Home Blog Page 4984

जामिया का प्रोफेसर अबरार सस्पेंड, CAA समर्थक 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का किया था दावा

जामिया मिलिया इस्लामिया ने असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद को सस्पेंड कर दिया है। उसने नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने वाले 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का दावा किया था। अबरार ने एक ट्वीट में ऐसा करने का दावा किया था। यूनिवर्सिटी ने ट्वीट कर उसे सस्पेंड करने की जानकारी दी है। इसमें कहा गया है कि अबरार ने जो दावा किया है वो गंभीर और अस्वीकार्य है। इसलिए जाँच पूरी होने तक उसे निलंबित कर दिया गया है।

प्रोफेसर अबरार ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि मेरे सभी विद्यार्थी पास हो गए, सिर्फ 15 गैर मुस्लिमों को छोड़कर, जो सीएए के समर्थन में थे या फिर सीएए का विरोध करने वालों के खिलाफ में थे।

जामिया के प्रोफेसर डॉ. अबरार द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीन शॉट

इतना ही नहीं उसने अपनी कक्षा के 15 गैर-मुस्लिम छात्रों को धमकी दते हुए कहा था कि 55 छात्र उसके समर्थन में हैं। अगर उन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनों का विरोध नहीं बंद किया तो 55 छात्र उन्हे दंगों के माध्यम से सबक सिखाएँगे। वहीं जामिया के एक सूत्र ने कहा कि प्रोफेसरों को गैर मुस्लिम छात्रों के रोल नंबर पता है इसलिए प्रोफसर को गैर-मुस्लिम छात्रों की पहचान करना आसान है। हालाँकि बाद में अबरार ने अपने ट्वीट पर सफाई देते हुए इसे मजाक बताया था।

जामिया के प्रोफेसर डॉ. अबरार द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीन शॉट

अबरार ज़ाकिर नाइक का भी अनुयायी है। वो ट्विटर पर ज़ाकिर नाइक को फॉलो करता है और उसकी विचारधारा भी कट्टर इस्लामी है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं को लेकर भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है। अपनी एक ट्वीट में उसने कहा था कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र बन गया तो फिर यहाँ की महिलाओं का क्या होगा? उसने कहा था कि अधिकतर बलात्कार आरोपित वही हैं, जो हिन्दू राष्ट्र या फिर रामराज की बात करते हैं। इससे पता चलता है कि वो हिन्दुओं से किस कदर नफरत करता है। साथ ही उसने कोरोना वायरस को लेकर भी सरकार के दावों और मेडिकल जगत की सलाहों पर पानी फेरने की कोशिश की थी।

अबरार ने कहा था कि कोरोना वायरस या फिर इस प्रकार की बाकी चीजें अल्लाह की परीक्षा है। उसने दावा किया था कि कोरोना वायरस से डरे बगैर सभी को सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखना चाहिए। यहाँ सवाल ये उठता है कि ऐसे व्यक्ति पर आज तक जामिया ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, जब वो खुले रूप से सोशल मीडिया को माध्यम बना कर इस तरह की घृणास्पद बातें कर रहा है। एक ऐसा प्रोफेसर, जो कोरोना वायरस को ‘अल्लाह का इम्तिहान’ बताता है।

कश्मीर में ‘कोरोना बम’: विदेश से आए सैकड़ों चकमा दे घर पहुँचे, अब संक्रमण का बड़ा खतरा बने

चीन के वुहान से कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू हुआ था। आज पूरी दुनिया इस महामारी के चपेट में है। भारत में भी तेजी से इसका संक्रमण बढ़ रहा है। प्रसार रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर से हैरान करने वाली जानकारी सामने आ रही है। प्रशासन को 400 से ज्यादा लोगों के बारे शिकायत मिली है। इन पर विदेश यात्रा की हिस्ट्री छिपाने का आरोप है। ऐसे लोगों की लापरवाही की वजह से राज्य में बड़े स्तर पर संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।

बताया जाता है कि विदेश से लौटे ये कश्मीरी आइसोलेट होने से बचने के लिए चकमा देकर अपने घर पहुॅंचे। बाद में समाज के बीच खुलेआम घूमते रहे। उल्लेखनीय है कि घाटी में अब तक संक्रमण के आठ मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमित मरीज या तो विदेश से लौटे हैं या फिर उनके संपर्क में रहे हैं। प्रशासन को मिली शिकायतों में से अब तक 200 वाजिब मिलीं हैं और विदेश यात्रा से लौटे 150 लोग क्वारेंटाइन में भेजे गए हैं।

ये कैसे घर पहुँचे? कुछ वाकए पढ़िए। सभी जम्मू-कश्मीर/श्रीनगर के हैं। एक शख्स इटली से लौटता है, मगर किसी दूसरी जगह से होते हुए पहले नई दिल्ली आता है, फिर वह दिल्ली से जम्मू आने के लिए ट्रेन पकड़ता है। इसके बाद रेलवे स्टेशन से घर आने के लिए कैब लेता है। अपने घर जाने के लिए इतना लंबा रूट वह सिर्फ़ इसलिए लेता है ताकि ट्रैवल हिस्ट्री छिपा सके और 14 दिन के क्वारेंटाइन पीरियड से बच सके। हालाँकि बाद में पुलिस उसे ट्रेस कर पकड़ लेती है।

इसी तरह एक और मामला है। दो भाइयों का। दोनों बांग्लादेश के एक ही मेडिकल कॉलेज में पढ़ते हैं। एक फ्लाइट से आता है और दूसरा सड़क के रास्ते। जो फ्लाइट से आता है वह चेकिंग स्टॉफ को अपनी ट्रैवल हिस्ट्री बताता है और क्वारेंटाइन कर दिया जाता है। मगर, दूसरा भाई सड़क का रास्ता पकड़कर सीधे घर पहुँच जाता है और घर की बनी मिठाइयों का स्वाद ले रहा होता है। इसी बीच किसी समझदार पड़ोसी को इसकी भनक लगती है और वह कंट्रोल रूम में कॉल कर देता है। कुछ देर में टीम पहुँचती है और उस शख्स में कोरोनावायरस के लक्षण दिखते हैं। आखिर में उसे आइसोलेट कर ही दिया जाता है। 

ऐसे केवल दो मामले नहीं हैं। ऐसे अनेकों मामले हैं जिनके कारण जम्मू-कश्मीर में पुलिस प्रशासन को दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है। सरकार गुहार लगा-लगाकर थक गई है कि समाज को खतरे से बचाएँ, कोरोना के लक्षण दिखते ही स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाएँ। लेकिन नहीं, इंसानियत के दुश्मनों की बुद्धि में ये बातें समझ नहीं आती। मेडिकल का स्टूडेंट होने के बावजूद लोग ऐसी हरकतें कर रहे हैं, तो सोचिए जाहिलपना किस हद तक भीतर है।

इन्हीं जाहिलों से लड़ने के लिए श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर शाहिद चौधरी ट्वीट के जरिए विदेश यात्रा कर वापस अपने घर लौटने वाले और ट्रैवल हिस्ट्री छिपाने वाले कश्मीरियों को चेतावनी दे रहे हैं। रविवार को एक के बाद एक कई ट्वीट के जरिए शाहिद ये बताना चाह रहे थे कि लोग चाहे ट्रैवल हिस्ट्री छिपा लें, लेकिन प्रशासन की सतर्कता और लोगों की समझदारी से वे बच नहीं सकते।

कल रात की बात करें तो कंट्रोल रूम के ट्रेसिंग सिस्टम ने 400 प्राप्त शिकायतों में से 200 का सत्यापन किया और उनके सामने 150 ऐसे अघोषित लोगों के मामले सामने आए जो विदेश घूम कर लौटे, लेकिन किसी को भी इसका पता नहीं चला। अब फिलहाल इन सभी को कोरोंटाइन किया गया है। शाहिद चौधरी ने अपील किया है कि ऐसे लोग आगे आएँ और खुद रिपोर्ट करें। वरना ट्रेसिंग सिस्टम उन्हें ट्रैक कर ही लेगा।

रविवार को शाहीद चौधरी के एक ट्वीट से 4 लोगों के बारे में जानकारी सामने आई। ये दुबई और कजाकिस्तान की यात्रा कर लौटे, लेकिन प्रशासन को अपनी ट्रैवल हिस्ट्री बताना जरूरी नहीं समझा। हालाँकि उनका पता बाद में आईटी ने लगा लिया। लेकिन ऐसी हरकतों को देखकर डिप्टी कमिश्नर ने तंज कसते हुए कहा, “हे मेरे स्वास्थ्य संगठन के गाइडलाइन्स वाले दोस्तों, क्या आप मुझे प्रवचन जैसा कुछ भेज सकते हैं ताकि मैं ऐसे लोगों को समझा पाऊँ?”

हम यदि शाहिद चौधरी के ट्विटर हैंडल पर एक नजर डालें तो मालूम पड़ेगा कि प्रशासन ऐसे लोगों की बेवकूफियों के कारण कितना परेशान हो रहा। जो अपने ट्रैवल हिस्ट्री को छिपा रहे हैं उन्हें ट्रेस किया जा रहा है, जो अस्पताल से भाग रहे हैं उन्हें पकड़ा जा रहा है और ये काम एक दो बार नहीं लगातार हो रहा है।

शाहिद चौधरी के ट्विट्स का स्क्रीनशॉट

शाहिद लगातार ट्विटर पर निवेदन कर रहे हैं कि इस महामारी की गंभीरता को समझें। इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन को सही जानकारी दें। अभी भी देरी नहीं हुई है। परिस्थितियों को देखते हुए उनका यहाँ तक कहना है कि डॉक्टर्स के मुताबिक हो सकता है कम्यूनिटि में मौजूद केस पॉजिटिव आए केसों से भी ज्यादा हों। इसलिए भगवान के लिए घर में रहें और ट्रैवल हिस्ट्री होने पर या लक्षण दिखते ही तय अस्पतालों में संपर्क करें।

चौधरी के मुताबिक उनके पास इस समय ऐसे संदेशों का ढेर लग गया है जिनमें उन लोगों की जानकारी दी गई है जो अपनी ट्रैवल हिस्ट्री को छिपाकर खुलेआम घूम रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें चेतावनी दी है कि वे जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाएँ और ध्यान रखें कि ये अपीलें निराधार नहीं हैं। कंट्रोल रूम और टीम भी इस समय मुश्किल समय से गुजर रही है।

हालाँकि, इस समय ये बात सब जानते हैं कि सरकार और पुलिस प्रशासन सिर्फ़ लोगों को इस महामारी से बचाने के लिए इतनी सख्ती दिखा रहा है। मगर फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनका मानना है कि ऐसे लोगों के बारे में सोशल मीडिया पर बात नहीं होनी चाहिए, उन्हें शर्मसार नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जरूरी नहीं कि जिसने विदेशों में ट्रैवल किया हो, वो कोरोना पॉजिटिव हो ही।

कश्मीर में एयरपोर्ट से बिन स्क्रीनिंग कराए, अस्पताल से भागकर, ट्रैवल हिस्ट्री छिपाकर, घर में छिपने वालों की तादाद बढ़ती जा रही हैं। 23 मार्च को 65 लोगों को ट्रैक किया गया था। उससे पहले बैंकाक, यूके, दुबई, बांग्लादेश, कजाकिस्तान से आने वाले 29 लोगों के बारे में पता लगाया गया था जो रास्ता बदलकर या फिर ट्रैवल हिस्ट्री छिपाकर घरों तक पहुँचे थे।

इसके अलावा गुरुवार से शनिवार तक श्रीनगर लौटने वाले कुल 1166 लोगों को इस तरह ही 20 होटलों में क्वारेंटाइन किया गया है। कश्मीर में सुरक्षा बल हमेशा आतंकी खतरों से निपटने के लिए सतर्क रहते हैं। लोगों की आवाजाही का पता लगाने के लिए यहाँ इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग सिस्टम हैं। यह नेटवर्क उन लोगों से निपटने के लिए भी काम आ रहा है जो आइसोलेशन सेंटर से भाग रहे हैं। पिछले शनिवार को ही ऐसे 3 पीएचडी स्कॉलर्स जो बिना बताए क्वारेंटाइन सेंटर से गायब हो गए थे, उन्हें पकड़ लिया गया और एग्जामिनेशन के लिए हेल्थ सेंटर में डाल दिया गया। ये तीनों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र थे, जो 18 मार्च को ही यूएई से लौटे थे। इन्हें यूनिवर्सिटी में ही क्वारेंटाइन किया गया था, लेकिन ये भागकर कश्मीर आ गए। 

यहाँ बता दें  जम्मू-कश्मीर प्रशासन ट्रैवल हिस्ट्री छिपाने वाले यात्रियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है। लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे। सिर्फ प्रशासन के प्रयासों से क्या होगा, अगर जनता ही सहयोग नहीं करेगी। हाल ही में श्रीनगर एयरपोर्ट पर बांग्लादेश से आए कुछ मेडिकल स्टूडेंट्स ने जाँच का विरोध करते हुए तोड़फोड़ की थी। कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर पीके पोल ने इस पर कहा था कि प्रक्रिया का उल्लंघन करने वालों को प्रशासन बर्दाश्त नहीं करेगा। जो भी शख्स नियमों का पालन नहीं करेगा, उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शाहिद चौधरी का कहना है, “यकीन कीजिए अगर मैं रोज इस तरह के लोगों की जानकारी साझा करूँगा तो कश्मीर में कोई सो भी नहीं पाएगा। अपने अहंकार को एकतरफ रखें, समस्या को बढ़ाने की बजाय मिलजुल कर काम करें और एक-दूसरे की मदद करें। जो अभी चल रहा है वो तीसरे विश्वयुद्ध से कम नहीं है। यह खत्म हो जाए तो हम अपनी बाकी समस्याओं को आपस में निपटाते रहेंगे।”

लॉकडाउन में कोई भूखा न सोए: 1 करोड़ BJP कार्यकर्ता हर दिन 5 करोड़ गरीबों को खिलाएँगे खाना

कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। इससे उन लोगों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया है जो रोज कमाते और खाते हैं। इन्हें राहत पहुॅंचाने के लिए केंद्र से राज्य सरकारें तमाम कदम उठा रही हैं। इसी कड़ी में बीजेपी ने भी एक कैंपेन की घोषणा की है। महाभोजन अभियान का मकसद है कि लॉकडाउन के दौरान कोई भूखा न सोए।

इस अभियान के दौरान पार्टी के 1 करोड़ कार्यकर्ता हर रोज देश के 5 करोड़ गरीबों के भोजन का प्रबंध करेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने को भी कहा गया है। उल्लेखनीय है कि सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में सबसे बड़ा अस्त्र है।

बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में निर्णय लेते हुए कहा कि गुरुवार से पूरे देश में 5 करोड़ गरीब लोगों को लॉकडाउन के दौरान भोजन कराया जाएगा। इसके लिए पार्टी के 1 करोड़ कार्यकर्ताओं को तैयार किया जाएगा। हरेक कार्यकर्ता पाँच लोगों के भोजन का प्रबंध करेगा। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि 21 दिनों तक देश के पाँच करोड़ गरीबों को आसानी से भोजन मिल सके।

24 मार्च को रात आठ बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के वुहान शहर से निकले घातक कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए पूरे भारत में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की थी। इस दौरान मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वह 21 दिनों तक अपने घरों से बाहर न निकलें। भारत में कोरोना वायरस की चपेट में आने से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 606 से अधिक हो गई है। पूरे विश्व में अब तक 20 हजार से अधिक लोगों की मौत कोरोना वायरस की चपेट में आने से हो चुकी है।

उद्दंडों को मुर्गा भी बना रही है, बेसहारा लोगों को भोजन, बुजुर्गों को दवा तक भी उपलब्ध करा रही है पुलिस

कोरोना के संक्रमण में एक ओर जहाँ कई लोग पुलिस की भूमिका को नकारात्मक रूप से दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और ही कह रही है। ट्विटर पर लगभग हर बड़े-छोटे राज्य की पुलिस लॉकडाउन की सीमाओं का उल्लंघन करने वालों को दंड भी दे रहे हैं और वही पुलिसकर्मी लॉकडाउन के कारण हो रही समस्याओं से गुजर रहे लोगों के लिए मसीहा की भूमिका भी अदा कर रहे हैं। इसी का एक उदाहरण है उत्तराखंड पुलिस!

उत्तराखंड पुलिस ने ट्विटर पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें उन्हें भूखे लोगों के लिए भोजन का प्रबंध करते हुए देखा जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विट्टर अकाउंट से ट्वीट में लिखा है- “घबराओ मत #UttarakhandPolice हैं ना। लॉकडाउन के दौरान असहायों एवं बेसहारा लोगों को हरिद्वार IRB के जवानों द्वारा सामूहिक किचन लगाकर खाना खिलाया जा रहा है।”

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में पुलिस ने बेसहारा और गरीब लोगों के लिए सामूहिक किचन की व्यवस्था की है जिसमें लॉकडाउन के दौरान गरीब और खाने के लिए जूझ रहे लोगों को खिलाने का प्रबंध किया गया है। उत्तराखंड पुलिस को शायद इसी कारण ‘मित्र पुलिस’ भी कहा जाता है।

वहीं, उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक ट्वीट के द्वारा बताया कि उन्होंने व्हाट्सएप के जरिए बुजुर्ग की दवा मँगवाकर उनके घर तक पहुँचाई। इसी के साथ जरूरतमंद लोगों के घरों तक किचन से सम्बंधित खाने की वस्तुएँ भी उपलब्ध करवा रही है। सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है कि बंद के दौरान पंजाब पुलिस भी लोगों को भोजन आदि उपलब्ध करवाती देखी जा रही है।

पीएम मोदी द्वारा 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा करने के बाद से पुलिस और प्रशासन दोनों अनावश्यक सड़कों पर घूम रहे लोगों से सख्ती से निपटना शुरू कर दिया है, जिस कारण मीडिया का एक ख़ास वर्ग पुलिस की भूमिका पर संदेह खड़े करने का प्रयास भी कर रहा है। बेवजह घर से बाहर घूम रहे लोगों की फ़ौरन जाँच से लेकर उन पर दंडात्मक कार्रवाई के आदेश का भी पुलिस ने गंभीरता से पालन कर रही है।

मैं तो मजाक कर रहा था: आलोचना के बाद जामिया प्रोफेसर अबरार ने हिन्दू छात्रों को फेल करने वाली बात पर दी सफाई

हिन्दू छात्रों को फेल करने का दावा करने वाला जामिया मिल्लिया इस्लामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद अब अपने ही बयान से पलट गया है। उसने अपनी ही ट्वीट्स को पैरोडी या मजाक बताया है। उसने इसे ‘सरकाज्म’ करार दिया है। उसे कहा कि वो तो मजाक कर रहा था। चारों तरफ से काफ़ी आलोचना होने के बाद उसने ऐसा किया। बकौल अबरार, वो हिन्दू छात्रों को फेल करने की बात कह के ये दिखाना चाह रहा था कि कैसे सरकार विभिन्न समुदायों के बीच भेदभाव कर रही है। सफाई देते हुए भी उसने सीएए के विरोध में बातें कही।

बता दें कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रोफेसर ने दावा किया था कि उसने उन नॉन-मुस्लिम छात्रों को परीक्षा में फेल कर दिया है, जो सीएए के पक्ष में थे या जो सीएए विरोधियों का विरोध कर रहे थे। जहाँ एक तरफ शिक्षकों से उम्मीद की जाती है कि वो बिना किसी भेदभाव के छात्रों को पढ़ाएँ और उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाएँ, लेकिन प्रोफेसर अबरार अहमद लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से सीएए समर्थक छात्रों को धमकी देने में लगा हुआ था। हाल ही में उसने ऐलान किया था कि परीक्षा में 15 सीएए समर्थक छात्रों को छोड़ कर बाकी सभी छात्र पास हैं। उसने सीएए के विरोध में उसके 55 छात्र होने का दावा किया।

हालाँकि, कई लोगों को शंका थी कि कॉपी चेक करते समय प्रोफेसरों को छात्रों की पहचान पता ही नहीं होती, ऐसे में वो कैसे किसी को पहचान कर जान-बूझकर पास या फेल कर सकते हैं? हमने जामिया के कुछ लोगों से बात की, जिन्होंने हमें बताया कि अटैंडेंस शीट प्रोफेसरों के पास ही होती है, इसीलिए उनके लिए ये पता लगाना कठिन नहीं है कि कौन सा रोल नंबर किस छात्र का है और कौन हिन्दू हैं और कौन मुस्लिम। अबरार अहमद ने भी ऐसा ही करने का दावा किया है। अबरार अहमद जामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर है, जो बाटला हाउस क्षेत्र में रहता है। अबरार ज़ाकिर नाइक का भी अनुयायी है।’

अब वो अपने ही बयान से पलट गया है और आलोचना होने के बाद इसे मजाक बता रहा है। वो ट्विटर पर ज़ाकिर नाइक को फॉलो करता है और उसकी विचारधारा भी कट्टर इस्लामी है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं को लेकर भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है। अपनी एक ट्वीट में उसने कहा था कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र बन गया तो फिर यहाँ की महिलाओं का क्या होगा? उसने कहा था कि अधिकतर बलात्कार आरोपित वही हैं, जो हिन्दू राष्ट्र या फिर रामराज की बात करते हैं। इससे पता चलता है कि वो हिन्दुओं से किस कदर नफरत करता है।

कंटेजियन फिल्म में मेडिकल कन्सलटेंट रहे विषाणु विज्ञानी भी कोरोना से संक्रमित, कहा- अगर ये मुझे हो सकता है तो किसी को भी हो सकता है

हर देश में आम नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ऐसा है, जो कोरोना वायरस के संक्रमण की क्षमता को गंभीरता से नहीं ले रहा है। जबकि विभिन्न देशों से ऐसे कई मामले सामने आ गए हैं, जिनमें देखा गया कि कई राजनीतिक हस्तियों से लेकर हॉलीवुड के कलाकार और नामचीन खिलाड़ी भी इस वायरस के संक्रमित पाए गए हैं।

कोरोना वायरस से संक्रमितों में ऐसा ही एक नया नाम सामने आया है। यह नाम है विषाणुओं की खोज में महारत हासिल करने वाले दुनिया के शीर्ष विशेषज्ञों में शामिल डॉ. डब्ल्यू इयान लिपकिन का! विषाणु विज्ञानी डॉ. लिपकिन भी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं।

ख़ास बात यह है कि कोरोना वायरस के कारण एकबार फिर चर्चा में आई वर्ष 2011 में स्टीवन सोडरबर्ग के निर्देशन में बनी हॉलिवुड फिल्म ‘कंटेजियन’ (Contagion)में फिल्म निर्माण के दौरान मेडिकल सलाहकार यही डॉ. डब्ल्यू इयान लिपकिन ही थे। वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद उनका कहना है कि अगर यह मुझे हो सकता है तो फिर यह किसी को भी हो सकता है। डॉ. लिपकिन का कहना है कि वो ये नहीं जानते कि उन तक यह वायरस कब और कैसे पहुँचा लेकिन यह वायरस पूरे यूनाइटेड स्टेट में फ़ैल चुका है।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ इन्फेक्शन एंड इम्यूनिटी में डायरेक्टर डॉ. लिपकिन ने हाल ही में एक टीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने संक्रमित होने का खुलासा किया।

उन्होंने कहा, “मैं इस शो पर आज रात कहना चाहूँगा, यह मेरे लिए बेहद पर्सनल भी है। क्योंकि मैं कोविड-19 से संक्रमित हूँ और यह बहुत तकलीफदेह है। मैं इस शो के जरिए एक संदेश देना चाहता हूँ कि अगर यह वायरस मेरे ऊपर हमला कर सकता है, तो यह किसी को भी संक्रमित करने में सक्षम है।”

डॉ. लिपकिन ने कहा कि इस वायरस को नियंत्रित करने का सिर्फ एक ही तरीका है कि नियमति तौर पर सामाजिक अलगाव (सोशल डिस्टेंसिंग) और आइसोलेशन (एकांतवास) अपना लिया जाए। उन्होंने कहा, “हम वास्तव में नहीं जानते कि इस वायरस को नियंत्रित करने में कितना समय लगेगा। दुनिया में राज्यों और शहरों के बीच कई छोटी-बड़ी सीमाएँ हैं, और जब तक हम अटल नहीं होते हैं, इस चीज़ से आगे नहीं बढ़ने वाले हैं।”

3 सप्ताह की देरी, 6 गायब लोग, 350 पर कार्रवाई और इटली-अमेरिका पर आरोप: चीन का सबसे बड़ा ‘कोरोना कवर-अप’

कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में कोहराम मचा हुआ है। अब तक इसके 3 लाख से भी अधिक मामले आ चुके हैं और 19,600 से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस सवाल का उठना जायज है कि आख़िर चीन ने शुरुआत में इसे कवर-अप क्यों किया? यहाँ तक कि ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ की आँखों में भी धूल झोंका गया, जिसके बाद उसने भी इसे बड़ा ख़तरा नहीं माना। यहाँ हम इन्हीं चीजों पर बात करेंगे और जानेंगे कि कैसे चीन ने शुरुआती दिनों में इस वायरस के ख़तरों से दुनिया को अनजान रखा। एक अध्ययन के अनुसार, अगर चीन ने 3 सप्ताह पहले भी एक्शन लिया होता तो इस ख़तरे को 95% कम किया जा सकता था।

कब क्या हुआ? चीन के कवर-अप की टाइमलाइन

दिसंबर 10, 2019 को ही चीन में कोरोना का पहला मरीज बीमार पड़ने लगा था। इसके एक दिन बाद वुहान के अधिकारियों को बताया गया कि एक नया कोरोना वायरस आया है, जो लोगों को बीमार कर दे रहा है। वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल के डायरेक्टर ने 30 दिसंबर को इस वायरस के बारे में वीचैट पर सूचना दी। उन्हें जम कर फटकार लगाई गई और आदेश दिया गया कि वो इस वायरस के बारे में किसी को कुछ भी सूचना न दें। इसी तरह डॉक्टर ली वेलिआंग ने भी इस बारे में सोशल मीडिया पर विचार साझा किए। उन्हें भी फटकार लगाई गई और बुला कर पूछताछ की गई। इसी दिन वुहान हेल्थ कमीशन ने एक ‘अजीब प्रकार के न्यूमोनिया’ के होने की जानकारी दी और ऐसे किसी भी मामले को सूचित करने को कहा।

इसके बाद 2020 के शुरूआती हफ्ते में 2 जनवरी को ही चीन के सूत्रों और वैज्ञानिकों ने इस कोरोना वायरस के जेनेटिक इनफार्मेशन के बारे में सब कुछ पता कर लिया था लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। एक सप्ताह तक इसे यूँ ही अटका कर रखा गया। जनवरी 11-17 तक वुहान में हेल्थ सेक्टर के अधिकारियों की बैठकें चलती रहीं। जनवरी 18 को नए साल के जश्न के दौरान हज़ारों-लाखों लोगों ने जुट कर सेलिब्रेट किया। इसके एक दिन बाद बीजिंग से विशेषज्ञों को वुहान भेजा गया। जनवरी 20 को दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया और उसी दिन चीन ने घोषणा की कि ये ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसफर होने वाला वायरस है।

जनवरी 21 को चीन के सरकारी अख़बार ने इस बीमारी को लेकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक्शन प्लान के बारे में बताया। इसके 2 दिन बाद वुहान के कुछ शहरों में लॉकडाउन की घोषणा की गई। लेकिन, इन सबके बावजूद 24-30 जनवरी तक चीन में नए साल का जश्न मनाया गया, लोगों ने अपने सम्बन्धियों के यहाँ यात्राएँ की और सारे सेलिब्रेशन ऐसे ही चलते रहे। इसी बीच चीन लॉकडाउन का क्षेत्र भी बढ़ाता रहा और वुहान में इस वायरस से लड़ने के लिए एक नया अस्पताल तैयार किया गया। अब वही चीन ये दावे कर रहा है कि उसने इस आपदा को नियंत्रित कर के एक उदाहरण पेश किया है। वही चीन जो महीनों तक दुनिया की आँखों में धूल झोंकता रहा।

चीन की इस करनी से न सिर्फ़ उसे नुकसान हुआ बल्कि आज 100 से ज्यादा देश हलकान हैं। सेलिब्रेशनों की अनुमति देकर और जश्न पर रोक न लगा कर उसने लोगों की आवाजाही जारी रखी, जिससे इस वायरस के फैलने की रफ़्तार बढ़ गई। अगर सही समय पर इस पर लगाम लगाया गया होता तो आज पूरी दुनिया में तबाही का ये आलम नहीं देख रहे होते हम। इसके बावजूद कुछ लोग इस बात पर आपत्ति जता रहे हैं कि इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ‘चाइनीज वायरस’ क्यों कहते हैं? ये वुहान से ऑरिजिनेट हुआ लेकिन WHO जानबूझ कर इसके नामकरण में वुहान या चीन जैसे शब्द नहीं लाया।

चीन का पुराना इतिहास: हमेशा से चीजों को ढकने में माहिर

चीन का ये सब करने का पुराना इतिहास रहा है। उसने 2003 में SARS वायरस (Severe acute respiratory syndrome) के सामने आने के बाद भी कुछ ऐसा ही किया था। अबकी कोरोना वायरस के सामने आने के बाद भी चीन ने एक्शन लिए लेकिन वायरस को रोकने के लिए नहीं बल्कि इसकी सूचना सार्वजनिक करने वालों के ख़िलाफ़। वायरस के सामने आने के 7 सप्ताह बाद कुछ शहरों को लॉकडाउन करना और इस वायरस को लेकर चीन द्वारा ऐसा जताना कि ये कोई छोटी-मोटी चीज है, दुनिया को भारी पड़ा। ख़ुद चीन के प्रशासन ने स्वीकार किया है कि लॉकडाउन से पहले ही क़रीब 50 लाख लोग वुहान छोड़ चुके थे।

2019 में लिखे एक लेख में ‘चाइनीज एक्सप्रेस’ ने SARS या फिर MERS की तरह कोई खतरनाक वायरस के सामने आने की शंका जताई थी और कहा था कि इसकी वजह चमगादड़ ही होंगे लेकिन बावजूद इसके लगातार लापरवाही बरती गई। उस लेख में ये भी कहा गया था कि ये वायरस चीन से ही आएगा। 2019 तो छोड़िए, 2007 में ही एक जर्नल में प्रकाशित हुए आर्टिकल में बताया गया था कि साउथ चीन में चमगादड़ जैसे जानवरों को खाने का प्रचलन सही नहीं है क्योंकि उनके अंदर खतरनाक किस्म के वायरस होते हैं। उस लेख में इस आदत को ‘टाइम बम’ की संज्ञा दी गई थी। चीन में जनता बड़े स्तर पर इससे प्रभावित हुई है लेकिन दोष वहाँ की सरकार व प्रशासन का है।

एक तो चीन ने इस वायरस के प्रसार को नहीं रोका और बाद में ‘उलटा चोर कोतवाल को डाँटे’ की तर्ज पर अमेरिका और इटली को दोष देने में भी देरी नहीं की। चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई ऐसे लेख वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि ये वायरस चीन नहीं बल्कि इटली से आया। इसके बाद तब हद हो गई जब चीन ने अमेरिकी सेना पर आरोप मढ़ दिया कि अमेरिका ही इस वायरस को चीन तक लाया है। एक तरह से एक प्रोपेगंडा कैम्पेन चलाया गया, ताकि किसी और को दोष दिया जा सके। चीनी मीडिया ने इटली के एक डॉक्टर का इंटरव्यू खूब चलाया और उसके आधार पर ही इटली को दोष देना तेज कर दिया।

उस डॉक्टर के बयान के आधार पर दावे किए गए कि इटली में बुजुर्गों में न्यूमोनिया की तरह कुछ फ़ैल रहा था, जो बताता है कि ये वायरस वुहान में पहली बार नहीं आया। इस लेख को चीनी सोशल मीडिया पर 50 करोड़ लोगों ने देखा और इसे ‘एक्सपर्ट की राय’ कह कर पेश किया गया। यानी चीन पूरी तरह उस थ्योरी पर चल रहा है कि किसी भी चीज को लेकर इतने अफवाह फैला दो कि लोगों को सच्चाई पता ही न चले। हज़ार ‘कांस्पीरेसी थ्योरी’ फैला कर एक सच्चाई को ढक दो। वुहान और इटली के बीच कई फ्लाइट्स चलते हैं, जिससे चीनी वायरस तेजी से यूरोप में फैला। आज स्थिति ये है कि इटली में 6000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

ट्रम्प द्वारा इसे ‘चाइनीज वायरस’ कहने से बौखलाए चीनी अधिकारियों ने इसे अमेरिकी सेना की साजिश करार दिया और कहा कि अमेरिका में इसे स्टोर कर के रखा गया था ताकि समय आने पर चीन को तबाह किया जा सके। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने इसे अमरीका की साजिश करार दिया और पूछा कि अमेरिका में इससे कितने लोग प्रभावित हैं, वो डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? उन्होंने उलटा अमेरिका से ही कहा कि वो चीन को सब कुछ एक्सप्लेन करे।

जिसने भी आवाज़ उठाई, उसे चुप करा दिया गया

चीन में 5-6 लोग ऐसे हैं जो कोरोना वायरस के बारे में सूचना सार्वजनिक करने या सवाल उठाने के बाद गायब हो गए या कर दिए गए। चीन के प्रोफेसर झु झिंग्रन ने इस बारे में बहुत कुछ बताया था। कुछ दिनों बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और सारे सोशल मीडिया वेबसाइट्स से उनके एकाउंट्स गायब हो गए। ऐसे ही एक वीडियो ब्लॉगर का कुछ अता-पता नहीं चला। इन सभी को कोरोना वायरस के बारे में सवाल पूछना या सूचना देने की सज़ा मिली। डॉक्टर ली वेलिआंग ने जब स्थानीय पुलिस को कोरोना के बारे में बताया, उलटा उन्हें ही चुप करा दिया गया। कोरोना वायरस के कारण ही उनकी मौत हो गई।

चीन में ख़बरों का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, सब कुछ सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जब भी कोई ऐसी परिस्थिति आती है, चीन सभी सोशल मीडिया साइट्स और मीडिया की ख़बरों को खँगालने में तेज़ी कर देता है, ताकि कहीं कुछ ऐसा सार्वजनिक न हो जाए जो वहाँ की सरकार छिपाना चाहती हो। ‘ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स’ ने आँकड़ा गिनाते हुए बताया कि चीन के विभिन्न शहरों में 350 ऐसे लोग हैं, जिन्हें कोरोना के बारे में कुछ भी बोलने की सज़ा दी गई। एक युट्यूबर फांग ने कुछ लाशों के बारे में वीडियो बनाया था और उसे सार्वजनिक किया था, जिसके बाद उन्हें गायब कर दिया गया। उसके परिवार वाले कहते हैं कि ये सब कम्युनिस्ट पार्टी की करनी है।

कुल मिला कर बात ये है कि इसे चीनी वायरस कहना कोई रेसिज्म नहीं है। इसका अर्थ हुआ कि जिस जगह से ये वायरस पहली बार निकल कर आया, उस स्थान पर इसका नामकरण हो। ऊपर से जब चीन ने इसे ढकने की गलती करके दुनिया भर को परेशानी में डाला है तो फिर इसमें उन्हें क्यों दोष दिया जा रहा, जो इस वायरस के ऑरिजिनेट होने के स्थान के नाम पर इसे सम्बोधित कर रहे हैं? भारत-चीन की सीमा लगती है, भारत में कई लोग चीनी की तरह दिखते भी हैं और चीन से आवाजाही भी कम नहीं रही है। इसे ‘चीनी वायरस’ या ‘वुहान वायरस’ कहना ग़लत कैसे है, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं।

‘कोरोना से लड़ाई में कमांडर मोदी का अनुसरण पैदल सेना की तरह करो’: पी चिदंबरम ने किया 21 दिन के लॉकडाउन का समर्थन

पीएम मोदी द्वारा 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद अब हाल ही में घोटालों के आरोप में तिहाड़ गए पूर्व वित्त मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कॉन्ग्रेस से इतर लॉकडाउन का समर्थन किया है। चिंदबरम ने देशवासियों से अपील की है कि इस मुश्किल वक्त में वे प्रधानमंत्री को कमांडर समझें और पैदल सैनिक की तरह उनकी कही बातों का अच्छे से अनुसरण करते हुए कोरोना वायरस का मजबूती से सामना करें।

पी चिदंबरम की यह अपील इस कारण से भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश में किए गए 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा पर जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके कुछ नेता सवाल उठा रहे हैं, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम इसकी सराहना की है।

लॉकडाउन पर अपनी राय देते हुए ट्वीटर पर 10 सूत्री प्लान में चिदंरबम ने कोरोना के खिलाफ देशव्यापी लॉकडाउन को ‘ऐतिहासिक मूवमेंट’ बताया है।

चिदंबरम ने लिखा- “24 मार्च से पहले हुई बहस को पीछे छोड़ देना चाहिए और एक नई लड़ाई की शुरुआत के तौर पर देशव्यापी लॉकडाउन को देखा जाना चाहिए, जहाँ लोग सिपाही हैं और पीएम कमांडर हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम प्रधानमंत्री, केन्द्र और राज्य सरकारों को अपना पूरा समर्थन करें।”

केंद्र की मोदी सरकार को फौरन राहत की घोषणा करने का प्लान सुझाते हुए चिदंबरम ने कहा – “भारत में घर में रहना सबसे अच्छा है लेकिन घर में रहने के लिए लोगों को पैसे और खाने की जरूरत होगी। हमें न सिर्फ 21 दिनों के लिए सोचना और प्लान करना चाहिए बल्कि उसके अगले कुछ हफ्तों की भी योजना होनी चाहिए।”

चिदंबरम ने पैकेज के ऐलान के लिए सरकार से प्रधानमंत्री की किसानों के लिए योजना के तहत कहा कि किसानों को दोगुना भुगतान 12 हजार रुपए करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत इसमें एनरॉल लोगों को 3,000 रुपए, सभी जनधन खातों में 6 हजार रुपए, सभी राशन कार्ड धारकों के घरों में 10 किलो चावल और गेहूँ की डिलीवरी करने के साथ ही सभी कर्मचारियों के खाते में वेतन देने और वह सरकार की ओर से रिम्बर्स होना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने 1 अप्रैल से 30 जून, 2020 तक सभी आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों में 5% की कटौती की माँग भी की है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे वक्त में प्रधानमंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों को अपना पूरा समर्थन देना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। हालाँकि, चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि यह उनका निजी विचार है और उनकी पार्टी का इससे कुछ भी लेना-देना नहीं है।

मैंने 15 नॉन-मुस्लिम छात्रों को फेल कर दिया है: मिलिए जामिया के प्रोफेसर अबरार से, जाकिर नाइक का है फैन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि उसने उन नॉन-मुस्लिम छात्रों को परीक्षा में फेल कर दिया है, जो सीएए के पक्ष में थे या जो सीएए विरोधियों का विरोध कर रहे थे। जहाँ एक तरफ शिक्षकों से उम्मीद की जाती है कि वो बिना किसी भेदभाव के छात्रों को पढ़ाएँ और उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाएँ, लेकिन प्रोफेसर अबरार अहमद लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से सीएए समर्थक छात्रों को धमकी देने में लगा हुआ है। हाल ही में उसने ऐलान किया है कि परीक्षा में 15 सीएए समर्थक छात्रों को छोड़ कर बाकी सभी छात्र पास हैं। उसने सीएए के विरोध में उसके 55 छात्र होने का दावा किया।

हालाँकि, कई लोगों को शंका थी कि कॉपी चेक करते समय प्रोफेसरों को छात्रों की पहचान पता ही नहीं होती, ऐसे में वो कैसे किसी को पहचान कर जानबूझ कर पास या फेल कर सकते हैं? हमने जामिया के कुछ लोगों से बात की, जिन्होंने हमें बताया कि अटैंडेंस शीट प्रोफेसरों के पास ही होती है, इसीलिए उनके लिए ये पता लगाना कठिन नहीं है कि कौन सा रोल नंबर किस छात्र का है और कौन हिन्दू हैं और कौन मुस्लिम। अबरार अहमद ने भी ऐसा ही करने का दावा किया है। अबरार अहमद जामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर है, जो बाटला हाउस क्षेत्र में रहता है। अबरार ज़ाकिर नाइक का भी अनुयाई है।’

वो ट्विटर पर ज़ाकिर नाइक को फॉलो करता है और उसकी विचारधारा भी कट्टर इस्लामी है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं को लेकर भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है। अपनी एक ट्वीट में उसने कहा था कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र बन गया तो फिर यहाँ की महिलाओं का क्या होगा? उसने कहा था कि अधिकतर बलात्कार आरोपित वही हैं, जो हिन्दू राष्ट्र या फिर रामराज की बात करते हैं। इससे पता चलता है कि वो हिन्दुओं से किस कदर नफरत करता है। साथ ही उसने कोरोना वायरस को लेकर भी सरकार के दावों और मेडिकल जगत की सलाहों पर पानी फेरने की कोशिश की थी।

अबरार ने कहा था कि कोरोना वायरस या फिर इस प्रकार की बाकी चीजें अल्लाह की परीक्षा है। उसने दावा किया था कि कोरोना वायरस से डरे बगैर सभी को सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखना चाहिए। यहाँ सवाल ये उठता है कि ऐसे व्यक्ति पर आज तक जामिया ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, जब वो खुले रूप से सोशल मीडिया को माध्यम बना कर इस तरह की घृणास्पद बातें कर रहा है। एक ऐसा प्रोफेसर, जो कोरोना वायरस को ‘अल्लाह का इम्तिहान’ बताता है।

बेटे के बाद अब मम्मी ने फैलाई फर्जी खबर: स्वघोषित ‘फैक्ट चेकर’ की मम्मी ने शेयर की फर्जी फोटो

अगर आपको लगता है कि माँ-बेटे का सबसे बुद्दिहीन जोड़ा अभी तक सिर्फ राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी ही हैं, तो देर से ही सही लेकिन ऑल्ट न्यूज़ के फाउन्डर परिवार भी गाँधी परिवार को तगड़ी चुनौती देते हुए देखा जा सकता है। हालाँकि, इसमें एकमात्र अच्छी खबर यह है कि राजनीति के बाद अब इस तरह के समीकरण ‘फैक्ट चेक’ जैसी जगहों पर भी तैयार होने लगे हैं।

दरअसल, फैक्ट चेक की आड़ में अपने हिन्दू-विरोधी और सरकार-विरोधी एजेंडे को हवा देने के चक्कर में लगातार 2 दिन क्रमशः प्रतीक सिन्हा (ऑल्ट न्यूज़ वेबसाईट फाउन्डर) और फिर निर्झरी सिन्हा (प्रतीक सिन्हा की मम्मी और ऑल्ट न्यूज़ की निदेशक) का ‘रिवर्स फैक्ट चेक’ करते हुए आम ट्विटर यूजर्स ने ही उन्हें आईना दिखा दिया है। अब अगर 26 मार्च को भी ये कोई दूसरा ‘कोरोना षड्यंत्र’ करते हुए देखे जाते हैं, तो यह फैक्ट चेक के इतिहास में लगाईं गई पहली हैट्रिक कहलाएगी।

क्या है मामला :

स्वघोषित ‘फैक्ट न्यूज़ चेकर’ गैंग यानी, ऑल्ट न्यूज़ के फाउन्डर प्रतीक सिन्हा की ‘कोरोना षड्यंत्र’ में भागीदारी पकड़े जाने के ही ठीक एक दिन बाद ऑल्ट न्यूज़ की निदेशक और प्रतीक सिन्हा की मम्मी ट्विटर पर कोरोना षड्यंत्र में अपनी मौजूदगी साबित करती हुई देखी गई हैं।

प्रतीक सिन्हा की मम्मी निर्झरी सिन्हा ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें कुछ गरीब बच्चों की तस्वीर ट्वीट करते हुए देखी गई। तस्वीर के साथ ‘फैक्ट चेकर’ प्रतीक सिन्हा की मम्मी यानी ऑल्ट न्यूज़ की निदेशक निर्झरी सिन्हा ने लिखा है – “PM मोदी का इनके लिए क्या सन्देश है, घर पर रहो और बाहर मत निकलो?”

दरअसल, इस चित्र में कुछ बच्चों को दिखाया गया है और निर्झरी सिन्हा ने इसी बहाने अपने उसी मर्म को बाहर निकालने की कोशिश की है, जिसके कारण वो अक्सर PM मोदी को गाली देने से लेकर हर प्रकार की दक्षिणपंथी सरकार विरोधी गतिविधि करती हुई देखी जाती हैं। निर्झरी सिन्हा यानी, प्रतीक सिन्हा की मम्मी ने इस तस्वीर के जरिए PM मोदी के 21 दिनों के लॉकडाउन के ऐलान का उपहास करने का प्रयास किया लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ दिन से माँ-बेटों के षड्यंत्र को ज्यादा बल मिल नहीं पा रहा है। अपने दावे की वकालत में तथ्यों की कमी इस स्वघोषित फैक्ट चेकर गैंग के पास हमेशा ही रहती है इसलिए यह कहना भी गलत होगा कि यह षड्यंत्र पहली बार तथ्यों की कमी के कारण फ्लॉप हुए हैं।

क्या है तस्वीर की वास्तविकता –

ऑल्ट न्यूज़ के फाउन्डर प्रतीक सिन्हा और उनकी मम्मी यानी निर्झरी सिन्हा, जो कि ऑल्ट न्यूज़ की निदेशक भी हैं, ने जो तस्वीर ट्वीट की है, वह 2016 की है। अब एक प्रश्न उठता है जो कि निम्नलिखित है –

प्रश्न – आखिर 2016 की तस्वीर को 2020 में ट्वीट करते हुए उस पर सामाजिक ज्ञान देने का क्या कारण हो सकता है?

इसके 2 उत्तर हैं –

उत्तर 1 – बेटे प्रतीक सिन्हा की तरह ही कोरोना की वैश्विक महामारी के समय भी मोदी सरकार विरोधी कोई नया ‘कोरोना प्रपंच’ तैयार करना।
उत्तर 2 – लॉकडाउन के दौरान 24 घंटे घर में रहते हुए खाली समय का सदुपयोग कर मोदी सरकार विरोधी दलों (जो कि सर्वविदित ही हैं) की आँखों में अच्छे नम्बर हासिल करना।

ऑपइंडिया के सवाल-

प्रश्न 1- यदि फैलानी फेक न्यूज़ और प्रोपेगेंडा ही हो तो फिर खुद को फैक्ट चेकर कहना आवश्यक क्यों है?
प्रश्न 2- आखिर वह कौनसा वायरस है जो इंसान को मजबूर करता है कि वह ‘नासा तकनीक’ से पूरी दुनिया को ज्ञान देते हुए कहे कि गलत स्टोरी या मिसइन्फॉर्मेशन नहीं फैलानी चाहिए, जबकि आपने स्वयं ऑल्ट न्यूज़ के नाम से फेक न्यूज़ का कारखाना चला रखा हो?

खैर… निर्झरी सिन्हा के सामने कोरोना वायरस से भी बड़ी चुनौती बड़ी से बड़ी आपदा और महामारी के समय भी मोदी सरकार विरोधी अभियान जारी रखने की होती है। यह वही निर्झरी सिन्हा है जो ट्विटर पर अक्सर PM मोदी को खुली गालियाँ देते हुए भी देखी जाती है।

चाहे वह नोटबंदी के दौरान मोदी की कब्र खोदकर 500 और 1000 रुपए के नोटों से जला दिए जाने वाला ट्वीट हो या फिर उन्हें हत्यारा, अछूत और दंगे भड़काने वाला कहने वाला ट्वीट हो, निर्झरी सिन्हा ने हर समय साबित किया है कि वह ऑल्ट न्यूज़ जैसे स्वघोषित फैक्ट चेकर वेबसाईट की निदेशक होने की सबसे प्रबल दावेदार है।