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राहुल बजाज के बेटे ने कहा- साहस और बेहूदगी एक जैसे, बताया गडकरी ने कैसे की मदद

बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज ने एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सामने ‘डर का माहौल’ वाले नैरेटिव को बढ़ावा दिया। बजाज ने कहा कि आज के दौर में लोग सरकार को कुछ भी बोलने से डरते हैं। हालाँकि, अमित शाह ने उन्हें कहा कि डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। राहुल बजाज ने इस दौरान लिंचिंग का भी मुद्दा उठाया, जिसके जवाब में शाह ने उन्हें बताया कि मोदी सरकार के दौरान ऐसी घटनाओं में कमी आई है। अब राहुल बजाज के बेटे राजीव बजाज ने अपने पिता के बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

राजीव ने उस बयान के लिए अपने पिता राहुल बजाज के ‘असाधारण साहस’ की प्रशंसा करते हुए कहा है कि साहस और बेहूदगी एक जैसे ही होते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता कभी भी अपने मन की कहने से हिंचकते नहीं हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी व्यक्तिगत राय को इस तरह के सार्वजनिक मंच पर उठाना उचित है या नहीं, ये उन्हें नहीं पता। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट एक्सीलेंस को सम्मानित करने वाले मंच पर इस मुद्दे को उठाना सही है या ग़लत, वह इसका निर्णय नहीं कर पा रहे हैं। राजीव बजाज ने कहा कि उनके पिता राहुल बजाज को बोलने के लिए मंच उपलब्ध करवाना सांड को लाल कपड़ा दिखाने जैसा है।

राजीव बजाज ने कहा कि उन्होंने कहीं साहस की परिभाषा पढ़ी थी। बकौल राजीव, किसी कार्य को ये जानते हुए भी करना कि उससे कुछ लोगों को चोट पहुँच सकती है- ये साहस है। राजीव ने आगे कहा कि बेहूदगी की भी यही परिभाषा है और इसी कारण से दोनों में अंतर खोजना मुश्किल हो जाता है। राजीव ने बताया कि जब उन्होंने फ़रवरी 2017 में नोटबंदी के फ़ैसले का विरोध किया था, तब उनकी भी ख़ासी आलोचना हुई थी। राजीव ने कहा कि उनकी बड़े नेताओं या मंत्रियों से उतनी बातचीत नहीं होती।

राजीव बजाज ने इस दौरान एक वाकया भी सुनाया कि कैसे भाजपा सरकार ने उनकी मदद की। बजाज की कार प्रोजेक्ट Qute 8 सालों से केंद्र सरकार अनुमोदन के लिए पड़ी हुई थी। राजीव ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 8 सालों से लंबित बजाज के ऑटो व्हीकल Qute को अप्रूवल दिया। राजीव ने इसके लिए नीति आयोग को भी धन्यवाद दिया। इधर, लखीमपुर के सांसद अजय मिश्रा ने बजाज कम्पनी की चीनी मिलों पर किसानों का 10,000 करोड़ रुपया बकाया भुगतान न करने का आरोप लगाया है।

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इस्लामी आतंकवाद बर्दाश्त नहीं, मोदी के साथ मिल कर रोकेंगे: श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे

श्रीलंका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे गत दिनों भारत के दौरे पर आए थे। इस दौरान राष्ट्रपति भवन में उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हुई। यह भी गौर करने लायक बात है कि राजपक्षे ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपना सबसे पहले विदेश दौरा भारत का किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफ़ी अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और विकास के मामले पर उनके भाई महिंदा राजपक्षे और पीएम मोदी के प्रशासन के बीच काफ़ी समानता है। महिंदा भी श्रीलंका के राष्ट्रपति रह चुके हैं।

गोटाभाया ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में इस्लामी आतंकवाद को लेकर अपने कड़े रुख को दोहराया है। उन्होंने कहा कि इस्लामी आतंकवाद आज एक वैश्विक मुद्दा है और इससे हर देश को ख़तरा है। गोटाभाया राजपक्षे ने आगे कहा कि इस्लामी आतंकवाद से निपटने के लिए हमें अभी से ही सचेत होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस्लामी आतंकवाद को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी और ख़ुफ़िया तंत्र को मजबूत करने की दिशा में प्रयास करेगी। उनका जोर ख़ुफ़िया सूचनाएँ जुटाने और तकनीकी क्षमता विकसित करने पर रहेगा।

गोटाभाया ने साइबर स्पेस और फोन पर बातचीत इत्यादि की निगरानी के लिए नई तकनीक अपनाने पर ज़ोर दिया। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वो इस्लामी आतंकवाद से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार व अन्य पड़ोसियों के साथ मिल कर काम करेंगे और एक-दूसरे से ख़ुफ़िया सूचनाएँ साझा करेंगे। गोटाभाया ने कहा:

“लिट्टे से हम काफ़ी अच्छी तरह से निपटे। हमारी ख़ुफ़िया एजेन्सियाँ उस आंदोलन की पृष्ठभूमि, नेताओं, तौर-तरीकों और इतिहास से अच्छी तरह अवगत थे। ख़ुफ़िया एजेंसियों को उनके नेताओं के ठिकानों के बारे में पता था। लेकिन, इस्लामी आतंकवाद को लेकर दुर्भाग्य से ऐसा कुछ भी नहीं है। यह नया खतरा है। इससे निपटने के लिए हमें और क्षमता विकसित करनी पड़ेगी। लेकिन मैं अपने देश में इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं दूँगा और कभी बर्दाश्त नहीं करूँगा।”

‘हिंदुस्तान’ में प्रकाशित राजपक्षे के इंटरव्यू का एक अंश

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने इस्लामी कट्टरता को आतंकवाद की जड़ बताते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग नौकरी के लिए मध्य-पूर्व जाते हैं। वहाँ उन्हें भड़काया जाता है। राजपक्षे ने कहा कि इंटरनेट पर इस्लामी टिप्पणियाँ व उपदेश आसानी से उपलब्ध हैं। इनका प्रयोग कर किसी को भी घर बैठे कट्टरपंथी बनाया जा सकता है। उन्होंने श्रीलंका की पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ध्यान नहीं दिया, इसीलिए ईस्टर धमाके में कई लोग मारे गए।

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INX मीडिया केस: तिहाड़ से बाहर आएँगे चिदंबरम, 21 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर बानुमति, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की तीन जजों की बेंच ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामले में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जमानत दे दी है। वे 106 दिन से हिरासत में थे। फिलहाल वे तिहाड़ जेल में हैं। इसी मामले में सीबीआई के केस में सुप्रीम कोर्ट से पहले ही चिदंबरम को जमानत मिल चुकी है।

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चिदंबरम जमानत पर छूटने के बाद गवाहों से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे और कोर्ट की इजाजत के बगैर विदेश नही जाएँगे। साथ ही केस के बारे में प्रेस ब्रीफ़िंग नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आर्थिक अपराध काफी गंभीर अपराध होते हैं, लेकिन जमानत का भी कानूनी प्रावधान हैं। कोर्ट ने कहा, “जमानत का फैसला केस की मेरिट पर निर्भर करता है। जमानत देना कानून के प्रावधान में है।” कोर्ट ने चिदंबरम को 2-2 लाख के श्योरटी और निजी मुचलके पर जमानत दी है।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने नवंबर में आईएनएक्स-मीडिया से जुड़े ED के मामले में पी चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने राहत प्राप्त करने की चिदंबरम की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और यह मामला उन्हें जमानत देने के लिए सही नहीं है।

हाई कोर्ट के इसी आदेश को चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस पर सुनवाई की और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार (4 दिसंबर, 2019) को कोर्ट ने कई शर्तों के साथ उन्हें जमानत दे दी।

उल्लेखनीय है कि आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई ने पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के बाद उन्हें 6 सितंबर को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। सीबीआई ने मई 2017 को चिदंबरम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे। कॉन्ग्रेस नेता पर पद का दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

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JNU में 12 दिसंबर से सेमेस्टर एक्जाम, जो नहीं देंगे बाहर जाएँगे: प्रशासन की छात्रों को लास्ट वॉर्निंग

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों को सेमेस्टर परीक्षा में भाग न लेने पर विश्वविद्यालय से बाहर (दाखिला रदद) करने की चेतावनी दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आंदोलनकारी छात्रों को लास्ट वार्निंग देते हुए कहा कि यदि छात्र 12 दिसंबर से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं में नहीं बैठते हैं तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

जेएनयू रजिस्ट्रार प्रोफेसर प्रमोद कुमार की ओर से मंगलवार (दिसंबर 3, 2019) शाम को सर्कुलर जारी किया गया है। इससे पहले जेएनयू प्रशासन की तरफ से 17 नवंबर, 28 नवंबर और 29 नवंबर के दिन भी इस मामले में सर्कुलर जारी करते हुए छात्रों को चेताया गया था। मंगलवार को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक मानदंडों और अकादमिक कैलेंडर का पालन करते हुए 12 दिसंबर से शुरू होने वाली अंतिम सेमेस्टर परीक्षा में अनिवार्य रूप से शामिल होना होगा। जो ऐसा नहीं करेंगे वे जेएनयू अकेडमिक ऑर्डिनेंस के तहत यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं रह जाएँगे।

JNU प्रशासन द्वारा जारी किया गया सर्कुलर

साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि एमफिल कोर्स के नियमानुसार 5.00 सीजीपीए लाना अनिवार्य है। यदि कोई छात्र 5.00 सीजीपीए लाने में असफल रहता है तो जेएनयू अकेडमिक ऑर्डिनेंस के तहत दूसरे सेमेस्टर के अंत में उसका नाम ऑटोमेटिकली विश्वविद्यालय की नामांकन सूची से हट जाएगा। 

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि परीक्षा की अवधि को लेकर छात्रों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिलेगी। बीए ऑनर्स व बीए, एमए व एमएससी कोर्सेज में सभी सत्र की परीक्षाएँ निर्धारित सीजीपीए के साथ पास करना अनिवार्य है। यदि किसी छात्र की हाजिरी कम होती है तो उसे सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी।

इसके बाद भी आंदोलन में बैठे छात्र कक्षाओं में जाने के लिए तैयार नहीं हैं। जेएनयू छात्रसंघ ने पहले ही सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार का ऐलान किया है। उनका कहना है कि जब तक हॉस्टल फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन चलता रहेगा। बता दें कि पिछले करीब एक महीने से जेएनयू में छात्रों की तरफ से छात्रावास की फीस बढ़ोतरी और इसके नए नियमों को लागू करने के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। छात्रों की माँग है कि इसे वापिस लिया जाए। प्रशासन का कहना है कि छात्रों के प्रदर्शन के कारण संस्थान में अकादमिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।

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कमलेश तिवारी मर्डर: मौलाना कैफ़ी को बेल, मुस्लिम संगठन ने खड़ी कर दी थी वकीलों की फौज

हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या 18 अक्टूबर को लखनऊ में कर दी गई थी। इस हत्याकांड में कई मौलवियों के नाम सामने आए थे। इसके बाद यूपी पुलिस और गुजरात एटीएस की कार्रवाई में कई लोग गिरफ़्तार किए गए थे। मुख्य आरोपित अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन ने स्वीकार किया था कि पैगम्बर मुहम्मद पर दिए गए बयान के कारण उन्होंने हिन्दू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की बेरहमी से हत्या कर दी। इस मामले में बरेली के मौलाना सैयद कैफ़ी अली का नाम भी सामने आया था। उसने हत्यारोपितों की मदद की थी और उन्हें संरक्षण दिया था।

कैफ़ी आजमी ने अदालत में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुदेश कुमार ने मंजूर कर लिया। 20-20 हज़ार रुपए के 2 जमानत एवं निजी मुचलका राशि दाखिल करने पर उसे जमानत दी गई। मौलाना ने अदालत में कहा कि उस पर लगे आरोप जमानती हैं। इसे अदालत ने मान लिया। मौलाना पर आरोप है कि उसने कमलेश तिवारी के हत्यारों को अपने घर में शरण दी।

मौलाना ने तिवारी के हत्यारों की आर्थिक मदद की थी। उनका इलाज भी किया था। इसके बाद दोनों वहाँ से भागने में सफल रहे थे। मौलाना के ख़िलाफ़ पुलिस को कई साक्ष्य मिले थे। इन सबके आधार पर उसे 22 अक्टूबर को एसआईटी ने गिरफ़्तार किया था। बुधवार (दिसंबर 4, 2019) को मौलाना जेल से बाहर आ जाएगा। सैयद कैफ़ी ताजुशरिया दरगाह से जुड़ा हुआ है। उसके साथ अधिवक्ता नावेद और उसके पार्टनर कामरान को भी गिरफ़्तार किया गया था। ये दोनों दरगाह आला हजरत से जुड़े हुए हैं।

‘दैनिक जागरण’ के बरेली संस्करण में छपी ख़बर

मौलाना की जमानत करवाने के लिए ताजुशरिया के मुफ़्ती असजद रज़ा खाँ ने प्रयास किया था। परिजनों ने मुफ़्ती से इसके लिए अपील की थी। उसकी पैरवी आला हजरत दरगाह से जुड़े संगठन जमात रज़ा-ए-मुस्तफा ने की। संगठन के उपाध्यक्ष सलमान हसन खाँ कादरी ने बताया कि मौलाना की रिहाई के लिए उन्होंने वकीलों के एक पूरे पैनल को लगाया था।

कमलेश तिवारी की पत्नी को जान से मारने की धमकी, बंद लिफाफे में भेजा उर्दू में लिखा पत्र

‘मैं अली को जानती तो नहीं, लेकिन उसने कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मनाया… इसलिए उसे रिलीज करो’

‘मेरी बहन को मुस्लिम लड़के ने प्रेमजाल में फँसा लिया है’ – वो फर्जी कहानी, जिससे गई कमलेश तिवारी की जान

प्रीति रेड्डी रेप ऐंड मर्डर: निजामाबाद से पकड़ा गया युवक, फेसबुक पर की थी गंदी बात

हैदराबाद में पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को झकझोर रखा है। लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इतने संवेदनशील मामले में भी ओछी हकरतें करने से बाज नहीं आ रहे। हैदराबाद की साइबर क्राइम पुलिस ने निजामाबाद से ऐसे ही एक युवक को गिरफ्तार किया है। युवक की पहचान 22 वर्षीय चवन श्रीराम के तौर पर की गई है।

इस युवक ने फेसबुक पर प्रीति रेड्डी को लेकर अश्लील टिप्पणी की थी। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हुआ था। इस पोस्ट को कुछ लोग शेयर कर रहे थे, तो कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहे थे। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए 30 नवंबर को मामला दर्ज किया। इसके बाद लोकेशन तलाश कर गिरफ्तारी की गई।

हैदराबाद पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार प्रीति रेड्डी की तस्वीर अपलोड करके बेहद शर्मनाक और अश्लील पोस्ट बनाई गई थी। जाँच के दौरान पुलिस ने सख्त रुख दिखाते हुए आरोपित को धर दबोचा। इस बीच साइबराबाद पुलिस ने कुछ मीडिया समूहों को आगाह किया है कि वे पीड़िता का नाम, पहचान, फोटो और दस्तावेज जाहिर न करें। न ही मामले से संबंधित वीडियो क्लीपिंग चलाएँ।

इसके साथ ही हैदराबाद पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि महिलाओं को क्या करना है और क्या नहीं। पुलिस ने कुल 14 सलाह जारी किए हैं, जिनका महिलाओं को पालन करने के लिए कहा गया है। सोशल मीडिया पर इस एडवाइजरी को लेकर लोगों में काफी गुस्सा देखने को मिल रहा है। लोगों ने पूछा कि अगर सब कुछ आम नागरिकों व महिलाओं को ही करना है तो फिर पुलिस क्या करेगी?

गौरलतब है कि गैंगरेप के बाद प्रीति की हत्या कर दी गई थी। फिर उनके शव को आरोपितों ने जला दिया था। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार को मजिस्ट्रेट ने चरों आरोपितों मोहम्मद आरिफ (26 साल), जोल्लू शिवा (20 साल), जोल्लू नवीन कुमार (20 साल), चिन्ताकुट्टा चेन्ना केशवुलु (21 साल) को 14 दिनों की हिरासत में भेज दिया था।

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CM उद्धव की बैठक में बीवी का भतीजा, भड़की NCP ने कहा- दोबारा न हो ऐसी ग़लती

महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस की सरकार बने अभी 1 सप्ताह भी नहीं हुए हैं। लेकिन साझेदारों के बीच तल्खी की खबरें आने लगी है। मामला मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की एक बैठक से जुड़ा है। उद्धव ठाकरे ने मंत्रालय और सचिवालय के कुछ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। उस बैठक में उनके बेटे आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे। लेकिन हंगामा इसे लेकर नहीं हुआ क्योंकि आदित्य विधायक भी हैं। उस बैठक में उद्धव की पत्नी रश्मि ठाकरे के भतीजे वरुण सरदेसाई की मौजूदगी ने सबको हैरान कर दिया। लोगों ने पूछा कि वरुण ने बिना किसी पद पर रहते हुए मीटिंग कैसे अटेंड किया? एनसीपी ने भी इसके लिए उद्धव को खरी-खरी सुनाई है।

सरदेसाई ने सफाई देते हुए कहा कि बैठक में किसी संवेदनशील मुद्दे पर बातचीत नहीं की गई। वरुण ने कहा कि बैठक में किसे बुलाना है और किसे नहीं, ये तय करना सीएम का अधिकार है। साथ ही उन्होंने बताया कि वो सीएम उद्धव की ओर से उस बैठक में हिस्सा ले रहे थे। एनसीपी को ये सफाई नहीं पसंद आई। एनसीपी ने कहा कि भले ही यह बहुत बड़ी ग़लती नहीं हो, लेकिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अनुभव की कमी साफ़ दिख रही है।

एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि उद्धव ठाकरे के पास किसी प्रकार का प्रशासनिक अनुभव नहीं है और वो इससे पहले किसी पद पर नहीं रहे हैं, इसीलिए ये ग़लती हुई। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि उद्धव इस बात का ध्यान रखें कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हो। कॉन्ग्रेस भी वरुण के बैठक में शामिल होने से ख़ुश नहीं दिखी। पार्टी ने इसपर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। शिवसेना ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि वरुण उत्सुकतावश उस बैठक में चले गए होंगे।

उद्धव ठाकरे ने ये बैठक मुंबई में समुद्री किनारे वाले इलाक़ों व अन्य क्षेत्रों में पर्यटन के बारे में चर्चा करने के लिए बुलाई थी। एक सरकारी अधिकारी ने ‘मिड-डे’ से कहा:

“कोई ऐसा व्यक्ति सरकारी बैठक में कैसे भाग ले सकता है, जो न तो सरकार का हिस्सा है और न ही कोई जनप्रतिनिधि है? वरुण पर्यटन के विशेषज्ञ भी नहीं हैं। ऐसे में उनका इस बैठक में शामिल होने के कोई तुक नहीं है।”

जहाँ उद्धव ठाकरे के परिवार के सदस्य बिना किसी पद पर रहे मुख्यमंत्री की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं, आम कार्यकर्ताओं को ये छूट नहीं है। शिवसेना की यूथ विंग ‘युवा सेना’ की बैठक में सभी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट हिदायत दी गई कि शिवसेना का कोई भी सदस्य मंत्रालय में कोई काम करवाने के लिए न जाए, क्योंकि पार्टी अब सत्ता में है। वहीं वरुण ने कहा कि उन्होंने बैठक में जाकर कोई ग़लती नहीं की है। उस बैठक में उद्धव ने मुंबई में मछलीघर बनाने और संजय गाँधी नेशनल पार्क में ‘नाइट सफारी’ को विकसित करने को लेकर चर्चा की।

मेट्रो का काम ही मत रोको, पूरा कंट्रक्शन ही उखाड़ कर फेंक दो: CM उद्धव के फ़ैसले से गदगद हुए संजय निरुपम

पीएम मोदी की ‘बुलेट-ट्रेन’ पर शिवसेना का ब्रेक: उद्धव ने सत्ता संभालते ही दिए ये आदेश

बालासाहब को हत्यारा और नौकर बताने वाले अर्बन नक्सल को रिहा करो: CM उद्धव से NCP विधायक ने कहा

मैं BJP नहीं छोड़ रही हूँ, दलबदल मेरे खून में नहीं है: पंकजा मुंडे

भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे और पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे ने पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज कर दिया है। पंकजा मुंडे ने मंगलवार (दिसंबर 3, 2019) को कहा कि वह पार्टी नहीं छोड़ रही हैं। उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, ‘‘मैं पार्टी नहीं छोड़ रही हूँ। दलबदल मेरे खून में नहीं है। मैं पार्टी की सच्ची और समर्पित कार्यकर्ता हूँ।”

पंकजा मुंडे ने सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को ट्विटर पर अपने ‘बॉयो’ से भाजपा का नाम हटा दिया। इसके बाद उनके भाजपा छोड़ने की अटकलों ने जोर पकड़ लिया था। इससे पहले उन्होंने रविवार (दिसंबर 1, 2019) को एक फेसबुक पोस्ट करते हुए अपने पिता गोपीनाथ मुंडे के जन्मदिवस पर 12 दिसंबर को समर्थकों को बीड के गोपीनाथगढ़ पहुँचने की अपील की थी। इसमें उन्होंने लिखा था, ‘‘अब सोचने और निर्णय लेने की जरूरत है कि आगे क्या किया जाए?”

पंकजा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखी बातों को मीडिया के एक वर्ग द्वारा ट्विस्ट करने का आरोप लगाया। इससे पहले मंगलवार दोपहर भाजपा के पूर्व मंत्री विनोद तावड़े ने पंकजा मुंडे से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद तावड़े ने कहा, ‘‘रविवार को उनके फेसबुक पोस्ट का विरोधियों ने गलत मतलब निकाला, इसलिए वह बहुत आहत थीं। उन्होंने खुद मुझे बताया कि वह पार्टी से नाखुश नहीं हैं।”

इसके अलावा पंकजा ने उन अफवाहों का भी खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि उनके ट्विटर परिचय से ‘‘भाजपा’’ को हटाने का मकसद अपनी पार्टी पर दबाव बनाना था। बता दें कि पंकजा के फेसबुक अकाउंट के ‘अबाउट’ सेक्शन में उनका राजनीतिक संबंध अब भी भाजपा के साथ ही दिख रहा है। इसके साथ ही सोमवार को पंकजा ने अपने फेसबुक पेज पर भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और साथ में ‘कमल’ (भाजपा का चिह्न) की एक तस्वीर पोस्ट की।

पार्टी छोड़ने की अटकलों पर बात करते हुए पंकजा मुंडे ने कहा, “मैं पार्टी (भाजपा) की ईमानदार कार्यकर्ता रही हूँ, मैंने पार्टी के लिए काम किया है। मैं अपने ऊपर लगे आरोपों से दुखी हूँ। मैं अब 12 दिसंबर को बोलूँगी, अभी और कुछ नहीं कहना चाहती।”

गौरतलब है कि शिवसेना नेता संजय राउत ने दावा किया था कि कई नेता उद्धव ठाकरे नीत पार्टी में शामिल होने के इच्छुक हैं। हालाँकि बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने राउत के दावे को सोमवार को खारिज किया था। साथ ही उन्होंने पंकजा मुंडे के बीजेपी छोड़ने की खबरों का भी खंडन किया था। 

उन्होंने कहा था, “महाराष्ट्र में दुर्घटनावश बनी सरकार निराधार खबरें फैला रही है। उनके ठाकरे परिवार से अच्छे पारिवारिक रिश्ते हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह शिवसेना में शामिल होने जा रही हैं। वह हार के बाद आत्मनिरीक्षण कर रही हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह भाजपा छोड़ रही हैं।”

‘BJP नहीं छोड़ रहीं पंकजा मुंडे, महाराष्ट्र में दुर्घटनावश बनी सरकार फैला रही अफवाह’

NCP नेता धनंजय मुंडे ने बहन पंकजा पर की आपत्तिजनक टिप्पणी, मामला दर्ज

शरद पवार ने खोल दिए राज: कॉन्ग्रेस से चिढ़ा था अजित, फडणवीस से चल रही बात का पता था

महाराष्ट्र में 23 नवंबर को राष्ट्रपति शासन हटने के बाद तड़के सुबह भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी से बगावत करने वाले अजित पवार की मदद से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालाँकि, शरद पवार भतीजे को वापस अपने कुनबे में लाने में कामयाब हुए। अजित पवार के बगावत के बारे में एनसीपी अध्यक्ष ने कहा कि इसका कारण कॉन्ग्रेस है। बकौल पवार, कॉन्ग्रेस सरकार गठन पर हो रही बातचीत को काफ़ी लम्बा खींच रही थी, इसलिए अजित ने चिढ कर भाजपा के साथ जाने का फ़ैसला लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी की चिढ़ के कारण अजित ने बगावत की।

शरद पवार ने बताया कि अजित मानते थे कि कॉन्ग्रेस बातचीत को कुछ ज्यादा ही लम्बा खींच रही है और शिवसेना विचार-विमर्श में ठीक से हिस्सा नहीं ले रही है। शरद पवार ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें पता था कि अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस की बातचीत चल रही है। हालाँकि, पवार ने यह भी कहा कि उन्हें इसका तनिक भी आभास नहीं था कि अजित भाजपा से जा मिलेंगे। शरद पवार ने बताया कि फडणवीस के शपथ लेने से 1 दिन पहले 22 नवंबर की शाम को हुई बैठक में कॉन्ग्रेस से काफ़ी गर्मागर्म बहस हुई थी।

अजित पवार उस बैठक में हुई बातचीत से काफ़ी नाराज़ थे। वो चिढ़ गए थे। शरद पवार ने आगे बताया कि कॉन्ग्रेस अपने लिए अधिक संख्या में मनपसंद मंत्रालयों की माँग कर रही थी। शरद पवार उस बैठक से निकल गए थे। उसके बाद अजित पवार भी गुस्से में उस बैठक से निकल गए थे और उन्होंने एनसीपी नेताओं से कहा कि वो शायद इस तरह से काम करने में सक्षम नहीं हो पाएँगे। उसी रात देवेंद्र फडणवीस के साथ उनकी बैठक हुई। शरद पवार ने इस बात को नकार दिया कि उनके इशारे पर ही अजित ने फडणवीस को समर्थन दिया था।

एबीपी न्यूज़ के साथ इंटरव्यू में शरद पवार ने बताई ‘अंदर की बात’

गठबंधन के लिए भाजपा की बजाय शिवसेना को तरजीह देने के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि भाजपा के मुक़ाबले शिवसेना के साथ काम करना ज्यादा आसान है। शरद पवार ने कहा कि वो शिवसेना के साथ गठबंधन करने को तभी राज़ी हुए जब उन्हें पक्का यकीन हो गया कि ठाकरे सरकार कहीं भी हिंदुत्व को बीच में लेकर नहीं आएगी। शरद पवार ने यह भी माना कि पार्टी में उनके भतीजे की पकड़ ख़ासी मजबूत है। पवार ने कहा कि अजित की बगावत के बाद उनसे मुलाकात हुई तो उन्हें अपनी ग़लती का एहसास हो गया और उन्होंने अपना फ़ैसला बदल लिया।

हालाँकि, शारद पवार इस सवाल से कन्नी काट गए कि अजित नई सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद संभालेंगे या नहीं? उन्होंने कहा कि एनसीपी, कॉन्ग्रेस और शिवसेना की गठबंधन में ‘पूर्ण समझदारी’ है और सरकार 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करेगी।

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‘नफ़रत के बीज बोने के लिए उठाया है राम मंदिर फैसले को चुनौती देने का कदम’

जमीयत उलमा ए हिन्द के राम जन्मभूमि मंदिर पर आए निर्णय को चुनौती देने के फैसले को मुस्लिम समुदाय के भीतर से ही समर्थन नहीं मिल पा रहा है। केंद्रीय शिया वक़्फ़ बोर्ड के मुखिया वसीम रिज़वी ने मंगलवार (3 दिसंबर, 2019) को बयान दिया है कि यह कदम जमीयत ने केवल साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए उठाया है।

“हर किसी को पता है कि इस पुनर्विचार याचिका पर कोई फैसला नहीं आएगा, क्योंकि कोई भी फ़ैसला इस आए हुए फ़ैसले से बेहतर नहीं हो सकता था। यह पुनर्विचार याचिका केवल नफ़रत के बीज बोने के लिए डाली गई है।”

गौरतलब है कि कल (सोमवार, 2 दिसंबर, 2019 को) सुप्रीम कोर्ट में जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट के ही द्वारा दिए गए रामजन्मभूमि बनाम बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसले के खिलाफ़ पुनर्विचार याचिका दायर की है। 9 नवंबर, 2019 को आए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में पूर्व में विवादित रहे रामजन्मभूमि मंदिर परिसर के पूरे 2.77 एकड़ का मालिकाना हक मंदिर के देवता रामलला विराजमान को दे दिया था, और उनके मंदिर के निर्माण के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने में न्यास का गठन कर अदालत को सूचित करने का आदेश दिया था।

अदालत ने मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया था, क्योंकि मंदिर स्थल पर खड़ी बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर, 1992 को अवैध रूप से ढहा दिया गया था।

टाइम्स नाउ ने अपने पास मौजूद जमीयत की याचिका की कॉपी के आधार पर दावा किया है कि जमीयत ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक इससे अन्य के अलावा बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों को (दंड की जगह) राहत मिल गई। इसके अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी आगामी सोमवार को पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है। गौरतलब है कि आगामी सोमवार (9 दिसंबर, 2019) को ही एक महीने के भीतर पुनर्विचार याचिका दायर करने की अंतिम तिथि समाप्त हो रही है। कुछ दिन पहले ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (बीएमसी) के संयोजक एडवोकेट ज़फ़रयाब जीलानी ने इस आशय से जानकारी मीडिया को दी थी

टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्होंने सवाल उठाया था कि “अवैध रूप से घुस आई” मूर्ति को भला अदालत देवता कैसे मान सकती है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह ‘जबरन’ मूर्ति को (उस समय, 1949 में) विवादित रहे ढाँचे में स्थापित कर वहाँ बनी बाबरी मस्जिद का अपमान किया गया है।”

जीलानी का दावा है कि उनकी याचिका तत्कालीन मस्जिद के मुख्य गुंबद में रखी गई मूर्ति को देवता का दर्जा देने के विरोध पर आधारित होगी। उनका मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस बिंदु पर ध्यान दिया होता तो उनका फैसला अलग होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी याचिका समयसीमा 9 दिसंबर से पहले ही आएगी।