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हटाओ BHU से राजीव गाँधी का नाम: साउथ कैंपस का नाम बदलने पर एकमत से फैसला

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का नाम विश्वविद्यालय के दक्षिणी कैम्पस से हटाने की सिफारिश की है। पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि संस्थान में राजीव गाँधी का कोई योगदान नहीं था। बीएचयू कोर्ट विश्वविद्यालय की एक सलाहकार संस्था है।

यह साउथ कैम्पस 2006 में स्थापित हुआ था। मुख्य कैम्पस से 60 किलोमीटर दूर मिर्ज़ापुर के बरकछा में स्थित यह कैम्पस मुख्यतः कृषि विज्ञान के अनुसंधानों को समर्पित है। 19 अगस्त, 2006 को इसका लोकार्पण तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने किया था।

नाम बदलने का प्रस्ताव कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के निर्णय लेने वाली संस्था अकादमिक काउंसिल के पास भेज दिया है। कोर्ट की इस बैठक की अध्यक्षता चांसलर गिरिधर मालवीय ने की, जो इलाहबाद हाई कोर्ट से रिटायर्ड जज हैं। इसके अलावा वह विश्वविद्यालय के संस्थापक और हिन्दू महासभा के नेता महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के पौत्र हैं। महामना को 2015 में भारत रत्न से मरणोपरांत सम्मानित किया गया था।

9 दिसंबर, 2019 को हुई जिस बैठक में यह निर्णय किया गया, वह कोर्ट की 63वीं बैठक थी। जस्टिस मालवीय के अनुसार यह प्रस्ताव कोर्ट ने एकमत से पारित किया है

नाम बदलने की इस प्रक्रिया के दौरान जब ऑपइंडिया ने BHU के सोशल साइंस, कला संकाय, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय सहित बरकछा कैंपस के कुछ छात्रों से बात की कि क्या राजीव गाँधी का नाम हटाना ठीक है तो ज़्यादातर ने एक सुर में कहा कि बिलकुल हटना चाहिए हम छात्र तो बहुत पहले से ही माँग करते आ रहे हैं। अब प्रशासन ने इसका स्वतः संज्ञान लिया है। और प्रस्ताव भी BHU कोर्ट में पारित हो गया है।

BHU कोर्ट की बैठक में प्रस्ताव पारित

जब हमने छात्रों से पूछा कि आप छात्र क्या चाहते हैं? किसके नाम पर हो BHU के दक्षिणी परिसर का नाम? तो अमित, मनोज, अमन, पंकज,शुभम, कृष्णा कुमार, शशिकांत मिश्र, आनंद मोहन झा, विनायक जैसे कई छात्रों ने एक मत से कहा परिसर का नाम या तो महामना के नाम पर रखा जाए अगर नहीं तो उन्हीं के हिन्दू महासभा के कुछ साथियों सावरकर, गोलवरकर या हेडगेवार के नाम पर भी रखा जा सकता है। इन सभी का BHU की स्थापना के समय मालवीय जी को सहयोग रहा है। हालाँकि, कुछ लोगों ने महात्मा गाँधी का नाम भी सुझाया तो छात्रों ने यह कहकर इसे ख़ारिज किया कि वाराणसी में पहले से ही महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ है। तो सावरकर का नाम भी चल सकता है क्योंकि वो भी महामना के सहयोगी रहे हैं।

धर्म विज्ञान संकाय के पूर्व छात्र डॉ. मुनीश मिश्र से जब ऑपइंडिया ने बात की तो उन्होंने कहा, “BHU कोर्ट का यह कदम स्वागत योग्य है। इसके लिए साउथ कैम्पस बनने के समय से ही माँग होती चली आ रही थी। जैसे महामना जी शृंगेरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य जी की ही उपस्थित में विश्वविद्यालय का शिलान्यास कराना चाहते थे, पर समय की जरूरत को समझते हुए लार्ड हार्बिन की उपस्थिति में हुआ किन्तु उस समारोह का समापन शंकराचार्य की पादुका आने के उपरांत ही हुआ। उसी तरह तत्कालीन कुलपति महोदय ने समय की माँग को देखते हुए नामकरण किया, अब अगर बदला जा रहा है तो स्वागत योग्य कदम है।”

जैसे ही यह खबर कॉन्ग्रेस को लगी तो उम्मीद के मुताबिक कॉन्ग्रेस ने इस सिफारिश का विरोध किया है। कॉन्ग्रेस नेता अजय राय ने कहा है कि उनकी पार्टी ऐसा होने ही नहीं देगी। “अगर ऐसी कोई कोशिश हुई तो कॉन्ग्रेस सड़कों पर उतरेगी, और नाम बदलीकरण होने ही नहीं देगी।” पूर्व में विधायक रह चुके राय 2014 में प्रधानमंत्री (तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के और वाराणसी लोक सभा के भाजपा प्रत्याशी) नरेंद्र मोदी से लोक सभा चुनाव हार चुके हैं।

इसके पहले बीएचयू कुछ दिन पूर्व भी चर्चा में था। उस समय उसके सनातन विद्या और धर्म विज्ञान संकाय (SVDV फैकल्टी) में एक मुस्लिम प्रोफेसर डॉ. फ़िरोज़ खान की नियुक्ति का छात्रों ने कड़ा किरोध किया था क्योंकि यह संकाय केवल सनातन धर्म के धर्मावलम्बियों के लिए ही बना था। एक महीने से अधिक समय तक चला गतिरोध तब टूटा जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने समझौता करते हुए डॉ. फ़िरोज़ खान को दूसरे विभाग में उसी विषय की शिक्षा में समायोजित कर लिया और उन्होंने SVDV से त्यागपत्र दे दिया।

आर्टिकल 370, अयोध्या, CAB…, कहीं आपने भी तो गूगल पर नहीं खोजे इन 20 सवालों के जवाब

आज के समय में सूचना एकत्रित करने के लिए गूगल सबसे आसान माध्यम है। अरबों की संख्या में विश्व के हर कोने से लोग इस पर अपने सवालों के जवाब ढूँढते हैं। कई बार कोई मुद्दा ऐसा उठता है, जिस पर जाहिर है कि एक साथ कई लोगों की जानने की इच्छा हो जाती है। ऐसे में जब मिलते-जुलते सवाल गूगल पर कई लोगों द्वारा डाले जाते हैं तो गूगल उसे अपनी वार्षिक रिपोर्ट में संकलित करता है। ताकि उन मुद्दो पर प्रकाश डाला जा सके, जिसके लिए सबसे ज्यादा गूगल पर सर्च किया गया। इसी क्रम में आज हम आपको उन 20 सवालों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनका जवाब इस वर्ष भारतीयों ने गूगल पर सबसे ज्यादा खोजा और ये गूगल सर्च के टॉप ट्रेंड में रहे।

सवाल1- अनुच्छेद 370 क्या है?

सवाल 2- मतदान कैसे किया जाए?

सवाल 3- एक्जिट पोल क्या है?

सवाल 5- आधार कार्ड से कैसे लिंक करे पैन कार्ड?

सवाल 6- ब्लैक होल क्या है?

सवाल 7- वोटर लिस्ट में नाम कैसे चेक किया जाए?

सवाल-7 हाउडी मोदी क्या है?

सवाल 8- नीट का रिजल्ट कैसे देखा जाए?

सवाल 9- ई सिगरेट क्या है?

सवाल 10- ट्रे के मुताबिक चैनल्स को कैसे चुना जाए?

सवाल 11- क्रिकेट में डीएलएस पद्धति (DLS Method) क्या है?

सवाल 12- होली के रंगों को कैसे छुड़ाया जाए?

सवाल 13- अयोध्या मामला क्या है?

सवाल 14- पबजी कैसे खेलें?

सवाल 15- आर्टिकल 15 क्या है?

सवाल 16- फास्टैग कैसे पाएँ?

सवाल 17- सर्जिकल स्ट्राइक क्या है?

सवाल 18- पोलिंग बूथ के बारे में कैसे पता लगाएँ?

सवाल 19 नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स ऑफ इंडिया क्या है?

सवाल 20- GST9-R कैसे फाइल करें?

तो ये हैं वो 20 सवाल जिन्हें इस साल भारतीयों द्वारा सबसे ज्यादा सर्च किया गया या ये कहें जिनके बारे में भारत के लोग सबसे ज्यादा जानने के इच्छुक रहे। इनमें राजनैतिक, सामाजिक सवालों के अलावा खेल, मनोरंजन से जुड़े सवाल भी रहे।

बता दें मई-जून के महीने में हुए लोकसभा इलेक्शन और विश्व कप के दौरान गूगल पर विश्व कप से संबंधित खबरों को सबसे ज्यादा सर्च किया गया जबकि लोकसभा इलेक्शन दूसरे ट्रेंड पर रहा। इसके बाद तीसरे नंबर पर चंद्रयान-2 ने ट्रेंड किया और शाहिद कपूर की कबीर सिंह भी इस बार विवादों के कारण चौथे नंबर पर जगह बनाने में सफल हुई। इसके बाद आर्टिकल 370, एनआरसी, कैब, अयोध्या जैसे मुद्दों भी इस साल गूगल के सर्च पर टॉप ट्रेंड में रहे। इनके अलावा एग्जिट पोल, ब्लैक होल, हाउडी मोदी जैसे सवालों को भी काफी सर्च किया गया।

नाबालिग लड़कियों को नंगा कर गंदी बात करती थी सुपरिटेंडेंट असमां पीरजादा: जोधपुर बालिका गृह का मामला

राजस्थान के जोधपुर राजकीय बालिका गृह में शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। बालिका गृह की सुपरिटेंडेंट असमां पीरजादा वहाँ रहने वाली बालिकाओं के कपड़े उतरवाकर उन पर फब्तियाँ कसती थी। उन्हें पीटती थी। इतना ही नहीं मासिक धर्म के दौरान जब लड़कियाँ जब सेनेट्री पैड माँगती थी, तो पैड देने की बजाए उनसे बदसलूकी करती थी। इस मामले में सुपरिटेंडेंट और दो केयर टेकर को निलंबित कर दिया गया है।

ख़बर के अनुसार, बालिका गृह में रहने वाली लड़कियों ने बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्षा संगीता बेनीवाल से सेंटर सुपरिटेंडेंट असमां पर भामाशाह के नाम पर अनजान आदमियों से मिलने के लिए मजबूर करने की शिक़ायत भी की। यह बालिका गृह जोधपुर के मंडोर में है। जोधपुर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ-साथ बाल संरक्षण आयोग की चेयरमैन संगीता बेनीवाल का भी नगर गृह है।

ख़बर के अनुसार, मामले को गंभीरता से लेते हुए जब छानबीन की गई तो बेनीवाल को पता चला कि वहाँ और भी कई अन्य अनियमितताएँ बरती गई हैं। यह भी पता चला है कि बच्चियों को कई तरह से प्रताड़ित किया जाता था। फ़ब्तियाँ, भूखा रखने के अलावा मासिक धर्म के दौरान सेनेट्री पैड न देकर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था। 

बेनीवाल ने बताया कि इस बालिका गृह में तकरीबन 45 बालिकाएँ हैं। उन्होंने इस ओर भी इशारा किया कि इससे पहले भी बालिका गृह की बालिकाओं ने उन्हें अकेले में अपनी पीड़ा बताई थी। उन्होंने कहा, “इन बालिकाओं के साथ ये सभी कृत्य अमानवीय हैं। मैंंने बालिका गृह का निरीक्षण किया है, जिसमें और भी अनियमितताएँ सामने आई हैं। विभाग द्वारा अधीक्षक (असमां) को निलंबित किया गया है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।”

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‘मुर्गीघर की रखवाली लोमड़ी करे तो सतर्क रहने की ज़रूरत, हर आतंकी गतिविधि के पीछे होता है पाकिस्तान’

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी मिशन की पहली सचिव पॉलोमी त्रिपाठी जम्मू-कश्मीर मामले पर एक बार फिर से पाकिस्तान की कलई खोलकर रख दी है। कश्मीर मुद्दे को लेकर दुनिया भर में भद पिटवा चुके पाकिस्तान को एक बार फिर त्रिपाठी ने कड़ी फ़टकार लगाई है। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में हर आतंकी गतिविधि के पीछे पाकिस्तान का हाथ होता है। पाकिस्तान हमेशा से ही आतंकवादियों को पनाह देता आया है। 

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को तो उठाया ही साथ में नागरिकता (संशोधन) विधेयक का भी ज़िक्र किया। पॉलोमी त्रिपाठी ने गुरुवार (12 दिसंबर) को ‘Culture of Peace’ विषय पर चर्चा के दौरान कहा,

“सहयोग की भावना शांति की आत्मा होती है। इस भावना का दुरुपयोग और राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। हमें ऐसी स्थिति में विशेष रूप से सतर्क रहने की ज़रूरत है, जब मुर्गीघर की रखवाली लोमड़ी कर रही हो।”

दरअसल, पॉलोमी त्रिपाठी पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मुनीर अकरम की टिप्पणी का जवाब दे रही थीं। मुनीर अकरम ने अपने भाषण के दौरान भारत और उसके आंतरिक मामलों पर जिनमें जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने को लेकर, नागरिकता (संशोधन) विधेयक, राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण और सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या विवाद पर दिए फ़ैसले आदि शामिल हैंं, उन पर टिप्पणियाँ की थी। 

पॉलोमी त्रिपाठी ने कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा इस एजेंडे का दुरुपयोग करने के प्रयास पर शायद ही उन लोगों को आश्चर्य हो, जो पाकिस्तान की हरक़तों के बारे में न जानता हो। उन्होंने पाकिस्तान के नक़ाब को उजागर करते हुए कहा कि वो हमेशा राजनीतिक लाभ के लिए झूठे बयानों को सहारा लेता है उसके बल पर सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है।

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अख़्तियार करते हुए पॉलोमी त्रिपाठी ने कहा,

“वास्तव में अंतर्राष्ट्रीय स्तर हो रही हर आतंकवादी गतिविधि के तार पाकिस्तान की जमीन से जुड़े हुए हैं। आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकानों में प्रशिक्षित किया जाता है। बच्चों और युवाओं को किताबों की जगह बंदूक दी जाती हैं, महिलाओं पर अत्याचार किया जाता है, और अल्पसंख्यकों को सताया जाता है।”

उन्होंने कहा कि इन सुरक्षित ठिकानों से जब आतंकवादी बाहर निकलते हैं तो विश्व स्तर पर शांति भंग करने की धमकी देते हैं। उन्होंने कहा कि जो पाकिस्तान ख़ुद की सरज़मी पर आतंकियों को पाल रहा है वो दूसरे देशों की आंतरिक व्यवस्था पर बेवजह ही सवाल खड़े करता रहता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने पाकिस्तान के हर आरोप को बेबुनियाद करार देते हुए उन्हें एक सिरे से ख़ारिज कर दिया। पॉलोमी त्रिपाठी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

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कॉन्ग्रेस ने जिसको कहा निर्बला, फोर्ब्स की 100 ताकतवर महिलाओं में वह निर्मला

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बीते दिनों प्याज से लेकर जीडीपी पर दिए बयानों पर विरोधियों द्वारा खूब ट्रोल किया गया। उनके रहन-सहन से लेकर उनकी जवाब देने की क्षमता पर सवाल उठाए गए। लेकिन, सभी आलोचनाओं का मुँहतोड़ जबाव देते हुए वो आज दुनिया की सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल हो गई हैं।

फोर्ब्स ने दुनिया की 100 ताकतवर महिलाओं की लिस्ट जारी की है। इसमें निर्मला सीतारमण को 34वें नंबर पर रखा गया है।

निर्मला सीतारमण के अलावा दो अन्य भारतीय महिलाओं ने भी इस सूची में अपनी जगह बनाई। इनमें से एक एचसीएल कॉर्पोरेशन की सीईओ और एचसीएल टेक की वाइस चेयरपर्सन रोशनी नाडर मल्होत्रा 54वें और दूसरी बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ 65वें नंबर पर हैं।

फोर्ब्स द्वारा जारी की गई इस सूची में लगातार नौंवी बार पहले स्थान पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल है। इसके बाद यूरोपियन सेंट्रल बैंक की प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लगार्ड (Christine Lagarde) हैं। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) तीसरे नंबर पर हैं। लिस्ट में बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना भी हैं।

टाइम मैगजीन की पर्सन ऑफ द ईय़र ग्रेटा थुनबर्ग (Greta Thunberg) ने इस लिस्ट में पहली बार अपनी जगह बनाई है। फोर्ब्स मैगजीन का कहना है, “2019 में दुनिया भर की महिलाओं ने सरकार, बिजनेस, फिलैंथ्रॉपी (दान) और मीडिया के क्षेत्र अपने नेतृत्व का लोहा मनवाया है। इन्होंने अपनी एक नई राह तैयार की है।”

बता दें, इस लिस्ट में 23 महिलाएँ ऐसी हैं जिन्होंने पहली बार फोर्ब्स की सूची में अपनी जगह बनाई। इसमें एक नाम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भी है। जो भारत की पहली फुल टाइम पहली महिला फाइनेंस मिनिस्टर हैं। इससे पहले इंदिरा गाँधी ने प्रधानमंत्री रहते यह पोर्टफोलियो अपने पास रखा था। वहीं, HCL की CEO होने के नाते रोशनी 8.9 अरब डॉलर की इस कंपनी के सारे रणनीतिक फैसले लेती हैं। वह कंपनी के कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉ​नसिबिलिटी कमिटी की चेयरपर्सन और शिव नाडर फाउंडेशन की ट्रस्टी भी हैं।

सूची में शामिल एक अन्य महिला शॉ देश की ऐसी सबसे अमीर महिला हैं जिन्होंने अपनी पूरी संपति स्वयं कमाई है। देश की सबसे बड़ी बॉयो फार्मास्यूटिकल कंपनी बायकॉन की शुरुआत उन्होंने की। इस कंपनी का मार्केट अब अमेरिका में भी बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने हालिया सत्र के दौरान लोकसभा में वित्त मंत्री को निर्बला कह दिया था। चौधरी ने कहा था, “हम आपका सम्मान करते हैं मगर कभी-कभी आपको ‘निर्बला सीतारमण’ कहने का मन करता है, क्योंकि आप मंत्री पद पर तो हैं, लेकिन जो आपके मन में है वह कह भी नहीं पाती हैं।”

मनमोहन और रघुराम राजन के दिनों की बैंकिंग ने सब बर्बाद किया: निर्मला सीतारमण

निर्मला सीतारमण ने जो किया, वो आजम खान जैसों के मुँह पर ‘तमाचा’ है – शशि थरूर ने भी किया सैल्यूट!

अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उठाए कई जरूरी कदम

CAB के खिलाफ जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने किया उग्र प्रदर्शन: पुलिस ने टाँग कर सड़क से हटाया

लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पास होने के बाद से फैले भ्रम के कारण इसका कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी है। कई संस्थाए और लोग इसे जबरदस्ती मुस्लिम विरोधी या कथित अल्पसंख्यकों की नागरिकता छीनने वाला कानून बता कर दूसरों को डरा और बरगला रहे हैं।

आज जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया जा रहा है। इससे पहले AMU के छात्रों ने CAB खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया था। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने गुवाहाटी में विरोध प्रदर्शन किया। कर्नाटक के कलबुर्गी शहर में धारा 144 लगाई गई है, जिसमें शुक्रवार की नमाज और डीसी कार्यालय परिसर शामिल नहीं हैं। यह शुक्रवार को शाम 6 बजे तक लागू रहेगी।

CAB का पूर्वोत्तर में जमकर विरोध किया जा रहा है। असम के कई इलाकों में भी उग्र प्रदर्शन जारी है। इस प्रदर्शन में कई सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। कल भाजपा नेता का घर और ऑफिस में भी आगजनी की गई थी। कई बसों को आग के हवाले कर दिया गया है। पूर्वोत्तर के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में भी जामिया के छात्रों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है।


जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने सड़क पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, मौके पर भारी संख्या पुलिस की मौजूदगी ने छात्रों को टाँगकर सड़क से हटाया। काफी संख्या में प्रदर्शन कर रहे जामिया के छात्र बैरिकेड के ऊपर चढ़कर भी उग्र प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस छात्रों को टाँग कर मौके से हटाने की कोशिश कर रही थी। छात्रों की भीड़ को तीतर-बितर करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात की गई थी।

बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक को पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी। इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों के पास समान अधिकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी कम से कम 20 फीसदी कम हुई है। नागरिकता संशोधन बिल में प्रावधान है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिन्दू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध एवं पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। 

SC ने ‘वायर’ का उड़ाया फ्यूज, ‘150 बच्चे कैद में’ कह कर कश्मीर पर फैला रहा था पाकिस्तानी प्रपंच

द वायर और उसके सम्पादक सिद्धार्थ वरदराजन एक बार फिर बेनकाब हो गए हैं। इस बार उन्हें आईना खुद सुप्रीम कोर्ट में दिखाया गया है, जहाँ उनके और पत्रकारिता के समुदाय विशेष के द्वारा कश्मीर के बारे में फैलाए जा रहे झूठ की पोल एक बार फिर खुल गई है। घाटी में बच्चों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने की जाँच करने गए हाईकोर्ट जजों के विशेष दल ने लौटकर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य की सभी जेलें देखने के बाद भी उन्हें कोई बच्चा या किशोर कैद नहीं मिला।

उनकी रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए वॉशिंगटन पोस्ट में छपी खबरों को नकार दिया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि जब 4 हाईकोर्ट जज जाकर देख कर आए हैं और एक बात कह रहे हैं, तो मीडिया की सुनी-सुनाई बातों पर जाने का क्या तात्पर्य।

गौरतलब है कि कश्मीर से 370 के तहत मिला विशेष दर्जा छिनने के तुरंत बाद से ही मीडिया गिरोह ने चिल्लाना शुरू कर दिया था कि कश्मीर में बच्चों और किशोरों को सेना व पुलिस ने उठा कर वयस्कों की तरह ही जेल में ठूँस दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से लेकर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक, सेना के अधिकारियों से लेकर पुलिस के स्थानीय थानेदारों तक सभी के नकारने के बाद भी यह प्रोपेगेंडा थमा नहीं, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय हवा भी दी जाने लगी।

आज जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के 4 जजों ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता एनाक्षी गांगुली का किशोरों के जेलों में अवैध रूप से बंद होने का दावा गलत है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि फिर वायर इस आशय की रिपोर्ट कैसे और क्यों छाप रहा है

यह पहली बार हो रहा हो, ऐसा भी नहीं है। इसके पहले भी अक्टूबर में उसी हाई कोर्ट के 4 जज गए थे पत्रकारिता के समुदाय विशेष के इन्हीं आरोपों के चलते, और लौटकर उन्होंने रिपोर्ट दी सुप्रीम कोर्ट को कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं

लेकिन एक महीने बाद इन्हें तसल्ली देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट से फिर से एक बार कहा कि 4 जज जाएँ और हालात का ताज़ा जायज़ा लें। वे गए, और लौटकर फिर से एक बार वही बात बताई, जो पहले भी सामने आ चुकी थी।

ऐसे में मीडिया गिरोह और इसके सबसे बड़े सरगना सिद्धार्थ वरदराजन को यह बताना चाहिए कि उनकी कहानी के हिसाब से जेलों में बंद करीब 150 नाबालिग कहाँ चले गए। यही नहीं, इस विषय पर उनका हालिया प्रोपेगंडा लेख पाकिस्तान के अख़बार डॉन के साथ साझे की खेती में छपा है। इसके बारे में भी उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए कि इसके लिए उन्होंने डॉन से पैसा लिया और उसे भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा बना कर दिया, या फिर उनके पास भारत का नमक खाते हुए नमकहरामी करने वालों की पौध में कमी आ गई, जो डॉन से प्रोपेगेंडा खरीदना पड़ रहा है।

अंत में मोदी सरकार और गृह मंत्री अमित शाह से वह सवाल, जो सोशल मीडिया पर आज सैकड़ों लोग पूछ रहे हैं: अमेरिकी नागरिक वरदराजन को आखिर किस मजबूरी के तहत भारत के मीडिया संस्थान (भले ही वामपंथी प्रोपेगंडा पोर्टल ही क्यों न हो) का मुखिया बने रहने दे रही है सरकार? क्यों नहीं कोई कानून ले आती कि भारतीय राजनीति को भारत की ज़मीन पर और भारत के संसाधनों से कवर कर रहे अख़बारों, चैनलों, पोर्टलों आदि में प्रमुख पदों पर केवल भारतीय नागरिक ही नियुक्त हो सकते हैं? आखिर अभिव्यिक्ति की स्वतंत्रता झूठ फ़ैलाने का तो लाइसेंस नहीं होती!

नागरिकता विधेयक पर ही BJP को मिली दोबारा सत्ता, बिना घोषणापत्र पढ़े ही शेखर गुप्ता फैला रहे झूठ-भ्रम

राणा अयूब ने विदेशी पत्रकार को J&K में अवैध रूप से घुसाया, भारत-विरोधी प्रचार किया: देश के साथ गद्दारी!

धोखा, बेशर्म, पाखंड… विलाप कर रहे लिबरल गैंग की बहुत बुरी जली, शब्दों से दे रहे खुद को तसल्ली

J&K: एक दशक से लटका था हाइवे का काम, 72 साल पुराना गुरुद्वारा हटाने को सिख राजी

जम्मू-कश्मीर में विकास हेतु श्रीनगर-बारामुला रोड पर बनने वाले राजमार्ग पर कल मुहर लग गई। गुरुवार (दिसंबर 13, 2019) को कश्मीर में सिख समुदाय के लोगों ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए 72 साल पुराने गुरुद्वारे को गिराकर राजमार्ग बनाने की अनुमति जिला प्रशासन अधिकारियों को दे दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1947 में बना गुरुद्वारा दमादम साहिब श्रीनगर-बारामूला रोड पर था। इसे अब दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। धार्मिक स्थल को शिफ्ट करने को लेकर कई जगहों पर प्रशासन और समुदाय विशेष के लोगों के बीच तनातनी की घटनाएँ सामने आ चुकी है। ऐसे में कश्मीर के सिख समुदाय और गुरुद्वारा प्रशासन का यह कदम नजीर की तरह है।

जानकारी के मुताबिक इस राजमार्ग का निर्माण एक दशक से लटका हुआ था। लेकिन अब, सिख समुदाय और श्रीनगर जिला प्रशासन के बीच हुए एक समझौते के बाद इस पुराने गुरुद्वारे को नेशनल हाइवे के लिए तोड़ा जाएगा। पास की एक ऑप्शनल जगह पर गुरुद्वारे का निर्माण होगा।

श्रीनगर-बारामूला रोड पर स्थित ये गुरुद्वारा पाकिस्तान से आए परिवारों की सेवा के लिए जाना जाता है। यहाँ लंगर के अलावा सामाजिक सेवा कार्य होते हैं। बाढ़ पीड़ितों और भूकंप पीड़ितों को शरण देना इसमें शामिल है।

राजमार्ग का रुका काम पूरा कराने के लिए कुछ समय पहले श्रीनगर के उपायुक्त शाहिद इकबाल चौधरी ने व्यक्तिगत रूप से चर्चा में हस्तक्षेप किया। उन्होंने इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए सिख समुदाय से संपर्क किया। जिसके बाद ये फैसला निकलकर सामने आया।

सिख समुदाय के इस फैसले पर शाहिद चौधरी ने कहा, “यह ऐतिहासिक है। श्रीनगर में नेशनल हाइवे के लिए गुरुद्वारा कमिटी ने सहमति दे दी। हमारी बातचीत हो रही थी। वैकल्पिक जमीन और सहयोग के लिए हमारा ऑफर उन्होंने स्वीकार कर लिया। संगत को धन्यवाद देने के लिए कोई शब्द नहीं है।”

वहीं, फैसले के बाद एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को उपायुक्त और गुरुद्वारा प्रबंधन की मौजूदगी में गुरुद्वारा दमदमा साहिब को तोड़ने का काम शुरू हुआ। जब तक नई जगह पर गुरुद्वारा बन नहीं जाता, तब तक यह एक अस्थायी जगह में रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सिख समुदाय द्वारा दिए किए गए डिजाइन के अनुसार गुरुद्वारा के निर्माण का काम सौंपा गया है।

NDTV ने बलात्कारी अनवर खान को ‘बाबा’ कह कर छुपाया, ट्वीट में लिखा तांत्रिक

NDTV की कलाकारी ऐसी खबरों में दिख ही जाती है जिसमें आरोपित समुदाय विशेष से हो। मजहबी अपराधियों को इस तरह पेश किया जाता है जैसे वह गुमनाम हो या फिर उसे हिन्दू प्रतीक के पीछे छिपाने की कोशिश करता है।

ताजा मामला भोपाल का है। आरोपित 55 वर्षीय अनवर खान है। वह ‘निकाई अब्बा’ है, अर्थात वह व्यक्ति जो निकाह के वक़्त औरत का हाथ उसके शौहर के हाथ में देता है। आरोपित अनवर खान निकाह हलाला के नाम पर एक युवती का बलात्कार करता है। पुलिस के सामने उसने अपना गुनाह भी कबूला है। महिला उसके खिलाफ नामजद FIR करती है। लेकिन NDTV जैसे न्यूज़ चैनल चूँकि अपराधी समुदाय विशेष से है तो उसे ‘तांत्रिक’, ‘बाबा’, ‘धर्मगुरु’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए मामले को स्पिन देकर तथाकथित सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की कोशिश करता है।

यदि अपराधी का नाम पता चल गया तो उसके मजहब का भी पता लग जाएगा। जैसे आज तक आतंकवाद का कोई धर्म ऐसे न्यूज़ चैनल नहीं ढूँढ पाए हैं जब आतंकी मजहब विशेष से होता है। लेकिन ऐसों के हिसाब से ‘हिन्दू बलात्कारी’ और ‘भगवा आतंकवाद’ से लेकर ‘हिन्दू टेरर’ होता है। क्योंकि इससे उनके हिसाब से मजहबी अपराध को मास्क करने या बाद में ऐसे फर्जी नैरेटिव बनाने में बल मिलता है कि देखिए ज़्यादातर बलात्कारी या अपराधी तो ‘हिन्दू बाबा’ या ‘तांत्रिक’ ही हैं, आतंकी भी वही हैं, वो तो शांति के दूत हैं। यही वे दूत हैं जो गंगा-जमुनी तहजीब को बचाए हुए हैं। ऐसे में NDTV जैसे चैनलों की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है कि गलती से भी ऐसे शब्दों का प्रयोग न हो जाए जिससे डरा हुआ शांतिदूत और डर जाए। जबकि सच्चाई यही है कि NDTV और वामपंथी विचारधारा के पोर्टल और चैनल ही सबसे अधिक डर फैलाते हैं। बात-बे-बात में आपातकाल लागू हो जाता है, लेकिन जब सही में लगा था उस पर मौन रहते हैं। इन्हे जर्मनी का हिटलर तो हर समय भारत में साकार होता दिखता है लेकिन स्टालिन, लेनिन, माओ जैसे नरपिचाश मसीहा नजर नहीं आते हैं। डर अगर इस देश में कोई बोता आया है तो यही मीडिया गिरोह के लोग हैं।

गौरतलब है, NDTV अपने रिपोर्ट में लिखता है, “भोपाल में एक 22 वर्षीय महिला को कथित तौर पर पति ने तीन तलाक दे दिया और फिर उसे एक बाबा के पास भेज दिया। उस बाबा ने हलाला के बहाने उससे कथित रूप से बलात्कार किया।”

NDTV

NDTV आगे लिखता है, “भोपाल में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण एक्ट 2019 ) के तहत एक बाबा और पीड़ित महिला के पति के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। एसएचओ अजय नायर ने बताया कि महिला की शिकायत मिली है कि उसके पति ने उसे तीन तलाक दिया। इसके बाद उसने बाबा को बुलाया और कहा कि वह पत्नी को अपनाना चाहता है और हलाला चाहता है। महिला का आरोप है कि उसके ससुराल के लोग बाबा के प्रति घोर अंधविश्वास से घिरे हैं। आरोपी 51 साल के अनवर खान ने स्वीकार किया कि उसने महिला से लगातार तीन दिन तक रेप किया।”

लेकिन ट्विटर पर NDTV ‘तांत्रिक’ लिखकर इसे बेचता है ताकि कोई पढ़े तो लगे कि अपराधी हिन्दू होगा। ऐसा NDTV ने पहली बार नहीं किया है। अपने दर्शकों को झूठे और ट्विस्टेड सूचनाओं से बरगला कर एक मजहब को बचाने और हिन्दुओं और इसके प्रतीकों को बदनाम कर, वामपंथी और देश विरोधी विचारधारा से पोषित ऐसे न्यूज़ चैनल जो समाज में केवल समुदाय का चहेता बनने के लिए हिन्दुओं को हर संभव बदनाम करने का खेल खुलेआम खेलते रहे हैं।

पूरा मामला क्या है:

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके से तीन तलाक और हलाला से जुड़ा मामला सामने आया है। जहाँ 22 वर्षीय महिला को पहले उसके शौहर ने तलाक देकर घर से बाहर कर दिया और फिर एक निकाई अब्बा ने उसके साथ संबंध बनाने के लिए उस पर ज्यादती की, उसका बलात्कार किया। पूरे मामले में पुलिस मे महिला की शिकायत पर उसके शौहर और निकाई अब्बा पर दहेज प्रताड़ना, दुष्कर्म और मुस्लिम महिला संरक्षण कानून के तहत के दर्ज कर लिया है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सीएसपी जहाँगीराबाद अलीम खान ने इस मामले पर बताया कि 22 वर्षीय महिला बिस्मिल्लाह कॉलोनी में रहती थी और कुछ समय पहले ही उसका निकाह हुआ था। लेकिन निकाह के कुछ दिन बाद ही उसका शौहर उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा। हद तब हो गई जब 23 नवंबर को उसने महिला को तीन तलाक कहकर घर से बाहर कर दिया। पीड़िता के घरवालों ने कई बार उसे समझाने की कोशिश भी की। मगर समझौता न हो सका।

महिला के अनुसार, शादी के बाद से ही निकाई अब्बा उर्फ अनवर खान, जिसका आना-जाना उसके ससुराल में होता था, उसने महिला पर गंदी निगाह रखनी शुरू कर दी थी। जब भी उसके ससुराल के लोग घर पर मौजूद नहीं होते थे, तो वह उसके पास पहुँच जाता था और उसके सामने अश्लील हरकतें करता था। महिला का कहना है कि अनवर की हरकतों के बारे में उसने अपने शौहर को बताया हुआ था। लेकिन वो अपनी बीवी की बातों पर विश्वास नहीं करता था।

महिला के मुताबिक, उसके निकाह के एक माह बाद ही वो अपने शौहर के साथ ससुराल से अलग रहने लगी थी, लेकिन तब भी अनवर का उसके घर पर आना-जाना होता था। बीते 23 नवंबर को महिला का जब अपने शौहर से विवाद हुआ तो शौहर के जोर देने पर अनवर खान को बुलवाया गया। जहाँ उसने पीड़िता से कहा, “तुम्हारे शौहर ने तुम्हें तलाक दे दिया है, अब हलाला करने के लिए तुम्हें मेरे साथ संबंध बनाने होंगे।”

जब महिला ने इस बारे में अपने शौहर से पूछा तो उसने जवाब दिया कि उसने शरीयत के हिसाब से उसे तीन तलाक दिया है। इसलिए उसे वैसा ही करना होगा, जैसा निकाई अब्बा कहता है। इसके बाद उसे मारपीट कर अनवर के पास भेज दिया गया और बिस्मिल्लाह कॉलोनी स्थित अपने घर में उसने महिला के साथ बलात्कार किया। रात में जब उसने शौहर को फोन करके बुलाया तो सब जानने के बाद भी उसने घटना का विरोध नहीं किया।

महिला की मानें तो 26 नवंबर को निकाई अब्बा ने उसे अपने साथ रखा, उसके साथ अश्लील हरकतें की और बाद में उसे उसके मायके भेज दिया। इसके साथ ही उसे धमकी दी कि अगर वह पुलिस के पास गई तो वे उसे जान से मार देंगे। बहुत दिनों तक महिला ने आपबीती किसी को नहीं बताई। लेकिन मंगलवार को हिम्मत करके वह अपने परिजनों को लेकर पुलिस के पास पहुँची और अपने शौहर समेत निकाई अब्बा के घिनौने कारनामों से पर्दा उठाया। जिसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों पर मामला दर्ज करके उन्हें हिरासत में लिया।

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ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन की बल्ले-बल्ले, 370 पर पाक राग अलापने वाली लेबर पार्टी को जनता ने नकारा

ब्रिटेन में हुए आम चुनाव में सत्ताधारी कंज़र्वेटिव पार्टी ने जीत हासिल की है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तानी राग अलापने वाली लेबर पार्टी को क़रारी शिक़स्त मिली है। लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी है। हार स्वीकारते हुए उन्होंने कहा है कि अगले चुनाव में वे लेबर पार्टी का नेतृत्व नहीं करेंगे।

दरअसल, ब्रेग्जिट को लेकर आकस्मिक हुए चुनाव में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को आम चुनाव में शुक्रवार की बहुमत मिला है। बीबीसी की ख़बर के अनुसार, ब्रिटेन के आम चुनाव में सत्ताधारी कंज़र्वेटिव पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। 650 सीटों वाली संसद पार्टी ने बहुमत के लिए ज़रूरी 326 सीटों का आँकड़ा पार कर लिया है। रुझानों के अनुसार, पार्टी के खाते में 363 सीटें आ सकती हैं।

ब्रिटेन के आम चुनाव में पीएम बोरिस जॉनसन को जीत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा, “पीएम बोरिस जॉनसन को प्रचंड बहुमत के साथ वापसी के लिए बहुत-बहुत बधाई। मैं उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ। भारत-ब्रिटेन के करीबी संबंधों के लिए मिलकर काम करना चाहता हूँ।”

बता दें कि एग्ज़िट पोल में भी इसी तरह के नतीजों का अनुमान लगाया गया था। एग्ज़िट पोल में बोरिस जॉनसन की कंज़र्वेटिव पार्टी को हाउस ऑफ कॉमन्स में 368 सीटें जीतने की उम्मीद जताई गई थी।

जेरेमी कॉर्बिन की पार्टी ने भारत के अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के बाद विरोध में आए पाकिस्तानी समूहों का समर्थन किया था। वहीं, अधिकांश ब्रिटिश-भारतीय समुदायों ने इस चुनाव में कंज़र्वेटिव पार्टी के बोरिस जॉनसन का खुले तौर पर समर्थन किया।

कॉर्बिन की लेबर पार्टी ने कश्मीर पर पाकिस्तानी मूल के सदस्यों द्वारा लाया गया एक ‘प्रस्ताव’ भी पारित किया था। इस प्रस्ताव में कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की वकालत करते हुए पाकिस्तान की तरह ही भारत के फैसले की आलोचना की गई थी।

इसके अलावा, भारतीय कॉन्ग्रेस पार्टी ने यूके के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की थी, इसमें कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति पर चर्चा की गई थी।

इतना ही नहीं, पाकिस्तानी प्रायोजित ब्रिटिश समूहों द्वारा आयोजित भारत-विरोधी मार्च में कई लेबर पार्टी के सदस्य और यहाँ तक कि उनके सांसद भी भाग लेते नज़र आए। भारत-विरोधी जुलूसों ने दो मौक़ों पर लंदन में भारतीय उच्चायोग के पास हिंसक प्रदर्शन भी किया था।

विवादास्पद कश्मीर प्रस्ताव के बाद, भारतीय उच्चायोग ने भारत-विरोधी तत्वों के खुले समर्थन की कड़ी आलोचना की थी और लेबर पार्टी के साथ अपने तय कार्यक्रमों को रद्द कर दिया था। ब्रिटेन में भारतीय समुदाय ने भी नाराज़गी व्यक्त की थी और कंज़र्वेटिव पार्टी के समर्थन की घोषणा की थी। वहीं, लेबर पार्टी का चेहरा उस समय सबके सामने आ गया था जब आतंकवादी संगठन जेकेएलएफ ने उसे समर्थन की घोषणा की।

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