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जमानत पर रिहा होते ही हंसिए से रेता महिला का गला, हुई मौत: नहाते वक्त बना लिया था अश्लील वीडियो

छत्तीसगढ़ के कोरबा में 35 वर्षीय महिला पर एक शख्स ने 6 दिसंबर को हंसिए से हमला किया। जिसके बाद बीती रात इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। पूरा मामला एक तरफा प्यार से संबंधित है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित शख्स का नाम इंद्रपाल तोंडे हैं। जो पिछले कुछ समय से महिला का पीछा किया करता था और उसने उसका अश्लील वीडियो भी बनाया था। महिला की शिकायत पर आरोपित शख्स पहले गिरफ्तार हो चुका था। लेकिन बीते दिनों उसे जमानत मिली थी। ऐसे में 6 दिसंबर को जब महिला कोरबा में बुधवारी बजरंग चौक के पास काम पर जा रही थी, तो वह उसे रास्ते में मिल गया और काम पर जा रही महिला का दिनदहाड़े हँसिए से गला रेत दिया।

न्यूज़स्टेट की रिपोर्ट के अनुसार, कोरबा पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह मीणा ने इस संबंध में बताया कि महिला मुंगेली जिले की निवासी थी और पति से अलग होने के बाद कोरबा के बुधवारी क्षेत्र में रहकर काम करती थी। जिसे हमले के बाद शनिवार शाम को कोरबा स्थित अस्पताल से बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में स्थानांतरित किया गया था। लेकिन शनिवार और रविवार की रात को उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि आरोपित इंद्रपाल तोंडे ने कुछ समय पहले महिला से प्रेम का इजहार किया था, लेकिन महिला ने उस समय उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया। महिला के घर बदलने के बाद भी तोंडे उसका पीछा करता रहता था। वे उसे लगातार परेशान कर रहा था।

इतना ही नहीं, इसी साल अक्टूबर में आरोपित ने कथित तौर पर महिला का गुप्त तरीके से नहाते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया था। जिसके बाद महिला ने उससे वीडियो हटाने को कहा, मगर जब टोंडे ने नहीं सुनी तो महिला ने एक शिकायत दर्ज करवाई और पुलिस द्वारा उसको गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ दिन पहले वह जमानत पर छूटा, तो महिला से बदला लेने के लिए हँसिया लेकर उसे रास्ते में मिला। जहाँ उसने महिला का गला रेतकर उसे मारने की कोशिश की।

जानकारी के मुताबिक इस हमले के दौरान पास से गुजर रहे कुछ लोगों ने महिला को बचाने की कोशिश की और तोंडे को पुलिस हिरासत में देने से पहले पीटा। पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। महिला की मृत्यु के बाद अब तोंडे पर हत्या के आरोप में मामले को दर्ज किया गया है।

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दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविन्द केजरीवाल की राजनीति फिर वहीं वापिस आ गई है, जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी- ‘खुलासे’। दिल्ली में एक इमारत में कल (रविवार, 8 दिसंबर, 2019) लगी भीषण आग के बारे में सनसनीखेज़ दावा करते हुए आप ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार अनाज मंडी में लगी आग के बारे में झूठ बोल रही है।

बकौल आप, भाजपा ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (एमसीडी) में व्याप्त भ्रष्टाचार को ढँकना चाहती है। लेकिन अपने दावे के पक्ष में, केंद्र सरकार को झूठा साबित करने वाला कोई भी सबूत दिल्ली सरकार या आम आदमी पार्टी ने खबर लिखे जाने तक सामने नहीं रखा है। गौरतलब है कि दिल्ली की महानगरपालिका भाजपा के नियंत्रण में है।

अब तक 43 लोगों की जान लील चुके इस हादसे के बारे में केजरीवाल सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है, “एक स्तब्ध कर देने वाला और झूठा बयान हाउसिंग और अर्बन अफ़ेयर्स (शहरी मामलों) के मंत्रालय ने अनाज मंडी के अग्निकाण्ड के बारे में जारी किया है। एमसीडी के भ्रष्टाचार और अक्षमता को छिपाने के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने कुछ असत्य दावे किए हैं।”

दिल्ली सरकार ने कहा है कि दिल्ली अग्निशमन सेवा (दिल्ली फायर सर्विस) ने इस बात की पुष्टि की है कि फैक्ट्री को कोई फायर क्लियरेंस और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं मिला था। यह फैक्ट्री अवैध तरीके से चल रही थी। केंद्रीय मंत्रालय क्यों एक ऐसी अवैध फैक्ट्री का बचाव कर रहा है जो सभी नियमों के उल्लंघन से चल रही थी, और जिसने इतनी सारी बेगुनाह जानें ले लीं?

आगे एमसीडी को लपेटते हुए आप ने कहा कि बिल्डिंगों के प्लान की जाँच करना और यह देखना कि सारा निर्माण कार्य और इमारतों का परिचालन क़ानूनी तरीके से हो रहा है या नहीं, यह एमसीडी का काम है।

गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली के रानी झाँसी रोड पर रविवार की सुबह अनाज मंडी में भीषण आग लग गई थी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। आग इतनी भयानक थी कि आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 27 गाड़ियाँ लगानी पड़ीं।

घटना सुबह 5 बजे की है। मंडी में एक तीन-मंजिला बेकरी है जिसकी ऊपरी मंजिल पर आग लगी थी। इसके बाद आग ने पूरी इमारत को ही अपनी चपेट में ले लिया था। इलाके के काफी सँकरे होने के चलते भी आग ज्यादा फैली।

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कर्नाटक उपचुनाव पर कुमारस्वामी का बयान- हम दुःखी थे, लेकिन हमसे ज़्यादा दुःखी 3 और लोग थे

कर्नाटक में उपचुनाव हुए। 4 महीने पहले बनी येदियुरप्पा सरकार के लिए यह परीक्षा की घड़ी थी। भाजपा को 6 सीटें जितनी ही जितनी थी, वरना सरकार चली जाती। फिर सवाल भी उठते। आरोप लगता कि कॉन्ग्रेस और जेडीएस की सरकार को गिरा कर भाजपा ख़ुद भी बहुमत साबित नहीं कर पाई और ‘चाणक्य’ अमित शाह एक बार फिर से विफल रहे। वो तो अच्छा हुआ कि कॉन्ग्रेस की जीत नहीं हुई वरना सिद्दारमैया के रूप में मीडिया के पास एक नया ‘चाणक्य’ मिल जाता। ठीक वैसे ही, जैसे महाराष्ट्र में शरद पवार के रूप में एक पुराना ‘चाणक्य’ खड़ा हो गया और संजय राउत रूप में शिवसेना को भी एक शायरी-प्रेमी ‘चाणक्य’ मिला।

इन सारे चाणक्यों के चक्कर में याद दिलाना ज़रूरी है कि असली चाणक्य विष्णुगुप्त थे। कहीं ऐसा न हो कि कल को इतने चाणक्य हो जाएँ कि विष्णुगुप्त अथवा कौटिल्य के बारे में किसी को पता ही न हो। खैर, आगे बढ़ने से पहले आँकड़ों पर नज़र डालना ज़रूरी है। कर्नाटक में 15 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने 12 सीटों पर अपनी जीत लगभग सुनिश्चित कर ली है। कॉन्ग्रेस को 2 सीटें आईं और 1 सीट स्वतंत्र उम्मीदवार के पाले में गई। जहाँ तक जेडीएस की बात है, देवगौड़ा और कुमारस्वामी कब रोने आएँगे, इसका मीडिया को बेसब्री से इंतज़ार है।

पिता-पुत्र दुःखी ज़रूर होंगे। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के ‘चाणक्य’ डीके शिवकुमार भी दुःखी होंगे। लेकिन उन्हें ‘थ्री इडियट्स’ का वो डायलॉग ज़रूर याद आ रहा होगा। तभी तो दोनों सोच रहे होंगे कि वो तो दुःखी हैं ही लेकिन उनसे ज्यादा दुःखी 3 और लोग हैं। उन तीन लोगों में ठाकरे, जो सीएम बेटे को बनाना चाहते थे लेकिन अंत में ख़ुद बन गए। दूसरे हैं आदित्य ठाकरे, जो भाई-बहन-चाचा-कजन-फूफा-मौसा सबके साथ सरकारी बैठकों में शामिल होते हैं। तीसरे दुःखी व्यक्ति होंगे शरद पवार, क्योंकि बकियों के मुक़ाबले उनकी प्रतिष्ठा ज्यादा दाँव पर है।

हाँ, प्रधानमंत्री ज़रूर ख़ुश हैं। उधर संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक के लिए हंगामा मचा हुआ है, इधर पीएम झारखण्ड में चुनाव प्रचार करने निकले हुए हैं। जब शाह वहाँ मौजूद हैं तो भला टेंशन कैसे लेना? तभी तो मोदी ने झांरखंड के निवासियों को कर्नाटक उपचुनाव के परिणाम याद दिलाया और कहा कि देखो कैसे वहाँ लोगों ने कॉन्ग्रेस को करारा सबक सिखाया है। हज़ारीबाग में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जिन्होंने जनादेश के साथ धोखा किया था, उन्हें जनता ने लोकतान्त्रिक तरीके से सज़ा दे दी। इस बयान की गूँज बंगलौर तो नहीं लेकिन मुंबई में ज़रूर एक सन्देश पहुँचा रही होगी।

जनादेश के साथ धोखा- यही वो वक्तव्य था, जिसका प्रयोग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के गठबंधन के लिए किया था। पीएम मोदी के बयान के बाद मुंबई के सियासी हलकों में ये चर्चा ज़रूर चल रही होगी अब वहाँ के 3 दलों को ‘लोकतान्त्रिक सज़ा’ कब मिलेगी? मोदीजी ने कहा कि जो-जो जनता के साथ धोखा करेगा, उसे ऐसे ही पाठ पढ़ाया जाएगा। अब मुंबई के लिए शाह और मोदी का क्या सिलेबस होगा, उसमें कौन सी पुस्तकें होंगी और कौन सा पाठ पढ़ाया जाएगा, ये देखने वाली बात है। और हाँ, सिलेबस में ‘अर्थशास्त्र’ नहीं होगा क्योंकि ये असली चाणक्यों का खेल नहीं है। एक बार फिर दोहराइए- चाणक्य विष्णुगुप्त ही थे। वैसे कुमारस्वामी ने उद्धव को भेजे अपने पत्र में पहले ही लिखा था:

“प्रिय उद्धव, अंत में क्या हुआ? हम भी रेले गए, आप भी रेले जाएँगे। याद रखिए, मुख्यमंत्री तो मैं था लेकिन पावर सेंटर सिद्दारमैया था। ख़ुद के हालात देखिए। भले मुख्यमंत्री मातोश्री का हो लेकिन सत्ता तो ‘सिल्वर ओक’ से ही चलेगी न। मेरे पिता की कुछ महत्वाकांक्षाएँ थीं तो आपके बेटे की है। मेरा कार्यकाल रोते-रोते बीता और मैं 5 साल तो क्या, डेढ़ वर्ष भी पूरे नहीं कर पाया। फिर आपकी तीन पहिए वाली सरकार का संतुलन कब तक बना रहेगा, ये सोचने वाली बात है। हमने डीके शिवकुमार पर भरोसा किया था, आपने संजय राउत पर किया है।”

कॉन्ग्रेस का बयान आया है कि जनता ने दलबदलुओं पर भरोसा जताया। पार्टी की ये पुरानी आदत रही है। सोनिया-राहुल को बचाने के लिए जनता, ईवीएम और चुनाव आयोग को ढाल बना कर खड़ा किया जाता रहा है। पीएम मोदी का राँची में बयान, बंगलौर में विधानसभा के आँकड़े बदलना, मुंबई में नई सरकार की सियासी हलचल और दिल्ली में संसद में नागरिकता बिल- ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। कुमारस्वामी ने जनता को डाँटते हुए पहले ही कहा था- “मोदी के पास जाओ, उन्हें अपनी समस्याएँ सुनाओ।” जनता ने उनकी बात सुन ली है। वो मोदी के पास चली गई है।

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मेरी नहीं तो किसी और की भी नहीं होगी… जिंदा जला देंगे: CM गहलोत के सामने फूट- फूट कर रोई छात्रा

हैदराबाद, उन्नाव… और अब जोधपुर। हैवानियत का सिलसिला टूटता नहीं दिख रहा है। राजस्थान के जोधपुर में एक छात्रा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जान बचाने की गुहार लगाई है। सीएम की जनसुवाई में पहुॅंची छात्रा अपनी पीड़ा बताते हुए रो पड़ी। कहा- मुख्यमंत्री जी मुझे बचा लो…दरिंदे मुझे जिंदा जला देंगे।

मामला जोधपुर के भोपालगढ़ थाना क्षेत्र का है। पीड़िता रविवार (नवंबर 8, 2019) को जोधपुर में सीएम अशोक गहलोत की जनसुनवाई में पहुँची थी। मुख्यमंत्री को उसने बताया कि कुछ लड़के उसे करीब 2 महीने से लगातार परेशान कर रहे हैं। आरोपितों ने खुद के नंबर वाले व्हाट्सअप पर उसकी फोटो की डीपी लगा रखी है। स्टेटस में लिख रखा है, ‘मेरी नहीं तो किसी और की भी नहीं होगी।’

मुख्यमंत्री के सामने छात्रा बिलख पड़ती है और कहती है, “वे लड़के मेरे को बोलते हैं कि मेरे से बात कर। वे ब्लैकमेल करते हैं। सोशल मीडिया में मेरी फोटो लगा देते हैं। मेरे पापा उसके घरवालों को समझाने गए तो उन पर हमला कर दिया। पापा को ज्यादा चोट पहुँची तो एमजीएम हॉस्पिटल में एडमिट कराना पड़ा। मेरे को बोलते हैं कि एफआईआर करवाई तो तेरे को जिंदा जला देंगे। एफआईआर करवाए दो महीने हो गए, पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही।”

आगे लड़की कहती है कि वह कलेक्टर से लेकर एसपी, आईजी तक के पास गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लड़की का कहना है, “इससे उन लड़कों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और हम डर रहे हैं। हमारे घरवाले सब्जी लेने तक के लिए बाहर नहीं जाते हैं। हमलोग उनसे डर के मारे घर में बैठे हैं। मैं पढ़ नहीं पा रही हूँ। उनकी वजह से मेरी पीएमटी (प्री-मेडिकल टेस्‍ट) की पढ़ाई छूट गई है।”

जानकारी के मुताबिक सीएम गहलोत ने लड़की को ढाढस बँधाया और साथ ही वहाँ मौजूद पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल कुमार को बुलाकर कार्रवाई के आदेश दिए। चूँकि मामला जोधपुर ग्रामीण का था, इसलिए वहाँ के एसपी राहुल बारहट को बुलाया गया। एसपी ने बताया कि सुरपुरा खुर्द के रहने वाले कैलाश, उसके भाई भगवान और मुकेश को 6 महीने पहले गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में वे जमानत पर छूट गए।

हैदराबाद, उन्नाव, मुजफ्फरपुर जैसी वारदातों में पुलिस का लापरवाही भरा रवैया रहा है। इस मामले में भी पुलिस-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा दिख रहा है।

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1400 साल से सुन्नी कर रहे शिया पर अत्याचार, उन्हें भी CAB में करें शामिल: अमित शाह से वसीम रिजवी

नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) को लेकर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। पत्र में रिजवी ने माँग की है कि इस बिल में शिया समुदाय को भी शामिल किया जाए। रिजवी ने कहा है कि शिया लोगों पर तमाम देशों में जुल्म हो रहा है। उन्हें ज्यादती से बचाने के लिए केंद्र सरकार को कदम उठाना चाहिए।

पत्र में रिजवी ने कहा है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित सीरिया, सऊदी अरब और कीनिया जैसे देश जहाँ सुन्नी बहुमत में है और शिया अल्पसंख्यक हैं, वहाँ उनके साथ अमानवीय कृत्य किए जा रहे हैं। शिया होने की वजह से उनकी हत्याएँ की जा रही हैं।

रिजवी ने कहा है कि शिया समाज का शोषण लगभग 1400 वर्षों से लगातार मुस्लिम बहुसंख्यक सुन्नी समाज द्वारा पूरी दुनिया में किया जा रहा है। यह आज भी जारी है। उन्होंने नागरिकता संशोधन विधेयक में दूसरे मजहब के शिया वर्ग को भी शामिल करने की अपील अमित शाह से की है। रिजवी ने कहा है कि शिया समाज को जुल्म और ज्यदती से बचाने की दृष्टि से यह न्यायसंगत होगा।

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश किया। इस बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। समुदाय विशेष को इसमें शामिल नहीं किया गया है। बिल के जरिए 6दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन की बात है।

इस विधेयक के विरोध में पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉन्ग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दाल भी इसका विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि धर्म के आधार पर नागरिकता भारत के संविधान और उसकी तहजीब के खिलाफ है।

CAB के लिए रेप ऐंड मर्डर: विशाल डडलानी ने एनकाउंटर को प्याज के भाव तौला

हर सवाल का जवाब दूँगा, भागना मत: शाह ने पेश किया CAB, ओवैसी ने कहा- इस हिटलर से बचाओ

218 फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी योगी सरकार, कैबिनेट में फैसला: रेप मामलों में अब जल्द मिलेगा न्याय

महिलाओं के ख़िलाफ़ लगातार हो रही हिंसक व यौन वारदातों ने निपटने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सख्त हो उठी है। हाल ही में उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता को जला कर मार डालने वाली घटना से पूरे देश में आक्रोश माहौल है। अदालतों में लामतों पड़े हज़ारों मामलों को देखते हुए योगी कैबिनेट ने सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को हुई बैठक में अहम निर्णय लिया। योगी कैबिनेट ने फ़ैसला लिया कि महिलाओं व नाबालिगों के साथ होने वाले अपराध के मामलों में अपराधियों को शीध्र सज़ा दिलाने के लिए 218 फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएँगे।

इनमें से 144 फ़ास्ट ट्रैक अदालतें ऐसी होंगी, जहाँ सिर्फ़ बलात्कार के मामलों की सुनवाई होगी। इससे बलात्कार के मामलों का शीघ्र निपटारा होगा और पीड़ित महिलाओं को जल्द से जल्द न्याय मिल सकेगा। नाबालिगों के साथ आए दिन होने वाले अपराध से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए 74 फ़ास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएँगी। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इस सम्बन्ध में आदेश दे दिया है।

नाबालिग के साथ होने वाले अपराध के मामलों में पोस्को एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। लखनऊ के लोक भवन में हुई कैबिनेट बैठक में ये फ़ैसले लिए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव पीड़िता के परिजनों की भी सभी माँगें मान ली हैं और उन्हें हरसंभव सहायता देने का वादा किया है। महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध रोकने के लिए पुलिस को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। यूपी के क़ानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया:

“उत्तर प्रदेश में 42389 पोस्को और 25749 बलात्कार के मामले अभी लंबित पड़े हुए हैं। इसके कारण राज्य सरकार ने ये बड़ा निर्णय लिया है। नए फ़ास्ट ट्रैक अदालतों के लिए जजों की भर्ती जल्द ही शुरू की जाएगी। हर कोर्ट का खर्च 75 लाख रुपए आएगा।”

इसके अलावा योगी कैबिनेट ने कई अन्य मुद्दों पर भी बैठक में अहम निर्णय लिए। राज्य के 14 शहरों में इलेक्ट्रिक एसी बसें चलाने का फ़ैसला लिया गया। अयोध्या, गोरखपुर और फ़िरोज़ाबाद नगर निगम की सीमाओं के विस्तार पर भी मुहर लगा दी गई।

CAB के लिए रेप ऐंड मर्डर: विशाल डडलानी ने एनकाउंटर को प्याज के भाव तौला

जहाँ एक तरफ सरकार शरणार्थी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता देकर उन्हें अपना ‘घर’ देने के लिए नागरिकता संसद में संशोधन विधेयक लेकर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर दुष्प्रचार करने वालों की एक फौज तैयार हो गई है। ऐसे लोगों में न सिर्फ़ राजनेता बल्कि सेलिब्रिटी भी शामिल हैं। अरविन्द केजरीवाल के लिए चुनाव प्रचार कर चुके आम आदमी पार्टी समर्थक विशाल डडलानी ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी डाली, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगीत निर्देशक डडलानी ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर विवादस्पद और आपत्तिजनक टिप्पणी की है।

विशाल डडलानी ने प्याज के बढ़ते दाम और हैदराबाद में प्रीति रेड्डी के गैंगरेप व हत्या के आरोपितों के एनकाउंटर को एक ही चश्मे से देखते हुए कहा कि यह सब ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। फ़िलहाल सोनी चैनल पर प्रसारित होने वाले ‘इंडियन आइडल 11’ में जज की भूमिका निभा रहे विशाल डडलानी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा:

“लगातार हो रही बलात्कार की घटनाएँ हों या फिर हत्या की वारदातें, हो सकता है कि ये सभी पूर्व नियोजित हैं। एक बड़ी साज़िश के तहत ये सभी आपराधिक वारदातें एक ख़ास तरीके से तैयार की गई हो सकती हैं। बलात्कार और हत्या की वारदातें इसलिए कराई जा रही हैं ताकि नागरिकता संशोधन विधेयक की तरफ़ से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। ये विधेयक हद से ज्यादा ख़तरनाक है।’

म्यूजिक डायरेक्टर विशाल डडलानी ने बलात्कार और हत्या की वारदातों को बताया पूर्व-नियोजित

विशाल डडलानी दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुए छात्र संघ चुनाव से लेकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव तक, हर जगह आम आदमी पार्टी का प्रचार कर चुके हैं। केजरीवाल के लिए प्रचार कर चुके डडलानी को यह भी लगता है कि नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) से ध्यान हटाने के लिए बलात्कार और हत्या की वारदातें कराई जा रही हैं। ये सभी आपराधिक घटनाएँ पूर्व नियोजित हैं। इसकी साज़िश पहले ही रच ली गई थी। यह विधेयक हद से ज्यादा ख़तरनाक है।” उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अपनी आँखें खोलो और इन सभी चीजों पर सवाल खड़े करें।

उनका ये बयान अजीब है क्योंकि कुछ ही दिनों पहले तक डडलानी बलात्कारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई न करने का आरोप लगा कर मोदी सरकार पर निशाना साध रहे थे। उन्होंने कहा कि पीएम ने झूठ बोला कि उनके शासन के दौरान बलात्कारियों को महीने भर के अंदर फाँसी पर लटका दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्भया के बलात्कारी, कठुआ नाबालिग रेपकांड के दोषी और उन्नाव के आरोपित विधायक कुलदीप सेंगर सहित कई ऐसे लोग हैं, जो अभी भी ज़िंदा हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पीएम मोदी महिलाओं की पीड़ा का इस्तेमाल कर अपना प्रोपेगेंडा चला रहे हैं।

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NRC और CAB एक ही सिक्के के पहलू, बंगाल में लागू नहीं होने दूँगी: ममता बनर्जी

6 साल की बच्ची से रेप, गला दबाकर हत्या: महिला जज ने सुनाई फाँसी की सज़ा, हत्यारे को पछतावा नहीं

राजस्थान के जयपुर के दूदू की अपर सेशन कोर्ट ने क़रीब आठ साल पहले 6 साल की बच्ची से बलात्कार के बाद बेरहमी से उसकी हत्या करने के मामले के बलात्कारी महेंद्र उर्फ़ धर्मेंद्र बैरवा को फाँसी की सज़ा सुनाई है। बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की घटना फागी इलाक़े में हुई थी। कोर्ट ने दोषी को न सिर्फ़ फाँसी की सज़ा सुनाई बल्कि कई धाराओं के तहत उसके ऊपर 8.20 लाख रुपए का ज़ुर्माना भी लगाया। 

अपर सेशन की महिला जज शिल्पा समीर ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ़ रेयरेस्ट माना और फ़ैसला सुनाते हुए मासूम बच्ची की पीड़ा को कविता रूपी मार्मिक शब्दों में कुछ इस तरह बयाँ किया…

‘मैं नन्हीं सी गुड़िया थी,

मुझे जीना था,

हँसना था,

खेलना था,

फिर क्यों इतना दर्द दिया,

बिना कसूर, बिना ग़लती के,

क्यों निष्ठुरता से तोड़कर,

मुझको फेंक दिया।’

महिला जज ने इस मामले पर फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि 6 साल की बच्ची असहाय थी, उसके अंदर इतनी ताक़त नहीं थी कि वो अपने ख़िलाफ़ हो रहे अपराध का प्रतिरोध कर सके। अभियुक्त ने उस मासूम का बलात्कार कर बड़ी बेरहमी से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। यह अपराध ख़ौफ़नाक ही नहीं बल्कि समाज को पूरी तरह से प्रभावित करने वाला है। इस घटना के बारे में मात्र सोचने से ही लोग नि:शब्द हो जाते हैं, भावनाएँ ख़ामोशी का रूप ले लेती हैं। इस दर्दनाक घटना के दौरान मासूम बच्ची की पीड़ा का अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता, उसे व्यक्त करने के लिए शब्द भी कम पड़ जाएँगे।

इसके आगे महिला जज कहा कि मासूम बच्ची के सम्मान को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उसके साथ हैवानियत भरी घटना को अंजाम देने वाले अपराधी को सज़ा देकर दंडित करने का दायित्व अदालत का है। ऐसे अपराधियों को कठोर दंड देकर उनके अंदर डर पैदा किया जा सके, इसके लिए सज़ा-ए-मौत के अलावा दूसरी कोई अन्य सज़ा नहीं हो सकती।    

महिला जज शिल्पा समीर ने जब यह फ़ैसला सुनाया तो कोर्ट में मौजूद हर शख़्स मासूम की हत्या व बलात्कार की वारदात को सोचकर बेहद भावुक हो गया, लेकिन इस नृशंस वारदात को अंजाम देने वाले दरिंदे महेंद्र के चेहरे पर एक शिकन भी नहीं आई। हालाँकि, इस सज़ा को सुनने के बाद वो एक पल के लिए हैरान ज़रूर हुआ, लेकिन उसे अपने किए पर बिलकुल पछतावा नहीं था। फ़ैसला सुनाए जाने के बाद गार्ड उसे जेल ले गया।

ख़बर के अनुसार, 21 मई 2011 को आरोपी महेंद्र फागी निवासी अपने परिचित के घर आया था। जहाँ उसने देखा कि 6 वर्षीय बच्ची परिचित की बेटी अकेली है। उसने मौक़े का फ़ायदा उठाया और बच्ची को उठाकर उसके कच्चे मकान के एक कमरे में ले गया। वहाँ उसने बच्ची का बलात्कार किया और उसके बाद सूंतली (रस्सी) से बच्ची का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने बच्ची के शव को एक बक्से में डाला और परिचित के घर में बँधे एक बकरे को लेकर वहाँ से फ़रार हो गया।

काफ़ी समय तक जब बच्ची नज़र नहीं आई तो उसके परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। इसके बाद परिजनों को ख़ून से लथपथ बच्ची का शव मिला। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद 27 वर्षीय महेंद्र उर्फ़ धर्मेंद्र बैरवा को गिरफ़्तार कर लिया।

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शाह का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 पेश कर दिया है। लोकसभा में तो सरकार के पास नंबर है लेकिन दिक्कत राज्यसभा में हो सकती है। वहाँ भी विधेयक पास हो जाए, इसके लिए तैयारी करनी होती है। फ्लोर मैनेजमेंट उसी को कहते हैं। आइए कुछ आँकड़ो से समझते हैं इस विधेयक के पास होने के गुणा-गणित को।

कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा समर्थित UPA के नेतृत्व वाले विपक्ष के पास सदन की कुल संख्या 245 में से 100 से कम लग रही है। कॉन्ग्रेस के पास 46 सांसद हैं, लेकिन मोतीलाल वोहरा स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते अनुपस्थित हैं।

उच्च सदन में ममता बनर्जी की तृणमूल में 13 सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी के 9 हैं, डीएमके के पास 5, RJD और बसपा दोनों के पास 4-4 सांसद हैं, और अन्य छोटे दलों को मिलाकर यह संख्या 100 तक पहुँचती है।

जबकि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA और उनकी संख्या पर नज़र डालें तो इनके अपने 83 सांसद हैं, जिसमें नव-निर्वाचित सांसद अरुण सिंह और केसी राममूर्ति भी शामिल हैं।

शिरोमणि अकाली के पास 3 सांसद हैं और दूसरी सहयोगी पार्टी AIADMK के पास 11 सदस्यों ने वोट देकर अपना समर्थन दिया। जदयू के नीतीश कुमार ने भी बिल का समर्थन करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा नॉमिनेटिड सांसदों को सम्मिलित करके अन्य 12 सदस्यों, स्वतंत्र  एवं लघु पार्टियों और नॉर्थ ईस्ट के सहयोगी दलों को ही केवल गणना में जोड़ा गया है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में भाजपा और शिवसेना के बीच राजनैतिक घमासान हुआ, जिसकी वजह से उनका गठबंधन टूट गया। इसके बावजूद उद्धव ठाकरे की पार्टी ने इस विधेयक का समर्थन किया। जबकि निष्पक्ष पार्टियों का अब भी केंद्र सरकार के समर्थन में आना बाकी है।

इसके अलावा, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल ने भी 7 मतों से अपना समर्थन दिया। हालाँकि पार्टी ने इसमें कुछ काट-छाँट की माँग करते हुए संशोधनों को प्रस्ताव रखा।

TRS के 6 सासंदों ने और YS जगन की YSRCP ने 2 वोटों से अपना समर्थन दिया। वहीं, भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी तेलगु देशम पार्टी भी 2 वोटों से अपना समर्थन देगी।

बता दें कि अनिल बलूनी को मिलाकर भाजपा के कम से कम 2 सांसद मेडिकल लीव पर हैं और दो स्वतंत्र दावेदारों का समर्थन भी नदारद है। और इस तरह NDA के पास सांसदो की संख्या 120 यानी आधे से ऊपर 132 तक पहुँचती नज़र आ रही है।

शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही अमित शाह की क़रीबी टीम सहित फ्लोर मैनेजर अपने काम में लगे हुए हैं। इसी तरह की क़वायद, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के प्रस्ताव पर हुई थी।

रेल मंत्री पीयूष गोयल अपने मंत्रिमंडल के सहयोगी धर्मेंद्र प्रधान के रूप में AIADMK को अपने पक्ष में लाने में रहे, उन्होंने बीजेडी को भी लूप में रखा।

पार्टी के महासचिव भूपेंद्र यादव JDU से बात कर रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी TRS, YSR और TDP समेत छोटे दलों से बात कर रहे हैं।

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि ये बिल 0.001% भी अल्पसंख्यकों के विरुद्ध नहीं है। कॉन्ग्रेस संसदीय दाल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया था कि अल्पसंख्यकों को डराने के लिए मोदी सरकार ये विधेयक लेकर आ रही है। अमित शाह ने विपक्ष से कहा कि अगर वो भागे नहीं तो उन्हें उनकी हर आपत्ति का जवाब दिया जाएगा। अमित शाह ने जैसे ही बिल को सदन के पटल पर रखा विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया। रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह विधेयक भारत के संविधान में निहित मूल्यों के विरुद्ध है।

आगे बढ़ने से पहले ये बताना ज़रूरी है कि नागरिकता संशोधन विधेयक यानी CAB पास होने के बाद बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से भारत में आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के शरणार्थियों को ‘अवैध इमिग्रेंट’ नहीं माना जाएगा और उन्हें भारत का नागरिक बनाने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। ये सुविधा दिसंबर 31 2014 से पहले भारत में आकर रह रहे शरणार्थियों को मिलेगी। कुछ लोग कह रहे हैं कि इससे उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोग नाराज़ हो जाएँगे, क्योंकि ये बिल असम एकॉर्ड का उल्लंघन करता है। नॉथ-ईस्ट के राज्यों में कई वामपंथी संगठन इसके ख़िलाफ़ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

संसद में मुस्लिम लीग व अन्य मुस्लिम नेताओं ने इस बिल के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराया। एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस गृहमंत्री से देश को बचा लो। उन्होंने कहा कि इतिहास में अमित शाह का नाम हिटलर के साथ लिया जाएगा। संसद के शीतकालीन सत्र में इस बिल को लेकर लगातार हंगामा जारी है।

शाह ने यूएस ग्रीन कार्ड का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ के नियम-क़ायदे शरणार्थियों के मामले में काफ़ी सख्त हैं। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से हर देश के लोगों को अपनाता आया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इस बिल को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताया। सांसद सौगत रॉय ने कहा कि ये डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के मूल्यों के ख़िलाफ़ है।

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