संसद के बाहर प्रदर्शन के दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की भाजपा नेताओं से धक्का-मुक्की में आज (19 दिसंबर 2024) दो भाजपा नेता चोटिल हो गए। इनमें एक 70 वर्षीय प्रताप सारंगी हैं और दूसरे 56 साल के मुकेश राजपूत हैं। दोनों सांसदों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। वहाँ डॉक्टरों ने उनकी स्थिति देखते हुए उन्हें आईसीयू में शिफ्त कर दिया।
अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार ओडिशा से आने वाले बीजेपी एमपी प्रताप सारंगी को सिर में गंभीर चोट आई है। उनके सिर पर गहरा घाव था और अस्पताल पहुँचने तक उनका काफी खून बह चुका था। डॉक्टरों ने उनकी चोट पर टांके लगाए हैं। मुकेश राजपूत भी इस घटना में घायल हुए हैं और उनकी स्थिति भी गंभीर बताई जा रही है।
इस घटना की बाबत केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया, “घटना में दो नेता घायल हुए हैं। 4-5 अन्य नेताओं ने भी चोट आने की शिकायत की है… मकर द्वार पर कॉन्ग्रेस नेता रोज प्रदर्शन कर रहे थे। कभी प्ले कार्ड लेकर आ जाते थे कभी कुछ। आज पहली बार एनडीए के साथियों ने प्रदर्शन किया। उनको (विपक्षियों को) लगा ये तो उनकी जागीर है। लेकिन हर सांसद को प्रदर्शन का अधिकार है। हमने किया तो वो धक्का-मुक्की करते हुए आए। भीड़ को चीरते हुए आए जबकि आने-जाने का पूरा रास्ता था।”
#WATCH | Union Law Minister Arjun Ram Meghwal says, "Two leaders are injured. 4-5 other MPs have complained about this…All the Ps have the right to protest. He (Rahul Gandhi) did physical violence and he did not even go to see the condition of Sarangi ji…They (Congress) have… pic.twitter.com/AhhhqOQT5B
अर्जुन मेघवाल ने कहा, “राहुल गाँधी LOP भी हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए। वह दोबारा सारंगी जी को देखने भी नहीं गए। उन्होंने हमेशा बीआर अंबेडकर के साथ अन्याय किया है। उन्होंने हमेशा उनका अपमान किया। हम अस्पताल से रिपोर्ट आ जाने के बाद एक्शन लेंगे।”
#WATCH | RML MS Dr Ajay Shukla says, "We are trying to stabilise both (Pratap Sarangi and Mukesh Rajput) of them, evaluation is being done. Tests will be done. Symptomatic treatment has begun…Since both of them suffered head injuries, they are admitted to the ICU. Pratap… pic.twitter.com/BmTgdOHbBZ
बता दें कि संसद में हुई इस घटना को लेकर जहाँ राहुल गाँधी ने अपने जोर दिखाने की बात को कबूला है तो वहीं सांसदों को लगी चोट मामले आरएमएल के एमएस डॉ अजय शुक्ला का भी बयान आया है। उन्होंने बताया है कि वो लोग जाँच के बाद दोनों नेताओं को स्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। शुरुआती जाँच हो गई है। दोनों के सिर पर चोटें आई हैं। उन्हें आईसीयू में एडमिट किया गया है। प्रताप सारंगी के सिर से बहुत खून बह गया है और उनके सिर पर गहरा कट भी है। उन्हें टाँके लगा दिए गए हैं। वहीं मुकेश राजपूत अचेत अवस्था में थे। अभी उन्हें होश आ गया है, लेकिन बेचैनी है। उनका बीपी बहुत बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के घर पर बिजली विभाग ने गुरुवार (19 दिसंबर 2024) की सुबह तलाशी ली। इस दौरान बर्क के घरवालों ने बिजली के मीटर की जाँच करने से टीम को रोका और जूनियर इंजनीनियर को धमकी भी दी। इसके बाद धमकी देने का FIR की जा रही है। टीम के साथ भारी संख्या में पुलिस, रैपिड ऐक्शन फोर्स और PAC के जवान भी मौजूद थे।
यूपी बिजली विभाग के वरिष्ठ इंजीनियर डीके गुप्ता ने बताया, “दो JE और दो एसडीओ सहित पाँच लोगों की टीम सुबह उनके (जियाउर्रहमान बर्क) घर गई थी। वे (परिवार के सदस्य) बिजली की चेकिंग नहीं करने दे रहे थे, लेकिन फिर जूनियर इंजीनियर (जेई) ने ताला खोल दिया। उन्होंने जेई को भी धमकी दी, इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा रही है।”
#WATCH | UP Electricity Department search at SP MP Zia ur Rehman Barq's residence | DK Gupta, senior engineer State Electricity Department says, "A team of five people went to his (Zia ur Rehman Barq) residence in the morning. They (family members) were not allowing to conduct… pic.twitter.com/VZN4VB3a2F
सीनियर इंजीनियर डीके गुप्ता ने आगे बताया, “(जियाउर्रहमान बर्क के घर) कुल 16.5 किलोवाट का लोड दर्ज किया गया। 2 किलोवाट के दो कनेक्शन थे। इनमें से एक जियाउर्रहमान बर्क के नाम पर और दूसरा उनके दादा (शफीकुर रहमान बर्क) के नाम पर है। जियाउर रहमान बर्क के खिलाफ बिजली चोरी को लेकर एफआईआर दर्ज की जा रही है। मीटर की एमआरआई भी कराई गई है।”
शिकायत की कॉपी (साभार: आजतक)
कहा जा रहा है कि सांसद जियाउर्रहमान के अब्बू ममलूक रहमान बर्क ने बिजली विभाग के अधिकारियों को धमकाते हुए कहा, “हमारी सरकार आएगी तो हम देख लेंगे।” इसके बाद बिजली विभाग ने जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ धमकी देने की FIR दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। वहीं, बिजली चोरी के मामले में एक FIR पहले ही दर्ज कराई जा चुकी है। बर्क के खिलाफ एंटी पावर थेफ्ट की धारा 135 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
FIR की कॉपी (साभार: आजतक)
दरअसल, सांसद जियाउर्रहमान के घर में बिजली के दो मीटर लगे हैं। इन मीटरों में टेम्परिंग यानी छेड़छाड़ के सबूत मिले हैं। यही कारण है कि बीते एक साल में उनके घर में बिजली के मीटर की रीडिंग जीरो रही। इसके बाद कुछ दिन पहले ही बिजली विभाग ने सांसद जियाउर्रहमान के घर के पुराने मीटर को जब्त करके जाँच के लिए भेज दिया था और उसकी जगह पर नई और स्मार्ट मीटर लगाए थे।
रिपोर्ट के अनुसार सपा सांसद के दो मंजिला घर में 83 बल्ब, 19 पंखे और 3 एसी चलाए जा रहे थे। गीजर से लेकर माइक्रोवेव तक अन्य आधुनिक उपकरण का भी इस्तेमाल हो रहा था। बिजली विभाग ने बताया है कि इस घर में 16,480 वॉट के उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। लेकिन कई महीनों से बिल शून्य आ रहा था।
मुंबई में 18 दिसंबर को एक दुखद घटना घटी। बुधवार (18 दिसंबर 2024) की शाम गेटवे ऑफ इंडिया से एलिफेंटा केव के बीच चलने वाली एक फेरी नौका को नेवी की स्पीड बोट ने टक्कर मार दी। घटना में 13 लोगों की मौत की खबर सामने आ रही है वहीं 115 से ज्यादा लोग रेस्क्यू किए जा चुके हैं।
बताया जा रहा है कि घटना शाम 3:55 की है। उस समय में ‘नीलकमल’ नाम की नाव गेटवे ऑफ इंडिया से एलिफेंटा केव की ओर जा रही थी। इसी दौरान नेवी की स्पीड बोट से इस नाव की टक्कर हुई और नाव पलटने से चारों ओर हल्ला मच गया। भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और पुलिस तुरंत सक्रिय हुई। उन्होंने हेलीकॉप्टर की मदद से रेक्यू शुरू किया।
घटना के संबंध में नौसेना ने अपनी ओर बयान जारी कर बताया कि 18 दिसंबर की शाम को नौसेना का पोत इंजन परीक्षण के लिए जा रहा था, लेकिन तभी शाम चार बजे इसने नियंत्रण खो दिया और करंजा के पास यह ‘नीलकमल’ नामक नौका से टकरा गया और नौका में सवार लोग डूबने लगे।
Unverified footage appears to show a speedboat intentionally ramming into the side of the passenger vessel at high speed.#Indiapic.twitter.com/T7fjFkzrkq
जानकारी के अनुसार, नेवी की स्पीड बोट टकराने से जो बोट बलटी उसमें 80 लोगों के बैठने की क्षमता थी लेकिन उसमें जरूरत से ज्यादा लोगों को बैठाया गया था। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने इस घटना को देखने के बाद कहा कि उन्होंने कभी ऐसा भयावह दृश्य नहीं देखा था। इतनी अफरा-तफरी और बच्ची की चीख-चिल्लाहट कभी नहीं सुनी थी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे की जानकारी देते हुए कहा कि मुंबई के बुचर द्वीप पर दोपहर बाद करीब 3:55 बजे ‘नीलकमल’ नाम की नाव हादसे का शिकार हो गई। हादसे में 99 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है और 13 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में 10 नागरिक और तीन नौसेना के जवान हैं। घटना में दो लोग लोग गंभीर रूप से घायल भी हैं, जिन्हें नौसेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह भी सूचना दी कि 11 क्राफ्ट और 4 हेलीकॉप्टर की मदद से नौसेना, तटरक्षक और पुलिस ने बचाव अभियान चलाया गया है। मुंबई पुलिस के अनुसार, मृतकों में सात पुरुष, चार महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं।
VIDEO | Early morning visuals from Gateway of India, #Mumbai.
Thirteen persons died and 99 others were rescued after a Navy craft crashed into a ferry off the Mumbai coast on Wednesday.
बता दें कि इस घटना के बाद सीएम ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को पाँच लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है। साथ ही न्याय के लिए नौसेना बोट के ड्राइवर और इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार अन्य लोगों के खिलाफ दक्षिण मुंबई के कोलाबा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं सुरक्षा लिहाज से बुधवार को पुलिस ने गेटवे ऑफ इंडिया पर पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है और नौका सेवाओं को निलंबित कर दिया है।
इस घटना के चश्मदीद व राजस्थान के निवासी श्रवण कुमार ने बताया कि उन्होंने घटना से पहले नेवी बोट के स्टंट की वीडियो बनाई थी। उन्होंने कहा कि उन लोगों को लग रहा था कि कोई स्टंट चल रहा है, लेकिन फिर बोट आकर नाव से टकरा गई।
वहीं 25 वर्षीय गौतम गुप्ता ने भी बताया कि घटना से पहले वो वीडियो बना रहे थे उन्हें लगा था कि स्पीडबोट कोई स्टंट कर रही है, लेकिन तभी उसने अपनी फेरी को टक्कर मार दी। वह कहते हैं, “हम विश्वास ही नहीं कर पाए, हमें झटका लगा और स्पीडबोट में से एक यात्री हवा में उछला और जाकर नौका के डेक पर जा लगा। उसका शरीर पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया था। “
प्रयागराज महाकुंभ 2025 की शुरुआत माघ मेले (13 जनवरी 2024) के साथ हो जाएगी। प्रयागराज महाकुंभ का आयोजन भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का सबसे बड़ा उत्सव होगा, जो माघ महीने में प्रारंभ होकर लगभग दो महीनों तक चलेगा। इस दौरान करोड़ों श्रद्धालु यहाँ डुबकी लगाएँगे। इस समय महाकुंभ की तैयारियाँ जोरों पर हैं, जिसमें नए घाटों का निर्माण, यातायात और सुरक्षा प्रबंधन, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, साथ ही स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुंभ का यह दिव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता, और सहिष्णुता की अद्वितीय मिसाल भी पेश करता है। हम इस लेख में जानेंगे, महाकुंभ से जुड़ी खास बातें…
महाकुंभ का पौराणिक और ऐतिहासिक संदर्भ
महाकुंभ मेला भारतीय संस्कृति का ऐसा पवित्र उत्सव है, जिसकी गूंज प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक युग तक सुनाई देती है। महाकुंभ मेला इतिहास, धर्म, दर्शन और समाज के अद्वितीय समागम को दर्शाता है। यह मेला न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय दर्शन, परंपरा और खगोलीय विज्ञान का अद्भुत संगम भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश की बूंदें हरिद्वार, प्रयागराज (इलाहाबाद), उज्जैन और नासिक के पवित्र स्थलों पर गिरीं। यही कारण है कि इन चार स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन होता है। इस मेले का इतिहास इतना पुराना है कि इसकी उत्पत्ति का समय स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है।
महाकुंभ का उल्लेख वेदों, पुराणों और महाकाव्यों में मिलता है। श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण और महाभारत में समुद्र मंथन की कथा को विस्तार से बताया गया है। इस कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र का मंथन किया। मंथन से निकले अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ, जिसमें अमृत की बूंदें चार स्थानों पर गिरीं।
विष्णु पुराण में यह भी उल्लेख है कि जब गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करता है और सूर्य मेष राशि में होता है, तो हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होता है। इसी प्रकार, जब सूर्य और गुरु सिंह राशि में होते हैं, तो नासिक में कुंभ लगता है। उज्जैन में कुंभ तब होता है जब गुरु कुंभ राशि में प्रवेश करता है। प्रयागराज में माघ अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं और गुरु मेष राशि में होता है। इस खगोलीय गणना का सटीक पालन आज भी किया जाता है।
इतिहासकार मानते हैं कि कुंभ मेला सिंधु घाटी सभ्यता से भी पुराना है। तो कुछ इतिहासकारों के अनुसार कुंभ मेले का आयोजन गुप्त काल (तीसरी से पाँचवीं सदी) में सुव्यवस्थित रूप में शुरू हुआ। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी 629-645 ईस्वी में सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में प्रयागराज के कुंभ मेले का वर्णन किया है। उन्होंने इसे एक विशाल और भव्य आयोजन बताया, जिसमें असंख्य साधु, विद्वान और श्रद्धालु सम्मिलित होते थे। आधुनिक प्रशासनिक ढांचे के तहत कुंभ का स्वरूप गुप्त काल से शुरु हुआ और शंकराचार्य ने इसे धर्म और समाज को जोड़ने का माध्यम बनाया।
धर्माचार्य मानते हैं कि कुंभ मेला अनादि है। यह किसी एक घटना से प्रारंभ नहीं हुआ बल्कि मानव सभ्यता के साथ इसकी परंपरा विकसित हुई। यह आयोजन मानवता की धरोहर है, जिसमें धर्म, संस्कृति और समाज का अद्भुत समागम होता है।
कुंभ मेले का खगोलीय महत्व
कुंभ मेला खगोलीय घटनाओं पर आधारित है। नवग्रहों में से सूर्य, चंद्रमा, गुरु और शनि की स्थिति इस आयोजन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। अमृत की रक्षा में इन ग्रहों की भूमिका को पुराणों में विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। कुंभ मेले का आयोजन हर तीन वर्षों के अंतराल पर होता है, जो चार पवित्र स्थलों—हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में बारी-बारी से आयोजित होता है। 12 वर्षों के चक्र के बाद यह मेला अपने पहले स्थान पर लौटता है।
प्रयागराज का कुंभ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम होता है। कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है, जबकि 6 साल में अर्धकुंभ और हर 144 साल में महाकुंभ का आयोजन होता है। हर 144 साल आयोजित होने वाले महाकुंभ को देवताओं और मनुष्यों के संयुक्त पर्व के रूप में देखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पृथ्वी का एक वर्ष देवताओं के एक दिन के बराबर होता है। इसी गणना के आधार पर 144 वर्षों के अंतराल को महाकुंभ के रूप में मनाया जाता है।
दुनिया के लिए अबूझ पहेली है महाकुंभ
महाकुंभ न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में एक अद्वितीय आयोजन है। पश्चिमी धर्मों में सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं का महत्व अधिक है, लेकिन वहाँ किसी दार्शनिक या आध्यात्मिक घटना की इस प्रकार की मान्यता नहीं है। कुंभ मेले का खगोलीय आधार और इसका आध्यात्मिक महत्व पश्चिमी विचारधारा के लिए अबूझ पहेली है।
यह मेला सनातन धर्म की उस दृष्टि को दर्शाता है, जिसमें सत्य की खोज को प्राथमिकता दी जाती है। यहाँ कोई किसी पर अपनी मान्यता थोपता नहीं, बल्कि सभी को अपनी-अपनी साधना पद्धति में विश्वास करने का अधिकार है। यह विविधता का सम्मान और सहिष्णुता का अद्भुत उदाहरण है।
कुंभ मेला आज केवल भारतीयों तक सीमित नहीं है। विदेशी पत्रकार, श्रद्धालु, और पर्यटक भी इसमें भाग लेते हैं। उनके लिए यह भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का परिचय है। पश्चिमी दृष्टिकोण से यह मेला ब्रह्मांड और जीवन की गूढ़ अवधारणाओं को समझने का प्रयास है। विदेशी लेखक और पत्रकार इस मेले को ‘विश्व का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण आयोजन’ कहते हैं। उनका मानना है कि कुंभ मेला भारतीय दर्शन और अध्यात्म की व्यापकता को दर्शाता है।
फोटो साभार: अमर उजाला
महाकुंभ में संतों का मेला, गृहस्थों के लिए भी स्वर्णिम अवसर
कुंभ मेला संतों, तपस्वियों और गृहस्थों के बीच का एक सेतु है। कुंभ मेला संतों और गृहस्थों दोनों के लिए एक अद्वितीय अवसर है। यह साधना, ज्ञान, और आस्था का केंद्र है, जहाँ गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग तपस्वियों के सत्संग से धर्म का मर्म समझते हैं। कुंभ में संत समाज का महत्वपूर्ण योगदान है, जहाँ वे अपने ज्ञान और अनुभव को जनसामान्य के साथ साझा करते हैं। संतों के सत्संग और प्रवचन से लोगों को आत्मज्ञान प्राप्त होता है।
कुछ संत ऐसे भी होते हैं, जो अपने साधना स्थलों से बाहर नहीं आते, लेकिन कुंभ के अवसर पर दर्शन देते हैं। श्रद्धालु इन संतों से जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझते हैं और धर्म का मर्म जानते हैं। यह आयोजन साधना परंपरा, गृहस्थ परंपरा और कुंभ शास्त्र की त्रिवेणी है। कुंभ मेला इस दृष्टि से अनूठा है कि यहाँ समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ मिलते हैं।
फोटो साभार: kumbh.gov.in
महाकुंभ नगरी में कथा और प्रवचन की परंपरा ने समाज को सदियों से दिशा दी है। कथा और प्रवचन कठिन ज्ञान को सरल भाषा में आम जन तक पहुँचाने का माध्यम हैं। महाकुंभ में विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों द्वारा आयोजित कथाएँ श्रद्धालुओं को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाती हैं। धार्मिक कथावाचक मानते हैं कि ये कथाएँ समाज को गहरे स्तर पर प्रभावित करती हैं। अखाड़ों के प्रतिनिधि कहते हैं कि कथा और प्रवचन जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझाने का माध्यम हैं। समाजशास्त्री इसे भारतीय समाज की सामूहिक चेतना को जागृत करने का साधन मानते हैं। श्रद्धालु कहते हैं कि इन प्रवचनों से उन्हें जीवन को नई दृष्टि और ऊर्जा मिलती है।
महाकुंभ में राज्य सत्ता, समाज सत्ता और धर्म सत्ता का समागम
कुंभ मेले में धर्मांतरण, किसी विशेष पूजा पद्धति या विचारधारा को थोपने का कोई स्थान नहीं है। यहाँ हर व्यक्ति को अपनी आस्था और पूजा पद्धति के साथ आने और उसे प्रकट करने की स्वतंत्रता है। यह विविधता में एकता की भारतीय परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
कुंभ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है। यह राज्य सत्ता, समाज सत्ता, और धर्म सत्ता का अद्वितीय संगम भी है। कुंभ मेला भारतीय समाज की उस विलक्षणता को दर्शाता है, जहाँ राज्य सत्ता, समाज सत्ता और धर्म सत्ता तीनों एक-दूसरे के सहयोग से काम करती हैं। यहाँ धर्माचार्य, आध्यात्मिक गुरु और प्रशासन मिलकर मेले को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करते हैं। यह आयोजन एक आदर्श समाज की नींव रखने का प्रतीक है।
महाकुंभ भारतीय संस्कृति, धर्म और समाज का ऐसा संगम है, जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को एकता और सहिष्णुता का संदेश देता है। यह आयोजन पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक रूप से अनमोल है। महाकुंभ भारतीय समाज की सहअस्तित्व की भावना और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। यह न केवल आस्था का पर्व है, बल्कि एक ऐसा मंच भी है, जहाँ मानवता, ज्ञान और चेतना का मिलन होता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (18 दिसंबर 2024) को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को लेकर कॉन्ग्रेस द्वारा फैलाए गए झूठ का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश पेश किया, क्योंकि बीजेपी के वक्ताओं ने कहा कि कॉन्ग्रेस आंबेडकर विरोधी और संविधान विरोधी है। कॉन्ग्रेस ने सावरकर का भी अपमान किया।
अमित शाह ने कहा कि पिछले सप्ताह लोकसभा और राज्यसभा में संविधान के 75 साल पूरा होने के मौके पर संविधान की रचना, संविधान निर्माताओं के योगदान और संविधान के आदर्शों पर एक गौरवमयी चर्चा का आयोजन हुआ। इस चर्चा में 75 साल की देश की गौरवमयी यात्रा, विकास यात्रा और उपलब्धियों की भी चर्चा होनी थी।
उन्होंने कहा कि संसद जैसे देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक फोरम में जब चर्चा होती है, तब इसमें बात तथ्य और सत्य के आधार पर होनी चाहिए। कॉन्ग्रेस पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कल मंगलवार (17 दिसंबर) को कॉन्ग्रेस ने जिस तरह से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर रखने का प्रयास किया है, इसकी वे कड़ी निंदा करते हैं।
कल से कांग्रेस ने जिस तरह से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर रखने का प्रयास किया है, ये अत्यंत निंदनीय है और मैं इसकी निंदा करना चाहता हूं।
ये इसलिए हुआ क्योंकि भाजपा के वक्ताओं ने संविधान पर, संविधान की रचना के मूल्यों पर और जब-जब कांग्रेस या भाजपा का शासन रहा, तब शासन ने संविधान के… pic.twitter.com/LqyVSezvOH
गृह मंत्री ने कहा, “ये इसलिए हुआ क्योंकि भाजपा के वक्ताओं ने संविधान पर, संविधान की रचना के मूल्यों पर और जब-जब कॉन्ग्रेस या भाजपा का शासन रहा, तब शासन ने संविधान के मूल्यों का किस तरह से मूल्यांकन, संरक्षण और संवर्धन किया, इस पर तथ्यों और अनेक उदाहरण के साथ भाजपा के वक्ताओं ने विषय रखे। इससे तय हो गया कि कॉन्ग्रेस अंबेडकर जी की विरोधी पार्टी है, कॉन्ग्रेस आरक्षण विरोधी और संविधान विरोधी पार्टी है।”
कॉन्ग्रेस पर वीर सावरकर का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस ने सावरकर जी का भी अपमान किया। कॉन्ग्रेस ने आपातकाल लगाकर संविधान के मूल्यों की धज्जियाँ उड़ा दी। नारी सम्मान को भी वर्षों तक दरकिनार किया। न्यायपालिका का हमेशा अपमान किया। सेना के शहीदों का अपमान किया और भारत की भूमि तक को संविधान तोड़कर दूसरे देशों को देने की हिमाकत कॉन्ग्रेस के शासन में हुई।”
इससे तय हो गया कि कांग्रेस अंबेडकर जी की विरोधी पार्टी है, कांग्रेस आरक्षण विरोधी और संविधान विरोधी पार्टी है।
कांग्रेस ने सावरकर जी का भी अपमान किया, कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर संविधान के सारे मूल्यों की धज्जियां उड़ा दी, नारी सम्मान को भी वर्षों तक दरकिनार किया, न्यायपालिका का… pic.twitter.com/6QgW3S2IdH
उन्होंने आगे कहा, “कल से कॉन्ग्रेस ने फिर एक बार अपनी पुरानी पद्धति को अपनाकर, बातों को तोड़-मरोड़कर और सत्य को असत्य के कपड़े पहनाकर समाज में भ्राँति फैलाने का एक कुत्सित प्रयास किया है। संसद में चर्चा के दौरान ये सिद्ध हो गया कि बाबा साहेब अंबेडकर का कॉन्ग्रेस ने किस तरह से पुरजोर विरोध किया था। बाबा साहेब के न रहने के बाद भी किस प्रकार से कॉन्ग्रेस ने उन्हें हाशिये पर धकेलने का प्रयास किया।”
कल से कांग्रेस ने फिर एक बार अपनी पुरानी पद्धति को अपनाकर, बातों को तोड़-मरोड़कर और सत्य को असत्य के कपड़े पहनाकर समाज में भ्रांति फैलाने का एक कुत्सित प्रयास किया है।
संसद में चर्चा के दौरान ये सिद्ध हो गया कि बाबा साहेब अंबेडकर का कांग्रेस ने किस तरह से पुरजोर विरोध किया था।… pic.twitter.com/MRIJ3RbU5b
डॉक्टर अंबेडकर पर कॉन्ग्रेस की पुरानी नीति को लेकर अमित शाह ने कहा, “जहाँ तक भारत रत्न देने का सवाल है, कॉन्ग्रेस के नेताओं ने कई बार खुद ही अपने आप को भारत रत्न दिए हैं। 1955 में नेहरू जी ने खुद को भारत रत्न दे दिया, 1971 में इंदिरा जी ने खुद को भारत रत्न दे दिया। बाबा साहेब को भारत रत्न 1990 में तब मिला, जब कॉन्ग्रेस सत्ता में नहीं थी और भाजपा के समर्थन वाली सरकार थी। 1990 तक कॉन्ग्रेस बाबा साहेब को भारत रत्न न मिले, इसके लिए प्रयास करती रही। यहाँ तक कि बाबा साहेब की 100वीं जयंती को मनाने की मनाही कर दी गई।”
जहां तक भारत रत्न देने का सवाल है, कांग्रेस के नेताओं ने कई बार खुद ही अपने आप को भारत रत्न दिए हैं।
1955 में नेहरू जी ने खुद को भारत रत्न दे दिया, 1971 में इंदिरा जी ने खुद को भारत रत्न दे दिया।
लेकिन बाबा साहेब को भारत रत्न 1990 में तब मिला जब कांग्रेस सत्ता में नहीं थी और… pic.twitter.com/3pvMxDlTrt
अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस जब तक सत्ता में रही, तब बाबा साहेब अंबेडकर का कोई स्मारक नहीं बना। जहाँ-जहाँ विपक्ष की सरकारें आती गईं, स्मारक बनते गए। भाजपा की सरकारों ने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने बाबा साहेब के जीवन से संबंधित पंचतीर्थ का विकास किया। मध्य प्रदेश में महू, लंदन में बाब साहेब के स्मारक, नागपुर में दीक्षाभूमि, दिल्ली में राष्ट्रीय स्मारक और महाराष्ट्र के मुंबई में चैत्यभूमि का विकास करने का काम भाजपा की सरकारों ने किया।
जब तक कांग्रेस सत्ता में रही बाबा साहेब अंबेडकर का कोई स्मारक नहीं बना। जहां-जहां विपक्ष की सरकारें आती गईं, स्मारक बनते गए।
भाजपा की सरकारों ने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने बाबा साहेब के जीवन से संबंधित पंचतीर्थ का विकास किया, मध्य प्रदेश में महू, लंदन में बाब… pic.twitter.com/opDB73Jd1L
अमित शाह ने कहा कि राज्यसभा में उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने पीएम नरेन्द्र मोदी के बयानों को एडिट करके सार्वजनिक किया था। उस समय चुनाव चल रहे थे और उनके बयान को AI का उपयोग करके संपादित किया गया था। उन्होंने कहा, “मैं मीडिया से भी अनुरोध करना चाहता हूँ कि वह मेरा पूरा बयान जनता के सामने रखें। मैं उस पार्टी से हूँ जो अंबेडकर जी का कभी अपमान नहीं कर सकती।”
राज्यसभा में मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।
इससे पहले उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी जी के बयानों को एडिट करके सार्वजनिक किया था।
जब चुनाव चल रहे थे तो मेरे बयान को AI का उपयोग करके संपादित किया गया था। और आज वे मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “पहले जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा अंबेडकर जी के सिद्धांतों पर चलने का प्रयास किया है। जब भी भारतीय जनता पार्टी सत्ता में रही, हमने अंबेडकर जी के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया है। भारतीय जनता पार्टी ने आरक्षण को मजबूत करने का काम किया है। हम जानते हैं कि देश के संविधान को समावेशी बनाने में, दलितों, आदिवासियों, वंचितों, गरीबों को न्याय दिलाने में और देश में लोकतंत्र की नींव को गहरा करने में बाबा साहेब का बहुत बड़ा योगदान है।”
मैं मीडिया से भी अनुरोध करना चाहता हूं कि वह मेरा पूरा बयान जनता के सामने रखें।
मैं उस पार्टी से हूं जो अंबेडकर जी का कभी अपमान नहीं कर सकती।
पहले जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा अंबेडकर जी के सिद्धांतों पर चलने का प्रयास किया है।
अमित शाह ने कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी अपील की। उन्होंने कहा कि खड़गे जी को कॉन्ग्रेस के इस कुत्सित प्रयास का समर्थन नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा, “मुझे बहुत दुख है कि राहुल गाँधी के दबाव में आप भी इसमें शामिल हो गए हैं।”
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के मुस्लिम बाहुल सराय रहमान में बुधवार (18 दिसंबर 2024) को 50 साल से अधिक पुराना एक शिव मंदिर मिला है। यह मंदिर सालों से बंद पड़ा था। मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण इस तरफ किसी का ध्यान भी नहीं जाता था। जब करणी सेना और बजरंग दल जैसे हिंदू संगठनों को इसकी जानकारी मिली तो वे इलाके में पहुँचे और इसे खोले जाने को लेकर हंगामा करने लगे।
यह मंदिर बन्ना देवी थाना क्षेत्र के सराय रहमान इलाके में है। इसकी सूचना स्थानीय थाना को लगी तो पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची और लोगों को शांत कराया। करणी सेना ने मंदिर को खोले जाने की माँग को लेकर प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा है। अखिल भारतीय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि सालों से इस मंदिर पर कब्जा करके रखा गया था और यहाँ पूजा-अर्चना नहीं हो रही है।
पुलिस ने आश्वासन दिया कि मंदिर को सुरक्षा दी जाएगी और यहाँ पूजा पाठ को भी नहीं रोका जाएगा। करणी सेना का कहना है कि मंदिर के अंदर की मूर्तियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। कई मूर्तियाँ तोड़ दी गई हैं। हिंदू संगठनों इसकी जाँच और मंदिर को सुरक्षा की माँग की। बन्नादेवी थाना के प्रभारी पंकज मिश्रा ने बताया कि मंदिर को खुलवा करके उसकी साफ-सफाई कराई गई है।
ज्ञानेंद्र सिंह चौहान ने आगे बताया कि करणी सेना ने महानगर में करीब 15 ऐसे मंदिरों को चिह्नित किया है, जिन पर मुस्लिम समुदाय का कब्जा है। उन्होंने कहा कि इन मंदिरों को जल्दी ही मुक्त कराया जाएगा। वहीं, अलीगढ़ एसपी सिटी मृगांक पाठक ने बताया कि मंदिर पर अवैध कब्जे की शिकायत मिली है। इस संबंध में जाँच कराई जाएगी और दोषियों पर कानून अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, मंदिर खुलवाने के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे विश्व हिंदू परिषद के अलीगढ़ जिला प्रचार प्रमुख प्रतीक रघुवंशी ने कहा कि सम्भल के बाद अलीगढ़ के सराय रहमान स्थित मन्दिर को कब्जा मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि मन्दिर की मूर्तियों को पहले ही तोड़ दी गई थी और शिवलिंग को दबा दिया गया था।
उन्होंने कहा कि हिंदू संगठन के लोगों को इस बारे में पता चला तो मन्दिर के पास से मलबा हटाया गया और वहाँ मन्दिर में शिवलिंग मिला है। रघुवंशी ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने मलबे को हटाकर मन्दिर की साफ-सफाई की गई। उन्होंने कहा कि मंदिर के बाहर ईंटों से भरे कट्टे रखे हुए थे। साफ-सफाई करने के बाद यहाँ विधिवत पूजा-पाठ कराया गया।
वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले हिंदू परिवार भी रहा करते थे, लेकिन वे समय के साथ यहाँ से घर-बार बेचकर चले गए। इसके बाद इस मंदिर पर मुस्लिम समुदाय का कब्जा हो गया। लोगों का यह भी कहना है कि हिंदू समुदाय के लोग अपने साथ मूर्ति आदि लेकर भी चले गए थे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार (18 दिसंबर 2024) को ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक एवं कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर से कई सवाल किए। अदालत ने पूछा कि यति नरसिंहानंद के भाषण को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने के बजाय सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर क्यों पोस्ट किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जुबैर के ट्वीट देखकर लगता है कि वे अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।
दरअसल, जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है। खंडपीठ ने पूछा कि मोहम्मद जुबैर पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने के अपराध के लिए मामला क्यों दर्ज किया गया है। कोर्ट ने 20 दिसंबर तक जवाब माँगा है।
खंडपीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “यदि यह व्यक्ति (यति नरसिंहानंद) अजीब व्यवहार कर रहा है तो क्या आप पुलिस के पास जाने के बजाय और भी अजीब व्यवहार करेंगे? क्या आपने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है? मैं आपके आचरण को देखूँगा। यदि आपको उसका (यति) भाषण, चेहरा पसंद नहीं है तो आपको उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।”
दरअसल, जुबैर ने गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए भाषण को ‘अपमानजनक और घृणास्पद’ बताते हुए ट्वीट किया था। इसको लेकर जुबैर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। नरसिंहानंद के समर्थकों द्वारा दायर मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा की माँग करते हुए मोहम्मद जुबैर ने हाई कोर्ट में याचिका दी थी, जिस पर सुनवाई हुई।
दरअसल, यति नरसिंहानंद ने 29 सितंबर को एक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी की थी। जुबैर ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें उसने इस भाषण को ‘अपमानजनक और घृणास्पद’ बताया था। इसके बाद यति नरसिंहानंद फाउंडेशन की महासचिव उदिता त्यागी ने जुबैर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
त्यागी ने डासना देवी मंडी में हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए जुबैर, अरशद मदनी और असदुद्दीन ओवैसी को दोषी ठहराते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। गाजियाबाद पुलिस ने इसके बाद जुबैर पर बीएनएस की धारा 196 (धार्मिक आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना), 228 (झूठे सबूत गढ़ना), 299 (धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना), 356 (3) (मानहानि) और 351 (2) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए। इसके बाद बीएनएस की धारा 152 के तहत अपराध भी जोड़ा गया।
इसके बाद जुबैर ने एफआईआर के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और गिरफ्तारी से बचने की माँग की। अपनी याचिका में जुबैर ने कहा है कि उसने यति नरसिंहानंद की बार-बार की सांप्रदायिक टिप्पणियों और महिलाओं और वरिष्ठ राजनेताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियों को उजागर करने के लिए एक्स पर पोस्ट किया था।
यूपी के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर्रहमान बर्क इन दिनों दो अलग-अलग मामलों में कानूनी शिकंजे में घिर गए हैं। पहली मुश्किल संभल हिंसा से जुड़ी है, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है, अब इस मामले में वो अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुँचे हैं और एफआईआर रद्द करने की माँग की है। तो दूसरी परेशानी उनके घर के बिजली कनेक्शन में कथित गड़बड़ी को लेकर है।
हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल हिंसा मामले में जिया उर्रहमान बर्क ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अर्जी देकर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की गुहार लगाई है। अपनी याचिका में बर्क ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की माँग की है। बर्क ने दलील दी कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो यह अपूरणीय क्षति साबित होगी।
बता दें कि 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान संभल में भड़की हिंसा के मामले में सांसद जिया उर्रहमान बर्क को पुलिस ने नामजद आरोपित बनाया है। हिंसा के दौरान पत्थरबाजी, तोड़फोड़, आगजनी और फायरिंग की घटनाएँ हुईं, जिनमें पाँच लोगों की मौत हो गई थी और सीओ समेत 19 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
पुलिस का आरोप है कि सपा सांसद और स्थानीय विधायक इकबाल महमूद के बेटे ने भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया। इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करवाने के लिए सांसद बर्क ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया है।
बिजली चोरी मामले में भी हो सकती है कार्रवाई
हिंसा के आरोपों से घिरे सांसद अब बिजली चोरी के शक के दायरे में भी आ गए हैं। बिजली विभाग की जाँच में उनके आवास का पुराना मीटर हटाकर नया स्मार्ट मीटर लगाया गया। जाँच में पाया गया कि पिछले पाँच महीनों का बिजली बिल शून्य था, जबकि उनके घर में एसी और कूलर जैसे कई बिजली उपकरण मौजूद हैं।
संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि अप्रैल से नवंबर तक सांसद के घर में बिजली खपत के आँकड़े असामान्य पाए गए। जुलाई से नवंबर तक एक भी यूनिट बिजली खर्च नहीं हुई, जबकि जून में केवल 13 यूनिट और अप्रैल में 35 यूनिट की खपत दर्ज की गई।
बहरहाल, बिजली विभाग ने मीटर की गड़बड़ी की जाँच शुरू कर दी है। अगर जाँच में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो सांसद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो सकती है। वहीं, सपा सांसद जिया उर्रहमान बर्क ने इन आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि बिजली का बिल नियमित रूप से जमा किया गया है और जाँच में पूरा सहयोग किया जाएगा। अगर कोई नोटिस मिलता है, तो वह कानून का सहारा लेंगे।
उनके पिता ममलुकु उर्रहमान बर्क ने भी बिजली चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मोहल्ले में हर घर में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, और यह कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि अगर पुलिस शहर छोड़ दे, तो हालात और बेहतर हो सकते हैं।
फिलहाल दोनों ही मामलों की जाँच चल रही है। संभल हिंसा मामले में हाई कोर्ट में सांसद की याचिका पर सुनवाई होगी, जबकि बिजली विभाग की जाँच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज होगी या नहीं।
प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्ता पलट होने के बाद बांग्लादेश में उनकी पार्टी आवामी लीग के 400 से अधिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है। बांग्लादेश सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी आवामी लीग का दावा है कि इस साल जुलाई से लेकर अभी तक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा इन हत्याओं को अंजाम दिया गया है। वहीं, हसीना के तख्ता पलट के चेहरा रहे छात्र नेता ने कहा कि बांग्लादेश की नई सरकार के भारत के हिंदुत्व के खिलाफ है।
आवामी लीग ने अपने पार्टी के ऐसे 394 नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की सूची जारी की है, जिनकी हत्या कर दी गई। पार्टी का कहना है कि यह शुरुआती सूची है और आने वाले समय में उन लोगों के नामों वाली ऐसी और सूची जारी की जाएँगी, जिनकी हत्या कर दी गई है। जानकारों के अनुसार, बांग्लादेश में अराजकता के बाद से आवामी लीग के अधिकांश सदस्यों की हत्या कर दी गई।
हत्या जमात-ए-इस्लामी द्वारा बांग्लादेश में विपक्ष पर हमला करने के लिए अपनाई गई एक खास शैली है। जमात की छात्र शाखा छात्र शिबिर ऐसी हत्याओं के लिए पूरे मुल्क में कुख्यात है। इस साल 5 अगस्त को बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद आवामी लीग के लिए नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का बहुत ही व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया गया है। उसी दिन उनकी पार्टी के 29 नेताओं एवं उनके परिवार के लोगों की हत्या कर दी गई।
बांग्लादेश को भारत का हिंदुत्व पसंद नहीं
शेख हसीना सरकार के खिलाफ छात्रों के विद्रोह का प्रमुख चेहरा रहे 26 वर्षीय आसिफ महमूद का कहना है कि बांग्लादेश के लोग हिंदुत्व के खिलाफ हैं। मोहम्मद यूसुफ के नेतृत्व वाली सरकार में सलाहकार की भूमिका निभा रहे आसिफ महमूद ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि भारत के कई नेता बांग्लादेश के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।
महमूद ने कहा, “हमारे लोग भारत से नाराज हैं, क्योंकि भारत शेख हसीना की मदद कर रहा है। शेख हसीना वहाँ रहकर स्पीच दे रही हैं। अगर भारत उन्हें वापस भेजता है तो इससे बांग्लादेश के साथ उसके रिश्ते सुधरेंगे।” महमूद ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर होने वाले हमलों को राजनीतिक मसला बताया।
हिंदुत्व को लेकर आसिफ महमूद ने कहा, “BJP भारत में सरकार चला रही है। उसका हिंदू घोषणापत्र है, जिसके हम लोग खिलाफ हैं। बांग्लादेश के लोगों को हिंदुत्व पसंद नहीं है। साल 2019 में भारत में CAA-NRC एक्ट पास हुआ। हमने इसका विरोध किया। भारत से बड़ी संख्या में प्रवासी बांग्लादेश वापस आ सकते हैं। ये पॉलिसी मुस्लिमों के खिलाफ है। इससे हमें खतरा महसूस हो रहा है।”
बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों ‘बैन भाजपा’ के पोस्टर को लेकर आसिफ ने कहा, “हम उन लोगों के खिलाफ हैं, जो शेख हसीना सरकार के साथ थे। यही भारत के लिए नफरत की वजह है। इसीलिए बांग्लादेश के लोग इंडियन प्रोडक्ट बैन करने की माँग कर रहे हैं।” महमूद ने माना कि शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद आवामी लीग के 10 हजार लोगों को कैद किया गया है।
‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारा नहीं मानने और वहाँ की नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की फोटो हटाने की तैयारी को लेकर महमूद ने कहा कि बांग्लादेश ने 1947, 1971 और 1990 में लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि देश का कोई एक राष्ट्रपिता नहीं हो सकता। आजादी की जंग में कई लोग शामिल थे। उन्होंने कहा, “हमारे पास मौलाना हामिद खान वसानी, हुसैन सुहरावर्दी और जोगेन मंडल जैसे कई संस्थापक पिता हैं।”
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित ने कॉन्ग्रेस को ऐसा आईना दिखाया कि कॉन्ग्रेसी उनके भाषण का एक छोटा सा क्लिप काटकर सरकार और भाजपा को बदनाम करने लगे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस सोचती है कि झूठ बोलकर उसके कुकर्मों, खासतौर से डॉक्टर आंबेडकर के प्रति उनके अपमान को छुपाया जा सकता है, तो वे गलत सोच रही है।
पीएम मोदी ने X के अपने सोशल मीडिया पोस्ट में गाँधी परिवार और पंडित नेहरू पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने बार-बार देखा है कि कैसे एक वंश के नेतृत्व वाली एक पार्टी ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की विरासत को मिटाने और एससी/एसटी समुदायों को अपमानित करने के लिए हरसंभव गंदी चाल चली है। उन्होंने कहा कि उनके पास कॉन्ग्रेस के पापों की सूची है।
उस सूची को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “डॉक्टर अंबेडकर के प्रति कॉन्ग्रेस के पापों की सूची में ये शामिल हैं: उन्हें (अंबेडकर को) एक बार नहीं बल्कि दो बार चुनाव में हराना। पंडित नेहरू द्वारा उनके खिलाफ प्रचार करना और उनकी हार को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाना। उन्हें भारत रत्न देने से इनकार करना। संसद के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र को सम्मान का स्थान नहीं देना।”
The list of the Congress' sins towards Dr. Ambedkar includes:
Getting him defeated in elections not once but twice.
Pandit Nehru campaigning against him and making his loss a prestige issue.
Denying him a Bharat Ratna.
Denying his portrait a place of pride in Parliament’s…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस चाहे जितनी कोशिश कर ले, लेकिन वे इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि एससी/एसटी समुदायों के खिलाफ सबसे भयानक नरसंहार उनके शासन में ही हुए हैं। कॉन्ग्रेस सालों तक सत्ता में रही, लेकिन एससी और एसटी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए कुछ भी ठोस नहीं किया।
पीएम मोदी ने कहा, “संसद में गृह मंत्री अमित शाह जी ने डॉक्टर अंबेडकर का अपमान करने और एससी/एसटी समुदायों की अनदेखी करने के कॉन्ग्रेस के काले इतिहास को उजागर किया। उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से वे स्पष्ट रूप से स्तब्ध और स्तब्ध हैं। यही कारण है कि वे अब नाटकबाजी में लिप्त हैं! दुख की बात है कि उनके लिए, लोग सच्चाई जानते हैं!”
In Parliament, HM @AmitShah Ji exposed the Congress’ dark history of insulting Dr. Ambedkar and ignoring the SC/ST Communities. They are clearly stung and stunned by the facts he presented, which is why they are now indulging in theatrics! Sadly, for them, people know the truth! pic.twitter.com/l2csoc0Bvd
पीएम मोदी ने कहा, हम जो कुछ भी हैं, “हम जो कुछ भी हैं, वह डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की वजह से ही है! हमारी सरकार ने पिछले एक दशक में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के सपने को पूरा करने के लिए अथक प्रयास किया है। किसी भी क्षेत्र को लें – चाहे वह 25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकालना हो, एससी/एसटी एक्ट को मजबूत करना हो, हमारी सरकार के प्रमुख कार्यक्रम जैसे स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना और बहुत कुछ, इनमें से प्रत्येक ने गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के जीवन को छुआ है।”
पीएम मोदी ने आगे कहा, “हमारी सरकार ने डॉ. अंबेडकर से जुड़े पाँच प्रतिष्ठित स्थानों- पंचतीर्थ को विकसित करने के लिए काम किया है। कई दशकों से चैत्य भूमि के लिए भूमि का मुद्दा लंबित था। हमारी सरकार ने न केवल इस मुद्दे को सुलझाया, बल्कि मैं वहाँ प्रार्थना करने भी गया हूँ।हमने दिल्ली में 26, अलीपुर रोड को भी विकसित किया है, जहाँ डॉक्टर अंबेडकर ने अपने अंतिम वर्ष बिताए थे। लंदन में जिस घर में वे रहते थे, उसे भी सरकार ने अधिग्रहित कर लिया है। जब डॉ. अंबेडकर की बात आती है तो हमारा सम्मान और श्रद्धा सर्वोच्च है।”
Our Government has worked to develop Panchteerth, the five iconic places associated with Dr. Ambedkar.
For decades, there was a pending issue on land for Chaitya Bhoomi. Not only did our Government resolve the issue, I have gone to pray there as well.
बता दें कि देश की संसद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भाषण के क्लिप के एक हिस्से को काटकर कॉन्ग्रेसी और विरोधी दल सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि कॉन्ग्रेस ऐसा कर रही है। अपनी चिढ़ ने कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं द्वारा दरबारी पत्रकारों ने अमित शाह के भाषण के हिस्से को शेयर करके सरकार को बदनाम करना शुरू कर दिया।
कॉन्ग्रेस ने X अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “‘अभी एक फैशन हो गया है- अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर.. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।’ अमित शाह ने बेहद घृणित बात की है। इस बात से जाहिर होता है कि BJP और RSS के नेताओं के मन में बाबा साहेब अंबेडकर जी को लेकर बहुत नफरत है। नफरत ऐसी कि उनके नाम तक से इनको चिढ़ है।”
कॉन्ग्रेस ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “ये वही लोग हैं जिनके पूर्वज बाबा साहेब के पुतले फूँकते थे, जो ख़ुद बाबा साहेब के दिए संविधान को बदलने की बात करते थे। जब जनता ने इन्हें सबक सिखाया तो अब इन्हें बाबा साहेब का नाम लेने वालों से चिढ़ हो गई है। शर्मनाक! अमित शाह को इसके लिए देश से माफी माँगनी चाहिए।”
अमित शाह के भाषण के जिस हिस्से को विरोधियों द्वारा साझा किया जा रहा है, वह सही, लेकिन उसका संदर्भ क्या है उसे विरोधी छिपा गए। इससे अमित शाह का बयान एकतरफा दिखने लगा, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। अमित शाह ने अंबेडकर के साथ कॉन्ग्रेस के नेताओं के दुर्व्यवहार को उन्होंने उजागर किया था।
अमित शाह ने अपने भाषण में कहा था, “अभी यह फैशन चल गया है अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर……. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों का स्वर्ग मिल जाता। हमें आनंद है कि ये अंबेडकर का नाम लेते हैं, लेकिन अंबेडकर जी के प्रति आपका भाव क्या है ये मैं बताता हूँ।” इसके बाद अमित शाह कॉन्ग्रेस और पंडित नेहरू की पोल खोलकर रख देते हैं।
अमित शाह ने आगे कहा था, “अंबेडकर जी ने देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे दिया? अंबेडकर जी ने कई बार कहा कि अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के साथ हुए व्यवहार से मैं असंतुष्ट हूँ। सरकार की विदेश नीति से मैं असहमत हूँ और आर्टिकल 370 से मैं असहमत हूँ। इसलिए वे छोड़ना चाहते थे। उन्हें आश्वासन दिया गया, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ और नजरअंदाज किए जाने के कारण इस्तीफा दे दिया।”
केंद्रीय गृहमंत्री ने आगे कहा था, “श्री बीसी रॉय ने पत्र लिखा कि अंबेडकर और राजा जी जैसे लोग मंत्रिमंडल छोड़ेंगे तो क्या होगा। तो उनको नेहरू जी ने जवाब में लिखा- राजाजी के जाने से थोड़ा-बहुत नुकसान तो होगा, लेकिन अंबेडकर के जाने से मंत्रिमंडल कमजोर नहीं होगा।” अमित शाह ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस जिसका विरोध करती रही है, उसका वोट के लिए नाम लेना कितना उचित है। अंबेडकर जी मानने वाले पर्याप्त संख्या में आ गए हैं, इसलिए आप अंबेडकर अंबेडकर कर रहे हो।”