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अमित शाह होम नहीं ‘हेट मिनिस्टर’, देश को केंद्र सरकार से सबसे बड़ा खतरा: बृंदा करात

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात ने शनिवार (फरवरी 22, 2020) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि वो होम मिनिस्टर नहीं, हेट मिनिस्टर हैं। इसके साथ ही करात ने कहा कि देश को केंद्र सरकार से सबसे बड़ा खतरा है। आज हमारे देश के चरित्र को बचाने का संघर्ष चल रहा है। केंद्रीय मंत्री कानून के साथ नहीं बल्कि उद्योपतियों के साथ खड़े हैं।

उन्होंने अगरतला में माकपा के राज्य-जनजातीय फ्रंटल संगठन के 22 वें केंद्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए कहा, “गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली चुनाव के कैंपेनिंग के दौरान कहा कि ईवीएम का बटन इतने गुस्से के साथ दबाना कि बटन यहाँ दबे और करंट शाहीन बाग के अंदर लगे। क्या कोई गृह मंत्री ऐसा भाषण दे सकता है? इसलिए मैं कहती हूँ कि अमित शाह भारत के होम मिनिस्टर नहीं हैं, वह देश के हेट मिनिस्टर का काम कर रहे हैं।”

बृंदा करात ने आगे कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार बहुमत के बल पर सांप्रदायिकता को आधार बनाकर लोगों का ध्रुवीकरण कर रही है। इसके साथ ही करात ने आरोप लगाया कि मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा और घृणा का माहौल अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी के हेट पॉलिटिक्स का परिणाम का है।

साथ ही करात ने दावा किया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से नॉर्थ-ईस्ट के आदिवासी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोग धर्म के आधार पर नागरिकता को स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि यह संविधान की आत्मा के खिलाफ है और वो संविधान की रक्षा के लिए खड़े हैं। करात ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों में कोई काम नहीं हुआ है। किसानों को उचित मजदूरी नहीं मिल रही है, भाजपा गरीब लोगों से पैसा लूट रही है और हर दिन देश के लोगों के अधिकार का हनन किया जा रहा है।”

भगवान जब लोगों को अक्ल बाँट रहे थे, तब स्वरा भास्कर NRC के ‘रिलीवेंट सेक्शन्स’ पढ़ने में व्यस्त थी

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध ने इस देश के लेफ्ट लिबरल्स को जितनी तेजी से सस्ती लोकप्रियता दी है, उस स्ट्राइक रेट से आजादी के बाद इस देश में किसी को शायद ही लोकप्रियता मिली हो। लेकिन इस घटना ने ब्रह्माण्ड के सारे पिछले दावों को झुठला दिया है और देवलोक में देवताओं के सिंहासन हिलने लगे हैं। कारण बताया जा रहा है कि नागरिकता कानून के बहाने स्वरा भास्कर, कुणाल कामरा और अनुराग कश्यप जैसों को बेरोजगारी में जिस रफ़्तार से अटेंशन और सस्ती लोक्रप्रियता मिलती जा रही है, वह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की लोकप्रियता के ग्राफ को सीधी चुनौती दे रहा है।

कॉमन सेन्स के वितरण को लेकर देवलोक में आपात बैठक

इसके बाद देवलोक में एक आपात बैठक आयोजित कराई गई। इसका उद्देश्य था कि अब लोकप्रियता का कम्पास इंटरनेट पर दिन भर सरकार विरोधी ट्वीट करने के बजाए कॉमन सेन्स, बुद्धि और विवेक की ओर शिफ्ट कर दिया जाए। कार्यकारिणी की बैठक में यह कार्य एक बार फिर ब्रह्मा जी को सौंपने का फैसला लिया गया। ब्रह्मा जी ने कहा कि वो बुद्धि और विवेक सिर्फ उन्हीं लोगों को बाँटेंगे, जिनके पास कागज होंगे। यह सुनते ही झट से राहुल गाँधी ने अपने कागज छुपा दिए और देखा-देखी दिग्विजय सिंह से लेकर तमाम इंटरनेट बुद्धिजीवियों ने भी अपने कागज छुपाकर ब्रह्मा जी को ‘बेफिटिंग रिप्लाई’ दे दिया।

अक्ल वितरण के कुछ दिन बाद अचानक ‘इंटरनेट लिबरल्स’ बिरियानी बाग़ में धरना देते देखे गए। जब पत्रकार उन तक पहुँचे तो लेफ्ट-लिबरल्स गिरोह ने कहा- “हमारा मकसद नागरिकता कानून नहीं, बल्कि कॉमन सेन्स और अक्ल वितरण में किया गया पक्षपात का विरोध है।”

इस पर जब पत्रकारों ने अपनी बॉडी लैंग्वेज से ज्यादा ही सक्रीय प्रदर्शनकारी नजर आ रही गिरोह की मुख्य सदस्य स्वरा भास्कर से पूछा कि महज दो दिन पहले ही तो भगवान जब घोषणा कर रहे थे कि सभी लोगों में बुद्धि और विवेक बाँटा जाएगा और इसके लिए कागज दिखाने होंगे, तब आप कहाँ थे? इस पर स्वरा भास्कर ने पत्रकारों को जो ‘बेफिटिंग रिप्लाई‘ दिया उसने पत्रकारों के पैरों तले जमीन खिसका दी। स्वरा भास्कर ने कहा- “जब ब्रह्मा अक्ल बाँट रहे थे, उस समय मैं NRC के ‘रिलिवेंट सेक्शंस’ पढ़ रही थी।”

स्वरा भास्कर के इस ‘बेफिटिंग रिप्लाई’ पर उनके समर्थकों ने तालियाँ बजाई और लगे हाथ फैज़ की एक नज़्म भी पढ़ डाली। मौके पर मौजूद कुणाल कामरा ने कहा कि बुद्धि बाँटने में उनके साथ भी फासीवादी ब्रह्मा ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है, इसी वजह से उनके चुटकुलों पर किसी को हँसी नहीं आती है और उन्हें कॉमेडी करने के लिए गालियों का सहारा लेना होता है।

रवीश कुमार ने बताया स्वरा को लेफ्ट-लिबरल गिरोह का राहुल गाँधी

इस मनुवादी घटना पर रवीश कुमार ने स्वरा भास्कर के खिलाफ बड़ा खुलासा करते हुए प्राइम टाइम में बताया कि इंसान की बॉडी लैंग्वेज हमेशा उसकी बुद्धिमत्ता की व्युत्क्रम संबंध (इन्वर्सली प्रोपोर्शनल) में होती है। और स्वरा भास्कर के साथ भी यही हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि स्वरा भास्कर साबित करती है कि आप कितने ही बड़े झुमके पहन लो, लेकिन अगर आप सिर्फ नकलची मूर्ख हैं तो न ही बड़े झुमके और न ही कांजीवरम उद्योग आपकी कोई मदद कर सकता है। ब्रह्मा द्वारा अक्ल बाँटते समय स्वरा भास्कर के NRC के रिलिवेंट सेक्शंस पढ़ने के फैसले से निराश रवीश कुमार ने कहा कि स्वरा भास्कर और कुछ नहीं बल्कि इंटरनेट लेफ्ट-लिबरल गिरोह की राहुल गाँधी मात्र हैं।

IQ वितरण पर हुए पक्षपात के विरोध में इस्तीफा देते-देते रह गए राहुल गाँधी

लेकिन ब्रह्मा द्वारा किए गए इस पक्षपात पर सबसे ज्यादा कड़ी प्रतिक्रिया राहुल गाँधी ने व्यक्त की है। उन्होंने आस्तीन थोड़ी सी ऊपर सरकाते हुए कहा- “देखो भई, मैं एक बात साफ़-साफ़ बोलता हूँ, मैं इस पर पहले भी कहा चुका हूँ।”

इसके बाद कुछ देर चुप रह कर राहुल गाँधी ने आगे कहा- “मैं कहता हूँ बुद्धि नहीं बाँटनी है, मत बाँटो लेकिन अगर टीवी पर छोटा भीम देखने के लिए किसी तरह का कागज माँगा गया तो मैं फौरन अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दूँगा।” इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें कान में चुपके से याद दिलाया कि वो आजकल अध्यक्ष पद पर नहीं हैं तब जाकर राहुल गाँधी अपने गुस्से पर नियंत्रण कर पाए।

लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ब्रह्मा जी द्वारा अक्ल बाँटने पर कोई आपत्ति नहीं की। उन्होंने कहा कि जब तक वो कम से कम 2 और राज्यों के मुख्यमंत्री नहीं बन जाते हैं, तब तक हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ कुछ नहीं कहेंगे। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि उनके साथी अल्बर्ट मनीष सिसोदिया पर वैसे भी माँ सरस्वती का आशीर्वाद है तभी वो मोटर से पानी खींच पाने में कामयाब भी हुए।

वहीं, लिबरल गिरोह के भक्तगणों ने इस बात पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए कहा कि जहाँ पहले उनके पास सिर्फ अल्बर्ट मनीष सिसोदिया जैसी वैज्ञानिक ही मौजूद थे, अब उनके पास स्वरा भास्कर जैसी गणितज्ञ भी हैं क्योंकि रवीश कुमार ने उनके IQ की तुलना अक्ल के साथ कुछ व्युत्क्रम संबंध बताकर की है।

NRC का ड्राफ्ट कहाँ, CAA पढ़ा है? रुबिका ने स्वरा के उड़ाए होश, सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे

सीएए का विरोध करने वाली फ़िल्म अभिनेत्रियों की बात की जाए तो सबसे पहला नाम स्वरा भास्कर का आता है, जिन्हें देखकर लगता है कि वह आज कल फ़िल्मों में मिलने वाली रोल की तरह ही सीएए के विरोध में प्रदर्शनकारियों का किरदार अदा कर रही हैं वह भी मुख्य भूमिका में, लेकिन एक समाचार चैनल में सीएए एनआरसी को लेकर हो रही चर्चा में एंकर ने स्वरा से बस एक सवाल पूछ लिया कि क्या आपने इसे कभी पढ़ा है? जिसका स्वरा कुछ जवाब नहीं दे सकीं। इसके बाद ट्वीटर पर आई इस वीडियो के जवाब में ट्विटर यूजरों ने स्वरा को अपने निशाने पर ले लिया और अपने-अपने अंदाज में जमकर लताड़ लगाई।

हिंदुस्तान पेपर और ABP समाचार चैनल के संयुक्त प्रयास से बीते दिन ‘शिखर समागम’ का आयोजन किया जा रहा था, जिसमें आयोजित एक सत्र में CAA, NRC, NPR विषय पर चर्चा हो रही थी। मंच पर एंकर रुबिका लियाकत के साथ गेस्ट पैनल में दो अन्य गेस्टों के साथ विषय पर चर्चा करने के लिए फ़िल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर भी मौजूद थीं। चर्चा के दौरान रुबिका ने स्वरा से एक के बाद एक कई सवाल किए- NRC का draft कहाँ है?,
बस आपको हवा-हवाई बातें करनी हैं, Vote देने जाएँगी कागज़ दिखाएँगी, और नारे लगवाएँगी कागज़ नहीं दिखाएँगे, मैडम आपने CAA एक्ट पढ़ा है? मुझे यकीन था आपने एक्ट नहीं पढ़ा होगा। आप मुस्लिमों को डरा रही हैं।

रुबिका के एक साथ इतने सवाल सुनकर स्वरा से कोई जवाब नहीं बना और बोली कि एक मिनट मैडम एक मिनट, ऐसा नहीं है, मैंने जरूरी बिंदू पढ़े हैं, देखिए मैडम ये आपकी आडियंस है वगैरह-वगैरह। इसके बाद ट्विटर पर आई वीडियो पर लोगों ने जो प्रतिक्रियाएँ दी। अब जरा आप उन्हें भी देख लीजिए।

@Priyankabjym नाम के यूजर ने लिखा, “ग़लत जगह उंगली की है इस बार तुमने (स्वरा भास्कर), आपने तो स्वरा की बोलती बंद कर दी (रुबिका लियाकत)।”

@Text_to_Amit नाम के यूजर ने सीएए विरोध करने वाले पूरे गैंग पर ही सवाल खड़े कर दिए और लिखा, “जब लीडर ऐसे हैं तो, को लीडर कैसे होंगे, और फ़िर फोलोवर कैसे-कैसे होंगे।”

@RAMSINHZALA14 नाम के यूजर ने लिखा, “आज उंगली बाई को रुबिका जी ने नानी याद दिला दी। लेकिन बेशर्म की हद्द देखो। रुकने का नाम ही नहीं (स्वरा भास्कर)।”

@De_evil1 नाम के यूजर ने स्वरा की विषय की तैयारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए और लिखा, “अगली बार अच्छा ट्रेनिंग लेना झूठ बोलने की, ऐसे खुले में दिमागी शौच न किया करो, भारत में खुलें शौच की इजाजत नहीं है।”

@iamurarijit नाम के यूजर ने तो पूरे गैंग की ही पोल खोल दी और लिखा, “JNU वालों में ये ख़ास खूबी है कि ये जो चीज नहीं होती उसे भी देख लेते हैं, जैसे नकाब के पीछे ABVP ‘गुंडे’, बिना ड्राफ्ट के NRC…।”

@gauravsh44 नाम के यूजर ने लिखा, “हर जगह अपना मुँह काला कराती है।”

@shiveshsharma ने एक विडियो पोस्ट करते हुए अपनी बातों को दूसरो तक पहुँचाया, वीडियो में स्वरा पाकिस्तान में बैठकर यह कहती हुई दिखाई दे रही हैं कि उनको लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क से भी अधिक पाकिस्तान का लाहौर शहर पसंद है।

@ChiyaShuchi नाम की यूजर ने तो कमाल ही कर दिया और मानो स्वरा के मन की बात ही कह दी हो। लिखा, “हाय राम! टाइम तो देश छोड़ने का है।”

आख़िर में @KhajuriaPawan नाम के यूजर ने बिना लिखे ही सब कुछ लिख दिया। अब आप ही देख लीजिए और समझ जाइएगा।

10 साल में 17 साल बढ़ गई स्वरा की उम्र: CAA विरोध के चक्कर में बेसिक गणित भी भूलीं अभिनेत्री

हाथ में संविधान, जुबाँ पर सुप्रीम कोर्ट के लिए गाली, दिल में राम के लिए घृणा: ऐसे कैसे चलेगा स्वरा मैडम?

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हम अल्लाह को मानते हैं, लोकतंत्र को नहीं: ‘जामिया के विद्यार्थियों’ का ऐलान

देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम के समर्थन में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा रैली निकालने के बाद अब इन छात्रों ने ऐलान किया है कि वो लोकतंत्र को नहीं, अल्लाह को मानते हैं। फेसबुक पर Students of Jamia नाम के पेज ने ये पोस्ट किया है। इसमें लिखा गया है कि ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मद रसुल्लाह, लोकतंत्र के खिलाफ है।

Students of Jamia द्वारा शेयर किया गया फेसबुक पोस्ट

इस पेज ने Al Haya Min Allah नाम के एक पेज को शेयर किया है। जिस पर लिखा गया है कि लोकतंत्र के सिद्धांत के विपरीत, इस्लाम जोर देकर कहता है कि हक को मेजॉरिटी के साथ परिभाषित नहीं किया गया है।

इसमें मसनद अहमद के हवाले से कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद ने कहा था कि कई दुष्ट लोगों के बीच धार्मिक लोग भी होते हैं। जो उनकी अवहेलना करते हैं, उनकी संख्या उनके मानने वालों की तुलना में अधिक होती है। अल्लाह सार्वजनिक रूप से स्वीकृत मेजरिटेरिज्म के खिलाफ बात करते हैं। और यदि आप उन लोगों की बातें मानते हैं तो वो आपको अल्लाह के रास्ते से गुमराह करेंगे।

एक तरफ जहाँ सीएए का विरोध करते हुए ये कहा जा रहा है कि वो लोकतंत्र और संविधान का पालन कर रहे हैं, उसकी रक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जामिया के छात्रों का इस तरह से खुले तौर पर कहना कि उनके अल्लाह लोकतंत्र के खिलाफ हैं, कई सवाल खड़े करता है। जब जामिया के दंगाईयों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी तो वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल समेत कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया था। उनका कहना था कि लोकतंत्र कमजोर हो रहा है, मगर अब जो जामिया के छात्र कर रहे हैं, वो क्या है?

बता दें कि इसी जामिया के छात्रों ने असम को हिंदुस्तान से काटने की बात करने वाले शरजील इमाम के समर्थन में मार्च निकाला था। इस दौरान नारे लगाए गए थे, “शरजील तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। शरजील तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं। शरजील को रिहा करो।”

उल्लेखनीय है कि शरजील ही शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा था, जो घूम-घूम कर भड़काऊ भाषण दे रहा था। उसने मस्जिदों में आपत्तिजनक पोस्टर्स बाँटे थे। ऐसे में शरजील के समर्थन में जामिया के छात्रों का खड़ा होना संदेह पैदा करता है। मार्च के दौरान इन छात्रों ने हज़ारों शरजील इमाम पैदा करने की बात कही। इससे पहले लखनऊ में भी शरजील इमाम के समर्थन में मार्च निकालने की कोशिश की गई थी। हालाँकि योगी आदित्यनाथ की सरकार के प्रयासों के कारण ये संभव नहीं हो सका।

गठबंधन के नेता ने उद्धव से कहा – ध्यान से पढ़िए NPR-NRC: दिल्ली में मोदी-ठाकरे मिले, मुंबई में कई दिल-जले!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुध उद्धव ठाकरे ने सीएए को लेकर मीडिया के सामने शनिवार को अपनी राय खुलकर दी। उन्होंने कहा कि सीएए से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। यह कानून किसी की नागरिकता नहीं लेगा। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार में सहयोगी की भूमिका निभा रहे दलों ने उद्धव को फ़िर से इस कानून को पढ़ने की नसीहत दे डाली है। उद्धव ठाकरे के बयान और सहयोगी पार्टियों के द्वारा उन पर कटाक्ष को लेकर गठबंधन में रार बढ़ती ही जा रही है।

महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार बनने के बाद पहली बार शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने बेटे आदित्य के साथ शनिवार को प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमने नागरिकता संशोधन अधिनियम, NPR और NRC पर चर्चा की है। मैंने पहले ही इन मुद्दों पर अपना रुख साफ कर दिया है। किसी को सीएए से डरना नहीं चाहिए।”

महाराष्ट्र के मुख्यमत्री उद्धव ठाकरे ने साफ कहा कि यह कानून (CAA) किसी की नागरिकता लेने के लिए नहीं है। बल्कि यह कानून पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है। इसलिए इससे किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।

उद्धव के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा हो गई। बयान पर सबसे पहले प्रक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने उद्धव को इसे फिर से पढ़ने की नसीहत दे दी और ट्वीट करते हुए कहा, “जब उद्धव पूरे कानून को ध्यान से पढ़ेंगे तब उन्हें समझ आएगा कि NPR और NRC में बहुत फर्क नहीं है। एक बार आप NPR पर सहमत हुए तो NRC को नहीं रोक पाएँगे।” CAA पर तिवारी ने कहा कि सरकार को संविधान के अनुसार इसके प्रारूप में परिवर्तन करने होंगे। संविधान में स्पष्ट है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती।

बता दें कि शनिवार को अपने बेटे आदित्य के साथ दिल्ली आए उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाक़ात के बाद गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी मुलाक़ात की थी। गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) और कॉन्ग्रेस के समर्थन से मिली-जुली सरकार चला रहे हैं। एक ओर जहाँ NCP और कॉन्ग्रेस नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर शिवसेना इसके समर्थन में दिखाई दे रही है। ऐसे में महाराष्ट्र गठबंधन सरकार में कहीं न कहीं आपसी मतभेद की स्थिति बनी हुई है।

मुस्लिम हमारे जिगर के टुकड़े हैं – फारूक, उमर और मुफ्ती की जल्द रिहाई के लिए करेंगे प्रार्थना: राजनाथ सिंह

जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 और 35ए को खत्म किए जाने के बाद से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती नजरबंद हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर टिप्पणी करते हुए इन लोगों की जल्द रिहाई की कामना की है। साथ ही सिंह ने उम्मीद जताई कि रिहा होने के बाद तीनों पूर्व सीएम, कश्मीर के हालात को सामान्य बनाने और विकास करने में योगदान देंगे।

बता दें कि मोदी सरकार द्वारा पिछले वर्ष 5 अगस्त को जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को हटा दिया गया था, जिसके बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। इसी समय से एहतियात के तौर पर जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों नेशनल कॉन्फ्रेंस से फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से महबूबा मुफ्ती सहित दर्जनों राजनेताओं को नजरबंद कर दिया गया था।

हालाँकि इसके बाद से अधिकांश राजनेताओं को रिहा कर दिया गया है, मगर तीनों पूर्व मुख्यमंत्री और एक दर्जन राजनेताओं को अभी भी नजरबंद रखा गया है। फारूक अब्दुल्ला को सितंबर में कड़े पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत नजरबंद किया गया और इसके कुछ समय बाद उमर अब्दुल्ला और महबूबा को भी इसी एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था। सरकार ने सुरक्षा की दृष्टि से इन नेताओं के भड़काऊ बयानों का हवाला देते हुए इन्हें नजरबंद रखा है।

राजनाथ सिंह ने IANS को दिए गए इंटरव्यू में कहा, “कश्मीर का माहौल शांतिपूर्ण है। स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। सुधार के साथ-साथ इन फैसलों (नजरबंदी से राजनेताओं की रिहाई) को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार ने किसी को भी प्रताड़ित नहीं किया है।”

वहीं सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कश्मीर के हितों में कुछ कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “हर किसी को इसका स्वागत करना चाहिए।” सिंह ने कहा कि फारूक उमर व मुफ्ती की जल्द रिहाई के लिए प्रार्थना करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मैं यह भी प्रार्थना करता हूँ कि जब वह बाहर आएँ तो कश्मीर की स्थिति को सुधारने में अपना योगदान दें।”

इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने इस धारणा को भी खारिज किया कि मोदी सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। उन्होंने मेरठ और मेंगलुरु में अपनी दो मेगा रैलियों का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने पहले भी अपनी मेरठ और मेंगलुरु की रैलियों में कहा है कि मुस्लिम भारत के नागरिक और हमारे भाई हैं। वह हमारे जिगर का टुकड़ा है। कुछ ताकतें हैं, जो उन्हें गुमराह कर रही हैं। लेकिन बीजेपी किसी भी स्थिति में भारत के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं जा सकती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत से ही ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा दिया है।”

अब दिल्ली का जाफराबाद बना ‘शाहीन बाग’, सड़क पर बैठीं महिलाएँ, मेट्रो स्टेशन बंद

शाहीन बाग में पिछले 2 महीने से भी ज्यादा समय से चल रहे महिलाओं के प्रदर्शन के बीच जाफराबाद में भी महिलाओं के प्रदर्शन से पुलिस अलर्ट हो गई। महिलाओं ने शनिवार (फरवरी 22, 2020) देर रात जाफराबाद में प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहाँ पर सुरक्षा व्यवस्था के भारी इंतजाम किए गए हैं। खुद दिल्ली पुलिस के डीसीपी (नॉर्थ-ईस्ट) वेद प्रकाश सूर्या घटनास्थल पर पहुँचे और साथ ही महिला पुलिसकर्मियों को भी वहाँ भेजा गया है।

बता दें कि शाहीनबाग की तरह ही जाफराबाद मार्ग पर भी महिलाएँ लगभग डेढ़ महीने से सीएए के विरोध में धरने पर बैठी हैं। शनिवार रात साढ़े दस बजे धरने पर बैठी महिलाएँ जाफराबाद मुख्य सड़क पर उतर आईं। उन्होंने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे जमा होकर रोड को जाम कर दिया। बताया जा रहा है कि 500 से ज्यादा महिलाएँ सीएए के खिलाफ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास एकत्र हो गईं।

जिसके बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के एंट्री और एग्जिट गेट को बंद कर दिया। इस स्टेशन पर ट्रेनें नहीं रूकेंगी। महिलाओं ने नारे लगाते हुए कहा कि वे तब तक प्रदर्शनस्थल से नहीं हटेंगी, जब तक केंद्र सरकार सीएए को रद्द नहीं कर देती। प्रदर्शनकारियों ने अपनी बाँह पर एक नीली पट्टी बाँधी और ‘जय भीम’ के नारे भी लगाए। इलाके में महिला पुलिसकर्मियों सहित भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है। महिलाओं ने सीलमपुर को मौजपुर और यमुना विहार से जोड़ने वाली सड़क नंबर 66 को अवरुद्ध कर दिया है। अचानक विरोध-प्रदर्शन के कारण यातायात बाधित हो गया। सड़क को खाली कराने के लिए पुलिस प्रदर्शनकारियों से बात करने की कोशिश कर रही है।

वहीं भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर आजाद का दावा है कि ये सभी महिलाएँ उनके ‘भारत बंद’ के आह्वान पर धरने पर बैठी हैं। चंद्र शेखर आजाद ने ट्वीट कर कहा है, “ऐतिहासिक भारत बंद की शुरुआत जाफराबद सीलमपुर दिल्ली से कर दी गई है, दिल्ली के साथी जाफराबाद पहुँचें। आज संवैधानिक दायरे में रहते हुए पूरा भारत बंद किया जाएगा। बीजेपी सरकार को बहुजनों की ताकत का अहसास करवाया जाएगा।” भीम आर्मी का कहना है कि यह भारत बंद संविधान और रक्षण के साथ हो रहे छेड़-छाड़ के विरोध में है।

महिलाओ ने कहा कि वह रविवार (फरवरी 23, 2020) को हर हाल में पैदल मार्च निकालेंगी। महिलाओं ने बताया कि भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने रविवार को भारत बंद का आह्वान किया है, साथ ही मार्च निकालने का आह्वान किया हुआ है। दिल्ली में जहाँ-जहाँ सीएए के विरोध में धरने चल रहे हैं, वह सभी जगह गए थे और उन्होंने राजघाट के पैदल मार्च में शामिल होने की अपील की थी। हालाँकि पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है। बता दें कि दिसंबर 2019 में जाफराबाद में सीएए विरोध के नाम पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

‘हमारी मैडम सोनिया जी को क्यों नहीं बुलाया’ – गुस्से में कॉन्ग्रेसी अधीर रंजन, नहीं जाएँगे भोज खाने राष्ट्रपति भवन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित रात्रिभोज कार्यक्रम में निमंत्रण के बाद भी कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन ने इसमें शामिल होने से इंकार कर दिया है। दरअसल अधीर रंजन ने रात्रिभोज कार्यक्रम में सोनिया गाँधी को आमंत्रित नहीं किए जाने पर नाराजगी ज़ाहिर की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज में बुलाए जाने पर कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र के कुछ कायदे और शालीनताएँ होती हैं। इसमें विपक्ष क्यों नदारद है? क्यों हमारी मैडम सोनिया जी को नहीं बुलाया गया? अमेरिका में जब हाउडी मोदी हुआ तो वहाँ के मंच पर तो डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों थे।

इससे पहले लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और राज्यसभा में कॉन्ग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज के लिए 25 फरवरी को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया गया, जिसमें जाने से अधीर रंजन चौधरी ने साफ इंकार कर दिया है। साथ ही इस रात्रिभोज को लेकर सरकार पर कई सारे सवाल भी खड़े किए हैं।

अधीर रंजन ने ट्वीट किया, “ट्रंप अहमदाबाद से अपने राष्ट्रपति चुनाव अभियान को शुरू करने जा रहे हैं। एक साथ दो माचो (मर्दवादी) राजनेता मिलेंगे, खाएँगे और मीडिया के लाइमलाइट में आएँगे। लेकिन संक्षेप में कहें तो, अमेरिका विक्रेता के रूप में होगा जबकि भारत खरीदार होगा। वहीं कॉन्ग्रेस ट्रंप की यात्रा का एक तरफ तो स्वागत कर रही है तो दूसरी ओर यात्रा से भारत के नफे-नुकसान को लेकर भी लगातार सवाल उठा रही है।

आपतो बता दें कि 24 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति भारत दौरे पर अहमदाबाद पहुँचेंगे। इसके बाद अहमदाबाद के नवनिर्मित मोटेरा स्टेडियम में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, जहाँ से वह आगरा के लिए रवाना होंगे और ताजमहल का दीदार करेंगे। वहीं 25 को ट्रंप दिल्ली पहुँचकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इससे पहले दोनों देशों के बीच कुछ महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते भी हो सकते हैं।

‘ट्रंपेन्द्र बाहुबली’ की धमाकेदार एंट्री: Meme पोस्ट कर कहा – भारत के दोस्तों से मिलने के लिए उत्सुक, विडियो वायरल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से पहले जोर-शोर से तैयारियाँ चल रही हैं। अपने भारत दौरे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति भी कम उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भारत दौरे पर रवाना होने से पहले एक ट्वीट को रिट्वीट किया है, जिसमें वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे सफल फिल्म ‘बाहुबली’ के मीम में नजर आ रहे हैं। इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए ट्रंप ने लिखा है, “भारत में अपने शानदार दोस्तों से मिलने के लिए उत्सुक हूँ।“

1 मिनट 21 सेकंड का ये मीम वीडियो ट्विटर हैंडल @Silmemes1 से पोस्ट किया गया है। सबसे खास बात है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इसे रिट्वीट किया है। इसमें ऐनिमेटेड किरदारों के साथ भारत और अमेरिका की दोस्ती को दिखाया गया है। इसके साथ ही ‘बाहुबली’ फिल्म की एक फुटेज को एडिट किया गया है, जिसमें ट्रंप को बाहुबली के तौर दिखाया गया है। उनका चेहरा फिल्म के एक्टर प्रभास की जगह पर पोस्ट किया गया है। इस वीडियो में वह पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ रथ पर बैठे भी देखे जा सकते हैं। यही नहीं, ट्रंप अपनी बेटी इवांका और उनके पति जैरेड को कंधों पर बिठाए भी दिखते हैं। वीडियो में पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी पत्नी जशोदाबेन को भी देखा जा सकता है। पूरे मीम वीडियो में ‘बाहुबली’ का लोकप्रिय गाना भी है।

बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप 24-25 फरवरी को दो दिनों के भारत दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान उनकी पत्नी मेलानिया, बेटी इवांका और दामाद जैरेड भी उनके साथ होंगे। ट्रंप सबसे पहले गुजरात के अहमदाबाद पहुँचेंगे। जहाँ पीएम मोदी के के साथ ट्रंप एक भव्य रोड शो में हिस्सा लेंगे। इस रोड शो को खास बनाने के लिए काफी तैयारियाँ की गई हैं। रोड शो खास बनाने के लिए रास्ते में 28 स्वागत मंच बनाए गए हैं। इस मंचों पर अलग-अलग प्रदेश के लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही स्कूल के बच्चे भी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए उत्साहित हैं।

इसके बाद अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम होगा। साथ ही ट्रंप मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम का उद्घाटन भी करेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा पिछले काफी समय से सुर्खियों में है और दुनिया भर की निगाहें यूएस-भारत की इस दोस्ती पर टिकी हुई है। अहमदाबाद के साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप के स्वागत की तैयारियाँ आगरा में भी तेजी से चल रही हैं। प्रशासन आगरा को स्वागत योग्य बनाने में जुटा है, ताकि जब ट्रंप अपनी पत्नी के साथ ताजमहल पहुँचें, तो इसकी खूबसूरती देख कर खुश हो जाएँ।

हम तुम्हारे साथ हैं: शरजील इमाम के समर्थन में उतरा जामिया, गूँजा ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’

“शरजील तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।”
“शरजील तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।”
“शरजील को रिहा करो।”

ये वो नारे हैं जो देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम के समर्थन में जामिया के छात्रों की रैली में गूँजा। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने उसके समर्थन में मार्च निकाला। शरजील इमाम ने महात्मा गाँधी को सबसे बड़ा फासिस्ट नेता कहा था और नॉथ-ईस्ट इंडिया को शेष भारत से काट कर अलग करने के लिए समुदाय विशेष को उकसाया था। शरजील ही शाहीन बाग़ विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा था, जो घूम-घूम कर भड़काऊ भाषण दे रहा था। उसने मस्जिदों में आपत्तिजनक पोस्टर्स बाँटे थे। ऐसे में शरजील के समर्थन में जामिया के छात्रों का खड़ा होना संदेह पैदा करता है।

ये मार्च जामिया मिल्लिया इस्लामिया से लेकर ज़ाकिर नगर ढलान तक गया। इस मार्च में ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ जैसे मजहबी नारे भी लगाए गए। साथ ही कई अन्य नारों के जरिए मोदी सरकार का विरोध किया गया और शरजील इमाम का समर्थन किया गया। मार्च में शरजील इमाम पर ‘चुप्पी तोड़ने’ के भी नारे लगाए। इस मार्च में जामिया छात्र संगठनों के कई नेता भी शामिल हुए। एक छात्र नेता ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार शरजील इमाम और डॉक्टर कफील पर हमले कर रही है।

जामिया के छात्रों ने कहा कि शरजील इमाम की तरफ लोग धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं और लोगों को समझ आ रहा है कि चक्का-जाम करना राष्ट्रद्रोह नहीं है। छात्र नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार किसी पर भी यूएपीए और पीएसए लगा दे रही है। जामिया के छात्रों ने कहा कि माहौल ऐसा बना दिया गया है जैसे शरजील कोई देशद्रोही हो। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि देश में नफरत का माहौल बना दिया गया है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शरजील इमाम की विचारधारा से डरते हैं।

शरजील इमाम के समर्थन में लगे भड़काऊ और आपत्तिजनक नारे

छात्रों ने हज़ारों शरजील इमाम पैदा करने की बात कही। इससे पहले लखनऊ में भी शरजील इमाम के समर्थन में मार्च निकालने की कोशिश की गई थी लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार के प्रयासों के कारण ये संभव नहीं हो सका।