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किसी ने काट लिया कलावा तो किसी ने फाड़ दिया ‘जय श्री राम’ का स्टीकर: पलायन करते हिन्दुओं का डर

डर का आलम ऐसा कि गोपाल काँप रहे थे। थड़थड़ाती आवाज़ में वे बोलते हैं- “हिन्दुओं को मार रहे हैं जी।” अनिश्चितता के इस दौरान में निरंकुश अत्याचार की बानगी गोपाल के चेहरे पर साफ़ देखी जा सकती थी। यही स्थिति है, दिल्ली के हिन्दुओं की। अगर आप हिन्दू हैं, तो आप हिन्दू दिखने का रिस्क नहीं ले सकते। हिन्दू दिखेंगे तो मारे जाने का डर है। रुद्राक्ष, कलावा, गाड़ी पर हिन्दू स्टीकर या तिलक- ये सब किसी अनहोनी का कारण बन सकता है या इसे बनाया जा सकता है, ‘उनके’ द्वारा। बुधवार (फरवरी 26, 2020) के सुबह की बात है, जब गोपाल अपनी बाइक साफ़ कर रहे थे।

अब तक ये काम उनके छोटे भाई शिवा करते आ रहे थे। गोपाल की पत्नी जया घर के कुछ छोटे-मोटे सामान एक जगह रखने में लगी हुई थी। एक दो तौलिए, गणेश की छोटी सी प्रतिमा और एक फैमिली फोटो- सामान के नाम पर वो यही सब रख रही थीं। मुझसे उन्होंने कहा, “मैं जफराबाद जाना चाहती हूँ। यहाँ से ज्यादा दूर भी नहीं है। लेकिन कैसे जाएँ? क्योंकि बीच में मस्जिद ही मस्जिद है।” जया ग़लत नहीं कह रही थीं क्योंकि हिन्दू बहुल मौजपुर के आसपास कई मस्जिद हैं। इलाक़े के हिन्दुओं को इसका भान है कि उन मस्जिदों से हिंसा भड़काई जा रही है। इस नक़्शे को देखिए:

मौजपुर के आसपास के मस्जिद, जिनसे डर रहे हैं स्थानीय हिन्दू

दिल्ली में इस्लामी भीड़ जिस तरह से हिन्दुओं पर कहर बरपा रही है, हिन्दुओं के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। वो एकदम बेचारे हो चुके हैं। गोपाल भी मौजपुर के निवासी हैं। उनके घर में उनकी माँ, पत्नी, छोटा भाई और एक 6 साल की बेटी। मुस्लिम बहुल जाफराबाद और ब्रह्मपुरी से उठी हिंसा की लपटों ने मौजपुर को भी अपने आगोश में ले लिया और वहाँ के हिन्दुओं की स्थिति भी दयनीय है। गोपाल के घर से कुछ ही दूरी पर विनोद कुमार को मार डाला गया था। उनके बेटे नितिन के सामने ही। क्यों? क्योंकि उनकी बाइक पर ‘जय श्री राम’ का स्टिकर लगा हुआ था।

‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ जैसे मजहबी नारों के बीच विनोद को मार डाला गया। वायरल हुए विडियो में उनके शव को सड़क पर पड़े हुए देखा जा सकता है। उससे कुछ ही दूरी पर आग से झुलसी हुई उनकी बाइक भी पड़ी थी। उनके बेटे नितिन बताते हैं कि इस्लामी टोपी पहनी भीड़ कुल 40 की संख्या में थी, जिसने लाठी-डंडों से पीट-पीट कर विनोद को मार डाला। एक लाचार हिन्दू ने वीडियो शूट करते समय कहा:

“देखिए, मुस्लिमों का ये हाल। हिन्दुओं का जीना बेहाल कर दिया है। एक लाश भेजी गई है मुस्लिम की तरफ़ से हमारे हिन्दू भाई की। ये घटना ब्रह्मपुरी गली नंबर एक की है। वो सन्देश दे रहे हैं- ले जाओ लाश, ऐसी लाशें तो रात भर उठती ही रहेंगी।”

इलाक़े में डर का माहौल है और हिन्दू पलायन की सोच रहे हैं। गोपाल का परिवार उससे अलग नहीं है। उनके पास अब भागने या घर में दुबके रहने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। अव्वल तो ये कि ये दोनों उपाय भी रिस्की हैं। गोपाल ने भी जाने से पहले अपनी बाइक पर लगे ‘जय श्री राम’ स्टीकर को खुरच के हटाया। गोपाल कहते हैं- “छोटी सी बच्ची है मेरी। आपने देखा ना ‘जय श्री राम’ वाला स्टीकर देख कर मुस्लिमों ने विनोद का क्या किया? आज हम हिन्दुओं का ये हाल है कि हम राम का नाम भी नहीं ले सकते। जला कर मार डालते हैं।” गोपाल की काँपती हुए आवाज़ उस इलाक़े के हिन्दुओं का डर बता रही थी।

ख़ुफ़िया एजेंसियों की मानें तो ‘भीम आर्मी’ और पीएफआई ने हिन्दुओं के ख़िलाफ़ हिंसा को भड़काने की पूरी साज़िश रची है। निशाना अधिकतर हिन्दू ही बने हैं, भले ही मीडिया ये दिखाने का ग़लत प्रयास कर रहा हो कि मजहब विशेष ही पीड़ित हैं। मौजपुर से कुछ ही दूरी पर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को मार डाला गया था। आरोप है कि आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे अंकित सहित 4 लोगों को घसीट पर ले गए और उन्हें मार डाला। इसके बाद उनके शवों को नाले में फेंक दिया।

मोहम्मद शाहरुख़ का वायरल विडियो तो अपने देखा ही होगा, जिसने भजनपुरा में पुलिस पर 8 राउंड फायरिंग की थी। वो इलाक़ा भी शाहदरा से ज्यादा दूर नहीं है। एक और हिन्दू परिवार से हमने बात की, जो काफ़ी डरा हुआ था। हर्ष ने अपने हाथ पर बँधे हुए कलावे को काट कर हटा दिया, जो उसकी दादी उसे रोज बाँधा करती थीं। मज़बूरी है, इस्लामी भीड़ यही सब देख कर भड़क रही है। हर्ष कहते हैं अंकित की तरह उन्हें भी मारा जा सकता है, अगर उन्होंने कलावा नहीं हटाया तो। वो कहते हैं कि जो कलावा उनकी रक्षा के लिए बाँधा जाता था, वो उनकी मौत का कारण भी बन सकता है।

हर्ष ने बताया कि उनके एक दोस्त ने रुद्राक्ष हटा दिया है, क्योंकि आस्था के ऊपर अभी अपनी रक्षा को रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हर्ष चाकू के साथ सोते हैं क्योंकि आत्मरक्षा के लिए कोई न कोई उपाय तो रखना ही पड़ेगा। हर्ष ने कहा- “हमारी बहन-बेटियों को भी लाठी उठानी पड़ी है। मजहबी दंगाई आएँगे तो सबसे ज्यादा ख़तरा उन्हें ही है। हमने अपनी बहन-बेटियों को कह रखा है कि अगर हमें कुछ हो जाएँ तो वो पहले अपनी जान बचाएँ या ख़ुद मर जाएँ।” दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाक़ों में यही हाल है हिन्दुओं का।

(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। मृतकों के अलावा अन्य पीड़ितों का नाम बदल दिए गए हैं।)

दिलबर सिंह नेगी के हाथ-पैर काट दंगाइयों ने दुकान की आग में झोंका: बचकर भागे श्याम ने बताई आपबीती

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों में अब तक 34 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके साथ ही हिंसा की रूह कॅंपा देने वाली कहानियॉं भी सामने आ रही है। मरने वालों में उत्तराखंड के दिलबर सिंह नेगी भी हैं। वे दिल्ली के शाहदरा में रहते थे।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार दिलवर सिंह नेगी को 23 फ़रवरी की शाम दंगाइयों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। दिलबर सिंह नेगी उत्तराखंड के पौड़ी जिले स्थित थलीसैण ब्लॉक से सम्बन्ध रखते थे। उनके करीबी श्याम सिंह ने ऑपइंडिया को बताया कि 23 फ़रवरी की शाम कुछ दंगाई शाहदरा इलाके में शोर मचाते हुए घुसे। दंगाइयों ने नेगी को अपना पहला निशाना बनाया। उनके हाथ-पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया।

इस घटना को देख वहाँ लोगों में अफरा-तफरी मच गई। अपनों के बीच चीख-पुकार शुरू हो गई। दहशत में लोग अपनी जान बचाकर भागे। फ़ोन पर ऑपइंडिया के साथ बातचीत में भी दिलबर के परिजन बेहद डरे लग रहे थे। उन्होंने बताया कि वे अभी भी GTB अस्पताल में मौजूद हैं और दिलवर की बॉडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

उस दिन की घटना के बाद वे लोग मौके पर जाने का साहस नहीं जुटा रहे हैं। जहाँ पर यह घटना हुई वहाँ दुकानें बंद हैं। जान बचाकर भाग निकलने में कामयाब रहे लोगों में से एक उत्तराखंड के ही ग्राम ईडा का श्याम सिंह भी हैं। उन्होंने बताया कि दिलवर सिंह के सारे कागज और पहचान सम्बंधित डॉक्यूमेंट्स जलकर राख हो चुके हैं।

हिंसा की शुरुआत रविवार को हुई थी। इसके बाद कई इलाकों में दंगा भड़क गया। दंगाइयों ने 19 साल के एक हिंदू लड़के पर हमला किया और उसके सिर में ड्रिल मशीन से छेद कर दी। पीड़ित विवेक पर उस वक्त हमला किया गया जब वह अपनी दुकान में बैठा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विडियो में 2-3 लोग एक हिंदू के शव को भीड़ से दूर लेकर जाते नजर आए थे। लेकिन भीड़ अचानक से गली के बाहर आकर अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर का नारा लगाने लगती है। मारे गए युवक का नाम विनोद बताया जा रहा है। घटना ब्रह्मपुरी इलाके की है। चॉंदबाग के नाले से आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा का शव बरामद किया गया था। ड्यूटी से लौटते वक्त उनकी हत्या कर दी गई। आरोप है कि दंगाई उन्हें घसीटकर आप पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गए। वहॉं हत्या करने के बाद उनका शव नाले में फेंक दिया।

दिल्ली हिंसा: अपनी दुकान में बैठा था 19 साल का विवेक, दंगाइयों ने सिर में ड्रिल मशीन से कर दी छेद

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारों के बीच ब्रह्मपुरी में मुस्लिम भीड़ ने की हिंदू युवक की हत्या

आप अपना धैर्य खो बैठे हैं और विपक्ष के अजेंडे में उलझ कर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं

लुटियन के लुटेरों ने कभी इतना खतरा महसूस नहीं किया, जितना खतरा उनको अब महसूस हो रहा है। उनका यहाँ होना सिर्फ विरोध के लिए था, नकारात्मकता फैलाने के लिए था, लोगों को धोखे के जाल में उलझाने के लिए था और वो बने थे सिर्फ विश्वासघात के लिए। लेकिन, आज वही लुटेरे जो कुछ सालों पहले “एलीट” कहलाते थे, आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

लुटियन के एलीट क्लास की मानसिकता के ऊपर और उनके अस्तित्व की लड़ाई के ऊपर ये श्रृंखला नंदिनी जी ने अप्रैल 4, 2019 को लिखी थी जब चुनाव शुरू नहीं हुए थे। उन्हीं के शब्दों को आपके सामने पेश करने की कोशिश कर रहा हूँ, जिस से बाकी लोग भी इसको पढ़ सकें और जान सकें कि जिनको हम अपना देवता बनाए बैठे थे, वो बुत ही निकले।

बात 2006 की है जब अपने खानदान के नाम को भुनाते हुए और नौकरशाही की सीढ़ियों को अपने नाम के सहारे चढ़ते हुए ये ‘साहब’ के हुजूम के सामने एक सभा में घोषणा करते हैं कि “भारत जैसा अद्भुत कोई देश नहीं है”। आप जान कर हैरान रह जाएँगे कि जिस कारण से उन साहब ने अपनी मातृभूमि की प्रशंसा की थी उसका देश की संस्कृति, विविधता, इतिहास, कला, वास्तुकला, व्यंजनों से कोई लेना-देना नहीं था।

किन्तु जो कारण उन्होंने बताए थे और उन कारणों को सुनकर सभागार में जो अट्टहास लगे थे वो सालों दर साल मेरे कानों में गूँजते रहे। उन साहब का कहना था कि “भारत जैसा अद्भुत कोई देश नहीं है” क्योंकि “सिर्फ पाक और बांग्लादेश ही ऐसे देश हैं जहाँ के राजनेताओं और सरकारी कर्मचारियों के बंगले मेरे बंगले समान हैं।“ साहब के कुछ अन्य बोल:

“मेरी घर की तरफ़ आने-जाने वाले रास्ते साफ-सुथरे हैं, फुटपाथों के आसपास पेड़ लगे हैं और बिजली निर्बाध है।”

“सिर्फ भारत में ही आपको नौकरानियों, मालियों, ड्राइवरों की कमी महसूस नहीं होती क्योंकि यहाँ पर लेबर “चीप” है। (और भगवान करे ये लेबर हमेशा ही “चीप” रहे, ऐसा उनका कहना था।)

साहब ने एक ठहाका और लगाया और अपने भाषण में इन शब्दों को जोड़ा:

“किस देश में आप सीधे पुलिस आयुक्त को फोन कर सकते हैं? किस देश में अपनी ससुराल जाने वाले रास्ते को वन वे ट्रैफिक में तब्दील करा सकते हैं क्योंकि आपके ससुर साहब को भारी ट्रैफिक से आने-जाने में तकलीफ होती थी?अद्भुत है ये देश जहाँ आप एक राज्य के सीएम से एक फ्लाईओवर की योजना को रोकने का अनुरोध कर सकते हैं जो कुछ आलीशान घरों की सुन्दरता में आड़े आ रहा था। और हाँ, किस और देश में आप एक प्राइवेट क्लब के मालिक को फोन करके धमका सकते हैं कि अगर आपकी सदस्यता तुरंत स्वीकृत नहीं हुई तो आपके घर पर एक्साइज वालों की रेड डाल दी जाएगी ?”

साहब का सवाल था कि किस देश में आप एक संरक्षित क्षेत्र में सभी पर्यावरण कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए एक शानदार आलीशान घर का निर्माण कर सकते हैं? है कोई और देश जहाँ बैन किया हुआ जानवर का माँस आपको मात्र 5 मिनट में एक फोन कॉल पर हाज़िर हो जाता है?

साहब अपनी ‘Luxuries’ का बखान करते हुए पूछते हैं कि क्या है कोई ऐसा देश जहाँ आपकी नालायक औलादों को आप देश के सबसे शानदार विद्यालयों में या फिर उच्च कोटि के आईवी लीग कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में लायक छात्रों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थानों पर पहुँच सकते हैं? साहब ये सब बोल रहे थे, तभी वहाँ पर किसी ने उनसे पूछा था कि उस आम आदमी का क्या जिसके पास मूल सुविधाएँ तक हासिल नहीं? आम जनता का क्या?

उनका जवाब था, “मेरा ड्राइवर कहता है (ये आपको मैं बता दूँ कि मैंने उस वक़्त पहली बार ये ‘ड्राइवर का सिद्धांत’ के बारे में सुना और सीखा था, जो आगे चलकर हर किसी ने इस्तेमाल किया) छोटे शहरों और गाँवों में हमारे लोग बड़े खुश हैं, क्योंकि वो सभी जात-पात के मसलों में उलझे हुए हैं और वे अपने जीवन में जो भी छोटा-मोटा मिला है, उन चीज़ों के लिए आभारी हैं।”

साथ ही कुछेक सालों में होते रहने वाले दंगे उनको ये अहसास कराते रहते हैं कि उनके पास जो भी है वो कितना कीमती है। जब आपका स्वयं का जीवन खतरे में होता है तो आप मूर्ख ही होंगे जो टूटी-फूटी सड़कों और कूड़े के बारे में चिंतित होंगे। अभी पिछले दिनों इन साहब से फिर मुलाकात हुई और मैंने जानना चाहा था कि भावी आम चुनाव 2019 पर उनके विचार क्या थे?

उनका कहना था; “उनका गैंग और उनके मालिकान इस बार पूरी जान लगा देंगे कि सत्ता का परिवर्तन हो कर रहे। आखिर वो सोने का अंडा देने वाली मुर्गी जो 5 साल से किसी और के हाथ में है, वो उसको इस बार नहीं हाथ से नहीं जाने देंगे। बहुत दुखी होकर उनका कहना था कि पिछले 5 साल बेहद मुश्किल से भरे थे और दुबारा एक और पाँच साल का मतलब सिर्फ क़यामत ही होगा।”

मुझे समझ आ गया था कि इस बार हमला 2014 से बड़ा होगा, हताशाओं से भरा होगा, अभद्रता की सीमाओं को तोड़ दिया जायगा। याद रहे कि ये लेख 2019 के चुनाव से पहले लिखा गया था और जैसा आप देख रहे हैं कि वही हो रहा है। लेकिन, साथ ही मुझे ये भी शक नहीं कि यह एक युग का अंत है और उस अंधे युग की समाप्ति को अंधे भी देख सकते हैं।

ये तो था नंदनी जी की ट्वीट श्रुंखला के कुछ अंशों का हिंदी में रूपांतरण। और अब आता हूँ मैं अपनी बात पर।

चायवाला मोदी वापस आएगा- ऐसा उन महाशय ने कहा था! मोदी जी वापस आए और साथ ही शुरू हुआ पूर्व नियोजित हमला। अगर आपको लगता है कि सरकार आँखें मूँदे बैठी थी तो आप शायद कुछ ज्यादा सोच रहे हैं। सब कुछ वही हो रहा है, कहीं स्केल बड़ा है कहीं स्केल छोटा पर हमलों की उम्मीद थी और सरकार की तैयारी भी पूरी थी।

ये ज़रूरी नहीं कि आपको हमेशा दिखे कि रोकथाम कहाँ और कैसे हो रही है। आपको दिल्ली की ये आग दिख रही है जो शायद कई सालों बाद भड़काई गई एक आग है पर आपको वो आग नहीं दिख पाई होगी जिनको पश्चिमी उत्तरप्रदेश में, मुंबई के इलाकों में, मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में और भी कई “ख़ास इलाकों” में भड़कने से पहले ही बुझा दिया गया।

ये जिस सरकार की आपको नाकामी दिख रही है ये वही सरकार है जिसने कश्मीर में अभूतपूर्व विपरीत परिस्थितियों में अपनी मर्ज़ी के खिलाफ एक पत्ता भी नहीं हिलने दिया। वही मोदी हैं, वही अमित शाह हैं। बस आप अपना धैर्य खो बैठे हैं और विपक्ष के अजेंडे में उलझ कर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।

वो चाहते हैं कि आप हिंसा की बात करें, वो चाहते हैं कि आप कानून को हाथ में ले जिस से उनके किए गए कामों को एक कारण मिल सके। क्यों करना है आपको राणा अयूब की ट्वीट को कोट और जवाब देना है? क्यों आपको स्वरा को गद्दार कहना है? राजदीप को क्यों गाली देना है आपको?

सोशल मीडिया पर इन की रोकथाम नहीं होगी। अगर करना है आपको रोकथाम तो करिए ब्लॉक इन सभी को और इनको जवाब देना बंद कीजिए। आप इनकी ऑडियंस हैं, और अगर ऑडियंस नहीं आएगी सिनेमा हॉल में तो पिक्चर तो फ्लॉप होगी ना ?

आखिर में एक निवेदन यहाँ उपस्थित महिलाओं से जो इस नकरात्मकता में उलझी हुई हैं। आप सुबह उठ कर सीधे यहाँ आती हैं और स्वरा एंड गैंग को गालियाँ देने और कोसने लग जाती हैं। एक घंटे बाद आप जब अपनी रिट्वीट और लाइक देख कर खुश होकर अपने बच्चे के लिए कुछ कह रही होती हैं या पति से, पिता से या किसी भी पारिवारिक सदस्य से बातचीत कर रही होती हैं तो आप के अंदर उसी एक घंटे का ज़हर घुला हुआ होता है। नफरत की आग लिए आप दिन भर घूम रहे होते हैं।

धर्म आपका कोई भी हो, नफरत आपके अंदर की सिर्फ आपको ही जलाएगी। आज तक दंगों में जितने भी लोग मारे गए वो ज़मीन पर मौजूद थे अपने अंदर नफरत लिए और नफरत भड़काने वाले टाइप कर रहे थे कहीं दूर बैठे हुए। मुझे कल से लोग डीएम (मैसेज) में आकर सेक्युलर बोल रहे हैं, कोई आपिया बोल रहा है कोई संघी।

बोलते रहिए, सेक्युलर होना गलत नहीं है अगर आप वो सेक्युलर हैं जिसके मायने वो नहीं होते जो आप मानते हैं, बल्कि वो होते हैं जो आपने असलियत में ना पढ़ा और ना होते हुए देखा। इस उम्मीद के साथ आपसे विदा कि जब यहाँ मुस्कराहट वापस आएगी तो मैं भी आ जाऊँगा।

रवीश कुमार का प्राइम टाइम प्रोपेगेंडा: गोली चलाने वाला मोहम्मद शाहरुख नहीं, अनुराग मिश्रा है

झूठे दावों और फर्जी खबरों के सहारे एक तय दर्शक भीड़ को अपनी ओर आकर्षित कर बरगलाने वाले रवीश कुमार एक फिर झूठ फैलाते नजर आए। इस बार उन्होंने मोहम्मद शाहरुख के नाम पर झूठ परोसा है। वही मोहम्मद शाहरुख जिसने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान एक पुलिसकर्मी पर बंदूक तानी थी और लगातार इधर-उधर 8 राउंड फायरिंग की थी। उस शाहरुख को कल रवीश कुमार ने अपने प्राइम टाइम में अनुराग मिश्रा बता दिया। साथ ही एक विडियो के जरिए उसकी गिरफ्तारी नहीं होने का भ्रम पैदा करने की कोशिश की।

26 फरवरी को प्रसारित अपने प्राइम टाइम में रवीश को कहते सुना जा सकता है, “पुलिस की हालत ये है कि अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है। पुलिस साफ कहती है ये शाहरुख है, मगर आप सोशल मीडिया पर देखिए कि इसे अनुराग मिश्रा बताया जा रहा है।” जिस अनुराग मिश्रा की प्रोफाइल को लेकर ये प्रोपेगेंडा तैयार किया गया उसने खुद विडियो के जरिए ऐसा करने वालों के झूठ का पर्दाफाश किया। साथ ही कहा कि वह उस हर शख्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे जिन्होंने उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया।

रवीश कुमार को अपने प्राइम टाइम में बिन सच्चाई खँगाले दिल्ली पुलिस से कहते सुना जा सकता है कि वो युवक की पहचान पर दोबारा से बोलें और इसके बाद उन्हें बिन तारीख के एक विडियो चलाते देखा जा सकता है। इसमें उनका रिपोर्टर पुलिस से पूछता है कि क्या उस युवक की गिरफ्तारी हुई है। इसपर पुलिस कहती है कि वो उसकी खोज में हैं। जल्द से जल्द उसकी गिरफ्तारी हो जाएगी। इसके बाद रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम में अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा का वीडियो चलाते हैं ताकि उनके दर्शकों को ये लगे कि उनकी भाषणों के कारण दिल्ली में हिंसा भड़की।

इस प्राइम टाइम की शुरुआत में रवीश कुमार आईबी अधिकारी की मौत के बारे में भी बात करते हैं और पहले तो ये समझाने की कोशिश करते हैं कि आखिर कैसे अंकित शर्मा के परिवार ने आम आदमी पार्टी के नेता को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया। फिर बाद में पूरी हिंसा के लिए टेलीविजन डिबेट में भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार ठहराया। शायद इस बीच रवीश कुमार और उनकी टीम 51 वर्षीय विनोद की निर्मम हत्या की कहानी बताना भूल गए, जिन्हें उनके बच्चे के सामने मार दिया गया और उनकी बाइक को आग के हवाले कर दिया गया।

इस प्राइम टाइम में रवीश कुमार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के दौरे की विडियो दिखाते भी नजर आए। इसमें एक मुस्लिम युवक ने सीएए के ख़िलाफ़ विरोध को आरएसएस प्रायोजित बताया और अमित शाह पर आरोप लगाया कि वे इन सबके पक्ष में हैं। इसके अलावा रवीश कुमार रामभक्त गुलशन और उस कपिल गुर्जर द्वारा गोली चलाने वाले वाकए को भी दिखाते नजर आए, जिसने ये कहा था कि इस देश में हिंदुओं की मर्जी चलेगी। जाहिर है, हिंदू नामों पर जोर देकर रवीश का इन विडियो को दिखाने के पीछे क्या इरादा था, लेकिन शायद वो भूल गए कि जिस कपिल गुर्जर की विडियो दिखाकर वो अपना एजेंडा चलाना चाहते थे, वो आम आदमी पार्टी का ही कार्यकर्ता था।

26 फरवरी को रवीश कुमार ने जिस तरह से तथ्यों को प्राइम टाइम में पेश किया वह इस बात का सबूत है कि मेनस्ट्रीम मीडिया दंगाई के मुस्लिम होने पर न केवल उसका नाम छिपाता है, बल्कि उसे क्लीनचिट भी देता है।

रतनलाल और अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के ख़िलाफ दिल्ली में साइलेंट मार्च

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा में पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल और आईबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या के खिलाफ आज शाम साइलेंट मार्च निकाला जाएगा। ‘यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा’ नाम की संस्था शाम 5 बजे मार्च निकालेगी। मार्च जंतर-मंतर के पास स्थित केरल हाउस से शुरू होकर अशोका रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगी। ‘यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा‘ ने AISA, PFI को बैन करने की भी माँग की है।


संस्था ‘यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा’ द्वारा शांति मार्च को लेकर जारी किया गया पोस्टर

ड्यूटी से लौटते वक़्त अंकित शर्मा को दंगाइयों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। चॉंदबाग के नाले से उनका शव बरामद किया गया था। इस मामले में आप पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि दंगाई अंकित शर्मा को घसीटकर उसके घर ले गए और हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी आरोप लगाया था कि ताहिर हुसैन के घर से लगातार पेट्रोल बम चलाए जा रहे थे और गोलीबारी भी की जा रही थी।

इससे पहले हिंसा में दिल्ली पुलिस के 42 वर्षीय हेड कान्स्टेबल रतनलाल की गोली लगने से मौत हो गई थी।
राजस्थान के सीकरी निवासी रतनलाल वर्ष 1998 में कॉन्स्टेबल के पद पर दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। रतनलाल की मौत की खबर जैसे ही उनके परिजनों को हुई ऐसे ही उनके घर में मातम पसर गया। रतनलाल की दो बेटियाँ और एक बेटा है।, जिनका बुधवार को उनके पैतृक गाँव में अंतिम संस्कार कर दिया गया।

ताहिर हुसैन के घर की छत पर पेट्रोल बम, पत्थरों का मिला जखीरा, पार्षद के बचाव में उतरी AAP

4 लोगों को खींचकर AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गए दंगाई, मार कर नाले में फेंक दिया: अंकित शर्मा का भाई

माँ से किया वादा पूरा नहीं कर पाए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल, बुखार के बावजूद कर रहे थे ड्यूटी

ताहिर हुसैन के घर की छत पर पेट्रोल बम, पत्थरों का मिला जखीरा: पार्षद के बचाव में उतरी AAP

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों के दौरान आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। उनका शव चॉंदबाग के नाले से बरामद किया गया था। इस मामले में आप पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। हुसैन को लेकर लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, ताहिर हुसैन की छत पर से पेट्रोल बम का जखीरा, कट्टों और ट्रे में बड़े-बड़े पत्थर, गुलेल आदि बरामद किए गए है। इंडिया टीवी के पत्रकार कुमार सोनू की रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर सुशांत सिन्हा और आजतक की पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने इस खबर को तस्वीरों सहित शेयर किया। दावा किया जा रहा है ये तस्वीर ताहिर हुसैन के घर की छत की है। यहाँ की कई वीडियो पहले भी सामने आ चुके हैं। इनमें ताहिर के घर की छत से दंगाई पत्थरबाजी करते और पेट्रोल बम फेंकते नजर आ रहे है। ताहिर भी हाथ में रॉड लिए दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्टो के अनुसार जब कुछ मीडियाकर्मी उसके घर की छत पर पहुॅंचे तो चौंकाने वाला नजारा दिखा। पत्थर का अंबार लगा था। एक बड़ी सी गुलेल पड़ी थी। कोल्ड ड्रिंक की बोतलों में पेट्रोल भरा था। कई कट्टे, बोरियॉं मिलीं जिनमें से कुछ में पत्थर भी थे।

फिलहाल ताहिर कहॉं है यह साफ नहीं है। लेकिन एक विडियो के जरिए उसे खुद को बेकसूर बताने की कोशिश की है। उसका कहना है कि हिंसा के वक्त वह घर में नहीं था और वह अपनी जान बचाकर एक रिश्तेदार के घर पर है।

बता दें कि भाजपा नेता एवं दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि ताहिर के घर से निकले गुंडों ने ही आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या की थी। पत्रकार राहुल पंडिता ने भी चश्मदीदों के हवाले से बताया है कि अंकित के अलावा दो और लोगों को दंगाई खींचकर ताहिर के घर ले गए थे।

जी न्यूज को अंकित शर्मा के भाई ने बताया, “मुस्लिम लोग जो सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं, ये बहुत गलत कर रहे हैं। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इन्होंने कई घरों का नाश कर दिया। इसमें एक घर हमारा भी बर्बाद हो गया।” अंकित के भाई के अनुसार उनके भाई ड्यूटी से लौट रहे थे जब दंगाई गली के बाहर से उन्हें खींचकर ले गए। उनके मुताबिक भीड़ चार लोगों को खींचकर ताहिर हुसैन के मकान में लेकर गई और उन्हें मारकर नाले में फेंक दिया।

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी अपने पार्षद के बचाव में उतर आई है। AAP ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ताहिर के घर पर आठ घंटे बाद पहुँची थी। इस मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। आप नेता संजय सिंह ने कहा, “ताहिर हुसैन ने बयान जारी किया। उनके घर के अंदर भीड़ घुसी, तो पुलिस को जानकारी दी। लगातार अपने को बचाने के लिए पुलिस से मदद माँगी। पुलिस आठ घंटे बाद पहुँची और पुलिस ने उन्हें निकाला।” उन्होंने कहा कि ताहिर का कहना है कि भीड़ उनके घर में घुसी थी। वह तो दो दिन से घर में ही नहीं हैं। उन्हें पुलिस ने निकाला है।

अंकित को घसीट कर मार डाला: AAP पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत से गुंडे कर रहे बमबारी, देखें Video

‘AAP पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडों ने IB ऑफिसर को मार डाला, उसके घर से चल रहे बम व गोलियाँ’

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

4 लोगों को खींचकर AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गए दंगाई, मार कर नाले में फेंक दिया: अंकित शर्मा का भाई

‘कहते रवीश के चैनल से हूँ, तो ये हाल न होता’: NDTV के पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने किया पथराव

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर-मौजपुर इलाके में भड़की हिंसा पर रिपोर्ट करने पहुँचे NDTV पत्रकार श्रीनिवासन जैन पर मुस्लिम भीड़ द्वारा पथराव किए जाने की घटना सामने आई है। न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने इस घटना का विडियो शेयर किया है।

विडियो में श्रीनिवासन को रिपोर्टिंग करते देखा जा सकता है और ये भी कहते सुना जा सकता है कि उनपर पथराव हो रहा है। उनके मुताबिक दंगाई कैमरे में रिकॉर्ड होना नहीं चाहते थे। इसलिए कैमरा देखते ही चिल्लाने लगे और देखते ही देखते एनडीटीवी पत्रकार के ऊपर पत्थरबाजी होने लगी।

यह वीडियो देखकर हैरानी तो तब होती है, जब श्रीनिवासन ये कहते हैं कि जाफराबाद इलाके में कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इकट्ठा हुए हैं और उनमें मीडिया के प्रति बहुत ज्यादा गुस्सा है। इसके बाद वो दंगाइयों को चिल्लाता देख उन्हें आश्वासन देते हैं कि वो उनका विडियो नहीं बना रहे, जबकि उनपर पत्थरबाजी शुरू हो चुकी होती है। फिर वो कैमरे को लेकर उलटी दिशा में चलना शुरू कर देते हैं जिससे पत्थरबाजी करने वाली भीड़ कैमरे में कैद नहीं होती।

सोचिए, पत्थरबाजी करने वाले इन अल्पसंख्यक दंगाइयों के प्रति एनडीटीवी का और उसके पत्रकारों का कितना उदार रवैया है कि घटनास्थल पर मौजूद होने के बाद भी वो उन्हें कैमरे में कैद नहीं करते। विडियो में श्रीनिवासन को कहते सुना जा सकता है कि यहाँ पर पत्थर आने शुरू हो गए हैं तो हम यहाँ पर विडियो नहीं बनाएँगे। हम कैमरा घुमाएँगे और दूसरी तरफ चलेंगे। हमें भीड़ को उत्तेजित नहीं करना।

गौरतलब है कि इसी मामले पर दीपक चौरसिया ने श्रीनिवासन का विडियो वीडियो शेयर करके उनपर तंज कसा है। उन्होंने याद दिलाया है कि जब उनपर शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था, तब श्रीनिवासन ने कहा था कि दीपक चौरसिया पत्रकार ही नहीं हैं।

दीपक चौरसिया ने ट्वीट किया है, “प्रिय दोस्त! श्रीनिवासन जैन शाहीन बाग पिटाई के वक्त आपने लिखा था मैं तो पत्रकार हूँ नहीं! लेकिन आप तो हैं! फिर CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे इन शांतिदूतों ने आप पर पत्थर क्यों बरसाएँ? हाँ, अगर आप उनसे कहते कि आप रवीश कुमार के चैनल से हैं तो आपका ये हाल नहीं होता!” बता दें, 24 जनवरी को शाहीन बाग में भीड़ ने चौरसिया पर हमला किया था। उस वक़्त मीडिया गिरोह के लोगों ने इस हमले को जस्टिफाई करने की कोशिश की थी।

दिल्ली दंगा: मरने वालों की संख्या बढ़कर 30, अब तक 18 FIR, 106 गिरफ़्तार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। अब तक 30 लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी है।

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बुधवार देर शाम को दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एमएस रंधावा ने बताया कि पूर्वोत्तर दिल्ली में हुई घटनाओं के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज की गई है। 106 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा बताया कि हिंसा को लेकर पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज और पुख्ता सबूत हैं।

दिल्ली पुलिस ने लोगों की सहायता के लिए दो नंबर जारी किए है, जिस पर मदद के लिए कॉल की जा सकती है। रंधावा ने बताया कि पब्लिक किसी भी मदद या जानकारी के लिए 22829334 और 22829335 पर कॉल कर सकती है। मैं जनता से अपील करना चाहूँगा कि अफवाहों पर ध्यान न दें।

प्रभावित इलाकों में अर्धसैनिक बलों की कुल 107 कंपनियां तैनात की गई हैं। रविवार को भड़की हिंसा ने बाद में दंगों का रूप ले लिया था। एक अनुमान के मुताबिक हिंसा में 800 से अधिक दुकानों-मकानों में आगजनी व लूटपाट को गई। 2000 से अधिक वाहनों को आग के हवाले किया गया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार तीन इलाकों ब्रह्मपुरी, नूर-ए-इलाही और उस्मानपुर के तीसरा पुस्ता इलाके में दंगाइयों ने बुधवार देर रात को भी आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया।

जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर को दिल्ली हिंसा से जोड़ लिबरल गैंग ने फैलाया प्रोपेगेंडा, सच्चाई कुछ और…

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में दंगों के बाद अब तनावपूर्ण शांति है। लेकिन, मीडिया गिरोह और लिबरल गैंग अब भी सच्चाई बताने की जगह अपना प्रोपेगेंडा चलाने से बाज नहीं आ रहा। पहले तो भाजपा नेता कपिल मिश्रा पर हिंसा का ठीकरा फोड़ने की कोशिश की गई और अब जजों के तबादले के बहाने झूठ फैलाया जा रहा है।

लिबरल गैंग ने जस्टिस एस मुरलीधर के तबादले को दिल्ली हिंसा की सुनवाई से जोड़ने की कोशिश कर यह संदेश देने की कोशिश की कि उनका तबादला कपिल मिश्रा से जुड़े मामले की सुनवाई के कारण हुई है। अब मीडिया गिरोह की इस प्रकार की रिपोर्टिंग में कितनी सच्चाई है, आइए जानते हैं।

मंगलवार आधी रात और बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। इसके बाद खबर आई कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे की सलाह पर जस्टिस मुरलीधर का ट्रांसफर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कर दिया है। अब ये फैसला कब लिया गया इससे मीडिया गिरोह को कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने इस खबर के बहाने अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया।

गिरोह ने हेडलाइन के जरिए पाठकों को ये बताने की कोशिश की कि जस्टिस एस मुरलीधर अब कपिल मिश्रा द्वारा दी हेट स्पीच के मामले में सुनवाई नहीं करेंगे। उनका ट्रांसफर कर दिया गया है। सोचिए, ऐसी हेडलाइन पढ़कर किसे मोदी सरकार, फासीवादी नहीं लगेगी। आखिर क्यों पाठक के मन में सरकार के प्रति सवाल नहीं खड़े होंगे। पाठक पूछने थोड़ी जाएगा कि वामपंथी मीडिया ने ऐसा क्यों लिखा और वैसा क्यों नहीं। उसे तो जो परोसा जाएगा, वो उसे ही ग्रहण करेगा न।

खैर, जैसे ही सोशल मीडिया पर ये खबर तूल पकड़ने लगी वैसे ही इस मामले पर आगे की जानकारी आ गई। जिसमें बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 12 फरवरी को उनके स्थानांतरण की सिफारिश की थी। इसके बाद ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सीजीआइ बोबडे की सलाह पर दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस मुरलीधर को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रभार सँभालने का निर्देश दिया। ऐसा रूटीन प्रक्रिया के तहत किया गया। जस्टिस मुरलीधर के अलावा दो और जजों के तबादले के आदेश जारी किए गए हैं। इनमें से एक मुंबई हाईकोर्ट से तो दूसरे कर्नाटक हाईकोर्ट से संबद्ध हैं।

4 लोगों को खींचकर AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गए दंगाई, मार कर नाले में फेंक दिया: अंकित शर्मा के भाई

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भड़के दंगों में आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। उस पर दंगाइयों को शह देने के आरोप लग रहे हैं। कुछ विडियो सामने आए हैं जिसमें उसके घर से लगातार गोलीबारी हो रही है। पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं। उसके छत पर जमा लोग पत्थरबाजी कर रहे हैं। कई विडियो ऐसे आए हैं जिनमें ताहिर खुद रॉड के साथ छत पर दिखाई दे रहा है। साथ में कुछ लोग भी हैं।

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि हुसैन के घर से निकले गुंडों ने ही आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या की थी। अंकित का शव नाले से बरामद किया गया था। पत्रकार राहुल पंडिता ने चश्मदीदों के हवाले से बताया है कि अंकित के अलावा दो और लोगों को दंगाई खींचकर ताहिर के घर ले गए थे। वहीं, जी न्यूज से बातचीत में अंकित शर्मा के भाई ने चार लोगों को खींचकर ताहिर के घर ले जाने का दावा किया है।

राहुल पंडिता ने ट्वीट कर कहा है कि चॉंदबाग के मूॅंगा नगर के लोगों ने ताहिर हुसैन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कई चश्मदीदों ने बताया है कि अंकित शर्मा के अलावा दंगाई दो और लोगों को हुसैन के घर घसीटकर ले गए।

वहीं जी न्यूज को अंकित शर्मा के भाई ने बताया, “मुस्लिम लोग जो सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं, ये बहुत गलत कर रहे हैं। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इन्होंने कई घरों का नाश कर दिया। इसमें एक घर हमारा भी बर्बाद हो गया।” अंकित के भाई के अनुसार उनके भाई ड्यूटी से लौट रहे थे जब दंगाई गली के बाहर से उन्हें खींचकर ले गए। उनके मुताबिक भीड़ चार लोगों को खींचकर ताहिर हुसैन के मकान में लेकर गई और उन्हें मारकर नाले में फेंक दिया।

नीचे के विडियो में आप अंकित शर्मा के परिवार का वो बयान देख सकते हैं, जिससे पता चलता है कि कैसे दंगाई अंकित को गली से घसीटते हुए ले गई। परिवार का रो-रो कर बेहद बुरा हाल है।

इस बीच ताहिर ने एक विडियो जारी कर अपनी भूमिका पर सफाई दी है। वो कहता है, “बहुत सारी भीड़ जबर्दस्ती मेरा गेट तोड़ अंदर आना चाहती थी। मैंने पुलिस बुलाई। वो आए। हमारे मकान की तलाशी ली गई। जब कोई दंगाई नहीं दिखा तो मैं पुलिस के सहयोग से जान बचाकर बाहर निकला। पुलिसवालों की निगरानी एक दिन रही उसके बाद पुलिस चली गई। मैं एक सच्चा, अच्छा भारतीय मुस्लिम हूॅं, मैं आगे भी हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के लिए काम करता रहूॅंगा। मैं खुद जान बचाकर परिवार के साथ एक रिश्तेदार के पास हूॅं। मैं बच्चे की सौगंध खाकर कहता हूॅं कि इन सबसे मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैं इस तरह की घटिया राजनीति नहीं कर सकता।”

अंकित को घसीट कर मार डाला: AAP पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत से गुंडे कर रहे बमबारी, देखें Video

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चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या