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अमित शाह ने माइक दबाकर नहीं, खुलकर बोला था – ‘मैं बनिया हूँ’: मीडिया गिरोह फैला रहा झूठ

“…कमल के निशान पर जो वॉट (वोट) दबाओगे ना, वो वॉट तिवारी (भाजपा विधानसभा प्रत्याशी) को नहीं जाएगा, वो वोट नरेंद्र मोदी को मिलने वाला है… ये समझकर दबाना… मगर मुझे ‘हा हा’ कर रहे हो, ये बीस-पचीस हजार लोगों से तिवारी जीत जाएँगे क्या? जीतेंगे क्या?… अरे भाई, क्या ‘हा’ कह रहे हो? मैं भी बनिया हूँ… मुझे मालूम है नहीं जीतेंगे यार…” 

यहाँ गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान को शब्दशः लिखना ज़रूरी है, क्योंकि उनके झारखंड में चुनावी सभा के दिए गए बयान के संदर्भ से ही छेड़छाड़ कर पत्रकारिता का समुदाय विशेष फेक न्यूज़ फैलाने के अपने नए हथियार को धार देने में जुटा है। इस नए हथियार का नाम है ‘सही तथ्य की फेक न्यूज़’। 

झूठे तथ्यों और झूठे नैरेटिव के फ़ैल हो जाने के बाद मीडिया गिरोह यह नया, परिष्कृत हथियार लेकर आया है- जिसमें न मुख्य तथ्य के साथ छेड़छाड़ होती है और न ही किसी तरह का नैरेटिव दिया जाता है। केवल उस तथ्य के आसपास का संदर्भ गोल कर दिया जाता है, तोड़-मरोड़ दिया जाता है, या फिर उस तथ्य की रिपोर्टिंग ऐसे अंदाज़ में की जाती है कि जो झूठ शब्दों में न आ पाए, वह टोन में आ जाए। अमित शाह के झारखंड की चुनावी रैली में दिए गए भाषण को लेकर ऐसी ही ‘सही तथ्य की फेक न्यूज़’ प्रचारित हो रही है- और इसे करने में अग्रणी है द टेलीग्राफ, और इसके वरिष्ठ संवाददाता अंकुर भारद्वाज।

जैसा कि उनके भाषण के ऊपर दिए गए शब्दों से साफ़ है, और ऊपर के वीडियो में भी देखा जा सकता है, अमित शाह ने यह बात एक रौ में जनता से संवाद करते हुए कही थी। लेकिन अलग-अलग मीडिया गिरोह इसे अलग-अलग तरीके से ‘स्पिन’ देने की कोशिश कर रहा है, वह भी फेक न्यूज़ का। कहीं कोई वॉट्सऍप फॉरवर्ड मिल रहा है जिसमें केवल “अरे भाई, मैं भी बनिया हूँ” चल रहा है, कहीं कोई अख़बार या पोर्टल लिख रहा है कि अमित शाह यह बात मंच पर बैठे कुछ ही लोगों से कहना चाहते थे और माइक बंद न होने से ‘गलती से’ यह सबको सुनने को मिल गया। 

लेकिन अमित शाह के भाषण के वीडियो और उनके शब्दों से यह साफ है कि उन्होंने यह बात अपना भाषण सुन रहे लोगों को इंगित कर के ही कही थी। इस दौरान न ही वे मंच की ओर मुड़े और न ही माइक बंद करने की कोई कोशिश की। लेकिन टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट में भी, और उसे साझा करते हुए उनके वरिष्ठ संवाददाता अंकुर भारद्वाज के ट्वीट में भी, माइक के बंद होने-न होने का ज़िक्र कर ऐसा जताने की कोशिश की गई है कि भूलवश अमित शाह ने खुले ,माइक पर यह बात कह दी।

अंकुर भरद्वाज के ट्वीट ने एक और झूठ फैलाया- कि अमित शाह ने यह बात मंच पर मुड़ कर कहने की कोशिश की थी। वीडियो देखने से यह साफ हो जाएगा कि उन्होंने यह बात नीचे बैठे श्रोताओं से ही कही थी। इतना छोटा झूठ फ़ैलाने का क्या लाभ?- यह सवाल जायज़ है। इसका जवाब यह है कि इसके ज़रिए ऐसा दिखाने की कोशिश की जा रही है कि अमित शाह किसी जातिवादी संदर्भ में अपनी जाति का ज़िक्र कर रहे थे, और इसे छिपाने की कोशिश कर रहे थे- जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर है। 

उन्होंने यह बात किसी जातिवादी संदर्भ में नहीं बल्कि कम भीड़ पर नाराज़गी जताने के लिए कही थी- और जिस लहजे में उन्होंने यह कहा था, वह भारत के आम जीवन में बहुत आम है। अमूमन हम में से हर कोई अपनी जाति को किसी न किसी गुण से जोड़ता है, और अगर किसी स्थिति में उसे लगता है कि उस गुण विशेष में कोई उससे इक्कीस बनने की कोशिश कर रहा है तो अपनी जाति का हवाला उस व्यक्ति को हम यह याद दिलाने के लिए देते हैं कि इस गुण विशेष में हमने भी कच्ची गोलियाँ नहीं खेलीं। अमित शाह के मामले में यह गुण (चुनावी) गणित और वह दूसरा व्यक्ति सामने बैठी जनता है। 

अमित शाह ने जब पूछा, “ये बीस-पचीस हजार लोगों से तिवारी जीत जाएँगे क्या?” तो भीड़ में से कुछ लोग या तो उनका गुस्सा समझे नहीं, या समझ गए लेकिन और कोई जवाब नहीं सूझा तो “हाँ-हाँ” करने लगे। उसी पर खीझ कर उन्होंने याद दिलाया कि वे भी बनिया हैं (बनियों को आम अवधारणा में व्यवहारिक हिसाब किताब में कुशल माना जाता है), और इसलिए संगठन के लोग उन्हें मूर्ख न बनाएँ, गलत आश्वासन न दें। इस बात को उन्होंने पूरे आत्मविश्वास, पूरी ठसक के साथ कहा- क्योंकि पता था कि न ही वे किसी दूसरी जाति को नीचा दिखा रहे हैं और न ही जाति के आधार पर वोट  माँग रहे हैं। लेकिन इसी बात को माइक के ज़िक्र के साथ जोड़कर मीडिया ने ऐसा दिखाने की कोशिश की है जैसे वे यह जानते हुए कि कुछ गलत बोल रहे हैं, इसीलिए यहाँ माइक का ज़िक्र ज़रूरी है। 

और जाते-जाते एक और बात- अभी कुछ दिन पहले कहीं से गुज़रते हुए मैंने संयोगवश झगड़ रहे लोगों की बहस में से एक वाक्य सुना, “…साले, तुम्हें पता नहीं है- खटिक हैं हम, काट देंगे एक्कै बार में…”। मुझे किसी संदर्भ, किसी परिप्रेक्ष्य, दूसरे इंसान की जाति का अता-पता नहीं है, लेकिन इतना जानता हूँ कि पारम्परिक रूप से हिन्दुओं में सबसे अधिक कसाई और माँस-व्यापार करने वाली जाति खटिक दलितों में आती है- ऐसा माना जाता है कि तथाकथित ब्राह्मणवादियों द्वारा सबसे अधिक कथित तौर पर उत्पीड़ित जातियों में से एक है। और अगर उसका व्यक्ति भी आज के समय में वक्त और परिस्थिति के हिसाब से किसी जगह अपनी जाति का हवाला एक गुण के रूप में देता है, तो इसका मतलब साफ़ है कि जाति का हवाला भर देना हर जगह जातिवाद नहीं बन जाता।

ISIS के 13 आतंकियों को प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को सौंप सकता है अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान प्रत्‍यर्पण संधि के तहत 13 आतंकवादी भारत को सौंप सकता है। ये वो आतंकी हैं, जिन्होंने पिछले कुछ हफ्तों में अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सेना के सामने आत्मसर्पण किया था। इनमें 600 से अधिक इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी थे।

इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, भारत और अफ़ग़ानिस्तान ने पिछले रविवार (25 नवंबर) को अपनी द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के संचालन को औपचारिक रूप दिया था। ख़बर में काबुल के सूत्रों के हवाले से लिखा गया, “प्रत्यर्पण संधि की औपचारिकता के बाद काबुल ने 13 आईएस आतंकवादियों के प्रत्यर्पण का फ़ैसला किया है।”

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, “आतंकवादियों को उचित प्रक्रिया के बाद भारत को सौंपा जाएगा। यह क़दम दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी साझेदारी में महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित होगा।”

अफ़ग़ानिस्तान के एक अधिकारी ने बताया, “पिछले कुछ हफ्तों में अफगान सुरक्षा बलों के अलग-अलग अभियानों के बाद सैकड़ों इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था।”

अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रांतीय गवर्नर शाह महमूद मियांखली ने कहा, “पिछले दो सप्ताह में ISIS के 243 आतंकवादी और उनके परिवार के लगभग 400 सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं।” पिछले सप्ताह नंगरहार के अचिन ज़िले में सुरक्षा बलों के सामने 51 महिलाओं और 96 बच्चों के साथ 82 सेनानियों ने अपने हथियार सौंप दिए थे।

इससे पहले भी महिलाओं और बच्चों सहित लगभग 300 ISIS सदस्यों ने नंगरहार में अफ़ग़ान विशेष बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। वहीं, दूसरी तरफ, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि जुलाई में अफ़ग़ानिस्तान में ISIS के 2,000 से कम लड़ाके थे। जबकि संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि उस देश में 2,500 और 4,000 लड़ाके थे।

2 लाख का इलाज, 2300 फ़ील्ड ऑपरेशन: भारतीय सेना के रंगराज को मिलेगा ‘वॉर हीरो’ का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान

दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के बीच हुए कोरियाई युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल (स्वर्गीय) एजी रंगराज को अपने देश के सबसे बड़े युद्ध सम्मान ‘वॉर हीरो’ से सम्मनित करने का ऐलान किया है। 2020 में इस युद्ध को पूरे 70 साल हो जाएँगे, इसी ख़ास मौक़े पर दक्षिण कोरिया की तरफ से इस सम्मान का ऐलान किया गया। बता दें कि दक्षिण कोरिया के वॉर-वेटरन मंत्रालय की तरफ से हर साल युद्ध की याद में इस सम्मान का ऐलान किया जाता है। 


भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल (स्वर्गीय) एजी रंगराज (तस्वीर साभार: www.ssbcrack.com)

नई दिल्ली स्थित कोरियन एंबेसी के कर्नल ली इन ने बताया कि कोरिया की तरफ से लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज को उनके महान कार्यों के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। साथ ही सियोल में मौजूद कोरियन वॉर मेमोरियल में अगले साल जुलाई 2020 में लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज की एक बड़ी-सी तस्वीर भी लगाई जाएगी।  

आइए अब आपको बताते हैं भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल (स्वर्गीय) एजी रंगराज के बारे में, जिनकी अगुआई में 60वीं पैराशूट फ़ील्ड एंबुलेंस ने नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच हुए युद्ध में मोबाइल आर्मी सर्जिकल हॉस्पिटल (MASH) चलाया गया था। 

दरअसल, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि 1950 में जब उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच युद्ध हुआ था, तो भारतीय सेना ने किसी एक सेना का साथ देने की बजाए एक तटस्थ भूमिका निभाते हुए अपनी एक मोबाइल मिलिट्री एंबुलेंस प्लाटून को एशिया के सुदूर-पूर्व में युद्ध के मैदान में भेजा था। यही प्लाटून थी 60वीं पैराशूट फ़ील्ड एंबुलेंस प्लाटून। लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज इसी पलाटून के कमांडर (प्लाटून-कमांडर) थे जिसमें कुल 627 जवान थे। 

भारतीय सेना की इस प्लाटून एंबुलेंस ने घूम-घूम कर युद्ध क्षेत्र में ख़तरों के बीच घायल हुए सैनिकों का इलाज किया था। इस दौरान भारत के तीन सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे, जबकि 23 जवान घायल हुए थे। लगभग तीन साल (1950-53) तक चलने वाले इस युद्ध में लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराजन पूरी मुस्तैदी के साथ वहाँ डटे रहे। उनके इस अदम्य साहस के लिए भारत सरकार ने उन्हे महावीर चक्र से भी सम्मानित किया था।

जानकारी के अनुसार, कर्नल रंगराज ख़ासतौर पर पहाड़ के संचालन के लिए प्रशिक्षित थे, जैसे कोरियन होते थे, और उनके पास इस तरह के काम के लिए आला दर्जें के उपकरण थे। भारतीय सेना भीषण सर्दी से जूझती हुई भीषण युद्ध के दौरान इलाज कर रही थी। 

मार्च 1951 में, युद्ध के दूसरे सबसे बड़े हवाई ऑपरेशन, ऑपरेशन टॉमहॉक में, 4,000 अमेरिकी सैनिकों के साथ लाइनों के पीछे 60वीं पैराशूट में एक दर्जन डॉक्टर्स थे, जिसमें रंगराज भी मौजूद थे।

उस समय काफ़ी जनहानि हुई थी। अमेरिका के कमांडर के अनुसार, “मुझे भारतीयों की दक्षता से तुरंत धक्का लगा। एक छोटी भूमिका में अनुकूलित उस छोटी इकाई ने 103 ऑपरेशन किए थे। जो उस तरह की छोटी इकाई के लिए बड़े साहस की बात थी।”

सितंबर, 1951 में, राष्ट्रमंडल सैनिकों से जुड़े रहने के दौरान, उन्होंने छ: दिनों की लड़ाई में 448 हताहतों का इलाज किया। भारतीयों ने सैकड़ों घायलों को बचाया। कुल मिलाकर, उन्होंने लगभग 200,000 घायलों का इलाज किया। इसमें 2,300 फ़ील्ड मेडिकल ऑपरेशन शामिल थे… और इस बीच, उन्होंने स्थानीय कोरियाई डॉक्टर्स और नर्सों को भी प्रशिक्षित किया।

भारत ने लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज को श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी वीरता को सम्मानित करते हुए एक डाक टिकट भी जारी किया। 60 के दशक में लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराजन की अगुआई में भारतीय सेना के जवानों ने कोरिया में फरवरी 1954 तक (क़रीब साढ़े तीन साल तक) सेवा की।

2010 में दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति ली म्युंग-बाक ने टिप्पणी की थी कि अगर भारतीय सेना के जवानों ने बलिदान न दिया होता, तो कोरिया ऐसा न होता जैसा वो आज है।

आपको बता दें कि कोरियाई युद्ध में मारे गए सैनिकों की याद में दक्षिण कोरिया ने राजधानी सिओल में वॉर मेमोरियल बनाया है। उस वॉर मेमोरियल में ‘भारत’ के नाम से अलग स्मारक बनाया गया है जहाँ तिरंगा झंडा बड़ी शान से लहराता रहता है। उस स्मारक पर 60वीं पैराशूट फील्ड एंबुलेस प्लाटून की उपलब्धियों के विषय में लिखा है।

इन उपलब्धियों के विषय में लिखा है कि भारतीय सैनिकों ने कोरियाई युद्ध के दौरान ‘लैंड ऑफ मॉर्निंग काम’ में आजादी और शांति के लिए अपना खून-पसीना बहाया था जो दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ सबंधों को बयां करता है। ये फील्ड एंबुलेंस इन दिनों आगरा में तैनात रहती है और जब भी कोई नया कोरियाई राजदूत भारत पहुँचता है वो इस यूनिट में ज़रूर एक विजिट करता है।

‘प्रीति रेड्डी’ पढ़ी-लिखी थी, उसने अपनी बहन को क्यों किया फोन, पुलिस को क्यों नहीं’ – मंत्री महमूद अली

हैदराबाद के शमसाबाद में हुए प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) हत्याकांड पर जहाँ आज पूरा देश आक्रोशित है और गुनहगारों के लिए कड़ी सी कड़ी सजा की माँग कर रहा है। वहीं, तेलंगाना के गृहमंत्री महमूद अली ने इस मामले पर ऐसा बयान दे दिया है, जिसे सुनकर सोशल मीडिया पर हर ओर उनकी थू-थू हो रही है। दरअसल, इस पूरे मामले को महमूद अली ने अपने बयान से एक नया एंगल देने की कोशिश की है।

उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “मुझे इस घटना का दुख है। लेकिन ये दुर्भाग्य की बात है कि पीड़िता एक डॉक्टर थी, पढ़ी-लिखी थी, फिर भी उसने ऐसे समय में पहले अपनी बहन को कॉल क्यों किया? उसने 100 नंबर पर कॉल क्यों नहीं किया। अगर वो 100 नंबर पर कॉल करती तो शायद उसे बचाया जा सकता था।”

गृहमंत्री ने अपने राज्य की पुलिस के लिए तो बोल दिया लेकिन बहन को कॉल न करके पुलिस को फोन करने से प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) को कितना फायदा पहुँचता? शायद कुछ भी नहीं! क्यों? क्योंकि उसी पुलिस ने बाद में प्रीति के परिवार वालों की कोई मदद नहीं की। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब प्रीति की बहन ने उसका नंबर न मिलने पर पुलिस को सबसे पहले इसकी जानकारी देने की कोशिश की तो पुलिस द्वारा उसे ये कहकर टाला जाता रहा कि ये इलाका उनके अंतर्गत नहीं आता है। जबकि पिता ने जब अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत करवानी चाही, तो कथित तौर पुलिस ने उनसे पूछा कि कहीं उनकी बेटी किसी लड़के के साथ तो नहीं भाग गई?

सोचिए, ऐसी गंभीर स्थिति में जिस पुलिस के पास इतनी अनर्गल बातें करने का समय है क्या वो उस समय पर प्रीति की मदद के लिए त्वरित कार्रवाई करती? महमूद अली के अनुसार लड़की को अपनी बहन को नहीं, पुलिस को कॉल करना चाहिए था, ताकि उन्हें बचाया जा सके, लेकिन अगर राज्य की पुलिस इतनी ही सचेत है, तो क्या टॉल प्लाजा जैसी जगह पर कोई सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम नहीं होना चाहिए था?

महमूद अली के इस बयान ने आज उन लोगों को भी शर्मिंदा कर दिया है, जो राज्य में महिला सुरक्षा की दुहाई देते फिरते हैं, लेकिन जब ऐसी कोई घटना घट जाती है, तो फौरन लड़की पर इल्जाम मढ़ने से नहीं चूकते।

इस बयान के सामने आने के बाद प्रीति रेड्डी के लिए न्याय की गुहार लगाने वाले लोग अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का अली के बयान को आधार बनाकर कहना है कि त्वरित कार्रवाई और महिला सुरक्षा मानदंडो पर बात करने वाले लोग मानें चाहे न मानें, लेकिन 90 प्रतिशत भारतीयों का भरोसा 100 नंबर मिलाने से उठ चुका है।

इसके अलावा कुछ यूजर्स इस बयान को अतिसंवेदनशील करार देते हुए ये भी कह रहे हैं कि उन्हें इस बयान से कोई हैरानी नहीं है। ऐसे ही लोग महिला सुरक्षा की ऐसी बदतर स्थिति के लिए उत्तरदायी हैं।

एक यूजर ने भाजपा तेलंगाना को ये बयान टैग करते हुए लिखा है कि इस प्रकार के मंत्रियों पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

यहाँ बता दें कि शमसाबाद पुलिस थाने में जहाँ प्रीति की बहन से कहा गया था कि ये मामला उनके क्षेत्र में नहीं आता, उन्हें भी सस्पेंड किए जाने की माँग सोशल मीडिया पर उठ रही है और कहा जा रहा है कि सुरक्षा के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाने का खेल अब बंद होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि मामले के तूल पकड़ने के बाद तेलंगाना पुलिस ने इस मामले को सुलझा लेने का दावा किया है। उनके मुताबिक गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद पाशा और अन्य तीन बहुत दिन से प्रीति के साथ बलात्कार करने की योजना बना रहे थे और टोल प्लाजा पर खड़ी पीड़िता की स्कूटी को भी उन्होंने जान-बूझकर पंचर किया था। 

इसके अलावा प्रीति के पोस्टमार्टम में पता चला है कि उनके साथ बलात्कार ही नहीं हुआ बल्कि उन्हें गला दबाकर हत्या करने के पहले बुरी तरह टॉर्चर भी किया गया था। उनकी लाश को मोहम्मद पाशा की लॉरी में भरकर टोल प्लाजा से 30-40 (विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सटीक दूरी का अंतर है) किलोमीटर दूर ले जाकर आग लगा दी गई। पुलिस को जाँच में प्रीति के अंतःवस्त्र और उनके पास ही शराब की बोतलें भी मिली।

मो. पाशा ने पहले से ही प्लानिंग करके किया डॉ. प्रियंका का रेप और मर्डर, जलाई लाश: पुलिस का दावा

26 साल की डॉ. प्रियंका का रेप, मर्डर: शमसाबाद में मिली आधी जली लाश, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

गाय के पैर बाँध मो. अंसारी ने किया दुष्कर्म, नारियल तेल के साथ गाँव वालों ने रंगे हाथ पकड़ा: देखें Video

अरबाज ने प्रेमजाल में फॅंसाया, फिर 3 दोस्तों के साथ किया गैंगरेप: कैमूर में लोगों ने जला डाला आरोपित का घर

काशी-मथुरा हिंदुओं के लिए मक्का-मदीना जैसा, मुस्लिम उन्हें सौंप दे दोनों जगह: KK मुहम्मद

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक केके मुहम्मद ने अयोध्या राम मंदिर को लेकर आए फैसले के बाद एक इंटरव्यू में कहा कि डाकूओं को समझाना आसान है, लेकिन कम्युनिस्टों को नहीं। इस दौरान उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि चंबल घाटी स्थित बटेश्वर मुख्य मंदिर समेत अन्य मंदिरों का संरक्षण डाकू निर्भय गुर्जर के सहयोग से हुआ था। निर्भय गुर्जर के मारे जाने के बाद मंदिर पर फिर से खतरा मंडराने लगा था। इसके दोबारा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन प्रमुख केएस सुदर्शन आगे आए थे।

उन्होंने बताया कि जब वो चंबल गए तो वहाँ पर डाकूओं का बोलबाला था। उन्होंने निर्भय सिंह गुर्जर नाम के डाकू से भारतीय धरोहरों की सुरक्षा करने और मंदिर बनाने की बात की। बता दें कि निर्भय सिंह गुर्जर डाकूओं का मुखिया था। उन्होंने निर्भय सिंह को भारतीय इतिहास और महत्व के बारे में बताया। इस पर निर्भय सिंह ने मंदिरों के संरक्षण के लिए सहयोग देने का आश्वासन दिया। जिसके बाद उन्होंने 2 से 3 साल में प्रसिद्ध बटेश्वर मंदिर समेत कुल 80 मंदिरों का संरक्षण कार्य पूर्ण करवाया। उन्होंने बताया कि फिलहाल चंबल घाटी में तकरीबन 200 मंदिर हैं।

अयोध्या राम मंदिर पर बाद करते हुए उन्होंने कहा कि सभी संरचना की कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिसके आधार पर आप कह सकते हैं कि ये मंदिर था, मस्जिद था, या फिर चर्च। और इस संरचना के नीचे पूर्ण कलश, अष्टमंगल, मूर्तियाँ आदि मौजूद थे, जो कि यह प्रमाण देते हैं कि वो ढाँचा मंदिर की थी। इसके साथ ही सुग्रीव के बड़े भाई बालि को मारने और 10,000 राक्षसों को मारने के साक्ष्य हैं और सभी जानते हैं कि ये दोनों काम भगवान राम ने किया है।


केके मुहम्मद का साक्षात्कार आप वीडियो में 1:36 के बाद देख सकते हैं।

आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के ये लिए ये एक मौका है कि वो आगे आकर मंदिर निर्माण में सहयोग दें। हालाँकि, उन्होंने यह बात स्वीकारी है कि भारतीय मुस्लिम को अयोध्या पर फैसले से कोई दिक्कत नहीं है। अफगानी मुस्लिम लोग मंदिरों का विध्वंस करते हैं। कई और मंदिर हैं, जिसका विध्वंस किया गया है, लेकिन लोग उसके बारे में नहीं जानते हैं, क्योंकि वो अयोध्या की तरह प्रकाश में नहीं आया। उन्होंने कहा कि इसमें कम्युनिस्ट कहानीकार (इतिहासकार) इरफान हबीब जैसे लोग और जेनएनयू के लोग समर्थन देते हैं।

केके मुहम्मद ने कहा कि जिस तरह से मुस्लिमों के लिए मक्का मदीना मायने रखता है, उसी तरह से अयोध्या हिंदुओं के लिए महत्व रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ये मस्जिद अजमेर शरीफ, ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती या फिर निजामुद्दीन से संबंधित होता तो वो उनके साथ खड़े होते, लेकिन ये एक साधारण सा मस्जिद था। और हिन्दुओं के लिए यह मुस्लिमों के मक्का-मदीना की तरह है। इसके साथ ही उन्होंने एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि काशी और मथुरा का मंदिर भी हिंदुओं का है और उसी के हक में आएगा।

मदरसे में पढ़ाई को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मदरसे में सेमेटिक रिलीजन की पढ़ाई होती है। सेमेटिक रिलीजन कहने का मतलब उनका ये था कि कि अगर आप मुस्लिम नहीं हैं तो आपको जन्नत नसीब होगा, क्रिश्चन नहीं तो जन्नत नहीं मिलेगा। वहीं उन्होंने हिन्दू धर्म के बारे में बात करते हुए कहा कि इसमें आप राम, कृष्ण, शिव किसी भी भगवान की पूजा कर सकते हैं, नहीं भी कर सकते हैं… ये है हिन्दू। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिमों के लिए एक देश बनाया गया है- पाकिस्तान। मगर भारत में ऐसा नहीं है, और अगर भारत में ऐसा है तो सिर्फ बहुसंख्यक हिन्दुओं की वजह से। भारत को हिन्दू जैसे धर्म की जरूरत है। अगर भारत सेक्युलर है तो हिन्दू की वजह से।

आगे उन्होंने यह भी कहा कि जो मुस्लिम कह रहा है कि उनके पूर्वज राम-कृष्ण नहीं है, तो इसका मतलब है कि वो भारत के मुस्लिम नहीं है, वो किसी और देश के मुस्लिम हैं। उन्होंने अपने एक शिक्षक अबू बकर के बारे में बताते हुए कहा कि वो टिपिकल मुल्ला थे। रोज सुबह मस्जिद जाते थे, नमाज पढ़ते थे, लेकिन वो उनको रामायण और महाभारत भी पढ़ाते थे। उन्होंने कहा कि रामायण- महाभारत सिर्फ भारत का नहीं बलिक साउथ एशियन देश की भी धरोहर है।

इस दौरान एक दर्शक ने उनसे सवाल पूछते हुए कहा कि राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऐसा दिखाया गया कि इसमें किसी की हार नहीं हुई है। हिन्दू-मुस्लिम एक है। मगर इसमें सबसे बड़ी हार मार्क्सवादियों की हुई, जिसे मीडिया वालों ने नहीं दिखाया। इस पर उनकी राय क्या है? तो केके मुहम्मद ने इसका जवाब देते हुए कहा कि 34-35 साल की लड़ाई के बाद मार्क्सवादियों और वामपंथी इतिहासकारों की बड़ी हार हुई है। उन्होंने कुछ कम्युनिस्टों का उदाहरण देते हुए कहा कि हालाँकि ये लोग अच्छे होते हैं, मगर इरफान हबीब जैसे कुछ इतिहासकार बिल्कुल इसके विपरीत अपना नैरेटिव गढ़ते हैं, जो कि अब पूरी तरह से फेल हो चुका है।

उन्होंने कहा कि इसको टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे मुख्य समाचार पत्र तरजीह देते हैं। केके मुहम्मद ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ दिए एक इंटरव्यू के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्होंने समाचार पत्र को एक बयान दिया था। जिसे उसने एक बार प्रकाशित किया और फिर दोबारा उसने बिना उनसे पूछे, बिना उनकी अनुमति लिए अपने तरीके से अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए इस्तेमाल किया कि वो (केके मुहम्मद) अयोध्या मामले से जुड़े हुए नहीं है।

‘…वरना तुझे और तेरे परिवार को RDX से उड़ा देंगे’ – राष्ट्रपति कोविंद के रिश्तेदार को मिली Pak से धमकी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के एक रिश्तेदार को वाट्सअप कॉल पर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। बताया जा रहा है कि जिस नंबर से कॉल आया, वो पाकिस्तानी नंबर था। सूचना पाते ही पुलिस जाँच में जुट गई है। बता दें कि राष्ट्रपति कोविंद के रिश्तेदार को ये धमकी उस समय दी गई, जब राष्ट्रपति कानपुर जाने वाले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति कोविंद के जिस रिश्तेदार को ये धमकी मिली है, वो उनके भतीजे की पत्नी के भाई राजीव कुमार हैं। राजीव कल्याणपुर में रहते हैं और नमो सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति कोविंद 30 नवंबर को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय और नगर निगम के कार्यक्रम में शामिल होने कानपुर जा रहे हैं। इस कारण पहले ही पुलिस अधिकारी वहाँ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कराने में जुटे थे। लेकिन इसी बीच राजीव द्वारा कल्याणपुर थाने में ये शिकायत लेकर पहुँचने से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और हड़बड़ी में पुलिस अधिकारी थाने पहुँचे। इसके बाद राजीव से पूरे मामले की जानकारी ली गई।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट की मानें तो राजीव कुमार ने पुलिस को बताया कि गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 1 मिनट पर उनके मोबाइल फोन पर +92… नंबर से एक वाट्सएप कॉल आया। पहले उन्होंने इस नंबर पर गौर नहीं किया, लेकिन बाद में जब उन्होंने कॉल रिसीव किया, तो फोन करने वाले ने उन्हें धमकी देते हुए कहा- ‘नमो सेना छोड़ दे वरना तुझे और तेरे परिवार को आरडीएक्स से उड़ा देंगे।’ राजीव के अनुसार फोन करने वाले से जब उन्होंने नाम पूछा तो उसने अपना नाम नहीं बताया और करीब 40 सेकेंड बात करने के बाद फोन काट दिया।

पाकिस्तानी नंबर से इस प्रकार धमकी भरी कॉल आने के बाद राजीव और उनका परिवार दहशत में है। रिपोर्ट के मुताबिक सीओ अजय कुमार का कहना है कि वाट्सएप कॉल करने वाले ने राजीव को नमो सेना छोडऩे के लिए कहा है। शायद वह राजीव या संगठन को पहले से जानता है। +92 पाकिस्तान का आइएसडी कोड जरूर है लेकिन यह कॉल स्पूफिंग का भी मामला हो सकता है, जिसमें किसी भी नंबर का इस्तेमाल करके कॉल की जाती है। साइबर सेल व सर्विलांस टीम दोनों की मदद से जाँच कराई जा रही है।

छात्रों के विरोध के बीच डॉ. फिरोज ने दिया BHU आयुर्वेद संकाय में गुपचुप तरीके से इंटरव्यू

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध जारी है। इसी बीच खबर है कि BHU के आयुर्वेद संकाय के संस्कृत विभाग में असोसिएट प्रोफ़ेसर के पद के लिए आज शुक्रवार (नवम्बर 29, 2019) को डॉ. फिरोज खान ने गुपचुप तरीके से इंटरव्यू दिया जिसकी पुष्टि आयुर्वेद संकाय प्रमुख यामिनी भूषण त्रिपाठी ने किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि फिरोज खान इंटरव्यू देने आए थे, सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, रिजल्ट आने इसकी सूचना आपको जल्द दी जाएगी।

बता दें कि फिरोज खान का संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान में नियुक्ति का वहाँ के छात्रों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। जिसके लिए वे 15 दिनों तक धरना पर भी बैठे और अभी भी आंदोलन जारी रखे हुए हैं। कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार किया जा रहा है जिससे संकाय में पठन-पाठन ठप है। ऑपइंडिया के सूत्रों के अनुसार, छात्रों के विरोध को मद्देनजर रखते हुए आज फिरोज खान के इंटरव्यू को समय से पहले ही संपन्न करा लिया गया।
सूत्रों ने यह भी बताया कि डॉ. फिरोज खान ने कला संकाय के संस्कृत विभाग में भी आवेदन किया है जिसके लिए उनका साक्षात्कार 4 दिसम्बर को है।

मीडिया ने SVDV के आंदोलन को संस्कृत भाषा से जोड़कर भ्रम फ़ैलाने की कोशिश की थी। जबकि यह मुद्दा संस्कृत भाषा और हिन्दू-मुस्लिम का न होकर धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति से जुड़ा था। उस संकाय से इतर किसी और संस्कृत विभाग में होता तो SVDV के छात्र इसका कभी विरोध नहीं करते बल्कि स्वागत करते। वहाँ के छात्रों के उनके स्थान्तरण के माँग को देखते हुए इस बीच विश्विद्यालय में चर्चा ये भी है कि BHU प्रशासन ने अन्दोलनकारी छात्रों से 10 दिन की मोहलत माँगी थी, जिसकी समय सीमा एक-दो दिन में समाप्त हो रही है और छात्र अपनी माँगे न माने जाने के कारण एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर चुके हैं और इस आंदोलन को काशी के विद्वानों, SVDV के पूर्व आचार्यों और छात्रों सहित काशी विद्वत परिषद, शंकराचार्यों और रामलला जन्मभूमि के संतो सहित तमाम गणमान्य नागरिकों के समर्थन को देखते हुए प्रशासन डॉ. फिरोज खान क नियुक्ति आयुर्वेद या कला संकाय के संस्कृत विभाग में करके इस पूरे मामले का पटाक्षेप करना चाहता है।

हालाँकि, प्रशासन का यह दावा है कि फिरोज खान एक मेधावी छात्र हैं और उन्होंने पहले से ही BHU के कई विभागों में आवेदन कर रखा था। और उनका किसी अन्य संकाय के संस्कृत विभाग में चयन होता है तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। जब ऑपइंडिया ने इसे लेकर छात्रों से बात की तो उनका कहना है, “फिरोज खान की SVDV छोड़कर कहीं भी नियुक्ति हो हम उनका स्वागत करेंगे। हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है हमारा विरोध सिर्फ उनके संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पढ़ाने से है। हम उन्हें अपना आचार्य नहीं मान सकते, यहाँ उनकी नियुक्ति पूरी तरह से मालवीय मूल्यों, BHU संविधान और धर्म के संरक्षण के खिलाफ है।”

ग़ौरतलब है कि पहली बार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफ़ेसर डॉ फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति 5 नवम्बर को हुई थी। संकाय के विद्यार्थियों को जैसे ही इसका पता चला, उन्होंने इस नियुक्ति के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

बता दें कि BHU में विवाद के बाद अल्पसंख्यक प्रोफ़ेसर फ़िरोज़ ख़ान ने आयुर्वेद विभाग के संस्कृत प्रोफ़ेसर के लिए आवेदन किया है। और उनका इंटरव्यू आयुर्वेद विभाग में 29 नवंबर को है। इसका खुलासा ऑपइंडिया ने अपने पहले के रिपोर्ट में भी किया था।

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मो. पाशा ने पहले से ही प्लानिंग करके किया ‘प्रीति रेड्डी’ का रेप और मर्डर, जलाई लाश: पुलिस का दावा

शमसाबाद, हैदराबाद के प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) हत्याकांड को तेलंगाना पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। उनके मुताबिक गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद पाशा और अन्य तीन बहुत दिन से प्रीति के साथ बलात्कार करने की योजना बना रहे थे और टोल प्लाजा पर खड़ी पीड़िता की स्कूटी को भी उन्होंने जानबूझकर पंचर किया था। मोहम्मद पाशा महबूबनगर जिले का रहने वाला बताया जा रहा है।

अपडेट: मोहम्मद पाशा के अलावा पुलिस ने जिन तीन अन्य आरोपितों को पकड़ा है, उनके नाम हैं – नवीन, केशवुलु और शिवा।

इसके अलावा प्रीति के पोस्टमार्टम में पता चला है कि उनके साथ बलात्कार ही नहीं हुआ बल्कि उन्हें गला दबाकर हत्या करने के पहले बुरी तरह टॉर्चर भी किया गया था। उनकी लाश को मोहम्मद पाशा की लॉरी में भरकर टोल प्लाजा से 30-40 (विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सटीक दूरी का अंतर है) किलोमीटर दूर ले जाकर आग लगा दी गई। पुलिस को जाँच में प्रियंका के अंतःवस्त्र और उनके पास ही शराब की बोतलें भी मिले।

गौरतलब है कि हैदराबाद के बाहरी इलाके शमसाबाद में 26 वर्षीय महिला डॉक्टर की जली हुई लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई भाई। वारदात की सूचना मिलते ही जहाँ पुलिस सक्रिय रूप से मामले की जाँच में जुट गई, तो वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स भी कल रात से प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) कोल्लुरु स्थित पशु चिकित्सालय में काम करती थीं। बुधवार (नवंबर 27, 2019) को भी वह वहीं गई हुईं थीं। उन्होंने अपनी स्कूटी को शादनगर के टोल प्लाजा शमसाबाद के पास पार्क किया था। लेकिन रात में जब वह वहाँ वापस लौटीं तो उनकी स्कूटी पंक्चर थी। उन्होंने इसकी सूचना अपनी बहन को दी और कहा कि उन्हें डर लग रहा है, क्योंकि उनके आसपास सिर्फ लोडिंग ट्रक और अनजान लोग हैं।

प्रीति को डरा हुआ देखकर उनकी बहन ने उन्हें स्कूटी पार्क करके कैब से आने की सलाह दी। लेकिन प्रीति रेड्डी ने उन्हें बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें मदद ऑफर की है, इसलिए वो थोड़ी देर में कॉल बैक करेंगी।

इस वाकये के बाद प्रीति का कोई फोन नहीं आया, जब परिजनों ने उनसे कुछ मिनट बाद संपर्क करने का प्रयास किया तो उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। परेशान परिवार वाले खुद प्रीति को ढूँढने के लिए टोल प्लाजा की ओर निकले। जब वह नहीं मिलीं तो उन्होंने थक हारकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

फेसबुक पर भी प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) को लेकर दिख रहा गुस्सा

शिकायत मिलने के बाद गुरुवार (नवंबर 28, 2019) की सुबह पुलिस को हैदराबाद-बेंग्लुरु हाईवे के पास एक महिला का जला हुआ शव दिखाई पड़ने की जानकारी मिली। जब घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर प्रीति के घरवालों को संपर्क किया तो उन्होंने उसके कपड़े और गले का लॉकेट देखकर पुष्टि कर दी कि वो जली हुई लाश प्रियंका की ही है। पुलिस ने मौत से पहले रेप की भी शंका जाहिर की। पुलिस की यह शंका निराधार नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जहाँ प्रीति की आधी जली हुई लाश मिली, वहाँ से 100 मीटर की दूरी पर उसका अंडरवियर पाया गया है।

बता दें कि इस मामले में पुलिस ने जाँच शुरू कर दी और इसमें 10 से 15 विशेष टीमें जाँच में लगाई गईं। सीसीटीवी फुटेज खँगालने, प्रीति के कॉल रिकॉर्ड्स चेक करने आदि से पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रीति को मदद ऑफर करने वाले लोग कौन थे। इसके अलावा शमसाबाद के डिप्टी कमिश्नर प्रकाश रेड्डी ने भी मौके का मुआयना किया था।

इस खबर की सूचना मिलने के बाद ही ट्विटर पर और फेसबुक पर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के लिए लोग न्याय की गुहार लगाने लगे। साथ ही लड़कियों के लिए चिंता व्यक्त की गई कि अब हमारा समाज इतना भी सभ्य नहीं बचा कि एक लड़की किसी सड़क पर अकेले खड़ी हो सके।

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उमर अली ने 42 वर्षीय महिला का पहले किया बलात्कार, फिर फावड़े से पीट-पीटकर की हत्या

केरल में कोच्चि के नजदीक स्थित पेरुम्बवूर में 42 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार के बाद हत्या करने का मामला सामने आया है। घटना मंगलवार (नवंबर 26, 2019) देर रात एक बजे घटी है। आरोपित की पहचान असम प्रवासी उमर अली के रूप में हुई है। पुलिस ने उमर को गिरफ्तार कर लिया है। अब आगे की पूछताछ जारी है।

बुधवार (नवंबर 27, 2019) को घटना की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि सुबह शहर में एक दुकान के करीब एक मजदूर ने खून में लथपथ नग्न महिला का शव देखा। जिसके बाद पुलिस को इसकी सूचना मिली। मामले में तफ्तीश के दौरान मालूम चला कि महिला का पहले बलात्कार हुआ है और फिर फावड़े से उसके सिर-चेहरे पर वार कर उसकी हत्या की गई।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित ने अपनी पहचान छिपाने के लिए नजदीकी इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए थे, क्योंकि उनमें पूरी घटना कैद हो गई थी। लेकिन पुलिस ने कुछ अन्य कैद हुए फुटेज की मदद से उसकी पहचान कर ली और जल्द ही उसे गिरफ्तार भी किया।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने महिला की जानकारी देते हुए बताया कि मृतक महिला एर्नाकुलम जिला कुरुप्पमपाड़ी की निवासी थी। वह अपने परिवार से अलग हो गई थी और पेरुम्बवूर में अकेली रहती थी। जो कि एक औद्योगिक इलाका है और वहाँ बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर (नॉर्थ ईस्ट) से आए प्रवासी मजदूर रहते हैं।

जाँच में जुटी पुलिस के अनुसार अपराध की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। उमर से पूरे मामले में पूछताछ की जा रही है। महिला के चेहरे पर पुलिस को 30 गहरे घाव मिले हैं। इसके अलावा वो फावड़ा भी बरामद कर लिया गया है, जिससे महिला पर हमला हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक, एर्नाकुलम के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि वे पूरे मामले में एक अनुवादक की मदद से आरोपित उमप से पूछताछ कर रहे हैं। मुमकिन है आने वाले कुछ दिनों में वे आगे और जानकारी प्राप्त कर लेंगे।

उल्लेखनीय है कि प्रवासी मजदूरों से संबंधित ये तीसरा मामला है। इससे पहले भी साल 2016 में लॉ पढ़ रही छात्रा के साथ पहले बलात्कार और बर्बर हत्या का मामला सुर्खियों में आ चुका है। जिसमें असम के अमीरुल इस्लाम को दोषी ठहराया गया था और जाँच पूरी होने के बाद उसे मौत की सजा मुकर्रर हुई थी। इस घटना के बाद राज्य में प्रवासी मजदूरों के ख़िलाफ़ कई प्रदर्शन हुए थे। क्योंकि एक अनुमान के अनुसार इस समय केरल राज्य में कम से कम 30 लाख प्रवासी मजदूर रहते हैं।

सलमान ने किया साधु-संतों, हिंदू देवी-देवताओं का अपमान, सोशल मीडिया पर छाया #BoycottDabangg3

सलमान खान की फिल्म दबंग 3 विवादों में फँसती नजर आ रही है। आज (नवंबर 29, 2019) सुबह से ट्विटर पर #BoycottDabangg3 पर ट्रेंड कर रहा है। विवाद इतना बढ़ गया है, फिल्म को रोक लगाने की माँग की जा रही है। दरअसल मामला ये है कि इस फिल्म के टाइटल सॉन्ग ‘हुड़ दबंग दबंग…’ में सलमान खान के साथ साधु-संतों को डांस करते दिखाया गया है। जिसको लोगों ने गलत बताया है अब इस पर बवाल हो गया है। लोगों का कहना है कि मनोरंजन के नाम पर इस तरह से सलमान खान के साथ गाने पर साधु-संतों को नाचते हुए दिखाना हिन्दू धर्म-संस्कृति का अपमान है।

आलोक मिश्रा नाम के एक यूजर ने लिखा कि इस वीडियो में जिस तरह से साधु- संतों को डांस करते हुए दिखाया गया है, क्या आपने किसी पादरी या मौलवी को फिल्मी गाने पर डांस करते हुए देखा है? आलोक मिश्रा ने कुछ फोटोज भी शेयर की है। जिसमें लिखा है, “साधु-संतों का नहीं रख रहे हैं मान, क्या कभी मौलवी को नाचते हुए दिखाएगा सलमान खान?”  एक अन्य तस्वीर में लिखा गया है “ऋषि-मुनि, साधु-संत हैं हिंदू संस्कृति का अभिमान! उन्हें नाचते हुए दिखाकर, सलमान ने किया उनका अपमान!” इसके साथ ही एक फोटो में बॉलीवुड फिल्म OMG, PK और दबंग 3 को लेकर कहा गया है कि बॉलीवुड नहीं ले रहा है सुधरने का नाम, हिन्दू धर्म को कर रहा है बार-बार बदनाम।

वहीं पूजा नाम की एक यूजर ने लिखा कि हिन्दुओं को सेंसर बोर्ड से दबंग 3 फिल्म के सर्टिफिकेशन को रद्द करने की माँग करनी चाहिए। क्या फिल्म मेकर्स में इतनी हिम्मत है कि वो पादरियों या मौलवियों को इस तरह से नाचते हुए दिखा सके?

बता दें कि इस गाने में साधु-संतों को नाचते हुए दिखाने के साथ ही हिन्दुओं के आराध्य भगवान राम, कृष्ण और शिव को सलमान के साथ नाचते हुए दिखाया गया है। इसी पर निशाना साधते हुए एक यूजर ने लिखा, “#दबंग 3 का बहिष्कार करो हिंदुओं। सलमान खान की मूवी में हिंदू देवताओं को श्री राम श्री कृष्ण और शंकर जी को नाचते हुए दिखाया गया। हिंदू भावनाओ को ठेस पहुँचाया गया है व मज़ाक दिखाया गया है। दबंग 3 बैन करो।”

एक यूजर ने लिखा कि दबंग 3 के गाने में एक नदी के तटपर अनेक साधुओं को अश्‍लील और आपत्तिजनक शैली में नाचते हुए दिखाया गया है। कुछ साधुओं को पाश्‍चात्त्य लोगों की भांति गिटार बजाते हुए दिखाया गया है। कुछ साधुओं को गाने के तालपर अपनी जटाएँ और बालों को उडाते हुए दिखाया गया है। इस फिल्म में साधु-संतों को नाचते हुए दिखाकर किया घोर अपमान! साधु-संतों का अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्थान।

एक ने लिखा, “दबंग 3 वालों जरा होश में आओ। मनोरंजन के नाम पर साधु-संतों का मजाक न उड़ाओ।”

वैसे ये पहली बार नहीं हुआ है, जब हिन्दू संस्कृति या प्रतीकों का इस तरह से मजाक उड़ाया गया हो। हिन्दू देवी-देवता, इतिहास और पवित्र पुस्तकें हमेशा से चर्चा का विषय रही हैं और इन्हें लेकर न जाने कितनी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गई हैं, इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल है। दरअसल जब हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं या फिर प्रतीकों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाती है, तो कोई हिंसक घटना नहीं होती, जिस तरह से पैगंबर के ऊपर टिप्पणी करने पर होती है।

क्या आपने सुना है कि किसी हिन्दू ने किसी मुस्लिम को इसीलिए मार डाला क्योंकि उसने राम, कृष्ण या फिर दुर्गा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी? नहीं। मगर आपने ये जरूर सुना होगा कि शार्ली एब्दो में एक बार पैगम्बर मुहम्मद को लेकर कार्टून छापा गया था, जिसके बाद दुनिया भर के मुस्लिम सड़कों पर उतर आए। कई जगह रैलियाँ हुईं। 2011 में और फिर 2015 में, दो बार इसके दफ्तर पर इस्लामी आतंकी हमला हुआ। दूसरे हमले में 12 लोग मारे गए। बता दें कि शार्ली एब्दो फ्रांस से प्रकाशित होने वाली की एक मैगजीन है, जो अपने कार्टूनों के जरिए कटाक्ष और व्यंग्य का पुट लिए सामग्री के लिए जानी जाती है।

कथित तौर पर हिन्दूवादी नेता कमलेश तिवारी ने 2015 में पैगम्बर मुहम्मद पर कोई टिप्पणी की थी। जिसके बाद ख़बरें आईं कि 1 लाख मुस्लिमों ने सड़क पर उतर कर उन्हें फाँसी पर लटकाने की माँग की। मौलानाओं ने उन पर फतवे जारी किए, उनका सिर कलम करने की बात कही गई और उन्हें सरेआम धमकी दी गई और 18 अक्टूबर को गला रेत कर उनकी हत्या कर दी गई।

मगर हिन्दू धर्म के साथ खिलवाड़ करने वालों के साथ ऐसा नहीं होता। इसलिए हिन्दू धर्म को टारगेट करना अधिक आसान होता है, क्योंकि ये लोग ज्यादा से ज्यादा विरोध प्रदर्शन करते हैं, ट्विटर पर ट्रेंड चलाते हैं, जैसा कि अभी चल रहा है, मगर किसी भी हिंसक घटनाओं को अंजाम नहीं देते हैं।

इससे पहले भी दबंग 3 शिवलिंग का अपमान करने को लेकर चर्चा में आ चुका है। बता दें कि शूटिंग आराम से हो, इसके लिए क्रू के लोगों ने वहाँ के शिवलिंग के ऊपर स्टूल रख दिया। और तो और, क्रू के दो मेंबर उसके ऊपर चढ़कर बड़े आराम से प्री-शूटिंग का काम कर रहे थे। इसका फोटो और वीडियो वायरल हो गया। जिसके बाद  बात बिगड़ती देख कर सलमान खान ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा था कि वो बड़े शिव भक्त हैं और यह स्वीकार भी किया कि शिवलिंग का सम्मान करते हुए उसके ऊपर तखत उन्होंने ही रखवाया था और जब कुछ लोगों ने उसका दुरुपयोग किया तो तत्काल हटवा भी दिया।