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झारखंड की उन 15 सीटों का हाल जहाँ मोदी, राहुल और प्रियंका ने रैली की

झारखंड विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस-झामुमो गठबंधन जीत की ओर अग्रसर है। जहाँ कॉन्ग्रेस 13 सीटें जीत रही है, वहीं झामुमो 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरती दिख रही है। एक सीट पर राजद आगे है। तीनों दलों का गठबंधन खबर लिखे जाने तक 41 सीटों पर आगे था।

अब एक नजर उन सीटों पर डालते हैं जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने रैली की। राहुल गाँधी ने 2 दिसंबर को सिमडेगा में चुनावी जनसभा की। 9 दिसंबर को बड़कागाँव और राँची में उनकी रैली हुई। 12 दिसंबर को उन्होंने राजमहल और महगामा में अपनी पार्टी व गठबंधन के कैडर में जान फूँकने का काम किया। आइए, देखते हैं कि उन सीटों पर फिलहाल क्या स्थिति है;

सिमडेगा: भाजपा
बड़कागाँव: कॉन्ग्रेस
राँची: भाजपा
राजमहल: भाजपा
महगामा: झामुमो

प्रियंका गाँधी ने एकमात्र जनसभा पाकुड़ में की। वहाँ के ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो कॉन्ग्रेस के आलमगीर आलम बड़ी जीत की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन जगहों पर अपनी जनसभा की, उस पर एक नज़र दाल लेते हैं। उन्होंने 25 नवंबर को मेदिनीनगर और गुमला में रैली की। प्रधानमंत्री 2 दिसंबर को जमशेदपुर व खूँटी पहुँचे। 9 दिसंबर को बरही और बोकारो में उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं की हौसला आफजाई की। 12 दिसंबर को धनबाद और 15 दिसंबर को दुमका में पीएम की रैली हुई। प्रधानमंत्री ने 17 दिसंबर को विपक्षी गठबंधन के सीएम उम्मीदवार हेमंत सोरेन के क्षेत्र बरहेट से अपनी चुनावी कैम्पेन का समापन किया। इस सीटों की स्थिति ऐसी है;

डाल्टेनगंज: भाजपा
गुमला: झामुमो
जमशेदपुर: निर्दलीय
खूँटी: भाजपा
बरही: कॉन्ग्रेस
बोकारो: कॉन्ग्रेस
धनबाद: भाजपा
दुमका: झामुमो
बरहेट: झामुमो

जैसा कि आप देख सकते हैं, पीएम मोदी ने 9 सीटों पर रैलियाँ की, जिनमें से 3 पर भाजपा आगे चल रही है। वहीं 2 सीटों से ख़ुद पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आगे चल रहे हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास को निर्दलीय सरयू राय पटखनी देते दिख रहे हैं। भाजपा के बागी नेता सरयू राय टिकट काटे जाने से नाराज़ होकर मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ निर्दलीय मैदान में उतर आए थे। ये अंतिम नतीजे नहीं हैं। वोटो की गिनती चल रही है। कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के बीच फासला बेहद कम है।

मैं पंकज तिवारी… अल्लाह कसम मैं पत्थर नहीं चला रहा था: गोरखपुर के एक पत्थरबाज का ‘कबूलनामा’

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नाम पर हिंसक प्रदर्शनों के पीछे की मंशा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सोशल मीडिया में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें ऐसे प्रदर्शनों में शामिल लोगों को यह तक नहीं मालूम था कि आखिर वे क्यों इकट्ठा हो रहे हैं? समुदाय विशेष के लोगों को भड़काने की बातें भी सामने आई है। हिंसा का दोष हिंदुओं और भाजपा के मत्थे मढ़ने की कोशिश भी हुई है। इसी कड़ी में गोरखपुर से एक घटना सामने आई है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद यहॉं हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान पुलिस ने एक पत्थरबाज को पकड़ा। पुलिस को झॉंसा देने के लिए उसने अपना नाम पंकज तिवारी बताया। जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसके मुँह से ‘अल्लाह कसम’ निकल गया।

दैनिक जगारण की रिपोर्ट के अनुसार बवाल पर काबू पाने के बाद पुलिस पत्थरबाजों की धर-पकड़ में जुटी थी। पुलिस की एक टीम में सदर तहसीलदार भी शामिल थे। संदेह होने पर उन्होंने एक युवक को रोका। पूछने पर उसने अपना नाम पंकज तिवारी बताया। जब उससे पिता नाम पूछा गया तो थोड़ी देर सोचने के बाद उसने गौरी तिवारी बताया। हालॉंकि एक पुलिसकर्मी ने उसे पत्थर फेंकते देखा था। उसने कहा- साहब यह भी पत्थरबाजी कर रहा था। पथराव करते इसे मैंने खुद देखा है। सिपाही ने जैसे ही यह बात कही खुद को पंकज तिवारी बताने वाला युवक बोल पड़ा- अल्लाह कसम मैं पत्थर नहीं चला रहा था। इससे उसका भेद खुल गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दैनिक जागरण के गोरखपुर संस्करण में प्रकाशित खबर

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर में हिंसा भड़कने के पीछे बाहरी लोगों का हाथ होने का संदेह भी है। बताया गया है कि शुक्रवार की सुबह से ही शहर के शाहमारूफ इलाके में युवकों का कुछ समूह सक्रिय था। पहले इन्होंने दुकानें बंद कराई फिर काली पट्टी लगाकर नमाज अदा करने का फैसला किया। ये युवक एक-दूसरे के हाथ में काली पट्टी बॉंधने लगे। पुलिस ने इन पर नजर बना रखी थी। बाद में ये युवक जामा मस्जिद के पास भी लोगों को काली पट्टी बॉंधते दिखे।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार यह देख एलआइयू की टीम ने अधिकारियों को एक रिपोर्ट भेजी थी। इसमें कहा गया था कि कुछ बाहरी युवक लोगों को काली पट्टी बॉंध भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। तय किया गया कि नमाज के बाद ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। लेकिन, उससे पहले ही बवाल शुरू हो गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस की जॉंच से यह बात सामने आई है कि बाहरी तत्व पिछले कई दिनों से कुछ खास व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डालकर गोरखपुर के युवकों के संपर्क में थे। कुछ युवकों को फोन कर भी उकसाया गया था। बाहरी लोग सीएए पर दूसरे शहरों में हुए बवाल का हवाला देकर लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। जॉंच में यह बात भी सामने आई है कि पत्थरबाजी के लिए ऐसी ईंटे जमा की गई थी जिसे थोड़ी सी ऊंचाई से गिराने पर भी कई टुकड़े हो जाएँ ताकि पथराव के दौरान उनका आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।

25-30 पुलिस वालों को दुकान में बंद कर जिंदा जलाने का प्रयास: नमाज के बाद हापुड़ में उपद्रवियों का तांडव

यूपी पुलिस ने चौराहे पर टाँगी दंगाइयों की तस्वीर, कहा- बवालियों की पहचान कर फ़ौरन खबर करें

यूपी हिंसा: CAA के विरोध-प्रदर्शन में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, 62 दंगाइयों की गोली से जख़्मी

‘उद्धव के खिलाफ टिप्पणी करने पर शिवसैनिकों ने मार कर कान का पर्दा फाड़ा, जबरन कराया मुंडन’

महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ जामिया मिलिया में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही की तुलना 1919 में हुए जलियांवाला बाग से की। मुख्यमंत्री ने कहा था कि युवा छात्र बम की तरह होते हैं।

ठाकरे के इस विवादित बयान को लेकर महाराष्ट्र के वडाला के रहने वाला एक शख्स ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी। जो कि उसे काफी महँगा साबित हुआ और उसे इसका खामियाजा शिवसैनिकों के गुंडागर्दी के रूप में भुगतना पड़ा। बताया जा रहा है कि राहुल तिवारी नाम के फेसबुक प्रोफाइल से टिप्पणी की गई है, जबकि उसका असली नाम हीरामणि तिवारी है।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे के खिलाफ टिप्पणी करने पर शिवसेना सैनिकों ने उसके साथ बदसलूकी की, हाथापाई, मारपीट की और फिर जबरन उसका मुंडन करा दिया। पीड़ित व्यक्ति ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जिनलोगों ने उनके साथ मारपीट की है, वो उनको अच्छी तरह से जानते हैं। उनका कहना है कि सभी शिव सैनिकों ने मिलकर उन्हें पीटा। उन्होंने बताया कि दो शाखा प्रमुख ने मिलकर उनकी पिटाई की।

आगे हीरामणि तिवारी ने कहा, “मुझे पता चला कि शिव सैनिकों ने मुझे पीटने के लिए अलग से एक महिला टीम को भी तैयार कर रखा था। अगर मेरी तरफ से कोई महिला पलटवार करती तो वो उनसे निपटतीं। जहाँ तक मुझे जानकारी मिली है शिवसैनिकों ने ये सब कुछ प्लानिंग के साथ किया है। उन्होंने शिवसेना शाखा के पास पुलिस खड़ी कर रखी थी, जो कि घटना के 2-3 मिनट बाद ही वहाँ पहुँची।”

आगे हीरामणि तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनलोगों ने उनके अकेले होने का फायदा उठाया है। उनको सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनलोगों ने उन्हें इतनी बुरी तरह से पीटा कि उनके कान का पर्दा फट गया है। उन्होंने शिवसेना सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है, ताकि फिर किसी को इस तरह से पीटने की हिम्मत न हो।

BJP छीन लेगी आदिवासियों की ज़मीनें: पत्थलगड़ी में ‘डर’ दिखाने वाली कॉन्ग्रेस गठबंधन को बढ़त

झारखण्ड को जानने-समझने वाले लोगों ने पत्थलगड़ी का नाम ज़रूर सुना होगा। आदिवासियों के इस मूवमेंट को कुछ मिशनरियों व कट्टरवादियों का समर्थन मिला, जिससे इसे सरकार के ख़िलाफ़ लड़ाई का एक प्रतीक बना दिया गया। हालाँकि, आज स्थिति सामान्य है लेकिन फिर भी खूँटी और गुमला जैसे जिलों में चुनाव के दौरान स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण रही। एक समय यह आंदोलन लोहरदगा, राँची और सिमडेगा तक फैल गया था। नक्सलियों के उभार के बाद ये हिंसक हो गया था और मिशनरियों के साथ के कारण ग़ैर-क़ानूनी रूप से इसके तहत ‘स्वतंत्र सरकार’ स्थापित करने का प्रयास किया गया था – अर्थात, सामानांतर सरकार।

नक्सल समर्थित इस मूवमेंट वाले इलाक़ों में मुख्यमंत्री रघुबर दास के ख़िलाफ़ ख़ूब दुष्प्रचार अभियान चलाया गया। लोगों के बीच अफवाह फैलाई गई कि भाजपा आदिवासी विरोधी है, इसीलिए उसने 2014 में जीतने के बाद एक गैर-आदिवासी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। क्या नक्सलियों की ये साज़िश कामयाब रही? इसके लिए खूँटी लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 6 विधानसभा क्षेत्रों के ट्रेंड देखिए क्योंकि पत्थलगड़ी मूवमेंट का एक तरह से यही गढ़ रहा है:

खरसावाँ: (2014: झामुमो) अब- झामुमो
तमाड़: (2014:आजसू) अब- झामुमो
तोरपा: (2014: झामुमो) अब- भाजपा
खूँटी: (2014: भाजपा) अब- भाजपा
कोलेबिरा: (2018: कॉन्ग्रेस) अब- कॉन्ग्रेस
सिमडेगा: (2014: भाजपा) अब- कॉन्ग्रेस

जैसा कि आप देख सकते हैं, इस चुनाव से पहले खूँटी की 2 सीटें भाजपा व 2 सीटें कॉन्ग्रेस के पास थीं। अब 4 सीटें कॉन्ग्रेस व झामुमो के पास हैं। इससे पहले कि आपके मन में सवाल उठे, बता दें कि आदिवासियों द्वारा शिलालेख पर अपने पूवजों व बलिदानियों के नाम लिखने की परंपरा है, जो पत्थलगड़ी कहलाई। आदिवासियों के बीच डर बैठाया गया है कि सरकार उनकी ज़मीन छीन लेगी, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। खूँटी में विपक्षियों ने रघुवर दास पर उनकी रैली में चप्पल-जूते भी फेंके थे।

पत्थलगड़ी मूवमेंट को देखते हुए ही हिंसा रोकने हेतु चुनाव के दौरान इन क्षेत्रों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। चुनाव के दौरान गाँव-गाँव तक में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखी गई थी। हिंसा फैलाने वाले उपद्रवियों के ख़िलाफ़ सैंकड़ों मामले दर्ज हैं, जो चुनाव का मुद्दा भी बनी। इस संबंध में कुल 19 मामलों में 172 नामजद आरोपित हैं। भाजपा के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार का एक मुद्दा यह भी रहा। हालाँकि, भाजपा ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के जरिए इन इलाक़ों को साधने का प्रयास भी किया। पूरे आंदोलन के दौरान मुंडा ने इसके विरोध में कुछ नहीं बोला। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा खूँटी से ही सांसद हैं, ऐसे में उनके गढ़ में भाजपा के लिए स्थिति कैसी रही, यह परिणाम से पता चल जाता है।

मुख्यमंत्री रघुबर दास के ख़िलाफ़ गुस्सा क्यों था? ये इसीलिए, क्योंकि उनकी सरकार ने 2016 के अंत में एक संशोधन क़ानून पास किया था, जिसके तहत ट्राइबल क्षेत्रों की ज़मीन का भी विकास कार्यों के लिए अधिग्रहण किया जाना था। पत्थलगड़ी हिंसा के आरोपित और विकास के लिए आदिवासियों का जमीन अधिग्रहण- इन दो फैक्टरों को मिला दें और झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन का बयान देखें… तो इस क्षेत्र की राजनीति साफ हो जाएगी। शिबू सोरेन ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि उनकी सरकार बनते ही पत्थलगड़ी हिंसा के आरोपितों पर से सभी केस हटा लिए जाएँगे। और फिर खूँटी का महत्व इसीलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहाँ से चुनाव प्रचार किया था।

ममता के गढ़ में CAA के समर्थन में रैली को संबोधित करने पहुँचे BJP के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में बुलाए गए मार्च को संबोधित करने के लिए पश्चिम बंगाल के कोलकाता पहुँच गए हैं। उनका स्वागत कैलाश विजयवर्गीय ने किया जो पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं।

जानकारी के अनुसार, भाजपा की रैली का मार्ग बदलकर हिन्द सिनेमा से सीआर एवेन्यू कर दिया गया। रैली का समापन श्यामबाजार में होगा, जहाँ भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। पहले यह रैली रानी रश्मोनी रोड से शुरू होकर स्वामी विवेकानंद के आवास पर समाप्त होने वाली थी।

वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व वाम दलों द्वारा इस क़ानून के विरोध में जारी विरोध-प्रदर्शन के कारण राज्य की राजनीति गर्म होती जा रही है। इस बीच राज्य के लोगों को नागरिकता संशोधन क़ानून से अवगत कराने व इस क़ानून को लेकर फैलाए जा रहे अफ़वाहों को ख़त्म करने को प्रदेश भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने इस क़ानून के समर्थन में जुलूस निकालकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देने का निर्णय लिया।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लड़ाई लड़ रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी को CAA और NRC के खिलाफ लगाए गए सभी विज्ञापनों को हटाने का आदेश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 9 जनवरी 2020 को होगी। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने टीवी चैनलों पर नागरिकता कानून और NRC नहीं लागू करने का विज्ञापन दिया था। ममता बनर्जी खुद यह कहते हुए दिखीं कि बंगाल के लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि राज्य में NRC और नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होगा।

1 लाख की भीड़ जमा कर अमित शाह को कोलकाता में घुसने नहीं दूँगा: ममता के मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी

SIMI, ओवैसी की पार्टी से जुड़े कानपुर हिंसा के तार, ममता बनर्जी के नेता नहीं कर पाएँगे लखनऊ में प्रवेश

‘मुस्लिम टोपी’ पहन भाजपा कार्यकर्ता तोड़फोड़ कर समुदाय विशेष को बदनाम कर रहे: ममता बनर्जी


ममता बनर्जी को झटका: कलकत्ता हाईकोर्ट ने CAA-NRC संबंधी विज्ञापनों को हटाने के दिए निर्देश

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लड़ाई लड़ रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी को CAA और NRC के खिलाफ लगाए गए सभी विज्ञापनों को हटाने का आदेश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 9 जनवरी 2020 को होगी। बता दें कि ममता बनर्जी ने टीवी चैनलों पर नागरिकता कानून और NRC नहीं लागू करने का विज्ञापन दिया था। ममता बनर्जी खुद यह कहते हुए दिखीं कि बंगाल के लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि राज्य में NRC और नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होगा।

ममता बनर्जी के इस बयान के बाद अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ममता सरकार को वेबसाइटों और अन्य स्थानों से विज्ञापन हटाने का आदेश दिया। ममता ने नागरिकता संशोधन कानून को ‘विभाजनकारी’ और ‘क्रूर’ कानून बताया था।

16 दिसंबर को ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे राज्य में रैलियाँ निकाली थी। हाथों में पोस्टर, बैनर और तख्तियाँ लिए टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इन कार्यकर्ताओं की माँग CAA को रद करने की थी।

बता दें कि कुछ दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए ममता सरकार को एक जिलेवार रिपोर्ट तलब की थी जिसमें पूछा गया था वहाँ कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति है? नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में बंगाल के कई जिलों में सरकार संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया था और बड़े स्तर पर तोड़-फोड़ की गई थी। कोर्ट ने बंगाल के एटॉर्नी जनरल से CAA के खिलाफ दिए गए विज्ञापनों पर भी सवाल जवाब किया था जिसमें भारी मात्रा में सरकारी धन का इस्तेमाल हुआ।

यूपी हिंसा: CAA के विरोध-प्रदर्शन में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, 62 दंगाइयों की गोली से जख़्मी

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध-प्रदर्शनों के नाम पर देशभर में लगातार हिंसक दंगे हो रहे हैं। उपद्रवियों के हमले से कई पुलिसकर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की ख़बरें भी सामने आ रही हैं। जिस तरह से इन हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को अंजाम दिया जा रहा है उससे यह साफ़ पता चलता है कि दंगाइयों के सिर पर ख़ून सवार है, जो जान लेने पर उतारू हैं।

इस बीच, ख़बर है कि यूपी में 250 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें 62 पुलिसकर्मी दंगाइयों की गोली से घायल हुए हैं। पुलिस ने 700 से अधिक गैर-प्रतिबंधित बोर (पुलिस द्वारा इस्तेमाल नहीं की गई) बरामद की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन ज़िंदा व इस्तेमाल की गई कारतूसों की बरामदगी ‘शांतिपूर्ण ढंग से कर रहे विरोधियो’ से हुई है। ऐसे में यह सवाल एकाएक ही उठ जाता है कि दंगाइयों का अगर यह ‘शांतिपूर्ण ढंग से किया गया विरोध-प्रदर्शन है, तो फिर अशांतिपूर्ण तरीक़ा क्या होगा?

सच्चाई तो यह है कि उपद्रवियों का यह जानलेवा और हिंसक रवैया इस बात का सबूत है कि उन्हें न तो क़ानून का कोई डर है और न ही उनके अंदर कोई इंसानियत बची है, इस पर यह कह देना कि यह तो ‘शांतिपूर्ण ढंग से किया गया विरोध’ है इसका कोई अर्थ ही नहीं रह जाता है।

इन्हीं हालातों को ध्यान में रखते हुए यूपी में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए योगी सरकार सख़्ती के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाने वालों की सम्पत्ति इसकी भरपाई की जाएगी। उपद्रवियो की सम्पत्ति को नीलाम करके जो पैसे आएँगे, उससे उनके द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को पहुँचाई गई क्षति की भरपाई होगी।

इसी कड़ी में गाजियाबाद पुलिस ने शुक्रवार (20 दिसंबर) को हुए प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने वालों की तस्वीर जारी की है। इनकी तस्वीर वाले पोस्टर चौराहे पर लगाए गए और लोगों से इनकी पहचान कर जानकारी देने की अपील की गई। प्रदर्शन के दौरान ज़िले के लोनी थाना क्षेत्र में उपद्रवियों ने काफी हिंसा की थी। इनकी पहचान के लिए तस्वीरों वाले पोस्टर बीच चौराहों पर लगाए गए हैं। इनके बारे में सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।

उधर, कानपुर में CAA के ख़िलाफ़ शुक्रवार (20 दिसंबर) को जुमे की नमाज़ के बाद दंगाइयों ने क़रीब ढाई घंटे तक जमकर उत्पात मचाया। बाबूपुरवा के बेगमपुरवा, बगाही मस्जिद के पास प्रदर्शन के दौरान अराजक तत्वों ने पुलिस पर तेज़ाब से हमला कर दिया। यहाँ आगजनी, पथराव और गोलीबारी में 12 लोगों को गोली लगी।

दंगों से कुछ तस्वीरें, जो बताती हैं पुलिस वाले भी चोट खाते हैं, उनका भी ख़ून बहता है…

25-30 पुलिस वालों को दुकान में बंद कर जिंदा जलाने का प्रयास: नमाज के बाद हापुड़ में उपद्रवियों का तांडव

कानपुर में CAA पर हिंसा: दंगाइयों ने पुलिस पर तेज़ाब और पेट्रोल बम से किया हमला, 50 गिरफ़्तार-12 को लगी गोली

मुस्लिम भीड़ ने CAA के विरोध के नाम पर हनुमान मंदिर में घुस कर मूर्तियों को तोड़ा: वीडियो आया सामने

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) एवं राष्‍ट्रीय नागरिक रजिस्‍टर (NRC) के विरोध में आयोजित राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के बिहार बंद के नाम पर शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को ‘हिंदुओं के साथ खिलवाड़ किया गया।’ राज्‍य में कई जगहों भारी हिंसा हुई। सबसे बड़ी घटना पटना के फुलवारीशरीफ में हुई, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने हनुमान मंदिर में घुसकर तोड़-फोड़ की।

इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा हनुमान मंदिर को तोड़ दिया गया। इस वीडियो में उपद्रवियों की भीड़ को मंदिर में प्रवेश करते हुए और मूर्ति को तोड़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में मौजूद शख्स बोलते हुए सुना जा सकता है, “हिंदुओं के साथ खिलवाड़ किया गया है। वो लोग हमारे मंदिर में घुसकर मूर्तियों को तोड़ रहे हैं।”

बंद के दौरान चेहरे पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का मुखौटा लगाए राजद कार्यकर्ताओं ने लाठी-डंडों से ऑटोरिक्शा में तोड़फोड़ की। बताया जा रहा है कि बंद के समर्थन में निकला जुलूस टमटम पड़ाव के पास धार्मिक स्थल से गुजर रहा था। इस जुलूस में उपद्रवी और असामाजिक तत्व भी मौजूद थे। सभी टमटम पड़ाव पर पहुँचने के बाद संगतपर मोहल्ले से आगे बढ़ने पर अड़ गए।

लेकिन संगतपर निवासियों ने जुलूस का रास्ता रोक लिया था। पुलिस ने भी उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और जुलूस में शामिल उपद्रवियों ने धार्मिक स्थल में तोड-फ़ोड़ करनी शुरू कर दी और फिर आगजनी भी की। इससे विवाद ने और विकराल रूप ले लिया। दोनों गुटों के बीच जमकर पत्थरबाजी और फायरिंग हुई।

फुलवारी शरीफ क्षेत्र का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें दो समूहों के बीच हुई भीड़ हिंसा को देखा जा सकता है।

शनिवार को पटना में हुई हिंसा में 25 लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि बंद के दौरान भड़के दंगे में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हालाँकि ऑपइंडिया गोली मारकर हत्या करने के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। हिंसा में घायल हुए 2 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 11 लोगों को एम्स में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 6 को गोली लगी थी।

‘शव यात्रा पर पत्थरबाजी, अत्याचारों का विरोध करते तो जेल, लूट लेते थे सारा सामान, छोड़ना पड़ा पाकिस्तान’

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध के बीच हरियाणा के यमुनानगर में रहने वाले कुछ पाकिस्तानी हिंदुओं ने रविवार को एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रतन लाल कटारिया और विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को अपनी आपबीती सुनाई। इन लोगों ने इस कार्यक्रम में नए कानून पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि आखिर किस तरह इन लोगों ने भारत में आकर खुलकर सांस ली। क्योंकि, पाकिस्तान में तो न केवल उनपर धर्म परिवर्तन के लिए जोर दिया जाता था, बल्कि उनके द्वारा श्मशान की ओर ले जा रही शव यात्रा पर भी पथराव होता था। इतना ही नहीं, इन लोगों ने ये भी बताया कि जब ये लोग अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों का विरोध करते थे तो इन्हें जेल होती थी और इनके सामानों को लूट लिया जाता था।

हरियाणा के यमुनानगर में इस समय पाकिस्तान से आए करीब 22 हिंदू परिवार रह रहे हैं। जिनमें से 10 को नागरिकता मिल चुकी है और बाकी इंतजार में हैं। इनमें से कुछ ने केंद्रीय मंत्री रतन लाल कटारिया और विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को अपनी आप बीती सुनाई और कहा कि इन्होंने बीते हरियाणा विधानसभा चुनावों में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पार्टी को समर्थन दिया था, क्योंकि उनका कहना था कि वे पाकिस्तान से आए हिंदुओं को नागरिकता दिलाने में मदद करेंगे। लेकिन अब जब मोदी सरकार ने ये बिल पास कर दिया तो वे उसका विरोध कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने भाजपा का हाथ थाम लिया है।

पाकिस्तान और भारत के बीच फर्क़ बताते हुए नगर सुधार मंडल के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मण दास बहल (88) ने बताया कि पाकिस्तान में उन्होंने 3 बार जिला काउंसलर का चुनाव जीता और हर बार उन्हें बहुमत मिला। लेकिन फिर भी वहाँ उनकी बात नहीं मानी जाती। हिंदुओं द्वारा शव को श्मशान ले जाते समय उसपर पत्थर फेंके जाते, धर्म परिवर्तन के लिए लंबे समय तक जेल में रखा जाता, एवं तरह-तरह के अत्याचार होते। मगर, लक्ष्मण दास के अनुसार उन्होंने इतने सब के बावजूद कभी हार नहीं मानी और अपने परिवार के साथ हरियाणा के यमुनानगर पहुँचे।

बहल ने इस कार्यक्रम में बताया कि पाकिस्तान के शहर कोहाट में उनका कारोबार था। लेकिन उनका सब कुछ वहाँ लूट लिया गया। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि उन्हें अपने बच्चों को और उनकी धार्मिक पहचान को छिपाना पड़ा। साथ ही अपनी करोड़ों की संपत्ति को हजारों में बेचना पड़ा। बहल के अनुसार साल 1988 में उन्होंने भारत आकर खुली हवा में सांस ली। यहाँ लोगों ने उनका काफी साथ दिया। हमीदा में उन्हें किराए पर मकान मिला और फिर उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया। उनका कहना है कि आज पुराने दिन को याद करते हैं तो उनका मन घबरा जाता है।

इसके बाद दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार आजाद नगर में रहने वाले रणजीत बताते हैं कि उनके पिता 2 भाई हैं। जिनमें उनके चाचा दर्शन सिंह पहले ही यमुना नगर आ गए थे। लेकिन वे पाकिस्तान में फँस गए थे। इस बीच उनके घर की महिलाएँ बुर्का पहनकर घर से निकलती थीं और बिंदी भी नहीं लगाती थीं। क्योंकि अगर वहाँ के लोगों को पता चल जाता था कि वे हिंदू हैं तो उनके साथ बुरा बर्ताव होता था, जिसे सोचकर भी उनकी रूह कांपती हैं।

वहीं, इस कार्यक्रम में वैद्य जसबीर नाम के पाकिस्तानी हिंदू ने भी केंद्रीय मंत्री को आप बीती सुनाते हुए माँग उठाई कि पाकिस्तान में जब कोई हिंदू भारत आने के लिए वीजा लगाता है तो उनको क्लास वन अधिकारी का आइकार्ड साथ लगाना होता है। ये बहुत बड़ी चुनौती है, जिस कारण परेशानी का सामना करना पड़ता। इसलिए इस शर्त में भी संशोधन होना चाहिए। जिसके बाद केंद्रीय राज्यमंत्री रतन लाल कटारिया ने इस बारे में विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात करने का आश्वासन दिया। साथ ही दूसरे देशों से आए अल्पसंख्यकों के लिए कैंप लगाने की बात भी कही।

गौरतलब है कि एक ओर नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे विशेष समुदाय के लोग खुद की नागरिकता छिन जाने का डर दिखाकर मोदी सरकार को घेरने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। वहीं, दूसरी ओर वे शरणार्थी हैं, जिन्हें इस कानून के बनने से फायदा होने वाला है और वे बार-बार मोदी सरकार को आभार कहने से थक नहीं रहे।

हयातुनिसा ने दो बार ₹2-2 लाख कर्ज लिया, शौहर मुस्तफा ने सारे पैसे डुबोए, टोका तो बल्ले से पीट कर मार डाला

आंध्र प्रदेश के नरसरावपेट में तीखी बहस के बाद शौहर ने बीबी की बल्ले से मारकर हत्या कर दी। ग्रामीण पुलिस इंस्पेक्टर वाई अचैया ने बताया कि नरसरावोपेट के साई नगर इलाके में रहने वाले मुस्तफा और उसकी बीबी हयातुननिसा के बीच शनिवार (दिसंबर 21, 2019) रात को किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसी दौरान मुस्तफा ने बीवी पर हमला कर दिया जिससे उसकी मौत हो गई। दोनों का निकाह करीब 10 साल पहले हुआ था।

जानकारी के मुताबिक हयातुननिसा बर्नपेट के एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थी, जबकि मुस्तफा बेरोजगार था। पुलिस ने कहा कि हयातुननिसा ने मुस्तफा की मदद करने के लिए बार-बार प्रयास किए। यहाँ तक कि अपने पति के लिए कार खरीदने के लिए 2 लाख रुपए का ऋण भी लिया, ताकि मुस्तफा ट्रेवल बिजनेस करके कमा सके। लेकिन उसे नुकसान उठाना पड़ा, जिसके बाद उसने कार बेच दी। हयातुननिसा ने फिर से 2 लाख रुपए का ऋण लेकर मुस्तफा के लिए कपड़ों की दुकान खोल दी, मगर इस बार भी मुस्तफा की लापरवाही की वजह से नुकसान हुआ और दुकान बंद हो गया।

पुलिस ने बताया कि इस सबकी वजह से दोनों का रिश्ता तनावपूर्ण हो गया था। दोनों अक्सर लड़ते-झगड़ते रहते थे। शनिवार की रात को भी दोनों के बीच बहस छिड़ गई, जिसके बाद मुस्तफा ने गुस्से में बल्ला उठाया और हयातुननिसा की पिटाई शुरू कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। 

मुस्तफा ने रविवार (दिसंबर 22, 2019) सुबह पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मुस्तफा के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर हयातुननिसा के शव को पोस्टमार्टम के लिए नरसरावपेट सरकारी क्षेत्र अस्पताल में भेज दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले तेलंगाना में दो भाइयों ने बहस होने पर अपने जीजा सद्दाम की गला काटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद दोनों मृतक का कटा हुआ सिर लेकर नामपल्ली पुलिस थाने पहुँचकर आत्मसमर्पण कर दिया था। इरफान और घोसे ने घटना को सड़क पर भरी दोपहर में अंजाम दिया थी। आरोपितों के हाथ में मृतक का कटा हुआ सिर देखकर पुलिस भी हैरत में पड़ गई थी। इरफान और घोसे चाकू से तब तक सद्दाम पर हमला करते रहे, जब तक कि उसका सिर धड़ से अलग नहीं हो गया।