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दिल्ली दंगों की 8 कहानियाँ, जिसे मीडिया छुपा रहा: अजीत भारती के सवाल | Ajeet Bharti on Delhi Riots and Media Hiding Facts

पूर्वी दिल्ली, चाँद-बाग में स्थित एक घर। वो घर, जहाँ एक हिंदू की बेटी की शादी हो रही थी। ताहिर हुसैन के गुंडों और दंगाइयों के हमले और आगजनी से वो घर पूरी तरह जलकर खाक हो गया है और एक मलबे के ढेर में बदल चुका है। मजहबी दंगाइयों द्वारा घर के ऊपर लगातार पेट्रोल बम फेंके गए। लोगों के ऊपर हजारों की संख्या में टाइल्स फेंके गए। पूरा का पूरा पार्किंग लॉट फूँक दिया गया और सारी गाड़ियाँ जलकर कबाड़ में बदल चुकी हैं। 

आईबी के लिए काम करने वाले अंकित शर्मा की सैकड़ों बार चाकुओं से गुदी हुई लाश एक नाले से बरामद हुई है। लेकिन वामपंथी मीडिया ये कहानियाँ नहीं दिखाएगा क्योंकि ये कहानियाँ महत्वपूर्ण नहीं हैं। हिन्दुओं की मौत से इस देश की मीडिया को कोई फर्क नहीं पड़ता है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

‘एंटी-मुस्लिम’ दंगों का सच: मरने वालों में 8 हिन्दू, 5 का नाम पता नहीं

दिल्ली हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 27 तक पहुँच गई है। जिनमें एक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और IB अधिकारी अंकित शर्मा भी शामिल हैं। दंगों में हुई मौतों को लेकर अब तक मिली जानकारी के अनुसार कुल 27 लोगों में आठ हिन्दू हैं, जबकि कुछ के नाम और पहचान अभी सार्वजनिक होने बाकी हैं। 9 नाम समुदाय विशेष के हैं। जिन 5 लोगों के बारे में अभी पता नहीं चला है कि उनके नाम क्या हैं, वो हिन्दू भी हो सकते हैं और दूसरे मजहब से भी। हमारे पास जो लिस्ट है, उसमें कुल 22 नाम ही हैं।

मृतकों में हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल के साथ ही राहुल सोलंकी और कई अन्य की मृत्यु गोली से हुई हैं। हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की मृत्यु गोली लगने से हुई थी। जबकि अंकित शर्मा की मृत्यु कल शाम ही दंगाइयों ने पीट-पीट कर कर दी थी। हालाँकि, उनके पिता ने यह भी आशंका जाहिर की है कि उन्हें पीटने के बाद गोली भी मारी गई थी। जबकि सोमवार को राहुल सोलंकी की हत्या उस समय कर दी गई, जब वो करावल नगर में खरीददारी करने गया था।

‘रोड जाम करना ही पड़ेगा’: दिल्ली हिंसा पर वामपंथी प्रोपेगंडा पोर्टलों ने यूँ फैलाया ज़हर, दंगाइयों का किया बचाव

दिल्ली में दंगाइयों ने तीन दिन से पूरे महानगर को अशांत कर रखा है। इसमें उनका पूरा साथ दे रहा है मीडिया का एक बड़ा वर्ग, जो बिलकुल ही नहीं चाहता कि दंगाई अगर इस्लामी भीड़ की शक्ल में आएँ तो उनकी पहचान उजागर हों। वहीं दो-चार भाजपा नेता के बयानों को लेकर ऐसा हंगामा मचाया जा रहा है, जैसे बाबर को उन्होंने ही भारत बुला कर कत्लेआम करवाया था। ये ट्रेंड तभी शुरू हो गया था, जब दिल्ली में हिंसा की घटनाएँ शुरू हुई थी। जैसे विधानसभा चुनाव से पहले अनुराग ठाकुर के नाम पर बिल फाड़ा जा रहा था, अब कपिल मिश्रा को बलि का बकरा बना कर असदुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान, शरजील इमाम और भड़काऊ बयान देने वाले तमाम लोगों को बचाया जा रहा है।

मीडिया का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि दिल्ली पुलिस को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाए और ये साबित किया जाए कि ‘हिंदुत्व के गुंडे’ पुलिस के साथ मिल कर समुदाय विशेष को मार रहे हैं। हम ऐसे ही प्रपंची मीडिया पोर्टलों की पोल खोलने जा रहे हैं, एक-एक कर। साथ ही हम इस लेख में उनके प्रपंच का जवाब देने से भी नहीं चूकेंगे क्योंकि झूठ व भ्रम फैलाना उनका पुराना पेशा रहा है।

पुलिस ने एक्शन नहीं लिया: द क्विंट

‘द क्विंट’ का सवाल है कि आखिर पुलिस ने एक्शन लेने से पहले अपने राजनीतिक बॉस के आर्डर का इंतजार क्यों किया? पहली बात तो ये कि मीडिया पोर्टल को कैसे पता चला कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई थी और अमित शाह का आदेश आने के बाद ही पुलिस सक्रिय हुई। साथ ही ‘द क्विंट’ ने कई आपराधिक मामले झेल रहे अमानतुल्लाह ख़ान और भाजपा नेता कपिल मिश्रा की तुलना करने का प्रयास किया। अर्थात, इन्होने अमानतुल्लाह की बात तब की, जब इन्हें कपिल मिश्रा को दंगों का कारण साबित करना था। और पुलिस अपने संवैधानिक नेतृत्व से आदेश नहीं लेगी तो मीडिया से लेगी?

‘द क्विंट’ ने कपिल मिश्रा की तुलना अमानतुल्लाह से की

अख़बार वही छापें, जो हम कहें: न्यूज़लॉन्ड्री

ये एक ऐसा प्रोपेगंडा पोर्टल है, जो चाहता है कि सारे समाचारपत्र इसके हिसाब से ही चलें। अर्थात, ‘दैनिक जागरण’ ने सरसंघचालक मोहन भागवत का बयान छाप दिया तो दिक्कत, उसने पहले पेज पर एड दे दिया तो दिक्कत और ट्रम्प-मोदी की रैली को कवरेज दी तो दिक्कत। यानी, कोई अख़बार भागवत का बयान न छापे। क्या वो अपराधी हैं? नहीं। कोई अख़बार अब किसी भी प्रकार का एडवर्टाइजमेंट के लिए अब ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ से अनुमति ले। क्या ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ मीडिया का दादा बन गया है? मोदी-ट्रम्प की रैली में सवा लाख लोग आए थे तो उसे कवर न किया जाए?

‘न्यूज़लॉन्ड्री’ अब तय करेगा कि कौन अख़बार क्या छापे

रोड जाम तो करना ही पड़ेगा, नहीं तो अटेंशन कैसे मिलेगा: द प्रिंट

‘द प्रिंट’ कई मामलों में मीडिया के इस वर्ग को लीड करता है। जैसे, ये बताना कि फलाँ मामले में वामपंथियों का प्रपंची नैरेटिव क्या रहेगा? इस बार भी न्यूज़ पोर्टल ने कुछ ऐसा ही किया। वो पूछता है कि क्या रोड जाम कर देना इतना बड़ा गुनाह है कि कोई क़ानून अपने हाथ में ले ले? पहली बात तो ये कि 2 महीने से रोड जाम करने से लाखों लोगों को प्रतिदिन परेशानी हुई। दूसरी बात, क़ानून हाथ में किसने लिया? इस्लामी टोपी पहने वो 40 लोग कौन थे, जिन्होंने ब्रह्मपुरी में विनोद कुमार को मार डाला? साथ ही ‘द प्रिंट’ रोड जाम करने को सही ठहराता है और कहता है कि तभी तो अटेंशन मिलेगा।

‘द प्रिंट’ ने रोड जाम करने को सही ठहराया

‘द प्रिंट’ दावा करता है कि गृहमंत्री अमित शाह हिंसा भड़का रहे हैं क्योंकि दिल्ली में भाजपा की हार हुई है। भाजपा की हार तो झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी हुई है। वहाँ क्यों नहीं हिंसा भड़की? वो सब तो बड़े-बड़े पूर्ण राज्य हैं, जबकि दिल्ली तो पूर्ण राज्य भी नहीं है। मुंबई में भी सीएए विरोधी आंदोलन हुए लेकिन वहाँ ‘शाह ने हिंसा क्यों नहीं भड़काई?’

केंद्र सरकार ही तो हिंसा करा रही है: स्क्रॉल

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘स्क्रॉल’ ने सारा इल्जाम भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर लगा दिया। साथ ही पोर्टल ने कहा कि पुलिस भी सरकार के साथ मिल कर समुदाय विशेष को मार रही है। लगता है स्क्रॉल अभी भी ‘कॉन्ग्रेस वाले हैंगओवर’ में जी रहा है क्योंकि उसका ‘वैज्ञानिक तर्क’ है कि सत्ता के संरक्षण के बिना ऐसी हिंसा हो ही नहीं सकती। साथ ही उसने भाजपा के बड़े नेताओं की ‘चुप्पी’ ओर सवाल खड़े किए हैं। यानी, भाजपा नेता कुछ बोलें तो वही बयान हिंसा का कारण बन जाएगा और कुछ न बोलें तो पूछा जाएगा कि चुप क्यों हैं? चित भी मेरी और पट भी।

‘स्क्रॉल’ ने पुलिस व केंद्र पर मिल कर हिंसा करने का आरोप मढ़ा

कितना गाँधीवादी है शाहीन बाग़ का आंदोलन: नवजीवन

ये कॉन्ग्रेस का हिंदी मुखपत्र है, ‘नेशनल हेराल्ड’ का हिंदी संस्करण। इसका कहना है कि शाहीन बाग़ का आंदोलन काफ़ी गाँधीवादी है। क्या राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को गाली देकर अपना गाँधीवाद दिखाया जाता है? शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट के मुख्य साजिशकर्ता शरजील इमाम ने भी तो यही किया। उसने गाँधी को बीसवीं सदी का सबसे बड़ा फासिस्ट नेता बताया। जिस आंदोलन के नेता ही गाँधी को फासिस्ट कहे, वो आंदोलन गाँधीवादी कैसे?

‘नवजीवन’ ने शाहीन बाग़ के उपद्रवियों को बचाने में पूरी ताक़त खपाई

प्रोपेगंडा पोर्टल ने आगे लिखा है कि शाहीन बाग़ में मजहबी नारे नहीं लगे। तो वहाँ पर ‘तेरा-मेरा रिश्ता क्या’ कौन लोग बोल रहे थे? वहाँ हिन्दुओं के प्रतीक चिह्नों को गाली दी गई, वो क्या था? वहाँ एक के बाद एक मजहबी नारे लगे लेकिन कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ने झूठ पर झूठ परोसा।

दक्षिणपंथी हिन्दू ग्रुप मुस्लिमों को मार रहा है: ब्लूमबर्ग

जब भारत में रह रहे लोगों को बरगलाने में वामपंथी मीडिया पोर्टल कामयाब हो सकते हैं तो फिर भारत के बाहर रह रहे लोगों के मन में देश की नकारात्मक छवि बिठाना तो उनके बाएँ हाथ का खेल हो जाता है। अब विदेशी लोगों को ग्राउंड की जानकारी है नहीं, ‘ब्लूमबर्ग’ जैसे संस्थान उन्हें झूठ परोसते हैं। भारत में भी एक गुट द्वारा इसे ख़ूब शेयर किया जाता है क्योंकि कुछ लोग ‘विदेशी मीडिया’ को ही मानते हैं। इस पोर्टल ने तो सीधा दावा कर दिया कि मुस्लिम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और हिन्दुओं ने हमला कर दिया।

‘ब्लूमबर्ग’ ने बिना सबूत हिन्दुओं को आतंकी ठहरा दिया

‘ब्लूमबर्ग’ ने बिना किसी सबूत के हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए मनगढंत आरोप लगाए और झूठे दावे कर दिए। अगर हिन्दू गुंडे बन गए हैं तो फिर मरने वालों में हिन्दू क्यों हैं? विदेशी मीडिया में इस तरह के प्रपंच सालों से चल रहा है।

हिंदुत्व के गुंडों ने सीएए विरोधियों को मारा: द वायर

बात अगर प्रपंच की हो रही हो और उसमें ‘द वायर’ का नाम न आए तो शायद पूरा लेख ही अधूरा रह जाएगा। इसने तो बिना किसी सबूत के दावा कर दिया कि हिंदुत्व के ‘गुंडे’ सीएए विरोधियों को मार रहे हैं। जबकि सच्चाई ये है कि सीएए के ख़िलाफ़ किसी भी रैली को सीएए समर्थकों ने नुकसान नहीं पहुँचाया लेकिन सीएए के समर्थन में जहाँ भी रैली हुई, मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाजी की।

‘द वायर’ ने हिंसा को सीएए विरोधियों को कुचलने की हिन्दुओं की साजिश करार दिया

साथ ही ‘द वायर’ ने दिल्ली हिंसा पर वामपंथियों का फेवरिट फॉर्मूला अपनाया और कपिल मिश्रा पर दंगे भड़काने के आरोप लगाए। हालाँकि, इस दौरान उसने शरजील इमाम, ओवैसी, वारिस पठान और अन्य भड़काऊ मुल्ला-मौलवियों के आपत्तिजनक बयानों का जिक्र नहीं किया।

दिल्ली हिंसा: ड्रोन कैमरा से देखने पर छतों पर नजर आए पत्थर, देखें VIDEO

रविवार (फरवरी 23, 2020) शाम से उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के इलाके में हुई हिंसा के बाद पुलिस दंगों की जाँच में जुट गई है। दंगों के बाद प्रभावित इलाकों में पुलिस बल को तैनात किया गया है साथ ही अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किया गया है।

पुलिस ने जब हिंसा प्रभावित इलाकों की ड्रोन कैमरों के जरिए जाँच की तो दिल्ली के शिव विहार इलाके में दिल्ली पुलिस को कई घरों की छतों पर इकट्ठे किए हुए पत्थर देखने को मिले। पुलिस अब इन घरों को चिन्हित कर कार्रवाई की बात कह रही है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि हिंसा में अब तक 106 लोग गिरफ्तार किए गए हैं और 18 पर एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि अब हालात पूरी तरह कंट्रोल में हैं और किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को भी कोई शिकायत करनी है, वे 112 नंबर पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा 22829334 और 22829335 नंबरों पर कॉल करके भी शिकायत कर सकते हैं या कोई भी सूचना दे सकते हैं।

दिल्ली में दंगा प्रभावित इलाकों में बुधवार को एडिशनल पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दिए गए हैं। वरिष्ठ अफसरों को प्रभावित इलाकों में जाकर हालात का जायजा लिया है। इसी वजह से बुधवार को हिंसा की कोई और घटना नहीं हुई है। ड्रोन के माध्यम से सर्विलांस किया जा रहा है।

हिंसा का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल दिल्ली में ज़मीन पर उतर चुके हैं। मौजपुर इलाक़े में घूम कर उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। डोभाल ने जनता को आश्वासन दिया है कि दिल्ली में ज़मीन पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद हैं और किसी को भी अब डरने की ज़रूरत नहीं है। दिल्ली में भड़की हिंसा में अब तक 200 लोग घायल हुए हैं और 22 लोगों की मौत की ख़बर है। गोकुलपुरी पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को भी दंगाइयों ने मार डाला।

डोभाल ने बताया कि स्थिति एकदम नियंत्रण में है और लोग पूर्णतः संतुष्ट हैं। उन्होने कहा कि पुलिस ग्राउंड पर अपना कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि हालात नियंत्रण में है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक बार स्थिति शांत हो जाए, सभी सवालों का जवाब दिया जाएगा।

‘मैं मरे हुए ठुल्ले के लिए संवेदना नहीं जता सकता’: AAP नेता ने किया दिल्ली दंगों में मारे गए IB अफसर का अपमान

ऐसे समय में, जब कि दिल्ली में हो रहे दंगों में कई पुलिस अधिकारी से लेकर आम जनता अपनी जान गँवा रहे हैं, आम आदमी पार्टी और इसके नेता राजनीतिक उद्देश्यों के कारण अपनी जहरीली मानसिकता से बाज नहीं आ रहे हैं। आज सुबह ही दिल्ली के चाँदबाग इलाके में दंगाइयों द्वारा एक 26 साल के IB अधिकारी अंकित शर्मा (Ankit Sharma) की बेरहमी से हत्या करने की खबर सामने आई। अंकित शर्मा की लाश के बारे में किसी को पता न चले इसके लिए उनकी लाश को एक गंदे नाले में छुपा दिया गया।

लेकिन आम आदमी पार्टी के संयोजक मयूर पंघाल (Mayur Panghaal) ने IB अधिकारी को अपमानित करते हुए सोशल मीडिया पर कई अपमानजनक ट्वीट किए। उसने ना सिर्फ मृतक अंकित शर्मा को ठुल्ला कहा, बल्कि यह भी कहा कि मरे हुए ठुल्ले के लिए उसे कोई अफ़सोस नहीं है।

मयूर पंघाल नवी मुंबई के आम आदमी पार्टी का नेता है। उसने फेसबुक से लेकर ट्विटर पर IB अधिकारी मृतक अंकित शर्मा के खिलाफ बेहूदे और शर्मनाक भाषा का प्रयोग किया।

एक ट्वीट में आम आदमी पार्टी नेता ने लिखा- “आज अंकित शर्मा नाम का एक ठुल्ला गटर में पड़ा मिला। लेकिन किसी मरे हुए ठुल्ले के लिए मुझे कोई अफ़सोस नहीं है।”

इसके अतिरिक्त एक अन्य पोस्ट में मयूर पंघाल ने लिखा, “क्या अंकित शर्मा भी अपने साथियों की तरह दंगाइयों की मदद कर रहा था? वर्दी वाले अपराधी की मौत का कोई अफ़सोस नहीं है।”

एक और पोस्ट करते हुए आम आदमी पार्टी नेता ने लिखा कि अंकित शर्मा को अपने हत्यारे साथी ठुल्लों की मदद करने का नतीजा भुगतना पड़ा है। इसके आगे उसने लिखा, “कोई ठुल्ला अपनी किस्मत से टकराए, इसके लिए मैं दुखी नहीं महसूस कर सकता हूँ। माफ़ करना अंकित शर्मा, तुम गलत लोगों की तरफ थे। जो लोग तलवार के साथ जीते हैं, तलवार से ही मारे भी जाते हैं।”

मनोज पंघाल नवी मुंबई में आम आदमी पार्टी का संयोजक है। अंकित शर्मा के खिलाफ अपने विवादित पोस्ट करने के कारण लोगों के निशाने पर आने के बाद उसने पोस्ट डिलीट कर दिया है और साथ ही अपना अकाउंट भी डीएक्टिवेट कर दिया है। हालाँकि, तब तक लोग उसके पोस्ट का स्क्रीनशॉट ले चुके थे।

मृतक अंकित शर्मा (26) खजूरी में रहते थे। मंगलवार (फरवरी 25, 2020) शाम जब वह ड्यूटी से घर लौट रहे थे, उसी समय चाँदबाग पुलिया पर कुछ दंगाइयों ने उन्हें घेर लिया और उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को नाले में फेंक दिया। अंकित शर्मा के पिता रविंदर शर्मा भी IB में हेड कॉन्स्टेबल हैं। उनका कहना है कि पिटाई के साथ अंकित को गोली भी मारी गई है।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया है। अंकित के पिता रविंदर शर्मा ने मौके पर मौजूद मीडिया को बताया कि उनका बेटा अंकित 2017 में IB में शामिल हुआ था। अंकित की अभी तक शादी नहीं हुई थी। उनके लिए लड़की की तलाश की जा रही थी।

अंकित को घसीट कर मार डाला: AAP पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत से गुंडे कर रहे बमबारी, देखें Video

दिल्ली में दंगाइयों ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को मार डाला। वो मात्र 26 वर्ष के थे और हाल ही में उनकी नौकरी लगी थी। जिस परिवार में कुछ दिनों पहले तक ख़ुशी का माहौल था, वो अब गम और मातम के साए में जी रहा है। पीड़ित परिवार ने सीधा आरोप लगाया है कि मुस्लिम भीड़ अंकित शर्मा को घसीट कर ले गई। उन्हें गली में से घसीट कर ले जाया गया। इसी इलाक़े में आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद मोहम्मद ताहिर हुसैन का भी घर है, जहाँ से रह-रह कर गोलीबारी हो रही है। पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी आरोप लगाया है कि हुसैन के घर से निकले गुंडों ने अंकित को मार डाला।

नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप अंकित शर्मा के परिवार का वो बयान देख सकते हैं, जिसमें पता चल रहा है कि कैसे मुस्लिम भीड़ अंकित को गली में से घसीटते हुए ले गई। परिवार का रो-रो कर बेहद बुरा हाल है, आप इस वीडियो में देख सकते हैं:

केजरीवाल की पार्टी के नेता ताहिर हुसैन के घर से लगातार गोलीबारी हो रही है। उसके घर से पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं। इसके कई वीडियो भी सामने आए हैं लेकिन अब तक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का कोई बयान नहीं आया है और न ही पार्टी ने हुसैन पर कोई कार्रवाई की है। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे ताहिर हुसैन के घर पर जमा कई लोग लगातार बम फेंक रहे हैं और जम कर पत्थरबाजी कर रहे हैं:

ताहिर हुसैन के घर से लगातार फेंके जा रहे हैं बम

पत्रकार राहुल पंडिता ने भी सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर किए और बताया कि मूँगा नगर में हिन्दुओं ने आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छत पर से हुसैन के आदमी पेट्रोल बम और पत्थर फेंक रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप: ताहिर हुसैन के घर में जमा किए गए हैं हथियार

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन के 5 मंजिला ईमारत में पहले से हथियार जमा कर के रखे गए हैं और उसके ही गुंडों ने अंकित शर्मा को मारा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस ईमारत के हर मंजिल से बम फेंके जा रहे हैं और भारी संख्या में गुंडे जमा हैं।

बालाकोट की बरसी पर कथित संघर्ष विराम उल्लंघन पर पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिक को किया तलब

दिल्ली में जारी हिंसा के बीच पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन के संबंध में कुछ खबरें सामने आई हैं। इन खबरों में हैरानी की बात यह है कि सीजफॉयर उलंघन का आरोप भारत ने नहीं बल्कि पाकिस्तान ने भारत पर लगाया है। बुधवार को पाकिस्तान ने कश्मीर में एलओसी (LOC) पर भारतीय सैनिकों पर सीज़फायर (संघर्ष विराम) के उलंघन का आरोप लगाया है। इसके संबंध में पाकिस्तान ने एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक को तलब भी किया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाते हुए कहा है कि मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को ही POK स्थित नेजापीर इलाके में भारतीय सेना की ओर से किए गए संघर्ष विराम उल्लंघन के दौरान एक चालीस साल के व्यक्ति को गंभीर चोटें आई हैं।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, “भारत द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन में वर्ष 2017 से ही
वृद्धि जारी है, इस दौरान भारतीय बलों ने 1,970 युद्धविराम उल्लंघन किए हैं।” उन्होंने कहा कि भारत द्वारा संघर्ष विराम का उल्लंघन क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है और इससे रणनीतिक नुकसान हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अब तक भारत की ओर से 384 बार सीज फायर का उलंघन हो चुका है।

पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने भारतीय राजनयिक की पहचान नहीं बताई है। साथ ही पाकिस्तान ने भारतीय पक्ष से 2003 के युद्धविराम व्यवस्था का सम्मान करने के साथ ही संघर्ष विराम उल्लंघन की इन और अन्य घटनाओं की जाँच, भारतीय सेनाओं को भी युद्धविराम का सम्मान करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा और कार्य सीमा पर शांति बनाए रखने का भी आग्रह किया है।

गौरतलब है कि आज ही उस बालाकोट एयर स्ट्राइक की पहली बरसी है, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुस कर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंपों पर बमबारी कर उसे तबाह कर दिया था। फरवरी 14, 2019 को हुए जम्मू-कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने 26 फरवरी की देर रात इसका बदला लिया था और पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश के आतंकी कैंप को नेस्तानबूद कर दिया था। भारतीय वायुसेना के इस एयर स्ट्राइक में जैश के करीब 250 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया था। विपक्षी दलों द्वारा बार-बार माँग करने पर भारत सरकार ने इसका वीडियो जारी कर सबूत भी दिखाए थे।

यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है सर… मस्जिद से ऐलान हो रहे हैं इकट्ठा होने के: आपबीती पूर्वी दिल्ली से

रविवार शाम से ही दिल्ली में जारी हिंसा के बीच एक ओर जहाँ देश का लेफ्ट-लिबरल मीडिया गिरोह इसे हिन्दूओं द्वारा भड़काई हुई हिंसा बताने का प्रयास करते हुए देखा गया वहीं, जमीन पर इन दंगों की असलियत सिर्फ आम आदमी ही जान रहे हैं। हिंसा, आगजनी, गोलीबारी और तोड़फोड़ के बीच ऑपइंडिया से एक दंगा पीड़ित युवती ने सम्पर्क किया। घटना के वक़्त वहाँ मौजूद लड़की ने ऑपइंडिया से सम्पर्क करके बताया कि उसके घर के पास स्थित मुस्लिम कॉलोनी में किस प्रकार से दंगे भड़काने का प्रयास किया जा रहा है।

यह घटना मंगलवार (फरवरी 25, 2020) शाम की है। घटनास्थल पर मौजूद युवती ने फौरन व्हाट्सएप पर इस घटना का आँखों-देखा हाल ऑपइंडिया को भेजते हुए बताया, “यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है। मेरे घर के सामने ही दंगे और मारपीट हो रहे हैं। घर के सामने ही मुस्लिम बस्ती है, वहाँ से लोग आकर हिन्दू इलाके में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। यहाँ न कोई पुलिस है ना ही कोई सुरक्षा का प्रबंध। सिर्फ बजरंग दल और आरएसएस के लोग ही आकर मदद कर रहे हैं। ये यहाँ पर न होते तो वो कब के यहाँ घुस चुके होते। उन्होंने मुस्लिम बस्ती में रहने वाले हिन्दुओं के घर और दुकानों को जला दिया है।”

दंगों से घबराई हुई युवती ने बताया कि यह घटना जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर के पास की ही है। ऑपइंडिया को भेजे हुए संदेश में युवती ने बताया है कि मुस्लिम बस्ती में दिन में ही स्पीकर्स से ऐलान किया गया था कि दिन में बारह बजे के बाद दंगे होंगे।

अपने संदेश में युवती ने कहा कि उनकी कॉलोनी के लोग रात भर खौफ के साए में ही रहे और अगली सुबह पुलिस के फ्लैग मार्च के बाद ही वहाँ मौजूद लोगों ने राहत की साँस ली। साथ ही युवती ने कहा कि भागीरथ विहार में मौजूद हिंदुओं ने ही मुस्लिमों को शरण देकर बचाया है। जबकि मुस्लिम भीड़ निरंतर उनकी कॉलोनी में आकर उपद्रव करने की कोशिश करती रही।

बता दें कि मुख्यधारा की मीडिया निरंतर यह दिखाने का प्रयास करती नजर आ रही है कि दिल्ली के दंगों में मात्र मुस्लिमों को ही नुकसान हुआ है। जबकि इसके उलट हक़ीक़त यह है कि हिन्दू पहचान बाहर होने के डर से यह बताने में भी डर रहे हैं कि मुस्लिम उपद्रवियों ने उनके घरों में घुसकर किस तरह से हैवानियत को अंजाम दिया।

नोट: ऑपइंडिया सुरक्षा कारणों से युवती का नाम और स्थान गोपनीय रख रहा है।

झूठ फैलाते ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार को एक व्यक्ति ने यूँ सिखाया सबक, दिल्ली पुलिस को कर रहा था बदनाम

जेएनयू में भड़की हिंसा के समय हमने ‘इंडिया टुडे’ का फर्जी स्टिंग ऑपरेशन देखा था। मीडिया संस्थान जेएनयू के वामपंथी दंगाइयों को बचाने के लिए एकदम से पगला गया था। अब ‘आजतक’ के एक पत्रकार का झूठ पकड़ा गया है, जो अफवाह फैला कर दिल्ली पुलिस को बदनाम कर रहा था। इससे साफ़ पता चलता है कि किस तरह मीडिया जानबूझ कर दिल्ली में हो रही हिंसा की एकतरफा रिपोर्टिंग कर रहा है। ‘आजतक’ भले ही ख़बरों के प्रसारण के मामले में ‘सबसे तेज़’ होने का दावा करता हो, मगर उसकी पोल खुल गई है।

दरअसल, ‘आजतक (इंडिया टुडे)’ के पत्रकार ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए दिल्ली के एक इलाक़े में गया हुआ था। वहाँ से उसने बताया कि उस क्षेत्र में पुलिस की तैनाती नहीं की गई है। उसने एक तरह से दिल्ली पुलिस को बदनाम करने की कोशिश करते हुए यह दिखाने का प्रयास किया कि दिल्ली पुलिस ग्राउंड पर मौजूद नहीं है और कुछ कार्रवाई नहीं कर रही है। हालाँकि, एक सजग नागरिक ने पत्रकार के झूठ को बेनकाब करते हुए कुछ यूँ उसकी पोल खोली:

एक जिम्मेदार नागरिक ने मीडिया को झूठ फैलाने से रोका

हालाँकि, जब एक सजग नागरिक ने वीडियो शूट किया तो पता चला कि वहाँ पर उस इलाक़े में भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद थे, जो सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त थे। उक्त व्यक्ति ने ‘आजतक’ चैनल का विरोध करते हुए उसके पत्रकार को याद दिलाया कि वो एक नेशनल चैनल के पत्रकार हैं और इसीलिए उन्हें जिम्मेदारी निभाते हुए झूठ नहीं बोलना चाहिए। उसने ‘आजतक’ के पत्रकार को अफवाह न फैलाने की सलाह दी। हालाँकि, पत्रकार सवालों से बचता रहा और उसे कोई जवाब नहीं सूझा तो वो भाग खड़ा हुआ।

उक्त नागरिक ने यह भी बताया कि उस इलाक़े में अतिरक्त पुलिस बल के लिए कण्ट्रोल रूम को भी फोन किया गया है, साथ ही पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़ कर स्थिति को नियंत्रित किया। अब सवाल उठता है कि आख़िर इतना बड़ा मीडिया संस्थान होने के बावजूद ‘इंडिया टुडे’ और ‘आजतक’ इस तरह दिल्ली पुलिस को बदनाम करने के पीछे क्यों पड़ा है?

छेनू और नासिर गैंग ने भड़काई दिल्ली में हिंसा, पुलिस ने की 12 उपद्रवियों की पहचान

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तरी-पूर्वी इलाकों में भड़के दंगों में एक नया खुलासा सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में 12 से अधिक लोगों की पहचान कर ली है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुई हिंसा में दो गैंग इरफ़ान छेनू और नासिर गैंग के शामिल होने की बात भी की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार शाम से दिल्ली में हुई हिंसा आगजनी, गोलीबारी और पथराव इन्हीं छेनू गैंग और नासिर गैंग का हाथ था। अब तक पुलिसकर्मियों द्वारा CCTV और वीडियो के आधार पर उस इलाके में सक्रीय गैंग के 12 से ज्यादा लोगों की पहचान की जा चुकी है। कैमरा में पहचाने गए लोग नासिर गैंग और इरफ़ान छेनू गैंग से बताए जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, बीते 3 दिनों में दिल्ली में 600 से ज्यादा राउंड फायरिंग हुई है। इसका मतलब हथियारों और गोलियों की कमी नहीं थी और ये गैंग ही इसकी सप्लाई कर रहे थे। पुलिस ने आशंका जताई है कि दिल्ली में हिंसा भड़काने और आगजनी करने के लिए छेनू गैंग को हायर किया गया था और इन गैंग्स की मदद से सुनियोजित साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।

यमुनापार के रहने वाले कुख्यात छेनू पहलवान और नासिर गिरोह आज की तारीख में दिल्ली पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द माने जाते हैं। दोनों गिरोहों में पहले कई बार दिनदहाड़े गैंगवार की घटनाएँ होती आई हैं। साल 2010 में स्पेशल सेल ने नासिर को 55 लाख की डकैती के मामले में गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद नासिर ने कुख्यात बदमाश हाशिम बाबा से दोस्ती कर ली थी।

इसी समय हाशिम की अकील मामा और छेनू गिरोह से भी तनातनी जारी थी। वहीं, छेनू को अपनी गैंग का शार्प शूटर माना जाता है। छेनू कुख्यात बदमाश हाजी अफजाल और कमल का चचेरा भाई बताया जाता है। यहीं से नासिर और छेनू के बीच मामला गरमा गया और दोनों गैंग के बीच गैंगवार की घटनाएँ सामने आने लगीं।

रिपोर्ट्स में छेनू गैंग को दिल्ली के सबसे खतरनाक गैंग में से एक माना जाता है और ये नार्थ ईस्ट दिल्ली के साथ लोनी गाजियाबाद में भी सक्रिय है। ये गिरोह काफी बेरहम माने जाते हैं। पहचान के बाद पुलिस इस जाँच में लगी है कि हिंसा के लिए किन लोगों ने इनको हायर किया था।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे की ठीक पहली शाम से ही उत्तर पूर्वी दिल्ली में नागरिकता कानून (CAA) को लेकर फैली हिंसा में अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इस बीच एक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल ने दंगाइयों की गोली लगने से अपनी जान गँवाई और आज सुबह IB के एक सहायक अधिकारी अंकित शर्मा की लाश दिल्ली के चाँदपुर में बरामद हुई। मृतक अंकित को दंगाइयों ने तब अपना निशाना बनाया, जब वो ड्यूटी से अपने घर लौट रहे थे।