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25000 संडे स्कूल के छात्र: चर्च पर कब्ज़े की लड़ाई में बच्चों से अपने खून से ‘Sathyam’ लिखवा रहे केरल के ईसाई?

केरल के एर्नाकुलम में चर्चों के आधिपत्य और उनमें प्रवेश को लेकर जैकोबाइट और ऑर्थोडॉक्स धड़ों की लड़ाई का रूप गंदला होता जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जैकोबाइट वाले ऑर्थोडॉक्स चर्च के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में छोटे छोटे बच्चों को अपने खून से ‘सत्यम’ लिखने के लिए मजबूर कर रहे हैं

करीब 25000 संडे स्कूल के छात्र राज्य के विभिन्न पैरिशों से आकर कोठमंगलम में पैट्रिआर्क ऑफ़ अंतिओक के प्रति अपनी वफ़ादारी जताने के लिए इकट्ठे हुए थे। आ रही जानकारी के मुताबिक बच्चों की पहली उंगली में नुकीली चीज़ से घाव कर पीछे की ओर रबड़ बैंड बाँधे गए थे ताकि और खून बहे और उसका इस्तेमाल स्याही के तौर पर किया जा सके।

विरोध के इस तरीके से चाइल्ड राइट्स ग्रुप नाराज़ हो गए हैं। बाल अधिकार आयोग ने जिला प्रशासन, जिला बाल संरक्षण अधिकारी और पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट माँगी है। चाइल्ड राइट्स कमीशन के चेयरमैन पी सुरेश ने कहा कि आयोग ने सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान से) मामला दर्ज कर लिया है, और अगर जाँच में किसी भी तरह की ज़बरदस्ती की बात सामने आती है, तो विरोध प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ कदम उठाए जाएँगे।

जैकोबाइट चर्च कोठमंगलम के फादर जोसे पृथुवायलील ने कहा है कि बच्चों ने यह सब अपनी मर्ज़ी से, स्वेच्छा से किया है। इसके अलावा इकठ्ठा 25000 बच्चों में से केवल कुछ ने ही ऐसा किया है। “लोगों का अपनी आस्था को जताने के कई तरीके होते हैं, ऐसे भी लोग होते हैं जो अपनी जान भी आस्था के किए कुर्बान करने को तैयार रहते हैं।”

इसके पहले एर्नाकुलम ज़िले के पिरवोम स्थित सेंट मेरी चर्च में उस समय अफ़रा-तफ़री मच गई थी जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पुलिस ने चर्च में प्रवेश करने की कोशिश की थी।

पिरवोम में स्थित चर्च में उस समय हालात बिगड़ गए थे जब ऑर्थोडॉक्स ग्रुप ने नियंत्रण लेने की कोशिश की और जैकबाइट्स ने नियंत्रण देने से इनकार कर दिया। आत्महत्या की धमकियों के बीच जिला कलेक्टर एस सुहास मौके पर पहुँचे थे और प्रदर्शनकारियों के साथ उन्होंने बात की। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन शीर्ष अदालत के आदेशों का पालन कर रही है। आख़िरकार, पुलिस ने चर्च में प्रवेश किया और प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार करना शुरू कर दिया। पुलिस इतनी मुस्तैद भी इसीलिए दिखी क्योंकि कोर्ट ने अपने आदेश पर की गई कार्रवाई की गुरुवार दोपहर 1.45 बजे तक रिपोर्ट माँगी थी।

इसरो निश्चित रूप से चंद्रमा की सतह पर एक और लैंडिंग का प्रयास करेगा, योजना पर काम हो रहा है: के सिवान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख कैलासादिवु सिवान ने शनिवार (2 नवंबर) को कहा कि संगठन विक्रम लैंडर के दूसरे लैंडिंग पर प्रयास कर रहा है।

तमाम तरह की अटकलों पर विराम लगाते हुए इसरो प्रमुख ने कहा कि इसरो निश्चित रूप से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक और लैंडिंग का प्रयास करेगा। IIT-Delhi के 50वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली आए सिवान ने कहा, “हम विक्रम लैंडर लैंडिंग के लिए तकनीक का प्रदर्शन करना चाहते हैं। हम विक्रम लैंडर लैंडिंग के लिए आगे बढ़ने के बारे में कार्य योजना पर काम कर रहे हैं।”

इसरो प्रमुख ने कहा, “आप सभी लोग चंद्रयान-2 मिशन के बारे में जानते हैं। तकनीकी पक्ष की बात करें तो यह सच है कि हम विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं करा पाए, लेकिन पूरा सिस्टम चाँद की सतह से 300 मीटर दूर तक पूरी तरह काम कर रहा था।” उन्होंने कहा यदि यह सफल रहा होता, तो भारत चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यान को ले जाने वाला चौथा देश होता।

इस महत्वाकांक्षी मिशन के माध्यम से, भारत ने चंद्रमा के अंधेरे पक्ष की खोज करने का प्रयास किया। मिशन को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना था। जब इसरो ने चंद्रयान -2 को अपनी जगह पर सफलतापूर्वक स्थापित करने में कामयाबी हासिल की थी, विक्रम लैंडर ने आखिरी समय में जमीनी स्टेशनों से संपर्क खो दिया था।

विक्रम लैंडर को चंद्र सतह पर भारत का पहला चंद्रमा रोवर ‘प्रज्ञान’ लॉन्च करना था।

जैसा कि ISRO द्वारा समझाया गया है, चंद्रमा मिशन का उपयोग पृथ्वी के इतिहास को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक प्रयोगशाला के रूप में किया गया था। माना जाता है कि एक समय में चंद्रमा, पृथ्वी का एक हिस्सा था। सौर मंडल के पहले के दिनों में वायुमंडल के संकेतों से पता चलता है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इकट्ठा जल 3-4 बिलियन वर्ष पुराना हो सकता है।

हालाँकि, इसरो का महत्वाकांक्षी चंद्रयान-2, आज तक का सबसे चुनौतीपूर्ण अंतरिक्ष अभियान है, जिसने भारत और उसके नागरिकों को पहले ही गौरवान्वित कर दिया था। एक सामूहिक मिशन के रूप में, चंद्रयान-2 ने अपने उद्देश्य का 95% परिणाम हासिल कर लिया था।

भारत में तकनीकी शिक्षा के लिए आईआईटी को बेहद महत्वपूर्ण करार देते हुए के सिवान ने कहा कि उन्होंने तीन दशक पहले आईआईटी बॉम्बे से ग्रैजुएशन किया था। तब जॉब की स्थिति आज जैसी नहीं थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में स्पेशलाइजेशन के क्षेत्र में सीमित ही विकल्प थे, लेकिन आज काफी अवसर हैं।

J&K के आतंकी हमले में 5 मजदूरों की मौत के बाद, 131 को वापस पश्चिम बंगाल लाएँगी ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की ममता सरकार कश्मीर से 131 मजदूरों को वापस लाने की कवायद में जुट गई है। यह फैसला कश्मीर के कुलगाम में पाँच मजदूरों की आतंकी द्वारा हत्या किए जाने के बाद लिया गया है। सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार की सहायता से कश्मीर गए 131 मजदूरों को वापस पश्चिम बंगाल लाया जाएगा। वह मुर्शिदाबाद, दिनाजपुर और माल्दा से हैं।

ममता बनर्जी ने ट्विटर पर कहा कि 131 श्रमिकों की पहचान की गई है, जो कश्मीर में काम कर रहे हैं और उन्हें वापस लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्रमिकों को शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) को जम्मू ले जाया गया। अब वो ट्रेन से बंगाल के लिए रवाना होंगे। इसके लिए टिकटों की व्यवस्था की जा रही है।

बंगाल सरकार ने जम्मू-कश्मीर में दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए भेजा है। दरअसल इन पुलिस अधिकारियों को इसलिए भेजा गया है ताकि बंगाल में अपने घर लौटने के इच्छुक ज्यादातर श्रमिकों के लिए उचित व्यवस्था की जा सके।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार (अक्टूबर 29, 2019) को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों द्वारा कम से कम पाँच गैर-कश्मीरी मजदूरों की हत्या कर दी गई। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुष्टि की। मृतकों की पहचान नईमुद्दीन शेख, मुरशलीम शेख, रफीकुल शेख, रफीक शेख और कमरुद्दीन शेख के तौर पर हुई है। यह सभी मुर्शिदाबाद के सागरदिघी के बहलनगर गाँव के रहने वाले थे।

बता दें कि यह हमला उस दिन हुआ जब यूरोपीय संसद के सदस्यों का 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए घाटी का दौरा किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के उन पाँच मजदूरों के परिवारों को हरसंभव मदद का वादा किया, जिनकी आतंकवादियों द्वारा हत्या कर दी गई। जब आतंकवादियों ने उन पर हमला किया, उस समय श्रमिक एक स्थानीय निवासी के घर पर थे।

ममता बनर्जी ने इसे पहले से सुनियोजित किया गया हमला बताया। उन्होंने इन हत्याओं के मामले में जाँच की माँग की है। मंगलवार को घटना के कुछ घंटो बाद बनर्जी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा था कि कश्मीर में आतंकी हमलों में मारे गए मुर्शिदाबाद जिले के पाँच श्रमिकों के परिवारों को सभी तरह की मदद दी जाएगी।

हनुमान के भेष में भीख माँग रहा नसीम गिरफ़्तार: हिन्दू इलाक़े की रेकी करने का आरोप

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक भिखारी भगवान हनुमान की वेश-भूषा में भीख माँग रहा था। सुभाष नगर क्षेत्र में दोपहर के समय लोगों ने जब उसे हनुमान का भेष धर कर भीख माँगते देखा तो आपत्ति जताई। हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्यों ने इस बात की सूचना पुलिस को दी। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता भी वहाँ पर जमा हो गए। बजरंग दल के संयोजन वरुण ने भी इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलने का बाद पुलिस वहाँ पर पहुँची।

पुलिस ने जब हनुमान के भेष में भीख माँग रहे युवक से पूछताछ की, तो कुछ और ही सामने आया। उसने अपना नाम नसीम बताया। वह मुरादाबाद के लालटीकर रोड का रहने वाला है। पुलिस ने जब सख्ती से पूछ्ताछ की तो उसने दावा किया कि वह हिन्दू धर्म में आस्था रखता है। उसने पुलिस को बताया कि उनकी माँ और बीवी, दोनों ही हिन्दू धर्म से ताल्लुक रखती हैं। उसने बताया कि वो पहले लैला-मजनू के भेष में भीख माँगा करता था और उसने पहली बार हनुमान का रूप धरा था।

पुलिस ने बजरंग दल और हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया है। जबकि लोगों का कहना है कि वह कई बार हनुमान के भेष में इधर-उधर चक्कर लगा चुका है। बजरंग दल के महानगर संयोजन वरुण ने बताया कि वो अपने मित्र अधिवक्ता आलोक प्रधान के साथ घर जा रहे थे, तभी उन्हें नसीम दिखा। वह हनुमान के भेष में भीख माँग रहा था। बकौल वरुण, ऐसा लग रहा था जैसे नसीम हिन्दू इलाक़े की रेकी करने आया है।

नसीम डेलापीड़ की झोपड़पट्टी में अपनी बीवी मुस्कान के साथ रहता है। पुलिस ने उसपर रूप बदल कर ठगी करने का मुक़दमा दर्ज किया है। पुलिस को मुक़दमे में धाराएँ लगाने के लिए काफ़ी माथापच्ची करनी पड़ी। आरोपित के पास से आधार कार्ड भी जब्त किया गया है। नसीम के एक और साथी के बारे में पता चला है, जो फरार बताया जा रहा है। नसीम ने बताया कि वो कुलदेवी को भेंड़ की बलि देता है और काली माता को मदिरा चढ़ाता है। उसने बताया कि जब उसके पिता नदीम जिन्दा थे, तभी से वह ऐसा करता आ रहा है। नदीम की 7 वर्ष पूर्व मृत्यु हो गई थी।

मैं आपकी वजह से जीता हूँ, आपके सभी कार्यों में साथ हूँ: MLA ने पादरियों को दी खुली छूट

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआरसीपी ने इस साल हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज कर राज्य में सरकार बनाई। जगन की आँधी का आलम ये रहा कि कई वर्षों से आंध्र प्रदेश की सत्ता पर काबिज चंद्रबाबू नायडू अपने अस्तित्व की लड़ाई में उलझ गए। जो नायडू चुनाव से पहले देश भर की विपक्षी पार्टियों को गोलबंद करने में जुटे थे, अब उनसे जुड़ी ख़बरें मीडिया का हिस्सा ही नहीं बनतीं। हालाँकि, जगन रेड्डी के सीएम बनने के बाद भी उनकी सरकार और पार्टी विवादों से दूर नहीं रही। अब एक विधायक के बयान से विवाद उपजा है।

ईस्ट गोदावरी जिले में स्थित जग्गमपेटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक चांटी बाबू ने हाल ही में ईसाई पादरियों की एक बैठक को सम्बोधित किया, जिसमें उन्होंने कई विवादित बयान दिए। जगन की पार्टी के विधायक ने न सिर्फ़ ईसाई पादरियों की मजहबी गतिविधियों का समर्थन किया बल्कि उसे बढ़ावा भी दिया। विधायक ने ईसाई पादरियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वो उनके समर्थन से ही जीत कर आए हैं। उन्होंने ईसाई पादरियों को कहा, “अगर आपकी गतिविधियों व क्रियाकलापों में कोई भी व्यवधान डालता है तो उन्हें बताएँ कि विधायक आपके साथ है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने विधायक पर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। विधायक चांटी बाबू का ये वीडियो ट्विटर पर पहुँच गया, जहाँ कई लोगों ने इसे शेयर करते हुए मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और उनकी पार्टी वाईएसआरसीपी को भी घेरा। विधायक ने ईसाई पादरियों को कहा कि उनकी सभी गतिविधियों में वो साथ खड़े हैं। लोगों ने विधायक से पूछा कि क्या वे ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे धर्मांतरण अभियान का भी स्वागत करते हैं?

उधर जगन मोहन रेड्डी ख़ुद सीबीआई की जाँच झेल रहे हैं। हाल ही में सीबीआई की अदालत ने उन्हें सशरीर कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। अवैध निवेश मामलों में सीबीआई की जाँच का सामना कर रहे सीएम जगन ने कोर्ट में ख़ुद उपस्थित होने से छूट देने की माँग की थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।

‘क्या राष्ट्रपति भाजपा की जेब में हैं या फिर उनकी सील महाराष्ट्र भाजपा के कार्यालय में है’

महाराष्ट्र में सत्ता के लिए जारी संघर्ष की आँच बढ़ती ही जा रही है। अब ताप बढ़ाते हुए शिव सेना ने भाजपा से पूछा है कि क्या राष्ट्रपति भाजपा की जेब में हैं। शिव सेना के मुखपत्र सामना के सम्पादकीय में पूछा गया है कि आम आदमी भाजपा नेता मुनगंटीवार की धमकी का क्या अर्थ निकालें। सामना में सीधे-सीधे राष्ट्रपति कार्यालय का भी नाम लेते हुए पूछा गया है कि क्या राष्ट्रपति भाजपा की जेब में हैं, या फिर उनकी सील महाराष्ट्र भाजपा के (नरीमन पॉइंट स्थित) कार्यालय में पड़ी हुई है कि भाजपा अपनी सरकार न बन पाने की सूरत में राष्ट्रपति शासन थोप देगी राज्य पर।

इसके अलावा शिव सेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी भाजपा नेता के बयान से व्यथित होकर उनसे सवाल किया है कि क्या वे चुने हुए विधायकों को धमकी दे रहे हैं। शिव सेना के राज्य सभा सांसद और सामना के कार्यकारी सम्पादक संजय राउत ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए यह भी कहा कि महाराष्ट्र में आज राजनीतिक स्थिति ऐसी है कि भाजपा और शिव सेना के अलावा बाकी सभी राजनीतिक दल एक दूसरे से बात कर रहे हैं।

शुक्रवार को बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा था कि यदि राज्य में सात नवंबर तक नई सरकार नहीं बनती है तो राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार से अपनी मुलाकात पर संजय राउत ने यह बयान दिया था। कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थरोट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण ने भी शरद पवार से मुलाक़ात की थी। इन मुलाकातों ने राज्य में ग़ैर-भाजपा सरकार की अटकलों को हवा दे दी थी।

हिन्दुओं को भला-बुरा कह ‘कूल’ बनीं शबाना: बड़े मियाँ तो बड़े मियाँ, दूसरी बीवी सुभान अल्लाह

कुमारटुली से शुरू करते हैं। कुमारटुली से इसीलिए, क्योंकि वहाँ के लोगों के कारण बंगाल की दुर्गा पूजा में वो रौनक आती है, जो शायद ही कहीं और रहती हो। नार्थ कोलकाता के शोभाबाजार के पास स्थित कुमारटुली में ही वो लोग रहते हैं, जो माँ दुर्गा की कई भव्य मूर्तियों का निर्माण करते हैं, जो इंटरनेट पर वायरल होती हैं और जिनका दर्शन लाखों करोड़ों लोग करते हैं। त्योहारों के मौसम में लोग उनके पास जाते हैं, चाय-पानी पीते हैं, उनसे बातचीत करते हैं और अपनी प्रतिमाओं का ऑर्डर देते हैं। बड़े-बड़े पंडालों के आयोजक उनके पास जाकर बैठते हैं। कुछ लोग ऑर्डर की हुई प्रतिमाओं का निरिक्षण करने जाते हैं। पत्रकार उन मूर्तिकारों का इंटरव्यू लेते हैं। अमेरिका, यूके और नूजीलैंड तक के लोग उनसे मिलते हैं।

ये थी असली बात। अब आते हैं बनावटी बात पर। बनावटी बात, यानी उसे मैन्युफैक्चर करने वाले बनावटी लोग। बनावटी नैरेटिव, यानी उसे फैलाने वाली बनावटी विचारधारा। शबाना आज़मी के हाल ही के ट्वीट पर ग़ौर कीजिए। जावेद अख़्तर तो दिन भर में इतने लोगों से लड़ते-झगड़ते हैं कि उनके ट्वीट्स खोजने मुश्किल हैं लेकिन उनकी पत्नी उनसे कम ट्वीट करती हैं। शबाना आज़मी ने एक अंग्रेजी कविता के रूप में ‘मूर्तिकारों की दुर्दशा’ का वर्णन किया है। इस ‘दर्दनाक’ और ‘समाज की दयनीय स्थिति का सच्चा चित्रण करने वाले’ चित्र में एक मूर्तिकार गणेश भगवान की प्रतिमा बनाते समय उनसे कहते है:

“जब तक मैं तुम्हारी नक्काशी में व्यस्त था
तब तक तुम सिर्फ़ एक पत्थर थे
अब जब मेरा काम ख़त्म हो गया है
तुम भगवान बन गए हो
लेकिन मेरा क्या?
मैं तो ठहरा अछूत”

कितना दुःख-दर्द है न इस कविता में? कितनी चिंतित दिखती हैं न शबाना आजमी ग़रीबों के लिए। और हाँ, कितना आसान है न हर समस्या को (अगर वो नहीं है तो मैन्युफैक्चर कर के) हिंदुत्व, हिन्दू समाज और हिन्दू देवी-देवताओं से जोड़ना? जो मूर्तिकार भगवान गणेश की मूर्ति बनाता है, उसी मूर्तिकार को गणेश के भक्त अछूत मानते हैं। यही सन्देश है न इस कविता का? हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों को लेकर यह प्रोपेगंडा नया नहीं है। ‘रेड लेबल टी’ के प्रचार में भी एक मुस्लिम शिल्पकार को दिखाया गया था। वो काफ़ी प्रेम से भगवान गणेश की मूर्तियाँ बना रहा था जबकि हिन्दू गणेश भक्त उसकी पहचान जानकर उससे मूर्ति लेने का इच्छुक नहीं था। कितने दकियानूसी ख्यालों वाले हैं न ये हिन्दू?

सबसे बड़ी बात तो ये है कि जावेद अख्तर की पत्नी शबाना आज़मी ने जिस मूर्ति को लेकर भारत में हिन्दुओं की छुआछूत पर निशाना साधा है, वो कम्बोडियन गणेश की प्रतिमा है। अर्थात, गणेश की प्रतिमा की इस रूप में कम्बोडिया में पूजा की जाती है। प्रतीत होता है कि ये मूर्तिकार भी कम्बोडिया का ही है। तो क्या अब शबाना आज़मी कम्बोडिया से उदाहरण लेकर भारत के हिन्दुओं पर निशाना साध रही हैं? क्या उन्होंने कभी बकरीद पर बकरे न काटने की सलाह दी है? क्या उन्होंने बकरीद पर ख़ून से सनी सड़कों की फोटो शेयर कर अपने मजहब के लोगों को कोई सीख दी है? नहीं।

अब आइए आपको सच्चाई से अवगत कराने का समय आ गया है। कुछ न कुछ खामियाँ हर प्रोफेशन में है लेकिन मूर्तिकारों को अछूत बता कर शबाना आजमी ने उनका अपमान किया है, उनकी कथित पीड़ा नहीं दिखाई है। साउथ मुंबई से 2 घंटे के रास्ते पर पेन नामक एक गाँव है, जहाँ 15,000 लोग मिल कर प्रतिवर्ष गणेश जी की 7 लाख मूर्तियाँ बनाते हैं। उन्हें इसके लिए महीनों मेहनत करनी होती है। आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि इनमें से एक चौथाई मूर्तियाँ तो विदेशों में एक्सपोर्ट की जाती है। 10 करोड़ रुपए के सालाना टर्नओवर वाली मूर्तिकारों की यह जमात सैकड़ों सालों से इस बिजनेस में लगी हैं।

शबाना आजमी को एक बार वहाँ जाना चाहिए क्योंकि पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वहाँ से म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने गणेश प्रतिमा म्यूजियम का निर्माण किया है। मूर्तिकारों के साथ अछूत जैसा व्यवहार किया जाता है, शबाना आजमी के इस दावे की पोल कोलकाता में भी खुल जाती है और मुंबई में भी। ये दोनों तो बस एक उदाहरण थे। लेकिन शबाना आजमी ने एक कुतर्क पर आधारित प्रयास किया है। सामाजिक कुरीति को धर्म और हिन्दू देवी-देवताओं के साथ जोड़ने का प्रयास। लेकिन कुछ सवाल भी हैं। सवाल भी इसी प्रयास से जुड़ा है।

कहा तो ये भी जाता है कि जिसनें ताजमहल बनाया, शाहजहाँ ने उसीके हाथ ही काट डाले ताकि वह ऐसा कुछ और न बना सके। उसके सहयोगियों के भी हाथ काट डाले गए। सोमनाथ का मंदिर भी कई सालों में काफ़ी मेहनत से बना था। उसे बार-बार अलग-अलग इस्लामी शासकों द्वारा तोड़ा गया। राम मंदिर भी कई लोगों ने काफ़ी सारा ख़ून-पसीना बहा कर ही बनाया था। बाबर के अनुयायियों ने उसपर पानी फेर दिया। भारत में हजारों मंदिर बने, दर्शनीय कलाकृतियों के साथ- जिन्हें उकेरने में दशकों लगे। उन्हें ढाहने में इस्लामिक आक्रांताओं ने एक मिनट भी नहीं लगाया। उन इमारतों, प्रतिमाओं और कलाकृतियों को बनाने वालों के दिल पर क्या बीती होगी? अगर वो इस दुनिया में नहीं भी रहे होंगे तो उनकी रूह काँप उठी होगी।

किसी ‘तीन तलाक़’ की पीड़िता के लिए कभी शबाना आजमी के मन में कोई कविता आई क्या? जिस प्रतिमा की वो बात कर रही हैं, उसी प्रतिमा के विसर्जन के समय पत्थरबाजी करने वालों से पीड़ित श्रद्धालुओं की पीड़ा को दिखाने के लिए वो जावेद अख़्तर को कोई कविता लिखने बोल सकती हैं क्या? किसी को भी अछूत माना जाए तो यह सही नहीं है लेकिन शिल्पकारों और मूर्तिकारों को अछूत मानने की तो कहीं परंपरा ही नहीं रही है? इतिहास में भी ऐसा कोई वाकया नहीं है, जहाँ हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमा का निर्माण करने वाले शिल्पकारों को हेय दृष्टि से देखा जाता हो या फिर उनके साथ अछूत जैसा व्यवहार किया जाता हो।

वैसे हिन्दू पर्व-त्योहारों के समय सेलेब्रिटीज द्वारा इस तरह के नाटक कोई नई बात नहीं है। प्रियंका चोपड़ा का दमा तभी उखड़ता है, जब दिवाली आती है। बॉलीवुड पानी बचाने की बात तभी करता है, जब होली आती है। बाकि मजहबों के त्योहारों पर बधाई और हिन्दू त्योहारों पर सीख। वाह। बॉलीवुड का यह दोहरा रवैया सचमुच तारीफ के लायक है। एक तरफ जावेद अख्तर सोशल मीडिया पर लोगों से लड़ते फिर रहे हैं, दूसरी तरफ उसी अजेंडे को उनकी दूसरी बीवी हिंदुत्व और हिन्दू त्योहारों पर निशाना साधते हुए फैला रही हैं। मियाँ-बीवी का ये कॉम्बिनेशन शायद फ़िल्मों से लगभग रिटायर होकर इसी काम में लगा हुआ है।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला: ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रतुल पुरी के ख़िलाफ़ दाखिल की चार्जशीट

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले के मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के ख़िलाफ़ दिल्ली एक अदालत में पूरक आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है। यह आरोप-पत्र शनिवार (2 नवंबर) को विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष दाखिल किया गया। 

ज्ञात हो कि जाँच एजेंसी ने रतुल पुरी को चार सितंबर को गिरफ़्तार किया था और फ़िलहाल वो न्यायिक हिरासत में हैं। इटली के फिनमैकेनिका की ब्रिटिश सहायक, अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की ख़रीद में कथित अनियमितताओं के बाद मनी-लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था।

इससे पहले पुरी को बैंक धोखाधड़ी धोखाधड़ी के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ़्तार किया गया था। हेलिकॉप्टर घोटाले में पुरी जाँच एजेंसी के सामने पेश हुए जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद सीबीआई की FIR का संज्ञान लेते हुए उनके और अन्य के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।

पीएमएलए का इस्तेमाल कर सबसे ताज़ा केस सभी पर दायर किया गया है। लगभग दो महीने पहले (17 अगस्त, 2019 को) दायर इस मुक़दमे में रतुल पुरी के अलावा उनके पिता दीपक पुरी, माँ नीता पुरी (जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ की बहन भी हैं) और अन्य के खिलाफ शिकायत की गई थी। मामला सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा अपने साथ ₹354 करोड़ की धोखाधड़ी (फ्रॉड) किए जाने के आरोप का था। उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी अदालत ने ख़ारिज कर दी थी। इसके अलावा ईडी का यह भी आरोप था कि रतुल पुरी चॉपर घोटाले के मामले में वो एक गवाह की हत्या के लिए भी जिम्मेदार हैं।

ग़ौरतलब है कि दिल्ली की अदालत ने 25 अक्टूबर 2019 को रतुल पुरी की न्यायिक हिरासत (जुडिशियल कस्टडी) एक हफ्ते यानि शनिवार (2 नवंबर, 2019) तक के लिए बढ़ा दी थी।

‘सुरक्षा परिषद ने कहा- हम नहीं डालेंगे कश्मीर के मामले में हाथ, ये भारत का आतंरिक मामला’

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कश्मीर के मुद्दे पर इस महीने कोई चर्चा नहीं करेगा। यूनाइटेड किंगडम ऑफ़ ब्रिटेन की संयुक्त राष्ट्र में स्थाई प्रतिनिधि और नवंबर माह की अध्यक्षा करेन पियर्स ने कहा कि परिषद इस मुद्दे को नहीं उठाएगा, और दुनिया में और भी बहुत सारे मुद्दे पड़े हैं उठाने के लिए। उन्होंने यह बयान ब्रिटेन में शुक्रवार (1 नवंबर, 2019) को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दिया।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकशित एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद ने हाल ही में इस मुद्दे को डिस्कस किया था और इस महीने सुरक्षा परिषद के किसी भी सदस्य ने इस मुद्दे पर मीटिंग की माँग नहीं की है

सुरक्षा परिषद में इसके पहले भी पाकिस्तान को किसी ने भाव नहीं दिया था- सुरक्षा परिषद ने 5 अगस्त के बाद केवल एक अनौपचारिक, अनाधिकारिक बैठक बुलाई थी, वह भी इसलिए कि हिन्दुस्तानी कार्रवाई लद्दाख में भी हुई, और लद्दाख पर चीन अपना दावा करता है। सुरक्षा परिषद की उस बैठक में भी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्थायी सदस्यों में 5 में से 4 और अस्थायी सदस्यों में 10 में से 9 ने हिंदुस्तान का पक्ष लिया।

हिंदुस्तान ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह हिदायत दे दी थी कि कश्मीर उसका आंतरिक मसला है। अतः चाहे उसे पूर्ण राज्य से केंद्र-शासित प्रदेश में बदलना हो, या अनुच्छेद 370 के ज़रिए उसे मिले विशेष प्रावधानों को खत्म करना, हिंदुस्तान पूरे कश्मीर (POK और अक्साई चिन सहित) में किसी भी बाहरी शक्ति का हस्तक्षेप सहन नहीं करेगा। 

इसके पहले भारत द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने के लिए किए गए फैसले के बाद से पाकिस्तान लगातार संयुक्त राष्ट्र (UN) तक मामले को ले जाने की बात कर रहा था। जिसके संबंध में उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष को दखल देने के लिहाज से पत्र भी लिखा, लेकिन तत्कालीन अध्यक्षा जोअन्ना व्रोनेका ने पाकिस्तान के इस पत्र पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया था।

सुरक्षा परिषद की तत्कालीन अध्यक्षा ने न्यूयॉर्क में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्‍तान द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संबंध में लिखे गए पत्र पर पूछे गए सवाल को गंभीरता से सुनने के बाद ‘नो कमेंट्स’ में जवाब दिया था। साथ ही यूएन ने भी पाकिस्तान को 1972 के शिमला समझौते का रास्ता दिखा कर टरका दिया था।

महाराष्ट्र में नया ट्विस्ट: कॉन्ग्रेस नेता की सोनिया से माँग, शिवसेना के साथ बनाएँ सरकार

महाराष्‍ट्र में बीते एक सप्ताह से सीएम पद को लेकर रस्साकशी कर रही शिवसेना और बीजेपी की तकरार के बीच अब तीसरा पक्ष भी सक्रिय होता दिख रहा है। अब तक इस पूरी कवायद से दूरी बनाकर चल रही कॉन्ग्रेस के सांसद हुसैन दलवई ने सोनिया गाँधी को चिट्ठी लिखकर शिवसेना को समर्थन देने की माँग की है। इससे सूबे की राजनीति में अब एक नया मोड़ आ गया है।

सोनिया गाँधी को लिखे पत्र में राज्‍यसभा सांसद हुसैन दलवई ने कहा है कि कॉन्ग्रेस को सरकार बनाने में शिवसेना का समर्थन करना चाहिए। दलवई का कहना है कि कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति बनाने में शिवसेना ने कॉन्ग्रेस का समर्थन किया था। ऐसे में अब महाराष्‍ट्र में कॉन्ग्रेस को भी शिवसेना का समर्थन करना चाहिए।

कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा, “महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी में सरकार गठन पर सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में कॉन्ग्रेस, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग, गठबंधन में हमारी सहयोगी एनसीपी और शिवसेना साथ मिलकर सरकार बनाएँ।” उन्होंने लिखा, “सब जानते हैं कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने हमारे कई विधायक और नेताओं को अपने खेमे में शामिल कर लिया था। अगर वे सरकार बनाने में सक्षम होते हैं, तो वे फिर से और अधिक सख्ती के साथ ऐसा करेंगे। ऐसे में अगर हम शिवसेना के साथ सरकार बनाने में सक्षम होते हैं, तो इसे रोका जा सकता है और इससे हम अपने आधार को मजबूत कर पाएँगे।”

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक समुदाय लिंचिंग पर भाजपा सरकार के एजेंडा को लेकर अतिसंवेदनशील हैं। साथ ही देश भर में एनआरसी को लागू करने की योजना और बाबरी मस्जिद विवाद मामले पर कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंतित है।

उन्होंने लिखा कि मतदाताओं ने भी भाजपा को स्पष्ट बहुमत से वंचित कर दिया है। यह उनके द्वारा प्रतिपादित घृणा की राजनीति के प्रति मतदाताओं के रूख को दर्शाता है। इसलिए भाजपा को सत्ता में आने से रोकना अति आवश्यक है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिवसेना के साथ सरकार बनाने के लिए सहयोगी एनसीपी को पूर्ण विश्वास में लेना होगा, तभी ऐसा निर्णय लिया जाना चाहिए।