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‘हम देखेंगे’ की जगह ‘गायंत्री मंत्र’ सुनकर बिलबिला उठे वामपंथी, NDTV ने तो डिलीट ही कर दिया वीडियो, लोगों ने लगाई लताड़

कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण इन दिनों अधिकतर सड़कें खाली हैं। कई लोगों को विशेष रूप से घर में रहने की सलाह दी गई है तो कई अपनी इच्छा से घर में बंद हैं। ऐसे में इस अकेलेपन को दूर करने के लिए लोग तरह-तरह के तरीकों से एक दूसरे को इस लड़ाई को लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

अभी कुछ दिन पहले हमने देखा कि इटली, जहाँ कोरोना का असर व्यापक स्तर पर है, वहाँ लोगों ने बॉलकनी में आकर गाना गाया। अब इसी की तर्ज पर गुरुग्राम में भी ऐसा मामला आया। जहाँ कोरोंटाइन हुए लोगों का उत्साह बढ़ाने के लिए कुछ औरतें अपने घर से निकलकर आईं और इस मुश्किल घड़ी में अपने आसपास मौजूद ऐसे लोगों को सकारात्मक ऊर्जा देने के लिए गायत्री मंत्र और हम होंगे कामयाब गाना गाया।

इस वीडियो को एनडीटीवी की पत्रकार सुक्रिती द्विवेदी ने अपने ट्विटर पर शेयर किया। उन्होंने ‘इटली जैसा दृश्य गुड़गाँव’ में बताते हुए इसे ट्वीट किया। उन्होंने बताया कि गुड़गाँव के सेक्टर 28 में औरतें घरों से निकलकर बॉलकनी में आईं और उन्होंने गायत्री मंत्र और हम होंगे कामयाब गाना गाया।

अब देखते ही देखते ये विडियो वायरल हो गई। सोशल मीडिया यूजर्स इसकी सराहना करने लगे। मगर इस बीच कुछ वामपंथी ये सब देखकर बिलबिला उठे। उन्होंने फौरन इसे धर्म से जोड़ दिया और वीडियो में नजर आ रही महिलाओं को बेवकूफ तक करार दे दिया।

लिबरल-सेकुलरों ने तुरंत कहना शुरू किया कि इटली में लॉकडाउन था, गुरुग्राम में नहीं हैं। इसलिए लाउड स्पीकर लगाकर हिंदू मंत्रो का उच्चारण केवल एक स्टंट हैं। जबकि कुछ ने ये शिकायत की कि ये लोग सिर्फ़ हिंदू मंत्रों को लाउड स्पीकर पर बोलकर लोगों को तंग कर रहे हैं।

एक यूजर ने औरतों की उम्र को लेकर उनका मजाक उड़ाने की कोशिश की और लिखा कि 4-5 आंटी पूरी सोसायटी को परेशान कर रही हैं, ताकि सोशल मीडिया पर शो-ऑफ किया जा सके।

यहाँ बता दें, जिस समय लिबरल अपनी खुंदस निकालते हुए इटली और गुरुग्राम में फर्क़ बता रहे हैं। वहाँ अब तक कोरोना के 17 पॉजिटिव केस आ चुके हैं। जिसके कारण सरकार ने स्कूल, कॉलेज और आँगनबाड़ी सबको बंद करने का निर्देश दिया है ताकि इस वायरस को फैलने से रोका जा सके। लेकिन शायद लिबरलों और कट्टरपंथियों को इससे कोई लेना देना नहीं हैं। उन्हें सिर्फ़ अपनी घृणा प्रदर्शित करनी हैं।

इस वीडियो को देखकर एक इस्लामिक ट्रोल मंत्र उच्चारण करने वाली महिलाओं पर सेक्सिस्ट कमेंट करती हैं और इस पूरे प्रयास को प्रायोजित इवेंट बताती हैं। एक अन्य ट्रोल कहती हैं कि इटली में जो लोग बॉलकनी में आए उन्होंने दिल से प्रोत्साहित करने वाला गाना गाया। उन्होंने लाउडस्पीकर, माइक्रोफोन, राष्ट्रीय ध्वज आदि के साथ धार्मिक मंत्र नहीं बोले।

कुछ कट्टरपंथियों ने तो ये देखकर यहाँ तक हैरानी जताते हुए पूछा कि ये महिलाएँ जो आज हम होंगे कामयाब गा रही हैं, उनमें से कितनी महिलाएँ कभी शाहीन बाग गईं और ये गाना गाकर आई।

गौरतलब है कि ऐसे समय में जब पूरा विश्व इस घातक वायरस से लड़ने के लिए प्रयासरत है और अपने आसपास के लोगों को बचाने के लिए अलग-अलग कोशिशें कर रहा है। उस समय जाहिर है ये प्रयास भी सराहना के योग्य हैं। लेकिन लिबरलों में होती हलचल को देखकर समझा जा सकता है कि उनके लिए मानवता के मायने सिर्फ तभी तक हैं, जब तक उनसे हिंदू धर्म को न जोड़ा जाए। खुद विचार करिए कि जो लोग लाउड स्पीकर से आते मजहबी आवाजों को जस्टिफाई करने पर तत्पर रहते हैं। उनके लिए ये स्टंट हैं। जिनके लिए शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रही औरते सशक्त महिलाएँ हैं। वहीं गायत्री मंत्र गाती ये औरतें आँटी हैं। जिनके लिए ‘हम देंखेगे’ जैसे गजलें अजेंडामुक्त हैं। वहीं हिंदू मंत्रों का उच्चारण स्टेज ईवेंट हैं।

यहाँ सबसे शर्म की बात, जो इस वीडियो के वायरल होने के बाद हुई वो ये कि एनडीटीवी ने पहले जहाँ इस विडियो को अपने ट्विटर से ट्वीट किया और इसे इटली जैसे उदहारण बताया। वहीं अपने निर्धारित दर्शकों का विरोध देखर फौरन इसे डिलीट कर दिया कि कही उनके सेकुलर मानकों को ठेस न पहुँचे।

हालाँकि, एनडीटीवी की इस हरकत के लिए कुछ यूजर्स ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई और कहा कि ये वीडियो क्यों डिलीट की? शायद तुम चाहते थे कि यहाँ पर गायत्री मंत्र का जगह हम देखेंगें गाया जाए। लेकिन गायत्री मंत्र सुनकर तुमने इसे डिलीट कर दिया क्योंकि ये तुम्हारे फॉलोवर्स के मन पर चोट करता।

100 तलवारों सहित शोएब, इम्तियाज, कादर, याकूब गिरफ्तार: पुलिस को दिखाया फर्जी रसीद, 9 दिन की हिरासत

गुजरात के राजकोट के जूनागढ़ जिले में पुलिस ने 4 युवकों को 100 तलवारों सहित गिरफ्तार किया। इनकी गिरफ्तारी मंगरोल शहर में शनिवार की रात हुई। आरोपितों के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने हथियारों के एक डीलर को भी गिरफ्तार किया। बाद में पाँचों को कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद इन्हें 9 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। अब आगे की जाँच जारी है।

पुलिस के मुताबिक शनिवार को 6 बजे केशोड़-मंगरोल हाइवे पर उन्होंने चारों युवकों को आते देखा। इनके हाथ में एक थैला था। जिसे देखकर मंगरोल पुलिस को शक हुआ और उन्होंने फिरदौस नर्सरी के नजदीक मंगरोल-केसोड़ चोकड़ी के पास उन्हें रोका। उनके थैले की छानबीन हुई, जिसमें से 100 से ज्यादा तलवारें निकलीं।

जब पुलिस ने इसे देखकर उनसे पूछताछ की तो उन्होंने सच बताने की बजाय पुलिस को फर्जी रसीद दिखाई। लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने खुलासा किया कि तलवारें कच्छ के अंजार से इरफान द्वारा भेजी गई थीं और मंगरोल में हसन वाजा तक पहुँचाई जानी थीं।

इसके बाद पुलिस ने सारी तलवारों को जब्त कर लिया और 4 युवकों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान शोएब छपास (20) इम्तियाज बुमाडिया (18), कादर गिरनारी (35) और याकूब बुमाडिया (35) के रूप में हुई। चारों मंगरोल नगर के निवासी हैं।

इनके पास से पुलिस ने 100 तलवारों के अलावा 2 बाइक और 3 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जिनकी कीमत का अनुमान 1,23,000 रुपए लगाया गया है। पुलिस ने इस सबंध में हसन वाजा को भी गिरफ्तार किया है, जिसका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था। यहाँ बता दें कि गिरफ्तार हुए ये पाँचों आरोपित कारपेंट्री और मजदूरी का कार्य करते थे।

पोप फ्रांसिस ने ‘गॉड’ से की बात: कोरोना वायरस से इटली में फैली महामारी को ‘अपने हाथों से’ रोकने के लिए कहा

चीन के बुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस का कहर इन दिनों चीन के बाद सबसे अधिक इटली में फैला हुआ है। इस पर पोप फ्रांसिस ने कहा है कि ऐसे समय में लोगों को परिवार के साथ जुड़ने के लिए संगरोध में समय का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मैंने गॉड से कोरोनो वायरस को अपने हाथ से रोकने के लिए कहा था। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वायरस क्या है, इसके लक्षण क्या हैं इसे लेकर आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। वहीं कोरोना वायरस के प्रकोप से जूझ रहे इटली में मंगलवार तक वायरस के 27,980 मरीज सामने आ चुके हैं और इसकी चपेट में आने से अब तक अकेले इटली में 2,503 मौतें हो चुकी हैं।

वहीं पोप फ्रांसिस पिछले कुछ दिनों से अपना समय वेटिकन में बिता रहे हैं, हालांकि उन्होंने इटालियन राजधानी में दो चर्चों में बीमारी के पीड़ितों के लिए प्रार्थना करने के लिए रविवार दोपहर को देश के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को खारिज कर दिया। पोप फ्रांसिस बुधवार को वेटिकन में एपोस्टोलिक महल की एक लाइब्रेरी में आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसके बाद डेली मेल की खबर के मुताबिक पोप ने बुधवार को दैनिक इतालवी प्रकाशन ला रिपब्लिका से बात करते हुए पोप फ्रांसिस ने कहा कि उन्होंने गॉड से ‘अपने हाथों से’ इटली में महामारी को रोकने के लिए कहा है।

दरअसल, इटालियन सरकार ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए घोषणा की थी कि सार्वजनिक रूप से रहते हुए एक मीटर की दूरी बनाए रखें। इससे पहले कोरोना वायरस संकट में अपनों को खो चुके लोगों को संबोधित करते हुए, पोप ने कहा था कि ‘मैं हर किसी से उन लोगों के करीब रहने के लिए कहता हूँ जिन्होंने इस आपदा में अपनों को खो दिया है। हर संभव किसी भी तरीके से उनके करीब हो।

आपको बता दें कि पोप खुद पिछले महीने से ठंड से पीड़ित हैं। इसके बाद भी उन्होंने इतालवी सरकार द्वारा घर के अंदर रहने की सलाह को टाला और रविवार को रोम की सुनसान गलियों से वायरस के अंत की प्रार्थना करने के लिए चर्च की ओर चले गए। वेटिकन के प्रवक्ता माटेओ ब्रूनी ने कहा कि अपनी सुरक्षा बढ़ाने पर भड़के 83 वर्षीय पोप, जोकि खुद ठंड से पीड़ित हैं उन्होंने सड़कों पर चलने का फैसला किया ‘जैसे कि वह एक तीर्थयात्रा पर निकले हों।

बीवी से झूठ बोलकर गर्लफ्रेंड के साथ गया था इटली, कोरोना वायरस ने धर लिया: नहीं बता रहा GF का नाम

आपने गैब्रियल ग्रासिया मार्खेस की मशहूर पुस्तक ‘लव इन दी टाइम्स ऑफ़ कोलेरा’ का नाम तो सुना ही होगा! इसी तर्ज पर अब ‘लव इन दी टाइम्स ऑफ़ कोरोना’ जैसी ख़बरें भी सामने आने लगी हैं।

कोरोना वायरस ने चीन के बाद सबसे ज्यादा तबाही इटली में मचाई है। ऐसे में एक शख्स ने अपनी पत्नी से बिजनेस ट्रिप का झूठ बोलकर अपनी प्रेमिका के साथ कुछ समय बिताने के लिए इटली को चुना, जहाँ उसे कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया।

दरअसल, ब्रिटेन में एक शख्स अपनी पत्नी को झूठ के अंधेरे में रखकर अन्य महिला के साथ इश्क फरमा रहा था। बिजनेस ट्रिप तो बहाना था, असल में उन्हें प्रेमिका के साथ इटली में वक्त बिताना था। लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी इस सीक्रेट ट्रिप को ‘कोरना वायरस’ की नजर लग गई और ट्रिप के दौरान कोरोना वायरस की चपेट में आ गए।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 30 साल के इस शख्स को कोरोना के कारण अलग कमरे में रखा गया है। लेकिन उसकी पत्नी अब भी इस बात से अंजान है कि आखिर उनके पति को इस वायरस ने कैसे पकड़ा। कोरोना के लक्षण दिखने पर शख्स ने इस बात की हामी भरी कि वह इटली की सीक्रेट ट्रिप के दौरान इस वायरस की चपेट में आया। इसके साथ ही शख्स ने अस्पताल के डॉक्टर्स को बताया कि उसका एक महिला के साथ अफेयर चल रहा है।

हालाँकि, जब उसकी पहचान पूछी गई तो उसने प्रेमिका (गर्लफ्रेंड) का नाम बताने से इंकार कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि शख्स ने यह माना है कि उसकी पत्नी यह नहीं जानती है कि आखिर उन्हें यह संक्रमण कैसे हुआ। अभी तक तो इस शख्स की हालत स्थिर बनी हुई है। जबकि उसकी पत्नी ने खुद को अपने नॉर्थ इंग्लैंड के घर में सेल्फ आइसोलेशन में रखा हुआ है।

ज्ञात हो कि दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर है। चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ यह वायरस 8 हजार लोगों की जान ले चुका है। जबकि 2 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं। बुधवार को एक रिपोर्ट में बताया गया कि इटली में COVID-19 के चलते मौत के 500 नए मामले समने आए हैं। 12 मार्च से यह पूरा देश लॉकडाउन है।

नूर-ए-इलाही में सौरभ के प्राइवेट पार्ट के पास गोली मारकर भागे इमरान और उसका दोस्त, ऑफ ड्यूटी ASI की बहादुरी से धरे गए

उत्तरपूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाके नूर-ए-इलाही, यमुना विहार में बुधवार (मार्च 18, 2020) की रात लूटपाट की वारदात सामने आई। यहाँ विशेष समुदाय के दो युवकों ने बन्दूक की नोंक पर एक हिंदू युवक से उसका सामान छीना और उसे गोली मारी। लेकिन, ऑफ ड्यूटी एएसआई रविन्द्र की बहादुरी से दोनों को धड़ पकड़ा गया। दोनों आरोपितों की पहचान इमरान उर्फ मॉडल और इमरान के रूप में हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीसीपी ऑफिस में कार्यरत एएसआई रविंद्र बुधवार की रात करीब 7 बजे अपने भतीजे से मिलने गए थे। मगर वापसी के दौरान उन्होंने तीन लोगों के बीच आपसी झड़प होती देखी। इनमें से एक ने इसी बीच 2 राउंड गोली फायर कर दी और फिर भागना शुरू कर दिया।

मगर, पुलिस अधिकारी ने पीड़ित की हालत देखकर उन चोरों का पीछा किया और उनमें से एक को पकड़ा लिया। इसके बाद पीड़ित ने भी चोर के साथी का पीछा किया और उसे भी पकड़ लिया गया। इस वारदात में पीड़ित के प्राइवेट पार्ट के पास गोली लगी।

एएसआई रविंद्र बताते हैं कि जब वे नूर-ए-इलाही करीब 8:25 pm पर पहुँचे। तो उन्होंने तीनों को हाथापाई करते देखा। पीड़ित मदद की गुहार के लिए चिल्ला रहा था। जब उन्होंने उससे पूछा तो उसने बताया कि दोनों लोगों ने उससे उसका मोबाइल छीन लिया है। बस फिर क्या… ऑफ ड्यूटी एएसआई ने इतना सुनते ही वहाँ अपनी मोटरसाइकल छोड़ी और पिस्टल वाले युवक के पीछे भागे। आरोपित एक रेस्ट्रां की ओर भाग रहा था। लेकिन पुलिस अधिकारी ने उसे पकड़ लिया और उससे उसकी पिस्टल छीनी।

इसके बाद वहाँ भीड़ इकट्ठा हुई और आरोपित को पीटा गया। पीड़ित सौरभ गुप्ता ने भी इस बीच दूसरे चोर को पकड़ लिया और बाद में दोनों को भजनपुरा थाने सौंपा गया। बाद में सौरभ गुप्ता को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल के लिए भर्ती कराया गया।

CAA के खिलाफ धरना में जहाँ पहुँचते थे नेता-एक्टिविस्ट, बाइक से आकर 5 लोगों ने बरसाई अंधाधुंध गोलियाँ

बिहार के गया जिले में पिछले कई माह से सीएए के खिलाफ चल रहे अनिश्चितकालीन धरने पर बीते दिन कुछ बाईक सवार आरोपितों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इससे धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों में भगदड़ मच गई। हालाँकि किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं मौजूद लोगों ने तीनों आरोपितों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है, जिनसे पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। दरअसल गया जिले के चाकंद के बारा समेत कटारी हिल के शांति बाग, शेरघाटी एवं इमामगंज समेत कई स्थलों पर सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ अनिश्चतकालीन धरना चल रहा है।

वहीं गया-पटना हाइवे के किनारे बारा गाँव के पास संविधान बचाओ-देश बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सीएए के खिलाफ चल रहे धरने के पास बुधवार देर शाम को पाँच बाईक सवार आरोपितों ने अचानक से हवाई फायरिंग कर दी। गोली आवाज सुनते ही धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। वहीं लोगों ने तत्काल शोर मचाकर तीन आरोपितों को हथियार सहित दबोच लिया। जबकि दो आरोपित किसी तरह मौका पाकर फरार हो गए। इसके बाद लोगों ने तीनों आरोपितों को जमकर पीटा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया।

धरने पर फायरिंग की सूचना पर पहुँचे पुलिस के आला अधिकारियों ने मौजूद लोगों से मामले में पूछताछ की। सिटी एसपी राकेश कुमार ने बताया कि घटनास्थल से एक देसी कट्टा, एक खोखा और कई कारतूस बरामद किया गया है और पूरे मामले की छानबीन की जा रही है। इसके बाद से ही पुलिस हिरासत में लिए तीनों आरोपितों से मामले को लेकर पूछताछ कर रही है। आपको बता दें कि धरना स्थल पर फायरिंग करने वाले आरोपितों की पहचान चतरा के प्रतापपुर थाना के लिपटा गाँव के कमलेश यादव, खिजरसराय के चिरैली गाँव के हरिवंश वर्मा और परैया थाना के फुरहुरिया गाँव के वीरू कुमार के रूप में हुई है।

गौरतलब है कि गया जिले में कई स्थानों पर सीएए के खिलाफ चल रहे धरने में प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में अपनी माँगों को लेकर शामिल हो रहे हैं। इतना ही नहीं, इन धरनों में राजद, कॉन्ग्रेस, वामपंथी दलों एवं अन्य पार्टियों के कई नामचीन नेता, विधायक, सांसद एवं अन्य एक्टिविस्ट शामिल होकर अपना समर्थन दे चुके हैं।

पूर्व CJI रंजन गोगोई बन गए राज्य सभा सांसद, शपथ ग्रहण के दौरान विपक्ष ने मचाया हंगामा

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने विपक्षी सदस्यों के शोर शराबे के बीच गुरुवार (मार्च 19, 2020) को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण ले ली है। राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने पर गोगोई जैसे ही शपथ लेने निर्धारित स्थान पर पहुँचे, वहाँ विपक्षी सदस्यों ने उन्हें देखकर हल्ला करना शुरू कर दिया और शेम-शेम के नारे लगाए। इस दौरान विपक्ष ने सदन से वॉक आउट भी किया। लेकिन अंतत: भारी विरोध के बीच रंजन गोगोई ने सांसद की शपथ ले ही ली।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सरकार की अनुशंसा पर सोमवार को पूर्व सीजेआई गोगोई को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। जिसके बाद विपक्ष उन पर काफी हमलावर रहा और आज उनके शपथ के दौरान जोर-जोर से हल्ला मचाकर सदन से वॉक आउट कर गया।

गोगोई के शपथ लेने और विपक्ष के वॉक आउट पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राज्यसभा में पूर्व सीजेआई सहित विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों के आने की एक महान परंपरा है। गोगोई जिन्होंने आज शपथ ली है वह निश्चित रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे। विपक्ष का वॉक आउट करना घोर अनुचित था।

वहीं, राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने भी विपक्ष के इस रवैये को देखकर कहा कि ऐसा व्यवहार सदस्यों की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

बता दें कि रंजन गोगोई देश के 46वें चीफ जस्टिस रहे हैं। उन्होंने सीजेआई का पद 3 अक्टूबर 2018 से 17 नंवबर 2019 तक संभाला। इस बीच उन्होंने राम जन्मभूमि जैसे कई ऐतिहासिक फैसले लिए। मौजूद जानकारी के अनुसार पूर्व CJI का जन्म 18 नवंबर, 1954 को असम में हुआ। उन्होंने डिब्रूगढ़ के डॉन बोस्को स्कूल और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में पढ़ाई की। उनके पिता केशव चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री थे। जस्टिस रंजन गोगोई ने 1978 में वकालत के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। 28 फरवरी, 2001 को रंजन गोगोई को गुवाहाटी हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद जस्टिस गोगोई 23 अप्रैल, 2012 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने थे और बाद में मुख्य न्यायाधीश भी बन कई मामलों की सुनवाई को लेकर चर्चा में रहे।

नहीं देखा जाएगा कौन हिंदू, कौन मुस्लिम… खाड़ी देशों से आने वाले सभी 26000 भारतीय को मेडिकल सुविधा, मुंबई में तैयारी पूरी

देश के साथ-साथ विदेशों में कोरोना के लगातार बढ़ते प्रभाव से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए केन्द्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। खाड़ी देशों से 26000 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जाएगा। इसके लिए मुंबई में बीएमसी ने पोवई में एक नवनिर्मित ट्रेनिंग सेंटर को ही क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील कर दिया है। इस फैसले के बाद से ही मुंबई नगरपालिका उन 26 हजार लोगों के ठहरने का इंतजाम करने में जुटी है, जो आज से 31 मार्च तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत और ओमान जैसे खाड़ी देशों से वतन वापस आने वाले हैं।

बीएमसी के मुताबिक इन देशों से हर दिन 23 फ्लाइट मुंबई पहुँचती है। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार, यूएई, कुवैत, कतर और ओमान से आने वाले सभी यात्रियों को हर हाल में 14 दिनों तक क्वारंटाइन सेंटर में रहना होगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुबई से आने वाले महाराष्ट्र के 15 लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इसलिए बीएमसी ने अपने इंजीनियरों के लिए पोवई में एक नवनिर्मित ट्रेनिंग सेंटर को क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील कर दिया है। इसके अलावा, मरोल में सेवन हिल्स हॉस्पिटल में आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था है।

योजना के मुताबिक खाड़ी देशों से ज्यादातर भारतीय यहाँ इस महीने का आखिर तक पहुँचेंगे। अधिकारियों के अनुसार खाड़ी देशों से आने वाले लोगों को कई श्रेणियों में बाँट दिया जाएगा। जो लोग स्वस्थ होंगे, उनको छूट दी जाएगी और जो लोग संदेह की श्रेणी में होंगे उनके ऊपर निगरानी रखी जाएगी। हालाँकि नेगेटिव पाए जाने वाले लोगों को सार्वजनिक परिवहन का सहारा नहीं लेने दिया जाएगा। वहीं मुंबई पहुँचने वाले हर व्यक्ति के हाथ पर मुहर लगा दिया जाएगा और उन्हें देश के दूसरे किसी हिस्से के लिए फ्लाइट लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जो लोग मुंबई से दूर-दराज के इलाके के होंगे, उन्हें पोवई या सेवन हिल्स हॉस्पिटल स्थित क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाएगा। जिनमें कोविड-19 के लक्षण दिखेंगे, उनकी जाँच की जाएगी। वहीं, बुजुर्गों आदि को क्वारंटाइन सेंटर में तुरंत भेज दिया जाएगा। बीएमसी बुधवार से वाहनों की व्यसवस्था में भी जुट गया, जिनके जरिए लोगों को एयरपोर्ट से आइसोलेशन वार्ड तक ले जाया जाएगा।

वहीं देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 150 से अधिक हो गई है। अगर बात करें देश में फैले इस वायरस के मरीजों की तो अभी तक महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या सबसे अधिक यानी 45 मिली है।

न्यू रेलवे, नई रफ्तार: सुरक्षा, तकनीक और सुविधा से मोदी सरकार ने किया कॉन्ग्रेस जमाने के खस्ताहाल रेलवे का कायाकल्प

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सर्वाधिक ध्यान जिन चीजों पर दिया है, उनमें से एक पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन है। चाहे वह ‘भारतमाला प्रोजेक्ट’ के तहत देश के महत्वपूर्ण स्थानों को आपस में जोड़ने का लक्ष्य हो या पोर्ट्स को जोड़ने का कार्य। सरकार ने ट्रांसपोर्टेशन के ऊपर काफी राजस्व व्यय किया है। इसमें एक महत्वपूर्ण क्षेत्र, देश की लाइफ़ लाइन ‘भारतीय रेल’ है। देश का जनमानस लम्बी दूरी की सुलभ व सस्ती यात्रा के लिए हमेशा से रेलवे को प्राथमिकता देता रहा है। इसे ध्यान में रख मोदी सरकार रेलवे का कायाकल्प करने की दिशा में बढ़ रही है।

सुरक्षा

सन् 2014 में जब मोदी सरकार ने देश की कमान सँभाली उसके बाद से ही रेलवे सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। चाहे वह एक्सिडेंट या ट्रेन के अंदर महिला सुरक्षा या स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा का सवाल। सरकार पूरी तत्परता से इस पर ध्यान दे रही है। UPA कार्यकाल में भारतीय रेल में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति दुखद रही। ममता बनर्जी के बतौर रेल मंत्री रहते उनके कार्यकाल में लगभग 619 लोगों को रेल संबंधी दुर्घटनाओं में अपनी जान गॅंवानी पड़ी। UPA के समय मानवरहित क्रॉसिंग की वजह से 1,441 लोगों को अपनी गॅंवानी पड़ी।

इसके समाधान हेतु रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सभी मानवरहित क्रॉसिंग को 1 साल में खत्म करने का निर्णय साकार किया। रेलवे क्रॉसिंग को हटाना कोई साधारण कार्य नहीं था, मगर रेल मंत्री और रेलवे की टीम ने तत्परता और असाधारण इच्छाशक्ति के बल पर यह लक्ष्य साधने में सफलता प्राप्त की। 1 साल के भीतर सभी मानवरहित क्रॉसिंग ख़त्म किए गए। इन जगहों पर पुल बनाए गए या गेटमैन की तैनाती की गई ताकि वहाँ आने-जाने वाले यातायात को सुचारू रूप से व सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा सके। मोदी सरकार ने LHB कोच, FOB’s के निर्माण, रेल पटरियों के रिन्यूवल के कार्यों पर ज़ोर दिया। इसके परिणामस्वरूप पहले की तुलना में लगभग 85% की कमी रेल एक्सिडेंट में देखने को मिली, जो इतिहास में पहली बार हुआ। वर्ष 2019(FY) रेलवे के इतिहास में ऐसा वर्ष रहा जिसमें अभी तक 1 भी मौत ट्रेन एक्सिडेंट के कारण नहीं हुई। यह रेलवे इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में स्थापित हुई।

तकनीक

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे में तकनीकी उन्नयन पर बहुत ज़ोर दिया है। चाहे वह आपके खाने की जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए बारकोड सिस्टम हो, जिसमें जब आपका खाना ट्रेन में आपके पास आएगा और आप अपने मोबाइल से उसे स्कैन करेंगे तो वह आपको उस किचन तक ले जाएगा जहाँ आपका खाना तैयार हुआ है। आप CCTV की मदद से देख सकते हैं कि किचन कितना साफ़ है और कर्मचारी कैसे काम कर रहे हैं। इससे केवल यात्रियों को संतुष्टि ही नहीं अपितु कर्मचारियों की जवाबदेही व पारदर्शिता को भी बढ़ावा मिला है। वहीं रेलवे ने ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम को रेलवे में लाने का प्लान भी बनाया है, जिससे रेलवे ट्रेन की मूवमेंट, लाइन क्लीयर करना, कौन सी ट्रेन को किस समय पास करना है, आदि सब सिग्नलिंग सिस्टम के द्वारा निर्धारित किया जाएगा, जिससे ट्रेन की समयबद्धता में सुधार होगा।

सुविधा

मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे यात्रियों के लिए अनेक सुविधाओं का पिटारा खोला गया है। लगभग 5600 स्टेशनों पर वाई-फ़ाई सुविधा की उपलब्धता को सुनिश्चित किया गया है। आज के समय में इंटरनेट हर व्यक्ति के लिए वक मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। ख़ाली समय में लोग इंटरनेट के जरिए समय बिताने व ज़रूरतमंद लोग उसको अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। स्टेशन पर फ़्री हाई स्पीड वाई-फ़ाई से लोगों के इसके अनेक फ़ायदे मिल रहे है। हाल ही में केरल से जुड़ा एक प्रसंग चर्चा में रहा। वहॉं एक कुली ने स्टेशन के वाई-फ़ाई का इस्तेमाल करके अपनी पढ़ाई की और राज्य की सिविल परीक्षा पास की। वहीं कई लोग इसे मनोरंजन व सोशल नेटवर्किंग के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। सुंदर वेटिंग रूम, IRCTC के लाउंज, लिफ़्ट, एस्कलेटर, मात्र एक रुपए में सैनेटरी पैड, ब्रेस्ट फ़ीडिंग जैसी सुविधाओं को भी रेलवे ने ध्यान में रखा है जो दिखने में छोटी है लेकिन काम बहुत लोगों के आती है। महिलाओं सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण में यह एक सराहनीय प्रयास है।

आधुनिक ट्रेनों के साथ नई रफ़्तार

रेलवे में अगर आपको सबसे बड़ा बदलाव देखना है तो रेलवे की नई ट्रेनों पर गौर करें। पिछले वर्ष रेलवे में ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत बनी नई ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेन दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाई गई। इसको हरी झंडी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाई थी। इसके बाद दूसरी वन्दे भारत एक्सप्रेस दिल्ली से कटरा के बीच चलाई गई। आधुनिक ट्रेन की सूची में हमसफ़र एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस, पंडित मदन मोहन मालवीय एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं, जिन्होंने यात्रियों को लुभाया है।

तेजस एक्सप्रेस जैसी आधुनिक व सुविधाजनक ट्रेन जो कि पटरी पर चलते किसी प्लेन से कम नहीं है। इसमें रेलवे ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत कार्य किया और पहली ट्रेन का परिचालन दिल्ली से लखनऊ व दूसरी ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के लिए शुरू की गई। हाल ही में केंद्र सरकर द्वारा पेश किए गए बजट में वन्दे भारत व तेजस जैसी ट्रेनों के लिए काफ़ी बजट आवंटित किया गया। आने वाले वर्षों में लगभग 44 रेक आने कि उम्मीद जताई जा रही है जो रेलवे को रफ़्तार देने के लिए तैयार है। रेलवे सेवा व रेल मदद वह प्लेटफॉर्म है जो ट्विटर के माध्यम से लोगों की यात्रा संबंधी समस्याओं का समाधान करता है।

रेलवे सेवा

अगर आपको रेलवे से जुड़ी किसी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, अगर ट्रेन में चलते समय RPF की मदद की ज़रूरत है या मेडिकल मदद की ज़रूरत है या रेलवे के कार्य से जुड़ी किसी भी प्रकार की मदद की ज़रूरत है, तो रेलवे ट्विटर के जरिए इसका समाधान करता है। बस एक ट्वीट करने से सीधे रेल मंत्रालय से निर्देश जारी होते हैं और लोगों की समस्याओं का समाधान होता है। आप @RailwaySeva को टैग करके कोई ट्वीट करें तो आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा। रेलवे ने हाल ही में रेल मदद ऐप भी लॉंच किया है, जिसमें FIR की तरह आपकी समस्या को दर्ज किया जाएगा व शिकायत पंजीकरण उपरांत SMS के माध्यम से शिकायतकर्ता को सूचना दी जाएगी। साथ ही समस्या के समाधान उपरांत शिकायतकर्ता को पुनः SMS द्वारा समस्या के समाधान की जानकारी दी जाएगी।

स्टेशन रीडेवलपमेन्ट

स्टेशन रीडेवलोपमेन्ट रेल मंत्रालय द्वारा स्टेशन को आधुनिक बनाने के लिए चलाया गया उपक्रम है। रेल मंत्री पीयूष गोयल समय-समय पर ट्वीट कर उसकी जानकारी जनता के साथ साझा करते हैं। वहीं रेल मंत्रालय भी अपने ट्विटर अकाउंट् से इसकी जानकारी मुहैया कराता है। रेल मंत्री के इंस्टाग्राम अकाउंट पर आप विभिन्न स्स्टेशनों के उन्नयन संबंधी तस्वीरों को देख सकते हैं। इसमें स्टेशन पर आधुनिक बिल्डिंग शौचालय, साफ़-सफ़ाई, कलाकृति, आधुनिक मटेरियल, वेटिंग रूम, VIP लाउंज लिफ़्ट, एस्कलेटर, वाइफ़ाई, LED लाइट जैसी अनेक सुविधाएँ प्रदान की जा रही है। कुछ स्टेशन जिनको आधुनिक किया गया है उनमें – महाराष्ट्र के शिरडी, लोनावला, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, झारखंड का गिरिडीह, उत्तरप्रदेश में मथुरा, वाराणसी, मंडुआडीह, गुजरात का छायापुरी शामिल है। बाकी यह फेहरिस्त काफ़ी लम्बी है।

रेलवे रिस्ट्रक्चरिंग

कैबिनेट द्वारा हाल ही में रेलवे रिस्ट्रक्चरिंग करने का फ़ैसला लिया गया जो कि एक बहुत बड़ा फैसला है। रेलवे बोर्ड में अब तक चेयरमैन के अलावा 8 सदस्य होते थे जो अलग-अलग सर्विसेज से आते थे। लेकिन अब सभी का विलय करके इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (IRMS) बनाने की मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने रेलवे बोर्ड के फंक्शनल लेवल पर पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। अब नए रेलवे बोर्ड में एक चेयरमैन और 4 सदस्य होंगे। भारतीय रेलवे की मौजूदा आठ समूह एवं सेवाओं को अब इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (IRMS) नाम से एक केंद्रीय सेवा में पुनर्गठित किया जाएगा।

रेलवे विद्युतीकरण

रेल मंत्री पीयूष गोयल जिस भी सभा में जाते है अगर रेलवे के ऊपर उनको कुछ बोलना है तो रेलवे विद्युतीकरण पर बोलने में वो कभी नहीं हिचकिचाते। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रेल दुनिया का पहला ऐसा रेलवे होगा जो 100% विद्युतीकृत हो जाएगा। आँकड़ों पर गौर करें तो उनकी बातों में दम दिखता है।

UPA के ज़माने में विद्युतीकरण

वित्त वर्ष किलोमीटर 
2007-08 502
2008-09 797
2009-10 421
2010-11 75
2011-12 595
2012-13 1337
2013-14 610

मोदी सरकार के कार्यकाल में विद्युतीकरण

वित्त वर्ष किलोमीटर 
2014-15 1176
2015-16 1502
2016-17 1646
2017-18 4087
2018-19 5276

जाहिर है कि कॉन्ग्रेस सरकार की तुलना में विद्युतीकरण काफ़ी अधिक और तेज़ी से हुआ है। विद्युतीकरण होने से रेलवे की रफ़्तार में इज़ाफ़ा तो होगा ही साथ ही पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। इससे भारत पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका और स्थान को मजबूत कर पाएगा।

राज्य सभा के लिए कौन हो सकते हैं नामित: क्या प्रशांत भूषण जानबूझकर बोल रहे झूठ?

पूर्व सीजेआई गोगोई का नाम राज्यसभा के लिए नामित होने के बाद बड़े-बड़े बुद्धिजीवी निकलकर सामने आ रहे हैं। पहले तो हर मुमकिन प्रयास करके ये प्रसारित करने की कोशिश की जा रही थी कि राष्ट्रपति कोविंद ने गोगोई को जो राज्यसभा भेजने के लिए नामित किया, वो केवल उनके ‘एकतरफा’ फैसलों के कारण। लेकिन अब संविधान के अनुच्छेदों का उदाहरण देकर राष्ट्रपति के चयन को गलत साबित किया जा रहा है।

अब ऐसा करने वाले कोई और नहीं, बल्कि खुद जाने-माने वकील प्रशांत भूषण हैं। प्रशांत भूषण का कहना है कि आर्टिकल 80 (3) के तहत यदि कोई व्यक्ति कला, विज्ञान, साहित्य या समाज सेवा में विशेष ज्ञान रखता है, तो उसे राज्य सभा में नामांकित किया जा सकता है। लेकिन गोगोई की प्रतिभा और कला, विज्ञान, साहित्य या सामाजिक सेवा में विशेष ज्ञान एक सील कवर में अच्छी तरह से छिपा हुआ लगता है!

प्रशांत भूषण वकालत की दुनिया में वामपंथियों के एक ‘वरिष्ठ’ उम्मीद हैं। तो उनके द्वारा किया गया मार्गदर्शन भी अंतिम सत्य की तरह माना जाता है। लेकिन प्रमाणों की तरफ यदि गौर किया जाए तो प्रशांत भूषण और उनके समर्थकों का एजेंडा पूरी तरह ध्वस्त होता दिखता है।

साल 2005 में आई एक लिस्ट पढ़िए। इस लिस्ट में 107 ऐसे लोगों के नाम हैं, जिन्हें 1952 से लेकर 2005 तक राज्यसभा के लिए नामित किया गया। इनमें करीब 4 नाम ऐसे हैं, जिनका वकालत संबंधी बैकग्राउंड होने के बावजूद उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया।

इसके अलावा हाँ, इस सूची में कई बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, इतिहासकार, वैज्ञानिक, कवि, इंजीनियर, अर्थशास्त्री, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता के भी नाम हैं। लेकिन कहीं भी इसका उल्लेख नहीं है कि कानूनविद राज्यसभा के लिए नामित नहीं हो सकते। तो सवाल उठता है कि जब 1952 से इस बात पर गौर नहीं किया गया, तो आज क्यों?

क्या कानूनी जानकार होने के बाद प्रशांत भूषण अपने फॉलोवर्स को गलत सूचना प्रसारित करने पर आतुर हो चुके हैं? या केवल अपना अजेंडा साधने के लिए और भाजपा के प्रति अपनी नफरत निकालने के लिए अपने प्रोफेशन और अपनी विश्वसनीयता के साथ ख़िलावाड़ कर रहे हैं? या ये भी कह सकते हैं कि वो पूर्व सीजेआई के प्रति अपनी कुँठा निकाल रहे हैं, क्योंकि पिछले साल उन्हें कई मौकों पर उनके रवैये के कारण लताड़ा गया था।

गौरतलब है कि पिछले साल 16 जनवरी को लोकपाल मामले में बहस के दौरान चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया ने प्रशांत भूषण को जमकर फटकार लगाई थी। उस समय चीफ जस्टिस ने प्रशांत भूषण नसीहत देते हुए चीजों को सकारात्मक तरीके से देखने की बात कही थी। लोकपाल मामले पर बहस के दौरान कोर्ट में जब प्रशांत भूषण ने सर्च कमिटी के उपर सवाल खड़ा किया था तो चीफ़ जस्टिस ने तल्ख अंदाज में प्रशांत भूषण को ये जवाब दिया- “ऐसा लगता है आप जजों से भी ज्यादा जानते हैं।”