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क्रिसमस पर 17+ ईसाई घरों में बांग्लादेशी इस्लामी भीड़ ने लगाई आग, प्रार्थना करने चर्च गए थे सभी लोग: पीड़ित बोले- पहले से मिल रही थी धमकियाँ

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे। हाल में क्रिसमस के मौके पर ईसाई समुदाय के 17-19 घरों को जला दिया गया। घटना बंदरबन के लामा उपजिला की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला 25 दिसंबर को शाम के वक्त हुआ। उस समय गाँव के लोग दूसरे गाँव में स्थित चर्च में प्रार्थना करने गए थे। उसी दौरान इस कृत्य को अंजाम दिया गया। इस हमले 17-19 घर पूरी तरह नष्ट हो गए। पीड़ितों में से एक गुंगामणि त्रिपुरा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “हमारे घर पूरी तरह जलकर राख हो गए हैं। कुछ भी नहीं बचा।”

जानकारी के मुताबिक, बुधवार को रात करीब 12:30 बजे पड़ोसी गाँव में क्रिसमस की प्रार्थना करने गए ग्रामीणों ने अपने गाँव में आग जलती देखी और फौरन अपने घरों की ओर भागे, लेकिन जब तक वह पहुँचते तब तक सारे घर जलकर खाक हो चुके थे। गाँव के सभी घर बांस और घास-फूस से बने थे, इसलिए घर जल्दी जल गए।

ईसाई समुदाय के लोगों ने बताया कि इस घटना में उनका 15 लाख टका (बांग्लादेशी करंसी) से ज्यादा का नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें कुछ समय से धमकियाँ मिल रही थीं और इसीलिए वे चर्च जाते समय गांव में किसी को भी नहीं छोड़ते थे। 25 दिसंबर की रात जब वो लोग गए तो इस घटना को अंजाम दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री के रूप में चावल, दाल, तेल और कंबल उपलब्ध कराए हैं। मगर, पीड़ितों की चिंता ये है कि वो लोग रहेंगे कहाँ।

बता दें कि त्रिपुरा समुदाय के ये ईसाई लोग लामा सराय के एसपी गार्डन में रहते थे। गार्डन हसीना सरकार में बड़े अधिकारी रहे बेनजीर अहमद का है। 5 अगस्त को तख्तापलत के लोग बेनजीर के परिवार के लोग ये जगह छोड़ गए और यहाँ त्रिपुरा ईसाई समुदाय के लोग आ गए। उन्होंने दावा किया कि उनके पूर्वज यहीं रहा करते थे, लेकिन कब्जे के बाद उन्हें जाना पड़ा था।

हिंदू महिला को अगवा कर पैरों में बाँध दी लोहे की जंजीर, जबरन मुस्लिम बनाकर करता था रेप: असम पुलिस ने मुनाफ अली को पकड़ा, प्रॉपर्टी के लिए करता था प्रताड़ित

असम के कछार जिले में मुस्लिम युवक द्वारा एक हिन्दू महिला को बंधक बनाने का मामला सामने आया है। जनजातीय समुदाय की इस पीड़िता के पैरों में लोहे की जंजीर बाँध दी गई थी। उसे लगातार प्रताड़ित करके इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया गया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करके मुनाफ अली नाम के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना का हिन्दू संगठनों ने कड़ा विरोध किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 महीने पहले स्थानीय लोगों द्वारा बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को मुनाफ अली के घर में किसी हिन्दू महिला के बंधक होने की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि महिला को जंजीरों में बाँध कर बेरहमी से मारा-पीटा जाता है। इस जानकारी की तस्दीक बजरंग दल के सदस्यों ने करवाई तो सूचना सही पाई गई। इसके बाद मामले की जानकारी फ़ौरन पुलिस को दी गई।

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर पीड़िता को जंजीरों से मुक्त करवाया और मुनाफ अली को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता की प्रताड़ना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में महिला के बाएँ पैर में लम्बी जंजीर बँधी दिख रही है। जंजीर इतनी लम्बी थी कि पीड़िता अधिकतम घर के कुछ हिस्सों में ही पहुँच सकती थी।

हिन्दू संगठन के सदस्यों का आरोप है कि महिला का लगभग 12 साल पहले मुनाफ अली ने अपहरण कर लिया था। तब से उसे बंधक बनाकर रखा गया था। जानकारी के मुताबिक, मुनाफ अली ने पीड़िता को डरा-धमका कर इस्लाम कबूल करवा कर निकाह कर लिया था। निकाह के बाद मुनाफ अली बार-बार महिला को उसकी पुश्तैनी जमीन अपने नाम करने का दबाव बनाता था।

जब पीड़िता मना करती थी तो उसकी बुरी तरह से पिटाई की जाती थी। विगत 12 वर्षों में आरोपित ने पीड़िता से जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इस वजह से पीड़िता ने 5 बच्चों को जन्म दिया। ये बच्चे अभी मुनाफ अली के भाई के कब्ज़े में हैं। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मुनाफ अली ने उसके साथ बहुत अत्याचार किया है। उसने उसकी गला घोंटकर मारने का भी प्रयास किया था।

पीड़िता का कहना है कि वह कहीं भाग न जाए इसके चलते मुनाफ अली उसके पैरों में जंजीर बाँध कर रखता था। एक दिन महिला ने शोर मचा कर अपने पड़ोसियों से मदद माँगी थी। पड़ोसियों ने हिन्दू संगठनों से सम्पर्क किया और आखिरकार ये मामला पुलिस तक पहुँच गया। बजरंग दल के सदस्यों ने वैदिक अनुष्ठान से पीड़िता की हिन्दू धर्म में घर वापसी करवाई है।

जम्मू में दंगा भड़काने के लिए मरे हुए गाय-बछड़ों को हिंदू बहुल इलाकों में देते थे फेंक, पुलिस ने मुख्तियार, तारिक और आरिफ को पकड़ा

जम्मू कश्मीर में ऐसे गोतस्कर को पुलिस ने पकड़े हैं, जो गायों को मार करके हिन्दू इलाकों में फेंकते थे। यह इस काम के जरिए लोगों को भड़काना और दंगा करवाना चाहते थे। पुलिस ने इस गिरोह के 3 लोग पकड़े हैं। इन्होने जम्मू कश्मीर के नगरोटा में हाल ही में यही करने का प्रयास किया, जिसके बाद इनकी गिरफ्तारी हुई।

पुलिस की गिरफ्त में आए इन तीनों गोतस्करों का नाम मुख्तियार अहमद, तारिक हुसैन और आरिफ है। यह तीनों लम्बे समय से गोतस्करी करते थे। गोतस्करी के लिए यह क्रूरता से गोवंशों को ट्रकों में भरते थे। क्रूरता के चलते जो गोवंश पहले ही मारे जाते थे, उनको यह गोतस्कर हिन्दू बहुल इलाकों में फेंक दिया करते थे।

मंगलवार (24 दिसंबर, 2024) को भी इन तीनों ने इसी साजिश को अंजाम देने का प्रयास किया था। इन्होंने नगरोटा के जगटी-राजपुर मार्ग पर गोवंश फेंके थे। मंगलवार की सुबह इसी राह से कुछ स्थानीय लोग सड़क से जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें बदबू आने लगी। आसपास के लोगों ने पास जा कर देखा तो खाई में गाय और बछड़ा मृत अवस्था में पड़े मिले।

कुछ ही देर में यह बात आसपास के इलाकों में फ़ैल गई। स्थानीय लोगों के साथ हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्य भी घटनास्थल पर पहुँचने लगे। ये सभी घटना पर नाराजगी व्यक्त कर रहे थे। जब यह जानकारी पुलिस को मिली तो स्थानीय SHO परवेज सज्जाद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे।

लोगों के आक्रोश को देखते हुए उन्होंने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए 24 घंटों का समय माँगा। लोगों को समझा कर वापस भेजा गया। आरोपितों की पहचान के लिए इलाके के CCTV फुटेज खँगाले गए और अन्य सबूतों को जुटाया गया। एक फुटेज में रजिस्ट्रेशन नंबर 2195 का एक ट्रक चिन्हित हुआ। इसी को आधार बना कर पुलिस ने अपनी जाँच आगे बढ़ाई।

पुलिस ने ट्रक के जरिए हुई पड़ताल के आधार पर इन तीनों को दबोच लिया। इनमें से मुख्तियार कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला है जबकि आरिफ और तारिक का घर जम्मू के रियासी क्षेत्र में है। इन सभी पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की पूछताछ में इन तीनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने इनके ट्रक को भी सीज कर दिया है।

पुलिस की पूछताछ में इन्होने बताया है कि 2 महीने पहले भी इन्ही तीनों ने मिल कर जगटी इलाके में एक मृत गाय फेंक दी थी। तब नाराज हिन्दुओं ने इस घटना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया था। इन्होने आगे बताया कि गोवंश फेंक कर वह हिन्दू-मुस्लिम दंगा भड़काना चाहते थे।

वोट के लिए BJP नेता प्रवेश वर्मा के घर पर महिलाओं के बीच बाँटे गए ₹1100 का लिफाफा: दिल्ली की CM ने किया जो दावा, जानिए क्या है उसकी सच्चाई

विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी ने बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा पर संगीन आरोप लगाए हैं। आतिशी का दावा है कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश वर्मा के आवास पर महिलाओं को ₹1100 के लिफाफे बाँटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का वोटर कार्ड चेक करके उन्हें पैसे दिए गए। आतिशी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई और दिल्ली पुलिस को प्रवेश वर्मा के घर पर तुरंत छापा मारना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्मा के घर पर करोड़ों की नकदी मौजूद है।

प्रवेश वर्मा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा बताया। उन्होंने कहा कि यह रकम उनकी संस्था ‘राष्ट्रीय स्वाभिमान संस्था’ के जरिए जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए दी जा रही है। वर्मा ने बताया कि यह संस्था उनके पिता ने 25 साल पहले स्थापित की थी, और इसके तहत उन्होंने भूकंप पीड़ितों के लिए मकान, कारगिल शहीदों के परिवारों को आर्थिक सहायता और कई सामाजिक कार्य किए हैं। वर्मा ने कहा, “मैंने इन महिलाओं से उनकी समस्याएँ सुनीं। वे बिना पेंशन, राशन कार्ड और स्वास्थ्य सुविधाओं के परेशान हैं। इसीलिए मैंने अपनी संस्था के माध्यम से हर महीने उनकी मदद करने की योजना बनाई।”

बता दें कि प्रवेश वर्मा के आवास पर बड़ी संख्या में महिलाओं को एक कार्ड के साथ लिफाफे में 1100 रुपए कैश देने की खबरें सामने आई। प्रवेश साहिब सिंह की ओर से जो कार्ड महिलाओं को दिया गया है उस पर ऊपर लाडली योजना लिखा है। इस पर लाभार्थी की फोटो, नाम, पिता या पति का नाम, लाभार्थी क्रमांड और हस्ताक्षर है। नीचे लिखा गया है- नारी का सम्मान, राष्ट्रीय स्वाभिमान, 20 विंडरसर पैलेस, नई दिल्ली। कार्ड के ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा की तस्वीर भी लगी है और लिखा गया है- हमारे प्रेरणास्त्रोत।

वर्मा ने आप पर निशाना साधते हुए कहा कि वह महिलाओं को शराब नहीं बाँट रहे, जैसा कि दिल्ली सरकार ने पिछले 11 वर्षों में किया है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और आतिशी उनकी संस्था के काम को सराहने के बजाय उसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं।

इस बीच, आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से प्रवेश वर्मा की गिरफ्तारी की माँग की है। आतिशी ने आरोपों को जोर देकर कहा कि बीजेपी दिल्ली में धनबल और बाहुबल का सहारा लेकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। आप ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया और वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। केजरीवाल ने भी प्रवेश वर्मा पर हमला बोला था।

विवाद के केंद्र में प्रवेश वर्मा का सरकारी आवास ’20 विंडसर प्लेस’ है, जहाँ कथित रूप से महिलाओं को बुलाकर पैसे बाँटे जा रहे हैं। वर्मा ने इसे झूठा आरोप बताते हुए कहा कि उनकी संस्था हमेशा से गरीबों की मदद के लिए काम करती आई है। उन्होंने कहा कि यह सारा विवाद केवल उनका नाम खराब करने और चुनावी फायदा उठाने के लिए किया जा रहा है।

बहरहाल, दिल्ली की राजनीति में यह मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। एक तरफ आप इसे चुनाव में धांधली का प्रयास बता रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे जरूरतमंदों की मदद का एक प्रयास करार दे रही है।

जो मजदूर से बना ‘लॉटरी किंग’, TMC-DMK को दिए ₹1000 करोड़… उसके खिलाफ जाँच में सुप्रीम कोर्ट ने ED के बाँधे हाथ: कहा- मोबाइल-लैपटॉप से डाटा नहीं ले सकते

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आदेश दिया है कि वह फ्यूचर गेमिंग और उसके मालिक पर छापे के दौरान जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से डाटा ना लें। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ED फ्यूचर गेमिंग, उसके मालिक सैंटियागो मार्टिन, उसके परिजन और कर्मचारियों से इकट्ठा किए गए फोन-लैपटॉप समेत बाकी डिजिटल डिवाइस से सबूत नहीं जुटा पाएगी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने फ्यूचर गेमिंग की तरफ से दायर एक याचिका पर दिया है। यह आदेश जस्टिस अभी एस ओका और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने 13 दिसम्बर, 2024 को याचिका की सुनवाई के दौरान दिया।

ED ने नवम्बर, 2024 में ही सैंटियागो मार्टिन के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में ED को ₹12 करोड़ से अधिक कैश मिला था। ED ने इस दौरान मार्टिन, उसकी कम्पनी के कर्मचारियों, परिजनों समेत बाकी लोगों से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इकट्ठा किए थे। इसमें 17 मोबाइल फोन थे और बाकी कई लैपटॉप थे।

ED ने इस दौरान कई हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और ईमेल का डाटा भी लिया था। इन्हीं डिवाइस से ED डाटा लेकर करके फ्यूचर गेमिंग के खिलाफ सबूत इकट्ठा करती। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ना वह इन डिवाइस का डाटा एक्सेस कर पाएँगे और ना ही उसको अपने पास कॉपी कर पाएँगे।

ED ने सैंटियागो मार्टिन पर यह छापेमारी मेघालय पुलिस द्वारा दर्ज एक मामले के बाद की थी। मेघालय में दर्ज इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि फ्यूचर गेमिंग ने राज्य में अवैध तरीके से लॉटरी का धंधा कब्जा लिया। ED ने 6 राज्यों में यह छापेमारी की थी।

इंडियन एक्सप्रेस को ED के कुछ अधिकारियों ने बताया है कि इससे उनकी जाँच पर थोड़ा बहुत फर्क जरूर पड़ेगा लेकिन उनके पास और भी कई सबूत हैं। गौरतलब है कि ED फ्यूचर गेमिंग समेत बाक़ी मामलों में भी लैपटॉप और फोन आदि जब्त करती आई है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जाँच पर सुप्रीम कोर्ट में पहले ही 3 याचिकाएँ पड़ी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सैंटियागो मार्टिन वाली याचिका को इन्हीं याचिकाओं के साथ सम्मिलित करने का आदेश दिया गया है। सैंटियागो मार्टिन और बाकी लोगों के खिलाफ इस मामले में जारी किए गए समन पर भी रोक लगाई गई है। इससे पहले भी सैंटियागो मार्टिन के खिलाफ जाँच हो चुकी है। सैंटियागो मार्टिन की फ्यूचर गेमिंग का नाम मार्च, 2024 में चर्चा में आया था।

दरअसल, मार्च में चुनाव आयोग ने उन कंपनियों के नामों का ऐलान किया था, जिन्होंने राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए चुनावी बॉन्ड खरीदा था। इनमें सबसे अधिक बॉन्ड फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज कम्पनी ने खरीदा था। इसका मालिक सैंटियागो मार्टिन है। इस कम्पनी ने 12 अप्रैल 2019 से 24 जनवरी 2024 के बीच ₹1,368 करोड़ का राजनीतिक चंदा दिया था।

सैंटियागो मार्टिन की फ्यूचर गेंग ने इस ₹1368 करोड़ में से ₹542 करोड़ तृणमूल कॉन्ग्रेस, ₹503 करोड़ DMK और ₹150 करोड़ से अधिक का चुनावी चंदा YSR कॉन्ग्रेस को दिया था। सैंटियागो मार्टिन को लॉटरी किंग कहा जाता है। उसकी कम्पनी का बड़ा साम्राज्य है।

क्या करती है फ्यूचर गेमिंग एंड होटल्स?

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज की स्थापना वर्ष 1991 में सैंटियागो मार्टिन ने की थी। यह कम्पनी तमिलनाडु में शुरू हुई थी, लेकिन जब यहाँ लॉटरी बंद हो गई तो मार्टिन ने अपना अधिकांश धंधा केरल और कर्नाटक में चालू कर दिया।

इस पूरे प्रकरण के केंद्र में रहने वाला सैंटियागो मार्टिन ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ लॉटरी ट्रेड एंड अलाइड इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष हैं। उसकी इस कम्पनी में 1000 से अधिक लोग काम करते हैं। फ्यूचर गेमिंग वर्तमान में 13 राज्यों में लॉटरी चलाती है, इन राज्यों में अभी भी लॉटरी को कानूनी मान्यता है। यह राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और सिक्किम हैं।

मार्टिन की यह कम्पनी ‘डियर लॉटरी’ नाम से लॉटरी चलाती है। उसकी कम्पनी फ्यूचर गेमिंग दक्षिण भारत में अपनी एक अन्य कम्पनी मार्टिन कर्नाटक और पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी एक अन्य कम्पनी सिक्किम लॉटरी के माध्यम से धंधा करती है। बताते हैं कि कभी सैंटियागो मार्टिन म्यांमार के यंगून में मजदूरी करता था। बाद में उसने यह साम्राज्य खड़ा किया। उसके कई पार्टियों से संबंध हैं।

CPI(M) से सैंटियागो मार्टिन का गठजोड़

सैंटियागो मार्टिन ने वर्ष 2007 में कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र देशाभिमानी को ₹50 लाख के चार चुनावी बॉन्ड के माध्यम से ₹2 करोड़ का चंदा दिया था। जब यह मामला खुला तो पार्टी लोगों के निशाने पर आ गई। पार्टी की छवि बचाने के लिए महासचिव प्रकाश करात ने पैसा स्वीकार करने के बाद उसे लौटाने का निर्णय लिया था।

वर्ष 2016 में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के करीबी माने जाने वाले एक वरिष्ठ वकील एमके दामोदरन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर एक मामले में सैंटियागो मार्टिन की तरफ से केस लड़ा था। मुख्यमंत्री विजयन के कानूनी सलाहकार एमके दामोदरन लॉटरी घोटाले के सिलसिले में मार्च 2018 में सैंटियागो मार्टिन के लिए कोर्ट गए थे।

DMK से भी संबंध

DMK को चन्दा देने के अलावा अक्टूबर 2010 में, तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल पी.एस. रमन ने केरल हाई कोर्ट में सैंटियागो मार्टिन का केस लड़ा था। जब इस पर केरल सरकार ने ऐतराज किया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री करूणानिधि ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और रमन को इस मामले की पैरवी छोड़नी पड़ी थी।

फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज के मालिक सैंटियागो मार्टिन ने ₹50 करोड़ रुपये खर्च करके करुणानिधि की 75वीं फिल्म के निर्माण में मदद की। उसने इसमें स्क्रिप्ट भी लिखी थी। यह भी कहा जाता है कि ‘इलैगनन‘ नाम की एक फिल्म 3 साल तक अधर में लटकी रही, इसके बाद मार्टिन ने इसे पुनः चालू किया। इस फिल्म की कहानी लिखने के लिए करूणानिधि को ₹45 लाख का भुगतान किया गया था।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, “सिनेमा के बड़े नामों का कहना है कि इसके बदले में उसे (सेंटिआगो) को बिना कोई समस्या के अपना लॉटरी का धंधा चलाने दिया जाता है।” जनवरी 2023 में यह रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सैंटियागो मार्टिन के दामाद आधव अर्जुन को DMK ने 2024 लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी चुनावी रणनीतिकार की भूमिका में नियुक्त किया था।यह भी बताया जाता है कि अर्जुन के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री दामाद सबरीसन के साथ अच्छे सबंध हैं।

कॉन्ग्रेस और TMC से भी जुड़े हैं तार

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी सितंबर 2010 में केरल हाई कोर्ट में घोटाले के दागी सैंटियागो मार्टिन का केस लड़ा था। हालाँकि, उन्हें कम्युनिस्टों के विरोध के चलते मामले से नाम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। तक कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख जनार्दन द्विवेदी ने कहा था, “पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है, भले ही सिंघवी इस मामले से हटने की घोषणा की है।”

‘पत्रकार’ रोहिणी सिंह ने सितम्बर 2021 में एक ‘क्षेत्रीय दल’ और एक लॉटरी माफिया के बीच एक गठजोड़ की तरफ इशारा किया था।

इसके बाद दिसंबर, 2021 में उन्होंने ट्वीट किया, ”अडानी और अम्बानी को भूल जाओ। लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन पर नजर रखो और उस पार्टी पर नजर रखो जिसे वह फंड करता है। देश की राजनीति में आगे का समय बड़ा दिलचस्प है।’

G2G न्यूज की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सैंटियागो की कम्पनी फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज ने वर्ष 2017 और 2021 के बीच पश्चिम बंगाल में ₹12000 करोड़ GST दिया था। इस न्यूज रिपोर्ट में कम्पनी की वेबसाइट को आधार बनाते हुए लिखा गया था, “फ्यूचर गेमिंग देश के बड़े करदाताओं में से एक है। हर बार समय पर बड़ी मात्रा में करों का भुगतान करके, एक मजबूत देश के निर्माण में इसका योगदान प्रशंसनीय है।” सैंटियागो मार्टिन की कंपनी कंपनी लम्बे समय से पश्चिम बंगाल में ‘डियर लॉटरी’ चला रही है।

नवंबर 2022 में, सीबीआई ने बताया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के मंत्री अनुब्रत मंडल और उनकी बेटी ने तीन साल में 5 बार यह लॉटरी जीती है। TMC को सबसे अधिक चन्दा फ्यूचर गेमिंग से ही मिला।

संभल की मुस्लिम हिंसा में जिस DSP को लगी थी गोली, उन्हें CM योगी की धौंस दे इंटरव्यू के लिए हड़का रहा था यूट्यूबर मशकूर रजा: गिरफ्तारी के बाद लंगड़ाते हुए चलते दिखा

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस ने सोमवार (23 दिसंबर 2024) को फोन पर आधिकारियों को हड़काने वाले एक युवक को गिरफ्त्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपित मशकूर रज़ा ट्रांसपोर्ट का काम करने के साथ-साथ एक यूट्यूब चैनल चलाता है। संभल हिंसा में दंगाइयों के हमले में घायल डिप्टी एसपी अनुज चौधरी को मशकूर ने अर्दब में लेने का प्रयास किया था। इस दौरान उसने CM योगी आदित्यनाथ और UP के DGP का नाम लेकर धौंस जमाना चाहा था।

मीडिया से बात करते हुए संभल कोतवाली के थाना प्रभारी ने मशकूर पर हुई कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित पर शांतिभंग की धाराओं में एक्शन लिया गया है। बकौल SHO, मशकूर DSP अनुज चौधरी पर इंटरव्यू का दबाव बना रहा था। जब कई बार मना किया गया तो मशकूर ने DSP को धमकी दी। इसके बाद उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। मामले में आगे की जाँच जारी है।

गिरफ्तारी के बाद मशकूर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो कोतवाली संभल कैम्पस का है, जिसमें मशकूर लंगड़ाता हुआ चल रहा है और एक पुलिसकर्मी उसे सहारा दे रहा है। इसी वीडियो में मशकूर अपने किए पर पछतावा जता रहा है। उसने कहा, “मेरा यूट्यूब चैनल था, इसीलिए मैंने सोचा। वायरल होने के नाते। फेमस होने के लिए। बहुत बड़ी गलती हो गई सर मुझ से।” इस पर साथ चल रहे कांस्टेबल ने पूछा, “हो गए फेमस?”

क्या कहा था मशकूर ने

मशकूर मूल रूप से मुरादाबाद के मैनाठेर थानाक्षेत्र में पड़ने वाले गाँव ताहरपुर का रहने वाला है। संभल हिंसा के बाद वह DSP अनुज चौधरी को लगातार इंटरव्यू के लिए कॉल कर रहा था। अनुज चौधरी के बार-बार मना करने पर उसने पहले खुद को पत्रकार और बाद में भाजपा का सदस्य बताया। सख्ती से बात करने पर मशकूर इन दोनों दावों से मुकर कर खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने लगा।

इस बातचीत का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मशकूर ने अनुज चौधरी से कहा, “तुम इतने बड़े दादा हो क्या जो हर किसी को एक डंडे से हाँकोगे… गोली चलाओगे, गोली मारोगे ?” जवाब में अनुज चौधरी ने कहा था कि अब तेरा असली दर्द निकल कर बाहर आया। मशकूर आगे बोला, “आप कहो तो मैं CM साहब से फोन करा दूँ। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से? किससे कहलवाना होगा? SP साहब से कहलवा दूँ? DGP साहब से कहलवा दूँ?”

दीमक-चूहों से बचाने के लिए नोटों पर बोरिक पाउडर छींटता था सौरभ शर्मा, जानिए कैश के बदले क्यों सोने-चाँदी की गिल्ली की करता था डिमांड: लुकआउट नोटिस जारी

मध्य प्रदेश के लोकायुक्त की टीम ने 19 और 20 दिसंबर 2024 को RTO (परिवहन विभाग) के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में करोड़ों रुपए कैश सहित भारी मात्रा में सोने के बिस्किट और चाँदी की सिल्लियाँ बरामद हुई थीं। अब तक हुई जाँच में पता चला है कि सौरभ शर्मा रिश्वत में कैश के बजाय सोना और चाँदी लेना ज्यादा पसंद करता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सौरभ शर्मा नकदी के बदले लोगों से सोने और चाँदी लेना ज्यादा पसंद करता था। ऐसा करने के पीछे उसका मोलभाव का दिमाग काम करता था। वह इसी सोने-चाँदी को बाद में और अधिक दामों पर बेच दिया करता था। दूसरे कारण यह भी थे कि सौरभ शर्मा को नोटों की गड्डियाँ सहेज कर रखने में काफी दिक्कत होती थी। इससे नोटों को खराब होने के झंझट से मुक्ति मिल जाती थी।

कैश के बदले सोने-चाँदी को प्राथमिकता

इसके साथ ही सोने-चाँदी में अधिक कैश को खपाया जा सकता था। जाँच में यह भी पता सौरभ शर्मा ढाई-ढाई लाख रुपए की कीमत के नोटों का बंडल बनाकर रखता था। इन बंडलों के खराब होने को लेकर भी वह काफी चिंता में रहता था। दीमक और चूहों से बचाने के लिए वह बंडलों पर बोरिक पाउडर नाम का केमिकल का छिड़काव करता रहता था। वह नोटों का बंडल बनाने के लिए मशीन रखता था।

एक अनुमान के मुताबिक, सौरभ के ठिकानों से लगभग 234 किलो चाँदी बरामद हुई है। इस चाँदी की कीमत 2 करोड़ रुपयों से अधिक आँकी जा रही है। चाँदी के अलावा, उससे संबंधित 54 किलो सोना भी बरामद हुआ है। कुल मिलाकर अब तक सौरभ शर्मा के अनुमानित 8 करोड़ रुपयों की बरामदगी हो चुकी है। सौरभ शर्मा के बंगले और कार की भी कीमत करोड़ों में आँकी गई है।

लोकायुक्त की जाँच में यह भी निकल कर सामने आया है कि सौरभ शर्मा ने सोने और चाँदी के अलावा पैसों को स्कूल, अस्पताल, होटल, रियल स्टेट आदि कई कारोबारों में लगाया है। उसने अपनी माँ, पत्नी, साली एवं कुछ करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों के नाम पर भी निवेश किए हैं। सौरभ शर्मा के परिवार के अलावा इस नेटवर्क में अब तक उसके 2 करीबियों के नाम सामने आ चुके हैं।

सौरभ शर्मा के दोनों करीबियों के नाम शरद जयसवाल और चेतन गौड़ है। सौरभ शर्मा के घर से एक डायरी भी मिली है। कहा जा रहा है कि इसमें उसके सम्पर्क में रहे कई IAS-IPS अधिकारियों तथा नेताओं के नाम और मोबाइल नंबर लिखे हुए हैं। इस डायरी में सालाना 100 करोड़ रुपयों के लेन-देन का हिसाब है। लोकायुक्त की टीम सौरभ शर्मा के बाकी नेटवर्क को खँगालने में जुटी हुई है।

नौकरी से इस्तीफा पर उगाही लगातार जारी

जाँच में यह बात भी सामने आई है कि सौरभ शर्मा ने कुछ दिन पहले अपने तमाम करीबियों को LED टीवी गिफ्ट में दी थी। जाँच एजेंसियाँ सौरभ के विदेश यात्राओं और वहाँ के नेटवर्क को भी खँगालने में जुटी हुई हैं। लोकायुक्त को आशंका है कि सौरभ ने कुछ काला धन दुबई में रियल इस्टेट के काम में भी लगा रखा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर, जबलपुर और भोपाल में सौरभ की जायदाद पाई गई है।

जाँच में यह भी पता चला है कि सौरभ जल्द ही भोपाल के शाहपुर में जयपुरिया स्कूल की एक फ्रेंचाइजी खोलने वाला था। सौरभ ने अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन नाम से एक कम्पनी भी बना रखी है। साल 2021 में बनाई गई इस कम्पनी में सौरभ ने अपने साले को एडिशनल डायरेक्ट बना रखा है। इसी में उसके 2 करीबी शरद और चेतन भी साझेदार हैं।

छापेमारी में सौरभ शर्मा के ठिकानों से परिवहन विभाग की कई मुहरें मिली हैं। कई मुहर तो अधिकारियों के नाम सहित हैं। कार्टन में परिवहन विभाग की चालान काटने वाली कई रसीदें भी मिली हैं। माना जा रहा है कि कॉन्स्टेबल की नौकरी से इस्तीफा देने के बावजूद सौरभ शर्मा का चेक पोस्ट पर उगाही का खेल बदस्तूर जारी था। उसने मध्य प्रदेश के 47 चेक पोस्ट में से 23 का ठेका ले रखा था।

सौरभ की माँ, पत्नी और अन्य करीबियों से पूछताछ के लिए इनकम टैक्स विभाग नोटिस जारी करने जा रहा है। माना जा रहा है कि इन सभी से अगले 2 दिनों के अंदर पूछताछ की जा जाएगी। सौरभ शर्मा और उसके अब तक मिले नेटवर्क के खिलाफ ED ने सोमवार को केस दर्ज कर लिया है। कुछ दिन पहले पहले एक कार लावारिस हालत में मिली थी।

इस गाड़ी में 10 करोड़ रुपए नकद और 54 किलोग्राम सोना मिला था। यह गाड़ी और नकदी एवं सोना भी सौरभ शर्मा से संबंधित है। इसी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत उस पर ये FIR दर्ज की है। सौरभ शर्मा फरार है और माना जा रहा है कि वह दुबई में है। वहीं, कुछ लोग उसके मुंबई में छिपे होने की आशंका जता रहे हैं। इसको देखते हुए लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया है।

सौरभ शर्मा की नौकरी में धाँधली के आरोप

अब सौरभ शर्मा की नियुक्ति पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्वालियर हाई कोर्ट के वकील अवधेश तोमर ने आरोप लगाया है कि सौरभ की नियुक्ति के दस्तावेजों में भी हेराफेरी की गई थी। उन्होंने आरटीआई के जरिए नियुक्ति के दस्तावेज भी माँगे थे, जो परिवहन विभाग ने नहीं दिए। उन्होंने अभी कहा कि सौरभ का बड़ा भाई सचिन शर्मा सरकारी नौकरी में है। ऐसे में दूसरे की अनुकंपा नियुक्ति कानून के खिलाफ है।

उन्होंने यह भी कहा कि सौरभ शर्मा की नौकरी कॉन्ग्रेस के एक कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री की सिफारिश पर लगी थी। यही कारण है कि परिवहन विभाग इस फर्जीवाड़े को छिपाना चाहता है और इसके बारे में जानकारी नहीं दे रहा है। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉन्ग्रेस सरकार में सौरभ शर्मा की ताकत बढ़ जाती थी और वह अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग तक में दखल देता था।

ट्रांसपोर्टरों और कॉन्ग्रेस ने खोला मोर्चा

सौरभ शर्मा पर हुए खुलासे के बाद ट्रांसपोर्टरों ने RTO आधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कॉन्ग्रेस नामक समूह ने तमाम RTO अधिकारियों की सम्पत्तियों की जाँच कराए जाने की माँग उठाई है। इसी माँग में यह भी शामिल है कि लाइसेंस, फिटनेस और रजिस्ट्रेशन आदि की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाए, ताकि उन्हें तंग ना किया जा सके।

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इसे परिवहन घोटाला बताते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की निगरानी में जाँच कराए जाने की माँग उठाई है। इस संबंध में दिग्विजय सिंह ने PM मोदी को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने भाजपा नेता गोविंद सिंह राजपूत पर भी आरोप लगाया है। हालाँकि, गोविंद सिंह ने इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बता दें कि सौरभ शर्मा के पिता आरके शर्मा सरकारी डॉक्टर थे। उनकी मौत के बाद साल 2015 में शर्मा को अनुकंपा पर राज्य परिवहन विभाग में कॉन्स्टेबल की नौकरी मिली। उसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के बाद जाँच से बचने के लिए सौरभ शर्मा ने साल 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और चेक पोस्ट का ठेका लेकर वसूली का खुलेआम धंधा करने लगा।

पुर्तगाल के समंदर में समाए 250 जहाजों में लदा है खजाना, 1 में ही 22 टन सोना-चाँदी: आर्कियोलॉजिस्ट ने तैयार किया डूब चुके 8620 जहाजों का डाटाबेस, कहा- लूटेरे अंदर ही अंदर कर सकते हैं गायब

पुर्तगाल के समुद्री तट के पास 250 से अधिक खजाने से भरे जहाजों की खोज ने इतिहास प्रेमियों और पुरातत्वविदों के बीच खलबली मचा दी है। पानी के अंदर पुरातत्व में माहिर अलेक्जेंड्रे मोनटेरो ने हाल ही में एक डेटाबेस तैयार किया है, जिसमें 8,620 जहाजों के डूबने की जानकारी शामिल है। इनमें से लगभग 250 जहाज ऐसे हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि ये जहाज खजाने से भरे हो सकते हैं। ये जहाज मुख्य रूप से पुर्तगाल के मुख्य तट, अज़ोरेस और मदीरा के आसपास पाए गए हैं।

मोनटेरो ने बताया कि पुर्तगाल के ट्रोया क्षेत्र के पास 1589 में डूबे एक स्पेनिश जहाज नोस्सा सेनहोरा दो रोज़ारियो में अकेले 22 टन सोना और चांदी थी। इस जहाज की पूरी कहानी जानने के लिए उन्होंने गहरा शोध किया और यहाँ तक कि जहाज के कप्तान की माँ का नाम भी खोज निकाला। उनके अनुसार, पुर्तगाल के इतिहास में कई ऐसे जहाज हैं जो समुद्र की गहराई में खजाने के साथ दफन हैं।

बता दें कि 15वीं और 16वीं शताब्दी में पुर्तगाल एक प्रमुख औपनिवेशिक शक्ति था, जिसने दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और पूर्वी इंडीज में अपने उपनिवेश स्थापित किए थे। समय के साथ इस साम्राज्य के विघटन के बाद ब्राजील, अंगोला और मोजांबिक जैसे स्वतंत्र राष्ट्र बने। इन व्यापार मार्गों पर समुद्री दुर्घटनाओं के कारण कई जहाज समुद्र में डूब गए, जो आज ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

मोनटेरो ने कहा कि इन जहाजों के बारे में सरकार के पास जानकारी है, लेकिन उनके संरक्षण के लिए कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि इन जहाजों को जल्द या बाद में खोजा जाएगा, खासकर बंदरगाह निर्माण या अन्य परियोजनाओं के दौरान। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अगर इन खजानों को संरक्षित नहीं किया गया, तो वे लुटेरों के हाथ लग सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुर्तगाल को अपने समुद्री इतिहास की रक्षा के लिए एक ठोस योजना बनानी चाहिए।

मोनटेरो ने खुद कई वर्षों तक समुद्र के अंदर गोता लगाकर इन जहाजों का पता लगाया है। उन्होंने नोस्सा सेनहोरा दा लूज़ नामक जहाज की खोज में चार साल लगाए, जो 1615 में अज़ोरेस के पास डूबा था। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने पहली बार गोता लगाया, उन्हें जहाज का ठिकाना मिल गया। हालाँकि, उन्होंने खजाने की लूट की संभावना को कम बताया, क्योंकि कई जहाज रेत की गहराई में दबे हुए हैं। फिर भी उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन जहाजों के लिए संरक्षण योजना नहीं बनाई गई, तो यह पुर्तगाल की सांस्कृतिक धरोहर के लिए बड़ा नुकसान होगा।

पुरातत्वविद् का कहना है कि इन जहाजों की पहचान केवल पहला कदम है। इन जहाजों की खोज और उनके खजाने को संरक्षित करने के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है। मोनटेरो का मानना है कि अगर समर्पण के साथ प्रयास किया जाए, तो इन जहाजों को खोजने और संरक्षित करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। यह खोज पुर्तगाल के समुद्री इतिहास को गहराई से समझने का मौका देती है।

संभल में जिन्होंने बनवाई ‘रानी की बावड़ी’, बाबर से लड़े थे उनके पुरखे: मंदिर तक जाती थी सुरंग, जानिए किनके कारण सामने आया जमीन में दफन इतिहास

संभल के चंदौसी में खुदाई में मिली गहरी बावड़ी का कनेक्शन उस राजपरिवार है जिसने बाबर से लड़ाई लड़ी थी। इस बावड़ी के सर्वे के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम भी पहुँच गई है। बावड़ी में अब तक कई गलियारे और सुरंगे मिल चुकी हैं। यह बावड़ी कैसे जमीन में दब गई, इसकी भी जानकारी सामने आई है। बावड़ी की खुदाई लगातार जारी है और संभल का प्रशासन इसकी अधिक जानकारियाँ सामने लाने में जुटा है।

कैसे मिली बावड़ी, क्यों हुई खुदाई?

यह बावड़ी चंदौसी के लक्ष्मणपुर मोहल्ले में मिली है। यह मोहल्ला मुस्लिम बहुल है। यहाँ पर बावड़ी वाला इलाकों चारों तरफ से मकानों से घिरा हुआ है। हालाँकि, बावड़ी की जमीन खाली थी और कूड़े वगैरह से पटी हुई थी। इसकी खुदाई की शुरुआत कौशल किशोर की शिकायत पर चालू की गई है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंदूवादी कार्यकार्ता कौशल किशोर ने हाल ही में बावड़ी पर अतिक्रमण को लेकर जिले के अधिकारियों को शिकायत की। कौशल किशोर ने बताया कि उन्हें जानकारी थी कि यह बावड़ी 150 वर्ष पुरानी है।

प्रशासन ने इसके बाद एक टीम भेजी और अतिक्रमण को लेकर खुदाई चालू कर करवाई। इसमें बावड़ी के शुरूआती अंश मिले। इसके बाद और भी मजदूर बुला कर ढंग से इस पर काम करना चालू किया गया। स्पष्ट हुआ कि शिकायत में जो बावड़ी की बताई गई थी, वह सही थी और इसकी अधिक खुदाई पर पूरा ढांचा सामने आएगा, जिससे सब कुछ समझने में आसानी रहेगी।

कैसी है बावड़ी?

चंदौसी की यह बावड़ी संभवतः 30 फीट गहरी है। इसमें अभी खुदाई लगभग 14-15 फीट तक ही हुई है। बावड़ी तीन मंजिल की है। डीएम का कहना है कि इसमें दो मंजिल ईंटो जबकि एक मंजिल पत्थर की है। ऊपर के दो मंजिल में कमरे हैं जबकि सबसे नीचे वाली मंजिल पानी से जुड़ी हुई थी। बावड़ी में जमीन से अंदर उतरने के लिए सीढियाँ बनी हुई है। यह पक्के लाल पत्थर की हैं। बावड़ी में दो कमरे भी बने हुए हैं। इनमें जाने के लिए छोटे छोटे दरवाजे भी हैं। बावड़ी के भीतर 5 गलियारे मिले हैं। बताया गया है कि यह गलियारे बावड़ी में चारों तरफ हैं।

बावड़ी में सबसे निचले तल पर एक कुआँ था। यहाँ एक कमरे में सुरंग भी मिली है। इस सुरंग का रास्ता कुछ दूर बने एक राधाकृष्ण मंदिर तक जाता है, ऐसे लोगों ने दावा किया है। इस बावड़ी का इस्तेमाल सैनिक, आसपास के लोग और खेती के लिए होता था, यह आसपास के लोगों ने बताया है। जो इसी इलाके रहने वाले हैं, उन्होंने बताया है कि वह कुछ दशक पहले यहाँ घूमते टहलते थे लेकिन तब यही पूरी तरह से जमीन में दबी नहीं थी।

किसने बनवाई, कौन है मालिक?

इस बावड़ी को सहसपुर के राजपरिवार ने बनवाया था। सहसपुर का यह राजपरिवार मुरादाबाद, बिजनौर, संभल और बदायूँ जैसे इलाकों में बड़े इलाके का मालिक था। यहाँ इनका राज बाबर के पहले का है। भारतीय राजपरिवारों के बारे में बताने वाली एक वेबसाइट के अनुसार, यहाँ के राजा ने बाबर के खिलाफ युद्ध लड़ा था। लेकिन इसमें हार के बाद वह पंजाब चले गए थे। वह औरंगजेब के काल में लौटे और अपना राज वापस कायम किया।

इसी के अनुसार, इसी राजपरिवार के राजा प्रद्युमन कृष्ण सिंह ने 1857 के संग्राम में अंग्रेजों की मदद की, जिसका इनाम भी उन्हें मिला। यह राजा 1839 से 1880 तक यहाँ राज कर रहे थे। संभवतः, इन्हीं के दौर में यह बावड़ी बनी होगी। इनके ही वंश में राजा जगत सिंह हुए। उनकी पत्नी प्रीतम कँवर थीं। प्रीतम कँवर की 1982 में मौत हो गई थी। इससे पहले उन्होंने अपनी बहू सुरेन्द्र बाला को इस बावड़ी समेत तमाम सम्पत्तियाँ दी थी। सुरेन्द्रबाला की पोती शिप्रा गैरा अब यहाँ आई हैं।

शिप्रा गैरा ने भास्कर को बताया है कि 1995 तक वह चंदौसी की इस बावड़ी में आती थीं। शिप्रा गैरा उन रानी सुरेन्द्रबाला की पोती हैं, जिनके पास इस बावड़ी का मालिकाना हक़ हुआ करता था। उन्होंने अपने गोद लिए हुए बेटे विष्णु कुमार को इस बावड़ी समेत तमाम जमीनें दी थी। शिप्रा गैरा ने बताया कि वह जब आती थीं तब यहाँ एक बाग़ हुआ करता था और कुआँ भी चलताऊ हालत में था। सुरेन्द्रबाला के पोते ने भी इस संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी दादी ने अपने बेटे के बजाय गोद लिए हुए बेटे को इसका मालिकाना हक़ दिया था।

ASI की टीम पहुँची

नगर पालिका टीम ने इस बावड़ी की खुदाई काफी सावधानी से करवाई है। यहाँ पर मशीनों की बजाय नगरपालिका के मजदूरों को लगाया गया है। वह हाथों से खुदाई कर रहे हैं। बावड़ी की खुदाई का काम पाँचवे दिन बुधवार (25 दिसम्बर, 2024) को भी जारी था। यहाँ पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की भी एक टीम पहुँची है। उसने खुदाई के काम को देखा है और बावड़ी का निरीक्षण किया है। ASI ने इस बावड़ी के फोटो-वीडियो भी बनाए हैं। यहाँ पर मांग हो रही कि बाकी मंदिरों का भी पता लगाया जाए।

वाजपेयी की 100वीं जयंती पर PM मोदी ने बुंदेलखंड को जल ऊर्जा देने की रखी नींव, जानिए क्या है केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट: कब तक होगी पूरी, कैसे होगा फायदा

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की आधारशिला रखी। पीएम मोदी दोपहर करीब 12:30 बजे पीएम मोदी खजुराहो पहुँचे, जहाँ उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की आधारशिला भी रखी। ये राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के अंतर्गत देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है।

साल 2030 तक जुड़ जाएँगी केन और बेतवा नदी

केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत केन नदी के पानी को मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में भेजा जाएगा। केन नदी, जो जबलपुर के पास कैमूर पहाड़ों से निकलती है और उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में यमुना नदी में मिलती है, से पानी बेतवा नदी तक ले जाया जाएगा। बेतवा नदी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलकर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना से मिलती है। इस परियोजना के अंतर्गत केन नदी पर एक बांध बनाया जाएगा और 221 किलोमीटर लंबी नहर के माध्यम से पानी को बेतवा नदी तक पहुँचाया जाएगा।

यह परियोजना कुल 44,605 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही है। इससे मध्य प्रदेश के 10 जिलों के लगभग 44 लाख लोग और उत्तर प्रदेश के 4 जिलों के 21 लाख लोग, यानी कुल 65 लाख लोगों को लाभ पहुँचेगा। इन इलाकों में सिंचाई की समस्या का समाधान होगा, पीने का पानी उपलब्ध होगा और औद्योगिक विकास के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

इस परियोजना से मध्य प्रदेश के पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी और दतिया जिलों में करीब 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। उत्तर प्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर और बांदा जिलों को भी इससे काफी लाभ होगा। खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र, जो लंबे समय से सूखे की समस्या से जूझ रहा है, इस परियोजना के जरिए जीवनदायिनी सुविधा प्राप्त करेगा।

कैसे पूरा होगा यह प्रोजेक्ट?

  • डैम का निर्माण: परियोजना के तहत दौधन बांध बनाया जाएगा, जो केन नदी के पानी को संग्रहीत करेगा। इस बांध से पानी को बेतवा नदी तक पहुँचाया जाएगा।
  • नहर का निर्माण: केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 221 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाएगा। यह नहर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुँचाएगी।
  • जल बंटवारे की व्यवस्था: नवंबर से अप्रैल के बीच पानी का वितरण होगा। इस दौरान उत्तर प्रदेश को 750 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) और मध्य प्रदेश को 1834 MCM पानी मिलेगा।
  • ऊर्जा उत्पादन: परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। इससे हरित ऊर्जा में योगदान बढ़ेगा और औद्योगिक विकास के लिए बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। औद्योगिक इकाइयों को भी पर्याप्त पानी की आपूर्ति मिलने से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

हालाँकि, इस परियोजना को पूरा करने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। पर्यावरणीय और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी चिंताओं ने इसकी प्रगति को लंबे समय तक बाधित किया। यह परियोजना पन्ना अभयारण्य से होकर गुजरती है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के सवाल उठे। लेकिन मार्च 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर के बाद इस परियोजना को हरी झंडी दी गई।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का विचार सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में 2002 में आया था। उन्होंने देश में 36 नदियों को जोड़ने की योजना बनाई थी ताकि सूखे और बाढ़ की समस्या का समाधान हो सके। हालाँकि, इस योजना को आगे बढ़ाने में कई प्रशासनिक और पर्यावरणीय अड़चनें आईं। 2014 में मोदी सरकार ने इस योजना को फिर से शुरू किया और अब केन-बेतवा लिंक परियोजना को इसकी पहली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

1858 में पहली बार आया था ऐसा प्रस्ताव

भारत में नदियों को जोड़ने की अवधारणा नई नहीं है। ब्रिटिश काल में भी इस विचार पर चर्चा हुई थी। 1858 में ब्रिटिश सैन्य इंजीनियर आर्थर थॉमस कॉटन ने बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव रखा था ताकि सूखे और बाढ़ जैसी समस्याओं से निपटा जा सके। स्वतंत्रता के बाद भी नदियों को जोड़ने के कई प्रयास हुए, लेकिन यह योजना कभी पूरी तरह से अमल में नहीं लाई जा सकी।

केन-बेतवा परियोजना के तहत जल वितरण को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता हुआ है। हर साल नवंबर से अप्रैल के बीच यूपी को 750 एमसीएम और एमपी को 1834 एमसीएम पानी मिलेगा। इस परियोजना की निगरानी राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण (एनडब्ल्यूडीए) और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा की जाएगी।

इस परियोजना के शुरू होने से न केवल जल संकट का समाधान होगा, बल्कि किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्र में जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह परियोजना अटल बिहारी वाजपेयी के उस सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें उन्होंने नदियों को जोड़कर जल संकट का समाधान करने की परिकल्पना की थी।