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‘मेरा वोट कभी नहीं कटा, मैं हमेशा वोट डालती हूँ’: जिस महिला का नाम लेकर प्रपंच फैला रहे थे केजरीवाल, उसने ही AAP की ‘झूठ-फरेब’ की राजनीति की खोली पोल

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की राजनीति एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने किदवई नगर में आयोजित एक कार्यक्रम में दावा किया कि एक महिला मतदाता चंद्रा का नाम वोटर लिस्ट से कट गया है। उन्होंने इसे अपने भाषण में मतदाताओं को गुमराह करने और अपनी सरकार की ओर ध्यान खींचने करने का जरिया बनाया।

हालाँकि, जब चंद्रा ने खुद इस दावे पर प्रतिक्रिया दी, तो केजरीवाल के बयान की पोल खुल गई। चंद्रा ने साफ कहा, “मेरा नाम कभी वोटर लिस्ट से नहीं कटा। मैंने हमेशा नियमित रूप से अपना वोट डाला है। मुझे नहीं पता कि केजरीवाल ने ऐसा क्यों कहा। हो सकता है उन्हें कोई गलतफहमी हुई हो।” चंद्रा ने यह भी जोड़ा कि शायद केजरीवाल ने किसी और महिला के बारे में बात की हो, लेकिन गलती से उनकी ओर इशारा कर दिया।

चंद्रा के पति एम. रघु ने भी इस मामले में सफाई दी। उन्होंने कहा, “हम दोनों का नाम हमेशा वोटर लिस्ट में था और है। हो सकता है केजरीवाल ने अनजाने में चंद्रा का नाम लिया हो।”

अब बीजेपी ने इस मामले पर आप से जवाब माँगा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने हमला बोलते हुए एक्स पर लिखा, “मतदाता सूची पर भ्रम फैला रहे महाठग को महिला ने दिया मुँहतोड़ जवाब। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी एक सुसंगठित नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध प्रवास को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। इस राष्ट्रविरोधी अभियान से ध्यान हटाने के लिए उन्होंने भाजपा पर पूर्वांचलियों के वोटर कार्ड रद्द करने का झूठा आरोप लगाया। उनकी चाल और झूठ दोनों ही पूरी तरह से उजागर हो चुके हैं। अब अरविंद केजरीवाल बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं अपने ही फैलाए जाल में!”

इस घटनाक्रम ने केजरीवाल की राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहली बार नहीं है जब केजरीवाल ने इस तरह के दावे किए हैं। विरोधियों का कहना है कि वह अक्सर बिना जाँचे-परखे आरोप लगाते हैं, जिससे उनकी राजनीति का असली चेहरा उजागर होता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या यह सुविधाएँ झूठ और गुमराह करने वाली राजनीति को सही ठहराती हैं? क्या मतदाताओं को भ्रमित करना किसी भी सरकार के लिए सही कदम हो सकता है?

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं को 2100 रुपए प्रति माह देने की घोषणा की थी और इसका रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिया था। हालाँकि दिल्ली सरकार के ही विभाग ने साफ किया कि ऐसी कोई योजना अभी शुरू नहीं हुई है।

बहरहाल, केजरीवाल के इन दावों से न केवल उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ा है, बल्कि यह भी दिखा है कि कैसे वह अपनी राजनीति को चमकाने के लिए ऐसे बयान देते हैं। चंद्रा और उनके पति के बयान ने साफ कर दिया कि यह घटना केवल एक राजनीतिक चाल थी।

इस पूरे घटनाक्रम से यह बात साफ हो जाती है कि केजरीवाल की राजनीति केवल लोकलुभावन वादों और झूठे दावों पर आधारित है। जनता के मुद्दों से भटकाने और गुमराह करने की यह कोशिश एक जिम्मेदार नेता के लिए बेहद निराशाजनक है। इससे यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि जनता के मुद्दों को भूलकर केवल सुर्खियाँ बटोरने के लिए झूठे दावे किए जाएँ?

अटल जी का व्यक्तित्व अपनी तरफ खींचता था, उनका रोपा बीज आज वटवृक्ष: PM मोदी ने वाजपेयी की 100वीं जयंती पर लिखा लेख

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं…लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? अटल जी के ये शब्द कितने साहसी हैं…कितने गूढ़ हैं। अटल जी, कूच से नहीं डरे…उन जैसे व्यक्तित्व को किसी से डर लगता भी नहीं था। वो ये भी कहते थे… जीवन बंजारों का डेरा आज यहां, कल कहां कूच है..कौन जानता किधर सवेरा…आज अगर वो हमारे बीच होते, तो वो अपने जन्मदिन पर नया सवेरा देख रहे होते।

मैं वो दिन नहीं भूलता जब उन्होंने मुझे पास बुलाकर अंकवार में भर लिया था…और जोर से पीठ में धौल जमा दी थी। वो स्नेह…वो अपनत्व…वो प्रेम…मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है।आज 25 दिसंबर का ये दिन भारतीय राजनीति और भारतीय जनमानस के लिए एक तरह से सुशासन का अटल दिवस है। आज पूरा देश अपने भारत रत्न अटल को, उस आदर्श विभूति के रूप में याद कर रहा है, जिन्होंने अपनी सौम्यता, सहजता और सहृदयता से करोड़ों भारतीयों के मन में जगह बनाई। पूरा देश उनके योगदान के प्रति कृतज्ञ है। उनकी राजनीति के प्रति कृतार्थ है।

21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए उनकी एनडीए सरकार ने जो कदम उठाए, उसने देश को एक नई दिशा, नई गति दी। 1998 के जिस काल में उन्होंने पीएम पद संभाला, उस दौर में पूरा देश राजनीतिक अस्थिरता से घिरा हुआ था। 9 साल में देश ने चार बार लोकसभा के चुनाव देखे थे। लोगों को शंका थी कि ये सरकार भी उनकी उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाएगी। ऐसे समय में एक सामान्य परिवार से आने वाले अटल जी ने, देश को स्थिरता और सुशासन का मॉडल दिया। भारत को नव विकास की गारंटी दी।

वो ऐसे नेता थे, जिनका प्रभाव भी आज तक अटल है। वो भविष्य के भारत के परिकल्पना पुरुष थे। उनकी सरकार ने देश को आईटी, टेलीकम्यूनिकेशन और दूरसंचार की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ाया। उनके शासन काल में ही, एनडीए ने टेक्नॉलजी को सामान्य मानवी की पहुंच तक लाने का काम शुरू किया। भारत के दूर-दराज के इलाकों को बड़े शहरों से जोड़ने के सफल प्रयास किये गए। वाजपेयी जी की सरकार में शुरू हुई जिस स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने भारत के महानगरों को एक सूत्र में जोड़ा वो आज भी लोगों की स्मृतियों पर अमिट है।

लोकल कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए भी एनडीए गठबंधन की सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे कार्यक्रम शुरू किए। उनके शासन काल में दिल्ली मेट्रो शुरू हुई, जिसका विस्तार आज हमारी सरकार एक वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में कर रही है। ऐसे ही प्रयासों से उन्होंने ना सिर्फ आर्थिक प्रगति को नई शक्ति दी, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों को एक दूसरे से जोड़कर भारत की एकता को भी सशक्त किया।

जब भी सर्व शिक्षा अभियान की बात होती है, तो अटल जी की सरकार का जिक्र जरूर होता है। शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानने वाले वाजपेयी जी ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहाँ हर व्यक्ति को आधुनिक और गुणवत्ता वाली शिक्षा मिले। वो चाहते थे भारत के वर्ग, यानि ओबीसी, एससी, एसटी, आदिवासी और महिला सभी के लिए शिक्षा सहज और सुलभ बने। उनकी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बड़े आर्थिक सुधार किए।

इन सुधारों के कारण भाई-भतीजावाद में फँसी देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली। उस दौर की सरकार के समय में जो नीतियाँ बनीं, उनका मूल उद्देश्य सामान्य मानव के जीवन को बदलना ही रहा। उनकी सरकार के कई ऐसे अद्भुत और साहसी उदाहरण हैं, जिन्हें आज भी हम देशवासी गर्व से याद करते है। देश को अब भी 11 मई 1998 का वो गौरव दिवस याद है, एनडीए सरकार बनने के कुछ ही दिन बाद पोकरण में सफल परमाणु परीक्षण हुआ।

इसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ का नाम दिया गया। इस परीक्षण के बाद दुनियाभर में भारत के वैज्ञानिकों को लेकर चर्चा होने लगी। इस बीच कई देशों ने खुलकर नाराजगी जताई, लेकिन तब की सरकार ने किसी दबाव की परवाह नहीं की। पीछे हटने की जगह 13 मई को न्यूक्लियर टेस्ट का एक और धमाका कर दिया गया। 11 मई को हुए परीक्षण ने तो दुनिया को भारत के वैज्ञानिकों की शक्ति से परिचय कराया था। लेकिन 13 मई को हुए परीक्षण ने दुनिया को ये दिखाया कि भारत का नेतृत्व एक ऐसे नेता के हाथ में है, जो एक अलग मिट्टी से बना है।

उन्होंने पूरी दुनिया को ये संदेश दिया, ये पुराना भारत नहीं है। पूरी दुनिया जान चुकी थी, कि भारत अब दबाव में आने वाला देश नहीं है। इस परमाणु परीक्षण की वजह से देश पर प्रतिबंध भी लगे, लेकिन देश ने सबका मुकाबला किया। वाजपेयी सरकार के शासन काल में कई बार सुरक्षा संबंधी चुनौतियां आईं। करगिल युद्ध का दौर आया। संसद पर आतंकियों ने कायरना प्रहार किया। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले से वैश्विक स्थितियां बदलीं, लेकिन हर स्थिति में अटल जी के लिए भारत और भारत का हित सर्वोपरि रहा।

जब भी आप वाजपेयी जी के व्यक्तित्व के बारे में किसी से बात करेंगे तो वो यही कहेगा कि वो लोगों को अपनी तरफ खींच लेते थे। उनकी बोलने की कला का कोई सानी नहीं था। कविताओं और शब्दों में उनका कोई जवाब नहीं था। विरोधी भी वाजपेयी जी के भाषणों के मुरीद थे। युवा सांसदों के लिए वो चर्चाएँ सीखने का माध्यम बनतीं। कुछ सांसदों की संख्या लेकर भी, वो कॉन्ग्रेस की कुनीतियों का प्रखर विरोध करने में सफल होते। भारतीय राजनीति में वाजपेयी जी ने दिखाया, ईमानदारी और नीतिगत स्पष्टता का अर्थ क्या है।

संसद में कहा गया उनका ये वाक्य… सरकारें आएंगी, जाएँगी, पार्टियाँ बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए…आज भी मंत्र की तरह हम सबके मन में गूँजता रहता है। वो भारतीय लोकतंत्र को समझते थे। वो ये भी जानते थे कि लोकतंत्र का मजबूत रहना कितना जरुरी है। आपातकाल के समय उन्होंने दमनकारी कॉन्ग्रेस सरकार का जमकर विरोध किया, यातनाएँ झेली। जेल जाकर भी संविधान के हित का संकल्प दोहराया। NDA की स्थापना के साथ उन्होंने गठबंधन की राजनीति को नए सिरे से परिभाषित किया।

वो अनेक दलों को साथ लाए और NDA को विकास, देश की प्रगति और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधि बनाया। पीएम पद पर रहते हुए उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब हमेशा बेहतरीन तरीके से दिया। वो ज्यादातर समय विपक्षी दल में रहे, लेकिन नीतियों का विरोध तर्कों और शब्दों से किया। एक समय उन्हें कॉन्ग्रेस ने गद्दार तक कह दिया था, उसके बाद भी उन्होंने कभी असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।

उन में सत्ता की लालसा नहीं थी। 1996 में उन्होंने जोड़-तोड़ की राजनीति ना चुनकर, इस्तीफा देने का रास्ता चुन लिया। राजनीतिक षड्यंत्रों के कारण 1999 में उन्हें सिर्फ एक वोट के अंतर के कारण पद से इस्तीफा देना पड़ा। कई लोगों ने उनसे इस तरह की अनैतिक राजनीति को चुनौती देने के लिए कहा, लेकिन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी शुचिता की राजनीति पर चले। अगले चुनाव में उन्होंने मजबूत जनादेश के साथ वापसी की।

संविधान के मूल्य संरक्षण में भी, उनके जैसा कोई नहीं था। डॉ. श्यामा प्रसाद के निधन का उनपर बहुत प्रभाव पड़ा था। वो आपात के खिलाफ लड़ाई का भी बड़ा चेहरा बने। इमरजेंसी के बाद 1977 के चुनाव से पहले उन्होंने ‘जनसंघ’ का जनता पार्टी में विलय करने पर भी सहमति जता दी। मैं जानता हूँ कि ये निर्णय सहज नहीं रहा होगा, लेकिन वाजपेयी जी के लिए हर राष्ट्रभक्त कार्यकर्ता की तरह दल से बड़ा देश था, संगठन से बड़ा, संविधान था।

हम सब जानते हैं, अटल जी को भारतीय संस्कृति से भी बहुत लगाव था। भारत के विदेश मंत्री बनने के बाद जब संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण देने का अवसर आया, तो उन्होंने अपनी हिंदी से पूरे देश को खुद से जोड़ा। पहली बार किसी ने हिंदी में संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात कही। उन्होंने भारत की विरासत को विश्व पटल पर रखा। उन्होंने सामान्य भारतीय की भाषा को संयुक्त राष्ट्र के मंच तक पहुँचाया। राजनीतिक जीवन में होने के बाद भी, वो साहित्य और अभिव्यक्ति से जुड़े रहे।

वो एक ऐसे कवि और लेखक थे, जिनके शब्द हर विपरीत स्थिति में व्यक्ति को आशा और नव सृजन की प्रेरणा देते थे। वो हर उम्र के भारतीय के प्रिय थे। हर वर्ग के अपने थे। मेरे जैसे भारतीय जनता पार्टी के असंख्य कार्यकर्ताओं को उनसे सीखने का, उनके साथ काम करने का, उनसे संवाद करने का अवसर मिला। अगर आज बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है तो इसका श्रेय उस अटल आधार को है, जिसपर ये दृढ़ संगठन खड़ा है।

उन्होंने बीजेपी की नींव तब रखी, जब कॉन्ग्रेस जैसी पार्टी का विकल्प बनना आसान नहीं था। उनका नेतृत्व, उनकी राजनीतिक दक्षता, साहस और लोकतंत्र के प्रति उनके अगाध समर्पण ने बीजेपी को भारत की लोकप्रिय पार्टी के रूप में प्रशस्त किया। श्री लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों के साथ, उन्होंने पार्टी को अनेक चुनौतियों से निकालकर सफलता के सोपान तक पहुँचाया।

जब भी सत्ता और विचारधारा के बीच एक को चुनने की स्थितियां आईं, उन्होंने इस चुनाव में विचारधारा को खुले मन से चुन लिया। वो देश को ये समझाने में सफल हुए कि कॉन्ग्रेस के दृष्टिकोण से अलग एक वैकल्पिक वैश्विक दृष्टिकोण संभव है। ऐसा दृष्टिकोण वास्तव में परिणाम दे सकता है। आज उनका रोपित बीज, एक वटवृक्ष बनकर राष्ट्र सेवा की नव पीढ़ी को रच रहा है। अटल जी की 100वीं जयंती, भारत में सुशासन के एक राष्ट्र पुरुष की जयंती है।

आइए हम सब इस अवसर पर, उनके सपनों को साकार करने के लिए मिलकर काम करें। हम एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जो सुशासन, एकता और गति के अटल सिद्धांतों का प्रतीक हो। मुझे विश्वास है, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के सिखाए सिद्धांत ऐसे ही, हमें भारत को नव प्रगति और समृद्धि के पथ पर प्रशस्त करनें की प्रेरणा देते रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह लेख अपने ब्लॉग पर लिखा है। आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

रेप केस में ACP मोहसिन खान की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट ने लगा रखी है रोक, कानपुर IIT की पीड़ित छात्रा ने दर्ज कराई एक और FIR: कहा- मुझे बदनाम कर रहे, धमकी दे रहे

पीएचडी छात्रा से रेप के आरोपों से घिरे उत्तर प्रदेश पुलिस के ACP मोहसिन खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पीड़िता ने मंगलवार (24 नवंबर 2024) को मोहसिन के खिलाफ कानपुर में एक नई FIR दर्ज करवाई। इस FIR में मोहसिन और उनके वकील पर पीड़िता को आपराधिक धमकी देने और मानहानि सहित कई आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में भी जाँच शुरू कर दी है। दरअसल, मोहसिन शादी के नाम पर पीड़िता का शोषण कर रहे थे। उनकी बीवी का इंस्टाग्रम हैंडल चेक करके पीड़िता को अपने साथ हो रही धोखाधड़ी की जानकारी हुई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को पीड़िता कल्याणपुर थाने पहुँची। यहाँ उसने ACP मोहसिन खान और उनके वकील गौरव दीक्षित के खिलाफ थाने में तहरीर दी। तहरीर में पीड़िता ने आरोप लगाया कि मोहसिन और गौरव दीक्षित उसके खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। इस बयानबाजी से न सिर्फ पीड़िता का चरित्र हनन हो रहा है, बल्कि उसकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

आरोप लगाया गया है कि हाई कोर्ट से मिले स्टे के बाद मोहसिन खान अपनी ताकत का दुरूपयोग कर रहे हैं और पीड़िता को धमका रहे हैं। मोहसिन खान की तरफ से मिल रही धमकियों की वजह से वो डिप्रेशन में आ गई है। तनाव की वजह से वो IIT कैम्पस से बाहर नहीं निकल पा रही है। उसे घबराहट हो रही है, जिसकी वजह से वो अपनी कानूनी लड़ाई ठीक से नहीं लड़ पा रही है।

वहीं, नई FIR में मोहसिन खान के साथ उनके वकील गौरव दीक्षित को भी नामजद किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता पर निर्दोष बच्चे को मारने का झूठा आरोप लगाया। यहाँ तक कि दीक्षित ने पीड़िता के शादीशुदा होने और कई रिश्तों में रहने के आरोप लगाए। शिकायत में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि पीड़िता पर जल्द ही झूठी FIR दर्ज करवाने की तैयारी है।

पीड़िता ने म्यूजिक कंसर्ट के कुछ वीडियो भी सबूत के तौर पर पेश किए हैं। इन वीडियो में ACP मोहसिन खान पीड़ित छात्रा के साथ डांस कर रहे हैं। पुलिस इस वीडियो को एक अहम सबूत मानकर चल रही है। वह पीड़िता और मोहसिन खान के बीच नजदीकी के सबूत के तौर पर इस वीडियो को अदालत में भी पेश करने की तैयारी कर रही है।

पीड़िता की इस शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) में मानहानि की धारा 356 (2) और नुकसान पहुँचाने की धारा 351(1) के तहत दर्ज हुई है। कल्याणपुर के ACP अभिषेक पांडेय ने मीडिया को बताया कि मामले में जाँच जारी है। सामने आए तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

तेज हुई SIT की जाँच

इस बीच ACP मोहसिन खान पर लगे आरोपों की जाँच के लिए गठित SIT टीम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। विशेष जाँच दल (SIT) ने सोमवार को कानपुर IIT में 4 अन्य लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें 2 गार्ड, 1 प्रोफेसर और पीड़िता का एक दोस्त शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन सभी ने ACP मोहसिन और पीड़िता के बीच में पूर्व में रही नजदीकियों को स्वीकार किया है।

पीड़िता के मोबाइल से व्हाट्सएप चैट आदि भी रिकवर करके जाँच करवाई जा रही है। SIT को दिए गए बयान में पीड़िता ने बताया है कि 27 नवंबर 2024 को ACP मोहसिन खान एक बच्चे के अब्बा बने थे। उस समय उनकी बीवी अस्पताल में भर्ती थी। अगले दिन 28 नवंबर को मोहसिन खान पीड़िता से मिलने IIT कैम्पस पहुँचे। यहाँ ACP मोहसिन खान लगभग 4 से 5 घंटे तक रहे।

इस दौरान पीड़ित छात्रा को मोहसिन खान के व्यवहार में काफी बदलाव दिखा। इसके बाद पीड़िता ने 28 नवंबर 2024 को मोहसिन खान की बीवी के सोशल मीडिया हैंडलों को पहली बार खँगाला था। इस दौरान पीड़िता को पता चला कि मोहसिन खान पहले से ही शादीशुदा हैं और उनका हाल ही में उनका एक बच्चा भी हुआ है।

क्या है पूरा मामला

बताते चलें कि 12 दिसंबर 2024 को कानपुर के IIT में PhD कर रही एक छात्रा ने साल 2013 बैच के UP PCS अधिकारी ACP मोहसिन खान पर शादी का झाँसा देकर लगातार रेप करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने कहा था कि मोहसिन ने खुद को कुँवारा बताकर उससे बातचीत शुरू की थी। मोहसिन का भेद खुला तो उन्होंने अपनी बीवी से तलाक लेने का झाँसा दिया और पीड़िता का शोषण करते रहे।

सँभल में कुएँ की खुदाई कर रही नगरपालिका की टीम को धमकाने लगा मस्जिद का मुतवल्ली आमिर, पुलिस ने भेजा जेल: फरार 7 दंगाई भी पकड़ाए

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अवैध कब्जेदारी के खिलाफ और प्राचीन धरोहरों की तलाश में चल रही खुदाई के काम में अड़ंगा डालने का प्रयास किया गया है। मंगलवार (24 दिसंबर 2024) को यह बाधा शहर की एक मस्जिद के मुतवल्ली ने डाली है। आमिर नाम के मुतवल्ली ने कुओं की खुदाई का विरोध किया। उसकी इस करतूत पर नाराज हिन्दू समुदाय के लोगों ने गुस्सा जताया। पुलिस ने आमिर का चालान कर दिया। वहीं, 24 नवंबर की हिंसा से जुड़े 7 अन्य दंगाइयों को भी पुलिस ने पकड़ा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला सदर कोतवाली क्षेत्र का है। संभल नगरपालिका शहर के तमाम कुओं का जीर्णोद्धार करवा रही है। इसी कड़ी में नगरपालिका के कर्मचारी मंगलवार लाडम सराय मोहल्ले में पहुँचे। इस मोहल्ले में एक मस्जिद है। मस्जिद के बगल एक खाली जमीन है। इस जमीन पर एक कुआँ है, जिसे मिट्टी में दबा दिया गया था। कर्मचारी कुछ मजदूरों के साथ मिलकर इसकी खुदाई में जुट गए।

कुछ ही देर में पास की मस्जिद का मुतवल्ली आमिर वहाँ आ धमका। वह नगरपालिका के स्टाफ सहित खुदाई कर रहे मजदूरों क हड़काने लगा। वहाँ आसपास के मुस्लिम तबके के लोग भी जमा होने लगे। इसी दौरान हिन्दुओं को भी मुतवल्ली के करतूत की जानकारी मिली। वो आमिर की हरकत के विरोध में मौके पर पहुँच गए। दोनों पक्षों के आमने-सामने होने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई।

पुलिस बल ने हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के लोगों को समझा-बुझा कर घर वापस लौटाया। हालाँकि मुतवल्ली आमिर पर प्रशासन के समझाने का कोई असर नहीं पड़ा। वह घटनास्थल पर हंगामा करता रहा। आखिरकार पुलिस ने आमिर को गिरफ्तार कर लिया। उसका शांतिभंग की धाराओं में चालान कर दिया गया है। मुतवल्ली की गिरफ्तारी के बाद कुएँ की खुदाई का काम फिर से शुरू कर दिया गया।

अब तक 47 दंगाई गिरफ्तार

इस बीच 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान की गई हिंसा के फरार आरोपितों की धरपकड़ में जुटी संभल पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने फरार चल रहे 7 अन्य हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम शोएब, सुजाउद्दीन, आजम, जावेद अख्तर, शाहद, मुस्तफा हसन और अजहरूद्दीन हैं। ये सभी संभल के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। इनकी पहचान हिंसा के दौरान मिली वीडियो फुटेज के आधार पर हुई है।

पुलिस को इन सभी की लोकेशन शहर की बुलबुली मस्जिद के पास मिली थी। इन 7 नई गिरफ्तारियों के बाद अब संभल हिंसा के 1 माह बाद गिरफ्तार हुए कुल उपद्रवियों की तादाद 47 पहुँच गई है। अन्य 91 हमलावर चिन्हित किए जा चुके हैं। इनको भी पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। फ़िलहाल पुलिस अभी तमाम नामजदों सहित अन्य अज्ञात हमलावरों की पहचान और लोकेशन ट्रेस कर के दबिश दे रही है।

पहले मर्दों के साथ बनाता था यौन संबंध, फिर हत्या कर उनकी लाश के पैर छूकर माँगता था माफी: पकड़ा गया समलैंगिक सीरियल किलर, 11 लोगों की कर चुका है हत्या

पंजाब मे पुलिस ने एक सीरियल किलर को पकड़ा है। उसने अलग-अलग समय पर 11 लोगों की हत्याएँ की थीं। पकड़े गए शख्स ने हत्या, लूट और अप्राकृतिक संबंध बनाने की बात कबूली है। पकड़ा गया हत्यारा एक समलिंगी (गे) है और नशे का आदी भी था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूपनगर जिले की पुलिस ने सोमवार (23 दिसंबर, 2024) को उसे गिरफ्तार किया। आरोपित की पहचान 43 वर्षीय सोढ़ी उर्फ़ रामस्वरूप के तौर पर हुई है। सोढ़ी 3 बच्चों का पिता है। नशा व अन्य गंदी आदतों की वजह से 2 साल पहले उसके परिवार ने उसका बहिष्कार कर दिया था।

घर से निकाले जाने के बाद सोढ़ी इधर से उधर आवारा बन कर घूमा करता था। वह अक्सर लोगों से लिफ्ट ले कर उनके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता था। बाद में वह लोगों से पैसों की माँग करता था। माँग न पूरी होने पर वह सामने वाले की हत्या कर के उनका सामान लूट लिया करता था। उसकी गिरफ्तारी से हालिया कई हत्याओं के बारे में खुलासा हुआ है।

उसने अगस्त, 2024 में कीरतपुर साहिब में भी एक युवक को मारा था। 18 अगस्त इस 37 वर्षीय एक व्यक्ति की लाश मिली थी। उसकी हत्या गला घोंट कर की गई थी। मृतक की तलाश मनिंदर सिंह के तौर पर हुई थी। पुलिस ने इसके बाद इस मामले की जाँच चालू की थी। अब इस मामले में होशियारपुर जिले के रहने वाले सोढ़ी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मनिंदर सिंह को मार कर सोढ़ी ने उसका मोबाइल भी लूट लिया था। वह मृतक की बाइक भी साथ ले जाना चाहता था पर पहिया नाली में फँस जाने की वजह से वो ऐसा नहीं कर पाया। पूछताछ में सोढ़ी ने कबूल किया कि वह 11 लोगों की हत्याएँ अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग समय में कर चुका है।

ये हत्याएँ रूपनगर के अलावा होशियारपुर और फतेहगढ़ साहिब आदि जिलों में की गईं हैं। पूछताछ में यह भी पता चला है कि कत्ल करने के बाद उसे पछतावा होता था। वह लाश के पैर छू कर माफ़ी माँगता था। सोढ़ी द्वारा मारे गए लोगों में रूपनगर के जगजीत नगर का हरप्रीत सिंह भी शामिल है।

हरप्रीत की नग्न लाश रूपनगर के निरंकारी भवन के पास 24 जनवरी, 2024 को मिली थी। सोढ़ी ने कत्ल के बाद उसकी पीठ पर लिख दिया था। सोढ़ी का ही एक अन्य शिकार रूपनगर के ही घनौली इलाके में पड़ने वाले गाँव बेगमपुरा का मुकन्दर उर्फ़ बिल्ला भी बना था। 43 वर्षीय बिल्ला ट्रैक्टर बनाने का काम करता था। अप्रैल 2024 में उसकी लाश मिली थी।

बिल्ला के शरीर पर भी घाव पाए थे। बिल्ला और हरप्रीत की हत्या में पुलिस अज्ञात आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच कर रही थी। सोढ़ी ने इन दोनों हत्याओं में शामिल होना कबूल कर लिया है। आनंदपुर साहिब में एक व्यक्ति के साथ सोढ़ी ने मारपीट भी की थी।

पुलिस ने सोढ़ी से विस्तृत पूछताछ के लिए कोर्ट से उसका 5 दिनों का रिमांड लिया है। रिमांड अवधि के दौरान उसके द्वारा क़बूले गए सभी केसों की तस्दीक और कुछ नए अपराधों में सोढ़ी की संलिप्तता मिलने की आशंका है।

न संजीवनी, न महिला सम्मान… अपने दस्तावेज न दें, हो सकता है फ्रॉड: केजरीवाल की स्कीम को दिल्ली सरकार के ही विभागों ने बताया फर्जी, AAP चला रही रजिस्ट्रेशन अभियान

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार विधानसभा चुनावों से पहले अपनी ‘महिला सम्मान योजना’ और ‘संजीवनी योजना’ को खूब प्रचारित कर रहे हैं। वहीं, AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल सहित AAP कार्यकर्ता इन योजनाओं के लिए घूम-घूम कर पंजीकरण करा रहे हैं। अब दिल्ली सरकार के दो विभागों- स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास ने नोटिस जारी करके दोनों योजनाओं को फर्जी बताया है।

दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में कहा गया है कि उसे मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जानकारी मिली है कि ‘एक राजनीतिक दल’ ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ के तहत दिल्ली की महिलाओं को 2100 रुपए प्रतिमाह देने का दावा कर रहा है। दिल्ली सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना अधिसूचित नहीं की गई है।

नोटिस में आगे कहा गया है कि अगर ऐसी योजना आती है तो उसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाएगा। विभाग ने इस योजना को भ्रामक बताया है और कहा है कि जो भी राजनीतिक दल इस योजना के नाम पर फॉर्म भरवा रहा है, यह धोखाधड़ी के सिवाय और कुछ नहीं है। इसलिए ऐसी धोखाधड़ी से बचें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें।

नोटिस में आगे लिखा है, “नागरिकों को सावधान किया जाता है कि इस योजना के नाम पर व्यक्तिगत विवरण जैसे कि बैंक खाता, वोटर आईडी, फोन नंबर आदि के लीक होने का खकतरा हो सकता है और इसका फायदा साइबर अपराधी उठा सकते हैं। दिल्ली के सामान्य नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे इस गैर-मौजूद योजना के झूठे वादों को ना मानें, क्योंकि ये भ्रामक हैं।”

वहीं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ‘संजीवनी योजना’ को भी धोखाधड़ी बताया है और जनता को सचेत रहने के लिए कहा है। केजरीवाल या आम आदमी पार्टी सरकार की इस कथित योजना में दिल्ली के सभी अस्पतालों में 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। अब विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि इस तरह की कोई योजना ही मौजूद नहीं है।

विभाग का कहना है कि अवैध व्यक्तियों ने पंजीकरण अभियान चलाया है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों से आधार और बैंक खाता जानकारी सहित व्यक्तिगत जानकारी माँगी जा रही है। इसके साथ ही नकली स्वास्थ्य योजना कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने जनता को इस योजना पर विश्वास नहीं करने तथा व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी है।

बता दें कि इससे एक दिन पहले ही भाजपा ने आम आदमी पार्टी की इन योजनाओं को लेकर AAP सरकार पर हमला बोला था। भाजपा ने कहा था कि ये योजनाएँ सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त नहीं हैं। दरअसल, AAP ने पहले इन दोनों योजनाओं के लिए अपने वॉलंटियर्स के माध्यम से पूरे दिल्ली में रजिस्ट्रेशन का काम शुरू किया है।

इन नोटिसों के बाद AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने राजनीति शुरू कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने कहा, “महिला सम्मान योजना और संजीवनी योजना से ये लोग (BJP) बुरी तरह से बौखला गए हैं। अगले कुछ दिनों में फ़र्ज़ी केस बनाकर आतिशी जी को गिरफ्तार करने का इन्होंने प्लान बनाया है। उसके पहले “आप” के सीनियर नेताओं पर रेड की जाएँगी।”

महाकुंभ में लेंगे पीलीभीत एनकाउंटर का बदला: खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने वीडियो जारी कर दी धमकी, PM मोदी-CM योगी को कहे अपशब्द

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में हुए तीन आतंकियों के एनकाउंटर के बाद अब खालिस्तानियों ने धमकियाँ देना चालू कर दिया है। खालिस्तानी आतंकी और सिख्स फॉर जस्टिस के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू ने धमकी दी है कि वह इस एनकाउंटर का बदला लेगा। उसने महाकुंभ के मौके पर यह बदला लेने की बात कही है।

पन्नू ने मंगलवार (24 दिसम्बर, 2024) को एक वीडियो जारी किया। 3 मिनट के इस वीडियो में उसने कहा है कि यह एनकाउंटर फर्जी था और मारे गए तीनों आतंकी असल में शहीद हैं। उसने परिवार को मदद देने का भी ऐलान किया है। उसने कहा है कि SFJ उन तीनों परिवारों को ₹5 लाख देगा।

उसने साथ ही में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर भी अपशब्द कहे। पन्नू ने कहा है पीलीभीत में ही 1991 में एक फर्जी एनकाउंटर हुआ था जिसमें 11 सिखों को मार दिया गया था। उसने कहा है कि हालिया एनकाउंटर का बदला वह प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ में लेगा।

पन्नू ने कहा है कि 14 जनवरी, 29 जनवरी और 3 फरवरी, 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में हमला किया जाएगा। उसने हिंदुत्व को आतंकवाद करार दिया है। उसने पंजाब की आजादी और खालिस्तान को लेकर भी अपना प्रलाप दोहराया है। पन्नू की धमकी को पीलीभीत पुलिस ने संज्ञान में लिया है।

पीलीभीत पुलिस ने साइबर थाने में इस संबंध में एक FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने बताया है कि वह इस वीडियो को लेकर जाँच कर रहे हैं। कई जगह दावा किया गया है कि पीलीभीत पुलिस को भी इस घटना के बाद धमकियाँ दी गई हैं।

गौरतलब है कि सोमवार (23 दिसम्बर, 2024) को पीलीभीत के पूरनपुर में उत्तर प्रदेश पुलिस और पंजाब पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में तीन खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था। यह तीनों पंजाब के गुरदासपुर में एक पुलिस चौकी पर हमला करके भागे थे और पीलीभीत में आकर छुप गए थे।

यह तीनों आतंकी आतंकी खालिस्तान जिंदाबाद फ़ोर्स नामक देश विरोधी संगठन से जुड़े हुए थे। इनके हैंडलर ग्रीस, पाकिस्तान और इंग्लैंड में बैठे हुए थे। तीनों के पास से काफी हथियार भी बरामद हुए थे। एनकाउंटर में मार गिराए जाने के बाद उनके शरीर को पंजाब भेज दिया गया है।

जिनको आयुर्वेद/वेदों का ज्ञान नहीं, च्यवनप्राश कैसे बनाएँगे? बाबा रामदेव की पतंजलि के खिलाफ डाबर पहुँचा हाई कोर्ट, सिब्बल बोले- आदतन अपराधी, विज्ञापन पर रोक लगे

मशहूर कंपनी डाबर ने पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक मामला दायर किया है। डाबर का आरोप है कि पतंजलि अपने च्यवनप्राश उत्पादों के खिलाफ निगेटिव ऐड्स यानी विज्ञापन (नकारात्मक प्रचार अभियान) चला रहा है। डाबर ने हाई कोर्ट से तुरंत आदेश देने की माँग की है ताकि पतंजलि को इस प्रकार के निगेटिव प्रचार विज्ञापनों को चलाने से रोका जा सके। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस मिनी पुष्करना ने इस मामले में नोटिस जारी किया है और मामले की सुनवाई जनवरी के आखिरी सप्ताह में की जाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जज ने पहले इस मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का विचार किया था, लेकिन डाबर के द्वारा तुरंत राहत की माँग करने पर उन्होंने इस मामले की सुनवाई का निर्णय लिया। डाबर को विशेष आपत्ति पतंजलि के उस विज्ञापन पर है जिसमें स्वामी रामदेव कहते हैं, “जिनको आयुर्वेद और वेदों का ज्ञान नहीं, चारक, सुश्रुत, धन्वंतरि और च्यवनऋषि की परंपरा में ‘ऑरिजिनल’ च्यवनप्राश कैसे बना पाएँगे?” इस बयान से यह इशारा किया जा रहा है कि केवल पतंजलि का च्यवनप्राश ‘ऑरिजिनल’ है और बाजार में बाकी कंपनियों के च्यवनप्राश उत्पादों को आयुर्वेद की परंपरा का ज्ञान नहीं है, इस कारण वे नकली या साधारण हैं।

डाबर की ओर से वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने इस मामले में तर्क रखा और कहा कि पतंजलि आयुर्वेद लगातार ऐसा कर रहा है। उन्होंने इस साल पतंजलि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया, जिसमें पतंजलि पर अवमानना का मामला दर्ज किया गया था। सिब्बल का कहना है कि ‘साधारण’ कहकर पतंजलि ने च्यवनप्राश की पूरी श्रेणी को ही निचा दिखाया है, जो आयुर्वेदिक चिकित्सा का एक प्राचीन और मान्यता प्राप्त रूप है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सभी च्यवनप्राश को प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में दिए गए विशिष्ट सूत्रों और सामग्री का पालन करना अनिवार्य है, जिससे यह दावा कि कुछ च्यवनप्राश ‘साधारण’ हैं, गुमराह करने वाला और प्रतियोगियों के लिए हानिकारक है।

सिब्बल ने यह भी बताया कि पतंजलि ने इस विज्ञापन को विभिन्न टीवी चैनलों पर चलाया है, जिनमें कलर्स, स्टार, जी, सोनी और आज तक शामिल हैं। इसके अलावा, यह विज्ञापन दैनिक जागरण के दिल्ली संस्करण में भी प्रकाशित हुआ है। उन्होंने अदालत को बताया कि इन विज्ञापनों को पिछले तीन दिनों में 900 बार दिखाया गया है, और ये विज्ञापन जनता के दिमाग पर असर डाल सकते हैं।

पतंजलि आयुर्वेद की ओर से वरिष्ठ वकील जयंत मेहता ने दायर की गई याचिका की वैधता पर सवाल उठाए और मामले का जवाब दाखिल करने के लिए समय माँगा। इस प्रकार यह मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए है और देखना होगा कि अदालत किस पक्ष में फैसला सुनाती है।

जो ‘पादरी’ से बने सुप्रीम कोर्ट जज, जिन्होंने राम मंदिर पर फैसले को बताया ‘न्याय का मजाक’, उनको NHRC का अध्यक्ष बनवाना चाहती थी कॉन्ग्रेस: जस्टिस रामासुब्रमण्यन की नियुक्ति से हुई नाराज

कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर से एक ऐसे व्यक्ति की देश के महत्वपूर्ण पद के लिए वकालत की है, जिसने हाल ही में हिन्दुओं को लेकर आपत्तिजनक बातें कही थीं। इसी व्यक्ति ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत बताया था। यह व्यक्ति जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन हैं। रोहिंटन नरीमन सुप्रीम कोर्ट में जज रहे हैं। कॉन्ग्रेस ने उनकी वकालत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मुखिया तौर पर हाल ही में की। उनको नियुक्त ना किए जाने पर कॉन्ग्रेस ने एक डिसेंट नोट (असहमति पत्र) भी लिखा है। यह पत्र अब सामने आया है।

NHRC के मुखिया के तौर पर सोमवार (23 दिसम्बर, 2024) को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज वी रामासुब्रमण्यन को नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति उस कमिटी की सिफारिश पर की गई है, जो NHRC के मुखिया और सदस्यों के नामों पर मुहर लगाती है।

इस कमिटी में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के साथ ही संसद के दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष और राज्यसभा के उपसभापति भी होते हैं। इसी कमिटी की बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस मुखिया तथा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रोहिंटन नरीमन के नाम की वकालत की थी।

यह बैठक 18 दिसम्बर, 2024 को संसद भवन में हुई थी। इस बैठक में जस्टिस रोहिंटन नरीमन के नाम पर सहमति ना बनने के कारण राहुल गाँधी और खरगे ने एक असहमति का नोट लिखा। इस असहमति नोट में उन्होंने कहा है कि वह जस्टिस फली नरीमन को इसलिए NHRC का मुखिया बनाना चाहते थे क्योंकि वह अल्पसंख्यक पारसी समुदाय से आते हैं।

इसके अलावा उन्होंने नरीमन को बौद्धिक गहराई और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध बताया है। इन्हीं फली नरीमन ने हाल ही में जस्टिस AM अहमदी मेमोरियल लेक्चर में हिन्दुओं को लेकर काफी अशोभनीय बातें कही थी।

उन्होंने राम मंदिर को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट को कोसा था और मस्जिद ना बनाने पर दुख जाहिर किया था। रोहिंटन नरीमन ने कहा था कि 1984 में विश्व हिन्दू परिषद की राम मंदिर बनाने की माँग ‘तानाशाही’ और ‘अत्याचारी’ थी। उन्होंने कहा राम मंदिर के मामले में हिन्दू पक्ष को हमेशा कानून के खिलाफ रहने वाला भी करार दिया था।

रोहिंटन नरीमन ने इसी वक्तव्य में इस बात पर भी निराशा जताई थी कि बाबरी गिराने के एवज में उसी राम जन्मभूमि के सीने पर मस्जिद दुबारा क्यों नहीं खड़ी की गई। मस्जिद ना तामीर किए जाने को नरीमन ने ‘न्याय के साथ भद्दा मजाक‘ बताया था और कहा था कि यह एक भरपाई होती।

जिन रोहिंटन नरीमन ने देश की लगभग 100 करोड़ हिन्दू आबादी के लिए श्रद्धेय राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त करने वाले फैसले को गलत बताया, उन्हें मानवाधिकार आयोग का मुखिया बनाना चाहती थी। जिस मानवाधिकार आयोग का काम देश के सभी लोगों को सर उठा कर जिन्दगी जीने के अधिकार को सुरक्षित करना है, उसका मुखिया कॉन्ग्रेस उन रोहिंटन नरीमन को बनाना चाहती थी जो राम मंदिर मामले में हिन्दुओं को कानून के खिलाफ मानते हैं। विचारणीय बात यह है कि रोहिंटन नरीमन यदि इसके अध्यक्ष बनते तो उनके हिन्दुओं के प्रति क्या विचार रहते।

रोहिंटन नरीमन के पिता फली नरीमन ने भी हिन्दू संत योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने को लेकर भी अपनी खीझ दिखाई थी। उन्होंने यह तब किया था जब अपने बेटे रोहिंटन नरीमन को पारसी समुदाय का पादरी बनाया था।

फैज की बाइक पर हवाबाजी या किराए का झगड़ा… भोपाल में तलवारबाजी-पत्थरबाजी क्यों? सिख बोले- पगड़ी की बेअदबी की, मुस्लिम बोले- हमारा रास्ता बंद किया

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ 2 दिन पहले बाइक चलाने को लेकर हुए विवाद में मंगलवार (24 दिसंबर 2024) को तलवारें लहराई गईं और जमकर पथराव किया गया। यह विवाद सिख और मुस्लिमों के बीच हुआ है। लगभग आधे दर्जन लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला भोपाल के जहाँगीराबाद क्षेत्र के पुरानी गल्ला मंडी का है। दरअसल, यह मामला 22 दिसंबर 2024 की घटना से जुड़ा हुआ है। 22 दिसंबर यानी रविवार को मोहम्मद फैज़ नाम का एक युवक सिखों की बस्ती सरदारपुरा की संकरी गलियों से फर्राटे मारता हुआ बाइक ले जा रहा था। कुछ लोगों ने फैज़ को टोका तो वह बहस करने लगा।

आखिर में फैज ने सब्जी के एक ठेले से चाकू लेकर सरदार पर हमला कर दिया। इस मामले में पुलिस ने पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वहीं, तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल में भी डाल दिया है। इनमें से एक मोहम्मद फैज भी है। फरार चल रहे दो अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से सिख समाज में नाराजगी थी। सिख समाज ने पगड़ी की बेअदबी का आरोप लगाया था।

इसको लेकर मंगलवार (24 दिसंबर 2024) को सिखों ने माइकल नाम के एक मुस्लिम पर हमला कर दिया। जवाब में मुस्लिम पक्ष ने भी पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान कई लोग घायल हो गए। इनमें महिलाएँ भी शामिल हैं। सिख पक्ष का आरोप है कि उनके घरों के आगे से मुस्लिम समुदाय के लोग बेढंगे तौर पर वाहन चलाते हुए निकलते हैं। वहाँ गली में बच्चे खेल रहे होते हैं। उन्हें नुकसान हो सकता है।

ऑर्गेनाइजर की पत्रकार शुभी विश्वकर्मा के मुताबिक, जिस जहाँगीराबाद इलाके में हिंसा हुई है, वो मुस्लिम बहुल है। यहाँ की अधिकतर दुकानों के मालिक मुस्लिम समुदाय के लोग हैं। हिन्दू और सिख समुदाय के लोगों ने यहाँ किराए पर दुकानें ले रखी हैं। कुछ दिनों पहले मकान मालिकों और किरायेदारों में भाड़े को लेकर विवाद भी हुआ था। दोनों पक्षों में तनाव की एक बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है।

दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष का कहना है कि सिख समुदाय के लोगों ने उनके आने-जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया है। मुस्लिम पक्ष के मुताबिक, सिखों की हिंसक भीड़ ने कहा, “यहाँ किसी मुसलमान को नहीं रहने देंगे।” दोनों पक्षों से कुल 6 लोग घायल हुए हैं जिसमें महिलाएँ भी शामिल बताई जा रही हैं। इन सभी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

हिंसा की सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस फ़ोर्स पहुँचा। बल प्रयोग करके भीड़ को तितर-बितर किया गया। केस दर्ज करके हमलावरों को चिन्हित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। DCP प्रियंका शुक्ला के मुताबिक, तनाव को देखते हुए मौके पर पहले से फ़ोर्स तैनात थी। अतिरिक्त फ़ोर्स बुलाकर हिंसा को काबू किया गया। दोनों तरफ से शिकायतें दर्ज की जा रही हैं।