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ब्राह्मणों, भारत छोड़ो: JNU में विरोध के नाम पर घृणास्पद नारे, लोगों ने पूछा- दलित या मुस्लिम लिखा होता तो?

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन दिन प्रतिदिन अधिकाधिक नकारात्मकता से भरता जा रहा है। अब जेएनयू कैम्पस में ब्राह्मणविरोधी नारे लिखे जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई है, जिसमें जेएनयू के छात्रों ने कैम्पस में ‘ब्राह्मण, भारत छोड़ो’ लिखा हुआ है। इस आपत्तिजनक नारे के जरिए जेएनयू के छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस फोटो को ट्वीट करते हुए ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के पत्रकार राजशेखर झा ने पूछा कि अगर इस नारे में ब्राह्मण की जगह दलित या मुस्लिम लिखा होता, तब क्या होता?

आगे उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि अगर ब्रह्मण की जगह दलित या मुस्लिम लिखा होता तो कई कथित लिबरल व सेक्युलर लोग ‘नॉट माय इंडिया’ (ये मेरा भारत नहीं हो सकता) जैसी ‘कूल’ बातें लिख कर सोशल मीडिया पर ज़हर फैला रहे होते। लेकिन, ब्राह्मणों के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी गईं और किसी के कानों में जूँ तक न रेंगी। झा ने जेएनयू के छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि जिसने भी ऐसा किया है, उसे आत्ममंथन करने की ज़रूरत है। ऐसी घृणास्पद हरकतें विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।

राज शेखर झा ने लिखा कि जिसने भी ये लिखा है, कल को हो सकता है कि कोई उसके समुदाय के बारे में लिख दे। इस तरह से तो सभी आपस में जाति को लेकर लड़ बैठेंगे। उन्होंने ‘ये मेरा भारत नहीं’ वाले गैंग पर निशाना साधते हुए कहा कि वो लोग देश तो नहीं छोड़ेंगे लेकिन यहाँ रह कर आपस में लड़ते-लड़ाते ज़रूर रहेंगे। दुनिया बेहतर करती जाएगी और ऐसे लोग भारत को इन्हीं चीजों में उलझा कर रखे रहेंगे। किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य समुदाय के बारे में ऐसी आपत्तिजनक बातें नहीं लिखनी चाहिए।

अभी हाल ही में जेएनयू के छात्रों ने वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन को अपने ही डिपार्टमेंट के लैब में घुसने से रोक दिया था। उनके साथ बदतमीजी भी की गई थी। कई अन्य लोगों ने भी ट्विटर पर जेएनयू के ब्राह्मणविरोधी नारे को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। लोगों ने पूछा कि ये कैसा विरोध प्रदर्शन है, जहाँ देश के ही लोगों को गालियाँ दी जाती हैं और उन्हें भागने को कहा जाता है? जेएनयू में छात्र हॉस्टल फी को 10 रुपए से 300 रुपए प्रतिमाह किए जाने के ख़िलाफ़ हंगामा कर रहे हैं।

छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण जेएनयू के डीन उमेश कदम की तबियत बिगड़ गई थी। नारेबाजी के कारण प्रोफेसर कदम की तबियत और बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। एम्बुलेंस के रास्ते में भी छात्र लगातार नारेबाजी करते रहे। इस दौरान प्रोफेसर के बीवी-बच्चे भी वहीं मौजूद थे। इसी तरह छात्राओं ने एक महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने का प्रयास किया। महिला पत्रकार के साथ भी छात्रों ने बदतमीजी की। वामपंथी छात्र नेताओं में कैम्पस में सरकार द्वारा सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किए जाने की झूठी अफवाह भी फैलाई। वामपंथी छात्रों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के साथ भी छेड़छाड़ की और उनका अपमान किया था।

लोकसभा में कॉन्ग्रेस सांसदों ने मार्शल से की धक्का-मुक्की, राहुल गॉंधी ने सवाल पूछने से किया इनकार

संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार (नवंबर 25, 2019) को महाराष्ट्र में सरकार गठन के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस समेत विपक्ष ने सदन में जबर्दस्त हंगामा किया। स्पीकर ने मार्शल को कॉन्ग्रेस के दो सांसदों- टीएन प्रथापन और हीबी इडेन को बाहर निकालने का आदेश दिया। इस पर धक्का-मुक्की हुई। विपक्ष की लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही 2 बार स्थगित करनी पड़ी।

भाजपा ने कॉन्ग्रेस सांसदों की ह​रकत की निंदा करते हुए स्पीकर से कार्रवाई की मॉंग की है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कॉन्ग्रेस सासंदों की हरकत बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन किया है। प्रसाद ने कहा कि स्पीकर इस मामले में फैसला करेंगे। वहीं, इडेन का कहना है कि वो लोकसभा में महाराष्ट्र के मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे थे, मगर दुर्भाग्य से मार्शल ने उन्हें निकाल दिया। उन्होंने स्पीकर से इसकी शिकायत की है।

कॉन्ग्रेस सांसदों ने सोनिया गाँधी की अगुआई में संसद परिसर में प्रदर्शन भी किया। सदन की कार्यवाही आरंभ होने के साथ ही कॉन्ग्रेस सदस्य नारेबाजी करते और पोस्टर लिए हुए आसन के निकट पहुँच गए। टीएन प्रथापन और हीबी इडेन ने बड़ा पोस्टर ले रखा था जिस पर ‘स्टॉप मर्डर ऑफ डेमोक्रेसी’ लिखा था। विपक्षी नेताओं ने ‘संविधान की हत्या बंद करो, बंद करो’ के नारे लगाए। नारेबाजी के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने प्रश्नकाल शुरू कराया और अनुसूचित जाति के लड़के-लड़कियों के छात्रावास विषय पर पूरक प्रश्न पूछने के लिए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का नाम पुकारा।

इस सत्र में पहली बार सदन में पहुँचे गाँधी ने सवाल पूछने से इनकार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई है, ऐसे में उनके सवाल पूछने का कोई मतलब नहीं है। इसी बीच स्पीकर बिड़ला ने पोस्टर लहरा रहे इडेन और प्रथापन को ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी। फिर भी न मानने पर स्पीकर ने मार्शलों को दोनों कॉन्ग्रेस सांसदों को सदन से बाहर करने का आदेश दिया।

बता दें कि आज शीतकालीन सत्र की कार्यवाही का छठा दिन है। कॉन्ग्रेस, माकपा और अन्य विपक्षी दलों ने दोनों सदन में महाराष्ट्र के मुद्दे पर चर्चा की माँग की। लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और पार्टी के चीफ व्हिप के सुरेश ने महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात पर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। वहीं, माकपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी इसी मुद्दे को लेकर राज्यसभा की कार्यवाही निलंबित करने की माँग की।

बंगाल उपचुनाव: तृणमूल के 50 गुंडों ने BJP प्रत्याशी को घेर कर लात-घूसों से पीटा, वीडियो वायरल

पश्चिम बंगाल में भाजपा प्रत्याशी के साथ मारपीट की गई है। मामला करीमपुर का है, जहाँ विधानसभा उपचुनाव हो रहे हैं। भाजपा ने करीमपुर से जयप्रकाश मजूमदार को प्रत्याशी बनाया है। उनके साथ मारपीट का एक वीडियो सामने आया है। भाजपा प्रत्याशी को न सिर्फ़ थप्पड़ से मारा गया, बल्कि उन्हें धक्का भी दिया गया। वे उपचुनाव के दौरान पोलिंग बूथों का निरीक्षण कर रहे थे, तभी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया। लाठ-घूसों से भाजपा प्रत्याशी की पिटाई की गई।

तृणमूल कार्यकर्ताओं ने बेख़ौफ़ होकर भाजपा प्रत्याशी के साथ मारपीट की। स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाते देख सीआरपीएफ के जवानों ने लाठियाँ भाजी, तब जाकर तृणमूल के गुंडे वहाँ से भागे। मजूमदार बंगाल भाजपा के उपाध्यक्ष भी हैं। दरअसल, मजूमदार को सूचना मिली थी कि एक पोलिंग बूथ पर मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्हें वोट नहीं देने दिया जा रहा। इसकी सूचना मिलते ही भाजपा प्रत्याशी जयप्रकाश मजूमदार उक्त पोलिंग बूथ की तरफ़ निकल पड़े। तभी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया

पश्चिम बंगाल में करीमपुर, खड़गपुर सदर और कालियागंज विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहे हैं। भाजपा नेता मुकुल रॉय ने चुनाव आयोग को पत्र लिख कर तत्काल मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कम से कम तृणमूल कॉन्ग्रेस के 50 गुंडों ने जयप्रकाश मजुमदार को घेर कर उनकी पिटाई की। ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि जब तृणमूल कार्यकर्ताओं ने मजूमदार को लात-घूँसे से मारा, तब वे सड़क किनारे एक गड्ढे में जा गिरे। मजूमदार तृणमूल कार्यकर्ताओं की पिटाई के बाद गड्ढे में स्थित झाड़ियों में फँस गए।

चुनाव आयोग ने उक्त बूथ पर तैनात अधिकारी से रिपोर्ट तलब किया है। ये घटना पीपलखोला बूथ की है। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल कार्यकर्ताओं की ये हरकत दिखाती है कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी पहले ही हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस फिर से हिंसा का वैसा ही तांडव दिखा रही हुई, जैसा उसने लोकसभा चुनाव के दौरान किया था।

बंगाल: BJP नेता शेख आमिर खान को TMC के गुंडों ने तलवार से काटा, 2 महिलाएँ गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में TMC गुंडों ने महिला BJP कार्यकर्ता की गोली मारकर की हत्या, 6 घायल

बंगाल: BJP सांसद अर्जुन सिंह की कार पर TMC गुंडों का हमला, पार्टी कार्यालय पर कब्जे की कोशिश

अरबाज, सिकंदर, सोनू और कलाम ने नाबालिग को कार में खींचा, गैंगरेप कर Video किया वायरल

बिहार में एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप कर घटना का वीडियो वायरल करने का मामला सामने आया है। मामला कैमूर जिले का है। मोहम्मद अरबाज नामक युवक ने नाबालिग को शादी का झांसा देकर फँसाया और फिर अपने 3 दोस्तों के साथ मिल उससे बलात्कार किया। इतना ही नहीं, इस पूरी वारदात को आरोपितों ने मोबाइल में रिकॉर्ड भी कर लिया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

मामला संज्ञान में आते ही पुलिस पदाधिकारियों के होश उड़ गए और लड़की के परिवारवाले सन्न रह गए। वायरल वीडियो में देखा गया कि एक चलती कार में कुछ लड़के नाबालिग लड़की का मुँह बंद करके उसका बलात्कार कर रहे हैं और गाड़ी का शीशा लॉक है।

जानकारी के अनुसार इन आरोपितों की पहचान मोहनियां नगर के वार्ड नं.-15 अंतर्गत इस्लामगंज निवासी अरबाज उर्फ अयान, सोनू उर्फ कलाम, सिकंदर व सोनू के रूप में हुई है। लेकिन फिलहाल इनमें से अभी कोई गिरफ्तार नहीं हुआ है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस छात्रा की मेडिकल जाँच कराने की प्रक्रिया में जुट गई है।

लड़की के मुताबिक आरोपित अरबाज उसे कोचिंग आने-जाने के दौरान मिला था। उसे प्रेम जाल में फँसाया। शादी का झाँसा देकर पिछले 5 महीने से वह लड़की का यौन शोषण कर रहा था। मंगलवार को पीड़िता को कलाम ने मोहनिया में मुंडेश्वरी गेट के पास बुलाया। वहाँ अरबाज और उसके साथी पहले ही गाड़ी लेकर मौजूद थे। लड़की के आते ही उसे गाड़ी में खींच लिया गया। लड़की के आते ही उसे गाड़ी में खींच लिया गया और फिर चारों ने मिलकर उसका बलात्कार किया। जब लड़की ने चिल्ला कर विरोध किया तो उसके मुँह पर पट्टी बाँध दी गई।

बता दें, रविवार (नवंबर 24, 2019) की देर शाम महिला थाना पहुँचकर पीड़िता के घरवालों ने मामला दर्ज करवाया। पुलिस भी वीडियो के आधार पर अपराधियों को पहचानने का दावा कर चुकी है।

इस संबंध में पुलिस अधीक्षक दिलवाज अहमद ने बताया है कि शनिवार की रात सोशल मीडिया पर एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो वायरल हुआ। जिसके बाद रविवार को पुलिस पदाधिकारियों के संज्ञान में यह मामला सामने आया।

पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपितों को हर हाल में सजा मिलेगी। उन्होंने बताया है कि चारों युवकों की गिरफ्तारी के लिए उनके अभिभावकों पर दबाव डाला जा रहा है और छापेमारी भी जारी है।

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कॉन्ग्रेस छोड़ रहे हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया! ट्विटर पर बॉयो बदल कयासों को दी हवा

महाराष्ट्र में जारी सियासी ड्रामे के बीच मध्य प्रदेश की पॉलिटिक्स में भी हलचल की खबरें आ रही है। कॉन्ग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने की अटकलें फिर से तेज हो गई है। इसकी वजह बनी है सिंधिया द्वारा अपने ट्विटर बॉयो में किए गए कुछ बदलाव।

सिंधिया का ट्विटर बॉयो अब केवल “लोक सेवक, क्रिकेट में दिलचस्पी रखने वाला” है।

दिलचस्प बात यह है कि उनके नए ट्विटर बायो में, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि वो कॉन्ग्रेस का हिस्सा हैं। उस कॉन्ग्रेस का जिसकी कमलनाथ के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में सरकार चल रही है।

इससे पहले, उनके प्रोफाइल में गुना से 2002-2019 तक सांसद रहने का जिक्र था। साथ ही उन महकमों का भी जिक्र था जिसकी जिम्मेदारी मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने सॅंभाली थी।

सिंधिया के पहले के ट्विटर बॉयो में लिखा था कि वह 2002 से 2019 तक गुना के पूर्व सांसद थे। यह भी लिखा था कि वे पूर्व ऊर्जा मंत्री, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और MoS कम्युनिकेशन्स, IT विभाग के मंत्री थे।

सिंधिया ने अब बॉयो से इन जानकारियों का हटा दिया है। इससे पता ही नहीं चलता कि वे कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए हैं। शायद वे अपने अतीत से पीछा छुड़ाना चाहते हों! हालॉंकि सिंधिया ने एएनआई को बताया है कि ट्विटर बॉयो में बदलाव उन्होंने एक महीने पहले ही किया था। उनके मुताबिक बॉयो को संक्षिप्त रखने के लिए लोगों की सलाह पर ऐसा किया। इस संबंध में लग रही अटकलों को उन्होंने खारिज किया है।

बावजूद इसके कयास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश में कहीं कोई सियासी भूचाल तो नहीं आने वाला। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस तीन खेमों में बॅंटी है। एक गुट मुख्यमंत्री कमलनाथ का, दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का और तीसरा सिंधिया का है। कमलनाथ और सिंधिया गुट के मतभेद तब भी सामने आ गए थे जब विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुना जाना था। इसके बाद से सिंधिया के समर्थक लगातार उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने को लेकर लॉबिंग कर रहे हैं।

बता दें कि सिंधिया को मध्य प्रदेश राज्य इकाई का अध्यक्ष नहीं बनाए जाने पर उनके समर्थक सामूहिक इस्तीफ़े की धमकी भी दे चुके हैं। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद कमलनाथ के इस्तीफ़े के बाद खाली हो गया था। उस समय, भले ही सिंधिया ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था, लेकिन ऐसी ख़बरें सामने आईं थीं कि उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को ‘अल्टीमेटम’ दिया था कि उन्हें राज्य इकाई का प्रमुख बनाया जाना चाहिए, अन्यथा वो अन्य विकल्प के बारे में सोचेंगे। अन्य विकल्प से उनका मतलब ख़ुद पार्टी छोड़ने से था।

सिंधिया के ट्विटर बॉयो बदलने के साथ, इस बात के कयास भी लगाए जा रहे हैं कि कहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉन्ग्रेस को तलाक़ देने का फ़ैसला तो नहीं कर लिया है!

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शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की मुराद नहीं हुई पूरी, अब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट में आज (नवंबर 25, 2019) लगातार दूसरे दिन महाराष्ट्र के मामले पर सुनवाई हुई। देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ ग्रहण के खिलाफ शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी की संयुक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने फैसला मंगलवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया। अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से तीन दलों के पास 154 विधायकों का समर्थन होने की एफिडेविट स्वीकार करने से अदालत ने इनकार करते हुए कहा कि फैसला इस पर होना है कि मुख्यमंत्री सदन में बहुमत हासिल कर पाते हैं या नहीं।

महाराष्ट्र में शनिवार (नवंबर 23, 2019) तड़के राष्ट्रपति शासन समाप्त किए जाने के बाद फडणवीस और पवार ने शपथ ली थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान तत्काल बहुमत परीक्षण की मॉंग को टालते हुए अदालत ने सरकार बनाने के आमंत्रण और दावे से जुड़े दस्तावेज सौंपने को कहा था।

जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गवर्नर के सचिव की चिट्ठी अदालत को सौंपी, जिसमें विधायकों के हस्ताक्षर थे। तुषार मेहता ने कहा कि अजित पवार द्वारा 22 नवंबर को पत्र दिया गया था। पत्र में कहा गया था कि एनसीपी के सभी 54 विधायकों ने उन्हें नेता चुना है और सरकार बनाने के लिए अधिकृत किया गया है। इस चिट्ठी में 54 विधायकों के हस्ताक्षर थे।

तुषार मेहता ने समर्थन की चिट्ठी कोर्ट में पेश करते हुए कहा कि इसी चिट्ठी के आधार पर राज्यपाल ने शपथ दिलाई। मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि 12 नवंबर के बाद राज्यपाल के पास क्यों नहीं गए याचिककर्ता? उन्होंने कहा कि सभी के मना करने के बाद राज्यपाल ने ये फैसला किया। सॉलिसिटर जनरल ने गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी को अजित पवार के द्वारा लिखा गया समर्थन पत्र पढ़ा, जिसमें अजित पवार ने कहा था कि उनके पास 54 विधायक हैं और वो BJP को समर्थन दे रहे हैं। इसलिए वो चाहते है कि देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ के लिए बुलाया जाए।

तुषार मेहता ने राज्यपाल के उस पत्र को कोर्ट में पढ़कर सुनाया, जिसमें उल्लेख किया गया था कि फडणवीस-पवार सरकार को 170 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। मेहता ने कोर्ट के सामने फडणवीस के उस पत्र को भी पढ़ा, जिसमें कहा गया था कि पहली बार जब उन्हें सरकार बनाने के लिए बुलाया गया था, तो उनके पास संख्याबल नहीं था, लेकिन अब अजित पवार के समर्थन के बाद उनके पास बहुमत है।

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि गवर्नर पर विपक्षों का हमला पूरी तरह से निराधार है। किसी व्यक्ति को चुनने में राज्यपाल को पूर्ण विवेक होता है। फ्लोर टेस्ट कब आयोजित करना है, यह भी राज्यपाल का विवेक है। इस दौरान जस्टिस खन्ना ने कहा कि पिछले सभी मामलों में 24 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट हुआ है। उनका कहना था कि बहुमत गवर्नर हाउस में नहीं, बल्कि सदन के पटल पर तय किया जाता है।

अजित पवार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि उनकी विधायकों की लिस्ट तथ्यात्मक, कानूनी और संवैधानिक रूप से सही है। वो समर्थन देने के लिए अधिकृत थे। उन्होंने कहा कि अजित पवार 22 नवंबर को विधायक दल के नेता थे और उन्होंने विधायक दल के प्रमुख के रूप में 22 नवंबर को बीजेपी को समर्थन दिया और राज्यपाल ने इसी आधार पर विवेक का इस्तेमाल करते हुए फैसला लिया।

वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि 22 की रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें कॉन्ग्रेस-एनसीपी और शिवसेना ने सरकार बनाने की बात कही। सभी ने कहा कि उद्धव सीएम होंगे लेकिन सुबह 5 बजे ही फडणवीस सीएम बन गए। उन्होंने कहा कि ऐसी कौन सी इमरजेंसी थी कि सुबह सवा 5 बजे राष्ट्रपति शासन हटाया गया और शपथ दिलवा दी गई। इमरजेंसी का खुलासा होना चाहिए। इस पर जस्टिस खन्ना का कहना है कि कोर्ट राष्ट्रपति शासन को रद्द करने के सवाल पर सुनवाई नहीं कर रहा है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने फौरन फ्लोर टेस्ट की माँग करते हुए कहा कि दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट को सही कह रहे हैं तो फिर इसमें देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि कुछ छिपाया जा रहा है। अजित पवार की चिट्ठी फर्जी है। वहीं तुषार मेहता ने अजित पवार के विधायक दल के नेता से हटाए जाने पर कहा कि जो नई चिट्ठी सौंपी गई है, उसमें 12 विधायकों के हस्ताक्षर गायब हैं। मुकुल रोहतगी ने एक याचिका पर तीन वकीलों के दलील देने पर भी आपत्ति जताई।

फडणवीस के लिए बहुमत जुटाने निकले ठाकरे के ‘नारायण’: महाराष्ट्र के रण में BJP का सबसे बड़ा दाँव

अजित पवार के साथ हैं NCP के 43 विधायक: शरद पवार के दावों की सुप्रीम कोर्ट में खुली पोल

अजित पवार ने दिया PM मोदी को धन्यवाद: कहा- वो महाराष्ट्र में स्थिर सरकार सुनिश्चित करेंगे

900 ISIS आतंकियों ने अफ़ग़ानिस्तान में किया सरेंडर, 10 महिलाएँ-बच्चे केरल से: रिपोर्ट

अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों के सामने 900 ISIS आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी 10 महिलाएँ और बच्चे हैं, जो भारतीय आतंकवादियों के परिवार से हैं। इन 10 महिलाओं और बच्चों में से अधिकांश केरल के हैं।

ख़बर के अनुसार, आतंकवादियों ने पूर्वी प्रांत नांगरहार में आत्मसमर्पण किया है, जहाँ अफ़ग़ान राष्ट्रीय सुरक्षा बल ISIS के ख़िलाफ़ ऑपरेशन कर रहे हैं। आतंकी संगठन के ख़िलाफ़ 12 नवंबर को ऑपरेशन शुरू हुआ। 12 नवंबर को शुरू हुए आतंकी संगठन के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान के आक्रामक हमले के कुछ ही घंटों बाद 93 आतंकवादियों ने, जिनमें कई पाकिस्तानी शामिल थे, उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था।

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक, केरल के कई आतंकवादी 2016 से अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा पर थे। कुछ ने तो इस आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए इस्लाम धर्म क़बूल कर लिया था। इनमें से कई अपने परिवार को भी साथ ले जाते हैं। माना जाता है कि जिन 10 महिलाओं और बच्चों ने आत्मसमर्पण किया है, वे ISIS आतंकवादियों के पारिवारिक सदस्य हैं, जिन्होंने भारत से अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा की थी। अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा है कि वे उन सभी आतंकवादियों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है।

यह भी बताया जा रहा है कि 10 महिलाएँ और बच्चे, अधिकतर केरल से आए आतंकवादियों के परिवार हैं, जो काबुल में स्थानांतरित कर दिए गए। अफ़ग़ान ख़ुफ़िया एजेंसी, राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय की एक विशेष टीम, आत्मसमर्पण करने वाले लोगों का ब्यौरा इकट्ठा कर रही है।

हाल ही में यह बताया गया था कि ISIS या ISIS-K के खुरासान समूह ने पिछले साल भारत में आत्मघाती हमले का प्रयास किया था। अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया था। राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के कार्यवाहक निदेशक, राष्ट्रीय ख़ुफ़िया विभाग के निदेशक रसेल ट्रैवर्स के अनुसार, ISIS-K दक्षिण एशिया में संचालित होता है। ISIS-K अमेरिका के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

ट्रैवर्स ने आगे कहा कि दो साल पहले ISIS-K ने अमेरिका की धरती पर हमले का प्रयास किया था, लेकिन एफबीआई ने इसे रोक दिया। इसके अलावा, उन्होंने सांसदों से कहा कि किसी भी गणना के अनुसार, 9/11 के समय के लोगों की तुलना में अब अधिक कट्टरपंथी व्यक्ति हैं।

ISIS के मुख्य आतंकवादी अबू बक्र अल-बगदादी के उत्तर पश्चिमी सीरिया में अमेरिकी सेना द्वारा मारे जाने के कुछ दिनों बाद, ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि आतंकवादी संगठन अफ़ग़ानिस्तान में अपना आधार बदल रहा है।

उन्होंने कहा था कि ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान सीमा पर जो हालिया हमले किए गए, वे ISIS ने अफ़ग़ानिस्तान से बाहर होते हुए किए थे। घातक बंदूक की लड़ाई में एक दर्जन से अधिक लोग मारे गए।

ज़रीफ़ ने कहा कि उनकी सरकार ISIS के अपडेट के बारे में भारतीय एजेंसियों के साथ नियमित सम्पर्क में है। अफ़ग़ानिस्तान में बेस शिफ्ट करने वाला आतंकी समूह पाकिस्तान, रूस और चीन जैसे अन्य दक्षिण एशियाई देशों के लिए भी ख़तरा बना हुआ है। उन्होंने कहा, “यह (आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई) एक ऐसा मुद्दा है, जो हम सभी को एकजुट कर सकता है।” ज़रीफ़ ने कहा कि इन सभी देशों को आतंकी समूह से निकलने वाले खतरे से लड़ने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है।

नशे में धुत हो धार्मिक समारोह में गा रहा था गाना, लोगों ने स्टेज पर चढ़कर की पिटाई: Video वायरल

धार्मिक समारोह में शराब पीकर लोकसंगीत गाना एक गायक को महंगा पड़ गया। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि धार्मिक समारोह के दौरान वहाँ मौजूद एक व्यक्ति ने नशे में धुत गायक को स्टेज पर चढ़कर चांटा जड़ दिया। उसके बाद भी उस व्यक्ति का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वह दोबारा गायक को मारने के लिए आगे बढ़ा। मामले को वहीं रोकने के लिहाज से दूसरे युवक को स्टेज पर चढ़ दखल देना पड़ा।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को गुजरात के पत्रकार जनक दवे ने शेयर करते हुए पूरे मामले की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि समारोह में गायक शराब पीकर गाना गा रहा था। इस दौरान उसका न सुर मिल रहा था और न ताल। वहाँ मौजूद लोगों ने उसकी धुनाई कर दी। पत्रकार दवे के अनुसार कार्यक्रम धार्मिक था। लिहाजा लोगों को गायक की यह हरकत और नागवार गुजरी।

बता दें ये वीडियो गुजरात के बोताड का है। जिसमें मात्र 13 सेकेंड में ही गायक की आवाज सुनकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वो अपने होश में नहीं था और जनता को बरगलाने के लिए कुछ भी गा रहा था। ऐसे में उसके सुर लगातर बिगड़ रहे थे, जिससे वहाँ मौजूद जनता निराश तो हो रही थी, लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी। तभी एक युवक से ये सब बर्दाशत नहीं हुआ और वह स्टेज पर चढ़ गया। पहले उसने गायक को एक चांटा मारा और फिर दूसरा। इसके बाद वहाँ बैठे अन्य लोग भी गायक का विरोध करने लगे। कुछ लोग स्टेज पर भी आए, ताकि गुस्साए युवक से गायक को बचाया जा सके।

गौरतलब है कि गुजरात एक ऐसा प्रदेश है जहाँ शराब खरीदना और शराब बेचना दोनों निषेध है।

दिल्ली प्राइड परेड: ‘कश्मीर माँगे आज़ादी’, ‘भारत माता को चाहिए गर्लफ्रेंड’ के लगे नारे

दिल्ली में रविवार (24 नवंबर) को समलैंगिकों ने प्राइड परेड का आयोजन किया। इस दौरान कई आपत्तिजनक और देश विरोधी नारे लगे।

इस प्राइड परेड की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पत्रकार बोधिसत्व सेन रॉय ने शेयर की। इसमें आप देख सकते हैं कि परेड में शामिल लोगों ने किस तरह भड़काऊ और देशविरोधी नारे लगाए। उन्होंने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए नारे लगाए, इनमें ‘कश्मीर माँगे आज़ादी’, ‘तुम पुलिस बुआओ’, ‘तुम गोलो चालाओ’, ‘लाठी मारो’ जैसे भड़काऊ नारे शामिल हैं।

दिल्ली प्राइड परेड के दौरान ‘भारत माता को चाहिए गर्लफ्रेंड’ लिखित प्लेकार्ड भी देखे गए।

इसके अलावा कुछ ने राजनीतिक नारे लगाकर प्रधानमंत्री को निशाना बनाया।

समलैंगिकों ने अपनी इस प्राइड परेड के दौरान हाथों में प्रधानमंत्री मोदी पोस्टर लेकर उनका मज़ाक उड़ाया।  

और हाँ, ‘भगवा’ नफ़रत का रंग है।

दरअसल, समलैंगिक (LGBTQ) समुदाय ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भारत सरकार द्वारा लाए जा रहे बिल में कुछ प्रावधानों का विरोध किया है। इनका आरोप है कि सरकार ने क़ानून के प्रारूप में पहले ट्रांसजेंडर के तौर पर पंजीयन कराने और फिर सर्जरी का सबूत देने की बाध्यता रखी है।

समलैंगिक समुदाय की माँग है कि सरकार इस तरह के किसी प्रावधान को क़ानून में शामिल न करे। समुदाय अपनी पहचान किसी भी जेंडर में कराने को तैयार हैं। पदयात्रा के दौरान जारी एक वक्तव्य में समुदाय ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ख़ुश तो हैं, लेकिन अभी तक उनकी स्वीकार्यता समाज में नहीं बन पाई है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल समलैंगिक संबंधो पर फ़ैसला देते हुए अंग्रेजों के ज़माने के क़ानून को निरस्त करने का आदेश दिया था। इस पुराने क़ानून में समलैंगिक संबंधो के आरोप सही पाए जाने पर दस साल की सज़ा का प्रावधान था।

अयोध्या में राम मंदिर: 75 साल बाद वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों से हटेगा बाबरी मस्जिद का नाम

राम जन्मभूमि मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब सुन्नी वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों से बाबरी मस्जिद का नाम हटाने की कवायद शुरू हो गई है। यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड में 26-फैजाबाद’ नाम से दर्ज वक्फ सम्पत्ति ‘‘बाबरी मस्जिद’ को जल्द ही वक्फ बोर्ड के राजस्व अभिलेख से हटाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि वक्फ बोर्ड की 26 नवंबर की बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा। इसी बैठक में बोर्ड यह भी फैसला करेगा कि मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन ली जाए या नहीं। 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि से अलग मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश केंद्र सरकार को दिया था। इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने की बात बोर्ड पहले ही कह चुका है।

जानकारी के मुताबिक बोर्ड के दस्तावेज में 1 लाख 23 हजार से ज्यादा संपत्तियाँ दर्ज हैं। बता दें कि 75 साल पहले 1944 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद का नाम दर्ज कराया था। ये वक्फ नंबर 26 पर बाबरी मस्जिद अयोध्या जिला फैजाबाद नाम से दर्ज है। जिसे अब हमेशा के लिए हटाया जा सकता है।

मंगलवार (26 नवंबर, 2019) को लखनऊ में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की अहम बैठक होगी। माल एवेन्यू स्थित बोर्ड के कार्यालय में 11 बजे से होने वाली बैठक में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले में यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के बाबरी मस्जिद से जुड़े मुकदमे पर गौर किया जाएगा। बोर्ड की बैठक में कुल 8 सदस्य शामिल होंगे। इनमें चेयरमैन जुफर फारुकी के अलावा अदनान फरूखशर, अबरार अहमद, मोहम्मद जुनैद सिद्दीकी, सैय्यद अहमद अली, मोहम्मद जुनीद, इमरान माबूद खां और अब्दुल रज्जाक खां शामिल होंगे।

बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी ने हिन्दुस्तान से कहा कि बैठक में हम लोग इस बात पर फैसला लेंगे कि उच्च्तम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बोर्ड को क्या करना है? अपनी बैठक में बोर्ड यह फैसला करेगा कि 5 एकड़ जमीन उसे कुबूल है अथवा नहीं। अगर कुबूल है तो उस जमीन पर मस्जिद के अलावा और क्या-क्या निर्माण होगा।

इस मामले में कानून के जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दस्तावेज से बाबरी मस्जिद का नाम हटाना एक प्रक्रिया है, जिसे वक्फ बोर्ड को पूरा करना है। इस बीच कुछ मुस्लिम पक्षों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात भी सामने आई है। मगर कानून के जानकारों के मुताबिक यदि मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से पुनर्विचार याचिका दाखिल की भी जाती है तो सुन्नी वक्फ बोर्ड के दस्तावेज से बाबरी मस्जिद का नाम हटाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।