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बलिदानी रतनलाल का राजकीय सम्मान के साथ दाह संस्कार: 7 वर्षीय बेटे राम ने दी मुखाग्नि

दिल्ली हिंसा में वीरगति को प्राप्त हुए हेड कान्स्टेबल रतनलाल का आज राजस्थान में उनके पैतृक गाँव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान अंतिम दर्शन पाने के लिए क्षेत्र से हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं 7 वर्षीय बेटे द्वारा पिता को दी गई मुखाग्नि को देख हर किसी की आँखें नम हो गई। रतनलाल की अंतिम यात्रा के दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम और शहीद रतनलाल अमर रहें जैसे नारे गूँजते रहे।

बुधवार को राजस्थान के सीकर के जवान रतनलाल का शव अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गाँव तिहावली पहुँचा ऐसे ही गाँव में लोगों का हुजूम लग गया। घंटों लोगों ने रतनलाल के अंतिम दर्शन किए। इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान कि साथ अंतिम संस्कार किया गया। बलिदानी रतनलाल को सात वर्षीय बेटे राम ने मुखाग्नि दी, जिसे देख हर किसी की आँखे नम हो गई।

इससे पहले रतनलाल को शहीद का दर्जा न देने की ग्रामीणों ने शव को लेने से इंकार कर दिया था। इसके बाद मौके पर पहुँचे सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी से बात की। जहाँ से जवान रतनलाल को शहीद का दर्जा दिलाने और एक करोड़ के मुआवजे की घोषणा के बाद ही ग्रामीणों ने रतनलाल का शव लिया। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने हेड कान्स्टेबल रतनलाल की पत्नी को शोक संदेश भेजा और कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में बहादुर पुलिसकर्मी के परिवार के साथ है। उन्होंने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

बता दें कि राजस्थान के सीकर निवासी मृतक हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल वर्ष 1998 में कॉन्स्टेबल के पद पर दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। सोमवार को दिल्ली के गोकुलपुरी में हुई सीएए के नाम पर हुई हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल बुरी तरह जख्मी हो गए थे। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए जवान ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। रतनलाल की मौत की खबर जैसे ही उनकी पत्नी पूनम को मिली, वह बेहोश हो गईं। देखते ही देखते उनके घर भीड़ जमा हो गई। रतनलाल की दो बेटियाँ और एक बेटा है।


वारिस पठान के बयान और शाहीन बाग़ की दादियों की जहालत के कारण जली दिल्ली: वसीम रिजवी

दिल्ली में CAA विरोध के नाम पर हुई हिंसा के लिए शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने AIMIM के नेता वारिस पठान को जिम्मेदार ठहराया है। हिंसा के पीछे वारिस पठान के उस बयान को कारण बताया गया है, जिसे बीते दिनों कर्नाटक के गुलबर्ग में दिया गया था। दिल्ली हिंसा को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने दिल्ली में हो रही हिंसा को लेकर दिए अपने बयान में कहा कि दिल्ली हिंसा AIMIM के नेता वारिस पठान के बयान का नतीजा है। रिजवी का कहना है कि पठान के उस बयान के बाद ही दिल्ली में लोग उग्र हुए हैं।

वसीम रिजवी ने शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे धरने पर तंज कसते हुए आगे कहा कि ये हिंसा शाहीन बाग में बैठी दादी और नानियों की जिहालत का नतीजा है। रिजवी ने प्रदर्शनकारियों से हाथ जोड़कर अपील की है कि कॉन्ग्रेसी जहर का प्याला लोग न पिएँ। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के जाल में फँस कर हुकूमत के खिलाफ माहौल मत बनाओ। हुकूमत, देश और सीएए कानून हमारा है। आपस में लड़कर मरने वाले को कोई शहीद नहीं कहता।

इससे पहले रिजवी ने सीएए के ख़िलाफ विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर तंज कसते हुए कहा था कि अगर ऐसे ही हालात रहे तो इस्लामिक दाढ़ी और बगैर मूँछ के डरावने चेहरे हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को तार-तार कर देंगे। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा था कि शाहीन बाग जैसे हजारों धरने हो जाएँ, लेकिन नागरिकता संशोधन कानून पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। रिजवी ने पहले भी शाहीन बाग को अपना निशाना बनाते हुए कहा था कि शाहीन बाग का धरना हक माँगने कि लड़ाई नहीं है, बल्कि हिंदुओं का हक छीनने की जिद है।

गौरतलब है कि कर्नाटक के गुलबर्ग में सीएए के ख़िलाफ आयोजित रैली में AIMIM के नेता वारिस पठान ने हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए कहा था,“उनकी संख्या अभी 15 करोड़ है, लेकिन ये 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है। अगर ये 15 करोड़ साथ में आ गए, तो सोच लो उन 100 करोड़ हिंदुओं का क्या होगा?”। इस दौरान मंच पर पार्टी प्रमुख असदुद्दीन औवेसी भी मौजूद रहे। आपको बता दें कि वारिस पठान वही नेता हैं, जिनकी 2016 में महाराष्ट्र विधानसभा से सदस्यता इसलिए खत्म कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने सदन में भारत माता की जय बोलने से इनकार कर दिया था।

किसी को डरने की ज़रूरत नहीं, पुलिस बल की कमी नहीं है: दिल्ली में सड़क पर उतरे NSA अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल दिल्ली में ज़मीन पर उतर चुके हैं। मौजपुर इलाक़े में घूम कर उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। डोभाल ने जनता को आश्वासन दिया है कि दिल्ली में ज़मीन पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद हैं और किसी को भी अब डरने की ज़रूरत नहीं है। दिल्ली में भड़की हिंसा में अब तक 200 लोग घायल हुए हैं और 22 लोगों की मौत की ख़बर है। गोकुलपुरी पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को भी दंगाइयों ने मार डाला।

डोभाल ने बताया कि स्थिति एकदम नियंत्रण में है और लोग पूर्णतः संतुष्ट हैं। उन्होने कहा कि पुलिस ग्राउंड पर अपना कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि हालात नियंत्रण में है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक बार स्थिति शांत हो जाए, सभी सवालों का जवाब दिया जाएगा।

मंगलवार (फरवरी 25, 2020) की रात भी डोभाल ने कई इलाक़ों का दौरा करने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया था कि जो क़ानून सम्मत चलने वाले नागरिक हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि डोभाल अधिकारियों सहित हिंसा से प्रभावित क्षेत्र मौजपुर का दौरा कर रहे हैं:

दिल्ली में सीएए के ख़िलाफ़ भड़की हिंसा में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से भी ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हुई है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी मारे गए लोगों का ससम्मान अंतिम संस्कार किया जाए और साथ ही मदद के लिए एक हेल्पलाइन नंबर और एक हेल्पडेस्क बनाया जाए। हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार कई शेल्टर्स स्थापित करे, जहाँ दवाओं और कम्बल सहित अन्य सुविधाओं की उपलब्धता हो। हाईकोर्ट ने कहा है कि 1984 दंगे जैसी स्थिति न आए, इसका ध्यान रखा जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि ज़मीन पर एजेंसियाँ शांति-व्यवस्था बहाल करने के लिए लगातार लगी हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट में कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर के बयानों का वीडियो भी चलाया गया। हालाँकि, एसजी तुषार मेहता ने साफ़ कर दिया कि इनका दिल्ली में हुई हिंसा से कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं है।

मस्जिद पर भगवा ध्वज की पुरानी वीडियो शेयर करके फँसी राणा अय्यूब, शिकायत दर्ज

साम्प्रदायिक हिंसा की आग में भभकती राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दंगाइयों के जारी आतंक के बीच खुद को पत्रकार कहने वाली एजेंडाधारी राणा अय्यूब ने कल सोशल मीडिया पर एक पुरानी वीडियो पोस्ट की और दावा किया कि इन दंगों में मस्जिदों को तोड़कर भगवा झंडा लहराया जा रहा है। अब हालाँकि, बाद में इस बात की पुष्टि हो गई कि ये वीडियो 2 साल पुरानी है, लेकिन लोगों को भड़काने के लिहाज से राणा अय्यूब द्वारा की गई कोशिश के लिए उन्हें पहले यूजर्स ने सोशल मीडिया पर आड़े हाथों लिया गया। फिर अब उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज हो गई। शिकायत करने वाले का नाम रमेश सोलंकी है। रमेश ने अपनी शिकायत मंगलवार की शाम ऑनलाइन दायर की।

50 वर्षीय सोलंकी ने दावा किया कि वीडियो 2 साल पुराना है और इसे अय्यूब ने समाज में नफरत फैलाने और दिल्ली हिंसा में और अधिक ईंधन जोड़ने के इरादे से पोस्ट किया था। अपनी शिकायत में सोलंकी ने राणा के ट्वीट और ट्विटर हैंडल @ranaayyub की एक तस्वीर भी अपलोड की।

शिकायत के अलावा सोलंकी ने अपने ट्विटर पर ये भी लिखा कि कृपया इस राणा अय्यूब के खिलाफ कार्रवाई करें। राणा अय्यूब द्वारा साझा किया गया वीडियो 2 साल पुराना है और वह इसे फिर से आज की स्थिति में साझा कर रही हैं, जो समाज में नफरत फैलाने और लोगों को उकसाने का प्रयास है।

रमेश सोलंकी के अनुसार, “राणा झूठी अफवाहों को पोस्ट करने और भारत और भारत सरकार को बदनाम करने के लिए नियमित रुप से काम करती रही हैं, देश में सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने में सफल होने से पहले उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरुरी है।”

राणा अय्यूब द्वारा शेयर किया गया ट्वीट

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई साइबर अपराध के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मामले पर कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वे किसी भी कार्रवाई करने का निर्णय लेने से पहले तथ्यों को जाँच करेंगे। उन्होंने कहा, अगर जरूरत पड़ी तो हम शिकायत को आगे की जाँच के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन को रेफर कर देंगे।

गौरतलब है कि 25 फरवरी को ट्विटर हैंडल @RanaAyub पर पोस्ट की गई 45-सेकंड की एक वीडियो क्लिप में कुछ लोगों को एक केसरिया ध्वज और राष्ट्रीय तिरंगा लगाने की कोशिश करते हुए दिखाया गया था। अब आमतौर पर एक जिम्मेदार पत्रकार ऐसी वीडियो आदि के सही होने पर भी शेयर नहीं करते क्योंकि हिंसा भड़कने के आसार होते हैं। लेकिन राणा अय्यूब से ऐसी उम्मीद मूर्खता है।

वीडियो के आने पर कई लोगों ने बताया कि ये पुरानी है, और उस पर केस की धमकी दी, तो उन्होंने उस वीडियो को तुरंत अपने ट्विटर प्रोफाइल से हटा दिया और डिलीट कर दिया। अफवाह फैलाने, झूठे वीडियो शेयर करने और लोगों को भड़काने के लिए झूठ बोलना लिबरल पत्रकारों के गिरोह का पुराना पेशा रहा है। जब पोल खुल जाती है तो वो चुपके से अपना ट्वीट डिलीट कर देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि तब तक काफ़ी लोग उसे पढ़ने या देख चुके होते हैं।

मस्जिद पर भगवा ध्वज: राणा अयूब ने गिरफ़्तारी के डर से डिलीट किया वीडियो, फिर से किया ट्वीट
अमित शाह के गृह मंत्री बनते ही राणा अय्यूब ने एक साथ उगला झाग और जहर

पुलिस पिकनिक नहीं मना रही, एसिड अटैक झेल रही है, एकतरफा हंगामा न हो: दिल्ली HC में तुषार मेहता

दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार (फरवरी 26, 2020) को दिल्ली में हो रही हिंसा के संबंध में हर्ष मंदर द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में कपिल मिश्रा के बयान का विडियो भी चलाया गया। एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि अभी सभी विडियो की जाँच होनी बाकी है क्योंकि कई पक्षों की तरफ़ से कई सबूत मिले हैं। एसजी ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि उनके बयान का हिंसा की वारदातों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। एसजी ने कहा कि सभी विडियो की जाँच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि ये मामला काफ़ी संवेदनशील है।

वहीं दिल्ली सरकार की तरफ से पेश राहुल मेहरा लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। उनका कहना था कि कार्रवाई होती रहेगी, जाँच के लिए एफआईआर तत्काल दर्ज हो। हर्ष मंदर की तरफ से जिरह करते हुए कॉलिन गोंस्लेव्स ने कहा कि राज्य का ये कहना कि एफआईआर बाद में दर्ज होगा, काफ़ी चिंता का विषय है, क्योंकि ये कोर्ट के सामने आने वाले सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है।

कॉलिन ने हाईकोर्ट में दावा किया कि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बयान के बाद ही सब कुछ शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि ‘गोली मारो गद्दारों को’ वाला नारा काफ़ी लोकप्रिय बना दिया गया है और इसकी आड़ में हिंसा भड़क रही है। कॉलिन ने दावा किया कि अनुराग ठाकुर के एक बयान की वजह से 18 लोग मारे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं ने अपने समर्थकों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया है। इसके बाद कॉलिन ने हाईकोर्ट में भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा का भी भाषण चलाया।

कॉलिन यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने केंद्र सरकार के सहयोग से लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के ही गुंडे घूम-घूम कर हमले कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सेना की तैनाती मुद्दा नहीं है, क्योंकि फिलहाल एफआईआर दर्ज होगा या नहीं, इस पर ही बहस होगा। जब एसजी तुषार मेहता ने दोनों पक्षों की तरफ़ से कई विडियो सर्कुलेट होने की बात कही तो कॉलिन भड़क गए। उन्होंने मेहता पर आरोप लगाया कि वो उन्हें धमका रहे हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में साफ़ कर दिया कि अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा- तीनों के विडियो के आधार पर जानबूझ कर एकतरफा हंगामा किया जा रहा है। मेहता ने हाईकोर्ट से अपील करते हुए कहा कि पुलिस का मनोबल न गिराया जाए, उन्हें बदनाम करने की कोशिशों पर लगाम लगाई जाए।

एसजी ने कहा कि सही समय पर एफआईआर दर्ज किया जाएगा। इस पर जस्टिस मुरलीधर ने पूछा कि दिल्ली जल रही है, ऐसे में सही समय कब आएगा? एसजी मेहता ने जवाब दिया कि पुलिस कोई पिकनिक नहीं मना रही है, उन पर एसिड अटैक किए जा रहे हैं। तुषार मेहता ने कहा कि सभी पक्षों द्वारा घृणा भरे भाषण दिए जा रहे हैं और सब की जाँच की जाएगी। उन्होंने मुद्दों को बढ़ा-चढ़ा कर न पेश करने की अपील की।

अभी प्यार से बताया जा रहा, फिर सख्ती से बताया जाएगा: दंगाइयों को चेता रही दिल्ली पुलिस का Video

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रविवार से शुरू हुई हिंसा में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 250 से अधिक जख्मी हैं। बुधवार को करावल नगर, भजनपुरा, जाफराबाद, भजनपुरा, कबीर नगर, सीलमपुर जैसे इलाकों में तनावपूर्ण शांति देखने को मिल रही है। हालात पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए पुलिस पुलिस और सशस्त्र बलों के जवानों ने कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया है।

कई इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है। पुलिस लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है। ऐसा ही एक विडियो सीलमपुर से सामने आया है। इसमें पुलिस माइक से घोषणा करते हुए कह रही है, “सीलमपुर में एक महीने के लिए धारा 144 लगा दी गई है। कोई भी व्यक्ति यहाँ नज़र न आए। अभी तो तुम्हें प्यार से बताया जा रहा है, फिर सख्ती से बताया जाएगा। सभी अपनी दुकानें बंद कर दो यहाँ से।”

इससे पहले मंगलवार रात राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल ने भी सीलमपुर सहित कई प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। इस दौरान उनके साथ पुलिस कमिश्‍नर अमूल्‍य पटनायक भी थे। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है। हालत पर काबू पाने के लिए पुलिस को खुली छूट दी गई है। चार इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया था। इसमें सबसे संवेदनशील मौजपुर, जाफराबाद, करावल नगर और बाबरपुर शामिल हैं।

जिनके हाथ सिखों के ख़ून से रंगे हैं, वो अमित शाह का इस्तीफा माँग रहे: जावड़ेकर का सोनिया को जवाब

दिल्ली दंगों पर कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने आज (फरवरी 26, 2020) गृहमंत्री अमित शाह से बहुत सारे सवाल किए और भाजपा पर खुलकर निशाना साधा। सोनिया गाँधी के तीखे वार के बाद भाजपा की ओर से वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने पलटवार किया। उन्होंने सोनिया गाँधी को जवाब देते हुए कहा कि जिनके हाथ सिखों के खून से रंगे हों, उन्हें राजनीति करने के लिए सवाल नहीं उठाना चाहिए। जावड़ेकर ने कहा कि दिल्ली कॉन्ग्रेस दिल्ली हिंसा पर गंदी राजनीति कर रही है। ऐसे आरोपों से पुलिस का मनोबल गिरता है।

कॉन्ग्रेस द्वारा अमित शाह के इस्तीफे की माँग को भाजपा नेता ने हास्यास्पद बताया और कहा कि इससे हास्यास्पद माँग कोई नहीं हो सकती, क्योंकि अमित शाह तो उस दिन से स्थिति को संभालने में जुटे हुए हैं, जिन दिन पहली बार हिंसा भड़की थी। उनके मुताबिक, कॉन्ग्रेस ने अमित शाह से सवाल किए है कि हिंसा के दौरान वो कहाँ थे, तो बता दें कि अमित शाह ने तो कल सर्वदलीय बैठक की थी। इस बैठक में उन्‍होंने दिल्‍ली में हिंसा की पूरी स्थिति का जायजा लिया था।

अपनी बातचीत में जावड़ेकर ने कॉन्ग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि अभी सबका एक मात्र कार्य है कि हिंसा पूर्ण रूप से रुके और स्थायी शांति हो। चर्चा के लिए तो संसद का सत्र है। वहाँ चर्चा कर सकते हैं। और जिनके हाथ सिखों के नरसंहार से रंगे हों, वो यहाँ हिंसा रोकने में सफलता या असफलता की बात कर रहे हैं।

NDTV जर्नलिस्ट ने रचा सहकर्मियों को हिन्दुओं द्वारा मारने का साहित्य, सहकर्मियों ने कहा- हमें कुछ नहीं हुआ है

लेफ्ट लिबरल मीडिया गिरोह के सदस्य दंगों और हिंसक घटनाओं का इन्तजार सिर्फ इस कारण करते हैं ताकि वो लेखन प्रतियोगिता का हिस्सा बन कर पहला नंबर पाने की पूरजोर मेहनत करें। इसके लिए NDTV से लेकर स्क्रॉल, BBC आदि तथाकथित लिबरल्स की घातक टुकड़ियाँ किस तत्परता से अपने काम में जुट जाती हैं इसका ही एक और उदाहरण सामने आया है।

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में जारी हिंसा के बीच NDTV की जर्नलिस्ट निधि राजदान ने ट्वीट शेयर करते हुए लिखा कि उसके कुछ सहकर्मियों को दंगाइयों की एक भीड़ ने बुरी तरह से पीटा और तभी छोड़ा जब उन्होंने अपनी पहचान ‘हिन्दू’ के रूप में बताई।

निधि राजदान ने अपने ट्वीट में लिखा- “मेरे दो सहकर्मियों, अरविन्द गुणाशेखर और सौरभ शुक्ला को दिल्ली में एक भीड़ ने बुरी तरह से पीटा और सिर्फ तभी रुके जब महसूस हुआ कि ये ‘अपने हिन्दू लोग’ हैं। बिलकुल घिनौना!

NDTV पत्रकार ने दावा किया कि अरविन्द गुणाशेखर को भीड़ ने घेर लिया था और उसके मुँह पर हमला कर रहे थे। वो एक लाठी से उसके सर पर हमला करने ही जा रहे थे कि तब तक सौरभ शुक्ला ने बीच-बचाव किया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया कि भीड़ की लाठी शेखर शुक्ला को लगी और उसकी पीठ, पेट में घूँसे मारे गए। साथ ही उसकी टाँगों पर भी हमला किया गया।

लेकिन संयोगवश NDTV जर्नलिस्ट के दावे के उलट जब ‘पीड़ित’ सहकर्मियों ने अपनी तस्वीर शेयर की तो उनके ना ही चेहरों, और ना ही शरीर के किसी हिस्से पर घाव देखा गया।

निधि राजदान के सहकर्मियों ने अपनी इस तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा कि दिन खत्म हो गया है और वो तीनों सहकर्मी एकदम ठीक हैं। साथ ही उन्होंने दिल्ली को नसीहत देते हुए लिखा कि लोगों को समझाकर एकदूसरे के लिए दिल में जगह बनाइए।

सौरभ शुक्ला की यह ‘एकदम फिट’ तस्वीर देखने के बाद ट्विटर यूजर्स ने निधि राजदान से सवाल करते हुए पूछा कि उसने तो कहा था कि ये लोग अधमरे कर दिए गए थे। लेकिन इस पर NDTV की जर्नलिस्ट की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई।

ज्ञात हो कि दंगों को भड़काने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर फर्जी ख़बरें छापने वालों के खिलाफ सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी की गई हैं। उन्माद की आशंका वाले सोशल मीडिया एकाउंट्स से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक पर सरकार की निगरानी है।

बाइक पर ‘जय श्री राम’ का स्टीकर देख 40 लोगों ने मेरे पिता को मार डाला: नितिन ने सुनाई आपबीती

नीचे जो वीडियो संलग्न किया गया है, वो सोमवार (फरवरी 24, 2020) का है। जिस व्यक्ति की लाश सड़क पर पड़ी हुई है, उनका नाम विनोद कुमार है। दंगाइयों ने उन्हें मार डाला। उनके बेटे नितिन किसी तरह इस हिंसा में बच निकले लेकिन अपने पिता की मौत का गम शायद ही कभी उनका पीछा छोड़ पाए। नितिन अभी तक सोच रहे हैं कि आख़िर उन पर हमला क्यों किया गया। हमला करने का कोई कारण नहीं था क्योंकि नितिन या विनोद ने कुछ भी ग़लत नहीं किया था। पहले देखें वीडियो:

ऊपर के वीडियो में आप ये भी देख सकते हैं कि कैसे विनोद कुमार की लाश को जब ले जाया जा रहा है, तब बैकग्राउंड में ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ गूँज रहा है। भड़काऊ नारेबाजी के बीच विनोद कुमार की हत्या कर दी गई। नितिन ने अंदेशा जताया है कि उनकी बाइक के स्टिकर पर ‘जय श्री राम’ लिखा हुआ था और यही देख कर दंगाई भड़क उठे। अब आप समझ सकते हैं कि उपर्युक्त मजहबी नारे लगाने वाले और ‘जय श्री राम’ देखते ही हत्या कर देने वाले कौन लोग हो सकते हैं? ‘स्वराज्य’ की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने नितिन का ये बयान शेयर किया है।

उन्होंने इस घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग की है, जिसे यहाँ हम आपके सामने पेश कर रहे हैं। 51 वर्षीय विनोद की हत्या कर दी गई और उनके 25 वर्षीय बेटे नितिन गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों ही बाइक से दवा की दुकान पर जा रहे थे, जब उन पर लाठियों से हमला किया गया। घटना के कई वीडियो वायरल हुए हैं। एक वीडियो शूट कर रहा व्यक्ति उस फुटेज में बताता है:

“देखिए, मुस्लिमों का ये हाल। हिन्दुओं का जीना बेहाल कर दिया है। एक लाश भेजी गई है दूसरे समुदाय की तरफ़ से हमारे हिन्दू भाई की। ये घटना ब्रह्मपुरी गली नंबर एक की है। वो सन्देश दे रहे हैं- ले जाओ लाश, ऐसी लाशें तो रात भर उठती ही रहेंगी।”

स्थानीय लोग भी बताते हैं कि सोमवार को हिंसा काफ़ी ज्यादा भड़क गई थी। अभी तक इलाक़े में मातम पसरा हुआ है। प्लास्टिक और मेटल जलने की बू वातावरण में फैली हुई है। पुलिस गश्त लगा रही। सड़क पर लोग शायद ही दिख रहे हैं। गली नंबर एक में जली हुई बाइक पड़ी हुई है। एक व्यथित हिन्दू ने कहा- “आप आए हैं। बहुत बड़ी बात है। यहाँ तो अभी तक कोई भी नहीं आया, हमारा आदमी मार दिया गया।” नितिन ने बताया कि उस रात क्या हुआ था?

बकौल नितिन, जब वो और उनके पिता बाइक से जा रहे थे, एक बड़ा सा पत्थर आकर उन्हें लगा और वो होश खो बैठे। नितिन बताते हैं कि वो 40 लोगों की इस्लामी भीड़ थी। उन्होंने लाठियों और पत्थरों से बाप-बेटे को पीटना शुरू कर दिया। नितिन ने कई दरवाजे खटखटाए लेकिन किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला। मृतक विनोद की एक बेटी भी है। नितिन कहते हैं कि अब वो अनाथ हो चुके हैं, उनके ऊपर से पिता का साया उठ गया। नितिन को केवल इतना ही याद है कि आरोपितों ने इस्लामी टोपी पहन रखी थी।

‘दोनों तरफ के लोग हैं’: ‘दंगा साहित्य’ के दोगले कवियों से पूछिए कि हिन्दू ने कहाँ दंगा किया, कितने दिन किया?

‘दोनों तरफ के लोग हैं’, ‘मरने वाले दोनों तरफ से हैं’, ‘पत्थरबाजी में इधर के भी थे, उधर के भी थे’, हमें यह भी सोचना चाहिए कि ये जो चंद लोग हैं, चाहे हिन्दू हों, या मुस्लिम’, ‘आपको देखना होगा कि सड़क पर दो गुट हैं’ आदि कविताएँ और साहित्य पूरा लिखा जा रहा है। लिखना भी चाहिए, क्योंकि इस देश में इतिहास तभी से शुरू होता है, जब एक खास समुदाय पर खरोंच आती है।

हमारी सामूहिक याददाश्त इतनी कमजोर है कि हम इस ‘दंगा साहित्य’ के कवियों से ये सवाल नहीं पूछ पाते कि ‘दोनों तरफ के लोगों के आने से पहले जो तीन महीने से ‘एकतरफा हमला’ चला है, वो कहाँ गया? हम यह भूल जाते हैं कि पिछले कुछ सालों से विशुद्ध मजहबी कारणों से मरने वाले हमेशा एक ही तरफ के रहे हैं, चाहे वो कासगंज का चंदन गुप्ता हो, कमलेश तिवारी हो, भारत यादव हो, अंकित सक्सेना हो, प्रशांत पुजारी हो, ध्रुव त्यागी हो, या फिर लोहरदगा के नीरज प्रजापति…

पत्थरबाज़ी दोनों तरफ से हुई? कश्मीर में ‘दूसरा तरफ’ कौन सा तरफ था? शाहीन बाग में दूसरा तरफ कौन सा तरफ था? जामिया नगर में, लखनऊ के परिवर्तन चौक पर, बशीरघाट में, अलीगढ़ में, बिजनौर में, मेरठ में, अहमदाबाद में… ये दूसरी तरफ से पत्थरबाज़ी कौन कर रहा था, कहाँ से आ रहे थे पत्थर?

ये जो चंद लोग हैं, ‘चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम’ वाला राग कर्णप्रिय और मानवीय जरूर है, लेकिन ये ढोंग है। ‘ये जो चंद लोग हैं’ या फिर पूरी विचारधारा, पूरा समुदाय फर्जी कारण की डफली बजाता सड़क पर उतर जाता है, क्योंकि संविधान में विरोध की आजादी है! और वो विरोध दसियों लोगों की हत्या और सैकड़ों के घायल होने के रूप में प्रतिफलित होती है।

‘चाहे हिन्दू’ ही पहले लिखा जाता है, जबकि पहले तो एक ही उन्मादी भीड़ उतरी है हर बार। पहले गोधरा में 59 हिन्दुओं को जिंदा जलाया गया, जो कि चर्चा से गायब है। उसका हिसाब कौन करेगा? ट्रेन की बॉगी में बैठे कारसेवकों ने किस पर पत्थर फेंका था? उन 59 हिन्दुओं की बात कोई क्यों नहीं करता?

‘या मुस्लिम’? जी नहीं, अंतिम दिन कुछ हिन्दू पत्थर फेंकने लगे, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पहले दिन से हिन्दू पत्थर फेंक रहा था। पहले दिन से अंतिम दिन तक एक ही भीड़ पत्थर फेंकती दिखी, आग लगाती दिखी, जान लेती दिखी, कट्टे चलाती दिखी…

तीन महीने बाद अगर किसी के घर में मजहबी भीड़ घुस जाएगी तो प्रतिकार न सिर्फ स्वभाविक है, बल्कि अत्यावश्यक भी। प्रतिकार को हमला बताया जा रहा है। ‘हिन्दू’ और ‘मुस्लिम’ को एक ही पंक्ति में लिख कर बराबर किया जा रहा है। एक के अपराध के लदे पलड़े के बराबर में उसे रखने की कोशिश दिख रही है जो नगण्य है।

इस नैरेटिव से बचिए और पूछिए कि जिसकी गली में हिन्दू की लाश जला कर पहुँचा दी गई, उसने तीन महीने से किसका क्या बिगाड़ा था। ‘दंगा साहित्य’ के कवियों से पूछिए कि आज जो ‘दोनों तरफ के थे’, ‘इधर के भी, उधर के भी’ की ज्ञानवृष्टि हो रही है, वो तीन महीने के 89 दिनों तक कहाँ थी, जो आज 90वें दिन को निकली है?

यही ट्रैप है, जिसमें आप हमेशा फँसा दिए जाते हैं। अंतिम दिन की बात को पिछले हर दिन की तरह बताया जाता है। कश्मीरी हिन्दुओं के पलायन की बात होती है, नरसंहार गायब कर दिया गया है चर्चा से। गोधरा दंगों की बात होती है, 59 कारसेवकों की नृशंस हत्या पर कहीं बात नहीं होती।

ऐसे नहीं चलेगा। आज किसी कपिल मिश्रा को आतंकवादी कहा जा रहा है, विकिपीडिया पर सबसे ऊपर लिखा जा रहा है कि ‘भड़काऊ भाषण’ दिया था। अमानतुल्लाह की बातें नहीं होती जिसके भड़काऊ भाषणों का घाव नासूर बन कर शाहीन बाग में रिस रहा है। आप पुरानी बात मत भूलिए, वरना रामजन्मभूमि का इतिहास 1528 से ही बताया जाता रहेगा।

और मैं कौन हूँ? मैं दंगा फैलाने वाला कह दिया जाऊँगा क्योंकि मैंने भगवा रंग का कुर्ता पहना हुआ है, मेरे स्कार्फ पर ‘राधे-राधे’ लिखा हुआ है और मेरे हाथ में रुद्राक्ष है।

बस इतना ही काफी है। लेकिन हाँ, दिल्ली ही नहीं, पूरे देशभर में एक ख़ास भीड़ के लोगों द्वारा की गई हर हिंसा को आप झुठला नहीं सकते। क्योंकि रामचंद्र गुहा और रोमिला थापर जैसे फिक्शन राइटर्स उपन्यासकारों की काल्पनिक कहानियों को हर गली में मौजूद कैमरा रिकॉर्ड कर रहा है।