Home Blog Page 525

अकील ने बउआ बन कर तलाकशुदा हिंदू महिला को फँसाया, रेप के बाद बनाई अश्लील वीडियो: सच खुलने पर धर्मांतरण का दबाव, 5 लाख रूपयों की भी माँग

उत्तर प्रदेश के कानपुर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ अकील ने बउआ बन कर एक तलाकशुदा हिन्दू महिला को प्यार के जाल में फँसा लिया। अकील पहले से शादीशुदा था जिसने खुद को कुँवारा बता कर मेलजोल बढ़ाई थी। पीड़िता के साथ रेप किया गया और उसे इस्लाम कबूल करने का भी दबाव मिला। आपत्तिजनक वीडियो दिखा कर पीड़िता से पैसे भी ठगे गए। पुलिस पर भी कार्रवाई में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया गया है। मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर के दादानगर इलाके का है। यहाँ की एक फैक्ट्री में बर्रा इलाके की रहने वाली तलाकशुदा पीड़िता काम करती थी। इसी फैक्ट्री में ठेकेदार अकील भी काम करता था। अकील पहले से शादीशुदा था लेकिन उसने खुद को कुँआरा बताया। आरोपित ने खुद को बउआ बता कर पीड़िता से जान-पहचान बढ़ा ली। बउआ बने अकील ने पीड़िता से शादी का वादा किया और कई बार विरोध के बावजूद शारीरिक संबंध बनाए।

अकील पीड़िता को कई होटलों में ले गया। यहाँ उसने आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना डालीं। इस बीच पीड़िता गर्भवती हो गई। तब अकील ने पीड़िता का एबॉर्शन करवा दिया। इसी बीच पीड़िता को अकील के शादीशुदा और मुस्लिम होने की भनक लगी। जब पीड़िता ने अकील से इस बावत सवाल पूछा तो उसे भी इस्लाम कबूल करने का दबाव दिया जाने लगा। जब पीड़िता ने धर्मान्तरण से इंकार कर दिया तो आपत्तिजनक फोटो और वीडियो दिखा ब्लैकमेलिंग की जाने लगी।

पीड़िता का आरोप है कि अकील ने उस से 5 लाख रुपयों की डिमांड की थी। कोई रास्ता न देख कर दिसंबर 2023 में पीड़िता अकील की बीवी से मिली। यहाँ मदद के बजाय अकील की बीवी और उसके 3 सालों ने मिल कर पीड़िता को बेरहमी से पीटा। बकौल पीड़िता तब भी मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करने के बाद कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ। इस मामले में 5 दिसंबर को पीड़िता और आरोपित पक्ष का थाने में समझौता करवा दिया गया।

समझौते के बावजूद अकील द्वारा पीड़िता पर 5 लाख रुपयों और इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जाता रहा। आखिरकार शुक्रवार (20 दिसंबर) को पीड़िता अपनी फरियाद ले कर ADCP से मिलीं। ADCP ने मामले का संज्ञान लिया और नौबस्ता थाना पुलिस को जाँच कर के जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं हिन्दू संगठनों ने कानपुर में बढ़ रही लव जिहाद की घटनाओं पर चिंता जताते हुए अकील पर कठोर कार्रवाई की माँग की है।

‘शायद शिव जी का भी खतना…’ : महादेव का अपमान करने वाले DU प्रोफेसर को अदालत से झटका, कोर्ट ने FIR रद्द करने से किया साफ मना

ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को ले कर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले एक प्रोफेसर को दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रोफेसर रतन लाल पर दर्ज मुकदमा रद्द करने से इंकार कर दिया है। यह मुकदमा हिन्दुओं की भावनाओं को ठुकराने के लिए दर्ज किया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि रतन लाल की टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द पर बुरा असर पड़ा था। यह आदेश मंगलवार (17 दिसंबर, 2024) को दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस चंद्रधारी सिंह की अदालत में हुई। रतन लाल की तरफ से पेश वकीलों ने अभिव्यक्ति की आज़ादी सहित तमाम दलीलें पेश कीं। उन्होंने इस आधार पर रतन लाल के खिलाफ FIR को रद्द करने की माँग की। हालाँकि कोर्ट पर इन दलीलों का कोई असर नहीं पड़ा।

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि रतन लाल द्वारा पेश की गई दलीलों में वो तथ्य नहीं थे जिसके आधार पर आरोपित के खिलाफ FIR को रद्द किया जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि प्रोफेसर रतन लाल का इरादा एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का ही था। कोर्ट ने कहा कि प्रोफेसर जैसे पद वाले व्यक्ति की यह टिप्पणियाँ अशोभनीय हैं।

क्या था पूरा मामला

दिल्ली यूनिवर्सिटी में रतन लाल इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। मई 2022 में जब ज्ञानवापी के मुकदमे में हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग मिलने की बात कही तो तब रतन लाल ने सोशल मीडिया के अपने X और फेसबुक हैंडल पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाली थी। 14 मई, 2022 को डाली गई इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “यदि यह शिवलिंग हैं तो लगता है कि शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था।” इसी पोस्ट में रतन लाल ने हंसी वाली इमोजी भी डाली थी।

प्रोफेसर रतन लाल के इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उनके खिलाफ एक्शन की माँग जोर पकड़ने लगी थी। 18 मई, 2022 को दिल्ली के उत्तरी मौरिस नगर साइबर थाने में रतन लाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में यह शिकायत शिवाल भल्ला नाम के व्यक्ति ने दर्ज करवाई थी। पुलिस ने इस शिकायत पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा 153- A और 295- A के तहत FIR दर्ज कर ली थी।

20 मई, 2022 को पुलिस ने रतन लाल को खोज निकाला और गिरफ्तार कर लिया। अगले ही दिन 21 मई को प्रोफेसर रतन लाल जमानत पा गए। अब रतन लाल इस केस को खत्म करवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचे थे। हालाँकि यहाँ उनकी याचिका ख़ारिज कर दी गई है।

भारत का ‘चिकन नेक’ काटने की फिराक में थे बांग्लादेशी आतंकी, गिरफ्तारी के बाद सच उगला: कबूला- हिंदू नेताओं की हत्या भी था मकसद

पश्चिम बंगाल पुलिस ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार-उल-इस्लाम बांग्लादेश के आठ संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों का लक्ष्य था पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और पूर्वोत्तर के सात राज्यों को जोड़ने वाले ‘चिकन नेक’ इलाके में बड़े पैमाने पर अस्थिरता फैलाना। पुलिस के मुताबिक, यह आतंकी संगठन इस संवेदनशील क्षेत्र में समन्वित हमलों की योजना बना रहा था ताकि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के संपर्क को बाधित किया जा सके।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने मुर्शिदाबाद जिले में गिरफ्तार हुए दो संदिग्ध आतंकियों से 16 जीबी की पेन ड्राइव, जिहादी साहित्य, फर्जी पहचान पत्र और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। गिरफ्तार आतंकियों की पहचान अब्बास अली और मीनारुल शेख के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये दोनों एक स्लीपर सेल का हिस्सा थे जो दक्षिण और उत्तर बंगाल के संवेदनशील इलाकों में अस्थिरता पैदा करने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत में भी आतंक फैलाने की योजना बना रहे थे।

क्या है चिकन नेक?

चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र को भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग है। इसकी चौड़ाई मात्र 22 किलोमीटर है और यह भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से सटा हुआ है। अगर इस क्षेत्र में कोई व्यवधान उत्पन्न होता है, तो पूरे पूर्वोत्तर भारत का बाकी देश से संपर्क टूट सकता है। इस वजह से आतंकियों के लिए यह क्षेत्र हमेशा से एक संवेदनशील लक्ष्य रहा है।

पुलिस जाँच में यह भी सामने आया है कि इन आतंकियों ने मुर्शिदाबाद और अलीपुरद्वार जिलों में अपने ठिकाने बना लिए थे। उनकी योजना थी कि वे बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रमुख हिंदू नेताओं को निशाना बनाएँ। इसके अलावा ये आतंकी बांग्लादेश में 2015 में हुए ब्लॉगर हत्याकांड जैसे हमलों को दोहराना चाहते थे।

अधिकारियों का कहना है कि मुर्शिदाबाद बांग्लादेशी आतंकी संगठनों के लिए एक आसान रास्ता बन गया है। यह इलाका सीमावर्ती होने के कारण आतंकियों के लिए भारत में घुसपैठ और हथियारों की तस्करी के लिए उपयुक्त है।

बता दें कि अंसार-उल-इस्लाम बांग्लादेश एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, जो बांग्लादेश से संचालित होता है और इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करता है। हाल के वर्षों में यह संगठन भारत में भी अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा है। मुर्शिदाबाद और उससे लगे इलाकों में यह संगठन न केवल अपने ठिकाने बना रहा है, बल्कि नए सदस्यों की भर्ती भी कर रहा है।

गिरफ्तार आतंकी न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करना चाहते थे, बल्कि धार्मिक नेताओं की हत्या कर सांप्रदायिक तनाव भी फैलाना चाहते थे। उनकी योजनाओं का एक और मकसद भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संपर्क को काटकर देश की सुरक्षा को चुनौती देना था। फिलहाल, पश्चिम बंगाल पुलिस ने कहा है कि आतंकियों की अन्य स्लीपर सेल की पहचान करने और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जाँच जारी है।

43 साल बाद भारत के प्रधानमंत्री ने कुवैत में रखा कदम: रामायण-महाभारत का अरबी अनुवाद करने वाले लेखक PM मोदी से मिले, 101 साल के पूर्व IFS अधिकारी से भी की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार (21 दिसम्बर, 2024) को दो दिवसीय दौरे पर अरब देश कुवैत पहुँचे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 43 वर्षों में पहली कुवैत यात्रा है। पीएम मोदी कुवैत के अमीर के बुलावे पर इस दौरे पर गए हैं। पीएम मोदी ने यहाँ 100 वर्ष की उम्र पार कर चुके एक पूर्व भारतीय राजनयिक से मुलाक़ात भी की।

पीएम मोदी के कुवैत पहुँचने पर यहाँ रहने वाले भारतीयों ने उनका जोरदार स्वागत किया। कुवैत सरकार के भी उच्चाधिकारी इस मौके पर मौजूद रहे। पीएम मोदी ने यहाँ उन दो साहित्यकारों से भी मुलाक़ात भी की, जिन्होंने रामायण और महाभारत का अनुवाद संस्कृत से अरबी में किया और उन्हें प्रकाशित किया।

पीएम मोदी ने कुवैत दौरे की शुरुआत में ही मंगल सेन हांडा से भी मुलाकात की। मंगल सेन हांडा 101 वर्ष के हैं और वह भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी हैं। मंगल सेन हांडा ने अपने दशकों के राजनयिक करियर के दौरान अरब समेत तमाम देशों में अपनी सेवाएँ दी हैं। वर्तमान में वह कुवैत में रहते हैं।

हांडा की नातिन श्रेया जुनेजा ने पीएम मोदी से आग्रह किया था कि कुवैत दौरे में वह उनसे जरूर मिलें। इस पर पीएम मोदी ने ट्विटर पर जवाब दिया था कि वह मिलेंगे। हांडा से पीएम मोदी ने हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। बाकी परिजनों से भी पीएम मोदी मिले।

पीएम मोदी की यात्रा की शुरुआत कुवैत में स्थित भारतीय श्रमिकों के कैम्प में दौरे से होगी। विदेश मंत्रालय ने कह़ा कि पीएम मोदी का यह दौरा यह भारत सरकार की विदेशों में काम करने वाले श्रमिकों के प्रति गंभीरता को प्रदर्शित करता है।

पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबा और उनके बेटे सबा अल-खालिद अल-सबा से मुलाक़ात करेंगे और आधिकारिक बातचीत में शामिल होंगे। पीएम मोदी कुवैत के प्रधानमंत्री से भी बातचीत करेंगे।

पीएम मोदी यहाँ ‘हाला मोदी’ कायर्क्रम में भी हिस्सा ले रहे हैं जिसमें 5000 भारतीय शामिल हुए हैं। इसके अलावा वह गल्फ फुटबाल लीग के उद्घाटन समारोह में भी शामिल हो रहे हैं। कुवैत दौरे में पीएम मोदी दोनों देशों के बीच आर्थिक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर जोर देंगे।

भारत और कुवैत काफी पुराने सहयोगी हैं और दोनों देशो के बीच लगभग 10 बिलियन डॉलर (₹85000 करोड़) का द्विपक्षीय व्यापार होता है। लगभग 10 लाख भारतीय भी कुवैत में रहते हैं। ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।

कहीं मंदिर के पीछे बन रही बिरयानी, कहीं देवस्थान पर पड़ा मिला कूड़ा: कानपुर के मुस्लिम इलाकों में पहुँची मेयर प्रमिला पांडे, ताला खुलवाकर धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गुमशुदा और बंद पड़े मंदिरों को पुनः खोजने और उन्हें पुनर्जीवित करने का अभियान तेज हो गया है। इस पहल की अगुवाई कर रहीं कानपुर की मेयर और वरिष्ठ बीजेपी नेता प्रमिला पांडे ने मुस्लिम बहुल इलाकों में जाकर पुराने मंदिरों का निरीक्षण किया। यह कदम क्षेत्र में धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और पूजा-पाठ की बहाली के उद्देश्य से उठाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेयर प्रमिला पांडे शनिवार (21 दिसंबर 2024) को भारी पुलिस बल के साथ बेकनगंज क्षेत्र के दौरे पर निकलीं। उन्होंने एक-एक करके पाँच मंदिरों का निरीक्षण किया। इनमें से एक मंदिर, राम जानकी मंदिर, पर पहले से कब्जा था और वहाँ बिरयानी बनाने की शिकायतें मिली थीं। यह मंदिर अब शत्रु संपत्ति घोषित होने के बाद सील कर दिया गया है।

निशान मिला, लेकिन शिवलिंग था गायब

मेयर ने एक अन्य मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, का दौरा किया जहाँ शटर लगा हुआ था और अंदर कूड़ा भरा था। उन्होंने तुरंत अधिकारियों को इसे खाली करने और मंदिर की मरम्मत कराने का निर्देश दिया। शिव मंदिर का दौरा करने पर शिवलिंग के अवशेष मिले, लेकिन शिवलिंग गायब था।

मेयर ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया कि इन मंदिरों को पुनः पूजा-अर्चना के लिए तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षण स्थानीय समुदाय की जिम्मेदारी है। साथ ही मंदिरों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मंदिरों से कब्जे खाली करने पड़ेंगे

मेयर प्रमिला पांडे ने कहा कि इस जगह को सुनार गली कहते हैं। यहाँ पर अग्रवाल समुदाय के लोग रहते थे। कहा जाता है कि यहाँ हर 10 घर के बाद एक मंदिर और कुआँ हुआ करता था। जो अब नहीं है। अगर हमारे मंदिर हैं तो मूर्तियाँ कहाँ गई? किसी भी धर्म-समुदाय के लोग हों अगर मंदिर वहाँ पर है तो उसकी सुरक्षा करना वहाँ के लोगों का कर्तव्य है। अब यहाँ पर मंदिर नहीं है। इन लोगों को खाली करना पड़ेगा। यहाँ पर अब फिर से पूजा पाठ होगा।

बता दें कि आरटीआई से खुलासा हुआ था कि कानपुर में 325 मंदिर स्थित हैं, जिसमें से मुस्लिम बहुल इलाकों में स्थित 125 मंदिरों पर कब्जे हैं। सनातन मठ मंदिर रक्षा समिति के अनुसार, कानपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में 325 मंदिरों की पहचान की गई है, जिनमें से 125 मंदिरों पर कब्जा किया जा चुका है। समिति ने अब तक 35 मंदिरों की खोज की है, जो पूरी तरह खंडित हो चुके हैं।

इससे पहले, मेयर के अभियान से पहले कानपुर नगर निगम ने अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलवाया था। बेकनगंज के पास 100-125 साल पुराने तीन मंदिरों को कब्जे से मुक्त कराया गया और उनकी सफाई की गई। इनमें एक शिवजी और दो हनुमानजी के मंदिर शामिल थे।

कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने बताया कि बेकनगंज थाना क्षेत्र में मंदिरों के विषय में शिकायतें प्राप्त हुई थीं। पुलिस ने स्थलीय निरीक्षण के बाद तीन मंदिरों को कब्जे से मुक्त कराया। पुलिस ने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने का दावा किया है।

पत्नी बनी ईसाई, पति पर डालने लगी धर्मांतरण का दबाव: छत्तीसगढ़ के सूरज ने परेशान होकर लगाई फाँसी, दीवार पर लिखकर गया पूरा दर्द; पुलिस ने नकारा

छत्तीसगढ़ के बालोद में पत्नी से मिल रहे ईसाई धर्मान्तरण के दबाव में एक युवक द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर है। 35 वर्षीय मृतक का नाम सूरज देवांगन उर्फ़ गजेंद्र है। गजेंद्र ने अपने सुसाइड नोट में अपनी बीवी राजेश्वरी सहित अन्य ससुरालीजनों पर कार्रवाई की इच्छा जताई है। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में कड़े एक्शन की माँग उठाई है। पुलिस ने धर्मान्तरण के आरोपों का खंडन किया है। घटना शुक्रवार (20 दिसंबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना बालोद जिले के थानाक्षेत्र अर्जुन्दा की है। शुक्रवार को यहाँ के वार्ड नंबर 11 में रहने वाले सूरज देवांगन नाम के एक युवक ने अपने घर में फाँसी लगा ली। मौत से पहले सूरज ने घर की दीवाल पर अपना सुसाइड नोट लिखा था। इस नोट में सूरज ने लिखा, “मेरी पत्नी राकेश्वरी देवांगन जो कि आए दिन मुझसे वाद विवाद करती है। बच्चों को छोड़कर बार बार मायके चली जाती है, और वह ईसाई धर्म को अपना चुकी है।”

अपने इसी नोट में सूरज ने किसी प्रकाश देवांगन द्वारा खुद से 50 हजार रुपए ले कर वापस न करने के साथ पत्नी के अलावा सास-ससुर और सालों द्वार मिल रही प्रताड़ना का भी जिक्र किया है। विश्व हिन्दू परिषद ने इस मामले में नामजद सभी आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। विहिप पदाधिकारी बलराम गुप्ता के अनुसार कार्रवाई में ढिलाई होने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि प्रथम दृष्टया पुलिस इस मामले में धर्मान्तरण के दावों को नकार रही है। पुलिस का कहना है कि पूर्व में सूरज की पत्नी राजेश्वरी ने अपने पति के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज करवाई थी। प्रशासन आत्महत्या की वजह पैसे और घेरलू विवाद मान कर चल रहा है। फिलहाल सभी बिंदुओं पर जाँच जारी है। सूरज ने 2 माह पूर्व भी पुलिस में तहरीर दे कर अपनी पत्नी के खिलाफ बच्चों को छोड़ कर मायके जाने जैसे आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने भी यह माना है कि सूरज की पत्न्नी ईसाई मत का पालन करती है जिसको लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।

‘दलित बच्चों को भेजेंगे विदेश, सारा खर्चा हम उठाएँगे’ : अम्बेडकर विवाद को भुनाने में जुटी AAP, दिल्ली चुनाव से पहले किया ‘अम्बेडकर सम्मान स्कॉलरशिप योजना’ का ऐलान

डॉ भीमराव अम्बेडकर को लेकर चल रहे राजनीतिक बवाल का फायदा उठाने का प्रयास आम आदमी पार्टी (AAP) ने किया है। भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच डॉ अम्बेडकर के सम्मान को लेकर जारी बहस के बीच केजरीवाल ने उनके नाम पर एक योजना चालू करने का ऐलान किया है। यह योजना दलित छात्रों के लिए लाई गई है।

शनिवार (21 दिसम्बर, 2024) को दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल ने इस योजना की जानकारी दी। केजरीवाल यहाँ ‘डॉक्टर अंबेडकर सम्मान स्कॉलरशिप’ का ऐलान किया, जिसका फायदा दलित बच्चों को दिया जाएगा। केजरीवाल ने कहा है कि यह योजना उन दलित बच्चों को फायदा देगी जो विदेश जाकर पढ़ना चाहते हैं। उन बच्चों को दिल्ली सरकार स्कॉलरशिप देगी।

केजरीवाल ने कहा कि विदेशों में दलित बच्चों की पढ़ाई के साथ ही उनके आने-जाने का भी खर्च भी दिल्ली सरकार उठाएगी। यह योजना उन बच्चों पर भी लागू होगी, जिनके माता-पिता सरकारी सेवा में हैं। हालाँकि, केजरीवाल ने यह नहीं बताया कि यह योजना कब से चालू होगी और इसका फायदा कैसे लिया जा सकेगा।

केजरीवाल ने यह ऐलान ऐसे समय में किया है जब भाजपा डॉ अम्बेडकर के अपमान को लेकर कॉन्ग्रेस पर हमलावर है और इतिहास के पन्नों से लगातार चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने रख रही है। वहीं कॉन्ग्रेस गृह मंत्री अमित शाह पर डॉ अम्बेडकर का अपमान करने का आरोप लगा रही है। तमाम हैंडल्स ने उनका एक आधा-अधूरा क्लिप भी वायरल किया है।

केजरीवाल का यह ऐलान दिल्ली में दलित वोटरों में दायरा बढ़ाने और आगामी विधानसभा चुनाव में फायदा लेने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकांश शहरी जनसंख्या वाली दिल्ली में लगभग 20% वोटर दलित हैं और वह विधानसभा चुनाव में बड़ा रोल निभाते हैं। AAP को इससे पहले विधानसभा चुनावों में दलितों का अच्छा ख़ासा वोट मिला है।

बीते कुछ समय में राज कुमार आनंद जैसे दलित चेहरों ने AAP छोड़ी है। अब केजरीवाल फिर से यह दिखाना चाहते हैं कि वह दिल्ली में दलितों के हितैषी हैं और उनका वोट बटोरना चाहते हैं। राज कुमार आनंद ने इस्तीफ़ा देने के समय दिल्ली सरकार को दलित विरोधी करार दिया था। यह योजना आगामी चुनावों में कितना असर डालेगी, यह परिणाम देखकर पता चलेगा।

जिस तरह की योजना का ऐलान केजरीवाल ने किया है, केंद्र सरकार ऐसी ही योजनाएँ पहले ही चलाती है। इसके तहत पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों दलित छात्र विदेश पढ़ने जा चुके हैं।

चौकीदार बनकर आए वाजिद अली ने हड़पा पूरा मंदिर, मूर्तियाँ गायब करवाकर पूजा बंद करवाई: 150 साल पुराना श्रीगंगा महारानी मंदिर 50 साल बाद कब्जा मुक्त हुआ, फिर गूँजेगी शंखध्वनि

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मुस्लिमों के कब्ज़े में मौजूद एक और मकान के मंदिर होने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि ये मंदिर 150 साल (कहीं-कहीं 250 साल) पुराना है। 50 साल पहले यहाँ एक वाजिद अली नाम का शख्स चौकीदार बनकर आया था और धीरे-धीरे उसने पूरे मंदिर पर कब्जा कर लिया। इसके बाद उसने मूर्तियाँ गायब करवाईं और फिर पूजा भी बंद करवा दी। बाद में मंदिर को मकान बनाकर उस पर इस्लामी झंडा लगाया दिया गया। हाल में जब मंदिरों के कब्जाने की खबरों ने तूल पकड़ा तो इस मंदिर का भी पता चला। शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जाँच की और मकान को खाली करने का नोटिस दीवार पर चस्पा किया। वहीं हिन्दू संगठन के सदस्यों ने सक्रिय होकर मकान पर लगे हरे झंडे को हटा कर भगवा ध्वज लगा दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बरेली के किला थानाक्षेत्र का है। यहाँ के कटघर इलाके में रहने वाले राकेश सिंह ने दावा किया है कि आज से लगभग डेढ़ सौ साल पहले उनके पूर्वजों ने गंगा महारानी का एक मंदिर बनवाया था। तब इस मंदिर में विधि-विधान से कई देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्थापित किया गया था। कुछ ही समय में यह मंदिर आसपास के हिन्दुओं की आस्था का केंद्र बन गया था। यहाँ नियमित पूजा अर्चना होने लगी थी।

राकेश सिंह आगे बताते हैं कि लगभग 50 साल पहले इस मंदिर में बने एक कमरे को सहकारी समिति के लिए किराए पर दे दिया गया था। सहकारी समिति वालों ने वाज़िद अली नाम के एक चौकीदार को यहाँ रखरखाव और देखभाल के लिए नियुक्त किया। आरोप है कि वाज़िद अली ने पहले सहकारी समिति वाले कमरे और बाद में पूरे मंदिर पर ही कब्ज़ा जमा लिया। उसने धीरे-धीरे यहाँ स्थापित मूर्तियों को गायब कर दिया और पूजा अर्चना भी बंद करवा दी।

राकेश सिंह द्वारा इस मुद्दे को उठाते ही हिन्दू संगठन के सदस्य उस मकान पर पहुँच गए। मकान पर अब वाज़िद अली के बेटे रहते हैं। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने घर के ऊपर लगे हरे रंग के इस्लामी झड़े को हटा कर वहाँ भगवा ध्वज लहरा दिया। छत पर खड़े हो कर ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए गए। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के नाते पुलिस और प्रशासन फ़ौरन एक्टिव हुआ। मौके पर फ़ोर्स तैनात कर दी गई। गुरुवार को राकेश सिंह व वाज़िद अली के बेटों के बयान दर्ज करवाए गए।

प्रशासन की जाँच में पता चला कि वाज़िद अली या उसके बेटे मकान में अवैध तौर पर काबिज़ थे। वो सहकारी समिति के सदस्य भी नहीं थे। इसी आधार पर प्रशासन ने वाज़िद के परिवार को मकान खाली करने का निर्देश दिया है। मकान के ऊपर नोटिस भी चस्पा कर दी गई है। SDM गोविन्द मौर्य के मुताबिक मुस्लिम पक्ष ने अपनी मर्जी से मकान को खाली कर दिया है। फिलहाल मकान को सील कर कर राकेश सिंह के दावों की जाँच करवाई जा रही है। वहीं राकेश सिंह ने उम्मीद जताई है कि वाज़िद अली दौरा कब्जाए गए उनके मकान में जल्द ही पहले जैसा पूजा-पाठ शुरू होगा।

तमिलनाडु में आतंकी का जनाजा निकला ‘शान’ से… हजारों कट्टरपंथी शामिल, सुरक्षा में DMK सरकार ने 2000 पुलिसकर्मी लगाए: विरोध करने वाले BJP नेता गिरफ्तार, अन्नामलाई भी हिरासत में

देश के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में साल 1998 में सीरियल धमाके हुए थे। ये धमाके कोयंबटूर में हुए, जिसमें 58 लोगों की मौत हुई तो 231 लोग घायल हुए। इन धमाकों के दोषी एस-ए पाशा की मौत कुछ दिन पहले हुई। तमिलनाडु सरकार ने आतंकवादी एस ए पाशा के जनाजे की न सिर्फ अनुमति दी, बल्कि 2000 से ज्यादा पुलिसवालों को भी सुरक्षा में लगाया। इस दौरान हजारों कट्टरपंथियों, नेताओ, अभिनेताओं की भीड़ ने उसे किसी ‘हीरो’ की तरह विदाई दी। एक आतंकी के महिमामंडन का बीजेपी ने विरोध किया, लेकिन आतंकवादियों को जेल में मालिश की सुविधा देने वाली डीएमके सरकार ने इसे नजरअंदाज किया और विरोध प्रदर्शन करने वालों को ही हिरासत में ले लिया।

इस बीच, बीजेपी ने तमिलनाडु सरकार द्वारा आतंकवादी के जनाजे की अनुमति देने का विरोध किया गया। बीजेपी ने इस बात से आपत्ति जताई कि अनगिनत मासूमों की जान लेने वाले आतंकवादी का जनाजा निकाला गया और उसे आतंकी की तरह गुमनाम नहीं, बल्कि किसी हीरो की तरह शानदार विदाई दी गई। लेकिन डीएमके सरकार को ये पसंद नहीं आया। इस बात की तस्दीक ये दो तस्वीरें भी करती हैं।

आतंकवादी को हीरो जैसी विदाई देने के डीएमके सरकार के फैसले के खिलाफ बीजेपी, हिंदू मुन्नानी और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने रैली का आयोजन किया था। इस रैली में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जो आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देना चाहते थे। लेकिन डीएमके सरकार ने इन राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने के लिए पुलिस का सहारा लिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने ट्वीट कर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बताया कि डीएमके सरकार की पुलिस ने उन्हें, हिंदू मुन्नानी के प्रदेश अध्यक्ष केदेश्वर सी. सुब्रमण्यम, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष शिवलिंगम, बीजेपी के अन्य कार्यकर्ताओं और आम जनता को हिरासत में ले लिया। यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब वे ‘ब्लैक डे रैली’ में शामिल होकर डीएमके सरकार का विरोध कर रहे थे।

अन्नामलाई ने इसे डीएमके सरकार की वोट बैंक राजनीति का हिस्सा बताया और कहा कि सरकार ने एक तरफ आतंकवादी के जनाजे को समर्थन दिया, जबकि दूसरी तरफ जन सुरक्षा की माँग करने वालों को जेल में ठूँस दिया।

तमिलनाडु में एक तरफ आतंकी को हीरो जैसी विदाई जाती है, तो विरोध प्रदर्शन करने वाले राष्ट्रवादी नेताओं को डीएमके की सरकार जेल में ठूँस देती है। दोनों तस्वीरें सामने हैं। बताइए, देश में आतंकियों का महिमामंडन करने में कितनी आगे निकल गई है इंडी गठबंधन, जहाँ उप मुख्यमंत्री खुद को प्राउड क्रिश्चियन बताता है और सनातन की तुलना डेंगू-मलेरिया से करते हुए सनातन को मिटाने की बात करता है।

7 साल के बच्चे से लेकर 70 साल की खातून तक… 6 बांग्लादेशी घुसपैठियों को त्रिपुरा पुलिस ने दबोचा: पूछताछ में बोले- हम काम की तलाश में आए

पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में पुलिस ने गुरुवार (19 दिसंबर 2024) को 6 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। इन घुसपैठियों में 2 नाबालिग और इतनी ही महिलाएँ शामिल हैं। ये सभी खोवाई जिले के एक गेस्ट हॉउस में छिपे थे। अब तक हुई पूछताछ में पता चला कि ये सभी घुसपैठिए दिल्ली भी गए थे। ये सभी भारत में घुसपैठ का मकसद काम की तलाश बता रहे हैं। हालाँकि पुलिस इन दावों की गहराई से पड़ताल की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला खोवाई जिले के सुभाष पार्क इलाके का है। गुरुवार को यहाँ के जिला अस्पताल के आसपास कुछ संदिग्ध लोगों की सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई थी और तलाशी अभियान चलाया था। इसी दौरान पुलिस ने रॉय गेस्ट हॉउस भी पहुँची। इस गेस्ट हॉउस में पुलिस को 6 लोग संदिग्ध दिखे। इसमें 2 महिलाएँ, 2 पुरुष और 2 नाबालिग बच्चे शामिल थे। संतोषजनक जवाब न मिलने पर पुलिस इन सभी को थाने ले आई।

थाने में इन सभी संदिग्धों से हुए सवाल जवाब में इनकी पहचान 37 साल के मोहम्मद कबीर, 35 वर्षीया तानिया बेगम, 70 वर्षीया आएशा खातून, 23 साल के मुमीन, 5 वर्षीया शाहिदा और 6 वर्ष उम्र के मोहम्मद शाकिब के तौर पर हुई। पहले तो इन सभी ने पुलिस को भारतीय पहचान पत्र दिखा कर गुमराह करने की कोशिश की। जाँच में ये प्रमाण पत्र फर्जी निकले तो इन सभी ने खुद के बांग्लादेश के फेनी जिले से होने का सच कबूल कर लिया।

इन्होने पुलिस को बताया कि पकड़े जाने से पहले वो सब दिल्ली भी हो आए हैं। इन्होने भारत में घुसपैठ की वजह रोजगार की तलाश बताया है। सभी आरोपितों को हिरासत में ले कर पूछताछ और उनके घुसपैठ के असल मकसद को खंगाला जा रहा है। बरामद पहचान पत्रों की जाँच कराई जा रही है। केस दर्ज कर के मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इन कार्रवाइयों के बाद सभी को वापस उनके मुल्क में भेजने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।