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केरल पुलिस पर माफियाओं का कब्जा, जवाब दें CM विजयन: कैग रिपोर्ट का हवाला दे बोले चेन्निथला

कैग रिपोर्ट में केरल पुलिस से जुड़ी अनियमितताओं के सामने आने के बाद प्रदेश की विजयन सरकार पर कॉन्ग्रेस हमलावर हो गई है। विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने दो दिन पहले मुख्यमंत्री पी विजयन से कैग रिपोर्ट में केरल पुलिस से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों पर जाँच करवाने का आग्रह किया था।

चेन्निथला ने इन खबरों को शॉकिंग कहते हुए आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि केरल पुलिस पर माफिया का कब्जा है, जो बेहद खतरनाक स्थिति है। चेन्निथला ने पी विजयन से इस पर तुरंत अपना पक्ष रखने का आग्रह किया है। चेन्निथला के अनुसार, “दो दिन के बाद भी इस विषय पर सरकार और केरल के डीजीपी लोकनाथ बेहेरा जिन पर कैग रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं ने पूरी तरह चुप्पी ओढ़ ली है। मुख्यमंत्री कहते हैं कि वे इस पर असेंबली में बयान देंगे, यह स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस के अनुसार 2013-2018 की कैग रिपोर्ट केरल असेंबली के पटल पर बुधवार को रखी गई थी। इसमें बंदूकों और गोलियों के गायब होने, फंड्स के दुरुपयोग तथा डायवर्जन का आरोप लगाया गया है। कैग रिपोर्ट में केल्ट्रॉन नामक राज्य की पब्लिक सेक्टर कम्पनी और राज्य पुलिस के बीच खरीद में मिलीभगत करने के भी आरोप लगाए गए हैं।

चेन्निथला ने इस मामले में खुद को भी जाँच के घेरे में लेने की सिफारिश की। उनके अनुसार बेहेरा ने उनके अंतर्गत भी काम किया था जब वो राज्य के गृह मंत्री थे और उन्होंने पुलिस के आधुनिकीकरण में रुकावटें खड़ी करने की वजह से ही उन्हें पद से हटा दिया था।

चेन्निथला ने विजयन पर आरोप लगाते हुए कहा, “मुझे नहीं समझ आ रहा कि क्यों वो बेहेरा को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। शायद वो बेहेरा से खौफ खा रहे हैं। इस घोटाले की जिम्मेदारी उनकी भी बनती है, क्योंकि जब ये अनियमितताएँ हुई वे गृह मंत्री थे। मुख्य सचिव टॉम जोस की तरफ से आया बयान भी परेशान करने वाला है। यह सब एक गहरे षड्यंत्र की तरफ इशारा करता है, जिसकी जाँच होनी चाहिए।” चेन्निथला ने कहा कि अगले हफ्ते कॉन्ग्रेस की पॉलिटिकल मामलों की कमेटी की बैठक होने की जा रही है और तभी हम इस विषय पर अपने विरोध प्रदर्शन की रणनीति तय करेंगे।

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7 फरेबी पत्रकार: जामिया के एडिटेड विडियो से कर रहे बलजोरी, सोशल मीडिया पर लत्तम-जूत्तम

दिन- रविवार। तारीख- 16 फरवरी। केजरीवाल का शपथग्रहण। जामिया के वर्तमान और पूर्व छात्रों से बनी जामिया कोआर्डिनेशन कमिटी ने बहुत चालाकी से इस दिन को चुना। चुना इसलिए ताकि बीते साल 15 दिसंबर को जामिया कैंपस में हुई कथित हिंसा से जुड़े एक विडियो को छेड़छाड़ कर वायरल किया जा सके। बाकी काम वामपंथी मीडिया और लिबरल गिरोहों द्वारा कर ही दिया जाएगा। लेकिन ऐसा हो न सका। क्योंकि जिस विडियो को ये काट-छाँट कर वायरल करने की फिराक में थे, उसी का एक लंबा विडियो ऑपइंडिया के हाथ लग गया।

अब बात करते हैं विडियो की। इसमें कथित रूप से लाइब्रेरी के भीतर कुछ लोग पुलिस यूनिफार्म में स्टूडेंट्स को लाठियों से मारते नजर आ रहे हैं। इस एडिटेड वीडियो में कुछ 7-8 लोग, जिन्हें पुलिस का बताया जा रहा है, यूनिवर्सिटी के ओल्ड रीडिंग हॉल में प्रवेश कर स्टूडेंट्स को लाठियों से मारते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो रविवार तड़के सुबह जारी किया गया है।

मजे की बात यह है कि ट्विटर पर वीडियो जारी करने वाली यह कोआर्डिनेशन कमिटी, जिसे 15 दिसंबर को हुए एंटी CAA प्रोटेस्ट्स के नाम पर हुए दंगे के बाद बनाया गया था और जो जामिया कैंपस के साथ शाहीन बाग़ समेत कई अन्य जगहों पर भी नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में अग्रणी रही है, छात्रों द्वारा चुनी गई आधिकारिक स्टूडेंट्स बॉडी नहीं है।

इस वीडियो में स्पष्ट तौर पर नजर आ रहा है कि जिस समय पुलिस लाइब्रेरी में घुस रही है, उस समय ‘स्टूडेंट्स’ किताबें बंद किए बैठे हैं। दाईं तरफ बैठा ‘स्टूडेंट’ पुलिस के अंदर घुसते ही चेहरे को रुमाल से ढँकता नजर आ रहा है। वीडियो के टॉप लेफ्ट कॉर्नर में दीवार के साथ खड़ा दिखता ‘स्टूडेंट’ भी चेहरे पर रूमाल बांधे नजर आ रहा है।

जैसे ही जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी ने इस वीडियो को रिलीज किया, लिबरल सेक्युलर मीडिया गैंग के कथित पत्रकारों ने इसे हाथों-हाथ लेते हुए प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू कर दिया। मीडिया गैंग के अनुसार इस वीडियो में साफ़ नजर आ रहा है कि पुलिस ने ही पहले छात्रों पर बर्बरता दिखाई, जिसके बाद कैंपस में हिंसा भड़की।
एडिटेड वीडियो की मदद से हिंसा का सारा दोष मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस पर डालते लेफ्ट विंग के पत्रकार नागरिकता कानून के विरोध नाम पर मुस्लिम भीड़ को पुलिस पर किए गए हमलों से बचाते नजर आते हैं।

एक ट्विटर हैंडल @cjwerleman है। यह देश विरोधी और हिन्दू विरोधी प्रोपेगेंडा के लिए कुख्यात है। इसने भी अपने मोदी विरोधी प्रोपेगेंडा को दिशा देने के उद्देश्य से यह एडिटेड वीडियो शेयर किया। इसने अपने ट्वीट में लिखा – “दिल्ली पुलिस अधिकारियों द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों को लाइब्रेरी में पीटने का CCTV फुटेज। सरकार मुस्लिम विरोधी नागरिकता कानून के विरोध में उठने वाली हर आवाज को क्रूरता से दबा रही है।”

रेडियो जॉकी सायमा, जो कि हिन्दू विरोधी और फेक खबरों को फैलाने के लिए जानी जाती हैं, ने भी यह वीडियो फ़ौरन ट्विटर पर शेयर करते हुए मुस्लिम भीड़ के अपराधों को ढकने के लिए सारा दोष दिल्ली पुलिस के माथे थोप दिया। उन्होंने पुलिस पर व्यंग्य करते हुए लिखा है- “वो आए और उन्होंने कहा- तुम्हारे साथ, तुम्हारे लिए, हमेशा। और चले गए। 15 दिसंबर की शाम उन्होंने जामिया के छात्रों पर गुलाब बरसाए (जैसा कि आप देख सकते हैं)

इसी प्रकार की भावनाएँ कई अन्य पत्रकारों ने भी दिखाई -@AnooBhu ने लिखा- हम इसके लायक नहीं हैं, हम यह नहीं भूलेंगे।

वरदराजन उर्फ़ टुंकु (Tunku), Hoover इंस्टिट्यूट के एडिटर ने सरकार को गालियाँ देते हुए लिखा कि धार्मिक रूप से कट्टरपंथी सरकार ने छात्रों से, शिक्षा से, आधुनिकता से युद्ध छेड़ रखा है।

स्मिता शर्मा नाम की एक अन्य महिला, जो खुद को ‘स्वतंत्र’ के साथ ही ‘पत्रकार’ होने का दावा करती हैं, अपनी ख़ुशी रोक नहीं पाई और दिल्ली पुलिस के लिए अपशब्द कहने लगी। उसने कहा कि दिल्ली पुलिस पर तो धब्बा है ही, और इस कथित क्रूरता के लिए किसी भी प्रकार का स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता है। उन्होंने अपने ट्वीट में यह भी लिखा कि दिल्ली पुलिस को शर्म आनी चाहिए, पुलिस के राजनीतिक मास्टर्स तो आते-जाते रहेंगे लेकिन इस घटना ने उन पर दाग लगा दिया है।

वहीं, राणा अयूब नामक इस्लामी ट्रोल, जो पत्रकार होने की एक नकल भर है, एक कदम आगे जाकर लाइब्रेरी में नकाब लगाकर बैठे कथित छात्र को ही छुपा दिया और लिखा- “मुझे याद नहीं है कि देश के साथ मैं आखिरी बार कब इतनी निराश थी। दिल्ली पुलिस ने एक पवित्र जगह पर हेल्प-लेस छात्रों पर लाठी बरसाई। मैं अब इंडिया को नहीं पहचानती हूँ।”

इसी बीच, एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें CAA विरोधी ‘छात्र’ को पहले सड़क पर बाइक को आग लगाने के बाद लाइब्रेरी में बैठे हुए देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि जामिया यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में बैठा यही ‘छात्र’ दोनों CCTV फुटेज में देखा जा रहा है। इस कथित छात्र ने दोनों वीडियो में लाल धारियों वाली एक स्वेटर पहनी हुई है और चेहरे को छुपाने के लिए एक ही कपड़ा इस्तेमाल किया है।

CAA विरोध की आड़ में जामिया हिंसा

दरअसल, दिल्ली में जामिया के लगभग 2,000 ‘छात्र’ CAB का विरोध कर रहे थे। CAB के खिलाफ जामिया के प्रदर्शनकारियों ने कानून का विरोध व्यक्त करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर से संसद भवन तक मार्च निकाला था। हालाँकि इस दौरान वो हिंसा पर उतर आए और पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए। जैसे ही पुलिस ने छात्रों को शांत करने के लिए लाठीचार्ज करना शुरू किया, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के खिलाफ पथराव किया। छात्रों के हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और तीन पुलिसकर्मी आईसीयू में गंभीर हालत में हैं।

ज्ञात हो कि गत दिसंबर 15, 2019 को जामिया नगर और नई फ्रेंड्स कॉलोनी में हुई हिंसा में कम से कम पाँच बसें और सौ से ज्यादा निजी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया था। जामिया मिलिया विश्वविद्यालय समेत सौ से ज्यादा लोग इस हिंसा और विरोध प्रदर्शन में शामिल बताए जा रहे हैं। SIT द्वारा करीब सौ लोगों को अब तक इस सम्बन्ध में पकड़ा जा चुका है। जिनमें से कुछ पर तोड़फोड़ को लेकर केस भी दायर किए गए हैं।

पूर्व कॉन्ग्रेस नेता आसिफ मुहम्मद, जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के छात्र चंदन कुमार और स्थानीय नेता आशु खान से इस हिंसा के बारे में गत शुक्रवार को सात घंटों तक पूछताछ की गई थी।प्रदर्शनकारियों द्वारा फेंके गए पत्थरों, काँच की बोतल और ट्यूबलाइट फेंकने के चलते छात्रों व पुलिस समेत 30 लोग घायल हुए थे। अधिकारियों ने इनके मोबाइल फोन, से डाटा जो कि अब डिलीट कर दी गई जानकारी तलाशने के लिए फोरेंसिक विभाग को भेजे जा रहे हैं, कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य जानकारियाँ, जो कि जाँच के लिए जरुरी हैं आदि सीज कर लिए हैं।

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CAA और 370 पर पीछे नहीं हटेगी सरकार, हम संतों के दिखाए रास्ते पर चलेंगे: काशी में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (फरवरी 16, 2020) को वाराणसी में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान सीएए और अनुच्छेद 370 को लेकर भी बातें की। अपने संसदीय क्षेत्र में कई बड़े विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के साथ-साथ पीएम मोदी ने गंगा नदी को निर्मल करने के लिए हो रहे प्रयासों के बारे में भी लोगों को बताया। उन्होंने पूर्वांचल के विकास के लिए 1200 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया।

पीएम ने बीएचयू में एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया, जिसका शिलान्यास उन्होंने ही 2016 में किया था। 430 बेड वाला ये अस्पताल 21 महीनों में बन कर तैयार हुआ है। सीएए लाने और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले ऐतिहासिक फ़ैसलों के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन पर पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। चंदौली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 और सीएए जैसे निर्णयों के लिए देश काफ़ी समय से इंतजार कर रहा था।

पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे फ़ैसले देशहित में ज़रूरी हो गए थे। उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि केंद्र सरकार पर तमाम दबावों के बावजूद वो इन फैसलों पर कायम रहेंगे और पीछे नहीं हटेंगे। पीएम मोदी ने 1 दिन में ही काशी में एक के बाद एक तीन कार्यक्रमों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महादेव के आशीर्वाद से वो सभी फ़ैसले लिए जा रहे हैं, जो छोड़ दिए गए थे। पीएम ने कहा:

काशी विश्वनाथ धाम में ऐसे तमाम कार्य तेज़ी से पूरे किए जा रहे हैं। बहुत ही जल्दी बाबा का दिव्य प्रांगण एक आकर्षक और भव्य रूप में हम सभी के सामने आएगा। कुछ दिनों पहले श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे यहाँ आए थे। मंत्रमुग्ध राजपक्षे ने यहाँ की काफ़ी प्रशंसा की थी। काशी में पर्यटन आधारित रोजगार पर विशेष बल दिया जा रहा है। अकेले वाराणसी जनपद में पिछले 6 सालों में 25000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स या तो पूरे हो चुके हैं, या फिर उन पर काम जारी है। अयोध्या कानून के तहत जो 67 एकड़ जमीन अधिगृहित की गई थी, वो भी पूरी की पूरी, नवगठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को ट्रांसफर कर दी जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा नदी को स्वच्छ किए जाने के लिए हुए कार्यों की सफलता की चर्चा करते हुए बताया कि बीते 5-6 वर्षों में गंगाजल में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि मठों द्वारा दिखाए रास्ते पर चलते हुए, संतों द्वारा दिखाए रास्ते पर चलते हुए, हमें अपने जीवन के संकल्प पूरे करने हैं और राष्ट्र निर्माण में भी अपना पूरा सहयोग करते चलना है।

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टोपी छोड़ तिलकधारी बने बच्चों की झूठी कसम खाने वाले ‘सरजी’: मार्केट में आया नया ‘हनुमान भक्त’

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भले ही भाजपा हार गई हो, लेकिन जीतने वाली आम आदमी पार्टी अब हिंदुत्व की राजनीति पर उतर आई है। राजनीति में प्रतीकों का बड़ा महत्व होता है। हर छोटी-बड़ी चीजों को उसी स्तर से मापा जाता है- कोई बयान हो, कोई ड्रेस हो या फिर कोई नेता किसी दूसरे नेता के साथ बैठा हो। अरविंद केजरीवाल ने रविवार (फरवरी 16, 2020) को तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। लेकिन, इस बार उनका गेटअप पिछली बार से काफ़ी बदला हुआ था।

आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल दिसंबर 2013 में पहली बार सीएम के रूप में शपथ ली थी। वो सरकार 49 दिन ही चल पाई थी। पहली बार शपथ लेते हुए केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी की सफ़ेद टोपी पहन रखी थी। उनकी पार्टी ने उस चुनाव में 28 सीटें जीती थीं। केजरीवाल ने तब की रैलियों में अपने मेंटर अन्ना हजारे के नाम को भुनाया था, बावजूद इसके कि अन्ना के उनसे मतभेद सामने आने लगे थे। तब केजरीवाल कॉन्ग्रेस विरोधी लहर और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन पर सवार होकर दिल्ली की सत्ता तक पहुँचे थे। वो अलग बात है कि बच्चों की कसम खाने के बावजूद उन्होंने उसी कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन किया था।

केजरीवाल दूसरी बार प्रचंड जीत के साथ फिर से मुख्यमंत्री बने। फरवरी 2015 में जब उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तब भी उन्होंने आम आदमी पार्टी की टोपी पहन रखी थी। दोनों ही समारोहों में केजरीवाल ने तिलक नहीं लगा रखा था और AAP की सिग्नेचर टोपी पहन रखी थी। अबकी केजरीवाल के सिर से उनकी पार्टी की कैप गायब हो गई है और माथे पर लाल तिलक ने उसकी जगह ले ली है। मानो वे कहना चाह रहे हों कि चुनाव के दौरान पैदा हुई ‘हनुमान भक्ति’ अभी चलेगी।

दिल्ली में मतदान से 1 दिन पहले केजरीवाल ने कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में जाकर दर्शन किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि हनुमानजी ने उन्हें आशीर्वाद दिया है। उससे कुछ दिनों पहले वो एक न्यूज़ शो में हनुमान चालीसा पढ़ते नज़र आए थे। केजरीवाल ने शपथग्रहण के दौरान लाल तिलक लगा कर अपनी पार्टी के कैप को हटा दिया, जो बताता है कि अभी वो हिंदुत्व की राजनीति को जारी रखने वाले हैं। हालाँकि, यही केजरीवाल कभी हनुमानजी और स्वातिक के आपत्तिजनक कार्टून शेयर किया करते थे।

दिल्ली सीएम के शपथग्रहण समारोह में 1 साल का अव्यान तोमर भी दिखा, जो केजरीवाल के ‘मफलर मैन’ वाली वेशभूषा में था। उस बच्चे की एक फोटो नतीजों के दिन वायरल हुई थी। केजरीवाल के गेटअप में नन्हा अव्यान अतिथियों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

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‘तुमने मुस्लिमों को बहुत परेशान किया है, तुमको बख्शा नहीं जाएगा’: ट्रंप की यात्रा से पहले जैश का Video

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से पहले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने वीडियो जारी कर धमकी दी है। वीडियो में बदला लेने की बात कहते हुए भारत सरकार से कहा गया है कि तुमने मुस्लिमों को बहुत परेशान किया है। तुमको किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इसका परिणाम तुमको भुगतना ही होगा। ट्रंप और अमेरिकी की फर्स्ट लेडी मेलानिया 24-25 फरवरी को भारत आने वाले हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जैश के वीडियो में कहा गया है, “अगर किसी ने कत्ल किया है तो उसे माफ नहीं किया जाएगा।” इसमें कहा गया है कि जिस तरह से मुस्लिमों को परेशान कर उनकी बस्तियों को उजाड़ा गया है, उसका बदला लिया जाएगा। कुरान शरीफ का हवाला देते हुए एक व्यक्ति कहता है, “हमने शांति बहाल करने को लेकर बहुत बातें सुनी है। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। अब अनर्गल बातें करने का समय नहीं है।”

वीडियो में कहा गया है कि जिस तरह तुमने मुस्लिमों को परेशान किया और उनके घरों को जलाया है, उन सबका बदला लिया जाएगा। साथ ही कहा है कि बहुत देख लिया अमन, शांति का पैगाम देने का नाटक अब बस कुछ नहीं। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। वीडियो में लगातार बदला लेने की धमकी दी जा रही है।

इस वीडियो के बाद सुरक्षा एजेसियॉं सतर्क हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों को वीडियो से संबंधित एक अहम जानकारी मिली है। इस महीने की शुरुआत में पीओके में आतंकी समूहों की एक बैठक में पाकिस्तान सेना के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया था। इसमें चर्चा की गई कि कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को पाकिस्तानी आतंकियों के बजाय ज्यादा जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। ऐसा कर पाकिस्तान परस्त आतंकी ट्रंप के दौरे के दौरान यह संदेश देना चाहते हैं कि धारा 370 हटाने के बाद कश्मीरी नाराज हैं और वह आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं। कश्मीरियों के मन में खौफ बढ़ाने के लिए शहरी इलाकों में पुलिस, सुरक्षाबलों और आम लोगों पर गोलीबारी और ग्रेनेड हमले की साजिश भी रची जा रही है।

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वे सर जी हैं। दिल्ली के। आज ही यानी 16 फरवरी 2020 को लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। साथ में उनके छह कैबिनेट सहयोगियों ने भी शपथ ली है। लेकिन, एक बार फिर आधी आबादी की नुमाइंदगी गायब है।

इससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या आम आदमी पार्टी (आप) और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल के लिए महिलाएँ केवल वोट बैंक हैं? आप ने दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बस में महिलाओं की मुफ्त सवारी और उनकी सुरक्षा का मसला जोर-शोर से उठाया था। लेकिन, जब प्रतिनिधित्व देने का मौका आया तो उनको किनारे लगा दिया है। ऐसा लगता है कि आप की नजर में महिलाएँ न तो अपने मन से वोट देने के काबिल हैं और न सरकार चलाने के। ऐसा हम नहीं कह रहे। आठ फरवरी यानी जिस दिन विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले गए थे उस दिन के केजरीवाल के इस ट्वीट पर नजर डालिए;

इस बार के चुनाव में आप ने नौ महिलाओं को मैदान में उतारा था। इनमें से आठ जीतकर भी आई हैं। ये हैं- आतिशी मार्लेना, राखी बिड़ला, राजकुमारी ढिल्लो, प्रीति तोमर, धनवंती चंदेला, प्रमिला टोकस, भावना गौड़ और बंदना कुमारी। आप की एकमात्र महिला उम्मीदवार जो इस चुनाव में जीत नहीं पाईं वे हैं सरिता सिंह। पार्टी ने उन्हें रोहतास नगर से उम्मीदवार बनाया था। इससे पहले 2015 के चुनावों में पार्टी ने आठ महिलाओं को मौका दिया था और सभी जीत कर विधानसभा पहुॅंचने में कामयाब रही थीं।

इस बार आप की जो महिला विधायक चुनी गईं हैं उनमें से एक आतिशी को तो पार्टी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कथित सुधारों का श्रेय भी देती रही है। वे उपमुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के मुखिया रहे मनीष सिसोदिया की पिछले कार्यकाल में प्रमुख सलाहकार थीं। वैसे, नतीजों से तो लगता है कि सरकारी स्कूलों की दशा बदल देने का आप का दावा जनता के गले नहीं उतरा है। यही कारण है कि खुद सिसोदिया बड़ी मुश्किल से इस बार विधानसभा पहुॅंचे हैं। बावजूद इसके केजरीवाल ने उनको कैबिनेट में रखा है। लेकिन, कालकाजी से 52 फीसदी से ज्यादा वोट पाने वाली आतिशी को इसके काबिल नहीं समझा गया।

कालकाजी विधानसभा के परिणाम (साभार: चुनाव आयोग)

आप की पहली कैबिनेट में कुछ समय के लिए रहीं राखी बिड़ला तो मंगोलपुरी से करीब 58 फीसदी वोट पाने में कामयाब रही हैं। 30 हजार के ज्यादा के अंतर से जीती हैं। उन्हें भी मंत्री पद के काबिल नहीं समझा गया। प्रमिला टोकस, बंदना कुमारी जैसी महिलाएं दोबारा चुनकर आई हैं। लेकिन उन्हें भी मौका नहीं मिला है। इसके उलट बड़ी मुश्किल से जीते सत्येंद्र जैन और कैलाश गहलोत जैसे नेता कैबिनेट में अपनी जगह बचाने में कामयाब रहे हैं।

महिलाओं की नुमाइंदगी गायब होने के कारण विपक्षी नेताओं ने केजरीवाल पर महिला विरोधी होने के आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर भी आप की इसके लिए आलोचना हो रही है। @shivanibazaz के नाम के यूजर ने कहा, “आपने लोगों से वोट देने की अपील की, क्योंकि दिल्ली को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाना है, लेकिन महिलाओं के लिए नीतियाँ कौन बनाने जा रहा है, आपके मंत्रिमंडल में महिलाएँ कहाँ प्रतिनिधित्व कर रही हैं। एक बार सोचो…।”

एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली के इस विधानसभा चुनाव में 60% महिलाओं ने आप को अपना वोट दिया है। लेकिन, 70 में से 62 सीटें जीतने वाली पार्टी सरकार में उनकी भूमिका तय नहीं कर पाई है। वैसे, केजरीवाल को यह नहीं भूलना चाहिए कि लोकतंत्र में जनादेश केवल पॉंच साल के लिए होता है। इसलिए, उसके वादों पर यकीन कर जो महिलाएँ उसे वोट दे सकती हैं, वो सत्ता में ​अपनी हिस्सेदारी के लिए उससे सवाल भी कर सकती हैं।

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‘प्रदर्शन का विडियो FB पर क्यों डाला’ – जामिया की पूर्व छात्रा सीमा रिजवी पर हमला, बेटी को किडनैप करने की धमकी

जामिया की पूर्व छात्रा सीमा रिजवी ने जामिया नगर पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई है। सीमा ने यह शिकायत जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी (JCC) के कुछ सदस्यों के खिलाफ करवाई है। अपनी शिकायत में सीमा ने कहा कि इन लोगों ने उनके ऊपर हमला किया और साथ ही उनकी बेटी को किडनैप करने की धमकी दी। सीमा का कहना है कि उन लोगों ने यह धमकी इसलिए दी है क्योंकि उन्होंने CAA विरोधी प्रदर्शन की वीडियो फेसबुक पर डाल दी थी। अब यह वीडियो हटा ली गई है।

जानकारी के मुताबिक सीमा रिजवी ने 4 फरवरी 2020 को शिकायत दर्ज कराई थी। इसकी एक कॉपी ऑपइंडिया के पास है। इसमें सीमा ने आरोप लगाया कि जामिया में CAA विरोध प्रदर्शन में एक भीड़ ने उन्हें RSS कार्यकर्ता बताते हुए उनके ऊपर हमला किया। सीमा ने कहा, “मैं विरोध प्रदर्शन के बाद गेट नंबर 7 से निकल रही थी, जो कि जामा मस्जिद के नजदीक है, तभी कुछ लोगों ने मेरे ऊपर हमला किया। इसमें JCC के कई सदस्य शामिल थे। उन लोगों ने मुझे RSS कार्यकर्ता बताया क्योंकि मैंने इस विरोध प्रदर्शन की वीडियो अपने फेसबुक प्रोफाइल से शेयर की थी।” रिजवी ने आरोप लगाया कि उन्हें मुस्लिमों द्वारा मारपीट और प्रताड़ित करने के बाद जान से मारने की धमकी दी गई और वीडियो डिलीट करने के लिए कहा गया।

इसके साथ ही रिजवी ने आरोप लगाया कि भीड़ द्वारा उन्हें जामिया यूनिवर्सिटी के अंदर ले जाया गया और एक कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद भीड़ ने उन्हें धमकाया और मारपीट की। सीमा ने यह भी कहा कि JCC के सदस्यों की भीड़ ने विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। सीमा ने कहा, “उन्होंने मेरी 10 साल की बेटी को लेकर भी धमकियाँ दीं। लगातार मेरे बाल खींचे। किडनैप करने की धमकी दी।”

सीमा रिजवी ने जिन JCC सदस्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, उसमें सफूर जर्फर, गोहे आयशा अंसारी, सैफ-उल-इस्लाम, सलीम उमर, मोहम्मद गफ्फार खान, अबू दर्दा खान और इन्तेमाम के नाम शामिल हैं। जामिया नगर पुलिस स्टेशन ने इसके खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 354, 323, 506, 509 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि CAA के पास होने के साथ ही जामिया नगर में हिंसा भड़क गई थी, जिस के बाद दंगे पर काबू पाने के लिए पुलिस को कैंपस के अंदर जाना पड़ा था।

जामिया का कटा विडियो: रवीश ने जानबूझ कर क्यों दिखाया एडिटेड विडियो? समझिए क्रोनोलॉजी

रामलीला मैदान में ‘मोर’ नाचा, किसने देखा: सबने देखा और मजे लिए भरपूर…

दिल्ली के रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल ने रविवार 16 फरवरी 2020 को अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ शपथ ली। इस दौरान समारोह स्थल से एक वीडियो आया और आते ही चर्चा का केंद्र बन गया। यह वीडियो उदयवीर नाम के शख्स का था। उदयवीर मोर बनकर आए थे और झाड़ू से बने उनके पंख में केजरीवाल नजर आ रहे थे।

जमाना सोशल मीडिया का है, सो लोगों की नजर में चढ़ने का उदयवीर का यह तरीका तो काम कर गया। लेकिन, ट्विटर यूजर्स ने मजे भी जमकर लिए। इस बेतरतीब प्रयोग से न केवल उदयवीर खुद हॅंसी के पात्र बने बल्कि आप के चुनाव निशान झाड़ू और उसके मुखिया केजरीवाल पर चुटकी लेने का मौका भी यूजर्स को दे गए।

ट्विटर पर आई यूजरों की प्रतिक्रियाओं ने दिल्ली में फ्री योजनाओं से लेकर पार्टी के चुनाव निशान तक पर सवाल खड़े कर दिए। साथ ही लोगों को गुलामी से लेकर दिल्ली की फ्री वाली आज़ादी तक की याद दिला दी।

@TheBhopaali नाम के यूजर ने लिखा लगता है केजरीवाल जी ने टिकटॉक वालों को भी बुलाया है, उनका आना शुभा माना जाता है, नेक लेकर जाएँगे। @FaceLessOK नाम के यूजर ने लिखा, “सही प्रतिनिधित्व कर रहा है आम आदमी पार्टी का।”

@Saffron2024 नाम के यूजर ने लिखा, “नाथू मुझे दो गोली एक्स्ट्रा मार लियो, पर पहले इसका भेजा खोल।” वहीं @bokachov ने लिखा “लोग उड़ता तीर लेते हैं, इस बेचारे ने तो पूरा तरकश ले लिया अपने पिछवाड़े में !”

@DeemagSePaidal ने लिखा, “देखना कभी नीचे चुभ नहीं जाए झाड़ू, वरना पूर्ण स्वराज मिल जाएगा तुझे आज ही।” @sharmagopal99 नाम के यूजर ने लिखा, “जैसा गुरु वैसे चेले “भांड गिरी करने में गुरु चेलों में होड़ लगी रहती है कि कौन किससे ज्यादा और बढ़िया भांड गिरी कर सकता है”।

एक यूजर ने तो युवक के इंसान होने पर ही सवाल खड़े कर दिए। @kkeep_calm नाम के यूजर ने लिखा “बहुत ही विचित्र प्राणी लग रहा है ये”। एक यूजर ने तो केजरीवाल सरकार की वाई-फाई योजना को ही अपने निशाने पर ले लिया। @ntn_kansal नाम के यूजर ने लिखा, “झाडू घुसा कर मोर बन गया। अब WI FI की दिक्कत नहीं होगी इसके आसपास”।

एक यूजर ने केजरीवाल सरकार की फ्री देने वाली योजनाओं पर निशाना साधा और देश के लोगों को गुलामी लेकर आज़ादी तक की याद दिला दी। @sun_hwr नाम के यूजर ने लिखा, “ये नई तरह की दिल्ली है जहाँ बिजली मुफ़्त, पानी मुफ़्त, आना मुफ़्त, जाना मुफ़्त… बीमार हुए तो एक करोड़ का इलाज भी मुफ़्त… पूरे विश्व को सीखना चाहिए एक राज्य से ? मुफ़्तख़ोर बनाया जाता है मोर को नाचते देखकर लगा अगर मुफ़्त योजना अंग्रेज़ लाते तो ये मोर कभी आज़ाद नहीं होना चाहता।”

आख़िर में एक यूजर के बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है @akhaware नाम के यूजर ने तो कमाल ही कर दिया और सब कुछ बिना लिखे ही बोल दिया…, खैर जो भी लिखा अब आप खुद ही देख लीजिए…

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जामिया का कटा विडियो: रवीश ने जानबूझ कर क्यों दिखाया एडिटेड विडियो? समझिए क्रोनोलॉजी

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने एक सीसीटीवी फुटेज जारी किया है। इस वीडियो फुटेज के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने यूनिवर्सिटी के भीतर लाइब्रेरी में घुस कर छात्रों की पिटाई की। पुलिस पर तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। जैसा कि अपेक्षित था, मीडिया व लिबरलों के गिरोह विशेष ने इस वीडियो को वायरल करने में पूरी ताक़त लगा दी और और साथ ही दिल्ली पुलिस, गृह मंत्रालय, अमित शाह और केंद्र सरकार को लपेटने में लग गए। लेकिन, सच्चाई कुछ और ही प्रतीत हो रही है। वो हमें इसी वीडियो के लम्बे वर्जन को देखने के बाद पता चलता है।

थोड़े लम्बे वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि ये छात्र पढ़ने के लिए लाइब्रेरी में नहीं बैठे हुए थे। पुलिस ने उन्हीं उपद्रवी छात्रों की पिटाई की, जिन्हें उन्होंने चिह्नित किया। जामिया नगर में हुई हिंसा के दौरान सैकड़ों वाहन फूँक डाले गए थे और पुलिस पर पत्थरबाजी की गई थी। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस जैसे ही लाइब्रेरी में पहुँचती है, उपद्रवी छात्र किताबें खोल कर पढ़ने का नाटक करते हैं। उससे पहले वो हड़बड़ी में किताबें बंद कर के बैठे हुए थे।

ऑपइंडिया पर देखें जामिया लाइब्रेरी काण्ड का पूरा वीडियो जो छिपाया गया

आपको याद होगा कि जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रशासन और छात्रों, दोनों ने ही पुलिस को जाँच में सहयोग नहीं किया। जब पुलिस जाँच के लिए सीसीटीवी फुटेज लेने पहुँची, तब छात्रों ने हंगामा किया और पुलिस को वो फुटेज नहीं लेने दिया। आख़िर जामिया के छात्र क्या छिपाना चाहते थे? हमारे कुछ और भी सवाल हैं, जो इस वीडियो को देखने के बाद उभरते हैं:

  1. जामिया का ये वीडियो हिंसा के 60 दिनों बाद क्यों रिलीज किया गया? इतने दिन तक इन्तजार क्यों? उपद्रवी छात्रों और गिरोह विशेष के बीच क्या सेटिंग चल रही थी?
  2. वीडियो को काट-छाँट कर क्यों जारी किया गया? पूरा वीडियो आने से उपद्रवी छात्रों की पोल खुल जाती, क्या इसीलिए वीडियो को अपने हिसाब से काट कर पेश किया गया?
  3. ऊपर हम पूछ चुके हैं कि जामिया का प्रशासन और छात्र पुलिस की जाँच में सहयोग क्यों नहीं कर रहे हैं? सीसीटीवी फुटेज में ऐसा क्या था कि इसे पुलिस को नहीं दिया गया था?
  4. ये वीडियो किसने जारी किया? पुलिस ने तो नहीं किया है। फिर जामिया के छात्रों ने किया? या फिर गिरोह विशेष ने?
  5. पूरी क्रोनोलॉजी कुछ यूँ लग रही है। बसें जलाओ, पत्थरबाजी करो, अराजकता फैलाओ और फिर लाइब्रेरी में छिप कर पढ़ने का नाटक करो। पुलिस चिह्नित कर कार्रवाई करे तो सहानुभूति कार्ड खेलो। कहीं यही क्रोनोलॉजी तो नहीं है?

हालाँकि, फ़िलहाल सोशल मीडिया पर गिरोह विशेष द्वारा दिल्ली पुलिस को बदनाम करने का खेल जारी है। रवीश कुमार से लेकर बरखा दत्त तक इसी काम में लगे हुए हैं। किसी ने पूरा वाला वीडियो शेयर करने की जहमत नहीं उठाई है। आधे-अधूरे वीडियो के आधार पर अफवाहों का बाजार गर्म किया जा रहा है।

15 साल की हिंदू लड़की को अगवा कर जबरन धर्मांतरण करवाया: पाकिस्तान की सड़कों पर उतरे लोग

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले अत्याचार किसी से छिपे नहीं हैं। हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनका जबरन धर्मांतरण आम बात हो गई है। बीते दिनों 15 साल की महक को अगवा कर जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया था। इस घटना ने पाकिस्तान के लोगों को झकझोर दिया है। महक को न्याय दिलाने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

शनिवार (15 फरवरी 2020) को पाकिस्तान के कराची में हिंदू लड़की को न्याय दिलाने के लिए वकीलों के साथ सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। प्रेस क्लब के सामने जुटे लोग इंसाफ का माँग कर रहे थे। प्रदर्शनकारी ‘वी वांट जस्टिस’ और ‘महक को आज़ाद करो’ के नारे लगा रहे थे।

बीते दिनों भी सिख समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध मार्च निकाला था और सरकार से महक को आजाद कराने की माँग की थी। पुलिस और अदालत से न्याय की उम्मीद खो चुके लोग अब महक को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान में बीते कुछ महीनों में लगभग 50 अल्पसंख्यक (हिंदू और सिख) लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। ‘पाकिस्तानी हिंदूज यूथ फोरम’ और ‘सिंधी हिंदू स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान’ नाम से चल रहे फेसबुक पेज के जरिए इसकी जानकारी दी गई है। दरअसल 15 जनवरी को सिंध प्रांत के जैकोबाबाद जिले से कक्षा नौ में पढ़ने वाली 15 वर्षीय महक को अली रजा ने अगवा कर लिया था।

लड़की के अनुसार, उसे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया और फिर एक मुस्लिम से निकाह करवा दिया गया। इस मामले में पुलिस ने भी लड़की की कोई मदद नहीं की। जब यह मामला पाकिस्तान की कोर्ट में पहुँचा तो लड़की ने दबाव में आकर अदालत में कहा था कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया है। इसके बाद कोर्ट ने लड़की को आरोपित के साथ रहने का ही आदेश दे दिया था। हालांकि, जैसे ही वह अपने पिछले बयान से मुकर गई, कुछ पाकिस्तानी मौलवियों ने उसके लिए मौत की सजा की माँग की थी।

‘इस्लाम कबूल नहीं, डर कर किया था निकाह’ – नाबालिग हिन्दू लड़की के लिए कट्टरपंथियों ने माँगी मौत की सजा

मैं अली के साथ नहीं रहना चाहती, मुझे इस्लाम कबूल नहीं: 15 साल की लड़की ने कोर्ट में लगाई गुहार

15 साल की हिन्दू लड़की ने अमरोत शरीफ में क़बूल किया इस्लाम, 4 बच्चों के बाप से हुआ निक़ाह