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योगी आदित्यनाथ ने भव्य राम मंदिर के लिए हर परिवार से माँगे ₹11 और एक ईंट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए हर परिवार से 11 रुपए और एक ईंट का योगदान देने की अपील की है। मुख्यमंत्री योगी ने यह अपील झारखंड में चुनाव रैली के दौरान किया। यहाँ बीजेपी उम्मीदवार के लिए वोट माँगते हुए उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राम मंदिर-बाबरी मस्जिद का लंबे समय से चला आ रहा विवाद आख़िरकार पीएम मोदी द्वारा किए गए प्रयासों से हल हो गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कॉन्ग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), CPI-ML और अन्य राजनीतिक दल लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का हल नहीं चाहती थीं।

झारखंड चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार को वोट देने के लिए लोगों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,

“मैं उस प्रदेश से आता हूँ जिसने भगवान राम दिया और उनके शासन की प्रणाली को रामराज्य कहा गया, एक प्रणाली जिसमें नीतियाँ गरीब, युवा, महिला और समाज के हर तबके को ध्यान में रखते हुए बगैर भेद के बनाई जाती हैं। वही कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा रहा है।”

तीन दलों के समूह- कॉन्ग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और RJD गठबंधन पर हमला करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि वे किसी भी तरह ग़रीब, युवा, महिला और समाज के अन्य लोगों की सेवा के नाम पर सत्ता हथियाना चाहते हैं।

कॉन्ग्रेस, RJD, झामुमो और CPI-ML के गठबंधन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और माओवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए, योगी ने कहा, “कॉन्ग्रेस, RJD, झामुमो और CPI-ML की नीतियों ने चरमपंथ को बढ़ावा दिया है और उन्हें व्यापक नुकसान पहुँचाने में सक्षम बनाया है।”

इससे पहले, जब सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर बनाने के पक्ष में अपना फ़ैसला सुनाया था, तब विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने राम भक्तों को आगे आकर अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर के निर्माण में मदद की अपील की थी।

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घर की लड़की अगवा, गौमांस खाने को किया मजबूर: पाकिस्तान में सांसद बनने की हिंदू को सजा

बेनजीर भुट्टो के शासनकाल में पाकिस्तान में सांसद रह चुके डिवायाराम के फ़िलहाल हरियाणा के फतेहाबाद में मूँगफली बेचकर अपना जीवन निर्वाह कर रहे हैं। वहीं, गर्मियों में कुल्फी बेचकर गुजर-बसर करते हैं। दरअसल, पाकिस्तान में एक वक़्त ऐसा आया था जब उनकी जान पर बन गई थी और वो वहाँ से भागकर हिन्दुस्तान आ गए थे। पाकिस्तान में सताए जाने के बाद उन्होंने फतेहाबाद के रतनगढ़ गाँव में अपने परिवार के साथ बसेरा जमाया था।

इन दिनों वो इसलिए चर्चा में आ गए क्योंकि अब उन्हें उम्मीद है कि संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के बाद भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। इस विधेयक के पारित होने से डिवायाराम ख़ासा ख़ुश नज़र आ रहे हैं। पूर्व पाकिस्तानी सांसद को अब यह उम्मीद है कि जल्द उन्हें और उनके परिवार को भारतीय नागरिकता मिल जाएगी, जिसके बाद उनका भी राशन कार्ड बन जाएगा, जिससे वो भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। 

ख़बर के अनुसार, जब बेनजीर भुट्टो ने अपने पिता की मौत के बाद राजनीति में क़दम रखा था, तो वो डिवायाराम के क्षेत्र में गईं थी, जहाँ उनके स्वागत में डिवायाराम ने अच्छा-ख़ासा भाषण दिया था। इससे ख़ुश होकर भुट्टो ने उन्हें रिज़र्व सीट से सांसद बना दिया था। लेकिन, सांसद बनने के बाद उनके परिवार पर कई मुसीबतें आ गईं थी। डिवायाराम से नाराज़ मुस्लिमों ने 15 दिन बाद ही उनके परिवार की लड़की का अपहरण कर लिया और उन्हें पद छोड़ने की धमकियाँ भी दी।

पाकिस्तान, पूर्व सांसद, मूँगफली
पाकिस्तान के पूर्व सांसद मूँगफली-कुल्फी बेचकर करते हैं गुजर-बसर (तस्वीर साभार: दैनिक जागरण)

डिवायाराम जब बहुत परेशान हो गए तो उन्होंने पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया। वहाँ उन्हें धर्म-परिवर्तन की सलाह दी गई। लेकिन, डिवायाराम को यह मंज़ूर नहीं था, इसलिए उन्होंने सांसद पद से इस्तीफ़ा दे दिया और भारत में शरण लेने का फ़ैसला किया। डिवायाराम अपने परिवार के साथ जनवरी 2000 में एक महीने के वीज़ा पर भारत आए थे। शुरुआत में वो रोहतक ज़िले के कलानौर व रोहतक शहर में रहे। वीज़ा समाप्त होने के बाद उन्होंने तत्कालीन रोहतक के डीसी के समक्ष पेश होकर अर्जी दी कि वह और उनका परिवार किसी भी सूरत में पाकिस्तान नहीं जाना चाहता। 

उस समय बजरंग दल व अन्य हिन्दू संगठनों ने उनकी मदद की। उपायुक्त ने भी उन्हें वहाँ रहने की छूट दे दी। इसके बाद वे वर्ष 2006 में रोहतक से फतेहाबाद के रतिया क़स्बे के निकट गाँव रतनगढ़ में आकर रहने लगे। यहाँ वो पिछले 13 सालों से रह रहे हैं।

बता दें कि डिवायाराम की पाकिस्तान में 25 बीघे ज़मीन थी, लेकिन मुस्लिम समुदाय और मौलवियों ने उन्हें इस क़दर परेशान किया कि उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। मुस्लिम समुदाय डिवायाराम पर इस्लाम क़बूल करने और गोवंश मांस खाने के लिए दबाव डालता था। ऐसा न करने पर मुस्लिम समुदाय उनके साथ दुर्व्यवहार करता था।

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बंधक बनाकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म के दोषी शाहबुद्दीन गाजी को 12 साल की कैद

नाबालिग लड़की को अगवा कर बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले दोषी को 12 साल की कैद की सजा सुनाई गई है। स्पेशल पाक्सो कोर्ट ने इस मामले में दोषी शाहबुद्दीन गाजी को सजा सुनाई है। शाहबुद्दीन गाजी को 12 साल की कैद की सजा सुनाने के साथ ही उस पर 61,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

बता दें कि अदालत ने शाहबुद्दीन से जुर्माने की धनराशि वसूलने के बाद उसे पीड़ित लड़की को देने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने रेप पीड़ित नाबालिग को 3 लाख रुपए का हर्जाना भी देने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग के साथ रेप और पीड़िता को जबरन देह व्यापार में धकेलने जैसे गंभीर मामले की जाँच सब इंस्पेक्टर रैंक की पुलिस अधिकारी से कराने पर भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने जजमेंट की कॉपी डिस्ट्रिक्ट डीसीपी को भी भेजने का आदेश दिया है। शाहबुद्दीन नाबालिग पीड़िता को काम के बहाने दिल्ली लाकर उसे बंधक बनाकर रेप करने का दोषी है।

गौरतलब है कि दोषी शहाबुद्दीन ने 2013 में 14 और 15 साल की दो नाबालिग लड़की को यह कहकर दिल्ली लेकर आया था कि वहाँ पर वह दोनों लड़कियों की जॉब लगवा देगा, लेकिन उसने यहाँ लाकर दोनों लड़कियों को बंधक बना लिया और पत्नी के गाँव जाने पर उसके साथ रेप करता रहा। हालाँकि, पीड़िता की चचेरी बहन इस दौरान वहाँ से भागने में सफल रही, लेकिन पीड़िता उसके चंगुल से नहीं निकल पाई। शाहबुद्दीन ने पीड़िता के साथ खुद तो रेप किया ही, साथ ही उसने दिल्ली के अलावा नोएडा वगैरह जगहों पर ले जाकर पीड़िता से जबरन देह व्यापार भी कराया।

दोषी की पत्नी के वापस आने पर पीड़िता ने उससे अपने साथ हुए जघन्य अपराध के बारे में बताया, मगर उसने भी उसकी मदद नहीं की, उल्टा उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी गई और फिर एक दिन मौका पाकर वह उसके चंगुल से छूटकर भाग निकली। इसके बाद उसने पुलिस को दिए बयान में अपने साथ हुई पूरी वारदात के बारे में बताया।

पुलिस ने लड़की का मेडिकल कराने के बाद पीड़िता के बयान पर आईपीसी की धारा 342, धारा 366ए, धारा 376 के अलावा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और धारा 17 में मामला दर्ज कर शाहबुद्दीन गाजी और उसकी पत्नी रेहाना बीवी को गिरफ्तार कर लिया। बाद में सबूत के अभाव में दोषी की पत्नी को रिहा करना पड़ा। स्पेशल जज एनके मल्होत्रा की अदालत ने गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद शाहबुद्दीन को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में दोषी करार देते हुए 12 साल कैद की सजा सुनाई। हालाँकि, अदालत ने पुलिस की जाँच पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इस मामले में जाँच अधिकारी ने पीड़िता के परिजन और उसकी चचेरी बहन का बयान दर्ज नहीं किया। हो सकता है कि उसके साथ भी क्राइम हुआ हो।   

‘10000 मुस्लिमों ने बेलदांगा में BDO का दफ्तर घेरा, लगाई आग, पत्नी ने किसी तरह बचाई जान’

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हिंसक प्रदर्शन की आग असम में शुरू होकर पूर्वोत्तर के दूसरे राज्यों से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल तक फैल गया है। एक ओर शुक्रवार (दिसंबर 13, 2019) को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल में CAB लागू नहीं होने की घोषणा की, तो दूसरी ओर मुर्शिदाबाद में रेलवे स्टेशन में आग लगाने और उलबेड़िया में हावड़ा-खड़गपुर हावड़ा-खड़गपुर सेक्शन में अप और डाउन ट्रेनों का रास्ता रोकने की घटना हुई है। बता दें कि मुर्शिदाबाद बांग्लादेश से सटा एक जिला है। जहाँ शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद कट्टरपंथियों ने उग्र प्रदर्शन किया।

भाजपा ने पूरी घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की माँग की है। भाजपा के महासचिव व प्रदेश भाजपा के केंद्रीय प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि ममता बनर्जी पूरे बंगाल में आराजकता की स्थिति पैदा करना चाहती हैं। उनके बयान के बाद और जुम्मे की नमाज के बाद भीड़ ने बीरभूम, मुर्शिदाबाद में रेलवे स्टेशनों पर आगजनी की। वे टायर जला कर नेशनल हाइवे जाम कर रहे हैं। पुलिस इन स्थानों पर मूकदर्शक बनी हुई है। सीएम के इशारों पर आगजनी की घटना हो रही है।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि CAB के विरोध में जो हिंसा, आगजनी और अराजकता हुई उसके पीछे ममता बनर्जी का गैर-जिम्मेदाराना बयान है। उन्होंने घुसपैठियों को भड़काकर नए संशोधन का विरोध किया और राज्य में हिंसा फैलाई। राज्य की जनता सब देख और समझ रही है। समय आने पर इसका जवाब भी देगी।

इसके साथ ही एक अन्य ट्वीट के माध्यम से कैलाश विजयवर्गीय ने एक सरकारी अधिकारी के ऑफिस को 10,000 मुस्लिमों द्वारा घेरकर जला देने की बात कही। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “ममता राज में सरकारी अधिकारी इस हाल में हैं। बेलडांगा (मुर्शिदाबाद) के विकासखंड अधिकारी सरकारी काम से सिलीगुड़ी गए थे, तब उनके ऑफिस को 10,000 मुस्लिमों की भीड़ ने घेर लिया और आग लगा दी। उनकी पत्नी ने किसी तरह जान बचाई। जब अधिकारियों के ये हाल हैं,तो जनता की बेबसी समझी जा सकती है।”

बता दें कि मुर्शिदाबाद जिले में संशोधित नागरिकता विधेयक का विरोध कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को बेलडांगा स्टेशन में आग लगा दी और वहाँ तैनात आरपीएफ कर्मियों के साथ मारपीट की। ट्रेन की बोगी को भी फूँक दिया। जिले में कई अल्पसंख्यक संगठनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। एक वरिष्ठ आरपीएफ अधिकारी ने बताया, “उग्र मुस्लिम प्रदर्शनकारी अचानक रेलवे स्टेशन के परिसर में आ घुसे और उन्होंने प्लेटफार्म, दो तीन मंजिले भवनों और रेलवे कार्यालयों में आग लगा दी। जब आरपीएफ कर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तब उन्हें भी बुरी तरह पीटा गया।” उन्होंने यह भी कहा कि इस विरोध प्रदर्शन से ट्रेन सेवाएँ थम गई।

दिलीप मंडल पढ़ाने की जगह ‘जाति के आधार पर विभाजन’ खड़ा कर रहे हैं: माखनलाल यूनिवर्सिटी में बवाल

सोशल मीडिया पर और फेसबुक पोस्ट के माध्यम से दिन-भर सवर्णों के द्वारा अरबों साल से किए जा रहे जातिगत भेदभाव पर ज्ञान देने वाले प्रोफ़ेसर दिलीप सी मंडल के खिलाफ खुद जातिगत दुर्भावना फ़ैलाने ही नहीं, जातिवादी भेदभाव करने के भी आरोप लग रहे हैं। और आरोप लगाने वाले भी कोई ऐरे-गैर नहीं, देश के चोटी के पत्रकारिता संस्थानों में गिना जाने वाले माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के छात्र हैं। उनके दुर्व्यवहार से त्रस्त छात्र धरने पर बैठने के लिए मजबूर हो गए हैं।

भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में दो विज़िटिंग प्रोफ़सरों दिलीप मंडल और मुकेश कुमार के खिलाफ छात्रों का आरोप है कि वे क्लास में जातिगत भेदभाव और विभाजन बढ़ाते हैं। वे क्लास में और सोशल मीडिया पर छात्रों की जाति जानना चाहते हैं, और उसके बाद कथित ‘सवर्णों’ के साथ बदतमीज़ी करते हैं।

हालाँकि, कुलपति ने मामले की जाँच के लिए एक कमेटी भी बना दी है, लेकिन छात्र चाहते हैं कि इन दोनों प्रोफ़ेसरों की सेवाएँ तत्काल प्रभाव से निलंबित की जाएँ। साथ ही छात्रों ने कहा कि उनके विरोध प्रदर्शन के बारे में गलत अफ़वाहें भी उड़ाई जा रहीं हैं।

छात्रों ने इसके बारे में विश्विद्यालय प्रशासन से लिखित शिकायत भी की थी। लेकिन खबर लिखे जाने तक दिलीप मंडल के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया है।

छात्रों का कहना है कि अक्सर जातिगत पोस्ट लिखकर ये सवर्ण जातियों को टारगेट करते हैं। आप खुद भी देख सकते हैं कि अपने कल के पोस्ट में भी मंडल कह रहे हैं, “विद्यार्थी परिषद को शास्त्रार्थ का निमंत्रण। आज भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में ABVP ने फुले-आंबेडकर विचारधारा को लेकर मेरे खिलाफ हंगामा किया और तोड़फोड़ की। मेरा उनसे निवेदन है कि किसी तय तारीख को सांची स्तूप के पास आएं और मुद्दों पर बहस करें। स्वागत है।… आप भी मनुस्मृति और गोडसे तथा गोलवलकर की किताबें लेकर आइए।”

गौरतलब है कि इस साल की काँवड़ यात्रा के दौरान दिलीप मंडल ने काँवड़ियों के बीच भी जातिगत आधार पर विभाजन करने की कोशिश की थी। इसके अलावा ट्विटर के ब्लू टिक में भी जाति ढूँढ़ने की कोशिश के लिए भी उनकी काफी ‘नेकनामी’ हुई थी।

7 दिन की धमकी देने वाले इन ‘महापुरुष’ ने 5 हफ़्तों में भी ब्लू टिक नहीं हटाया है।

CAB विरोध के बहाने पत्थरबाजी पर उतरे जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र, दो पुलिस वाले ICU में

नागरिकता विधेयक देश के एक आश्चर्यजनक रूप से बड़े तबके के भीतर छिपी देश-विरोधी भावनाएँ सतह पर ला रहा है। हमने कल ही आपको बताया कि कैसे असम और मेघालय में बांग्लादेश से जान बचाकर भागे शरणार्थी बंगाली हिन्दुओं को नागरिकता देने के खिलाफ आगजनी और हिंसा भड़क उठे हैं। और आज देश की राजधानी में पुलिस वालों को ऐसे हमलों का सामना करना पड़ रहा है “आम नागरिक” और “बेबस बेकसूरों” से, जिससे रूबरू आम तौर पर कश्मीर में तैनात सैनिक और अर्द्धसैनिक सुरक्षाकर्मी होते हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नागरिकता बिल के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्मालिया के छात्रों ने न केवल विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, बल्कि उसमें पत्थरबाजी भी करने लगे। और इतनी उग्र हिंसा की कि दो पुलिस वालों को न केवल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, बल्कि वे पुलिस वाले आईसीयू में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। कुल 12 पुलिस वाले जामिया के छात्रों के हाथों घायल हुए हैं।

जामिया के छात्रों ने आज (शुक्रवार, 13 दिसंबर, 2019 को) संसद भवन की तरफ़ मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने जो बैरिकेड लगा रखे थे, प्रदर्शनकारी कथित तौर पर उन पर चढ़ कर उन्हें फाँदने लग गए

CAB protest by Jamia students turns violent; police lathicharge protestors
दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन के बहाने उगती अराजकता और जिहाद की नई पौध: तस्वीर The Pioneer से साभार

पुलिस के रोकने पर वह हिंसक हो कर उनसे भिड़ गए, और अंत में बात इतनी बढ़ गई कि पुलिस को लाठी चार्ज और आँसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों के सर पर हिंसा का भूत इतना ज़्यादा सवार था कि पुलिस ही नहीं, मीडिया पर भी उन्होंने हमला कर दिया। ट्विटर पर एक पत्रकार ने इस पर नाराज़गी जाहिर करते हुए लिखा कि अगर आप आवाज़ दबाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मीडिया को ही नहीं बोलने दे रहे, तो आप उनसे अलग कहाँ हुए जिनसे आप लड़ रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने मीडिया पर केवल सीधी हिंसा-भर नहीं की, क्योंकि मीडिया के पास कैमरे होते हैं और इनका असली चेहरा दुनिया के सामने दिख जाता। लेकिन फ़ोन पर बात कर रहे संवाददाता को घेर कर उसके कान में चीखने वाले के बारे में कोई भी बता सकता है कि कैमरा ऑफ़ होते ही ये छात्र मीडिया वालों के कितने टुकड़े कर देगा।

यही नहीं, ज़ी न्यूज़ के पत्रकार राहुल सिन्हा ने ट्वीट कर यह दावा भी किया कि हमलावर विशेष तौर पर ज़ी न्यूज़ के पत्रकारों पर हमले की फ़िराक में थे। ऐसे में यह भी नहीं माना जा सकता कि यह ‘गुस्सा’ क्षणिक, स्वःस्फूर्त था।

इस हिंसा के बाद पुलिस ने 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है

राजस्थान के टोंक में भाईयों ने किया बहन का रेप, गर्भवती पीड़िता का बच्चा कुछ घंटों में चल बसा

राजस्थान के टोंक में एक शर्मनाक घटना में एक नाबालिग के साथ उसी के सगे और फुफेरे भाईयों ने कथित तौर पर बलात्कार किया, और फ़ुफ़ेरे भाई से पीड़िता गर्भवती हो गई। पीड़िता के नवजात बच्चे का जब डीएनए टेस्ट हुआ तो उसमें फ़ुफ़ेरे भाई के पिता होने का पता चला। लेकिन वह बच्चा कुछ ही घंटों में मर भी गया। पीड़िता टोंक के देवली की रहने वाली बताई जा रही है

मीडिया खबरों में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि पीड़िता के पिता ने अपने बेटे और भांजे के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट में देवली के थानाधिकारी नरेश शर्मा द्वारा कहा गया है कि मामले की तहरीर इसी साल की 18 जुलाई को की गई थी।

शिशु के जन्म के बाद दोनों का डीएनए लेकर शिशु के साथ मिलाकर देखा गया तो पीड़िता का फ़ुफ़ेरा भाई पिता निकला

इसके पहले जब पीड़िता के गर्भवती होने के बाद उसने माँ-बाप को बताया कि उसके सगे और फ़ुफ़ेरे भाईयों ने उसे अकेला पाकर एक दिन उसके साथ बलात्कार किया था, लेकिन वह डर और शर्म के कारण उस समय चुप रही थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने फ़ुफ़ेरे भाई के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर लिया है। खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि चूँकि वह खुद भी नाबालिग है, अतः उसे किशोर न्यायालय के सामने पेश किया जाएगा

काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद पर स्टे खत्म, 9 जनवरी से सुनवाई शुरू: रिपोर्ट्स

राम जन्मभूमि आंदोलन के समय एक नारा चला था, “अयोध्या तो बस झाँकी है, मथुरा काशी बाकी है”। 9 नवंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि हिंदूवादी अब अगला दावा मथुरा और काशी में जानबूझकर हिन्दुओं के पवित्र मंदिरों को तोड़कर उनके ऊपर बनाई गई मस्जिदों को हटाने और पूरे स्थल के मालिकाना हक़ का कर सकते हैं। इसके अलावा द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक कहे जाने वाले बाबा विश्वनाथ के बगल में (या कुछ लोगों के अपुष्ट दावों की मानें तो असली ज्योतिर्लिंग के ऊपर) बनी ज्ञानवापी मस्जिद और भगवान श्री कृष्ण के जन्मस्थान मथुरा में बने ईदगाह के खिलाफ रामजन्मभूमि मंदिर की तर्ज पर आंदोलन चल सकने की भी सुगबुगाहट होने लगी है।

और इन्हीं अटकलों में से एक को बल देते हुए वाराणसी की सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्‍ट ट्रैक कोर्ट) सुधा यादव की अदालत में स्‍वयंभू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्‍वेश्‍वर के मुकदमे की सुनवाई पुनः शुरू हो गई है। इस सुनवाई पर पिछले दो दशकों से इलाहबाद हाई कोर्ट का स्टे लगा हुआ था, जो हाल ही में खत्म हो गया है। मुकदमे में अगली सुनवाई की तारीख़ 9 जनवरी, 2020 तय हुई है।

1991 में पंडित सोमनाथ व्यास व कुछ अन्य पक्षकारों ने स्थानीय अदालत में सिविल वाद दायर किया था। उनकी माँग थी कि ज्ञानवापी परिसर में नए मंदिर के निर्माण हो, और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार दिया जाए। गौरतलब है कि अभी वर्तमान मंदिर में भी कुछ बार अदालत से इजाज़त लेनी पड़ती है पूजा करने के लिए। उदाहरण के तौर पर, एक श्रद्धालु मंदिर के भीतर रह कर मंदिर की दीवार पर स्थित ‘शृंगार गौरी’ नामक स्थल का जलाभिषेक करना चाहते थे, लेकिन इजाज़त अदालत ने नहीं दी। कहा कि केवल सालाना जो पूजा होती है, वही चलते रहने की अनुमति दी जाएगी। इस प्रकार के आदेशों का क़ानूनी औचित्य चाहे जो हो, यह हिन्दू धर्म में पूजा-विधियों और कर्मकाण्डों के सतत विकास और बदलाव में बाधक होते हैं।

1991 में वाद के पक्षकारों ने भी यह विषय उठाया था कि हिंदू आस्‍थावानों को पूजा-पाठ, राग-भोग, दर्शन आदि के साथ निर्माण, मरम्‍मत और पुनरोद्धार का अधिकार प्राप्‍त है। उन्होंने दावा किया था कथित तौर पर ज्ञानवापी मस्जिद कहा जाने वाला ढाँचा ज्‍योतिर्लिंग विश्‍वेश्‍वर मंदिर के परिसर का अंश है। लेकिन 1998 में इलाहबाद उच्च न्यायालय ने पूरे मामले पर ही स्टे कर दिया। वह स्टे सुप्रीम कोर्ट से हटने के बाद सुनवाई हो रही है।

क्या अयोध्या के बाद अब काशी की बारी है?

हिन्दू पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने अदालत को अर्जी देते हुए कहा है कि ज्ञानवापी परिसर में स्‍वयंभू विश्‍वेश्‍वरनाथ का शिवलिंग आज भी स्‍थापित है। मस्जिद का निर्माण हिन्दुओं के पवित्र स्थल पर दूसरे मजहब के जबरन कब्ज़े से हुआ है। अतः, 1991 के प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट के हिसाब से भी इस स्थल का 15 अगस्त, 1947 को मूल स्वरूप हिन्दू मंदिर ही था। इस धार्मिक स्वरूप की तस्दीक करने और ऐतिहासिक परिस्थितियों के साक्ष्य इकट्ठा करने के लिए भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से सर्वेक्षण कराया जाना जरूरी है। रस्तोगी ने भवन की बाहरी और अंदरूनी दीवारों, गुंबदों, तहखाने आदि के सबंध में एएसआई की निरीक्षण रिपोर्ट मँगाने की अपील की है। उनका दावा है कि मस्जिद के केंद्रीय गुंबद के नीचे पुरातात्विक खुदाई हो तो नीचे ज्योतिर्लिंग ही निकलेगा।

गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के सर्वेक्षण ने रामजन्मभूमि मामले में हिन्दू पक्ष में फैसला जाने में अहम भूमिका निभाई थी। उसने न केवल यह साबित किया कि बाबरी मस्जिद किसी खाली जगह पर नहीं बल्कि हिन्दू मंदिर के भग्नावशेषों पर बनी, बल्कि यह भी साबित किया कि वह मंदिर विभिन्न स्वरूपों में मस्जिद के करीब दो हज़ार साल पहले से था।

CAB पर जुमे की नमाज के बाद कई जगह पत्थरबाज़ी, आगजनी और हिंसा की खबरें

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को बेलडांगा स्टेशन में आग लगा दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने वहाँ तैनात आरपीएफ कर्मियों के साथ मारपीट भी की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कहा जा रहा है कि CAB को लेकर जिले में कई कथित अल्पसंख्यक संगठनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ आरपीएफ अधिकारी ने कहा, “उग्र मजहबी प्रदर्शनकारी अचानक रेलवे स्टेशन के परिसर में आ घुसे और उन्होंने प्लेटफार्म, दो तीन मंजिले भवनों और रेलवे कार्यालयों में आग लगा दी। जब आरपीएफ कर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तब उन्हें भी बुरी तरह पीटा गया।” उन्होंने यह भी कहा कि इस विरोध प्रदर्शन से ट्रेन सेवाएँ बाधित हो गई है।

बता दें कि समुदाय विशेष बहुल मुर्शिदाबाद बांग्लादेश से सटा एक जिला है। जहाँ आज जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शन उग्र हो गया। साथ ही पश्चिम बंगाल से पुलिस बल पर पत्थरबाजी और आगजनी की खबर भी आ रही है। प्रदर्शनकारिओं ने कई जगह टायर जलाकर सड़क जाम किया तो कई जगह सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुँचाया।

इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सहारनपुर की जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद नमाजियों ने केंद्र सरकार के विरोध में CAB के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बैनर-पोस्टर भी लहराए। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है और नागरिकता संशोधन बिल सभी धर्मों के लिए नहीं है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलवी फरीद समेत कई लोगों ने नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी सौंपा तथा प्रदर्शनकारियों ने जमकर बवाल काटा।  

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने तत्काल ही बेहट, मिर्जापुर, गंगोह के अलावा सहारनपुर नगर में फ्लैग मार्च किया गया और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

गौरतलब है कि लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पास होने के बाद से फैले भ्रम के कारण इसका कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी है। कई संस्थाए और लोग इसे जबरदस्ती मजहब विरोधी या कथित अल्पसंख्यकों की नागरिकता छीनने वाला कानून बता कर दूसरों को डरा और बरगला रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम बंगाल में हजारों लोग नागरिकता संशोधित कानून के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन के लिए उतर आए। यहाँ के हावड़ा जिले में शुक्रवार को राष्ट्रीय राजमार्ग-6 को ब्‍लाक कर दिया गया। ये राजमार्ग ही कोलकाता को देश के बाकी हिस्‍सों से जोड़ता है।

आज दिल्ली में भी जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया जा रहा है। इससे पहले AMU के छात्रों ने CAB खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया था। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने गुवाहाटी में विरोध प्रदर्शन किया। कर्नाटक के कलबुर्गी शहर में धारा 144 लगाई गई है, जिसमें शुक्रवार की नमाज और डीसी कार्यालय परिसर शामिल नहीं हैं। यह शुक्रवार को शाम 6 बजे तक लागू रहेगी।

CAB का पूर्वोत्तर में जमकर विरोध किया जा रहा है। असम के कई इलाकों में भी उग्र प्रदर्शन जारी है। इस प्रदर्शन में कई सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। कल भाजपा नेता का घर और ऑफिस में भी आगजनी की गई थी। कई बसों को आग के हवाले कर दिया गया है। पूर्वोत्तर के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में भी जामिया के छात्रों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश ने पास किया ‘दिशा बिल’, 21 दिनों के अंदर दी जाएगी बलात्कारियों को सज़ा

आंध्र प्रदेश विधानसभा ने शुक्रवार (13 दिसंबर) को आंध्र प्रदेश दिशा विधेयक 2019 (आंध्र प्रदेश आपराधिक क़ानून (संशोधन) अधिनियम 2019) पारित कर दिया है। इसमें महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध से जुड़े मामलों का निपटारा 21 दिन के भीतर करने का नियम है और इसमें दोषी को फाँसी की सज़ा भी दी जाएगी।

इस प्रस्तावित नए क़ानून का नाम ‘आंध्र प्रदेश दिशा अधिनियम आपराधिक क़ानून (आंध्र प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 2019’ रखा गया है। हाल ही में पड़ोसी राज्य तेलंगाना में एक पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप और फिर नृशंस हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था। यह प्रस्तावित विधेयक पीड़िता को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है। इस विधेयक को गृह राज्य मंत्री एम सुचरिता ने विधानसभा में पेश किया जिसे सत्तारूढ़ पार्टी YSR कॉन्ग्रेस ने ‘क्रांतिकारी’ बताया।

नए क़ानून के तहत रिकॉर्ड समय सात दिनों के भीतर यौन अपराधों के मामलों की जाँच और चार्जशीट दाखिल करने की तारीख से 14 कार्य दिवसों के भीतर मुक़दमे को पूरा करने की बात कही गई है। नए पारित क़ानून के तहत सज़ा के ख़िलाफ़ अपील को छ: महीने के अंदर निपटाना होगा।

ख़बर के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (IPC) में तीन नए खंड 354E, 354F और 354G जोड़े जाएँगे जो महिलाओं के उत्पीड़न, बच्चों पर यौन उत्पीड़न और क्रमशः बच्चों पर बढ़ रहे यौन हमले को परिभाषित करते हैं। IPC की धारा-376 (बलात्कार), 376D (अस्पताल के किसी भी महिला के प्रबंधन या स्टाफ़ के किसी भी सदस्य द्वारा संभोग) और 376DA (16 साल से कम उम्र की महिला से सामूहिक बलात्कार) को सूचीबद्ध अपराधों के लिए मृत्युदंड में शामिल किया जाएगा।

ग़ौरतलब है कि 27 नवंबर को हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में एक युवती का अधजला शव बरामद हुआ था। उस शव की पहचान प्रीति रेड्डी के तौर पर हुई थी। प्रीति रेड्डी की गैंगरेप के बाद हत्या की गई और फिर लाश को जला दिया गया था। इस मामले में मोहम्मद पाशा, नवीन, चिंताकुंता केशावुलु और शिवा को गिरफ़्तार किया गया था।

आरोपितों की गिरफ़्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लोग इन्हें जल्द से जल्द सज़ा दिलवाने की माँग कर रहे थे। घटना के 9 दिन के भीतर ही ख़बर आई थी कि हैदराबाद पुलिस ने इनका एनकाउंटर कर दिया। आरोपितों को पुलिस घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट करने ले गई थी। वहाँ पुलिस का हथियार छीन आरोपितों ने भागने की कोशिश की और पुलिस कार्रवाई में मारे गए।

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जैसे ‘डॉ प्रीति’ को मारा, मेरे हैवान बेटे को भी जिंदा जला कर मार दो… लोग मुझसे नफरत करेंगे’

…वो पेट्रोल पम्प वर्कर, जिसकी मदद से ‘प्रीति रेड्डी’ के बलात्कारी-हत्यारे तक पहुँच पाई पुलिस

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