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The Hindu के ‘इस्लामोफोबिक’ कार्टून में लोगों ने पहचाना कोरोना वायरस का लिबास और मजहब

देश की मुख्यधारा की मीडिया और समाचार पत्रों पर अक्सर पूर्वग्रहों को लेकर कई तरह के आरोप लगाए जाते रहे हैं। कई बार देखा जाता है कि अभिव्यक्ति की आजादी का सहारा लेकर हिन्दू मान्यताओं और प्रतीकों को किसी भी शक्ल और नैरेटिव में पिरोकर जनता के सामने रखा जाता है और ख़ास विरोध भी इस बारे में बमुश्किल देखा जाता है। लेकिन कारोना वायरस की महामारी के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता ने पाला बदलने का प्रयास किया और यह खतरा मोल लिया है।

मशहूर समाचार पत्र द हिन्दू (The Hindu) ने 26 मार्च के अपने कार्टून में कोरोना के खिलाफ सन्देश दिखाने की कोशिश की, जिस कारण यह अखबार एक बड़े वर्ग के निशाने पर आ गया है।

26 मार्च को द हिन्दू ने एक कार्टून चित्र पब्लिश किया, जिसमें कोरोना वायरस (Covid-19) को हाथों में बन्दूक थामे हुए पृथ्वी ग्रह को डराते हुए बताया गया है कि इसने पूरी पृथ्वी को आतंकित किया है। लेकिन कुछ लोगों ने इस कार्टून में भी कोरोना वायरस के ‘लिबास’ पहचान लिए और फिर इसे इस्लामोफ़ोबिक कार्टून घोषित कर दिया।

The Hindu में प्रकाशित 26 मार्च का कार्टून –

लेकिन, इस कार्टून पर कुछ इस्लामिक विचारधारा का अनुसरण करने वाले लोगों ने आपत्ति दर्ज की है। राना सफवी, जिनके ट्विटर अकाउंट में उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि वो स्तंभकार, लेखक होने के साथ-साथ गंगा-जमुनी तहजीब में भी यकीन करती हैं, ने द हिन्दू का यह कार्टून ट्वीट करते हुए लिखा है- “द हिन्दू की दैनिक पाठक और साथ ही साथ कंट्रीब्युटर होने के नाते, मैं इस इस्लामोफोबिक कार्टून से बेहद दुखी हूँ।” उन्होंने द हिन्दू समूह के चेयरमैन एन राम को टैग करते हुए निवेदन किया है कि कृपया इसे हटा दीजिए। इसके आगे राना सफवी ने लिखा है – “हम आपसे ‘उन्हें उनके कपड़ों से पहचानिए’ वाली कट्टरता की उम्म्मीद नहीं करते हैं।

@grumpeoldman ने भी द हिन्दू के इस कार्टून को ट्वीट करते हुए लिखा है- “द हिन्दू! यह बेहद कड़वा है। ‘उन्हें उनके कपड़ों से पहचानो’ का अनुसरण करने के कारण तुम्हें लोगों से माफ़ी माँगनी चाहिए।”

इस कार्टून में कोरोना वायरस का लिबास पहचानकर इससे आहत होने वाले लोगों की लिस्ट बहुत लम्बी है। @EqualityLabs नाम के एक अकाउंट ने भी द हिन्दू को टैग करते हुए लिखा है कि द हिन्दू को यह इस्लामोफोबिक कार्टून हटाना चाहिए क्योंकि यह चित्र मुस्लिम विरोधी भावनाओं के समान ही है और यह स्वीकार नहीं है।

@SharjeelUsmani ने लिखा है, “@the_hindu में आज छपे एक कार्टून में कुर्ता पाजामा पहने तीन लोग जिनके चेहरे की जगह कोरोना वाइरस बना है, हाथ मे राइफल लिए पृथ्वी पर निशाना साधे हैं। भारत के तथाकथित ‘अच्छे’ अखबार के अंदर का इस्लामोफोबिया.. बोल रहा है कोरोना मुस्लिमों जितना बुरा है या मुस्लिम कोरोना जितने बुरे हैं?”

गौरतलब है कि पैगंबर मोहम्मद के कार्टून छापने से नाराजगी के कारण जनवरी 07, 2015 को फ्रांस की प्रसिद्ध व्यंग्य पत्रिका ‘शार्ली एब्दो’ पर आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें दो हमलावरों ने हमला कर 12 लोगों को जान से मार दिया। उनका कहना था कि पैगम्बर का कार्टून छापना इस्लाम के खिलाफ है।

शार्ली एब्डो के दफ्तर में हमलावर एक स्वचालित रायफल कालशनिकोव और रॉकेट लॉंचर से लैस होकर घुसे थे और जोर-जोर से कह रहे थे, “हमने पैगंबर का बदला लिया है” और साथ ही ‘अल्लाहु अकबर’ के मज़हबी नारे भी लगाए। इसके बाद पत्रिका के शीर्ष संपादक लॉरेन सूरिसो ने घोषणा की थी कि अब उनकी पत्रिका में कभी भी पैगंबर के कार्टून नहीं छापेंगे।

मक्का से लौटे 37 लोगों ने मुंबई एयरपोर्ट पर लगा क्वारेंटाइन स्टांप मिटाया: मॉं-बेटे के संक्रमित होने के बाद खुलासा

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मॉं-बेटे के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बेटे को मॉं से ही संक्रमण हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक युवक की मॉं सहित 37 लोग मक्का से उमरा कर लौटे थे। मुंबई एयरपोर्ट पर जॉंच के बाद इनके हाथ पर क्वारेंटाइन का स्टांप लगाया गया। लेकिन, एक खास परफ्यूम से स्टांप मिटा ये लोग अपने घर पहुॅंच गए। इनकी इस कारगुजारी से न इनके जीवन पर संकट पैदा हो गया बल्कि इन्होंने सैकड़ों और के जीवन को संकट में डाल दिया है।

पूरा मामला एक महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद सामने आई। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने सभी मक्का से लौटे सभी 37 लोगों को क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया है। इस 45 वर्षीय महिला को तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल ले जाया गया गया। जहाँ उसकी ट्रैवल हिस्ट्री और लक्षण देख सैम्पल्स किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ भेजे गए थे। इस महिला के कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद, उसके साथ उमरा कर के आए अन्य लोगों और उसके बेटे का भी टेस्ट करवाया गया। वह भी कोरोना संक्रमित पाया गया।

जिले के पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि पूछताछ करने पर पता चला कि विदेश से लौट कर आने के कारण मुंबई एयरपोर्ट पर इन सभी को क्वारेंटाइन की मुहर लगाई गई थी। इसे इन सभी ने मिटा दिया। जाँच-पड़ताल के चक्कर से बचने के लिए मुंबई से ट्रेन के जरिए लखनऊ ट्रेन पहुँचे। वहॉं से बस से पीलीभीत आए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये सभी पीलीभीत के उमरिया तहसील स्थित गाँवों के रहने वाले हैं, जिनमें से लगभग 25 एक ही गाँव के हैं।

जिले के प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के लोगों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि उमरा से लौटे इस ग्रुप के सभी 37 सदस्यों को पीलीभीत के क्वारेंटाइन सेंटर पहुँचा दिया गया है। गौरतलब है कि कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सरकार कई तरह के कदम उठा रही है। देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। लेकिन, लोगों की लापरवाही भारी पड़ रही है। पीलीभीत की तरह ही कश्मीर में भी प्रशासन को करीब 400 शिकायतें ट्रैवल हिस्ट्री छिपाने की मिली है।

जामिया का प्रोफेसर सस्पेंड, मजहब विशेष वाले ऑपइंडिया को बना रहे निशाना

जामिया मिल्लिया इस्लामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद ट्वीट करता है कि उसने सीएए का समर्थन करने वाले अपने 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल कर दिया है। ऑपइंडिया इस पर रिपोर्ट करता है। मामला तूल पकड़ता है। फिर अबरार सफाई देते हुए कहता है कि वह मजाक कर रहा था। यूनिवर्सिटी प्रशासन उसकी करतूत को गंंभीर मानता है। उसे जाँच पूरी होने तक सस्पेंड कर देता है। सब कुछ एक प्रक्रिया की तरह होता है। लेकिन इसी दौरान कुछ मुसंघी अबरार के निलंबन की खबर पढ़कर चिढ़ जाते हैं और ऑपइंडिया को गैर प्रमाणिक बताकर उसे टारगेट करने लगते हैं।

अब पढ़िए कि प्रशासन के एक्शन पर कैसे ये लोग ऑपइंडिया पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

मोहम्मद अरशद खान प्रशासन के फैसले को पढ़कर हैरानी जताता है और कहता है, “क्या सच में? प्रशासन ने पक्षपाती दक्षिणपंथी संघी समाचार पोर्टल की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और अति सम्मानित संकाय फैकल्टी को कुछ ही घंटों में निलंबित कर दिया। मगर इतने समय से पुलिस के ख़िलाफ़ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। जिन्होंने परिसर में घुसकर बर्बरता की।”

मोहम्मद सरफराज नाम का यूजर लिखता है, “मैं जामिया मिलिया इस्लामिया का छात्र हूँ। प्रोफेसर अबरार मेरे क्लास टीचर थे। मुझे अच्छी तरह से पता है कि वे कितना प्यारे प्रोफेसर हैं और यहाँ तक ​​गैर मुस्लिम छात्र भी मेरी कक्षा में उनके साथ बहुत खुश थे। अपनी सीमा में रहो।”

मिर्ज़ा बिला बेग ऑपइंडिया की खबर को फेक न्यूज बताता है और कहता है, “एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर अबरार अहमद को ऑपइंडिया द्वारा लगाए झूठे आरोपों के आधार पर निलंबित कर दिया गया।”

मोहम्मद अरशद वारसी ने जामिया प्रशासन को पागल बताते हुए लिखा, “क्या…जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन तुम पागल हो गए हो। ऑपइंडिया के फेक ट्वीट पर एक आदर्श टीचर के ख़िलाफ़ एक्शन ले लिया। क्या तुम बहरे और अंधे हो। तुम्हें दिखता नहीं कि अबरार अहमद ने एक व्यंग्य लिखा था।”

जिक्र नायक नामक यूजर लिखता है कि आखिर जामिया प्रशासन क्या कर रहा है? पहले अबरार सर को उनका मत रखने का मौका दो, फिर एक्शन लो। ये सब बिलकुल एकतरफा है। तुम्हें सारे चार्ज वापस लेने चाहिए।

अबु बकर, अबरार के ट्वीट का मतलब समझाने की कोशिश करता है और कहता है कि प्रोफेसर अबरार ने वैसा बिलकुल नहीं कहा, जैसा ऑपइंडिया द्वारा फैलाया जा रहा है। प्रोफेसर अबरार ने कभी भी बच्चों के साथ जाति-पाति पर भेदभाव नहीं किया। मैं सलाह देता हूँ कि अगर आपको सबूत चाहिए तो कॉलेज के नॉन मुस्लिम छात्रों से बात करें। किसी को अंधा होकर फ़ॉलो न करें।

इसके अलावा भड़काऊ बयानों के कारण फॉलोवर इकट्ठा करने वाला पत्रकार अली सोहराब भी इस मामले में ऑपइंडिया को आरएसएस का मुखपत्र कहने से नहीं चुकता। काकावाणी नाम के अकाउंट से सोहराब अपने फॉलोवर्स को भड़काते हुए लिखता है कि ऑपइंडिया इस्लाम को गाली देने वालों को प्रमोट करता है और आतंकी संगठन आरएसएस का मुखपत्र हैं। ये हर रोज मुस्लिमों को टारगेट करता है। अभी हाल फिलहाल में शरजील इमाम और खुद मुझे टारगेट कर चुका है। आज अबरार को टारगेट किया है। कल आप का नंबर हो सकता है।

अब जिस बात को लेकर अबरार के समर्थक इतना जहर उगल रहे हैं वह खुद उसने ट्वीट कर कबूला था। सीएए समर्थक छात्रों को फेल करने की बात करना, उन्हें धमकी देना किस तरह का व्यंग्य है यह समझ से परे है। ऑपइंडिया ने अपने तरफ से कोई झूठ दावे नहीं किए। जैसा अबरार ने सोशल मीडिया में कहा है वही सब पाठकों को बताया है। अबरार के इसी कबूलनामे पर यूनिवर्सिटी प्रशासन भी एक्शन लिया है।

कोरोना चैलेंज के नाम पर एक और टिकटॉक यूजर ने चाटी टॉयलेट सीट, हुआ संक्रमण

कोरोना वायरस को एक मजाक समझकर उसे हल्के में लेने वाले और उस पर उल-जुलूल बयान जारी करने वाले धीरे-धीरे इसकी गंभीरता से वाकिफ हो रहे हैं। मगर, अभी भी कुछ सनकी लोग ऐसे हैं जो सब कुछ जानते समझते हुए इसे सिर्फ़ एक ट्रेंड मान रहे हैं और चैलेंज की तरह ले रहे हैं। नतीजतन वे खुद अपनी गलतियों के कारण इसका शिकार हो रहे हैं।

ताजा उदहारण देखिए। शुक्रवार को एक टिकटॉक यूजर ने अपनी एक विडियो डाली। विडियो में वो टॉयलेट सीट को चाटते नजर आया। इस दौरान लोगों ने उसकी बहुत आलोचना की। मगर उस पर कोई फर्क़ नहीं पड़ा। उसने इस विडियो को कोरोना वायरस चैलेंज बताया। लेकिन, इस हरकत के कुछ दिन बाद में मालूम पड़ा कि वो खुद कोरोना से संक्रमित हो गया है और इसकी जानकारी भी उसने विडियो डालकर सबको दी है।

अब हालाँकि, लार्ज नाम का ये 21 वर्षीय लड़का वाकई अपनी इसी हरकत के कारण वायरस से संक्रमित हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन लोग इस समय सोशल मीडिया पर उसका विडियो शेयर कर खूब आलोचना कर रहे हैं। उसे गैर जिम्मेदार बता रहे हैं। कुछ लोग तो ये सब देखकर उसका मजाक भी उड़ा रहे हैं। ट्विटर ने तो इसका अकाउंट भी सस्पेंड कर दिया है।

गौरतलब है कि कोरोना चैलेंज का नाम पर लापरवाही और बेहूदगी दिखाने वाले शख्स से पहले एवा नाम की टिकटॉक यूजर भी ऐसी हरकत करने के लिए खबरों में आई थीं। एवा ने 15 मार्च को विडियो बनाकर टिकटॉक पर अपलोड की थी और कैप्शन में लिखा था, प्लीज इसे रीट्विट करें, ताकि लोग जान सकें कि विमान में सफाई कैसे की जा सकती है। यहाँ हालाँकि कैप्शन में ऐसा कुछ नहीं था, लेकिन विडियो यदि देखें तो एवा इसमें कोरोना वायरस के नाम पर टॉयलेट की सीट को जीभ से चाटते देखी जा सकती हैं और ऐसी घटिया हरकत करने के बाद वो अपने हाथ से विक्टरी का साइन भी बनाती दिखती हैं।

इस विडियो को भी कुछ समय पहले खूब शेयर किया गया था और एवा की विडियो को देखने के बाद अधिकांश लोगों ने उस पर पॉजिटिव रिएक्ट नहीं किया है, जो कि एक संतोषजनक बात थी। लेकिन उस समय ये सवाल जरूर उठा था कि जरूरी नहीं प्रतिक्रिया देने वाला हर व्यक्ति समझदार ही हो, क्योंकि उन लोगों का क्या भरोसा जो हर डिजिटल चुनौती को पूरा करने के लिए आमादा हो जाते हैं और इसी जुगत में लग जाते हैं कि किसी तरह वह भी ऐसे स्टंट करके टिकटॉक स्टॉर बनें और उनकी विडियो भी वायरल हो जाए।

लॉकडाउन के बाद भी मैनपुरी की मस्जिद में जुटे नमाजी, मौके पर पहुँची पुलिस से भिड़े

कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा किस तेजी से बढ़ रहा यह छिपा नहीं है। इसका प्रसार रोकने के लिए 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की है। बावजूद इसके समुदाय विशेष के कुछ लोग चेत नहीं रहे। लॉकडाउन को नजरअंदाज कर मस्जिदों में नमाज के लिए एकत्र हो रहे हैं। ऐसा ही मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिला से। यहाँ की एक मस्जिद में लॉकडाउन के बाद भी भीड़ नमाज के लिए जुट गई। इतना ही नहीं सूचना पर पहुँची पुलिस से भी नमाजी भिड़ गए। हालाँकि बाद में पुलिस ने समझाकर लोगों को शांत कर दिया।

दरअसल पूरे देश में 21 दिनों के लिए घोषित लॉकडाउन के बाद भी बुधवार को मैनपुरी के भोगांव कस्बे के मोहल्ला मोहम्मद सईद स्थित मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए नमाजियों की भीड़ इकट्ठा हो गई। इसकी जानकारी जब इलाका पुलिस को हुई तो तत्काल प्रभारी निरीक्षक पोहप सिंह, हल्का इंचार्ज भीपेन्द्र सिंह सिरोही और कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुँच गए, जहाँ पुलिस ने लोगों से मस्जिद का दरवाजा खोलने के लिए कहा। इसी बात पर मुस्लिम समाज के लोग आक्रोशित हो गए और फिर पुलिस और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच गहमागहमी शुरू हो गई। माहौल बिगड़ता देख कंट्रोल रूम को सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस पहुँच गई।

पुलिस के अधिकारियों ने लोगों को समझा बुझाकर मामला शांत किया। साथ ही प्रभारी निरीक्षक ने लोगों से अपील की कि वह लॉकडाउन जारी रहने तक अपने घरों में ही नमाज अदा करें। साथ ही चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर लॉकडाउन रहने तक मस्जिदों में न जुटें। अन्यथा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कनूनी कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि इससे पहले मेरठ में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बीते रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान पुलिस द्वारा मस्जिदों में इकट्ठे न होने की अपील का विरोध किया था, जिसके बाद पहले तो पुलिस ने लोगों को काफी समझाया था, लेकिन इसके बाद भी न मानने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। तब जाकर मुस्लिम समाज के लोग अपने घरों को लौटे। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 38 हो गई है।

अगले 3 महीने तक प्रति व्यक्ति 10 किलो चावल/गेहूँ के साथ 1 किलो फ्री दाल: 1.70 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान, 80 करोड़ गरीबों को मिलेगा लाभ

कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। केंद्र की सरकार ने गरीबों के लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस राहत पैकेज की घोषणा की है।

आर्थिक पैकेज की राशि का इस्तेमाल 10 करोड़ गरीबों के खाते में सीधे रकम ट्रांसफर करने और उद्योगों को राहत देने के लिए किया जाएगा। कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशभर में 21 दिन का लॉकडाउन घोषित किया था। इससे जनजीवन और आर्थिक गतिविधियां ठहर गई हैं।

गरीब वरिष्‍ठ नागरिकों, विधावाएं और दिव्‍यांगों को तीन महीने तक एक्‍स्‍ट्रा 1,000 रुपए डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए दिया जाएगा। महिला जन-धन खाताधारकों को 500 रुपए राशि उनके खाते में भेजी जाएगी। इससे 20 करोड़ महिलाओं को लाभ होगा। उज्‍ज्‍वला स्‍कीम के तहत 8 करोड़ से ज्‍यादा बीपीएल महिलाओं को इस कठिन समय में तीन महीने तक एलपीजी सिलेंडर मुफ्त में दिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि हम किसी को भूखा और रुपयों के बिना नहीं रहने देंगे। उन्होंने कहा कि 24-25 की रात को लॉकडाउन शुरू किया गया है। सरकार प्रभावितों और गरीबों की मदद के लिए काम कर रही है। हमें उन तक पहुँचना है। केवल 36 घंटे हुए हैं। हम पैकेज लेकर आए हैं, जो गरीबों का ध्यान रखेगा, जिन्हें तुरंत मदद की जरूरत है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत किसी गरीब को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा।

अभी गरीबों को 5 किलो गेहूँ या चावल हर महीने प्रति व्यक्ति मिलता है इसके अतिरिक्त अगले तीन महीने तक 5 किलो प्रति व्यक्ति मुफ्त गेहूँ या चावल दिया जाएगा। एक किलो प्रति परिवार दाल भी दिया जाएगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण धन योजना के तहत किसानों, मनरेगा, गरीब विधवा, गरीब पेंशनधारी और दिव्यांगों, और जन-धन अकाउंट धारी महिलाओं, उज्ज्वला योजना की लाभार्थी महिलाएं, स्वंय सेवा समूहों की महिलाओं और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों, कंस्ट्रक्शन से जुड़े मजदूरों को मदद दी जाएगी।

इसके अलावा कंस्‍ट्रक्‍शन से जुड़े 3.5 करोड़ मजदूरों के लिए 31,000 हजार रुपए के फंड का सदुपयोग किया जाए। इसके लिए राज्‍य सरकारों से कहा जाएगा। कोरोना वायरस से जंग के लिए मेडिकल टेस्‍ट, स्‍क्रीनिंग और अन्‍य जरूरतों के लिए डिस्ट्रिक्‍ट मिनेरल फंड का उपयोग करने की आजादी राज्‍य सरकारों को दी जाएगी। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए भी इस फंड का उपयोग किया जाएगा।

100 से कम कर्मचारी वाली कंपनी जिसमें 90 फीसद कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपए से कम है, उसके कर्मचारियों के ईपीएफओ खाते में सरकार अगले तीन महीने तक कर्मचारी और कंपनी की तरफ से पैसे डालेगी। सरकार दोनों की तरफ से 12-12 फीसद का योगदान करेगी। इससे 80 लाख से ज्‍यादा मजदूरों को लाभ लेगा।

संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ के रेगुलेशन में बदलाव किया जाएगा। अब कर्मचारी अपने प्रोविडेंट फंड खाते से 75 फीसद राशि या तीन महीने की सैलरी, जो भी राशि कम हो, की निकासी कर सकते हैं। ये पैसे उन्‍हें वापस नहीं करने होंगे।

50 लाख का बीमा कवर उन लोगों को मिलेगा जो कोरोना वायरस के इलाज में प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें डॉक्‍टर, पैरामेडिकल स्‍टाफ, सफाई कर्मचारी आदि शामिल हैं।

लॉकडाउन से प्रभावित गरीबों की मदद की जाएगी। जिन लोगों को तुरंत मदद की जरूरत है, उन्हें राहत दी जाएगी। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना लाई जाएगी। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ गरीब लोगों को 3 महीने तक राशन के अलावा 5 किलो गेहूँ या 5 किलो चावल अतिरिक्त दिया जाएगा। इसके अलावा एक किलो दाल भी दी जाएगी।यह खाद्य सामग्री राशन के अलावा होगी, यह फ्री दी जाएगी। 

किसानों के खाते में 2000 रुपए की किश्त अप्रैल के पहले हफ्ते में डाल दी जाएगी, इससे 8.69 करोड़ किसानों को फायदा मिलेगा। मनरेगा के तहत मजदूरी 182 से बढ़ाकर 202 रुपए की गई। 3 करोड़ सीनियर सिटीजंस, विधवाओं, दिव्यांगों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर डीबीटी का फायदा मिलेगा।

वित्त मंत्री कोरोना से लड़ने के लिए सभी तरह के राहत पैकेज की घोषणा करते हुए

‘जामिया में जिहादियों और नक्सलियों की साँठगॉंठ, हिजाब वाली डायरेक्टर हमेशा नीचा दिखाती थी’

नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने के कारण गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का मामला जामिया मिलिया इस्लामिया से आया है। अबरार अहमद नाम के असिस्टेंट प्रोफेसर ने ट्वीट कर ऐसे 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का दावा किया था। मामले के तूल पकड़ने के बाद सफाई देते हुए उसने इसे मजाक बताया था। हालॉंकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जॉंच पूरी होने तक उसे सस्पेंड कर दिया है।

जाकिर नायक के फैन अबरार के कट्टरपंथी विचारों और कारनामों को लेकर ऑपइंडिया ने विस्तार से रिपोर्ट की थी। इसके बाद सोशल मीडिया में कई लोग जामिया की अपनी आपबीती लेकर सामने आ रहे हैं। आधिकारिक तौर पर इनकी ऑपइंडिया पुष्टि नहीं करता। लेकिन, इससे संकेत मिलता है कि जामिया में गैर मुस्लिम छात्रों के साथ भेदभाव का सिलसिला पुराना है।

खुद को जामिया का पूर्व छात्रा बताने वाली शिवांगिनी पाठक ने बताया है उन्हें उनके नाम के कारण कभी पसंद नहीं किया गया। हमेशा उन प्रोफेसर्स ने उन्हें कम नंबर दिए जिनका झुकाव नक्सलियों की ओर था।

दरअसल, संजय दीक्षित ने इस मामले पर ऑपइंडिया की खबर को शेयर करते हुए लिखा कि गैर मुस्लिमों की मुस्लिम बहुल आबादी में ये किस्मत होती है। शिवांगिनी ने इस पर रिप्लाई करते हुए आपबीती बताई है। उन्होंने लिखा, “मैंने जामिया से MA किया है। प्रथम वर्ष में 67% अंकों के साथ टॉप भी किया था। लेकिन हिजाब वाली एक डायरेक्टर मुझे हमेशा नीचा दिखाती थी, क्योंकि उन्हें मेरा नाम नहीं पसंद था। नक्सलियों के प्रति झुकाव रखने वाले एक अन्य प्रोफेसर ने मुझे हमेशा कम नंबर दिए। जिहादी नक्सलियों की सॉंठगॉंठ काफी मजबूत है।”

शिवांगिनी के इस अनुभव को कई लोगों ने रीट्वीट करते हुए कहा है कि अगर शिवांगी द्वारा कही गई आधी बातें भी सच हैं, तो ये एक गंभीर विषय है। हमें इस नफरत भरे रवैए पर चिंता करनी चाहिए। क्या ऐसे प्रोफेसर यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लायक हैं?

लॉकडाउन में झाड़-फूँक कर रही थी स्वयंभू देवी, पुलिस पहुॅंची तो तलवार निकाल कर खड़ी हो गई

पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। इसका संक्रमण रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। इसके बाद भी कुछ अंधभक्त लॉकडाउन को नजरअंदाज कर खुद के साथ दूसरों की जान के लिए भी संकट पैदा कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है यूपी के देवरिया जिला से। यहाँ खुद को माँ काली का रूप बताने वाली महिला लॉकडाउन के बाद भी सैकड़ों लोगों का इलाज करने के बहाने झाड़-फूँक करने में लगी हुई थी। जब पुलिस पहुँची तो महिला तलवार लेकर खड़ी हो गई। इसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर मौजूद लोगों को खदेड़ा साथ ही महिला सहित 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के सामने तलवार लहराते हुई इस महिला का विडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

दरअसल पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी देवरिया क्षेत्र के मेहड़ा पुरवां गाँव में एक महिला बीते दिन अपने घर ही सैकड़ों लोगों की भीड़ को इकट्ठा कर झाड़-फूँक कर रही थी। जब इसकी जानकारी पुलिस को हुई तो तत्काल एसडीएम और सीओ फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने देखा कि सैकड़ों की संख्या में लोग महिला के घर के अंदर बैठे हुए हैं। पुलिस ने सभी से अपने-अपने घर जाने को कहा। इतना सुन खुद को माँ काली का रूप मानने वाली महिला लाल साड़ी पहने हाथ में तलवार लेकर पुलिस के सामने आकर खड़ी हो गई और पुलिस को जोर-जोर से ललकारने लगी।

महिला ने तलवार लहराते हुए पुलिस से कहा कि हिम्मत है तो मुझे हटाकर दिखाओ। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस एक्शन को देख वहीं मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने लाठी भाँजते हुए भीड़ को खदेड़ दिया और महिला, उसके पति-बेटे समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही मौके से एक तलवार, एम्पीफायर और साउण्डबॉक्स भी बरामद किया। इस मामले में गिरफ्तार महिला के पति शिव प्रसाद यादव शिक्षक हैं। उन्हें निलंबित कर दिया गया है। बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि पत्नी के साथ मिल कर आडम्बर फैलाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।

बताया जा रहा है कि मेहड़ा पुरवा गाँव की रहने वाली सुभद्रा यादव खुद को माँ आदि शक्ति दुर्गा का रूप बताते हुए पिछले कई वर्षों से झाड़-फूँक का काम कर रहीं थी। उसके यहाँ आए दिन लोगों की भीड़ लगी रहती थी। इस काम में शिक्षक पति भी उसकी मदद करता था। इसी क्रम में बुधवार को भी लोगों की भीड़ महिला के घर में जमा थी। वहीं पुलिस ने आरोपित महिला और उसके पति सहित गिरफ्तार 12 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जिसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के चलते देश में अब तक 13 मौत हो चुकी है। साथ ही इससे संक्रमित लोगों संख्या 649 हो गई है।

लॉकडाउन में दूरदर्शन पर लौटेगा रामायण और महाभारत का वो दौर!

80 और 90 के दशक में जीने वाले लोग जानते हैं रामायण और महाभारत का वो दौर! जब टीवी पर इनका प्रसारण शुरू होते ही सड़के खाली हो जाती थीं और लोग धर्म-मजहब से ऊपर उठकर इसे एक साथ बैठकर देखा करते थे। आज उस दौर की बातें एक बीता कल है। सब अपनी जिंदगी में व्यस्त हैं। मगर, कोरोना वायरस के कारण हुए 21 दिनों के लॉकडाउन से लोगों की जिंदगी में ठहराव आया है। ऐसे में इस बीच माँग उठी है कि दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत को फिर से प्रसारित किया जाए। अब इन्हीं माँगों को देखते हुए इस पर विचार होना शुरू हो गया है।

खबर है कि रामायण और महाभारत को फिर से रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। इस बात की पुष्टि भी हो गई है। दरअसल, बीते काफी दिनों से सोशल मीडिया पर लोग रामानंद सागर द्वारा बनाई गए रामायण और बीआर चोपड़ा के महाभारत को दोबारा टीवी पर प्रसारित करने की माँग कर रहे थे।

इसे देखते हुए बुधवार को प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने कहा कि लोगों की माँग को देखते हुए डीडी नेशनल पर इन धारावाहिकों के प्रसारण के लिए इनके राइट होल्डरों से बात की जा रही है। उन्होंने ट्वीट के जरिए इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने ये भी बताया कि अगर ऐसा होता है तो इनका प्रसारण दिन के अंत तक किया जाएगा।

बता दें कि एक दौर में रामायण और महाभारत को लेकर लोगों में ऐसा क्रेज था कि इनमें लीड किरदार निभाने वाले एक्टर्स को देखकर लोग अगरबत्ती जलाने लगते थे, उन्हें प्रणाम करने लगते थे। 78 एपिसोड वाले रामायण का जब प्रसारण टीवी पर शुरू होता था तब लोग काम-काज छोड़कर टीवी के सामने बैठ जाते थे। अगर ये शोज दोबारा प्रसारित हुए तो लोगों को वो पुराने दिन जरूर याद आ जाएँगे।

सऊदी से लौटी तबरेज की बहन से मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर को कोरोना संक्रमण, मरीजों पर भी खतरा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। बुधवार (मार्च 25, 2020) को स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। डॉक्टर के साथ उनकी पत्नी और बेटी में भी कोरोना संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं। इसके बाद इन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दिल्ली सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में इसकी सूचना दी गई। इस एडवाइजरी में उन लोगों से क्वारेंटाइन होने के लिए कहा गया जो 12 मार्च से लेकर 18 मार्च तक डॉक्टर के संपर्क में आए। साथ ही ये भी कहा गया कि कोरोना के लक्षण दिखते ही वे डॉक्टर से संपर्क करें।

गौरतलब है कि इससे पहले डॉक्टर के सऊदी से लौटी महिला यानी दिल्ली के 10 वें केस के संपर्क में आने की बात सामने आई थी। इसके बाद ही डॉक्टर के वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि इस डॉक्टर ने उस महिला मरीज का 12 मार्च से 17 मार्च तक इलाज किया था।

शाहदरा के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के एक आदेश में कहा गया है कि मौजपुरी के मोहनपुरी स्थित मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर गोपाल झा कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। इसलिए क्लीनिक बंद कर दिया गया है और उसे साफ किया जा रहा है। इस आदेश में 12 मार्च से 18 मार्च तक डॉक्टर के संपर्क में आने वाले लोगों को 15 दिन का क्वारेंटाइन पीरियड सख्ती से फॉलो करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही ये भी कहा गया है कि लक्षण दिखने पर वह कंट्रोल रूम में संपर्क करें।

उल्लेखनीय है कि जिस सऊदी से लौटी महिला के कारण मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर, उनकी पत्नी, बेटी समेत कई लोगों पर ये आफत आ बनी है, वो दिल्ली में कोरोना का 10वाँ केस है। जानकारी के मुताबिक दुबई से लौटने के बाद ये महिला अपने भाई (तबरेज) और अम्मी से मिली। दोनों जहाँगीरपुरी इलाके में रहते हैं। महिला का भाई बहन से मिलने के बाद कोरोना से संक्रमित हुआ। वह सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी जाता रहा और इस तरह एक महिला की लापरवाही के कारण 400-450 लोग इस खतरे के घेरे में आ गए।

बता दें, ये पहला मामला नहीं है जहाँ किसी एक संक्रमित व्यक्ति की गलती के कारण किसी शहर में संक्रमण कम्यूनिटी के बीच फैलना शुरू हुआ हो। साउथ कोरिया के बिगड़े हालात के लिए वहाँ का 31वाँ केस जिम्मेदार था। उसके कारण 1000 से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आए और अब वहाँ 8,799 के करीब संक्रमित लोग हैं।