Home Blog Page 527

सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के घर चला बुलडोजर, कनेक्शन भी कटा, बिजली चोरी में जुर्माना ₹1.91 करोड़ का: अब्बा ने दी थी ‘सरकार बदलने’ की धमकी

बिजली चोरी में घिरे उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क को बिजली विभाग ने 1.91 करोड़ रुपए का बिल जारी किया है। विभाग ने सांसद के घर की बिजली सप्लाई भी काट दी है। वहीं, प्रशासन ने उनके घर के बाहर बनी नालियों के ऊपर की सीढ़ियों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया है। दूसरी तरफ, बिजली विभाग के अधिकारियों को धमकाने वाला उनके अब्बू ममलूक उर रहमान का वीडियो भी सामने आया है।

बिजली विभाग के एसडीओ संतोष त्रिपाठी ने बताया कि जब बिजली विभाग की टीम ने सांसद बर्क के घर में लगे मीटर की रीडिंग ली तो वो जीरो निकली थी। इसके बाद विभाग की ओर से उन्हें नोटिस भेजा गया। नोटिस पर 15 दिन में रकम जमा नहीं करने पर विभाग की तरफ से आरसी जारी की जाएगी। अब बिजली विभाग ने उन पर 1.91 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है।

बता दें कि बिजली विभाग ने गुरुवार (19 दिसंबर 2024) की सुबह तलाशी ली। इस दौरान बर्क के घरवालों ने बिजली के मीटर की जाँच करने से टीम को रोका और जूनियर इंजनीनियर को धमकी भी दी। इस वीडियो भी सामने आया है। जिस वक्त बिजली विभाग के कर्मचारी उनके घर रीडिंग लेने के लिए गए थे, उस वक्त उनके साथ रैपिड ऐक्शन फोर्स, PAC और पुलिस की बड़ी संख्या में जवान मौजूद थे।

जाँच के दौरान सपा सांसद जियाउर्रहमान के अब्बू ममलूक रहमान बर्क ने अधिकारियों को धमकाते हुए कहा था, “हमारी सरकार आने दो…बहुत बदल गया है तू। ये सरकार रहेगी तो तुम्हारा कबाड़ा कर देगी।।” उन्होंने आगे कहा था, “एक आवाज देंगे तो बाहर भीड़ आकर खड़ी हो जाएगी।” इसके बाद उनके खिलाफ धमकी का मामला दर्ज कराया गया था।

बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर वीके गंगवाल ने बताया, “बर्क के घर में हम मीटर रीडिंग कर रहे थे। वहाँ पर सांसद के पिता मौजूद थे। उन्होंने हमें धमकाया और कहा- वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता है। सरकार बदलेगी तो आपके खिलाफ कार्रवाई कराएँगे। आप हमारी वीडियो बना रहे हैं। आप मुझ पर FIR कराएँ। हम आप पर FIR कराएँगे।”

वहीं, जियार्रहमान पर बिजली चोरी का एक अलग से मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब प्रशासन ने उनके घर की बिजली भी काट दी है। उन्हें जुर्माने की राशि को जल्द से जल्द जमा कराने के लिए कहा गया है। वहीं, नगरपालिका के अधिकारियों ने प्रशासन के साथ मिलकर उनके घर के पास बने अवैध निर्माण को ढहा दिया है।

दरअसल, सांसद जियाउर्रहमान के घर में बिजली के दो मीटर लगे हैं। इन मीटरों में टेम्परिंग यानी छेड़छाड़ के सबूत मिले हैं। यही कारण है कि बीते एक साल में उनके घर में बिजली के मीटर की रीडिंग जीरो रही। इसके बाद कुछ दिन पहले ही बिजली विभाग ने सांसद जियाउर्रहमान के घर के पुराने मीटर को जब्त करके जाँच के लिए भेज दिया था और उसकी जगह पर नई और स्मार्ट मीटर लगाए थे।

रिपोर्ट के अनुसार सपा सांसद के दो मंजिला घर में 83 बल्ब, 19 पंखे और 3 एसी चलाए जा रहे थे। गीजर से लेकर माइक्रोवेव तक अन्य आधुनिक उपकरण का भी इस्तेमाल हो रहा था। बिजली विभाग ने बताया है कि इस घर में 16,480 वॉट के उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बावजूद कई महीनों से उनके घर का बिजली बिल शून्य आ रहा था।

RSS और हिंदू नेताओं को मारने की थी साजिश… असम STF ने बांग्लादेशी आतंकी संगठन के 8 आतंकियों को किया गिरफ्तार, छानबीन में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद

भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनकर घूम रहे इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों पर असम एसटीएफ ने चोट की है। इस बार असम की स्पेशल टास्क फोर्स ने बंगाल पुलिस और केरल पुलिस के साथ मिलकर राज्यों में ऑपरेशन ‘प्रघात’ चलाया और 8 आतंकियों को गिरफ्तार किया।

आतंकियों की पहचान मोहम्मद साब शेख, मिनारुल शेख, अब्बास अली, नूर इस्लाम मंडल, अब्दुल करीम मंडल, मोजीबार रहमान, हमीदुल इस्लाम और इनामुल हक के तौर पर हुई है। ये सभी लोग देश भर में स्लीपन सेल बनाने की गतिविधियों में संलग्न थे। इनमें से साब शेख और अब्बास अली बांग्लादेशी हैं। अब्बास को पहले फर्जी पासपोर्ट मामले में भी अरेस्ट किया जा चुका था लेकिन इस बार गिरफ्तारी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रचने के लिए हुई।

असम पुलिस के स्पेशल डीजीपी हरमीत सिंह ने इस कार्रवाई को लेकर बताया कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और फलाकाटा में इस्लामी कट्टरपंथियों एक दूसरे से मिले थे। इन बैठकों में हिंदू नेताओं की हत्या की योजना के साथ देश में मजहबी तनाव भड़काकर, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ना था।

हालाँकि, पुलिस ने सूचना पाते ही देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी टीमें भेजीं और 17-18 दिसंबर की रात इस मामले में छापेमारी हुई। छानबीन में इनके पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामान भी मिले।

छानबीन में ये भी जानकारी सामने आई कि केरल और बंगाल में रहकर ये आतंकी किसी मोहम्मद फरहान इसराक के लिए काम कर रहे थे जिसका खुद का संबंध अलकायदा के आतंकियों से है। इसके अलावा उसकी करीबी आतंकी संगठन ‘अंसरुल्लाह बांग्ला टीम’ के सरगना जसीमुद्दीमन से भी है।

पुलिस इस एक्शन को एक बड़ी सफलता मान रही है और आगे देश की सुरक्षा के लिए आतंकियों की प्लानिंग के बारे में पता लगाने में जुटी है। अभी तक यही सामने आया है कि ये आतंकी बंगाल के मुर्शिदाबाद और फलाकाटा में कई बैठकें कर चुके थे। जहाँ नूर इस्लाम मंडल नाम का आतंकी अपने साथियों के साथ आया था और इस बैठक में आरएसएस सदस्यों व हिंदू संगठनों के सदस्यों को मारने की बात हुई थी।

इस्लामी आतंकी बलात्कारी भी था, छेड़ता था लड़कियों को: मारा गया फारूक अहमद भट उर्फ फारूक नल्ली, दर्ज थे 37 केस

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षा बलों ने गुरुवार (19 दिसंबर 2024) को 5 आतंकियों को मार गिराया। इनमें आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का शीर्ष कमांडर फारूक अहमद भट उर्फ नल्ली भी शामिल है। ये सभी आतंकी कुलगाम के रहने वाले थे। इन सबके खिलाफ करीब 91 मामले दर्ज थे। वहीं, A++ कैटेगरी में शामिल आतंकी फारूक भट के खिलाफ रेप सहित 37 मामले दर्ज थे।

कुलगाम जिले के देसचेन येमरिच इलाके का रहने वाला फारूक घाटी में सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले आतंकवादियों में से एक था। वह हिजबुल का सबसे लंबे समय तक कमांडर रहने वाला आतंकी भी था। वह कई आतंकी घटनाओं में शामिल था। इसके अलावा नेताओं को धमकाने, सुरक्षा बलों की हत्या, ग्रेनेड अटैक जैसी वारदातों में उसका हाथ रहा था।

उसने दक्षिण कश्मीर में कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया और स्थानीय आतंकियों की भर्ती में अहम भूमिका निभाई थी। फारूक भट ने ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर) नेटवर्क को सक्रिय किया था। इसको देखते हुए A++ कैटेगरी का आतंकी माना गया था। उसके खिलाफ रेप और छेड़छाड़ सहित करीब 37 मुकदमे दर्ज थे। फारूक भट पर 25 लाख रुपए का ईनाम भी रखा गया था।

फारूक भट साल 2015 में हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था। साल 2020 में श्रीनगर में एक मुठभेड़ में हिजबुल के ऑपरेशन कमांडर सैफुल्लाह को ढेर किए जाने के बाद उसे समूह की ऑपरेशनल कमान दी गई थी। साल 2020 में नवीद बाबू की गिरफ्तारी के बाद उसे हिजबुल का कमांडर इन चीफ नियुक्त किया गया था। इसकी मौत सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता है।

वहीं, मारा गया एक अन्य आतंकी मुश्ताक अहमद इत्तू साल 2020 से आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय था। उसके खिलाफ 7 केस दर्ज थे। फारूक ने ही मुश्ताक को हिजबुल में भर्ती कराया था। वहीं, इरफान याकूब नाम का आतंकी साल 2022 से, आदिल हजाम साल 2023 से और यासिर जावेद साल 2019 से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय था। यह सभी कुलगाम के रहने वाले थे।

ये शोपियाँ और कुलगाम जिले में हिजबुल मुजाहिदीन के मॉड्यूल को संचालित कर रहे थे। ये सभी आतंकी लंबे समय से सुरक्षा बलों के रडार पर थे। कमांडर 2 सेक्टर आरआर ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान ने बताया कि सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस पिछले दो महीने से इनके पीछे लगी थी। इसी दौरान सेना को इनपुट मिली कि कुलगाम जिले के बेहिबाग पीएस के कद्देर गाँव में कुछ आतंकी छिपे हुए हैं।

सेना ने सीआरपीएफ और पुलिस के साथ मिलकर सर्च ऑपरेशन चलाया। सुरक्षा बलों को देखते ही आतंकियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद लगभग 6 घंटे के ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने 5 आतंकियों को मार गिराया। मुठभेड़ में दो जवान भी घायल हुए थे। आतंकियों के पास से 5 AK-47 राइफल, 20 एके मैगज़ीन, 2 ग्रेनेड के अलावा अन्य हथियार एवं गोला-बारूद बरामद हुए हैं।

बीवी ने दिया पहले तलाक में 500 करोड़ रुपए देने का तर्क, सुप्रीम कोर्ट ने ₹12 करोड़ एकमुश्त देने का दिया आदेश, साथ ही कहा- ‘पति अनिश्चित काल तक पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 दिसंबर 2024) को भरण-पोषण और गुजारा भत्ता को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि कुछ कानून महिला कल्याण के लिए बनाए गए हैं, ना कि उनके पति एवं ससुराल के लोगों को दंडित करने के लिए। कोर्ट ने कहा कि इन कानूनों को पतियों के उत्पीड़न करने, धमकी देने या उनसे जबरन वसूली के साधन के रूप में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि विवाह एक पवित्र प्रथा है, जो कि परिवार की नींव है। ये कोई व्यवसायिक समझौता नहीं होता है। कोर्ट ने पाया कि वैवाहिक मामलों से संबंधित अधिकांश मामलों में दुष्कर्म, आपराधिक धमकी और विवाहित महिला से क्रूरता करने संबंधित कई आरोप लगाए जाते हैं। कोर्ट ने इस तरह की कठोर धाराएँ लगाने के लिए फटकार भी लगाई।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और पंकज मिथल की पीठ ने इस मामले में सख्त रूख अपनाया। पीठ ने कहा कि ऐसी माँगें अक्सर तभी की जाती हैं, जब जीवनसाथी आर्थिक रूप से संपन्न होता है। जब जीवनसाथी की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है या ऐसी माँग करने वाले व्यक्ति की तुलना में कमजोर हो जाती है तो ऐसी माँगें कम होती हैं।

न्यायालय ने कहा, “हमें पार्टियों द्वारा दूसरे पक्ष से संपत्ति के बराबरी के रूप में भरण-पोषण या गुजारा भत्ता मांगने की प्रवृत्ति पर गंभीर आपत्ति है। अक्सर देखा जाता है कि भरण-पोषण या गुजारा भत्ता के लिए अपने आवेदन में पार्टियाँ अपने जीवनसाथी की संपत्ति, स्थिति और आय को उजागर करती हैं और फिर एक ऐसी राशि माँगती हैं जो उनके जीवनसाथी की संपत्ति के बराबर हो।”

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आगे कहा, “हालाँकि, इस प्रथा में एक असंगति है, क्योंकि बराबरी की माँग केवल उन मामलों में की जाती है, जहाँ जीवनसाथी के पास साधन हैं या वह खुद के लिए बहुत अच्छा कर रहा है। हालाँकि, ऐसी माँगें उन मामलों में स्पष्ट रूप से अनुपस्थित होती हैं, जहाँ अलगाव के समय से जीवनसाथी की संपत्ति में कमी आई है।”

शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा कि गुजारा भत्ता पूर्व पति-पत्नी की वित्तीय स्थिति को समान बनाने के लिए नहीं है। यह आश्रित महिला को उचित जीवन स्तर प्रदान करने के लिए है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पूर्व पति अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति के आधार पर पूर्व पत्नी को अनिश्चित काल तक सहायता देने के लिए बाध्य नहीं हो सकता। हिंदू विवाह एक पवित्र संस्था है, न कि एक ‘व्यावसायिक उद्यम’।

पीठ ने कहा, “महिलाओं को इस बात को लेकर सावधान रहने की जरूरत है कि उनके हाथों में कानून के ये सख्त प्रावधान उनकी भलाई के लिए हैं, न कि उनके पतियों को दंडित करने या उनसे जबरन वसूली करने का साधन हैं। हमें आश्चर्य है कि यदि पति के अलग होने के बाद कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के कारण वह कंगाल हो गया है तो क्या पत्नी उसके साथ संपत्ति के बराबर होने की माँग करेगी?”

दरअसल, अदालत एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें महिला अपने पति द्वारा शुरू किए गए तलाक के मामले को लॉजिस्टिक कारणों से भोपाल से पुणे स्थानांतरित करने की माँग की थी। इस जोड़े का विवाह साल 2021 में हुआ था। पति अमेरिका में IT कंसल्टेंट था। उसने अपनी पत्नी से तलाक की माँग की थी, लेकिन पत्नी ने तलाक का विरोध किया था।

पत्नी ने यह भी दावा किया था कि अलग हुए पति की कुल संपत्ति 5,000 करोड़ रुपए है। इसमें अमेरिका और भारत में कई व्यवसाय और संपत्तियाँ शामिल हैं। पत्नी ने यह बताया था कि उसका अलग रह रहा पति अपनी पहली पत्नी को उससे अलग होने के बाद वर्जीनिया स्थित घर को छोड़कर कम से कम 500 करोड़ रुपए का भुगतान किया था।

हालाँकि, कोर्ट ने अलग रह रहे पति को आदेश दिया कि वह अलग रह रही अपनी पत्नी को अंतिम एवं एकमुश्त स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में 12 करोड़ रुपए दे। यह राशि एक महीने के भीतर देने के लिए कहा। इसके साथ ही पति को तलाक भी दे दी। सर्वोच्च न्यायालय ने अलग रह रहे पति के खिलाफ पत्नी द्वारा दायर आपराधिक मामले को भी रद्द कर दिया।

मैं कोई तिरंगा-विरंगा नहीं… राजदीप सरदेसाई ने इस बार किया राष्ट्रीय ध्वज का अपमान: वीडियो देख जनता भड़की, पूछा- क्या ऐसे होते हैं वरिष्ठ पत्रकार

इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई अपने मुँह से अनाप-शनाप निकालने की वजह से अक्सर सोशल मीडिया पर ट्रोल होते हैं। इस बार भी वह इसी कारण से गाली खा रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो में तिरंगे को लेकर अपने मन की बात रखी और वही बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

देख सकते हैं कि ‘द लल्लनटॉप’ के सौरभ द्विवेदी के साथ उनकी बातचीत क्रिकेट मैच देखने पर चल रही थी। इसी दौरान सौरभ बताने लगे कि वो स्टेडियम में बैठकर मैच देखने को लेकर इतने उत्साहित हैं कि उन्होंने निर्णय लिया है कि वो कलाई पर तिरंगा भी बनवाएँगे। इसके बाद उन्होंने कैमरे पर दिखाया कि वो अपने डेस्क पर भी हमेशा तिरंगा रखते हैं जिसे भारतीय सेना के बलिदानियों की विधवा (वार विडोज) द्वारा बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि ये तिरंगा उनके दोस्तों ने उन्हें दिया था इसलिए वो हमेशा मेज पर रहता है।

इसे सुन राजदीप सरदेसाई बड़ी हैरानी के साथ आँख निकालकर पूछते हैं- तो इसे आप लेकर जा रहे हो? इस पर सौरभ कहते हैं कि वो बस बात बता रहे हैं क्योंकि उन्हें याद आ गया है।तुरंत बाद राजदीप सरदेसाई कहना शुरू करते हैं, “मैं कोई तिरंगा-विरंगा नहीं रखता। तिरंगा मेरे दिल में है।”

सौरभ उनकी बात सुन नाराज होते हैं और उन्हें उनकी इस भाषा के लिए टोंकते हैं। वह समझाते हैं, :आप हमेशा कहते हो कि हिंदी आपकी पहली भाषा नहीं और उसके बाद आप ऐसी बात कहते हो। तिरंगा-विरंगा मत कहो।”

इस पर राजदीप बात को संभालते हुए कहते हैं, “मैं तिरंगे को अपने दिल में रखता हूँ और मैं इंडिया की शर्ट पहनूँगा लेकिन तिरंगा हाथ पर नहीं बनवाऊँगा।” इस पर सौरभ चुटकी लेते हुए कहते हैं- “अब आपकी ये सब करने की उम्र भी नहीं है।”

राजदीप सरदेसाई की यही क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग इसे देखने के बाद राजदीप पर भड़क रहे हैं। कहा जा रहा है कि जिसके मन में तिरंगे के प्रति सम्मान नहीं होता वही इस तरह की बातें करता है।

कुछ यूजर्स इसे सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बता रहे हैं। राजदीप के बड़बोलेपन पर कार्रवाई करने की बातें हो रही हैं।

सवाल खड़ा किया जा रहा है कि जो व्यक्ति खुद को वरिष्ठ पत्रकार कहता है उसे ये भी नहीं पता क्या कि वो शब्द कैसे इस्तेमाल कर रहा है।

किसी का राजदीप सरदेसाई की वीडियो देख कहना है कि ये लोग कॉन्ग्रेसी पत्रकार हैं भारत का अपमान तो करेंगे ही।

तिरछी आँखें, चपटी नाक, लंबी खोपड़ी… इस्लाम के आने से पहले कुवैत में क्या था? खुदाई में मिली मिट्टी की 7000 साल पुरानी मूर्ति खोलेगी राज, आज के एलियन जैसी शक्ल

इस्लामी मुल्क कुवैत के पुरातत्वविदों ने 7,000 साल पुरानी ऐसी एक आकृति की खोज की है, जो आजकल के एलियन के जैसे दिखता है। यह आकृति मिट्टी की बनी है। यह अरब प्रायद्वीप में पाया जाने वाला अपने तरह की पहली मूर्ति है। इस मूर्ति की छोटे-से सिर को बारीकी से तराशा गया है। वहीं, इसकी आँखें तिरछी, चपटी नाक और लम्बी खोपड़ी है।

पुरातत्वविदों का यह भी कहना है कि मूर्ति बनाने की यह शैली मेसोपोटामिया सभ्यता में आम थी। उनका कहना है कि छिपकली के सिर वाली या ओफिडियन के नाम से जानी जाने वाली ऐसी मूर्तियों का मेसोपोटामिया की कब्रों और पवित्र स्थानों में देखी जाने वाली रस्मों से ऐतिहासिक संबंध है। मोसोपोटामिया की सभ्यता आजकल के इराक, कुवैत, सीरिया, दक्षिण-पूर्वी तुर्की आदि क्षेत्रों तक फैला था।

यह मूर्ति इस साल बहरा-1 में खुदाई के दौरान पाया गया है। बहरा-1 उत्तरी कुवैत में एक प्रागैतिहासिक स्थल है। यहाँ पर कुवैती-पोलिश टीम साल 2009 से खुदाई कर रही है। बहरा-1 अरब प्रायद्वीप की सबसे पुरानी बस्तियों में से एक थी, जहां लगभग 5500 से 4900 ईसा पूर्व तक लोग रहा करते थे। इस दौरान बहरा-1 में उबैद लोगों ने बसना शुरू किया।

उबैद लोगों की संस्कृति मेसोपोटामिया में उत्पन्न हुई थी और वे अपने मिट्टी के विशेष बर्तनों के लिए जाने जाते थे। इनमें एलियन जैसी मूर्तियाँ भी शामिल थीं। बहरा-1 में अभियान दल की नेता एग्निएस्का शिमजैक ने कहा कि उबैद छठी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में अरब की खाड़ी में नवपाषाण या नए पाषाण युग के समाजों के साथ घुलमिल गए थे। इसके बाद यहाँ इस तरह के बर्तन या मूर्तियाँ बनाई जाने लगीं।

इस स्थल पर खोज की जिम्मेवारी सँभाल रहीं एग्निएस्का शिमजैक का कहना है कि इन लोगों और उनकी संस्कृतियों के टकराव के परिणामस्वरूप ‘सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रागैतिहासिक क्रॉस रोड’ बन गया। इस आदान-प्रदान का एक हिस्सा कला भी थी। यह मूर्ति मेसोपोटामिया की मिट्टी से बनी है, न कि स्थानीय अरब की खाड़ी में पाए जाने वाले ‘मोटे लाल सिरेमिक’ की तरह है।

खुदाई टीम ने इसका अर्थ ये निकाला कि उबैद लोग इस क्षेत्र में अपनी घरेलू परंपराओं को सक्रिय रूप से आयात कर रहे थे। बेल्जियम के गेन्ट विश्वविद्यालय में निकट पूर्वी पुरातत्ववेत्ता ऑरेली डेम्स ने इसे बेहद महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि इससे प्रागैतिहासिक खाड़ी क्षेत्र और मेसोपोटामिया के बीच संबंधों की जानकारी मिलेगी।

डेम्स ने इन मूर्तियों के असमान्य चेहरे पर शोध कर रही हैं। विभिन्न सिद्धांतों में इन मूर्तियों की असामान्य चेहरे की विशेषताओं को समझाने का प्रयास किया गया है। एक सिद्धांत में यह भी कहा गया है कि इन मूर्तियों में सिरों की कृत्रिम विकृति दिखाई गई है। इसे ‘सिर को आकार देने’ के रूप में जाना जाता है। इसे उबैद समाज में अपनाई जाने वाली एक प्रथा है।

मेसोपोटामिया में खुदाई में मिले कंकाल अवशेषों में इसका प्रमाण भी मिले हैं। शिशु की लचीली खोपड़ी के चारों ओर पट्टियाँ लपेटकर उबैद लोग एक सिर को एक विशेष आकार देने की कोशिश करते थे, जो कि उनकी पहचान से जुड़े प्रतीक के रूप में किया जा सकता है। जैसे कि वर्ग, संस्कृति या उनके बस्ती के भीतर किसी विशेष समूह से संबंधित होना।

माना जाता है कि उबैद समुदाय ने आठवीं और सातवीं सहस्राब्दी ईसा पूर्व में वर्तमान ईरान में इस प्रथा को अपनाया होगा और पाँचवीं सहस्राब्दी ईसा पूर्व के दौरान उबैद समाज में सिर को आकार देने का चलन अपने चरम पर रहा होगा। खैर जो भी हो, इस मूर्ति का अध्ययन जारी है। वहीं, इस स्थल की खुदाई जारी है और इससे जुड़े अन्य सामानों के मिलने की उम्मीद है।

संसद की धक्का-मुक्की थाने तक पहुँची, जानिए राहुल गाँधी के खिलाफ किन धाराओं में शिकायत; दोषी होने पर कितनी हो सकती है सजा: BJP के 2 सांसद अस्पताल में, महिला MP से भी बदसलूकी

संसद के बाहर गुरुवार (19 दिसंबर 2024) को हुई धक्का-मुक्की का मामला अब थाने पहुँच गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने राहुल गाँधी द्वारा की गई बदसलूकी के खिलाफ पार्लियमेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर शिकायत दी है।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस संबंध में खुद बताया कि उन्होंने राहुल गाँधी के खिलाफ मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 109, 115, 117, 125, 131 और 351 के तहत दर्ज कराया।

धाराओं में अधिकतम सजा

  • इनमें से धारा 109 तो हत्या के प्रयास की धारा है। ये धारा किसी व्यक्ति पर तब लगाई जाती है जब वो किसी अन्य व्यक्ति की हत्या करने का प्रयास करता है। अगर घटना में दूसरे व्यक्ति को चोट नहीं आती तो दोषी को 10 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है और अगर चोट आई है तो दोषी को आजीवन कारावास की सजा भी हो सकती है।
  • इसी प्रकार धारा 115 स्वेच्छा से किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने से जुड़ी है। अगर कोई व्यक्ति इस धारा के तहत दोषी पाया जाता है तो बीएनएस की धारा के तहत उसे 1 साल की सजा हो सकती है। साथ ही 15000 रुपए जुर्माना भी लग सकता है।
  • इसी प्रकार धारा 117 भी स्वेच्छा से गभीर चोट पहुँचाने से संबंधित है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर और स्वेच्छा (यानि अपनी खुद की इच्छा) से किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी चोट (Injury) पहुंचाता है जिससे गंभीर शारीरिक नुकसान होता है, तो यह अपराध धारा 117 के अंतर्गत आता है। इस अपराध की सजा 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक होती है।
  • धारा 125 और 351, आपराधिक धमकी से संबंधित है। यब तब लागू होती है जब कोई किसी अन्य व्यक्ति को धमकी देकर उसे डराता है। इस धारा के तहत अधिकतम सजा 2 साल की और साथ में जुर्माना हो सकता है।
  • इसी प्रकार धारा 131 तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ विद्रोह करने का प्रयास करता है। इस धारा की अधिकतम सजा आजीवन कारावास हो सकती है।

कॉन्ग्रेस ने भी दी शिकायत

बता दें कि संसद में धक्का-मुक्की के कारण भाजपा के दो सांसदों के घायल होने से और महिला सांसद से अभद्रता मामले में भाजपा पार्टी ने राहुल गाँधी के थाने में शिकायत दी। उनकी इस शिकायत के बाद कॉन्ग्रेस ने भी बीजेपी के खिलाफ काउंटर शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत को लेकर दिग्विजय सिंह और प्रमोद तिवारी ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जो चोट लगी है उसे लेकर ही कॉन्ग्रेस ने ये शिकायत दी है, वो चाहते हैं कि ये केस एससी-एसटी एक्ट में दर्ज हो क्योंकि खड़गे एक दलित हैं।

पहले पंखा आएगा, फिर बिजली आएगी… ऊर्जा क्षेत्र को अडानी ग्रुप ने नए कैंपेन से दी रफ्तार, दिखाया ‘ग्रीन एनर्जी’ से कैसे बदल रहा ग्रामीण भारत

भारत के प्रमुख व्यावसायिक कंपनी अडानी समूह ने 19 दिसंबर 2024 को शुरू किए गए अपने कैंपेन ‘हम करके दिखाते हैं’ का नया वर्जन लॉन्च किया। यह कैंपेन लाखों भारतीयों के जीवन में अडानी समूह की परियोजनाओं द्वारा लाए गए सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। इसके साथ ही यह स्वच्छ ऊर्जा के प्रति अडानी समूह की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।

अडानी समूह की ग्रीन एनर्जी के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करने वाली शॉर्ट फिल्म ‘पहले पंखा फिर बिजली’ एक बेहद भावनात्मक फिल्म है। इस विज्ञापन को ऑगिल्वी इंडिया द्वारा बनाया गया है। इसमें एक छोटे लड़के की कहानी बताई गई है, जो दिल को छू लेती है। यह छोटा बच्चा तमाम बाधाओं और उपहास के बावजूद यह मानता है कि एक पंखा उसके गाँव में बिजली ला सकता है।

एक दिन उस बच्चे का अटूट विश्वास उस समय हकीकत में बदल जाता है, जब वह देखता है कि अडानी के एक पवन चक्की जनरेटर को अपने गाँव में स्वच्छ ऊर्जा लाते हुए देखता है। इस शॉर्ट फिल्म की कहानी न केवल मानवीय विश्वास की शक्ति को उजागर करती है, बल्कि सभी के लिए एक उज्जवल भविष्य के निर्माण के लिए अडानी समूह की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

इसको लेकर अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया है। अपने पोस्ट में गौतम अडानी ने लिखा, “हमारे कामों में हमारे द्वारा किए गए वादे निहित हैं। वादे सिर्फ़ बुनियादी ढाँचे के बारे में नहीं हैं, बल्कि उम्मीद, प्रगति और एक उज्ज्वल कल के बारे में हैं। बदलाव की बयार यहाँ है। हम करके दिखाते हैं! #HKKDH #PehlePankhaPhirBijli

यह विज्ञापन फिल्म तो बस शुरुआत है। दरअसल, अडानी समूह सभी को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने की आकांक्षा रखता है। अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के निदेशक प्रणव अडानी ने कहा, “यह कैंपेन वास्तव में अडानी समूह की मूल भावना को दर्शाता है। हालाँकि हमें आकार, गति और पैमाने के लिए पहचाना जाता है, लेकिन इस पहल की खासियत इसका दिलों को छूने वाले एहसास हैं।”

प्रणव अडानी ने आगे कहा, “यह दिखाता है कि कैसे हमारा इन्फ्रास्ट्रक्चर लाखों भारतीयों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम बनता है। यह अभियान हमारे बिजनेस के साथ उसकी मानवीय कहानियों को सामने लाकर गहरे भावनात्मक जुड़ाव बनाने का प्रयास करता है। हमारा लक्ष्य लाखों भारतीयों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।”

ऑगिल्वी इंडिया के चीफ एडवाइजर पीयूष पांडे ने कहा, “यह फिल्म उपभोक्ताओं को मिलने वाले एक महत्वपूर्ण लाभ की एक भावुक कहानी को दर्शाती है। यह अदाणी रिन्यूएबल्स की तकनीकी विशेषज्ञता का दिखावा नहीं है, बल्कि अदाणी के ‘ह्यूमन-फर्स्ट’ दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है।”

BJP नेता ने महाकाल के किए दर्शन, कॉन्ग्रेस की पत्रकार ने पूछा- स्वर्ण मंदिर कब जाओगेः हिंदू घृणा पर मृणाल पांडे को नेटिजन्स ने घेरा, कहा- मंदिर और गुरुद्वारा दोनों सनातन का हिस्सा

कॉन्ग्रेसी पत्रकार मृणाल पांडे ने हाल में सोशल मीडिया पर अपनी हिंदू घृणा का प्रमाण एक बार फिर दिया। उन्होंने भाजपा के सिख नेता तजिंदर सिंह बग्गा की हिंदू मंदिर में फोटो देख अपनी घृणा दिखाई और सनातन धर्म के साथ सिख नेता का भी मजाक उड़ाया।

मृणाल पांडे का ट्वीट

दरअसल, तजिंदर बग्गा ने महाकाल बाबा के दर्शन की तस्वीर साझा की थी। उन्होंने कैप्शन में लिखा था कि उन्होंने श्रुतिका अर्जुन के लिए महाकाल मंदिर में प्रार्थना की। इसी फोटो पर मृणाल पांडे ने कमेंट करते हुए कहा, “स्वर्ण मंदिर में भी मत्था टेका काके , कि सनातनै से काम चला रहे हो?”

अपने ट्वीट के जरिए मृणाल पांडे ने सिख और हिंदू धर्म के बीच साफ तौर पर फर्क दिखाने की कोशिश की। इसके बाद कई लोगों ने मृणाल पांडे को लताड़ लगाई। किसी ने कहा, ” जो महिला अपनी बेटी का निकाह एक मुस्लिम से किया है वह इस बात पर चिंतित है कि एक सिख सनातनी क्यों है। गजब दोगलापन है।”

एक यूजर ने कहा, “मंदिर और गुरुद्वारा दोनों सनातन का ही हिस्सा है। हर सिख गुरु शिव और शक्ति को पूजता था। तुम जैसे फर्जी इतिहासकार 10 जनपथ वालों के निर्देश पर हिंदू धर्म और सनातन को कमजोर करने के लिए झूठ फैलाते हो। तुमको क्या दिक्कत है अगर कोई सिख मंदिर जाए तो?

बता दें कि कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ की पूर्व संपादकीय सलाहकार पांडे इस तरह के हास्यास्पद और भड़काऊ बयान देने के लिए बदनाम हैं। एक दफा उन्होंने कफील खान की मथुरा जेल से जमानत वाली खबर पर उनकी तुलना श्रीकृष्ण से कर दी थी

यह सनातनी आस्था का ही महाकुंभ नहीं, अर्थव्यवस्था को भी देता है गतिः आयोजन पर जितना खर्च करते थे अंग्रेज, उससे अधिक आता था राजस्व… इस बार ‘वोकल फॉर लोकल’ को भी बढ़ावा

इस बार प्रयागराज में आयोजित होने वाला महाकुंभ न सिर्फ परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण होगा, बल्कि अपने आप में हर तरह से अद्वितीय भी होगा। महाकुंभ प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक धर्म, संस्कृति और परंपरा के साथ-साथ समाजिकता और व्यवसाय का एक बड़ा मंच रहा है। महाकुंभ में दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं की वजह से राज्य सरकार को आर्थिक लाभ मिलेगा।

ब्रिटिश सरकार भी कुंभ के सफल आयोजन के लिए हमेशा प्रयासरत रहती थी। अंग्रेजों के लिए यह भले धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ना हो, लेकिन उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था। सन 1906 तक महाकुंभ के आयोजन में ब्रिटिश भारत की सरकार जितना खर्च करती थी, उससे अधिक इस मेले से उसे राजस्व मिल जाता था।

इसको देखते हुए प्रयागराज महाकुंभ 2025 की तैयारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साल 2022 में ही शुरू कर दी थी। उनकी अध्यक्षता में साल 2022 में ही महाकुंभ 2025 को लेकर पहली बैठक आयोजित की गई थी। उस दौरान सीएम योगी ने प्रयागराज के कई दौरे भी किए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस आयोजन को लेकर बेहद दिलचस्पी दिखाई।

यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ आयोजन की तैयारियों का खुद जायजा लेने के लिए प्रयागराज पहुँचे। प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी ने महाकुंभ आयोजन से जुड़ी कई परियोजनाओं का शिलान्यास/लोकार्पण/अनावरण/उद्घाटन भी किया। इस तरह इस आयोजन को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए पीएम मोदी और सीएम योगी जीन-जान से लगे हैं।

महाकुंभ नगरी के लिए विशेष परियोजनाएँ

इस बार के महाकुंभ में 45 करोड़ लोगों के पहुँचने की आशा है। इससे स्थानीय रोजगार, व्यापार, क्षेत्रीय हस्तशिल्प एवं कला के साथ-साथ पर्यटन एवं समग्र विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। कुंभ के कारण सरकार क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे को हर तरह से विकसित करती है, जिससे अंतत: नागरिकों को लाभ मिलता है और व्यापार को सुगम बनाता है।

महाकुंभ के लिए राज्य की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 500 से अधिक परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 6,382 करोड़ रुपए है। इनमें सड़कों का चौड़ीकरण, पेयजल की पाइपलाइन बिछाना, नई बसें चलाना आदि के साथ-साथ अन्य तरह की बुनियादी ढाँचे का विकास शामिल है।

इस महाकुंभ नगरी को बसाने के लिए 50 हजार से अधिक श्रमिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। जहाँ जरूरी हुआ, वहाँ पुल बनाए गए। जहाँ पुल बनाना संभव नहीं था, वहाँ स्टील के फोर लेन अस्थायी ब्रिज बनाए गए। जहाँ जरूरी हुआ, वहाँ रेलवे पुल तक बनाए गए। इतना ही नहीं, प्रयागराज पहुँचने वाली सारी सड़कों का चौड़ीकरण एवं उनका सौंदर्यीकरण किया गया।

प्रयागराज को दिया आकर्षक लुक

प्रयागराज में आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए शहर को विशेष रूप देने की कोशिश की गई है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने शहर दीवारों और प्रमुख चौराहों को भव्य रूप देने के लिए अलग से 60 करोड़ रुपए का बजट रखा है। इसमें शहर के प्रमुख दीवारों पर स्ट्रीट आर्ट, चौराहों पर म्यूरल्स (भित्ति चित्र), विभिन्न शैली की मूर्तियाँ (स्कल्पचर), लैंड स्केपिंग, ट्रैफिक साइन, ग्रीन बेल्ट और हॉर्टिकल्चर आदि का काम शामिल हैं।

शहर की दिवारों धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के विभिन्न प्रतीकों को अंकित किया जाएगा। इन पर इस तरह के चित्र बनाएँगे, जैसे वह उनसे संवाद कर रही हो। इस प्राचीन नगरी के बारे में उन्हें बता रही हो। उनका आधुनिकता के बीच धार्मिकता एवं सांस्कृतिक संगम में स्वागत कर रही हों। इस तरह शहर के लगभग 10 लाख वर्गफीट में इनका चित्रण होगा।

स्थानीय लोगों को रोजगार

एक अनुमान के मुताबिक, इस बार के महाकुंभ से 45,000 परिवारों को रोजगार मिलेगा। महाकुंभ में 25,000 श्रमिकों को लगाया गया है। महाकुंभ के लिए कौशल विकास के तहत 45,000 हजार परिवारों को ट्रेनिंग दी गई है। राज्य सरकार ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए शहर में 2,000 से अधिक पेइंग गेस्ट फैसिलिटी की सुविधा विकसित की है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2022 में पर्यटन नीति बनाई थी, जिसमें 10 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। ये प्रशिक्षित सेवा प्रदाता इस महाकुंभ में अपनी बड़ी भूमिका निभाएँगे और रोजगार पाएँगे। इनमें पर्यावरण के अनुकूल कुल्हड़, पत्तल-दोने आदि जैसे स्वरोजगार की महती भूमिका सामने आएगी। इससे लघु उद्योगों को बड़े पैमाने पर फायदा होगा।

यूपी का पर्यटन विभाग टूर गाइड, ड्राइवर, नाविक, स्ट्रीट वेंडर सहित कई प्रकार के सेवा प्रदाताओं को हर तरह का प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है। यूपी पर्यटन विभाग ने पर्यटकों को लुभाने एवं नाविकों को आय बढ़ाने के लिए 2,000 से अधिक नावकों को प्रशिक्षित किया है। इसमें श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार-कुशलता से लेकर उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने तक की बात शामिल है।

इतना ही नहीं, कुंभ के दौरान भोजन की पवित्रता को बनाए रखने के लिए स्थानीय महिलाएँ मिट्टी के चूल्हे भी बेच रही हैं। इस तरह महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हर सेवा प्रदाता एवं लघु उद्योगों से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग दी गई है, ताकि इस महाकुंभ में आने वाले लोगों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव के साथ-साथ मेहमान नवाजी का अपूर्व आनंद प्राप्त हो।

महाकुंभ के ‘टेंट सिटी’ में राजसी ठाट-बाट

महाकुंभ में 2,000 से अधिक पेइंग गेस्ट के अलावा, राज्य सरकार ने कुंभ क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए 2,000 से अधिक स्वीस कॉटेज शैली में टेंट स्थापित किया है। इसके लिए लग्जरी टेंट सिटी स्थापित की जा रही है। इन्हें उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (UPSTDC) बना रहा है। UPSTDC इस सिटी की स्थापना 6 साझेदारों के साथ मिलकर कर रहा है।

टेंट सिटी में कई तरह के ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं। इन ब्लॉक्स में आगमन, कुंभ कैंप इंडिया, ऋषिकुल कुंभ कॉटेज, कुंभ विलेज, कुंभ कैनवास, कुंभ एरा आदि प्रमुख हैं। इन टेंट्स में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के तहत फाइव स्टार होटल वाली सुविधाएँ मिलेंगी। यह सुपर डिलक्स, टेंट विला, महाराजा, स्वीस कॉटेज और डॉर्मेटरी फॉर्मेट में उपलब्ध होगा।

वोकल फॉर लोकल

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ-2025 के जरिए यूपी के स्थानीय उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने की रूप-रेखा बनाई है। सरकार ने इसके लिए पीएम मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपना मूल मंत्र बनाया है। इस दौरान ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ यानी हर जिले के एक बड़े उत्पाद को बढ़ावा दिया जाएगा।

बनारस की साड़ी, मुरादाबाद के पीतल का सामान, गोरखपुर का टेराकोटा, बाँदा के शजर पत्थर से बने उत्पाद को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रसिद्धि एवं बढ़ावा मिलने का अनुमान है। इसके कारण इन जिलों के संबंधित उत्पादों का कारोबार बढ़ने की उम्मीद भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोकल फॉर लोकल को बड़े पैमाने पर प्रमोट किया था और यूपी सरकार ने इसमें नया मानक स्थापित किया है।

75 देशों सहित 45 करोड़ आएँगे पर्यटक

प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 में दुनिया भर के 75 से अधिक देशों से 45 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद है। इनमें श्रद्धालु से लेकर पत्रकार एवं शोधार्थी तक शामिल हैं। यूरोप से ही लगभग 4 लाख पर्यटक सिर्फ महाकुंभ को देखने के लिए आ सकते हैं। यूरोप के कई देशों के टूर ऑपरेटरों ने यूपी पर्यटन विभाग से संपर्क किया है।

संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत आदि जैसे मुस्लिम देशों के पर्यटक भी महाकुंभ देखने के लिए प्रयागराज में होटल बुक करवा रहे हैं। इस तरह विदेशी पर्यटकों के आने से भारत को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। इससे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ब्रांड यूपी की दुनिया भर में पहचान भी मिलेगी।

बताते चलें कि साल 2019 के महाकुंभ में 24 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया था। इनमें 25 लाख विदेशी पर्यटक थे। इस बार यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। यह देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में हुए अभूतपूर्व सुधार के स्वागत एवं विश्वास के रूप में भी देखा जा रहा है।

अगर हम कुल पर्यटकों की बात करें तो पिछले साल यानी 2023 में कुल 48 करोड़ पर्यटक उत्तर प्रदेश आए। इनमें घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के पर्यटक शामिल हैं। यह आँकड़ा साल 2022 की अपेक्षा 50 प्रतिशत अधिक था। उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2028 में यह आँकड़ा 85 करोड़ पहुँच जाएगी। इस लिहाज से अगले साल के महाकुंभ की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रयागराज से अन्य धार्मिक स्थलों तक चलेंगी विशेष ट्रेनें

महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु विंध्याचल, अयोध्या, वाराणसी, वृंदावन, मथुरा जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल भी जा सकते हैं। महाकुंभ यात्रा के दौरान ही तीर्थयात्री इन तीर्थों की भी यात्रा कर सकें, इसके लिए राज्य सरकार ने धार्मिक कॉरीडोर बनाया है। इनमें वाराणसी का जलमार्ग से लेकर विशेष ट्रेनें चलाने तक की विशेष व्यवस्था की गई है।

प्रयागराज महाकुंभ को वाराणसी से सीधे जोड़ने के लिए रेलवे ने वाराणसी कैंट से प्रयागराज के बीच 34 ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। ऐसी ही विशेष ट्रेन प्रयागराज से अयोध्या, प्रयागराज से विंध्याचल और प्रयागराज से मथुरा-वृंदावन के बीच चलाने का निर्णय लिया गया है।

इन शहरों के लिए ‘फास्ट रिंग मेमू’ सेवा शुरू की गई है। यह फास्ट रिंग मेमू सेवा प्रयागराज से अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज आएगी। इसी तरह से दूसरी ट्रेन प्रयागराज से वाराणसी, फिर अयोध्या और फिर प्रयागराज आएगी। मुख्य स्नान पर्वों को छोड़कर यह सेवा सभी दिन शुरू रहेगी।