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चीन में हंता वायरस से 1 की मौत: कोरोना से अधिक खतरनाक, संक्रमित व्‍यक्तियों के मरने का आँकड़ा 38%

कोरोना वायरस की मार से जूझ रहे चीन के युन्नान प्रांत में एक व्‍यक्ति की सोमवार (मार्च 23, 2020) को हंता वायरस से मौत हो गई। पीड़‍ित व्‍यक्ति काम करने के लिए बस से शाडोंग प्रांत लौट रहा था। उसे हंता वायरस से पॉजिटिव पाया गया था। बस में सवार 32 अन्‍य लोगों की भी जाँच की गई है। चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स के इस घटना की जानकारी देने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है।

बड़ी संख्‍या में लोग ट्वीट करके यह डर जता रहे हैं कि यह कहीं कोरोना वायरस की तरह से ही महामारी न बन जाए। लोग कह रहे हैं कि अगर चीन के लोग जानवरों को जिंदा खाना बंद नहीं करेंगे तो यह होता रहेगा। सोशल मीडिया पर जारी बहस और लोगों के बीच फैले संशय के बीच आइए जानते हैं कि क्‍या है हंता वायरस?

जानें, क्‍या है हंता वायरस

हंता वायरस चूहे या गिलहरी के संपर्क में इंसान के आने से फैलता है। सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, चूहों के घर के अंदर और बाहर करने से हंता वायरस के संक्रमण का खतरा रहता है। यहाँ तक कि अगर कोई स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति भी है और वह हंता वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है तो उसके संक्रमित होने का खतरा रहता है। 

यह बीमारी एरोसोलिज्ड वायरस के माध्यम से लोगों में फैलता है। यानी कि यह मल, मूत्र या फिर लार के माध्यम से फैलता है। यदि कोई व्‍यक्ति चूहों के मल, पेशाब आदि को छूने के बाद अपनी आँख, नाक और मुँह को छूता है तो उसके हंता वायरस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी चूहे के काटने से भी फैल सकता है। हालाँकि यह बहुत कम होता है।

हंता वायरस को अमेरिका में ‘न्यू वर्ल्ड’ हंता वायरस के रुप में जाना जाता है और इससे हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) हो सकता है। वहीं अन्य हंता वायरस को ‘ओल्ड वर्ल्ड’ हंता वायरस कहा जाता है, जो कि यूरोप और एशिया में पाया जाता है। इससे गुर्दे के सिंड्रोम के साथ रक्तस्रावी बुखार हो सकता है।

इस वायरस से संक्रमित होने पर इंसान को बुखार, सिर दर्द, शरीर में दर्द, पेट में दर्द, उल्‍टी, डायरिया आदि हो जाता है। अगर इलाज में देरी होती है तो संक्रमित इंसान के फेफड़े में पानी भी भर जाता है, उसे साँस लेने में परेशानी होती है।

जानकारी के मुताबिक हंता वायरस जानलेवा है। इससे संक्रमित व्‍यक्तियों के मरने का आँकड़ा 38 प्रतिशत है। यानी कि यह कोरोना वायरस की तुलना में अधिक खतरनाक है। हालाँकि राहत की बात ये है कि अभी तक भारत में छिटपुट मामले सामने आए हैं। भारत में 2008 में इस वायरस की वजह से साँप और चूहे मारने वाले एक समूह की मौत हो गई थी। इसके अलावा 2016 में मुंबई में 12 साल के एक बच्चे की हंता वायरस संक्रमण से मृत्यु हो गई थी।

इसका उपचार मुश्किल है क्योंकि इसके लक्षण कोरोनावायरस के लक्षण की तरह ही होते हैं तो समझने में काफी परेशानी होती है और जब तक समझ में आता है, मरीज की मौत हो चुकी होती है। इसलिए बुखार और अधिक परिश्रम वाले व्यक्तियों और जो चूहों के संपर्क में हैं, उनका परीक्षण किया जाना चाहिए। ऐसा पाया गया है कि भारत में चूहे और साँपों का शिकार करने वाले लोग इसका शिकार हो सकते हैं। चिकित्सा देखभाल और आईसीयू के अलावा कोई फिलहाल इसका विशेष उपचार नहीं है। इसमें ऑक्सीजन थेरेपी साँस लेने की समस्या में मदद कर सकती है। इसके लिए जरूरी है कि मरीज जितनी जल्दी आईसीयू में पहुँच जाए, बेहतर है। घर या काम पर चूहों से संपर्क कम से कम करें। ठीक से साफ करें और कीट नियंत्रण का उपयोग करें। इससे बचाव के लिए घर या काम पर चूहों से के संपर्क में कम से कम रहें। घरों को ठीक तरह से साफ करें और पेस्ट कंट्रोल का उपयोग करें।

चीन में हंता वायरस का यह मामला ऐसे समय पर आया है जब पूरी दुनिया वुहान से निकले कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रही है। कोरोना वायरस से अब तक 16 हजार 500 लोगों की मौत हो गई है। यही नहीं अब तक दुनिया के 382,824 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। कोरोना वायरस की व्‍यापकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह वायरस अब 196 देशों में फैल चुका है।

कोरोना संकट के समय गाँव की गलियों, अस्पतालों को सेनेटाईज करने में जुटे संघ के स्वयंसेवक, मास्क देकर लोगों को कर रहे जागरूक

एक तरफ कोरोना के डर से लोग घरों में कैद हैं, तो कुछ लोग इस वायरस को गंभीरता से न लेकर लॉकडाउन के बाद भी सड़कों पर दिखाई रहे हैं। वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों, पुलिस प्रशासन के साथ देश के लाखों जिम्मेदार लोग कोरोना को मात देने के लिए घरों से बाहर निकले हुए हैं। इन्हीं में से कुछ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं। कोरोना को मात देने के लिए अब आरएसएस के स्वयंसेवक और दायित्ववान कार्यकर्ता अपने घरों से बाहर निकले हैं। सोशल मीडिया पर आई एक वीडियो में आप देख सकते हैं कि संघ के कुछ स्वयंसेवक अपनी पहचान के अनुरूप मध्य प्रदेश के एक गाँव की गलियों को छिड़काव के माध्यम से सेनेटाइज करने में लगे हुए हैं। साथ ही घर-घर जाकर लोगों को इससे बचने के उपाय बता रहे हैं।

एक संघ कार्यकर्ताओं द्वारा भेजे गए फोटो में आप देख सकते हैं कि आरएसएस के स्वयंसेवक सिर पर काली टोपी और खाकी हाफ नेकर पहने हाथ में सेनेटाइजर लेकर लोगों के हाथ साफ कराने में लगे हुए हैं। वहीं दूसरी दूसरी तस्वीर में आप देखेंगे कि संघ के स्वयंसेवक हाथ में लाउडस्पीकर लिए लोगों को कोरोना से बचाव के उपाय बता रहे हैं। साथ ही लोगों को घरों से न निकलने की अपील कर रहे हैं। वहीं अन्य तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि संघ के स्वयंसेवक घर-घर जाकर लोगों को मास्क बाँटने में लगे हुए हैं। गौर करने वाली बात यह कि इस दौरान सभी स्वयंसेवक अपने मुँह पर मास्क लगाकर गाँव में लोगों के बीच नजर आ रहे हैं।

कोरोना से बचाव के लिए लोगों को मास्क देते आरएसएस के स्वयंसेवक

वहीं आप इस वीडियों में देख सकते हैं संघ के स्वयंसेवक हाफ पैंट पहने और हाथों में झाडू लिए केरल के एक अस्पताल में सफाई करने में जुटे हुए हैं। आप इन तस्वीरों और सोशल मीडिया पर आई वीडियो के देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि स्वयंयेवक किस तरह से अपनी जान की परवाह किए बिना कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए घरों से बाहर निकलकर लोगों की सेवा में लगे हैं।

वहीं अगर बात करें राजस्थान की तो यहाँ के स्वयंसेवक ऐसे लोगों के लिए भोजन तैयार करने में लगे हुए हैं, जो कि हर रोज अपनी कमाई से अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन कोरोना के चलते राज्य में लगाए गए लॉकडाउन के चलते वो लोग घरों में कैद हैं। ऐसे ही मजदूर लोगों को संघ के स्वयंसेवक घर-घर भोजन पैकेट पहुँचा रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक के शीर्ष नेतृत्व ने मोदी द्वारा कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लोगों से जनता कर्फ्यू का पालन करने की अपील की थी। साथ ही अपने संघ के स्वयंसवकों से सरकार्यवाहक सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा था कि जनता कर्फ्यू के दिन कोई भी खुले में शाखा न लगाएँ साथ ही शाखा, मिलन, मंडली का कोई भी कार्यक्रम हो उसे अपने घरों में ही आयोजित करें।

संघ पदाधिकारियों द्वारा अपने स्वयंसेवकों से की गई अपील

कोरोना पर खौफ के बीच वामपंथी सरकार को शराब की चिंता, लॉकडाउन में भी खोल रखे हैं ‘ठेके’

केरल में सोमवार को कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की तादाद में अचानक वृद्धि देखने को मिली। इसके बाद राज्य में कुल 28 केस सामने आए। इतना होने के बावजूद राज्स सरकार के फैसलों में निहित नियम-शर्तों को देखकर लगा कि वे सिर्फ़ इस लड़ाई को लड़ने के लिए दिखावटी प्रयास कर रहे हैं और उन्हें केवल अपने राजस्व से मतलब है।

दरअसल, सोमवार को राज्य में 28 कोरोना मामलों का खुलासा होने के बाद केरल सरकार ने सभी बार और शराब के ठेकों को बंद करने की घोषणा की। लेकिन इस दौरान उन्होंने ये भी घोषणा की कि राज्य संचालित शराब की दुकानें खुली रहेंगी। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कोविड-19 समीक्षा बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की।

उन्होंने कहा, “राज्य द्वारा संचालित केरल स्टेट बेवरेज (मैन्युफैक्चरिंग एंड मार्केटिंग) कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बेवको) की शराब की दुकानों को प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया गया है और यह अब इन शराब की दुकानों को छूट दी जाएगी।” विजयन ने सोमवार को ये घोषणा करते गुए संवाददाताओं से कहा, “शराब की दुकानें खुली रहेंगी। जब सरकार ने शराब की बिक्री रोक दी थी तो हमें कुछ बुरे अनुभवों से गुजरना पड़ा था। इससे कई सामाजिक मुद्दे उत्पन्न होंगे।”

मुख्यमंत्री विजयन ने राज्य द्वारा संचालित शराब की दुकानों के खुलने पर शर्त रखी। उन्होंने कहा, “ग्राहक बैठकर नहीं पी सकते। मगर, बाद में जरूरत पड़ने पर काउंटर सेल की अनुमति दी जाएगी।”

इसके बाद उन्होंने अपने निर्णय को वाजिब ठहराते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के फैसले का हवाला दिया। जिसमें उन्होंने लॉकडाउन के दौरान जरूरत के सामनों जैसे सब्जी आदि के साथ पेय को जरूरी सामग्री में शामिल किया था और इसकी आपूर्ति को आवश्यक बताया था।

यहाँ बता दें कि केरल में इस समय वामपंथियों की सरकार है जिसके कारण सीएम का ये फैसला और भी ज्यादा हैरान करने वाला है। क्योंकि अपनी विचारधारा को हमेशा धर्म-जाति-पाति से उठकर मानवता के हित में बताने वाले वामपंथियों से जाहिर है ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन ऐसी उम्मीद सिर्फ कागजी है!

गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए नेता विपक्ष रमेश चेन्निथला ने कहा कि यह शराब की सभी दुकानों को बंद करने के खिलाफ सरकार के अड़ियल रवैये को दर्शाता है, जिससे राज्य और अधिक खतरनाक स्थिति में पहुँचेगा।

जानकारी के अनुसार, केरल वह राज्य है जहाँ प्रति व्यक्ति शराब की खपत सबसे अधिक है। जिसके कारण इसका सीधा राजस्व पर पड़ता है या ये कहें कि सरकारी खजाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य की शराब की खपत से आता है। बता दें 2019 में बिक्री की तुलना में बेवको आउटलेट के माध्यम से कानूनी शराब की बिक्री में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

ऑल्ट न्यूज के सिन्हा, प्रिंट वाले गुप्ता ने फेक अकाउंट को रीट्वीट कर फैलाई झूठी जानकारी, पकड़े जाने पर ट्वीट डिलीट

एक ट्विटर अकाउंट होता है, जो कई दिनों से बंद पड़ा हुआ है। उस ट्विटर अकाउंट से अचानक से एक वीडियो ट्वीट किया जाता है, जिसमें एक महिला डॉक्टर बताती है कि किस तरह डॉक्टरों को सरकार द्वारा कुछ भी सुविधाएँ नहीं दी जा रही हैं। वो बताती हैं कि उसने जो मास्क पहना हुआ है, वो काफ़ी पुराना है और उसे बार-बार धो कर उसे पहनना पड़ रहा है। विडम्बना देखिए कि वो ट्विटर अकाउंट काफ़ी दिनों से बंद पड़ा हुआ था जबकि उसे 2011 में ही बनाया गया था।

वो डॉक्टर बताती हैं कि वो एक सप्ताह से यही मास्क पहन रही हैं। इस ट्विटर अकाउंट के काफ़ी कम फॉलोवर हैं, मात्र 314 ही। फिर वो ट्वीट वायरल कैसे होगा? ऐसे में प्रतीक सिन्हा आगे आते हैं और वो उस ट्वीट को रीट्वीट करते हैं। वही प्रतीक सिन्हा, कथित फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के संस्थापक। इसके बाद ‘द प्रिंट’ के संस्थापक शेखर गुप्ता द्वारा उसे रीट्वीट किया जाता है। बस हो गया वायरल। वामपंथी गैंग की ख़बरों का नैरेटिव ऐसे ही गढ़ा जाता है।

और सबसे अच्छी बात तो ये है कि ये अकाउंट किसी पुरुष के नाम पर था, जिसका हैंडल है- विक्रमादित्य। पहले नाम भी किसी पुरुष का था लेकिन इसको वायरल करने के लिए इसे किसी महिला के नाम पर बना दिया गया। लेकिन, चोरी पकड़ी इसीलिए गई क्योंकि इस ट्विटर अकाउंट ने नाम तो बदल लिया लेकिन वो अपना यूजरनेम या फिर ट्विटर हैंडल का नाम नहीं बदल पाए। तैयारी अधूरी रह गई और प्रपंच पकड़ा गया। इसका मतलब है कि प्रतीक सिन्हा ने एक फेक अकाउंट का ट्वीट शेयर किया, ताकि इसके आधार पर मोदी सरकार पर निशाना साधा जा सके।

प्रतीक सिन्हा ने रीट्वीट किया फेक हैंडल का ट्वीट

अब उस अकाउंट ने अपने सारे ट्वीट्स डिलीट कर लिए हैं। अगस्त 2011 में बने उस अकाउंट पर अगर आप अभी जाएँगे तो आपको कुछ नहीं दिखेगा क्योंकि उसने सारे ट्वीट्स हटा दिए हैं। पकड़े जाने के बाद गिरोह विशेष ने ऐसा करवाया है। अक्सर ये आरोप लगाया जाता है कि फलाँ ट्विटर हैंडल ने कुछ ग़लत सूचना साझा कर दी तो इसके लिए पीएम मोदी जिम्मेदार हैं क्योंकि वो इसे फॉलो करते हैं। ठीक ऐसे ही, इस ट्विटर हैंडल को जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद फॉलो कर रही थीं। अब आप समझ सकते हैं कि किसके तार कहाँ और किस-किस से जुड़े हुए हैं।

और भी कई लोग थे, जिन्होंने मोदी सरकार के विरोध में ट्वीट देखते ही इस हैंडल को फॉलो कर दिया। उनमें से एक नाम ज्योति यादव का भी है, जो ‘द प्रिंट’ नामक प्रोपेगंडा पोर्टल में कार्यरत हैं। इस ट्विटर हैंडल का नाम पहले ‘विक्रमादित्य सांगवान’ था। आप ऊपर की तस्वीर में उसकी फोटो भी देख सकते हैं, जो कि देखने में स्पष्ट रूप से एक पुरुष लग रहा है। फिर मोदी के विरोध के प्रोपेगंडा की आग में उसने ख़ुद को औरत क्यों बना लिया, ये समझ से परे हैं।

कोरोना संकट पर वित्त मंत्रालय ने दी बड़ी राहत: ITR, GST सहित कई घोषणाएँ, दूसरे बैंक के ATM से पैसे निकालने पर नहीं लगेगा कोई चार्ज

भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है। भारत में अब तक इसके 503 केस सामने आ चुके हैं जिनमें से 9 लोगों की मौत हो गई है। कोरोना के खतरे से निपटने के लिए देश के कई राज्यों में लॉकडाउन घोषित किया गया है। कुछ जगहों पर लापरवाही की वजह से कर्फ्यू लगा दिया गया है। 

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को मीडिया को संबोधित किया। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कई राहतों का ऐलान किया। वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स और जीएसटी को लेकर अहम ऐलान किया। निर्मला सीतारमण ने लोगों को राहत देते हुए इनकम टैक्स रिटर्न की तारीख (2018-19) को बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया है। पहले इसकी आखिरी तारीख 31 मार्च थी। इसके बाद जमा करने पर 10% जुर्माना था। अब रिटर्न की देरी पर 12% की जगह 9% चार्ज लगेगा। इसके साथ ही आधार-लिंक पैन की आखिरी तारीख को 30 जून 2020 तक किया गया। यह भी पहले 31 मार्च तक थी।

इसके अलावा वित्त मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि TDS पर ब्याज दर 18% की जगह 9% किया गया। विवाद से विश्वास योजना को बढ़ाकर 30 जून 2020 कर दिया है और इस पर 10 प्रतिशत का कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं है। सीतारमण ने अन्य बड़े ऐलान भी किए। इसमें मार्च, अप्रैल, मई का जीएसटी रिटर्न भरने की तारीख भी 30 जून तक बढ़ाई गई। इसकी फाइलिंग में देरी पर कोई जुर्माना नहींं लगेगा। निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि 5 करोड़ सालाना से कम कारोबार वाली कंपनियों पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि कस्टम क्लियरेंस अब एक जरूरी सर्विस है, इसलिए 30 जून, 2020 तक यह 24/7 काम करेगी। नई कंपनीज बनाने वालों को अपने व्यापार के लिए डिक्लरेशन करने के निर्धारित 6 महीने की अवधि को बढ़ाकर एक साल किया गया। बोर्ड की बैठक आयोजित करने की अनिवार्यता को 60 दिनों की अवधि के लिए बढ़ाया जा रहा है, यह छूट अगली दो तिमाहियों के लिए है। 2020 में अभी जिन कंपनियों ने डायरेक्टर्स की एक भी मीटिंग नहीं की है, उनको नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कोरोना वायरस से जुड़े कार्यों में अब CSR का फंड दिया जा सकता है। यानी यह फंड अब कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जाएगा।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के 101 केस पॉजिटिव: 3 लाख N95 समेत 25 लाख मास्क कालाबाजारियों से जब्त, 4 गिरफ्तार, 2 फरार

कोरोना वायरस ने देश में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है। मंगलवार (मार्च 24, 2020) सुबह चार नए मामले सामने आए हैं, जिसमें से 3 पुणे से और एक सांगली से आया है। सांगली में पहली बार कोई कोरोना पॉजिटिव केस सामने आया है। अब महाराष्ट्र में मरीजों की संख्या 101 हो गई है। कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए पूरे राज्य में लगाई गई धारा 144 के फेल होने के बाद सीएम उद्धव ठाकरे ने आज से पूरे राज्य में कर्फ्यू घोषित कर दिया है। इसी के साथ राज्य के सभी बॉर्डर और शहरों की सीमाओं को भी सील किया गया है।

कोरोना वायरस के खतरे के बीच जरूरी संसाधन जैसे मास्क और सैनिटाइजर की माँग अचानक से काफी बढ़ गई है। इसके बाद इसकी कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस बीच मुंबई पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 25 लाख मास्क को जब्त किया है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि पुलिस ने अंधेरी और भिवंडी के गोदामों से 25 लाख मास्क जब्त किए हैं, जिसमें 3 लाख N95 मास्क शामिल हैं। इन मास्कों की कुल कीमत 15 करोड़ रुपए है। उन्होंने बताया कि मास्क की कालाबाजारी के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 2 लोग फरार हैं। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है। पुलिस ने बताया कि इन मास्कों को ऊँची कीमत पर बेचने की तैयारी थी।

गृहमंत्री ने बताया कि कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए पुलिस सर्तकता से काम कर रही है। उन्होंने मंगलवार को मुंबई में पत्रकारों को बताया कि मुंबई के अंधेरी व कांदिवली में बड़े पैमाने पर मास्क को बनाकर जमा किए जाने की गोपनीय खबर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश देसाई की टीम को मिली थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने नकली ग्राहक बनकर आरोपितों के साथ संपर्क किया और 25 लाख मास्क बरामद कर लिया है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से बरामद मास्क आम नागरिकों के लिए उपलब्ध करवाए जाएंँगे। 

गौरतलब है कि इससे पहले राजस्थान में मास्क की कालाबाजारी की खबर सामने आई थी। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल से तकरीबन ढाई लाख से ज्यादा मास्क गायब हो गए थे। इन गायब हुए मास्क की कीमत लगभग 11 करोड़ रुपए बताई गई थी। बताया गया कि गायब हुए मास्क N95 क्वालिटी के थे।

अज़ान सुनकर निकल पड़े 100-150 नमाजी: धारा 144 का उल्लंघन करते हुए अदा की नमाज, आसबीबी मस्जिद के ट्रस्टियों पर FIR दर्ज

विश्व भर में कोरोना के फैलते प्रभाव को रोकने के लिए हर ओर प्रयास किए जा रहे हैं। मगर, इस बीच एक समुदाय ऐसा है, जो इन कोशिशों को नजरअंदाज कर लगातार अपनी मनमानी कर रहा है। बीते दिनों कई ऐसे मामले सामने आए जब मजहब के नाम पर कोरोना के खतरे को दरकिनार कर मानवता को खतरे में डाला गया। इसी कड़ी में मुंबई में भी एक मस्जिद में धारा 144 का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा की गई। जिसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मस्जिद के ट्रस्टी पर FIR दर्ज की।

गौरतलब है कि अब तक कोरोना के मरीजों की संख्या महाराष्ट्र में सबसे अधिक पाई गई है और ये तादाद बढ़ती जा रही है लेकिन फिर भी भिवंडी शहर के आसबीबी मस्जिद पर इसका कोई फर्क़ नहीं है।

जानकारी के मुताबिक सोमवार की दोपहर यहाँ नमाज के लिए मस्जिद से अजान हुई। बस फिर क्या…! नियम कानून का उल्लंघन करते हुए लोग चल पड़े नमाज पढ़ने। मगर, इसकी जानकारी होने के बाद सरकार के आदेश का उल्लंघन करने के कारण भिवंडी शहर पुलिस ने आसबीबी मस्जिद के पदाधिकारियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया।।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस उपायुक्त राजकुमार शिंदे ने जमावबंदी लागू करने की जानकारी देते हुए शहर के सभी धार्मिक स्थलों पर जमा न होने की बात कही थी। उन्होंने मस्जिदों के पदाधिकारियों से नमाज के समय सिर्फ अजान करके लोगों को जानकारी देने का अनुरोध किया था और नमाज घरों में पढ़ने की बात कही थी।

मगर, आसबीबी मस्जिद में तो नमाज अदा करने वालों की भीड़ लग गई। इसके बाद भिवंडी शहर पुलिस ने आसबीबी मस्जिद के अध्यक्ष गुलाम अहमद खान, कोषाध्यक्ष मरगूब हसन अंसारी, सदस्य मो हबीब अंसारी एवं हजरत अली अंसारी सहित मस्जिद के अन्य पदाधिकारियों के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 144 (1)(3) एवं आईपीसी की धारा 188, 269 सहित राष्ट्रीय आपदा उल्लंघन अधिनियम 2005 की धारा 51 बी के तहत मामला दर्ज किया है।

100 बेड के साथ चालू हुआ देश का पहला ‘कोरोना वायरस डेडिकेटेड अस्पताल’, रिसर्च में जुटे रिलायंस के वैज्ञानिक व डॉक्टर

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कोरोना वायरस से निपटने और लोगों की परेशानियों का ख्याल रखने में सरकार का पूर्ण सहयोग करने का वादा किया और इसी क्रम में कई घोषणाएँ की। इनमें कोरोना वायरस के मरीजों के लिए एक स्पेशल अस्पताल खोलने की बात भी कही गई थी, जिसे सिर्फ़ 2 सप्ताह में तैयार कर लिया गया है। अब हम आपको उस असपताल की डिटेल्स बताते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बताया है कि ये देश का पहला ‘कोविड-19 डेडिकेटेड हॉस्पिटल’ है। इसमें 100 बेड हैं और इसे बृहनमुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) के साथ मिल कर तैयार किया गया है। इसे ‘सेवन हिल्स हॉस्पिटल’ के एक सेंटर के रूप में तैयार किया गया है।

रिलायंस ने बताया है कि ये अपने आप में भारत का पहला ऐसा सेंटर है और इसे पूर्णरूपेण रिलायंस फाउंडेशन द्वारा फंड किया गया है। क्रॉस-कंटैमिनेशन को रोकने और संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए एक ‘नेगेटिव प्रेशर रूम’ का निर्माण किया गया है। सभी बिस्तरों को सारी ज़रूरी सुविधाओं, जैसे बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्टर से लैस किया गया है। जैसे- वेंटीलेटर, पेसमेकर, डायलिसिस मशीन और पेसेंट मॉनिटरिंग डिवाइसेज की सुविधा सभी बेड के लिए है। इसके अलावा एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल ने भी क़दम बढ़ाए हैं।

ये अपने आप में एक वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर संस्थान है, जिसने विदेश से आने वालों के लिए स्पेशल मेडिकल फैसलिटीज की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। यहाँ जल्द ही संक्रमित लोगों के इलाज और आइसोलेशन की व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी। यहाँ के डॉक्टर्स और रिसचर्स लगातार कोरोना वायरस का तोड़ ढूँढने में लगे हुए हैं, ताकि इसका कोई स्थायी इलाज निकल कर सामने आए। महाराष्ट्र की लोधीवाली में भी रिलायंस का एक बड़ा आइसोलेशन सेंटर है, जिसे जिला प्रशासन को सौंप दिया गया है। रिलायंस ने मुख्यमंत्री राहत कोष में भी 5 करोड़ रुपए जमा किए हैं। देखें रिलायंस के ‘कोरोना वायरस डेडिकेटेड हॉस्पिटल’ का वीडियो:

सोमवार (मार्च 23, 2020) को ही रिलायंस ने घोषणा की थी कि रिलायंस फाउंडेशन देश के विभिन्न शहरों में लोगों को मुफ्त भोजन भी देगा। ये काम कई एनजीओ के माध्यम से किया जाएगा। इमरजेंसी सेवाओं की गाड़ियों को रिलायंस अपने पेट्रोल पम्प्स पर मुफ्त में तेल भी देगा। पूरे देश में रिलायंस के 736 ग्रोसरी स्टोर्स हैं, जिन्हें लोगों के डिमांड्स को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। अब ये सभी स्टोर्स सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक खुले रहेंगे। इन स्टोर्स में सब्जियों व अन्य चीजों का इंतजाम किया जाएगा। साथ ही बुजुर्गों के लिए होम डिलीवरी की व्यवस्था की जाएगी। रिलायंस ने प्रतिदिन 1 लाख मास्क के उत्पादन की भी जानकारी दी है।

कानून तोड़ने वालों को नहीं होगा संक्रमण, सिर्फ़ लगेगी चोट: सैनिटाइज्ड लाठियों से पिटाई करेगी हरियाणा पुलिस

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बाद लगभग पूरे भारत में लॉकडाउन की घोषणा विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा कर दी गई है। लेकिन, कई लोग फिर भी सरकार की सलाहों व आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे में हरियाणा में भी स्थिति ठीक नहीं है। वहाँ भी लोगों से लगातार अपील की जा रही है कि वो लॉकडाउन का पालन करें लेकिन कई लोग घरों से निकल रहे हैं। ऐसे में पुलिस अब सख्ती से कार्रवाई करने में जुट गई है। लाठियों को सैनिटाइज किया जा रहा है ताकि क़ानून तोड़ने वालों की पिटाई की जा सके।

हरियाणा में ‘सिक्योरिटी एंड साइबर क्राइम’ के एसपी पंकज नैन ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें पुलिस बल अपनी लाठियों पर सैनिटाइजर छिड़कते दिख रहे हैं। चूँकि इन लाठियों का इस्तेमाल सख्ती के लिए किया जाना है, ऐसे में पुलिसवालों का और साथ ही जिनकी पिटाई होगी, उनका भी सुरक्षित रहना ज़रूरी है, इसीलिए पुलिस लाठियों को सैनिटाइज कर रही है। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कैसे लाठियों पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा है:

अब तक कहावत ये चलती थी कि लाठी को तेल पिलाने से ज्यादा चोट लगती है लेकिन अब लाठियों को सैनिटाइजर पिलाया जा रहा है। आईपीएस अधिकारी पंकज ने बताया कि पुलिस ‘फुल तैयारी’ में है। जहाँ तक हरियाणा सरकार की बात है, वो किसानों के लिए एक बड़ी घोषणा का खाका तैयार करने में लगी हुई है। ‘मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना’ के 12.38 लाख लाभार्थियों के खाते में 2000 रुपए 31 मार्च तक भेज दिए जाएँगे। प्रत्येक को 4000 रुपए पहले ही दिए जा चुके हैं। सरकार ने विभिन्न कारोबारियों और व्यवाप्रियों से भी इसके लिए मदद माँगी है।

कई प्रदेशों में पुलिस कोरोना वायरस के खतरों को दरकिनार कर बिना मतलब घर से बाहर निकलने वालों पर कार्रवाई कर रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा में पुलिस ने ऐसे लोगों को एक पर्ची थमा पर उनकी फोटो खिंचवाई। उन पर्ची पर लिखा होता है- “मैं समाज का दुश्मन हूँ। मैं कोरोना वायरस का दोस्त हूँ। मैं सरकार की सलाह नहीं मानूँगा। मैं घर में नहीं रहूँगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चिंता जताई थी कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा है, ऐसे में विभिन्न राज्य सरकारें इस दिशा में काम करें।

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कॉन्ग्रेस नेता, चमचा डॉक्टर और ‘साथी पत्रकारों’ ने फैलाया कोरोना पर झूठ, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए FIR के आदेश

कॉन्ग्रेस नेता हरजीत भट्टी, जो कि पेशे से एक डॉक्टर हैं, ने सोमवार (मार्च 23, 2020) को ट्विटर पर दावा किया कि असम मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य कर्मियों को खुद को प्लास्टिक बैग में कवर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ये वो प्लास्टिक की थैलियाँ हैं, जिसका इस्तेमाल जैव चिकित्सा अपशिष्ट (biomedical waste) को ले जाने के लिए किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि असम मेडिकल कॉलेज में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (PPE) की कमी है।

कॉन्ग्रेस नेता द्वारा किया गया ट्वीट
विनोद कापड़ी द्वारा किया गया ट्वीट

फिल्मकार-पत्रकार विनोद कापड़ी, जो नियमित रूप से फर्जी खबरें फैलाने में लिप्त रहते हैं, वे भी इसमें शामिल हो गए हैं। देश में छाए संंकट के बीच भी उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ा। इसके साथ ही अन्य ‘पत्रकारों’ ने भी भट्टी के ट्वीट को फैलाने का काम किया, जैसा कि वो हमेशा किया करते हैं।

इस खबर को इसी तरह के अन्य लोगों ने भी ट्विटर पर काफी शेयर किया।

मोहम्मद जुबैर द्वारा लाइक किया गया Joydas का ट्वीट

AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा Joydas के ट्वीट को लाइक किया गया (हालाँकि हम अभी भी इस खबर का AltNews द्वारा फैक्ट चेक किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।)

वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर की पत्रकार ने भी Joydas के असत्यापित ट्वीट को शेयर किया। जिसे Joydas ने बाद में बिना किसी स्पष्टीकरण के डिलीट कर दिया। 

इसी तरह का दावा कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया संयोजक सरल पटेल ने भी किया।

हालाँकि असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने उनके सारे दावों को झूठा करार दिया। 

स्वास्थ्य मंत्री हिमंता विश्व शर्मा ने कॉन्ग्रेस नेता हरजीत भट्टी के ट्वीट को (राजनीतिक उद्देश्यों से) अत्यधिक प्रेरित बताते हुए कहा कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पिछले तीन दिनों में PPE किट की अच्छी संख्या में आपूर्ति की है। शर्मा ने यह भी बताया कि पुलिस को भट्टी के खिलाफ FIR दर्ज करने और जाँच करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि वो खुद अस्पताल के अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।

शर्मा के स्पष्टीकरण के बाद भट्टी, कापड़ी और Joydas ने चुपचाप अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया, जबकि कॉन्ग्रेस मीडिया संयोजक सरल पटेल ने अपने नेता शशि थरूर की तरह इसे अपने टाइमलाइन से डिलीट नहीं किया।

इधर हरजीत भट्टी ने उसी तस्वीर के साथ एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्हें असम मेडिकल कॉलेज से फोन आया कि उनके पास PPE है। इस प्लास्टिक बैग से परीक्षण किया गया था कि अगर मरीजों की संख्या में वृद्धि होगी तो PPE की कमी होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस ट्वीट के जरिए उन्होंने एक बार फिर से आधारहीन दावा किया।

बता दें कि डॉ हरजीत सिंह भट्टी कॉन्ग्रेस पार्टी के अखिल भारतीय चिकित्सा सेल के राष्ट्रीय संयोजक हैं। पिछले साल फरवरी में उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी में इस पद पर नियुक्त किया गया था। भट्टी सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी ही नहीं बल्कि भीम आर्मी के भी काफी नजदीकी हैं। वह भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के डॉक्टर होने का दावा करते हैं। आजाद इन दिनों जमानत पर बाहर है और भट्टी यह दावा करते हुए कि वह बेहद अस्वस्थ हैं, आजाद के चिकित्सा देखभाल की माँग को लेकर काफी मुखर रहे हैं। वह न केवल आजाद के डॉक्टर हैं, बल्कि वो उनके समर्थक भी हैं, क्योंकि उन्हें हैशटैग #AzaadiForAzad के साथ ट्वीट पोस्ट करते हुए देखा गया है।