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कोरोना के नाम पर NDTV ने ‘बेचा जहर’, बाबा रामदेव और योग को लेकर भ्रामक हेडलाइन से फैलाया प्रोपेगेंडा

कोरोना वायरस जैसे गंभीर मामले पर भी एनडीटीवी अपना प्रोपेगेंडा फैलाने से बाज नहीं आ रहा। शनिवार को रामदेव बाबा ने कोरोना वायरस पर बातचीत करते हुए कहा था कि कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं है। केवल सख्ती से सावधानियाँ बरतें। लेकिन एनडीटीवी ने इसे लेकर ऐसी हेडलाइन बनाई कि जो भी उसे पढ़े, वो बाबा रामदेव का उपहास ही उड़ाए।

दरअसल, शनिवार को बाबा रामदेव ने कोरोना वायरस का भय लोगों के भीतर से कम करने के लिए इस पर अपनी बात रखी थी। साथ ही इससे बचे रहने के लिए तरीके बताए थे। उन्होंने कहा था , “कोरोना वायरस से डरने की ज़रूरत नहीं है लेकिन इसके प्रसार और संक्रमण को रोकने के लिए सख्ती से सावधानी बरतें। जब आप सार्वजनिक स्थानों पर हों या बस, ट्रेन और फ्लाइट से यात्रा कर रहे हों तो आप अपने हाथों के लिए सेनिटाइज़र का उपयोग करें।”

अब हालाँकि, बाबा रामदेव ने यहाँ वही राय दी थी जो शायद कोई भी जानकार इंसान अपने फॉलोवर्स को दे। लेकिन एनडीटीवी ने इस पर रिपोर्ट करते हुए इसकी हेडलाइन इस प्रकार दी जैसे बाबा रामदेव ने कहा है कि कोरोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है, सिर्फ़ योगा का अभ्यास करें।

आखिर, ऐसे समय में जब पूरा विश्व कोरोना वायरस के कहर से डरा हुआ है, हर देश की सरकार हर स्तर पर किसी न किसी प्रकार से इससे लड़ने की कोशिश कर रही है। उस समय जाहिर है कोई भी आम व्यक्ति अगर बाबा रामदेव का ये सुझाव पढ़ेगा, तो उसे उनकी बात पर गुस्सा ही आएगा कि आखिर ऐसे समय में भी वो केवल अपना प्रचार (योग) कैसे कर सकते हैं।

लेकिन, वास्तविकता देखी जाए तो पता चलेगा कि बाबा रामदेव ने केवल कोरोना वायरस से बचने के लिए योग करने की सलाह नहीं दी। बल्कि उन्होंने तो लोगों से अपील करते हुए कहा था कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से 4 से 5 फीट की दूरी बनाएँ रखें। चेहरे को मास्क से ढकें। इसके अलावा योगा की भी प्रैक्टिस करें और नैचुरल लाइफस्टाइल फॉलो करें। ताकि इम्यून सिस्टम अच्छा हो और शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण आदि से बचाया जा सके।

ट्विटर पर यदि देखें, तो काफी हद तक एनडीटीवी अपनी इस हेडलाइन के साथ अपने दर्शकों को अपने पक्ष में भी करता दिखा। भ्रामक हेडलाइन देखकर, लोग बाबा रामदेव को लेकर अनाप-शनाप बोलने लगे। किसी ने उन्हें कनियाँ कहकर उनकी आँखों का मजाक उड़ाया, तो कोई उन्हें ये हेडलाइन देखकर फ्रॉड कहने लगा। एक यूजर ने तो ये तक लिखा कि जहाँ कोरोना पीड़ित हैं, वहाँ पर बाबा को योगा के लिए भेजना चाहिए। अब आखिर एनडीटीवी को यही सब तो चाहिए था! हेडलाइन के साथ खेल कर उसने प्रोपेगेंडा के अपने स्तर को बनाए रखा।

मगर, ईटी नॉउ की पत्रकार चंद्र आर श्रीकांत ने इस हेडलाइन की ओर सबका ध्यान आकर्षित करवाया और बाबा रामदेव के वास्तविक बयान को ट्विटर पर शेयर किया। जिसके बाद लोगों ने एनडीटीवी की हेडलाइन पर ध्यान देना शुरू किया और कहा कि ऐसी भ्रामक हेडलाइनों से बचने का केवल एक उपाय है कि हेडलाइन से अपनी समझ न बनाई जाए, बल्कि न्यूज कंटेंट से सारी बात समझने का प्रयास किया जाए।

JNU में वीर सावरकर मार्ग, 12 अन्य प्रसिद्ध हस्तियों के नाम भी शामिल: बोर्ड देख बौखलाए वामपंथी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सुबनसर हॉस्टल के नजदीक एक सड़क का नाम बदलकर वीर सावरकर मार्ग कर दिया गया। इसे देखने के बाद जेएनयू के वामपंथी छात्र काफी नाराज हुए। वामपंथी छात्रों के संघ ने इस कदम को शर्मनाक कहा। साथ ही सावरकर के नाम पर मार्ग का नाम रखे जाने की निंदा की।

जेएनयूसू की अध्यक्ष आइशी घोष ने अपने ट्विटर हैंडल से इसकी एक तस्वीर शेयर की। इस तस्वीर में साफ दिखा कि सुबनसर हॉस्टल को जाने वाली सड़क को वीडी सावरकर मार्ग नाम दिया गया है।

आइशी घोष ने इसी पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, “ये जेएनयू की विरासत के लिए शर्म की बात है कि इस आदमी का नाम इस विश्वविद्यालय में रखा गया है। सावरकर और उनके लोगों के लिए विश्वविद्यालय के पास न कभी जगह थी और न ही कभी होगी।”

जुलाई 2019 में जेएनयू कैंपस डेवलपमेंट कमिटी ने एग्जिक्यूटिव काउंसिल के समक्ष विभिन्न सड़कों के नामकरण के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों व प्रसिद्ध हस्तियों के नामों की सिफारिश की थी। वो थे:

  1. गुरु रविदास मार्ग (Guru Ravidas Marg)
  2. वीडी सावरकर मार्ग (V. D. Savarkar Marg)
  3. रानी अब्बक्का मार्ग (Rani Abbakka Marg)
  4. अब्दुल हमीद मार्ग (Abdul Hamid Marg)
  5. महर्षि वाल्मीकि मार्ग (Maharishi Valmiki Marg)
  6. गार्गी वाचक्नवी मार्ग (Gargi Vachaknavi Marg)
  7. रानी झाँसी मार्ग (Rani Jhansi Marg)
  8. महर्षि दयानंद सरस्वती मार्ग (Maharishi Dayananda Saraswati Marg)
  9. गोपीनाथ बोरदोलोई मार्ग (Gopinath Bordoloi Marg)
  10. वीर शिवाजी मार्ग (Veer Shivaji Marg)
  11. महाराणा प्रताप मार्ग (Maharana Pratap Marg)
  12. सरदार पटेल मार्ग (Sardar Patel Marg)
  13. लोकमान्य तिलक मार्ग (Lokmanya Tilak Marg)

13 नवंबर 2019 को समिति की उपरोक्त सिफारिशों को विचार और अनुमोदन के लिए आयोजित 283वीं एग्जिक्यूटिव काउंसिल की बैठक से पहले रखा गया था। ज्ञात हो कि काउंसिल ने इन सिफारिशों को मंजूरी दे दी है।

गौरतलब है कि वीर सावरकर को लेकर जेएनयू में मामला गर्माने से पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में भी हंगामा हुआ था। उस समय विनायक दामोदर सावरकर की मूर्ति लगाए जाने को लेकर मामले ने तूल पकड़ा था।

दरअसल, तब तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष शक्ति सिंह ने बगैर अनुमति लिए नॉर्थ कैंपस स्थित आर्ट्स फैकल्टी के गेट पर वीडी सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमाएँ लगवा दी थीं। जिसके बाद कई छात्र संगठनों ने इस पर ऐतराज जताया था।

साथ ही कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने तो सावरकर की मूर्ति पर काली स्याही तक पोत दी थी और उन्हें जूतों का हार भी पहनाया था। भारी हँगामे के बाद और एनएसयूआई की ऐसी हरकतों को देखते हुए आखिरकार मूर्तियों को वहाँ से हटाना पड़ा था।

उल्लेखनीय है कि वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिन्हें अंग्रेजों ने कालापानी की कठिन सज़ा दी थी। वह हिंदुत्व विचारक और एक प्रखर लेखक भी थे। वह कॉन्ग्रेस के आलोचक थे, जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना पर जोर दिया। उनके सम्मान में पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट का नाम 2002 में ‘वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखा गया था। साथ ही इंदिरा गाँधी ने भी वीर सावरकर को अपने एक पत्र में भारत का वीर सपूत कहा था।

हिंदू पुजारी की गला रेतकर हत्या: राजीब गाँधी (जहाँगीर), रजीबुल, आलमगीर, रमजान को फाँसी की सजा

हिंदू पुजारी की हत्या के मामले में प्रतिबंधित इस्लामिक आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिदीन-बांग्लादेश (JMB) से जुड़े रहे चार लोगों को फाँसी की सजा सुनाई गई है। ये चारों आरोपित हिंदू पुजारी जगनेश्वर रॉय की हत्या के मामले में दोषी पाए गए हैं।

कोर्ट ने जमात उल मुजाहिदीन-बांग्लादेश के चार सदस्य- जहाँगीर हुसैन उर्फ राजीब गांँधी, रजीबुल इस्लाम उर्फ बादल, आलमगीर हुसैन और रमजान अली को फाँसी की सजा सुनाई है।

हिंदू पुजारी की हत्या मामले में राजशाही के फास्ट ट्रैक ट्रिब्यूनल के जज अनूप कुमार ने रविवार (मार्च 15, 2020) को सुबह 11 बजे फैसला सुनाया, जिसमें से तीन दोषी कोर्ट में उपस्थित थे, जबकि राजीबुल इस्लाम फरार था।

बता दें कि 50 वर्षीत जगनेश्वर रॉय सोनापोटा गाँव के संत गौरियो मंदिर के प्रमुख महंत थे। 21 फरवरी 2016 को कुछ हथियारबंद बदमाशों ने उनकी गला काटकर निर्ममता से हत्या कर दी थी। उनकी धारधार हथियारों से पिटाई भी की गई थी। इस दौरान 35 वर्षीय एक श्रद्धालु गोपाल चंद्र रॉय को भी गोली लगी थी। हालाँकि वो किसी तरह से वहाँ से बचकर भागने में कामयाब हो गए।

इसके अलावा अपराधियों की गई फायरिंग और विस्फोट में दो अन्य श्रद्धालु भी घायल हो गए थे। कोर्ट ने अपने फैसले में तीन अन्य आरोपित- हरेज अली, खलीलुर्रहमान और मोहम्मद राणा को बरी कर दिया।

बता दें कि इन दोषियों में से जहाँगीर हुसैन होली आर्टिसन कैफे हमले का साजिशकर्ता भी है। ढाका के होली आर्टिसन कैफे पर एक जुलाई 2016 को हुए हमले में 22 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें एक भारतीय सहित 18 विदेशी थे। कैफे पर करीब 10 घंटे तक आतंकवादियों ने कब्जा जमाए रखा था। इस मामले में पिछले साल ढाका की अदालत ने 7 आतंकियों को मौत की सजा सुनाई थी। इस मामले में कोर्ट ने 1 आरोपित को बरी कर दिया। एंटी टेररिजम ट्रिब्यूनल के जज मोहम्मद मुजिबुर रहमान ने 7 दोषियों पर फाँसी के अलावा 50-50 हजार टका (बांग्लादेशी मुद्रा) जुर्माना भी लगाया था। इस हमले की योजना बनाने वालों में असलम हुसैन उर्फ राश का भी नाम आया था। वहीं ग्रेनेड पहुँचाने वालों में अब्दुस सबूर खान उर्फ सोहेल महफूज का नाम आया था।

कमलनाथ सरकार के फ्लोर टेस्ट पर संशय, बागी 16 MLA ने कहा- जैसे 6 के इस्तीफे कबूल किए, हमारा भी करिए

मध्य प्रदेश में जारी सियासी ड्रामे का पटाक्षेप सोमवार को होने की उम्मीद कम होती दिख रही है। राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार को बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था। लेकिन फ्लोर टेस्ट होने पर संशय बना हुआ है। इस बीच कॉन्ग्रेस के बागी विधायकों ने फिर से विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेजा है। उन्होंने कहा है कि जैसे उनके 6 साथियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं, उसी तरह उनके इस्तीफे को भी कबूल किया जाए। हालॉंकि विधानसभा अध्यक्ष ने खबर लिखे जाने तक न तो फ्लोर टेस्ट पर और न ही विधायकों के इस्तीफे को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया था।

फ्लोर टेस्ट से पहले रविवार रात तक बीजेपी और कॉन्ग्रेस के नेता अपने-अपने विधायकों के साथ बैठकों में व्यस्त थे। गुरुग्राम से बीजेपी के विधायक रात में भोपाल के लिए निकले। जयपुर से कॉन्ग्रेस के विधायक भी पहुॅंच गए हैं। भोपाल पहुॅंचते ही सभी विधायकों का कॉन्ग्रेस ने कोरोना वायरस को लेकर स्क्रीनिंग करवाई। विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन की कार्यसूची में फ्लोर टेस्‍ट का उल्‍लेख नहीं किया गया है। रविवार शाम जारी कार्यसूची में सिर्फ राज्यपाल के अभिभाषण की बात कही गई है।

16 बागी कॉन्ग्रेस विधायकों ने फिर से स्पीकर को अपना इस्तीफा भेजा है। 5 दिनों के भीतर यह दूसरा मौका है जब इन विधायकों ने इस्तीफा भेजा है। ये विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। कॉन्ग्रेस छोड़ सिंधिया ने बीते दिनों बीजेपी का दामन थामा था। उनके इस्तीफे के बाद 22 विधायकों ने बगावत कर दी थी। इनमें से 6 का ही इस्तीफा स्पीकर ने स्वीकार किया है। विधानसभा स्पीकर का कहना है, “मैं उन विधायकों का इंतजार कर रहा हूॅं जिन्हें किसी न किसी माध्यम से मुझे इस्तीफे भेजे हैं। वे मुझसे सीधे संपर्क क्यों नहीं करते। विधानसभा के सदस्यों के साथ जो हो रहा है उससे मैं चिंतित हॅं। ये स्थिति राज्य में लोकतंत्र पर सवाल उठाती है।”

फ्लोर टेस्ट से जुड़े सवालों को काल्पनिक बताते हुए स्पीकर ने जवाब देने से इनकार कर दिया है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में कोरोना की भी जोर-शोर से चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण का हवाला दे कर भी सरकार बहुमत परीक्षण टालने के रास्ते तलाश रही है। कमलनाथ सरकार में मंत्री प्रदीप जायसवाल ने फ्लोर टेस्ट पर किए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, “हमारे पास बहुमत है। मगर कल फ्लोर टेस्ट हो ये जरूरी नहीं। अभी तो कोरोना चल रहा है।”

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं। दो विधायकों का निधन हो चुका है और छह के इस्तीफे स्पीकर ने स्वीकार कर लिए हैं। ऐसे में सरकार बचाने के लिए कमलनाथ सरकार को 112 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। भाजपा के 107 और कॉन्ग्रेस के 108 विधायक हैं। 7 गैर कॉन्ग्रेसी-गैर भाजपाई विधायकों में से 4 निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा का है। यदि बागी 16 विधायकों नहीं माने तो कमलनाथ सरकार की विदाई तय है। ऐसे में राज्य सरकार की कोशिश है कि किसी तरह फ्लोर टेस्ट टल जाए जिससे उसे इन विधायकों को मनाने के लिए और समय मिल जाए।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस पर संकट मंडराने के बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, झारखंड से भी कांग्रेस विधायकों के बीच असंतोष की खबरें सामने आ चुकी है। गुजरात में कॉन्ग्रेस के पॉंच विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के डर से पार्टी ने कई विधायकों को राजस्थान भेज दिया है। राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर राजस्थान और झारखंड में भी असंतोष दिख रहा है। ऐसे में कमलनाथ सरकार यदि गिरी तो इसका असर इन राज्यों की राजनीति पर भी पड़ना तय है।

हथौड़े, रॉड से लैस 100 छात्रों ने जामिया के गेट पर बोला धावा, महिला सुरक्षाकर्मियों से भी बदसलूकी

नागरिकता संशोधन कानून आने के बाद से ही जामिया मिलिया इस्लामिया सुर्खियों में है। अब यहॉं फिर से छात्रों की कारगुजारी सामने आई है। इस बार छात्रों ने कार्यवाहक कुलपति और अन्य स्टाफ के साथ अभद्रता की है। इन छात्रों ने यूनिवर्सिटी के गेट को तोड़ने और कुलपति कार्यालय पर कब्जा करने की कोशिश भी की। महिला सुरक्षाकर्मियों के साथ भी बदसलूकी की गई। ट्विटर के जरिए यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने खुद पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है।

इसके मुताबिक छात्र संगठनों AISA, SIO, MSF, JSF वगैरह ने 12 मार्च को कुलपति के घेराव की सूचना सोशल मीडिया पर जारी की थी। उन्होंने कुछ मॉंगे भी रखी थी। कुलपति अभी बाहर हैं। इसलिए, कार्यवाहक कुलपति ने यूनिवर्सिटी के डीन, निदेशकों एवं अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। पॉच प्रोफेसरों की एक कमेटी गठित की गई ताकि वे छात्र संगठनों के साथ उनकी मॉंग पर चर्चा कर सकें।

समिति ने छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ शाम के चार बजे बैठक का समय मुकर्रर किया था। लेकिन, छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया इसको लेकर उत्साहजनक नहीं थी। इसके बाद 12 मार्च को यूनिवर्सिटी के सभी गेट बंद कर दिए गए। सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया। मौके पर शिक्षक भी थे ताकि छात्र उनके सामने अपनी बात रख सके।

लेकिन, करीब 100 छात्रों की भीड़ ने यूनिवर्सिटी का गेट तोड़ने की कोशिश की। वे हथौड़े, रॉड वगैरह से लैस थे। इस दौरान कुछ सुरक्षाकर्मी जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं को चोटें आईं। इन छात्रों ने गेट को तोड़ने के साथ-साथ प्रशासनिक भवन को भी नुकसान पहुँचाया। कुलपति के ऑफिस में जबरन घुसने की कोशिश की। कार्यवाहक कुलपति जब मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे उसी समय कुछ छात्रों ने उनके ऑफिस की खिड़की की काँच तोड़ अंदर घुसने की कोशिश। छात्रों ने उनके साथ वहॉं मौजूद अन्य शिक्षकों के साथ भी बदतमीजी की।

छात्रों के इस व्यवहार को यूनिवर्सिटी ने गैर जिम्मेदाराना माना है। रजिस्ट्रार ने कहा है कि कुछ गिने-चुने छात्रों ने यूनिवर्सिटी की गरिमा को नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने तोड़फोड़ की। कार्यवाहक कुलपति को रोकने का प्रयास किया। संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ सुरक्षा गार्ड्स के साथ मारपीट जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया। इसके बाद छात्र यह धमकी देते हुए वहॉं से चले गए कि वे प्रशासन को रविवार तक का वक्त देते हैं। इसके बाद सोमवार को भी इसी तरह से घेराव और प्रदर्शन करेंगे।

यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी और छात्रों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए यूनिवर्सिटी पहले से ही बंद है।

कांशीराम जयंती पर भीम आर्मी वाले रावण ने बनाई राजनीतिक पार्टी, BSP के कई नेताओं ने थामा दामन

कांशीराम की जयंती पर रविवार को भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ रावण ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की। नोएडा में ‘आजाद समाज पार्टी’ घोषणा की गई। खबरों के अनुसार नोएडा के सेक्टर 70 स्थित बसई गॉंव में संविधान की शपथ लेकर आजाद समाज पार्टी (एएसपी) के गठन की घोषणा की। पार्टी का झंडा नीले रंग का होगा। नव गठित पार्टी का अध्यक्ष सर्वसम्मति से चंद्रशेखर आजाद को चुना गया।

रावण के इस कदम से बसपा को तगड़ा झटका लगा है। पार्टी के कई नेताओं ने एएसपी का दामन थामा है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 28 पूर्व विधायक और 6 पूर्व सांसद पहुँचे थे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार रावण के इस कदम से 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में नए समीकरण बन सकते हैं। खासकर, पश्चिम उत्तर प्रदेश में। इस महीने की शुरुआत में उसने ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बसपाप्रमुख मायावती के सवाल पर चंद्रशेखर ने कहा, “मायावती जी सब कुछ अकेले दम पर नहीं कर सकतीं। वे लंबे समय से काम कर रहीं हैं। इसलिए हम भी आंदोलन में सहयोग करने उतरे हैं। राजनीति में कोई लंबे समय तक दुश्मन नहीं रहता और उनके आशीर्वाद से हम भी खुद को राजनीति में स्थापित कर लेंगे।” इससे पहले चंद्रशेखर कई बार मायावती पर दलितों के लिए पर्याप्त काम न करने का आरोप लगा चुके हैं। मायावती ने भी चंद्रशेखर को भाजपा का एजेंट करार दे अपने समर्थकों को उससे दूर रहने को कहा था।

76 साल का वो बुजुर्ग जिसकी कोरोना ने ली थी सबसे पहले जान उसका रिश्तेदार भी वायरस से संक्रमित

देश में बढ़ते हुए कोरोना संक्रमितों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है। कर्नाटक में कोरोना वायरस के एक और मामले की पुष्टि हुई है। यह संक्रमित व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि भारत में कोरोना के कारण जान गॅंवाने वाले पहले व्यक्ति के ही परिवार का है। इसके साथ ही राज्य में इस वायरस से संक्रमित लोगों संख्या बढ़कर सात हो गई है।

कर्नाटक के कलबुर्गी में संक्रमण के चलते 76 वर्षीय व्यक्ति की मौत के मामले में मृतक के परिजनों का कोरोना टेस्ट किया गया था। कर्नाटक राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बी श्रीरामुलू ने रविवार शाम ट्वीट कर कहा कि राज्य में कोविड-19 के एक और मामले की पुष्टि हुई है। यह मामला कलबुर्गी का है। मंत्री ने कहा कि 46 वर्षीय पीडि़त पिछले सप्ताह कोरोना के संक्रमण के कारण मरे बुजुर्ग व्यक्ति की रिश्तेदार है।

मृतक के संपर्क में आए चार रिश्तेदारों के नमूने कोरोना के संदिग्ध लक्षण के कारण जाँच के लिए भेजे गए थे। रविवार सुबह इनमें से तीन की जाँच रिपोर्ट आई थी जो नकारात्मक थी लेकिन शाम में आई चौथी रिपोर्ट में कोरोना से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री ने ट्वीट के जरिए बताया कि पीड़ित को पहले से ही आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। पाँच अन्य पीडि़त बेंगलूरु के दो अस्पतालों में भर्ती हैं। मंत्री ने कहा कि सभी पीड़ितों की हालत स्थिर है।

मालूम हो कि कलबुर्गी में 76 वर्षीय मोहम्मद हुसैन सिद्दिकी की मौत के बाद इस वायरस को लेकर लोगों के अंदर भय का माहौल बना हुआ है। वे सऊदी अरब से लौटे थे। उत्तर कन्नड़ जिले के अधिकारियों ने एक ही परिवार के 14 लोगों को भी आइसोलेशन वार्ड में रखा है, जो मक्का और मदीना की धार्मिक यात्रा से लौटे थे। बता दें कि इस परिवार के सदस्यों ने सिद्दिकी के साथ सऊदी अरब की यात्रा की थी। 

गौरतलब है कि चीन के वुहान शहर से यह संक्रमण शुरू हुआ था। अब तक दुनिया के 116 देश इसकी चपेट में आ चुके हैं। कोरोना वायरस संक्रमण 5,833 लोगों की जान ले चुका है। दुनियाभर में 1,55,086 लोग इससे संक्रमित हैं। यही कारण है कि WHO ने बुधवार को इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया था। 

कॉन्ग्रेस के 18 MLA, 17 ने कहा- फुरकान को उम्मीदवार बनाओ: आलाकमान ने नहीं सुनी, JMM भी फँसी

मध्य प्रदेश में जारी सियासी उठापटक के बीच कॉन्ग्रेस के लिए कहीं से भी राहत की खबर नहीं आ रही। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, और छत्तीसगढ़ के बाद अब झारखंड के कॉन्ग्रेसी विधायकों में असंतोष की खबर सामने आ रही है। इससे झारखंड में राज्यसभा की चुनाव रोचक हो गया है। कॉन्ग्रेस नेताओं की नाराजगी के बाद अब तक बीजेपी के खिलाफ वोटिंग करने वाले निर्दलीय भी इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते हैं।

दरअसल, राज्य के कॉन्ग्रेसी विधायक फुरकान अंसारी को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। नाराज कॉन्ग्रेस नेता शनिवार (मार्च 14, 2020) को अंसारी के आवास पर जुटे भी। इस बीच कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष साेनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी काे 4 मार्च लिखा गया एक पत्र भी सार्वजनिक हुआ। इसमें कई विधायकों ने अंसारी को उम्मीदवार बनाने की अनुशंसा की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राज्य के 18 कॉन्ग्रेस विधायकों में 17 ने फुरकान के टिकट का समर्थन किया था। पत्र पर पार्टी की एकमात्र विधायक दीपिका पांडेय का हस्ताक्षर नहीं हैं जो इस वक्त विदेश में हैं। बावजूद इसके आलाकमान ने शहजादा अनवर काे उम्मीदवार बना दिया। जिस पत्र पर विधायकों के हस्ताक्षर थे वह कोलेबिरा से कॉन्ग्रेस के विधायक नमन विक्सल कोगाड़ी ने लिखी थी। इस की पुष्टि स्वयं कोलेबिरा विधायक ने भी की है।

जिस पत्र पर विधायकों के हस्ताक्षर थे वह कोलेबिरा से कॉन्ग्रेस के विधायक नमन विक्सल कोगाड़ी ने लिखी थी। इस की पुष्टि स्वयं कोलेबिरा विधायक ने भी की है।

पत्र में जिक्र किया गया है कि लोकसभा में झारखंड राज्य से किसी भी अल्पसंख्यक को प्रत्याशी नहीं बनाया गया था। जबकि अल्पसंख्यकों की कुल आबादी 16.70% है और इस कारण इस समुदाय से ही एक कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजा जाने की बात उठाई गई थी। हाईकमान को लिखे गए इस पत्र में स्पष्ट रूप से फुरकान अंसारी को राज्यसभा भेजे जाने का जिक्र किया गया है। तमाम नेताओं द्वारा प्राथमिकता के तौर पर फुरकान अंसारी का नाम आगे रखे जाने के बावजूद उनकी जगह अल्पसंख्यक कोटे से ही शहजादा अनवर को ही प्रत्याशी बनाया गया है।

चुनाव में झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन की जीत पक्की मानी जा रही है। भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच कड़ी टक्‍कर होती दिख रही है। फिलहाल मुकाबले में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। झारखंड में राज्यसभा की एक सीट निकालने के लिए 27 विधायकों की आवश्यकता है। इस लिहाज से यूपीए को 54 विधायकों का समर्थन चाहिए। कॉन्ग्रेस, झामुमो व राजद का संयुक्त संख्या बल 49 है। भाजपा की बात करें तो बाबूलाल मरांडी के आने के बाद विधायकों की संख्या 26 हो जाती है। आजसू के दो विधायकों का साथ मिला तो संख्या बल 28 होगा।

ऐसे में कॉन्ग्रेस की नैया पार होने की उम्मीद नहीं दिखती। असल में कॉन्ग्रेस को झामुमो से दो प्रथम वरीयता के वोट की आस है। ऐसा होने पर सोरेन को 27 वोट मिलेंगे। इस सूरत में वे जीत तो जाएंगे लेकिन उस स्थिति में उनके वोट बीजेपी उम्मीदवार से कम हो सकते हैं। इससे सत्ताधारी झामुमो की फजीहत हो सकती है।

जंगल में छिपी थी ₹4 लाख की इनामी सविता, CAA विरोधी नेताओं से मिलने निकली तो दबोची गई

मीडिया खबरों के अनुसार इंटेलीजेंस एजेंसियों को शक है कि कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के जंगलों में सक्रिय संदिग्ध माओवादी लीडर श्रीमथी उर्फ़ सविता, नागरिकता कानून का विरोध कर रहे संगठनों के सम्पर्क में है। मंगलवार को तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के अनईकट्टी नामक स्थान से क्राइम ब्रांच की टीम ने 4 लाख की इनामी माओवादी नेता श्रीमथी को गिरफ्तार किया था। एजेंसियों का अनुमान है कि सविता नागरिकता कानून का विरोध कर रहे नेताओं से सम्पर्क करने के लिए ही अपने ठिकाने से निकली थी।

डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आंतरिक सुरक्षा) एन.कन्नन के अनुसार, “श्रीमथी की गिरफ्तारी वेस्टर्न घाट स्पेशल जोन कमेटी की माओवादी गतिविधियों के लिए बड़ा झटका है, जो केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक के ट्राई जंक्शन क्षेत्र में सक्रिय है। वह एक दर्जन से ज्यादा केसों में वांछित है। केरल और कर्नाटक पुलिस को उसकी तलाश थी।” उसके पास से माओवादी साहित्य, पेन ड्राइव, और एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है।

एक अन्य अधिकारी ने बताया, “हमें खबर थी कि वह किसी विशेष काम के सिलसिले में जंगल से बाहर आ रही है। जिसके बाद अनईकट्टी इलाके में स्पेशल टीमों को तैनात कर दिया गया था जिन्होंने उसे धर दबोचा।” यह भी सामने आया है कि नागरिकता कानून का विरोध कर रहे लोग सरकारी कार्यालयों में भी अनिश्चितकालीन हड़ताल करवाने की फिराक में लगे हुए हैं। विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों और माओवादियों के बीच संदेहास्पद सम्पर्कों के कारण राज्य में सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

इसमें पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाना, असमाजिक तत्वों पर नजर रखना आदि शामिल है। पुलिस ने ऐसे सभी विरोध-प्रदर्शनों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की चेतावनी दी है, जिनसे कानून-व्यवस्था का संकट उत्पन्न हो सकता है। इसके पहले भारतीय इंटेलीजेंस ने सीमा पार से होती उस बातचीत को ट्रैक किया था जिसमें कुछ लोग जिनके पाकिस्तानी होने का शक है, पैसा लेकर भी नागरिकता कानून के खिलाफ ज्यादा भीड़ जुटाने में असमर्थ साबित हुए लोगों को लताड़ रहे थे।

फ्लोर टेस्ट से पहले कमलनाथ ने बॉंटे तोहफे, मंत्री ने कहा- अभी कोरोना चल रहा, परीक्षण हो यह जरूरी नहीं

सिर्फ एक दिन की बात है और ये साफ हो जाएगा कि मध्य प्रदेश में एक ‘कमल’ (कमलनाथ) के मुरझाने की घड़ी आ गई है या फिर दूसरे ‘कमल’ (बीजेपी) के खिलने का मौका आ गया है। 16 मार्च की वो तारीख तय हो गई है जब कमलनाथ की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार को बहुमत साबित करके दिखाना है। ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने और कॉन्ग्रेस के 22 बागी विधायकों के इस्तीफे के बाद से ही अल्पमत में आई कमलनाथ सरकार पर खतरे की तलवार लटकी हुई है।

मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच कमलनाथ ने आज कैबिनेट की बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। फ्लोर टेस्ट से पहले सियासी घमासान के बीच कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों का महँगाई भत्ता बढ़ा दिया है। कर्मचारियों का महँगाई भत्ता जुलाई 2019 से बढ़ाया गया है। इसके मुताबिक सातवें वेतन आयोग का लाभ पाने वाले कर्मचारियों को 12 से 17 फीसदी का महँगाई भत्ता मिलेगा और छठे वेतन आयोग लाभ ले रहे कर्मचारियों को दस फीसदी का महँगाई भत्ता मिलेगा। प्रदेश में जारी राजनीतिक जद्दोजहद के बीच यह राज्य सरकार का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।

इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कॉन्ग्रेस ने आदिवासी नेता रामू टेकाम और राशिद सोहेल सिद्दकी को मध्य प्रदेश राज्य लोकसेवा आयोग का सदस्य बनाया है। वहीं मध्य प्रदेश रेत नियमों में संशोधन करते हुए निविदा में तीन दिन की अवधि को 15 दिन कर दिया गया है। जिस सरकार के भविष्य को लेकर अटकलें लग रही हों। उसके इस तरह अचानक ताबड़तोड़ फैसले लेने पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

दूसरी ओर राज्य के राजनीतिक गलियारों में कोरोना की भी जोर-शोर से चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण का हवाला दे सरकार बहुमत परीक्षण टालने के रास्ते तलाश रही है। कमलनाथ सरकार ने भोपाल लौटने वाले सभी विधायकों का कोरोना वायरस का टेस्ट करवाने का फैसला किया है।

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री पीसी शर्मा ने कहा, “राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा की गई कि हमारे विधायक जो जयपुर से आए हैं, उनका चिकित्सकीय परीक्षण किया जाना चाहिए। साथ ही हरियाणा और बेंगलुरु में रहने वाले विधायकों का भी चिकित्सकीय परीक्षण किया जाना चाहिए।” पीसी शर्मा ने कहा कि भोपाल लौटे सभी विधायकों का कोरोना वायरस का टेस्ट होगा। कमलनाथ सरकार में मंत्री प्रदीप जायसवाल ने फ्लोर टेस्ट पर किए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, “हमारे पास बहुमत है। मगर कल फ्लोर टेस्ट हो ये जरूरी नहीं। अभी तो कोरोना चल रहा है।”

मध्य प्रदेश में ये राजनीतिक हालात ज्योतिरादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद पैदा हुए हैं। होली के मौके पर सिंधिया ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद उनके समर्थक 22 विधायकों ने भी अपने इस्तीफे दे दिए हैं। इनमें से 6 के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। अन्य इस्तीफे स्वीकार किए जाने कमलनाथ सरकार का गिरना तय हो जाएगा।