Home Blog Page 5010

दूसरी शादी करना चाहता था रियाज, नसरीन नहीं मानी तो हाथ-पैर बाँध सिर कर दिया कलम

बीते दिनों एक सिर कटा शव भारत-नेपाल सीमा स्थित यूपी के बहराइच जिले के रुपईडीहा थाना क्षेत्र के अडगोड़वा में गेहूॅं के खेत से मिला था। शनिवार को पुलिस ने इस मामले की गुत्थी सुलझा ली। पुलिस के अनुसार तलाक नहीं देने पर विदेश में रह रहे पति ने ही महिला की हत्या करवाई थी। मृतका के पति समेत पॉंच लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। इनमें से तीन गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

मृतका की पहचान फखरपुर थाना क्षेत्र के औसानपुरवा निवासी इशहाक की बेटी नसरीन के रूप में हुई है। एसपी विपिन कुमार मिश्र ने मीडिया को बताया कि इशहाक ने अपनी बेटी नसरीन की शादी रिसिया थाना क्षेत्र के इटकौरी निवासी रियाज अली के साथ की थी। रियाज पिछले तीन साल से सऊदी अरब में रह रहा है। नसरीन का ससुरालीजनों और पति से लगातार विवाद बना रहता था। इसके कारण वह मायके में रह रही थी। रियाज अपनी पत्नी को तलाक दे दूसरी शादी करना चाहता था। लेकिन नसरीन राजी नहीं थी। इसके बाद रियाज ने अपने भाइयों के साथ मिल नसरीन के कत्ल की योजना बनाई।

उसने मुंबई में रह रहे अपने भाई मेराज और फुफेरे भाई नन्हे को गॉंव भेजा। ससुराल ले जाने के बहाने देवर मेराज ने नसरीन को बाइक पर बिठाया। लेकिन घर न ले जाकर उसे अडगोड़वा के एक खेत में ले गया। वहॉं पहले से ही उसके दो अन्य साथी मौजूद थे। यहीं खेत में तीनों ने नसरीन के हाथ-पैर बॉंध सिर कलम कर दिया। इसके बाद सिर सरयू नदी में फेंक दिया। पुलिस ने बताया कि मृतका के पिता की तहरीर पर सादिक, मेराज, रियाज, सायरा व नन्हे उर्फ सलमान पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर कत्ल में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया। नन्हे, सादिक और मिराज की गिरफ़्तारी हो गई है। नसरीन की सास सायरा फरार है।

हम भाग्यशाली हैं, भारत ने हमारे लिए दवाएँ-मेडिकल टीम भेजी: मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह

कोरोना के बढ़ते हुए प्रभाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्क (SAARC/दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) देशों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे हैं। भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका सार्क (SAARC) के सदस्य हैं। पीएम मोदी ने कोविड-19 के लिए एक इमर्जेंसी फंड बनाने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि भारत इसके लिए 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद का प्रस्ताव देता है। इसका इस्तेमाल कोई भी कर सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा कि हमें कोरोना वायरस से मिलकर लड़ना होगा, सबको चौकन्ना रहने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डब्लूएचओ ने कोरोना को महामारी घोषित किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सबको मिलकर लड़ना है, घबराने की जरूरत नहीं है, विकासशील देशों के सामने बड़ी चुनौती है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में पीएम मोदी ने कहा- “जैसा कि हम जानते हैं कोविड-19 को हाल ही में महामारी घोषित किया गया है। हमारे क्षेत्र में अब तक लगभग 150 केस सामने आए हैं, हमें सतर्क रहने की जरूरत है।”

कोरोना पर सार्क देशों के साथ चर्चा में पीएम मोदी ने इस वायरस के फैलने को लेकर भारत के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि ‘तैयार रहें, लेकिन घबराएँ नहीं’ ही हमारे मार्गदर्शन का मंत्र है।

इस पर मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा- “मैं पीएम मोदी को धन्यवाद कहना चाहता हूँ। संकट के समय में हम साथ आते हैं। 2003 में सार्स के खतरे के वक्त मालदीव ने सार्क के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक आयोजित की थी। कोई देश अकेले इस वायरस से नहीं निपट सकता है, इसमें सबकी मदद चाहिए।”

उन्होंने कहा, “मालदीव भाग्यशाली है कि उसे भारत की सहायता मिली है, इसके लिए मैं पीएम मोदी और भारत के लोगों को शुभकामनाएँ देता हूँ, उन्होंने हमारे लिए दवाएँ और मेडिकल टीम भेजी।”

वहीं, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि चीन, अमेरिका या फिर ईरान आदि की चीजें उनके लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत शंघाई को-ऑपरेशन का सदस्य है और चीन का उपाय उनके लिए कितना कारगर है, यह देखने की जरूरत है।

इस चर्चा में शामिल बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने भी भारत द्वारा मदद करने पर पीएम मोदी को शुक्रिया कहा। उन्होंने कहा कि वुहान से बांग्लादेश के 23 छात्रों को निकालने के लिए वो पीएम मोदी को धन्यवाद देना चाहती हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेन्स में पीएम मोदी ने #COVID19 फंड का प्रस्ताव रखते हुए भारत की तरफ़ से शुरुआती 10 मिलियन डॉलर की रक़म देने की बात भी कही।

प्रधानमंत्री मोदी ने सार्क देशों को संबोधित करते हुए कहा कि सार्क देशों में 150 से कम मामले सामने आए हैं, इसे लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। डॉक्टर्स और नर्सों को कोरोना से लड़ने की ट्रेनिंग दी जा रही है। सार्क देशों को मेडिकल टीम को पुख्ता ट्रेनिंग देने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भारत में जनवरी में ही कोरोना की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई थी।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस का संक्रमण दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर में 150,000 से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। बेहद पुख्ता सुरक्षा के बावजूद भी भारत में भी इससे संक्रमित होने वालों की संख्या 93 पहुँच गई है। इस बीच महाराष्ट्र में कोरोना का एक और पॉजिटिव मामला सामने आया है। इसी के साथ राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है।

PM मोदी के मुरीद हुए सभी देश: कोरोना की चपेट में आए ईरान, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया देख रहे भारत की ओर

28 साल बाद टेंट से आजादी… चैत्र नवरात्रि के पहले दिन रामलला बुलेट प्रूफ के अस्थाई मंदिर में होंगे शिफ्ट

रामजन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद से अयोध्या में जन्मभूमि पर विशाल मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। पहले इस हेतु सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार ट्रस्ट बनाया गया। जिसके बाद से राममंदिर बनने की दिशा में तेजी आई है। रामलला को टेंट से निकलकर अस्थायी मंदिर में शिफ्ट करने की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, इस दिशा में तैयारी भी अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। रामलला चैत्र नवरात्रि के पहले दिन यानी 25 मार्च को फाइबर के बने बुलेट प्रूफ के अस्थाई मंदिर में शिफ्ट हो जाएंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार इसके लिए कोलकाता में तैयार बुलेट प्रूफ मंदिर शनिवार देर रात अयोध्या पहुँच गया है। यह मंदिर 21×15 फुट का है।

मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक बुलेट प्रूफ फाइबर से बना यह मंदिर अनेक सुख-सुविधाओं से लैस है। जिसमें रामलला को गर्मी से बचाने के लिए दो एसी भी लगाए जाएंगे। मंदिर के लिए चबूतरा 24 मार्च तक तैयार हो जाएगा। जिसके बाद 25 मार्च को रामलला को इस चबूतरे पर विराजमान कराया जाएगा, जहाँ वे अपने भाइयों संग टेंट से निकलकर इस मंदिर में विराजेंगे। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो गोरखनाथ मंदिर के मठाधीश भी हैं, रामलला की प्रथम आरती करेंगे।

न्यूज एजेंसी के अनुसार रामलला के प्रमुख पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने मीडिया से कहा, “27 सालों से रामलला टेंट में विराजमान हैं। अब रामलला के लिए फाइबर का मंदिर आ गया है। जिसमें उनके लिए सारी सुख-सुविधाएँ होंगी। अब रामलला को अब किसी भी तरह की समस्या नहीं होगी।” याद रहे कि अयोध्या में स्थाई मंदिर के निर्माण होने तक रामलला इसी फाइबर से बने अस्थाई मंदिर में विराजेंगे।

वहीं कोरोना के चलते मौजूद भय के बीच अयोध्या जिलाधिकारी अनुज झा ने कहा कि कोरोना वायरस का राम नवमी मेले पर कोई असर नही पड़ेगा। राम नवमी मेला निश्चित समय पर ही होगा, जिसमें हमेशा की तरह पारंपरिक धार्मिक आयोजन किए जाएँगे। मेला रोकने की कोई बात नहीं है। जिलाधिकारी ने मीडिया से आगे कहा कि एडवाइजरी जारी कर मेले में आने वाले लोगो को जागरूक किया जाएगा, जिससे मेले को सुरक्षित संपन्न किया जा सके।

PM मोदी के मुरीद हुए सभी देश: कोरोना की चपेट में आए ईरान, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया देख रहे भारत की ओर

पूरी दुनिया कोरोना वायरस के खतरों से जूझ रही है। चीन, इटली और ईरान में स्थिति भयवाह है। भौगोलिक रूप से चीन से नजदीक दक्षिण देश भी इसकी चपेट में है लेकिन भारत ने समय पर तैयारियाँ कर के कुशल प्रबंधन का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ख़ुद सारी तैयारियों पर नज़र रख रहे हैं। ईरान और इजरायल जैसे देशों ने मदद के लिए भारत को लिखा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निष्क्रिय पड़े दक्षिण एशियाई संगठन सार्क को पुनर्जीवित कर इसका सकारात्मक इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जॉइंट जी-20 रणनीति की पेशकश की है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जी-20 के बीच लिंक-अप को बढ़ावा देते हुए कोरोना के खतरे से निपटने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने कहा कि ये काफ़ी सराहनीय उपक्रम है। मॉरिसन ने कहा कि वो इस मामले में पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। वो उनके इस क़दम का समर्थन करते हैं। कुछ ही दिनों बाद जी-20 की वित्तीय समिति की बैठक होने वाली है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि ये भले ही एक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या हो लेकिन आर्थिक जगत पर इसके गहरे असर होंगे। इधर प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन से बातचीत की। मोदी और बोरिस ने अपने-अपने देशों में कोरोना से उपजे खतरे और उससे निपटने की तैयारियों को एक-दूसरे से साझा किया। यूके के स्वास्थ्य मंत्री नदिने डोर्रिस भी कोरोना वायरस से पीड़ित हैं, जिसके लिए पीएम मोदी ने सहानुभूति जताई। उन्होंने उनके जल्दी ठीक होने की कामना की।

इससे पता चलता है कि पीएम मोदी दो स्तर पर इस ख़तरे से निपटने में लगे हुए हैं। एक तो सार्क देशों के संगठन माध्यम से, जिसमें पाकिस्तानी पीएम के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, पीएम मोदी आज ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी दक्षिण एशियाई देशों को सम्बोधित कर रहे। दूसरे स्तर पर पीएम मोदी जी-20 के मंच का सकारात्मक उपयोग करना चाहते हैं क्योंकि इस समूह में विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ और कई विकसित राष्ट्र हैं, जिनके अनुभवों से भारत को सीख मिलेगी और भारत अपनी प्रबंधन क्षमता के बारे में उन्हें बताएगा।

भारत लौटने वाले सभी नागरिकों का कहना है कि जितनी तेज़ी से यहाँ पर सावधानी बरतने और मेडिकल टेस्ट वगैरह की योजना बना कर उसका कार्यान्वयन किया गया, उतनी तेज़ी से शायद ही किसी देश में काम हुआ।अब देखना ये है कि सार्क देशों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद क्या निकल कर सामने आता है।

‘इस्लाम इजाजत नहीं देता’: दुबई से लौटे 4 युवकों का कोरोना टेस्ट से इनकार, कर्नाटक में ही हुई थी पहली मौत

सवाल: भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण से पहली मौत कहॉं हुई थी?
जवाब: कर्नाटक के कलबुर्गी में।
सवाल: मृतक कौन थे?
जवाब: 76 साल के मोहम्मद हुसैन सिद्दिकी।
सवाल: वे कहॉं से लौटे थे?
जवाब: दुबई।

ऊपर के सवाल-जवाब को रट्टा मार लीजिए और अब उस खबर पर गौर करिए जो कर्नाटक से ही आ रही है। यह खबर भी कोरोना से ही जुड़ी हुई है। उसी कोरोना से जिसका संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है और इसका प्रसार रोकने के लिए सरकार एक के बाद एक कदम उठा रही है। लोगों से भी सतर्कता बरतने को कहा जा रहा है।

लेकिन कर्नाटक के भटकल शहर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के चार मुस्लिम युवकों ने मेडिकल टेस्ट कराने से इनकार कर दिया है। वे हाल ही में दुबई से लौटे हैं। पब्लिक टीवी के मुताबिक इन युवकों का कहना है कि इस्लाम मेडिकल टेस्ट की इजाजत नहीं देता है, इसलिए वो जाँच नहीं करवाएँगे।

अपडेट (17/03/2020, 21:31PM) : पब्लिक टीवी ने वो खबर हटा ली है, ऑपइंडिया इसकी वृहद् जाँच कर रहा है।

कोरोना वायरस का संक्रमण सामने आने के बाद से ही कर्नाटक की मशीनरी पूरी तरह सक्रिय है। उत्तर कन्नड़ जिला प्रशासन ने भी आइसोलेशन वार्ड सहित तमाम चिकित्सा सुविधाओं का इंतजाम किया है। बाहर से आने वाले लोगों की जॉंच भी हो रही है। मकसद है घातक वायरस का संक्रमण रोकना। जिला अधिकारी मेडिकल चेकअप के लिए डोर-टू-डोर कैंपेन भी कर रहे हैं। बावजूद इसके इन युवकों की लापरवाही चौंकाने वाली है।

खबर के अनुसार जिला अधिकारी मेडिकल टीम के लिए साथ भटकल के मुस्लिम बहुल इलाकों में मेडिकल चेकअप करने गए थे। इसी दौरान चार मुस्लिम युवकों को एहतियात के तौर पर मेडिकल टेस्ट कराने के लिए कहा गया। ये चारों शुक्रवार को दुबई से लौटे हैं। लेकिन चारों ने मेडिकल टेस्ट करवाने से मना कर दिया। अधिकारियों को धमकी देते हुए वापस जाने के लिए कहा। जाँच कराने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है।

मुस्लिम युवकों के इस रवैए ने शहर के अन्य लोगों के जीवन को भी खतरे में डाल दिया है। स्थानीय लोगों ने इन युवकों को हिरासत में लेकर जिला प्रशासन ये यह पता लगाने की मॉंग की है कि वे कोरोना वायरस से संक्रमित हैं या नहीं।

इस बीच उत्तर कन्नड़ जिले के अधिकारियों ने एक ही परिवार के 14 लोगों को भी आइसोलेशन वार्ड में रखा है, जो मक्का और मदीना की धार्मिक यात्रा से लौटे थे। बता दें कि इस परिवार के सदस्यों ने 76 वर्षीय मोहम्मद हुसैन सिद्दिकी के साथ सऊदी अरब की यात्रा की थी। वही, सिद्दीकी जिनके बारे में आपको ऊपर सवाल-जवाब में जानकारी दी गई है।

गौरतलब है कि चीन के वुहान शहर से यह संक्रमण शुरू हुआ था। अब तक दुनिया के 116 देश इसकी चपेट में आ चुके हैं। कोरोना वायरस संक्रमण 5,833 लोगों की जान ले चुका है। दुनियाभर में 1,55,086 लोग इससे संक्रमित हैं। यही कारण है कि WHO ने बुधवार को इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया था। भारत में इससे अब तक दो मौतें और 93 संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।

माँ बगलामुखी की शरण में कमलनाथ सरकार, ‘शत्रु विनाशक यज्ञ’ से दूर कर रहे राजनीतिक संकट

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के भीतर चल रहे उठापटक ने वहाँ के मुख्यमंत्री कमलनाथ को धार्मिक बना दिया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा से जुड़ने के बाद कमलनाथ ने एक अनोखे अनुष्ठान का रास्ता अपनाया है। ऐसे में मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री पीसी शर्मा ने शनिवार (मार्च 14, 2020) को देवी की शरण में जाकर उन्हें अनुष्ठान करके मनाने की कोशिश की। उन्होंने आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में विशेष किस्म का ‘शत्रु विनाशक हवन’ किया।

कॉन्ग्रेस नेता पीसी शर्मा ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, “मैं धार्मिक मामलों और आध्यात्मिक विभाग का मंत्री भी हूँ, इसलिए मैं भक्त कल्याण के लिए विभिन्न सरकारी कार्यों का जायजा लेने आया था। हम माँ बगलामुखी मंदिर में हैं, इसलिए हमारी सरकार को कोई खतरा नहीं है। कॉन्ग्रेस के और सहयोगी दलों को मिलाकर 121 विधायक हमारे साथ हैं। जब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होगा तो हम देखेंगे कि चार-पाँच अतिरिक्त विधायक हमारा समर्थन करें।”

यह हवन नलखेड़ा के देवी बगलामुखी के मंदिर में किया गया। हिन्दू धर्म में बगलामुखी देवी को शत्रुओं के दमन और उन पर विजय की कामना के लिए पूजने की मान्यता है। दरअसल, राज्य में कॉन्ग्रेस दल के 22 विधायकों के इस्तीफे के साथ ही खलबली मच गई है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस को अलविदा कहने, बीजेपी में शामिल होने और उनके समर्थक मंत्रियों, विधायकों के भी सरकार का साथ छोड़ते हुए इस्तीफे देने से मध्य प्रदेश सरकार पर सियासी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसके लिए सरकार को संकट से उबारने के लिए मंत्री गण अपने-अपने तरीके से प्रयास कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश का सियासी संकट लगातार जोर पकड़ रहा है। राज्यपाल लालजी टंडन ने फ्लोर टेस्ट के आदेश दे दिए हैं। विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा, जिसके लिए बीजेपी और कॉन्ग्रेस अपनी ताकत झोंकने के लिए तैयार है। कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों को जयपुर से वापस बुला लिया है और सीएम कमलनाथ कैबिनेट की बैठक कर रहे हैं। यही नहीं, दिल्ली में बीजेपी आलाकमान की बैठक भी जारी है, जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हिस्सा ले रहे हैं।

फिलहाल ज्योतिरादित्य सिंधिया दल के इस्तीफा दे चुके कॉन्ग्रेस के 22 बागी विधायकों में से भी ज्यादातर बेंगलुरु में ठहरे हुए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने इन 22 विधायकों में से छह के त्यागपत्र शनिवार देर शाम को मंजूर कर लिए थे, जबकि 16 विधायकों के त्यागपत्र पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है।

मेरे विधायकों को छुड़ा दीजिए, उन्हें बंदी बनाया गया है: सरकार बचाने के लिए शाह की शरण में CM कमलनाथ

‘आपकी सरकार अल्पमत में, 16 मार्च को विश्वासमत हासिल करें और संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराएँ’

MP के बाद छत्तीसगढ़ के ‘महाराज’ भी कॉन्ग्रेस सरकार से आहत, CM बघेल ने बैठक में नहीं बुलाया

मध्य प्रदेश के बाद अब उससे सटे राज्य छत्तीसगढ़ में भी कॉन्ग्रेस के मतभेद सामने आने लगे हैं। यहाँ भी पार्टी सत्ता में है और संयोग ये है कि मध्य प्रदेश की तरह यहाँ भी चर्चा ‘महाराज’ को लेकर ही हो रही है। यहाँ ज्योतिरादित्य सिंधिया की नहीं, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की बात हो रही है। वे सरगुजा के मानद राजा भी हैं। छत्तीसगढ़ में पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में तब राज्य कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अलावा सिंहदेव ने भी ख़ासी मेहनत की थी। चुनाव जीतने के बाद उनका नाम सीएम पद की रेस में भी शामिल था।

हुआ यूँ की कोरोना वायरस को लेकर अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी बैठक हुई। मुख्यमंत्री बघेल ने इस उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। विडम्बना देखिए कि जिस विभाग की कोरोना से निपटने की तैयारियों में अहम किरदार होगा, उसी विभाग के मंत्री को इस बैठक में नहीं बुलाया गया। स्वास्थ्य अधिकारी तो पहुँचे लेकिन स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव नदारद रहे। बाद में सिंहदेव ने भी इशारों-इशारों में मुख्यमंत्री कार्यालय को लपेटे में ले लिया। उन्होंने कहा कि बैठक में उनकी मौजूदगी मुख्यमंत्री कार्यालय को सुनिश्चित करनी चाहिए थी।

भाजपा के लोग तो अटकलें लगा रहे हैं कि मध्य प्रदेश की तरह अब छत्तीसगढ़ में भी कॉन्ग्रेस की अंदरूनी कलह सतह पर आने लगी है। हालाँकि, यहाँ मध्य प्रदेश या राजस्थान की तरह उसके पास अल्पमत या मामूली बहुमत वाली समस्या नहीं है, क्योंकि पार्टी के पास 90 में से 69 सीटें हैं। भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जल्द ही यहाँ भी मध्य प्रदेश जैसी स्थिति देखने को मिलेगी। अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान में भी कॉन्ग्रेस का यही हाल है। अग्रवाल ये दावा करने से नहीं चूके कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में भी कोई ‘ज्योतिरादित्य सिंधिया’ देखने को मिल सकते हैं।

हालाँकि, बाद में टीएस सिंहदेव ने इन बातों से इनकार तो किया लेकिन खुल कर कुछ नहीं कहा। ये वही नेता हैं, जो कहते रहे हैं कि वो 100 जीवन मिलने के बावजूद भाजपा में नहीं जाएँगे। हाल ही में उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया की आलोचना भी की थी, जो मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के 22 विधायकों को तोड़ कर भाजपा में पहुँचे हैं। उन्होंने कहा था कि कप्तान कोई एक ही व्यक्ति रहता है और विराट कोहली को अगर भारतीय टीम में मौका नहीं मिलेगा तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो पाकिस्तान में जाकर खेलने लगेंगे। सिंहदेव अब कह रहे कि शायद जल्दबाजी में बैठक बुलाए जाने के कारण सीएम ने उन्हें नहीं बुलाया होगा।

इधर स्वास्थ्य मंत्री की अनुपस्थिति में हुई बैठक में भूपेश बघेल ने निर्णय लिया कि कोरोना वायरस के खतरों को देखते हुए 31 मार्च तक सभी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। बघेल ने विभिन्न विभागों को अलग-अलग निर्देश देते हुए केंद्र की एडवाइजरी के अनुरुप काम करने को कहा।

4 आतंकियों का सफाया, इंटरनेट सेवाएँ बंद: हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा दोनों को J&K में झटका

रविवार को जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को इस मुठभेड़ में मार गिराया। मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन का कमांडर तारिक अहमद भी शामिल था, जबकि बाकी तीन मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हैं। फिलहाल इलाके में सर्च अभियान जारी है और एहतियातन अनंतनाग और कुलगाम में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए भी इसकी जानकारी दी है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने बताया कि वातेर्गम और अनंतनाग इलाके में सुरक्षाबलों और पुलिस के जवानों के बीच एनकाउंटर में 4 आतंकी मारे गए हैं। इस मामले के संबंध में और जानकारी आना अभी बाकी है।

कश्मीर जोन पुलिस की तरफ से जानकारी दी गई कि डायलग़ाम क्षेत्र में चले इस जॉइंट ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया है जबकि इलाके में तलाशी अभियान चल रहा है। इससे पहले कल शनिवार को उत्तरी कश्मीर के सोपोर से एक आतंकी की गिरफ्तारी हुई थी। आतंकियों की मौजूदगी की खबर मिलने के बाद चलाए तलाशी अभियान के दौरान वो पकड़ में आया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ओल्ड टाउन बारामुला से भी सुरक्षा बलों ने एक आतंकी दानिश अहमद ककरु को गिरफ्तार किया है, जिसने आरम्भिक पूछताछ में बताया कि शनिवार सुबह ही उसने आतंकी संगठन ज्वाइन किया था।

दूसरी तरफ हंदवाड़ा पुलिस ने भी आतंकियों के दो मददगारों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद हुआ है। सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि इनके पास से आतंकियों के संबंध में अहम जानकारी हाथ लग सकती है। ये दोनों आतंकी उस समय हत्थे चढ़े, जब हंदवाड़ा पुलिस ने राष्ट्रीय राइफल्स और सीआरपीएफ के साथ पंथाचैक इलाके में एक नाका लगाया था, जिसे देख ये दोनों भागने लगे थे। जिसके बाद इन्हें दौड़ा कर पकड़ लिया गया। जिन्होंने बाद में अपनी पहचान पूछताछ के दौरान नजीर अहमद वानी और वानी के रूप में बताई। इनके पास से एक एके 47 राइफल समेत कई पिस्टल और मैग्जींस बरामद हुईं हैं।

27 दंगाइयों पर गैंगस्टर एक्ट, सरगना मोहम्मद ताहिर भी शामिल: जुमे की नमाज के बाद लखनऊ में हुई थी हिंसा

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध की आड़ में उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हिंसा हुई थी। दंगाइयों के खिलाफ राज्य की योगी सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में लखनऊ पुलिस ने हिंसा के आरोपितों पर गैंगस्टर एक्ट लगा दिया है। 19 दिसंबर 2019 को जुमे की नमाज के बाद थाना ठाकुरगंज क्षेत्र में हिंसक भीड़ ने चौकी सतखंडा में आगजनी और पथराव किया था। इसको लेकर पुलिस ने 28 आरोपितों पर गैंगस्टर्स और एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, 1986 लगाए हैं।

लखनऊ पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जाँच में पुष्टि हुई है कि उन्होंने ‘गैंग’ के रूप में ‘सरकार विरोधी गतिविधियों’ की साजिश रची थी। इससे जनता में अफरा-तफरी का माहौल हो गया और कानून-व्यवस्था गम्भीर रूप से प्रभावित हुई। इन पर लखनऊ के सतखंडा इलाके में पुलिस चौकी को आग लगाने के अलावा ‘हत्या करने के इरादे से’ पुलिस पर गोलीबारी का आरोप है। साथ ही अन्य सरकारी कार्यालयों को क्षतिग्रस्त करने और लूटने और सार्वजनिक/निजी वाहनों को आग लगाने का भी आरोप है।

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) विकास चन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि 27 लोगों में उनका ‘गैंग लीडर’ मोहम्मद ताहिर भी शामिल है। उन्होंने कहा कि एक दर्जन से अधिक लोगों को मौके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि अन्य को हिंसा की तस्वीरों और वीडियो फुटेज के माध्यम से पहचाना गया था। त्रिपाठी ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज FIR में अधिकांश आरोपित अभी भी जेल में हैं और जमानत पर बाहर रहने वालों को फिर से गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जाँच में पुष्टि हुई कि इनलोगों ने हिंसा के दौरान समूह बनाकर जान-बूझकर पुलिस चौकी और पुलिस कर्मियों को निशाना बनाया। पुलिस के पास इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाने को सही ठहराने के लिए पर्याप्त सबूत थे।

गौरतलब है कि योगी सरकार ने हिंसा अथवा दंगे के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को आगजनी या तोड़फोड़ के जरिए नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ अध्यादेश लाने का फैसला किया है। 13 मार्च को यूपी सरकार ने कैबिनेट की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश रिकवरी फ़ॉर डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट अध्यादेश-2020’ अध्यादेश के मसौदे को मंजूरी दे दी।

बता दें कि योगी सरकार ने हिंसा के आरोपितों के पोस्टर भी लगाए थे जिसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपत्ति जताते हुए पोस्टर हटाने के आदेश दिए थे। इसके प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को सुनने के बाद मामला बड़ी बेंच को सौंप दिया था। इसी के बाद योगी सरकार ने इस संबंध में अध्यादेश लाने का निर्णय लिया।

कोरोना से खौफ में जिहाद: ISIS ने लड़ाकों से कहा- यूरोप में मत घुसना, लौटना भी मत, ‘वर्क फ्रॉम होम’ करो

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए दुनिया भर के देश अपने स्तर पर तैयारियाँ कर रहे हैं। सीरिया और इराक में सक्रिय आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने भी इस वायरस से बचने के लिए एडवाइजरी जारी की है। उसने अपने जिहादी लड़ाकों को बताया है कि क्या करना है और क्या नहीं करना है। इस्लामिक स्टेट के आधिकारिक न्यूज़ वीकली ‘अल-नबा न्यूजलेटर’ में इंफोग्राफिक के जरिए ये एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें IS आतंकियों को यूरोप में एंट्री नहीं मारने का फरमान सुनाया गया है।

इस न्यूजलेटर के मुताबिक IS आतंकियों को महामारी ग्रस्त यूरोप से दूर रहना है। जो आतंकी या समर्थक पहले से यूरोप में हैं उन्हें वहीं रहने, यानी वापस अपने ठिकाने पर न लौटने का फरमान सुनाया गया है। अल-नबा न्यूजलेटर इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को चीन में कोरोना वायरस के फैलने की पहली खबर आने से अब तक लगातार अपडेट देता रहा है। लेकिन ताज़ा न्यूजलेटर में इस्लामिक स्टेट ने ‘कोरोना वायरस से कैसे निबटें’ (Directives to deal with the epidemic) का फरमान जारी किया है।

यूके के अखबार ‘द संडे-टाइम्स’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस न्यूजलेटर में कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट लड़ाकों को अल्लाह में भरोसा रखना है और उसी से इस बीमारी से लड़ने की दुआ माँगनी है। जो स्वस्थ लड़ाके हैं उन्हें महामारी ग्रस्त इलाके से दूर रहना है और जो वहाँ हैं उन्हें वहाँ से बाहर नहीं आना है।

ISIS ने अपने आतंकियों को एक हदीस का हवाला देते हुए जंभाई लेते समय और छींकते समय मुँह ढँकने की सलाह दी है। साथ ही, लगातार हाथ धोने और बर्तनों को धोकर छूने और इस्तेमाल करने की सलाह दी है। ISIS द्वारा जारी निर्देशों में यह भी कहा गया है, “जिहादी लड़ाके याद रखें, महामारी अपने आप नहीं आती, अल्लाह के फरमान से आती है।”

इसके साथ ही ISIS ने अपने सभी जिहादी लड़ाकों को कोरोना के खतरे के टलने तक घर से ही काम यानी, ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने की भी सलाह दी है। दरअसल, कई संस्थान आजकल अपने वर्कर्स को कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए घर से ही काम करने की सलाह दे चुके हैं।

आपको बता दें कि अभी सीरिया में कोरोना वायरस के केस बारे में सहीं जानकारी नहीं हैं, क्योंकि युद्धग्रस्त इलाके में इससे निपटने और इस संक्रमण की पहचान के लिए कोई खास इंतजाम नहीं हैं।