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‘AAP पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडों ने IB ऑफिसर को मार डाला, उसके घर से चल रहे बम व गोलियाँ’

दिल्ली में लगातार हो रही हिंसा की कई घटनाओं के पीछे आम आदमी पार्टी का हाथ होने के आरोप लग रहे हैं। दिल्ली के सत्ताधारी पार्टी पर पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने बड़ा आरोप लगाया है। आईबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या को लेकर ये बड़ा आरोप लगाया गया है। दिल्ली के हिंसा प्रभावित क्षेत्र चाँदबाग़ की एक नाली से अंकित का शव बरामद किया गया है। मिश्रा ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल की पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर से निकले लड़कों ने शर्मा की हत्या की है। हुसैन नेहरू विहार का ही निगम पार्षद हैं। बकौल मिश्रा, हुसैन के घर से निकले आरोपितों ने शर्मा को घसीटा।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ये भी आरोप लगाया है कि ताहिर हुसैन के घर से लगातार पेट्रोल बम चलाए जा रहे हैं और गोलीबारी भी की जा रही है। ये बहुत बड़ा आरोप है क्योंकि अंकित शर्मा की हत्या को ख़ुद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बहुत ही दुखद क्षति बताया है। केजरीवाल ने कहा है कि दोषियों को किसी भी हाल में नहीं बख्शा जाना चाहिए। उन्होंने इस हमले में मारे गए लोगों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता जताई। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में इस तरह की स्थिति पैदा होना दर्दनाक है।

बता दें कि अंकित शर्मा आईबी के कॉन्स्टेबल थे। कुछ दिनों पहले ही एजेंसी में उनकी नौकरी लगी थी। वह पिछले दिनों गायब थे। उनकी हत्या कर के उनकी लाश को गन्दी नाली में फेंक दिया गया। 26 वर्षीय अंकित शर्मा के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जीटीबी हॉस्पिटल ले जाया गया है। अंकित के पिता देवेंद्र शर्मा दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं। उनकी माँ सुधा शर्मा का रो-रो कर बुरा हाल है। सोमवार (फरवरी 24, 2020) को हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या कर दी गई थी। उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं।

केंद्र सरकार लगातार शांति की अपील कर रही है। ख़ुद पीएम मोदी ने स्थिति की समीक्षा के बाद स्थिति को शांतिपूर्ण और सामान्य बनाने पर जोर दिया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कहा है कि सुरक्षा बल लगातार अपने काम में लगे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी मामले की सुनवाई हुई है, जहाँ कपिल मिश्रा के बयान का मुद्दा छाया हुआ है। अब तक हिंसा में 21 लोगों के मौत की ख़बर है।

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

दिल्ली के हालात बेकाबू, तत्काल बुलाई जाए सेना: गो बैक के नारों और घेराव के बाद CM केजरीवाल

उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हुए दंगों को लेकर सीएम अरविंद केजरीवाल ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार दिल्ली पुलिस हालात पर काबू पाने में असमर्थ है। स्थिति पर नियंत्रण के लिए दिल्ली में सेना बुलाई जानी चाहिए। इसके लिए केजरीवाल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखने की भी बात कही है।

रविवार से जारी हिंसा को लेकर केजरीवाल ने ट्वीट कर हालात पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में हालात बेकाबू हैं। दिल्ली पुलिस के नियंत्रण में नहीं है। ऐसे में केजरीवाल ने केंद्र सरकार से तत्काल दिल्ली में सेना तैनात करने की माँग की है। उन्होंने सभी प्रभावित क्षेत्रों में भी तत्काल कर्फ्यू लगाने की माँग की है।

इससे पहले हिंसा में वीरगति को प्राप्त हुए रतनलाल के परिवार से मंगलवार को मिलने पहुँचे सीएम अरविन्द केजरीवाल और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को घटना से गुस्साए लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। इस दौरान आक्रोशित लोगों ने ‘केजरीवाल, वापस जाओ’ और ‘गो बैक केजरीवाल’ के नारे लगाए थे। इस विरोध के चलते केजरीवाल और सिसोदिया को उलटे पाँव वापस लौटना पड़ा था। इतना ही नहीं देर रात जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों और पूर्व छात्रों ने केजरीवाल के घर का घेराव भी किया था।

इस बीच जीटीबी अस्पताल के एमडी सुनील कुमार के मुताबिक नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने वालों और विरोध करने वालों के बीच हुई हिंसक झड़प में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं घायलों की संख्या बढ़कर 250 से भी अधिक हो गई है। इनमें 56 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

दिल्ली के कुछ इलाकों में छिटपुट पत्थरबाजी की घटनाएँ आ रही हैं। जाफराबाद, मौजपुर सहित कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण बने हुए है। हालात पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी है और पुलिस फोर्स फ्लैग मार्च कर हालात पर काबू करने में जुटी हुई है।

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से हिंसा मामले पर जवाब माँगा है। न्यायालय ने यह बताने के लिए कहा है कि जिन लोगों ने भड़काऊ भाषण दिया उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। साथ ही दिल्ली पुलिस के किसी बड़े अधिकारी को पेश होकर जवाब देने के लिए भी कहा है। दिल्ली के हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपद्रवियों ने दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल को भी मौत के घाट उतार दिया। यही कारण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने अब खुद पूरी कमान सॅंभाल ली है।

SP सांसद आजम खान ने MLA पत्नी और बेटे के साथ किया सरेंडर, भेजे गए जेल

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान, उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटा अब्दुल्ला को कोर्ट के आदेश पर आज जेल भेज दिया गया है। बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के जुर्म में आजम खान समेत उनकी पत्नी-बेटे पर ये कार्रवाई हुई। सभी को 2 मार्च तक की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इससे पहले बुधवार की सुबह यानी आज ही आजम खान के साथ पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला ने कोर्ट में सरेंडर किया था।

जानकारी के अनुसार, कोर्ट के आदेश पर आज तीनों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। उनपर आरोप है कि बार-बार कोर्ट के आदेश से लेकर मुनादी तक कराने के बाद भी वो अदालत में कोर्ट में हाजिर नहीं हुए, जिसे मद्देनजर रखते हुए स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को सीआरपीसी की धारा-83 के तहत संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किया था।

मगर, इस आदेश के बाद जारी होने के बाद आजम खान सामने आए और आज सुबह एडीजे 6 की कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की, लेकिन कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और उनपर ये कार्रवाई हुई।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने गंज कोतवाली में मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम और तजीन फातिमा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही आरोप लगाया था कि अनुचित लाभ लेने के लिए सपा सांसद आजम खान और उनकी पत्नी तजीन फातिमा ने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस मुकदमे में सम्मन के बाद भी हाजिर न होने पर पूर्व में आजम खान, तजीन फातिमा और अब्दुल्ला आजम खाँ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे।

यहाँ बता दें, अब्दुल्ला के खिलाफ 2-2 जन्म प्रमाणपत्र बनवाने, 2-2 पासपोर्ट बनवाने और 2-2 पैन कार्ड बनवाने के मुकदमे दर्ज हैं। इनमें तीन मुकदमे बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने ही दर्ज कराए हैं।

हालात सामान्य बनाने में जुटी हैं एजेंसियाँ, शांति बनाए रखें: दिल्ली दंगों पर पहली बार बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में हो रही हिंसा को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। तीन दिनों से जल रहे राजधानी के विभिन्न इलाक़े अभी भी अशांत बने हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने दिल्ली के कई क्षेत्रों में हुई हिंसा को लेकर एक विस्तृत समीक्षा की है। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली पुलिस व अन्य सरकारी एजेंसियाँ एक साथ समन्वय बना कर शांति स्थापित करने और स्थिति को समान्य बनाने के लिए ज़मीन पर काम कर रही है। दिल्ली पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ अपनी तरफ़ से पूरा प्रयास कर रही है।

हिंसा में सोमवार (फरवरी 24, 2020) को पुलिस कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या कर दी गई। अब तक कुल 21 लोगों की मौत की ख़बर है। मुस्लिम भीड़ द्वारा कई जगह उत्पात मचाए जाने, घरों को जलाने और निर्दोष नागरिकों के साथ क्रूरता करने की ख़बरें आ रही हैं। पीएम मोदी ने ताज़ा हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लिखा:

“शांति और समरसता हमारी प्रकृति का मूल केंद्र रहा है। मैं दिल्ली के भाइयों-बहनों से अपील करता हूँ कि वो हर परिस्थिति में शांति एवं भाईचारा का माहौल बनाए रखें। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि जितनी जल्दी हो सके, सभी क्षेत्रों में शांति स्थापित हो और स्थिति सामान्य हो।”

बता दें कि मंगलवार की रात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने भी पूरी स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए। उसी दिन सुबह गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एलजी अनिल बैजल सहित अन्य नेताओं व अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की।

दिल्ली में चल रही हिंसा को लेकर कई निर्मम वारदातों की ख़बरें भी आ रही हैं। चाँदबाग के एक नाले से आईबी कॉन्स्टेबल का शव मिला है। मृतक अंकित शर्मा (26) खजूरी में रहते थे। कहा जा रहा है कि दंगाइयों ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। विवेक नामक एक युवक के सिर में मुस्लिम भीड़ ने ड्रिल मशीन घुसा दिया। उसकी सर्जरी की गई है।

दिल्ली HC में कपिल मिश्रा की गिरफ़्तारी को लेकर चर्चा, भरी अदालत में चलाया गया Video

हाई कोर्ट में बुधवार (फरवरी 26, 2020) को दिल्ली में भड़की हिंसा को लेकर सुनवाई हुई। हरीश मंदर ने उच्चतम अदालत से दरख्वास्त की थी कि नार्थ-ईस्ट दिल्ली में लगातार हो रही हिंसा की जाँच के लिए एक स्वतंत्र कमिटी गठित की जाए। जस्टिस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि उन्हें दिल्ली के एलजी ने इस मामले में अदालत में उपस्थित होने के लिए आदेश दिया है। हालाँकि, याचिकाकर्ता के वकील राहुल मेहरा ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की सलाह लिए बिना एलजी ऐसे किसी को पक्ष रखने के लिए नहीं कह सकते।

कोर्ट में शाहीन बाग़ को खाली कराने को लेकर भी एक याचिका लंबित है। मेहता ने इस सम्बन्ध में जजों को याद दिलाया। इसके बाद कोर्ट में कपिल मिश्रा के बयान का मुद्दा आया। आरोप लगा कि भाजपा नेता बयान देकर हिंसा को भड़का रहे हैं। हालाँकि, एसजी तुषार मेहता ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा बयान देने के बाद उन्हें गिरफ़्तार करने की कोई जल्दी नहीं है, क्योंकि अभी इस विषय में जाँच होनी बाकी है। जस्टिस मुरलीधर ने बताया कि याचिकाकर्ता इस मामले में त्वरित आदेश की अपेक्षा रखते हैं, इसीलिए इस पर अभी सुनवाई होना आवश्यक है।

एसजी तुषार मेहता का कहना था कि ये मामला उतना भी अर्जेन्ट नहीं हुआ है कि सभी पक्षों को सुने बिना कोई आदेश जारी कर दिया जाए। उन्होंने भारत सरकार को भी इसमें एक पक्ष बनाने की अपील की और अपने सबमिशन के लिए एक दिन का समय माँगा। लेकिन, जस्टिस मुरलीधर ने पूछा कि क्या आरोपितों के विरुद्ध त्वरित रूप से एफआईआर दर्ज करना अर्जेन्ट मुद्दा नहीं है? उन्होंने कहा कि स्थिति काफ़ी भयावह हो गई है और एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि वो इस मामले के सभी बिंदुओं से परिचित नहीं हैं और इसलिए 1 दिन का समय चाहते हैं।

जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि कई ऐसे विडियो सर्कुलेट हो रहे हैं, जिन्हें सैकड़ों लोगों ने देखा है। उन्होंने मेहता से पूछा कि क्या इन सबके बावजूद उन्हें नहीं लगता कि ये अर्जेन्ट मैटर है? एसजी ने बताया कि उन्होंने ऐसी कोई विडियो नहीं देखी है। कोर्ट में पुलिस की तरफ़ से उपस्थित अधिकारी से जस्टिस मुरलीधर ने पूछा कि क्या उन्होंने वो विडियो देखे हैं? अधिकारी ने बताया कि उन्होंने 2 विडियो देखे हैं, लेकिन कपिल मिश्रा ने बयान वाला विडियो नहीं देखा है।

इस जवाब के बाद जस्टिस मुरलीधर ने पुलिस अधिकारी से निराशा जताते हुए पूछा कि आपके दफ्तर में इतने सारे टीवी हैं, आपने कैसे कपिल मिश्रा का विडियो नहीं देखा है? मुरलीधर ने कहा कि वो पुलिस की स्थिति से चकित हैं। तत्पश्चात उन्होंने कोर्ट में कपिल मिश्रा के बयान वाला विडियो चलाने का आदेश दिया। पुलिस अधिकारी ने पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के साथ खड़े सब-इंस्पेक्टर की पहचान की। इस बयान का ट्रांसक्रिप्ट एसजी मेहता को दिया गया। इसके बाद कोर्ट की सुनवाई दोपहर 2:30 तक स्थगित कर दी गई।

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

दिल्ली में नागरिकता कानून के विरोध में शुरू हुई हिंसा भयानक रूप लेती नजर आ रही है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा में उपद्रवियों ने एक आईबी कॉन्स्टेबल की हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया। यह घटना दिल्ली के चाँदबाग की है। नाले से आइबी के कॉन्स्टेबल का शव निकाला गया है।

मृतक अंकित शर्मा (26) खजूरी में रहते थे। मंगलवार (फरवरी 25, 2020) शाम को वह ड्यूटी से घर लौट रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि चाँदबाग पुलिया पर कुछ दंगाइयों ने उन्हें घेर लिया और उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को नाले में फेंक दिया।

दंगे में मारे गए अंकित शर्मा के परिजन मंगलवार से ही उनकी तलाश में थे। ज्ञात हो कि अंकित शर्मा के पिता रविंदर शर्मा भी IB में हेड कॉन्स्टेबल हैं। उनका कहना है कि पिटाई के साथ अंकित को गोली भी मारी गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया है। अंकित के पिता रविंदर शर्मा ने मौके पर मौजूद मीडिया को बताया कि उनका बेटा अंकित 2017 में IB में शामिल हुआ था। अंकित की अभी तक शादी नहीं हुई थी। उनके लिए लड़की की तलाश की जा रही थी।

इससे पहले दंगाइयों द्वारा 19 साल के एक हिंदू लड़के पर हमला किया और उसके सिर में ड्रिल मशीन से छेद करने की घटना सामने आई थी। पीड़ित विवेक पर उस वक्त हमला किया गया जब वह अपनी दुकान में बैठा था। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विडियो में 2-3 लोग एक हिंदू के शव को भीड़ से दूर लेकर जाते नजर आए थे। लेकिन भीड़ अचानक से गली के बाहर आकर अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर का नारा लगाने लगती है। मारे गए युवक का नाम विनोद बताया जा रहा है। घटना ब्रह्मपुरी इलाके की है।

नोट: सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और तस्वीरें पोस्ट हो रहे हैं। ऑपइंडिया इनकी पुष्टि नहीं करता। इस मुश्किल वक्त में धैर्य बनाएँ रखें और प्रशासन को हालात पर काबू पाने में सहयोग करें।

सड़क प्रदर्शन के लिए नहीं, लेकिन सुनवाई के लिए अभी माहौल ठीक नहीं: शाहीन बाग पर SC

शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पिछले 70 दिनों से जारी धरना-प्रदर्शन को लेकर बुधवार (फरवरी 26, 2020) को सर्वोच्च न्यायलय में एक बार फिर सुनवाई हुई। लेकिन इस बार भी कोई नतीजा नहीं निकला। हालाँकि, इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक सड़क प्रदर्शन के लिए नहीं है। मगर, ये समय इस मामले पर सुनवाई के लिए ठीक नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख तय की। साथ ही दिल्ली हिंसा पर पुलिस को सही समय पर कार्रवाई नहीं करने के लिए कड़ी फटकार भी लगाई और उसे ब्रिटिश पुलिस की तरह काम करने की सलाह दे डाली।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आप पुलिस को डिमोरलाइज नही कर सकते हैं, इस समय हमारे पुलिस बल के कॉन्स्टेबल की मौत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी हम इस मामले में विचार नहीं करना चाहते हैं। अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए अभी माहौल ठीक नहीं है।

मगर, इस बीच SG तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 13 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है ये बेहद गंभीर विषय है। “सार्वजनिक जगह” प्रदर्शन की जगह नहीं होती है।

गौरतलब है कि सुनवाई को दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करके शाहीन बाग प्रदर्शनों के संबंध में दायर की गई याचिकाओं के दायरे में विस्तार नहीं करेगा।

कोर्ट ने दिल्ली में हिंसा की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन उससे संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वार्ताकारों ने पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास सिर्फ एक मामला है, शाहीन बाग में रास्ता खुलवाने को लेकर, हमने वार्ताकार भेजे थे, जिन्होंने हमें रिपोर्ट सौंपी है। कोर्ट ने कहा कि शाहीन बाग मुद्दे पर सुनवाई से पहले उदारता और स्थिति के शांत होने की जरूरत है। शीर्ष न्यायालय ने वार्ताकार नियुक्त करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह लीक से हटकर समाधान है।

मदरसे में पढ़ने वाली 12 साल की बच्ची से रेप करता था मौलाना, प्रेगनेंट हुई तो खुल गया राज

झारखंड के रांची में मदरसे में पढ़ने वाली 12 साल की एक बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। आरोपित मौलाना शाहिद है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शाहिद ने बच्ची से कई बार रेप किया। जब वह गर्भवती हो गई तो उसका जबरन गर्भपात करा दिया गया। जिस मदरसे में यह घटना हुई है वहॉं 100 से अधिक बच्चियॉं तालीम ले रही थीं थे। मामला सामने आने के बाद लोग अपनी बच्चियों को वापस घर ले जा रहे हैं। पुलिस ने आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

घटना रांची के मांडरा थाना क्षेत्र की है। आरोपित शाहिद अपने घर में ही मदरसा चलाता था। बच्ची के मुताबिक बकरीद की नमाज के बाद मौलाना उसे कमरे में ले गया और रेप किया। इसके बाद वह लगातार उसके साथ रेप करता रहा। मुॅंह खोलने पर उसने बच्ची को जान से मारने की धमकी दी। पिछले दिनों पीड़िता की तबीयत अचानक खराब हुई तो मौलाना ने उसे उसके घर भेज दिया।

परिजन जब बच्ची को अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने उसे गर्भवती बताया। इस बात को सुन परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची से पूछताछ के बाद पता चला कि मौलाना उसके साथ पिछले काफी समय से दुष्कर्म कर रहा है। इसके बाद मौलाना ने बच्ची के परिजनों से 85 हजार रुपए में सौदा कर जबरन गर्भपात करवा दिया और मामले को दबाने की कोशिश की। इस मामले के लेकर गॉंव में पंचायत हुई। पंचायत में कोई समाधान नहीं निकला तो परिजनों ने आरोपित के ख़िलाफ मामला दर्ज करवाया।

परिजनों द्वारा आरोपित के खिलाफ थाने में की गई शिकायत के बाद पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल भेज दिया और आरोपित मौलवी शाहिद के खिलाफ में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद थाना पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए बीते दिनों दुष्कर्म के आरोपित मौलवी शाहिद अंसारी को गिरफ्तार कर लिया, जहाँ से उसे मंगलवार को पुलिस ने जेल भेज दिया गया।

भास्कर में प्रकाशित खबर के मुताबिक मदरसा में 100 बच्चियाँ पढ़ती हैं, लेकिन जैसे ही परिजनों को मौलाना के करतूतों के बारे में पता चला है उसके बाद अधिकांश परिजन मदरसे से अपनी बच्चियों को अपने साथ ले जा चुके हैं। वहीं थाना प्रभारी राणा जंग बहादुर सिंह ने बताया कि शाहिद पर पोस्को एक्ट के आलावा धारा 376, 313 और गर्भपात कराने का भी मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं पुलिस यह पता लगाने में जुटी हुई है कि आरोपित ने दूसरी किसी बच्ची के साथ तो ऐसा नहीं किया। आरोपित मौलाना 3 बच्चों का बाप है।

मुल्लों से सब डरते हैं: रेप के अड्डे बने मदरसे, मुँह खोलने पर 19 साल की नुसरत को जलाकर मारा डाला

मौलवी ने मदरसे में किया नाबालिग़ से रेप, निकाह की आड़ में छुपाने की कोशिश

भोपाल के मदरसे में जंजीर से बँधा मिला बच्चा: दीनी तालीम के नाम पर भीख भी मॅंगवा रहे मौलवी

दिल्ली हिंसा: अपनी दुकान में बैठा था 19 साल का विवेक, दंगाइयों ने सिर में ड्रिल मशीन से कर दी छेद

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के शिकार हुए लोगों की झकझोर देने वाली कहानियॉं सामने आ रही है। दंगाइयों ने 19 साल के एक हिंदू लड़के पर हमला किया और उसके सिर में ड्रिल मशीन से छेद कर दी।

सीएनएन-न्यूज़ 18 की रिपोर्टर पायल मेहता के अनुसार, लड़के का नाम विवेक है। उस पर मंगलवार को हमला किया गया। हिंसक भीड़ ने ड्रिल मशीन उसके सिर में घुसा दी। इसके बाद उसकी सर्जरी जीटीबी अस्पताल में हुई। अब विवेक की हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। बता दें, विवेक पर हिंसक भीड़ ने उस समय हमला किया जब वो अपनी दुकान के भीतर था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉक्टर ने बताया कि लड़के की सर्जरी कल रात की गई है। फिलहाल यह बताना मुश्किल है कि उसे ठीक होने में कितना वक्त लगेगा। न्यूज 18 पत्रकार पायल मेहता ने विवेक को लेकर ये जानकारी अपने ट्वीट के जरिए शेयर की। उन्होंने बताया कि लड़के की हालत अभी स्थिर है, उसने खाना खाया है और बात भी कर रहा है।

गौरतलब है कि इस घटना से पहले कल एक अन्य विडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। विडियो में देखा गया था कि 2-3 लोग एक हिंदू के शव को मुस्लिमों की भीड़ से दूर लेकर जा रहे हैं। लेकिन मुस्लिमों की भीड़ अचानक से गली के बाहर आकर अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर का नारा लगाने लगती है। सोशल मीडिया से पता लगा था कि मृतक युवक का नाम विनोद है।

इसके बाद इसी मामले से संबंधित एक और विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वीडियो में ब्रह्मपुरी इलाके के आसपास रहने वाले एक शख्स को कहते सुना जा सकता है कि मुस्लिमों ने विनोद का शव भेजा है और संदेश दिया है कि हिंदू के शव उन्हें इसी तरह पूरी रात मिलेंगे।

बता दें, उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा में अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है। 250 से ज्यादा लोग घायल हैं। सुरक्षाबल के जवान प्रभावित क्षेत्रों में दंगाइयों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर हालात सामान्य करने की कोशिश में लगे हैं। उपद्रवी लगातार जान-माल को नुकसान पहुँचा रहे है।

नोट: सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और तस्वीरें पोस्ट हो रहे हैं। ऑपइंडिया इनकी पुष्टि नहीं करता। इस मुश्किल वक्त में धैर्य बनाएँ रखें और प्रशासन को हालात पर काबू पाने में सहयोग करें।

बालाकोट में 189 साल पहले भी हुआ था एक ऑपरेशन, तब हूरों के चक्कर में मारे गए थे 300 जेहादी

भारतीय वायुसेना द्वारा पिछले साल बालाकोट स्थित आतंकी ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद बालाकोट के नाम से हर व्यक्ति परिचित हो गया। इस घटना से पहले शायद ही किसी आम व्यक्ति ने बालाकोट के बारे में जानने में दिलचस्पी जताई होगी। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि 2019 का एयरस्ट्राइक बालाकोट में आतंकियों के सफाए का पहला ऑपरेशन नहीं था। करीब 189 साल पहले भी महाराजा रणजीत सिंह की सेना ने बालाकोट की जमीन से 300 मुजाहिदीनों का सफाया किया था।

दरअसल, बालाकोट आज से नहीं बल्कि पिछले क़रीब 200 सालों से आतंकवाद का केंद्र रहा है। यहीं से जिहादियों की शुरूआत हुई थी जिसकी नींव सैयद अहमद शाह बरेलवी द्वारा रखी गई थी। स्वयं को इमाम घोषित कर बरेलवी ने जिहादियों की ऐसी फौज़ तैयार की थी, जो भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी हुकूमत कायम करना चाहते थे।

पाकिस्तानी लेखिका आयशा जलाल ने सैयद का जिक्र अपनी किताब पार्टिसंस ऑफ अल्लाह (Partisans of Allah) में भी किया है। सैयद बरेलवी का लक्ष्य भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी हुकूमत को स्थापित करना था। इसलिए उसने महाराजा रणजीत सिंह की सेना के ख़िलाफ़ जिहादियों को बड़ी तादाद में एकत्रित किया। बरेलवी ने अपनी जिहादी नीतियों से महाराजा को तंग कर रखा था जिसके कारण ही महाराजा रणजीत सिंह ने अपने पुत्र के नेतृत्व में पेशावर पर कब्जा करके उसे अपने राज्य से जोड़ा था।

पाकिस्तानी लेखक अजीज अहमद के अनुसार वर्तमान रायबरेली (यूपी) के रहने वाले सैयद अहमद शाह (1786-1831) ने ही बालाकोट को जिहाद का जन्मस्थली बनाया। जिहाद की शुरुआत के लिए बालाकोट का चुनाव बरेलवी द्वारा इसलिए भी किया गया था, क्योंकि उसका मानना था कि यह जगह पहाड़ों से घिरी हुई है और दूसरा इसके एक ओर नदी है जिसके कारण किसी का भी यहाँ पर पहुँचना बेहद मुश्किल होगा।

सैयद बरेलवी जानता था कि देश में अग्रेज़ों की हुकूमत से लड़ पाना उसके लिए तत्कालीन परिस्थितियों में मुश्किल था, इसलिए उसने उनके ख़िलाफ़ किसी प्रकार के जिहाद की घोषणा नहीं की। साथ ही अंग्रेज भी सैयद की इन खतरनाक गतिविधियों को जानने के बाद चुप थे क्योंकि उनका मानना था कि सैयद और उसके द्वारा तैयार किए जा रहे जिहादी लड़ाके सिख राज्य को कमजोर कर देंगे, जिससे की अंग्रेज़ों को ही फायदा पहुँचेगा। नतीजतन 1824 से 1831 तक जिहादी बालाकोट में सक्रिय रहे।

दरअसल, सैयद अहमद शाह ने राजा रणजीत सिंह द्वारा अज़ान और गौतस्करी पर प्रतिबंध लगाने की बात सुनकर जिहाद की घोषणा कर दी थी। जिस समय पर बरेलवी बालाकोट पहुँचा उस समय उसके साथ 600 जिहादी थे और पेशावर के हज़ारों पठानों द्वारा भी उसे समर्थन दिया जा रहा था।

स्वभाव से कट्टर विचारधारा वाले सैयद के बारे में एलेक्सेंडर गार्डनर ने बताया था कि उसने मात्र 30-40 रुपए के लिए अपने साथी को मौत के घाट उतार दिया था ।

सैयद से तंग आकर महाराजा रणजीत सिंह की सेना ने बालाकोट की एक पहाड़ी के पास डेरा डाल लिया। जिसके बाद सैयद ने वहाँ धान के खेतों में पानी अधिक मात्रा में डलवा दिया ताकि जब वह हमला करने आएँ तो उनकी गति धीमी पड़ जाए।

दोनों पक्ष एक दूसरे पर हमला करने के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करते रहे और एक दिन एक अज़ीबोगरीब घटना हुई जिसने सिख सेना को मुजाहिदीनों को मार गिराने का मौक़ा दे दिया। दरअसल, 6 मई 1831 के दिन एक जिहादी अपना दिमागी संतुलन खो बैठा और उसे अपने सामने हूरें दिखाई देने लगीं। वो एकदम से चिल्लाते हुए भागा कि उसे हूर बुला रही है और जाकर उन्हीं धान के खेतों में फँस गया जिसे सिख सेना के लिए जाल की तरह बिछाया गया था। मौक़े को परखते हुए सिखों की सेना ने उसे अपनी बंदूक का निशाना बनाकर मार गिराया। उन मुजाहिदीनों में हूरों के पास पहुँचने वाला चिराग अली पहला नाम था।

इसके बाद सिख सेना ने सभी मुजाहिदीनों को ढेर करना शुरू कर दिया। उस दौरान भी इस युद्ध में क़रीब 300 से ज्यादा जिहादियों को सिखों की सेना ने हूरों के क़रीब पहुँचाया था जिनकी कब्रें आज भी वहाँ पर मौजूद हैं। 189 साल बाद उसी जगह भारतीय वायुसेना ने वही घटना बीते साल दोहराई। अंतर केवल इतना था कि जिहादियों की जगह पर जैश-ए-मुहम्मद के 300 आतंकियों का सफाया हुआ और सिख सेना की जगह IAF ने विजय की पताका हवा में फहराई थी।

जरा सोचिए! जिहाद की शुरूआत करने वाले सैयद को भले ही महाराजा रणजीत सिंह की सेना ने मार गिराया हो। लेकिन आज के समय में आतंकवाद का लगातार बढ़ना कहीं न कहीं उसके द्वारा तैयार किए जिहादियों के प्रचार-प्रसार का ही नतीजा है। आए दिन न जाने कितने आतंकियों को मार गिराए जाने की खबरें हमें पढ़ने-सुनने को मिलती हैं लेकिन बावजूद इसके आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बालाकोट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए ही शायद आतंकी संगठन जैश ने अपने आतंकियों के लिए यहाँ पर प्रशिक्षण केंद्र खोला था। ये केंद्र आम जनता की पहुँच से दूर पहाड़ों पर था। इसे पिछले साल की 26 फरवरी को वायु सेना के जवानों ने पुलवामा का बदला लेने की नीयत से तहस-नहस कर दिया और शूरता के नए आयाम दर्ज किए।

आज पूर्व वायुसेना ने बालाकोट एयरस्ट्राइक के एक साल होने इस मौक़े पर कहा कि इस ऑपरेशन के जरिए वह पाकिस्तान को संदेश देना चाहती थी कि हम ‘घुसकर मारेंगे’ चाहे आप कहीं भी हों।