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‘सभी धर्म ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम: ओवैसी अगर बोल दें तो Z प्लस सिक्योरिटी की जरूरत पड़ जाएगी’

दिल्ली के ‘अर्थ कल्चरल फेस्ट’ ने भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी और एआईएमआईएम चीफ ओवैसी के बीच “क्या भारत के संवैधानिक मूल्य सच में खतरे में हैं?” विषय पर एक बहस का आयोजन किया था जिसके मॉडरेटर जे. साई दीपक थे।

इस रोचक बहस में एक जगह सुब्रमण्यम स्वामी ओवैसी को चुनौती देते हुए पूछते हैं, “क्या वो कह सकते हैं कि ‘सभी धर्म ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम हैं’ और, फिर खुद इस सवाल का जवाब देते हुए कहते हैं कि ओवैसी अगर यह बोल देंगे तो उन्हें Z प्लस सिक्योरिटी देने की जरूरत पड़ जाएगी।”

सुब्रमण्यम स्वामी ईसाइयत, इस्लाम और हिन्दू धर्म के बीच का फर्क बताते हुए कहते हैं, “हिन्दू धर्म जहाँ प्रत्येक मार्ग से ईश्वर की प्राप्ति सम्भव बताता है, वहीं ईसाइयत और इस्लाम दूसरे धर्मों को कमतर और शैतान का रास्ता करार देते हैं।”

पंथनिरपेक्षता के सवाल पर अपनी बात रखते हुए स्वामी कहते हैं, “या तो आप कहेंगे कि आप सभी धर्मों के प्रति सहिष्णु हैं लेकिन आप का धर्म सबसे श्रेष्ठ है, या आप हिन्दुओं की तरह कहेंगे कि ‘सभी धर्म ईश्वर तक जाते हैं’, इस्लाम ऐसा नहीं मानता कि सभी धर्मों के सहारे इंसान ईश्वर तक पहुँच सकता है और न ही ऐसा ईसाइयत मानती है।”

“यह राजनैतिक बयान है या धर्मशास्त्र से जुड़ा?” मॉडरेटर दीपक के इस सवाल पर सुब्रमण्यम स्वामी ने जवाब दिया कि यह बयान धर्मशास्त्र से संबंधित है।

सुब्रमण्यम स्वामी एकेश्वरवादी धर्मों के उस अभिन्न पहलू पर अपनी बात रख रहे थे जहाँ एक ईश्वर की मान्यता है और अन्य को कमतर माना जाता है जो महज शैतान प्रेरित शक्ति है जिसका काम इंसान को सच्चे ईश्वर से दूर ले जाना है।

VIDEO: स्वरा भास्कर ज्ञानगंगा के तीन मिनट जिसने वामपंथियों के प्रचलित तरीकों को फिर एक्सपोज किया

वामपंथियों के पास एक मशीन होती है जिसमें एक तरफ मूर्ख को डालिए, दूसरी तरफ से वो बकैत बन कर निकलेंगे। और हाँ, वामपंथियों के पास मूर्खों को छोड़ कर और कोई होता भी नहीं। या और गहरे उतरें तो यह कहना भी शास्त्रोचित है कि वामपंथी मूर्ख ही होते हैं। ये बात और है कि उन्हें अंत काल तक अपने मूढ़मति होने का पता नहीं चल पाता।

मूर्ख कई बार ऐसे कार्य भी कर जाते हैं, जो उन्हें लगता है कि ‘गर्दा उड़ा दिया मैंने, मुझे तो नोबेल मिलना चाहिए था’, लेकिन वो बस अपनी मिट्टी पलीद करवाते हैं, एक्सपोज होते हैं, और आम जनता के सामने अपने मूल रूप में प्रस्तुत हो जाते हैं।

स्वरा भास्कर के साथ वही हुआ। नाम में ही ‘स्वर’ है, तो बोलना तो जन्मसिद्ध अधिकार है, आधा नाम भास्कर है, तो भीतर आग भी भरी हुई होगी। ऐसे में वामपंथ का पेट्रोल खुद पर छींट कर भभकने की प्रवृत्ति, और फिर बाप-बाप चिल्ला कर कहना कि ‘आग लगा दिया रे, अरे जला दिया रे’, विक्टिम कार्ड स्वाइप करने में ये अगली पंक्ति में खड़ी होती हैं।

देखें इस लेख का पूरा वीडियो:

NRC का ड्राफ्ट कहाँ, CAA पढ़ा है? रुबिका ने स्वरा के उड़ाए होश, सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे

हम तुम्हारे साथ हैं: शरजील इमाम के समर्थन में उतरा जामिया, गूँजा ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’

भगवान जब लोगों को अक्ल बाँट रहे थे, तब स्वरा भास्कर NRC के ‘रिलीवेंट सेक्शन्स’ पढ़ने में व्यस्त थी

अलीगढ़: CAA की आड़ में उपद्रवियों ने दुर्गा मंदिर पर किया पथराव, पुलिस से झड़प के बाद हालात तनावपूर्ण

दिल्ली में शाहीन बाग़ कब्जाने के बाद CAA के विरोध में अलीगढ़ में माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है। अलीगढ़ के ऊपरकोट में विरोध प्रदर्शन जारी है जबकि शाहजमाल में हालात अभी भी बेकाबू हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि जुलूस निकाल रहे सैकड़ों लोग सड़कों पर मौजूद हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन करने के क्रम में कुछ युवकों ने तुर्कमान गेट पर प्राचीन नवदुर्गा पथवारी मंदिर पर पथराव कर दिया। जिससे बाद से हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं।

अलीगढ़ में रविवार (फरवरी 23, 2020) दोपहर के बाद हालात तनावपूर्ण हुए हैं। ऊपरकोट पर हालात सामान्य करने में जुटी पुलिस पर भी पथराव किया गया। पुलिस द्वारा प्रदर्शन और पथराव कर रहे कुछ लोगों को पकड़ने की कोशिश की गई, जिससे वहाँ मौजूद महिलाओं में गुस्सा बढ़ गया।

भीड़ ने जब पुलिस पर ज्यादा पथराव किया तो बदले में पुलिस ने पत्थरबाजों पर आँसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद वहाँ मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई और धरना दे रहीं महिलाएँ भी भाग गईं। देहलीगेट और ऊपरकोट इलाके में सुबह से जारी जुलूस प्रदर्शनों में भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी शामिल रहे। नागरिकता कानून का विरोध कर रहे कुछ लोगों ने ज्वलनशील चीजें भी फेंकी, जिससे कुछ दुकानों के पर्दों में आग लग गई। हालाँकि बाद में इस पर काबू पा लिया गया।

सीएए के विरोध में शाहजमाल ईदगाह के सामने हजारों की संख्या में महिलाएँ और पुरुष जमा हुए थे। प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी कर रहे थे। ऊपरकोट कोतवाली के सामने भी प्रदर्शनकारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पुलिस प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश कर रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के समझाने के बावजूद टकराव के हालात बन रहे हैं।

देहलीगेट और ऊपरकोट थाना क्षेत्र के मुस्लिम इलाकों के सभी बाजार बंद हो गए हैं। करीब 12:30 बजे सब्जी मंडी इलाके के दुकानदारों को भी धरना प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान करते हुए बाजार बंद करा दिया गया था। खासकर मुस्लिम बाहुल्य इलाके की दुकानें पूरी तरह से बंद हैं। फिलहाल इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। इलाके में हालात तनावपूर्ण हैं।

दिल्ली के मौजपुर में CAA समर्थक और विरोधी आमने-सामने, पत्थरबाजी के बाद स्थिति तनावपूर्ण

दिल्ली के जाफराबाद में सीएए के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया जब सामने से सीएए के समर्थक आ गए। देखते ही देखते दोनों ओर से जमकर पत्थरबाजी होने लगी। अभी तक दिल्ली पुलिस हालातों पर काबू नहीं कर सकी है। वहीं, तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए DMRC ने कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया है।

दिल्‍ली के जाफराबाद मेट्रो स्‍टेशन के पास शनिवार (फरवरी 22, 2020) रात से ही प्रदर्शनकारी बड़ी संख्‍या में एकत्र होने लगे थे, जो कि लगातार सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद रविवार की सुबह बड़ी संख्या में मौके पर पहुँची महिलाओं ने सड़क को जाम कर दिया। इसी बीच स्थित तब तनावपूर्ण हो गई कि जब मौजपुर में सीएए के समर्थन में सड़कों पर पहुँचकर लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कुछ ही देर में दोनों और से पत्थरबाजी शुरू हो गई। इसके बाद पुलिस को आँसू गैस के गोले दागने पड़े, लेकिन इसके बाद भी घंटों तक पुलिस हालात पर नियंत्रण पाने में नाकाम रही।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक तरफ सीएए के खिलाफ विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी सीएए से आज़ादी की माँग कर रहे थे, तो दूसरी ओर सीएए समर्थक उन्हें आज़ादी देने के नारे लगा रहे थे। घंटो तक दोनों ओर से पत्थरबाजी होती रही।

दरअसल, रविवार सुबह को ही बड़ी संख्या में जाफराबाद मेट्रो स्टेशन क्षेत्र में एकत्र होकर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। साथ ही प्रदशर्नकारियों ने यमुना पार की चार सड़के भी बंद कर दी। दरअसल प्रदर्शनकारी महिलाएँ शाहीन बाग की तरह ही रोड़ पर मंच स्थापित करना चाहती थीं, लेकिन मौके पर तैनात भारी पुलिस फोर्स ने इसे नाकाम कर दिया और किसी तरह मौजपुर से सीलमपुर जाने वाला मार्ग को खुलवाया। दूसरा मार्ग अभी भी बंद है।

हालाँकि, अभी भी करीब 500 मीटर की दूरी पर दोनों ही प्रदर्शनकारी अपनी-अपनी माँगे लेकर नारे लगा रहे हैं। मौकेे पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।

ट्रम्प दौरे से खौफजदा कश्मीर घाटी के सिख: कारण आपको भी विचलित कर सकता है

अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रम्प की आगामी भारत यात्रा ने कश्मीर घाटी के सिखों को उन खौफनाक यादों में वापस पहुँचा दिया है, जब 19 मार्च 2000 को तब के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के भारत दौरे के दौरान हथियारबंद आतंकियों ने अल्पसंख्यक सिख समुदाय के 35 सदस्यों को दक्षिण अनंतनाग जिले के छत्तीसिंगपोरा नामक गाँव में गोली मार कर हत्या कर दी थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर के सभी सिख संगठनों के संयुक्त फोरम ‘आल पार्टीज सिख कोआर्डिनेशन कमेटी’ (एपीएससीसी) के चेयरमैन जगमोहन सिंह रैना, उस ख़ौफ़नाक मंजर को याद करते हुए कहते हैं कि घाटी के सिख समाज को हमेशा किसी हाई प्रोफाइल विदेशी व्यक्ति विशेषकर अमरीकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान इसी प्रकार भय के साये में रहना पड़ता है।

शनिवार को जारी एक स्टेटमेंट में रैना ने कहा कि जहाँ एक तरफ ऐसा लगता है कि पूरा भारत ट्रम्प की यात्रा की तैयारियों में लगा है वहीं घाटी के सिख समाज में इसे लेकर खौफ का माहौल है, उन्हें लगता है कि ट्रम्प की इस यात्रा के दौरान उनके साथ कुछ बुरा हो सकता है और वे रडार पर हैं।

वर्ष 2000 में अनंतनाग के छत्तीसिंगपोरा में आतंकियों ने 35 सिखों की गोली मार कर हत्या कर दी थी

साल 2000 में अमेरिकी राष्ट्रपति क्लिंटन की भारत यात्रा के दौरान 19-20 मार्च की रात आर्मी की ड्रेस में आए हमलावरों ने 35 सिखों को मौत के घाट उतार दिया था वहीं 36 वीं मौत इस भयंकर मंजर को देख, एक महिला को हुए कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई थी। इस भयानक हत्याकांड के पीछे आतंकियों का हाथ बताया गया था।

‘राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद पर नहीं लौटते हैं तो पार्टी को सक्रिय-पूर्णकालिक नेतृत्व तलाशने की जरूरत’

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर एक बार फिर पार्टी के नेताओं के बीच चर्चा का विषय है। पार्टी में अध्यक्ष पद को लेकर निर्णय में हो रही देरी और इसके लिए चुनाव कराए जाने की माँग लगातार जारी है। इस बीच पार्टी का हर एक नेता अपना-अपना मत रख रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने रविवार (फरवरी 23, 2020) को कहा कि अगर राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के पद पर नहीं लौटते हैं तो पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए ‘सक्रिय और पूर्णकालिक नेतृत्व’ तलाशने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी धारणा बन रही है कि कॉन्ग्रेस ‘डाँवाडोल’ हो रही है और इसलिए पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए नेतृत्व का मुद्दा हल करना होगा। इससे पार्टी और मजबूत हो जाएगी। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के चुनाव से ऊर्जावान नेतृत्व टीम बनेगी और इससे पार्टी में राष्ट्रीय हित बढ़ सकता है। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से खास बातचीत में यह बातें कही।

वहीं यह पूछे जाने पर कि अगर राहुल गाँधी अध्यक्ष के पद पर नहीं लौटते हैं तो क्या प्रियंका गाँधी को यह पद संभालना चाहिए, थरूर कहते हैं कि उनका नाम आगे करने पर किसी भी कॉन्ग्रेस नेता को कोई आपत्ति नहीं होगी।  उन्होंने कहा, “मैं खास तौर से चाहता हूँ कि जब पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव हो तो वो अपना नाम आगे रखें। प्रियंका गाँंधी के पास कुदरती करिश्मा है। लेकिन यह सब उनके ऊपर निर्भर करता है और हमें इसकी इज्जत करनी चाहिए।” 

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने रविवार को कहा कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के सेनापति हैं और अब उन्हें नेतृत्व सँभाल लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि मौजूदा समय के चुनौतीपूर्ण हालात में युवा नेताओं को आगे-आगे और वरिष्ठ नेताओं को उनके पीछे-पीछे चलना चाहिए। राहुल गाँधी के साथ काम करने में किसी भी वरिष्ठ नेता को कोई परेशानी नहीं हो सकती।

बता दें कि पिछले कुछ दिनों में राहुल गाँधी को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की माँग की जाने लगी है। लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद राहुल गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और पार्टी ने सोनिया गाँधी को अंतरिम अध्यक्ष चुना। राहुल ने नेताओं द्वारा बतौर अध्यक्ष पार्टी में लौटने की गुजारिश ठुकरा दी थी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के ‘शीर्ष नेता’ बने हुए हैं, पार्टी का एक बड़ा धड़ा हमेशा चाहता है कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए। खुर्शीद ने कहा था कि राहुल गाँधी अभी भी शीर्ष नेता बने हुए हैं। और कोई और शीर्ष नेता नहीं है। लेकिन पार्टी में ऐसे अन्य नेता हैं, जिनका अपना महत्व है, जिन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी में अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा कॉन्ग्रेस का विरोध करने वाली पार्टियाँ उन पर किसी और से ज्यादा हमला करती रहती हैं, यह दर्शाता है कि वह अभी भी शीर्ष नेता बने हुए हैं।

बेटी को आरती करते देख टीवी तोड़ने वाले अफरीदी ने भारत-पाक के खराब संबंधों के लिए मोदी को ठहराया जिम्मेदार

क्रिकेट पकिस्तान को दिए एक इंटरव्यू में क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने भारत-पाक के बिगड़ते रिश्तों के लिए, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया है। अफरीदी ने कहा है कि जब तक भारत की सत्ता में मोदी रहेंगे तब तक भारत-पाक के रिश्ते सुधरना संभव नहीं है। दरअसल मुंबई हमलों के बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज नहीं खेली जा सकी है।

पाकिस्तान के पूर्व क्रिक्रेट कप्तान शाहिद आफ़रीदी ने ‘क्रिकेट पाकिस्तान‘ से बात करते हुए कहा, “भारत और पाकिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्तों के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज़िम्मेदार हैं और जब तक भारत में मोदी की सरकार रहेगी, तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिरीज़ होना असंभव सी बात है।”

आफ़रीदी ने कहा, “मुझे लगता है कि जब तक भारत में मोदी सत्ता में हैं, पाकिस्तान को भारत से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलेगा। अब हम सब उनकी मानसिकता समझ चुके हैं। उनकी मानसिकता सिर्फ़ आपको नकारात्मकता की ओर ही ले जाएगी।”

फरिश्तों जैसा साउंड करता ये अफरीदी वही इस्लामिक सुप्रीमेसी से पीड़ित कट्टर आदमी है जो टीवी पर किसी प्रोग्राम में आरती होते देख, आरती करने वाली अपनी मासूम बेटी से खफा हो टीवी तोड़कर फेंक देता है, जो कहता है कि उसकी बेटियाँ कभी ‘ऑउटडोर खेल नहीं खेलेंगीं, क्योंकि इस्लाम में गैर मर्दों के सामने इस तरह आना हराम है। अफरीदी इसके पहले भी पाकिस्तान की महिला क्रिक्रेट टीम पर टिप्पणी करते हुए कह चुके हैं कि औरतें रोटी पकाती ही अच्छी लगतीं हैं न की क्रिक्रेट खेलते।

गीतकार हुसैन हैदरी ने हिंसा के लिए उकसाया, कहा- ‘सवर्ण हिंदुओं’ को घर-घर जाकर मारो ‘चप्पल’

बॉलीवुड गीतकार हुसैन हैदरी अक्सर वामपंथियों को खुश करने के लिए मोदी विरोधी, हिंदू विरोधी यहाँ तक कि देश विरोधी बातें करने से नहीं चूकते। हैदर ने एक बार फिर लोगों को उकसाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है। हैदरी ने इस बार मोदी सरकार के साथ हिंदू सवर्णों को अपनी घृणित सोच निशाना बनाया है। इतना ही नहीं हैदरी ने वारिस पठान की भाषा को तो अस्वीकार किया, लेकिन हिंदुओं से शांत रहने की भी अपेक्षा की है।

बॉलीवुड गीतकार हुसैन हैदरी ने ट्विटर पर हिंदुओं के ख़िलाफ जहर उगला और ट्वीट करते हुए लिखा, “सवर्ण हिंदुओं ने पूरे देश को बर्बाद किया है, पर ज्ञान बाँटने में, भाषा के शृंगार सिखाने में, शालीनता का पाठ पढ़ाने में सब एक नंबर हैं। अपनी कॉलोनियों में घर-घर जाओ और चप्पल मार-मार कर बोलो बीजेपी को वोट न करें। हिम्मत दिखाओ, भक्ति नहीं।”

बाद के एक दूसरे ट्वीट में हुसैन हैदरी ने AIMIM नेता वारिस पठान के समर्थन में लिखा, जिसने कर्नाटक के गुलबर्गा में सीएए के खिलाफ आयोजित एक रैली में हिंदुओं के ख़िलाफ ज़हर उगला था। हैदरी ने इस घटना के लिए भी हिंदुओं को ही जिम्मेदार ठहराया।

हैदरी ने ट्वीट किया “सवर्ण हिंदुओं के बार-बार वारिस पठान की आलोचना करने में शर्म आनी चाहिए, जबकि वे जिस पार्टी को सीधे-सीधे या परोक्ष रूप से सत्ता सौंपी थी। वह खुले तौर पर नरसंहार की धमकी देते थे। बाहर सड़कों पर आने और आरएसएस को उखाड़ फेंकने के बजाय, ट्विटर और फेसबुक पर बकोली करवा लो बस इनसे।”

लेखक और कवि हैदरी सरकार के ख़िलाफ आगे ज़हर उगलते हुए ट्वीट करते है कि मेरा मतलब है कि भगवान की खातिर, हिंदुओं को सिर्फ मुस्लिम नेता के भाषण की आलोचना करने से रोकना चाहिए। वह तब भड़का रहा है कि जब उनके शासन के नेता हर रोज सामूहिक हत्याकांड लिए उकसा रहे हैं।

यह बात चौंकाने वाली है कि एक तरफ हैदरी कहते हैं कि वारिस पठान ने जो कहा वह बेहद घृणित और अस्वीकार्य था। इसके बाद भी वह चाहते हैं कि हिंदू प्रतिक्रिया न दें। दरअसल कवि हैदरी यह कहना चाहते हैं कि उनका समुदाय हिंदुओं के खिलाफ जो चाहे वह कह सकता है या कर सकता है, लेकिन हिंदू समुदाय को शांति रखनी चाहिए और सिर्फ मु्स्लिमों की बकवास को सहन करना चाहिए।

चौंकाने वाली बात यह कि यह सब ट्वीट करने के बाद हैदरी का ट्विटर अकाउंट पर लॉक लगा हुआ है।

‘CAA जैसे विरोध प्रदर्शन भाजपा के खिलाफ आक्रोश, कॉन्ग्रेस को इसके बीच में नहीं पड़ना चाहिए’

हाल ही में देखा गया है कि देश में चल रही नागरिकता कानून संबंधी तमाम चर्चा से दूर कॉन्ग्रेस पार्टी एक बार फिर अपने पारम्परिक नेतृत्व के मसले पर सक्रिय हो गई है। एक ओर जहाँ सलमान खुर्शीद और शशि थरूर ने कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर बयान दिए हैं वहीं अब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश भी इस चर्चा में शामिल हो गए हैं। हालाँकि जयराम रमेश ने नागरिकता कानून को लेकर भी पार्टी को दिशा-निर्देश दिए।

देश के अलग-अलग हिस्सों में CAA-NRC-NPR के विरोध के बीच जयराम रमेश ने कहा है कि विपक्षी राजनीतिक दलों को इन विरोध प्रदर्शनों से एक हाथ की दूरी बनाए रखनी चाहिए और जन आंदोलनों को जबरन अपना बनाने की कोशिश कोशिश नहीं करनी चाहिए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जयराम रमेश ने ये बातें अपनी किताब ‘अ चेकर्ड ब्रिलियंस : द मैनी लाइव्स ऑफ वी. के. कृष्ण मेनन’ के विमोचन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेताओं को इस बारे में बहुत सतर्क रहने की जरूरत है कि वे क्या बोलते हैं और क्या करते हैं, क्योंकि भाजपा चीजों का ध्रुवीकरण करने और साम्प्रदायिकता फैलाने की हमेशा कोशिश करेगी।

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा- “हम सभी इस दिशा में काम कर रहे हैं। किसी एक के हाथ में जादू नहीं होता, यह सामूहिक प्रयास है। यह सामूहिक काम, सामूहिक अनुशासन और हर व्यक्ति के अहंकार को मिलकर खत्म करने का आह्वान होगा।”

कॉन्ग्रेस पार्टी के भविष्य के प्रश्न पर उन्होंने जवाब दिया कि अपनी व्यक्तिगत महत्वकांक्षाओं से अलग इस समय सभी कार्यकर्ताओं की केवल एक महत्वाकांक्षा होनी चाहिए, वो ये कि कॉन्ग्रेस पार्टी को फिर से खड़ा करना और उसके समर्थकों को रोक कर रखना तथा सत्ता में लौटना।

‘जन आंदोलनों से एक हाथ की दूरी बनाए रखनी चाहिए’

जयराम रमेश ने NRC-CAA-NPR के खिलाफ देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। राजनीतिक दलों को सलाह दी कि उन्हें जन आंदोलनों से एक हाथ की दूरी बनानी चाहिए।

कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “हमें इन जन आंदोलनों से एक हाथ की दूरी बनाए रखनी चाहिए। हमें इनके राजनीतिकरण या इन्हें जबरन अपना मुद्दा बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कुछ चीजें राजनीतिक दल नहीं कर सकते और नहीं करनी चाहिए। हमें इन प्रदर्शनों को खुद आगे बढ़ने देना चाहिए क्योंकि ये भाजपा सरकार के खिलाफ जन आक्रोश को दर्शाते हैं।”

2019 के आम चुनाव में मिली हार के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में हुई कॉन्ग्रेस की फजीहत से पैदा हुए आंतरिक कलह के बीच कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता एक बार फिर मैदान संभालते हुए देखे जा रहे हैं। इसी क्रम में जयराम रमेश ने कहा कि समय की माँग यही है कि पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए ‘नेताओं के अहंकार और महत्वाकांक्षाओं का एक साथ खत्म होना’ आवश्यक है।

‘अनुभव वाले नेताओं का मार्गदर्शन करना चाहिए, न कि…’

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मुहावरा देते हुए कहा कि पार्टी को सुरंग के आखिर में रोशनी देखने से पहले लंबा सफर तय करना है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी सदस्यों को सुझाव दिया कि सभी वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेताओं को एक उम्र के बाद युवा नेताओं का मार्गदर्शन करना चाहिए, न कि उनकी राह में काँटे पैदा करने चाहिए।

गोरखपुर के डॉ कफील के घर मातम: मामा को मारी गोली, मौके पर हुई मौत

नागरिकता कानून के विरोध में भड़काऊ भाषण देने के केस में मथुरा जेल में बंद डॉ कफील खान के मामा की गोरखपुर में शुक्रवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई है। डॉ. कफील खान के मामा नुसरुतुल्ला अहमद वारसी उर्फ दादा को घर के सामने ही खड़े एक युवक ने उनके घर में घुसकर गोली मार दी। डॉ कफ़ील गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में आरोपित हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नुसरुतुल्ला के घर के गेट के सामने एक युवक काफी देर से खड़ा हुआ था। उनके गेट के पास आते ही वह उनसे बातचीत करने लगा। इसके बाद बातचीत करते हुए ही वह युवक उनके साथ घर के अंदर की तरफ चला गया। जहाँ से थोड़ी देर बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी। गोली की आवाज सुनकर जब तक बड़ी बेटी शोर मचाती, हमलावर गोली मार कर भाग चुका था।

मीडिया के अनुसार हत्याकांड की खबर पाते ही गोरखपुर एसएसपी डॉ सुनील कुमार गुप्ता, एसपी सिटी डॉ कौस्तुभ, सीओ कोतवाली वीपी सिंह तीन थाने की फोर्स और फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने शव पोस्टमॉर्टम को भेजकर जाँच शुरू कर दी है। गोली आँख के नीचे, मुँह के बीच में मारी गई है। पुलिस हत्यारे और हत्या के कारणों की तलाश में जुटी है।

पुलिस ने मृतक परिवार की शिकायत पर दो नामजद लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार मृतक नुसरूतुल्ला का कई लोगों से प्रॉपर्टी और पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। ऐसे में पैसों और प्रॉपर्टी संबंधित विवाद के कारण यह हत्या हुई हो, ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं। पुलिस ने पीड़ित परिवार की रिपोर्ट पर अनिल सोनकर और इमामुद्दीन के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस की जाँच हत्या के अन्य संभावित पहलुओं को भी ध्यान में रख आगे बढ़ रही है।