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‘मोदी समुदाय विशेष को भारत से भगाना चाहते हैं तो जहाज में भरकर कौन लाए जा रहे’

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सबका साथ-सबका विकास’ की बात करते हैं तो विपक्ष ‘दलितों पर अत्याचार’ और ‘मुस्लिमों की लिंचिंग’ की फर्जी बातें कर जनता को बरगलाना चाहता है। सीएए, एनआरसी का विरोध करते हुए कहता है कि मोदी सरकार समुदाय विशेष को भगाना चाहती है। फिर ईरान जैसे इस्लामी मुल्क से जहाज में भरकर लाए जा रहे लोग कौन हैं? ये सवाल हमारा नहीं है। ये सवाल कोरोना प्रभावित ईरान से भारतीयों को निकालने की तस्वीर सामने आने के बाद लोग पूछ रहे।

भारत सरकार ने ईरान में फँसे 234 नागरिकों को वहाँ से सफलतापूर्वक निकाला है। ये भारतीय हैं। इन्हें मुसीबत से निकालना सरकार की जिम्मेदारी है। यकीनन, इन्हें निकालते वक्त इनसे इनका मजहब नहीं पूछा गया होगा। जैसा कि पीएम मोदी कहते भी हैं कि उज्ज्वला योजना का लाभ देते समय उनकी सरकार किसी से नहीं पूछती कि वो हिन्दू है या मुस्लिम।

ईरान से निकाले गए सभी लोगों की एक पहचान थी- भारतीय। लेकिन, विपक्षी दलों को ये बताना ज़रूरी है कि इनमें से अधिकतर समुदाय विशेष के लोग थे। शुक्रवार (मार्च 13, 2020) को ईरान से भारतीय नागरिकों का तीसरा जत्था आया, जिसमें 44 लोग थे। इसके लिए ईरानी फ्लाइट सेवा महन एयरलाइंस की सर्विस ली गई। ईरान में 13,000 से भी अधिक कोरोना वायरस के मामले आ चुके हैं और ये उन देशों में शामिल है, जहाँ इस संक्रमण के खतरे सबसे ज्यादा हैं। ऐसे में वहाँ से अपने लोगों को निकाल कर लाना अति-आवश्यक था। इससे पहले वुहान में फँसे कश्मीरी छात्रों को वापस लाया गया था।

वापस आए लोगों ने भारत सरकार का धन्यवाद किया कि उसने इतने मुश्किल समय में अपने नागरिकों का ध्यान रखा। फ्लाइट के भीतर की कुछ तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें सभी लोग काफ़ी ख़ुश नज़र आ रहे हैं। यहाँ एक बार बताना आवश्यक है कि जिन 234 लोगों को वापस लाया गया, उनमें से 103 ऐसे थे जो मजहबी यात्रा पर ईरान गए थे। अन्य 131 छात्र हैं, जो ईरान में पढ़ाई कर रहे थे।

केवल इतना ही नहीं, भारत सरकार ईरान में एक मेडिकल कैम्प सेटअप कर वहाँ रह रहे भारतीयों का मेडिकल टेस्ट कराने की योजना पर काम कर रही है। फिर उनके टेस्ट सैम्पल्स भारत भेजा जाएगा। ईरान में 100 से भी अधिक लोगों के इस वायरस के संक्रमण से मरने की ख़बर है, ऐसे में वहाँ रह रहे भारतीयों ने वापस अपने वतन आकर कितने राहत की साँस ली होगी, आप ही सोच लीजिए। आशंका जताई गई है कि अभी भी 6000 भारतीय नागरिक विभिन्न देशों में फँसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए सरकार प्रयासरत है।

‘एबीपी न्यूज़’ के शो ‘नमस्ते भारत’ के एंकर विकास भदौरिया ने मीडिया व लिबरलों के गिरोह विशेष पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार समुदाय विशेष को निकाल नहीं रही है, बल्कि उन्हें हवाई जहाजों में भर-भर कर वापस भारत ला रही है। उनका इशारा विपक्षी दलों और लिबरलों के उस आरोप की ओर था, जिसमें वो कहते हैं कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के माध्यम से मोदी सरकार समुदाय विशेष को देश से बाहर करने की योजना पर काम कर रही है। भदौरिया ने कहा कि सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोग शाहीन बाग़ से अपना धंधा चला रहे हैं, जिन्हें अपनी आँखें खोलने की ज़रूरत है।

चीन से 800 भारतीय नागरिकों को बचा कर भारत लाया गया है, क्योंकि इस वायरस के संक्रमण की शुरुआत वहीं से हुई और वहाँ स्थिति और भी ख़राब है। हालाँकि, स्वरा भास्कर और अनुराग कश्यप गैंग के फ़िल्मी लोगों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है, क्योंकि शायद इससे उनका प्रोपेगेंडा बेनकाब हो जाएगा। भारत न सिर्फ़ अपने नागरिकों बल्कि दुनिया भर के कई देशों की मदद कर रहा है। तभी जो जिस ईरान ने दिल्ली में हुए दंगों को लेकर मोदी सरकार को भला-बुरा कहा था, वहीं का राष्ट्रपति पीएम मोदी को पत्र लिख कर कोरोना वायरस से बचने के लिए मदद माँग रहा है। हसन रोहानी ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण हो रही दिक्कतों का रोना रोया है।

इसी तरह यमन में भी जब भारतीय फँस गए थे, तब केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने ख़ुद वहाँ जाकर सारी तैयारी की थी और वहाँ से भारतीय नागरिकों को वापस लेकर आए थे। इसके बाद 2 दर्जन से भी अधिक देशों ने अपने-अपने नागरिकों को सुरक्षित वहाँ से बाहर निकालने के लिए भारत की मदद ली थी। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय मुस्लिम कामगार जाते हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार ने उनसे भी उनका मजहब नहीं, बल्कि सिर्फ़ नागरिकता पूछी। वही नागरिकता, जिसके लिए कागज़ दिखाने होते हैं। ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ वाले गैंग के लोग तो सो रहे होंगे अपने घरों में, एसी ऑन कर। उन्हें क्या फर्क पड़ता है कि कोरोना से कौन कहाँ फँसा हुआ है। फर्क उसे पड़ता है और काम करने में वो लगा हुआ है, जिस पर आरोप लगते हैं कि वो समुदाय विशेष को मार रहा है।

9 साल के मासूम ने सिगरेट लाने से किया इनकार तो कार सवार ने मारी गोली

एक 9 साल के बच्चे को कार सवार युवक ने सिर्फ इसलिए गोली मार दी, क्योंकि उसने सिगरेट लाने से मना कर दिया। घटना गाजियाबाद के मुरादनगर की है। मुरादनगर के जलालपुर ईदगाह मार्ग पर शनिवार (मार्च 14, 2020) की शाम सिगरेट लाने से इंकार करने पर कार सवारों ने नौ वर्षीय बालक को गोली मार दी। गोली उसके पैर में लगी। लहूलुहान हालत में उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित परिवार की तहरीर पर पुलिस ने चार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

सहबिस्वा निवासी सलीम मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता है। परिवार में पत्नी परवीन, तीन बेटी और दो बेटे हैं। सबसे छोटा बेटा रिहान (9) पहली कक्षा में पढ़ता है। शनिवार शाम रिहान अपने जीजा मुनीर आलम के साथ जलालपुर ईदगाह मार्ग से पैदल घर लौट रहा था। ईदगाह नाले के पास कार सवार युवक ने मुनीर आलम को अपने पास बुलाया और सिगरेट लाने को कहा। उसने इनकार कर दिया।

आरोप है कि सिगरेट लाने से इनकार करने पर गुस्साए कार सवार युवक ने गाली-गलौज कर पिस्टल निकाल ली। पिस्टल देख मुनीर आलम और रिहान भागने लगे। दोनों को भागता देख कार सवार ने गोली चला दी। पीछे होने के कारण गोली रिहान के पैर में लगी और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। गोली चलने की आवाज सुनते ही मौके पर लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। लोगों ने कार को घेर लिया। खुद को घिरता देख कार सवार मौके से फरार हो गए। घायल रिहान को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

एसएचओ ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि पीड़ित के परिवार की तहरीर पर सहबिस्वा निवासी सचिन और तीन अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस की तीन टीम आरोपितों की तलाश में लगी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार किया जाएगा।

₹177 करोड़ का J&K बैंक घोटाला: NC नेता और पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल के बेटे हिलाल के खिलाफ CBI की चार्जशीट

सीबीआई ने 177 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले के मामले में जम्मू कश्मीर में मंत्री रहे अब्दुल रहीम राथेर के बेटे हिलाल राथेर के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने लगभग 10 दिनों पहले ही इस मामले की जाँच शुरू की है और शनिवार (मार्च 14, 2020) को हिलाल के विरुद्ध कार्रवाई की शुरुआत कर दी गई। ये चार्जशीट जम्मू की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया। चार्जशीट में जम्मू एंड कश्मीर बैंक के न्यूज़ यूनिवर्सिटी कैम्पस के ब्रांच प्रमुख इक़बाल सिंह और अरुण कपूर का भी नाम आरोपितों में शामिल है।

इस मामले की जाँच एक स्पेशल इंवेस्टिगेटिंग टीम द्वारा किया जा रहा है। इससे पहले केंद्र शाषित प्रदेश की एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा इसकी जाँच की जा रही थी। सीबीआई ने इस मामले की एफआईआर 4 मार्च को दर्ज की थी। एसबीआई जाँच के लिए जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश द्वारा निवेदन किया गया था। सीबीआई का कहना है कि हिलाल राथेर ने तत्कालीन बैंक अधिकारियों के साथ मिल कर आपराधिक साज़िश रचते हुए 177.68 करोड़ रुपए का लोन प्राप्त किया। इसके लिए तय दिशा-निर्देशों और नियमों का उल्लंघन किया गया। सीबीआई ने बताया:

“ये सारे लोन फ्लैट्स के निर्माण के लिए गए थे। आरोपित ने अपने कर्मचारियों के बैंक खातों का दुरूपयोग करते हुए इन रुपयों की हेराफेरी की और गड़बड़ियाँ की। इतना ही नहीं, आरोपित हिलाल ने बैंक के समक्ष फर्जी दस्तावेज और बिल भी पेश किए।”

इस पूरे खेल में कई बैंक अधिकारी भी मिले हुए थे क्योंकि उन्होंने आरोपित द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की पुष्टि करने की भी कोशिश नहीं की। अधिकारियों ने लोन ग्रांट करने के लिए नियमों को ताक पर रखा और इसके बाद राथेर ने रुपयों की हेराफेरी की, इसीलिए ये मनी लॉन्ड्रिंग का केस बनता है। सीबीआई ने बताया कि आरोपित हिलाल की सम्पत्तियों की जाँच की जा रही है। देश-विदेश में उसके द्वारा किए गए रुपयों के लेनदेन और अर्जित की गई संपत्ति का पता लगाया जा रहा है।

पूरा मामला ये है कि फ्लैट निर्माण के लिए जो लोन लिया गया, उसे कहीं और इस्तेमाल किया गया। सीबीआई लेनदेन की पूरी प्रक्रिया की जाँच के बाद आगे की जानकारी देगी। चार्जशीट फाइल होने के बाद इस केस की जाँच में तेज़ी आने की उम्मीद है। ये मामला हाई प्रोफाइल बन चुका है क्योंकि हिलाल के अब्बा अब्दुल रहीम राथेर 36 साल से चरार-ए-शरीफ से विधायक रह कर रिकॉर्ड बना चुके हैं और जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री भी रहे हैं।

कोरोना पर भी कॉन्ग्रेस बँटी: मोदी सरकार के प्रयासों से आनंद शर्मा संतुष्ट, राहुल-प्रियंका जता चुके हैं नाराजगी

भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के अब तक 93 मामले सामने आ चुके हैं। 2 लोगों की मौत हो चुकी है। इसका प्रसार रोकने की केंद्र सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है। इस पर काबू पाने के लिए सरकार लगातार फैसले ले रही है। अन्य देशों में फॅंसे नागरिकों को लाने के प्रयास भी जारी हैं। इसी कड़ी में ईरान में फँसे 234 भारतीय निकाले गए हैं। सभी को जैसलमेर में रखा गया है।

लेकिन ऐसा लगता है कि मसला कैसा भी कॉन्ग्रेस उस पर एक राय नहीं बना सकती। अब कोरोना से निपटने के मोदी सरकार के प्रयासों पर भी मुख्य विपक्षी दल के भीतर विरोधाभास नजर आने लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्वी केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने केंद्र सरकार के प्रयासों पर संतुष्टि जताई है। उनसे पहले पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी और महासचिव प्रियंका गॉंधी ने मोदी सरकार की कोशिशों पर नाराजगी जताते हुए इसे नाकाफी बताया था।

शर्मा ने मोदी सरकार की कोशिशों पर संतुष्टि जताते हुए कहा, “मैं सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों और कोरोना वायरस को चेक करने के लिए की गई तैयारियों को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। स्वास्थ्य मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन कर रहा है, जो इस जानलेवा वायरस से लड़ने के लिए बेहद जरूरी है।”

इससे पहले कोरोना वायरस को लेकर राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उनका कहना था कि कोरोना वायरस का संकट गहराता जा रहा है, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। सब कुछ होने के बाद भी मोदी सरकार इसके लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है। शेयर बाजार में हो रहे नुकसान का जिक्र करते हुए राहुल गाँधी ने कहा था कि वह बार-बार कह रहे थे कि कोरोना वायरस गंभीर समस्या है, लेकिन मोदी सरकार को जो एक्शन लेना चाहिए था वह नहीं लिया।

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने भी कहा था, “सेंसेक्स पूरी तरह से गिर चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया है। हर कोई परेशान है। अगर पीएम मोदी को चुनी हुई सरकार गिराने से फुर्सत मिल गई हो तो देश के लिए जरूरी विषयों पर भी बोल दें।”

बता दें कि भारत ने कोरोना से लड़ने के मामले में अमेरिका-चीन जैसे देशों को पछाड़ा है। भारत की आबादी 135 करोड़ से भी अधिक है, लेकिन फिर भी यहाँ संक्रमण बहुत ही कम फैला है, जबकि इटली जैसे छोटे देश में संक्रमण ने तबाही मचा दी है। इस समय इटली जैसा छोटा और विकसित देश नया वुहान बन गया है, लेकिन 135 करोड़ की आबादी वाले देश भारत में कोरोना वायरस नियंत्रण में है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि भारत ने बिल्कुल सही समय पर कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एयरपोर्ट पर जाँच शुरू कर दी थी, जबकि इटली ने लापरवाही बरती। 

इसके साथ ही रेस्क्यू ऑपरेशन के मामले में भारत टॉप पर है। जहाँ पाकिस्तान जैसे देश ने अपने नागरिकों को चीन में ही छोड़ दिया, वहीं भारत ने हर भारतीय को निकाल लिया। भारत से सबसे अधिक फ्लाइट भेजी गई हैं। समय रहते अपने नागरिकों को निकालने की वजह से भी यहाँ संक्रमण काफी कम है। अभी हाल ही में ईरान से भी 234 भारतीयों को निकाल कर देश वापस लाया गया है।

गौरतलब है कि चीन के वुहान शहर से यह संक्रमण शुरू हुआ था। अब तक दुनिया के 116 देश इसकी चपेट में आ चुके हैं। कोरोना वायरस संक्रमण 5,833 लोगों की जान ले चुका है। दुनियाभर में 1,55,086 लोग इससे संक्रमित हैं। यही कारण है कि WHO ने बुधवार को इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया था।

‘मास्क नहीं, मेरे ताबीज लो… कोरोना से बच जाओगे’ – UP पुलिस ने अहमद को दबोचा, खुद को बताता था ‘कोरोना वाला बाबा’

जहाँ एक तरफ सरकार लगातार सोशल मीडिया से लेकर हॉस्पिटलों के माध्यम से लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय बताने में लगी हुई है, दूसरी तरह कुछ मुल्ला-फ़क़ीर इसे लेकर न सिर्फ़ अन्धविश्वास फैला रहे हैं बल्कि मोटी कमाई भी कर रहे हैं। इसी तरह के फ़क़ीर को दबोचने में यूपी पुलिस ने सफलता पाई है, जो लखनऊ के डालीगंज क्षेत्र में दुकान लगाए हुआ था। वो खतरनाक कोरोना वायरस के संक्रमण से हुई बीमारी को ठीक करने का दावा कर रहा था।

गिरफ़्तार अहमद सिद्दीकी ख़ुद को ‘कोरोना वाले बाबा’ बताता था और साथ ही दावा करता था कि वो ताबीज से उन लोगों को कोरोना वायरस से बचाने का माध्यम दे सकता है, जिन्होंने मास्क नहीं पहना हो। उसके दावे मेडिकल की दुनिया और वैज्ञानिक तर्कों को हवा-हवाई बताते करते हुए अन्धविश्वास फैला रहे थे, इसीलिए पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में अहमद को धर-दबोचा। लखनऊ के चीफ मेडिकल ऑफिसर ने इस बाबत पुलिस को सूचित किया था। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप उस कोरोना वाले फ़क़ीर को देख सकते हैं:

एडिशनल पुलिस कमिश्नर विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि उक्त फ़क़ीर निर्दोष लोगों को कोरोना वायरस ठीक करने के नाम पर बेवक़ूफ़ बना रहा था। उसने बड़ा सा बैनर भी लगवाया था, जिसमें लिखा था कि वो ‘सिद्ध किए हुए ताबीज’ देता है, जिससे कोरोना वायरस से हुआ संक्रमण ख़त्म हो जाएगा। उसने लिखा था कि जो लोग मास्क नहीं ले सकते हैं, वो सिर्फ़ 11 रुपए में उसकी ताबीज को लेकर कोरोना वायरस से बचाव कर सकते हैं। देखिए ‘कोरोना वाले बाबा’ का पोस्टर:

‘कोरोना वाले बाबा’ फ़क़ीर अहमद सिद्दीकी ने लगवाया था ये बैनर

अहमद सिद्दीकी को शनिवार (मार्च 14, 2020) को गिरफ़्तार किया गया। वजीरगंज पुलिस दोपहर के 11 बजे उसकी उसकी तलाश करते हुए पहुँची। उसने 10 बजे से 2 बजे तक मिलने का समय रखा हुआ था। पुलिस ऐसे ही दूसरे अन्धविश्वास फैलाने वाले फकीरों की तलाश में भी लगी हुई है, जो इस तरह के दावे करते हैं। लखनऊ में अब तक 2 लोगों के इस वायरस से संक्रमित होने की सूचना है। 11 लोगों को आइसोलेशन सेंटर में डाला गया है, जिनके जाँच रिपोर्ट आने का इन्तजार है।

कॉन्ग्रेस के लिए गुजरात से बुरी खबर: 2 MLA हुए बागी, सौंपा इस्तीफा, राज्यसभा टिकट के मामले पर फँसा पेंच

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद एक ओर जहाँ मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं अब गुजरात से भी कॉन्ग्रेस के लिए बुरी खबर आई है। राज्यसभा में सीट बँटवारे को लेकर नाराज कॉन्ग्रेस के दो विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है जबकि एक अन्य विधायक के इस्तीफा देने की खबर है। बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस के दोनों विधायकों ने देर रात पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात करने के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया है। दोनों विधायकों के इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है।

जानकारी के मुताबिक, गुजरात कॉन्ग्रेस विधायक सोमा पटेल और जेवी काकडिया ने राज्यसभा में उनके समुदाय के सदस्य को न भेजे जाने से नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सोमा पटेल ने राज्यसभा सीट कोली समुदाय को देने की माँग की थी। लेकिन गुजरात से कोली समुदाय के सदस्य को टिकट नहीं दिया गया। सोमा पटेल लिमडी से विधायक हैं, जबकि जेवी काकडिया धारी से विधायक हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस ने अपने 14 विधायकों को गाँधीनगर से जयपुर रवाना कर दिया था। गुजरात कॉन्ग्रेस विधायक हर्षद रिबाड़िया ने कहा था कि हॉर्स ट्रेडिंग के भय से वे लोग खुद को राजस्थान शिफ्ट करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार के राज्यसभा चुनाव में भी कॉन्ग्रेस विधायकों को बीजेपी ने अपने पाले में लाने की कोशिश की थी। इस बार फिर से ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। इसलिए विधायकों को सुरक्षित रखकर उन्हें वोट देने की ट्रेनिंग दी जाएगी। विधायकों को एयरलिफ्ट करने के बावजूद गुजरात कॉन्ग्रेस अपने विधायकों को टूटने से नहीं बचा पा रही है।

बता दें कि गुजरात की चार राज्‍यसभा सीटों के लिए 26 मार्च को मतदान होगा। कॉन्ग्रेस और बीजेपी अपने-अपने पुराने राज्यसभा सदस्यों की जगह नए चेहरों पर दाँव लगाया है। मौजूदा विधायकों के आँकड़ों के लिहाज से दोनों पार्टियों के खाते में दो-दो सीटों के मिलने के समीकरण बन रहे हैं, लेकिन बीजेपी ने अपना तीसरा कैंडिडेट उतारकर मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया है। भाजपा ने अपने तीन उम्‍मीदवार अभय भारद्वाज, रमीराबेल बारा व नरहरी अमीन को जिताने के लिए फुल प्रुफ रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा तीन सीट जीतने का दावा कर रही है। विधानसभा में भाजपा के 103 जबकि कॉन्ग्रेस के 73 व एक निर्दलीय विधायक सहित सदस्‍य संख्‍या 74 है। एक प्रत्‍याशी को जीत दिलाने के लिए 36 मतों की आवश्‍यकता होगी।

अमित शाह को कोरोना क्यों नहीं हुआ? महिला कॉन्ग्रेस नेता ने इशारों में कही बात, नागा साधुओं पर कर चुकी हैं अश्लील टिप्पणी

जहाँ एक तरफ लोग कोरोना वायरस से बचाव के उपाय कर रहे हैं और सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि इससे प्रभावित मरीजों के इलाज की व्यवस्था की जाए, कॉन्ग्रेस के लोग बकैती करने में लगे हुए हैं। राजस्थान महिला कॉन्ग्रेस की महासचिव रीना मिमरोत ने ट्विटर पर लिखा कि ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं, भारत हर मामले में पीछे है। रीना इस ट्वीट के द्वारा इशारा करना चाहती थीं कि ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री की तरह अमित शाह (जो भारत के गृहमंत्री हैं) भी कोरोना से संक्रमित हो जाएँ। वैसे, ये नया नहीं है। इससे पहले भी पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के लिए तरह-तरह की बीमारियाँ होने से लेकर मौत तक की दुआ माँगी गई है।

रीना के लिए भी यह पहला मौका नहीं है, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोरने के लिए इस तरह की हरकत की हो। रीमा मिमरोत ने नागरिकता कानून के लिए कागज ना होने की बात को लेकर चुटकुला बनाने की कोशिश की थी और साथ ही उन्होंने हिन्दू नागा साधुओं को अपमानित करने का प्रयास किया था। रीना मिमरोत ने एक ट्वीट शेयर किया था- “नागा साधु भी CAA के खिलाफ, बोले हमारे पास काग़ज़ नहीं है, जो है वही दिखाएँगे, चलेगा क्या?” कई लोगों ने रैना के इस ट्वीट को अश्लील बताया था।

रीना मिमरोत के ताज़ा ट्वीट पर भी लोगों ने उनकी आलोचना की। एक व्यक्ति ने रीना को याद दिलाया कि कल को अगर उन्हें कुछ होगा तो यही सरकार और यही गृहमंत्री उनके इलाज की व्यवस्था करेंगे। एक यूजर ने पूछा कि वो राहुल गाँधी को ख़ुश करने के लिए आख़िर कितना गिरेंगी? एक आक्रोशित ट्विटर यूजर ने लिखा कि अगर ऐसा है तो फिर राहुल गाँधी को ही देश का गृहमंत्री बना देना चाहिए। एक अन्य यूजर ने उसे ‘गन्दी मानसिकता’ करार दिया।

अव्वल तो ये कि इन सबके बावजूद रीना ने अपनी ट्वीट को डिलीट नहीं किया। इसके बाद भी वो ट्विटर पर हँसी-मजाक के नाम पर कुछ-कुछ परोसती रहीं। राजस्थान महिला कॉन्ग्रेस की महासचिव ने इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हमशक्ल की बिकनी में युवतियों के साथ क्रीड़ा करते हुए फोटो शेयर की थी और बताया था कि ये ट्रम्प हैं। हालाँकि, झूठ पकड़े जाने के बाद उन्होंने वो ट्वीट डिलीट कर लिया था। तब रीना ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा था- “नागपुरिया संघियों की शाखा से ज्ञान प्राप्त करके अपने संस्कारों को सार्वजनिक करते अंधभक्तों के ज्येष्ठ पिताजी, जिनके प्रचार प्रसार में इनके पप्पा लगे हैं। आ थू ?” ट्रम्प के बहाने रीना ने संघ पर निशाना साधा था।

बता दें कि हाल ही में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी पीएम मोदी के कोरोना से संक्रमित होकर मौत होने की दुआ की थी। लोगों ने कहा था कि जिस देश ने उन्हें इतने बड़े पद पर बिठाया, वो उसी देश के पीएम के लिए इस तरह की दुआ कर रहे हैं, जो उनकी एहसान फरामोशी को दिखाता है। हालाँकि, बाद में उन्होंने इसके लिए माफ़ी माँग ली थी।

पूर्व CEC कुरैशी की ‘दुआ’- PM मोदी को हो जाए कोरोना: विवाद के बाद ट्वीट डिलीट, मॉंगी माफी

‘चमगादड़, कुत्ते, बिल्लियाँ खा रहे, उनका खून-पेशाब पीते हैं’ – कोरोना पर अख्तर का गुस्सा, चीन वाली बात पर घिघियाए

हटा दो, काट दो 508 पेड़: शिवसेना के आदेश पर स्वरा गैंग, बॉलीवुड से लेकर फर्जी पर्यावरण प्रेमी सब चुप

मुंबई के आरे में मेट्रो-3 के लिए कारशेड बनाने के लिए पिछले दिनों जंगल से कुछ पेड़ काटे गए थे। जिसे लेकर काफी हो-हल्ला हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। इसके बाद कोर्ट ने पेड़ काटने पर रोक लगा दी। लेकिन अब राज्य की उद्धव सरकार ने 508 पेड़ों को हटाने का निर्णय लिया है, जिसमें 162 पेड़ काटे जाने हैं। यह पेड़ मेट्रो-2A के लिए काटे जाएँगे। इन पेड़ों को गोरेगाँव और अंधेरी के DN नगर से लेकर कांदिवली के लालजीपाड़ा तक काटा जाना है।

किसी भी राज्य में सरकार बदलने पर और किसी सरकार के सत्ता में आने पर किस तरह से वहाँ की स्थितियाँ बदलती हैं, ये उसी का उदाहरण है। जब बीजेपी की सरकार में कारशेड बनाने के लिए पेड़ काटे जा रहे थे, तो शिवसेना ने इसका भरपूर विरोध किया था। उद्धव ठाकरे ने तो यहाँ तक कह दिया था कि आगामी सरकार हमारी होगी और एक बार हमारी पार्टी सत्ता में आई तो हम आरे में पेड़ों की हत्या करने वालों से अच्छे तरीके से निपटेंगे। उन्होंने कटाई का विरोध करते हुए कहा था कि ये जो हत्यारे अधिकारी बैठे हैं, वो पेड़ों के कातिल हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। मगर अब उन्होंने खुद ही पेड़ों को काटने का आदेश दिया है।

जब उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली तो उन्होंने आरे में आंदोलन करने वाले करीब दो दर्जन ‘पर्यावरण प्रेमियों’ के खिलाफ दर्ज किए गए आपराधिक मामलों को वापस ले लिया था। उन्होंने मुख्यमंत्री बनते ही घोषणा करते हुए कहा था कि मेट्रो नहीं रुकेगा लेकिन आरे में अब पेड़ तो क्या, एक पत्ता भी नहीं काटा जाएगा। लेकिन ये क्या… उन्होंने तो सत्ता में आने के चंद महीनों बाद ही पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी।

और परिवर्तन तो देखिए… इस बार किसी मीडिया वालों ने इस खबर को बढ़-चढ़कर नहीं दिखाया। बढ़-चढ़कर तो छोड़िए… कुछ मीडिया हाउस के अलावा किसी ने इसे कवर ही नहीं किया, जैसे कुछ हुआ ही न हो! बड़े-बड़े तथाकथित पत्रकार, पर्यावरण संरक्षक, तथाकथित कार्यकर्ता और अभिनेता-अभिनेत्री के कानों पर इस खबर की जूँ तक न रेंगी। जी हाँ, मैं उन्हीं लोगों की बात कर रही हूँ जो आरे में पेड़ कटने के समय (भाजपा सरकार के वक्त) लंबे-लंबे भाषण और धरना प्रदर्शन दिया करते थे। 

उस समय तो इस कदर हंगामा हुआ था कि बॉलीवुड से लेकर मीडिया हाउस और तथाकथित एक्टिविस्ट तो जैसे पगला से गए थे। लेकिन अब… अब तो जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। क्योंकि वहाँ की सरकार जो बदल गई है। अब वहाँ पर बीजेपी जो नहीं है। अब वहाँ पर शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी की सरकार है! और इन्हें तो विरोध बस बीजेपी का करना है… सही या गलत के इनके पैमाने राजनीतिक चश्मे के कारण बदलते रहते हैं।

महाराष्ट्र बीजेपी के नेता किरीट सोमैया ने भी इस पर तंज कसते हुए उद्धव सरकार को अजीब सरकार बताया। बीजेपी के पूर्व लोकसभा सांसद ने शिवसेना को याद दिलाते हुए कहा कि यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अगाड़ी सरकार थी, जिसने आरे में ‘पेड़ों को बचाने’ के लिए मुंबई मेट्रो-3 कार शेड के निर्माण पर रोक लगा दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, लेकिन उन्होंने प्रतिबंध नहीं हटाया।

आरे जंगल से पेड़ काटने के फैसले के विरोध में सेलिब्रिटियों ने भी तब काफी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। बॉलीवुड एक्ट्रेस दिया मिर्जा ने भी इसका विरोध किया और वीडियो भी शेयर किया था। दिया मिर्जा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “क्या यह अवैध नहीं है? आरे में अभी यह हो रहा है। क्यों? कैसे?” दिया मिर्जा ने अपने ट्वीट में बीएमसी, आदित्य ठाकरे, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस को टैग किया था।

स्वरा भास्कर ने भी इस फैसले का विरोध किया था। उन्‍होंने ट्वीट किया था, “और यह शुरू हो गया। आरे जंगल नष्‍ट हो रहा है।” एक अन्य ट्वीट में स्वरा ने लिखा, “शर्मनाक। इस वीडियो में आरे फॉरेस्ट के पेड़ को गिरते हुए दिखाया जा रहा है।”

वहीं बॉलीवुड फिल्‍ममेकर ओनिर ने लिखा था, “अंधेरे के आवरण में कुल्हाड़ी हमारे पेड़ों पर गिरती है। RIP #AareyForest … हम आपको नहीं बचा पाए। मेरा दिल यह जानने के लिए टूट जाता है कि सुबह तक कई गर्वित खड़े पेड़ मानव लालच में पड़ गए होंगे।”

फरहान अख्‍तर ने भी विरोध में ट्वीट करते हुए लिखा था, “रात में पेड़ों को काटना एक दयनीय प्रयास है, जो लोग ऐसा करने जा रहे हैं वो भी जानते हैं कि यह गलत है।” 

अब ये पर्यावरण प्रेमी लोग कहाँ हैं? क्यों नहीं अपना विरोध दिखा रहे? अभी इतनी शांति क्यों है? क्या ये पर्यावरण के साथ अन्याय नहीं है? क्या ये दयनीय नहीं है? बॉलीवुड से लेकर पत्रकार और तथाकथित कार्यकर्ताओं का ये दोहरा रवैया दर्शाता है कि इन्हें पर्यावरण से कोई प्रेम नहीं है, बल्कि ये तो बस लाइमलाइट में आने की कोशिश करते हैं – वो भी सिर्फ BJP को टारगेट करके!

मेरे विधायकों को छुड़ा दीजिए, उन्हें बंदी बनाया गया है: सरकार बचाने के लिए शाह की शरण में CM कमलनाथ

मध्य प्रदेश का सियासी संकट गहराता जा रहा है। राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को विधानसभा में बहुमत साबित करने का निर्देश जारी कर दिया है। विधायकों के इस्तीफे के बाद अब संकट में पड़ी कॉन्ग्रेस को बहुमत जुटाने में पसीने छूट रहे हैं। शनिवार (मार्च 14, 2020) की लगभग आधी रात को राजभवन से इस संबंध में एक पत्र राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ को भेजा गया। राज्यपाल टंडन ने सीएम को लिखा कि मध्य प्रदेश की हाल की घटनाओं को मद्देनजर रखते हुए ये प्रतीत होता है कि कॉन्ग्रेस सरकार ने सदन का विश्वास खो दिया है और ये सरकार अब अल्पमत में है।

वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ अब अमित शाह की शरण में पहुँच गए हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिख कर मदद की गुहार लगाई है। कमलनाथ ने अपने पत्र में निवेदन किया है कि शाह बेंगलुरु एवं अन्य जगहों में ‘बंधक बनाए गए’ कॉन्ग्रेस के 22 विधायकों की रिहाई सुनिश्चित करें ताकि ये विधायक विधानसभा के सत्र में शामिल हो सकें। इससे ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस ख़ुद अपनी सरकार बचाने को लेकर आश्वस्त नहीं है और उसे पता है कि सदन में वो अल्पमत में है।

कमलनाथ ने अमित शाह को चार पृष्ठों का लम्बा-चौड़ा पत्र लिख कर अपने विधायकों को ‘छुड़ाने’ का आग्रह किया है। उन्होंने अमित शाह से कहा है कि देश का गृहमंत्री होने के नाते वो अपनी शक्तियों का प्रयोग करें और कॉन्ग्रेस के ‘बंदी बनाए गए’ 22 विधायकों को मध्य प्रदेश तक पहुँचाने का रास्ता साफ़ करें ताकि 16 मार्च को होने वाले विधानसभा सत्र में वो सभी भाग ले सकें। कमलनाथ ने लिखा कि विधायक ‘बिना भय और लालच’ के अपनी जिम्मेदारियों का वहन करने में सक्षम हो सकें, इसके लिए गृहमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए।

सीएम ने उन विधायकों को सीआरपीएफ की सुरक्षा देने की माँग भी की है। उन्होंने कहा है कि वो राज्य के मुख्यमंत्री हैं और उन सबकी सुरक्षा का दायित्व भी उन्हीं पर है। उन्होंने कहा है कि अगर कर्नाटक पुलिस उन विधयकों को ‘रिहा’ करवा देती है तो उनकी सरकार उच्चतम स्तर पर उनके लिए सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। उन्होंने दावा किया कि ये सभी विधायक डरे हुए हैं और विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने से इन्हें रोका जा रहा है। बता दें कि ज्योतोरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके गुट के सभी विधायक कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे चुके हैं।

सिर्फ एक छड़ी लेकर पहरा दे रहा था चिंटू: दिल्ली दंगों में नजमा ने फँसाया, CCTV ने दिलाई जमानत

नार्थ-ईस्ट दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों में एक आरोपित सीसीटीवी फुटेज के कारण ही पकड़ा गया और फिर उसी फुटेज के कारण ज़मानत पर भी रिहा हो गया। असल में वो व्यक्ति जिस सीसीटीवी फुटेज के कारण आरोपित बना था, उसी ने उसे राहत भी दिलाई। अदालत ने माना कि फुटेज में उक्त आरोपी अपने हाथ में सिर्फ छड़ी लेकर खड़ा तो दिख रहा है, लेकिन वह किसी के घर में चोरी करता हुआ या आगजनी करता हुआ नहीं दिख रहा, जैसा कि उस पर आरोप है।

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज डॉक्टर सुधीर कुमार जैन ने उक्त सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपित को ज़मानत दी। आरोपित का नाम चिंटू उर्फ़ संतोष है, जिसे सीसीटीवी फुटेज के तथ्यों एवं परिस्थितियों की जाँच के बाद रिहा किया गया। 25,000 रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही रकम की जमानती राशि देने का आदेश देते हुए कोर्ट ने संतोष को रिहा किया। अपनी जमानत की अवधि में उसे मामले के गवाहों को किसी तरह का लालच या धमकी न देने व साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न करने को भी कहा गया है। जमानत देते हुए अदालत ने कहा:

‘हाल ही में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में बड़े पैमाने पर दंगे हुए और जम कर हिंसा हुई। इन दंगों में सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचा। कई लोगों को चोटें आईं और 50 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। चिंटू पर सिर्फ इतना आरोप है कि उसके पास एक छड़ी थी और वह किसी दूसरे के घर के सामने खड़ा था। ऐसा कोई सबूत नहीं, जिससे यह लगे कि आरोपी घर से चोरी के अपराध में शामिल था।”

चिंटू के ख़िलाफ़ उस्मानपुर थाने में नजमा नामक महिला ने मामला दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि चिंटू ने उसके घर से सारी चीजें चोरी कर ली। आरोपी की ओर से जमानत की दरख्वास्त करते हुए वकील मनीष भदौरिया ने अदालत को बताया कि चिंटू पर अपने पूरे परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी है, जिसमें उसकी गर्भवती पत्नी भी शामिल है। गृह मंत्रालय में कार्यरत चिंटू अपने घर व जान-माल की सुरक्षा के लिए बाहर पहरा दे रहा था।

वकील ने भरोसा दिलाया कि चिंटू जाँच में पूरी तरह सहयोग करेगा और दावा किया कि उसकी चोरी में कोई भूमिका नहीं है। वहीं अर्जी का विरोध करते हुए सरकारी वकील ने सीसीटीवी में एक व्यक्ति को घर का दरवाजा तोड़ते जबकि दूसरे को छड़ी लेकर खड़ा देखे जाने को लेकर अपना तर्क रखा। वकील ने दावा किया कि जाँच एजेंसियों द्वारा छानबीन पूरी करने तक आरोपित को ज़मानत न दी जाए।