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FACT CHECK: ट्रंप के आगे देश को बदनाम करने के लिए AAP समेत लिबरल गिरोह ने फैलाया झूठ, हुआ पर्दाफाश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के भारत दौरे की खबर सुनने के बाद से देश का लिबरल गिरोह हैरान-परेशान है। अपनी सारी युक्तियाँ लगाकर ये गिरोह इस समय डोनॉल्ड ट्रंप के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के साथ देश की छवि मटियामेट करना चाहता है। अभी पिछले दिनों अपनी मूढ़ता का परिचय देते हुए इस कड़ी में एक प्रयास अतुल खत्री ने किया था। मगर अब कुछ और मूर्खों की लिस्ट निकलकर सामने आई है।

दरअसल, डोनॉल्ड ट्रंप के भारत दौरे से ठीक कुछ दिन पहले एक तस्वीर को सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। तस्वीर में दिखाया जा रहा है कि जिन दीवारों पर ट्रंप के स्वागत के लिए उनके पोस्टर बने हुए हैं, वहाँ तो भारतीय लोग पेशाब करके जा रहे हैं।

इस तस्वीर को 38 हजार फॉलोवर्स वाली आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम की इंचार्ज एश्वरी वर्मा ने भी शेयर किया है। साथ ही 20 हजार फॉलोवर्स वाले फिल्म निर्देशक और पत्रकार अविनाश दास ने भी शेयर किया है।

अब हालाँकि, ये गिरोह कितना ही खुद को चालाक समझे, लेकिन जरा सी गलती के कारण इसे हर बार अपनी फजीहत करवानी पड़ती है। कुछ ऐसा ही इस बार भी हुआ। क्योंकि जिस तस्वीर को सोशल मीडिया पर डालकर ट्रंप के सामने भारत की बदनामी करने कोशिश हो रही थी, वो डॉक्टर्ड निकली। अब इस बात की पुष्टि कैसे होती है। आइए समझते हैं…

दरअसल, लिबरल गिरोह जिस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करके मजे ले रहा है। उस तस्वीर में एक व्यक्ति दीवार पर पेशाब करता दिख रहा, दीवार पर साइड में नरेंद्र मोदी और डोनॉल्ड ट्रंप की तस्वीर है और रास्ते से एक युवक अपनी बाइक लेकर जा रहा है।

अब हालाँकि, एक नजर में कोई भी इस फोटो के झूठ को कैप्शन देखकर सच मान लेगा। लेकिन उसी समय की वास्तविक तस्वीर को देखा जाए तो, पता चलेगा कि गिरोह का प्रोपगेंडा 10 मिनट से ज़्यादा नहीं चल पाता। याद ही होगा कि जामिया लाइब्रेरी के वीडियो का प्रपंच कितने मिनट में फुस्स हो गया था।

मोदी-ट्रंप के पोस्टर के रूप में भारत-अमेरीका के रिश्ते को दर्शाने के लिए तैयार की गई इस दीवार पर रिपोर्ट हुई थी। जिसमें वही तस्वीर बतौर फीचर इमेज इस्तेमाल की गई। तस्वीर में वही कड़ाके की दोपहर थी, हरे रंग की दीवार पर ट्रंप-मोदी का पोस्टर था। साथ ही वो वहीं बाइक वाला व्यक्ति भी था, जिसे डॉक्टर्ड फोटो में क्रॉप करके आधा दिखाया गया। लेकिन, इसमें वो शख्स गायब था, जो दीवार पर पेशाब कर रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि उसे तो वहाँ तकनीक का इस्तेमाल करके जोड़ा गया था।

इसके अलावा, बता दें सच्चाई का पता बिना असली फोटो को देखे भी लगाया जा सकता है, क्योंकि डॉक्टर्ड तस्वीर में पेशाब कर रहे व्यक्ति को ध्यान से देखा जाए तो मालूम चलेगा कि उसके साइड में मौजूद पेड़ की छाया, जमीन पर साफ दिख रही है, लेकिन व्यक्ति की कोई छाया नज़र नहीं आ रही।

जाहिर है, कि नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए ये तस्वीर गढ़ी गई और बिना जाँच-परख किए अपने ट्विटर से इसे शेयर करने वालों ने भी अपने हजारों की संख्या में फॉलोवर्स को झूठ परोसा। साथ ही सार्वजनिक रूप से अपनी कुंठा निकालने के लिए देश को बदनाम करने का भरपूर प्रयास हुआ।

डिटेंशन सेंटरों में लोग न सेक्स कर पाएँगे, न ही बढ़ा पाएँगे अपनी जनसंख्या: सुशांत सिंह का ‘दर्द-भरा’ विडियो

अभिनेता सुशांत सिंह ने एक विडियो जारी किया है। वही CAA और NRC के बारे में घिसी-पिटी बात करते हुए। इसके विरोध में प्रोपेगेंडा फैलाते हुए। और यह कहते हुए कि वो इसके ख़िलाफ हैं। विडियो में सुशांत सिंह ने CAA, NPR और NRC के विरोध के साथ चिंता भी जाहिर की है। उनकी चिंता बड़ी अजीब है। उनका कहना है कि इस कानून के तहत समुदाय विशेष को डिटेंशन सेंटरों में रखा जाएगा। वहाँ उनको सेक्स करने का भी अधिकार नहीं होगा, वह अपनी जनससंख्या भी नहीं बढ़ा पाएँगे। यानी कि उनको जेल के कैदियों की तरह रखा जाएगा।

सुशांत सिंह ने NRC और NPR पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए इस विडियो के माध्यम से सरकार से कई सवाल भी किए। उन्होंने कहा, “अगर एक मुस्लिम परिवार के सभी सदस्य अवैध प्रवासी पाए जाते हैं, तो क्या उन्हें एक साथ हिरासत केंद्रों में रखा जाएगा? उनको डिटेंशन सेंटरों में रखा जाएगा, क्योंकि वह मुस्लिम हैं। अब सवाल खड़ा होता है कि क्या उस परिवार को जनसंख्या बढ़ाने का अधिकार होगा? यह सवाल इसलिए उठता है कि डिटेंशन सेंटरों में स्थान सीमित हैं। ज़ाहिर है कि आप वहाँ आबादी नहीं बढ़ा सकते।”

सुशांत सिंह ने CAA, NRC और NPR के बारे में अपनी आशंकाओं को जारी रखा और आधे-अधूरे झूठ के साथ वीडियो के माध्यम से अपनी बात रखते गए। इतना ही नहीं, सुशांत ने अमित शाह और पीएम मोदी के द्वारा दिए गए बयान को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि NRC पूरे देश में लागू नहीं की जाएगी। सुशांत ने दावा किया कि NRC न केवल मुस्लिमों को बदनाम करेगा, बल्कि यह देश के हिंदुओं को भी प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि जो गैर-मुस्लिम अपनी नागरिकता साबित करने में विफल होंगे, उनके पास अभी भी CAA के माध्यम से भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करने का मौक़ा होगा, लेकिन आश्चर्य की बात यह कि यह मौक़ा मुस्लिमों के पास नहीं होगा।

सुशांत सिंह ने कहा कि जो लोग अपनी भारतीय नागरिकता को साबित नहीं कर पाएँगे, उनको भारत की नागरिकता के लिए CAA के माध्यम से आवेदन करना होगा। फिर इसके बाद उनको यह भी स्वीकार करना होगा कि वे भारतीय नहीं हैं और पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान से आए हैं।

सुशांत सिंह ने सवाल किया, “आपके इतिहास के बारे में क्या? चूँकि आपने पहले ही स्वीकार कर लिया है कि आप भारतीय नहीं हैं, तो क्या आपकी नौकरी वैध मानी जाएगी? क्या आपकी शादी को कानूनी माना जाएगा? आपके बच्चों की नागरिकता की स्थिति क्या होगी? ”

सुशांत ने NPR के खिलाफ भी बात की। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यह NRC को लागू करने की दिशा में पहला कदम है। बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “NRC और NPR पर लोगों को बहुत भ्रम की स्थिति है। सरकार ने इस बात से इनकार किया है कि NRC को लागू किया जाएगा, लेकिन गृह मंत्री ने अपनी कई रैलियों में घोषणा की थी कि इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।”

सुशांत ने आख़िर में केंद्र सरकार को निशाने पर रखकर कहा कि लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा करने से बेहतर है कि सरकार के सभी मंत्री आपस में बैठकर एक राय बना लें कि हमें लोगों के बीच क्या बोलना है। मतलब इसे लागू करना है या नहीं और लागू करना है तो इसकी एक लिस्ट जारी करें कि इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। ताकि हम उसकी तैयारी में जुट जाएँ।

मुस्लिम युवक ने मुंडन करा ली दीक्षा, बनेंगे मुख्य पुरोहित: पिता ने भी मठ के लिए दी थी 2 एकड़ जमीन

एक लिंगायत मठ ने मुस्लिम युवक के लिए अपनी परंपराओं को तोड़ने का फैसला किया है। मठ ने 33 साल के दीवान शरीफ रहमानसाब मुल्ला को मुख्य पुरोहित बनाने का फैसला किया है। शरीफ ने बीते साल नवंबर में दीक्षा ली थी। यह मठ कर्नाटक के गडग ​जिले में स्थित है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शरीफ के पिता ने कई साल पहले मठ के लिए दो एकड़ जमीन दान थी।

आसुति गॉंव स्थित मुरुगराजेंद्र कोरानेश्वरा शांतिधाम मठ के मुख्य पुजारी के तौर पर शरीफ का अभिषेक 26 फरवरी को किया जाएगा। इसको लेकर मठ में जोर-शोर से तैयारियॉं चल रही है। मठ के इस फैसले को हिंदुओं में व्याप्त धार्मिक सहिष्णुता के तौर पर देखा जा रहा है। बकौल शरीफ, वह बचपन से ही बसवन्ना के मूल्यों से प्रभावित थे। बसवन्ना 12वीं सदी के सुधारक थे। शरीफ ने कहा है कि वे उनके दिखाए सामाजिक न्याय तथा सद्भाव के मार्ग पर काम करेंगे।

उन्होंने कहा, “मैं पास के मेनासगी गॉंव में आटा चक्की चलाता था। खाली समय में बसवन्ना और 12 वीं शताब्दी के अन्य साधुओं द्वारा लिखे गए वचनों पर प्रवचन देता था।” शरीफ ने बताया स्वामीजी ने उसकी इस सेवा को पहचाना और मुझे प्रशिक्षित करने के लिए अपनी शरण में ले लिया।

आसुति गॉंव का मठ कलबुर्गी के खजुरी गॉंव के 350 साल पुराने कोरानेश्वर संस्थान मठ से जुड़ा हुआ है।
मठ चित्रदुर्ग के श्री जगद्गुरु मुरुगराजेंद्र मठ के 361 मठों में से एक है, जिसमें देश के अन्य हिस्सों के अलावा कर्नाटक और महाराष्ट्र के लाखों अनुयायी आते हैं। खजूरी मठ के पुजारी मुरुगराजेंद्र कोरानेश्वर शिवयोगी ने बताया, “10 नवंबर, 2019 को शरीफ ने दीक्षा ली थी। हमने उन्हें पिछले तीन वर्षों में लिंगायत धर्म और बासवन्ना की शिक्षाओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया है। शरीफ बचपन से ही 12 वीं सदी के सुधारक बासवन्ना की शिक्षाओं से प्रभावित थे और उम्मीद है कि वह सामाजिक न्याय और सद्भाव के साथ उनके आदर्शों की दिशा में काम करेंगे।”

उन्होंने बताया, “बसव का दर्शन सार्वभौमिक है। हम अनुयायियों को जाति और धर्म की भिन्नता के बावजूद गले लगाते हैं। उन्होंने 12 वीं शताब्दी में सामाजिक न्याय और सद्भाव का सपना देखा था और उनकी शिक्षाओं का पालन करते हुए, मठ ने सभी के लिए अपने दरवाजे खोले हैं।”

शिवयोगी ने कहा, “लिंगायत धर्म संसार (परिवार) के माध्यम से मोक्ष में विश्वास करता है। पारिवारिक व्यक्ति एक स्वामी बन सकता है और सामाजिक तथा आध्यात्मिक कार्य कर सकता है।” उन्होंने कहा, “मठ के सभी भक्तों ने शरीफ को पुजारी बनाने का समर्थन किया है। यह हमारे लिए बासवन्ना के आदर्श और कल्याण राज्य को बनाए रखने का एक बेहतर अवसर है।”

मठ के सभी प्रमुख सदस्य डायमन्ना हडली, शरणप्पा कार्कीत्ती और संतोष बालूटगी ने कहा कि यह उदाहरण गर्व करने वाला है। सदस्यों ने आगे कहा कि, हमने जाति और धर्म के आधार पर घृणा और हिंसक संघर्ष को होते हुए देखा है, लेकिन हमारे कुरानेश्वर मठ एक मुस्लिम को लिंगायत मठ के प्रमुख के रूप में नियुक्त करके एक प्रेरणादायक मार्ग पर काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं जाति और धर्म के बावजूद गाँव के सभी भक्त इस मठ के अनुयायी हैं। सभी ने मठ के इस फैसले का समर्थन किया है।

शरीफ शादीशुदा और चार बच्चों के पिता भी हैं। लिंगायत मठों में पारिवारिक व्यक्ति की पुजारी के तौर पर नियुक्ति भी असामान्य है। हालांकि, मठ ने कहा है कि शरीफ एक समर्पित अनुयायी है। वे मठाधीश भी बन सकते हैं।

सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी से जल्द छीनी जाएगी भारत की नागरिकता- सुब्रमण्यम स्वामी

देश की बड़ी और सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कॉन्ग्रेस को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी जल्द ही भारत की नागरिकता खो सकते हैं। इस बात का खुलासा बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने दिए एक भाषण में किया है।

हैदराबाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में पहुँचे बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, “फाइल गृह मंत्री अमित शाह की मेज पर है और जल्द ही वे अपनी नागरिकता खो देंग।” संविधान की बात करते हुए स्वामी ने कहा कि भारतीय नागरिक होने के दौरान दूसरे देश की नागरिकता लेने वाले लोग स्वतः ही अपनी भारतीय नागरिकता खो देंगे।

दरअसल बीजेपी सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी हैदराबाद विश्वविद्यालय में आयोजित “सीएए– एक समकालीन राजनीति से परे एक ऐतिहासिक अनिवार्यता” विषय पर छात्रों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान स्वामी ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने इंग्लैंड में व्यवसाय शुरू करने के लिए ब्रिटिश नागरिकता का विकल्प चुना था। हालाँकि, राहुल गाँधी नागरिकता के लिए नए सिरे से आवेदन कर सकते हैं, क्योंकि उनके पिता राजीव गाँधी एक भारतीय थे। लेकिन वह अपनी माँ सोनिया गाँधी की साख का इस्तेमाल करते हुए आवेदन नहीं कर सकते, क्योंकि वह भारतीय नागरिक नहीं थीं।

वहीं, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर बोलते हुए स्वामी ने कहा, “सीएए को ठीक से समझा नहीं गया है, यहाँ तक कि इसका विरोध करने वालों ने भी खुद इस अधिनियम को नहीं पढ़ा है। इस कानून से भारतीय मुस्लिमों को कोई प्रभाव नहीं पढ़ने वाला है। रही बात यह तर्क देने की कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुस्लिमों को भी नागरिकता दी जानी चाहिए, तो यह हास्यापद है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न झेल रहे अल्पसंख्यकों के बचने के लिए एकमात्र स्थान भारत है। वहीं पाकिस्तान रोहिंग्याओं को अपने देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे रहा है और यहाँ कुछ लोग चाहते हैं कि पाकिस्तानी यहाँ आएँ।

संख्या में भले कम… लेकिन हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं! सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने भारत के 8 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित करने वाली याचिका को खारिज करने के बाद इस मामले पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को आज एक छूट दी। कोर्ट ने कहा, “जिन राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं, याचिकाकर्ता उन राज्यों के उच्च न्यायालयों में अलग-अलग जाकर इस मामले पर अपनी गुहार लगा सकते हैं।”

बता दें कि बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका को दायर किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मॉइनॉरिटी कमीशन की राय माँगी थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी अपना फैसला सुनाया।

कमीशन ने भी इस मामले पर अपनी राय यही दी थी कि फिलहाल इस मामले पर गौर करना सही नहीं है। क्योंकि सरकार ने अभी ऐसी कोई पॉलिसी नहीं बनाई है, जिसमें हिंदुओं को अल्पसंख्यकों का दर्जा दिया जाए। ऐसे में अब याचिकाकर्ता कोर्ट से छूट मिलने के बाद हाइकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

गौरतलब है कि भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई इस याचिका में माँग की गई थी कि राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक दर्जे का निर्धारण न हो बल्कि राज्य में उस समुदाय की जनसंख्या को देखते हुए नियम बनाने के निर्देश दिए जाएँ।

उपाध्याय ने अल्पसंख्यकों से जुड़े इस अध्यादेश को स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास जैसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि राष्ट्रीय स्तर पर हिंदू भले बहुसंख्यक हों लेकिन आठ राज्यों में वे अल्पसंख्यक हैं, इसलिए उन्हें इसका दर्जा दिया जाना चाहिए।

वो 8 राज्य, जहाँ हिंदुओं की जनसंख्या कम है, जिसके लिए SC में डाली गई थी याचिका:

  1. लक्षद्वीप में हिंदू आबादी 2.5%
  2. मिजोरम में हिंदू आबादी 2.75%,
  3. नागालैंड में हिंदू आबादी 8.75%,
  4. मेघालय में हिंदू आबादी 11.53%,
  5. जम्मू-कश्मीर में हिंदू आबादी 28.44%,
  6. अरुणाचल प्रदेश में हिंदू आबादी 29%,
  7. मणिपुर में हिंदू आबादी 31.39%
  8. पंजाब में हिंदू आबादी 38.4%

राजस्थान में दलित के साथ हैवानियत: प्राइवेट पार्ट्स में पेट्रोल, स्क्रू डाइवर भी घुसाया – रोंगटे खड़े करने वाला Video

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में 2 दलित भाइयों के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट का मामला उजागर हुआ है। घटना रविवार की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, एक पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने 500 रुपए (कुछ ट्वीटर अकॉउंट के मुताबिक) की चोरी के आरोप में दोनों भाइयों की बुरी तरह से पिटाई की और बाद में उन्हें तड़पाने के लिए उनके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला और उसमें स्क्रू ड्राइवर भी घुसाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य की राजधानी जयपुर से 230 किलोमीटर दूर नागौर में दोनों भाई बाइक सर्विसिंग के लिए पेट्रोल पंप के पास गए थे। लेकिन वहाँ उन पर चोरी का इल्जाम लगाते हुए उनसे मारपीट शुरू कर दी गई।

इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना की दो वीडियो सोशल मीडिया पर आ गई है। वायरल हुए इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे दोनों पीड़ितों के साथ बर्बरता की जा रही है। पीड़ितों के मुताबिक उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजपाल सिंह के मुताबिक पंप के कर्मचारियों ने दो भाइयों को चोरी के आरोप में बुरी तरह से पीटा और इस घटना का वीडियो वायरल हुआ। पीड़ित भाइयों ने इस संबंध में बुधवार को शिकायत दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में पाँच लोगों को हिरासत में लिया और अब आगे मामले की जाँच चल रही है।

सोशल मीडिया पर लोग कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए पार्टी के दलित प्रेम पर सवाल उठा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि हमेशा मीडिया में इंसाफ की बातें होती हैं लेकिन यहाँ सब चुप्पी साधे बैठे हैं। अगर भाजपा शासित प्रदेश में ये घटना होती तो मीडिया में अब तक प्राइम टाइम हो चुका होता। लेकिन घटना कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में हुई है, इसलिए शांति बनाए बैठे हैं।

राजस्थान: ससुर के महिला से रेप के बाद शिकायत करने पर पति ने बेल्ट से पीटा, ननद ने गर्म सलाखों से दागा

राजस्थान पुलिस की सुस्ती की भेंट चढ़ा रेप पीड़िता का पिता, घर में घुस तलवार से काटा

रेप के मामले: मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे, दूसरे नंबर पर भी कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान

‘हिंदुओं को हिलाना है, मोदी-शाह को गिराना है’ – जिस MLA ने नहीं कही भारत माता की जय, अब दे रहा धमकी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पूर्व एमएलए वारिस पठान के भाषण की एक वीडियो सामने आई है। वीडियो गुलबर्ग रैली के दौरान दिए भाषण की है। भाषण में वारिस पठान सीएए के ख़िलाफ़ बोलते हुए वहाँ मौजूद भीड़ को मोदी-शाह के अलावा हिंदुओं के ख़िलाफ़ भड़काते दिख रहे हैं। वीडियो में वारिस को कहते सुना जा सकता है कि उनकी संख्या अभी 15 करोड़ है, लेकिन ये 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है। अगर ये 15 करोड़ साथ में आ गए, तो सोच लो उन 100 करोड़ का क्या होगा?

वारिस पठान 15 मिनट की अपनी बातचीत में ओवैसी को शेर बताते हैं और सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही महिलाओं को शेरनियाँ। उन्हें पूरी वीडियो की शुरुआत में ही भीड़ को उकसाने के लिए कहते सुना जा सकता है कि हिंदुओं को हिलाना है न, मोदी-अमित शाह के तख्त को गिराना है न? तो आवाज ऐसी बनानी है कि आवाज यहाँ से निकले और सीधे जाकर दिल्ली के अंदर गिरे।

‘अगर यहाँ के 30 करोड़ मुस्लिम आतंकी बन गए तो क्या हाल होगा, खून की नदियाँ बहेंगी’

वीडियो में वारिस पठान मोदी शाह के ख़िलाफ़ जमकर जहर उगलने के बाद ये कहते भी नजर आते हैं कि सीने पर गोली खाएँगे, मगर कागज़ नहीं दिखाएँगे। उन्हें वीडियो में ये भी कहते सुना जा सकता है कि आज जो लोग सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, वो लोग इस देश के संविधान को बचाने निकले हैं। वे लोग इस देश के लोकतंत्र को बचाने निकले हैं और वे लोग इस देश के सेकुलरिज्म को बचाने निकले हैं।

अपने भाषण में वारिस पठान इस बात को एक सिरे से खारिज करते दिखते हैं कि मदरसों से आतंकवादी नहीं निकलते बल्कि उनके मुताबिक आतंकी तो आरएसएस से आते हैं। उन्हें वीडियो में पूछते देखा जा सकता है कि आखिर महात्मा गाँधी पर गोली चलाने वाला आतंकी गोडसे किस शाखा का था? गुजरात में माँ-बहन की इज्जत लूटी, वो किस शाखा से आते थे? जामिया और शाहीन बाग में जो पिस्तौल लेकर गया, वो किसकी बात सुनकर आया और किस शाखा से आया?

अपनी बात को खत्म करते-करते वारिस पठान वहाँ मौजूद भीड़ को आजादी के मायने बताते हैं और वीडियो की शुरुआत में सेकुलरिज्म की बात करने वाले अपने भाषण के अंत तक 100 करोड़ हिंदुओं पर हावी होने की बात खुलेआम कहते हैं और मुस्लिमों से संगठित होने की गुहार लगाते हैं।

वारिस कहते हैं, “आजादी लेनी पड़ेगी..और जो चीज माँगने से नहीं मिलती उसे छीनना पड़ेगा। अब वक्त आ गया है।” वे महिलाओं के प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि अभी तो सिर्फ़ शेरनियाँ बाहर निकली हैं। अगर हम लोग बाहर आ गए तो सोचो क्या होगा, हम 15 करोड़ है लेकिन 100 करोड़ पर भारी हैं, ये बात याद रख लेना।

गौरतलब है कि जिस मंच से AIMIM के पूर्व विधायक और वकील वारिस पठान ने मोदी-शाह समेत हिंदुओं के बारे में जमकर जहर उगला, उस मंच पर उनकी पार्टी प्रमुख ओवैसी भी मौजूद थे। जो साल 2018 में सेकुलरिज्म के नाम पर समुदाय विशेष से अपील करते हैं कि मुस्लिम सिर्फ़ मुस्लिमों को ही वोट दें, तभी धर्मनिरपेक्षता मजबूत होगी और साल 2019 में मुस्लिमों को कहते हैं कि अब खुदा के लिए सेकुलरिज्म को भूल जाओ और एकजुट होने का काम करो।

पाठकों को यह जानना बहुत जरूरी है कि वारिस पठान वही नेता हैं, जिनकी 2016 में महाराष्ट्र विधानसभा से सदस्यता इसलिए खत्म कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने सदन में भारत माता की जय बोलने से इनकार कर दिया था।

‘जो मोदी-शाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा वो मर्द-ए-मुजाहिद कह लाएगा’ – ओवैसी ने CAA को जिहाद से जोड़ा

शाहीन बाग में फ्री लंगर का AIMIM कनेक्शन: AAP, कॉन्ग्रेस, PFI के बाद अब ओवैसी का भी साथ

महाकाल एक्सप्रेस में महादेव को देख ओवैसी की सुलगी, लोगों ने कहा- एकतरफा सेकुलरिज्म नहीं चलेगा

…जिसका दादा हिंदू नरसंहार का सहयोगी, छोटा भाई 15 मिनट में हिंदुओं को देख लेने की धमकी दे – वो ओवैसी ‘झूठा’

26/11 को ‘हिंदू आतंक’ से जोड़ने की थी बहुत गहरी साजिश, कोर्ट में भी साबित करना पड़ा फर्जी हिंदू ID कार्ड

मुंबई पुलिस कमिश्नर रहे राकेश मारिया की बीते दिन मुंबई हमलों पर आई एक किताब ने कई खुलासे किए। अब 26/11 मुंबई हमले संबंधी मामले में सरकारी वकील रहे उज्ज्वल निकम ने भी राकेश मारिया के कई दावों पर अपनी मुहर लगाई है। इससे साफ़ हो गया है कि आतंक के आकाओं ने मुंबई हमले के लिए हिंदू आतंक नाम गढ़ने की एक नापाक कोशिश की थी। वो तो भला हो उस पुलिस अफसर का, जिसने एकमात्र जिंदा बचे आतंकी कसाब को अपने साथी पुलिसकर्मियों के गुस्से से बचाया, उसे सबूत के तौर पर जिंदा रखा। और तभी हिंदू आतंक जैसा शब्द गढ़े जाने के बाद भी अदालती प्रक्रिया में नाकाम साबित कर दिया गया, हक़ीक़त सभी के सामने लाकर रखा गया।

26/11 मुंबई आतंकी हमला मामले में सरकारी वकील रहे उज्ज्वल निकम ने राकेश मारिया की किताब में किए गए दावों पर मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमने अदालत के सामने 10 आईडी कार्ड पेश किए थे। वे सभी फर्जी थे। इनमें एक अजमल कसाब का था, बाकी सभी मरे हुए आतंकियों के थे। यह सच है कि सभी आईडी में हिंदू नाम थे। और कसाब ने भी मुंबई की अदालत में बयान दिया था 10 आतंकियों के पास 10 फर्जी आईडी के बारे में। इस तथ्य को हमने कोर्ट में साबित भी किया।”

उन्होंने अपने बयान में आगे कहा, “कसाब ने 19/02/2008 को कोर्ट में एक बयान दिया था। उनको सैन्य प्रशिक्षण देने वाले ने उससे कहा था कि उन्हें 10 फर्जी नाम के आईडी दिए जाएँगे। कसाब ने कोर्ट में यह भी साफ किया था कि ऐसा पुलिस को गुमराह करने के लिए किया था।” वहीं उन्होंने कहा कि अजमल कसाब के पास जो पहचान पत्र मिला था, उस पर नाम की जगह समीर चौधरी हैदराबाद लिखा था। इसकी जाँच की गई थी और अदालत में कॉलेज के प्रिंसिपल की गवाही भी हुई थी।

दरअसल पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने सोमवार को जारी अपनी आत्मकथा ‘Let Me Say It Now’ में 26/11 के मुंबई आतंकी हमले से जुड़े कई रहस्यों का खुलासा किया था। किताब में उन्होंने दावा किया था कि आतंकी संगठन लश्कर की योजना 26/11 आतंकी हमले को ‘हिंदू आतंकवाद’ के रूप में पेश करने की थी। मारिया ने अपनी किताब में यह भी दावा किया था कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता, तो कसाब समीर चौधरी के रूप में मारा जाता और मीडिया की ओर से इस हमले के लिए ‘हिंदू आतंकवादियों’ को दोषी ठहराया जाता।

गौरतलब है कि 26/11/2008 को कसाब सहित 10 आतंकियों ने समुद्र के रास्ते मुंबई में प्रवेश कर ताज होटल, नरीमन हाउस, छत्रपति शिवाजी समेत कई स्थानों को अपना निशाना बनाया था। इस हमले में 166 बेगुनाह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 308 से अधिक लोग घायल हुए थे। सेना ने कार्रवाई में कसाब को छोड़कर सभी को मौके पर ही मार गिराया गया था। बाद में कसाब को दोषी पाए जाने पर उसे 21 नवंबर 2012 को पुणे जेल में फाँसी दे दी गई थी। वह पहला विदेशी था, जिसे भारत में फाँसी दी गई थी।

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

नमाज, 1.25 लाख रुपए और बहन की शादी… 26/11 हमले के पीछे ‘हिंदू आतंकी’ कसाब की कहानी

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

होली खेलता कसाब, साईंभक्त लादेन और PUBG खेलते आतंकी: लोगों ने ‘फॉल्ट न्यूज़’ के यूँ लिए मजे

डॉ शाहीन खान ने कराया मुंडन, कॉन्ग्रेस और कमलनाथ के झूठ से तंग: राहुल गाँधी को भेजे गए बाल

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के झूठे वादों से तंग आकर बुधवार (फरवरी 19, 2020) को एक महिला अतिथि प्रोफेसर ने विरोध स्वरूप अपना मुंडन करवा लिया। महिला का नाम डॉक्टर शाहीन खान है। बीते 72 दिनों से अपनी माँगों को लेकर धरने पर बैठे अतिथि विद्वानों में से एक शाहीन ने यह कदम कॉन्ग्रेस द्वारा पूर्ण रूप से नजरअंदाज किए जाने के बाद उठाया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक रूप से मुंडन करवाने के बाद शाहीन ने बेहद भावुक होते हुए कहा, “चुनाव के बाद अतिथि विद्वानों से कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि सरकार बनने पर हमारी माँगों को पूरा किया जाएगा। हमने साल भर तक इंतजार किया। उसके बाद ही हमने अपना आंदोलन शुरू किया। मगर, आंदोलन शुरू होते ही अतिथि विद्वानों को फालेन आउट नोटिस मिलने शुरू हो गए।”

शाहीन के अनुसार, वे दो महीने से ठंड में धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी कोई सुध नहीं ली। उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर उनका भविष्य बनाया लेकिन अब खुद उनका भविष्य अंधकारमय है, इसलिए अब वह प्रदर्शनस्थल से लिखित आर्डर मिलने तक नहीं उठेंगे।

इसके अलावा, अतिथि विद्वान नियमतिकरण संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवराज सिंह ने भी मीडिया से बात की। उन्होंने डॉ शाहीन खान द्वारा मुंडन कराए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दुखदाई दिन अतिथि विद्वानों के लिए नहीं हो सकता, क्योंकि एक महिला ने अपने केश त्याग दिए। डॉक्टर शाहीन ने जो बाल मुंडवाए हैं, उसे हम राहुल गाँधी के पास भेजेंगे ताकि उन्हें पता चल सके कि उनके दिए गए वचन का यहाँ पालन नहीं हो रहा है।

गौरतलब है कि साल 2018 में कमलनाथ ने भाजपा पर निशाना साधने के लिए केशों को महिलाओं का सम्मान बताया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरते हुए महिला विद्वानों द्वारा केश त्यागने की घटना को दिल झकझोर देने वाली घटना कहा था। मगर, आज जब कॉन्ग्रेस के शासनकाल में अतिथि विद्वानों के साथ ऐसा अन्याय हो रहा है, तब इसकी सुध न कमलनाथ ले रहे हैं और न ही राहुल गाँधी।

कॉन्ग्रेस और प्रदेश सीएम के इसी रवैये को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, “मुख्यमंत्री जी, आज भी केश नारी के सम्मान का प्रतीक हैं। अतिथि विद्वान बहनों ने आपकी सोती हुई सरकार को नींद से जगाने के लिए अपने केश त्यागे, क्या आज आपको उनकी पीड़ा का अंदाज़ा है? क्या आपकी नज़र में आज प्रदेश शर्मसार हुआ? क्या उनकी भलाई के लिए आप कोई कदम उठाएँगे?”

जब ‘मासूम’ मुस्लिम महिला ने आँसुओं से DCP मारिया को फाँसा और दुबई भाग गया अबू सलेम

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने हाल ही में रिलीज हुई अपनी पुस्तक ‘लेट मी से इट नाउ’ में कई बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने इसी पुस्तक में बताया है कि कैसे अजमल कसाब को हिन्दू साबित करने की पूरी तैयार थी, जिससे 26/11 मुंबई हमले को ‘भगवा आतंकवाद’ का रंग दिया जाए। इसके बाद से कॉन्ग्रेस पर कई आरोप लगने शुरू हो गए थे, क्योंकि उस समय यूपीए-2 की सरकार थी। मारिया ने अपनी क़िताब में अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर अबू सलेम के बारे में भी बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया है कि अगर वो उस समय ठीक फ़ैसला लेते तो अबू सलेम डॉन नहीं बन पाता।

या मामला तब का है, जब अवैध हथियारों को रखने के आरोप में बॉलीवुड के अभिनेता संजय दत्त से पूछताछ हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि संजय दत्त के पास हथियार आए थे और उनमें से कुछ उन्होंने ख़ुद भी रख लिया था। जाँच के दौरान बांद्रा के माउंट मैरी के पास रहने वाली जेबुनिसा काजी नामक महिला का नाम सामने आया। संजय दत्त के पास से हथियार लाकर उसके पास ही रखे गए थे। मारिया ने जेबुनिसा को भी पूछताछ के लिए बुलाया। हालाँकि, जेबुनिसा ने पुलिस स्टेशन में ही रोना शुरू कर दिया। वो अपनी तीन बेटियों का हवाला देकर ख़ुद के निर्दोष होने की बात करने लगी।

वो ख़ुद को काफ़ी मासूम दिखा रही थी। दुर्भाग्य से तब डिप्टी कमिश्नर रहे राकेश मारिया उसकी बातों में आ गए। उसे जाने दिया गया। इसके बाद उस व्यक्ति से पूछताछ की गई, जिसकी गाड़ी में हथियार लाया गया था। उसका नाम मंजूर अहमद था, जिसने पुलिस को बताया कि जेबुनिसा मासूम नहीं है। उसने ही बताया कि जेबुनिसा इस वारदात में शामिल थी और उसने अपने आँसुओं से पुलिस को चकमा दे दिया। राकेश मारिया को तब अपनी ग़लती का एहसास हुआ लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। ज़ेबुसिना को पुलिस ने दोबारा शिकंजे में लिया, लेकिन तब तक उसने अपना काम कर दिया था।

उसे पूछताछ के बाद तुरंत जाकर अबू सलेम को सारी बातें बता दी थी। अबू सलेम वहाँ से सीधा नेपाल पहुँचा और बाद में दुबई से अपना कारोबार चलाने लगा। वह वहीं से व्यापारियों और फ़िल्मी हस्तियों से वसूली करता। दोबारा पूछताछ के दौरान राकेश मारिया ने जेबुनिसा को तमाचा जड़ने का मन बनाया, लेकिन उसने तुरंत सब कुछ बक दिया। दुबई जाकर अबू सलेम ने अंडरवर्ल्ड में और गहरी पैठ जमाई, जिसके बाद मुंबई में उसकी तूती बोलने लगी। वह 2002 तक बेख़ौफ़ होकर अपराधों को अंजाम देता रहा।

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