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हमारे पास 165 विधायक, 10 मिनट में साबित कर देंगे बहुमत: शिवसेना सांसद संजय राउत

महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने एक बार फिर बीजेपी पर निशाना साधा है। रविवार को राउत ने कहा कि अजित पवार को तोड़कर सरकार बनाना बीजेपी को उल्टा पड़ जाएगा। एनसीपी के सभी विधायक वापस लौट आए हैं। इसके साथ ही राउत ने इसे भाजपा के अंत की शुरुआत बताया है।

उन्होंने कहा, “सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग और पुलिस भाजपा के चार मुख्य पार्टी कार्यकर्ता हैं। वर्तमान गवर्नर भी उनके कार्यकर्ता हैं, लेकिन भाजपा अब अपने ही खेल में फँस गई है। यह उनके अंत की शुरुआत है।”

राउत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भाजपा के देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की इजाजत दी। राउत ने यह भी कहा कि सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 30 नवंबर की समय-सीमा केवल इसलिए दी गई ताकि दल-बदल कराया जा सके। राउत ने कहा, ‘‘शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के पास 165 विधायक हैं। अगर राज्यपाल हमें बुलाते हैं तो हम दस मिनट में अपना बहुमत साबित कर सकते हैं।’’

संजय राउत ने आगे कहा कि इंदिरा गाँधी के काल में इमरजेंसी को काला दिन कहा जाता था। पर जो कल महाराष्ट्र में हुआ उससे बड़ा काला दिन और कुछ नही हो सकता है। उन्होंने कहा कि कल का दिन ‘Black saturday’ था। जनता सोई थी और जब जागी तब उनको पता चला कि महाराष्ट्र में शपथ हो गई। उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि ऐसा काम पॉकेटमार करते हैं। राज्यपाल, एनसीपी और शिवसेना को 24 घंटे नहीं देते हैं, लेकिन अजित पवार एक फर्ज़ी डॉक्यूमेंट लेकर जाते हैं और उनको मान लिया जाता है।

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सामने आए पवार के दोनों गुमशुदा विधायक, कहा- हम चाचा-भतीजा दोनों के साथ हैं

महाराष्ट्र में जारी सियासी उठापठक के बीच एनसीपी के वे दो विधायक सामने आ गए हैं जो गुमशुदा बताए जा रहे थे। विधायक दौलत दारोगा और नितिन पवार की गुमशुदगी को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। दोनों ने सामने आने के बाद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और शनिवार को राज्य के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अजित पवार, दोनों के प्रति निष्ठा जताई है।

यह बेहद दिलचस्प है क्योंकि अजित पवार के भाजपा को समर्थन देने के बाद शरद पवार ने उन्हें विधायक दल के नेता पद से हटा दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी को समर्थन अजित का व्यक्तिगत फैसला है न कि पार्टी का। इसके बाद एनसीपी विधायकों की बैठक भी हुई थी। बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा था कि केवल चार-पॉंच विधायक ही नेतृत्व के साथ नहीं हैं।

इनमें से एक दौलत दारोगा के लापता होने को लेकर ठाणे जिले के शाहपुर पुलिस स्टेशन में शनिवार को शिक़ायत दर्ज कराई थी। रविवार को उन्होंने कहा, “मैं सुरक्षित हूँ। मैं एनसीपी के निशान पर चुनाव जीतकर आया हूँ, इसलिए पार्टी बदलने का कोई सवाल ही नहीं है। शरद पवार और अजित पवार जो भी फ़ैसला लेंगे मैं उसके साथ हूँ। किसी भी अफ़वाह पर विश्वास न करें।”

देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ ग्रहण के बाद दारोगा के लापता होने की खबरें आई थी। इसके बाद, NCP और विधायक के परिवार ने उनके लापता होने की शिक़ायत दर्ज करवाई। शाहपुर से NCP विधायक दौलत दारोगा शनिवार की सुबह शपथ ग्रहण के दौरान राजभवन में मौजूद थे।

एक अधिकारी ने बताया कि पूर्व विधायक पांडुरंग बरोरा ने शाहपुर पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज किया था।

एक अन्य विधायक नेता नितिन पवार के लापता होने की भी ख़बर थी। उनका भी पता चल गया है। उन्होंने कहा, “मैं अपने परिवार और लोगों से अनुरोध करता हूँ कि वे मेरी चिंता न करें। मैं शरद पवार, अजित पवार और छगन भुजबल के साथ हूँ। मेरे परिवार और लोगों द्वारा अन्यथा कुछ भी नहीं सोचा जाना चाहिए।”

इसके अलावा एनसीपी विधायक माणिकराव कोकाते भी रविवार को मुंबई के उस होटल पहुॅंचे जहॉं पार्टी के अन्य विधायक मौजूद हैं। वे भी शनिवार को शपथ ग्रहण के समय अजित पवार के साथ दिखे थे। बाद में उनकी भी कोई सूचना नहीं होने की बात सामने आई थी।

गौरतलब है कि फडणवीस और अजित पवार के शपथ ग्रहण को शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दे रखी है। सोमवार को इस मामले में तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई करते हुए तत्काल बहुमत परीक्षण की मॉंग नहीं मानी। अदालत ने राज्यपाल का आदेश और फडणवीस की तरफ से उन्हें सौंपे गए समर्थन पत्र की कॉपी मंगलवार को पेश करने का निर्देश दिया है।

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मुस्लिम छात्रों के बीच झड़प को मीडिया ने दिया सांप्रदायिक रंग, ‘कश्मीरियों पर हमले’ के रूप में किया प्रचारित

राजस्थान के मेवाड़ यूनिवर्सिटी में दो पक्षों में हुए झगड़े को मीडिया ने जबरदस्ती सांप्रदायिक रंग दिया। समाचार पत्रों से लेकर ‘द वायर’ जैसे प्रोपेगंडा पोर्टल्स ने भी इसे मुस्लिम छात्रों पर अत्याचार के रूप में दिखाया। चितौड़ जिले क्व गंगवाड़ थाने में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के ताहिर मजीद, बिलाल अहमद, इश्फाक अहमद और मोहम्मद अली ने यूनिवर्सिटी ही कुछ अन्य छात्रों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। उन्होंने बिहार के कुछ छात्रों पर मारपीट का आरोप लगाया। आरोपितों में बिहार के तीन मुस्लिम छात्र हैं। मीडिया में इसे ‘कश्मीरी छात्रों पर लगातार हो रहे हमले’ की श्रृंखला की एक कड़ी के रूप में चलाया गया।

ऑपइंडिया ने सच्चाई जानने के लिए गंगवाड़ थाने से संपर्क किया, जहाँ से पता चला कि ये मामला कहीं से भी सांप्रदायिक नहीं है और न ही छात्रों को कश्मीरी होने के कारण निशाना बनाया गया। गंगवाड़ थाना ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में दोनों पक्ष मुस्लिम ही हैं, ऐसे में इसके सांप्रदायिक होने का सवाल ही नहीं उठता। पुलिस ने ‘द वायर’ की उस रिपोर्ट को साफ़-साफ़ नकार दिया, जिसमें बिहारी छात्रों द्वारा कश्मीरी छात्रों को आतंकी कहने की बात लिखी गई है। पुलिस ने बताया कि इस झगड़े के दौरान किसी ने भी कश्मीरी छात्रों को आतंकी नहीं कहा। पुलिस ने इसे छात्रों के बीच का आपसी विवाद करार दिया।

‘द वायर’ ने इस ख़बर को कश्मीरी छात्रों पर हमले के रूप में दिखाया

वहीं मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने भी इस पूरे प्रकरण के सांप्रदायिक होने की बात को नकार दिया। ऑपइंडिया से बात करते हुए यूनिवर्सिटी डीन सीके शर्मा ने बताया कि मीडिया में इसे ग़लत तरीके से पेश किया जा रहा है। दरअसल, ये मामला छात्रों के बीच आपसी झड़प का था, जो थाने तक पहुँच गया। पुलिस ने ऑपइंडिया को बताया कि हॉस्टल मेस में छात्रों के बीच किसी बात को लेकर वाद-विवाद हुआ और इसने संघर्ष का रूप ले लिया। जबकि ‘द वायर’ ने बिलाल के हवाले से बताया है कि उन्हें आतंकी कहा गया। सवाल ये उठता है कि ये आतंकी वाली बात कश्मीरी छात्रों ने एफआईआर में क्यों नहीं दर्ज कराई?

इस मामूली विवाद को यूनिवर्सिटी डीन ने समाप्त कर दिया था। इसके बाद फिर से कश्मीरी छात्रों का एक गुट संघर्ष पर उतारू हो गया। जवाब में बिहारी छात्रों ने भी हमला किया और दोनों एक-दूसरे से लड़ बैठे। इसका न तो उनके कश्मीरी होने से कुछ लेना-देना था और न ही मुस्लिम होने से। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मेवाड़ यूनिवर्सिटी में सैकड़ों कश्मीरी छात्र पढ़ते हैं और उनके लिए अलग से हॉस्टल की व्यवस्था भी की गई है। उन हॉस्टल्स में अन्य मुस्लिम छात्रों को भी रखा गया है।

‘द वायर’ की ही रिपोर्ट को आधार बना कर ‘द क्विंट ने’ भी इसे कश्मीरी छात्रों पर हमले का रंग देकर दिखाया। मीडिया पोर्टल ने ऐसा जताया है कि ये एक सांप्रदायिक घटना थी। पुलिस के बयान के बाद इनकी पोल खुलती दिख रही है। सीताराम येचुरी जैसे वामपंथी नेताओं ने भी इसे अल्पसंख्यकों पर हमले के रूप में प्रचारित किया।

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बधाई सुप्रिया! हल हो गई शरद पवार के उत्तराधिकार की समस्या: पवार पॉलिटिक्स पर दिग्विजय सिंह का तंज

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन के बावजूद सियासी घमासान अभी थमा नहीं है। शनिवार को सुबह से लेकर शाम तक हुए तमाम ड्रामे के बाद शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले में रविवार (नवंबर 24, 2019) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कल फैसला सुनाएगा।

इस बीच, राज्य के सियासी घटनाक्रमों के बहाने कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पवार परिवार की अंदरूनी राजनीति पर तंज कसा है। दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, “NCP के 54 में से 53 विधायक शरद पवार जी के साथ रहेंगे। अजित पवार अकेले रह जाएँगे। शरद पवार के उत्तराधिकारी की समस्या भी हल हो गई। बधाई सुप्रिया!!”

इससे पहले सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, “राज्यपाल द्वारा संविधान का मजाक बनाया जा रहा है। गोवा और मेघालय में भी ऐसा ही हुआ था। NCP का कोई भी विधायक भाजपा का समर्थन नहीं करेगा।”

महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच दिग्विजय सिंह ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक के बाद एक कई ट्वीट किए। एक ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “शिवसेना, NCP और कॉन्ग्रेस को अपनी ताक़त ज़मीन पर दिखने के लिए सड़कों पर उतरना चाहिए। देखते हैं मुंबई और महाराष्ट्र की जनता किसके साथ है? तीनों पार्टियों के लिए यह अस्तित्व का सवाल है। विशेष कर उद्धव और ठाकरे परिवार के लिए यह प्रतिष्ठा का प्रश्न है।”

एक अन्य ट्वीट में दिग्विजय सिंह ने लिखा, “महाराष्ट्र के नए उप-मुख्यमंत्री दो आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। अजित पवार का एनसीपी छोड़ भाजपा का पल्ला पकड़ने का कारण समझे? अमित शाह/मोदी के सबसे ताकतवर हथियार प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई, आईटी हैं। भाजपा पारस पत्थर है उसके छूने से भ्रष्ट भी ईमानदार हो जाता है।”

इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र के घटनाक्रम पर मोहन भागवत जी की कोई टिप्पणी नहीं आई। देश उनसे जानना चाहता है कि जिन अजित पवार को देवेंद्र फडणवीस जी ने जेल भेजने का जनता से वादा किया था अब उन्हें उप-मुख्य मंत्री बनाया, क्या यह अनैतिक नहीं है? क्या इसी रास्ते से संघ राष्ट्र निर्माण करना चाहता है?

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अयोध्या में राम मंदिर: मोदी बोले- फ़ैसले के बाद 130 करोड़ भारतीयों ने साबित किया देशहित से बढ़कर कुछ नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 59वीं बार देशवासियों से मन की बात की। उन्होंने कहा कि 9 नवंबर को अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय का फैसला न्यायपालिका के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद देश में जिस प्रकार की प्रतिक्रिया देखने को मिली उससे साबित हो गया कि देशवासियों ने देशहित को सर्वोपरि माना।

मोदी ने अपने मासिक ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा ”पिछले ‘मन की बात’ में मैंने 2010 में अयोध्या मामले में आए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बारे में चर्चा करते हुए कहा था कि देश ने तब किस तरह से शांति और भाईचारा बनाए रखा था। निर्णय आने के पहले भी, और निर्णय आने के बाद भी। इस बार भी, जब, नौ नवम्बर को उच्चतम न्यायालय का फैसला आया, तो 130 करोड़ भारतीयों ने फिर से साबित कर दिया कि उनके लिए देशहित से बढ़कर कुछ नहीं है। देश में शांति, एकता और सद्भावना के मूल्य सर्वोपरि हैं। राम मंदिर पर जब फ़ैसला आया तो पूरे देश ने उसे दिल खोलकर गले लगाया। पूरी सहजता और शांति के साथ स्वीकार किया।

‘मैं आज भी ख़ुद को कैडेट मानता हूँ’

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि नवंबर महीने का चौथा रविवार हर साल एनसीसी डे के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा, “मैं भी आप ही की तरह कैडेट रहा हूँ और आज भी मन से खुद को कैडेट मानता हूँ। दुनिया के सबसे बड़े यूनिफॉर्म्ड यूथ ऑर्गनाइजेशन में भारत की एनसीसी एक है। इसमें सेना, नौ-सेना, वायुसेना तीनों शामिल हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “7 दिसंबर को आर्म्ड फोर्सेज फ्लैग डे मनाया जाता है। यह वो दिन है, जब हम अपने सशस्त्र बलों के सहयोग को याद करते हैं। हर किसी के पास उस दिन आर्म्ड फोर्सेज का फ्लैग होना ही चाहिए। हम वीर सैनिकों का स्मरण करें। लीडरशिप, देशभक्ति, सेल्फलेस सर्विस, अनुशासन और कड़ी मेहनत इन सबको अपने कैरेक्टर का हिस्सा बनाएँ। अपनी आदत बनाने की एक रोमांचक यात्रा मतलब है एनसीसी।”

पीएम मोदी ने स्कूलों से किया ‘फिट इंडिया वीक’ मनाने का आग्रह

पीएम मोदी ने कहा कि फिट इंडिया मूवमेंट से आप परिचित हो गए होंगे। स्कूल्स फिट इंडिया मूवमेंट दिसंबर में कभी भी मना सकते हैं। इसमे बच्चे चित्रकारी, खेलकूद प्रतियोगिताएँ और योग में शामिल हो सकते हैं। बच्चों को इसमें पसीना बहाना है। अधिकतम फोकस्ड एक्टिविटी करनी है। उन्होंने कहा, “मैं स्कूलों से आग्रह करता हूँ कि हर जगह फिट इंडिया वीक मनाएँ। इससे फिटनेस के लिए जागरूकता बढ़ती है। सभी स्कूल फिट इंडिया रैंकिंग में शामिल हों और फिट इंडिया को सहज स्वभाव बनाएँ। यह एक जनआंदोलन बने।”

उन्होंने कहा कि फिट इंडिया मूवमेंट में फिटनेस को लेकर स्कूलों की रैंकिंग की व्यवस्था की गई है। इसे हासिल करने वाले सभी स्कूल, फिट इंडिया लोगो और फ्लैग इस्तेमाल कर पाएँगे। फिट इंडिया पोर्टल पर जाकर स्कूल स्वयं को फिट घोषित कर सकते हैं। फिट इंडिया के तहत उन्हें फिट इंडिया 3 स्टार और 5 स्टार रेटिंग दी जाएगी।

भाषाएँ-बोलियाँ धरोहर हैं, इन्हें बचाएँ

पुष्करम, पुष्करालु, पुष्कर: के बारे में आपने नहीं सुना होगा। यह नदियों के किनारे मनाए जाने वाले उत्सव हैं। पुष्करम ऐसा उत्सव है जिसमें नदी का महात्मय, नदी का गौरव, जीवन में नदी की महत्ता एक सहज रूप से उजागर होती है। यह देश की 12 अलग-अलग नदियों पर जो उत्सव होते हैं उनके भिन्न-भिन्न नाम हैं। हर वर्ष एक नदी पर यानी उस नदी का नंबर फिर 12 वर्ष के बाद लगता है। यह उत्सव देश के अलग-अलग कोने की 12 नदियों पर होता है। बारी-बारी से होता है 12 दिन चलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस संदर्भ में असम नौगाँव के रमेश शर्मा की टिप्पणी का भी ज़िक्र किया। इसमें 4-16 नवंबर तक चले ब्रहमपुत्र पुष्कर के बारे में बताया गया था।

मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी भारत भूमि पर सैकड़ों भाषाएँ सदियों से पुष्पित पल्लवित होती रही हैं। हालाँकि, हमें इस बात की भी चिंता होती है कि कहीं भाषाएँ, बोलियाँ ख़त्म तो नहीं हो जाएँगी। लेकिन उत्तराखंड के धारचुला की कहानी से मुझे काफी संतोष मिला। वहाँ की आबादी कम है, लेकिन इसके बाद भी बुजुर्ग और युवा सभी अपनी भाषाओं को बचाने के लिए आगे आए। भाषाओं और बोलियों को बचाए रखने के लिए हम सभी को आगे आना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष को उन भाषाओं का वर्ष बताया है जो विलुप्त होने की कगार पर हैं।

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महीने के आख़िरी रविवार को मन की बात के ज़रिए देशवासियों को संबोधित करते हैं। पीएम मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का यह 59वाँ संस्करण था। इससे पहले उन्होंने 27 अक्टूबर को मन की बात कार्यक्रम में देश को संबोधित किया था।

कौन हैं ‘प्लॉगर’ रिपुदमन बेल्वी और सिस्टर थ्रेसिया? PM मोदी ने ‘मन की बात’ में की जिनकी चर्चा

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मीडिया को हेडलाइन मैटीरियल न मिले तो लोकतंत्र रुक नहीं जाता: नरेंद्र मोदी की ‘खरी-खरी’ मन की बात

SVDV के प्रोफेसरों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र: कहा- ‘फिरोज की नियुक्ति BHU एक्ट के खिलाफ’, कार्यकारिणी करेगी पुनर्विचार

बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में नियुक्त फिरोज खान की नियुक्ति का मामला अभी शांत नहीं हुआ है। छात्रों ने धरना भले समाप्त कर दिया हो लेकिन उनका आंदोलन जारी है। चक्रपाणि ओझा, शशिकांत मिश्रा, कृष्णा आदि के नेतृत्व में छात्रों ने कल पीएमओ को ज्ञापन सौंपा। अब SVDV के ही दो एमेरिट्स प्रोफेसरों क्रमश: प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी व प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी ने समूचे विवाद पर नाराजगी व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को तीन पेज का पत्र लिखा है। इस पत्र पर 50 से अधिक प्रोफेसरों के हस्ताक्षर हैं। बता दें कि दोनों प्रोफ़ेसर संस्कृत और धर्म विज्ञान के क्षेत्र में प्रख्यात नाम हैं और संकाय में करीब 50 वर्षों से सेवारत रहते हुए विभागाध्यक्ष व संकायाध्यक्ष के पदों को भी सुशोभित कर चुके हैं।

राष्ट्रपति को लिखे पत्र में स्पष्ट है कि धार्मिक अध्ययन का प्रावधान बीएचयू के एक्ट 1951 एवं संसद की ओर से संशोधित अधिनियम-1951 द्वारा संरक्षित एवं मूल भावना के अनुरूप स्वतंत्रता के बाद से आज तक चला आ रहा है। इसमें संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के द्वारा प्रदत्त धार्मिक शिक्षा केवल भारतीय मत-पंथों के विद्यार्थियों को नित्य आचार निष्ठ होकर पारंपरिक पद्धति से शास्त्रीय एवं आचार्य बनने के लिए उपाधि प्रदान की जाती है।


Letter to President by BHU Professors

प्रोफ़ेसर रेवा प्रसाद द्विवेदी ने कहा, “यह बिलकुल गलत हुआ। न तो कुलपति को नियमों की जानकारी है और न ही डीन, विभागाध्यक्ष व रजिस्ट्रार को। पुराने लोगों को है लेकिन उनसे विश्विद्यालय का संपर्क नहीं है। यह धर्म का प्रश्न है। संकाय में चरण छूकर विद्यार्थी प्रणाम करते हैं अब वे संकोच करेंगे। यहाँ कोई पढ़ने नहीं आएगा।”


Letter to President by BHU Professors

बता दें कि इसी बीएचयू अधिनियम-1915 एवं संशोधित अधिनियम 1951 के आधार पर इस संकाय में यह परंपरा लगभग 104 वर्षों से चली आ रही है। यहाँ केवल हिंदू, सनानत मतों, बौद्ध, जैन सिख ही अध्ययन-अध्यापन में शामिल हो सकते हैं। किसी गैर हिंदू मत के शिक्षक के कारण परंपरा से पढ़ रहे धार्मिक रस्म रिवाज, कर्मकांड-वेदादि-त्रिपिटक आदि विषयों के शास्त्री आचार्य कक्षाओं के विद्यार्थी परंपरा के मूल से वंचित हो जाएँगे और सौ साल से भी अधिक समय से चले आ रहे नियम भी खंडित हो जाएँगे। जो मालवीय जी के मूल्यों और और उनके बनाए नियमों के खिलाफ है जिसे देश आजाद होने के बाद भी संसद से स्वीकृति मिल चुकी है।


Letter to President by BHU Professors

धर्म विज्ञान संकाय के दोनों एमेरिट्स प्रोफेसरों का कहना है कि इस संकाय के धार्मिक साहित्य विभाग में मुस्लिम शिक्षक की नियुक्ति धर्म शिक्षा की भावनाओं और काशी विद्वत परंपरा एवं BHU के एक्ट और परंपरा दोनों के विरुद्ध है। उन्होंने राष्ट्रपति से विवि की गरिमा की रक्षा एवं इस समस्या से मुक्ति दिलाने का अनुरोध भी किया है।

BHU कार्यकारिणी करेगी पुनर्विचार

फिरोज खान की नियुक्ति से उपजे विवाद को BHU की कार्यकारिणी परिषद ने संज्ञान लिया है। परिषद के सदस्य जल्द होने वाली बैठक में इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया और इसकी वैधानिकता को लेकर पुनर्विचार भी करेंगे। कार्यकारिणी परिषद के सदस्यों ने बातचीत में इस पूरे मामले पर हैरानी जताते हुए बयान दिया कि इस प्रकरण से पूरी दुनियाँ में BHU का मजाक बना दिया गया। ऑपइंडिया से बातचीत में BHU के सूत्रों ने बताया कि विश्विद्यालय के इतिहास में ऐसा पहली बार VC राकेश भटनागर के कार्यकाल में हुआ है जब शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियों के लिफाफे बिना कार्यकारिणी के समक्ष रखे ही खोल दिए गए हों।

बता दें कि कुलपति राकेश भटनागर ने कार्यकारिणी परिषद से 20 नवंबर तक की पूर्व सहमति ले ली थी ये डर दिखाकर कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो मानवसंसाधन मंत्रालय और UGC इन पदों को कभी भी लैप्स कर देगा इसलिए औपचारिकताओं को निभाए बगैर उन्हें नियुक्ति का अधिकार दें। उन्होंने दावा किया कि ऐसा JNU में भी होता आया है। फिरोज खान के मामले में भी यही हुआ, उनका इंटरव्यू 5 नवंबर को हुआ और 6 नवंबर को ही नियुक्ति पत्र देकर जॉइनिंग करा दिया गया। इतनी जल्दबाजी देखकर ही विश्विद्यालय में ही उनके द्वारा किए अन्य नियुक्तियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

डॉ. फिरोज का समर्थन करने पर RSS के खिलाफ धरना

बीएचयू में मुस्लिम शिक्षक की तैनाती का समर्थन करने पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भी विरोध झेलना पड़ रह है। डा. फिरोज खान का विरोध कर रहे संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों ने शनिवार को आरएसएस के लंका स्थित विश्व संवाद केंद्र पर भी धरना दिया और नारेबाजी की। छात्रों ने काशी विभाग संघचालक को उनके पद से हटाने की माँग भी की है।

आरएसएस के संवाद केंद्र का घेराव करते SVDV के छात्र

गौरतलब है कि शुक्रवार को संघ की तरफ से बैठक करने के बाद काशी विभाग संघ चालक डा. जयप्रकाश लाल की तरफ से विज्ञप्ति जारी की गई थी कि इस मामले में यदि नियुक्ति वैधानिक चयन प्रक्रिया के तहत हुई है तो फिरोज का विरोध करना गलत है। जयप्रकाश लाल से भी वही गलती हुई जैसे बाकी लोगों ने की। उन्हें भी मामले का पूरा संज्ञान नहीं था और संस्कृत भाषा को लेकर बयान दे दिया जिसे मीडिया ने ‘आरएसएस ने दिया फिरोज खान को समर्थन’ के नाम से चलाया और इस तथाकथित समर्थन से आंदोलन को पहुँचे नुकसान के कारण भी SVDV के प्रदर्शनकारी छात्र विश्व संवाद केंद्र पर जा धमके और जमकर खरी-खोटी सुनाई। बता दें कि छात्रों के इस अप्रत्याशित विरोध-प्रदर्शन को तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से संघ मुख्यालय और उच्च स्तरीय पदाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

महाराष्ट्र में तत्काल बहुमत परीक्षण नहीं, फडणवीस-अजित पवार के शपथ पर कल फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी की संयुक्त याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को फैसला सुनाएगा। तीनों दलों ने महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री और अजित पवार के उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने को शीर्ष अदालत में चुनौती दे रखी है। तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच फडणवीस और पवार ने शनिवार की सुबह शपथ ली थी।

रविवार को जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने सुनवाई याचिका पर सुनवाई की। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह सोमवार सुबह राज्यपाल का आदेश और फडणवीस की तरफ से उन्हें सौंपे गए समर्थन पत्र की कॉपी पेश करें।

इसके अलावा कोर्ट की तरफ से महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री अजित पवार, केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया है। तत्काल बहुमत परीक्षण पर पीठ ने कोई फैसला नहीं दिया।

कॉन्ग्रेस-शिवसेना-एनसीपी की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश की। सिब्बल ने राज्यपाल पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि राज्यपाल सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल के आदेशों पर काम कर रहे है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में जो हो रहा है वैसा हमने पहले कभी नहीं देखा। जब हमने शाम में सरकार बनाने की घोषणा कर दी फिर फडणवीस को कैसे शपथ दिलाई गई। “

जस्टिस अशोक भूषण ने जब सिब्बल से पूछा कि राज्यपाल के समक्ष पत्र कब पेश किया गया था तो उन्होंने कहा कि इसके बारे किसी को जानकारी नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “अगर बीजेपी के पास बहुमत है, तो साबित करे, वरना हमें सरकार बनाने का अवसर दें।” कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कर्नाटक की तर्ज पर 24 घंटे के भीतर बहुमत परीक्षण कराने का आदेश देने की माँग की। उन्होंने कर्नाटक का हवाला देते हुए कहा कि राज्यपाल ने येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 19 दिनों का वक्त दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे में फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था।

जस्टिस एनवी रमन्ना ने सिंघवी से पूछा कि क्या वो यह कह रहे हैं कि राज्यपाल के सामने कोई मैटेरियल प्रस्तुत नहीं किया गया था, तो उन्होंने इसका जवाब ‘हाँ’ में दिया। अभिषेक मनु सिंघवी ने अजित पवार के उप मुख्यमंत्री बनने पर सवाल उठाते हुए कहा, “वो कैसे डिप्टी सीएम बन सकते हैं, जब 41 विधायक कह रहे हैं कि वो एनसीपी के साथ हैं और अब हम उन्हें (अजित पवार) एनसीपी नेता के तौर पर नहीं जानते।” सिंघवी ने कोर्ट से कहा कि जोड़-तोड़ की राजनीति को रोकना जरूरी है, इसलिए जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट हो।

गौरतलब है कि राज्यपाल ने फडणवीस सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 30 नवंबर तक का वक्त दिया है। शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस के ‘महा विकास अघाड़ी’ ने अपनी याचिका में राज्य में 24 घंटे के भीतर बहुमत परीक्षण का आदेश देने की माँग की थी।

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खालिस्तानी आतंकियों को हथियार देने वाला आसिफ़ साथी के साथ पकड़ा गया, यूपी ATS ने शामली में दबोचा

उत्तर प्रदेश एटीएस (आतंक-रोधी दस्ता) ने शनिवार (23 नवंबर) देर शाम शामली से खालिस्तानी आतंकवादियों के मॉड्यूल को हथियार सप्लाई करने वाले आरोपितों को गिरफ़्तार किया है। इनके पास से .32 बोर की पिस्टल, कारतूस और मैगजीन के अलावा तमंचा भी बरामद हुआ है। पकड़े गए हथियार सप्लायर राज सिंह और आसिफ़ निवासी गाँव जलालपुर, थाना बाबरी, शामली से हैं। यूपी एटीएस की टीम दोनों आरोपितों से पूछताछ में जुट गई है।

ख़बर के अनुसार, पंजाब पुलिस ने जब इस मॉड्यूल को चला रहे लखविंदर सिंह और उसके अन्य साथियों से पूछताछ की तो यह पता चला कि उन लोगों को शामली ज़िले का राज सिंह नामक व्यक्ति हथियारों के साथ दस हैंड ग्रेनेड, 1 पिस्टल और 20 कारतूस की सप्लाई देने वाला था।

एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक़, राज सिंह पंजाब पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा वांछित था। जाँच एजेंसी उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि वह ग्रेनेड कहाँ से लाता था। हालाँकि, दोनों ख़ुद को मज़दूर बता रहे हैं। फ़िलहाल, यूपी एटीएस और खुफिया एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

एटीएस ने एक विज्ञप्ति में बताया कि उसे सूचना मिली थी कि शामली ज़िले के जलालपुर का रहने वाला राज सिंह नामक व्यक्ति खालिस्तानी आतंकवादियों को विस्फोटक सप्लाई कर रहा था। उसे और उसके साथी आसिफ़ को शामली में गुरुद्वारा तिराहे के पास से गिरफ़्तार किया गया। विज्ञप्ति में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि आदर्श मंडी थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच जारी है।

ख़बर के अनुसार, आसिफ़ और उसके साथी के तार खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह उर्फ़ पम्मा से जुड़े हैं।
पम्मा, 2016 में पंजाब में हुई आठ हिन्दू-सिख नेताओं की हत्या का मुख्य साज़िशकर्ता है। पंजाब में उसके ख़िलाफ़ तीन वारंट जारी हैं।

बता दें कि 2016 में ही पंजाब और राजस्थान की एटीएस टीम पम्मा को पकड़ने के लिए पुर्तगाल जा चुकी है। हालाँकि, वो कोशिश नाक़ामयाब रही, जिसकी वजह से अब उसके प्रत्यर्पण की कोशिशें चल रही हैं। इससे पहले पम्मा ने 2009 में ISI से सम्पर्क करके पंजाब में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बॉर्डर पार से 9 किलो आरडीएक्स, 8 पिस्टल, 400 कारतूस व डोटोनेटर का ज़ख़ीरा भारत भिजवाया था।

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महाराष्ट्र की सियासत में अब सक्रिय हुआ भाजपा का संजय, 45 शिवसेना विधायकों के संपर्क में होने का कर चुके हैं दावा

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से संजय नाम काफी चर्चा में रहा है। शिवसेना सांसद संजय राउत लगातार शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के दावों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। दूसरी ओर, मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष संजय निरुपम हैं, जो लगातार शिवसेना के साथ जाने को लेकर अपनी पार्टी को चेता रहे हैं। अब इस सियासी पटकथा में भाजपा सांसद संजय काकड़े की भी एंट्री हो गई है।

काकड़े आज (नवंबर 24, 2019) एनसीपी प्रमुख शरद पवार के घर उनसे मिलने पहुँचे। काकड़े राज्यसभा में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए चुने गए थे, लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए। बीते दिनों उन्होंने शिवसेना के 45 विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने का दावा किया था।

बता दें कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ ग्रहण के विरोध में शिवसेना, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस तीनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। तीन सदस्यीय पीठ इस मामले पर आज सुनवाई करेगी।

भाजपा नेता आशीष शेलार ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्देश देगा, हम उसका पालन करेंगे। लेकिन राज्यपाल ने हमें 30 नवंबर तक का समय दिया है, हम 170 विधायकों या उससे अधिक के साथ बहुमत साबित करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, “वे कहते हैं कि रात के अंधेरे में शपथग्रहण हो गया। हम लोग सुबह जल्दी उठकर ‘शाखा’ में जाते हैं। इसे ‘राम प्रहार’ का समय कहते हैं। जो लोग भगवान राम को भूल गए वे राम प्रहार का मतलब कैसे समझ सकते हैं?”

इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने भाजपा पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट करके देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण को एक्सीडेंटल शपथ ग्रहण बताया है। इसके साथ ही संजय राउत ने कहा कि शरद पवार एक राष्ट्रीय नेता हैं। अगर भाजपा सरकार बनाने की कोशिश कर रही है, तो ऐसा नहीं होगा। यह भाजपा और अजित पवार द्वारा उठाया गया एक गलत कदम है। उनका कहना है कि 165 विधायक शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ हैं।

बता दें कि एक दिन पहले शनिवार को महाराष्ट्र में भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर हुआ। शनिवार सुबह बीजेपी ने एनसीपी नेता अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने देवेंद्र फड़णवीस को दोबारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी। 

हालाँकि शाम होते-होते काफी कुछ बदल गया। एनसीपी मुखिया शरद पवार ने अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटा दिया और नए नेता के चुनाव तक एनसीपी नेता जयंत पाटिल को विधायक दल की जिम्मेदारी सौंपी गई। शाम तक एनसीपी के 54 में से 49 विधायक मुंबई के होटल में शिफ्ट कर दिए गए। 

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‘रोमियो’ बन मेरठ की युवती को दुबई बुलाने वाला नदीम इकबाल भागा पाकिस्तान

हाल ही में उत्तरप्रदेश के मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी कपिल गुप्ता ने अपनी बेटी को पाकिस्तानी युवक के चंगुल से छुड़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय और प्रदेश के मुख्यमंत्री से गुहार लगाई थी। उन्होंने ट्वीट किया था, “मैं एक 18 वर्षीय बेटी का लाचार पिता हूँ। मेरी मासूम बेटी को लव जिहाद के जाल में फँसा लिया गया है। वह लड़का पाकिस्तान से है, जो मेरी बेटी से पिछले कुछ समय से रोमियो बनकर बात कर रहा था। मेरी बेटी को बहला-फुसलाकर दुबई ले गया है। न जाने मेरी बेटी किस हाल में होगी।”

सोशल मीडिया एक्सपर्ट ने नदीम इकबाल नामक इस पाकिस्तानी युवक का पता लगा लिया है। हालाँकि, अभी उसके ठिकाने की जानकारी गुप्त रखी गई है। लेकिन जाँच एजेंसियों को नदीम के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। इस बात की जानकारी परिजनों को भी दे दी गई है।

ख़बर के अनुसार, युवती को दुबई बुलाने के बाद नदीम खुद पाकिस्तान भाग गया। दुबई स्थित भारतीय दूतावास अधिकारियों द्वारा लगातार फोन किए जाने से वो बुरी तरह घबरा गया, जिसके चलते वो शुक्रवार (22 नवंबर) की रात को पाकिस्तान चला गया। एक सोशल मीडिया यूजर ने जब फोन पर नदीम से बातचीत की तो उसने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकार दिया और युवती के लापता होने के प्रकरण से भी अनभिज्ञता जताई।

कपिल गुप्ता ने 17 नवंबर को अपनी पीड़ा बयान करते हुए ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने गृह मंत्रालय, दुबई पुलिस, प्रधानमंत्री मोदी आदि से मदद माँगी थी। उन्होंने बताया था कि वे इस संबंध में एसएसपी के दफ्तर कंकरखेड़ा में रिपोर्ट करवा चुके हैं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बेटी का पासपोर्ट नंबर और लड़के की फोटो भी शेयर की थी।

पिता की मदद की गुहार पर दुबई स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने युवती के पिता को कॉल करके पूरे प्रकरण की जानकारी माँगी थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जैसे ही उन्हें भारत से रिपोर्ट मिलेगी, वे आगे की प्रक्रिया के लिए त्वरित कार्रवाई करेंगे।

इस सन्दर्भ में, 18 नवंबर की रात को कांसुलेट जनरल ऑफ़ इंडिया (सीजीआई) दुबई की तरफ से युवती के पिता को ट्वीट कर कहा गया, “आपकी बेटी को ढूँढने के लिए हमने दुबई की एजेंसियों से बात की है। लेकिन किसी सम्पर्क नंबर या पते के बगैर सूचना मिलना काफ़ी कठिन रहेगा। हम हर संभव प्रयास करेंगे।”

ख़बर के अनुसार, बृहस्पतिवार को मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने मामले को संसद में उठाया था। उन्होंने सरकार से युवती की बरामद कराने की माँग की थी। बता दें कि कपिल गुप्ता की बेटी फेसबुक और इंस्टाग्राम के ज़रिए पाकिस्तानी युवक नदीम से मिली थी और 4 नवंबर को उसका पासपोर्ट बना था। इसके बाद 8 नवंबर की सुबह लड़की पासपोर्ट, शैक्षिक प्रमाण-पत्र और सात हज़ार रुपए के साथ घर से गायब हो गई। खोजबीन शुरू हुई तो 10 नवंबर को लड़की के पिता ने सांसद राजेंद्र अग्रवाल से मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई। जिससे मेरठ पुलिस सक्रिय हुई और विदेशी क्षेत्रीय पंजीयन कार्यालय (एफआरआरओ) दिल्ली से संपर्क किया।

इसके बाद, 15 नवंबर को FRRO ने अपनी रिपोर्ट दी कि 8 नवंबर की रात युवती दिल्ली एयरपोर्ट से दुबई गई। जिसके बाद परिवार ने कयास लगाया कि इसके पीछे नदीम ही है, जो पाक के एक पाँच सितारा होटल का मैनेजर है। उसने अपने प्रोफाइल में आई लव पाकिस्तान लिख रखा था।

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