वीभत्स और क्रूर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) रेप और हत्याकांड ने देश में एक बड़ी आबादी को झकझोर कर रख दिया है। इसमें आम लोगों की एक बड़ी संख्या तो शामिल है ही, ऐसा लग रहा है कि इसमें आंध्र प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस की ट्विटर आईडी का एडमिन भी है। सोशल मीडिया पर आंध्र प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस की ट्विटर आईडी से हुए एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है, जिसमें उनके हैंडल से हुए ट्वीट में इस हत्याकांड की जगह को ‘पीसफुल एम’ (‘शांतिप्रिय-मुस्लिम’) वाला इलाका बताया गया है। साथ ही उनके हत्यारों को “पीसफ़ुल मॉन्स्टर्स” (‘शांतिप्रिय दरिंदे’) कहा गया है। लेकिन जल्दी ही वह ट्वीट डिलीट भी कर दिया गया।
मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए बदनाम कॉन्ग्रेस के हैंडल से ऐसी ट्वीट, ऐसे तंज़ का आना ट्विटर पर लोगों को भौंचक कर रहा है।
कुछ लोग उन्हें ‘संघ के एजेंडे पर चलने वाला’ कह रहे हैं (जबकि इस मामले का आरएसएस से कोई लेना-देना ही नहीं है!), तो कुछ अन्य ने कॉन्ग्रेस के बहिष्कार के लिए आह्वान करना शुरू कर दिया है।
@AndhraPMC what do you mean by “Peaceful-M”..??? Is all Muslims are rapist?? Let me tell u 4 men are got arrested 1 Muslim and 3 Hindus don’t play politics here and bring justice… And to all Muslims boycott @AndhraPMC they hate Muslims deep in their heart..
आम लोग ही नहीं, रिपब्लिक टीवी की दक्षिणी भारत ब्यूरो चीफ़ पूजा प्रसन्ना ने भी कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया।
Bloody hell, have you lost your freaking mind, Congress? This from an official handle of AP Mahila Congress. “Peaceful-M”, really? https://t.co/FEXEA5ukrz
“…कमल के निशान पर जो वॉट (वोट) दबाओगे ना, वो वॉट तिवारी (भाजपा विधानसभा प्रत्याशी) को नहीं जाएगा, वो वोट नरेंद्र मोदी को मिलने वाला है… ये समझकर दबाना… मगर मुझे ‘हा हा’ कर रहे हो, ये बीस-पचीस हजार लोगों से तिवारी जीत जाएँगे क्या? जीतेंगे क्या?… अरे भाई, क्या ‘हा’ कह रहे हो? मैं भी बनिया हूँ… मुझे मालूम है नहीं जीतेंगे यार…”
यहाँ गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान को शब्दशः लिखना ज़रूरी है, क्योंकि उनके झारखंड में चुनावी सभा के दिए गए बयान के संदर्भ से ही छेड़छाड़ कर पत्रकारिता का समुदाय विशेष फेक न्यूज़ फैलाने के अपने नए हथियार को धार देने में जुटा है। इस नए हथियार का नाम है ‘सही तथ्य की फेक न्यूज़’।
झूठे तथ्यों और झूठे नैरेटिव के फ़ैल हो जाने के बाद मीडिया गिरोह यह नया, परिष्कृत हथियार लेकर आया है- जिसमें न मुख्य तथ्य के साथ छेड़छाड़ होती है और न ही किसी तरह का नैरेटिव दिया जाता है। केवल उस तथ्य के आसपास का संदर्भ गोल कर दिया जाता है, तोड़-मरोड़ दिया जाता है, या फिर उस तथ्य की रिपोर्टिंग ऐसे अंदाज़ में की जाती है कि जो झूठ शब्दों में न आ पाए, वह टोन में आ जाए। अमित शाह के झारखंड की चुनावी रैली में दिए गए भाषण को लेकर ऐसी ही ‘सही तथ्य की फेक न्यूज़’ प्रचारित हो रही है- और इसे करने में अग्रणी है द टेलीग्राफ, और इसके वरिष्ठ संवाददाता अंकुर भारद्वाज।
जैसा कि उनके भाषण के ऊपर दिए गए शब्दों से साफ़ है, और ऊपर के वीडियो में भी देखा जा सकता है, अमित शाह ने यह बात एक रौ में जनता से संवाद करते हुए कही थी। लेकिन अलग-अलग मीडिया गिरोह इसे अलग-अलग तरीके से ‘स्पिन’ देने की कोशिश कर रहा है, वह भी फेक न्यूज़ का। कहीं कोई वॉट्सऍप फॉरवर्ड मिल रहा है जिसमें केवल “अरे भाई, मैं भी बनिया हूँ” चल रहा है, कहीं कोई अख़बार या पोर्टल लिख रहा है कि अमित शाह यह बात मंच पर बैठे कुछ ही लोगों से कहना चाहते थे और माइक बंद न होने से ‘गलती से’ यह सबको सुनने को मिल गया।
लेकिन अमित शाह के भाषण के वीडियो और उनके शब्दों से यह साफ है कि उन्होंने यह बात अपना भाषण सुन रहे लोगों को इंगित कर के ही कही थी। इस दौरान न ही वे मंच की ओर मुड़े और न ही माइक बंद करने की कोई कोशिश की। लेकिन टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट में भी, और उसे साझा करते हुए उनके वरिष्ठ संवाददाता अंकुर भारद्वाज के ट्वीट में भी, माइक के बंद होने-न होने का ज़िक्र कर ऐसा जताने की कोशिश की गई है कि भूलवश अमित शाह ने खुले ,माइक पर यह बात कह दी।
अंकुर भरद्वाज के ट्वीट ने एक और झूठ फैलाया- कि अमित शाह ने यह बात मंच पर मुड़ कर कहने की कोशिश की थी। वीडियो देखने से यह साफ हो जाएगा कि उन्होंने यह बात नीचे बैठे श्रोताओं से ही कही थी। इतना छोटा झूठ फ़ैलाने का क्या लाभ?- यह सवाल जायज़ है। इसका जवाब यह है कि इसके ज़रिए ऐसा दिखाने की कोशिश की जा रही है कि अमित शाह किसी जातिवादी संदर्भ में अपनी जाति का ज़िक्र कर रहे थे, और इसे छिपाने की कोशिश कर रहे थे- जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर है।
Amit Shah saw a thin crowd at his rally in Jharkhand. Turned to others on the dias and said: Aap mujhe bewakoof mat banao. Main bhi baniya hoon. Ye dus pandrah hazar logon se jeet lenge kya. The mic wasn’t switched off but. pic.twitter.com/KFQ9xBXXur
उन्होंने यह बात किसी जातिवादी संदर्भ में नहीं बल्कि कम भीड़ पर नाराज़गी जताने के लिए कही थी- और जिस लहजे में उन्होंने यह कहा था, वह भारत के आम जीवन में बहुत आम है। अमूमन हम में से हर कोई अपनी जाति को किसी न किसी गुण से जोड़ता है, और अगर किसी स्थिति में उसे लगता है कि उस गुण विशेष में कोई उससे इक्कीस बनने की कोशिश कर रहा है तो अपनी जाति का हवाला उस व्यक्ति को हम यह याद दिलाने के लिए देते हैं कि इस गुण विशेष में हमने भी कच्ची गोलियाँ नहीं खेलीं। अमित शाह के मामले में यह गुण (चुनावी) गणित और वह दूसरा व्यक्ति सामने बैठी जनता है।
अमित शाह ने जब पूछा, “ये बीस-पचीस हजार लोगों से तिवारी जीत जाएँगे क्या?” तो भीड़ में से कुछ लोग या तो उनका गुस्सा समझे नहीं, या समझ गए लेकिन और कोई जवाब नहीं सूझा तो “हाँ-हाँ” करने लगे। उसी पर खीझ कर उन्होंने याद दिलाया कि वे भी बनिया हैं (बनियों को आम अवधारणा में व्यवहारिक हिसाब किताब में कुशल माना जाता है), और इसलिए संगठन के लोग उन्हें मूर्ख न बनाएँ, गलत आश्वासन न दें। इस बात को उन्होंने पूरे आत्मविश्वास, पूरी ठसक के साथ कहा- क्योंकि पता था कि न ही वे किसी दूसरी जाति को नीचा दिखा रहे हैं और न ही जाति के आधार पर वोट माँग रहे हैं। लेकिन इसी बात को माइक के ज़िक्र के साथ जोड़कर मीडिया ने ऐसा दिखाने की कोशिश की है जैसे वे यह जानते हुए कि कुछ गलत बोल रहे हैं, इसीलिए यहाँ माइक का ज़िक्र ज़रूरी है।
और जाते-जाते एक और बात- अभी कुछ दिन पहले कहीं से गुज़रते हुए मैंने संयोगवश झगड़ रहे लोगों की बहस में से एक वाक्य सुना, “…साले, तुम्हें पता नहीं है- खटिक हैं हम, काट देंगे एक्कै बार में…”। मुझे किसी संदर्भ, किसी परिप्रेक्ष्य, दूसरे इंसान की जाति का अता-पता नहीं है, लेकिन इतना जानता हूँ कि पारम्परिक रूप से हिन्दुओं में सबसे अधिक कसाई और माँस-व्यापार करने वाली जाति खटिक दलितों में आती है- ऐसा माना जाता है कि तथाकथित ब्राह्मणवादियों द्वारा सबसे अधिक कथित तौर पर उत्पीड़ित जातियों में से एक है। और अगर उसका व्यक्ति भी आज के समय में वक्त और परिस्थिति के हिसाब से किसी जगह अपनी जाति का हवाला एक गुण के रूप में देता है, तो इसका मतलब साफ़ है कि जाति का हवाला भर देना हर जगह जातिवाद नहीं बन जाता।
अफ़ग़ानिस्तान प्रत्यर्पण संधि के तहत 13 आतंकवादी भारत को सौंप सकता है। ये वो आतंकी हैं, जिन्होंने पिछले कुछ हफ्तों में अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सेना के सामने आत्मसर्पण किया था। इनमें 600 से अधिक इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी थे।
इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, भारत और अफ़ग़ानिस्तान ने पिछले रविवार (25 नवंबर) को अपनी द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के संचालन को औपचारिक रूप दिया था। ख़बर में काबुल के सूत्रों के हवाले से लिखा गया, “प्रत्यर्पण संधि की औपचारिकता के बाद काबुल ने 13 आईएस आतंकवादियों के प्रत्यर्पण का फ़ैसला किया है।”
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, “आतंकवादियों को उचित प्रक्रिया के बाद भारत को सौंपा जाएगा। यह क़दम दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी साझेदारी में महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित होगा।”
अफ़ग़ानिस्तान के एक अधिकारी ने बताया, “पिछले कुछ हफ्तों में अफगान सुरक्षा बलों के अलग-अलग अभियानों के बाद सैकड़ों इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था।”
अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार प्रांतीय गवर्नर शाह महमूद मियांखली ने कहा, “पिछले दो सप्ताह में ISIS के 243 आतंकवादी और उनके परिवार के लगभग 400 सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं।” पिछले सप्ताह नंगरहार के अचिन ज़िले में सुरक्षा बलों के सामने 51 महिलाओं और 96 बच्चों के साथ 82 सेनानियों ने अपने हथियार सौंप दिए थे।
इससे पहले भी महिलाओं और बच्चों सहित लगभग 300 ISIS सदस्यों ने नंगरहार में अफ़ग़ान विशेष बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। वहीं, दूसरी तरफ, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि जुलाई में अफ़ग़ानिस्तान में ISIS के 2,000 से कम लड़ाके थे। जबकि संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि उस देश में 2,500 और 4,000 लड़ाके थे।
दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के बीच हुए कोरियाई युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल (स्वर्गीय) एजी रंगराज को अपने देश के सबसे बड़े युद्ध सम्मान ‘वॉर हीरो’ से सम्मनित करने का ऐलान किया है। 2020 में इस युद्ध को पूरे 70 साल हो जाएँगे, इसी ख़ास मौक़े पर दक्षिण कोरिया की तरफ से इस सम्मान का ऐलान किया गया। बता दें कि दक्षिण कोरिया के वॉर-वेटरन मंत्रालय की तरफ से हर साल युद्ध की याद में इस सम्मान का ऐलान किया जाता है।
भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल (स्वर्गीय) एजी रंगराज (तस्वीर साभार: www.ssbcrack.com)
नई दिल्ली स्थित कोरियन एंबेसी के कर्नल ली इन ने बताया कि कोरिया की तरफ से लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज को उनके महान कार्यों के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। साथ ही सियोल में मौजूद कोरियन वॉर मेमोरियल में अगले साल जुलाई 2020 में लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज की एक बड़ी-सी तस्वीर भी लगाई जाएगी।
आइए अब आपको बताते हैं भारतीय सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल (स्वर्गीय) एजी रंगराज के बारे में, जिनकी अगुआई में 60वीं पैराशूट फ़ील्ड एंबुलेंस ने नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच हुए युद्ध में मोबाइल आर्मी सर्जिकल हॉस्पिटल (MASH) चलाया गया था।
दरअसल, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि 1950 में जब उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच युद्ध हुआ था, तो भारतीय सेना ने किसी एक सेना का साथ देने की बजाए एक तटस्थ भूमिका निभाते हुए अपनी एक मोबाइल मिलिट्री एंबुलेंस प्लाटून को एशिया के सुदूर-पूर्व में युद्ध के मैदान में भेजा था। यही प्लाटून थी 60वीं पैराशूट फ़ील्ड एंबुलेंस प्लाटून। लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज इसी पलाटून के कमांडर (प्लाटून-कमांडर) थे जिसमें कुल 627 जवान थे।
भारतीय सेना की इस प्लाटून एंबुलेंस ने घूम-घूम कर युद्ध क्षेत्र में ख़तरों के बीच घायल हुए सैनिकों का इलाज किया था। इस दौरान भारत के तीन सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे, जबकि 23 जवान घायल हुए थे। लगभग तीन साल (1950-53) तक चलने वाले इस युद्ध में लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराजन पूरी मुस्तैदी के साथ वहाँ डटे रहे। उनके इस अदम्य साहस के लिए भारत सरकार ने उन्हे महावीर चक्र से भी सम्मानित किया था।
जानकारी के अनुसार, कर्नल रंगराज ख़ासतौर पर पहाड़ के संचालन के लिए प्रशिक्षित थे, जैसे कोरियन होते थे, और उनके पास इस तरह के काम के लिए आला दर्जें के उपकरण थे। भारतीय सेना भीषण सर्दी से जूझती हुई भीषण युद्ध के दौरान इलाज कर रही थी।
मार्च 1951 में, युद्ध के दूसरे सबसे बड़े हवाई ऑपरेशन, ऑपरेशन टॉमहॉक में, 4,000 अमेरिकी सैनिकों के साथ लाइनों के पीछे 60वीं पैराशूट में एक दर्जन डॉक्टर्स थे, जिसमें रंगराज भी मौजूद थे।
उस समय काफ़ी जनहानि हुई थी। अमेरिका के कमांडर के अनुसार, “मुझे भारतीयों की दक्षता से तुरंत धक्का लगा। एक छोटी भूमिका में अनुकूलित उस छोटी इकाई ने 103 ऑपरेशन किए थे। जो उस तरह की छोटी इकाई के लिए बड़े साहस की बात थी।”
सितंबर, 1951 में, राष्ट्रमंडल सैनिकों से जुड़े रहने के दौरान, उन्होंने छ: दिनों की लड़ाई में 448 हताहतों का इलाज किया। भारतीयों ने सैकड़ों घायलों को बचाया। कुल मिलाकर, उन्होंने लगभग 200,000 घायलों का इलाज किया। इसमें 2,300 फ़ील्ड मेडिकल ऑपरेशन शामिल थे… और इस बीच, उन्होंने स्थानीय कोरियाई डॉक्टर्स और नर्सों को भी प्रशिक्षित किया।
भारत ने लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज को श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी वीरता को सम्मानित करते हुए एक डाक टिकट भी जारी किया। 60 के दशक में लेफ़्टिनेंट कर्नल एजी रंगराजन की अगुआई में भारतीय सेना के जवानों ने कोरिया में फरवरी 1954 तक (क़रीब साढ़े तीन साल तक) सेवा की।
2010 में दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति ली म्युंग-बाक ने टिप्पणी की थी कि अगर भारतीय सेना के जवानों ने बलिदान न दिया होता, तो कोरिया ऐसा न होता जैसा वो आज है।
आपको बता दें कि कोरियाई युद्ध में मारे गए सैनिकों की याद में दक्षिण कोरिया ने राजधानी सिओल में वॉर मेमोरियल बनाया है। उस वॉर मेमोरियल में ‘भारत’ के नाम से अलग स्मारक बनाया गया है जहाँ तिरंगा झंडा बड़ी शान से लहराता रहता है। उस स्मारक पर 60वीं पैराशूट फील्ड एंबुलेस प्लाटून की उपलब्धियों के विषय में लिखा है।
इन उपलब्धियों के विषय में लिखा है कि भारतीय सैनिकों ने कोरियाई युद्ध के दौरान ‘लैंड ऑफ मॉर्निंग काम’ में आजादी और शांति के लिए अपना खून-पसीना बहाया था जो दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ सबंधों को बयां करता है। ये फील्ड एंबुलेंस इन दिनों आगरा में तैनात रहती है और जब भी कोई नया कोरियाई राजदूत भारत पहुँचता है वो इस यूनिट में ज़रूर एक विजिट करता है।
हैदराबाद के शमसाबाद में हुए प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) हत्याकांड पर जहाँ आज पूरा देश आक्रोशित है और गुनहगारों के लिए कड़ी सी कड़ी सजा की माँग कर रहा है। वहीं, तेलंगाना के गृहमंत्री महमूद अली ने इस मामले पर ऐसा बयान दे दिया है, जिसे सुनकर सोशल मीडिया पर हर ओर उनकी थू-थू हो रही है। दरअसल, इस पूरे मामले को महमूद अली ने अपने बयान से एक नया एंगल देने की कोशिश की है।
Telangana Home Minister, Mohd Mahmood Ali on alleged rape & murder case of a woman veterinary doctor: We are saddened by the incident, police is alert & controlling crime. It is unfortunate that she called her sister and not ‘100’, had she called ‘100’ she could have been saved. pic.twitter.com/8OnilhroI5
उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “मुझे इस घटना का दुख है। लेकिन ये दुर्भाग्य की बात है कि पीड़िता एक डॉक्टर थी, पढ़ी-लिखी थी, फिर भी उसने ऐसे समय में पहले अपनी बहन को कॉल क्यों किया? उसने 100 नंबर पर कॉल क्यों नहीं किया। अगर वो 100 नंबर पर कॉल करती तो शायद उसे बचाया जा सकता था।”
गृहमंत्री ने अपने राज्य की पुलिस के लिए तो बोल दिया लेकिन बहन को कॉल न करके पुलिस को फोन करने से प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) को कितना फायदा पहुँचता? शायद कुछ भी नहीं! क्यों? क्योंकि उसी पुलिस ने बाद में प्रीति के परिवार वालों की कोई मदद नहीं की। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब प्रीति की बहन ने उसका नंबर न मिलने पर पुलिस को सबसे पहले इसकी जानकारी देने की कोशिश की तो पुलिस द्वारा उसे ये कहकर टाला जाता रहा कि ये इलाका उनके अंतर्गत नहीं आता है। जबकि पिता ने जब अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत करवानी चाही, तो कथित तौर पुलिस ने उनसे पूछा कि कहीं उनकी बेटी किसी लड़के के साथ तो नहीं भाग गई?
सोचिए, ऐसी गंभीर स्थिति में जिस पुलिस के पास इतनी अनर्गल बातें करने का समय है क्या वो उस समय पर प्रीति की मदद के लिए त्वरित कार्रवाई करती? महमूद अली के अनुसार लड़की को अपनी बहन को नहीं, पुलिस को कॉल करना चाहिए था, ताकि उन्हें बचाया जा सके, लेकिन अगर राज्य की पुलिस इतनी ही सचेत है, तो क्या टॉल प्लाजा जैसी जगह पर कोई सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम नहीं होना चाहिए था?
महमूद अली के इस बयान ने आज उन लोगों को भी शर्मिंदा कर दिया है, जो राज्य में महिला सुरक्षा की दुहाई देते फिरते हैं, लेकिन जब ऐसी कोई घटना घट जाती है, तो फौरन लड़की पर इल्जाम मढ़ने से नहीं चूकते।
इस बयान के सामने आने के बाद प्रीति रेड्डी के लिए न्याय की गुहार लगाने वाले लोग अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का अली के बयान को आधार बनाकर कहना है कि त्वरित कार्रवाई और महिला सुरक्षा मानदंडो पर बात करने वाले लोग मानें चाहे न मानें, लेकिन 90 प्रतिशत भारतीयों का भरोसा 100 नंबर मिलाने से उठ चुका है।
Is it not victim blaming? Instead of talking about Fastrack justice, women safety measures, better police vigilance, the home minister is putting onus on the victim. Believe it or not, 90% of Indians have no faith in dail 100. Who is to be blamed?
इसके अलावा कुछ यूजर्स इस बयान को अतिसंवेदनशील करार देते हुए ये भी कह रहे हैं कि उन्हें इस बयान से कोई हैरानी नहीं है। ऐसे ही लोग महिला सुरक्षा की ऐसी बदतर स्थिति के लिए उत्तरदायी हैं।
Actually not surprised by the answer …naam me hi khot he toh aage ka kya bole . He is totally responsible for the women safety. Very very insensetive statement.
यहाँ बता दें कि शमसाबाद पुलिस थाने में जहाँ प्रीति की बहन से कहा गया था कि ये मामला उनके क्षेत्र में नहीं आता, उन्हें भी सस्पेंड किए जाने की माँग सोशल मीडिया पर उठ रही है और कहा जा रहा है कि सुरक्षा के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाने का खेल अब बंद होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मामले के तूल पकड़ने के बाद तेलंगाना पुलिस ने इस मामले को सुलझा लेने का दावा किया है। उनके मुताबिक गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद पाशा और अन्य तीन बहुत दिन से प्रीति के साथ बलात्कार करने की योजना बना रहे थे और टोल प्लाजा पर खड़ी पीड़िता की स्कूटी को भी उन्होंने जान-बूझकर पंचर किया था।
इसके अलावा प्रीति के पोस्टमार्टम में पता चला है कि उनके साथ बलात्कार ही नहीं हुआ बल्कि उन्हें गला दबाकर हत्या करने के पहले बुरी तरह टॉर्चर भी किया गया था। उनकी लाश को मोहम्मद पाशा की लॉरी में भरकर टोल प्लाजा से 30-40 (विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सटीक दूरी का अंतर है) किलोमीटर दूर ले जाकर आग लगा दी गई। पुलिस को जाँच में प्रीति के अंतःवस्त्र और उनके पास ही शराब की बोतलें भी मिली।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक केके मुहम्मद ने अयोध्या राम मंदिर को लेकर आए फैसले के बाद एक इंटरव्यू में कहा कि डाकूओं को समझाना आसान है, लेकिन कम्युनिस्टों को नहीं। इस दौरान उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि चंबल घाटी स्थित बटेश्वर मुख्य मंदिर समेत अन्य मंदिरों का संरक्षण डाकू निर्भय गुर्जर के सहयोग से हुआ था। निर्भय गुर्जर के मारे जाने के बाद मंदिर पर फिर से खतरा मंडराने लगा था। इसके दोबारा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन प्रमुख केएस सुदर्शन आगे आए थे।
उन्होंने बताया कि जब वो चंबल गए तो वहाँ पर डाकूओं का बोलबाला था। उन्होंने निर्भय सिंह गुर्जर नाम के डाकू से भारतीय धरोहरों की सुरक्षा करने और मंदिर बनाने की बात की। बता दें कि निर्भय सिंह गुर्जर डाकूओं का मुखिया था। उन्होंने निर्भय सिंह को भारतीय इतिहास और महत्व के बारे में बताया। इस पर निर्भय सिंह ने मंदिरों के संरक्षण के लिए सहयोग देने का आश्वासन दिया। जिसके बाद उन्होंने 2 से 3 साल में प्रसिद्ध बटेश्वर मंदिर समेत कुल 80 मंदिरों का संरक्षण कार्य पूर्ण करवाया। उन्होंने बताया कि फिलहाल चंबल घाटी में तकरीबन 200 मंदिर हैं।
The BJP govt was of no help. I then convinced the dreaded dacoit Nirbhay Gujjar to respect our heritage & allow me to protect it. He relented, and I was able to reconstruct as many as 80 temples. You can convince a dacoit but never a communist, says Dr KK Muhammed at @mlrlitfest. pic.twitter.com/l8RG78yiYN
अयोध्या राम मंदिर पर बाद करते हुए उन्होंने कहा कि सभी संरचना की कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिसके आधार पर आप कह सकते हैं कि ये मंदिर था, मस्जिद था, या फिर चर्च। और इस संरचना के नीचे पूर्ण कलश, अष्टमंगल, मूर्तियाँ आदि मौजूद थे, जो कि यह प्रमाण देते हैं कि वो ढाँचा मंदिर की थी। इसके साथ ही सुग्रीव के बड़े भाई बालि को मारने और 10,000 राक्षसों को मारने के साक्ष्य हैं और सभी जानते हैं कि ये दोनों काम भगवान राम ने किया है।
केके मुहम्मद का साक्षात्कार आप वीडियो में 1:36 के बाद देख सकते हैं।
आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के ये लिए ये एक मौका है कि वो आगे आकर मंदिर निर्माण में सहयोग दें। हालाँकि, उन्होंने यह बात स्वीकारी है कि भारतीय मुस्लिम को अयोध्या पर फैसले से कोई दिक्कत नहीं है। अफगानी मुस्लिम लोग मंदिरों का विध्वंस करते हैं। कई और मंदिर हैं, जिसका विध्वंस किया गया है, लेकिन लोग उसके बारे में नहीं जानते हैं, क्योंकि वो अयोध्या की तरह प्रकाश में नहीं आया। उन्होंने कहा कि इसमें कम्युनिस्ट कहानीकार (इतिहासकार) इरफान हबीब जैसे लोग और जेनएनयू के लोग समर्थन देते हैं।
केके मुहम्मद ने कहा कि जिस तरह से मुस्लिमों के लिए मक्का मदीना मायने रखता है, उसी तरह से अयोध्या हिंदुओं के लिए महत्व रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ये मस्जिद अजमेर शरीफ, ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती या फिर निजामुद्दीन से संबंधित होता तो वो उनके साथ खड़े होते, लेकिन ये एक साधारण सा मस्जिद था। और हिन्दुओं के लिए यह मुस्लिमों के मक्का-मदीना की तरह है। इसके साथ ही उन्होंने एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि काशी और मथुरा का मंदिर भी हिंदुओं का है और उसी के हक में आएगा।
मदरसे में पढ़ाई को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मदरसे में सेमेटिक रिलीजन की पढ़ाई होती है। सेमेटिक रिलीजन कहने का मतलब उनका ये था कि कि अगर आप मुस्लिम नहीं हैं तो आपको जन्नत नसीब होगा, क्रिश्चन नहीं तो जन्नत नहीं मिलेगा। वहीं उन्होंने हिन्दू धर्म के बारे में बात करते हुए कहा कि इसमें आप राम, कृष्ण, शिव किसी भी भगवान की पूजा कर सकते हैं, नहीं भी कर सकते हैं… ये है हिन्दू। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिमों के लिए एक देश बनाया गया है- पाकिस्तान। मगर भारत में ऐसा नहीं है, और अगर भारत में ऐसा है तो सिर्फ बहुसंख्यक हिन्दुओं की वजह से। भारत को हिन्दू जैसे धर्म की जरूरत है। अगर भारत सेक्युलर है तो हिन्दू की वजह से।
If Lord Rama is not part of your culture, you are NOT a perfect Muslim; let me be clear: India is secular ONLY because it is a Hindu majority nation, says Dr KK Muhammed (suspended for declaring that a temple once stood under the Babri mosque) at the @mlrlitfest. pic.twitter.com/s704KEbbqf
आगे उन्होंने यह भी कहा कि जो मुस्लिम कह रहा है कि उनके पूर्वज राम-कृष्ण नहीं है, तो इसका मतलब है कि वो भारत के मुस्लिम नहीं है, वो किसी और देश के मुस्लिम हैं। उन्होंने अपने एक शिक्षक अबू बकर के बारे में बताते हुए कहा कि वो टिपिकल मुल्ला थे। रोज सुबह मस्जिद जाते थे, नमाज पढ़ते थे, लेकिन वो उनको रामायण और महाभारत भी पढ़ाते थे। उन्होंने कहा कि रामायण- महाभारत सिर्फ भारत का नहीं बलिक साउथ एशियन देश की भी धरोहर है।
इस दौरान एक दर्शक ने उनसे सवाल पूछते हुए कहा कि राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऐसा दिखाया गया कि इसमें किसी की हार नहीं हुई है। हिन्दू-मुस्लिम एक है। मगर इसमें सबसे बड़ी हार मार्क्सवादियों की हुई, जिसे मीडिया वालों ने नहीं दिखाया। इस पर उनकी राय क्या है? तो केके मुहम्मद ने इसका जवाब देते हुए कहा कि 34-35 साल की लड़ाई के बाद मार्क्सवादियों और वामपंथी इतिहासकारों की बड़ी हार हुई है। उन्होंने कुछ कम्युनिस्टों का उदाहरण देते हुए कहा कि हालाँकि ये लोग अच्छे होते हैं, मगर इरफान हबीब जैसे कुछ इतिहासकार बिल्कुल इसके विपरीत अपना नैरेटिव गढ़ते हैं, जो कि अब पूरी तरह से फेल हो चुका है।
उन्होंने कहा कि इसको टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे मुख्य समाचार पत्र तरजीह देते हैं। केके मुहम्मद ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ दिए एक इंटरव्यू के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्होंने समाचार पत्र को एक बयान दिया था। जिसे उसने एक बार प्रकाशित किया और फिर दोबारा उसने बिना उनसे पूछे, बिना उनकी अनुमति लिए अपने तरीके से अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए इस्तेमाल किया कि वो (केके मुहम्मद) अयोध्या मामले से जुड़े हुए नहीं है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के एक रिश्तेदार को वाट्सअप कॉल पर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। बताया जा रहा है कि जिस नंबर से कॉल आया, वो पाकिस्तानी नंबर था। सूचना पाते ही पुलिस जाँच में जुट गई है। बता दें कि राष्ट्रपति कोविंद के रिश्तेदार को ये धमकी उस समय दी गई, जब राष्ट्रपति कानपुर जाने वाले हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति कोविंद के जिस रिश्तेदार को ये धमकी मिली है, वो उनके भतीजे की पत्नी के भाई राजीव कुमार हैं। राजीव कल्याणपुर में रहते हैं और नमो सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति कोविंद 30 नवंबर को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय और नगर निगम के कार्यक्रम में शामिल होने कानपुर जा रहे हैं। इस कारण पहले ही पुलिस अधिकारी वहाँ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कराने में जुटे थे। लेकिन इसी बीच राजीव द्वारा कल्याणपुर थाने में ये शिकायत लेकर पहुँचने से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और हड़बड़ी में पुलिस अधिकारी थाने पहुँचे। इसके बाद राजीव से पूरे मामले की जानकारी ली गई।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट की मानें तो राजीव कुमार ने पुलिस को बताया कि गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 1 मिनट पर उनके मोबाइल फोन पर +92… नंबर से एक वाट्सएप कॉल आया। पहले उन्होंने इस नंबर पर गौर नहीं किया, लेकिन बाद में जब उन्होंने कॉल रिसीव किया, तो फोन करने वाले ने उन्हें धमकी देते हुए कहा- ‘नमो सेना छोड़ दे वरना तुझे और तेरे परिवार को आरडीएक्स से उड़ा देंगे।’ राजीव के अनुसार फोन करने वाले से जब उन्होंने नाम पूछा तो उसने अपना नाम नहीं बताया और करीब 40 सेकेंड बात करने के बाद फोन काट दिया।
पाकिस्तानी नंबर से इस प्रकार धमकी भरी कॉल आने के बाद राजीव और उनका परिवार दहशत में है। रिपोर्ट के मुताबिक सीओ अजय कुमार का कहना है कि वाट्सएप कॉल करने वाले ने राजीव को नमो सेना छोडऩे के लिए कहा है। शायद वह राजीव या संगठन को पहले से जानता है। +92 पाकिस्तान का आइएसडी कोड जरूर है लेकिन यह कॉल स्पूफिंग का भी मामला हो सकता है, जिसमें किसी भी नंबर का इस्तेमाल करके कॉल की जाती है। साइबर सेल व सर्विलांस टीम दोनों की मदद से जाँच कराई जा रही है।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध जारी है। इसी बीच खबर है कि BHU के आयुर्वेद संकाय के संस्कृत विभाग में असोसिएट प्रोफ़ेसर के पद के लिए आज शुक्रवार (नवम्बर 29, 2019) को डॉ. फिरोज खान ने गुपचुप तरीके से इंटरव्यू दिया जिसकी पुष्टि आयुर्वेद संकाय प्रमुख यामिनी भूषण त्रिपाठी ने किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि फिरोज खान इंटरव्यू देने आए थे, सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, रिजल्ट आने इसकी सूचना आपको जल्द दी जाएगी।
बता दें कि फिरोज खान का संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान में नियुक्ति का वहाँ के छात्रों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। जिसके लिए वे 15 दिनों तक धरना पर भी बैठे और अभी भी आंदोलन जारी रखे हुए हैं। कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार किया जा रहा है जिससे संकाय में पठन-पाठन ठप है। ऑपइंडिया के सूत्रों के अनुसार, छात्रों के विरोध को मद्देनजर रखते हुए आज फिरोज खान के इंटरव्यू को समय से पहले ही संपन्न करा लिया गया। सूत्रों ने यह भी बताया कि डॉ. फिरोज खान ने कला संकाय के संस्कृत विभाग में भी आवेदन किया है जिसके लिए उनका साक्षात्कार 4 दिसम्बर को है।
मीडिया ने SVDV के आंदोलन को संस्कृत भाषा से जोड़कर भ्रम फ़ैलाने की कोशिश की थी। जबकि यह मुद्दा संस्कृत भाषा और हिन्दू-मुस्लिम का न होकर धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति से जुड़ा था। उस संकाय से इतर किसी और संस्कृत विभाग में होता तो SVDV के छात्र इसका कभी विरोध नहीं करते बल्कि स्वागत करते। वहाँ के छात्रों के उनके स्थान्तरण के माँग को देखते हुए इस बीच विश्विद्यालय में चर्चा ये भी है कि BHU प्रशासन ने अन्दोलनकारी छात्रों से 10 दिन की मोहलत माँगी थी, जिसकी समय सीमा एक-दो दिन में समाप्त हो रही है और छात्र अपनी माँगे न माने जाने के कारण एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर चुके हैं और इस आंदोलन को काशी के विद्वानों, SVDV के पूर्व आचार्यों और छात्रों सहित काशी विद्वत परिषद, शंकराचार्यों और रामलला जन्मभूमि के संतो सहित तमाम गणमान्य नागरिकों के समर्थन को देखते हुए प्रशासन डॉ. फिरोज खान क नियुक्ति आयुर्वेद या कला संकाय के संस्कृत विभाग में करके इस पूरे मामले का पटाक्षेप करना चाहता है।
हालाँकि, प्रशासन का यह दावा है कि फिरोज खान एक मेधावी छात्र हैं और उन्होंने पहले से ही BHU के कई विभागों में आवेदन कर रखा था। और उनका किसी अन्य संकाय के संस्कृत विभाग में चयन होता है तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। जब ऑपइंडिया ने इसे लेकर छात्रों से बात की तो उनका कहना है, “फिरोज खान की SVDV छोड़कर कहीं भी नियुक्ति हो हम उनका स्वागत करेंगे। हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है हमारा विरोध सिर्फ उनके संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पढ़ाने से है। हम उन्हें अपना आचार्य नहीं मान सकते, यहाँ उनकी नियुक्ति पूरी तरह से मालवीय मूल्यों, BHU संविधान और धर्म के संरक्षण के खिलाफ है।”
ग़ौरतलब है कि पहली बार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफ़ेसर डॉ फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति 5 नवम्बर को हुई थी। संकाय के विद्यार्थियों को जैसे ही इसका पता चला, उन्होंने इस नियुक्ति के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
बता दें कि BHU में विवाद के बाद अल्पसंख्यक प्रोफ़ेसर फ़िरोज़ ख़ान ने आयुर्वेद विभाग के संस्कृत प्रोफ़ेसर के लिए आवेदन किया है। और उनका इंटरव्यू आयुर्वेद विभाग में 29 नवंबर को है। इसका खुलासा ऑपइंडिया ने अपने पहले के रिपोर्ट में भी किया था।
शमसाबाद, हैदराबाद के प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) हत्याकांड को तेलंगाना पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। उनके मुताबिक गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद पाशा और अन्य तीन बहुत दिन से प्रीति के साथ बलात्कार करने की योजना बना रहे थे और टोल प्लाजा पर खड़ी पीड़िता की स्कूटी को भी उन्होंने जानबूझकर पंचर किया था। मोहम्मद पाशा महबूबनगर जिले का रहने वाला बताया जा रहा है।
अपडेट: मोहम्मद पाशा के अलावा पुलिस ने जिन तीन अन्य आरोपितों को पकड़ा है, उनके नाम हैं – नवीन, केशवुलु और शिवा।
इसके अलावा प्रीति के पोस्टमार्टम में पता चला है कि उनके साथ बलात्कार ही नहीं हुआ बल्कि उन्हें गला दबाकर हत्या करने के पहले बुरी तरह टॉर्चर भी किया गया था। उनकी लाश को मोहम्मद पाशा की लॉरी में भरकर टोल प्लाजा से 30-40 (विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सटीक दूरी का अंतर है) किलोमीटर दूर ले जाकर आग लगा दी गई। पुलिस को जाँच में प्रियंका के अंतःवस्त्र और उनके पास ही शराब की बोतलें भी मिले।
गौरतलब है कि हैदराबाद के बाहरी इलाके शमसाबाद में 26 वर्षीय महिला डॉक्टर की जली हुई लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई भाई। वारदात की सूचना मिलते ही जहाँ पुलिस सक्रिय रूप से मामले की जाँच में जुट गई, तो वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया यूजर्स भी कल रात से प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) कोल्लुरु स्थित पशु चिकित्सालय में काम करती थीं। बुधवार (नवंबर 27, 2019) को भी वह वहीं गई हुईं थीं। उन्होंने अपनी स्कूटी को शादनगर के टोल प्लाजा शमसाबाद के पास पार्क किया था। लेकिन रात में जब वह वहाँ वापस लौटीं तो उनकी स्कूटी पंक्चर थी। उन्होंने इसकी सूचना अपनी बहन को दी और कहा कि उन्हें डर लग रहा है, क्योंकि उनके आसपास सिर्फ लोडिंग ट्रक और अनजान लोग हैं।
Dr. Priyanka Reddy’s found brutally murdered & charred to death after she was stranded in Hyderabad outskirts
प्रीति को डरा हुआ देखकर उनकी बहन ने उन्हें स्कूटी पार्क करके कैब से आने की सलाह दी। लेकिन प्रीति रेड्डी ने उन्हें बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें मदद ऑफर की है, इसलिए वो थोड़ी देर में कॉल बैक करेंगी।
इस वाकये के बाद प्रीति का कोई फोन नहीं आया, जब परिजनों ने उनसे कुछ मिनट बाद संपर्क करने का प्रयास किया तो उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। परेशान परिवार वाले खुद प्रीति को ढूँढने के लिए टोल प्लाजा की ओर निकले। जब वह नहीं मिलीं तो उन्होंने थक हारकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
फेसबुक पर भी प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) को लेकर दिख रहा गुस्सा
शिकायत मिलने के बाद गुरुवार (नवंबर 28, 2019) की सुबह पुलिस को हैदराबाद-बेंग्लुरु हाईवे के पास एक महिला का जला हुआ शव दिखाई पड़ने की जानकारी मिली। जब घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर प्रीति के घरवालों को संपर्क किया तो उन्होंने उसके कपड़े और गले का लॉकेट देखकर पुष्टि कर दी कि वो जली हुई लाश प्रियंका की ही है। पुलिस ने मौत से पहले रेप की भी शंका जाहिर की। पुलिस की यह शंका निराधार नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जहाँ प्रीति की आधी जली हुई लाश मिली, वहाँ से 100 मीटर की दूरी पर उसका अंडरवियर पाया गया है।
बता दें कि इस मामले में पुलिस ने जाँच शुरू कर दी और इसमें 10 से 15 विशेष टीमें जाँच में लगाई गईं। सीसीटीवी फुटेज खँगालने, प्रीति के कॉल रिकॉर्ड्स चेक करने आदि से पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रीति को मदद ऑफर करने वाले लोग कौन थे। इसके अलावा शमसाबाद के डिप्टी कमिश्नर प्रकाश रेड्डी ने भी मौके का मुआयना किया था।
It is hard to accept that we live in a world where women are no more safe to wander alone. I don't think it will get better after witnessing what has happened to another girl. It was dreadful and painful at the same time. May your soul rest in peace. #RIPPriyankaReddy
इस खबर की सूचना मिलने के बाद ही ट्विटर पर और फेसबुक पर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के लिए लोग न्याय की गुहार लगाने लगे। साथ ही लड़कियों के लिए चिंता व्यक्त की गई कि अब हमारा समाज इतना भी सभ्य नहीं बचा कि एक लड़की किसी सड़क पर अकेले खड़ी हो सके।
She believed our society and went alone. You, me, this society and our system, we all collectively failed her today. In fact we all killed her.#RIPPriyankaReddy
केरल में कोच्चि के नजदीक स्थित पेरुम्बवूर में 42 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार के बाद हत्या करने का मामला सामने आया है। घटना मंगलवार (नवंबर 26, 2019) देर रात एक बजे घटी है। आरोपित की पहचान असम प्रवासी उमर अली के रूप में हुई है। पुलिस ने उमर को गिरफ्तार कर लिया है। अब आगे की पूछताछ जारी है।
बुधवार (नवंबर 27, 2019) को घटना की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि सुबह शहर में एक दुकान के करीब एक मजदूर ने खून में लथपथ नग्न महिला का शव देखा। जिसके बाद पुलिस को इसकी सूचना मिली। मामले में तफ्तीश के दौरान मालूम चला कि महिला का पहले बलात्कार हुआ है और फिर फावड़े से उसके सिर-चेहरे पर वार कर उसकी हत्या की गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपित ने अपनी पहचान छिपाने के लिए नजदीकी इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए थे, क्योंकि उनमें पूरी घटना कैद हो गई थी। लेकिन पुलिस ने कुछ अन्य कैद हुए फुटेज की मदद से उसकी पहचान कर ली और जल्द ही उसे गिरफ्तार भी किया।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने महिला की जानकारी देते हुए बताया कि मृतक महिला एर्नाकुलम जिला कुरुप्पमपाड़ी की निवासी थी। वह अपने परिवार से अलग हो गई थी और पेरुम्बवूर में अकेली रहती थी। जो कि एक औद्योगिक इलाका है और वहाँ बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर (नॉर्थ ईस्ट) से आए प्रवासी मजदूर रहते हैं।
जाँच में जुटी पुलिस के अनुसार अपराध की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। उमर से पूरे मामले में पूछताछ की जा रही है। महिला के चेहरे पर पुलिस को 30 गहरे घाव मिले हैं। इसके अलावा वो फावड़ा भी बरामद कर लिया गया है, जिससे महिला पर हमला हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, एर्नाकुलम के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि वे पूरे मामले में एक अनुवादक की मदद से आरोपित उमप से पूछताछ कर रहे हैं। मुमकिन है आने वाले कुछ दिनों में वे आगे और जानकारी प्राप्त कर लेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रवासी मजदूरों से संबंधित ये तीसरा मामला है। इससे पहले भी साल 2016 में लॉ पढ़ रही छात्रा के साथ पहले बलात्कार और बर्बर हत्या का मामला सुर्खियों में आ चुका है। जिसमें असम के अमीरुल इस्लाम को दोषी ठहराया गया था और जाँच पूरी होने के बाद उसे मौत की सजा मुकर्रर हुई थी। इस घटना के बाद राज्य में प्रवासी मजदूरों के ख़िलाफ़ कई प्रदर्शन हुए थे। क्योंकि एक अनुमान के अनुसार इस समय केरल राज्य में कम से कम 30 लाख प्रवासी मजदूर रहते हैं।