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प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी बच्ची का नाम लिया, हमारे तो भाग्य खुल गए: ‘नागरिकता’ की माँ

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार (23 दिसंबर) को आयोजित जनसभा को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजनूं के टीला इलाक़े में जन्मी एक बच्ची का ज़िक्र किया। बता दें कि इस बच्ची का नाम ‘नागरिकता’ है, जिसे इस दुनिया में आए अभी महज़ 14 दिन ही हुए हैं। यह अपने आप में बेहद दिलचस्प बात है कि पीएम मोदी के लिए यह बच्ची बहुत ख़ास है, तभी तो उन्होंने अपने संबोधन में उसका ज़िक्र किया।

पीएम मोदी द्वारा रैली में बच्ची का नाम लिए जाने से उसकी माँ बहुत ख़ुश थीं। उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री ने हमारी बच्ची का नाम लिया, हमारे तो भाग्य खुल गए। इस बच्ची के रूप में हमारे घर में लक्ष्मी ने जन्म लिया है। अब हमारी नागरिकता की राह आसान हो जाएगी साथ ही बिजली पानी की सुविधा भी मिल सकेगी।”

जो लोग नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध कर रहे हैं उन्हें संदेश देते हुए नागरिकता की माँ ने कहा, “मैं उनसे यह कहना चाहूँगी कि हमें नागरिकता मिल रही है तो आप क्यों नाराज़ हो रहे हैं। तोड़फोड़ की ख़बर सुनकर बेहद दुख होता है।” पाकिस्तान में बिताए अपने दु:खद अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में तो हमें परेशान किया ही जाता था, लेकिन यहाँ हमें इज़्ज़त मिलेगी।”

बच्ची की माँ के अलावा, उसके दादा ने भी इस बात पर ख़ुशी ज़ाहिर की कि देश के प्रधानमंत्री ने बच्ची का ज़िक्र अपने संबोधन में किया। उन्होंने कहा कि पीए मोदी ने सब साफ़ कर दिया है कि किसी को बाहर नहीं किया जा रहा है। अब उम्मीद है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ लोग विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे।

दरअसल, दिल्ली के मजनूं के टीला में रह रहे पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी परिवार ने नागरिकता संशोधन क़ानून के लोकसभा और राज्यसभा से पास होने की ख़ुशी में 9 दिसंबर को जन्मी अपनी बच्ची का नाम ‘नागरिकता’ रख दिया था। बता दें कि पाकिस्तान में वर्षों से रह रहे हिन्दू परिवार वहाँ सताए जाने के बाद भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। मजनूं का टीला में रह रहे कुल 135 से अधिक परिवारों का जीवन बेहद ग़रीबी में गुज़र रहा था।

135 से अधिक परिवारों में 800 से अधिक लोग रहते हैं, जिनके पास नियमित तौर पर कोई रोज़गार नहीं है। 2013 में यहाँ शरणार्थी शिविर बनाए गए थे, जहाँ पाकिस्तान से भाग कर आए क़रीब 40 परिवार रहते थे। धीरे-धीरे यहाँ आने वाले शरणीर्थियों की संख्या बढ़कर 135 हो गई।

दिल्ली के मजनूं का टीला में पाकिस्तान से आकर रहने वाले हिन्दू शरणार्थी पड़ोसी मुल्क़ से इस कदर सताए गए कि वो ख़ुद को पाकिस्तानी कहलवाना तक पसंद नहीं करते। वो खुद को हिन्दुस्तानी कहते हैं। वहाँ पर रह रहे एक अन्य हिन्दू शरणार्थी से जब पूछा गया कि पाकिस्तान में रहने के दौरान उन्हें किन जुल्मों-सितम का सामना करना पड़ा तो उन्होंने काफी भावुक होते हुए कहा कि पाकिस्तान के अंदर हिन्दू होना गुनाह है, क्योंकि वहाँ हिन्दुत्व की कोई अहमियत ही नहीं है। यहाँ हिन्दुस्तान में हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सारे भाई-भाई है। भारत ही वो जगह है, जहाँ हम हिन्दू सुरक्षित हैं, इसलिए वो पाकिस्तान से भारत में रहने आए हैं।

पाकिस्तान से आए हिन्दुओं को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी और उनकी शरणार्थी पहचान ख़त्म हो जाएगी। इनमें से अधिकतर शरणार्थियों का कहना था कि पाकिस्तान में अपना घर छोड़ने का फ़ैसला इनके लिए आसान नहीं था। लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। धार्मिक उन्माद के कारण इन पाकिस्तानी हिन्दुओं को अपना देश छोड़ना पड़ा।

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जामिया के नाम पर बिल फाड़ने वाले नासिर आज़मी की खुली पोल, Zee Media ने दिया था परफॉर्मेंस सुधारने का अल्टीमेटम

Zee Media के प्रोडक्शन हेड नासिर आज़मी ने रविवार (22 दिसंबर) को सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इस्तीफ़ा दे दिया है। नासिर का कहना था कि जेएनयू, कन्हैया कुमार, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और हाल ही में जामिया मिलिया इस्लामिया की घटनाओं को कवर करने के मामले में Zee News “विफल” रहा है।

उन्होंने अपने ट्वीट में भी ऐसा ही दावा किया।

लोगों की नज़र में आने के लिए नासिर आज़मी ने कुछ राजनीतिक दलों और राजनेताओं को टैग भी किया, जिससे उन्हें कुछ रीट्वीट मिल सकें।

लेकिन नासिर आज़मी के Zee Media छोड़ने की असल वजह कुछ और है, जो उन्होंने नहीं बताई।


Zee News के नासिर आज़मी को मिला था परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान का नोटिस

ऑपइंडिया को सूत्रों ने बताया कि नासिर आज़मी को पहले ही एक महीने के लिए परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) में रखा गया था, क्योंकि उनके काम की परफार्मेंस मीडिया संस्थान के मानक पर खरी नहीं उतरती थी। इस बात को प्रमाणित करने के लिए ऊपर अपलोड किए दस्तावेज़ के अनुसार, उनका PIP टाइम 4 दिसंबर, 2019 से 4 जनवरी 2020 तक प्रभावी था।

22 दिसंबर को जब उन्होंने जामिया के छात्रों और अन्य लोगों के साथ नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ एकजुटता दिखाते हुए ट्वीट किया तो उन्होंने अपने PIP से जुड़े सच के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। शायद उन्हें यह लगा होगा कि उनका यह सच किसी के सामने तब तक नहीं आएगा, जब तक वो किसी से शेयर नहीं करेंगे। लेकिन सोशल मीडिया के युग में कुछ भी छिपाए नहीं छिपता।

Zee News के सीनियर प्रोड्यूसर अमित कुमार सिंह ने आज़मी के झूठ का पर्दाफ़ाश फेसबुक पर किया।

सिंह ने कहा कि आज़मी न केवल जामिया के छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि इस्लाम के नाम पर झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई अपनी बेहतरी के लिए किसी भी संस्थान को छोड़ने के लिए स्वतंत्र होता है। लेकिन यहाँ सवाल बेहतरी का नहीं, बल्कि मौक़ा देखकर ख़ुद को शहीद दिखाने का है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उम्मीद नहीं थी कि जिस संस्थान ने आपको (नासिर आज़मी) 10 सालों से भी ज्यादा वक्त तक आसरा दिया, जहाँ की बदौलत आपकी दाल-रोटी चलती रही वहाँ से रुखसत होते समय आप अपने झूठे ज़मीर को आगे कर देंगे। पोस्ट में नासिर से पूछा गया है कि उन्होंने अपने फैसले की वजह जेएनयू, एएमयू, कन्हैया कुमार और जामिया को बताया है। लेकिन, जब इन जगहों पर घटनाएँ हुई तो उनका जमीर क्यों नहीं जागा? यह एहसास होने के बाद कि ज़ी मीडिया में ज्यादा दिन तक ठहरना मुमकिन नहीं है तो आपने जामिया के छात्रों और दूसरे लोगों को बेवकूफ़ बनाना शुरू कर दिया।

सिंह ने नासिर को फ़टकारते हुए लिखा कि आपके ज़मीर के मुताबिक़ 2016 में ही आपको ज़ी मीडिया को बाय-बाय बोल देना चाहिए था..लेकिन कौन छोड़ता है मोटी तनख्वाह को, वो भी लाखो की तनख्वाह को। लेकिन, यहाँ तो ज़मीर का मसला था ही नहीं, आपने तो ज़मीर के नाम पर दूसरों को बेवकूफ़ बनाना शुरू कर दिया..इस बारे में सोचिएगा। उन्होंने लिखा कि CAA और NRC के बारे में अफ़वाह फैलाने वालों में आप भी शामिल हैं… आपको सच्चाई मालूम है, इसलिए PIP का ये लेटर उनके लिए अटैच कर रहा हूँ, जो आपके बारे में जानते नहीं हैं।

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4 दिन तक टंकी पर चढ़ी रही छात्राएँ, CM अशोक गहलोत करते रहे ट्वीट: अधर में 1.5 लाख छात्रों का भविष्य

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक ट्वीट किया कि वो टंकी पर चढ़ी छात्राओं से नीचे उतरने की अपील करते हैं। इसके बाद लोग अचम्भे में पड़ गए कि उनके इस ट्वीट का मतलब क्या है, क्योंकि काफ़ी लोगों को इसके पीछे की कहानी पता ही नहीं थी। दरअसल, जयपुर की जगतपुरा में सीबीआई गेट के पास व्याख्याता परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर 5 लड़कियाँ टंकी पर चढ़ गईं। शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को पानी टंकी पर चढ़ी ये लड़कियाँ मंगलवार को नीचे उतरीं। सरकार और पुलिस-प्रशासन लगातार उनसे मिन्नतें करता रहा कि वो लोग बातचीत के जरिए मामले को सुलझाएँ।

आज मुख्यमंत्री गहलोत ने ख़ुद ट्वीट कर उनसे नीचे उतरने की अपील की। टंकी के नीचे भारी पुलिस बल, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, सिविल डिफेंस की टीमें खड़ी रहीं। छात्राओं की माँग है कि स्कूल व्याख्याता परीक्षा तिथि 6 महीने आगे बढ़ाई जाए, पदों में बढ़ोतरी की जाए, अन्य राज्यों का कोटा निर्धारित किया जाए और उर्दू के पदों के लिए भी वैकेंसी निकाली जाए। सरकार ने साफ़ कर दिया है कि परीक्षा की तिथि आगे नहीं बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ही 2 बार तिथि आगे बढ़ाई जा चुकी है।

छात्राओं का टंकी पर चढ़ना आमजनों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया। छात्राओं को सोने के लिए रज़ाई, गद्दा और भूख-प्यास मिटाने के लिए खाना-पानी रस्सी के माध्यम से पहुँचाया जा रहा था। छात्राएँ माइक से बता रही थीं कि उन्हें क्या चाहिए और उन्हें वो सारी चीजें पहुँचाई जा रही थीं। नीचे भी कई छात्र-छात्राएँ जमा हो गए। उन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए टंकी पर चढ़ी छात्राओं का समर्थन किया। कई लड़कों ने स्थानीय लोकगीतों पर नृत्य कर अपना विरोध दर्ज कराया।

मुख़्यमंत्रीओ अशोक गहलोत के ट्वीट के रिप्लाई में कई अभ्यर्थियों व युवाओं ने अपनी परेशानी बताई, जिसे हम नीचे उनके नाम के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं:

सुरजीत सिहाग: श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय, मैं जब से यह भर्ती निकली है तब से तैयारी कर रहा हूँ। लेकिन इन साथियों की माँगों से इत्तेफाक रखता हूँ। मेरा आपसे निवेदन है कि आप एक बार इनकी बात पर अवश्य गौर करें।

राजू उलियाना: ये परीक्षा जुलाई मे होनी चाहिए। 1.5 लाख छात्रों के करियर का सवाल है।

विक्रम सिंह यादव: इस भर्ती को आगे खिसका कर आपका कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं हो जाएगा, परन्तु इसे जनवरी में करवाने की जिद में आप लाखों युवाओं के सपनों को खत्म कर रहे हैं। साहब, आपसे हाथ जोड़कर विनती है इस भर्ती को अपने नाक का सवाल न बनाएँ। हम बच्चे केवल तैयारी के लिए पर्याप्त समय माँग रहे हैं और कुछ नही। आप भी अपने अशिक्षित शिक्षामंत्री की तरह बातें मत कीजिए। हमें न्याय दीजिए।

भूपेंद्र विधौलिया: दूसरी बार सरकार ने बढ़ाया था, अभ्यर्थियों ने बढ़ाने की माँग नहीं की थी। ईडब्ल्यूएस में अचल संपत्ति का प्रावधान हटाने से इसके दायरे में आने वाले अभ्यर्थियों को फार्म संशोधन का मौका सरकार को देना चाहिए। परीक्षा स्थगित कर दो।

कुँवर भैंरो सिंह: श्रीमान, अगर ये परीक्षा जुलाई में हो जाएगी तो उन 1.56 लाख को अपना भाग्य आजमाने का अवसर मिल जाएगा वरना इन 1.56 लाख में से अगर किसी का सेलेक्शन हो भी गया तो RPSC (Rajasthan Public Service Commission ) इन्हें योग्य नहीं मानेगी क्योकि इनकी फाइनल परीक्षा का परिणाम जून तक आता है। श्रीमान, आपसे पुनः निवेदन हैं।

इसी तरह हज़ारों छात्रों ने अशोक गहलोत से नाराज़गी जताई। व्याख्याता परीक्षा का मुद्दा राजस्थान में गरमा गया है और इन छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इसे इगो का मुद्दा बना रहे हैं। ये भी गौर करने लायक बात है कि ज्यादातर नाराज़ छात्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक हैं।

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5 ट्रिलियन में जीरो गिनाने वाले कॉन्ग्रेसी गौरव वल्लभ चौथे नंबर पर, ज़मानत जब्त होनी तय

सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ और भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा के बीच की वो बहस ज़रूर देखी होगी, जिसमें 5 ट्रिलियन इकोनॉमी पर बात की गई थी। बात तो 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी पर शुरू हुई लेकिन कहीं और जाकर अटक गई। गौरव वल्लभ ने संबित से पूछा था कि 5 ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं? हालाँकि, संबित बार-बार तंज कसते रहे, जिसके बाद गौरव वल्लभ ने बिलियन और ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं, इसका गणितीय सूत्र बताया और वीडियो वायरल हो गया। यह वीडियो सोशल मीडिया में खूब चला और इससे उत्साहित होकर कॉन्ग्रेस ने गौरव को झारखंड के चुनावी मैदान में उतार दिया।

गौरव वल्लभ जमशेदपुर पूर्वी से बुरी तरह हार रहे हैं। वे चौथे नंबर पर चल रहे हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास 10829 वोटों के साथ पहले नंबर पर चल रहे हैं, वहीं भाजपा के बागी नेता व निर्दलीय उम्मीदवार सरयू राय 10673 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर चल रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता गौरव वल्लभ मात्र 1581 वोट अब तक मिले हैं। जेवीएम के अभय सिंह भी उनसे आगे चल रहे हैं। ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि जमशेदपुर पूर्वी सीट से गौरव वल्लभ की जमानत जब्त होनी तय है।

टीवी बहस में कुर्सी पर बैठ कर भले ही गौरव वल्लभ ये बता देते हों कि बिलियन और ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं, लेकिन जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से उन्हें बुरी हार का मुँह देखना पड़ेगा, ऐसा निश्चित लग रहा है। इस सीट पर उनकी लड़ाई मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा के बागी सरयू राय से थी। सरयू तो रघुवर मंत्रिमंडल का हिस्सा भी थे। 19 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में झारखण्ड में लगातार 5 साल सरकार चलाने वाले रघुवर दास एक बार फिर से जमशेदपुर पूर्वी से जीतते हैं तो वो झारखंड में मुख्यमंत्री की हार वाला मिथक तोड़ने में कामयाब होंगे।

रघुवर दास के गढ़ जमशेदपुर की सभी 6 सीटों पर चुनावी परिणाम के ट्रेंड्स का अब तक कुछ यूँ गणित रहा:

बहरागोड़ा: जेएमएम
घाटशिला: भाजपा
पोटका: भाजपा
जुगसलाई: जेवीएम
जमशेदपुर ईस्ट: भाजपा
जमशेदपुर वेस्ट: भाजपा

1995 में इस क्षेत्र से पहली बार जीतने वाले रघुवर लगातार छठी बार जीत दर्ज कर अपना गढ़ बचाएँगे या नहीं, ये देखने वाली बात होगी। कभी टाटा स्टील रोलिंग मिल में बतौर मजदूर काम करने वाले रघुवर 2014 में तब राज्य के मुखिया बने, जब जीत के बाद भाजपा आलाकमान ने उन पर भरोसा जताया। गौरव वल्लभ पूरे चुनाव के दौरान आरोप लगाते रहे कि पूर्वी जमशेदपुर से रघुवर भाजपा के घोषित प्रत्याशी हैं और सरयू अघोषित। यह दूसरी बात है कि पर्दे के पीछे से कॉन्ग्रेस के सहयोगी दल भी गौरव की मदद करने की बजाए सरयू राय पर दॉंव लगा रहे थे। आगे बढ़ने से पहले अब भी ट्रिलियन डॉलर वीडियो का आनंद ले सकते हैं:

गौरव वल्लभ, जिन्हें पता है कि 5 ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं

जमेशदपुर में 3 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने रघुवर दास के लिए वोट माँगा था। सरयू राय भले ही बागी होकर निर्दलीय लड़े लेकिन उन्होंने झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन के नेता हेमंत सोरेन के लिए चुनाव प्रचार भी किया था।

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सिखों के दिखाए राह पर बढ़े मुस्लिम, झेलम पर पुल के लिए 40 साल पुरानी मस्जिद हटाने को तैयार

आर्टिकल 370 के प्रावधान निरस्त किए जाने के बाद से जम्मू—कश्मीर का माहौल बदलने लगा है। विकास के लिए लोग खुद आगे आने लगे हैं। कुछ दिनों पहले श्रीनगर-बारामुला राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से में आड़े आ रहे गुरुद्वारे को हटाने के लिए सिखों के तैयार होने के बाद अब मुस्लिमों ने भी ऐसी ही मिसाल पेश की है। वे झेलम नदी पर प्रस्तावित पुल के आड़े आ रही 40 साल पुरानी एक मस्जिद को हटाने पर सहमत हो गए हैं। बता दें कि इस पुल का निर्माण वर्ष 2002 से रुका हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि रामपोरा में झेलम नदी पर प्रस्तावित 166 मीटर लंबे दो लेन वाले पुल को बनाने के लिए वर्ष 2002 में 10 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई थी। मगर इसके रास्ते में अबु तुराब मस्जिद, कुछ आवास और व्यावसायिक इमारतों समेत 18 बाधाएँ आड़े आ रहे थे, जिसके कारण काम अटका हुआ था। सबसे मुश्किल मस्जिद हटाने के लिए लोगों को तैयार करना था।

श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट और डेवलपमेंट कमिश्नर शाहिद इकबाल चौधरी ने कमरवारी के रामपोरा क्षेत्र में अबु तुराब मस्जिद की प्रबंध समिति के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू किया और सहमति के बाद शनिवार को मस्जिद को हटाने का काम शुरू हो गया है। समझौते के तहत मस्जिद का पुनर्निर्माण दूसरी जगह पर जिला प्रशासन 12 महीने के अंदर अपने खर्चे पर कराएगा। 2018 में जम्मू और कश्मीर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन से 2.5 करोड़ रुपए से अधिक की फंंडिंग मिलने के बावजूद, मस्जिद सहित कुल 18 बाधाओं की वजह से काम ठप रहा।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

शाहिद इकबाल चौधरी ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने में आ रही अड़चन को सुलझा लिया गया है, काम फिर से शुरू हो जाएगा। अन्य अड़चनों को दूर करने के लिए भी योजना तैयार की गई है। जिसमें एक फायर स्टेशन और 16 आवासीय और व्यावसायिक इमारतें हैं। उक्त पुल के निर्माण के साथ जिला प्रशासन झेलम के साथ बाढ़ सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के लिए काम करेगा। आसपास की सड़कों की मरम्मत की जाएगी और पूरे इलाके में स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएँगी।

बता दें कि श्रीनगर में विकास के लिए स्थानीय लोगों के आगे आने का यह दूसरा उदाहरण है। इससे पहले जिला मजिस्ट्रेट और डेवलपमेंट कमिश्नर शाहिद चौधरी ने इस माह की शुरुआत में श्रीनगर-बारामुला राष्ट्रीय राजमार्ग पर जैनकोट में ऐतिहासिक दमदमा साहिब गुरुद्वारा के प्रबंधन के साथ सफलतापूर्वक बातचीत कर उनको इस 100 साल पुराने गुरुद्वारे को दूसरे स्थान पर स्थापित करने के लिए सिखों को तैयार कर लिया था। गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण भी सरकारी खर्च पर किया जाएगा।

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2014 में जब झारखंड में विधानसभा चुनाव हुआ, तब हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री थे। दुमका उनके पिता और
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का गढ़ भी रहा है, जहाँ से ‘गुरुजी’ 8 बार सांसद रह चुके हैं। 2014 के चुनाव में झारखंड की राजनीति में एक ऐसी महिला का उदय हुआ, जिन्होंने संगठन में ख़ुद को पहले ही साबित कर दिया था। अपने ही गढ़ में हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री रहते इस महिला से हार का सामना करना पड़ा था। हेमंत को 65,105 वोट मिले थे। लुइस मरांडी ने 70,367 पाकर मुख्यमंत्री को ही हरा दिया।

लुइस मरांडी ही दुमका में बड़ा उलटफेर करने वाली महिला थीं। उन्हें रघुवर मंत्रिमंडल में महिला एवं बाल विकास, अल्पसंख्यक कल्याण और सामाजिक कल्याण जैसे मंत्रालय दिए गए। वो झारखंड महिला आयोग की सदस्य रह चुकी हैं। उनके नेतृत्व में झारखंड भाजपा की महिला प्रकोष्ठ ने नई ऊँचाइयों को छुआ। मंत्री रहते उनकी ‘तेजस्विनी’ योजना की ख़ूब चर्चा हुई, जिसमें 14 से 24 वर्ष तक की किशोरियों को शिक्षा के साथ-साथ रोज़गार प्रशिक्षण का भी प्रावधान किया गया है।

लुइस मरांडी ने 2014 में जो करामात किया था, वो 5 वर्षों बाद 2019 में उसे फिर से दोहराती हुई नज़र आ रही हैं। चुनाव आयोग के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, उन्हें अब तक 22019 वोट मिले हैं, जबकि 19592 वोटों के साथ हेमंत सोरेन उनसे काफ़ी पीछे चल रहे हैं। लुइस को फ़िलहाल 48.79 % वोट मिले हैं, वहीं हेमंत सोरेन 43.41 % मतों के साथ पीछे चल रहे हैं। दोनों के मतों के बीच के अंतर की बात करें तो ये 2427 (5.38%) है। हेमंत को लगातार दूसरी बार लुइस उनके ही गढ़ में पटखनी देने की ओर बढ़ रहीं हैं।

1995 में भाजपा की सदस्य बनी लुइस को राजनाथ सिंह ने भाजपा अध्यक्ष रहते पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया था। ये पार्टी का उन पर भरोसा ही था कि 2009 में चुनाव हारने के बावजूद उन पर 2014 में दोबारा भरोसा जताया गया। बनारस काशी विद्यापीठ से शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने राँची विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि ली। गौर करने वाली बात ये है कि पूरे झारखण्ड में दो ही पीएचडी उम्मीदवार हैं और लुइस मरांडी उनमें से एक हैं। जिस दुमका में कभी वह सहायक शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं, उसी दुमका से जीत कर वह मंत्री बनीं।

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा ने 2014 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया, तब लुइस मरांडी झारखंड में भाजपा की चुनावी रणनीति की सूत्रधार रहीं। पार्टी ने 14 में से 12 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की और इस तरह से उनका क़द पार्टी और राज्य की राजनीति में और बढ़ गया।

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झारखंड विधानसभा चुनाव के अब तक के रूझानों में भाजपा और झामुमो गठबंधन के बीच काँटे की टक्कर दिख रही है। जब भाजपा की सीटें बढ़नी लगती है तब रवीश कुमार जनता को कोसने लगते हैं। वहीं जब झामुमो गठबंधन आगे निकल जाता है तो रवीश का चेहरा खिल उठता है। एनडीटीवी के स्टूडियो में एक अलग ही माहौल है, जहाँ ख़ुशी और गम इस आधार पर तय हो रहा है कि भाजपा हारती दिख रही है या फिर आगे निकलते। रवीश कुमार ने जैसे ही देखा कि भाजपा आगे बढ़ रही है, उन्होंने युवाओं को कोसते हुए कहा कि उन्हें अब रोज़गार से कोई मतलब नहीं रह गया है।

सुबह के रुझानों में कॉन्ग्रेस-झामुमो-राजद गठबंधन को बढ़त मिलती दिख रही थी, तब NDTV के स्टूडियो में एक अलग माहौल था। लेकिन जैसे ही भाजपा की तरफ काँटा बढ़ना शुरू हुआ, रवीश ने सुर बदल लिया और मतदाताओं के विवेक पर ही सवाल उठाने लगे।

रवीश बार-बार यह बात भूल जाते हैं कि लोकतंत्र में एक आम आदमी के वोट की कीमत वही होती है जो उनके जैसे परम ज्ञानियों के वोट की है। शायद यही अभिजात्यता और घमंड उन्हें हर मतदान के बाद यह कहने पर मजबूर कर देता है (भाजपा की जीत की स्थिति में) कि युवाओं को रोजगार से मतलब नहीं। उनका पूरा एजेंडा पूरे लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया और एक वोट के महत्व को बेकार साबित करने पर टिका हुआ है।

परिणाम जब भाजपा के खिलाफ जाते हैं तब रवीश को यह याद आता है कि युवाओं ने समझदारी दिखाई है। इससे सीधा दिखता है कि रवीश और रवीश जैसों के लिए गैरभाजपा सरकार कितनी आवश्यक दिखती है। यह विचित्र बात है कि जब जनता भाजपा के खिलाफ जाती है तभी वो रवीश को समझदार दिखती है अन्यथा वो मजे लेने लगते हैं कि युवाओं को तो मतलब ही नहीं, वो तो भावनात्मक मुद्दों पर वोट दे रहे हैं।

सवाल यह है कि बदलते रुझानों के साथ रवीश-छाप लोगों के लिए जनता की प्रकृति और प्रवृत्ति भी मिनट-दर-मिनट क्यों बदलती जाती है? क्या लोकतंत्र का हर पहलू रवीश कुमार के लिए बेकार हो चुका है।

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1 लाख की भीड़ जमा कर अमित शाह को कोलकाता में घुसने नहीं दूँगा: ममता के मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता और ममता बनर्जी के मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ने रविवार (दिसंबर 22, 2019) को धमकी दी कि अगर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को फौरन वापस नहीं लिया गया तो जब भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता दौरे पर आएँगे, तो उन्हें एयरपोर्ट से बाहर कदम नहीं रखने दिया जाएगा। बता दें कि सिद्दीकुल्ला चौधरी जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

टीएमसी नेता का कहना है कि कानून मानवता और देश के नागरिकों के खिलाफ है, जो सदियों से यहाँ रह रहे हैं। CAA के विरोध में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की रैली के दौरान उन्होंने कहा, ”अगर जरूरत पड़ी तो हम लोग उन्हें (शाह को) शहर के हवाई अड्डे के बाहर कदम नहीं रखने देंगे। उन्हें रोकने के लिए हम लोग एक लाख लोगों को वहाँ जमा कर सकते हैं।”

हालाँकि चौधरी ने दावा किया कि संगठन का प्रदर्शन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, “हम लोग हिंसक प्रदर्शनों में यकीन नहीं करते। लेकिन निश्चित रूप से हम लोग CAA और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) का जी जान से विरोध करेंगे।” चौधरी ने कहा कि बीजेपी को लोगों ने पहले ही नकार दिया है। अभी कोलकाता समेत पूरे देश में चल रहा विरोध-प्रदर्शन इसका गवाह है।

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने रानी रासमोनी एवेन्यू में रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “56 इंच के सीने” ने देश के लोगों को निराश किया है, क्योंकि वो “नफरत और विभाजन की राजनीति” कर रहे हैं। ममता के मंत्री ने कहा, “वे (मोदी और शाह) क्या कर रहे हैं, लोगों पर एक के बाद एक करके अपना एजेंडा थोप रहे हैं। वे चर्चा में विश्वास नहीं करते हैं, वे बातचीत में विश्वास नहीं करते हैं। हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे।” साथ ही रैली में वक्ताओं ने CAA और NRC के विरोध में सड़कों पर उतरने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का शुक्रिया अदा किया।

सिद्दीकुल्ला चौधरी के इस बयान पर बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि चौधरी पहले भी ‘मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मौन समर्थन’ से इस तरह का ‘भड़काऊ बयान’ दे चुके हैं। घोष ने कहा, “राज्य का कोई मंत्री कैसे इस तरह धमकी दे सकता है?”

बता दें कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC राष्ट्रीय स्तर पर NRC को लागू करने के सबसे मुखर आलोचकों में से एक है। यहाँ तक कि बंगाल की सीएम ने CAA और NRC पर संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले जनमत संग्रह की भी माँग की है। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में पश्चिम बंगाल में उग्र प्रदर्शन हुआ, कई रेलवे स्टेशन और ट्रेनों पर हमला गया।

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झारखंड: गढ़ में हार की ओर बढ़ रहे विपक्ष के CM उम्मीदवार हेमंत सोरेन, भाभी भी चल रहीं पीछे

झारखंड में विपक्ष को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। झामुमो-कॉन्ग्रेस-राजद गठबन्धन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हेमंत सोरेन अपने ही गढ़ से हारने की ओर अग्रसर हैं। अगर अभी तक के रुझानों की बात करें तो उन्हें भाजपा की लुइस मरांडी के हाथों हार का सामना करना पड़ सकता है। हेमंत सोरेन झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं, ऐसे में उनका हारना पार्टी के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है। न सिर्फ़ झामुमो, बल्कि कॉन्ग्रेस के लिए भी इसे एक बड़े झटके के रूप में देखा जाएगा।

ताज़ा आँकड़ों पर नज़र डालें तो हेमंत सोरेन को महज 3492 वोट मिले हैं, वहीं लुईस मरांडी 9821 वोटों के साथ उनसे काफ़ी आगे दिख रही हैं। दुमका में सोरेन परिवार की प्रतिष्ठा दाँव पर है, क्योंकि ये ‘गुरुजी का गढ़’ भी कहा जाता है। हेमंत सोरेन के पिता और झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन यहाँ से 8 बार सांसद रह चुके हैं। चुनाव आयोग की आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, अभी तक सोरेन को 24.97% मत मिले हैं, वहीं 70.23% मतों के साथ लुइस मरांडी एकतरफा जीत की ओर बढ़ रही हैं।

दुमका लोकसभा क्षेत्र की एक और सीट जामा से भी सोरेन परिवार की प्रतिष्ठा दाँव पर लगी है, क्योंकि यहाँ से पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की बहू और हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन चुनाव लड़ रही हैं। सीता सोरेन भी पीछे चल रही हैं। उन्हें अब तक के रुझानों के अनुसार 2277 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के सुरेश मुर्मू 4470 वोटों के साथ उनसे आगे हैं। सोरेन को अब तक 28.02% वोट मिले हैं तो मुर्मू 55.02% मतों के साथ आगे हैं।

दुमका और जामा से सोरेन परिवार के हार के बाद इन चर्चाओं को काफ़ी बल मिलेगा कि शिबू सोरेन का गढ़ उनके हाथ से फिसलता जा रहा है। अगर पूरे राज्य के रुझानों की बात करें तो चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार भाजपा 22 और झामुमो 21 सीटों पर आगे चल रही है। कॉन्ग्रेस की 10 और राजद की 5 सीटों को मिला दें तो विपक्षी गठबंधन 36 सीटों पर आगे है।

जामिया में दंगाइयों ने ही लगाई थी बसों में आग: CCTV फुटेज जारी होने के बाद माफ़ी माँगेंगे सिसोदिया?

आपको याद होगा कि जामिया नगर में कुछ दिनों पहले 4 सार्वजनिक बसों को आग के हवाले कर दिया गया था। इसके अलावा 100 से भी अधिक प्राइवेट वाहनों को भी फूँक दिया गया था। जिस जगह पर ये वारदात हुई, वहाँ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। वहाँ पर आम आदमी पार्टी के विधायक अमनतुल्लाह ख़ान को भी भीड़ का नेतृत्व करते देखा गया था। हिंसा होने के बाद पुलिस को जामिया कैम्पस में घुस कर स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा था। इसके बाद जामिया व जेएनयू के छात्रों ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप मढ़ा था।

अब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कुछ फोटो शेयर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने ही बसों में आग लगाई और छात्रों को फँसा दिया। हालाँकि सिसोदिया ने जो फोटो शेयर किए थे, उनमें पुलिस आग बुझाती हुई दिख रही है। अब दिल्ली पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज जारी करने के बाद लोग आप नेता सिसोदिया माफ़ी की माँग कर रहे हैं।

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि दंगाई बाइकों पर पेट्रोल डाल कर उन्हें आग के हवाले कर रहे हैं। ये वीडियो फुटेज 15 दिसंबर के हैं। दंगाइयों को वीडियो में पत्थरबाजी करते हुए भी देखा जा सकता है। उन्होंने मास्क पहन कर अपनी पहचान छिपाने का प्रयास किया और कई वाहनों को आग के हवाले किया।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि मोटरसाइकिलों में से पेट्रोल भी निकाल लिया गया। पीछे हिंसक भीड़ को पत्थरबाजी करते हुए देखा जा सकता है। इस घटना के बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने आशंका जताई थी कि ये दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश है। वहीं मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और इस तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है। इससे भी अधिक हिंसक वारदातें सीलमपुर में हुईं, जहाँ दंगाइयों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की और आमजनों को भी घायल कर दिया।

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