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महमूद से दोस्ती में गई बुजुर्ग दंपति की जान: आकिब और उस्मान ने गला रेता

लखनऊ के चौपटिया में बुजुर्ग दंपत्ति की हत्या करने वाले आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि बुजुर्ग दंपत्ति (70 वर्षीय हिलाल अहमद और 65 वर्षीय पत्नी बिलकिस ) के घर में लूटपाट कर उनकी हत्या करने वाला कोई और नहीं बल्कि उनके करीबी दोस्त महमूद-उल-हसन का बेटा आकिब महमूद है। जिसने अपने दोस्त उस्मान के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। दोनों आरोपित चौपटिया इलाके के रहने वाले हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान इनके पास से 2 चाकू, बाइक, लूटे गए रुपए, जेवरात व अन्य सामान को बरामद कर लिया है। साथ ही बताया है कि दोनों आरोपितों की धड़-पकड़ सीसीटीवी कैमरों और फुटेज की मदद से की जा सकी।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि बुजुर्ग दंपत्ति की हत्या के बाद पुलिस टीम ने संदिग्धों की फुटेज सोशल मीडिया पर जारी किए थे। जिसके बाद एक युवक उनके पास संदिग्धों की जानकारी लेकर पहुँचा और उसने दावा किया कि वह उनमें से एक को पहचानता है। युवक के बताए अनुसार ही पुलिस ने चौपटिया इलाके में रहने उस्मान उर्फ चपाती को हिरासत में ले लिया। जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने हिलाल और बिलकिस की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली। साथ ही उसने पुलिस को अपने साथी आकिब का नाम भी बताया। इसके बाद पुलिस ने उसको भी गिरफ्तार कर लिया।

एएसपी ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि हिलाल अक्सर आकिब के पिता महमूद से मिलने उनके घर जाते थे। दोनों लोगों का एक दूसरे के घर आना-जाना था। आकिब को पता था कि हिलाल अपनी बेटी के पास अक्सर ऑस्ट्रेलिया जाते रहते हैं। उनके पास काफी पैसे और जेवरात हैं। पुलिस के अनुसार आरोपित युवक ई-रिक्शा खरीद किराए पर चलवाना चाहता था। इसके कारण उसने अपने दोस्त उस्मान उर्फ चपाती के साथ मिलकर हिलाल और उनकी पत्नी की हत्या कर लूटपाट की योजना बनाई।

आरोपितों के अनुसार उन्होंने एक हफ्ते पहले ही केजीएमयू के पास मेडिकल शॉप से सर्जिकल ग्लव्स खरीदे थे। इसके अलावा दोनों ने उसी इलाके से चाकू भी खरीदे। वारदात वाले दिन दोनों दंपत्ति के घर बाइक से गए थे। हालाँकि बाइक इस दौरान उन्होंने दूर खड़ी की थी और फिर ग्लव्स पहनकर ही घर में घुसे। साजिश के तहत उस्मान ने दरवाजे पर दस्तक दी और हिलाल के दरवाजा खोलते ही उसने चाकू से उनके गले पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। कुछ देर बाद आकिब भी भीतर कमरे में दाखिल हो गया। इस बीच शोर सुनकर बिलकिस भी अपने कमरे से बाहर निकली, जिन्हें देखते ही पहले उस्मान और फिर आकिब ने हमला बोल दिया। इसके बाद बिलकिश को दोनों ने बेड पर धक्का दिया और फिर चाकू से गला रेतकर मौत के घाट उतार दिया। दोनों ने बिलाल पर 10 तो बिलकीस पर चाकू से छह बार वार किया था। आरोपितों के पास से पुलिस ने करीब 22 हजार रुपए, मलेशियन और आस्ट्रेलियन करेंसी, ज्वैलरी, बाइक, दो चाकू और खून से सने कपड़े बरामद किए हैं।

गौरतलब है कि लखनऊ के चौपटिया में गुरुवार रात को घटी इस घटना ने सबको हिलाकर रख दिया था। मौक़े पर पहुँची पुलिस ने अपनी घर का मुआयना करने के बाद बताया था कि घटनास्थल से सर्जिकल दस्ताने और चाय के कप बरामद हुए हैं, जो इस दोहरे हत्याकांड में किसी परिचित के शामिल होने की संभावना की ओर इशारा करते हैं। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू की और जल्द से जल्द पूरे मामले की हर परत को खोलकर रख दिया।

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नालायक बर्बादी की ओर बढ़ रहे: CAB विरोधियों को पाकिस्तानी युवक का टका सा जवाब

भारत के नागरिकता कानून को लेकर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही है। कहीं लोगों में खुशी है तो कहीं आक्रोश। कुछ लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार के इस कदम के बाद उनके जीवन में उजाला आएगा। भारतीय कट्टरपंथियों के हिंसक प्रदर्शन के एक वीडियो पाकिस्तान से आया है। इसमें एक युवक बता रहा है कि क्यों इस कानून का विरोध नहीं करना चाहिए।

वीडियो में युवक समुदाय के लोगों की स्थिति को ‘नालायक बेटे’ से जोड़कर बता रहा है। साथ ही अपने उदाहरणों के जरिए ये भी बताने की कोशिश कर रहा है कि खास समुदाय बर्बादी की ओर आगे बढ़ रहा है। उसकी वजह से देश को कोई फायदा नहीं हो रहा। युवक के अनुसार आज पाकिस्तान और खास समुदाय को लेकर लेकर पूरे विश्व में एक राय निर्मित हो चुकी है, जो उन्हें सबके सामने आतंकी के रूप में पेश करती है। इसके उलट भारत एक ऐसा देश बनता जा रहा है जहाँ स्थिति भी बेहतर है और अमेरिका, चाइना की तरह व्यापार भी ज्यादा है।

जानकारी के अनुसार ये वीडियो पाकिस्तान की यूट्यूबर सना अमजद ने बनाई है। इसमें वे अपने मुल्क के लोगों से पूछती नजर आ रही हैं कि भारत द्वारा सिटिजनशिप बिल पास करने के बाद अब सभी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को वहाँ पर नागरिकता दी जाएगी केवल खास समुदाय को छोड़कर…इस पर उनका क्या कहना है।

सना के सवालों का जवाब देते हुए एक पाकिस्तानी युवक कहता है कि अगर एक घर में पाँच बेटे हैं और पिता उनमें से चार बेटों को घर में जगह दे दे, लेकिन पाँचवे को घर से बाहर कर दे तो इसमें गलती किसकी होगी। पिता की या बेटे की? सना पिता को कसूरवार बताती हैं। इसके बाद युवक कहता है कि अगर चार बेटे अच्छा कमाते हैं और अच्छे से रहते हैं, लेकिन पाँचवाँ बेटा चरस-गाँजे के नशे में डूबा रहता है और केवल बर्बादी की ओर आगे बढ़ता है…उससे घर को कोई फायदा नहीं होता और उसकी सिर्फ शिकायतें ही आ रही हैं, तो गलती किसकी होगी? इस बार सना बेटे को दोषी बताती हैं और पिता के फैसले को सही।

इसके बाद अपनी बात आगे बढ़ाते हुए युवक कहता है कि उनके समुदाय के लोगों के माथे पर टैग लग गया है कि वे आतंकी हैं और केवल उनके कहने से कि वो ऐसे नहीं हैं- कुछ नहीं होगा। पूरा विश्व मानता है कि वो अब आतंकी हैं। युवक के मुताबिक भारत के पास एक पुख्ता वजह है उन्हें अपने मुल्क से निकालने के लिए, जिसका समर्थन कई देश करते हैं।

इसके बाद युवक भारत और अपने मुल्क की आर्थिक स्थिति पर बात करता है। वीडिय़ो में युवक को साफ कहते सुना जा सकता है कि अमेरिका और चाइना के बाद भारत अगला कमर्शियल मार्केट है। दुनिया भारत में निवेश कर रही है और दुनिया को बिजनेसमैन चलाते हैं, पैसा चलाता है, व्यापारिकता चलाती है। हम तुम या ईमान नहीं चलाता। इसलिए एक कमर्शियल मार्केट (भारत) जो 1अरब 30 करोड़ की मार्केट है, वो क्या निर्णय लेती है, ये हम 20 करोड़ (पाकिस्तान) को मानना पड़ेगा। बेवजह जुलूस निकालने से, इंटरव्यू करने से, सोशल मीडिया पर खबर डालने से, धमकी भरे पोस्ट डालने से कुछ नहीं होगा…। न हमसे हुआ है न हमसे होगा…हाँ एक दो बार जंग में हमने हल्का-फुल्का तीर मार लिया होगा, लेकिन ये भी सच है कि 90 लाख ने बांग्लादेश में सरेंडर भी किया है। अगर हम सोचते हैं टैंक, चॉपर, मिग 21 गिराकर हम भारत में संशोधन को रोक देंगे…तो ऐसा कभी नहीं होगा। भारत ने 70 साल पुराने कश्मीर पर फैसला लेकर दिखा दिया, हम वहाँ कुछ नहीं कर पाए। प्रैक्टिकली सोचें कि हम कहाँ पर खड़े हैं? हमारी ताकत क्या है? हमारी ग्रोथ क्या है? लड़के के मुताबिक उनके मुल्क को देखना चाहिए कि वो बाजार में और व्यापारिकता कहाँ हैं…क्योंकि फालतू की बातें करने से कुछ नहीं होगा।

गौरतलब कि फेसबुक से लेकर ट्विटर पर सना अमजद द्वारा युवक का इंटरव्यू जमकर वायरल हो रहा है। लोग युवक की समझदारी सुनकर कह रहे हैं कि करोड़ों में एक मिला है, जो जाहिल नहीं हैं। वहीं कुछ का कहना है कि इत्तेफाक से कभी-कभी समझदार पाकिस्तानी के भी दीदार हो जाते हैं जो आजतक लुप्त प्राय प्रजाति की श्रेणी में आते हैं।

जामिया में मजहबी नारे ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ क्यों लग रहे? विरोध तो सरकार का है न?

जामिया में मजहबी नारे ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ क्यों लग रहे? विरोध तो सरकार का है न?

जिस कानून से भारतीय नागरिकों का कोई लेना-देना है ही नहीं, उस कानून के विरोध में जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? क्या ये अनपढ़ लोग हैं जिन्हें यह मालूम नहीं कि इस कानून की मदद से किसी बाहरी देश के नागरिक को, भारत की नागरिकता दी जाएगी? या फिर इन विश्वविद्यालयों के नाम का ‘इस्लामिया’ और ‘मुस्लिम’ अपने ‘उम्माह’ के लिए खड़ा हो रहा है कि दुनिया के सारे मुस्लिम एक हैं, वो एक कौम हैं, और उसके लिए वो हमेशा खड़े होंगे?

चलिए मान लेते हैं कॉलेज में युवा जोश उफान पर होता है, और कॉलेज के बच्चों के मानसिक विकास के लिए सवाल उठाना, विरोध करना, सरकार के खिलाफ खड़े होना न सिर्फ एक आम बात है, बल्कि ऐसा अपेक्षित भी है। अपेक्षित इसलिए क्योंकि स्कूल के यूनिफॉर्म कल्चर से बाहर आ कर, हर तरह की स्वच्छंदता को समझने के लिए कॉलेज-विश्वविद्यालय काल में सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों पर आवाज उठाना, विद्यार्थियों की वैयक्तिक और सामूहिक सोच को बेहतर बनाता है।

इसलिए तमाम विश्वविद्यालयों के बच्चे अलग-अलग मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन करते रहते हैं। अब आप यह देखिए कि प्रदर्शन के तरीके क्या होते हैं? आमतौर पर तख्तियाँ होती हैं, जिस पर आपने संदेश लिखे होते हैं, नारेबाजी होती है जिसमें प्रशासन, सरकार, नेता या मुद्दे को केन्द्र में रख कर सामूहिक आवाज लगाई जाती है। कई बार मोमबत्तियाँ ले कर शांत ‘कैंडल मार्च’ होता है। कई बार किसी एक जगह से दूसरे जगह जाते हुए ‘यहाँ से वहाँ तक’ नारेबाज़ी करते हुए पैदल मार्च होता है।

अब बात करते हैं जामिया मिलिया इस्लामिया में चल रहे विरोध का। कल की खबर के अनुसार, विद्यार्थियों के पक्ष से बात की जाए तो जब पुलिस ने उनके संसद भवन तक की विरोध यात्रा को रोका, और बैरिकेड लगा दिए तो उन्होंने ‘आत्मरक्षा’ में हिंसक तरीके आजमाए। एक ने ‘क्विंट’ पर चल रहे एक विडियो में कहा कि पुलिस ने जब लाठी चार्ज किया तो संविधान हमें आत्मरक्षा में हिंसा करने का अधिकार देता है। उनकी किसी मित्र की परीक्षा होनी थी, उनके सर पर लाठी पड़ी और वो हॉस्पिटल में हैं।

घटनास्थल पर गिरे पत्थरों बड़े-बड़े टुकड़े कुछ और कहानी कहते हैं। कल ही की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस के दो जवान ICU में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं, कुल 12 जवान बुरी तरह से घायल हुए हैं। उग्र प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि उनके विरोध को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आँसूगैस के गोले दागे, तो उन्होंने पत्थरबाज़ी शुरू की।

उम्माह, टू-नेशन थ्योरी, पत्थरबाजी और इस्लाम

आप गौर कीजिए कि पत्थरबाजी सिर्फ एक ही मजहब से जुड़े लोग क्यों करते हैं? कश्मीर में पत्थरबाजी कौन करते थे? काँवड़ियों पर पत्थरबाजी कौन करते थे? जून से जुलाई 2019 के बीच तोड़े गए दस मंदिरों पर पत्थरबाजी किस मजहब के लोगों ने की? दुर्गा विसर्जन और रामनवमी के जुलूस पर पत्थर कौन फेंकता है? पुलिस जब किसी आरोपित को पकड़ने पहुँचती है तो पत्थर बरसाने वाले कौन होते हैं?

कश्मीर में जब पत्थरबाजी होती थी और तमाम तरह के हिंसक प्रदर्शन होते थे, तो एक खास नारा लगता था। उसमें ‘नारा-ए-तकबीर अल्लाहु अकबर’ तो होता ही था, दूसरा नारा होता था ‘पाकिस्तान से रिश्ता क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह’। इसका अर्थ क्या है? इसका अर्थ बहुत ही सीधा है कि पाकिस्तान से रिश्ता मजहब का है, अल्लाह वाला रिश्ता है। इसी को ‘उम्माह’ कहते हैं। ‘उम्माह’ का वास्तविक मतलब इस्लामी कौम है, जो देश और महादेश से परे, समुदाय विशेष की सबसे बड़ी पहचान है जो यह मनवाने पर मजबूर करता है कि ‘हमारे इस्लाम में ‘वंदे मातरम्’ पर मनाही है, हम नहीं गाएँगे।’

आतंकियों के समर्थन में खड़े रहने वाले सैयद अली शाह गिलानी ने साफ-साफ कहा था कि कश्मीर की समस्या इस्लामी है, राजनैतिक नहीं। वो जिन्ना के ‘हिन्दू-मुस्लिम दो अलग मुल्क हैं’ को भी दोहराता है। वो ‘कश्मीर बनेगा पाकिस्तान’ भी मानता है और 2010 में दिए गए एक साक्षात्कार में बताता है कि एक सेकुलर समाज में कोई भी सच्चा मुस्लिम अपने मजहब को पूरी तरह नहीं निभा सकता। मतलब साफ है कि इनका लक्ष्य समुदाय विशेष के लिए अलग देश का है। वरना ‘वो हाफिज देगा… आजादी’ कह कर उस आतंकवादी हाफिज सईद से उम्मीद नहीं लगाती वो भीड़।

इस वर्चस्व को साबित करने के लिए इन ‘इस्लामिया’ और ‘मुस्लिम’ यूनिवर्सिटी के प्रदर्शनकारी विद्यार्थी सरकार द्वारा लाए गए बिल के खिलाफ, कौन सी नारेबाजी करते हैं? आखिर नागरिकता (संशोधन) कानून ने भारत के ख़ास मजहब के साथ ऐसा क्या किया है कि उन्हें प्रदर्शन करते हुए ‘नारा-ए-तकबीर’ की याद आ गई?

आखिर जामिया में चल रहे प्रदर्शन में, जिसमें ये छात्र-छात्राएँ संविधान के आर्टिकल 19 की बात करते नजर आते हैं, ‘तेरा-मेरा रिश्ता क्या? ला इलाहा इल्लल्लाह’ और ‘आज़ादी कौन दिलाएगा? ला इलाहा इल्लल्लाह’ की जगह कहाँ बनती है? एक शैक्षणिक संस्थान में, सरकारी कानून के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए इस्लामी रिश्तेदारी क्यों निकाली जा रही है? किस आजादी की बात हो रही है यहाँ?

कश्मीर की समस्या अपने पुराने रूप में तो अब है नहीं। वहाँ के लोगों की ‘आजादी’ की ख्वाहिश तो पूरी होने से रही, हाँ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर वाले जरूर आजाद कराए जाएँगे। तो फिर ‘आजादी कौन दिलाएगा’ में ये ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ क्या है?

क्या ये भीड़ किसी नेता की रैली में जुटी भीड़ है जिसे पता नहीं है कि वो वहाँ आई क्यों है? क्या आपको लगता है कि ये भीड़ किसी नेता की पढ़ाई हुई भीड़ है कि ‘मैं आगे-आगे ये बोलूँगा, तुम पीछे से ये बोलना’? ये पढ़े लिखे लोग हैं जिनके दिमाग में हर बात स्पष्ट है कि वो क्या बोल रहे हैं, कहाँ बोल रहे हैं, और क्यों बोल रहे हैं।

ये वो लोग हैं जो देश को बाँटने के सपने पाले हुए हैं। ये वो युवा हैं जो जिन्ना के मरने के बाद, पाकिस्तान बनने के बाद, हिन्दुस्तान के बहुसंख्यक हिन्दुओं की सहिष्णुता का लाभ उठा कर, उन्हें फिर से उसी दौर में पहुँचाने की ख्वाहिश रखते हैं जब ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के नाम पर इस्लामी भीड़ ने हजारों हिन्दुओं को एक दिन में काट दिया था। इसलिए, ये आज भी ‘हिन्दू-मुस्लिम दो अलग देश हैं’ की बातों में पूरा विश्वास करते हैं, और ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नाम पर बता रहे हैं कि वो इकट्ठा हो सकते हैं और आजादी माँग सकते हैं।

ये कपोल कल्पना नहीं है कि राजनैतिक मुद्दे पर विरोध करते हुए ‘नारा-ए-तकबीर’ चिल्लाया जाता है, और उसका कोई अलग मतलब नहीं है। ये बस यह बताता है कि इनकी आस्था राष्ट्र से इतर सिर्फ इस्लाम में है, संविधान की धाराएँ तो ये लोग शेक्सपीयर के ‘डेविल कैन साइट स्क्रिप्चर फॉर हिज परपस’ (यानी, शैतान अपने मतलब साधने के लिए धर्म ग्रंथों की पंक्तियाँ भी सुना सकता है) की तर्ज पर जब-तब करते रहते हैं।

संविधान में आस्था है तो हर राष्ट्रीय प्रतीक का सम्मान करो। संविधान में आस्था है, और उसी का सहारा ले कर प्रदर्शन कर रहे हो, तो पुलिस पर पत्थरबाज़ी कैसे कर लेते हो? वो इसलिए कि तुम्हें पता है कि वो ‘उम्माह’ तुम्हारी खातिर जहाँ कहीं भी है, उठ खड़ा होगा और बोलेगा। अगर ये प्रदर्शन सिर्फ नागरिकता कानून को ले कर होता, और तुम सिर्फ विद्यार्थी होते तो इस प्रकरण में न तो पत्थर आता, न ही अल्लाह! तुमने अल्लाह को खींच कर बताया है कि संविधान तो बस अपना हित साधने के लिए, इस्तेमाल कर रहे हो, मतलब तो तुम्हें घंटा नहीं है उससे।

ये अकेले नहीं हैं, दुर्भाग्य यही है

इस ‘आजादी कौन दिलाएगा? ला इलाहा इल्लल्लाह!’ की बात करते हुए ऑस्ट्रेलियाई एक्टिविस्ट इमाम तौहिदी की बात याद आती है, जब वो एक टॉक शो में डेव रूबिन से बात करते हुए कहते हैं, “आम तौर पर हर मुस्लिम दो देशों का नागरिक होता है- एक उस देश का जिसका वह राजनीतिक रूप से नागरिक होता है और दूसरा मुस्लिम ‘उम्माह’। जब दुनिया के किसी भी कोने में बैठा कोई भी मुल्ला किसी का सर कलम कर देने का फ़तवा जारी करता है तो वह अँधेरे में तीर नहीं मार रहा होता है। उसे यह पता होता है कि उसके इस फ़तवे को पूरा करना किसी न किसी मुस्लिम का फ़र्ज़ होगा।”

कमलेश तिवारी पर फतवा किसने जारी किया था? कमलेश तिवारी का गला किसने रेता? कमलेश तिवारी को हलाल करने के बाद किसी ‘इस्लामिया’ या ‘मुस्लिम’ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सड़क पर आ कर कहा कि ये इस्लाम के खिलाफ है? कहीं किसी मजहबी भीड़ ने कैंडल मार्च निकाला? ये सब नहीं होता क्योंकि एम्सटर्डम से पेरिस के शार्ली एब्दो तक इस्लामी हिंसा जायज ही नहीं, आवश्यक कह कर डिफेंड की जाती है। कितने इस्लामी आतंकी हमलों के बाद इन विश्वविद्यालयों को छात्र बाहर आ कर निंदा करते हैं कि जो हुआ वो गलत हुआ?

ऐसा नहीं होता क्योंकि मजहब विशेष की सामूहिक चुप्पी एक मौन सहमति है कि वो दार-अस-सलाम की तरफ बढ़ रहा है, जिसमें ‘सलाम’ का मतलब ‘शांति’ तो ज़रूर है लेकिन वो शांति हर गैर-मुस्लिम की हत्या के बाद पैदा हुआ शांति है। इस मौन सहमति में यही पढ़े-लिखे लोग हैं जो खुलेआम यह कहने से बाज नहीं आते कि ‘हमने तुम पर दो सौ साल राज किया है, अपने पर आ गए तो भागने की जगह नहीं मिलेगी’।

इसलिए जब ये कहते हैं कि ‘हम तो शांतिपूर्ण तरीके से, संविधान के आर्टिकल 19 के तहत, इकट्ठा हो कर आगे बढ़ रहे थे’, तो ये शैतानों की तरह ग्रंथ की पंक्तियाँ दोहरा रहे होते हैं, जिसे इनके नेता संसद में ही फाड़ देते हैं। ये शक्ति प्रदर्शन है, और कुछ भी नहीं। एक कानून को ऐसे देखना जैसे कि ख़ास मजहब को बाहर किया जा रहा है, जबकि वो तीन मुस्लिम-बहुल राष्ट्रों के मजहबी और सियासी आतंक से त्रस्त अल्पसंख्यकों की नागरिकता के लिए है, यह बताता है कि पढ़ने-लिखने के बाद भी कुछ लोग मजहबी उन्माद से ऊपर नहीं उठ पाते।

वो वही सपने देखते हैं जो मस्जिद से नमाज पढ़ कर बाहर निकलता वो कट्टरपंथी देखता है, जब वो हाथों में पत्थर उठाता है, मशाल लेता है और सामने आई हर चीज को तबाह कर देता है क्योंकि उसे लगता है कि ‘पाकिस्तान से रिश्ता क्या? ला इलाहा इल्लल्लाह’ उसके पत्थर फेंकने से फलित हो जाएगा। ये न तो विद्यार्थी हैं, न प्रदर्शनकारी, ये इस्लामी कट्टरपंथ के वो नुमाइंदे हैं, जिनका ख्वाब मजहब विशेष वालों के लिए अलग दुनिया बसाने की है जहाँ कोई हिन्दू निगाह के दायरे में न बचे।

BHU के हिन्दू धर्म फैकल्टी में आज फिरोज खान घुसे हैं, कल विश्वनाथ मंदिर से ‘अल्लाहु अकबर’ भी बजेगा

प्रिय अमर्त्य सेन जी, ‘अल्लाहु अकबर’ कह कर हत्या करने वालों पर आपके नोबल विचारों का सबको इंतजार है

जामिया में लगे अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह के नारे: CAB के खिलाफ प्रदर्शन ऐसे हुआ हिंसक

ऐतिहासिक नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) का देश के कुछ हिस्सों में विरोध हो रहा है। लेकिन, कुछ मजहबी समूहों की घुसपैठ के बाद ये विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो चुके हैं। शुक्रवार (दिसंबर 13, 2019) को दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में भी ‘छात्रों’ के हिंसक प्रदर्शन ने सांप्रदायिक रंग ले लिया। न केवल पुलिस पर हमला किया गया, बल्कि अल्लाहु अकबर के नारे भी लगे। बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन के हिंसक हो जाने और पथराव के बाद 50 छात्रों को हिरासत में लिया गया था।

एक वीडियो सामने आया है जिसमें जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों को ‘अल्लाहु अकबर‘ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। उन्हें यह कहते हुए भी सुना जा सकता है, “ये शहर जगमगाएगा, नूर-ए-ला-इलाहा से, ये शहर जगमगाएगा, नूर-ए-ला-इलाहा से। नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर।”

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की हिंसक भीड़ पुलिस को उकसाते और गाली दे रही है। स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

रिटायर्ड एंकर बरखा दत्त द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उग्र भीड़ में से एक प्रदर्शनकारी अपने साथी से कहता है कि पुलिस बचकर जाने न पाए। उसे छोड़े ना।

जामिया मिलिया इस्लामिया के कट्टरपंथी इस्लामी समूहों में से एक तहज़ीब कमेटी द्वारा शेयर किए गए एक अन्य वीडियो में एक ‘छात्र’ को सांप्रदायिक और भड़काऊ भाषण देते हुए देखा जा सकता है। इसमें एक छात्र दावा करते हुए कहता है, “जो मुस्लिमों की रक्षा करना चाहते हैं, उन्हें इस्लाम की भी रक्षा करनी होगी।” इसके साथ ही कई और भी उत्तेजक बयान दिए गए, जिसमें मुस्लिमों को सड़कों पर उतरने के लिए कहा गया है। इस दौरान दिए गए ‘भाषण’ में नारा लगाया गया, “तेरा मेरा रिश्ता क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह।” बता दें कि इसी तरह के बयान कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा पाकिस्तान के संबंध में सुनने को मिला था, जहाँ उन्होंने कहा था, “पाकिस्तान से रिश्ता क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह।”

दरअसल, दिल्ली में जामिया के लगभग 2,000 ‘छात्र’ CAB का विरोध कर रहे थे। CAB के खिलाफ जामिया के प्रदर्शनकारियों ने कानून का विरोध व्यक्त करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर से संसद भवन तक मार्च निकाला था। हालाँकि इस दौरान वो हिंसा पर उतर आए और पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए। जैसे ही पुलिस ने छात्रों को शांत करने के लिए लाठीचार्ज करना शुरू किया, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के खिलाफ पथराव किया। छात्रों के हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और तीन पुलिसकर्मी आईसीयू में गंभीर हालत में हैं।

इसी तरह के बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और हिंसा पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिला। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAB) के पारित होने के बाद राज्य में विभिन्न मजहबी संगठनों से जुड़े कई सदस्यों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था। बता दें कि पश्चिम बंगाल की यह हिंसा सोची-समझी साजिश थी। राज्य और देश के अन्य विभिन्न हिस्सों में मस्जिदों में शुक्रवार (दिसंबर 13, 2019) को जुमे की नमाज के बाद CAB के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, इसी का परिणाम है कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में अत्यधिक हिंसा हुई।

प्रदर्शनकारियों ने CAB विरोध की आड़ में गाड़ियों पर पथराव किया। इसकी वजह से हावड़ा सेक्शन में कई लंबी दूरी की और लोकल ट्रेनें हिंसा के कारण फँसी हुई थीं। मजहबी भीड़ ने इस दौरान एंबुलेंस पर भी पथराव किया। इसके अलावा पूर्वी मिदनापुर जिले में भाजपा महासचिव सायंतन बसु की कार पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया। भीड़ इतनी आक्रामक थी कि पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उन्हें प्रदर्शनकारियों के बीच से निकाला।

CAB के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के बीच गुवाहाटी, शिलॉन्ग में कर्फ्यू में दी गई ढील

जैसलमेर प्रशासन ने पाक शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए लगाए शिविर

संसद द्वारा पारित नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाने के बाद अब यह क़ानून में तब्दील हो गया है। इसलिए राजस्थान के जैसलमेर में ज़िला प्रशासन द्वारा शुक्रवार (13 दिसंबर) को एक शिविर का आयोजन किया गया ताकि पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्राप्त करने की औपचारिकता पूरी करने में मदद मिल सके।

जैसलमेर ज़िले के सब डिविज़नल मजिस्ट्रेट (SDM) ओम प्रकाश बिश्नोई की निगरानी में आयोजित इस शिविर में पाकिस्तान के 15 शरणार्थी भारतीय नागरिकता अधिकारों का लाभ उठाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं को पूरा करते नज़र आए।

ख़बर के अनुसार, शिविर के बारे में बात करते हुए, बिश्नोई ने बताया किया कि सभी संबंधित विभागों को एक मंच के तहत लाने के लिए इस तरह के शिविर अक्सर आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा रिपोर्टिंग और निकासी प्रक्रिया को ऑनलाइन नियंत्रित किया जाता है।

नागरिकता क़ानूनों के नए संशोधनों को संसद के दोनों सदनों द्वारा शीतकालीन सत्र में मंज़ूरी दे दी गई थी और बाद में भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मंज़ूरी मिलने के बाद इसे आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया गया।

संशोधित नागरिकता अधिनियम अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई सहित उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज़ी से ट्रैक करने के उद्देश्य से पारित किया गया था।

ग़ौरतलब है कि विपक्ष के विरोध के बावजूद नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार (11 दिसंबर) को राज्यसभा द्वारा और सोमवार (9 दिसंबर) को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। मौजूदा क़ानून के मुताबिक किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल यहाँ रहना अनिवार्य था। नए कानून में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह अवधि घटाकर 6 साल कर दी गई है। मौजूदा क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने का प्रावधान था।

वहीं, नागरिकता संशोधन अधिनियम के पारित होने के बाद विभिन्न मजहबी संगठनों से संबंधित कई सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किए। हालाँकि, यह विरोध प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं रहा, ये जल्द ही हिंसा में तब्दील हो गया। खासकर पश्चिम बंगाल में हिंसा का उग्र रूप देखने को मिला।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में एक रेलवे स्टेशन परिसर में शुक्रवार शाम को हजारों लोगों द्वारा आग लगा दी गई, जिसमें अधिकतर लोग समुदाय विशेष से संबंधित थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बेलडांगा रेलवे स्टेशन परिसर में रेलवे पुलिस बल के कर्मियों की भी पिटाई की।

बता दें कि पश्चिम बंगाल और केरल के बाद पंजाब ने भी कहा था कि यह क़ानून राज्य में नहीं लागू होगा। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नागरिकता क़ानून को असंवैधानिक और देश को बाँटने वाला करार देते हुए इसे भारत की धर्मनिरपेक्षता पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस क़ानून को राज्य में लागू नहीं होने देगी। लेकिन कैसे ये नहीं बताया। जबकि उनके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है।

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कट्टरपंथियों के ‘आतंक’ से जलते बंगाल में CAB के ख़िलाफ़ ममता ने की 16-17 दिसंबर को विरोध-प्रदर्शन की घोषणा

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो, ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी दिसंबर में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण (NRC) के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करेगी। TMC के आधिकारिक ट्विटर हैंडल के एक ट्वीट में, यह घोषणा की गई कि यह विरोध-प्रदर्शन 16 और 17 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा।

जैसा कि ट्वीट से स्पष्ट होता है, ममता बनर्जी संसद के दोनों सदनों में नागरिकता संशोधन विधेयक के पारित होने के विरोध में ‘रैली में जाने के लिए’ तैयार हैं। TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि वह पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAB) और नागरिकों के लिए NRC के कार्यान्वयन की अनुमति नहीं देंगी।

ममता बनर्जी ने डर का माहौल बनाने के लिए मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज के बाद CAB के खिलाफ समुदाय विशेष के हिंसक विरोध प्रदर्शन को होने दिया।

पश्चिम बंगाल में एम्बुलेंस और गाड़ियों पर भी पथराव किया गया। हिंसक विरोध-प्रदर्शन में एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। शुक्रवार को, प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले में भी उग्र प्रदर्शन किए। उन्होंने उलुबेरिया रेलवे स्टेशन पर पटरियों को अवरुद्ध करके हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम दिया।

अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पथराव का सहारा लेकर कॉम्प्लेक्स और कुछ गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ भी की। पूर्व रेलवे के सियालदह डिवीजन में हिंसा की वजह से ट्रेन सेवाएँ प्रभावित हुईं।

नागरिकता संशोधन विधेयक का उद्देश्य पड़ोसी इस्लामिक देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के हिन्दुओं, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों जैसे उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देना है। यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित हो चुका है और इसे राष्ट्रपति कोविंद की भी मंज़ूरी मिल चुकी है।

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अरविंद केजरीवाल ने विधान सभा चुनाव के लिए प्रशांत किशोर की कम्पनी से किया गठजोड़

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही चुनावी सरगर्मियाँ तेज होती जा रही हैं। विधानसभा चुनाव में बेहद कम वक्त रह गया है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) को चुनाव प्रचार के लिए प्रशांत किशोर की कंपनी का साथ मिल गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार (दिसंबर 14, 2019) को खुद इसकी जानकारी ट्वीट करते हुए दी है।

AAP ने विधानसभा चुनाव के लिए देश के मशहूर पेशेवर राजनीतिक रणनीतिकार और जनता दल यूनाइटेड पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर से हाथ मिलाया है। सीएम केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा, “ये बताते हुए खुशी हो रही है कि इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) अब हमारे साथ काम करेगी, आपका स्वागत है।” प्रशांत किशोर की कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ने भी इस बारे में ट्वीट कर जानकारी दी है।

वहीं प्रशांत किशोर के आम आदमी पार्टी के साथ जाने पर कॉन्ग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने कहा, “प्रशांत किशोर जिसके साथ चाहे काम कर सकते हैं, लेकिन दिल्ली के लोगों को शीला दीक्षित के काम याद हैं। कॉन्ग्रेस दिल्ली में बहुत अच्छा करेगी।”

बता दें कि प्रशांत किशोर की कंपनी चुनाव के दौरान कई राजनीतिक दलों को प्रचार में सहयोग कर चुकी है। ज्यादातर मामलों में कंपनी को बड़ी सफलता हाथ लगी है। नरेंद्र मोदी के 2014 लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान और जीत के पीछे प्रशांत किशोर बड़े हीरो के रूप में उभरे थे। 2014 की भाजपा की जीत का श्रेय प्रशांत किशोर के कैंपेन को ही दिया जाता है। इसके साथ ही प्रशांत ने बिहार में महागठबंधन, तेलंगाना में टीआरएस के लिए और हाल ही में हुए महाराष्ट्र चुनाव में उद्धव ठाकरे के लिए भी चुनाव मैनेजमेंट किया था।

वैसे राजनीतिक तौर पर देखें तो प्रशांत किशोर जनता दल (यूनाइटेड) से ताल्लुक रखते हैं। राजनीति में आने के पहले वह 8 सालों तक यूनाइटेड नेशन के लिए भी काम कर चुके हैं। जेडीयू से अलग उनकी एक राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर भी पहचान है। गौरतलब है कि उनका पहला राजनीतिक अभियान वर्तमान पीएम और तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के समर्थन में साल 2011 में रहा था। इस दौरान तत्कालीन सीएम मोदी ने तीसरी बार गुजरात में बड़ी चुनावी जीत हासिल की थी।

CAB के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के बीच गुवाहाटी, शिलॉन्ग में कर्फ्यू में दी गई ढील

नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद से ही उत्तर पूर्वी राज्यों में तनाव की स्थिति है। असम, मेघालय और त्रिपुरा के हालात काफी तनावपूर्ण हैं। असम में 22 दिसंबर तक स्कूल और कॉलेजों को बंद किया गया है। सेना और पुलिस की तैनाती के बावजूद लोग कर्फ्यू का उल्लंघन कर रहे हैं। इन प्रदेशों के कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। इस बीच असम के गुवाहाटी में आज सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच कर्फ्यू में ढील दी गई है। हालाँकि सुरक्षा के मद्देनजर इंटरनेट सेवाएँ अभी भी बंद है। उधर कोहिमा में नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (NSF) ने आज 6 घंटे के लिए बंद का आह्वान किया है।

जानकारी के मुताबिक हिंसक प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए असम की राजधानी गुवाहाटी और अन्य स्थानों पर सेना और असम राइफल्स की आठ टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल पी खोंगसाई ने बताया कि बिगड़ती कानून व्यवस्था को नियंत्रण में लाने के लिए गुवाहाटी के अलावा मोरीगाँव, सोनितपुर और डिब्रूगढ़ जिलों के नागरिक प्रशासन ने सेना और असम राइफल्स की माँग की है। इस विधेयक के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के हिंसा पर उतर जाने के बाद बुधवार को सेना बुलाई गई थी।

असम में नागरिकता संशोधन बिल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद अब कानून का रूप ले चुका है। इस बिल के विरोध की आवाज सबसे पहले असम से ही सुनाई दी थी। पिछले कुछ दिनों से असम में इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर आगजनी की घटनाएँ हुई हैं।

बता दें कि असम के हालातों को देखते हुए जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की गुवाहाटी में पीएम मोदी के साथ होने वाली मीटिंग को भी रद कर दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार बताया कि जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की प्रस्तावित भारत यात्रा के संदर्भ में दोनों पक्षों ने आम सहमति से फिलहाल यात्रा को टालने का निर्णय लिया है। गृह मंत्री अमित शाह का शिलॉन्ग दौरा भी रद्द कर दिया गया है। उन्हें रविवार को यहाँ एक कार्यक्रम में शामिल होना था।

वहीं नागरिकता अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर मेघालय के शिलांग में भी लगाए गए कर्फ्यू में सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक ढील दी गई है। 

‘भगोड़ा ज़ाकिर नाइक को मालदीव आने की अनुमति नहीं, भारत अल्पसंख्यकों के लिए स्वर्ग’

विवादित इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक ने हाल ही में मलेशिया से मालदीव जाने का प्रयास किया, लेकिन मालदीव ने इसे अनुमति नहीं दी। भारत आए मालदीव की संसद के स्पीकर मोहम्मद नशीद ने शुक्रवार (13 दिसंबर) को कहा, “वह (ज़ाकिर नाइक) मालदीव आने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हमने उसे आने इजाज़त नहीं दी।”

नशीद से जब यह पूछा गया कि क्या मालदीव और मलेशिया के बीच ज़ाकिर नाइक के प्रत्यर्पण के लिए कोई बातचीत चल रही है, तो इस पर उन्होंने कहा, “हाल ही में मालदीव आने की इजाज़त नहीं दी गई, लिहाज़ा (मलेशिया और मालदीव के बीच) बातचीत हो रही है।” नाइक ने 2016 में, भारत छोड़कर मलेशिया भाग गया था, तब भारत उसके प्रत्यर्पण की माँग कर रहा है। 

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने ज़ाकिर के ख़िलाफ़ ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम के तहत FIR दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2016 में उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि नाइक और उसके ट्रस्टों ने अज्ञात लोगों और शुभचिंतकों से करोड़ों रुपए हासिल किए थे।

भारत दौरे पर आए मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा स्पीकर मोहम्मद नशीद नागरिकता संशोधन क़ानून पर अपनी राय देते हुए कहा कि उन्हें भारत के लोकतंत्र पर यक़ीन करते हैं और यह भारत का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, “नागरिकता संशोधन बिल की पूरी प्रक्रिया को संसद के दोनों सदनों से मंज़ूरी मिली है और मैं उस दौरान ख़ुद भारत की संसद में मौजूद था।”

उन्होंने खुद का उदहारण देते हुए कहा, “भारत अल्पसंख़्यकों के लिए स्वर्ग है, जब मैं भी भारतीय हाई कमीशन गया तो वहाँ मुझे भी शरण मिली। यहाँ तक की भारत आने के लिए भी कहा गया।”

मोहम्मद नशीद ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि हिन्द महासागर में इस वक्त कोल्ड वार जैसे हालात हैं। चीन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मालदीव में एमडीपी सरकार आने के बाद उनके देश में भारत का हित सुरक्षित है। उन्होंने कहा, “मालदीव में सरकार बदलने के साथ ही चीन की तुलना में भारत के हित वहाँ सुरक्षित हैं, ऐसा न कहना बहुत कठिन है कि हिन्द महासागर में एक शीत युद्ध की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन हम दो देशों के बीच सैंडविच जैसी स्थिति में फँसना नहीं चाहते हैं, लेकिन हाँ हमारी नीति भारत पहले की है।”

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ममता के बंगाल में जुमे की नमाज के बाद कट्टरपंथियों ने योजना बनाकर की जमकर हिंसा, पत्थरबाजी, आगजनी

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAB) के पारित होने के बाद विभिन्न मजहबी संगठनों से संबंधित कई सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किए। हालाँकि यह विरोध प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं रहा, ये जल्द ही हिंसा में तब्दील हो गया। खासकर पश्चिम बंगाल में हिंसा का उग्र रूप देखने को मिला।

रिपोर्ट के मुताबिक यह हिंसा सोची-समझी साजिश थी। राज्य और देश के अन्य विभिन्न हिस्सों में मस्जिदों में शुक्रवार (दिसंबर 13, 2019) को जुमे की नमाज के बाद CAB के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, इसी का परिणाम है कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में अत्यधिक हिंसा हुई।

जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक रेलवे स्टेशन परिसर में शुक्रवार शाम को हजारों लोगों द्वारा आग लगा दी गई, जिसमें अधिकतर लोग समुदाय विशेष से संबंधित थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बेलडांगा रेलवे स्टेशन परिसर में रेलवे पुलिस बल के कर्मियों की भी पिटाई की।

इंडिया टुडे के एसोसिएट एडिटर इंद्रजीत कुंडू की एक रिपोर्ट के अनुसार, उग्र मजहबी भीड़ ने एंबुलेंस पर पथराव किया और बेलडांगा रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ की। रेलवे पटरियों पर टायर भी जलाए गए थे। 

भीड़ ने कई वाहनों को आग लगा दी और एक एम्बुलेंस पर भी पथराव किया। हिंसक विरोध प्रदर्शन में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में भी उग्र प्रदर्शन किया। उन्होंने उलुबेरिया रेलवे स्टेशन पर पटरियों को अवरुद्ध करके हिंसा किया।

अधिकारियों ने कहा कि उग्र भीड़ ने पथराव कर कॉम्प्लेक्स और कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ की। पूर्व रेलवे के सियालदह डिवीजन में हिंसा ने ट्रेन सेवाओं को भी प्रभावित किया।

प्रदर्शनकारियों ने CAB विरोध की आड़ में गाड़ियों पर पथराव किया। इसकी वजह से हावड़ा सेक्शन में कई लंबी दूरी की और लोकल ट्रेनें हिंसा के कारण फँसी हुई थीं।

कोलकाता में प्रदर्शनकारियों ने पार्क सर्कस में भी घंटों तक यातायात बाधित किया और शहर में बड़ी संख्या में नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में इकट्ठा हुए। समुदाय के हजारों लोगों ने क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 6 को भी अवरुद्ध कर दिया।

पूर्वी मिदनापुर जिले में, भाजपा महासचिव सायंतन बसु की कार पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया। भीड़ इतनी आक्रामक थी कि पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उन्हें प्रदर्शनकारियों के बीच से निकाला।

भीड़ द्वारा हिंसक हिंसक विरोध प्रदर्शन केवल पश्चिम बंगाल तक ही सीमित नहीं है। राजधानी दिल्ली में भी नागरिकता बिल के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्मालिया के छात्रों ने न केवल विरोध प्रदर्शन दिया, बल्कि उसमें पत्थरबाजी भी करने लगे। और इतनी उग्र हिंसा की कि दो पुलिस वालों को न केवल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है, बल्कि वे पुलिस वाले आईसीयू में ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। कुल 12 पुलिस वाले जामिया के छात्रों के हाथों घायल हुए हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तकरीबन 50 छात्रों को हिरासत में ले लिया है।

गौरतलब है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार (दिसंबर 11, 2019) को राज्यसभा द्वारा और सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। गुरुवार (दिसंबर 12, 2019) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सहमति देने के बाद नागरिकता (संशोधन) विधेयक अब कानून बन गया है। बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल के कानून बनने के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के चलते आए हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को लोगों को CAB के तहत भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।