Home Blog Page 524

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस आई एक्शन में, अब तक 175 की हुई पहचान: LG ऑफिस के आदेश के बाद कार्रवाई, जल्द सब भेजे जाएँगे अपने मुल्क

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाते हुए 175 संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की है। अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ ये अभियान शनिवार (21 दिसंबर 2024) की शाम 6 बजे से बाहरी दिल्ली क्षेत्र में शुरू हुआ और लगातार 12 घंटे तक चला। पुलिस का यह कदम दिल्ली में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश के बाद आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान के लिए यह अभियान 11 दिसंबर को शुरू किया गया था। इससे ठीक एक दिन पहले उपराज्यपाल सचिवालय ने इन व्यक्तियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पुलिस ने बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता जाहिर करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।

बाहरी जिले के पुलिस अधिकारी ने बताया कि स्थानीय थानों, विशेष इकाइयों और जिला विदेशी प्रकोष्ठ के अधिकारियों की विशेष टीमों को गठित किया गया है। इन टीमों को घर-घर जाकर जाँच करने और संदिग्ध प्रवासियों की जानकारी जुटाने का निर्देश दिया गया है। अभियान के दौरान 175 लोगों की पहचान की गई, जो बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे थे।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि जिन व्यक्तियों की पहचान की गई है, उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। उनके दस्तावेजों की जाँच की जा रही है और उनके स्थानीय संपर्कों के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है। इन जाँचों के परिणामों के आधार पर कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने यह भी कहा कि दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों की संख्या में इजाफा हो रहा है, जिससे सुरक्षा को खतरा हो सकता है। बाहरी जिला पुलिस ने इन व्यक्तियों को हिरासत में लेने और उन्हें उनके मूल स्थान पर वापस भेजने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अवैध प्रवासियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी चलता रहेगा, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

PM मोदी को मिला कुवैत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ : जानें अब तक और कितने देश प्रधानमंत्री को दे चुके हैं अवार्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुवैत दौरे के दूसरे दिन देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ से नवाजा गया। यह सम्मान कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह ने प्रदान किया। यह पुरस्कार भारत और कुवैत के बीच मजबूत होते संबंधों और पीएम मोदी के योगदान को मान्यता देने के लिए दिया गया। यह पीएम मोदी को किसी देश द्वारा दिया गया 20वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।

‘ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर’ कुवैत का प्रतिष्ठित नाइटहुड पुरस्कार है, जो राष्ट्राध्यक्षों और विदेशी शाही परिवारों के सदस्यों को दिया जाता है। इससे पहले यह सम्मान बिल क्लिंटन, प्रिंस चार्ल्स और जॉर्ज बुश जैसी प्रमुख हस्तियों को भी दिया जा चुका है। इस सम्मान की स्थापना 1974 में की गई थी। यह कुवैत के ऐतिहासिक नेता मुबारक अल-सबाह की स्मृति में दिया जाता है, जिन्होंने 1897 में कुवैत को ओटोमन साम्राज्य से अलग एक स्वतंत्र देश के रूप में स्थापित किया था।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह से शानदार मुलाकात हुई। हमने फार्मास्युटिकल्स, आईटी, फिनटेक, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। हमारे देशों के घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करते हुए इसे रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुँचाया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में हमारी दोस्ती और भी प्रगाढ़ होगी।”

कुवैत यात्रा पर पीएम मोदी, दौरा बेहद अहम

पीएम मोदी कुवैत के दो दिवसीय दौरे पर हैं। यह यात्रा कुवैत के अमीर के निमंत्रण पर हो रही है। कुवैत की राजधानी में उन्होंने भारतीय प्रवासियों के साथ मुलाकात की और एक भारतीय श्रमिक शिविर का दौरा भी किया। पीएम मोदी ने कुवैत के साथ व्यापार, निवेश और ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की।

भारत और कुवैत के संबंध बेहद खास

कुवैत भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और वहाँ भारतीय समुदाय सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। भारत और कुवैत के बीच वित्त वर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.47 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। कुवैत भारत का छठा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों का लगभग तीन प्रतिशत पूरा करता है।

पीएम मोदी को मिल चुके हैं 20 से ज्यादा देशों के शीर्ष सम्मान

कुवैत से पहले पीएम मोदी को कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है। हाल ही में उन्हें गुयाना, डोमिनिका और बारबाडोस ने भी सम्मानित किया। अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में शामिल हैं:

अफगानिस्तान: स्टेट ऑर्डर ऑफ गाजी अमीर अमानुल्लाह खान (2016)
फिलिस्तीन: ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन (2018)
यूएई: ऑर्डर ऑफ जायद (2019)
फ्रांस: लीजन ऑफ ऑनर (2023)
रूस: ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू एपोस्टल (2023)
मिस्र: ऑर्डर ऑफ द नाइल (2023)

पीएम मोदी की यह यात्रा भारत और कुवैत के बीच राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जिस संभल में हिंदुओं को बना दिया अल्पसंख्यक, वहाँ की जमीन उगल रही इतिहास: मंदिर-प्राचीन कुओं के बाद मिली ‘रानी की बावड़ी’, दफन थी प्राचीन इमारत-सुरंग

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बंद पड़े मंदिरों के अलावा खुदाई के दौरान एक अन्य ऐतिहासिक धरोहर निकल कर सामने आई है। इसी जिले के चंदौसी क्षेत्र में राजस्व विभाग ने एक प्राचीन बावड़ी को भी खोज निकाला है। काफी बड़ी संरचना वाली इस बावड़ी को मिट्टी से दफन कर दिया गया था। फ़िलहाल प्रशसन द्वारा खुदाई का काम जारी है। माना जा रहा है कि अभी यहाँ पर सुरंग भी मिल सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुदाई का ये काम चंदौसी के लक्ष्मणगंज इलाके में हो रहा है। साल 1857 तक ये क्षेत्र हिन्दू बहुल हुआ करता था। यहाँ सैनी बहुतायत हुआ करते थे। वर्तमान में यह जगह मुस्लिम बहुल हो चुकी है। इस जगह की खुदाई की माँग को लेकर संभल के जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र मिला था। प्रार्थना पत्र में लक्ष्मणगंज के अंदर रानी बिलारी की प्रचीन बावड़ी होने का दावा किया गया था। इसी शिकायत का संज्ञान लेकर राजस्व विभाग की टीम लक्ष्मण गंज पहुँची थी।

बस्ती के बीच में एक जगह चिन्हित कर के खुदाई शुरू हुई। कुछ ही देर बाद जमीन के नीचे प्राचीन इमारतें मिलनी शुरू हो गईं। मीडिया से बात करते हुए राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नीचे 2 मंजिला इमारत दबी हुई है। यहाँ मौजूद बावड़ी और विशाल कुआँ सरकारी अभिलेखों में भी दर्ज है। बावड़ी की गहराई लगभग 250 फ़ीट बताई जा रही है। प्रशासन के पास नक्शा भी मौजूद है। आगे की खुदाई नक्शे के आधार पर की जाएगी। खुदाई का काम अभी भी जारी है। इसके विजुअल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

इस बीच भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) की टीम संभल पहुँच कर काम पर लग गई है। टीम ने यहाँ कल्कि मंदिर से अपनी जाँच पड़ताल शुरू की। इसके अलावा ASI 5 अलग-अलग जगहों पर भी सर्वे के लिए पहुँची। इन जगहों में 5 तीर्थ और 19 कुएँ शामिल हैं। इन कुओं में कल्कि मंदिर में मौजूद अति प्राचीन कृष्ण कूप भी शामिल है। शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए ASI के इस दौरे को हर संभव गुप्त ही रखने की कोशिश की गई थी।

गौरतलब है कि संभल में दंगों का पुराना इतिहास रहा है। इन्हीं दंगों के बल पर संभल नगरपालिका क्षेत्र से धीरे-धीरे हिंदुओं को मिटाया गया। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

8 दिन पीछा कर पुलिस ने चोर अब्दुल और सादिक को पकड़ा, कोर्ट ने 15 दिन बाद दे दी जमानत: बाहर आने के बाद जज के घर से ही चुराए नकदी और जेवर

राजस्थान के जोधपुर में पुलिस ने शनिवार (21 दिसंबर 2024) को दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया। इनका नाम मोहम्मद सादिक और अब्दुल्ला है। दोनों पर आरोप है कि ये पहले मकानों की रेकी करते थे और मौका देखकर वहाँ चोरी करते थे। हाल ही में इन्होंने एक जज के घर से लाखों के गहने और नकदी पर हाथ साफ किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सादिक और अब्दुल्ला जोधपुर के बकरा मंडी इलाके में रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों शातिर नकबजन हैं और इनके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं। सादिक पर तीन और अब्दुल्ला पर सात केस दर्ज हैं। इन्होंने 3 नवंबर 2024 को पाली जिले की इंद्रा कॉलोनी में एक बंद मकान को निशाना बनाया था, जहाँ से करीब 20 लाख रुपये के गहने चोरी किए थे। घटना के समय मकान मालिक पूरे परिवार सहित एक मंदिर में दर्शन करने चित्तौड़गढ़ गए थे।

पुलिस ने उस मामले में कड़ी मेहनत करते हुए 400 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले और 11 नवंबर को दोनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में चोरी के कुछ गहने बरामद हुए। इसके बाद पुलिस के सामने उन्होंने सुधरने का वादा किया और 14 नवंबर को जेल भेज दिए गए, लेकिन 29 नवंबर को उन्हें अदालत से जमानत मिल गई।

जेल से छूटने के बाद दोनों ने फिर से चोरी शुरू कर दी। 13 दिसंबर 2024 को उन्होंने चित्तौड़गढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ सांधु के बंद मकान को निशाना बनाया। यहाँ से लाखों के गहने और नकदी चुराकर फरार हो गए।

मजिस्ट्रेट के घर चोरी होने से पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और 50 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। इसके बाद चोरों की पहचान सादिक और अब्दुल्ला के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों की तलाश में दबिश डालनी शुरू की। आखिरकार शनिवार (21 दिसंबर) को इन्हे जोधपुर से दबोच लिया गया है।

पुलिस की जाँच में पता चला कि सादिक और अब्दुल्ला महँगे शौक और जुआ-सट्टा खेलने के आदी हैं। ये बंद मकानों की रेकी करते और रात में वहाँ चोरी को अंजाम देते। चोरी करते वक्त एक व्यक्ति घर के अंदर होता और दूसरा बाहर निगरानी करता। खतरा होने पर बाहर खड़ा व्यक्ति अंदर वाले को अलर्ट कर देता, जिससे वे भाग जाते थे। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच और कानूनी कार्रवाई कर रही है।

बाल उखाड़े, चाकू घोंपा, कपड़े फाड़ सड़क पर घुमाया: बंगाल में मुस्लिम भीड़ ने TMC की महिला कार्यकर्ता को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, पीड़िता ने BJP से लगाई मदद की गुहार

पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में एक महिला के साथ मुस्लिम भीड़ द्वारा बर्बरता किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की कार्यकर्ता है जिसकी पिटाई के बाद सड़क पर घुमाया गया है। इस कांड का खुलासा भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार (21 दिसंबर 2024) को किया है।

यह मामला मेदनीपुर के नंदकुमार थानाक्षेत्र में आने वाले गाँव श्यामसुंदर पुर का है। शुक्रवार (20 दिसंबर) को यहाँ 42 वर्षीया हिन्दू महिला ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में महिला ने बताया कि उनके 23 वर्षीय बेटे का लम्बे समय से प्रेम संबंध एक 19 साल की मुस्लिम लड़की से था। इसी बीच 19 नवंबर को प्रेमी जोड़ा एक साथ अपना-अपना घर छोड़ कर कहीं चला गया। अब दोनों ने शादी कर ली है। इसी बात से मुस्लिम पक्ष नाराज था।

पीड़िता किराने की दुकान चला कर अपने परिवार का गुजारा करती है। इसी दुकान पर शुक्रवार (20 दिसंबर) को सुबह लगभग 8:15 पर एक भीड़ ने हमला कर दिया। हमलावरों के पास डंडे, लोहे की रॉड, चाकू, कैंची आदि बताए जा रहे हैं। हमलावर भीड़ ने महिला को पहले गंदी-गंदी गालियाँ दीं और 2 CCTV कैमरे तोड़ डाले। खुद को बचाने के लिए महिला ने दुकान का शटर बंद कर लिया। तब हिंसक भीड़ ने महिला के घर और दुकान में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

आखिरकार भीड़ महिला के घरों के दरवाजे तोड़ कर अंदर घुसने में कामयाब रही। पीड़िता को बेरहमी से पीटा गया। महिला का घुटना बुरी तरह से घायल हो गया। महिला के एक पैर पर चाकू घोंप दिए गए। पुरुष हमलावरों ने पीड़िता के बालों को उखाड़ लिया। पीड़िता के कपड़े फाड़ कर उसे सड़क पर घुमाया गया। हमलावरों ने अपनी इन करतूतों के वीडियो भी बनाए। इसी दौरान पीड़िता की दुकान से किराने का सामान और कैश लूट लिया गया। महिला की चीखें सुन कर आपसस के लोग जमा हुए। उन्होंने जैसे-तैसे पीड़िता को बचाया।

हमलावरों को आपराधिक सोच और जमीन हड़पने वाला बताकर पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुवेंदु अधिकारी का दावा है कि पीड़िता तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेत्री है। उन्होंने आगे लिखा कि हमलावर भीड़ तृणमूल कॉन्ग्रेस की वोटबैंक है जिसकी वजह से उन पर पुलिस ने भी कोई एक्शन नहीं लिया है। अब पीड़िता की मदद विश्व हिन्दू परिषद जैसे संगठन कर रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस में मौजूद हिन्दुओं से कहा है कि केवल बीजेपी ही उनकी रक्षा कर सकती है।

बताते चलें कि इसी साल जून में भी उत्तरी दिनाजपुर में तृणमूल कॉन्ग्रेस समर्थकों ने एक महिला को तालिबानी अंदाज में पीटा था। तब इस घटना का वीडियो वामपंथी पार्टी (CPI- M) के नेता मोहम्मद सलीम ने शेयर किया था। उन्होंने बाहुबली माने जाने वाले एक स्थानीय TMC नेता तजेमुल को इस घटना का गुनहगार बताया था। तजेमुल को लोग JCB कह कर बुलाते हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी क्षेत्र के फुलबारी में एक महिला ने सार्वजानिक पिटाई के सदमे में आत्महत्या कर लिया था।

जिस कॉपर प्लांट को बंद करवाने के लिए विदेशों से आया पैसा, अब उसे शुरू करने के लिए तमिलनाडु में लोग कर रहे प्रदर्शन: जानिए कैसे भारत को हुआ नुकसान, चीन को फायदा

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट को फिर से खोलने की माँग को लेकर स्थानीय लोगों ने शुक्रवार (20 दिसंबर 2024) को विरोध-प्रदर्शन किया। यह प्लांट 2018 में तमिलनाडु सरकार के आदेश पर बंद कर दिया गया था। ऐसा ही आदेश कोर्ट ने भी दिया था। भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कॉन्ग्रेस (INTUC) ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उनकी माँग है कि कॉपर प्लांट और अन्य बंद उद्योगों को दोबारा शुरू किया जाए ताकि क्षेत्र में बेरोजगारी कम हो सके।

स्टरलाइट कॉपर प्लांट के बंद होने से 1,500 प्रत्यक्ष और 40,000 अप्रत्यक्ष नौकरियाँ चली गईं। इससे न केवल स्थानीय लोगों पर असर पड़ा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा प्रभाव हुआ। प्लांट बंद होने के बाद, भारत, जो पहले तांबे का निर्यातक था, अब आयातक बन गया। 2017-18 में भारत शीर्ष पाँच तांबा कैथोड निर्यातकों में शामिल था। लेकिन प्लांट के बंद होने के बाद 2018-19 से भारत तांबे का शुद्ध आयातक बन गया।

स्टरलाइट कॉपर देश की 38% तांबे की जरूरत पूरी करता था और हर साल लगभग 4 लाख टन तांबे का उत्पादन करता था। प्लांट के बंद होने का सबसे बड़ा फायदा चीन को हुआ, जो तांबे का मुख्य उत्पादक और निर्यातक है। यह भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि तांबा ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए आवश्यक धातु है।

भविष्य में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। तांबे की माँग तेजी से बढ़ रही है। साल 2030 तक, भारत को हर साल 2.5-3.5 मिलियन मीट्रिक टन तांबे की जरूरत होगी। यह माँग मुख्य रूप से अक्षय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, शहरीकरण और पावर ग्रिड विस्तार जैसे क्षेत्रों से आएगी।

भारत सरकार के सोलर एनर्जी अभियान के तहत, 2030 तक सोलर और विंड एनर्जी के लिए 1.5 मिलियन टन तांबे की जरूरत होगी। बिजली उत्पादन और वितरण उपकरण, जैसे अल्टरनेटर और ट्रांसफॉर्मर में तांबे का उपयोग होता है। इसके अलावा, सोलर पैनलों में भी तांबा अहम भूमिका निभाता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती माँग के चलते तांबे की आवश्यकता और बढ़ेगी। एक इलेक्ट्रिक कार में औसतन 83 किलोग्राम तांबा और एक इलेक्ट्रिक बस में 224 किलोग्राम तांबा लगता है। भारत सरकार ने 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य रखा है, जिससे तांबे की मांग में भारी वृद्धि होगी।

तेजी से हो रहे शहरीकरण और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के तहत भी बिजली और तांबे की मांग बढ़ेगी। भारत 2030 तक अपने पावर ग्रिड को 20% तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। बिजली के कुशल ट्रांसमिशन में तांबे की भूमिका महत्वपूर्ण है।

भारत में प्रति व्यक्ति तांबे की खपत अभी 1 किलोग्राम है, जो 2047 तक बढ़कर 3.2 किलोग्राम हो सकती है। अनुमान है कि भारत को हर 4 साल में एक नया कॉपर स्मेल्टर चाहिए। स्टरलाइट जैसे प्लांट्स को फिर से शुरू करना बहुत जरूरी है।

प्लांट के बंद होने से भारत का तांबा उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ। 2018-19 में तांबा निर्यात 90% गिर गया। 2017-18 में 3.78 लाख टन निर्यात होता था, जो 2018-19 में घटकर मात्र 48,000 टन रह गया।

CUTS इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट के बंद होने से भारत को ₹14,749 करोड़ का नुकसान हुआ, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि तांबे की आपूर्ति पर भी असर पड़ा।

स्टरलाइट कॉपर प्लांट के बंद होने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। कॉपर उत्पादन एक उच्च लाभ वाला निवेश है, जिसमें लगभग 400% तक का रिटर्न मिलता है। अगर देश में कॉपर का उत्पादन जारी रहता, तो यह आर्थिक विकास में बड़ा योगदान देता। लेकिन प्लांट के बंद होने से भारत को कॉपर आयात करना पड़ रहा है, जिससे अन्य देशों को लाभ हो रहा है।

चीन, पाकिस्तान और अन्य देशों को लाभ

भारत में कॉपर की माँग को पूरा करने के लिए अब बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ रहा है। इसमें सबसे अधिक आयात चीन से हो रहा है। 2023 में चीन से भारत के कॉपर आयात की कीमत $340.12 मिलियन थी। 2023-24 में भारत ने 363,000 टन परिष्कृत कॉपर आयात किया, जो पिछले दो वर्षों में 13% की वृद्धि दर्शाता है।
भारत के निर्यात से बाहर होने से वैश्विक कॉपर आपूर्ति कम हो गई, जिसका फायदा चीनी कंपनियों ने उठाया। चीन ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के जरिए बेहतर कीमत और शर्तें हासिल कीं।

इस बीच, पाकिस्तान जैसे देशों ने भारत की जगह ले ली। 2023 में पाकिस्तान का चीन को कॉपर निर्यात लगभग $752 मिलियन का था। इसके अलावा, सऊदी अरब भी बड़ा लाभार्थी बना, क्योंकि वेदांता समूह ने वहाँ $2 बिलियन का निवेश करने का फैसला किया है। यह निवेश 400 केटीपीए ग्रीनफील्ड कॉपर स्मेल्टर और रिफाइनरी तथा 300 केटीपीए कॉपर रॉड प्रोजेक्ट पर किया जाएगा।

विदेशी षड्यंत्र की आशंका

स्टरलाइट प्लांट विरोध प्रदर्शन के पीछे विदेशी फंडिंग का आरोप लगा है। तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने पिछले साल इन प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताया था। कहा जाता है कि चीनी कंपनियों ने जिनका भारतीय कॉपर आयात में आर्थिक हित था, इन विरोध प्रदर्शनों को प्रोत्साहित और वित्त पोषित किया।

वेदांता ने मद्रास हाईकोर्ट में बताया कि चीनी कंपनियों ने इन प्रदर्शनों का समर्थन किया। इसके अलावा कई एनजीओ पर भी विदेशी धन के नियमों का उल्लंघन कर फंड लेने का आरोप लगा। इसमें चर्च समूह, टुटिकोरिन डायोसिस एसोसिएशन और मोहन सी. लाजरस जैसे ईसाई मिशनरी शामिल हैं। इनका एफसीआरए पंजीकरण 2015 में खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर रद्द कर दिया गया था, लेकिन कहा जाता है कि इसके बाद भी उन्होंने विदेशी धन प्राप्त किया।

‘गृहयुद्ध छेड़ना चाहते हैं राहुल गाँधी’: कॉन्ग्रेस नेता को 7 जनवरी को बरेली की कोर्ट में हाजिर होने का आदेश, सरकार बनने पर जाति गिनने और आर्थिक सर्वेक्षण का किया था वादा

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी को उत्तर प्रदेश की बरेली जिला कोर्ट ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयान पर 7 जनवरी 2024 को पेश होने के लिए समन जारी किया है। यह बयान उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण और जातिगत जनगणना को लेकर दिया था।

बरेली की जिला जज कोर्ट ने पंकज पाठक की याचिका पर ये समन जारी किया है। उन्होंने राहुल गाँधी के बयान को ‘देश में गृहयुद्ध छेड़ने की कोशिश’ का आरोप लगाया। उन्होंने याचिका में कहा है, “हमने महसूस किया कि राहुल गाँधी ने चुनावों के दौरान जातिगत जनगणना पर जो बयान दिया था, वह देश में गृह युद्ध शुरू करने की कोशिश जैसा था।”

शुरुआत में यह याचिका एमपी-एमएलए कोर्ट में दायर की गई थी, लेकिन वहाँ इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने जिला जज कोर्ट में अपील की। पंकज पाठक ने बताया, “हमारी अपील वहाँ स्वीकार कर ली गई और राहुल गाँधी को नोटिस जारी किया गया।”

बता दें कि राहुल गाँधी ने अपनी पार्टी का प्रचार करते हुए कहा था कि यदि कॉन्ग्रेस केंद्र में सरकार बनाती है, तो वह वित्तीय और संस्थागत सर्वेक्षण करेगी। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लाभ पहुँचाने के लिए संसाधनों का पुनर्वितरण करना होगा। राहुल ने कहा था, “जितनी आबादी, उतना हक।”

हैदराबाद की एक रैली में राहुल ने कहा था कि कि कॉन्ग्रेस सरकार बनने पर सबसे पहले जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इसके बाद आर्थिक और संस्थागत सर्वेक्षण शुरू होगा। राहुल ने कहा, “हम पहले पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अल्पसंख्यकों और अन्य वर्गों की सही जनसंख्या और उनकी स्थिति जानने के लिए जातिगत जनगणना करेंगे। फिर भारत की संपत्ति, नौकरियाँ और अन्य कल्याणकारी योजनाएँ इन वर्गों की जनसंख्या के अनुपात में बाँटी जाएँगी।”

राहुल गाँधी ने सरकारी और बड़े उद्योगों में पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों की कम भागीदारी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “देश की 90 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों की है, लेकिन इनका सरकारी नौकरियों और संसाधनों में हिस्सा नहीं है।”

राहुल गाँधी के इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पर अल्पसंख्यकों के अधिकार घटाने का आरोप लगाते हुए तंज भी कसा था। पीएम मोदी ने कहा था, “पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कहते थे कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है, खासतौर से मुस्लिमों का। लेकिन अब कॉन्ग्रेस कह रही है कि आबादी तय करेगी कि किसे पहले अधिकार मिलेंगे। क्या कॉन्ग्रेस अब अल्पसंख्यकों के अधिकार घटाना चाहती है?”

कानपुर में 120 मंदिर बंद मिले: जिन्होंने देवस्थल को बिरयानी की दुकान से लेकर बना दिया कूड़ाघर… वे अब कह रहे हमने कब्जा नहीं किया, हम हैं ‘रखवाले’

मुस्लिम बहुल इलाकों में मौजूद बंद पड़े हिन्दू मंदिरों को कब्ज़ा मुक्त करवाने की मुहिम अब कानपुर भी पहुँच गई है। यहाँ की मेयर कल पुलिस फ़ोर्स के साथ शहर के 5 अलग-अलग मंदिरों पर गईं। इन मंदिरों की दुर्दशा पर मेयर ने नाराजगी जताई जिसमें एक के पीछे तो बिरयानी बेची जा रही थी। अब यहाँ की साफ़-सफाई शुरू की जा चुकी है। यहाँ रोज पूजा-अर्चना का ऐलान हुआ है। ऐसे कुल कब्ज़ा प्रभावित मंदिरों की तादाद 100 से अधिक बताई जा रही है। हालाँकि प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मुस्लिम पक्ष खुद को कब्जेदार नहीं बल्कि मंदिरों का रखवाला बताने में जुट गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, बेकनगंज के राम जानकी मंदिर के पीछे रहने वाले नफीस कहते हैं- “मंदिर को जैसे खोलना है, वैसे खोलें। हमको क्या लेना-देना है। मंदिर अलग है, घर अलग है। ये क्षेत्र पहले पुराना सर्राफा था। सारे हिंदू भाई यही रहते थे। फिर वो हिंदू बहुल क्षेत्रों में चले गए। मंदिर चारों तरफ से पैक है। हम लोग मंदिरों की देखभाल करते हैं। 92 के दंगों में हर जगह मंदिरों में तोड़फोड़ हुई। इसको हम लोगों ने बचाया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार (21 दिसंबर 2024) को कानपुर की मेयर प्रमिला पांडेय 7 थानों की पुलिस फ़ोर्स के साथ मुस्लिम बहुल इलाके बेकनगंज पहुँची। बेकनगंज वही इलाका है जहाँ जून 2022 में मुस्लिम भीड़ ने भाजपा नेत्री नूपुर शर्मा के बयान के विरोध में पुलिस पर हमला कर दिया था। प्रमिला पांडेय को यहाँ कई मंदिरों पर अवैध कब्ज़े की सूचना मिली थी। इसी सूचना पर लगभग आधे घंटे तक वो बेकनगंज में रहीं।

प्रमिला पांडेय ने 30 मिनट के अंदर कुल 5 ऐसे मंदिरों को खोज निकाला जो अवैध कब्ज़े और बदहाली के शिकार हुए थे। इसमें पहले नंबर पर राम जानकी मंदिर है। इस मंदिर पर कानपुर 2022 हिंसा के मुख्य आरोपित मुख़्तार बाबा बिरयानी वाले का कब्ज़ा था। मंदिर के पीछे बिरयानी बनाई जाती थी। स्थानीय लोगों की माना जाए तो लगभग 100 साल पहले वर्ग गज में फैले इस मंदिर का अब बेहद छोटा सा ही हिस्सा शेष बचा है।

वहीं दूसरा मंदिर राधा कृष्ण का है। यह मंदिर बेहद जर्जर हालत में पाया गया। इसी इलाके में तीसरा मंदिर महादेव शिव का मिला। मंदिर में शिवलिंग के अवशेष भर मौजूद मिले। मंदिर के पीछे रिहायशी बस्तियाँ हैं। शिव मंदिर के बाद मेयर व साथ चल रही प्रशासनिक टीम को एक अन्य राधा-कृष्ण मंदिर मिला। इस मंदिर का शटर बंद मिला। शटर खोलने पर अंदर कूड़ा भरा मिला। मेयर प्रमिला ने सभी अवैध कब्जेदारों को फ़ौरन कब्ज़ा हटा लेने का आदेश दिया है। वो मंदिरों की ऐसी हालत देख कर काफी नाराज भी हुईं।

मेयर का ऐलान है कि खोजे जा रहे सभी मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद वहाँ पहले की तरह विधि-विधान से पूजा अर्चना शुरू करवाई जाएगी। मेयर प्रमिला पांडेय ने यह भी कहा कि मंदिर में स्थापित मूर्तियाँ कहाँ गई इसकी जाँच करवाई जाएगी। बताते चलें कि कानपुर नगर निगम के एक सर्वे के मुताबिक शहर के मुस्लिम क्षेत्रों में लगभग 120 मंदिर बंद पड़े हैं। वहीं प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मुस्लिम पक्ष खुद को कब्जेदार के बजाय मंदिरों का रखवाला बताने में जुट गया है।

नाम अब्दुल मोहसेन, लेकिन इस्लाम से ऐसी ‘घृणा’ कि जर्मनी के क्रिसमस मार्केट में भाड़े की BMW से लोगों को रौंद डाला: 200+ घायलों में 7 भारतीय, मृतकों में 9 साल का बच्चा भी

जर्मनी के मैगडेबर्ग शहर में शुक्रवार शाम हुए हमले में 5 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हमले में 7 भारतीय नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से 3 को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। भारत सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘बेरहम’ बताया है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हम मैगडेबर्ग में क्रिसमस मार्केट पर हुए इस क्रूर हमले की निंदा करते हैं। कई अनमोल जिंदगियाँ खत्म हो गईं और कई लोग घायल हो गए। हमारी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ पीड़ितों के साथ हैं।” भारत सरकार ने यह भी बताया कि जर्मनी में भारतीय मिशन घायलों और उनके परिवारों से लगातार संपर्क में है और हर संभव मदद मुहैया करा रहा है।

शुक्रवार (20 दिसंबर 2024) को मैगडेबर्ग के क्रिसमस मार्केट में तेज रफ्तार कार से भीड़ को कुचल डाला गया। इस हमले में मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल है। इस हमले में 200 से अधिक घायल हो गए हैं, जिसमें 7 भारतीय भी शामिल हैं।

जर्मन पुलिस ने घटना के तुरंत बाद कार चालक, 50 वर्षीय सऊदी डॉक्टर तालेब को गिरफ्तार कर लिया। पिछले 20 वर्षों से जर्मनी में रह रहे तालेब ने इस हमले में इस्तेमाल हुई बीएमडब्ल्यू कार किराए पर ली थी। शुरू में कार में विस्फोटक होने का शक था, लेकिन जाँच के बाद पुलिस ने इसे खारिज कर दिया।

हमलावर एक्स मुस्लिम है। कहा जा रहा है कि इस्लाम से ‘घृणा’ करता था। जर्मनी के उन धुर दक्षिणपंथी समूहों का समर्थक है जो प्रवासियों को बसाने के विरुद्ध हैं। मेरा सवाल है कि मुस्लिमों से ये कैसी घृणा है कि आप ईसाइयों के त्योहार पर हमला करते हैं। हालाँकि इस मामले में जर्मनी की आंतरिक मंत्री नैन्सी फेजर ने संदिग्ध की ‘इस्लामोफोबिया’ की पुष्टि की, लेकिन हमले की मुख्य वजह क्या थी, इस पर कोई भी बयान देने से मना कर दिया। वहीं, जर्मनी के सैक्सनी-अन्हाल्ट राज्य के प्रीमियर रेनर हैसलॉफ ने जनता को भरोसा दिलाया कि आरोपित अकेला था और अब कोई खतरा नहीं है।

बहरहाल, भारत ने जर्मनी में घायल भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए सक्रिय प्रयास किए हैं। विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि इस घटना से जुड़े हर मामले में मदद जारी रहेगी। यह हमला सिर्फ जर्मनी ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जो सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत को उजागर करता है।

भारत में न्यूक्लियर टेस्ट हो या UN में दिया हिंदी वाला भाषण… जानें अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन कैसे दूसरे नेताओं के लिए भी बना अमर प्रेरणा, 100 वीं जयंती मना रहा देश

25 दिसंबर 2024 को भारत माँ के एक ऐसे सपूत, जिन्होंने अपने कृतित्व, व्यक्तित्व और नेतृत्व से देश को गौरवान्वित किया, दुनिया याद करेगी, श्रद्धा सुमन अर्पित करेगी। वह महानायक कोई और नहीं, बल्कि भारत के यशस्वी पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी न केवल एक सशक्त राजनेता थे, बल्कि वे एक संवेदनशील कवि, एक दूरदर्शी विचारक और एक फक्कड़ व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत को वैश्विक मंच पर सशक्त पहचान दिलाई, और उनके जीवन-मूल्य आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन: कवि से प्रधानमंत्री तक का सफर

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी खुद एक कवि और शिक्षक थे, जिससे उन्हें साहित्य और राष्ट्रवाद की शिक्षा बचपन से ही मिली। वे विद्यार्थी जीवन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए और जीवनभर देश के प्रति समर्पित रहे।

1957 में वे पहली बार बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) से लोकसभा के सदस्य बने। संसद में उनके ओजस्वी और तार्किक वक्तव्यों ने जल्द ही उन्हें देश का एक प्रमुख नेता बना दिया। उनके व्यक्तित्व की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे विपक्ष के नेता हों या प्रधानमंत्री, उनका सम्मान सभी दलों के नेता करते थे।

दृढ़ नेतृत्व और दूरदर्शी निर्णय

अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्री काल (1998-2004) में भारत को कई ऐतिहासिक उपलिब्धयाँ दीं। उनके नेतृत्व में भारत ने 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण किए, जिसने भारत को विश्व पटल पर परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में स्थापित किया। इस निर्णय के बाद कई देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल नेतृत्व ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया।

कारगिल युद्ध (1999) के समय उनका नेतृत्व और सेना के प्रति उनका समर्थन अद्वितीय था। भारत ने इस युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार दी और उनके शांतिपूर्ण प्रयासों ने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय मंच पर गरिमा और मजबूती से प्रस्तुत हो।

लाहौर बस यात्रा: शांति के लिए एक पहल

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐतिहासिक लाहौर बस यात्रा का नेतृत्व किया, जो भारत-पाकिस्तान के बीच शांति बहाल करने का एक प्रयास था। हालाँकि इस पहल को पाकिस्तान के कारगिल घुसपैठ ने बाधित किया, लेकिन यह दिखाता है कि वो शांति के कितने बड़े पक्षधर थे।

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का गौरव

1977 में विदेश मंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया, जो भारतीय संस्कृति और भाषा के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है। यह भाषण भारत की गरिमा और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने वाला मील का पत्थर बना।

कवि हृदय और प्रेरणा स्रोत

अटल बिहारी वाजपेयी न केवल राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी थे, बल्कि वे एक सशक्त कवि भी थे। उनकी कविताएँ जीवन के संघर्ष, उम्मीद और दृढ़ता की झलक दिखाती हैं। उनकी कविता की पंक्तियाँ, “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ”, हर व्यक्ति को निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

संवेदनशीलता और मानवीय पक्ष

अटल बिहारी वाजपेयी की संवेदनशीलता उनके राजनीतिक जीवन का अनूठा पहलू थी। चाहे किसानों की समस्याएँ हों, महिलाओं के अधिकार हों, या युवाओं के लिए रोजगार के अवसर – उन्होंने हर मुद्दे पर गंभीरता से काम किया। उनके नेतृत्व में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना (Golden Quadrilateral) जैसी परियोजनाएँ शुरू हुईं, जिसने भारत में आधुनिक सड़क नेटवर्क की नींव रखी। उन्होंने कहा था:

अटल बिहारी वाजपेयी का यह संदेश भारत के प्रत्येक नागरिक का ध्येय पथ बनना चाहिए। यही उनके जन्मदिन पर सच्चे मायने में उनके प्रति श्रद्धांजलि होगी।

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रेरणा: फिर सबेरा होगा

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में नहीं पहुँची। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में माननीय लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी की कमान सँभाली। राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए कहा था, “मैं और आडवाणी जी सिनेमा देखने गए थे और पिक्चर का नाम था फिर सबेरा होगा।” इस कथन से उन्होंने देशभर के कार्यकर्ताओं को एक बड़ा संदेश दिया। उनकी 51 रचनाएँ अपने आप में अध्यात्म, राष्ट्रभाव और गहन जीवन दर्शन का गूढ़ संदेश देती हैं।

100वीं जयंती: संकल्प का अवसर

इस वर्ष, जब देश अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती मना रहा है, यह उनके जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने और अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता लाने का संकल्प लेने का समय है। उनके जीवन का हर पहलू – उनकी कविताएँ, उनके विचार, और उनका नेतृत्व – हमें सिखाता है कि देश और समाज के प्रति समर्पण कैसे जीवन को अर्थपूर्ण बना सकता है।

अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत: एक अमर प्रेरणा

अटल बिहारी वाजपेयी भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और योगदान सदैव हमें प्रेरणा देते रहेंगे। उनके नेतृत्व का दौर न केवल भारत की राजनीतिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का भी युग था। उनके द्वारा स्थापित आदर्श आज भी हर नागरिक के लिए प्रेरणादायक हैं। उनके शब्दों में:

“हमने अंधकार को चीरकर सवेरा देखा है, हमने तूफानों में जलकर दीपक जलाया है।”

उनकी यह सोच हर भारतीय को आशा और विश्वास का दीप जलाने के लिए प्रेरित करती है।

25 दिसंबर को, उनकी जन्मशती पर, आइए हम सभी उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण की दिशा में अपना योगदान दें। अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत सदैव हमारे साथ रहेगी और हमें आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती रहेगी।