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उस्मान खान ने किया लंदन ब्रिज पर हमला, कश्मीर में आतंकी ट्रेनिंग के लिए जुटा रहा था पैसे

ब्रिटेन के मशहूर लंदन ब्रिज के पास शुक्रवार (नवंबर 29, 2019) को हुई आतंकी घटना में 2 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस हमले के संदिग्ध आतंकी को मौके पर ही गोली मारकर ढेर कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कॉटलैंड यार्ड ने फर्जी विस्फोटक जैकेट पहने एक संदिग्ध को घटनास्थल पर मार गिराने की पुष्टि कल रात (शुक्रवार, 29 नवंबर) को ही कर दी थी। अब पुलिस ने इस मामले से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि संदिग्ध आतंकी का नाम उस्मान खान था, जो इससे पहले भी आतंकी गतिविधियों का दोषी पाया गया था।

द गार्डियन के मुताबिक उस्मान खान आतंकवाद संबंधी अपराध के लिए 8 साल जेल में बिताने के बाद दिसंबर 2018 में लाइसेंस (पैरोल) पर रिहा हुआ था। 2012 में उसे आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और योजना बनाने तथा कश्मीर में एक आतंकवादी सैन्य प्रशिक्षण सुविधा स्थापित करने और अन्य युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए धन जुटाने सहित कई अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था। तब न्यायाधीश ने उस्मान खान की योजनाओं को गंभीर आतंकवाद और लंबे समय के लिए खतरनाक करार दिया था। साथ ही पुलिस को चेतावनी दी थी कि आगे चलकर वह जनता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

उस्मान खान के आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने को लेकर फरवरी 2012 में आठ साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। बता दें कि खान लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर बमबारी करने की योजना बना रहा था और साथ ही उसका परिवार पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर में जमीन पर एक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर बनाने की साजिश रच रहा था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उस्मान खान पाकिस्तान मूल का था और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर में एक आतंकवादी कैंप स्थापित करना चाहता था और कश्मीर में लड़ने के लिए ब्रिटेन में भर्ती होना चाहता था। उसके इस्लामिक आतंकी ग्रुप के साथ लिंक थे।

डिप्टी CM पर अड़ी कॉन्ग्रेस-NCP: उद्धव ठाकरे की तीन पहियों वाली सरकार फ्लोर टेस्ट से पहले लड़खड़ाई

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की तीन पहियों की सरकार के आगे बढ़ने से पहले ही खींचतान शुरू हो गई है। शिवसेना को मुख्यमंत्री पद देने के बाद कॉन्ग्रेस-एनसीपी में उपमुख्यमंत्री पद के लिए ठन गई है। कॉन्ग्रेस उपमुख्यमंत्री पद माँग रही है, जबकि एनसीपी ने इस पर अपना दावा ठोका है। अघाड़ी में कॉन्ग्रेस को विधानसभा अध्यक्ष पद देने की बात हुई है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस-एनसीपी दोनों ही पार्टियाँ स्पीकर का पद नहीं छोड़ना चाहती थीं। जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने एनसीपी के सामने स्पीकर की पोस्ट छोड़ने के बदले दो डिप्टी सीएम के पदों का रखा प्रस्ताव रखा। दरअसल कॉन्ग्रेस चाहती है कि राज्य में एनसीपी के अलावा उनकी पार्टी का भी डिप्टी सीएम हो। हालाँकि एनसीपी दो उपमुख्यमंत्रियों पर भी सहमत नहीं है

वहीं बताया जा रहा है कि एनसीपी की अंदरूनी राजनीति की वजह से उपमुख्यमंत्री का पद कॉन्ग्रेस के पास जा सकता है और कॉन्ग्रेस के बालासाहेब थोराट राज्य के नए उप मुख्यमंत्री हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक एनसीपी नेता अजित पवार खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। लेकिन उनकी बगावत के बाद उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाने को लेकर एनसीपी में दो राय हो गई है। इसलिए अब एनसीपी इस विवाद को टालने के लिए उप मुख्यमंत्री का पद कॉन्ग्रेस को देकर विधानसभा अध्यक्ष का पद लेना चाहती है।

यह विवाद सामने आने के बाद अजित पवार का कहना है कि ‘महा विकास अघाड़ी’ (एनसीपी-शिवसेना-कॉन्ग्रेस गठबंधन) में किसे क्या मिलेगा, यह पहले ही तय हो चुका है। बँटवारे के मुताबिक शिवसेना को मुख्यमंत्री पद मिला जबकि एनसीपी को उपमुख्यमंत्री तथा विधानसभा का उपाध्यक्ष पद और कॉन्ग्रेस को विधानसभा अध्यक्ष का पद मिलेगा। 

वैसे मामला इतना आसान नहीं है, जितना पवार बता रहे हैं। जानकारी के मुताबिक कॉन्ग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी इस बात पर राजी है कि मंत्रिमंडल में एकाध जगह कम मिले परंतु उपमुख्यमंत्री पद जरूरी है क्योंकि तभी महाविकास अघाड़ी की सरकार में तीनों दलों का गठबंधन दिखेगा। उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले भी महाविकास अघाड़ी की बैठक में यह मुद्दा उठा था और तब भी कॉन्ग्रेस ने कहा था कि उसे उपमुख्यमंत्री पद नहीं मिला तो बेहतर होगा कि शिवसेना-एनसीपी मिलकर सरकार बनाएँ। वह उन्हें बाहर से समर्थन देगी।

एक तरफ जहाँ कॉन्ग्रेस की तरफ से उपमुख्यमंत्री पद की माँग की बात सामने आ रही है, वहीं पार्टी में कुछ नेता भी हैं, जो शुरू से ही यह चाहते हैं कि विधानसभा अध्यक्ष का पद एनसीपी को देकर उसके बदले में दो मंत्री पद ले लिए जाएँ। अब ऐसे में ये देखने वाली बात होगी कि अगर विधानसभा का अध्यक्ष पद एनसीपी के हिस्से जाता है, तो कॉन्ग्रेस में मंत्री पद के लिए किसका नाम सामने आता है। 

बता दें कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सीएम उद्धव ठाकरे को 3 दिसंबर तक बहुमत साबित करने का समय दिया है। मगर ‘महा विकास अघाड़ी’ सरकार आज (नवंबर 30, 2019) ही महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत परीक्षण देने वाली है। फ्लोर टेस्ट से पहले शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने शुक्रवार (नवंबर 29, 2019) कहा, “कल फ्लोर टेस्ट हो सकता है। हम तैयार हैं। पहले हमारे पास 162 विधायक थे, अब हम 170 हैं और संख्या बढ़ जाएगी। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि इस सरकार के पास है बहुमत।”

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एक और ‘प्रीति’! आधी जली स्थिति में उसी इलाके में मिली एक और लाश, जाँच जारी

आज पूरे दिन प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के रेप और हत्या की खबरों से मीडिया और सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा उबलता रहा, वहीं रात होते-होते एक और हृदयविदारक खबर आई है कि उसी इलाके में, उसी थाना क्षेत्र में एक और महिला की अधजली लाश मिली है।

पुलिस ने कहा है कि अभी जाँच की जा रही है। हालाँकि, दोनों ही लाशों का स्थिति में समानता पाए जाने पर लोग यह भी कह रहे हैं कि यह काम किसी एक ही व्यक्ति या गैंग का हो सकता है। फिर भी, इस पर पुलिस ने अभी तक उस तरह की गुंजाइश पर कुछ नहीं कहा है। सुबह तक इस पर और भी बातें निकल कर सामने आ सकती हैं।

सोशल मीडिया पर लाश की तस्वीर और उसके पाए जाने का एक विडियो भी घूम रहा है लेकिन वह इतना नृशंस है कि हम उसे दिखा नहीं सकते। पुलिस यह भी कह रही है कि लड़की ने आग से जल कर आत्महत्या की कोशिश की हो, इस एंगल से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

आपको बता दें कि हैदराबाद के बाहरी इलाके शमसाबाद में 26 वर्षीय महिला प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की जली हुई लाश मिली। पुलिस ने जाँच की और अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रीति के पोस्टमॉर्टम में पता चला है कि उनके साथ बलात्कार ही नहीं हुआ बल्कि उन्हें गला दबाकर हत्या करने के पहले बुरी तरह टॉर्चर भी किया गया था। और इसके बाद उन्हें जला दिया गया था। इस जघन्य अपराध के मुख्य आरोपित का नाम मो. पाशा है जबकि बाकि तीन हैं – नवीन, केशवुलु और शिवा।

नोट: यह खबर अभी डेवलपिंग स्टेज में है। जैसे ही इस मामले में पूरी जानकारी पुलिस या स्थानीय मीडिया द्वारा दी जाएगी, इस खबर को अपडेट किया जाएगा।

26 साल की डॉ. प्रियंका का रेप, मर्डर: शमसाबाद में मिली आधी जली लाश, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

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दोस्त के साथ बस स्टॉप पर थी लॉ की छात्रा, तमंचे के बल किया गैंग रेप: सुनील, कुलदीप, संदीप, अजय सहित 12 गिरफ्तार

डॉ. प्रियंका रेड्डी बलात्कार मामले के बाद एक और दिल दहला देने वाला बलात्कार का मामला सामने आया है। राँची के कांके में एक दर्जन लड़कों ने कथित तौर पर एक छात्रा को अगवा कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया है। सभी आरोपित खबर लिखे जाने तक पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए हैं। पीड़िता की उम्र लगभग 25 के आसपास बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आरोपितों के पास से पुलिस ने एक कार और एक बाइक के अलावा 3 जिन्दा कारतूस, दो मैगज़ीन, एक देसी पिस्तौल भी बरामद की हैं। इसके अलावा पीड़ता का क्षतिग्रस्त मोबाइल फ़ोन भी उन्हीं आरोपितों के पास से मिलने की बात पुलिस ने कही है। कांके पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ मामला पीड़िता की तहरीर पर दर्ज कर लिया है।

पीड़िता कांके स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की छात्रा है। बकौल रांची के ग्रामीण पुलिस अधीक्षक ऋषभ कुमार झा, शाम को वह जब विश्विद्यालय से 4 किलोमीटर दूर अपने एक पुरुष मित्र के साथ खड़ी बात कर रही थी तो बाइक सवार दो आरोपितों ने उन पर हमला कर दिया। उसके मित्र को पीट कर वे पीड़िता को पिस्तौल की नोंक पर बाइक से ईंट भट्ठे पर ले जाने लगे, और रास्ते में बाइक का पेट्रोल खत्म हो जाने पर उन्होंने अपने अन्य दोस्तों को कार से बुला लिया।

वहाँ ले जाकर कथित तौर पर उन सभी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद उन्होंने अपने और दोस्तों को भी बुलाकर पीड़िता के साथ और बलात्कार कराया। इसके बाद उन्होंने रात में उसे और उसकी स्कूटी को संग्रामपुर पुल के पास छोड़ दिया।

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच तीन युवक पीड़िता के दोस्त को भी घेरे रहे और धमकी देते रहे कि शोर मचाने पर उसे जान से मार देंगे। इस दौरान उसने उनमें से एक का मोबाइल नंबर किसी तरह नोट कर लिया, जिसके आधार पर उन सभी को पुलिस ने एक-एक कर हिरासत में ले लिया।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेने की घोषणा करते हुए दावा किया है कि उसने झारखंड के डीजीपी को पत्र लिख दिया है।

सभी 12 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके नाम है क्रमशः सुनील मुंडा, कुलदीप उराँव, सुनील उराँव, संदीप तिर्की, अजय मुंडा, राजन उराँव, नवीन उराँव, बसंत कच्छप, रवि उराँव, अमन उराँव, रोहित उराँव, ऋषि उराँव।

‘करोड़ों के घपले, मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे पिता, वे चाहते थे स्वामी नित्यानंद के खिलाफ करूँ षड़यंत्र’

आध्यात्मिक गुरु स्वामी नित्यानंद के खिलाफ लगे दो लड़कियों को अगवा करने और गायब कर देने के आरोप में नया मोड़ आया है। जिन दो बहनों के अपहरण और उन्हें जबरन आश्रम में रखने का आरोप स्वामी नित्यानंद पर है, उनमें से एक ने आगे आकर एक वीडियो मैसेज में नित्यानंद को क्लीन चिट दी है और अपने पिता पर ही उनके खिलाफ साज़िश करने का आरोप लगाया है

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक सामने आने वाली लड़की ‘गायब’ बताई जा रहीं दोनों बहनों में बड़ी है। 21 वर्षीया लड़की ने बताया है कि उसने अपने पिता द्वारा नित्यानंद आश्रम में की जा रही आर्थिक अनियमिताओं का खुलासा कर दिया था। इसके बाद से उसके पिता, जो तमिलनाडु के निवासी इस रिपोर्ट में बताए गए हैं, ने उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था कि वह आश्रम छोड़ दे और अपने पिता के साथ मिलकर नित्यानंद के साथ साज़िश करे।

“नित्यानंद आश्रम से ग्रैजुएशन करने के बाद मुझे (आश्रम) प्रशासन में काम दे दिया गया। मैंने उस दौरान यह पाया कि जहाँ कहीं मेरे पिता शामिल थे, वहाँ कई सारे सामानों और चीज़ों की खरीददारी में गड़बड़ी थी।” गौरतलब है कि इन दोनों के पिता ने नित्यानंद पर आरोप लगाया था कि उन्होंने दोनों बहनों को जबरन अपने आश्रम में कैद कर के रखा था।

अपने पिता पर गंभीर आरोपों की लम्बी फेहरिस्त जारी रखते हुए उसने यह भी कहा कि वे अपने सहयोगियों को टेंडर जारी होने के पहले से तय राशि बता देते थे और उनके सहयोगी उससे सस्ते दाम लगाकर टेंडर पा लेते थे। इसके बाद चाहे वे जैसी भी गुणवत्ता का सामान दें, आश्रम खरीद लेता था। इसके अलावा कथित तौर पर लड़की के पिता ने एक बिल्डिंग बनाने में भी ₹12 करोड़ का घोटाला घटिया क्वालिटी के सामान के इस्तेमाल से किया था। यही नहीं, उसने अपने पिता पर इन अनियमितताओं के बदले एक टैबलेट कम्प्यूटर रिश्वत में पाने का आरोप भी लगाया है।

“मुझे यह जानकार बहुत आश्चर्य हुआ कि मेरे पिता मनी-लॉन्ड्रिंग में भी शामिल थे, बावजूद इसके कि स्वामीजी हमारे 6 सदस्यों के परिवार की आर्थिक सहायता करते थे।” उसने यह भी कहा कि उसके पिता ने पहले उसी पर दबाव डाला कि वह स्वामी नित्यानंद के खिलाफ बलात्कार का नकली आरोप लगाए, लेकिन उसने मना कर दिया। उसके बाद ही पिता ने खुद नित्यानंद पर आरोप लगाए।

‘जबरन रखी गई मूर्ति देवता कैसे’: अयोध्या निर्णय को चुनौती देगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड हालाँकि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को स्वीकार कर चुका है, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अभी भी इस निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका डालने पर अड़ा हुआ है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (बीएमसी) के संयोजक एडवोकेट ज़फ़रयाब जीलानी ने इस आशय से जानकारी मीडिया को दी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्होंने सवाल उठाया कि “अवैध रूप से घुस आई” मूर्ति को भला अदालत देवता कैसे मान सकती है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह ‘जबरन’ मूर्ति को (उस समय, 1949 में) विवादित रहे ढाँचे में स्थापित कर वहाँ बनी बाबरी मस्जिद का अपमान किया गया है।”

जीलानी का दावा है कि उनकी याचिका तत्कालीन मस्जिद के मुख्य गुंबद में रखी गई मूर्ति को देवता का दर्जा देने के विरोध पर आधारित होगी। उनका मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस बिंदु पर ध्यान दिया होता तो उनका फैसला अलग होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी याचिका समयसीमा 9 दिसंबर से पहले ही आएगी।

जफरयाब जीलानी मुस्लिम पक्ष के पहले वकील नहीं हैं जिन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हमला बोला है। इनके पहले मुस्लिम पक्ष की पैरोकारी करने वाले एक अन्य वकील राजीव धवन ने विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में विवादित रहे 2.77 एकड़ समेत पूरी 67 एकड़ भूमि हिन्दुओं को रामलला का मंदिर बनाने के लिए दिए जाने को मुस्लिम पक्ष के साथ अदालत का अन्याय करार दिया। साथ ही दावा किया कि हिन्दुओं ने माहौल खराब किया और मुस्लिम पक्ष शांत रहा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी ऐसे ही आरोप लगाए थे।

गौरतलब है कि 9 नवंबर, 2019 के अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यों वाली संविधान बेंच ने राम जन्मभूमि स्थल का पूरा मालिकाना हक हिन्दुओं को दिया था। साथ ही मस्जिद बनाने के लिए अलग से 5 एकड़ ज़मीन देने के निर्देश केंद्र सरकार को दिए थे। इस पीठ की अध्यक्षता तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने की थी और इसमें मुस्लिम जज जस्टिस अब्दुल नज़ीर भी शामिल थे। पीठ ने अपना फैसला सर्वसम्मति से दिया था।

भाजपा तो विपक्ष में, इसके बाद भी महा विकास अघाड़ी क्यों डर के मारे छिप कर बैठी है: फडणवीस

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कल (गुरुवार, 28 सितंबर, 2019 को) ही शपथ लेने वाले वर्तमान मुख्यमंत्री और शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पर हमला बोला है। उन्होंने उद्धव को चुनौती देते हुए कहा कि अब जबकि उद्धव ने सरकार बना ही ली है तो विधायकों को वे अभी भी क्यों छिपाए बैठे हैं।

आज (शुक्रवार, 29 नवंबर, 2019 को) सुबह एक के बाद एक ट्वीट कर फडणवीस ने ठाकरे को घेरा। सबसे पहले उन्होंने दावा किया कि कल रात शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की पहली कैबिनेट बैठक में चर्चा किसानों को सहायता की बजाय गुप-चुप विश्वास मत में बहुमत सिद्ध करने के बारे में हुई है। ऐसे में बहुमत के दावे का अर्थ ही क्या है?

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर गुप्त रूप से विधानसभा की बैठक बुलाने और प्रोटेम स्पीकर को बदलने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। फडणवीस ने पूछा कि आखिर सीएम ठाकरे अपने ही विधायकों पर इतना अविश्वास किस बात के लिए कर रहे हैं।

देवेंद्र फडणवीस इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने ठाकरे से पूछा कि जब भाजपा को विपक्ष घोषित कर ही दिया गया है तो इसके बाद भी महा विकास अघाड़ी क्यों डर के मारे छिप कर बैठी है।

गौरतलब है कि पिछले महीने हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा से नाता तोड़ने वाली शिव सेना ने कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ महाराष्ट्र में सरकार बनाई है। तीनों पार्टियों के बीच एक महीने चली बातचीत के बाद शिव सेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने कल दादर के शिवाजी पार्क में सीएम पद की शपथ ली थी। उसके साथ कॉन्ग्रेस, शिव सेना और एनसीपी के दो-दो विधायकों को भी फ़िलहाल मंत्री बनाया गया है। इन पार्टियों के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शिव सेना ने सेक्युलरिज़्म को मंज़ूरी देकर और कॉन्ग्रेस ने 80% स्थानीय-मराठी आरक्षण को स्वीकार कर वैचारिक रूप से समझौता किया है।

आंध्र प्रदेश: पशु की तरह बेंच से बँधे दिखे छोटे-छोटे छात्र, हेडमास्टर की खुली पोल

आँध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले में 2 बच्चों के साथ स्कूल में हुए अमानवीय व्यवहार की तस्वीर सामने आई है। जिनमें देखा जा सकता है कि बच्चों को स्कूल परिसर में शिक्षा देने के बजाए किस प्रकार पशुओं की भाँति रस्सी से बाँधकर दंड दिया जा रहा है।

‘द न्यूज मिनट’ की रिपोर्ट के अनुसार, ये घटना कादिरी मंडल के मूसनपेट अपर प्राइमरी स्कूल की है। जहाँ तीसरी कक्षा और पाँचवी कक्षा के 2 छात्रों को रस्सी से कसके बाँधकर बेंच के पास रखा गया और शिक्षक अन्य बच्चों से बात करते रहे। जानकारी के मुताबिक बच्चों के ऊपर ये निर्ममता भरा व्यवहार उनके शैतानी करने के कारण हुआ। जिससे परेशान होकर स्कूल की प्रधानाध्यापिका श्रीदेवी ने उन्हें ये सजा दी। उन्होंने चौथी के बच्चे को आदेश दिया कि वो उन्हें रस्सी से बाँधे।

हालाँकि, हेडमास्टर श्रीदेवी का कहना है कि ये सब बच्चों के घरवालों की शिकायत पर हुआ है। उनके अनुसार दोनों बच्चों में से एक की माता ने आकर शिकायत की थी कि वो स्कूल से बड़े बच्चों की किताबें घर ले जाता था और अन्य चीजें भी चुराता था। इसलिए उसकी माँ मे उसे मारा और यहाँ बाँधकर चली गई। उनका कहना है कि अब ऐसी स्थिति में वो क्या कह सकती थीं… लेकिन सोचने वाली बात ये है कि अगर प्रधानाध्यापिका की कही बात सच भी है तो क्या उन्हें इस बात पर संज्ञान नहीं लेना चाहिए था कि उनके स्कूल परिसर में क्या हो रहा है?

हेडमास्टर श्रीदेवी ने क्लास 5 के बच्चे की सजा पर सफाई पेश करते हुए कहा कि उसे लव लेटर लिखने पर दंड मिला है। उनके मुताबिक लव लेटर देखकर गुस्से में आए उसके घरवालों ने उसे यहाँ बाँधा, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि ये उनकी जिम्मेदारी है कि उनके स्कूल में क्या होगा क्या नहीं… तो उन्होंने जवाब दिया,”मैं अभिभावकों पर चिल्लाई थी, लेकिन उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया तो वो भाग जाएँगे। इसके बाद हम किसी काम में व्यस्त हो गए, तो सोचा कि इन सबसे बाद में निबटा जाएगा।”

जब मीडिया ने उनसे सवाल किया बच्चे अभिभावकों को दोषी न बताकर, उन्हें इसके लिए जिम्मेदार बता रहे हैं? तो उन्होंने कहा कि हो सकता है कि वे सिर्फ़ बदनाम करने की कोशिश है, क्योंकि हम अक्सर उन्हें डाँटते रहते हैं।

गौरतलब है कि इस मामले पर बलाला हक्कुला संघम (sBalala Hakkula Sangham) एनजीओ में बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अच्युता राव ने बाल अधिकार आयोग को याचिका दायर कर दी है। इस याचिका में बच्चों के साथ किए जाने वाले बर्बर व्यवहार पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग है। साथ ही इस बात का भी हवाला दिया गया है कि प्रधानाध्यापिका श्रीदेवी ने बाल अधिकारों का हनन किया। इस मामले को जिलाधिकारी के संज्ञान में भी भेजा गया है। जिसमें इस बात का उल्लेख है कि छात्रों द्वारा कक्षा में ध्यान न देने के कारण उन्हें पशुओं की तरह बाँधा गया।

इसके अलावा एनजीओ ने इस मामले पर जल्द से जल्द आपराधिक कार्रवाई के अलावा तुरंत विभागीय कार्रवाई की माँग की है। द न्यूज मिनट से बात करते हुए राज्य के बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गंता हीमावथी ने बताया कि इस मामले में म्यूनिसिपल कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर से बात हो चुकी है। अब वे जाँच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी। उनके मुताबिक ये मामला अनुशासनहीनता का है, जहाँ दंड में बच्चों को रस्सी से बाँधा गया। अब क्योंकि शारीरिक दंड देना अपराध है, तो उसी के मुताबिक कार्रवाई होगी।

‘कॉन्ग्रेस की अनुमति से हुई गाँधी की हत्या और कॉन्ग्रेस ने ही उठाया सबसे ज्यादा फायदा’

भोपाल से भारतीय जनता पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले वाले बयान माफी माँग ली है। प्रज्ञा ठाकुर के द्वारा महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले वक्तव्य पर विपक्ष ने भारी हंगामा किया था। शुक्रवार (नवंबर 29, 2019) को लोकसभा में उन्होंने कहा माफी माँगते हुए कहा कि उन्होंने नाथूराम गोडसे को देशभक्त नहीं कहा, फिर भी अगर किसी को ठेस पहुँचती है तो क्षमा माँगती है। उनका कहना था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। 

इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस जमकर राजनीति कर रही है। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जहाँ प्रज्ञा ठाकुर को आतंकवादी कहा, वहीं मध्य प्रदेश के एक कॉन्ग्रेस विधायक ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जिंदा जलाने की धमकी दी है। कॉन्ग्रेसी विधायक गोवर्धन दांगी ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर राज्य में प्रवेश करेंगी तो उन्हें ज़िंदा जला दिया जाएगा।

अब इस पर स्वतंत्रता सेनानी और देशभक्त वीर सावरकर (विनायक दामोदर सावरकर) के पौत्र रणजीत सावरकर ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि महात्मा गाँधी की हत्या कॉन्ग्रेस की अनुमति से हुई थी और इसका सबसे ज्यादा फायदा भी कॉन्ग्रेस ने ही उठाया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस गाँधी की हत्या का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती रही है।

रणजीत सावरकर यहीं पर नहीं रूके। उन्होंने आगे कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस की अपनी कोई नीति ही नहीं है। वो सत्ता सुख के लिए कुछ भी कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने शिवसेना-एनसीपी और कॉन्ग्रेस गठबंधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिवसेना अपने हिंदुत्ववादी छवि से नहीं हटेगी। उनका मानना है कि वो सावरकर के लिए भारत रत्न की माँग उठाती रहेगी। रणजीत सावरकर ने कहा कि शिवसेना नही बदलेगी, बल्कि कॉन्ग्रेस में बदलाव आएगा। कॉन्ग्रेस पहले ही सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर बढ़ चुकी है।

गौरतलब है कि रणजीत सावरकर ने वीर सावरकर को कथित रूप से ‘राष्ट्रदोही’ कहने के मामले में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है। इसमें राहुल गाँधी के साथ ही कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पार्टी को भी नामजद किया गया है। मुंबई की एक अदालत ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं।

बता दें कि अक्टूबर में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल ने कहा था कि सावरकर वीर नहीं थे, बल्कि उन्होंने जेल से रिहा होने के लिए ब्रिटिश सरकार को लिखित प्रार्थना की थी। साथ ही अंग्रेजों से अपनी गतिविधियों के लिए माफी भी माँगी थी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान रणजीत सावरकर ने कहा था कि यह सरासर गलत तथ्य है। उन्होंने कहा था कि वीर सावरकर को अंग्रेजों ने 27 साल जेल में रखा था। रणजीत सावरकर ने शिकायत में कहा है कि राहुल गाँधी और उनकी पार्टी ने स्वतंत्रता सेनानी के ‘‘नैतिक और बौद्धिक चरित्र को नीचा दिखाने’’ की कोशिश की।

‘प्रीति रेड्डी’ हत्याकांड: आंध्र प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस ने कसा मुस्लिमों पर तंज़, डिलीट ट्वीट पर नाराज़ हुए लोग

वीभत्स और क्रूर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) रेप और हत्याकांड ने देश में एक बड़ी आबादी को झकझोर कर रख दिया है। इसमें आम लोगों की एक बड़ी संख्या तो शामिल है ही, ऐसा लग रहा है कि इसमें आंध्र प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस की ट्विटर आईडी का एडमिन भी है। सोशल मीडिया पर आंध्र प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस की ट्विटर आईडी से हुए एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है, जिसमें उनके हैंडल से हुए ट्वीट में इस हत्याकांड की जगह को ‘पीसफुल एम’ (‘शांतिप्रिय-मुस्लिम’) वाला इलाका बताया गया है। साथ ही उनके हत्यारों को “पीसफ़ुल मॉन्स्टर्स” (‘शांतिप्रिय दरिंदे’) कहा गया है। लेकिन जल्दी ही वह ट्वीट डिलीट भी कर दिया गया।

मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए बदनाम कॉन्ग्रेस के हैंडल से ऐसी ट्वीट, ऐसे तंज़ का आना ट्विटर पर लोगों को भौंचक कर रहा है।

कुछ लोग उन्हें ‘संघ के एजेंडे पर चलने वाला’ कह रहे हैं (जबकि इस मामले का आरएसएस से कोई लेना-देना ही नहीं है!), तो कुछ अन्य ने कॉन्ग्रेस के बहिष्कार के लिए आह्वान करना शुरू कर दिया है।

आम लोग ही नहीं, रिपब्लिक टीवी की दक्षिणी भारत ब्यूरो चीफ़ पूजा प्रसन्ना ने भी कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया।