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नारायण स्वामी मंदिर को ढाह कर बनाया गया देवल मस्जिद… और राज्य सरकार हिंदू-इस्लामी वास्तुकला पर ताली बजा रही!

भारत में इस्लामिक आक्रांताओं के प्रभाव के कारण हमने शुरुआत से ही अपनी संस्कृति और सभ्यता का खून होते देखा। क्लासरूम में किताबों के जरिए हमें जिन मुगलों के गुणगान का पाठ पढ़ाया गया, हकीकत में उनकी तलवार ने भारत का कोई कोना नहीं छोड़ा और भारत के न जाने कितने मंदिरों को मात्र मलबे में तब्दील कर दिया। उसके बाद इन्होंने उसी मलबे पर मुस्लिम स्मारकों को इतिहास में दर्ज करवाया। खुद मुस्लिम इतिहासकारों ने भी अपने शासकों और सेनापतियों की इस बर्बरता का बढ़-चढ़कर बखान किया। देवल मस्जिद भी इसी क्रूरता का एक उदाहरण है। जिसे आज तेलंगाना की विरासत के रूप में देखा जाता है और सेक्युलर लोग इसकी तारीफ करते नहीं थकते। लेकिन इसकी वास्तविक हकीकत क्या है और देवल मस्जिद बनने का इतिहास क्या है, आइए आज हम आपको बताएँ…

कल हेरिटेज तेलंगाना (तेलंगाना सरकार के हेरिटेज विभाग का ऑफिशिअल ट्वीटर हैंडल) ने इस मस्जिद को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में इस मस्जिद का बखान इस प्रकार हुआ, “हिंदू और इस्लामी वास्तुकला दोनों की विशेषता वाले देवल मस्जिद एक ऐसी विरासत है, दुर्लभ स्मारक वाली ऐसी संरचना है, जिसने खोजकर्ताओं को मोहित किया है।”

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अब हालाँकि, ये बात जाहिर है कि जिनकी आँखों पर धर्मनिरपेक्षता के नाम पर इस्लामिक पट्टियाँ बाँध दी गई हैं, वे इसे वाकई में एक धरोहर समझेंगे। लेकिन जिन्हें थोड़ा भी इस्लामिक बर्बरता और क्रूरता का भान है, वे समझ पाएँगे कि किस चालाकी से हिंदुओं के मंदिर पर ढाए गए जुल्म को संरचना का नाम देकर धरोहर बताया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के निजामाबाद जिले के बोधन में स्थित इस देवल मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है ये मस्जिद पहले एक मंदिर था। मगर मोहम्मद तुगलक ने दक्खन में अपने विजय अभियान के बाद इसकी संरचना में थोड़ा बहुत बदलाव करवाया और फिर इसे मस्जिद का नाम दे दिया। लेकिन इस दौरान इसकी दीवारों पर कई ऐसी कलाकृतियाँ छूट गईं, जिन्होंने इतिहासकारों को अपने मंदिर होने का प्रमाण दिया।

इतिहास के अनुसार, देवल मस्जिद पहले हिंदू-जैन मंदिर था, जिसका निर्माण राष्ट्रकूट के राजा इंद्र (तृतीय) ने 9वीं औ 10वीं सदी में कराया था। लेकिन तुगलक ने इस मंदिर को तोड़कर पहले खंडित किया और बाद में उसे मस्जिद का आकार दे दिया। बाद में हिंदुओं के पूजनीय शिवलिंग को पैरों के पास मढ़वाया।

इस मस्जिद का असली नाम इंद्रनारायण स्वामी हुआ करता था। कला इतिहासकार एमएस मेट ने इसका जिक्र अपनी किताब में भी किया कि आखिर कैसे एक विशाल मंदिर को मस्जिद में तब्दील किया गया। उन्होंने बताया कि तुलगक ने यहाँ से मूर्तियों को हटवाया और मेहराब रखवाया। मंदिर के शिखर को ध्वस्त किया गया और उसकी जगह गुँबद बनाए गए।

केवल इतिहासकार नहीं, बल्कि “मस्जिद” के भीतर रखा गया 11वीं शताब्दी का शिलालेख भी इस बात को संदर्भित करता है कि पहले ये ‘मस्जिद’ इंद्रनारायण का मंदिर था। लेकिन तुगलक के आक्रमण के बाद इसमें बदलाव हुआ।

बता दें कि इस मंदिर का जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी में जोगापय्या नाम के एक व्यक्ति ने किया था। उन्होंने उस समय भगवान विष्णु की एक प्रतिमा का अभिषेक किया था और एक गरुड़ स्तंभ बनवाया था।

ट्रू इंडोलॉजी द्वारा दी जानकारी के अनुसार, इस मस्जिद को आज भी वांडा संभल गुड़ी कहा जाता है। इस मस्जिद की दीवारों पर आज भी भगवान विष्णु के दशावतार देखे जा सकते हैं।

आइए अब उन परिस्थियों के बारे में जानते हैं, जिनके कारण ये विशालकाय मंदिर एक मस्जिद में तब्दील हुआ। दरसअल, 1323 में तुगलक खान ने बोधन पर आक्रमण किया। उस समय इसे काकतिया कमांडर सीतारामचन्द्र शास्त्री द्वारा संरक्षित किया जाता था। जिसके कारण उन्होंने तुगलक खान का तगड़ा प्रतिरोध किया। लेकिन आखिर में उन्हें हार माननी पड़ी और उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया।

तुगलक ने शास्त्री के सामने इस्लाम अपनाने और तुगलक के शासन को स्वीकारने की शर्त रखी। बाद में शास्त्री ने इस्लाम कबूल कर अपना नाम आलम खान कर लिया। लेकिन जैसे ही तुगलक की सेना वहाँ से गई शास्त्री ने दोबारा से हिंदुत्व अपना लिया। इसके बाद जब अगली दफा तुगलक की सेना ने बोधन पर आक्रमण किया उन्होंने अपने साथ कोई कैदी नहीं रखा। उन्होंने बोधन किले को घेरा और उसे ध्वस्त कर दिया। उन्होंने काकतिया कमांडर सीताराम चंद्र शास्त्री का सिर धड़ से अलग कर दिया और फिर इस मंदिर को देवल मस्जिद बना दिया।

इंडोनेशिया से आया इस्लामी प्रचारक दल, जहाँ घूमा वहाँ कोरोना के 13 मामले: मस्जिद के लोगों को खोजने में जुटी पुलिस

तेलंगाना में बुधवार देर शाम को कोरोना वायरस के सात नए मामले सामने आए। इसके बाद राज्य सरकार ने घोषणा करते हुए बताया कि तेलंगाना राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। वहीं सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय ने जानकारी दी कि कोरोना वायरस के सभी 7 नए मामले इंडोनेशिया से आए हैं, जोकि सभी इस्लामिक प्रचारक हैं।

ये सभी सात नए मामले एक सदस्य की रिपोर्ट पॉजीटिव मिलने के एक दिन बाद आए। यह सदस्य एक टीम का हिस्सा था। बताया जा रहा है कि 10 इस्लामिक प्रचारकों का समूह तीन दिन की करीमनगर की यात्रा पर था और ये सात लोग भी इसी ग्रुप से ही हैं। सभी का मंगलवार को परीक्षण किया गया। वहीं इस ग्रुप में तीन भारतीय भी थे, जो कि हैदराबाद के गाँधी अस्पताल में रहते थे।

इंडोनेशियाई से आए ग्रुप के बारे में बताया जा रहा है कि ये ग्रुप 22 फरवरी को नई दिल्ली आया था और इनमें से 10 भारतीय तीन मार्च को करीमनगर पहुँचे। इस ग्रुप ने आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति के कोच नंबर S9 में यात्रा की और रामागुंडम में उतर गया। इसके बाद यह ग्रुप मुकरमपुरा और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्रों की दो मस्जिदों में भी रहा। वहीं अपने धार्मिक अभियान के दौरान ये कस्बे के कुछ इलाकों में घूमे और कई लोगों से मिलने भी गए। इसी बीच विशेष शाखा पुलिस, जो कि शहर में विदेशी नागरिकों को ढूँढती थी, उन्हें जिला मुख्यालय के अस्पताल ले आई, जहाँ एक व्यक्ति को खाँसी, सर्दी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए।

स्वास्थ्य मंत्री इटाला राजेंदर ने कहा कि उन लोगों का पता लगाना बड़ा ही मुश्किल होगा, जो इंडोनेशियाई से आए लोगों के साथ निकट संपर्क में आए थे। हालांकि राज्य सरकार ने इस मामले के बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पहले ही सूचित कर दिया है ताकि अन्य राज्यों में संपर्क ट्रेसिंग की कार्रवाई की जा सके।

वहीं देश में कोरोना के अब तक 150 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और तीन लोगों की अलग-अलग राज्यों में मौत हो चुकी है। इसकी रोकथाम के लिए केन्द्र सरकार के साथ राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर कई तरह की योजनाओं के साथ घोषणाएँ की है। वहीं अधिकांश राज्यों ने अपने यहाँ स्कूल, कॉलेज, मॉल, सिनेमा हॉल यहाँ तक कि मंदिरों को भी बंद कर दिया है।

उठाए जा सकते हैं 6 महीने के राशन, हमारे पास 646 लाख टन अनाज: कोरोना के ख़तरे को देखते हुए सरकार ने खोला खजाना

भारत में कोरोना वायरस के अब तक 151 मामले सामने आ चुके हैं। मोदी सरकार भी जनता के स्वास्थ्य व सुरक्षा को लेकर चिंतित है, जिसके तहत कई अहम घोषणाएँ की जा रही हैं। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने जानकारी दी कि अप्रैल 1, 2020 तक पीडीएस के माध्यम से दिए जाने वाले अनाज में चावल 135.8 लाख टन और गेहूँ 74.6 लाख टन की आवश्यकता है। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि कुल 210.4 लाख टन अनाज की जरूरत है जबकि अभी सरकार के पास कुल स्टॉक 646.09 लाख टन स्टॉक है। मतलब कि सरकार के पास अनाज का 435.69 लाख टन अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है।

पासवान ने आगे बताया कि इसमें चावल 272.90 लाख टन और गेहूँ 162.79 लाख टन है। केन्द्र के सर्कुलर के मुताबिक, राज्य सरकारें एक बार में 6 महीने तक के लिए पीडीएस का अनाज ले सकती हैं। अभी पंजाब सरकार 6 महीने का और ओडिशा सरकार एक बार में 2 महीने का कोटा ले रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि अन्य सरकारें भी चाहें तो अनाज ले सकती हैं। इस मामले में सरकार राज्यों का हाथ नहीं रोकेगी। पासवान ने बताया:

“अनाज की न कोई कमी है और न इसको लेकर कोई घबराहट है। इसके अलावा खुले बाजार में भी OMSS के माध्यम से बिक्री हो रही है, जिसमें चावल का भाव 22.50 रुपए प्रति किलो है। किसी को घबराने की ज़रूरत नहीं है।” कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते संभावित प्रतिबंध से सप्लाई बाधित होने पर गरीब लोगों को अनाज की कमी न हो, इसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है। एक बार में ज्यादा राशन लेने की छूट दिए जाने से सेंट्रल स्टोरेज पर प्रेशर कम होगा क्योंकि कुछ मात्रा में गेहूँ खुले में रखे गए हैं।

केंद्र ने राज्य सरकार को एडवाइजरी जारी की है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राशन दुकानों पर भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएँ। फ़िलहाल, सरकार पीडीएस सिस्टम के तहत देश भर के 5 लाख राशन दुकानों पर बेनिफिशियरी को 5 किलो सब्सिडाइज्ड अनाज प्रत्येक महीने देती है। इस पर सरकार को सालाना 1.4 लाख करोड़ रुपए का खर्च आता है। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत राशन दुकानों के जरिए अनाज सब्सिडाइज्ड रेट पर प्रदान किए जाते हैं। 3 रुपए प्रति किलो चावल, 2 रुपए प्रति किलो गेहूँ और 1 रुपए प्रति किलो मोटे अनाज बेचीं जाती है।

SAARC की ही तर्ज पर PM मोदी ने बुलाई G-20 देशों की बैठक, समूह के मुखिया देश ने मानी राय

पीएम मोदी ने रविवार (मार्च 15, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सार्क (SAARC) देशों की बैठक बुलाई थी। सार्क से जुड़े देशों ने पीएम नरेंद्र मोदी की पहल का स्वागत करते हुए कोरोना वायरस के कहर से निपटने के लिए एक-दूसरे की मदद को वक्त की जरूरत बताया।

इसके बाद पीएम मोदी ने सार्क देशों की तर्ज पर ही सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के साथ टेलीफोन पर कोरोना संक्रमण से निपटने के उपायों पर बातचीत की। G-20 समूह के मौजूदा मुखिया (अध्यक्ष) सऊदी अरब ने इस संगठन के देशों की बैठक बुलाने के मोदी के सुझाव को स्वीकार कर लिया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने महामारी को लेकर दक्षेस देशों के बीच एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित करने की भारत की हालिया पहल के बारे में बताया।

यह बैठक वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए होगी और इसमें एक दूसरे से अनुभवों को साझा करने और आगे एक सामूहिक रणनीति बनाने पर जोर होगा। साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने की रणनीति पर भी चर्चा होगी।

पीएम मोदी और प्रिंस सलमान ने इस पर सहमति व्यक्त की कि सऊदी अरब के नेतृत्व में इसी तरह की कवायद जी-20 देशों के समूह की ओर से भी की जानी चाहिए। गौरतलब है कि सऊदी अरब मौजूदा समय जी-20 समूह का अध्यक्ष है।

गौरतलब है कि सार्क देशों में कोरोना वायरस से निपटने के लिए COVID-19 इमजेंसी फंड बनाने की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने भारत की ओर से इसमें 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 74 करोड़ रुपए) देने का ऐलान किया था।

पीएम मोदी से वार्ता के बाद मंगलवार को देर शाम सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित G-20 समूह के कार्यालय की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि कोरोना वायरस पर विशेष बैठक अगले हफ्ते बुलाई गई है ताकि इस महामारी से उत्पन्न स्थिति व चुनौतियों से लड़ने की एक साझा वैश्विक प्रयास हो सके।

G-20 में दुनिया के इस समय सबसे प्रभावशाली 20 देश शामिल हैं और इसका गठन वर्ष 2007-08 के वैश्विक मंदी के बाद किया था। उसके पहले तक दुनिया के सर्वशक्तिशाली सात देशों का एक संगठन समूह-7 काम करता था।

कोरोना है फिर भी घर में रहो, ठीक हो जाओगे, हॉस्पिटलों में लाइन मत लगाओ: इमरान का अपने देशवासियों को सन्देश

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया तबाह है और जिसे भी जरा सा भी इसके लक्षण दिख रहे हैं, उसे तुरंत अस्पताल में चेकअप कराने की सलाह दी गई है। लेकिन, पाकिस्तान में इसका उलटा हो रहा है। वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का कहना है कि जिसे भी कोरोना वायरस हो, वो अपने घर में ही रहे और बाहर न निकले। लोगों का पूछना है कि अगर ऐसा तो फिर मरीज अपना इलाज कैसे कराएँगे? इमरान ख़ान ने अपने लोगों को न घबराने की सलाह दी है और चेताया है कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकना असंभव है।

लेकिन, साथ ही इमरान ने ये भी कहा है कि पाकिस्तान बाकी देशों की तरह पूरी तरह लॉकडाउन में नहीं जा सकता क्योंकि इससे उसकी अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी। पाकिस्तान में अब तक कोरोना वायरस के 245 मामले सामने आ चुके हैं। सिंध प्रांत में इसका कुछ ज्यादा ही प्रकोप है, जहाँ इसके 172 मामले सामने आ चुके हैं। इन सबके बीच इमरान का कहना है कि पाकिस्तान के बड़े शहर लॉकडाउन की स्थिति में नहीं जा सकते।

इमरान ख़ान ने ये कह कर अपने ही देशवासियों को सकते में डाल दिया है कि अगर ज्यादा लोग कोरोना का शिकार हुए तो देश की स्वास्थ्य व चिकित्सा व्यवस्था धड़ाम हो जाएगी। इमरान ने कहा कि जो वृद्ध लोग हैं, सिर्फ उन्हें ही तुरंत मेडिकल अटेंशन देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि जो भी कोरोना वायरस के शिकार हुए हैं, उनमें से 97% पूरी तरह ठीक हो जाएँगे और 90% लोगों को नार्मल फ्लू की तरह ही बीमारी होगी, जिन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी चीजें बंद हो गई तो लोग भूखे मरेंगे।

उन्होंने पाकिस्तान को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर 4-5% मरीज भी बाहर निकले तो हज़ारों संक्रमित होकर बीमार पड़ जाएँगे। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वो दौड़ कर मेडिकल टेस्ट कराने हॉस्पिटल न जाएँ। अमेरिका का उदाहरण देते हुए ख़ान ने दावा किया कि किसी भी देश के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि सर्दी-जुकाम के शिकार सभी लोगों का मेडिकल टेस्ट कराया जा सके। अपने ही पीएम की ऐसी सलाह से पाकिस्तानी हैरान हैं

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ जानें यहाँ: सूचनाएँ, जानकारियाँ, लिंक्स, हेल्पलाइन नंबर्स और संक्रमित लोगों की संख्या

COVID-19 वायरस से जुड़ी ख़बरों कि लाइव जानकारी

भारत में अब तक कोरोना वायरस के कुल 151 मामले सामने आ चुके हैं। पीड़ितों में 25 विदेशी नागरिक हैं। उत्तराखंड में राज्य सरकार ने कर्मचारियों को घर से काम करने के आदेश जारी किए। आदेश में कहा गया है कि बहुत जरूरी होने पर कर्मचारियों को ऑफिस में बुलाया जाए। वहीं, बेंगलुरु में दो नए केस मिलने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या 151 हो गई है। इनमें 25 विदेशी हैं। भारत में कोरोना वायरस के कारण अब तक तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके साथ ही भारतीय सेना का एक जवान भी कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है। कोरोना की वजह से कई बड़े और छोटे शहरों में लोग घरों में रहने को मजबूर हैं और लॉकडाउन घोषित कर दिए जा चुके हैं। स्कूल-कॉलेज, मॉल, सिनेमाहॉल बंद कर दिए गए हैं ।

भारत में कुल संक्रमित 151
भारत में कुल सक्रीय संक्रमित134*
भारत में कुल रिकवरी14
संक्रमण से भारत में कुल मृत्यु3
भारत में पीड़ित विदेशी नागरिक 25
विश्वभर में संक्रमितों की कुल संख्या206,845 *
विदेशों में वायरस से संक्रमित भारतीय 276
विश्वभर में संक्रमण से रिकवर कर लिए गए लोग 82,889*
पूरे विश्व में अब तक संक्रमण से हुई कुल मौतें 8,272*

नोट- तारांकित (*) किए गए आँकड़े लगातार बदल रहे हैं, जिन्हें कि अपडेट किया जाता रहेगा।

यह भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों पर आधारित हैं। विश्वभर के अन्य आँकड़े worldometers(डॉट)info से लिए गए हैं।
कोरोना वायरस से समान्धित हेल्पलाइन नम्बर – +91-11-23978046
टोल फ्री नम्बर – 1075
हेल्पलाइन मेल आईडी – ncov19[at]gov[dot]in

वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सरकार द्वारा सामाजिक उपक्रमों, गैर जरुरी यात्रा और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं।

विदेश राज्‍य मंत्री वी मुरलीधरन ने बुधवार (मार्च 18, 2020) को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि विदेश में इस समय 276 भारतीय कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। ईरान में सबसे ज्यादा 255 मामले सामने आए हैं। इनके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में 12, इटली में 5, हांगकांग, कुवैत, रवांडा और श्रीलंका में एक-एक भारतीय इस गंभीर वायरस से संक्रमित हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को ईरान से 53 भारतीयों का चौथा दल भारत लौटा और इसके साथ ही कोरोना वायरस से प्रभावित इस देश से निकाले गए लोगों की कुल संख्या 389 हो गई है।

कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचना एवं जानकारी-

सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी (पीडीएफ)
इन्डियन काउँसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च द्वारा जारी गाइडलाइन्स (पीडीएफ)
यात्रा सम्बन्धी सलाह (पीडीएफ)

कब करवाएँ कोरोना कि जाँच

मास्क कब पहनें –

घर पर कैसे करें खुद को क्वारंटाइन –

कब होता है खुद को घर पर क्वारंटाइन करना जरुरी –

मोदी हमसे डरते हैं, हम कोरोना से नहीं डरते, ये अल्लाह का अज़ाब है, कुरान हमारी रक्षा करेगा: शाहीन बाग की बुर्कानशीं महिलाएँ

दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ पिछले करीब तीन महीनों से महिला प्रदर्शनकारियों का धरना जारी है। इस बीच कोरोना वायरस के लगातर बढ़ते प्रकोप से पूरी दुनियाँ बंद है वहीं शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी धरना स्थल को खाली करने के लिए तैयार नहीं है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में घातक कोरोना वायरस फैलने के बावजूद, शाहीन बाग में CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों ने यह कहते हुए जगह खाली करने से इनकार कर दिया कि वे कोरोना वायरस से डरते नहीं हैं।

धरने पर पहुँची महिलाओं से टाइम्स नाउ के संवाददाता ने बात की, जिस पर एक शाहीन बाग की एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह अल्लाह का अज़ाब है, मैं कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप से जरा भी डरती हूँ। अगर सरकार को हमारी चिंता है, तो उन्हें पहले ये काला कानून वापस लेना होगा। नीचे संलग्न ट्वीट में आप वीडियो देख सकते हैं।

इस बीच महिला प्रदर्शनकारी ने मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि मोदी सरकार उनसे डरती है और कहा कि शाहीन बाग में सभाओं को प्रतिबंधित करने के लिए सरकार का हालिया निर्देश उनके द्वारा जारी आंदोलन को कमजोर करने की ही एक चाल है। बुर्का-पहने महिला ने एक बार फिर कहा कि हम कोरोना वायरस से डरते नहीं हैं।

इसके बाद चैनल के रिपोर्टर ने सवाल किया कि इस तरह के बड़े पैमाने पर यहाँ एकत्र होने के कारण प्रत्येक प्रदर्शनकारी को वायरस फैलने का खतरा हो सकता है, इसके जवाब में महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि वायरस से संक्रमित होने का जोखिम तो उनके घरों में भी भी होगा, इसलिए किसी भी कीमत पर धरना स्थल को खाली करने का सवाल नहीं है। एक अन्य बुर्का पहने प्रदर्शनकारी महिला ने भी कुछ इसी तरह अपनी सहयोगी की बात को आगे बढ़ाया और कहा कि वे अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई अपील का हम पालन कर रहे हैं।

दरअसल, हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1897 में महामारी रोग अधिनियम लागू किया था और अत्यधिक संक्रामक रोग के प्रसार को सीमित करने के लिए प्रतिबंधों का एक नया सेट घोषित किया था। इसके बाद मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने फैसला किया कि कम लोग ही धरने पर आएँगे, लेकिन न तो धरने को समाप्त करेंगे और न ही घरना स्थल को खाली करेंगे।

केजरीवाल सरकार की अपील के बाद भी शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इक तरफ चीन के बुहान शहर से तेजी से फैली महामारी ने दुनियाँ को बंद कर दिया है। तो वहीं दूसरी ओर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी धरना स्थल पर कुरान पढ़ रहे हैं। यह मानते हुए कि अल्लाह उन्हें कोरोना के संकट से बचाएगा।

शाहीन बाग़ प्रदर्शनकारियों के कारण दिल के मरीज की मौत, तीन बेटियाँ हुईं अनाथ

शाहीन बाग़ के लोग प्रदर्शन स्थल से हटने को तैयार नहीं हैं, जिसके कारण कोरोना वायरस के फैलने का ख़तरा और बढ़ गया है। पुलिस द्वारा लाख समझाने के बावजूद उपद्रवी वहाँ से हटने को तैयार नहीं हैं। वो लोग दिल्ली सरकार के उस आदेश को भी मानने से इनकार कर रहे हैं, जिसमें एक जगह 50 से अधिक लोगों के न जमा होने की बात कही गई है। यहाँ तक कि विशेषज्ञों और डॉक्टरों की सलाह को भी धता बता कर अन्य लोगों को खतरे में डाला जा रहा है। अब इन उपद्रवियों के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई है।

‘न्यूज़ नेशन’ के पत्रकार दीपक चौरसिया ने भी आरोप लगाया कि शाहीन बाग़ ने एक व्यक्ति की जान ले ली, जिनका नाम सुरेंद्र था। 55 वर्षीय सुरेंद्र को सोमवार (मार्च 16, 2020) को हार्ट अटैक आया था। घरवालों ने आनन-फानन में एक ऑटो हायर करके सफदरगंज अस्पताल की ओर जाने लगे। रास्ते में शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने भारी जाम लगा रखा था। वो लोग वहाँ से हटने को तैयार नहीं थे। प्रदर्शनकारियों के कारण सुरेंद्र सही समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाए और उनकी मौत हो गई।

सुरेंद्र मदनपुर खादर के रहने वाले थे। उनके परिजनों ने कहा है कि वो इन प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज कराएँगे। उनकी पत्नी और तीन बेटियाँ हैं, जो अनाथ हो गईं। सुरेंद्र का सफदरगंज अस्पताल में पहले से ही इलाज चल रहा था। उन्हें रात के क़रीब 11 बजे हार्ट अटैक आया था। उन्हें अस्पताल ले जाते समय कालिंदी कुञ्ज मार्ग पूरी तरह बंद था। पीड़ित की हालत और बिगड़ने से उन्हें नजदीकी अपोलो हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन वहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

डॉक्टरों ने बताया कि अगर सुरेंद्र को 20 मिनट पहले अस्पताल पहुँचाया जाता तो उनकी जान बचने की संभावना थी। हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉक्टर केके अग्रवाल ने भी इस बात की पुष्टि की और बताया कि मरीज को हार्ट अटैक आने के आधे घंटे के भीतर अस्पताल पहुँचा दिया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, वैसे-वैसे मरीज की टेबियार और बिगड़ती जाती है और इलाज मुश्किल हो जाता है।

ये योगी का उत्तर प्रदेश है, यहाँ गुंडागिरी नहीं चलती: कारगर है दंगों से निपटने का ‘योगी मॉडल’

गोरक्षधाम के महंत योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के पहले ऐसे भाजपा नेता हैं, जिन्होंने बतौर मुख्यमंत्री राज्य में 3 साल का कार्यकाल पूरा किया है। इसमें कोई शक नहीं कि वो पूरे 5 साल राज करेंगे लेकिन इस दौरान उन्होंने जो सबसे अच्छे कार्य किए, उनमें से एक है क़ानून-व्यवस्था का राज़ स्थापित करना। यूपी में हुए ताबड़तोड़ एनकाउंटर्स में कई अपराधी मारे गए, कई राज्य से ही भाग खड़े हुए और कइयों ने सरेंडर किया। लेकिन, बुद्धिजीवियों का एक वर्ग लगातार लोगों को उकसा कर माहौल बिगाड़ने में लगा रहता है, जैसा दिल्ली में किया गया।

उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों की जनसंख्या 20% के आसपास है। यानी लिबरलों व मीडिया के गिरोह विशेष के पास वहाँ के मुस्लिमों को भड़काने के ज्यादा मौके थे और इसके लिए पूरा प्रयास किया गया। शाहीन बाग़ की तर्ज पर लखनऊ और वाराणसी में महिलाओं को बिठाया गया। इमरान प्रतापगढ़ी और शरजील इमाम से भड़काऊ व आपत्तिजनक भाषण दिलाए गए। जेएनयू और जामिया के तर्ज पर एएमयू को सुलगाने का प्रयास किया गया। मजहबी युवकों को पत्थरबाजी में लगाया गया। पुलिस पर हमले किए गए। लेकिन, कुछ ही दिनों में सब शांत हो गया और नापाक मंसूबे वाले नाकामयाब रहे।

ऐसा क्यों हुआ? पूरे मीडिया गिरोह, लिबरल गैंग और कथित बुद्धिजीवियों की राह में एक ही रोड़ा था- यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, गोरक्षधाम पीठ के महंत। इस महंत ने एक के बाद एक देश के टुकड़े-टुकड़े करने वालों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। न तो मीडिया उन्हें चुप करा सकता है और न ही वो फर्जी बुद्धिजीवियों के दबाव में आते हैं। और हाँ, हिंसा की वारदातों को शांत कराने का अनुभव तो उन्हें गोरखपुर से ही है। सब कुछ क़ानून सम्मत हुए, लेकिन कैसे? यहाँ दिल्ली हिंसा के बीच हम शांति के यूपी मॉडल की बात करेंगे।

दंगाइयों से पाई-पाई वसूलने वाला नियम

उत्तर प्रदेश में दंगाइयों और उपद्रवियों पर अन्य कार्रवाई से ज्यादा जोर इस बात पर है कि उनकी करतूतों से जो सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाए। जैसे, रामपुर जिले में 28 लोगों को आरोपित बनाया गया और पुलिस के 9 डंडे व 3 हेलमेट तक के रुपए वसूल लिए गए। भले ही वो एक कंगाल व्यक्ति हो या कोई धन्नासेठ, अगर उसने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का काम किया है तो उससे वसूली की है। पुलिस की जीप पर पत्थरबाजी हुई तो उसे बनवाने के लिए रुपए भी दंगाइयों से ही वसूले गए।

बता दें कि ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम 1984’ पहले से मौजूद है। इसके प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का दोषी साबित होता है तो उसे 5 साल तक की सजा हो सकती है। इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है। यानी, क़ानून तो पहले से है लेकिन इसका सही तरीके से उपयोग योगी सरकार ने किया। लखनऊ से लेकर अलीगढ़ तक दंगाइयों से पाई-पाई वसूला गया। सीधा मतलब है, जब किसी को अपनी संपत्ति जाने का भय होगा तो वो जनता की संपत्ति को नुकसान पहुँचाएगा ही नहीं।

सड़क पर दादागिरी नहीं चलेगी: प्रदर्शन अलग कीजिए

इसे लखनऊ के घंटाघर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से समझिए। वहाँ महिलाओं को बड़ी तादाद में बिठा दिया गया था। योगी सरकार ने प्रदर्शन के लिए कभी किसी को नहीं रोका क्योंकि लोकतंत्र में इसके लिए जनता को अधिकार है। लेकिन, ‘अवैध तौर-तरीकों’ से चल रहे प्रदर्शन से ज़रूर उसी हिसाब से निपटा गया। घंटाघर पार्क में प्रदर्शनकारियों ने ज्यादतियाँ की। कुछ लोगों ने वहाँ रस्से और डंडे से घेरा बनाकर शीट लगाया था जिसे लगाने से प्रशासन द्वारा मना किया गया था। वहाँ कम्बल वितरित किया जा रहा था, जिसे लेने के लिए आसपास के लोग आ रहे थे और अराजकता फ़ैल रही थी।

पुलिस ने तुरंत जाकर कम्बलों को वहाँ से हटाया। हालाँकि, अफवाह भी फैलाई गई कि पुलिस कम्बल छीन रही है। कम्बल वितरित करने वाले संगठनों के लोगों को भी वहाँ से भगाया गया। बिना अनुमति लगाए गए टेंट्स को जब्त कर लिया गया। जिन्होंने भड़काने की कोशिश की, उन पर सीधा चालान लगाया गया। हज़ारों महिलाएँ वहाँ जमा थीं लेकिन जिन चीजों को वहाँ ले जाने की अनुमति नहीं थी, पुलिस ने उस एक-एक चीज को जब्त किया। दिल्ली में भी योगी का यही मॉडल ज़रूरी है, जो विपक्षी नेताओं और मीडिया की परवाह न करते हुए क़ानून-सम्मत कार्रवाई करे।

पुलिस के साथ खड़ी रही सरकार: दी गई खुली छूट

आपको याद होगा कि मेरठ के एसपी ने आपत्तिजनक पाकिस्तान समर्थित नारे लगाने वाले उपद्रवियों की बस्ती में घुस कर उनके परिवार वालों को समझाया। एसपी ने स्पष्ट कहा कि जिन्हें ये सब करना है, वो पाकिस्तान चले जाएँ। उन्होंने उपद्रवियों से कहा– “इस गली को मैं ठीक कर दूँगा।” एसपी अखिलेश नारायण का वीडियो वायरल कर के उन्हें ख़ूब बदनाम करने का प्रयास किया गया। लेकिन, यूपी सरकार अपने पुलिस अधिकारी के साथ मजबूती खड़ी रही, पूरे दुष्प्रचार के बावजूद। यूपी सरकार के मंत्री मोहसिन रजा ने एसपी का समर्थन किया।

यहाँ तक कि दंगाइयों के होर्डिंग लगाने का मामला हाईकोर्ट में भी गया और वहाँ इस पर रोक लगा दी गई लेकिन योगी सरकार उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट गई। वहाँ अपील करने के बाद एक अध्यादेश पास कर के दंगाइयों के पोस्टर लगाने और उनका ‘नेम व शेम’ करने की योजना का मार्ग प्रशस्त किया गया। इसका असर भी दिख रहा है और कई शहरों में दंगाइयों द्वारा सरकार को चेक सौंप कर नुकसान की भरपाई की जा रही है।

सरकार से मास्क और सेनिटायजर माँगने वाले शाहीन बाग में चौकी तो है, लोग नहीं

सीएए विरोध के नाम पर पिछले तीन महीने से चल रहे दिल्ली के शाहीन बाग धरने में कोरोना के डर ने प्रवेश कर दिया है, यही कारण है कि धरने पर हर रोज प्रदर्शनकारियों की संख्या घटती चली जा रही है। हालाँकि, महिलाओं का सीएए के खिलाफ धरना प्रदर्शन अभी जारी है और वह किसी भी कीमत पर धरने से उठने को तैयार नहीं हैं।

बुधवार दोपहर को शाहीन बाग धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बेहद कम हो गई। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि धरना स्थल पर कुछ मीटरों की दूरी पर जगह-जगह रहे तख्त पर इक्का-दुक्का महिलाएँ बैठी हुई दिखाई दे रही हैं। वहीं कुछ अधिंकाश प्रदर्शनकारी मुँह पर मास्क पहने दिखाई दिए, लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा कोरोना के खतरे को देखते हुए 50 से अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र न होने की चेतावनी शाहीन बाग के काम नहीं आई। शाहीन बाग पर बैठी महिला प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह अपनी माँगों को लेकर अडिग हैं हम तब तक धरना समाप्त नहीं करेंगे जब तक कि मोदी जी इस काले कानून को वापस नहीं ले लेते।

वहीं केजरीवाल सरकार की अपील के बाद मंगलवार को धरने पर पहुँचे दिल्ली पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कराने को लेकर तीखी बहस हो गई थी। दरअसल, अधिकारियों ने वायरस के खतरे को देखते हुए प्रदर्शन को खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भीड़ से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। यह प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ आम नागरिकों के जीवन के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। इस पर प्रदर्शनकारी भड़क उठे और बोले धरना जारी रहेगा। बातचीत विफल होने के बाद अधिकारी मौके से वापस चले गए थे।

गौरतलब हो कि दिल्ली सरकार ने 31 मार्च तक सभी स्कूलों और सिनेमा घरों को बंद कर दिया है साथ ही दिल्ली सरकार ने राजधानी में 50 से अधिक लोगों के एकत्रित होने पर रोक लगा दी है। वहीं दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए लोगों से भीड़-भाड़ वाली इलाकों में नहीं जाने की भी अपील की गई है। लेकिन सरकार की इस एडवाइजरी को धता बताते हुए शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी किसी भी कीमत पर प्रदर्शन से हटने को तैयार नहीं हैं।