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लॉकडाउन से पहले ही 50 लाख लोग छोड़ चुके थे वुहान, यहीं से शुरू हुआ था कोरोना का संक्रमण

घातक कोरोना वायरस की रोकथाम में बुरी तरह असफल होने के बाद साम्यवादी चीन ने इस वायरस से संबंधित जानकारियों को लेकर पूरी दुनिया को उलझन में डाल रखा है। अब जबकि चीन इस वायरस पर काबू पा चुका है, वह इससे धूमिल हुई अपनी इमेज को ठीक करने में जुट गया है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पीआर एक्सरसाइज चला न सिर्फ इस महामारी के लिए अपनी जिम्मेदारी स्वीकारने से बचने की कोशिश में है, बल्कि दूसरे देशों खासकर अमेरिका पर इसकी जिम्मेदारी डालने की फिराक में लगा है।

एक तरफ चीनी सरकार इस वायरस के लिए दूसरों को दोषी ठहराने में व्यस्त है तो दूसरी तरफ उसके डिप्लोमेट्स और मीडिया संगठन इस वायरस को ‘चाइना वायरस’ कहने पर सख्त एतराज जाते हुए इसे ‘नस्लीय’ करार देते घूम रहे हैं। चीन इस वायरस के पीछे किन्हीं साजिशों के होने की आशंका जताते हुए खुद को इसके लिए जिम्मेदार मानने से कतई इनकार कर रहा है। याद रहे कि इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या दुनिया भर में अब तक 2 लाख क्रॉस कर चुकी है। वहीं इससे होने वाली मौतों की संख्या 11,000 पहुँच चुकी है।

हालाँकि इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट्स के अनुसार इस घातक वायरस के फैलाव के पीछे सिर्फ और सिर्फ चीन ही जिम्मेदार है। चीन न सिर्फ ‘पेशेंट जीरो’ को ढूंढ़ पाने में असफल रहा बल्कि उसने इस वायरस के संक्रमण शुरू होने के कई हफ्तों बाद जाकर यह स्वीकार किया कि वुहान से आते निमोनिया के अधिसंख्य मामलों में एक नया वायरस जिम्मेदार पाया गया है। पूर्वी चीन के वुहान प्रान्त की आबादी 11 मिलियन है, जहाँ से नवंबर 2019 से ही इस वायरस के फैलने के डेटा सामने आ रहे हैं।

चीन ने न सिर्फ इस वायरस से निपटने में लापरवाही दिखाई बल्कि जिन लोगों ने भी कोरोना वायरस के बारे में चीनी प्रशासन को सचेत करने की कोशिश की उनकी आवाजों को दबा दिया गया। कोरोना वायरस से अपने दोस्तों को सचेत करने की कोशिशों के चलते जिस डॉ. वेन लियांग को चीनी सरकार ने फटकार लगाई थी, कोरोना वायरस से उनकी मौत के बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की टॉप लीडरशिप ने उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना जताते हुए माफ़ी माँगी।

इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट्स से सामने आए आँकड़ों के अनुसार कथित तौर पर चीन ने न सिर्फ मरीजों के टेस्ट सैम्पल्स नष्ट किए, व्हिसलब्लोवर्स को शांत रहने को मजबूर किया बल्कि यात्रा प्रतिबंध भी बहुत देर से लगाए। wion की एक रिपोर्ट के अनुसार 3 जनवरी को चीन के नेशनल हेल्थ कमिश्नर ने सभी लैब्स को आदेश दिया था कि इस वायरस से संबंधित कोई भी सूचना प्रकाशित नहीं की जाएगी और इसके साथ ही उनसे सारे सैम्पल्स को लेकर जब्त कर लिया गया।

आख़िरकार 23 दिन बाद चीन ने इस नोबल वायरस से पैदा हुए खतरे को स्वीकारा और 23 जनवरी को वुहान सिटी के सम्पूर्ण लॉक डाउन की घोषणा की। वुहान ही वो शहर है जिसके पशु बाजार से इस नोबल वायरस के फैलने की शुरुआत मानी जा रही है।

हालाँकि ये सारे उपाय चीन ने तब किए जब पूरी दुनिया इस घातक वायरस के चपेट में आ चुकी थी। चीनी सरकार के इन प्रतिबंधों को लगाने के पहले ही 11 मिलियन की आबादी में से 5 मिलियन लोग वुहान छोड़ चुके थे और कई मिलियन लोग लगातार वुहान आ-जा चुके थे। इसके आलावा कोरोना वायरस महामारी उस समय फैली जब चीन में नया वर्ष शुरू होने को था, जो कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार दुनिया के सबसे बड़े मानवीय प्रवासन का कारण बनता है जिसमें करोड़ों-करोड़ लोग अपने घरों की तरफ या छुट्टियाँ मनाने पर्यटन निकल जाते हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल करीब 450 मिलियन यानी 45 करोड़ लोगों को नववर्ष के दौरान यात्रा करनी थी। ये सारी यात्राएँ 24 जनवरी से 30 जनवरी के बीच प्रस्तावित थीं। याद रहे कि चीन के वुहान के बाद जो देश सबसे ज्यादा पीड़ित है इस महामारी से वह इटली है। वहां फरवरी की शुरुआत में इस वायरस से संक्रमण के केसेज आने शुरू हुए थे।

हालाँकि यह कोई पहली बार नहीं है कि चीन किसी वैश्विक बीमारी का स्रोत बनकर उभरा हो। इससे पहले 2002-2003 में चीन पर सार्स बीमारी फैलाने का आरोप लगा था जिसने दुनियाभर में 8000 से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया था। इसके बावजूद भी ड्रैगन ने कोई भी सबक सीखने से इनकार कर दिया और नतीजा आज कोरोना संक्रमण के रूप में दुनिया के सामने है।

328 साल पहले एक्राम ख़ान था, अब कोरोना है: दो मौके जब श्रीमंदिर में लगा ‘कर्फ्यू’ पर नहीं रुका पूजा-पाठ

ओडिशा में स्थित प्रभु जगन्नाथ मंदिर में हर वर्ष हज़ारों-लाखों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं। देश-विदेश से आने वाले भक्तों के लिए वहाँ प्रसाद भी बनाया जाता रहा है। जहाँ पहले मंदिर भक्तों से गुलजार रहता था, अब कोरोना वायरस के कारण यहाँ अघोषित कर्फ्यू का माहौल है। भक्तों की चहलकदमी बंद हो गई है। श्रीमंदिर में भक्तों के दर्शन पर रोक लग गई है। कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है। जिला प्रशासन व सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करते हुए मंदिर प्रशासन ने ये फ़ैसला लिया है।

ऐसा 328 साल बाद हुआ है, जब श्रीमंदिर में इस तरह ‘कर्फ्यू’ लगा हो। आज से 328 साल पहले एक्राम ख़ान के हमले दौरान मंदिर में इस तरह का सन्नाटा पसरा था। एक्राम ख़ान ने जब मंदिर पर हमला किया था, तब उसने भारी लूट मचाई थी और जमकर कत्लेआम हुआ था। फ़िलहाल ओडिशा सरकार ने निर्णय लिया है कि 31 मार्च तक श्रीमंदिर को बंद रखा जाएगा। एक्राम ख़ान वाली घटना 17वीं शताब्दी की है। वो औरंगज़ेब का जनरल था। उसने और मरमस्त ख़ान जामउल्लह ने 1692 में मंदिर पर हमला किया था। हमलावरों ने मंदिर के सिंहद्वार को क्षतिग्रस्त कर दिया था।

जब ये हमला हुआ था तब प्रतिमा को क्रूर हमलावरों से बचाने के लिए तब के गजपति राजा व स्थानीय लोगों ने मिल कर छिपा दिया था। इस्लामी आक्रांताओं का मुख्य मकसद देवता की मूर्ति को क्षत-विक्षत करना ही था। उन्होंने जब स्थानीय लोगों से मूर्ति के बारे में पूछा तब उन्हें मुख्य प्रतिमा की जगह दूसरी प्रतिमा थमा दी गई, जिसे उन्होंने मुख्य प्रतिमा समझा। इसके बाद कुछ दिनों के लिए श्रीमंदिर को बंद कर दिया गया। हालाँकि, पुजारीगण गोपनीय रूप से पूजा-पाठ और सारे रीति-रिवाजों को निभाते रहे, लेकिन आम जनता के लिए ये मंदिर तब कुछ दिनों तक बंद रहा था।

उस समय की तरह ही अभी भी जगन्नाथ मंदिर आम जनता के लिए तो बंद रहेगा, लेकिन पुजारी प्रतिदिन की तरह पूजा-पाठ जारी रखेंगे व अन्य रीति-रिवाजों को निभाते रहेंगे। इससे पहले मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाया था, जिसमें बताना होता था कि उन्होंने कोरोना वायरस से सम्बंधित चेकअप कराया है और वो संक्रमित नहीं हैं। लेकिन कोरोना को लेकर लगातार बिगड़ती स्थिति के बाद अब इसे बंद कर दिया गया है। ओडिशा सरकार ने भी 5 जिलों व 7 शहरों में ‘कम्प्लीट लॉकडाउन’ की घोषणा की है।

प्यारे मोदी-विरोधी चिलगोजों, PM ने ताली बजाने को कहा तो तुम्हारे अंतःपुर में खुजली क्यों हो रही है?

“देख लो साथियों, जहाँ ट्रम्प और जिनपिंग ने कोरोना से बचने को करोड़ों खर्च कर डाले, वहीं हमारा फेकू मोदी भाषण से काम चला रहा है।”
“चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने क्या-क्या न किया कोरोना भगाने को और ये फासिस्ट मोदी हमसे घंटी बजवा रहा है।”
“सभी बड़े और समझदार देश इलाज बात कर रहे हैं और मूर्ख मोदी “जनता कर्फ्यू” लगवा रहा है।”

ये सब मैं नहीं बल्कि हमारे देश का ‘कामपंथी व चमनजी’ समाज कह रहा है। ये वह समाज है जिससे मोदी कह दें कि विष्ठा मलद्वार से करनी चाहिए तो वह अपने मुख से करने लगेगा। इनका ऑक्सीजन भी मोदी-विरोध है। इनका गड़बड़ाया पाचन तंत्र भी मोदी को गाली देकर दुरुस्त होता है। इस समाज के गाँजा और सेक्स लाइफ का एक्स फैक्टर है मोदी विरोध। घंटी वाली क्या बात कही मोदी ने? उन्होंने कहा था:

“डॉक्टर, नर्स, हॉस्पिटल स्टाफ, सैनिटेशन वर्कर, एयरलाइन्स कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी, पुलिस बल, मीडिया कर्मचारी, ट्रेन, बस/ऑटो ऑपरेटर और होम डिलिवरी से सम्बद्ध लोग- इन सबों ने हमारे लिए अपनी जान जोखिम में डाल कर और निस्वार्थ होकर हमें जो सेवाएँ दी हैं, वो साधारण कार्य नहीं है। ये सभी लोग हमारे और कोरोना के बीच राष्ट्र के रक्षक के रूप में मजबूती से खड़े हैं। राष्ट्र इन सभी का आभारी है। मेरी इच्छा है कि 22 मार्च रविवार को हम ऐसे सभी लोगों का आभार व्यक्त करें। रविवार को ठीक 5 बजे, हम सभी अपने घरों के दरवाजे, बॉलकनी खिड़कियों पर खड़े हों और 5 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन दें। हम अपने हाथों से तालियाँ बजा कर, बर्तन पीट कर या घंटियाँ बजा कर इन सबकी सेवा को सलाम करें।”

अब आप बताइए की ‘चमनजी’ और कामपंथियों की सभी शाखाओं को किसी की सेवा के प्रति आभार जताने से भी आपत्ति है। कोई तुम्हारी जान के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहा है और तुम्हें उन्हें सल्यूट करने पर आपत्ति है? देखो ‘चमनाधिपतियों’ और कॉन्ग्रेस+वामपंथ के गठबंधन से बने ‘कामपंथियों’, अपना स्टैंड क्लियर करो। ऐसे राष्ट्र-रक्षकों को सम्मान मिलने से समस्या क्या है तुम्हें या फिर घंटी, तालियों और बर्तन की आवाज से दिक्कत है? यूँ तो आपलोग बहुत पढ़ते हो (हालाँकि, ‘कामशास्त्र और सूराशास्त्र’ के अलावा क्या पढ़ते हो- मुझे नहीं पता)। लेकिन आओ, इसी बहाने कुछ ज्ञान की बातें बताता जाऊँ।

थोड़ा पल्मिस्ट्री और थोड़ा एक्यूप्रेशर पढ़ोगे तो ज्ञान पाओगे कि ताली बजाने से न केवल शरीर का ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है बल्कि, यह हार्ट, साँस सम्बन्धी समस्याओं को भी कम करता है। इससे डायबेटिक्स को भी आराम मिलता है। जिन्होंने अब तक कोरोना को पढ़ा व समझा होगा, उन्होंने इसमें होने वाली साँस सम्बन्धी समस्या और डायबेटिक्स वालों के खतरे को भी पढ़ा ही होगा। यूँ तो ताली बजने से हुए एक्यूप्रेशर से बैक, नेक और ज्वाइंट पेन भी ठीक होता है, डिप्रेशन भी कम होता और बच्चों का दिमाग दुरुस्त होता है, लेकिन तुम लोगों का क्या? तुम्हारा तो दिमाग अब न बच्चों का रहा और न बचा हुआ।

अब आओ बताता हूँ कि बर्तन पीटने और घंटियाँ बजाने का क्या असर होता है। सबसे बड़ा फायदा तो तुम ‘चिलगोजों’ को ये मिलेगा कि इस ध्वनि से तुम्हारे अंदर की नेगेटिविटी कम होगी। हाँ! बर्तन, करताल और घंटियों में इस्तेमाल होने कुछ धातुओं को पीटने से जो स्पंदन उत्पन्न होता है वो 7-10 सेकंड तक हमारे कानों में लगातार पड़ता है। यह ध्वनि न केवल रिचुअल है, बल्कि हमारे शरीर पर इसके कई सारे सकारात्मक परिणाम भी हैं। जैसे, हमारी एकाग्रता का बढ़ना, हमारे लेफ्ट और राइट ब्रेन को बैलेंस्ड करना, आँखों देखी का ब्रेन द्वारा बेहतर और जल्द समझना, श्रवण शक्ति को समझने में सुधार, हार्ट की ब्लड पम्पिंग में बैलेंस, शरीर के सातों हीलिंग सेंटर को एक्टिवट करना।

हमारी सेंसिंग को बेहतर करना और हमारे मेन्टल डिसऑर्डर को ठीक करना भी इसके सकारात्मक परिणाम हैं। कुल मिलाकर ये ध्वनि न केवल मोदी द्वारा राष्ट्र रक्षकों के सम्मान के लिए है, बल्कि तुम हरे-पिले और ‘चिलगोजों’ के दिलों-दिमाग के लिए भी फायदेमंद है। लेकिन, तुम्हें तो मोदी-विरोध करना है। अब भले चाहे तुम्हारा दिमाग खराब रहे, दिल-गुर्दे फ्यूज हो जाएँ या फिर तुम्हारे अंतःपुर में खुजली होती रहे।

मोदी ने सरकारी व्यवस्थाएँ नहीं दुरुस्त की और भाषण देने आ गया। क्या कर दे मोदी उपलब्ध व्यवस्था और उसको भी न मानने वाले हम महान लोगों के लिए फिर? अपने मुँह में सैनिटाइजर लगा कर स्प्रे करे या फिर आकर जनता के हाथों पर साबुन मले? दुनिया कह रही है की प्रिवेंशन ही इलाज है इसका। कोई सरकार और कोई स्वास्थ्य सुविधा कुछ नहीं कर सकती इसका। फिर किसका इलाज नहीं हुआ अब तक देश में? किसको कहीं मरने को छोड़ दिया मोदी ने? प्यारे ‘चिलगोजों’, इस वायरस चेन को ब्रेक कर ही रोका जा सकता है। ये तो तुम्हें पता है न? तुम्हारे पास इस चेन ब्रेक के लिए 24 घंटे के जनता कर्फ्यू से बेहतर कोई उपाय हो तो कहो। मुँह से ही कहो न क्योंकि अब तक तो शायद मोदी ने ये कहा नहीं है- “मेरे प्यारे देशवासियों, हमें मुँह से बोलना चाहिए” कि तुम लोग कहीं और से बोलने लगो। तो मेरे प्यारों, समस्या के समाधान में हाथ नहीं बँटा सकते हो, ठीक है, चलेगा। मगर कुछ हो रहा उस पर हंगामा कर समस्या तो न बढ़ाओ।

वैज्ञानिक पद्धति से कालविधान कारक: भारतीय मनीषा की सर्वोच्‍च उपलब्धियों में विशेष है ज्योतिष शास्त्र

मानव संस्कृति का आधार वेद है। वेद अर्थात् ज्ञान। ज्ञान से ही मनुष्य की सर्वांगीण उन्नति संभव है और उस ज्ञान का आदिस्रोत ऋग्वेद आदि चार संहिताएँ हैं। ऋग्वेद को सम्पूर्ण विश्व ने बिना किसी संशय के विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ माना है। आदिकाल में ज्ञानार्जन श्रवण मात्र से होता था, अत: ज्ञान को श्रुति कहा गया। धीरे-धीरे श्रुति परंपरा से ज्ञानार्जन तथा पठन-पाठन में शिथिलता आई और परिणामस्वरूप अन्य वेद-व्याख्या ग्रंथों का आविर्भाव हुआ।

सभी ग्रंथों का उद्देश्य वेदार्थ को यथार्थ में समझाना और तदनुकूल आचरण को सिखाना था। उन्हीं ग्रंथों की शृंखला में वेदांग नाम से जाने वाले छ ग्रन्थ हैं– शिक्षा, कल्प, निरुक्त, व्याकरण, छंद और ज्योतिष। इन्‍हें ‘षडंग’ भी कहा जाता है। वेदांग का अर्थ है- वेद का अंग। अंगी वेद है और छ वेदांग शास्त्र उसके अंग हैं, अर्थात् उपकारक हैं। ‘अंग्‍यन्‍ते ज्ञायन्‍ते अमीभिरिति अंङ्गानि’ अर्थात किसी भी वस्‍तु के स्‍वरूप को जिन अवयवों या उपकरणों के माध्‍यम से जाना जाता है, उसे अंग कहते हैं।

वेद को समझाने के सहायक ग्रंथों को ‘पाणिनीय शिक्षा’ में इस प्रकार बताया गया है;
शिक्षा घ्राणं तु वेदस्य, हस्तौ कल्पोऽथ पठ्यते मुखं व्याकरणं स्मृतम्।
निरुक्त श्रौतमुच्यते, छन्द: पादौतु वेदस्य ज्योतिषामयनं चक्षु:॥

अर्थात् ज्योतिष वेद के दो नेत्र हैं, निरुक्त ‘श्रोत्र’ है, शिक्षा ‘नासिका’, व्याकरण ‘मुख’ तथा कल्प ‘हस्त’ और छन्द ‘पाद’ हैं। षड् वेदांगों में से चार वेदांग (व्‍याकरण, निरूक्‍त, शिक्षा और छन्‍द) भाषा-बोध से सम्‍बन्धित हैं। अन्य दो वेदांग कल्प तथा ज्योतिष वेदों का याज्ञिक (व्यवहारिक तथा प्रयोगात्मक) ज्ञान का बोध कराते हैं।

‘कल्पौ वेद विहितानां कर्मणामानुपूर्व्येण कल्पनाशास्त्रम्’ अर्थात् ‘कल्प’ वेद प्रतिपादित कर्मों का प्रायोगिक रूप प्रस्तुत करने वाला शास्त्र है, तथा ज्‍योतिष उन कर्मों के अनुकूल समय आदि बताने वाला शास्त्र है। ज्योतिष पूर्णत: वैज्ञानिक पद्धति से कालविधान कारक तथा भारतीय मनीषा की सर्वोच्‍च उपलब्धियों में से एक विशेष उपलब्धि है। यहाँ एक बात और ध्यान देने योग्य है कि जैसे आज किसी भी नवीन खोज के न्यूनतम दो स्तर अवश्य होते हैं- Theory and practical, यानी, सिद्दांत और प्रयोग। ठीक उसी प्रकार वेदवर्णित विज्ञान के भी दो स्तर हैं- मन्त्र तथा यज्ञ। वेद में वर्णित ज्ञान के प्रयोगात्मक (practical) रूप को ‘यज्ञ’ कहा जाता है।

किसी भी प्रयोग अर्थात, यज्ञ को करने के लिए उचित काल तथा अनुकूल मौसम को जानना बहुत आवश्यक है। वेद में समयानुसार यज्ञ-विधान किया गया है। अत: वेद को समझने के लिए काल, मास, पक्ष, ऋतु तथा मौसम आदि के सम्यक बोधक, सूक्ष्म अध्ययन अथवा दर्शन कराने वाले ‘ज्योतिष शास्त्र’ (ज्योति, अर्थात्‌ प्रकाशपुंज, संबंधी विवेचन) का ज्ञान नितांत आवश्यक तथा उपादेय है-
वेदा हि यज्ञार्थमभिप्रवृत्ताः कालानुपूर्वा विहिताश्च यज्ञाः।
तस्मादिदं कालविधानशास्त्रं यो ज्येतिषं वेद स वेद यज्ञान्॥

ज्योतिष वेदांग का सर्वप्राचीन तथा प्रामाणिक लगधाचार्य-रचित ‘वेदांगज्योतिष’ नामक ग्रन्थ उपलब्ध होता है। इस ग्रन्थ में पंचांग के प्रारम्भिक नियम, त्रैराशिक नियम, युग-गणना, नक्षत्र- गणना, उनकी स्थिति आदि का संक्षिप्त वर्णन किया गया है। इसके बाद नारद, पराशर, वसिष्ठ आदि ॠषियों के ग्रन्थ तथा वाराहमिहिर, आर्यभट, ब्राह्मगुप्त, भास्कराचार्य के ज्योतिष ग्रन्थ प्रख्यात हैं।

चारो वेदों के पृथक्पृथक् ज्योतिषशास्त्र थे। उनमें से सामवेद का ज्योतिषशास्त्र अप्राप्य है, शेष तीन वेदों के ज्योतिषशास्त्र प्राप्त होते हैं-
(1) ऋग्वेद का ज्योतिष शास्त्र – आर्चज्योतिषम्, इसमें 36 पद्य हैं।
(2) यजुर्वेद का ज्योतिष शास्त्र – याजुषज्योतिषम्, इसमें 39 पद्य हैं।
(3) अथर्ववेद का ज्योतिष शास्त्र – आथर्वणज्योतिषम्, इसमें 162 पद्य हैं।

वेदाङ्ग ज्योतिष के उपलब्ध तीनों ही शास्त्रों में खगोलीय पिंडों की स्थिति, उनके गतिशास्त्र तथा उनकी भौतिक रचना आदि के ज्ञान के अतिरिक्त गणितशास्त्र के कई प्रमुख विषय यथा- संख्याओं का उल्लेख, जोड़, घटा, गुणा, भाग, त्रैराशिक नियमादि का उल्लेख भी मिलता है। इसलिए आचार्य लगध प्रणीत ‘वेदांग ज्योतिष’ में ज्योतिषशास्त्र की महत्ता बताते हुए ज्योतिष को गणित कहा है;
यथा शिखा मयूराणां , नागानां मणयो यथा ।
तद् वेदांगशास्त्राणां , गणितं मूर्ध्नि वर्तते ॥

अर्थात, जैसे मोरों में शिखा और नागों में मणि का स्थान सबसे ऊपर है, वैसे ही सभी वेदांग शास्त्रों मे गणित अर्थात ज्योतिष का स्थान सबसे ऊपर है। स्पष्ट है कि उस समय गणितशास्त्र नक्षत्रविद्या के अन्तर्गत ही परिगणित होता था।

ज्योतिष शास्त्रों में आकाशीय पिंडों (ग्रह, नक्षत्र) की स्थिति से त्रुटि से लेकर कल्पकाल तक की कालगणना, आयन, अब्द, ग्रहगतिनिरूपण, ग्रहों का उदयास्त, वक्रमार्ग, सूर्य व चन्द्रमा के ग्रहण प्रारम्भ एवं अस्त, ग्रहण की दिशा, ग्रहयुति, ग्रहों की कक्षस्थिति, देशभेद, देशान्तर, पृथ्वी का भ्रमण, पृथ्वी की दैनिक व वार्षिक गति, ध्रुव प्रदेश, अक्षांश, लम्बांश, गुरुत्वाकर्षण, नक्षत्र संस्थान, भगण, द्युज्या, चापांश, लग्न, पृथ्वी की छाया, पलभा समस्त विषय परिगणित है।

जहाँ प्रयोग-स्थल अर्थात् यज्ञ-वेदी के निर्माण हेतु वेदांग के कल्प शुल्ब सूत्रों से ज्यामिति, त्रिकोणमिति तथा क्षेत्रमिति का ज्ञान होता है, वहीं ज्योतिष वेदाङ्ग ने गणितशास्त्र के सर्वाङ्गीण विकास में भी महती योगदान दिया। ज्योतिषशास्त्र के महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक ग्रन्थ सूर्यसिद्धान्त में ज्या (Sine), उत्क्रमज्या (Versine), कोटिज्या (Cosine) त्रिकोणमितीय फलनों का उल्लेख मिलता है।

500 ई. से 1200 ई. के मध्य गणितशास्त्र का विकास अतुलनीय है। यही वह समय है जब भास्कर (द्वितीय) आर्यभट्ट सदृश विद्वानों ने इस शास्त्र की परम्परा को और भी अधिक सुदृढ़ किया। वैदिक ऋषियों ने इन शास्त्रों के अध्ययन तथा निरीक्षण के उपरान्त सौरमास, चंद्रमास और नक्षत्रमास की गणना की और सभी को मिलाकर पृथ्वी का समय निर्धारण करते हुए संपूर्ण ब्रह्मांड का समय भी निर्धारण कर पूर्णत: वैज्ञानिक कैलेंडर/पंचांग के द्वारा एक सटीक समय मापन पद्धति विकसित की है।

इसमें समय की सबसे छोटी ईकाई ‘अणु’ से लेकर सबसे बड़ी ईकाई ‘दिव्य वर्ष’ तक का मान तथा प्रत्येक काल-मान को एक नाम भी दिया गया है –
*1 परमाणु = काल की सबसे सूक्ष्मतम अवस्था
*2 परमाणु = 1 अणु
*3 अणु = 1 त्रसरेणु
*3 त्रसरेणु = 1 त्रुटि
*10 त्रुटि = 1 प्राण…………………………………….. *360 वर्ष = 1 दिव्य वर्ष अर्थात देवताओं का 1 वर्ष।

* 71 महायुग = 1 मन्वंतर
* 14 मन्वंतर = एक कल्प (अब 7वाँ वैवस्वत मन्वंतर काल चल रहा है)
* एक कल्प = ब्रह्मा का एक दिन = सृष्टि (4 अरब 32 करोड़ वर्ष)
* ब्रह्मा का वर्ष = ब्रह्मा दिन(4 अरब 32 करोड़ वर्ष) + ब्रह्मा रात(4 अरब 32 करोड़ वर्ष) अत: ब्रह्मा का अहोरात्र, यानी 864 करोड़ वर्ष हुआ।

ब्रह्मा की 100 वर्ष की आयु = ब्रह्मांड की आयु- 31 नील 10 अरब 40 अरब वर्ष (31,10,40,00,00,00,000 वर्ष)। काल की इस गणना को जीवंत रखने हेतु एक अद्भुत व्यवस्था भी की गई है। हमारे देश में किसी भी शुभ कार्य से पूर्व संकल्प कराया जाता है। उस संकल्प मंत्र में सृष्टि के प्रारम्भ से आज तक की काल-गणना, वर्तमान युग, अयन, ऋतु, मास आदि काल की प्रत्येक कला तथा देश-स्थिति का वाचन किया जाता है।

यह लेख डॉ. सोनिया द्वारा लिखा गया है। डॉ. सोनिया वर्तमान में विश्वविद्यालय के हिन्दू महाविद्यालय में संस्कृत विभाग में सहायकाचार्या हैं

5 राज्यों को मिले ₹2600 करोड़: निकाय चुनाव नहीं हुए फिर भी मोदी सरकार ने खोला पिटारा, नॉर्थ-ईस्ट पर भी ध्यान

मोदी सरकार ने कहा है कि वो ये व्यवस्था करने में लगी है कि राज्यों को जनता को मूलभूत सुविधाएँ देने में कोई दिक्कत न हो। इसीलिए, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पेंडिंग इंस्टॉलमेंट्स राशि जारी कर दी है। पहले 14वें वित्तीय आयोग द्वारा जारी की जाने वाली इस राशि पर रोक लगा दी गई थी। ये रोक इसलिए लगी थी, क्योंकि इन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न नहीं हुए थे। लेकिन, अब सरकार की चिंता ये है कि चुनाव हो या न हो, कोरोना वायरस से बढ़ते ख़तरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के पास धन की कमी नहीं रहनी चाहिए। इसलिए, सरकार ने तकनीकी चीजों की परवाह न करते हुए ये बड़ी घोषणा की है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि स्थानीय निकायों को स्वच्छता सम्बन्धी सुविधाएँ देने और मूलभूत नागरिक सेवाएँ देने में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े, इसलिए ये निर्णय लिया गया है। आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश की ग्रामीण निकायों को क्रमशः 870 करोड़ और 70 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश की शहरी निकायों को भी 431 करोड़ की धनराशि दी गई है। अरुणाचल के शहरी निकायों के लिए 16 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।

सीतारमण ने बताया कि मेघालय के लिए डेढ़ करोड़ और नागालैंड के लिए 6 करोड़ रुपए की राशि केंद्र सरकार ने जारी की है। सबसे ज्यादा तमिलनाडु के शहरी निकायों के लिए 988 करोड़ रुपए की भारी रकम जारी की गई है। ओडिशा को 186 करोड़ दिए गए हैं। वहाँ भी ये राशि शहरी निकायों के लिए ही है। कुल मिला कर केंद्र सरकार ने विभिन्न पेंडिंग इंस्टॉलमेंट्स के रूप में 2570 करोड़ रुपए जारी किए हैं। ये उनलोगों के लिए भी करारा तमाचा है, जो लगातार दूसरे देशों के प्रधानमंत्रियों के सम्बोधन से पीएम मोदी के राष्ट्र को सम्बोधन की तुलना करते हुए उनके द्वारा कही गई बातों को नज़रअंदाज़ कर उनमें से केवल ‘ताली’ और ‘थाली’ निकाल कर हंगामा कर रहे थे।

विभिन्न राज्यों के निकायों को मिली धनराशि का चार्ट

कुल मिला कर देखें तो 941 करोड़ रुपए ग्रामीण निकायों के लिए जारी किए गए हैं, वहीं 1629 करोड़ रुपए शहरी निकायों को दिए गए। ऐसा नहीं है कि सरकार ने सिर्फ़ घोषणा की है। सीतारमण ने बताया कि उपर्युक्त धनराशि इन राज्यों के खातों में डाल दी गई है। भारत में कोरोना वायरस का मरीजों की संख्या ख़बर लिखे जाने तक 321 तक पहुँच गई है। नॉर्थ-ईस्ट के किसी भी राज्य में अभी तक कोरोना वायरस का एक भी मामले नहीं आया है, फिर भी सरकार द्वारा वित्तीय राशि जारी करना ये बताता है कि वो इस समस्या से निपटने को लेकर गंभीर है।

देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या हुई 322, उड़ीसा की तर्ज पर दिल्ली में भी हो सकता है लॉकडाउन

देश में बढ़ते कोरोना के मामलों के बीच इससे निपटने के केंद्र और राज्य की सरकारों ने भी युद्धस्तर पर हर संभव प्रयास शुरू कर दिए हैं। आज ही ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने बढ़ते ख़तरे को देखते हुए जगन्नाथ मंदिर को आमजनों के लिए बंद कर दिया है। 5 जिलों में टोटल लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी लोगों से अपील की है कि संक्रमण को देखते हुए वे कुछ समय के लिए सुबह की सैर बंद कर दें और अधिकतर समय घर पर ही गुजारें।

सीएम केजरीवाल ने दिल्ली में टोटल लॉकडाउन की संभावना जताते हुए कहा कि फिलहाल दिल्ली में लॉक डाउन नहीं होने जा रहा लेकिन यदि ऐसी जरूरत आन पड़ी तो उनकी सरकार दिल्ली वासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसा कदम भी उठा सकती है। सीएम केजरीवाल ने अपने उस आदेश को भी संशोधित कर दिया है जिसमें 20 या इससे ज्यादा लोगों को एक जगह पर इकट्ठा होने से रोका गया था। केजरीवाल ने आज कहा कि राजधानी में किसी भी जगह पर 5 या इससे ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकते। यदि पाँच या उससे ज्यादा लोग एक साथ कहीं इकट्ठा होते हैं तो उन्हें एक-दूसरे से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाए रखनी चाहिए।

इस बीच सरकारों की तमाम कोशिशों के बाद भी देश में कोरोना के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। देशभर से पिछले 24 घंटे में ही कोरोना के तकरीबन 100 के नए मामले पॉजिटिव पाए गए हैं। इससे देश भर में इस घातक वायरस से संक्रमित मरीजों की सख्या 300 के पार पहुँच गई है। सबसे बुरी स्थिति महाराष्ट्र की है, जहाँ से अभी तक 63 मामले सामने आ चुके हैं। कोरोना से देश के 22 राज्य प्रभावित हैं। कोरोना के मरीजों की संख्या केरल में 52 और दिल्ली में 26 तक पहुँच गई है जो महाराष्ट्र के बाद सर्वाधिक है। इनके अलावा उत्तर प्रदेश में 25, राजस्थान 23 और हरियाणा से 20 कोरोना संक्रमित केस सामने आ चुके हैं। इसके अलावा देशभर में कोरोना से ठीक होने वाले मामले भी 28 तक पहुँच चुके हैं जो एक राहत की खबर है।

ममता ने जनता कर्फ्यू को धता बताया: 22 को बंगाल के स्कूलों में लगेगा बच्चों-शिक्षकों का जमावड़ा, बँटेंगे आलू

पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 3 मामले सामने आ चुके हैं। बावजूद इसके मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे लेकर असंवेदनशीलता दिखा रही हैं। कुछ दिनों पहले उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार दिल्ली दंगों से ध्यान भटकाने के लिए कोरोना वायरस को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही है। अब ममता सरकार ने कुछ ऐसा किया है, जिससे पता चलता है कि इस संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए राज्य सरकार गंभीर नहीं है। रविवार (मार्च 22, 2020) को पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों में चावल और आलू बाँटने का कार्यक्रम रखा है। इसका अर्थ है कि उस दिन भारी भीड़ जुटेगी।

लगभग सभी राज्यों में स्कूल-कॉलेजों को 31 मार्च या उससे आगे तक के लिए बंद कर दिया गया है। कई जगह परीक्षाएँ ठप्प हो गईं या फिर उनकी तारीख आगे बढ़ा दी गई और कई राज्यों में बिना परीक्षा के लिए आठवीं कक्षा से नीचे के बच्चों को अगले वर्ग में प्रवेश दे दिया गया। बावजूद इसके पश्चिम बंगाल सरकार का ये फ़ैसला लोगों को खटक रहा है। प्राथमिक विद्यालयों के सभी शिक्षकों को रविवार को स्कूल में उपस्थित रहने का निर्देश जारी किया गया है।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि ये सब ‘जनता कर्फ्यू’ को धता बताने के लिए किया गया है। ये शक और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि उनका दावा है कि पहले ये कार्यक्रम 23-24 मार्च को होने वाला था लेकिन जानबूझ कर इसे 22 मार्च को रीशेड्यूल किया गया है। अन्य नेताओं ने भी तृणमूल सरकार पर ‘बदले की राजनीति’ के आरोप लगाए हैं। इससे ‘सोशल डिस्टन्सिंग’ की सलाह को भी तगड़ा झटका लगा है।

बता दें कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘जनता कर्फ्यू’ की घोषणा की थी और पूरे देश की जनता से अपील की थी कि उस दिन सुबह 7 बजे से लेकर रात 9 बजे तक वो बाहर न निकलें। साथ ही शाम को थाली, घंटी अथवा ताली बना कर डॉक्टरों, नर्सों, कर्मचारियों व अन्य सेवारत लोगों को धन्यवाद देने की भी अपील की गई थी। पीएम मोदी के कई आलोचकों ने भी इस घोषणा व सलाह की प्रशंसा की थी। लेकिन, रविवार को सुबह 10 बजे पश्चिम बंगाल में बच्चों व शिक्षकों का स्कूल में जमावड़ा लगवाने का मतलब है कि उन सभी की जान संकट में डालना।

22 मार्च को मस्जिद में जुटें और करें इबादत: जनता कर्फ्यू पर समुदाय विशेष को भड़का रहा उलेमा काउंसिल

चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना का संक्रमण अब तक करीब 11 हजार जानें ले चुका है। देश में भी अब तक पॉंच मौतें हो चुकी है। इसका प्रसार रोकने के लिए लोगों से बड़ी संख्या में एक जगह जमा नहीं होने और आवश्यक नहीं होने पर घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च यानी रविवार को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है। लेकिन, मजहबी लोगों को इससे कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा।

ऑल इंडिया सूफी उलेमा काउंसिल ने रविवार को लोगों से मस्जिद में जमा होने की अपील की है। कहा है कि मस्जिदों में इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से अपने बुरे कर्मों के लिए अल्लाह से माफ़ी मॉंगें। काउंसिल के प्रेसिडेंट हकीम सूफी सैय्यद मोहम्मद खैरुद्दीन कादरी ने कहा है कि घर में बैठ फिजूल के कामों में समय नष्ट करने से कहीं बेहतर है कि हम मस्जिद में पहुँच इस दुनिया को बनाने वाले के सामने अपने किए पर पछतावा जाहिर करें, उससे माफ़ी माँगें।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कादरी ने मस्जिदों की प्रबंधन कमेटियों से अपील की कि वे विशेष प्रार्थनाओं और कुरान पढ़ने के लिए इंतजाम करें। इसके अलावा उसने मस्जिदों में सामूहिक ‘इतिकाफ’ करने की भी पैरवी की। इस्लाम में ‘इतिकाफ’ का मतलब है व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक तौर पर मस्जिदों में अल्लाह की इबादत करने में सारा समय समर्पित करना।

इस तरह के अजीबोगरीब बयान सामने आने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस्लामिक धर्मगुरु कोरोना को चीन में जारी उइगर मुस्लिमों के उत्पीड़न से भी जोड़ चुके हैं। इलियास शराफुद्दीन नाम के एक धर्मगुरु ने कहा था कि उइगर मुस्लिमों से क्रूरता करने के कारण अल्लाह ने चीन पर इस वायरस का कहर बरपाया है और उन्हें दंडित किया है। एक वायरल ऑडियो में धर्मगुरु को कहते सुना गया था कि याद करो कैसे उन्होंने मुस्लिमों को धमकी दी थी और दो करोड़ मुस्लिमों की जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की। मुस्लिमों को शराब पीने के लिए मजबूर किया गया, उनकी मस्जिदों को तोड़ दिया गया और उनकी पवित्र पुस्तकों को जला दिया गया। उन्होंने कहा था कि चीन ने सोचा कि कोई भी उन्हें चुनौती नहीं दे सकता, लेकिन अल्लाह सबसे शक्तिशाली है, अल्लाह ने चीन को सजा दी।

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग पर जारी अपीलों के बाद भी ‘मजहब’ सामान्य समझ पर हावी है। इसका उदाहरण कल उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में देखने को मिला था। कोरोना को देखते हुए उम्मीद थी कि जुमे को मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज को मस्जिद में न पढ़कर अपने-अपने घरों में पढ़ेंगे, जिससे सैंकड़ों लोगों के एक जगह एकत्रित होने से बचा जा सकेगा। लेकिन अफ़सोस कि इस संदर्भ में की गईं तमाम अपीलों के बावजूद भी गोरखपुर में जुमे की नमाज के लिए कई जगह सैंकड़ों की भीड़ देखी गई। आम दिनों की तरह ही घंटाघर और कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को दोपहर से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी।

वहीं शाहीन बाग़ में भी 95 दिनों से जारी धरना पर कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर जारी किसी अपील, नियम-कानून का कोई प्रभाव पड़ता दिखाई नहीं देता। महिलाएँ अब वहाँ जमीन पर बैठने की बजाए लकड़ी की चौकियों पर बैठी हुई हैं।

‘शराब की होम डिलीवरी करवाएँ, ठेके पर भीड़ के कारण फैल सकता है कोरोना’ – हाईकोर्ट में याचिका

जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना से बचने के लिए तरकीबें खोजने में हैरान-परेशान घूम रही है, वहीं कुछ को दारु की ऑनलाइन बिक्री शुरू कराने की पड़ी है। ऐसा ही एक अजीबोगरीब वाक़या शुक्रवार को केरल से सामने आया है। यहाँ शराब की ऑनलाइन बिक्री शुरू करवाने के लिए जी ज्योतिष नामक व्यक्ति केरल हाईकोर्ट पहुँच गया। मीडिया में आई खबरों के अनुसार याचिका लगाने वाले व्यक्ति ने अपनी दलील में कहा कि कोरोना के कारण शराब की दुकानों में लगने वाली भीड़ से बचने के लिए शराब की होम डिलीवरी की जानी चाहिए। इससे पीने वाले भीड़ के संपर्क में आने से बच सकेंगे।

केरल हाईकोर्ट ने इस बेतुकी याचिका को खारिज करते हुए, इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता ज्योतिष पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। यह राशि याचिकाकर्ता को बतौर जुर्माना मुख्यमंत्री राहत कोष में दो हफ्ते में जमा करानी होगी। कोर्ट ने कहा कि ज्योतिष ने अपने निजी हित के लिए कोर्ट में याचिका लगाई, जिसकी निंदा की जानी चाहिए।

अलूवा के रहने वाले ज्योतिष ने अपनी याचिका में कहा था कि ऐसा ही खतरा दूसरे लोगों को भी है। इस कारण हाईकोर्ट राज्य के आबकारी विभाग को आदेश दे कि शराब की ऑनलाइन बिक्री शुरू करवाई जाए।

याद रहे कि देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अब तक पूरे देश में इससे 5 मौतें हो चुकी हैं और 259 मामले सामने आ चुके हैं।उत्तर प्रदेश में कोरोना के 23 मरीज मिल चुके हैं। जिसके लखनऊ, कानपुर और नॉएडा को सैनिटाइज करने की भी घोषणा हो चुकी है। इसी की रोकथाम के लिए भारत सरकार ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

वहीं चीन के बाद कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित इटली इस बीमारी से बुरी तरह बर्बाद होने की दहलीज़ पर है। वहाँ का हाल यह है कि लाशों का अंतिम संस्‍कार भी नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को इटली में एक दिन के अंदर कोरोना की वजह से 627 लोगों की जान चली गई, जबकि कोरोना वायरस के संक्रमण के 5986 नए मामले भी सामने आ गए। इसी के साथ इटली में मरने वालों की संख्या 4032 हो चुकी है और कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी बढ़कर 47021 हो गई है।

BJP के हुए कॉन्ग्रेस के 21 पूर्व MLA, इनकी बगावत से ही MP में गिरी थी कमलनाथ सरकार

कमलनाथ के मुख्‍यमंत्री पद से इस्‍तीफे के बाद बीजेपी मध्‍य प्रदेश में सरकार बनाने की कवायद में जुट गई है। इसी कड़ी में शनिवार (मार्च 20, 2020) को कॉन्ग्रेस के पूर्व 21 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। मध्य प्रदेश में सियासी संकट शुरू होने के बाद बेंगलुरु में डेरा डालने वाले इन पूर्व विधायकों ने दिल्ली पहुॅंच बीजेपी अध्यक्ष जेपी के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और पार्टी की सदस्यता ली। हाल ही में कॉन्ग्रेस छोड़ बीजेपी में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद ट्विटर पर इस बारे में जानकारी दी है।

22 विधायकों की बगावत ने ही मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार की विदाई की पटकथा लिखी थी। ये सभी विधायक बेंगलुरु में ठहरे हुए थे। शुरुआत में विधानसभा स्पीकर इनका इस्तीफा स्वीकार करने से टालमटोल कर रहे थे। लेकिन, गुरुवार को फ्लोर टेस्ट के सुप्रीम कोर्ट के बाद इनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था। अगले दिन शुक्रवार को कमलनाथ ने भी इस्तीफा दे दिया था। कॉन्ग्रेस से बगावत करने वाले इन 22 पूर्व विधायकों में शामिल रहे बिसाहूलाल साहू पहले ही भाजपा की सदस्यता ले चुके हैं। ये सभी सिंधिया के समर्थक हैं। कॉन्ग्रेस में सिंधिया की उपेक्षा से नाराज होकर इन्होंने बगावत की थी।

भाजपा अध्यक्ष नड्डा से मुलाकात से पहले इन नेताओं से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुलाकात की। भाजपा अध्यक्ष के आवास पर भी सिंधिया मौजूद था। उनके अलावा भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और धर्मेंद्र प्रधान भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि इन पूर्व विधायकों में से 16 ग्वालियर-चंबल से हैं और इस क्षेत्र में सिंधिया का खासा प्रभाव माना जाता है। कोरोना वायरस के कारण विधायकों की बैठक अब 23 मार्च को प्रस्तावित है। इस मामले में दिल्ली से पर्यवेक्षक के रूप में धर्मेंद्र प्रधान और प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भोपाल जा सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं 25 मार्च को मध्य प्रदेश में नई सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है।