कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ही पार्टी के नेता और वर्तमान में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को चिट्ठी लिखकर आपत्ति जताई है। चम्बल एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर लिखे अपने पत्र को कॉन्ग्रेस नेता सिंधिया ने ट्विटर पर भी पोस्ट किया है। उन्होंने अपने पत्र में इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि मध्यप्रदेश की चम्बल योजना में से भिंड जिले को जगह नहीं दी गई। इस सम्बन्ध में उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
मप्र शासन द्वारा स्वीकृत चंबल एक्सप्रेस-वे योजना में भिंड जिले को यथावत जोड़ने हेतु मुख्यमंत्री कमलनाथ जी को पत्र लिखकर अनुरोध किया@OfficeOfKNathpic.twitter.com/9oMwzJe9IL
अपने इस पत्र की एक कॉपी सिंधिया ने ट्विटर पर भी पोस्ट की। उन्होंने इसमें लिखा कि चंबल एक्सप्रेसवे को चम्बल नदी के समानांतर बनाने की योजना थी, जोकि मील का पत्थर साबित होगी मगर इसमें भिंड को शामिल ही नहीं किया गया है। भिंड जिला चम्बल नदी के समानांतर स्थित है। इस परियोजना में भिंड को शामिल किए जाने को लेकर अपने पत्र में उल्लेख करते हुए सिंधिया ने कहा कि यहाँ भी विकास की अपार संभावनाएँ हैं। इससे भिंड भी विकास की मुख्यधारा में शामिल होगा।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश की चम्बल एक्सप्रेसवे करीब 200 किलोमीटर लम्बी और 10 मीटर चौड़ी होगी। इस एक्सप्रेसवे का निर्माण अब मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम चम्बल क्षेत्र के गडौरा गाँव से शुरू कराएगा। इसके साथ ही राजस्थान का हैवी ट्रैफिक सबलगढ़, कैलारस होते हुए मध्य प्रदेश के मुरैना पहुँचेगा।
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार सिंधिया ने अपने पत्र में यह भी कहा कि अगर भिंड जिले को इस परियोजना में शामिल नहीं किया गया तो एक्सप्रेसवे बनाने की मूल-मंशा ही असफल रह जाएगी। सिंधिया का तात्पर्य था कि इस परियोजना के ज़रिए भिंड को भी मुख्यधारा के विकास जोड़ा जाना चाहिए। बता दें कि इस परियोजना से मध्यप्रदेश को काफी लाभ मिल सकता है। इसके ज़रिए राज्य के पर्यटन को भी अच्छा-खासा बढ़ावा मिलेगा। सिंधिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को लिखे अपने पत्र में यह भी लिखा, “आपसे मेरा आग्रह है कि सम्बंधित विभाग को निर्देशित करके भिंड जिले को इस परियोजना में शामिल किया जाए, मुझे आशा है कि इस विषय पर आप गंभीरता से विचार करेंगे।”
INX घोटाले में चिदंबरम परिवार की मुश्किलें कम होतीं नहीं दिख रहीं हैं। एक तरफ़ दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पी चिंदंबरम की गिरफ़्तारी बरकरार रखते हुए उन्हें जमानत देने से इंकार कर दिया है, और दूसरी ओर अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि उनके बेटे कार्ति चिदंबरम भी ईडी के रडार पर हैं- उनकी गिरफ़्तारी पर से अदालती रोक हटते ही एजेंसी उन्हें हिरासत में ले लेगी।
#INXMediacase: #TusharMehta ने आगे अपनी दलीलों को बढ़ाते हुए कहा कि #KartiChidambaram की गिरफ्तारी पर लगी ये अंतरिम रोक भी ठीक नहीं. कोर्ट ने बिना सारे तथ्यों पर गौर किए कार्ति की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. जैसे ही ये रोक हटेगी, कार्ति को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.#ZeeHindustan
मजे की बात यह है कि ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह बात जब कही तो अदालत में कार्ति मौजूद थे। दरअसल चिदंबरम सीनियर ने दिल्ली हाई कोर्ट के उक्त आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर बहस के दौरान यह बात कही गई। कार्ति अपने पिता की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत में थे।
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि कार्ति चिदंबरम को न ही जमानत मिली हुई है न ही अग्रिम जमानत। उन्होंने तो भ्रष्टाचार-निरोधक कानून मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के कुछ प्रावधानों को ही चुनौती दे दी थी। इसी की सुनवाई में कोर्ट ने संदर्भवश उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी। एजेंसी उसी के हटने का इंतज़ार कर रही है।
#INXMediacase: #ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल #TusharMehta ने कहा, #ED की ओर से दायर केस में #KartiChidambaram को न तो अग्रिम ज़मानत मिली है, न ही नियमित ज़मानत. मनी लांड्रिंग एक्ट के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है
इसके अलावा पी चिदंबरम को जमानत दिए जाने के विरोध में ईडी ने तर्क दिया कि वे कोई मासूम मंत्री नहीं थे, जिन्हें अँधेरे में रखा गया। मेहता के अनुसार INX मीडिया के अलावा भी कई कम्पनियाँ संदिग्ध हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि ईडी ने 16 कम्पनियाँ चिह्नित की हैं, जिनके मनी लॉन्ड्रिंग और संदेहास्पद आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने की शंका है।
इस बीच भ्रष्टाचार के गहराते आरोपों के बावजूद कॉन्ग्रेस पूरे दम-खम के साथ चिदंबरम के पक्ष में है। दो दिन पहले ही वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और संचार मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष शशि थरूर कार्ति चिदंबरम के साथ पी चिदंबरम से मिलने पहुँचे थे।
चेन्नई के तिरुवन्नामलई (Tiruvannamalai) में महिला थाने की पुलिस ने 20 वर्षीय पादरी चेल्लादुरई (chelladurai) और निकी फिलिप नामक (nikki philip) एक नाइजिरियन को 16 साल की लड़की का यौन शोषण करने के मामले में गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक इन दोनों ने नाबालिग लड़की को शादी का झाँसा देकर, उसका यौन शोषण उस समय किया, जब वह ग्याहरवीं कक्षा की छात्रा थी और तिरुवन्नामलई के एक गाँव में अपनी दादी के पास रहती थी। लड़की एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी है। इस मामले में दोनों आरोपितों के अलावा लड़की की दादी और पॉल नामक मैरेज ब्रोकर भी हिरासत में लिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, 2 साल पहले लड़की की दादी द्वारा घर के टेरेस पर संचालित चर्च में चेल्लादुरई पादरी की नौकरी करता था। इसी दौरान उसने लड़की से शादी का वादा किया। लेकिन बाद में उसे धोखा दे दिया। अपने बयान में लड़की ने बताया कि पादरी ने फरवरी 2017 से मई 2018 के बीच उसका बहुत बार यौन शोषण किया। और बाद में वह अपने काम के नाम पर कृष्णगिरी चला गया। धीरे-धीरे उसने लड़की से बात करनी बंद कर दी।
एक साल बाद लड़की की दादी के पास पॉल नामक मैरेज ब्रोकर फिलिप को लेकर आया। पॉल ने लड़की की दादी से फिलिप की पहचान एक समृद्ध व्यक्ति के रूप में कराई और उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा। बहुत कोशिशों के बाद भी चेल्लादुरई से संपर्क न होने के कारण बच्ची टूट चुकी थी और उसने फिलिप से शादी करने के लिए हाँ कर दी। सितंबर 24 से सितंबर 27 तक फिलिप लड़की के साथ एक होटल में रहा और लगातार उसका यौन शोषण करता रहा।
जब लड़की के किसी परिजन को इसके बारे में पता चला, तो वे तिरुवन्नामलई आईं और लड़की को किसी तरह बचाया। इसके बाद स्थानीयों लोगों ने इस मामले पर शिकायत करवाई और तिरुवन्नामलई में चाल्डलाइन अधिकारियों ने इसपर संज्ञान लिया। पहले लड़की की दादी को पकड़ा गया, फिर मैरेज ब्रोकर को पकड़ा गया और फिर तलाश अभियान चलाकर दोनों आरोपितों को पकड़ा गया, जो फरार थे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, तिरुवन्नामलई में महिला पुलिस थानों की इंस्पेक्टर ए. हेमामालिनी ने बताया कि लड़की के बयान अनुसार 4 आरोपितों पर आइपीसी की धारा 376 (1) के तहत और पॉक्सो एक्ट की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है। साथ ही पुलिस ने चेल्लादुरई को सोमवार को और फिलिप को मंगलवार की रात को गिरफ्तार कर लिया है।
बाहरी दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में सौतेले पिता दानिश अली (32) ने एक मामूली सी गलती पर अपनी 4 साल की सौतेली बेटी रुखसार उर्फ नेहा के सीने में इतनी तेजी से घूँसा मारा कि उसकी तुरंत मौत हो गई। इस घटना के बाद उसने पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की, लेकिन उसकी बीवी रुखसाना नहीं मानी और पूरे मामले का खुलासा हुआ। रुखसाना ने तुरंत इस घटना की सूचना पुलिस को दी और पुलिस ने दानिश को गिरफ्तार कर लिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 4 साल की रुखसार सुल्तानपुरी के बी ब्लॉक में अपनी अम्मी रुखसाना और सौतेले अब्बू दानिश के साथ रहती थी। साल 2014 में उसकी अम्मी रुखसाना ने अपने ही गाँव में रहने वाले राहुल से शादी की थी, जिसकी बेटी रुखसार थी। साल 2017 में राहुल की मौत हो जाने के बाद रुखसाना का निकाह उसके घरवालों ने दूसरे युवक के साथ करवा दिया। लेकिन वहाँ वह मार-पिटाई से तंग आ गई और उसने अपने दूसरे पति को तलाक दे दिया। इसके बाद साल 2017 में ही रुखसाना की माँ ने उसका तीसरा निकाह दानिश से करवाया, जो नांगलोई इलाके में एक कपड़े की फैक्टरी में नौकरी करता था।
The victim’s mother told the police that her husband was not fond of her daughter and used to beat her up.https://t.co/2N5hEM9ynv
रुखसाना के अनुसार दानिश को उसकी बेटी पसंद नहीं थी और वो अक्सर उसे छोड़ने की बात करता था। मगर वो नहीं मानती थी। ऐसे में मंगलवार की दोपहर दानिश रुखसार को ट्यूशन छोड़ने जा रहा था, तभी रुखसार से सड़क पार करने में कोई गलती हो गई। जिसके बाद दानिश ने पहले बच्ची को कई थप्पड़ मारे और फिर उसके सीने में जोर से घूँसा मार दिया। चोट इतनी जोर की थी कि रुखसार बेहोश हो गई। जब दानिश उसे लेकर रुखसाना के पास पहुँचा, तो उसने उसे बताया कि सड़क पार करते हुए किसी वाहन से उसे टक्कर मार दिया है।
बच्ची की नाजुक हालत देखते हुए दोनों उसे संजय गाँधी अस्पताल ले गए, जहाँ उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। साथ ही बच्ची की मौत पर संदेह भी जताया। इसके बाद शाम करीब 7:45 बजे रुखसाना ने पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस ने जब बुधवार को बच्ची का पोस्टमॉर्टम कराया तो डॉक्टरों ने बताया कि घूँसा लगने से मासूम का दिल फट गया। इससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में बता दें पुलिस ने दानिश पर हत्या का मामला दर्ज किया है। साथ ही उसकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
उत्तराखंड कैबिनेट ने बुधवार (27 नवंबर) को राज्य में चार धाम से संबंधित एक प्रस्ताव पास किया। प्रस्ताव में चार धाम के अलावा अन्य 51 मंदिरों के प्रबंधन का भी उल्लेख है। यह प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मंदिर और आंध्र प्रदेश में तिरुपति बालाजी मंदिर के तर्ज़ पर प्रबंधन करने संबंधी है।
राज्य सरकार ने यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के प्रबंधन की देखरेख के लिए चारधाम तीर्थ प्रबंधन बोर्ड अधिनियम-2019 को लागू करने की योजना बनाई है।
राज्य के शहरी विकास मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने बुधवार को बताया कि चारधाम विकास बोर्ड में मुख्यमंत्री अध्यक्ष होंगे जबकि संस्कृति विभाग के मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। लेकिन इसमें शर्त यह है कि मुख्यमंत्री अगर हिन्दू हो तभी वे अध्यक्ष होंगे अन्यथा सरकार का एक वरिष्ठ मंत्री (जिसका हिंदू होना अनिवार्य होगा) बोर्ड का अध्यक्ष होगा।
उन्होंने बताया कि कोशिश यह है कि राज्य में जहाँ अब तक, मंदिरों को सरकारी समितियों के साथ व्यक्तिगत समितियों द्वारा शासित किया गया है वहाँ हिन्दू पूजा स्थलों के कामकाज की देखरेख के लिए एक व्यापक क़ानून पेश किया जाए। यह क़ानून, केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित राज्य के सभी प्रमुख मंदिरों का नियमन करेगा, जिनकी देख-रेख अब केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर समिति कर रही है।
कौशिक ने बताया कि नया तीर्थस्थल जम्मू-कश्मीर के कटरा ज़िले में वैष्णो देवी मंदिर और तिरुपति में बालाजी मंदिर की तर्ज़ पर काम करेगा। उन्होंने कहा कि इस क़दम का उद्देश्य राज्य के सभी प्रमुख मंदिरों में सुविधाओं में सुधार करना है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
कौशिक ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में कुल 36 प्रस्तावों पर चर्चा की गई और 35 को मंज़ूरी दे दी गई। उन्होंने चारधाम तीर्थ प्रबंधन बोर्ड अधिनियम, 2019 को शामिल किया।
कौशिक ने बताया,
”एक बार जब राज्य का सीएम बोर्ड का अध्यक्ष बन जाएगा, इसके बाद तीन सांसदों, छह विधायकों, कई सचिवों और चार धामों के पुजारियों को भी बोर्ड में सदस्य के रूप में शामिल कर लिया जाएगा।”
कौशिक ने बताया कि बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी एक भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी होगा, जो पूर्व में प्राप्त पुजारियों के अधिकारों को देखेगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई मुस्लिम सीएम होता है तो कैबिनेट का एक वरिष्ठ हिंदू मंत्री बोर्ड का अध्यक्ष होगा।
उन्होंने कहा, ”शुरुआती चरण में, बोर्ड चार धाम और 51 मंदिरों का प्रबंधन करेगा। इस संबंध में एक विधेयक आगामी सत्र में राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा। अधिनियम बन जाने के बाद, बोर्ड वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी श्राइन मैनेजमेंट बोर्ड की तर्ज़ पर काम करेगा।”
इसके अलावा, कैबिनेट ने राज्य में मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए नियम और क़ानून बनाने का भी फ़ैसला किया है। उन्होंने बताया,
”नियम और क़ानून मदरसों को आधुनिक बनाने में मदद करेंगे। यह उनके कम्प्यूटरीकरण में मदद करेगा क्योंकि सरकार पीएम नरेंद्र मोदी के सिद्धांत ‘सबका साथ सबका विकास’ के तहत काम करती है। इसके अलावा, राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य में अरबी-फ़ारसी मदरसा बोर्ड के लिए नियम और क़ानून बनाने का भी फ़ैसला किया।”
इसके अलावा जिन स्कूलों में इमारतें नहीं हैं, कैबिनेट ने वहाँ बांस का उपयोग करके संरचनाओं के निर्माण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। वहीं, अन्य मंज़ूरियों में के बीच, राज्य मंत्रिमंडल ने घोषणा की कि वह अप्रैल में एक वेलनेस समिट-2020 का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस कार्यक्रम में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, चीन और थाईलैंड को भागीदार देशों के रूप में शामिल किया जाएगा और इसकी मेज़बानी के लिए 25 करोड़ रुपए ख़र्च होंगे।
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनने से पहले राजनैतिक गलियारे में बहुत उठा-पटक देखने को मिली। आरोप-प्रत्यारोपों के अलावा कई बैठकों में मनाने-रूठने की प्रक्रिया इस दौरान आम रही। लेकिन अब जब तस्वीर साफ हो गई कि एनसीपी-शिवसेना-कॉ़न्ग्रेस के गठबंधन से राज्य में सरकार बनने वाली है, उस समय एक और जानकारी सामने आई है। जानकारी ऐसी जिसे फिलहाल भाजपा पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में ये दिखाती है कि सत्ता पलटते ही अवसरवादी लोग चाहे किसी भी पार्टी से हों, वे खुद को बचाने के लिए जुगत-जुगाड़ में लग ही जाते हैं।
दरअसल, पता चला है कि शिवसेना के साथ गठबंधन बनाने से पहले कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और मल्लिकार्जुन खड़गे जिस गाड़ी में बैठकर एनसीपी चीफ शरद पवार के घर बुधवार (27 नवंबर 2019) को उच्च स्तरीय बैठक करने गए थे, उस बीएमडब्ल्यू का ताल्लुक भाजपा नेता से है। अब मन में ये सवाल लाजिमी है कि कॉन्ग्रेस नेताओं को बैठक में भाजपा नेता की कार से कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता क्यों गए? तो आइए बताते हैं… आखिर इस बैठक में भाजपा का नाम क्यों और किस कारण से उछला? और ये कहाँ तक उचित था।
Mumbai: Senior Congress leaders Ahmed Patel and Mallikarjun Kharge arrive at NCP Chief Sharad Pawar’s residence pic.twitter.com/c05lIEYw43
इंडिया टुडे की खबर के अनुसार, जिसे प्रभास के. दत्ता ने रिपोर्ट की है, जिस BMW कार में बैठकर दोनों वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता बैठक में पहुँचे, वे झारखंड के जमशेदपुर से पंजीकृत है और जिसका मालिकाना अधिकार केबीजे गोल्ड ऑर्नामेंट्स लिमिटेड के पास है। अब रिपोर्ट के अनुसार इस गोल्ड कंपनी के डायरेक्टर भाजपा नेता दीपक कम्बोज हैं। जो साल 2014 में भाजपा लहर होने के बाद भी दिनदोशी सीट से 580 वोटों से हार गए थे। और तो और, कम्बोज उस समय महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सबसे अमीर दावेदार थे।
साभार: इंडिया टुडे
कम्बोज की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कम्बोज की कुछ विशेष पहचान भी है, जो उन्हें कई सवालों के घेरे में घेरती हैं। जानकारी के अनुसार कम्बोज एक बैंक डिफॉल्टर हैं। उन पर बैंक का 30 करोड़ रुपया बकाया है और जिसके कारण भाजपा के सत्ता में रहने के बाद भी साल 2015 में बैंक ने उनका एक फ्लैट कब्जाया था। वहीं, कमला मिल में लगी आग के आरोपित के साथ फोटो खिंचवाकर साल 2018 में भी वो विवादों का हिस्सा रह चुके हैं। और, इसी वर्ष जून में बैंक ऑफ बड़ोदा ने उन्हें एक विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है, जिस कारण उनके ख़िलाफ कार्रवाई जारी है।
अब चूँकि महाराष्ट्र में सत्तापलट हो रहा है तो कम्बोज जो अब तक देवेंद्र फडणवीस के करीबी कहे जा रहे थे, वो अब महाराष्ट्र की भावी सरकार को खुश करने में लगे हैं। माना जा रहा है कि वे चाहते हैं कि शिवसेना को समर्थन देकर सत्ता में बैठाने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी उनसे खुश रहे और उनके ख़िलाफ़ चल रहे विवाद कभी विपक्षी पार्टी के लिए राजनीति का विषय न बने। अब इससे जाहिर है कि कॉन्ग्रेस नेताओं को भेजी गई बीएमडब्ल्यू कार का ताल्लुक किसी भाजपा नेता से नहीं बल्कि एक बैंक डिफॉल्टर से है, जो चाहता है कि उसके ख़िलाफ़ चल रही कार्रवाई शांत हो सके और ये मामले कभी तूल न पकड़ें।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद महाराष्ट्र की उथल-पुथल ने भी इस बात को साफ कर दिया है कि राजनीति में दुश्मनी सिर्फ़ तब तक होती है, जब तक उससे कोई फायदा न हो, अगर फायदा मिला तो विरोधी भी सहयोगी और दुश्मन भी दोस्त होता। इसी नीति को अपनाकर दीपक कम्बोज कॉन्ग्रेस के हितैषी बनना चाहते हैं, ताकि वे उस बदले के भाव से बचे रहें, जो पार्टियाँ सत्ता कब्जाने के बाद दिखाती हैं।
न्यू यॉर्क में भारत के कॉन्सुल जनरल हैं संदीप चक्रवर्ती। अभी खबरों में हैं। वो इसलिए क्योंकि उन्होंने कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर कुछ कह दिया। इससे बहुतों को मिर्ची लग गई। जबकि कॉन्सुल जनरल चक्रवर्ती ने सिर्फ इतना कहा कि इस्लामिक हिंसा के कारण मजबूरी में घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए भारत भी इज़राइली मॉडल अपना सकता है।
एक निजी कार्यक्रम में बोलते हुए कॉन्सुल जनरल संदीप चक्रवर्ती ने कहा कि कश्मीरी पंडित जल्द ही घाटी लौट सकते हैं क्योंकि “अगर इज़रायल के लोग ऐसा कर सकते हैं, तो हम भी कर सकते हैं।” यहाँ उनका तात्पर्य इससे था कि जिस तरह से इजरायल ने अपने नागरिकों के हितों के लिए रास्ते अपनाए, वैसा ही भारत भी कर सकता है। लेकिन उनके इस बयान से बवाल मच गया।
संदीप चक्रवर्ती ने इज़रायली मॉडल को स्पष्ट करते हुए संदर्भ में कहा,
“मेरा मानना है कि जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में सुधार होगा। यह शरणार्थियों को वापस जाने की अनुमति देगा और अपने जीवनकाल में, आप वापस जाने में सक्षम होंगे… आप अपने घर वापस जा पाएँगे और आपको सुरक्षा मिलेगी, क्योंकि दुनिया में हमारे पास पहले से ही एक मॉडल है।”
ख़बर के अनुसार, भारतीय राजनयिक ने टिप्पणी करते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि हम इसका पालन क्यों नहीं कर रहे हैं। ऐसा पूर्व में हुआ है। आपको देखना होगा कि अगर इज़रायल ऐसा कर सकता है, तो हम भी कर सकते हैं।” राजनयिक की इस टिप्पणी को रिकॉर्ड किया गया और फिर सोशल मीडिया पर अपलोड भी किया गया। एक घंटे के लंबे फेसबुक लाइव को आप नीचे सुन सकते हैं। यहाँ कॉन्सुल जेनरल संदीप चक्रवर्ती को 50वें मिनट से 56वें मिनट तक सुना जा सकता है। इन 6 मिनट में वो कश्मीरी संस्कृति, हिंदू संस्कृति के साथ-साथ कश्मीरी पंडितों के दर्द और उन्हें उनके घरों तक वापस जाने की बात करते हैं।
वीडियो देखने से सन्दर्भ का पता चल जाता है की राजनयिक ने कहीं भी कोई नकारात्मक बात नहीं की है, न ही उन्होंने किसी तरह की हिंसा की तरफ इशारा किया है। वीडियो में जो कहा गया है उसका मतलब बस इतना है कि अगर एक देश, इजराइल में, यहूदियों की पूरी आबादी अपनी भाषा, संस्कृति और ज़मीन के साथ 2000 साल के बाद भी अपनी पुरातन भूमि पर लौट सकती है, तो कश्मीरी पंडित भी वापस जा सकते हैं।
इसके लिए सरकार नीतियाँ बनाए, लोगों को जागरूक करे, कश्मीरी पंडितों की वापसी के साथ-साथ वैसा माहौल दे कि वो वहाँ अपना भविष्य देख सकें। इसके लिए किसी नरसंहार की आवश्यकता नहीं है, न ही कॉन्सुल जनरल ने ऐसा कहीं भी कहा है। मीडिया में इसे ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे एक सरकारी अफसर ने किसी सामूहिक नरसंहार की ओर इशारा किया है। इस तरह की बातें फैलाना विशुद्ध प्रपंच है, और कुछ भी नहीं।
इज़रायल ने 1967 में वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम पर क़ब्ज़े के बाद से लगभग 140 बस्तियों का निर्माण किया है। अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत बस्तियों को कथित तौर पर अवैध माना जाता है। लेकिन अमेरिका ने हाल ही में कहा कि वह अब नहीं मानता कि इज़रायल की बस्तियाँ अवैध हैं। और भले ही दुनिया इसे अवैध माने, इजरायल ने अपने नागरिकों के लिए जो किया, वो वैध है। और शायद इसी तर्क पर चक्रवर्ती ने अपनी बात रखी।
कश्मीरी पंडितों के साथ बैठक के दौरान अपनी टिप्पणी में, संदीप चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि लोग कश्मीरी संस्कृति के बारे में बात कर रहे हैं। इससे आगे इज़रायल के मुद्दे और यहूदी मुद्दे पर एक अतिथि द्वारा की गई टिप्पणी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा,
“उन्होंने अपनी संस्कृति को 2000 वर्षों तक जीवित रखा और वे वापस चले गए। मुझे लगता है कि हम सभी को कश्मीरी संस्कृति को जीवित रखना होगा। कश्मीर संस्कृति भारतीय संस्कृति है, यह हिन्दू संस्कृति है।”
उन्होंने कहा, “हममें से कोई भी कश्मीर के बिना भारत की कल्पना नहीं कर सकता है। हमारे पास हमारी ज़मीन होगी, हमारे लोगों को कुछ समय के लिए वापस जाना होगा, सरकार ने जो किया है, वह क्या किया है।”
उनकी टिप्पणी से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपनी कश्मीर नीति को लेकर भारत सरकार पर निशाना साधा। इमरान ख़ान ने कहा कि भारत सरकार की आरएसएस की विचारधारा की फासीवादी मानसिकता को दर्शाता है, जिसने 100 दिनों से अधिक समय तक जम्मू और कश्मीर की घेराबंदी जारी रखी, कश्मीरियों को काफ़ी-कुछ बर्दाश्त करना पड़ा, क्योंकि शक्तिशाली देश अपने व्यापारिक हितों के कारण चुप रहते हैं।
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए, संदीप चक्रवर्ती ने बुधवार (27 नवंबर) को ट्वीट किया, “सोशल मीडिया पर मेरे पोस्ट पर कुछ लोगों ने टिप्पणी की है। मेरे विचारों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। जिससे उसका अलग मतलब निकल रहा है।”
I have seen some social media comments on my recent remarks. My remarks are being taken out of context.
ग़ौरतलब है कि 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर की विशेष दर्जे को ख़त्म कर उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को रद्द कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख) में विभाजित कर दिया गया।
पाकिस्तान तब से लेकर अब तक भारत के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के फ़ैसले पर रोता आ रहा है और संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर इस मुद्दे को बार-बार फेल होने के बावजूद उठाता आ रहा है।
राजस्थान सरकार ने पाकिस्तान से आकर भारत में रह रहे 21 पाकिस्तानी प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की है। अधिकारियों के मुताबिक़, जिन पाकिस्तानी प्रवासियों को नागरिकता प्रदान की गई है, वो पिछले 19 साल से भारत में रह रहे थे। नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी 21 लोग विषम परिस्थितियों में पाकिस्तान छोड़कर भारत में रहने आए हिन्दू हैं।
Rajasthan: 21 Hindu migrants from Pakistan, who had been living in the state, were granted Indian citizenship today. They were handed over the citizenship certificates at the District Collectorate in Jaipur today. pic.twitter.com/6LgzyCwZsH
ख़बर के अनुसार, जयपुर ज़िला कलेक्टर जगरूप सिंह ने बताया कि भारतीय नागरिकता नहीं होने की वजह से इन्हें सरकारी नौकरी पाने और विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में 35 पाकिस्तानी प्रवासियों को भारतीय नागरिकता दी गई गई है।
जयपुर के ज़िला कलेक्टर ने यह भी बताया कि 28 अन्य पाकिस्तानी प्रवासियों ने भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है और उसके लिए प्रक्रिया चल रही है, इसके अलावा 63 अन्य मामलों में भी जाँच हो रही है और जल्द से जल्द उन सभी को भारतीय नागरिकता देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्थान में जयपुर के अलावा जोधपुर और जैसलमेर के ज़िला कलेक्टरों को भी जाँच के बाद पाकिस्तानी प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार है।
इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान सरकार के उस आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई थी, जिसमें पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों को वापस भेजने की बात कही गई थी। विदेशियों के प्रत्यर्पण के सम्बन्ध में गृह मंत्रालय ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाई थी। बता दें कि अशोक गहलोत सरकार ने हिन्दुओं के लिए भारत छोड़कर पाकिस्तान चले जाने का आदेश दिया था। राज्य सरकार का यह आदेश उनके लिए था जो पाकिस्तान के सिंध प्रांत से धार्मिक वीजा पर भारत आए थे।
एक रिपोर्ट के मुताबिक़, इन परिवारों के 19 सदस्य भारत में रह रहे थे। इनमें से तीन सदस्यों को सीबीआई और ज़िला प्रशासन की टीम ने पाकिस्तान चले जाने का नोटिस थमा दिया था।
आश्चर्य इस बात पर होता है कि यह वही गहलोत सरकार है, जिसने कभी पाकिस्तानी शरणार्थियों को वापस चले जाने का फ़रमान सुनाया था, और अब उन्हें नागरिकता प्रदान कर अपना अगला सियासी दाँव खेला है। कॉन्ग्रेस सरकार की इस पैंतरेबाज़ी से उसका दोहरा चरित्र खुलकर सामने आता है, जिसका एकमात्र मक़सद केवल जनता को ठगना भर ही है।
महाराष्ट्र में लंबे समय तक चले राजनैतिक नाटक के बाद आज (नवंबर 28, 2019) आखिरकार शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले हैं। इस बीच 75 वर्षीय एक वैदिक ज्योतिश ने इस नई सरकार पर एक भविष्यवाणी की है। सुशील चतुर्वेदी नामक ज्योतिश ने मिड डे से बातचीत में दावा किया है कि ये गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं टिकने वाला। उन्होंने अपनी गणना के अनुसार बताया कि ये सरकार अप्रैल तक धराशाही हो जाएगी।
सुशील चतुर्वेदी के अनुसार उनकी ये भविष्यवाणी उद्धव ठाकरे द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले समय पर आधारित है। चतुर्वेदी के अनुसार यह बताता है कि अगर उद्धव आज निर्धारित समय पर शपथ ग्रहण करते हैं, तो आने वाले समय में उनके लिए परेशानियाँ बढ़ेगीं। 7 फरवरी से 28 अप्रैल तक में सरकार के गिरने के भी आसार हैं। बता दें कि उद्धव ठाकरे आज यानी 28 नवंबर को शाम 6 बजकर 40 मिनट पर शपथ लेने वाले हैं।
ज्योतिष सुशील चतुर्वेदी के मुताबिक शपथ ग्रहण के लिए तय किया गया समय ग्रहों की स्थिति के अनुसार गठबंधन के अनुकूल नहीं है। इस समय वृष आरोही है। शनि, शुक्र और चंद्रमा भी आठवें घर में संपर्क बनाए बैठे हैं, जो कि अंत समय को दर्शाता है। इसके बाद मंगल और बुध भी छठे स्थान पर बैठे हैं, जो कि दुश्मनों का घर है। इसलिए शपथ ग्रहण समारोह के समयानुसार ये गठबंधन उसी समय बिखर जाएगा, जब ये सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य आएँगें।
सुशील चतुर्वेदी ने भविष्यवाणी की है कि 7 फरवरी से 28 अप्रैल के बीच का समय गठबंधन के लिए सबसे परेशानी भरा वक्त होगा, क्योंकि इस दौरान इनमें ज्यादा मतभेद होंगे। उनके कहे मुताबिक यही मतभेद इस गठबंधन का धराशाही कर देंगे।
इसके अतिरिक्त, ज्योतिष चतुर्वेदी ने शिवसेना का नाम लिए बिना ये भी बताया है कि सरकार बनाने की चाह में उन्होंने जो कदम उठाएँ हैं, उसके कारण वे आने वाले समय में अपनी अधिकतर सीटें राज्य में खो देंगे। बता दें इस दौरान जब ज्योतिश जी से इस परेशानी का समाधान पूछा गया तो वो इस बात को मुस्कुराकर टालते नजर आए। उन्होंने कहा, “अगर मैं यहीं सारे उपाय बता दूँगा, तो मुझे मेरी दक्षिणा कौन देगा?”
संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पार्टी के सर्वेसर्वा गाँधी परिवार पर तीखा हमला बोला। गृहमंत्री ने सदन में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए गए आक्षेप के जवाब में अपनी बात रखते हुए कहा कि गाँधी परिवार की सिक्योरिटी हटाई नहीं गई है बल्कि उसमे कुछ बदलाव किए गए हैं। एसपीजी को लेकर शाह ने राहुल और उनकी कॉन्ग्रेस पार्टी को भी आइना दिखा दिया।
शाह ने कहा कि केंद्र सरकार की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शाह बोले कि लगातार यह दिखाने की कोशिश हो रही है कि गाँधी परिवार की सिक्योरिटी वापस ले ली गई है और हमारी सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर बेपरवाह है। गृहमंत्री ने कहा कि गाँधी परिवार की सिक्योरिटी कम करने की बजाय सिक्योरिटी एजेंसी की सलाह पर सुरक्षा कारणों से हमने उनका सुरक्षा घेरा बढ़ा दिए हैं। दरअसल जब से भारत सरकार ने गाँधी परिवार के सदस्यों की सिक्योरिटी एसपीजी से हटाकर ज़ेड प्लस की है उसी के बाद से कॉन्ग्रेस पार्टी के कई नेता केंद्र सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं। बता दें कि गाँधी परिवार के जिन सदस्यों की सिक्योरिटी घटाई गई है उनमें सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा के नाम शामिल हैं।
लोकसभा की कार्रवाई के दौरान कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा सतर्क किए जाने के बावजूद गाँधी परिवार और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा हटाने के केंद्र सरकार के निर्णय पर सवाल खड़े कर दिए।
वहीं बदले की राजनीति के आरोप का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि राजनीति में बदले की भावना रखना भाजपा का सिद्धांत नहीं है। बदले की राजनीति करना तो दरअसल कॉन्ग्रेस पार्टी की पुरानी आदत रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस को वीआईपी की भी नहीं बल्कि एक परिवार की चिंता है। शाह ने आगे कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा घटी तो कोई नहीं बोला मगर जैसे ही गाँधी परिवार की सुरक्षा कम की गई तो सबने हल्ला मचाना शुरू कर दिया। गृहमंत्री ने सवाल किया कि पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह और गाँधी परिवार की सिक्योरिटी को लेकर कॉन्ग्रेसियों के स्वर में आखिर इतना अंतर क्यों है?
इस दौरान अमित शाह ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने एसपीजी बिल में कई ऐसे संशोधन किए जिनका उद्देश्य सिर्फ गाँधी परिवार का पक्ष लेना था। उन्होंने वह मौके भी गिनाए जब गाँधी परिवार के सदस्यों ने एसपीजी का अनादर भी किया। उन्होंने कहा कि 600 बार ऐसे मौके आए जब राहुल ने ऐसा किया। इस सम्बन्ध में आँकड़े पेश करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने भारत में यात्रा करने के दौरान 1892 बार एसपीजी के नियमों का उल्लंघन किया जबकि 2015 से अबतक अपनी विदेश यात्राओं के दौरान उन्होंने 247 बार एसपीजी के नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं। इसपर गृहमंत्री शाह ने पूछा कि आखिर यह लोग अपनी विदेश यात्राओं की जानकारी इतना छिपाते क्यों हैं?
बता दें कि सरकार द्वारा गाँधी परिवार को एसपीजी की बजाय ज़ेड प्लस सिक्योरिटी देने के निर्णय के कई दिनों बाद आज एसपीजी से सम्बंधित यह बिल संसद में पेश किया गया था।