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मणिपुर में कुकी आतंकी इस्तेमाल कर रहे SpaceX का स्टारलिंक? हाई स्पीड इंरनेट डिवाइस मिलने से उठे सवाल, मस्क बोले- भारत में उनकी कंपनी की सेवा नहीं

हिंसाग्रस्त मणिपुर में सुरक्षा बलों ने कुकी विद्रोहियों वाले इम्फाल पूर्वी जिले से स्टारलिंक इंटरनेट डिवाइस, स्नाइपर राइफल, पिस्तौल, ग्रेनेड और अन्य हथियार बरामद किए हैं। अमेरिकी टेक दिग्गज एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक दुनिया की पहली सैटेलाइट है जो लाइसेंस मिलने के बाद दुनिया में कहीं भी ब्रॉडबैंड इंटरनेट प्रदान करती है।

इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि 13 दिसंबर को चुराचाँदपुर, चंदेल, इम्फाल पूर्व और कांगपोकपी सहित कई जिलों में एक अभियान चलाया गया था। इसी दौरान यह बरामदगी की गई है। भारत में विद्रोहियों द्वारा स्टारलिंक के उपयोग को लेकर एक सवाल के जवाब में मस्क ने कहा कि ये आरोप ‘झूठे’ हैं। उन्होंने कहा कि ‘भारत में स्टारलिंक उपग्रह बीम बंद’ हैं।

इम्फाल पूर्वी जिले के केराओ खुनौ में सुरक्षा बलों को एक स्टारलिंक राउटर और एंटीना जब्त मिला। यह सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्शन रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (RPF)/पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा इस्तेमाल किए जा रहा था। एक 20-मीटर FTP केबल, एक सैटेलाइट राउटर और एक सैटेलाइट इंटरनेट एंटीना बरामद किया गया। इससे जाहिर है कि कुकी विद्रोहियों को कहीं बाहर से सहायता मिल रही है।

बता दें कि म्यांमार पहले से ही इस तरह के उपकरणों का उपयोग करता आ रहा है। सिग्नल इंटेलिजेंस के अनुसार, म्यांमार में ऐसे कई ठिकाने हैं जहाँ दुनिया भर के लोगों को ठगने के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराधियों द्वारा स्टारलिंक सैटेलाइट सिस्टम का उपयोग किया जाता है। स्टारलिंक इंडोनेशिया, मलेशिया और श्रीलंका जैसे भारत के पड़ोसी देशों में काम कर रहा है।

यह पहली बार नहीं है कि भारतीय क्षेत्र में स्टारलिंक उपकरण पाए गए थे। नवंबर में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास भारतीय जलक्षेत्र में म्यांमार के एक जहाज को जब्त किया गया था। यह जहाज 6 टन से अधिक मेथ की तस्करी करने की कोशिश कर रहा था। इनके पास से अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों के अलावा, सुरक्षा बलों को ड्रग तस्करों के पास से उन्नत जीपीएस उपकरणों के साथ एक स्पेसएक्स स्टारलिंक डिवाइस भी मिली थी।

भारतीय सेना और असम राइफल्स की संयुक्त कार्रवाई में एक एके-47 राइफल, एक स्नाइपर राइफल, एक म्यांमार निर्मित 0.22 पिस्तौल, म्यांमार निर्मित पाँच 9 मिमी पिस्तौल, म्यांमार निर्मित एक 7.65 मिमी पिस्तौल, एक .303 बोल्ट-एक्शन राइफल, दो .303 सिंगल-बोल्ट स्नाइपर राइफल, एक 9 मिमी कार्बाइन मशीन गन (सीएमजी), पाँच फैक्टरी निर्मित 12 मिमी सिंगल बैरल राइफल, एक .22 राइफल, एक 12 मिमी शॉटगन, तीन स्थानीय रूप से निर्मित मोर्टार, एक सिंगल बैरल बंदूक, एक 5.56 मिमी एमए 4 असॉल्ट राइफल, एक एमए-1 (एमके-आई) असॉल्ट राइफल, एक एयर गन, ग्रेनेड और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया।

दरअसल, सुरक्षा बल 56 वर्षीय मैतेई शख्स लैशराम कमलबाबू सिंह की तलाश कर रहे थे। वे 25 नवंबर से कांगपोकपी जिले से लापता हो गए थे। सेना और असम राइफल्स के कम से कम 2,000 जवानों ने उनकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी की। सेना ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में ट्रैकर कुत्तों, ड्रोन और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। इसी दौरान यह जखीरा मिला।

मुस्लिम बढ़ते गए तो भगवान की मूर्तियों के साथ पलायन को मजबूर हुए हिंदू, मुजफ्फरनगर में खंडहर बना शिव मंदिरः संभल में मिला एक और प्राचीन कुआँ

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में एक शिव मंदिर मिला है। ये शिव मंदिर 1970 में बना था, लेकिन कभी हिंदू बाहुल्य रहे इस इलाके में मुस्लिमों की संख्या बढ़ती गई और हिंदुओं को पलायन करना पड़ा और मंदिर पूरी तरह से खहंडर बन गया। अब फिर से इस शिव मंदिर पर प्रशासन की नजर पड़ी है। वहीं, संभल में एक और प्राचीन कुआँ मिला है, जिसकी खुदाई शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि ये कुआँ भी पौराणिक महत्व का है।

मुजफ्फरनगर में शिव मंदिर की दुर्दशा, हिंदुओं ने किया था पलायन

मुजफ्फरनगर जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र में मोहनलाल लद्दावाला मोहल्ले में 54 साल पहले एक शिव मंदिर की स्थापना हुई थी। उस समय यह क्षेत्र हिंदू बाहुल्य था, लेकिन बाद में जब 90 के दशक में अयोध्या राम मंदिर का आंदोलन तेज होने के बाद यहाँ की परिस्थितियाँ बदल गईं। दंगों और बढ़ती मुस्लिम आबादी के चलते हिंदू समाज के लोग इस इलाके से पलायन कर गए। इसके साथ ही, इस मंदिर से भगवान शिव की मूर्ति और अन्य धार्मिक प्रतीक भी हटा लिए गए। अब यह मंदिर खंडहर बन चुका है।

इस शिव मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हुए इलाके से पलायन कर चुके परिवार के सदस्य भाजपा नेता सुधीर खटीक ने कहा कि 1970 में मंदिर की स्थापना हुई थी। यहाँ नियमित पूजा-अर्चना होती थी, लेकिन 1990 के बाद जब मुस्लिम आबादी बढ़ी, तो हालात बदलने लगे। मोहल्ले में मीट की दुकानें खुलने लगीं और सांप्रदायिक माहौल बिगड़ गया। ऐसे में हिंदू परिवारों ने मंदिर की मूर्तियाँ हटा दीं और दूसरी जगह स्थापित कर लीं।

आज मंदिर पर आसपास के लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। किसी ने छज्जे बढ़ा लिए, तो किसी ने पार्किंग बना ली। सुधीर खटीक का कहना है कि सरकार को इस मंदिर की पुनर्स्थापना करनी चाहिए। उनका मानना है कि धर्म और संस्कृति की सुरक्षा ही राष्ट्र की सुरक्षा का आधार है।

संभल में प्राचीन कुओं की खोज जारी, एक और कुआँ मिला

संभल जिले में हाल ही में एक और प्राचीन कुआँ मिला है। जामा मस्जिद के पास मोहल्ला टंकी में मिले इस कुएँ के साथ ही अब तक संभल जिले में आधा दर्जन से अधिक प्राचीन कुओं की खुदाई हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका प्राचीन जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने और उनके सौंदर्यीकरण पर काम कर रहे हैं।

संभल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. मणिभूषण तिवारी ने बताया कि ये कुएँ जल संरक्षण और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। अब तक 10 फीट तक खुदाई की जा चुकी है। उनका कहना है कि इन जल स्त्रोतों को रिचार्ज करने और धार्मिक कार्यक्रमों के पुनः आयोजन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

शहर की ऐतिहासिक पहचान के अनुसार, संभल में 52 सराय, 68 तीर्थ, और 19 कूप (कुएँ) हुआ करते थे। इनकी खोज और पुनर्स्थापना से क्षेत्र की धरोहर को नया जीवन मिलेगा। यह पहल ‘कैच द रेन’ और जल संरक्षण अभियानों के तहत चल रही है।

मुजफ्फरनगर के शिव मंदिर और संभल के प्राचीन कुओं की कहानी उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की दुर्दशा को सामने लाती है।

बच्चों के सूसू-पॉटी वाले डायपर, पैगंबर मुहम्मद का नाम और वायरल वीडियो: बिल्ली का कार्टून और अरबी में पैगंबर पर पहले भी बवाल – जानिए क्या है पूरा मामला

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि डायपर बनाने वाली एक कंपनी के डायपर पर मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद का नाम लिखा हुआ है। वीडियो को वायरल करते हुए डायपर बनाने वाली कंपनी पेंपर्स को बॉयकाट करने की बात भी कही जा रही है। यह वीडियो फेसबुक, इंस्टग्राम से लेकर यूट्यूब तक पर वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कह रहा है कि पेंपर्स के डायपर के अंदर मुहम्मद का नाम लिखा हुआ है। इस वीडियो को शेयर करते हुए इरा अरमान मलिक नाम के एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, “वायरल वीडियो भोपाल का बताया जा रहा है, जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति ने डायपर बनाने वाली कंपनी का डायपर खोला और उस पर प्यारे ‘मुहम्मद साहब’ का नाम लिखा हुआ पाया। उसकी पहचान का पता लगाया जा रहा है।सभी मुस्लिम दुकानदार भाइयों को इस कंपनी के उत्पाद बेचना बंद कर देना चाहिए। अपने शहर में इस कंपनी के वितरक से शिकायत करें।”

इनफॉर्म्ड डॉट इन नाम के इंस्टा हैंडल ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “भोपाल से वायरल हुए एक वीडियो में एक मुस्लिम व्यक्ति ने दावा किया है कि उसे एक खास कंपनी द्वारा बनाए गए डायपर के अंदर ‘मुहम्मद साहब’ लिखा हुआ मिला है। अधिकारी मामले की जाँच कर रहे हैं। इस बीच, वॉलमार्ट की भगवान गणेश की तस्वीरों वाले अंडरगारमेंट बेचने के लिए आलोचना की गई है। ये घटनाएँ बताती हैं कि कैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं के साथ खेल रही हैं, जो सामाजिक सद्भाव के लिए हानिकारक है।”

इस वीडियो को इंस्टाग्राम की तरह फेसबुक पर भी वायरल किया जा रहा है।

मौलाना सलीम अशरफ कासमी नाम के एक फेसबुक हैंडल ने वीडियो को शेयर करते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “लेडीज ग्रुप में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। कंपनी के डायपर का हर हिंदुस्तानी मुसलमान बहिष्कार करे और इस कंपनी के खिलाफ हर जिले में मुक़दमा दर्ज करें नबी की तौहीन का।”

वहीं, न्यूज नाऊ नाम के यूट्यूब चैनल ने लगभग दो महीना पहले इसे शेयर किया था। उसने लिखा, “पैंपर्स ने मुहम्मद की शान में गुस्ताखी की।”

साल 2018 में भी हुआ था वायरल

इसी तरह का वीडियो साल 2018 में भी वायरल हुआ था। उस समय इससे जुड़ी खबरें मीडिया में भी सामने आई थीं। उस साल फरवरी में हैदराबाद के कुछ मुस्लिमों ने बेबी डायपर ब्रांड पैम्पर्स पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि मुस्लिमों के पैंगम्बर मोहम्मद का इसमें अपमान किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डायपर पर बिल्ली की नाक, मुँह, मूँछ और बाईं आँख की छवि अरबी में पैगम्बर मोहम्मद की वर्तनी की तरह है।

इस घटना के बाद कई जगहों पर पैंपर्स के डायपर जलाकर विरोध प्रदर्शन किए गए थे। उस दौरान एक मुस्लिम व्यक्ति ने कहा था कि उसने बाजार से डायपर लाकर उसकी जाँच की तो यह बात सही पाई गई। बाद में कुछ लोग पैम्पर्स के कुछ पैकेट जमीन पर रखकर उन्हें आग लगाते नजर आए। जब डायपर जल रहे होते हैं तो एक व्यक्ति ‘मूसा, मूसा, जाकिर मूसा’ का नारा लगाता हुआ सुनाई दे रहा था।

तब मुस्लिम प्रोपेगेंडा वेबसाइट मिल्ली गजट ने क्लिप शेयर करते हुए लिखा था, “पैम्पर्स को एक फतवे का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एक मुस्लिम समूह ने दावा किया है कि उन्होंने नैपी ब्रांड के कार्टून बिल्ली शुभंकर की मूंछों में “मोहम्मद” शब्द देखा है।”

उस साल ‘सच न्यूज’ नाम के एक यूट्यूब चैनल ने भी इस खबर को साझा किया था।

इसको लेकर हैदराबाद के दबीरपुरा पुलिस स्टेशन में कई मुस्लिमों ने शिकायत भी दर्ज कराई थी। दरसगाह जिहाद-ओ-शहादत (डीजेएस) ने दावा किया था कि डायपर पर बनी बिल्ली की कार्टून उर्दू और अरबी में ‘मोहम्मद’ के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्द से मिलती जुलती है।

उन्होंने 20 फरवरी 2018 में दबीरपुरा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया था, “नंगी आंखों से भी पहचाना जा सकता है कि इस पर पैगंबर का नाम उर्दू/अरबी में लिखा हुआ है।” शिकायत में पैंपर्स बनाने वाली कंपनी पर मुस्लिमों की भावनाओं को जानबूझकर आहत करने का आरोप लगाया था।

हालाँकि, 6 साल बाद इसी तरह का एक वीडियो क्यों वायरल हो रहा है, इसके पीछे की वजह सामने नहीं आई है। इसको लेकर ना ही किसी तरह न्यूज सामने आई है और ना ही इससे संबंधित किसी तरह की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसके बावजूद अक्टूबर 2024 से ही इस कंपनी के डायपर के विरोध में वीडियो शेयर किए जा रहे हैं।

₹20 करोड़ की संपत्ति, बेटी को नमाज पढ़ते देख हिंदू बाप को हुआ ब्रेन हेमरेज… फराज अतर के बार-बार रेप, इस्लामी ट्यूशन और धर्मांतरण से तंग आकर बेटी भी आग लगा कर मरी

गाजियाबाद में बीते 11 दिसंबर को आत्मदाह करने वाली एक युवती के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। युवती के पिता ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में आरोप लगाया है कि दिल्ली के शाहदरा निवासी फराज अतर ने उनकी बेटी को प्रेमजाल में फंसाकर बार-बार दुष्कर्म किया और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया। फराज द्वारा शादी के नाम पर रखी गई शर्त और धोखे से आहत होकर उनकी बेटी ने खुद को आग लगाकर जान दे दी।

करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए रचा पूरा खेल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कविनगर थानाक्षेत्र के निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने समय में एक सफल कारोबारी थे और उनकी करीब 20 करोड़ रुपये की संपत्ति उनकी 30 वर्षीय बेटी के नाम थी। बुजुर्ग के अनुसार, फराज ने संपत्ति पर कब्जा करने के उद्देश्य से उनकी बेटी को प्रेमजाल में फंसाया। उसने खुद को अविवाहित बताते हुए शादी का झांसा दिया और बेटी का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण किया।

बुजुर्ग ने बताया कि फराज ने कर्ज में डूबा होने की बात कहकर उनकी बेटी से लाखों रुपये ऐंठ लिए। कुछ समय बाद युवती का व्यवहार बदलने लगा। 14 नवंबर को जब बुजुर्ग अपनी बेटी के कमरे में गए, तो उन्होंने उसे इस्लाम मजहब से संबंधित गतिविधियाँ (नमाज पढ़ते हुए) करते हुए देखा। यह देखकर बुजुर्ग को गहरा आघात पहुँचा और उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। इसके बाद उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

आईसीयू में ‘शादी का प्रस्ताव’

शिकायत में बुजुर्ग ने यह भी बताया कि 15 नवंबर को जब वह आईसीयू में भर्ती थे, तब फराज अतर उनकी बेटी के साथ अस्पताल पहुँचा। उसने उनके सामने बेटी का हाथ माँगते हुए शादी का प्रस्ताव रखा। बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि फराज ने उनकी गंभीर स्थिति का फायदा उठाकर उन्हें शादी के लिए हाँ करने पर मजबूर कर दिया।

इतना ही नहीं, फराज ने भाई कासिफ के कहने पर उनसे एक कागज पर हस्ताक्षर कराए, जिसमें लिखा था कि बेटी की दूसरे धर्म के युवक से शादी पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। फराज ने भाई को सुप्रीम कोर्ट का वकील बताकर अपनी बात मनवाई और बुजुर्ग को बेटी की कसम देकर यह निर्देश दिया कि वह किसी अन्य परिजन को इस बारे में न बताएँ।

मतांतरण के लिए ‘ट्यूशन’ लगवाया

बुजुर्ग के अनुसार, उनकी बेटी ने उन्हें बताया था कि फराज ने न सिर्फ उसकी संपत्ति हथियाने की कोशिश की बल्कि उसका धर्म परिवर्तन कराने के लिए भी दबाव बनाया। उसने युवती को दूसरे धर्म के रीति-रिवाज और धार्मिक किताबें पढ़ने के लिए मजबूर किया। फराज ने एक विशेष ट्यूशन लगवाकर युवती को धर्मांतरण की प्रक्रिया से गुजरने को बाध्य किया।

पीड़ित पिता ने यह भी आरोप लगाया कि फराज ने उनकी बेटी को नशे की लत लगा दी। मंकी डस्ट जैसे घातक नशे का इस्तेमाल कर वह उसे बेसुध करता और फिर दुष्कर्म करता।

संपत्ति के नाम पर शादी की शर्त

24 नवंबर को फराज ने युवती और उसके पिता को कौशांबी के एक होटल में बुलाया और अपने परिवार के सदस्यों से मिलवाया। होटल का पूरा खर्च युवती से ही दिलवाया गया। इस मुलाकात के बाद युवती ने शादी के दस्तावेज तैयार करवाए, लेकिन फराज ने शादी की तारीख टालने का बहाना बनाना शुरू कर दिया।

10 दिसंबर को युवती ने अपने पिता को बताया कि फराज ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि जब तक संपत्ति उसके नाम नहीं होती, वह शादी नहीं करेगा। इस बात से आहत युवती ने 11 दिसंबर को अपने चंद्रपुरी स्थित घर में खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली।

डीसीपी सिटी राजेश कुमार के अनुसार, “शाहदरा निवासी फराज अतर, उसके भाई कासिफ, माँ माहे तलत, बहन सना समेत अन्य के खिलाफ दुष्कर्म, धर्मांतरण, आत्महत्या के लिए उकसाने और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।”

बुजुर्ग पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने की माँग की है। उनका कहना है कि फराज और उसके परिवार ने उनकी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी और अंत में उसे अपनी जान गँवाने के लिए मजबूर कर दिया।

‘अमित शाह को अंबेडकर से नफरत, संसद में की घृणित बात’: ‘खतना’ वीडियो वायरल कर रहे कॉन्ग्रेसी नेता और दलाल पत्रकार: नेहरू ने बाबा साहेब को किया था जलील, यह है वीडियो की सच्चाई

देश की संसद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भाषण के क्लिप के एक हिस्से को काटकर कॉन्ग्रेसी और विरोधी दल सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। यह पहली बार नहीं है कि कॉन्ग्रेस ऐसा कर रही है। जब-जब कॉन्ग्रेस मुद्दाविहीन होती है तो इसी तरह के फेक न्यूज फैलाकर सरकार को बदनाम करने का प्रयास करती है। ये काम सिर्फ कॉन्ग्रेसी या विपक्षी नेता ही नहीं, बल्कि कुछ दरबारी पत्रकार भी बखूबी करते हैं।

दरअसल, राज्यसभा में संविधान पर बहस के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार (17 दिसंबर 2024) को डॉक्टर भीरामराव अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वालों को आड़े हाथों लिया था। अपने लगभग 90 मिनट के स्पीच में अमित शाह ने कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं को अंबेडकर के साथ पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं कॉन्ग्रेस द्वारा की गई हरकतों को देश के सामने रखा था। इसके बाद कॉन्ग्रेस चिढ़ गई।

अपनी चिढ़ ने कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं द्वारा दरबारी पत्रकारों ने अमित शाह के भाषण के हिस्से को शेयर करके सरकार को बदनाम करना शुरू कर दिया। कॉन्ग्रेस ने X अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “‘अभी एक फैशन हो गया है- अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर.. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।’ अमित शाह ने बेहद घृणित बात की है।”

कॉन्ग्रेस ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “इस बात से जाहिर होता है कि BJP और RSS के नेताओं के मन में बाबा साहेब अंबेडकर जी को लेकर बहुत नफरत है। नफरत ऐसी कि उनके नाम तक से इनको चिढ़ है। ये वही लोग हैं जिनके पूर्वज बाबा साहेब के पुतले फूँकते थे, जो ख़ुद बाबा साहेब के दिए संविधान को बदलने की बात करते थे। जब जनता ने इन्हें सबक सिखाया तो अब इन्हें बाबा साहेब का नाम लेने वालों से चिढ़ हो गई है। शर्मनाक! अमित शाह को इसके लिए देश से माफी माँगनी चाहिए।”

यही बात कॉन्ग्रेस के नेता जयराम और सुप्रिया श्रीनेत सहित तमाम नेताओं ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शेयर की है। इन नेता ने सिर्फ अमित शाह को ही नहीं, बल्कि बाबा साहेब के नाम पर भाजपा और RSS को भी बदनाम करने की कोशिश की है। रणविजय सिंह, ममता त्रिपाठी आदि कई कथित पत्रकारों ने भी अमित शाह के भाषण के आधे-अधूरे क्लिप को वायरल किया।

डॉक्टर लक्ष्मण यादव नाम के एक कथित बुद्धिजीवी ने इस अधूरे क्लिप को वायरल करते हुए लिखा, “अमित शाह को अगर गोडसे, गोलवलकर, सावरकर से फुरसत मिल गई होती और अंबेडकर को पढ़ लिए होते, अंबेडकर को जान लिए होते, अम्बेडकर की भारतीय समाज में मौजूदगी और अहमियत देख लिए होते, तो शायद ऐसा कभी न बोलते।”

उन्होंने आगे लिखा, “डॉ. अंबेडकर ने करोड़ों वंचितों, शोषितों, मजलूमों, महिलाओं को उस जगह से निकाला है, जो नरक से बदतर जीवन जीने को मजबूर थे. उनके लिए स्वर्ग और स्वर दोनों दिया है बाबा साहब ने।”

दरअसल, ये सारा फेक न्यूज एक षडयंत्र के तहत वायरल किया जा रहा है, ताकि अमित शाह, भाजपा और संघ को दलित-वंचित विरोधी साबित किया जा सके। वहीं, कॉन्ग्रेस के नेता अपने पूर्वजों की करतूतों को छिपाने और वर्तमान परिस्थितियों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए अब फेक न्यूज जैसे गैर-कानूनी काम करने लगे हैं।

अमित शाह के भाषण के जिस हिस्से को विरोधियों द्वारा साझा किया जा रहा है, वह सही, लेकिन उसका संदर्भ क्या है उसे विरोधी छिपा गए। इससे अमित शाह का बयान एकतरफा दिखने लगा, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। अमित शाह ने अंबेडकर के साथ कॉन्ग्रेस के नेताओं के दुर्व्यवहार को उन्होंने उजागर किया था।

अमित शाह ने अपने भाषण में कहा, “अभी यह फैशन चल गया है अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर……. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों का स्वर्ग मिल जाता। हमें आनंद है कि ये अंबेडकर का नाम लेते हैं, लेकिन अंबेडकर जी के प्रति आपका भाव क्या है ये मैं बताता हूँ।” इसके बाद अमित शाह कॉन्ग्रेस और पंडित नेहरू की पोल खोलकर रख देते हैं।

अमित शाह ने आगे कहा, “अंबेडकर जी ने देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे दिया? अंबेडकर जी ने कई बार कहा कि अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के साथ हुए व्यवहार से मैं असंतुष्ट हूँ। सरकार की विदेश नीति से मैं असहमत हूँ और आर्टिकल 370 से मैं असहमत हूँ। इसलिए वे छोड़ना चाहते थे। उन्हें आश्वासन दिया गया, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ और नजरअंदाज किए जाने के कारण इस्तीफा दे दिया।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने आगे बताया, “श्री बीसी रॉय ने पत्र लिखा कि अंबेडकर और राजा जी जैसे लोग मंत्रिमंडल छोड़ेंगे तो क्या होगा। तो उनको नेहरू जी ने जवाब में लिखा- राजाजी के जाने से थोड़ा-बहुत नुकसान तो होगा, लेकिन अंबेडकर के जाने से मंत्रिमंडल कमजोर नहीं होगा।” अमित शाह ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस जिसका विरोध करती रही है, उसका वोट के लिए नाम लेना कितना उचित है। अंबेडकर जी मानने वाले पर्याप्त संख्या में आ गए हैं, इसलिए आप अंबेडकर अंबेडकर कर रहे हो।”

इस तरह, केंद्रीय मंत्री अमित शाह के पूरे भाषण को सुना जाए तो वो साफ तौर पर बता रहे हैं कि जिस अंबेडकर का नाम अब कॉन्ग्रेस जप रही है, उन्हीं अंबेडकर को उसने कितना जलील किया है। हालाँकि, अपने राजनीतिक फायदे के लिए कन्ग्रेस, उसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी, जयराम रमेश, सुप्रिया श्रीनेत और उनके दरबारी पत्रकार आधे-अधूरे क्लिप को चलाकर फेक न्यूज फैला रहे हैं।

जिसने मार डाला 58 भारतीय लोगों को… उस आंतकी के जनाजे में शामिल मुस्लिम भीड़ के साथ कई विधायक-नेता-एक्टर: अनहोनी से बचने के लिए तैनात रहे 2000+ पुलिसकर्मी

साल 1998 में कोयंबटूर में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इन धमाकों में 58 लोगों की जान चली गई थी, तो 231 लोग घायल हो गए थे। इन धमाकों के पीछे अल-उम्मा नाम के कट्टरपंथी संगठन का नाम आया था, जिसे बैन कर दिया गया। इसी संगठन का मुखिया था एस ए बाशा, जो उन सीरियल ब्लास्ट के मुख्य कर्ता-धर्ताओं में से एक था। उसे उम्रकैद की सजा मिली थी। एसए बाशा दुर्दांत आतंकियों में था, जिसने 2003 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जान से मारने की धमकी थी। एसए बाशा की सोमनार (16 दिसंबर 2024) को अस्पताल में मौत हो गई थी, और अगले दिन (17 दिसंबर 2024) उसे दफनाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एस ए बाशा नाम के आतंकी को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग पहुँचे। उसे किसी ‘हीरो’ की तरह विदाई दी गई, जबकि उसने तमिलनाडु को कई बार आतंकी हमलों का दर्द दिया। उसकी आखिरी विदाई के लिए पूरे कोयंबटूर में 2000 पुलिसवालों और 200 आरएएफ जवानों की तैनाती की गई। इतनी भारी सुरक्षा में उसका विदाई जुलूस निकाला गया और किसी ‘शहीद’ जैसी विदाई दी गई।

आतंकी एसए बाशा की अंतिम यात्रा पर वरिष्ठ पत्रकार राहुल शिवशंकर ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “कोयंबटूर, तमिलनाडु में इस्लामी आतंकी एस.ए. बाशा की शवयात्रा निकाली जा रही है। ये वही आतंकी है जो 1998 कोयंबटूर धमाकों का मास्टरमाइंड था, जिसमें 58 भारतीयों की जान गई थी। ये पाकिस्तान या बांग्लादेश में नहीं, बल्कि भारत में हो रहा है। न कोई ‘शांतिप्रिय’ इसे लेकर आवाज उठा रहा है, न ‘धर्मनिरपेक्षता’ का झंडा लहराने वाले कुछ कह रहे हैं। ‘संवैधानिकता’ के ठेकेदार तो संविधान के नाम पर अपनी राजनीति में व्यस्त हैं!”

हैरानी की बात नहीं है कि इस्लामिक कट्टरपंथी धड़ों, राजनीतिक पार्टियों के नेता उसकी अंतिम यात्रा में पहुँचे। यही नहीं, खुद को तमिलियन नेशनल कहने वाली पार्टी के सबसे बड़े नेता सीमान ने तो यहाँ तक कह दिया कि डीएमके सरकार को एसए बाशा को पहले ही रिहा कर देना था, जोकि डीएमके सरकार के हाथ में था। ऐसा न करने के लिए डीएमके सरकार की आलोचना भी की गई।

हालाँकि बाशा को पैरोल देकर अस्पताल में रखने वाले इन्हीं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के पिता करुणानिधि जब मुख्यमंत्री थे, तब बाशा के साथी आतंकवादी को जेल में मालिक तक की सुविधा दी जाती थी। आईए, अब बताते हैं कि कौन से बड़े नेता इस आतंकवादी की आखिरी यात्रा में पहुँचे, जो उसके दक्षिण उक्कड़म स्थित रोज गार्डन वाले घर से शुरू होकर फ्लावर मार्केट स्थित हैदर अली टीपू सुल्तान सुन्नथ जमात मस्जिद तक गई।

1- एनटीके नेता सीमान- सीमान तमिल एक्टर हैं और नाम तमिलार काची नाम की राजनीतिक पार्टी चलाते हैं। वो तमिल पहचान, भाषा, स्वायत्तता की बात करते हैं। तमिल ईलम जैसे बैन आउटफिट के समर्थक भी हैं। उन्होंने डीएमके सरकार को ये कहते हुए बयान दिया है कि आतंकवादी एसए बाशा को पहले ही डीएमके सरकार जेल से निकाल सकती थी।

2- कोंगु इलैगनार पेरावई पार्टी के अध्यक्ष यू थानियारसु। इनकी पार्टी तमिलनाडु के अंदर भी क्षेत्रीय पार्टी है और AIADMK-DMK के बीच झूलती रहती है। थानियारसु AIADMK के टिकट पर 2 बार विधायक भी रहे हैं।

3- वीसीके के उप महासचिव वन्नी अरासु: VCK यानी विदुथलाई चिरुथैगल काची, इस पार्टी को दलित पैंथर्स पार्टी या दलित पैंथर्स इयक्कम यानी आंदोलन भी कहा जाता है। कहने को ये पार्टी दलित और तमिल राष्ट्रवाद की बात कहती है, लेकिन पार्टी के उप महासचिव वन्नी अरासु आतंकवादी को अंतिम विदाई देने पहुँचे।

4- मणिथानेया मक्कल काची के महासचिव और मन्नापरई विधायक पी अब्दुल समद: स्थानीय विधायक पी अब्दुल समद, एसए बाशा का करीबी रहा है। अल-उम्मा के बैन होने के बाद इसके जुड़े सदस्यों ने कट्टरपंथी संगठन की जगह एमकेके पहले टीएनएमएमके और फिर नाम से इस्लामी पार्टी बनाई। ये पार्टी AIADMK के बाद DMK के साथ गठबंधन में है और इस पार्टी के 2 विधायक हैं।

इस पार्टी का अध्यक्ष एम एच जवाहिरुद्दीन है। जवाहरुद्दीन सिमी का सदस्य भी रहा है और एसए बाशा का बेहद करीबी भी। वो राज्य में 25 से ज्यादा इस्लामिक ट्रस्ट, सोसायटी चलाता है और मजहबी दान के नाम पर एंबुलेस सेवा भी देता है।

इन नेताओं के अलावा कई छोटे-बड़े छुटभैय्ये नेता भी एसए बाशा जैसे दोषी पाए गए और उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकवादी को आखिरी विदाई देने पहुँचे। खास बात ये है कि तमिलनाडु में इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ाने वालों में से एक रहे बाशा की आखिरी यात्रा निकालने की योजना का बीजेपी ने विरोध किया था, लेकिन डीएमके सरकार ने आतंकवादी की न सिर्फ शान से विदाई यात्रा निकाली, बल्कि ‘हीरो’ की तरह विदाई देने जनाजे में उमड़ी भीड़ को मैनेज करने के लिए 2000-2200 जवानों की सेवाएँ भी उपलब्ध कराई।

फिर से वही जामिया, फिर से वही दिसंबर, फिर से वही ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे… देश को फूँकने की वामपंथियों-कट्टरपंथियों की वह साजिश न भूले हैं, न भूलेंगे, न भूलने देंगे

जामिया मिलिया इस्लामिया में 16 दिसंबर 2024 को एक प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में AISA, SFI और NSUI के सैंकड़ों छात्रों ने मिलकर “तेरा-मेरा क्या रिश्ता- ला इलाहा इल्ललाह” और “हम क्या माँगे आजादी” जैसे नारे जोर-जोर से लगाए।

इनका ऐसा करने के पीछे तर्क था कि ये लोग 2019 में यानी पाँच साल पहले CAA-एनआरसी विरोध प्रदर्शन में जो कुछ भी हुआ था वो उसे याद करने के लिए इकट्ठा हुए हैं।

इनके मुताबिक, 5 साल पहले प्रशासन ने इनपर अत्याचार किया था, दिल्ली पुलिस ने बेवजह परिसर में अपनी ताकत दिखाई थी, इनके साथियों की पिटाई हुई थी।

अपने इस प्रदर्शन को इन्होंने ‘जामिया रेजिस्टेंस डे’ का नाम दिया। हालाँकि ये लोग ये बताना भूल गए कि प्रदर्शन के समय जो ये आजादी-आजादी के नारे लगा रही थी इन्हें आजादी किससे चाहिए?

एक्स पर वामपंथियों और इस्लामियों के ट्वीट पढ़कर लगे कि शायद वाकई साल 2019 में इनपर अत्याचार हुआ था या प्रशासन ने इन्हें दबाने की कोशिश की थी, लेकिन हकीकत क्या है ये इससे एकदम अलग है

आइए एक बार याद करें 2019 में क्या हुआ…

9 दिसंबर 2019 वो तारीख है जब नागरिकता संशोधन बिल (CAB) लोकसभा में पास हुआ था, इसके बाद 11 दिसंबर 2019 को CAA बना… एक तरफ जहाँ इस फैसले से वह पाकिस्तानी-बांग्लादेशी (जिन्हें कभी उनकी धार्मिक पहचान के कारण अपने मुल्कों में सताया गया था और अब भारत उन्हें अपने देश का नागरिक बनने का मौका दे रहा था) सब खुश थे। तो, वहीं दूसरी ओर भारत के इस्लामी कट्टरपंथी, उनके हितैषी वामपंथी पूरी तरह बिलबिला गए थे।

कानून में कोई गलती न ढूँढ पाने के कारण इन लोगों ने मिलकर एक नई साजिश रची… इस्लामी वर्ग को बरगलाने की। अफवाह फैलाई गई कि ये कानून इसलिए आया है ताकि भारत के मुसलमानों को देश से निकाल दिया जाए।

मुस्लिम वर्ग के छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक को समझाया गया कि मोदी सरकार पहले NRC के जरिए कागज माँगेगी, फिर जो कागज नहीं दिखा पाएँगे उसे देश से निकाला जाएगा। इस प्रक्रिया में CAA बाकी समुदाय के लोगों को तो बचा लेगा लेकिन मुस्लिम को छँटनी करके बाहर कर दिया जाएगा क्योंकि इस कानून में मुस्लिमों को देश का नागरिक बनाने की बात ही नहीं है।

इस तरह एक मनगढ़ंत बात को हर मुस्लिम के मन में भरा गया और साल 2019 की दिसंबर में जामिया मिलिया इस्लामिया से विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई।

13 दिसंबर 2019 से जामिया में इस्लामी-वामपंथी इकट्ठा हुए और 15 दिसंबर 2019 को जामिया नगर में बसों को आग के हवाले करने की घटना सामने आई। आग किसने लगाई? आज इस पर कोई बात नहीं करता, मगर आप सिर्फ कल्पना करिए कि यदि इस हरकत के बाद उस दिन बस में लगे सीएनजी सिलिंडर फट जाते तो उस इलाके का हाल क्या होता…

आग लगाने वालों ने बस में बस में बैठे न ड्राइवर का ख्याल किया और न ही यात्रियों का। आसपास मौजूद लोग बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर वहाँ से भागे। स्थिति हाथ से निकल रही थी, उपद्रवी हर सीमा लांघ रहे थे, तभी दिल्ली पुलिस एक्शन में आई और लाठीचार्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू की। आँसू गैस तक छोड़े गए मगर हिंसा ने थमने का नाम नहीं लिया। बड़ी मशक्कत के बाद जब चीजें थमीं तो सोशल मीडिया पर उन वीडियोज ने हक्का-बक्का कर दिया जिसमें खुलेआम छात्रों की भीड़ इस्लामी नारे लगा रही थी

ये नारे ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारे थे, ‘अल्लाहु-अकबर’ के नारे थे, ‘तेरा-मेरा क्या रिश्ता ला इलाहा इल्लाह’ के नारे थे और साथ ही साथ उसी आजादी के नारे थे जिसकी गूँज के बाद कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार हुआ।

इस घटना के बाद में दिल्ली में लगी आग थमी नहीं, शाहीन बाग के प्रदर्शन ने इसे और ज्यादा विस्तार दिया। और उस प्रदर्शन के बाद क्या हुआ ये याद करके भी रूह कांप जाए।

इतनी व्यापक स्तर पर हिंदू विरोधी हिंसा यूँ ही नहीं अंजाम दे दी गई थी, यूँ ही पुलिस कॉन्सटेबल रतनलाल की ड्यूटी पर हत्या नहीं हुई थी, यूँ ही गुलेल के जरिए हिंदुओं के घरों को पेट्रोल बम से निशाना नहीं बनाया गया था… इसके लिए शरजील इमाम जैसे कट्टरपंथियों ने बीज बोया था।

15 दिसंबर को शुरू हुए प्रदर्शन में पहले दिन से मुस्लिमों को भड़काने का काम अलग-अलग स्तर पर चल रहा था, कहीं पैंफलेट बाँटे जा रहे थे तो कहीं ऑनलाइन ऑडियो-वीडियो भेजकर भीड़ को उकसाया जा रहा था… इस हरकत का खुलकर पता तब चला जब 17 दिसंबर को शरजील इमाम की एक वीडियो वायरल हुई।

इस वीडियो में शरजील ने मुस्लिमों को भड़काते हुए दिल्ली में चक्का जाम करने की बात कही थी। उसने कहा था कि मुसलमान दिल्ली के 500 शहरों में चक्का जाम कर सकता है। इस भाषण के वायरल होने के बाद पुलिस शरजील को ढूँढने में जुट गई और दूसरी ओर इस्लामी, वामपंथी बुद्धिजीवी ये फैलाने में जुट गए कि शरजील तो मुस्लिमों को उनके अधिकार बता रहा था और पुलिस ने उसे आतंकी दिखा दिया।

अब ये बात किसी से छिपी नहीं है कि मुस्लिम भीड़ जब-जब सड़कों पर उतरी है तो उस भीड़ ने कैसे नारे लगाए और कैसी प्रदर्शनों को अंजाम दिया है। हालिया मामलों से याद दिलाएँ तो संभल की घटना याद कर लीजिए चाहे तो बाराबंकी की…आपको इस भीड़ का पैटर्न मालूम पड़ जाएगा।

साल 2019 में तो खुलेआम इस्लामी कट्टरपंथी और वामपंथी इस भीड़ को उकसा रहे थे और जब पुलिस इन्हें रोकने आगे बढ़ रहे थी तो ये ऐसा दिखाया जा रहा था जैसे पुलिस लोगों को बचाने नहीं लोगों को मारने आई है।

आज जिस जामिया में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन सामने आया है, उसी जामिया के मेंकभी भी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में मारे गए अंकित शर्मा को याद नहीं करते किसी को नहीं देखा गया जिन्हें इस्लामी भीड़ ने चाकुओं से गोद-गोदकर मार डाला था, कभी किसी को उत्तराखंड का दिलबर नेगी भी याद नहीं आया जो दिल्ली कमाने आया था और हाथ-पाँव काटकर उसे जलकर मरने के लिए छोड़ दिया गया

इन्हें याद आते हैं शरजील इमाम, सफूरा जरगर, उमर खालिद जैसे लोग…जिन्होंने सीएए-एनआरसी के बारे में सब कुछ पढ़ने समझने के बाद भी उन्हें अपने वर्ग के कम पढ़े लिखे लोगों तक गलत ढंग से पहुँचाकर भड़काया।

अजीब बात ये है कि दिल्ली पुलिस की जाँच भी बताती है कि जामिया की हिंसा एक सुनियोजित घटना थी, जहाँ दंगाइयों के पास पत्थर थे, लाठियाँ थी, पेट्रोल बम थे, ट्यूबलाइट थी। अगर ऐसा नहीं था तो सोचिए कि उन दंगाइयों को कैसे पता चला कि जामिया में ऐसा कुछ होने वाला है जहाँ पुलिस आँसू गोले चला सकती है, उन्होंने इस तरह की कार्रवाई से बचने के लिए अपने पास गीले कंबल तक रखे हुए थे…।

इन सारी घटनाओं को देख सुन पढ़ने के बाद इसमें कोई दोराय नहीं है कि 2019 की दिसंबर में शुरू हुई हिंसा हिंदुओं के खिलाफ की गई हिंसा थी। एक बार को उस दिसंबर को जामिया के ये ‘वामपंथी और इस्लामी’ भूल भी जाएँ, लेकिन दिल्ली वाले और खासकर दिल्ली के हिंदू कभी नहीं भूलेंगे। उस आग में उन्होंने अपने अपनों को जलते हुए देखा है

CM योगी आदित्यनाथ को धमकी देने वाला अताउल गनी हथियार के साथ गिरफ्तार, बताया- बांग्लादेश से आकर बंगाल के मालदा में बसा: कहा था- बिस्मिल्लाह बोलकर योगी की दूँगा कुर्बानी

नोएडा पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी देने वाले एक व्यक्ति को दिल्ली के शाहीन बाग इलाके से गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान शेख अताउल (40) पुत्र उसमान गनी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से बांग्लादेश का निवासी है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में उसका परिवार बस गया था। बाद में वह दिल्ली के शाहीन बाग में रहने लगा। पुलिस ने आरोपित के पास से एक .315 बोर का तमंचा, जिंदा कारतूस, एक चाकू, आपत्तिजनक दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएडा सेक्टर 39 पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए शेख के खिलाफ मामला दर्ज किया और उसे दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। एडिशनल डीसीपी मनीष मिश्रा ने बताया कि शेख के खिलाफ बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

शुरुआती पूछताछ में शेख ने बताया कि उसने हथियार अपनी सुरक्षा और डर दिखाने के लिए रखा था। पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि क्या शेख आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है और क्या वह सच में मुख्यमंत्री पर हमला करने की योजना बना रहा था।

एडिशनल डीसीपी मनीष मिश्रा ने कहा, “वायरल वीडियो में आरोपित व्यक्ति ने संवैधानिक पद पर बैठे एक जननेता के खिलाफ झूठी और भड़काऊ बातें कही थीं, जो सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दे सकती थीं। आरोपित ने अलगाववादी बयान देकर करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई।”

पुलिस ने आरोपित के पास से मिले मोबाइल फोन और दस्तावेजों की जाँच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि वह किसी संगठन से जुड़ा हुआ था या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था। पुलिस ने बताया कि इस मामले में सोशल मीडिया सेल ने वीडियो को चिह्नित कर सेक्टर 39 थाने में मामला दर्ज कराया था। यह वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हुआ था। आरोपित के भड़काऊ बयानों से सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका थी।

बता दें कि शेख अताउल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उसने योगी आदित्यनाथ को ‘कुर्बान’ कर देने की धमकी दी थी। वीडियो में उसने भड़काऊ बयान देते हुए सांप्रदायिक भावनाएँ भड़काने की कोशिश की थी। उसने खुलेआम गोश्त खाने और मस्जिदों को ध्वस्त करने के झूठे आरोप लगाकर धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश की। उसने कहा था, “बिस्मिल्लाह बोलूँगा और कुर्बानी दे दूँगा योगी की” और यह कहते हुए उसने हाथों से कुर्बानी देने का इशारा भी किया।

शेख अताउल ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, अवैध मस्जिदों पर कार्रवाई, और लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर अपनी नाराजगी जताई। इसके साथ ही उसने कहा, “खुलेआम भैंस का गोश्त काट रहे हैं हम लोग। खुलेआम अजान चल रहा है। जाओ योगी… सु#$@र के जने के पास.. जो मस्जिद से माइक उतारता है। उसकी अम्मी ने शादी किया है, मुसलमान से… बोलता है मुसलमानों को भगाओ यहाँ से.. सामने आएगा तो बिल्मिल्लाह बोलके #$% दूँगा।”

हर्षा हत्याकांड के गवाह को धमकी, कहा- कोर्ट मत जाना: हिजाब के विरोध में लिखने पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने चाकू से गोदकर मार डाला था, NIA कर रही है जाँच

कर्नाटक के शिवमोगा जिले में बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा हिंदू की हत्या का मामला फिर चर्चा में है। हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की कोर्ट में गवाही देने वाले एक गवाह को धमकी देने का मामला सामने आया है। इस मामले में शिवमोगा के तुंगानगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये गवाह उस पेट्रोल पंप पर काम करता था, जहाँ हर्षा हत्याकांड के बाद हत्यारे गाड़ी में ईंधन डलवाने गए थे। NIA ने जाँच के बाद उस पेट्रोल पंप कर्मचारी को सरकारी गवाह बनाया था, जिसे अब धमकाने की कोशिश की गई। आरोप है कि एक अज्ञात व्यक्ति ने इस गवाह को गवाही न देने की धमकी दी।

धमकी के बावजूद युवक ने दी गवाही

बताया जा रहा है कि पेट्रोल पंप पर काम करने वाला यह युवक अब दूसरी नौकरी कर रहा है। कुछ दिन पहले एक व्यक्ति स्कूटर से पेट्रोल पंप पर आया और गवाह की जानकारी माँगी। पंप कर्मचारियों से कहा गया कि गवाह को कोर्ट में पेश होने से मना कर दें। हालाँकि 12 दिसंबर 2024 को गवाह ने एनआईए कोर्ट में गवाही दी। इसके बाद उन्होंने धमकी की जानकारी पुलिस को की। कोर्ट के निर्देश पर तुंगानगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि गवाह की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है और मामले की जाँच जारी है।

कर्नाटक के तत्कालीन सीएम ने दिलाया था न्याय का भरोसा

बता दें कि हर्षा को हिंदुत्व विचारधारा से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए जाना जाता था। साल 2022 में उस समय कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे बासवराज बोम्मई ने इस हत्या को साजिश करार दिया था।

एक इंटरव्यू में तत्कालीन सीएम बासवराज बोम्मई ने कहा था, “हर्षा, जिसे हर्षा हिंदू के नाम से भी जाना जाता था। वो एक कार्यकर्ता था। वो हर तरह के धार्मिक कार्यक्रमों में सबसे आगे रहता था। उसने हाल ही में हिंदुओं के कई अहम मामलों को उठाया था, जिससे कई लोग काफी चिढ़े हुए थे। कई स्थानीय लोग उसके खिलाफ थे। ये हत्या बहुत ही भयानक थी। ये हत्या से बढ़कर है। ये हार्डकोर दुश्मनी है, जिसे एक छोटे से लड़के पर दिखाया गया है। उसकी हत्या पीछे का सबसे बड़ा कारण यह था कि वो एक हिंदू एक्टिविस्ट था और बहुत ही मुखर तरीके से अपनी आवाज को उठाता था।”

फरवरी 2022 में की गई थी हर्षा की हत्या

गौरतलब है कि कर्नाटक के शिवमोगा जिले 26 साल के बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की रविवार (20 फरवरी 2022) को चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि हर्षा ने फेसबुक प्रोफाइल पर हिजाब के ख़िलाफ़ और भगवा शॉल के समर्थन में पोस्ट लिखी थी, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में कई कट्टरपंथी मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया था, जिनकी पहचान रियाज, नदीम, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ, अफान (रिहान) के तौर पर हुई थी। इस हत्याकांड में कासिफ मुख्य आरोपित है।

संभल में पुलिस पर हमला करने जिस इलाके से आए थे मुस्लिम उपद्रवी वहाँ भी एक बंद मंदिर मिला, भीतर में विराजमान थे हनुमान जी और राधा-कृष्ण: प्रशासन 22 कुएँ की खोज में लगा

उत्तर प्रदेश के संभल के खग्गू सराय में 46 साल से बंद पड़े कार्तिकेश्वर महादेव मंदिर के खुलने के बाद एक और सालों से बंद पड़ा हिंदू मंदिर मिला है। ये मंदिर हयात नगर थानाक्षेत्र के सरायतरीन इलाके में मिला। अवैध कब्जे हटाने के बीच पुलिस की नजर इस पर पड़ी। पुलिस प्रशासन ने फौरन इसका ताला खुलवाया और पाया कि अंदर राधा-कृष्ण और हनुमान जी की मूर्तियाँ स्थापित थीं।

प्रशासन ने इस मंदिर को भी साफ करवाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर काफी समय से इसलिए बंद था क्योंकि पूरा इलाका मुस्लिम बाहुल्य है। पहले इलाके में 30 से 40 हिंदू परिवार रहते थे जो कि दंगे के बाद धीरे-धीरे पलायन कर गए।

मालूम हो कि जिस हयातनगर (सरायतरीन) में यह बंद पड़ा मंदिर मिला है उस जगह की चर्चा संभल हिंसा के बाद भी थी। दरअसल, सामने आया था कि हिंसा में इस इलाके के युवक भी शामिल थे। अब दोबारा से बंद पड़े मंदिर के मिलने के कारण इस इलाके की बात हो रही है।

संभल में मिला एक और मंदिर

सामने आई तस्वीर में देख सकते हैं कि मंदिर के आसपास घनी बस्ती है और मंदिर की दीवारें देखकर ही पता चल रहा है कि सालों से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालाँकि, मालूम हो कि इस मंदिर के आसपास किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं मिला है जैसा कि कार्तिकेश्वर मंदिर के पास मिला था।

खग्गू सराय में मिले मंदिर के पास अवैध कब्जे को तो मुस्लिम परिवार छोड़ने को तैयार हो गया है और प्रशासन से बातचीत के बाद खुद अतिक्रमण हटा रहा है। लेकिन, अब ये खग्गू सराय इलाके में मिल रहे कुओं के कारण सुर्खियों में है।

जामा मास्जिद के पास मिला एक और कुआँ

बीते दिनों इसी मंदिर को खुलवाने के बाद एक पास में मिले कुएँ की खुदाई भी हुई थी जिसमें से हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ मिली थीं। इस खुदाई के बाद प्रशासन को एक और कुएँ का पता चला। ये कुआँ मस्जिद के बिलकुल दरवाजे के किनारे पर पाटा गया था। प्रशासन इसकी भी खुदाई करवा रहा है। मौके पर पुलिस फोर्स तैनात है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कुआँ नगर पालिका ने ही बंद करवाया था। अब प्रशासन मंदिर के पास बने कुएँ की तरह इसकी खुदाई भी कराएगा।

कुछ रिपोर्ट्स ऐसी भी सामने आई हैं जिसमें जिलाधिकारी डॉक्टर राजेंद्र पैंसिया के हवाले से बताया गया कि संभल में 68 तीर्थ और 21 कूप और 52 सराय और दर्जनों सरोवर होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया कि इलाके में अवैध कब्जा होने के बाद ये सारी चीजें विलुप्त हो गईं। लेकिन अब दोबारा प्रशासन के प्रयासों से संभल अपने वास्तविक रूप में लौट आएगा।

संभल का विवाद

गौरतलब है कि संभल में 24 नवंबर को जामा मस्जिद का सर्वे करने निकली टीम को रोकने के लिए कई इस्लामी कट्टरपंथी सड़कों पर उतर आए थे। इसके बाद इलाके में पथराव से लेकर गोलीबारी तक हुई थी। कुछ ही दिन बाद ये इलाका बिजली चोरी करने के कारण खबरों में आया। प्रशासन ने अपनी कार्रवाई शुरू की और इलाके में बंद पड़े मंदिरों का मामला सामने आया। इसके साथ ही ये भी पता चला कि कैसे 46 साल पहले दंगे के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाया गया और उसके बाद तमाम हिंदू पलायन कर गए।