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IB के अंकित शर्मा की हत्या में अब तक 6 गिरफ्तार: दंगों के दौरान चाकुओं से गोद नाले में फेंक दिया था

आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान शर्मा की निर्मम तरीके से हत्या कर उनका शव नाले में फेंक दिया गया था। इस मामले में सबसे पहले सलमान उर्फ मुल्ला उर्फ नन्हे को गिरफ्तार किया गया था। उसने हत्या से जुड़े कई राज खोले थे। इसके बाद पॉंच और लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनके नाम हैं- फ़िरोज़, जावेद, गुलफाम, शोएब और अनस।

मुल्ला को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। मुल्ला मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला है। 2005 से वह दिल्ली के सुंदर नगरी इलाके में रह रहा है। वह प्याज की रेहड़ी लगाता था। सलमान के मुताबिक दंगाइयों ने अंकित का मजहब जानने के लिए उनके कपड़े उतारे थे। धर्म पुख्ता कर उन्हें चाकुओं से गोद डाला। सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित पर 14 बार चाकू से वार किए। अंकित के चेहरे पर काला कपड़ा डाल उन्हें आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के घर में ले जाया गया था।

ताहिर पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में है। उसकी इमारत से पेट्रोल बम और पत्थर का जखीरा बरामद किया गया था। आरोप है कि उसकी इमारत से हिंदुओं को निशाना बनाकर हमले किए गए। गोलियॉं चलाई गई। अंकित की हत्या के सिलसिले में उसके पिता रविंद्र शर्मा ने दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए ताहिर हुसैन समेत कई अन्य लोगों को आरोपित बनाया था। अंकित का शव 26 फरवरी को चॉंदबाग के नाले से मिला था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सलमान एक फोन कॉल से गिरफ्त में आया था। असल में पुलिस ने चॉंदबाग में दंगों के दौरान एक अपराधी मूसा के फोन को सर्विलांस पर रखा था। उसी बातचीत में मुल्ला का नाम सामने आया। इसके बाद जब मुल्ला का फोन सर्विलांस पर लिया गया तो वह किसी से बात करते हुए सुनाई पड़ा- हमने एक को गोद दिया। मूसा की भी तलाश की जा रही है। अंकित की हत्या में उसके शामिल होने का भी संदेह है।

दंगाइयों ने अंकित शर्मा के साथ दो अन्य हिंदू युवकों को भी पकड़ लिया था। दोनों किसी तरह उनके चंगुल से छुड़ाकर भागने में कामयाब हो गए थे। अंकित शर्मा के अकेले पकड़े जाने से दंगाइयों ने बेरहमी से उनकी हत्या दी थी, जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी होती है।

राजस्थान कॉन्ग्रेस का भी संकट गहराया: CM गहलोत के करीबी को राज्यसभा टिकट का विरोध

मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने के बाद से कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार संकट में है। 22 विधायकों के इस्तीफे से सरकार संकट में है। कुछ इसी तरह के हालात राजस्थान में भी बनते जा रहे हैं। सिंधिया की तरह यहॉं भी उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट अपनी उपेक्षा से आहत बताएए जाते हैं। पार्टी विधायक अपनी ही सरकार में बात नहीं सुनने का आरोप मंत्रियों पर लगा रहे हैं तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर मनमर्जी से सरकार और संगठन चलाने के आरोप लग रहे हैं।

अब राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारी को लेकर विरोध हो गया। गहलोत के एक करीबी को टिकट मिलने पर पार्टी के कई नेताओं ने आपत्ति जताई है। कॉन्ग्रेस ने राजस्थान से राज्यसभा के लिए केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने नामांकन दाखिल भी कर दिया है। नामांकन दाखिल करने के समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, सह प्रभारी विवेक बंसल समेत कई मंत्री व कई विधायक मौजूद थे।

बताया जा रहा है कि डांगी के नाम को लेकर कॉन्ग्रेस में एक राय नहीं है। उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट भी उनके नाम पर सहमत नहीं थे। लेकिन आखिरकार आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद वे मान गए। डांगी तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन वे हर बार हारे हैं। एक बार देसुरी से और दो बार रेओदर से। दलित समुदाय से आने वाले डांगी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेहद करीबी माने जाते हैं।

राजस्थान के कॉन्ग्रेस विधायक वेद प्रकाश सोलंकी का कहना है, “विधानसभा में इस बात की चर्चा है कि क्या वह अकेले अनुसूचित जाति के उम्मीदवार हैं? वह तीन चुनाव हार चुके हैं इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया।” इसके अलावा कॉन्ग्रेस के अन्य नेताओं ने नीरज डांगी की उम्मीदवारी पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्या किसी ताकतवर व्यक्ति का करीबी होने से कॉन्ग्रेस में टिकट पाया जा सकता है। हम अपने कैडर को ये क्या संदेश दे रहे हैं? कॉन्ग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि डांगी का पार्टी में कोई खास योगदान भी नहीं है।

राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है। आँकड़ों के हिसाब से कॉन्ग्रेस के दो और भाजपा का एक उम्मीदवार चुना जाना तय माना जा रहा था। भाजपा के ओंकार सिंह लाखावत को मैदान में उतारने से मुकाबला रोचक हो गया है। नामांकन से नाम वापसी की आखिर तारीख 18 है। अगर 18 मार्च तक लाखावत नाम वापस नहीं लेते हैं तो चुनाव होना तय है। लाखावत को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला भाजपा की विधायक दल की बैठक में किया गया था। लाखावत पहले भी राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।

4 निहत्थे वायुसैनिकों की हत्या: आतंकी यासीन मलिक पर चलेगा मुकदमा, कोर्ट ने कहा- उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत

25 जनवरी 1990 को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) ने भारतीय वायु सेना के चार निहत्थे अधिकारियों की हत्या कर दी थी। इस मामले में आतंकी यासीन मलिक के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है। जम्मू की टाडा कोर्ट ने कहा है कि उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत हैं।

यासीन फिलहाल आतंकी फंडिंग के मामले में जेल में बंद है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने उसके खिलाफ सोमवार को आरोप तय करने की मॅंजूरी दी है। वायुसेना जवानों की हत्या तब की गई जब उनके पास कोई भी हथियार नहीं था और वे एयरपोर्ट जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे। वहाँ भारतीय वायुसेना के 14 जवान थे। तभी अचानक से एक मारुति जिप्सी और एक बाइक से 5 आतंकी वहाँ पहुँचे और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उन्होंने एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवानों के अलावा 2 कश्मीरी महिलाओं की भी हत्या कर दी गई, जो बस का इंतजार कर रही थीं। आतंकियों ने ख़ून से लथपथ जवानों के सामने डांस करते हुए जिहादी नारे भी लगाए थे।

आतंकी यासीन मलिक को ‘अलगाववादी नेता’ के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। वह जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का चीफ भी है। जेकेएलएफ मूलतः एक आतंकवादी संगठन है जिसकी स्थापना 1977 में की गई थी। सन 1989 में इसी संगठन के आतंकियों ने जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या की थी। दिसंबर 1989 में मुफ़्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण किया गया था जिसके बदले में पाँच आतंकियों को छोड़ा गया था।

दिसंबर 8, 1989 को रुबैया सईद के अपहरण के बाद पंद्रह दिनों तक ड्रामा चला था जिसके बाद वीपी सिंह सरकार द्वारा अब्दुल हमीद शेख़, शेर खान, नूर मोहम्मद कलवल, अल्ताफ अहमद और जावेद अहमद जरगर नामक आतंकियों को जेल से छोड़ा गया था। चौदह साल बाद जेकेएलएफ के जावेद मीर ने रुबैया सईद के अपहरण की बात कबूल की थी। इसके अगले साल जनवरी 25 जनवरी 1990 को जेकेएलएफ ने भारतीय वायु सेना के 4 अधिकारियों की हत्या कर दी थी। खुद यासीन मलिक ने भी बीबीसी को दिए इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि उसने ड्यूटी पर जा रहे 40 वायुसैनिकों पर गोलियाँ चलाई थीं। इसके बावजूद वह आजतक कानून के शिकंजे से बाहर खुला घूम रहा है। उम्मीद है कि अब इस केस में तेज़ी आएगी और यासीन मलिक को उसके पापों की सज़ा मिलेगी।      

‘चमगादड़, कुत्ते, बिल्लियाँ खा रहे, उनका खून-पेशाब पीते हैं’ – कोरोना पर अख्तर का गुस्सा, चीन वाली बात पर घिघियाए

पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस के आतंक से भयभीत है। खेल से लेकर अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव देखा जा रहा है। ऐसे में आईपीएल के भविष्य से लेकर ऐसे ही तमाम अन्य टूर्नामेंट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसी के चलते पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज शोएब अख्तर भी अपनी प्रतिक्रिया देने से नहीं रोक पाए और उनका गुस्सा चीन पर उतरा है। दरअसल, पाकिस्तान की टी20 लीग पाकिस्तान सुपर लीग पर भी कोरोना वायरस का असर पड़ा है। यही कारण है कि शोएब अख्तर ने पीएसएल के बंद होने पर चीन पर अपनी भड़ास निकाली।

शोएब अख्तर ने कोरोना वायरस फैलाने के लिए चीन पर अपना गुस्सा निकालते हुए कहा कि जब ऊपर वाले ने खाने के लिए इतनी सारी चीजें बनाई हैं तो फिर आप चमगादड़ और कुत्ते कैसे खा सकते हैं? कोरोना की वजह से पाकिस्तान सुपर लीग से विदेशी खिलाड़ी लौट रहे हैं और मैचों को खाली स्टेडियम में कराया जा रहा है।

नाराज शोएब अख्तर ने कहा, “ऊपर वाले ने जब खाने के लिए इतनी सारी चीजें बनाई हैं तो फिर आपको क्या जरूरी है ऐसी अजीब चीजें खाने की। कभी चमगादड़ खा रहे हैं, कुत्ते खा रहे हैं तो कभी बिल्लियाँ खा रहे हैं तो कभी क्या खा रहे हैं। मुझे तो बिल्कुल समझ नहीं आता इन सब चीजों को खाने की जरूरत ही क्या है। पूरी दुनिया रिस्क पर आ गई है, हर चीज खराब हो गई है। 50 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है टूरिजम इंडस्ट्री को।”

अख्तर ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि आपको चमगादड़ जैसी चीजें क्यों खानी पड़ती हैं, उनका खून और पेशाब पीना पड़ता है और आप वायरस पूरी दुनिया में फैला देते हैं… मैं चीनी लोगों की बात कर रहा हूँ। उन्होंने पूरी दुनिया को खतरे में डाल दिया है। मुझे सच में समझ नहीं आता कि आप चमगादड़, कुत्ते और बिल्ली कैसे खा सकते हैं। मैं सच में गुस्से में हूँ।

हालाँकि, अपने बयान पर लोगों की प्रतिक्रियाओं से घबराते हुए उन्होंने बाद में स्पष्ट भी किया कि उनका बयान चीन के लोगों के खिलाफ नहीं बल्कि जानवरों के कानून के बारे में था। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूँ कि यह आपका कल्चर है लेकिन इससे आपकी मदद नहीं हो रही है।

कोरोना के कारण पीएसएल पर पड़े असर पर शोएब ने कहा, “मुझे गुस्सा सबसे ज्यादा इस चीज का है कि पहले तो बड़ी मुश्किल से पाकिस्तान में पीएसएल आई, अब बो भी बंद हो गई है। प्लेयर्स वापस जा रहे हैं। प्लेयर्स इसलिए वापस जा रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से इतने केस बढ़ रहे हैं। मुझे इस बात का गुस्सा है कि कोरोना वायरस की वजह से पीएसएल खत्म होने जा रहा है। खत्म तो नहीं होगा लेकिन खाली स्टेडियम में होगा और आगे जो विदेशी खिलाड़ी हैं, वो जा रहे हैं।”

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के डर से पिछले तीन दिन में कई बड़े टूर्नामेंट और सीरीज को स्थगित करने का फैसला लिया जा चुका है। बीसीसीआई ने भारत और साउथ अफ्रीका वनडे सीरीज के आखिरी दो मुकाबले रद्द कर दिए तो वहीं इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) को 15 अप्रैल तक स्थगित करने का फैसला लिया। ऑस्ट्रेलिया की महिला टीम का साउथ अफ्रीका दौरा रद करना पड़ा जबकि न्यूजीलैंड के साथ पुरुष टीम के दो वनडे मुकाबलों को भी स्थगित कर दिया गया।

चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस अब तक 100 से ज्यादा देशों में फैल चुका है और इससे 1 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं और 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में अब तक कोरोना के 83 मामले सामने आए हैं। भारत में अब तक COVID 19 से दो की मौत हुई है।  

CAA विरोध की भेंट चढ़ी 43 दिन की दुधमुँही बच्ची: प्रदर्शन के लिए रोज ईदगाह लेकर जाती थी अम्मी

बीते दिनों दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे सीएए विरोधी प्रदर्शन से एक बच्ची की मौत की खबर आई थी। अब ऐसी ही खबर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आ रही है। बताया जा रहा है कि जिले के देवबंद स्थित ईदगाह में चल रहे सीएए और एनआरसी विरोधी धरना-प्रदर्शन में आ रही 43 दिन की बच्ची की मौत हो गई है। इस दुधमुॅंही बच्ची को लेकर उसकी मॉं रोज प्रदर्शन में शामिल हो रही थी।

देवबंद के मोहल्ला बडजियाउलहक़ स्थित कुएँ वाली गली निवासी नौशाद की पत्नी नौशाबा पिछले कुछ दिनों से अपनी तकरीबन डेढ़ माह की बच्ची को लेकर प्रदर्शन में शामिल हो रही थी। कई बार नौशाबा ने प्रदर्शन स्थल पर रात में भी रुकने की कोशिश की थी। हालॉंकि उसकी बच्ची छोटी होने के कारण अन्य महिलाओं ने उसे ऐसा नहीं करने दिया। बावजूद इसके नोशाबा सुबह से लेकर देर शाम तक बच्ची के साथ धरनास्थल पर रहती थी। शुक्रवार (मार्च 13, 2020) को मासूम बच्ची की मौत की सूचना मिलने पर धरना स्थल पर शोक का माहौल बन गया।

नौशाबा गुरुवार (मार्च 12) को वह धरनास्थल पर नहीं पहुँची। शुक्रवार को पता चला कि उसकी बच्ची की तबीयत खराब होने के बाद उसका इंतकाल हो गया। इसके बाद मुत्तहिदा ख्वातीन कमेटी की अध्यक्ष आमना रोशनी, फौजिया सरवर, इरम उस्मानी, फरीहा उस्मानी और सलमा अहसन सहित काफी संख्या में महिलाएँ नौशाबा के घर पहुँचीं और बच्ची की मौत पर दुख का इजहार किया और फिर उन्होंने जुमे की नमाज के बाद धरनास्थल पर कुरआन ख्वानी कर बच्ची को खिराज-ए-अकीदत पेश की। 

गौरतलब है कि 30 जनवरी को राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन के दौरान ही 4 महीने की एक नवजात बच्ची की मृत्यु हो गई थी। नवजात की मृत्यु के बाद देशभर में शाहीन बाग़ में विरोध के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने वालों की काफी निंदा की गई थी। बच्ची की मौत के बाद उसकी अम्मी ने कहा था कि उसने सीएए के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन में अपनी बच्ची को कुर्बान कर दिया। अन्य प्रोटेस्टरों का कहना था कि वो अल्लाह की बच्ची थी और उसे अल्लाह ने ले लिया। ऐसे कई बयान दिए गए, जिससे पता चलता है कि बच्ची मरी नहीं, उसकी ‘हत्या’ की गई।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा था कि हमारे मन में मातृत्व के प्रति उच्च-कोटि का सम्मान है और बच्चों के लिए उनके मन में काफ़ी चिंताएँ हैं। सीजेआई ने कहा कि बच्चों के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, “क्या एक 4 महीने का बच्चा विरोध-प्रदर्शन करने के लिए जा सकता है? मैं तो कहता हूँ कि सभी माँओं की इस मामले में एक राय होनी चाहिए, बच्चों के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता। कृप्या आपलोग और समस्या पैदा न करें।”

शाहिद और मेहरूम की हत्या में फिरोज, चाँद, रईस, शोएब, इमरान गिरफ्तार: दिल्ली दंगों का खौफनाक सच

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24-15 फरवरी को हुई हिंसा में तीन अलग-अलग मामलों में सात और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन पर दिल्ली में हुई हिंसा में शामिल होने के आरोप है। पुलिस ने इन्हें दंगे भड़काने, हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया है।

पहले मामले में SIT ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया ,है उनकी पहचान मोहम्मद फिरोज, चाँद मोहम्मद और रईस खान के रूप में हुई है। इनके सम्पर्क शाहिद खान की हत्या से जुड़े होने के कारण इन्हें गिरफ्तार किया गया है। शाहिद की हत्या 24 फरवरी को अपने घर के पास ही दयालपुर में हुई थी। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपित भी चाँद बाग़ से ही हैं।

जिस समय शाहिद के सर में दंगाइयों की गोली लगी, उस वक़्त वो मोहन नर्सिंग होम के सामने स्थित अपने घर की छत पर खड़ा था। जाँच के दौरान पुलिस के हाथ सोशल मीडिया और अन्य सूत्रों से सम्बंधित वीडियो बरामद हुए। उन्हें वीडियो फुटेज में गोली चलाते हुए देखा गया है। उनका पता लगाकर बृहस्पतिवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बाकी लोगों की धरपकड़ के लिए खोज अभी भी जारी है।

दूसरी घटना में शोएब और इमरान नाम के दो आरोपितों को भी मेहरूम नाम के व्यक्ति की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है। हमले में मेहरूम की मौत हो गई थी, जबकि श्मशाद घायल हो गया था। यह घटना 24 फरवरी को भजनपुरा स्थित सुभाष मोहल्ले की है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। शोएब 12वीं का छात्र है। बृहस्पतिवार को उसकी परीक्षा थी। शोएब के लिए क्राइम ब्रांच को विशेष तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा खत्म होने तक उससे पूछताछ नहीं की जाए।

तीसरे मामले में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24-15 फरवरी को हुई हिंसा में दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है, इनके नाम गुलफाम और तनवीर हैं। इस पर दिल्ली में हुई हिंसा में शामिल होने के आरोप है। इन दोनों के पास से पुलिस ने कुछ मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं और फोन को जाँच के लिए फॉरेंसिक विभाग को भेज दिया गया है।

दंगों में पीड़ित अजय ने अपनी शिकायत में बताया है कि 25 फरवरी को वह अपने घर लौट रहा था, उसी वक़्त उसके हाथ में गोली लगी। इसके बाद वो वहीं गिर पड़ा और उसने स्थानीय लोगों से मदद माँगी। लोगों ने उसे भागने की सलाह दी क्योंकि दो दंगाई वहाँ पर लें 4 और 5 लगातार गोलियाँ बरसा रहे थे। जब उसने देखा तो उसने आम आदमी पार्टी नेता ताहिर हुसैन के घर की छत से भारी मात्रा में पत्थरबाजी और फायरिंग होते हुए देखी। इसके बाद अजय ने वहाँ से भागकर अपना इलाज नजदीकी अस्पताल में करवाया।

हम दो-हमारे दो: कॉन्ग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी पेश करेंगे बिल, ज्यादा बच्चे पर नौकरी जाने का प्रावधान

देश में संसाधन सीमित हैं लेकिन आबादी बेहद तेजी से बढ़ती जा रही है। हर साल बढ़ती जनसंख्या के आँकड़े दर्शा रहे हैं कि हालात ऐसे ही रहे तो स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती है। देश में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर लगातार बहस जारी है। अब इस संबंध में कानून को लेकर कुछ सांसद कागजी दिलचस्पी भी दिखा रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्य विपक्षी दल कॉन्ग्रेस के सांसद अभिषेक मनु सिंघवी दो बच्चों की नीति वाला विधेयक राज्यसभा में पेश करने वाले हैं।

सिंघवी का प्रस्ताव है कि दो बच्चा नीति को मानने वालों को प्रोत्साहन और ना मानने वालों को हतोत्साहित या सुविधाओं से वंचित किया जाना चाहिए। सिंघवी निजी हैसियत से ‘हम दो-हमारे दो’ नीति वाला जो विधेयक पेश करने जा रहे हैं उसको सदन में पेश करने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। अभिषेक मनु सिंघवी के Population Control Bill, 2020 के प्रस्ताव में कहा गया है कि दो बच्चा नीति का पालन नहीं करने वालों को चुनाव लड़ने, सरकारी सेवाओं में प्रोन्नति लेने, सरकारी योजनाओं या सब्सिडी का लाभ लेने, बीपीएल श्रेणी में सूचीबद्ध होने और समूह ‘क’ यानी Group A की नौकरियों के लिए आवेदन करने से रोका जाना चाहिए। 

साथ ही विधेयक में यह भी प्रस्ताव किया गया है कि केंद्र सरकार को राष्ट्रीय जनसंख्या स्थिरीकरण फंड की स्थापना करनी चाहिए ताकि जो लोग दो बच्चा नीति का पालन करना चाहते हैं उनकी मदद की जा सके। इसके अलावा सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भनिरोधकों को उचित दर पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

विधेयक में एक ही बच्चे पर नसबंदी कराने वालों को सरकार की ओर से विशेष प्रोत्साहन देने की पैरवी की गई है। मसलन, उनके बच्चे को उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में वरीयता दी जाए। गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले वैसे दंपति जो खुद नसबंदी कराते हैं उन्हें केंद्र की ओर से एकमुश्त रकम के माध्यम से मदद करने की बात कही गई है। कहा गया है कि अगर दंपति का एक ही बच्चा हो और वह लड़का हो तो उन्हें 60 हजार रुपए और यदि एक ही लड़की हो तो उन्हें 1 लाख रुपए दिए जाएँ।

विधेयक में कहा गया है कि इसके लागू होने के बाद केंद्र सरकार के कर्मचारियों को लिखित में यह भी देना चाहिए कि वह दो बच्चा नीति का पूरी तरह से पालन करेंगे। जिन कर्मचारियों के पहले से ही दो से ज्यादा बच्चे हैं, वह भी लिखित में यह देंगे कि वह अब और बच्चे पैदा नहीं करेंगे। केंद्र सरकार को भी नियुक्तियों के समय उन्हीं लोगों को वरीयता देनी चाहिए जिनके दो या उससे कम बच्चे हों। सरकारी कर्मचारियों के बच्चों में यदि कोई दिव्यांग है या कोई अन्य ऐसी परिस्थिति है कि तीसरा बच्चा आवश्यक है तो ही उसे विधेयक में प्रस्तावित किए गए नियमों के तहत छूट मिलेगी। विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि दो बच्चा नीति का पालन जो भी सरकारी कर्मचारी नहीं करें उनकी सेवाएँ समाप्त की जा सकती हैं।

कॉन्ग्रेस सांसद सिंघवी ने विधेयक के बारे में कहा, “बढ़ती जनसंख्या भारत के सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डाल रही है। इस कारण मैं दो-बच्चे के आदर्श नीति को लागू करने का आह्वान करता हूँ। वास्तविक समृद्धि और कल्याण को हमेशा प्रति व्यक्ति आय में मापा जाता है न कि सकल आय में। जब भी हम 5 ट्रिलियन और 20 ट्रिलियन इकोनॉमी की बात करते हैं, तो अच्छा लगता है, लेकिन यह तभी संभव है जब प्रति व्यक्ति आय बढ़े।”

गौरतलब है कि संसद के वर्तमान बजट सत्र में ही भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की माँग करते हुए इसे समय की जरूरत बताया और कहा कि वर्तमान में ही सभी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना संभव नहीं हो रहा है, जबकि जब आबादी 150 करोड़ के पार पहुँच जाएगी तब पीने का पानी मिलेगा ही नहीं। 

सांसद ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जनसंख्या कई गुना बढ़ती है, जबकि संसाधनों में बहुत कम वृद्धि हो पाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना चाहिए जो ‘हम दो-हमारे दो’ पर आधारित हो और इसका पालन नहीं करने वालों को हर तरह की सुविधाओं से न सिर्फ वंचित किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें किसी भी प्रकार के चुनाव लड़ने से भी रोका जाना चाहिए। लोकसभा में भी यह मुद्दा कई बार उठ चुका है। कई नेता जनसंख्या नियंत्रण कानून के समर्थन में आवाज उठा चुके हैं।

ममता बनर्जी के MLA ने खुद की बनाई 2 आदमकद प्रतिमाएँ, हर सुबह घंटों करते हैं साफ-सफाई

जयंत नास्कर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस से ताल्लुक रखते हैं। दक्षिण 24 परगना जिले गोसाबा से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। 71 साल के नास्कर इन दिनों दो कारणों से चर्चा में हैं। पहली, राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में खुद उनकी पार्टी की सरकार है फिर भी खुद की जान को खतरा बता रहे हैं। दूसरी, उन्होंने अपनी दो आदमकद प्रतिमाएँ बनवा रखी है, जिसकी वे हर सुबह घंटों साफ-सफाई करते हैं। इसके कारण खुद अपनी ही पार्टी के लोग उनका मजाक बना रहे हैं।

जयंत की ये मूर्तियॉं फाइबर ग्लास और मिट्टी से बनी है। उनका कहना है कि कुछ साल पहले अलीपुर सेंट्रल जेल से चार अपराधी फरार हुए थे। जब ये पकड़े गए तो उन्होंने बताया कि नास्कर की हत्या के लिए उनलोगों को सुपारी दी गई थी। यही कारण है कि विधायक जी ने जीते जी ही अपनी मूर्तियॉं बनवा ली है ताकि मरने के बाद भी लोग उन्हें याद रखें।

नास्कर ने बताया, “अलीपुर जेल से चार अपराधी फरार हो गए। जब वे फिर से पकड़े गए तो उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानीय नेताओं ने उन्हें मेरी हत्या के लिए सुपारी दी थी। तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक प्रवीण त्रिपाठी ने इस बारे में मुझे सूचना दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मेरी सुरक्षा वाई श्रेणी में कर दी।” उन्होंने कहा, “इसके बाद मैंने अपनी प्रतिमा बनवाने का निर्णय किया ताकि अगर मेरी हत्या होती है तो यह लोगों को मेरी याद दिलाती रहे।”

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार नास्कर की सुरक्षा में 11 पुलिसकर्मी तैनात हैं। हालॉंकि प्रशासन का कहना है कि उन्हें कोई खतरा नहीं है। टीएमसी के जिलाध्यक्ष शौकत मोला के हवाले से बताया गया है कि इस तरह का काम वही व्यक्ति कर सकता है जिसे कोई समझ नहीं हो। 5 बच्चों के पिता नास्कर का कहना है कि खुद की पार्टी के भीतर ही उनके कई दुश्मन हैं। उन्होंने बताया कि अपनी मूर्तियॉं उन्होंने कुछ साल बनवा कर घर के एक कमरे में रखी थी। इसके बारे में लोगों को पता नहीं था। पिछले दिनों पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने मूर्तियॉं देख ली और फोटो क्लिक कर ली। उन्होंने बताया कि एक मूर्ति स्थानीय स्कूल में लगेगी, क्योंकि 1993 से 2016 तक वे वहॉं के सचिव रहे हैं।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 14 मार्च 2020 को प्रकाशित खबर

गौरतलब है कि ऐसा करने वाले नास्कर पहले नेता नहीं हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहते मायावती ने भी अपनी प्रतिमाएँ लगवाई थी। उन्होंने अपनी पार्टी (बसपा) के चुनाव चिहृ हाथी की प्रतिमाएँ बनवाकर प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया था।

दुनिया में मची चीख-पुकार, पाकिस्तान में लग रहे ‘कोरोना वायरस जिंदाबाद’ के नारे

करीब तीन महीने पहले चीन में दस्तक देने वाले कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे महामारी घोषित कर चुका है। इसके बढ़ते प्रकोप ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। लेकिन आप जानकर हैरान रह जाएँगे कि पाकिस्तान में कोरोना जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं।

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक विडियो कुछ छात्र कोरोना वायरस जिंदाबाद के नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह विडियो पाकिस्तान का है। यहाँ के एक विश्वविद्यालय के छात्र अपनी परीक्षाएँ स्थगित होने पर कोरोना वायरस जिंदाबाद कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि कोरोना वायरस के कारण परीक्षा स्थगित कर दी गई है। इससे उन्हें तैयारी करने का और समय मिल गया है।

ट्विटर पर इस विडियो को शेयर करते हुए @AnasMallick नाम के यूजर ने लिखा है कि यह बेहद बेतुका है। पाकिस्तान में विश्वविद्यालय के छात्र ‘कोरोना वायरस जिंदाबाद’ का जाप कर रहे हैं, क्योंकि कोरोना आउटब्रेक के कारण उनकी परीक्षा स्थगित हो गई हैं। इससे उन्हें तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल रहा है।

कोरोना के संक्रमण से भारत में अब तक दो मौत हो चुकी हैं। पहली कर्नाटक के कलबुर्गी निवासी 76 वर्षीय शख्स की ओर दूसरी दिल्ली निवासी 68 वर्षीय महिला की। साथ ही भारत में कोरोना संक्रमण के अब तक 82 मामले सामने आ चुके हैं। इसे देखते हुए भारत ने एक तरह से खुद को दुनिया से अलग-थलग कर लिया है। 15 अप्रैल तक यात्री वीजा सस्पेंड कर दिया है। साथ ही अपने नागरिकों को भी विदेश यात्रा से बचने की सलाह दी है।

गौरतलब है कि चीन के वुहान शहर से यह संक्रमण शुरू हुआ था। अब तक दुनिया के 114 देश इसकी चपेट में आ चुके हैं। कोरोना वायरस संक्रमण 5,000 से अधिक लोगों की जान ले चुका है। दुनियाभर में 1,34,300 से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं। यही कारण है कि WHO ने बुधवार को इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया था।

7 साल से शुरू कर 16 की उम्र तक सौतेली बेटी का रेप करता रहा मो. असलम, आखिरी साँस तक कैद की सजा

लखनऊ के हुसैनगंज से एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। क्राइम ऐसा, जिससे बाप-बेटी का नाजुक रिश्ता कलंकित हो गया। बाप के साए में बड़ी हुई नाबालिग बेटी उसी के दुष्कर्म का शिकार हो गई। सौतला बाप ही वहशी दरिन्दा बन बैठा और उसने अपनी 7 साल की सौतेली बेटी से रेप करना शुरू किया। 

आरोप है कि पीड़ित बच्ची की माँ और अन्य बच्चों को नींद की गोलियाँ खिलाकर अपनी नाबालिग सौतेली बेटी से रेप करता था सौतेला बाप। और यह एक बार की बात नहीं हुई। ये गंदा खेल 9 साल तक चलता रहा। सब्र का बाँध टूट जाने पर पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस से की तो मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। 2015 के इस मामले में कोर्ट ने अब दरिंदे पिता को उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 60 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने जुर्माने की 90 फीसदी रकम को पीड़िता को देने का आदेश दिया है। बता दें कि कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाते हुए अपने आदेश में कहा कि दोषी अपनी आखिरी साँस तक जेल में रहेगा।

16 वर्षीय पीड़िता ने 26 जून 2015 को इस मामले में हुसैनगंज में FIR दर्ज करवाई थी। पीड़िता के सौतले पिता मोहम्मद असलम खान (बदला हुआ नाम) ने 26 जून 2015 की रात में भी उसके साथ दुष्कर्म किया था। असलम ने पहली बार पीड़िता के साथ 7 साल की उम्र में दुष्कर्म किया था और फिर इसके बाद वो पीड़िता के 16 साल के होने तक उसके साथ रेप करता रहा।

पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई FIR के मुताबिक जब पीड़िता 3 साल की थी तब उसके माता-पिता का तलाक हो गया था। पीड़िता और उसका भाई अपनी माँ के साथ रहते थे। कुछ समय बाद पीड़िता की माँ ने उसके सौतेले पिता से निकाह कर लिया, लेकिन वह पीड़िता और उसके भाई को पसंद नहीं करता था। असलम बच्चों को नींद की गोली खिलाता रहता था और मारपीट भी करता था। इसके बाद सौतेली बेटी से रेप करता था। पीड़िता ने इस बारे में अपनी माँ को बताया। जब उसकी माँ ने इसका विरोध किया तो दोषी सौतेले पिता ने दोनों के साथ मारपीट की।