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UP पुलिस ने ठोके 103 अपराधी, 17745 का डर से सरेंडर: मायावती ने कहा था हैदराबाद से सीखो

रेप के बाद पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की जघन्य हत्या करने के मामले के चारों आरोपितों को हैदराबाद पुलिस ने मार गिराया। इसके बाद उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश की पुलिस को हैदराबाद की पुलिस से सीख लेने को कहा। जवाब देने में यूपी पुलिस ने भी देरी नहीं की और आँकड़े जारी कर बताया कि दुर्दांत अपराधियों को मार गिराने में वह भी पीछे नहीं है।

जिन परिस्थितियों में हैदराबाद में एनकाउंटर हुआ उनको लेकर सवाल बने हुए हैं। बावजूद इसके ज्यादातर लोग, जिसमें नेता भी शामिल हैं इसका स्वागत कर रहे हैं। हैदराबाद में गैंग रेप के बाद प्रीति रेड्डी की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद आरोपितों ने उनके शव को जला दिया था। हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई का स्वागत करते हुए मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराध पर काबू पाने के लिए इससे सीख लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार सो रही है। यहाँ और दिल्ली में भी हैदराबाद पुलिस से प्रेरणा लेनी चाहिए। लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि यहाँ अपराधियों के साथ मेहमानों जैसा सलूक होता है। उन्होंने कहा कि यूपी में अब जंगलराज है। जब उनकी सरकार थी तो उन्होंने अपनी पार्टी के आरोपितों को भी जेल भेजा।

मायावती के दावों की पोल यूपी पुलिस के आँकड़ों ने खोल दी है। आँकड़ों के मुताबिक़, यूपी में पिछले दो साल में 5,178 मुठभेड़ों में पुलिस ने 103 अपराधियों को मार गिराया है। 1,859 अपराधी पुलिस कार्रवाई में जख्मी हुए। इसके अलावा, 17,745 अपराधियों ने डर से आत्मसमर्पण किया या खुद ही जमानत रद्द करा जेल पहुँच गए। जाहिर है, राज्य में अपराधियों के साथ मेहमान जैसा सलूक नहीं हो रहा।

दिलचस्प यह है कि मायावती की टिप्पणी का हवाला देते हुए अलग-अलग मीडिया हाउस के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी पुलिस ने कई बार इन आँकड़ों को ट्वीट किया है। यूपी में तो कई मामलों में अपराधियों ने योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद ही सरेंडर किया है। इस साल जनवरी में यूपी सरकार की ओर से जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार मार्च 2017 से जुलाई 2018 के बीच 3000 से ज्यादा एनकाउंटर हुए। इनमें 78 अपराधी मारे गए और 800 से ज्यादा जख्मी हुए। इसी दौरान पुलिस के हाथों मारे जाने के डर से 11,981 से ज्यादा अपराधियों ने अपनी जमानत रद्द करवा कोर्ट में सरेंडर किया।

ग़ौरतलब है कि हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी के साथ गैंगरेप कर निर्मम हत्या करने वाले चारों आरोपित पुलिस द्वारा गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की देर रात एनकाउंटर में मारे गए। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार एनकाउंटर उसी जगह पर हुआ, जहाँ उन दरिंदों ने पीड़िता के शव को जलाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गुरुवार (5 दिसंबर) की देर रात पुलिस पूरे क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिए चारों आरोपितों को एनएच-44 पर लेकर गई थी। लेकिन, वहाँ पर चारों पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने चेतावनी देते हुए उन्हें रोका, लेकिन वो भागते रहे। अंततः पुलिस को उन पर गोली चलानी पड़ी और मौक़ा-ए-वारदात पर ही उन्हें वहीं ढेर कर दिया। खुद तेलंगाना के पुलिस कमिश्नर ने इस खबर की पुष्टि शुक्रवार (6 दिसंबर) की सुबह की।

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5 लड़कियों का गैंगरेप करने वाले पादरी अल्फांसो समेत 6 को उम्रकैद… लेकिन NGO मामले में बरी

पिछले साल 5 लड़कियों के साथ रेप करने के मामले में झारखंड के खूँटी की अदालत में एक पादरी समेत 6 लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इनमें से एक केस पीड़िताओं की ओर से दर्ज करवाया गया था जबकि दूसरा एक एनजीओ की ओर से। युवतियों की शिकायत पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश राजेश कुमार की अदालत ने 17 जून 2019 को स्थानीय चर्च के फादर अल्फांसो आइंद, बाजी सामद उर्फ टकला, अजुब सांडीपूर्ति, जोनास मुंडा, जॉन जुनास तिड़ू और बलराम सामद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन, ताजा जानकारी के मुताबिक एनजीओ की शिकायत पर सुनवाई के दौरान इन सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने यह फैसला गवाहों के अदालत में समय से पेश न होने के कारण लिया।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक खूँटी के न्यायधीश राजेश कुमार की अदालत ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले गैर सरकारी संगठन के संचालक संजय शर्मा तथा अन्य गवाहों के अदालत में पेश नहीं होने के कारण साक्ष्य के अभाव में इस मामले के आरोपित पादरी अल्फांसो सहित सभी 6 आरोपितों को बुधवार को बरी कर दिया। आरोपितों की ओर से अधिवक्ता सुभाशीष सोरेन ने जानकारी देते हुए बताया कि कोर्ट की ओर से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी अभियोजन पक्ष की ओर से एनजीओ के वाहनचालक के अलावा कोई भी गवाह अदालत में पेश नहीं हुए। जिस कारण कोर्ट ने उनकी गवाही बंद कर दी। सोरेन ने कहा कि मामले के शिकायतकर्ता एनजीओ संचालक संजय शर्मा के पेश न होने से इस मामले में दर्ज कराई गई दूसरी प्राथमिकी की अदालत में पुष्टि ही नहीं हो सकी।

पूरा मामला:

यह मामला 19 जून 2018 का है। जब कोचांग के गाँव स्थित स्कॉट मैन मिडिल स्कूल में नुक्कड़ नाटक करने आई 5 लड़कियों का अपहरण कर उनका बलात्कार किया गया था। एफआईआर के मुताबिक 18 जून 2018 को खूँटी के पिस्टाकोली में आशा किरण नाम की संस्था के कुछ लोग नुक्कड़ नाटक करने पहुँचे थे। इनका उद्देश्य लोगों में सरकारी योजनाओं को लेकर जागरूकता फैलाना था।

नाटक के दौरान टीम की एक सिस्टर को एक व्यक्ति मिला, जिसने खुद को कोचांग का मुखिया बताया। उसने सिस्टर से कहा कि उसे उनका कार्यक्रम पसंद है और वह चाहता है कि कोचांग में भी ऐसे कार्यक्रम किए जाएँ। मीडिया खबरों के मुताबिक पहले तो सिस्टर ने वहाँ नाटक करने से मना कर दिया, लेकिन बाद में व्यक्ति के कहने पर टीम वहाँ जाने को तैयार हो गई। 19 जून को टीम वहाँ पहुँची और बाजार में नुक्कड़ नाटक शुरू हुआ।

इस दौरान टीम की दोनों सिस्टर बगल के स्कूल के फादर से मिलने चली गईं, जहाँ बाद में पूरी टीम को भी बुलाया गया, यहाँ भी टीम ने नुक्कड़ नाटक किया। इसके बाद वहाँ 2 लड़के फादर से बात करने आए। बात खत्म हुई तो फादर ने टीम की लड़कियों को उन लड़कों के साथ जाने के लिए कहा, जब लड़कियों ने विरोध किया तो हथियारों के बल पर लड़कियों को लड़कों के साथ भेजा गया।

इसके बाद सुनसान जगह ले जाकर उनका रेप किया गया। उनके गुप्तांगों पर सुलगती सिगरेट दागी गई। उन्हें पेशाब पिलाया गया। जब लड़कियों ने इसकी शिकायत फादर से की तो अल्फांसो ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने इस घटना का जिक्र किसी से किया तो उनके माता-पिता को मार दिया जाएगा। 20 जून को जब इस बात की जानकारी पुलिस को मिली तो बड़ी मुश्किल से पुलिस ने एक लड़की को बयान के लिए राजी किया। जिसके बाद इस मामले में दो प्राथमिकी दर्ज की गई। अभियोजन की ओर से इस मामले में सिर्फ एक गवाही दर्ज कराई गई थी और एनजीओ की युवतियों और अन्य सहकर्मियों की गाड़ी का ड्राइवर संतोष हेंब्रम ही इस मामले में अपनी गवाही देने अदालत पहुँचा था।

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BJP विधायक के ऊपर बम से हमला, TMC के गुंडो ने की पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडे आए दिन हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर 24 परगना का है, जहाँ बीजेपी के भाटपारा विधायक पवन सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और TMC के लोगों द्वारा उन पर बम से हमला किया गया।

उन्होंने कहा, “मुझे पता चला कि मेरे पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की जा रही है, जब मैं वहाँ पहुँचा तो मैंने देखा कि एक लड़का मेरे ऑफिस को TMC के झंडे वाले रंग से रंग रहा था।”

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सदस्यों को तंग करने और उनकी हत्या करने का सिलसिला कोई नया नहीं है। राज्य के विद्युत मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने अपनी ही पार्टी की सांसद माला रॉय के समर्थकों पर मारपीट का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि उन पर यह हमला दक्षिण कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान किया गया।

इसके अलावा, अक्टूबर महीनें में राज्य के बीरभूम में TMC गुंडों ने 47 वर्षीय महिला बीजेपी कार्यकर्ता शंकरी बागड़ी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं, छ: अन्य बीजेपी समर्थक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बताया गया था कि TMC के गुंडों ने बंदूकों और हथियार के साथ शंकरी बागड़ी के घर को पूरी तरह से घेर लिया था। उसके बाद TMC कार्यकर्ताओं द्वारा शुरू की गई गोलीबारी में इस हिंसात्मक घटना को अंजाम दिया गया।   

बता दें कि पश्चिम बंगाल में सूबे की सरकार और राज्यपाल के बीच भी तीखी नोंक-झोंक देखने को मिलती रहती है। राज्यपाल जगदीर धनखड़ ने हाल ही में एक ट्वीट के ज़रिए ममता बनर्जी पर निशाना साधा था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि दीदी ने उनके बारे में ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ कहा है। इस बात की पुष्टि के लिए राज्यपाल धनखड़ ने एक बंगाली अख़बार की ख़बर की तस्वीर भी शेयर की थी। 

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हैदराबाद एनकाउंटर के बाद पुलिस पर बरसाए फूल, महिलाओं ने बाँधी राखी… औवैसी ने कहा – ‘जाँच हो’

हैदराबाद के शादनगर में पशु चिकित्सक ‘प्रीति रेड्डी’ (बदला हुआ नाम) की निर्मम हत्या के बाद से सवालों के घेरे में आई राज्य पुलिस को आज आरोपितों का मौक़ा-ए-वारदात पर एनकाउंटर करने के लिए चारों ओर से बधाई दी जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक पुलिस को आभार व्यक्त किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक और खबर आई है। एनकाउंटर के बाद घटनास्थल पर पहुँचे हजारों लोगों ने पुलिस पर फूल बरसाए हैं और महिलाओं ने पुलिस की कार्रवाई पर अपनी खुशी प्रकट करते हुए उन्हें राखी बाँधी है। इसके अलावा राज्य में एसीपी और डीसीपी जिंदाबाद के नारे लगाए जाने के वीडियो भी सामने आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एनकाउंटर की सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। भीड़ को संभालने के लिए वहाँ पुलिस टीम तैनात की गई है। यहाँ जुटी भीड़ पुलिस के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए उन पर फूल बरसा रही है। वहीं, पीड़िता की पड़ोसी महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों को राखी बाँधकर अपनी खुशी जाहिर की है।

गौरतलब है कि पीड़िता के पिता और बहन समेत देश भर की कई बड़ी हस्तियों और राजनेताओं ने इस एनकाउंटर का समर्थन किया है। एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए कानून मंत्री रेड्डी ने कहा कि आरोपितों को भगवान ने उनके किए की सजा दी है। जिससे हैदराबाद समेत पूरे देश में खुशी है। उन्होंने दावा भी किया कि वह चारों पुलिस के हथियार लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर फायरिंग की।

इस एनकाउंटर के बाद बता दें AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी समेत कई लोगों ने एनकाउंटर पर सवाल भी उठाया है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हर मुठभेड़ की जाँच की जानी चाहिए।

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महाराष्ट्र में शिवसेना-NCP-कॉन्ग्रेस को लगा झटका, भिवंडी में BJP के हाथों मिली हार

महाराष्ट्र में शिवसेना, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) और कॉन्ग्रेस गठबंधन के महाविकास अघाड़ी को मेयर चुनाव में करारा झटका लगा है। ठाणे ज़िले की भिवंडी महानगर पालिका के मेयर चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने गुरुवार (5 दिसंबर) को चुनाव जीत लिया है। इस चुनाव में महाविकास अघाड़ी की तरफ से कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार रिषिका राका चुनावी मैदान में थीं।

वहीं, ठाणे ज़िले की भिवंडी से मेयर चुनाव में बीजेपी समर्थित कोणार्क विकास अघाड़ी की प्रतिभा पाटिल ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा, कॉन्ग्रेस पार्टी के बागी इमरान ख़ान डिप्टी मेयर बनने में सफल रहे।

ख़बर के अनुसार, कुल 90 सीटों में से कॉन्ग्रेस-शिवसेना के 59 पार्षद थे। वहीं, बीजेपी समर्थित कोणार्क विकास अघाड़ी के पास केवल 31 पार्षद थे। लेकिन, जब अंतिम परिणाम आया तो कॉन्ग्रेस के 47 में से 18 पार्षदों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया और कोणार्क विकास अघाड़ी की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल 49 वोटों के साथ मेयर चुनी गईं। वहीं, कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार रिषिका राका को केवल 41 वोट मिले। इस प्रकार पूर्व महापौर प्रतिभा पाटिल एक बार फिर महापौर चुनी गईं, और पूर्व उपमहापौर कॉन्ग्रेस के बागी नगरसेवक इमरान ख़ान दूसरी बार उपमहापौर चुने गए।

बता दें कि 90 नगरसेवकों वाली भिवंडी में कॉन्ग्रेस को को बहुमत प्राप्त था, क्योंकि उसके 47 सदस्य थे। बीजेपी के 20, शिवसेना के 12, कोणार्क विकास अघाड़ी के 4, आरपीआई एकतावादी के 4, समाजवादी पार्टी के 2 और दो निर्दलीय सदस्य हैं।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि संख्या बल के आधार पर कॉन्ग्रेस के पास बहुमत होने के बावजूद महापौर और उपमहापौर के चुनाव में कॉन्ग्रेस ने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जिससे कॉन्ग्रेस के खाते में 59 नगरसेवक हो गए थे। कॉन्ग्रेस के खाते में बहुमत के आधार पर 13 नगरसेवक ज़्यादा थे, जिसकी वजह से कॉन्ग्रेस-शिवसेना ने महापौर के लिए कॉन्ग्रेस की नगरसेविका रिषिका राका और उपमहापौर के लिए शिवसेना के नगरसेवक बालाराम चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया था।

वहीं दूसरी तरफ, कोणार्क विकास अघाड़ी ने महापौर के लिए प्रतिभा पाटिल और उपमहापौर के लिए कॉन्ग्रेस के बागी नगरसेवक इमरान ख़ान को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन महापौर चुनाव से पहले ही कॉन्ग्रेस के 18 नगरसेवक कोणार्क विकास अघाड़ी के साथ चले गए। यही सबसे बड़ी वजह भी बनी जिसके चलते महापौर पद के चुनाव में कोणार्क विकास अघाड़ी की उम्मीदवार प्रतिभा पाटील को 49 वोट मिले। उधर, कॉन्ग्रेस-शिवसेना की उम्मीदवार रिषिका राका को 41 वोट ही मिल सके। इस वजह से कोणार्क विकास अघाड़ी की प्रतिभा पाटील ने रिषिका राका को आठ वोटों से हराकर दूसरी बार फिर से महापौर चुन ली गईं।

वहीं, उपमहापौर के चुनाव में कॉन्ग्रेस से बगावत कर कोणार्क विकास अघाड़ी के साथ चुनाव लड़ने वाले इमरान ख़ान को भी 49 मत और कॉन्ग्रेस-शिवसेना के उम्मीदवार शिवसेना नगरसेवक बालाराम चौधरी को 41 वोट मिले। शिवसेना नगरसेवक बालाराम चौधरी को आठ वोटों से पराजित कर इमरान ख़ान भी दूसरी बार उपमहापौर चुने गए हैं।

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…2008 में भी इसी IPS अफसर ने किया था 3 का इनकाउंटर, फेंका गया था कॉलेज की 2 लड़कियों पर एसिड

भारतीय मीडिया में आज सुबह से जो खबर चल रही है, वो है हैदराबाद रेप-मर्डर की। रेप-मर्डर के घटना की नहीं बल्कि रेप-मर्डर करने वाले आरोपितों के इनकाउंटर की। हुआ यह कि पुलिस पूरे क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिए चारों आरोपितों को एनएच-44 पर लेकर गई थी। लेकिन, वहाँ पर चारों पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने चेतावनी देते हुए उन्हें रोका लेकिन वो भागते रहे। अंततः पुलिस ने उन पर गोली चला दी और मौका-ए-वारदात पर ही उन्हें वहीं ढेर कर दिया।

पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप और उन्हें जिंदा जला देने के इस जघन्य अपराध की जाँच जो IPS अधिकारी कर रहे थे, उनका नाम है – वीसी सज्जनार (VC Sajjanar)। पुलिस इनकाउंटर में मारे गए आरोपितों के पक्ष-विपक्ष में अभी तमाम दलीलें आनी शुरू हो गई हैं। इस बीच हम आपको बता रहे हैं इस IPS अफसर से जुड़ा एक रोचक किस्सा।

वो साल 2008 था। तब वीसी सज्जनार वारंगल के एसपी थे। वहीं के काकातिया इंस्टिट्यूट में दो लड़कियाँ इंजिनियरिंग की पढ़ाई करती थीं – स्वपनिका और प्रनिथा। इनमें से स्वपनिका को श्रीनिवास नाम के एक लड़के ने प्रोपोज किया था। लेकिन स्वपनिका ने उसके प्रेम अनुरोध को ठुकरा दिया था, जो उसका अधिकार था। लेकिन श्रीनिवास चूँकि ‘मर्द’ था, इसलिए उसने इसे अपना अपमान समझा। बस फिर क्या! अपने दो दोस्तों पी हरिकृष्णा और बी संजय के साथ मिलकर उसने स्वपनिका के साथ-साथ प्रनिथा पर भी एसिड फेंक दिया।

वारंगल के एसपी वीसी सज्जनार ने आज सुबह की हैदराबाद की खबर के जैसे ही एसिड फेंकने वाले तीनों आरोपितों का तब इनकाउंटर किया था। शायद तब भी मानवाधिकार की आवाज उठी होगी। उठ तो आज भी रही है। इन्हीं आवाजों के बीच एक आवाज और भी उठी है – ‘प्रीति रेड्डी’ के पिताजी की। उनका कहना है कि मेरी बेटी (प्रीति) को अब शांति मिलेगी।

और ऐसा नहीं है कि इस तरह के जघन्य अपराध के बाद ऐसी त्वरित सजा की माँग सिर्फ पीड़िता के परिवार की ओर से ही उठती है। पिछले हफ्ते से ही सोशल मीडिया पर लोग वारंगल एसिड अटैक और इनकाउंटर को लेकर कहानियाँ गढ़ रहे थे, अपने-अपने ढंग की माँग कर रहे थे। इनकाउंटर कानून सही तो नहीं है लेकिन पुलिस कभी-कभी चेतावनी देने के बाद मजबूर हो जाती है गोली चलाने पर और वही गोली पैर की जगह शरीर के दूसरे हिस्सों में लग जाती है तो आरोपित की मौत हो जाती है। हैदराबाद में हुए इनकाउंटर में कितनी सच्चाई पुलिस की बातों में यह तो जाँच का विषय है, फिलहाल सोशल मीडिया पर ‘सही हुआ’ और ‘मानवाधिकार’ के बीच गरमा-गर्म बहस जारी है।

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हैदराबाद के शादनगर में प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ सामूहिक बलात्कार कर उनकी निर्मम हत्या करने वाले चारों आरोपितों के एनकाउंटर के बाद तेलंगाना के कानून मंत्री इंद्रकरण रेड्डी ने पुलिस की कार्रवाई को ‘भगवान का न्याय‘ बताया है। उन्होंने इस एनकाउंटर के लिए अपने राज्य की पुलिस की पीठ थपथपाई है। साथ ही कहा है कि आरोपितों ने भागने की कोशिश की थी तो उन्हें मार गिराया गया।

एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए कानून मंत्री रेड्डी ने कहा कि आरोपितों को भगवान ने उनके किए की सजा दी है। जिससे हैदराबाद समेत पूरे देश में खुशी है। उन्होंने दावा भी किया कि वह चारों पुलिस के हथियार लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर फायरिंग की।

उल्लेखनीय है कि पीड़िता के पिता ने भी इस सूचना के बाद एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि यह एनकाउंटर उनकी बेटी के साथ इंसाफ है। उनका कहना है कि अब उनकी बच्ची की आत्मा को शांति मिलेगी। वहीं, पीड़िता की बहन ने कहा कि यह कार्रवाई भविष्य के लिए नजीर साबित होगी।

इसके अलावा इस कार्रवाई पर ‘निर्भया’ की माँ ने भी अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने तेलंगाना पुलिस की तारीफ करते हुए प्रशासन से अपील की है कि गुनहगारों को मार गिराने वाली पुलिस के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न हो, क्योंकि उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। इसके अलावा आशा देवी ने इस दौरान अपनी बेटी के गुनहगारों को भी फाँसी पर जल्द से जल्द लटकाने की गुहार लगाई ।

बता दें चारों आरोपितों की मौत की खबर सुनने के बाद ‘प्रीति रेड्डी’ के लिए न्याय की गुहार लगाने वाले लोग अब खुलकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे है। साथ ही तेलंगाना पुलिस के प्रति अपना आभार भी व्यक्त कर रहे हैं। एएनआई द्वारा जारी एक वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह एक बस में जाती हुई कई लड़कियाँ शोर करके नजदीक खड़ी पुलिस को सम्मान दे रही है।

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हैदराबाद में सामूहिक बलात्कार और नृशंस हत्या की शिकार डॉ प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के चारों आरोपित आज पुलिस एनकाउंटर में ढेर हो गए। जैसे-जैसे यह ख़बर लोगों तक पहुँच रही है, उस पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाँ आ रही हैं। इस बीच पीड़िता के पिता ने पुलिस और सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि अब उनकी बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी। 

इससे पहले पीड़िता के पिता ने भी मंगलवार को कहा था, “दोषियों को जितना जल्दी संभव हो, उतनी जल्दी सजा देनी चाहिए। कई कानून बनाए गए लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है। निर्भया केस को ही देख लीजिए। दोषियों को फाँसी पर लटकाना चाहिए।”

बता दें कि पूरे देश में हैवानियत भरी इस घटना की घोर निंदा हो रही थी। सभी आरोपितों को फाँसी दिए जाने की पुरज़ोर माँग उठाई जा रही थी। चारों आरोपितों में से एक माँ ने यहाँ तक कहा था उन्होंने जो जघन्य अपराध किया है, उसके लिए या तो उन्हें फाँसी दी जानी चाहिए या फिर ज़िंदा जला देना चाहिए।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद में बलात्कार के बाद डॉ प्रीति को जला देने वाले आरोपित सी चेन्ना केशवुलु की माँ ने स्थानीय मीडिया से कहा था, “मेरी ख़ुद की भी एक बेटी है, मैं मृतक लड़की के परिवार का दर्द समझ सकती हूँ।” उन्होंने कहा था कि इस हैवानियत भरे कृत्य के लिए उनके बेटे को फाँसी दे दी जानी चाहिए या फिर ज़िंदा जला दिया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि अगर ऐसी घटना पर भी अपने बेटे का बचाव करती हूँ तो लोग पूरी जिंदगी मुझसे नफरत करेंगे।

ग़ौरतलब है कि हैदराबाद में एक वेटेनरी डॉक्टर के तौर पर काम करने वाली डॉ प्रीति के साथ गैंगरेप करने के बाद आरोपितों ने उन्हें जला दिया था। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया था। गैंगरेप के दौरान ही दुष्कर्म पीड़िता की मौत हो गई थी। इसके बाद सभी आरोपित डॉ प्रीति के शव को गाड़ी में रखकर रिंग रोड के क़रीब ले गए, जहाँ कम्बल में लिपटे उनकी लाश को उन सभी ने पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। गिरफ़्तारी के बाद शनिवार को मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपितों [मोहम्मद आरिफ़ (26 साल), जोल्लू शिवा (20 साल), जोल्लू नवीन कुमार (20 साल), चिन्ताकुट्टा चेन्ना केशवुलु (21 साल)] को 14 दिनों की हिरासत में भेज दिया था।

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हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में पशु चिकित्सक ‘प्रीति रेड्डी’ (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप कर निर्मम हत्या करने वाले चारों आरोपित पुलिस द्वारा गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की देर रात एनकाउंटर में मारे गए। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार एनकाउंटर उसी जगह पर हुआ, जहाँ उन दरिंदों ने पीड़िता के शव को जलाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार की देर रात पुलिस पूरे क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिए चारों आरोपितों को एनएच-44 पर लेकर गई थी। लेकिन, वहाँ पर चारों पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने चेतावनी देते हुए उन्हें रोका लेकिन वो भागते रहे। अंततः पुलिस ने उन पर गोली चला दी और मौका-ए-वारदात पर ही उन्हें वहीं ढेर कर दिया। खुद तेलंगाना के पुलिस कमिश्नर ने इस खबर की पुष्टि शुक्रवार की सुबह की है।

उल्लेखनीय है कि गैंगरेप की सूचना के बाद से ही पुलिस ने शिवा, नवीन, केशवुलू और मोहम्मद आरिफ को गिरफ्तार कर अपनी रिमांड में रखा हुआ था। देश के चारों ओर से इन्हें फाँसी दिए जाने की माँगे उठ रहीं थी। पीड़िता की माँ की तो यहाँ तक माँग थी कि जिस तरह इन दरिंदों ने उनकी बेटी को जलाया है, बिलकुल उसी तरह से इन्हें भी जलाया जाना चाहिए।

बता दें कि इससे पहले आरोपितों के परिवारों ने साफ कहा था कि उनके बेटों को अगर मौत की सजा दी जाती है तो वे विरोध नहीं करेंगे। एक आरोपित के परिवार की ओर से कहा गया कि जो अपराध उन्होंने किया उसके लिए उन्हें या तो फाँसी दी जानी चाहिए या फिर जिंदा ही जला देना चाहिए। आरोपित सी चेन्ना केशवुलु की माँ ने स्थानीय मीडिया से कहा था, “मेरी खुद की भी एक बेटी है, मैं मृतक लड़की के परिवार का दर्द समझ सकती हूँ”। उन्होंने कहा कि इस हैवानियत भरे कृत्य के लिए उनके बेटे को फाँसी दे दी जानी चाहिए या फिर जिंदा जला दिया जाना चाहिए।

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खाली बैठे हैं उद्धव ठाकरे के मंत्री, कॉन्ग्रेस-एनसीपी-शिवसेना की खींचतान में अब तक नहीं बँटा मंत्रालय

महाराष्ट्र में भले शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने मिलकर महा विकास अघाड़ी बना ली है। भले गठबंधन के नेता के रूप में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। भले 28 नवंबर को उनके साथ एनसीपी के जयंत पाटिल और छगन भुजबल, कॉन्ग्रेस के बालासाहेब थोराट और नितिन राउत तथा शिवसेना के एकनाथ शिंदे और सुभाष देसाई ने कैबिनेट सदस्यों के तौर पर शपथ ले ली हो। बावजूद इसके तीनों दलों के बीच की खींचतान खत्म होती नहीं दिख रही है।

यही कारण है कि आज तक उद्धव ठाकरे अपने मंत्रियों का महकमा बॉंट नहीं पाए हैं। तीनों दलों के बीच गंभीर मतभेद की बातें उसी दिन से कही जा रही है जब इन्होंने साथ आने की कोशिश की थी। यही कारण है कि सरकार गठन के बाद से ही मंत्रियों की नाराजगी और राष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेद की कई खबरें आ चुकी है।

‘इसमें हमें क्या मिला है?’

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार बार-बार यह साबित कर रहे हैं कि इस सरकार के बनाने और चलाने के पीछे उनका जो एजेंडा है, वह बहुत गहरा है और उसकी थाह किसी के पास नहीं है। पहले ‘निस्वार्थ’ रूप से सरकार बनाने के लिए तीन हफ्ते इनकार, अजित पवार के रहस्यमय तरीके से 80 घंटे का फडणवीस का डिप्टी बनने के बाद उनकी ‘घर वापसी’ और अंत में ‘अहसान’ जता कर खैरात में सरकार बनाने के बाद अब उन्होंने उद्धव की बाँह मरोड़ना शुरू कर दिया है। हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि कॉन्ग्रेस को स्पीकर का पद मिला, शिवसेना को सीएम का, लेकिन असली घाटे में तो इस सरकार में उनकी पार्टी है। अब खबर आ रही है कि उनकी पार्टी से 15 नहीं 16 मंत्री बनाए जाएँगे, जबकि शिवसेना के कोटे से 15 मंत्री ही होंगे।

खलिहर बैठे मंत्री, मंत्री बनने की बाट देख रहे MLA

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक मंत्री के हवाले से दावा किया है कि सरकार मंत्रालयों के बँटवारे में खींचतान का शिकार हो गई है। तीनों ही पार्टियाँ गृह, वित्त, हाउसिंग, राजस्व जैसे विभागों पर नज़रें गड़ाए बैठे हैं, जिनमें भ्रष्टाचार, काली कमाई और बंदरबाँट का भरपूर ‘स्कोप’ है। सरकार अभी 6 मंत्रियों को ही जब विभाग नहीं बाँट पा रही है, तो ज़ाहिर सी बात है मंत्रिमंडल विस्तार कर बाकी पद भरना तो और बड़ी चुनौती होगी।

भीमा-कोरेगाँव को लेकर एनसीपी, नागरिकता बिल को लेकर कॉन्ग्रेस खफ़ा

भीमा-कोरेगाँव मामले में आरोपित अर्बन नक्सलों और अन्य के खिलाफ मामला वापस लेने के लिए एनसीपी उद्धव पर लगातार दबाव बढ़ा रही है। यही नहीं, सरकार बनाने के लिए हिंदुत्व के एजेंडे से पीछे हटने वाली शिवसेना ने जब नागरिकता संशोधन अधिनियम का समर्थन कर दिया, तो कॉन्ग्रेस बिफर गई। कॉन्ग्रेस ने इसे न्यूनतम साझा कार्यक्रम के उस बिंदु का उल्लंघन है, जिसमें विचारधारा के स्तर पर टकराव वाले मुद्दों पर चर्चा और बीच का रास्ता निकालने की बात कही गई है।

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शरद पवार की 2 डिमांड पूरी कर देते मोदी-शाह तो उद्धव ठाकरे नहीं बनते महाराष्ट्र के सीएम

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