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ईसाइयों पर मेहरबान जगन सरकार, धर्मांतरण के लिए खोला खजाना: आंध्र प्रदेश में विकास गया तेल लेने

आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी सरकार का जन-कल्याणकारी योजनाओं को रफ़्तार देने पर फोकस नहीं दिख रहा। वह लोगों को मुफ़्त में चीजें देने की नीति पर ज़्यादा जोर दे रही है। आंध्र प्रदेश सरकार के इस रुख के कारण न सिर्फ़ सार्वजनिक संपत्ति को भारी क्षति पहुँच रही है, बल्कि राज्य में धर्मांतरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। आरोप लग रहे हैं कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार लोगों को धर्मान्तरण के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आंध्र प्रदेश में ईसाई धर्मान्तरण ने जोर पकड़ लिया है और जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई नहीं की गई तो यह हिंसक भी हो सकता है।

विपक्ष पहले से ही आरोप लगता रहता है कि वाईएसआर कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के साथ ही राज्य का सरकारी खजाना ईसाइयों के लिए खोल दिया गया है। विपक्षी पार्टियों के इस आरोप के बाद कई हिंदूवादी संगठनों ने भी इस तरफ ध्यान दिलाया है। बता दें कि जगन मोहन रेड्डी और उनका पूरा परिवार ईसाई धर्म का अनुसरण करता है। पिछले महीने जगन सरकार ने यरुशलम जाने वाले ईसाई तीर्थयात्रियों को 40,000 रुपए की जगह 60,000 रुपए देने का निर्णय लिया था। ये योजना उन ईसाई धर्मावलम्बियों के लिए है, जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपए से कम है।

इससे ऊपर की आय वालों के लिए पहले 20,000 रुपए दिए जाते थे, जिसे बढ़ा कर अब 30,000 रुपए कर दिया गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि ईसाई पादरियों को 5000 रुपए प्रति महीने दिए जाएँगे। इसके अलावा ईसाई धर्म के लोगों को आवास देने के अलावा अन्य वित्तीय सहायता देने पर भी विचार किया जा रहा है। भाजपा नेता चंद्र मोहन ने भी इन आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ईसाई धर्मान्तरण के लिए सार्वजनिक खजाने को खाली कर रही है। उन्होंने कहा कि आंध्र सरकार हिंदू विरोधी योजनाओं के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर इसे रोका नहीं गया तो बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है।

इस सम्बन्ध में ‘संडे गार्डियन’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। अख़बार ने राज्य के अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय से भी संपर्क किया, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं मिला। कई विशेषज्ञों ने बताया कि धर्मान्तरण के बाद लोगों को उसका मजहब छिपा कर रखने को कहा जाता है। 2011 के जनगणना आँकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में 1.4% ईसाई हैं। अब धर्मान्तरण का अभियान आक्रामक होने के कारण इस जनसंख्या में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है। कई ऐसे लोग हैं, जो धर्मान्तरण कर चुके हैं लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना नाम नहीं बदला है।

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 2 दशक तक राजनीतिक विज्ञान पढ़ाने वाले गौतम सेन कहते हैं कि धर्मान्तरण के अल्वा ‘चर्च प्लांटिंग’ भी एक अहम मुद्दा है, जिस पर सबका ध्यान नहीं जाता। इसके तहत राज्य के कई गाँवों में मंदिरों की संख्या से ज़्यादा चर्च बना दिए गए है। ईसाइयत का प्रभाव जताने के लिए ऐसा किया जाता है। ईसाइयत को बढ़ावा देने में लगी जगन सरकार ने न सिर्फ़ कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को ठन्डे बस्ते में डाल दिया है, बल्कि कई चालू प्रोजेक्ट्स को भी रोक दिया है। इससे निवेशकों को नुकसान का सामना करना पड़ा है।

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साल की आखिरी मन की बात: CAA विरोधी हिंसा पर बोले पीएम- युवाओं को अराजकता नहीं पसंद

रविवार (29 दिसंबर 2019) को रेडियो कार्यक्रम मन की बात का 60वाँ एपिसोड प्रसारित हुआ। यह इस साल का आखिरी मन की बात था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को बधाई देते हुए इसकी शुरुआत की। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर हुई हिंसा के आलोक में कहा कि देश के युवा अराजकता पसंद नहीं करते। उन्हें अव्यवस्था से चिढ़ है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन सीएए को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों में छात्रों का जिक्र आने से जोड़ कर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवा हर दिन कुछ नया करना चाहते हैं। आज के युवा एक बेहतर सिस्टम पंसद करते हैं। अगर कोई सिस्टम सही से काम न करे तो वे बेचैन हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “मैं इसे अच्छा मानता हूँ। नई पीढ़ी को अराजकता पसंद नहीं है। अव्यवस्था से उन्हें चिढ़ है। जातिवाद, परिवारवाद जैसी अव्यवस्था को वो पसंद नहीं करते हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी कहते थे कि युवावस्था की क़ीमत को आँका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा, “ये जीवन का सबसे मूल्यवान कालखंड होता है। आपका जीवन इस पर निर्भर करता है कि आप अपनी युवावस्था का उपयोग किस प्रकार करते हैं। इसके आगे उन्होंने कहा कि हम अलग-अलग कॉलेजों में, यूनिवर्सिटी में और स्कूल में पढ़ते तो हैं, लेकिन पढ़ने के बाद Alumni meet एक बहुत सुहाना अवसर होता है। इस अवसर पर सभी नौजवान पुरानी यादों में खो जाते हैं, इसका एक अलग ही आनंद है।”

उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत में ये दशक न सिर्फ़ युवाओं के विकास के लिए होगा, बल्कि युवाओं के सामर्थ्य से देश का विकास करने वाला भी साबित होगा। भारत को आधुनिक बनाने में युवा पीढ़ी की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है।

मन की बात कार्यक्रम में बिहार का ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बिहार के पश्चिमी चंपारण की एक कहानी बताए बिना वे रह नहीं सकते। यहाँ भैरवगंज हेल्थ सेंटर में लोग हेल्थ चेकअप कराने आए। यह कार्यक्रम सरकार का नहीं था, बल्कि यह एक स्कूल के पुराने छात्रों द्वारा उठाया गया क़दम था। इसका नाम संकल्प 95 था।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील की कि 2022 में देश के लोग स्थानीय सामानों को ख़रीदने पर जोर दें। उन्होंने कहा कि ये काम सरकारी नहीं होना चाहिए। देश के युवा छोटे-छोटे ग्रुप और संगठन बनाकर लोगों को स्थानीय सामान ख़रीदने पर ज़ोर दें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में सूर्यग्रहण, प्राचीन भारत के मनीषियों आर्यभट्ट, भास्कराचार्य का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को खगोल शास्त्र के बारे में रूचि विकसित करनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर के हिमायत प्रोग्राम का ज़िक्र किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस कार्यक्रम की वजह से 18000 युवाओं को ट्रेनिंग मिली, जबकि 5000 युवाओं को रोज़गार भी मिला। उन्होंने कहा कि हिमायत कार्यक्रम स्किल ट्रेनिंग से जुड़ा हुआ है। साथ ही उन्होंने सभी देशवासियों को नए साल की शुभकामनाएँ भी दीं।

अपने पिछले मन की बात कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने अयोध्या के रामजन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर बात की थी, उन्होंने देशवासियों के द्वारा इस फैसले को स्वीकार किए जाने पर उनका धन्यवाद किया था। उन्होंने कहा था कि 130 करोड़ भारतीयों ने फिर यह साबित कर दिया कि उनके लिए देशहित से बढ़कर कुछ भी नहीं है।

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कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रही MLA रमाबाई CAA के साथ, मायावती ने बसपा से निलंबित किया

मध्य प्रदेश में की विधायक रमाबाई को बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी से निलंबित कर दिया है। रमाबाई द्वारा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन करने पर मायावती ने यह कार्रवाई की है। रमाबाई दमोह के पथरिया से विधायक हैं। उनका यह रुख प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार के लिए भी परेशानी पैदा कर सकता है। बसपा की तरह ही कॉन्ग्रेस भी CAA और NRC का विरोध कर रही है। कमलनाथ सरकार बसपा और निर्दलीयों के समर्थन से चल रही है।

मायावती ने ट्वीट कर रमाबाई को निलंबित किए जाने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा है, BSP अनुशासित पार्टी है और इसे तोड़ने पर पार्टी के MP/MLA आदि के विरूद्ध भी तुरंत कार्रवाई की जाती है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के पथेरिया से बसपा विधायक रमाबाई परिहार द्वारा CAA का समर्थन करने पर उनको पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। मायावती ने कहा है कि उन पर पार्टी कार्यक्रम में भाग लेने पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही बसपा सुप्रीमो ने बताया है कि BSP ने सबसे पहले सीएए को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताकर इसका तीव्र विरोध किया। संसद में भी इसके विरूद्ध वोट दिया और इसकी वापसी को भी लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया। फिर भी विधायक परिहार ने CAA का समर्थन किया। पहले भी उन्हें कई बार पार्टी लाइन पर चलने की चेतावनी दी गई थी।

गौरतलब है कि इस मसले पर बसपा के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से हिंसक विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने को भी कहा था। साथ ही उन्होंने भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण को भी निशाने पर लिया था। इस मसले पर शुक्रवार (20 दिसंबर) को दिल्ली के जामा मस्जिद पर हुए प्रदर्शन में चंद्रशेखर दिखा था। बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। मायावती ने ट्वीट कर उस पर दलितों को बरगलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि दलितों का मानना है कि षड्यंत्र के तहत चंद्रशेखर ऐसे राज्यों में जाता है जहॉं चुनाव करीब हो और बीएसपी की पकड़ हो। वोटों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर प्रदर्शन वगैरह कर वह फिर जबरन जेल चला जाता है।

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नहीं रहे पेजावर मठ के प्रमुख विश्वेश तीर्थ स्वामी, पीएम मोदी बोले- ऊर्जा स्रोत की तरह थे

पेजावर मठ के प्रमुख श्री श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी जी का रविवार (29 दिसंबर) को निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार थे। सांस लेने में परेशानी के बाद 20 दिसंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने शनिवार को कहा था कि श्री तीर्थ की हालत गंभीर है और उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है। मठ के अधिकारियों और कनिष्ठ मठ प्रमुख विश्वाप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी ने बताया कि श्री विश्वेश की इच्छा के अनुसार रविवार को उन्हें अस्पताल से मठ लाया गया और यहीं इलाज जारी रखने का फ़ैसला किया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वेश तीर्थ स्वामी के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, “पेजावार मठ के श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी, उडुपी में उन लाखों लोगों के दिलों और दिमाग में रहेंगे, जिनके लिए वह हमेशा एक मार्गदर्शक रहे। सेवा और आध्यात्मिकता के वे ऊर्जा स्रोत थे।” उन्होंने कहा, “मैंने कई मौकों पर उनसे बहुत कुछ सीखा है। मैंने हाल ही में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उनसे मुलाकात की थी। उनका अद्भुत ज्ञान हमेशा मेरे साथ रहा है। मेरी संवेदनाएं उनके अनुयायियों के साथ हैं।”

तटीय क्षेत्र का दौरा कर रहे मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा शनिवार को अस्पताल पहुँचे थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती आज तड़के उडुपी श्री कृष्ण मठ में पेजावर मठ के प्रमुख विश्वेश तीर्थ स्वामी के दर्शन करने पहुँची थीं। भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती उनकी शिष्या रही हैं।

श्री श्री विश्वेश स्वामीजी का जन्म 27 अप्रैल, 1931 को श्री नारायणाचार्य और श्रीमति कमलम्मा की दूसरी संतान के रूप में हुआ था, जो रामकुंजा के एक भक्त युगल थे। माता-पिता ने बच्चे का नाम वेंकटरमण रखा। पेजावर मठ के तत्कालीन प्रमुख वेंकटरमण, श्री श्री विश्व मानय तीर्थ स्वामीजी ने उन्हें आठ वर्ष की आयु में संन्यासी के रूप में दीक्षा दी थी। दीक्षा 3 दिसंबर 1938 को हम्पी के पास चक्रतीर्थ में हुई। दीक्षा के बाद, वेंकटरमण श्री श्री विश्वेश तीर्थ बन गए।

किसी भी आठ उडुपी मठों के प्रमुख के लिए, दो साल के लिए भगवान कृष्ण की पूजा करने के लिए पर्याय (Paraya) की ज़िम्मेदारी किसी सौभाग्य से कम नहीं होता। यह शुभ कार्य करने का अवसर श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी को वर्ष 1952 में पहली बार दिया गया था।

बता दें कि पर्याय एक धार्मिक अनुष्ठान होता है जो उडुपी के श्री कृष्ण मठ (कृष्ण मंदिर) में हर एक साल पर होता है। द्वैत दार्शनिक श्री माधवाचार्य द्वारा स्थापित आष्टा मठ के स्वामीजी (द्रष्टा या भिक्षु या पोंटिफ) के बीच कृष्ण मठ की पूजा और प्रशासन का काम विभाजित किया जाता है। प्रत्येक मठ के प्रत्येक स्वामी को दो साल की अवधि के लिए उडुपी श्रीकृष्ण की पूजा करने का अवसर प्राप्त होता है।

आध्यात्मिक, सामाजिक और विद्वतापूर्ण गतिविधियों में श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी जी की भूमिका का इतिहास में उनका पहला पर्याय बेजोड़ था। इस पर्याय के दौरान, माधव संस्कृति, अखिल भारत माधव महा मंडली (ABMM) के गौरवशाली मशालची की स्थापना की गई थी। ABMMM ने मैसूर के महाराजा महामहिम की अध्यक्षता में अपना पहला सम्मेलन आयोजित किया।

1968 में श्री स्वामीजी के दूसरे पर्याय के दौरान, उडुपी का पूरा क्षेत्र सचमुच पुनर्जीवित हो उठा था। इस पर्याय के दौरान, विश्व हिन्दू परिषद के क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन के अवसर पर श्री स्वामी जी द्वारा दिया गया नारा (हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू: पतितो भवेत्। मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मंत्र: समानता) परिषद के सभी कार्यकर्ताओं के लिए एक मंत्र बन गया। 1968 में अपने दूसरे पर्याय के दौरान, उन्होंने उडुपी में बडागुमलगे की मरम्मत की।

यहाँ तक ​​कि वर्ष 1984 में श्री स्वामीजी की तीसरी पर्याय के दौरान उडुपी के पूरे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और भौतिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी परिवर्तन किया। 1984 में स्वामीजी के रूप में उन्हें अपने तीसरे पर्याय के दौरान उडुपी में कृष्ण धाम नामक एक नया हॉल मिला। श्री स्वामीजी ने 18 जनवरी, 2016 को अपना पाँचवा पर्याय शुरू किया था और 18 जनवरी, 2018 को इसे पूरा किया।

यूपी के कुशीनगर में होगा देश का पहला ट्रांसजेंडर यूनिवर्सिटी, योगी सरकार का फैसला

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए यूनिवर्सिटी बनाया जाएगा। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है। इसका मकसद ट्रांसजेंडर समुदाय को कक्षा एक से स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) तक की पढ़ाई की सुविधा मुहैया कराना है। साथ ही वे शोध व पीएचडी की डिग्री भी हासिल कर सके। अपनी तरह का यह देश का पहला यूनिवर्सिटी होगा।

ख़बर के अनुसार, यह विश्वविद्यालय उत्‍तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले के फजीलनगर ब्‍लॉक में बनेगा। इसे अखिल भारतीय किन्‍नर शिक्षा सेवा ट्रस्‍ट बनाएगा। ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. कृष्ण मोहन मिश्रा ने बताया, “यह अपनी तरह का देश का पहला विश्‍वविद्यालय होगा, जहाँ ट्रांसजेंडर समुदाय के छात्र शिक्षा प्राप्‍त कर सकेंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगले साल 15 जनवरी से इस यूनिवर्सिटी में छात्रों को दाखिला मिलेगा। फरवरी-मार्च से कक्षाएँ शुरू हो जाएँगी।”

मिश्रा ने कहा, “विश्वविद्यालय में, ट्रांसजेंडर समुदाय कक्षा एक से स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई कर सकेंगे और यहाँ तक ​​कि शोध भी कर सकेंगे और पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे।”विधायक गंगा सिंह कुशवाहा ने कहा कि समुदाय के सदस्य शिक्षा प्राप्त करेंगे और देश को एक नई दिशा देने में सक्षम होंगे। भाजपा सांसद रमापति राम त्रिपाठी की मौजूदगी में रविवार को स्कूल का शिलान्यास किया गया।

ट्रांसजेंडर समुदाय ने योगी आदित्यनाथ सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया है और विश्वविद्यालय खोलने पर भी ख़ुशी जताई है। किन्नर अखाड़े के लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने फ़ैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे समुदाय के लोगों को शादियों में नाचने से परे एक जीवन जीने में मदद मिल सकेगी। इस तरह की पहल से उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है।

किन्नर समुदाय के सदस्यों में से एक गुड्डी किन्नर ने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि हम शिक्षित होंगे और समाज में सम्मान प्राप्त करेंगे। शिक्षा में शक्ति है और मुझे यक़ीन है कि इससे न केवल हमारा जीवन बल्कि दूसरों के जीवन को भी बदलेगा।”

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कॉन्ग्रेस की सहयोगी डीएमके के नेता के बंगले पर छापा, ₹1000 के 268 बंडल मिले

इंटेलिजेंस ब्यूरो के नई दिल्ली के अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर तमिलनाडु के बोमनमपलायम में एक बंगले की तलाशी ली। यह बंगला कॉन्ग्रेस के सहयोगी दल डीएमके के एक अधिकारी का है। बंगले के एक गुप्त कमरे से 1,000 रुपए के पुराने नोट के 268 बंडल बरामद किए। जब इन बंडलों की जाँच की गई तो पता चला कि हरेक बंडल का केवल पहला नोट पुराना था। उसके नीचे नोट के शेप में कटे अखबार के पन्ने थे। यानी हरेक बंडल का पहला नोट 1000 का था और बाक़ी रद्दी कागज़।

ख़बर के अनुसार, IB के अधिकारियों ने पुराने नोटों के आकार (शेप) में काटे गए अख़बार के 660 बंडल भी ज़ब्त किए हैं। इन बंडलों को कार्टन के बक्सों में रखा गया था और एक ऑफ़िस रूम की शेल्फ के अंदर एक गुप्त कमरे में रखा गया था। पुलिस के मुताबिक, IB अधिकारियों को इस बात की भनक लग गई थी कि राशिद और तीन अन्य अवैध रूप से पैसे के लेन-देन में लगे हैं। माना जा रहा है कि इन्होने उत्तर भारत के एक व्यक्ति के साथ सौदा किया था, जिसमें दावा किया गया था कि उनके पास बड़ी मात्रा में पुराने नोट (विमुद्रीकृत मुद्रा) हैं और एक बार केंद्र में सरकार बदलने के बाद नोट को फिर से वैध कर दिया जाएगा।

इस दावे पर संदेह करते हुए उस व्यक्ति ने IB अधिकारियों को सूचित कर दिया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस के साथ शनिवार (28 दिसंबर) की रात को घर पर छापा मारा। बंगला DMK अधिकारी आनंदन का है, जो DMK के पूर्व विधायक एलंगो का बेटा है। इसे राशिद ने किराए पर लिया था। वह बंगले में रॉयल टेक कंपनी चलाता है।

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उद्धव और बाल ठाकरे को देख कराह उठे कॉन्ग्रेस-एनसीपी के नेता, पूछा- सोनिया और पवार की फोटो कहाँ?

महाराष्ट्र में भले ही सभी किसानों का कर्ज माफ करने का ऐलान नहीं किया गया हो, लेकिन इसका श्रेय लेने के लिए सत्ताधारी महाविकास अघाड़ी (शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी) के मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। एनसीपी और कॉन्ग्रेस के नेता इस बात से नाराज हैं कि शिवसेना अकेले इसका श्रेय लूट रही है। असल में औरंगाबाद, पिंपड़ी-चिंचवाड़, पुणे सहित राज्य के कई हिस्सों में इसका श्रेय लेते हुए जो होर्डिंग लगाए गए हैं, उस पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके पिता शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की तस्वीर है।

होर्डिंग में बताया गया है कि शिवसेना ने किसानों की ‘पूर्ण कर्जमाफी’ का वादा पूरा किया। लेकिन, उसकी सहयोगी कॉन्ग्रेस और एनसीपी इससे बहुत उत्साहित नहीं हैं। पुणे कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता रमेश अय्यर ने कहा कि यह एक सामूहिक फैसला है। उचित होता कि इसका श्रेय गठबंधन के सभी साझेदारों को दिया जाता न कि किसी एक पार्टी को।

एनसीपी के विधान पार्षद सतीश चव्हाण ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि यदि शिवसेना ने पोस्टर में साथी दलों के शीर्ष नेताओं की तस्वीर भी लगाई होती तो अच्छा होता। कॉन्ग्रेस नेता नामदेव राव पवार ने कहा कि शिवसेना का यह कदम ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पोस्टर पर एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी की तस्वीर भी होनी चाहिए थी।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का ऐलान किया था। शनिवार को सरकार स्पष्ट किया कि जिन किसानों का फसल कर्ज दो लाख रुपए से अधिक है उनका कर्ज माफ नहीं होगा। सरकारी प्रस्ताव (जीआर) में कहा गया है कि महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्ज माफी योजना के अनुसार एक अप्रैल 2015 और 31 मार्च 2019 के बीच लिया गया दो लाख रुपए तक का कर्ज जो 30 सितंबर 2019 तक चुकाया नहीं गया है, उसे माफ किया जाएगा। जिन किसानों का फसल कर्ज और पुनर्गठन कर्ज दो लाख रुपए से अधिक है उन्हें इस योजना के तहत लाभ नहीं मिलेगा।

सावरकर पर एक सुर में बोली भाजपा-शिवसेना, राहुल गाँधी के विवादित बोल से दाँव पर महाराष्ट्र सरकार

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भगोड़े गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला की बेटी सोनिया शेख गिरफ़्तार, फर्जी पासपोर्ट पर बच्चे के साथ भाग रही थी विदेश

भगोड़े गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला की बेटी सोनिया लकड़ावाला उर्फ सोनिया शेख को गिरफ्तार किया गया है। वह फर्जी पासपोर्ट पर ​अपनी बेटी के साथ विदेश भागने की फिराक में थी। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने से पहले ही उसे हिरासत में ले लिया गया।

एक अधिकारी ने बताया कि सोनिया लकड़ावाला उर्फ़ सोनिया शेख शुक्रवार (27 दिसंबर) देर रात नेपाल जाने वाली एक उड़ान में सवार होने वाली थी, तभी पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। दस्तावेजों की जाँच के बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया गया।

इस साल की शुरुआत में खार के एक बिल्डर ने एजाज लकड़ावाला और उसके भाई अकिल के खिलाफ जबरन उगाही का एक मामला दर्ज कराया था। अकिल को बाद में मार्च में गिरफ़्तार कर लिया गया था। उगाही निरोधक इकाई के अधिकारी ने कहा, “अकिल ने हमें बताया था कि सोनिया के पास एक फर्जी पासपोर्ट है और वह देश से भागने की कोशिश करेगी। शुक्रवार को हमें सूचना मिली कि वह अपने बच्ची के साथ मुंबई हवाई अड्डे पर है। उसके बाद एक टीम ने वहाँ के आव्रजन अधिकारियों को सतर्क किया और उसे हिरासत में ले लिया गया।”

उन्होंने कहा कि सोनिया को पिछले साल मुंबई से पासपोर्ट जारी किया गया था लेकिन इसके लिए जाली दस्तावेज पेश किए गए थे। उसके खिलाफ पासपोर्ट कानून और भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप है। यह पता लगाने के लिए जाँच की जा रही है कि क्या खार के बिल्डर द्वारा दर्ज कराए गए उगाही मामले से उसका कोई संबंध है। अधिकारी ने कहा कि उसे शनिवार को अदालत में पेश किया गया जहाँ से उसे 30 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

छोटा राजन गैंग का सदस्य रहा एजाज मुंबई और दिल्ली में 24 से ज्यादा मामलों में वांछित है। इसमें हत्या और फिरौती के कई मामले शामिल हैं। कभी जोगेश्वरी इलाके में रहने वाले लकड़ावाला ने बांद्रा के सेंट स्टेनीस्लूस स्कूल से पढ़ाई की है। सूत्रों के मुताबिक, वह फिलहाल कनाडा में रह रहा है। साल 2003 में छोटा शकील के साथ साँठगाँठ के आरोप में राजन ने एजाज पर बैंकॉक में हमला करवाया था। उस दौरान कहा गया कि वह हॉस्पिटल से भागकर दक्षिण अफ्रीका पहुँच गया था।

हालाँकि, बाद में साल 2004 में एजाज काे कनाडा की रॉयल पुलिस ने ओटावा में पकड़ा। यहाँ कुछ दिन जेल में रहने के बाद उसे रिहा कर दिया गया। इसके बाद वह कई साल तक लापता रहा। 2008 में पुलिस को फिरौती के एक मामले में एजाज के लिप्त होने की जानकारी मिली।

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यूपी की ‘मर्दानी’ जो कॉन्ग्रेस के गुंडों से नहीं डरी: वीडियो से खुली पोल तो प्रियंका गॉंधी ने मारी पलटी

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर देश भर में हुई हिंसा में कॉन्ग्रेस के कई नेता नामजद हुए हैं। लगातार वे तथ्य भी सामने आ रहे हैं जिससे पता चलता है कि एनपीआर, एनआरसी और डिटेंशन सेंटर के नाम पर कॉन्ग्रेस लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही। चौतरफा घिरी कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गॉंधी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक नया सियासी बवंडर खड़ा करने की कोशिश की। लेकिन, जब तथ्य सामने आए तो उनके दावों की पोल खुल गई।

प्रियंका ने दावा किया कि वे पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी के परिवारवालों से मिलने जा रही थीं। रास्ते में पुलिस ने उनके काफिले को रोक लिया। एक महिला अधिकारी ने उनका गला दबाया और धक्का देकर गिरा दिया। प्रियंका गॉंधी से कथित बदसलूकी को लेकर कॉन्ग्रेस ने एक वीडियो भी जारी किया। दिलचस्प यह है कि इस वीडियो में प्रियंका गॉंधी के साथ कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं दिखाई पड़ती। एक महिला अधिकारी प्रियंका गॉंधी के पास जाती हैं और उनसे बात करने की कोशिश करती हैं। थोड़ी देर बातचीत होने के बाद प्रियंका के साथ खड़े ‘गुंडे’ महिला अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की करते दिखाई पड़ते हैं। वीडियो में कहीं भी महिला अधिकारी प्रियंका गॉंधी का गला पकड़ते या प्रियंका जमीन पर गिरती नजर नहीं आतीं, जैसा उन्होंने दावा किया था। कॉन्ग्रेस के इस वीडियो से जाहिर है कि प्रियंका जान-बूझकर झूठ बोल रही थीं ताकि सुर्खियॉं बटोर सके। दिलचस्प यह है कि इसके लिए प्रियंका से सवाल करने की बजाए मीडिया गिरोह महिला अधिकारी पर ही टूट पड़ा।

कॉन्ग्रेस द्वारा जारी वीडियो का स्क्रीनशॉट

जिस महिला अधिकारी को निशाना बनाने की कोशिश की गई वें हैं सर्कल ऑफिसर डॉ. अर्चना सिंह। वे प्रियंका गाँधी की फ्लीट की प्रभारी थी। उन्होंने बताया, “इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। मैं उनकी (प्रियंका गाँधी) फ्लीट इंचार्ज थी। उनके साथ किसी ने भी अभद्रता नहीं की। मैंने सिर्फ अपनी ड्यूटी की। इस घटना के दौरान मेरे साथ धक्का-मुक्की की गई थी।” लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने भी प्रियंका के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सीओ एमसीआर डॉ. अर्चना सिंह ने रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रियंका गाँधी पार्टी दफ्तर से गोखले मार्ग के लिए निकली थीं। उनकी फ्लीट तय रास्ते से न जाकर लोहिया पथ की तरफ जाने लगी। इस पर जब बातचीत की गई तो कोई सही जवाब नहीं मिला।

झूठ पकड़े जाने के बाद प्रियंका ने सफाई देते हुए कहा, “मैं दारापुरी के परिवार से मिलने जा रही थी। पुलिस ने बार-बार रोका। जब गाड़ी को रोका और मैंने पैदल जाने की कोशिश की तो मुझे घेर कर रोका और मेरे गले पर हाथ लगाया, मुझे गिरा भी दिया था एक बार।” हालॉंकि प्रियंका की सफाई में भी उनके दावे की तरह ही घालमेल है। पहले उन्होंने कहा था कि महिला अधिकारी ने गला दबाया। सफाई देते हुए कहा कि उनके गले पर हाथ लगाया। लेकिन, कॉन्ग्रेस की तरफ से जारी वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखता।

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साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर के उपचार का विज्ञान है BHU का ‘भूत विद्या’, झाड़-फूँक नहीं

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने एक नया पाठ्यक्रम शुरू किया है। नाम है ‘भूत विद्या’। नाम सुनते ही पहला ख्याल आता है बचपन में सुनी भूत वाली कहानियों का। भूत छुड़ाने का दावा करने वाले ओझा-गुणी का। बीबीसी जैसे मीडिया संस्थान भी “Bhoot Vidya: India university to teach doctors Ghost Studies” जैसे हेडलाइन से इसी तरह का भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन हकीकत कुछ और ही है। BHU का ‘भूत विद्या’ विशुद्ध विज्ञान है। इससे साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर का उपचार किया जाता है। ऑपइंडिया के संपादक अजीत भारती ने इस मसले पर बीएचयू के आयुर्वेद विभाग के डीन प्रोफ़ेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी से लंबी बातचीत कर इसके अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की। आप इसे विस्तार से सुन सकते हैं।

इस दौरान प्रोफेसर त्रिपाठी ने बताया कि इसका भूत से कोई लेना-देना नहीं है। न ही यह ओझा-गुणी की पढ़ाई है। इसकी शिक्षा के लिए चिकित्सा का ज्ञान होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पाठकों को आकर्षित करने के लिए मीडिया संस्थान इस तरह की हेडलाइन बना रहे हैं ताकि लोगों में भ्रम पैदा हो।

प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि सारा ज्ञान वेदों से आया है। चौथे वेद अथर्ववेद से आयुर्वेद निकला है। आयुर्वेद में आठ अंग होते हैं। शल्य, शालाक्य, काय चिकित्सा, कौमारभृत्य, अगदतंत्र, रसायन विज्ञान, वाजीकरण और भूत विद्या। इसे ही आष्टांग आयुर्वेद कहते हैं। बकौल प्रोफेसर त्रिपाठी इनमें से पॉंच को तो 15 भागों में विभाजित कर विकसित करने में कामयाबी मिल चुकी है। लेकिन, आयुर्वेद के आखिरी तीन भाग अभी तक पूरी तरह से विकसित नहीं हुए हैं। यही कारण है​ कि बीएचयू ने पहली बार इनकी पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। जून में तीनों का यूनिट बनाया गया था। जो आगे चलकर विभाग में बदल जाएगा। छह महीने का ये पाठ्यक्रम होगा। भूत विद्या की शिक्षा लेने वाले साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर यानी मनोदैहिक विकार का उपचार करने में समर्थ होंगे। इस तरह के विकार मन में पैदा होकर शरीर को कष्ट देते हैं।

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