकार से सिख परिवारों को अफगानिस्तान से जल्द से जल्द एयरलिफ्ट कर भारत लाने की अपील की है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने वाले कानून का विरोध करने में कॉन्ग्रेस भी शामिल रही है। अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने CAA के खिलाफ पंजाब विधानसभा में बिल पास किया था। इसे भारत के हितों के विरुद्ध तथा असंवैधानिक करार दिया था। ऐसा करने वाला केरल के बाद पंजाब दूसरा राज्य था।

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में 25 मार्च को गुरुद्वारे पर आातंकी हमला हुआ था। हमले के वक्त वहॉं 150 श्रद्धालु मौजूद थे। 27 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि आठ अन्य घायल हो गए थे। एक फिदायीन ने खुद को उड़ा लिया था और फिर उसके साथियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। हमले की जिम्मेदारी आईएस ने ली थी।

बताते चलें कि अफगानिस्तान में लंबे समय से सिखों को व्यापक भेदभाव का सामना करना पड़ा है और कई बार आतंकवादियों ने उन्हें निशाना बनाया है। हालिया दिल्ली दंगों के बाद भी काबुल में सिखों की दुकान पर हमला हुआ था। अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना का विडियो ट्विटर पर शेयर किया था। इसमें अधेड़ उम्र का सिख दुकानदार हाथ जोड़कर हताश खड़ा था और उसकी दुकान का सामान जमीन पर बिखरा था।

पहले भी अफगानिस्तान में सिखों पर हमले होते आए हैं और डरकर वे भारत आने को मजबूर हुए हैं। 2018 में भी जलालाबाद में आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 13 सिख मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी भी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। हमले से सिख समुदाय इतना डर गया था कि उन्होंने देश छोड़ने का फैसला कर लिया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब 300 से भी कम सिख परिवार बचे हैं। इनके पास दो ही गुरुद्वारा है। एक जलालाबाद और दूसरा काबुल में।

97000 सिखों और हिंदुओं का सफाया… वो भी सिर्फ 29 साल में! आतंकी हमले आम, मानवाधिकार बेमानी है अफगानिस्तान में

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक गुरुद्वारे पर आतंकी हमला हुआ, जिसमें 27 अल्पसंख्यक सिखों को निशाना बनाकर मार दिया गया। यह घटना उस समय की है जब लगभग 150 सिख गुरुद्वारे में प्रार्थना के लिए इकट्ठा हुए थे। अचानक से एक फिदायीन ने अपने को पहले बम से उड़ा दिया और बाकि आतंकियों ने गुरुद्वारे पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। जैसा हमेशा होता है और इस बार भी, आतंकी हमले की जिम्मेदारी एक इस्लामिक संगठन ने ली है।

खबर सिर्फ यही नहीं है कि किसी इस्लामिक आतंकी संगठन ने हमले के पीछे अपना हाथ बताया है। असल में मुद्दा यह है कि अफगानिस्तान के 27 अल्पसंख्यक सिखों का नरसंहार हुआ है। फिलहाल 8 सिख गंभीर घायल हैं और संभव है कि इनमें से कुछ लोगों की मौत भी हो जाए। दुर्भाग्य यह भी है कि इनके परिवारों को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलने वाली है। संयुक्त राष्ट्र संघ और दूसरे मानवाधिकारों के हितैषी संगठन भी इनके लिए कोई पहल नहीं करेंगे।

दरअसल, यह कोई मेरा स्वयं का मूल्यांकन नहीं है। अफगानिस्तान में हिन्दू और सिखों पर पहले भी आतंकी हमले हो चुके हैं। कभी किसी को आर्थिक सहायता तो दूर, दिलासा और भरोसा तक नहीं दिया गया। अभी 2018 में ही जलालाबाद में 10 सिखों का नरसंहार कर दिया गया। तब भी किसी ने उन सिखों के परिजनों को सांत्वना तक नहीं दी।

एक साधारण सा सवाल है – इन सिखों का क्या दोष है? क्या इन्हें जीवन जीने का अधिकार नहीं है? इनकी किस्मत में बम और बंदूकें ही लिखी हैं! आतंकी हमले के अलावा उनका हर दिन सामाजिक बहिष्कार और दमन भी होता है। साल 2016 में रॉयटर्स ने काबुल के जगतार सिंह की कहानी को प्रकाशित किया। सिंह ने तब समाचार एजेंसी को बताया था, “अफगानिस्तान में अगर आप मुस्लिम नहीं तो आप इन्सान नहीं हैं। हम अपने दिन की शुरुआत डर और अलगाव से करते है। मेरे आठ साल के बेटे जसमीत सिंह ने स्कूल जाना बंद कर दिया क्योंकि वहाँ उसे ‘हिन्दू काफिर’ कहकर बुलाया जाता था।”

वास्तव में यह मानवाधिकारों के हनन ही नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार करना है। सोचिए, इन सिखों की स्थिति कितनी मार्मिक रहती होगी। साल 2010 में तालिबान आतंकियों ने दो सिखों के सिर काट दिए और उनके कटे हुए शीशों को गुरूद्वारे में रखवा दिया। यह घटना किसी विश्व युद्ध के दौरान नहीं हुई थी, जिसे सामान्य मानकर छोड़ दिया जाए। उन सिखों के सिर तब काटे गए थे, जब विश्वभर में मानवाधिकारों के संगठन स्थापित हो चुके थे। संयुक्त राष्ट्र संघ का काबुल में भी एक दफ्तर कार्यरत था।

वैसे तो, अफगानिस्तान के पिछले 1400 सालों का इतिहास इस तरह के नरसंहारों से भरा हुआ है। मगर आज जब हम एक सभ्य और आधुनिक समाज की कल्पना करते हैं, तो ऐसे अमानवीय कृत्य कहाँ तक जायज हैं? अब जब इन अल्पसंख्यकों की सुध लेने वाला कोई है, तो ऐसे हमलों से बचने का क्या रास्ता हो सकता है? एक संभव और आसान तरीका है कि यह लोग अपनी पहचान ही छिपा लें। मगर, अफगानिस्तान के कट्टर धर्मांध संगठनों और आतंकियों ने इसका पहले ही तोड़ निकाल लिया है। वहाँ के हिन्दू और सिखों के घरों को विशेष निशान से चिन्हित किया गया है। यही नहीं, उनकी पहचान को समुदाय विशेष से अलग करने के लिए उन्हें लेबल्स लगाने का फरमान भी सुनाया जा चुका है।

अफगानिस्तान का कोई आधिकारिक सेन्सस नहीं है। अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट और मीडिया के अनुसार 1990 में वहाँ 1 लाख हिन्दू और सिख आबादी थी, जोकि अब 3000 के आसपास है। अब यह समझना कोई कठिन काम नहीं है कि उन 97,000 हिन्दुओं और सिखों के साथ क्या हश्र हुआ होगा। संभव है कि उन्हें मार दिया गया होगा अथवा उनका जबरन धर्म परिवर्तन हुआ होगा और कुछ भागकर दूसरे देशों में शरण ले चुके होंगे।

सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक तौर पर भारत उनके लिए एकमात्र उम्मीद की किरण है। भारत में भी पिछले कई दशकों से यह सवाल उठता रहा है कि अफगानिस्तान के अल्पसंखक समुदाय के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक कदम उठाए जाने चाहिए। पिछली सरकारों ने कुछ राहत दी लेकिन वह कोई स्थाई समाधान नहीं था। आखिरकार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्र सरकार ने साल 2019 में भारतीय नागरिकता कानून में एक संशोधन संसद से पारित करवाया। जिसका एकमात्र मकसद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। यह नागरिकता कानून में दसवाँ संशोधन था, इससे पहले सात संशोधन कॉन्ग्रेस की सरकारों ने किए। बाकि एक संशोधन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय हुआ और दूसरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2015 में किया गया।

इन पिछले नौ संशोधनों का कोई विरोध नहीं हुआ, लेकिन इस दसवें संशोधन को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। राजधानी दिल्ली सहित देशभर के शहरों में कट्टरपंथियों द्वारा पत्थरबाज़ी, हिंसा और आगजनी की गई। शाहीनबाग़ के नाम पर देश की राजधानी को असहाय बना दिया गया। जबकि इस संशोधन का भारतीय नागरिकों से कोई लेना-देना नहीं था। सरकार की तरफ से लगातार भरोसा दिया गया कि किसी भी भारतीय नागरिक विशेषकर मजहब विशेष की नागरिकता को कोई नुकसान नहीं है।

एक तरफ अफगानिस्तान है, जहाँ की बहुसंख्यक आबादी ने हिन्दू और सिख अल्पसंख्यकों का जीवन जीना दूभर कर दिया। दूसरी तरफ भारत के अल्पसंख्यकों ने उन्हीं हिन्दू और सिखों को भारतीय नागरिकता दिए जाने पर हंगामा मचा दिया। दुर्भाग्य देखिए, अफगानिस्तान के इस अल्पसंख्यक समुदाय ने पहले आतंकियों से सामना किया, तो यहाँ उन्हें राजनैतिक तुष्टिकरण देखने को मिला। अंत में बस एक यही सवाल पैदा होता है कि आखिर इन लोगों की किस्मत में और क्या देखने को बचा है।

भारत की तर्ज पर ब्रिटेन में भी बजी तालियाँ और थालियाँ, PM जॉनसन और राजपरिवार के लोग भी हुए शामिल

शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को ब्रिटेन में भारत की तर्ज पर ही लोगों ने अपने घरों में रहते हुए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को तालियाँ और थालियाँ बजाकर सलामी दी। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए लोगों ने ‘क्लैप फॉर केयरर्स’ कार्यक्रम के तहत तालियाँ बजाईं। हजारों की संख्या में लोग अपने घरों की छत और बॉलकनी में आकर आकर स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आभार जताने के लिए जुटे।

इसमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और राजपरिवार के लोग भी शामिल हुए। कैंब्रिज के प्रिंस विलियम और प्रिंसेस कैथरिन के बच्चों प्रिंस जॉर्ज, प्रिंसेस शर्लेट और प्रिंस लुईस ने भी तालियाँ बजाईं। रॉयल परिवार के इंस्टाग्राम पर इन बच्चों का वीडियो शेयर किया गया। वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया है, “सभी डॉक्टरों, नर्सों, ख्याल रखने वालों, GP, फार्मासिस्ट, वालंटियर्स और अन्य नेशनल हेल्थ स्टाफ जो कोरोना वायरस से लड़ाई में मदद कर रहे हैं: शुक्रिया।”

बता दें कि पीएम मोदी की अपील पर 22 मार्च को कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया गया था। इसी दिन पीएम की अपील पर शाम 5 बजे 5 मिनट के लिए देश भर की जनता अपने घरों के बालकनी, खिड़कियों और छतों पर निकलकर डॉक्टर्स, मेडिकल स्टाफ, नर्स, जो लोग सेवा कर रहे हैं और इलाज कर रहे हैं, उनकी हौसलाफजाई के लिए तालियाँ, थालियाँ, घंटी और शंख आदि बजाकर उनका आभार व्यक्त किया था। हालाँकि देश के कुछ लिबरलों और तथाकथित बुद्धजीवियों ने इसका मजाक उड़ाया था।

मगर पीएम मोदी की इस पहल की पूरी दुनिया में चर्चा हुई। अब ब्रिटेन ने भी पीएम मोदी के इस तरीके को फॉलो करते हुए पूरे देश में कोरोना वॉरियर्स के समर्थन में ताली बजवाई है। ब्रिटेन भी आज कोरोना वायरस की आपदा से बुरी तरह जूझ रहा है। यहाँ के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। लिहाजा संकट की इस घड़ी में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं से संबंधित लोगों के प्रति आभार प्रकट करने के लिए पूरे ब्रिटेन में लोगों ने ताली बजाकर उनका अभिनंदन किया गया।

फिल्म हैरी पॉटर की एक्ट्रेस एम्मा वाटसन ने एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि वह मेडिकल स्टाफ की बहुत आभारी है। वीडियो के अंदर आप सुन सकते हैं कि किस तरह से लोग अपने घरों की बालकनी पर आकर मेडिकल स्टाफ के लिए तालियाँ और थालियाँ और साथ ही सीटियाँ बजा रहे हैं।

वीडियो कैप्शन में एम्मा वाटसन ने लिखा, “मैं उस देश पर गर्व करती हूँ जो किसी को भी मेडिकल में देने के लिए तैयार है। साथ ही मेडिकल वर्कर्स पर भी गर्व करती हूँ, जो इतनी जोखिम भरे महामारी के बीच अपने काम की सेवा से लोगों को मदद पहुँचा रहे हैं। मैं ऐसे लोगों का आभार व्यक्त करती हूँ।”

मोदी ने खाते में ₹1000 डाले हैं: अफवाह फैलते ही बैंक दौड़ीं महिलाएँ, समुदाय विशेष की जुटी भारी भीड़

दिल्ली के शाहीन बाग़ सहित पूरे देश में हुए सीएए विरोधी आन्दोलनों का लब्बोलुआब यही था कि कागज़ नहीं दिखाएँगे। लेकिन, कोरोना वायरस से उपजे ख़तरों के बीच सरकारी सहायता लेने के लिए लोग न सिर्फ़ लाइन में लगे हुए हैं, बल्कि कागज़ भी दिखा रहे हैं। मेरठ में अफवाह फैला दी गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के खाते में हज़ार रुपए डाले हैं। इसके बाद महिलाओं की भारी भीड़ मेरठ के कई बैंकों में पासबुक लेकर दौड़ी चली गई। बैंकों के बाहर भारी भीड़ जुट गई और महिलाओं की अधिकारी लगातार समझाते रहे। इनमें अधिकतर दूसरे मजहब महिलाएँ थीं, जिन्होंने हंगामा किया।

समुदाय विशेष के पुरुष भी अपने-अपने घर की महिलाओं को लेकर बैंक पहुँचे। महिलाएँ माँग कर रही थीं कि उनके पासबुक पर प्रिंट कर दिखाया जाए कि रुपए आए हैं या नहीं। बता दें कि भारत सरकार ने ऐलान किया है कि जिन महिलाओं के पास जन-धन अकाउंट हैं, उनके खाते में अगले तीन महीने तक 500 रुपए डाले जाएँगे, यानी कुल 1500 रुपए की सहायता मिलेगी। जबकि महिलाओं के बीच अफवाह फ़ैल गई कि 1000 रुपए मोदी ने उनके अकाउंट में डाल दिए हैं। फिर क्या था। सभी अपने-अपने रुपए निकालने के लिए बैंकों की ओर भागीं।

इन महिलाओं ने ‘इंडिया टीवी’ से बात करते हुए दावा किया कि मोदी ने उन्हें जो पैसे दिए हैं, उसे निकालने नहीं दिया जा रहा है। कई लोगों ने इस भीड़ को देख नोटबंदी के बाद बैंकों में लगी भीड़ को याद किया। मेरठ ही नहीं बल्कि अलीगढ़ में भी भीड़ जुटी। एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि अफरातफरी के माहौल के कारण लोग 100 रुपए भी निकाल के ले जा रहे हैं। सभी महिलाएँ पासबुक व अन्य कागज़ लेकर बैंक पहुँची हुई थीं। बैंक के अधिकारियों ने सरकार से सहायता की गुहार लगाई। अलीगढ़ में तो अफवाह के कारण नगर निगम और डीएम ऑफिस के बाहर भी लोग पहुँच गए।

आज की बात: देखें 9:35 के बाद (साभार: इंडिया टीवी)

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने महिलाओं को रुपए के लिए कतार में लगे देख कर उन पर तंज कसा। लोगों ने कहा कि कोई भी सरकारी सहायता तभी मिलेगी, जब सही कागज़ दिखाए जाएँगे। बता दें कि मोदी सरकार द्वारा जो वित्तीय मदद का ऐलान किया गया है, वो सभी लाभार्थियों के खाते में ‘डायरेक्ट ट्रांसफर’ के जरिए भेजा जाएगा।

बाराबंकी: मस्जिद में जबरन नमाज पढ़ने पर जान मोहम्मद, सलमान और रफी गिरफ्तार

देश भर में जारी लॉकडाउन के चलते लोगों को एक जगह इकट्ठा होने की अनुमति नहीं है। सभी धार्मिक स्थल बंद हैं। किसी भी धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद कुछ जगहों की मस्जिदों में जुमे की नमाज के लिए भीड़ देखी गई। पुलिस ने इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से। यहाँ पर सामूहिक नमाज पढ़ने को लेकर 35 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। तीन आरोपितों जान मोहम्मद, सलमान व मोहम्मद रफी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इंस्पेक्टर संजय मौर्य ने इसकी जानकारी दी। एसपी अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि थाना रामनगर के सत्तीनपुरवा मस्जिद में करीब 30-35 लोग जबरन घुस गए और नमाज अदा की। इसके लिए पहले ही प्रशासन के साथ ही सभी धर्मगुरुओं ने खुद मना किया था। इस मामले में पुलिस ने महामारी अधिनियम के अलावा आईपीसी की कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

इसी तरह अयोध्या में नमाज के लिए मस्जिद में भीड़ लगाने को लेकर आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मना करने के बावजूद मखदूमपुर गाँव के कुछ लोग समूह बनाकर मस्जिद के बाहर इकट्ठा थे। एसओ संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आठों व्यक्ति के खिलाफ धारा-3 महामारी अधिनियम 1897 व धारा-51 आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत धारा 269, 271 व 188 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। इसके अलावा मेरठ, अमरोहा, मजफ्फरनगर और बदायूँ समेत कई अन्य जिलों से इस तरह की खबरें सामने आई हैं।

गौरतलब है कि शुक्रवार को जुमे की नमाज को लेकर पुलिस-प्रशासन बीते कई दिन से अलर्ट थी। कोरोना के खौफ के बीच लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराना बड़ी चुनौती बना थी। आशंका थी कि एक ही जगह जमा होकर नमाज पढ़ने से कोरोना वायरस पैर पसार सकता है। इसको लेकर आला पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से भी अपील की थी। पुलिस-प्रशासन का सहयोग करते हुए मुस्लिम धर्म गुरुओं ने भी घरों में ही नमाज पढ़ने का आह्वान किया था। शुक्रवार को इसका कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस-प्रशासन अलर्ट रहा। दिन भर पुलिस टीमें मस्जिदों व आसपास इलाकों में गश्त लगाती रही।

आप देवता हैं, सभी देशों को आप जैसा प्रधानमंत्री मिले: भावुक नर्स ने फोन पर PM मोदी को सराहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वायरस के खतरों के मद्देनज़र लगातार लोगों से सीधा संपर्क कर रहे हैं। सबसे पहले तो उन्होंने 2 बार राष्ट्र को सम्बोधित किया। उसके बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनका हालचाल जाना। कई डॉक्टरों और प्रोफ़सरों सहित विदेश से लौटे लोगों से भी पीएम ने संवाद किया। देश भर के कई रेडियो जॉकी से बात कर पीएम मोदी ने कोरोना को लेकर जागरूकता फैलाने की अपील की। इसका सकारात्मक असर भी हो रहा है और लोगों को ऐसा महसूस हो रहा है कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है।

इसी क्रम में पीएम मोदी ने एक नर्स से बात की और पूछा कि वो कोरोना मरीजों का डर कैसे दूर करती हैं? उन्होंने पुणे के नायडू हॉस्पिटल में कार्यरत नर्स छाया से बातचीत की। छाया ने बताया कि उनका पूरा हॉस्पिटल प्रधानमंत्री को सलाम करता है, क्योंकि उन्होंने इतने छोटे हॉस्पिटल को फोन कर के हालचाल जाना और चीजों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री से नर्स ने कहा कि वो तो एक हॉस्पिटल में ड्यूटी कर रही हैं, लेकिन आप तो 24 घंटे पूरे देश की सेवा में लगे हुए हैं। अचानक पीएम का फोन आने से नर्स की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।

पीएम मोदी से नर्स छाया ने कहा कि वो देवता की तरह हैं और दुनिया के सभी देशों को उनके जैसा प्रधानमंत्री मिले। पीएम मोदी ने छाया को उनकी भावनाओं के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वो जो भी कर रहे हैं, वो उनका कर्तव्य है। पीएम ने वुहान से लौटे एक कश्मीरी मेडिकल छात्र से भी बातचीत की और कहा कि युवाओं को अन्य लोगों से बात कर के कोरोना के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए। छात्र निजाम ने वुहान से वापस लाने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया।

निज़ाम ने कहा कि पीएम मोदी द्वारा लॉकडाउन की घोषणा जनहित में की गई है और सभी को इसका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे और उनके सभी साथी चीन में फँस गए थे, जहाँ से भारत सरकार ने उन्हें वापस निकाला। निज़ाम ने बताया कि वहाँ से लौटे सभी कश्मीरी छात्रों को काफ़ी अच्छे तरीके से रखा गया था, जिसके लिए वो प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं। सभी छात्रों को अच्छी सुविधाएँ दी गईं।

कोरोना पर The Quint का फर्जीवाड़ा: जिस इंजीनियर को डॉक्टर बता दिखाई भयावह तस्वीर, उसने ही बताया झूठा

ऐसे समय में, जब पूरा विश्व चाइनीज Covid-19 वायरस के संक्रमण से लड़ रहा है, देश का लेफ्ट-लिबरल मीडिया गिरोह अपने प्रोपेगंडा से बाहर नहीं निकल रहा है। कुछ दिन पहले ऑल्ट न्यूज़ ने एक फर्जी ट्विटर अकाउंट के ऐसे दावे को हवा दी थी जिसमें अस्पताल में डॉक्टर्स के पास मास्क ना होने और रोगियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होने की बात कही गई थी। बाद में यह ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया गया।

इसी क्रम में ऑल्ट न्यूज़ के ही समान लेफ्ट-लिबरल मीडिया के नाम पर सरकार और व्यवस्था के खिलाफ नैरेटिव चलाने वाले द क्विंट ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और वो भी एक कदम आगे बढ़कर। दरअसल, दी क्विंट ने एक इंजीनियर को डॉक्टर बना कर उसके विचारों को सनसनी बनाकर पेश किया है।

बृहस्पतिवार (मार्च 26,2020) को द क्विंट ने डॉ. गिरिधर ज्ञानी का एक इंटरव्यू प्रकाशित किया। द क्विंट वेबसाइट ने दावा किया कि डॉ. ज्ञानी Covid-19 के खिलाफ तैयार की गई टास्क फ़ोर्स के संयोजक थे। उन्होंने मंगलवार (24 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में प्रमुख डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की एक बैठक में भाग लिया था।

इस इंटरव्यू में द क्विंट ने विशेष जोर देते हुए बताया कि वह एक ‘डॉक्टर’ हैं, जिन्होंने खुलासा किया था कि भारत कोरोना वायरस के संक्रमण के तीसरे चरण, यानी कम्युनिटी ट्रांसफर में पहुँच चुका है। इस साक्षात्कार के माध्यम से, क्विंट ने यह दावा करते हुए सरकार पर हमला किया कि वह कोरोना वायरस परीक्षण में अभी भी पुरानी कठोर नीति का पालन कर रही है। वामपंथी समाचार वेबसाइट ने यह भी दावा किया कि कथित ‘डॉक्टर’ ने उनसे कहा कि देश पहले से ही इस ट्रान्समिशन के चरण-3 में था, लेकिन मोदी सरकार इसे आधिकारिक नहीं बना रही थी।

द क्विंट के दावों और उसकी भ्रमक हेडलाइन को डॉ. ज्ञानी ने ही नकार दिया है। उन्होंने कहा है कि क्विंट ने भ्रामक हेडलाइन के माध्यम से उनकी बातों को कुछ और ही बनाकर पेश किया है। ज्ञानी ने स्पष्ट करते हुए कहाए- “सौभाग्य से अभी तक कोरोना संक्रमितों के मामलों में सामान्य रूप से ही वृद्धि देखी गई है, जबकि कम्युनिटी ट्रांसफर के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।”

द क्विंट ने अब अपने इस सनसनीखेज इंटरव्यू को हर जगह से डिलीट कर इसे ‘अपडेट’ करते हुए अपने आरोपों को ‘संभवाना’ नाम दिया है।

यहाँ पर यह जानना भी आवश्यक है कि एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (AHPI) के संस्थापक डॉ. गिरधर ज्ञानी ‘डॉक्टर’ भी नहीं हैं, जैसा कि द क्विंट वेबसाइट की ‘पत्रकार’ पूनम अग्रवाल ने दावा किया है। वास्तव में, डॉ. ज्ञानी एक क्वालिटी मैनेजमेंट इंजीनियर हैं, जिन्होंने बाद में पीएचडी की डिग्री ग्रहण की थी। ना ही वे मेडिकल प्रैक्टिस करते हैं और ना ही वे कोई महामारी विशेषज्ञ हैं।

AHPI ने भी स्पष्ट किया है कि डॉ. ज्ञानी ने द क्विंट से यह कभी नहीं कहा कि भारत पहले से ही संक्रमण के तीसरे चरण में है। एक ट्वीट में AHPI ने स्पष्टीकरण देते हुए लिखा है कि डॉ. ज्ञानी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत तीसरे चरण में तो नहीं है, लेकिन यह बेहतर होता अगर सरकार यह सोचकर सभी जरूरी तैयारियाँ की होती कि भारत पहले से ही संक्रमण के तीसरे चरण में है।

इस पूरे सनसनीखेज दावे में जो सबसे बड़ा झूठ द क्विंट ने कहा है वो ये कि डॉ. ज्ञानी टास्क फ़ोर्स की उस मीटिंग का हिस्सा थे, जिसे पीएम मोदी ने संबोधित किया था। द क्विंट का यह दावा भी फर्जी साबित हुआ है। क्विंट ने लिखा है कि “Covid-19 हॉस्पिटल्स के लिए टास्क फ़ोर्स” जबकि किसी भी सरकारी वेबसाइट पर ऐसी किसी भी टास्क फ़ोर्स का जिक्र ही नहीं है। ICMR ने जरूर एक Covid-19 टास्क फ़ोर्स का गठन किया है, लेकिन वह स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय कमेटी है ना कि “Covid-19 अस्पताल।”

वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द क्विंट’ की उस रिपोर्ट का वह हिस्सा, जो अब नहीं रहा;

ICMR, जिसने कि NITI आयोग के सहयोग से डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स की कमेटी का गठन किया था, द्वारा जारी आधिकारिक डॉक्यूमेंट में किसी भी डॉ. ज्ञानी का जिक्र नहीं है।

ICMR द्वारा 18 मार्च को जारी डॉक्यूमेंट;

इस तरह द क्विंट ने पूरी तरह से बेबुनियाद और काल्पनिक आधारों पर कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी सरकार विरोधी अपने एजेंडे को फैलाने का एक और नाकाम प्रयास किया है।

‘कोरोना हेलमेट’ पहन सड़क पर उतरी पुलिस, लॉकडाउन में बाहर निकले लोगों को समझाने का अनोखा तरीका

कोरोना वायरस महामारी की गंभीरता को लेकर लोगों के बीच जागरूक फैलाने के लिए चेन्नई पुलिस ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। एक स्थानीय कलाकार ने एक पुलिस अधिकारी के साथ मिलकर लॉकडाउन के दौरान लोगों को सड़कों पर निकलने से रोकने के लिए एक अनोखा ‘कोरोना’ हेलमेट बनाया है। सड़कों पर 24 घंटे सेवा दे रहे पुलिस कर्मियों ने कहा कि हेलमेट लोगों को जागरूक करने में उपयोगी साबित हो रहा है।

सड़क पर कोरोना हेलमेट पहनकर लोगों से मिलने वाले पुलिस इंस्पेक्टर राजेश बाबू ने कहा, “हम लोगों को जागरूक करने के लिए उनसे बात कर रहे थे। लेकिन उनके बीच जागरूकता बहुत कम है। इसलिए हमने कुछ अलग करने की सोची। हमने एक हेलमेट डिजाइन किया है जो कोरोना वायरस की तरह दिखता है। हमने कुछ ऐसा करने के बारे में सोचा, जो लोगों को डराए और उन्हें घर पर बनाए रखे।”

उन्होंने कहा, “हम सभी कदम उठाते हैं लेकिन फिर भी लोग सड़कों पर निकल आते हैं। इसलिए यह कोरोना हेलमेट एक ऐसा कदम है जो हम यह सुनिश्चित करने के लिए उठा रहे हैं कि लोग पुलिस की बात को गंभीरता से लें। हेलमेट कुछ अलग करने की कोशिश है। जब मैं इसे पहनता हूँ तो कोरोना वायरस का विचार यात्रियों के दिमाग में आता है। विशेष रूप से बच्चे इसे देखकर प्रतिक्रिया देते हैं।” इंस्पेक्टर राजेश ने कहा कि उन्होंने यह हेलमेट पहनकर लोगों को इससे बचने और लॉकडाउन के दौरान घर रहने के फायदों के बारे में बताया। 

बता दें कि इस ‘कोरोना हेलमेट’ को चेन्नई के आर्टिस्ट गौतम ने डिजाइन किया। उन्होंने यह हेलमेट लोगों में जागरूकता लाने के लिए तैयार किया है। पुलिस इससे लोगों को जागरूक कर रही है। गौतम ने इस संबंध में बात करते हुए कहा, “पुलिस 24 घंटे काम कर रही है। वहीं लोग इसको लेकर गंभीर नहीं है। मैं पुलिस के लिए कुछ करना चाहता था इसलिए ये तैयार किया।”

स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक अभी तक तमिलनाडु में कोरोना वायरस के कुल 38 मामले सामने आए हैं। इनमें से 6 विदेशी नागरिक हैं। वहीं एक आदमी की कोरोना से राज्य में मौत हो चुकी है। साथ ही दो लोग अस्पताल से ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।