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पटना की वो मस्जिद, जहाँ विदेशियों का तय होता है काम और कटता है कमान: 12 की पकड़ के बाद खुलासा

बिहार की राजधानी पटना के कुर्जी इलाके में स्थित दीघा मस्जिद से पकड़े गए 12 विदेशियों को क़्वारंटाइन कर दिया गया है। सोमवार को इन्हें हिरासत में लेने के बाद जाँच के लिए पटना एम्स भेजा गया। यहाँ स्क्रीनिंग के बाद इन्हें होटल पाटलिपुत्र अशोक भेजा गया। खुद एम्स के निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह ने इस खबर की जानकारी दी।

जागरण में प्रकाशित संबंधित खबर

उल्लेखनीय है कि सोमवार को ये सभी पटना पहुँचे थे। लेकिन, पहले इस बारे में किसी को सूचना नहीं थी। मगर, खुलासा होते ही आसपास के मोहल्ले में ये खबर फैल गई और लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। हँगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी फौरन इलाके में पहुँची और 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया।

इनसे पूछताछ में पता चला कि सभी तजाकिस्तान (Tajikistan) के निवासी हैं और पटना में धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए आए थे। दीघा थानेदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एहतियातन जाँच के लिए सभी को एम्स भेजा गया। ये सभी चार महीने पूर्व धार्मिक प्रचार के लिए भारत आए थे और सोमवार की सुबह नमाज के लिए दीघा मस्जिद गए थे, पुलिस ने सूचना पर जाँच के लिए एम्स भिजवाया।  

यहाँ बता दें कि स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को इन विदेशियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी लेकिन कुछ लोगों की मदद से इन लोगों को धार्मिक स्थल की आड़ लेकर छिपाया गया। साथ ही इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच भी नहीं करवाई। इन पर ये भी आरोप लगा कि धार्मिक स्थल में छिपकर ये लोग बिहार में घूम-घूमकर धर्म विशेष का प्रचार करते हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये सभी विदेशी पहले दिल्ली, फिर मुंबई में थे। इसके बाद 4 मार्च को पटना पहुँचे थे। लेकिन यहाँ इन्हें अपने काम (मजहब प्रचार) को करने के लिए अशोक राजपथ पर नूरी मस्जिद स्थित तबलिगी जमायत मुख्यालय जाना था। क्योंकि, वहीं से इन्हें किस मस्जिद में भेजना है, ये तय होता है।

दरअसल, बिहार में इस काम के लिए मुख्यालय से ही कमान कटता है। बताया जा रहा है कि इन लोगों का सोमवार की सुबह दीघा के गेट नंबर 74 पर स्थित मस्जिद में जाने के लिए कमान कटा था। मगर, सुबह करीब दस बजे किसी ने उन्हें देख हल्ला कर दिया कि बिना जाँच के दूसरे देश से पटना आए हैं।

पिता की पेंटिग राणा कपूर को करोड़ों में बेचना प्रियंका गाँधी को पड़ेगा महँगा, ED की नजरों में है ये अपराध

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने एमएफ हुसैन द्वारा बनाई अपने पिता राजीव गाँधी की पेंटिग को यस बैंक के पूर्व सीईओ राणा कपूर को करोड़ों में बेचा था। शायद उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि ये सौदा उन्हें इतना महंगा पड़ेगा कि इस लेन-देन के कारण ईडी उन पर अपना शिकंजा कसेगी।

जी हाँ, खबर आ रही है कि ईडी बैंक फ्रॉड मामले में इस ट्रांसैक्शन को अपराध मान सकती है। अभी फिलहाल जाँच एजेंसी ने राणा कपूर को कस्टडी में ले रखा है। लेकिन आसार है कि इस मामले में देनदारों से भी पूछताछ हो सकती है। जिसकी खबर सुनकर गाँधी परिवार के वकील केटीएस तुलसी ने इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि यह सब अपराध में कैसे आ सकता है? यह पूरी तरह से एक निजी वाणिज्यिक लेनदेन है और जब कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसे आयकर घोषित किया है, तो हमें उन पर विश्वास करना होगा। बिना किसी काल्पनिक खींचतान के ये मामला मनी लॉन्ड्रिंज की गतिविधि का हिस्सा नहीं बन सकता।

उल्लेखनीय है कि मामले की जाँच में जुटे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “2 करोड़ रुपए, जिसे राणा कपूर ने प्रियंका गाँधी को पेंटिंग के बदले दिया, वह कपूर के अकाउंट में कुछ समय पहले ही आए थे। इस कारण से ये मामला उनके लिए जाँच का विषय है और इसी वजह से खरीददार और देनदार दोनों पर PMLA एक्ट की धारा 3 के कार्रवाई हो सकती है।”

यहाँ बता दें कि पीएमएलए की इस धारा के तहत प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जो व्यक्ति भी अपराध के दौरान उस प्रक्रिया या संपत्ति से संबंधित होता है, उसे मनी लॉन्ड्रिंग का अपराधी माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक एमएफ हुसैन ने राजीव को उनकी ये पेंटिंग उनके प्रधानमंत्री रहने के दौरान दी थी। लेकिन साल 2010 में प्रियंका गाँधी ने इसे 2 करोड़ रुपए में राणा कपूर को बेच दिया। कपूर ने इसकी पेमेंट प्रियंका गाँधी को चेक के जरिए की थी। जिसकी जाँच आईटी विभाग द्वारा जारी है।

गौरतलब है कि ये मामला उस समय प्रकाश में आया था, जब ईडी ने राणा कपूर के मुंबई वाले घर पर छापेमारी की और इस पेंटिंग को जब्त किया था। बाद में जाँच में मालूम हुआ कि 2 करोड़ की लेन-देन इसी पेंटिग से संबंधित थी। खुद राणा कपूर ने ईडी को इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के होने के सबूत दिए।

खबर के अनुसार, जब कपूर से पूछा गया कि उन्हें ये पेंटिंग कैसे मिली, तो बैंकर राणा कपूर ने उन्हें अपने और पूर्व कॉन्ग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा के बीच हुई बातचीत (संदेश के जरिए) की एक कॉपी सौंपी। इसमें एक पत्र स्वीकृति का था और दूसरा प्रियंका गाँधी की ओर से आभार का। इसके अलावा एक कॉपी उस 2 करोड़ रुपए के चेक की थी, जिसपर उन्होंने 3 जून 2010 को हस्ताक्षर किया।

जाँच एजेंसियों को सौंपे गए संदेशों को उस समय ब्लैकबेरी के जरिए प्रेषित किया गया था। जिसमें डिओरा और कपूर के बीच 25 मई 2010 से लेकर 6 जून 2010 तक की बातचीत है। प्राप्त दस्तावेजों से मालूम पड़ता है कि कपूर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की पेंटिंग खरीदने की इच्छा जताई थी और यस बैंक के जरिए इस खरीददारी को वाजिब ठहराने के लिए ये कारण दिया था कि वह कला को संग्रहित करने के शौकीन हैं।वहीं, प्रियंका गाँधी द्वारा कपूर को लिखे गए पत्र में उन्होंने इस पेंटिंग के ऐतिहासिक मूल्यों को संदर्भित किया था और आशा जताई थी कि कपूर इस पेंटिंग के कद के अनुरूप इसे सही जगह देंगे।

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शाहीन बाग में फिर इकट्ठा हुई ‘जाहिलों’ की भीड़, लोगों ने कहा- ‘तंबू उखाड़ना काफी नहीं, इन्हें बंबू भी चाहिए’

दिल्ली के शाहीन बाग इलाके से प्रदर्शन स्थल का तंबू उखड़ने के बाद वहाँ की एक तस्वीर सामने आई है। ये तस्वीर वहाँ के स्थानीय लोगों की है, जो कोरोना के फैलते प्रभाव को जानते-समझते हुए सड़क पर इकट्ठा हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, शाहीन बाग पर पुलिस की कार्रवाई के बाद ये भीड़ जुटी और देखते ही देखते इनकी तादाद बढ़ती गई। हालाँकि, चिंता की बात नहीं है क्योंकि स्थिति को समझते हुए वहाँ पहले ही भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ सरकार विज्ञापनों, संदेशों, सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपने-अपने घरों में रहने की गुहार लगा रही है। वहीं ये तस्वीर इलाके में मौजूद लोगों की नासमझी, लापरवाही और समाज के प्रति गैर-जिम्मेदार रवैये को दर्शाती है।

सोशल मीडिया पर तो यूजर्स इस भीड़ को जाहिल, मानवता के दुश्मन और आतंकवादी तक कह रहे हैं। लोगों का कहना है, “देश हमेशा याद रखेगा, जब देश सबसे मुश्किल घड़ी से गुजर रहा था तब जाहिलों ने देश को धोखा दिया। यह सही में गद्दार है और धोखेबाज हैं।” 

वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकार दिव्य कुमार सोती ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इन लोगों के लिए तंबू उखाड़ना काफी नहीं है। इन्हें बंबू भी चाहिए।

एएनआई द्वारा दी इस जानकारी पर एक शमीला नामक यूजर ने भी प्रतिक्रिया दी है। महिला का कहना है कि एएनआई कोरोना वायरस को मुस्लिमों की छवि भयावह बना रही है। शमीला के अनुसार, ये कोरोना वायरस 2 और 3 महीनों में मर जाएगा। लेकिन लोगों की नफरत भरी प्रतिक्रिया कभी खत्म नहीं होगी।

बता दें कि शाहीन बाग में मुस्लिमों की भीड़ की इस हरकत को धिक्कारा जा रहा है। लोगों का कहना है कि बॉलीवुड के सेकुलर और पत्तलकारों को आकर इन्हें समझाने की आवश्यकता है।

आज रात 8 बजे… देश को फिर संबोधित करेंगे PM मोदी, कोरोना वायरस पर करेंगे बात

देश में फैल रहे कोरोना वायरस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (मार्च 24, 2020) रात 8 बजे देश को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने खुद ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें देशवासियों के साथ साझा करूँगा। आज, 24 मार्च रात 8 बजे देश को संबोधित करूँगा।” इससे पहले 19 मार्च को पीएम ने देश को संबोधित किया था और जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था।

बता दें कि भारत में फैल रहे कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच देश के 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह से लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है। इस फैसले से 560 जिलों में पूरी तरह से बंदी लागू कर दी गई है। भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के अब तक करीब 500 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मंगलवार तक के आँकड़ों में यह संख्या सामने आई है।

मंगलवार सुबह तक के आँकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना वायरस के कुल मामले 492 हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इन आँकड़ों में 41 विदेशी नागरिक शामिल हैं और अब तक 9 मौत हो चुकी है। पिछले कुछ दिनों में संक्रमण के मामले अचानक बढ़ने के बाद अधिकारियों ने लगभग पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया है जिसके तहत लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध हैं और सड़क, रेल एवं हवाई यातायात पर 31 मार्च तक रोक लगा दी गई है।

इसके अलावा लोगों को सख्त हिदायत दी जा रही है कि लोग घरों से बाहर ना निकलें। लेकिन लोग फिर भी लापवाही करते हुए सड़कों पर आ रहे हैं और लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लोगों से अपील की थी कि वे लॉकडाउन को गंभीरता से लें और राज्य सरकार कानून का पालन करवाएँ। पुलिस ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी एक्शन भी लिया है।

बता दें कि इससे पहले पीए मोदी ने सोमवार (मार्च 23, 2020) को इस कठिन समय में मीडिया के कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे राष्ट्रसेवा कहा और आभार जताया। पीएम मोदी ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा, “आप लोगों ने बहुत बहादुरी और दिलेरी से काम किया है। सही मायने में यही राष्‍ट्र सेवा है।”

सावधान: सोशल मीडिया पर कोरोना संबंधी अफवाह फैलाया तो… 6 महीने के लिए जाएँगे जेल

महामारी घोषित हो चुके कोरोना वायरस का कहर दुनिया भर में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना वायरस की चपेट में दुनिया भर के साढ़े तीन लाख से ज्यादा नागरिक आ चुके हैं। इनमें से 16491 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 1 लाख 337 लोग ठीक हो चुके हैं जबकि 11204 की हालत बेहद गंभीर है। एहतियात के तौर पर भारत सहित विश्व के कई देशों ने बड़े हिस्सों में लॉकडाउन कर दिया है, इस वजह से करीब 100 करोड़ लोग अपने घरों में कैद हो गए हैं।

वहीं भारत की बात करें तो यहाँ कोरोना के 451 मामले सामने आए हैं। 9 लोगों की इस संक्रमण से मौत हो चुकी है। भारत में अभी यह महामारी सिर्फ दूसरे चरण तक पहुँची है। भारत सरकार यह कोशिश है कि यह तीसरे चरण यानी कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन तक न पहुँचे। भारत की सरकार पूरी ताकत के साथ कोरोना वायरस के साथ जंग लड़ रही है।

सरकार इससे निपटने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, देश भर में चिकित्सा सेवाएँ तेज कर दी गई है। जगह जगह अस्पतालों में इसके लिए आइसोलेश वार्ड बनाए गए हैं। इस बीच इसको लेकर अफवाहों का बाजार भी गर्म है। सोशल मीडिया से लेकर प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के माध्यम से बिना किसी आधार के, बिना किसी पुष्टि के कई अफवाहें फैलाई जा रही है। जिसकी वजह से जनता के मन में काफी संशय पैदा हो रहा है और इस घातक बीमारी पर नियंत्रण करना काफी मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि इस बीमारी से निपटना जनता के सहयोग के बिना संभव नहीं है। 

इस मामले को उड़ीसा, असम, महाराष्ट्र और गुजरात समेत लगभग सभी राज्यों ने गंभीरता से लिया है और एक विज्ञप्ति जारी किया। इसमें साफ-साफ कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति, संस्था या संगठन कोरोना वायरस से संबंधित कोई भी जानकारी बिना तथ्य का पता लगाए या फिर DMET, DPH, DHS या कलेक्टर की पूर्व मंजूरी के बिना प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया पर नहीं डालेगा। अगर कोई इसका उल्लंघन करता है, तो उसे दंडनीय अपराध माना जाएगा और उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इस धारा के तहत 6 महीने की जेल हो सकती है। एडवाइजरी में कहा गया है कि ऐसा करना इसलिए आवश्यक है ताकि कोरोना को लेकर अनौपचारिक जानकारी और तेजी से फैल रही अफवाहों पर विराम लगाया जा सके, उसे रोका जा सके।

आगे विज्ञप्ति में कहा गया है कि किसी भी निजी प्रयोगशालाओं को कोरोना वायरस के परीक्षण की अनुमति नहीं है। कोरोना वायरस का परीक्षण करने के इच्छुक निजी स्वास्थ्य संस्थानों को राज्य IDSP इकाई के माध्यम से अपने परीक्षण नमूने भेजने होंगे। इसके बाद राज्य IDSP इकाई भारतीय स्टेट काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा जारी गाइडलाइन के हिसाब से परीक्षण की व्यवस्था करेगी। 

इसके साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति ने पिछले 14 दिनों में ऐसे किसी देश की यात्रा की है, जहाँ पर कोरोना वायरस के केस पाए गए हैं, तो उसे स्वेच्छा से राज्य नियंत्रण कक्ष, राज्य निगरानी अधिकारी, IDSP या फिर टोल फ्री नंबर 104 पर रिपोर्ट करना चाहिए, ताकि  DMET, DPH, DHS और कलेक्टर द्वारा माले पर संज्ञान लिया जा सके।

‘हमारा रोजा है, हमें छोड़ दो… हाय लगेगी’ – शाहीन बाग में बुर्के वाली महिला ने दी पुलिस को बददुआ

आज सुबह 7 बजे शाहीन बाग पूरा खाली करवा लिया गया। दिल्ली पुलिस ने भारी तादाद में निर्देशों का पालन करते हुए ये कार्रवाई की। धरना स्थल से टेंट कुर्सी हटवाई गए। शरारती तत्वों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि पहले उन्होंने लोगों को समझाया। मगर जब प्रदर्शनकारी राजी नहीं हुए और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो बल का इस्तेमाल करके इस काम को अंजाम दिया गया।

मंगलवार को सुबह-सुबह पुलिस के इस एक्शन के बाद शाहीन बाग की कई विडियोज आईं। विडियो में भारी संख्या में पुलिस को शाहीन बाग पर देखा गया। इसी बीच एक नजारा और देखने को मिला, जिसमें एक महिला प्रदर्शनकारी पुलिस वालों को बद्दुआ देती नजर आई और कहती दिखी कि इन्हें उनकी हाय लगेगी।

विडियो में 1 मिनट 8 सेकेंड के आगे देख सकते हैं कि पुलिस इस बुर्काधारी महिला को डिटेन कर रही है। लेकिन वो कैमरे में देखकर कह रही है, “देख लीजिए, हमें पकड़कर ले जा रहे हैं। हमारा रोजा है। इन्हें हाय लगेगा।” 

विडियो में देख सकते हैं कि महिला प्रदर्शनकारी बार-बार खुद को पुलिस की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश कर रही है। लेकिन जब पत्रकार उससे बढ़ते संक्रमण पर सवाल करता है तो कहती है कि इन्हें हमारी हाय लगेगा। हमारे बच्चे दूध पीने वाले हैं, हमें छोड़ दो। वहीं एक दूसरे प्रदर्शनकारी (हिरासत में लिए जाने के बाद) विडियो की शुरुआत में महिला से पहले कहता है कि अब इनकी मर्जी है जो चाहें कर सकते हैं, इनका राज है।

अब हालाँकि, विडियो देखने के बाद दिल्ली पुलिस का विरोध करने वालों को इसमें भी पुलिस की ही गलती नजर आएगी। लेकिन, 100 दिन से कालिंदी कुंज का रास्ता खुलने का इंतजार कर रही जनता ने इस कदम का स्वागत किया है। साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में अहम कदम बताया गया है।

सोशल मीडिया पर इस विडियो को देखने के बाद लोगों ने चुटकी ली है। कुछ ने इसे बिन सिर पैर का धरना बताया और पूछा कि क्या 100 दिनों से जो इन लोगों के कारण लोगों को नोएडा से साउथ दिल्ली और साउथ दिल्ली से नोएडा स्कूल, कॉलेज, नौकरी, अस्पताल जाने में दिक्कत हुई, उन्हें हाय नहीं लगेगी।

WHO ने की भारत की तारीफ, कहा- ‘कोरोना को रोकना अब आपके हाथ में, पहले भी ऐसे दुश्‍मनों को हराया’

पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ रही है। इस वायरस के चलते हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग इससे संक्रमित हैं। तमाम देश इस वायरस से लड़ने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं और अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं ताकि वह अपने देशवासियों को बचा सकें। कोरोना वायरस के खतरे से लोगों को बचाने के लिए भारत लगातार सख्त कदम उठा रहा है। कई राज्यों को को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है, तो कई राज्यों में कर्फ्यू लगा दिए गए हैं। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत के प्रयासों की तारीफ की है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी निदेशक माइकल जे रेयान ने कहा है कि कोरोना वायरस का भविष्य में कैसा असर रहेगा, यह भारत जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देशों की कार्रवाई पर तय होगा। उन्होंने कहा, “चीन की तरह भारत बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है। कोरोना वायरस के दूरगामी परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि बड़ी जनसंख्या वाले देश इसे लेकर क्या कदम उठाते हैं। यह बहुत जरूरी है कि भारत जन स्वास्थ्य के स्तर पर आक्रामक फैसले लेना जारी रखे।”

इसके साथ ही कोरोना संकट में भारत से उम्मीद जताते हुए माइकल जे रेयान ने कहा कि भारत ने साइलेंट किलर कही जाने वाली 2 गंभीर बीमारियों- स्मॉल पॉक्स और पोलियो के उन्मूलन में दुनिया का नेतृत्व किया। भारत में जबरदस्त क्षमता है, सभी देशों में भी जबरदस्त क्षमता है कि वे अपने समुदायों और नागरिक समाजों को एकत्र करें।

कोरोना वायरस संकट के निपटने की काबिलियत का हवला देते हुए रियान ने कहा कि हमारा मानना है भारत में जबरदस्त क्षमता है। जब समुदाय जुटते हैं, सिविल सोसाइटी साथ आती हैं और सरकारें ड्राइव करती हैं तो लक्ष्य पूरा होता है। WHO ने कहा कि भारत को इस लड़ाई का नेतृत्व करते हुए दिखाना चाहिए कि क्या होना चाहिए और उसे किस तरह किया जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कोरोना की भयावहता देखते हुए पूरी दुनिया से वैश्विक शांति को लेकर आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मैं दुनिया के सभी कोनों में तत्काल वैश्विक युद्ध विराम का आह्वान कर रहा हूँ। यह लॉकडाउन पर सशस्त्र संघर्ष और हमारे जीवन की सच्ची लड़ाई पर एक साथ ध्यान केंद्रित करने, शत्रुता से पीछे छोड़ने और अविश्वास तथा दुश्मनी को दूर करने का समय है।”

भारत में कोरोना के 451 मामले सामने आए हैं। 9 लोगों की इस संक्रमण से मौत हो चुकी है। भारत में अभी यह महामारी सिर्फ दूसरे चरण तक पहुँची है। भारत सरकार यह कोशिश है कि यह तीसरे चरण यानि कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन तक न पहुँचे। भारत पूरी ताकत के साथ कोरोना वायरस के साथ जंग लड़ रही है।

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के देखते हुए सोमवार (मार्च 23, 2020) की रात पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है, यानी अब देश के 548 जिले लॉकडाउन हैं। हालाँकि तीन राज्य पूरी तरह से लॉकडाउन नहीं है, जिसमें उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और मध्य प्रदेश शामिल है। वहीं, लक्षद्वीप में कुछ गतिविधियों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई है।

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विदेश से लौटे एयर इंडिया के कर्मचारियों को परेशान कर रहे पड़ोसी, बुला रहे पुलिस

कोरोना वायरस के दहशत की वजह से जहाँ लोग अपनों से मिलने से भी परहेज कर रहे हैं, वहीं एयर इंडिया के कर्मचारी विदेशों में फँसे लोगों को अपनी जान पर खेलकर देश वापस ला रहे हैं। विदेशों में फँसे भारतीयों को वापस लाने के लेकर एयर इंडिया के प्रयासों को लेकर पीएम मोदी व अन्य मंत्रियों ने सराहना की।

लेकिन इन जाबाँजों को अपने ही पड़ोसियों द्वारा परेशान किया जा रहा है। स्थिति यह है कि पड़ोसी उन्हें देखते ही आरडब्ल्ययूए और पुलिस बुला रहे हैं। कंपनी ने रविवार (मार्च 22, 2020) को बताया कि कई सोसायटी, आरडब्ल्यूए और पड़ोसियों ने उनके चालक दल के सदस्यों को परेशान करना शुरू कर दिया है। उन्हें ड्यूटी करने से रोका जा रहा है और पुलिस तक बुलाई जा रही। ऐसा इसलिए क्योंकि वे हाल ही में विदेश से लौटे हैं। 

क्रू मेंबर्स की इन परेशानियों को लेकर एअर इंडिया ने प्रशासन और आम लोगों से एक अपील की है। एयर इंडिया ने रविवार को बताया कि एयरलाइन्स की टीम ने विदेशों में कोराना वायरस से प्रभावित इलाकों से भारतीय नागरिकों को निकालने का सराहनीय काम किया है। एअर इंडिया ने लिखा कि लोग ये तक भूल जाते हैं कि एयर इंडिया के इन नायकों के कारण ही कईयों के साथी, माँ-बाप, भाई-बहन या बच्चे कोरोना प्रभावित इलाकों से लौट कर वापस आ सके हैं। एअर इंडिया ने पुलिस वगैरह जैसी संस्थाओं से मदद माँगी। एयरलाइन कंपनी ने कहा कि संस्थाएँ ये तय करें कि एयर इंडिया के कर्मचारियों से लोग सलीके से पेश आएँ, उन्हें सम्मान और आजादी मिले।

एयर इंडिया ने बताया कि विदेश की उड़ानों में जाने वाले चालक दल के सदस्य बचाव के सभी प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। साथ ही विदेश से आने के बाद उनकी डॉक्टरी जाँच की जाती है और वे 14 दिन सबसे अलग भी रहते हैं।

कंपनी ने कहा कि कुछ लोग यह भूल जा रहे हैं कि विदेशो में फँसे उनके करीबियों को वापस बुलाने के लिए ये क्रू मेंबर्स लगातार मेहनत कर रहे हैं। लेकिन सोसाइटी के लोग इसकी तारीफ करने की बजाय उन्हें परेशान कर रहे हैं। वे उन्हें घर से निकलने से रोक रहे हैं और कई बार उन्होंने पुलिस को बुला लिया है। एयरलाइन ने कहा कि लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों और आम लोगों से अपील की है कि वो क्रू मेंबर्स के सही बर्ताव करें। उनकी ​इज्जत करें और आम नागरिक की तरह ही पेश आएँ। चालक दल के सदस्य ही कोरोना प्रभावित कई देशों में फँसे लोगों को सुरक्षित उनके घर पहुँचाया है।

बता दें कि सिर्फ एयर इंडिया के क्रू मेंबर्स के साथ ही नहीं, बल्कि उन डॉक्टरों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार हो रहा है, जो दिन रात एक करके मरीजों को ठीक करने का प्रयास करते हैं। इस विषम परिस्थिति में भी अपनी जान की परवाह किए बिना कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएँ सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस बारे में सूरत के बीजेपी विधायक हर्ष सिंघवी से बात की। जिसके बाद सिंघवी ने स्थानीय प्रशासन से बात करके उन्हें मामले पर संज्ञान लेने के लिए कहा है।

शाहीन बाग एक झटके में खाली: प्रदर्शनकारियों की मनमानियों के बीच पुलिस ने उठा लिए टेंट-कुर्सी, कई हिरासत में

कोरोना वायरस के फैलते प्रभाव के बावजूद नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ अपना धरना प्रदर्शन जारी रखने वाले शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आज सुबह हटवा दिया। धरना स्थल पर लगे टेंट और कुर्सियों को भी वहाँ से उठा लिया गया। मंगलवार (मार्च 24, 2020) को शाहीन बाग में भारी पुलिस फोर्स की तैनाती के बीच ये कार्रवाई हुई। पुलिस ने धारा-144 की दलील देते हुए ये एक्शन लिया। बता दें कि शाहीन बाग में महिलाएँ पिछले 100 दिनों से धरने पर बैठी थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉइट सीपी देवेश श्रीवास्तव ने कहा, “कोरोना वायरस के बढ़ने के कारण लोगों से अपील की जा रही थी। स्थानीय भी हमसे माँग कर रहे थे। आज सुबह हमने इस कार्रवाई की शुरुआत 7 बजे की। शुरुआत में कुछ शरारती तत्व माहौल को बिगाड़ना चाहते थे। वे नहीं माने, तो उन्हें हिरासत में लिया गया है।” 

जॉइंट सीपी ने बताया कि करीब 10 से 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। विरोध करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। देवेश श्रीवास्तव ने आगे कहा कि हमारा मकसद इलाके में शांति बहाल करना है। कोरोना को लेकर सख्त आदेश थे कि भीड़ जमा न हो।

अब फिलहाल, पुलिस ने धरने वाली जगह से टेंट को पूरी तरह हटा दिया है। कोरोना वायरस के मद्देनजर दिल्ली में धारा 144 लागू है। इसके बावजूद वहाँ कुछ प्रदर्शनकारी जुटे हुए थे। एक पुलिसर्मी ने बताया कि सुबह भी वहाँ काफी महिलाएँ धरने पर बैठी हुईं थी। हमने उनसे कहा कि 144 लगाई गई है, इसलिए धरने को खत्म कर दें। लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद पुलिस को बलपूर्वक उनको हटाना पड़ा।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ पुलिस प्रदर्शनस्थल को बलपूर्वक खत्म करवाने के पीछे प्रदर्शनकारियों की जिद को कारण बता रही है। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वह खुद पीछे हट गए थे, लेकिन पुलिस ने धरना स्थल में बना भारत माता का नक्शा और इंडिया गेट को क्यों हटाया। बताया जा रहा है यहाँ लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की है और हालातों को देखते हुए पूरे शाहीन बाग इलाके में भारी पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है।

इस बीच भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी शाहीन बाग प्रदर्शन खाली होने की सूचना दी है। उन्होंने धरना स्थल से हटाए गए टेंट, कुर्सियों को ट्रक में भरते हुए ये विडियो अपने ट्विटर पर डाली है और लिखा है, “सब तख्त उछाल कर फेंक दिए, सब टेंट उखाड़ कर फेंक दिए, हमने देख लिया, सबने देख लिया, दिल्ली को मिल गई आज़ादी शाहीन बाग का फ्रॉड ख़त्म।”

यहाँ बता दें कि बीते दिनों दिल्ली में कोरोना के बढ़ते केसों के बावजूद शनिवार को हमने शाहीन बाग पर बैठे प्रदर्शनकारियों की जिद देखी। इससे पहले भी कई बार विडियोज के जरिए ऐसी बातें सामने आई थीं, जिसमें वहाँ बैठी महिलाएँ किसी कीमत पर प्रदर्शन से उठने की बात नहीं सुन रहीं थी। बल्कि इसकी जगह वे ये कह रही थीं उन्हें कोरोना नहीं हो सकता। उनके साथ अल्लाह है। कोरोना तो मोदी को होगा।

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कोरोना से लड़ाई में PM मोदी ने की मीडिया की तारीफ, कहा: यही है असली राष्ट्रभक्ति

कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम में केंद्र सरकार समेत सभी राज्य सरकारें अपनी भूमिकाओं का निर्वहन करने में लगी हुई हैं। ज्यादातर राज्यों ने जहाँ खुद को लॉकडाउन कर लिया है वहीं देश के 75 जिलों को भी इस महामारी के चलते लॉकडाउन कर दिया गया है। ऐसे हालात में देश में आवश्यक सुविधाओं तथा सेवाओं की आपूर्ति करने वाले बिना डरे बिना हिचके अपनी अपनी ड्यूटी में मुस्तैद हैं। इन लोगों में वो मीडियाकर्मी भी शामिल हैं जो कोरोना से निपटने के लिए जारी किए जा रहे सरकारी पहलों और निर्देशों को आम लोगों तक पहुँचा रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को आज मीडिया से बातचीत के दौरान मीडिया का आभार जताया। उन्‍होंने इस कठिन समय में मीडिया के कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे राष्ट्रसेवा कहा और आभार जताया। मोदी ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा, “आप लोगों ने बहुत बहादुरी और दिलेरी से काम किया है। सही मायने में यही राष्‍ट्र सेवा है।”

इस दौरान कोरोना से लड़ने में सोशल डिस्टेंसिंग की महत्ता बतलाते हुए उन्होंने कहा, “हमारे लिए आगे अभी बड़ी जंग है। इसके लिए सोशल डिस्‍टैसिंग काफी अहम है। आप जानते हैं कि कैसे बातचीत करनी है। लोगों से घर पर रहने के संदेश को तेजी से फैलाएँ। जापान और दक्षिण करिया ने अनुशासन अपनाकर इस पर कुछ हद वतक कंट्रोल किया है।” पीएम मोदी ने आगे अपने सम्बोधन में कहा कि कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में भय और निराशा का कोई स्‍थान नहीं हैं, हमारे हौसले बुलंद रहने चाहिए।

पीएम मोदी ने स्वास्थ्य सेवाओं में जुटे लोगों को याद करते हुए कहा, “हमें मेडिकल या स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में जुटे लोगों का हौसला बढ़ाना होगा। वे बिना किसी स्‍वार्थ के अपनी जिंदगी खतरे में डालकर लोगों के लिए काम कर रहे हैं।” याद रहे कि भारत में अबतक कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 450 पार कर चुकी है जिसमें से 9 की मौत हो चुकी है।