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कल शाम से शुरू हो जाएँगी यस बैंक की सारी सेवाएँ, कैश की कमी नहीं: विपक्षी प्रोपेगंडा फेल

केंद्र सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि यस बैंक के खाताधारकों का रुपया नहीं डूबेगा। विपक्षी दलों और वामपंथियों द्वारा लगातार अफवाह फैलाई जा रही थी कि यस बैंक के डूबने में सरकार का हाथ है और इसके जितने भी खाताधारक हैं, उन सभी के रुपए कभी वापस नहीं मिलेंगे। बाद में जब पता चला कि यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी की पेंटिंग पूरे 2 करोड़ रुपए में ख़रीदी थी, तब से कॉन्ग्रेस नेताओं ने चुप्पी साध ली। राणा कपूर की तीनों बेटियों के नाम भी इस धोखाधड़ी में सामने आए हैं।

अब ताज़ा ख़बर आई है कि बुधवार (मार्च 18, 2020) की शाम 6 बजे के बाद से यस बैंक के ग्राहक सभी प्रकार की बैंकिंग सेवाओं व सुविधाओं का पूर्ववत लाभ उठा सकेंगे। बैंक के नए प्रबंध निदेशक प्रशांत कुमार ने उक्त जानकारी दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के जानकारी दी कि बैंक के पास नकदी की कोई कमी नहीं है। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 मार्च को यस बैंक के सारे कामकाज पर पाबंदी लगा दी थी। बैंक के ग्राहकों को 3 अप्रैल तक खाते से 50,000 रुपए तक निकालने की अनुमति दी गई थी। यस बैंक के अधिकारियों ने कहा:

“यस बैंक की सभी ऑनलाइन सेवाएँ पूरी तरह से काम कर रही है। बैंक के एटीएम में नकदी की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। एसबीआई अपने शेयर्स बेचने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। लेकिन, मैं विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि अगले तीन वर्षों तक यस बैंक का एक भी शेयर नहीं बेचा जाएगा।”

यस बैंक ने अपने बैंक के निदेशक मंडल के पुनर्गठन की भी मंजूरी दे दी है। रिजर्व बैंक ने ही प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया था। वो बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं। वो एसबीआई के मुख्य वित्त अधिकारी और उप प्रबंध निदेशक के रूप में काम कर चुके हैं। वहीं पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व गैर-कार्यकारी निदेशक सुनील मेहता को यस बैंक का गैर-कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यस बैंक विदेशी निवेशकों का विश्वास जीतने में भी कामयाब सिद्ध होगा। बैंक के अधिकारियों ने कहा है कि खाताधारकों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

कानपुर हिंसा: उपद्रवियों पर योगी सरकार का शिकंजा, नोटिस के बाद जमा कराई गई ₹80,856 जुर्माने की पहली किस्त

सीएए के नाम पर यूपी में हिसा करने और उसकी आड़ में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले उपद्रवियों को योगी सरकार किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहती और कानून के तहत उसे सबक भी सिखाना चाहती है। यही कारण है कि योगी सरकार की सख्ती के चलते कानपुर में हिंसा करने वाले उपद्रवियों ने जुर्माने की पहली किस्त को जमा करा दिया है।

यूपी पुलिस द्वारा उपद्रवियों के खिलाफ की जा रही सख्त कार्रवाई से घबराए बेकनगंज थाने के 6 उपद्रवियों ने सिटी मजिस्ट्रेट के नोटिस पर सोमवार को खुद पर लगे जुर्माने के 80,856 रुपए जमा करा दिए। नोटिस की सूची में शामिल बेकनगंज निवासी यासीन, नौबस्ता निवासी मोहम्मद अरमान, बेकनगंज निवासी गुरगुट, इरफान, लियाकत और दिलशाद ने मिलकर 80,856 रुपए का चेक सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा करा दिया। दरअसल, कानपुर में हुई हिंसा के लिए सरकार द्वारा गठित की गई जाँच कमेटी ने यतीमखाना में 2 लाख 80 हजार रुपए के नुकसान का आकलन करके वसूली का नोटिस 21 लोगों को जारी किया था।

उधर बाबरपुर पुलिस ने हिंसा में शामिल एक और आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे पुलिस ने कोर्ट में पेश किया और वहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। दरअसल, बवाल के दौरान आरोपित को गोली लगी थी। इसके बाद अस्पताल में भर्ती कराने के बाद आरोपित अस्पताल से फरार हो गया था, जिसकी सीसीटीवी फुटेज की मदद से जमील के रूप में पहचान हुई थी। वहीं बाबूपुरवा हिंसा में अब तक 16 आरोपितों को पुलिस जेल भेज चुकी है, जबकि 19 फरार चल रहे हैं। फरार आरोपितों के खिलाफ बाबूपुरवा पुलिस कुर्की की कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।

गौरतलब है कि 21 दिसंबर को सीएए विरोध के नाम पर उपद्रवियों ने जुमे की नमाज के बाद यतीमखाना और बाबूपुरवा में जमकर उत्पात मचाया था। इस दौरान की गई हिंसा में उपद्रवियों ने पब्लिक और सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले तो किया ही साथ ही पत्थरबाजी में दर्जनों गाड़ियों को अपना निशाना बनाया था। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने पुलिस पर गोली चलाने के साथ पेट्रोल बम भी चलाए थे। इसके बाद योगी सरकार ने सरकारी नुकसान की भरपाई उपद्रवियों से ही करने के निर्देश दिए थे।

कानपुर हिंसा में 12 लोगों को गोली लगी थी और 263 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके बाद पहले तो यूपी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वीडियो की मदद से उपद्रवियों की पहचान की। इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए उन पर जुर्माना लगाया। इसे वसूल करने के लिए प्रशासन ने पहले तो नोटिस जारी किया और फिर अल्टीमेटम भी दिया। इसके बाद दंगाई अपने और अपनी संपत्ति को बचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

इमरान खान: कोरोना के सम्मान में, कटोरा लिए मैदान में

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए विश्व का हर देश इस समय अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस बार भी सिर्फ़ अमीर देशों से अपने लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाते ही दिख रहे हैं।

अभी हाल ही में जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्क देशों के साथ बुलाई गई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग में गैर मौजूद होकर ऐंठ दिखाई थी और एक जूनियर मंत्री को भेज दिया था। वहीं, देश में कोरोना के बढ़ते मामले देखकर उनकी सारी हेकड़ी निकल गई।

पाकिस्तान में कोरोना वायरस के बढ़ते असर को देखते हुए उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बड़े देशों से गुहार लगाई कि उनको पाकिस्तान को लोन देना चाहिए और आर्थिक मदद देनी चाहिए ताकि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सके। बता दें कि पाकिस्तान में मंगलवार को कोरोना वायरस की वजह से पहली मौत हो गई है और संक्रमिक लोगों का आँकड़ा 190 तक पहुँच गया है।

एक इंटरव्यू में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से गरीब देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। अगर यहाँ पर हालात बिगड़ते हैं तो मेडिकल व्यवस्था नहीं संभाल पाएगी, ऐसा सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि भारत में भी होगा। क्योंकि कोरोना से लड़ने के लिए न उनके पास न क्षमता है और न ही संसाधन। उन्होंने इस साक्षात्कार में इकोनोमिक स्लोडाउन के कारण होने वाली गरीबी और भुखमरी पर भी अपनी चिंता व्यक्त की।

इमरान खान ने कहा कि यही कारण है कि बड़े देशों को छोटे देशों की मदद करनी चाहिए और आर्थिक मदद देनी चाहिए। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान का उदाहरण दिया और कहा कि ईरान पर सैंक्शन लगे हुए हैं, इस वजह से वहाँ पर मौतें हो रही हैं।

गौरतलब है कि आज समृद्ध देशों से आर्थिक मदद, लोन आदि की माँग करने वाले इमरान खान ने बीते दिनों जब सार्क देशों की प्रेस कॉन्फ्रेंसिंग में अपने एक जूनियर मंत्री को भेजा था, उस समय न केवल इमरान खान का इस मसले पर गैर जिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला था, बल्कि उनके जूनियर मंत्री ने भी इस मसले की जगह जम्मू कश्मीर का रोना रोया था और सभी को मुद्दे से भटकाने की कोशिश की थी। डॉ. जफर मिर्जा ने कहा था कि सार्क के सभी सदस्य देशों में संक्रमण फैला हुआ है। हम दक्षिण एशिया के सभी पीड़ितों के लिए समान रूप से चिंतित हैं। जम्मू-कश्मीर में भी कोरोना के मामले सामने आए हैं। वहाँ हेल्थ इमरजेंसी को देखते हुए सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाया जाना चाहिए।

यहाँ, बता दें कि इस विडियो कॉनफ्रेंस में नरेंद्र मोदी ने सार्क देशों से 10 मिलियन डॉलर (74 करोड़ रुपए) का इमरजेंसी फंड बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि सार्क देश अपनी इच्छा से अनुदान दे सकते हैं। साथ ही पीएम मोदी ने बताया था कि हमने आपदा पीड़ितों की निगरानी के लिए एक पोर्टल तैयार किया है। इसे सार्क के सभी सदस्य देशों के साथ साझा किया जाएगा।

योगी सरकार के प्रयासों से इंसेफ्लाइटिस चाइल्ड डेथ पर पाया गया कंट्रोल, 2,817 से 234 पर आया आँकड़ा

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को सत्ता संभालते हुए 3 साल पूरे होने वाले हैं। इन तीन सालों के पूरे होने के बीच में योगी सरकार ने कई ऐसे काम किए हैं जिन्हें आने वाली सरकारें हमेशा याद रखेंगी और शायद उनसे सीख भी लें। इन्हीं कार्यों में से एक कार्य गोरखपुर इंसेफ्लाइटिस चाइल्ड डेथ पर कंट्रोल पाना भी हैं।

दरअसल, आज से 3 वर्ष पहले योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक व धार्मिक कर्मभूमि रहा गोरखपुर जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में था। उस समय पूरे प्रदेश में हजारों की संख्या में बच्चों की मौतें होती थीं। मगर 2017 में जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली, तब उन्होंने इस समस्या को बड़ी चुनौती के रूप में लिया।

पिछली सरकारों की निष्क्रियता के कारण सालाना मृत बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही थी। उस वर्ष भी करीब 500 से अधिक बच्चे अपनी जान गँवा चुके थे और गोरखपुर व आसपास के 14 जिले इस बीमारी की चपेट में थे। इसके बाद 2017 में गोरखपुर के अस्पताल में कई बच्चों की मौत होने से ये मामला बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया।

बस फिर क्या…. योगी आदित्यनाथ ने इस बीमारी से निपटने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएँ तैयार कीं। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) और UNICEF जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी की और उनके साथ मिल कर एक एक्शन प्लान पर काम शुरू किया।

इस समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा और व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया गया। स्वास्थ्य व सफाई को लेकर जागरूकता फैलाने के तहत एक बड़ा अभियान चलाया गया। प्रभावित क्षेत्रों से सूअरों को अलग किया गया। फॉगिंग के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीम को लगाया गया।

बच्चों के माता-पिता को घर-घर जाकर यह समझाया गया कि वे अपने बच्चों को मिट्टी की पुताई वाली जमीन पर न सोने दें। पीने का पानी के लिए इंडिया मार्क-2 वाटर पाइप का और हैंड पंप का प्रयोग करने की सलाह दी गई।

इस बीमारी से जुड़े लक्षणों के बारे में हर परिवार को बताया गया और किसी भी आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस नंबर पर कॉल करने को कहा गया। इन सभी कार्यों के परिणाम भी अच्छे मिले। जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण हुई मौतों में एक वर्ष के भीतर दो तिहाई की कमी आई। जहाँ 2017 में इस बीमारी से 557 जानें गई थीं, 2018 में यह आँकड़ा 187 रहा।

साल 2019 में सरकार द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार, बच्चों की मौत के कारण विवादों में रहे गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही साल 2016 में 2,817 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें 426 की मौत इस बीमारी के कारण हुई। इसके बाद साल 2017 में करीब 2,998 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से मरने वाले बच्चों की संख्या 380 रही। ऐसे ही साल 2018 में ये आँकड़ा और कम हुआ। इस बार सिर्फ़ 1,289 केस अस्पताल में आए। इनमें मृत बच्चों का दर गिरके 125 रह गया और साल 2019 आते-आते सरकार के प्रयासों ने इस बुखार के प्रकोप को खत्म तो नहीं किया लेकिन काफी हद तक कम कर दिया। क्योंकि पिछले साल केवल 234 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए जिनमें सिर्फ़ 22 बच्चों को नहीं बचाया जा सका। बाकी बच्चों को बचाने में अस्पताल सफल रहा।

आज अगर हम 2016 से 2019 तक के ये घटते आँकड़े देखें। तो मालूम पड़ेगा कि योगी सरकार से पहले तक बच्चों का इस बीमारी से ग्रस्त होना एक रूटीन प्रक्रिया हो गई थी। लेकिन प्रशासन ने अपने प्रयासों से इस पर काबू पाया और लगातार बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में गिरावट आई। अब उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों में प्रदेश से इस बुखार का प्रकोप खत्म हो जाएगा और संसाधन-सुविधाएँ इतनी होंगी कि किसी नवजात को इससे पीड़ित न होना पड़े।

बता दें, योगी सरकार की इस कामयाबी के लिए पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान उनकी खूब तारीफ की थी और कहा था कि कुछ स्वार्थी थे जिन्होंने योगी आदित्यनाथ के काम को नकार दिया और निर्दोष लोगों की मौत के लिए उन्हें दोषी ठहराया। मगर अब एक बीमारी जो दूषित वातावरण के कारण फैल रही थी वो अब खत्म होने की कगार पर है। पीएम मोदी ने इस दौरान बताया था कि संसद का एक भी सत्र ऐसा नहीं जाता था जब योगी आदित्यनाथ सबके समक्ष इस मुद्दे को नहीं उठाते थे और सबको इस बात से अवगत नहीं कराते थे कि आखिर कैसे प्रदेश में बच्चों की मृत्यु की संख्या बढ़ रही है।

’20 और MLA छोड़ना चाहते हैं कॉन्ग्रेस, लेकिन उन्हें कैद में रखा गया है’ – बागी विधायकों का दावा, परेशान कमलनाथ!

मध्य प्रदेश में जारी फ्लोर टेस्ट पर घमासान के बीच मंगलवार (मार्च 17, 2020) को कॉन्ग्रेस के बागी विधायकों ने दावा किया है कि पार्टी के 20 और विधायक उनके साथ जुड़ना चाहते हैं और आने वाले दिनों में वो भाजपा में शामिल होने की सोच रहे हैं। बेंगलुरु पहुँचने और अपने इस्तीफे भेजने के बाद पहली बार पत्रकारों से बात करते हुए 22 विधायकों ने कहा कि वे किसी भी परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हैं।

एक महिला विधायक ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “ज्योतिरादित्य सिंधिया हमारे नेता हैं। हम उनके साथ वर्षों से राजनीति कर रहे हैं। हम में से अधिकांश उनकी वजह से राजनीति में हैं। हम अभी भी भाजपा में शामिल होने के बारे में सोच रहे हैं। अगर हमें केंद्रीय पुलिस से सुरक्षा मिलती है, तो हम मध्य प्रदेश जाएँगे और इसके बारे में सोचेंगे।”

विधायकों ने दावा किया कि 20 और विधायक उनके साथ हैं, लेकिन उन्हें कैद में रखा गया है। यदि वे भी बागी विधायकों के साथ होते, तो कॉन्ग्रेस स्पष्ट रूप से टूट जाती और इस पर कोई भी कानून लागू नहीं हो सकता था। बागी विधायकों ने कहा कि वे किसी भी परिणाम के लिए तैयार हैं और उन्हें विश्वास है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग उनके साथ हैं।

इससे पहले बागी कॉन्ग्रेस विधायक इमरती देवी ने कहा था, “ज्योतिरादित्य सिंधिया ही हमारे नेता हैं। उन्होंने हमें बहुत कुछ सिखाया है। चाहे कुएँ में कूदना पड़े लेकिन हम उनके साथ ही रहेंगे।” वहीं एक अन्य विधायक गोविंद सिंह राजपूत ने कमलनाथ पर वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कमलनाथ ने हमें कभी 15 मिनट भी नहीं सुना। फिर हम अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए किससे बात करें।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन पर किसी तरह का दबाव है या उनको बंधक बनाकर रखा गया है, तो इस पर बागी विधायकों ने कहा, “हमें ना यहाँ लाया गया है और ना ही हम बंधक हैं, हम आजाद हैं। बहुत मजबूरी में पार्टी छोड़ने का फैसला लिया क्योंकि हमारी सुनी नहीं जाती है।” बागी विधायकों ने कहा कि कमलनाथ केवल छिंदवाड़ा के सीएम बनकर रह गए हैं।

राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराए जाने को लेकर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है। इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश में मौजूदा सरकार निश्चित रूप से गिरेगी। आज भारतीय जनता पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या बल है। भाजपा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर कल (मार्च 18, 2020) तक जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई कल सुबह 10.30 बजे फिर होगी।

राज्यपाल के पत्र के बाद हड़बड़ाए कमलनाथ फिर पहुँचे राजभवन, BJP विधायकों से भी की मुलाकात

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हम यहाँ से नहीं हटेंगे: शाहीन बाग़ की महिलाओं ने पुलिस के अनुरोध को नकारा, कोरोना वायरस फैलने का ख़तरा

चीन से के बुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना का कहर विश्व के करीब 120 देशों में अब तक फैल चुका है। अगर बात करें भारत की तो यहाँ कोरोना के प्रकोप को रोकने के लिए सभी एयरपोर्ट, स्कूल, मॉल, रेस्टोरेंट यहाँ तक कि मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए हैं। सरकार ने सभी बड़े आयोजनों पर रोक लगा दी गई है, लेकिन इस बीच जारी है तो सिर्फ दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ तीन महीने से चल रहा धरना।

कोरोना के लगातार बढ़ते कहर को देखते हुए मंगलवार को दिल्ली पुलिस शाहीन बाग धरने पर पहुँच गई। इस दौरान धरने पर बैठी प्रदर्शनकारी महिलाओं से दिल्ली पुलिस और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने बात की साथ ही कोरोना के बढ़ते कहर से उनको अवगत कराया साथ ही उनसे धरने को समाप्त करने का भी अनुरोध किया। हालाँकि, प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दिल्ली पुलिस के इस अनुरोध को न तो गंभीरता से लिया और न ही इसका कोई जवाब देना उचित समझा।

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल घोषणा कर चुके हैं कि दिल्ली में एक स्थान पर अब 50 से अधिक लोग नहीं जुट सकते। इसके बाद शाहीन बाग में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि धरने पर भीड़ को एकत्र नहीं होने दिया जाएगा। शिफ्ट के हिसाब से ही महिलाओं को बुलाया जाएगा। साथ ही प्रवेश द्वार पर एक मशीन लगाई जाएगी और सेनेटाइजर का भी प्रबंध किया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों शाहीन बाद धरने पर पहुँची इंडिया टीवी की महिला पत्रकार ने दम तोड़ते शाहीन बाग प्रदर्शन की लाइव तस्वीरों को लोगों के सामने रखा था। इस दौरान जब गिनती की गई तो धरने पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 19 थी। इसके बाद हूटर बजाकर न सिर्फ लोगों को एकत्र किया गया बल्कि महिला पत्रकारों से धक्का-मुक्की और उनके कैमरे को तोड़ने तक की कोशिश की गई।

खैर, आपको बता दें कि अभी तक भारत में कोरोना वायरस के चलते तीन मौत हो चुकी हैं, इनमें पहली कर्नाटक, दूसरी दिल्ली और तीसरी मौत महाराष्ट्र में हुई है। वहीं देश में कोरोना वायरस के अब तक 126 मामले सामने आ चुके हैं।

शाहीन बाग़ पहुँची दिल्ली पुलिस: कोरोना वायरस को लेकर निर्देशों के बावजूद हटने को तैयार नहीं प्रदर्शनकारी

सरकार कोरोना वायरस से उपजे ख़तरे को लेकर सावधान और सचेत नज़र आ रही है और साथ ही एक्शन भी ले रही है। एक ओर जहाँ लोगों के मेडिकल टेस्ट की व्यवस्था की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जनता को जागरूक बनाने के लिए उन्हें बचाव के तमाम उपाय बताए जा रहे हैं। लेकिन, शाहीन बाग़ वाले न तो केंद्र सरकार की सुन रहे हैं और न ही दिल्ली सरकार की। शाहीन बाग़ में महिलाएँ धरने पर बैठी हुई हैं। सीएए के नाम पर चल रहे इस उवद्रव में भीड़ को देखते हुए कोरोना वायरस के फैलने का ख़तरा बढ़ गया है क्यों ये विशेषज्ञों की सलाहों की अवहेलना कर रहे हैं।

इसी बीच ताज़ा ख़बर आई है कि दिल्ली पुलिस शाहीन बाग़ प्रदर्शन स्थल पर पहुँची है, जहाँ से उपद्रवियों को हटने के लिए कहा गया है ताकि भीड़ न जुटे। केजरीवाल सरकार का आदेश है कि एक जगह पर कहीं भी 50 से ज्यादा लोग न जुटें। केंद्र सरकार ने भी बारम्बार कहा है कि लोग किसी भी प्रकार की सोशल गैदरिंग से दूरी बना कर रखें। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से कहा है कि कोरोना वायरस के फैलने के ख़तरे को देखते हुए वो जल्द से जल्द धरनास्थल को खाली करें।

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के लोगों ने भी शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों से धरनास्थल खाली करने का अनुरोध किया। भारत में अब तक कोरोना वायरस के 126 मामले आ चुके हैं और 3 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इनमें 22 विदेशी नागरिक शामिल हैं। मरने वाले लोग महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक के हैं। दिल्ली में जहाँ अब तक 7 मामले आए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में कुल 13 मामले आए हैं। सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में अब तक 39 केस सामने आ चुके हैं। इसके बाद केरल का नंबर आता है, जहाँ अब तक 24 केस सामने आ चुके हैं।

हालाँकि, शाहीन बाग़ वालों ने सरकार की बात मानने से इनकार कर दिया था। शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने पूछा था कि 50 लोगों की भीड़ न जुटने वाले आदेश के पीछे का मेडिकल आधार क्या है? उन्होंने आरोप लगाया था कि कोरोना वायरस के नाम पर शाहीन बाग़ के प्रदर्शन को ख़त्म करने की साजिश रची जा रही है। उपद्रवियों ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल लोगों से बात करने की बजाए सब को डरा रहे हैं।

कोरोना वायरस: मोदी सरकार की तैयारियों को WHO ने बताया असाधारण, ‘क्वारंटाइन सेंटर’ में तगड़ी व्यवस्था

भारत ने कोरोना वायरस के खतरों से निपटने के लिए जिस तरह की तैयारी की है, उससे अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भी प्रभावित हैं। एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है और काफ़ी पहले से ही विदेश से आने वाले लोगों का मेडिकल टेस्ट किए जाने की शुरुआत कर दी गई थी। भारत में ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाईजेशन’ के प्रतिनिधि हेंक बेकेडम ने कहा कि कोरोना वायरस के खतरों से निपटने के लिए भारत सरकार और ख़ासकर प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रतिबद्धता असाधारण किस्म की रही है। उन्होंने भारत के प्रयासों को प्रभावशाली करार दिया।

डब्ल्यूएचओ ने माना है कि मोदी सरकार के प्रयासों के कारण भारत आज कोरोना वायरस से निपटने के मामले में अच्छा कर रहा है। डब्ल्यूएचओ के अधिकारी बेकेडम ने कहा कि जिस तरह से पूरी प्रक्रिया अपनाई गई, उससे वो खास प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था के पास हेल्थ रिसर्च डिपार्टमेंट में रिसर्च के लिए अच्छी-ख़ासी व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि अब इस रिसर्च का भारत भी हिस्सा बनेगा। इसका अर्थ है कि सरकार ठीक दिशा में काम कर रही है।

इसी तरह केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी दिल्ली से सटे एक आइसोलेशन सेंटर के भीतर का एक वीडियो ट्वीट किया, जिसे एक व्यक्ति ने बनाया था। वो आइसोलेशन सेंटर की व्यवस्थाओं से काफ़ी ख़ुश दिखा था कि कैसे सरकार कोरोना वायरस से निपटने के प्रति न सिर्फ गंभीर है बल्कि लोगों का ख्याल भी रख रही है। वो व्यक्ति जर्मनी से दिल्ली आया था, जहाँ ‘क्वारंटाइन सेंटर’ में सभी लोगों को अलग-अलग कमरे दिए गए हैं, भोजन अच्छा और स्वादिष्ट मिल रहा है, स्वच्छ जल की व्यवस्था है और लोगों को नए तौलिए-कपड़े दिए गए हैं।

उसने बताया कि जब वो जर्मनी से लौट कर यहाँ आया तो उसे शंका थी कि न जाने कैसी व्यवस्था होगी लेकिन यहाँ आने पर पता चला कि सारी व्यवस्थाएँ चुस्त-दुरुस्त हैं। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप उक्त व्यक्ति का बात सुन सकते हैं:

दिल्ली से 70 किलोमीटर की दूरी पर एक 400 बेड का ‘क्वारंटाइन सेंटर’ बनाया है, जहाँ विदेश से आने वाले लोगों को 14 दिनों के लिए रखा जा रहा है। नोएडा सेक्टर 39 स्थित जिला अस्पताल में ये सारी व्यवस्था की गई है। यहाँ पर्याप्त मात्रा में डॉक्टरों के साथ-साथ पैरामेडिकल स्टाफ्स की भी तैनाती की गई है। इस ‘क्वारंटाइन वार्ड’ को महज 10-12 घंटों में तैयार कर लिया गया। चीन, इटली, ईरान, जर्मनी और स्पेन से लौटने वालों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।

‘भारत, भ्रष्ट, मरा हुआ…’ – गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने जहरीली राणा अयूब को कहा- नीच, स्वघोषित पत्रकार

एक अजीब घटना सामने आई है। इसमें फेक न्यूज़ फैलाने को लेकर हमेशा ट्रोल होने वाली बकलोल पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने इस्लामी (खुद को लेकिन पत्रकार बताती है) राणा अयूब के कोरोना वायरस पर असंवेदनशील ट्वीट को लेकर उनके ऊपर हमला किया। दरअसल राणा अयूब ने 16 मार्च को कोरोना वायरस को लेकर एक ट्वीट किया।

इसमें राणा ने जोर देकर लिखा कि नैतिक रूप से भ्रष्ट होने के कारण भारत में हर कोई अंदर से इतना ‘मरा’ है, कि एक वायरस इन्हें (भारतीयों को) क्या मार सकता है? भारत में अब तक विदेशी नागरिक समेत 126 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। इससे अब तक तीन मौतें हो चुकी हैं। राज्यों ने बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। 

राणा अयूब के इस ट्वीट पर लोगों ने उन्हें काफी लताड़ा, लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि इस ट्वीट के लिए उन्हें उन लोगों ने भी लताड़ा, जो कि पहले खुद अपमानजनक और घृणित व्यवहार कर चुके हैं।

स्वाति चतुर्वेदी ने राणा अयूब को कहा ‘घृणित इंसान’

खुद को ‘पत्रकार’ बताने वाली गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने राणा अयूब के ट्वीट को मौकापरस्त बताते हुए उन्हें ‘घृणित इंसान’ बताया।

उन्होंने एक और ट्वीट किया, जिसमें अयूब को नीच इंसान कहा। अयूब पर आगे हमला करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें उन लोगों के लिए खेद है, जो खुद को ‘पत्रकार’ मानते हैं।

काफी ताज्जुब की बात है कि कुछ साल पहले तक राणा अयूब के तारीफों की पुल बाँधने वाली स्वघोषित ‘पत्रकार’ स्वाति चतुर्वेदी आज उसके खिलाफ जहर उगल रही हैं।

अब ऐसा लगता है कि चतुर्वेदी ने इस तरफ इशारा किया कि राणा अयूब कहीं कहीं तथ्यात्मक रूप से गलत थी, जिसके बाद अयूब ने उन्हें ब्लॉक कर दिया।

अब जब दो मित्र शत्रु हो गए हैं, तो हम अपने पाठकों पर यह छोड़ते हैं कि वो बताएँ कि ये लड़ाई किसने जीती? स्वाति चतुर्वेदी या फिर राणा अयूब? पोल का बटन दबाएँ और अपना विजेता चुनें 🙂

नवजात की हत्यारन भीड़, अब कोरोना पर नहीं सुन रही निर्देश: मानवता के लिए ख़तरा बना शाहीन बाग़ प्रदर्शन

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारी अब मानवता के लिए ख़तरा बन कर उभर रहे हैं। जहाँ एक तरफ सरकार लोगों से अपील कर रही है कि भीड़ न जुटाएँ और किसी भी सामाजिक फंक्शन इत्यादि का हिस्सा न बनें, शाहीन बाग़ में सीएए के विरोध के नाम पर बैठी महिलाएँ वहाँ से हटने का नाम ही नहीं ले रही है। दक्षिण कोरिया में एक चर्च की जिद के कारण 5000 से भी अधिक लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ गए। ठीक उसी तरह, दिल्ली का शाहीन बाग़ एक खतरनाक स्पॉट बन कर भर रहा है, जहाँ डॉक्टरों व विशेषज्ञों की हर सलाह को धता बताया जा रहा है।

शाहीन बाग़ का धरना 95 दिनों से लगातार जारी है। अब महिलाएँ वहाँ भूमि पर बैठने की बजाए लकड़ी की चौकियों पर बैठी हुई हैं। जहाँ भारत सरकार कोरोना वायरस से बढ़ते ख़तरे को देखते हुए तमाम तरह के बचाव व सावधानी के उपायों से जनता को अवगत कर उन्हें जागरूक बना रही है, शाहीन बाग़ वाले उपद्रवी अब भी जिद पर अड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वो मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के उस आदेश को मानेंगी, जिसमें 50 से ज्यादा लोगों के एक साथ एक जगह न जुटने की बात कही गई है।

इस धरने में रोज शामिल हो रहे राकिब ने ‘आजतक’ को बताया कि अगर 50 लोग जुटते हैं तो उन्हें कोरोना नहीं होगा, इसकी गारंटी कौन देगा? शाहीन बाग़ में 2 मीटर की दूरी पर 100 तख़्त लगा दिए गए हैं और हर तख़्त पर दो-दो महिलाओं को बिठाया गया है। राकिब ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि जब दंगे हुए तब उन्होंने हमारा साथ क्यों नहीं दिया? तब उन्होंने कोई आदेश क्यों नहीं जारी किया? उसने आम आदमी पार्टी को मिनी भाजपा बताते हुए कहा कि केजरीवाल ने अमित शाह से मिलने के बाद कन्हैया कुमार के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी।

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने पूछा कि 50 लोगों की भीड़ न जुटने वाले आदेश के पीछे का मेडिकल आधार क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना वायरस के नाम पर शाहीन बाग़ के प्रदर्शन को ख़त्म करने की साजिश रची जा रही है। सबने आरोप लगाया कि केजरीवाल लोगों से बात करने की बजाए सब को डरा रहे हैं। रुस्तम नामक व्यक्ति ने सीएए को ‘काला क़ानून’ करार देते हुए कहा कि जब ये लागू हुआ, तब राज्य सरकार क्या कर रही थी? उसने पूछा कि अब उनके पास इतनी पावर कहाँ से आ गई और अगर पावर थी तो दिल्ली को जलने क्यों दिया?

वैसे ये पहली बार नहीं है कि शाहीन बाग़ में इस तरह की असंवेदनशीलता दिखाई जा रही है। इससे पहले एक नवजात शिशु की मौत हो गई थी। उसे उसकी अम्मी हमेशा भीषण ठण्ड में भी प्रदर्शन में लेकर जाती थी। मौत के बाद उसके वहाँ की कई महिलाओं ने कहा था कि अल्लाह की बच्ची है, अल्लाह ने बुला लिया। भाजपा नेता अमित मालवीय ने याद दिलाया कि 1918 फ़िलेडैल्फ़िया में एक परेड को रोके जाने को कहा गया लेकिन उनकी जिद के कारण स्पेनिश फ्लू फैला और स्पेन की 80% जनसंख्या संक्रमित हो गई। लाखों की मौत हो गई थी।