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महिला शिक्षक का अपहरण, जबरन बिठा कर गुंडागर्दी: JNU को ‘गढ़चिरौली’ बनाने की ओर एक और कदम

ऐसा लग रहा है कि देश की राजधानी दिल्ली के बीच स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को इसके वामपंथी छात्र अपने राजनीतिक आका नक्सलियों के केंद्र ‘गढ़चिरौली’ जैसा बनाने पर ही तुले हुए हैं।

ट्विटर पर वायरल हो रहे एक वीडियो को देख कर लग रहा है कि माओ-लेनिन-मार्क्स के वंशजों के गढ़ में यूनिवर्सिटी के नियम तो दूर की बात, नागरिक कानून व्यवस्था ही पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और विश्वविद्यालय लेफ्ट वाले छात्रों के रहमो करम पर आ चुका है। वीडियो के ट्वीट में बताया जा रहा है कि जेनएयू की एसोशिएट डीन ऑफ़ स्टूडेंट्स, डॉ. वंदना मिश्रा, को सुबह से यूनिवर्सिटी के छात्रों ने उनकी मर्ज़ी के खिलाफ एक कमरे में कैद कर रखा है (यानि अपहृत कर रखा है)।

वीडियो में उनके चारों ओर नारेबाजी करते, चीखते और दहाड़ते छात्र दिख रहे हैं। साथ ही डॉ. मिश्रा बहुत ही बेबस नज़र आ रहीं हैं। वीडियो शेयर करने वाले ट्वीट में यह भी दावा किया गया है कि उनकी सेहत सुबह से गिरती ही जा रही है। यह भी बताया गया है कि उन्हें उनकी ही स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ की बिल्डिंग में स्थित क्लास में कैद कर के रखा गया है।

ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसके पीछे कारण छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच फीस, ड्रेस कोड, लाइब्रेरी के समय जैसी चीज़ों को लेकर टकराव है। इसके चलते छात्रों के भूख हड़ताल पर होने की बात कही गई है।

इस बीच कैम्पस ‘नक्सलियों’ की हरकतों से ट्विटर पर कई प्रबुद्ध व्यक्तित्व बिफर उठे हैं। पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्वीट करके कहा है कि भले ही उन छात्रों को शांतिपूर्वक अपनी बात कहने का अधिकार हो, लेकिन अवैध रूप से किसी को बंदी बनाना कानून के खिलाफ है। कौल ने जेएनयू के कुलपति वीके सारस्वत को निशाने पर लेते हुए सवाल किया है कि उन्होंने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की या दिल्ली पुलिस को क्यों नहीं बुलाया।

एएनआई सम्पादक स्मिता प्रकाश ने भी घटना की आलोचना की है। वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने जेएनयू को ‘रिपब्लिक ऑफ़ जेएनयू’ बताते हुए बेबस देश की जनता के पैसों से चल रही एक समानांतर राजनीतिक सत्ता करार दिया है।

ख़ास ही नहीं, आम लोग भी जेएनयू की घटना से बेहद नाराज़ हैं। एक ट्विटर यूज़र ने कहा कि खाली ट्वीट कर अपने आप को पीड़ित दिखा रहे जेएनयू कुलपति खुद को नाकारा साबित कर रहे हैं। वहीं एक दूसरे ट्वीटर हैंडल ने जेएनयू की तुलना दुर्दांत जिहादी संगठन इस्लामिक स्टेट से कर दी है।

गंगा साफ़ करते-करते भाजपा का मन मैला हो गया: उद्धव ठाकरे का छलका ‘दर्द’, बोले शाह पर भरोसा नहीं

शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी का 30 साल पुराना गठबंधन लगभग खत्म होने की कगार पर दिख रहा है। 5 साल की सरकार चलाने के बाद दोबारा जनादेश पाने के बावजूद मुख्यमंत्री पद और विभागों की संख्या पर दावेदारी इसका कारण है। इसके अलावा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद अब शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी भाजपा के खिलाफ बयान दिया है, जिसमें भाजपा का मन मैला हो जाने, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर भरोसा न करने जैसे हमले किए गए हैं।

ठाकरे ने कहा है कि उन्होंने अपने पिता और शिव सेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे से वादा किया था कि शिव सेना का एक दिन सीएम होगा, और इस वादे को पूरा करने के लिए उन्हें अमित शाह या देवेंद्र फडणवीस की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने साथ भी भाजपा पर गंगा साफ़ करते-करते अपने मन में मैल आ जाने का आरोप लगाया।

इसके अलावा उद्धव ने एक ओर फडणवीस के इस आरोप का खंडन किया है कि सेना की एनसीपी से बात हो चुकी है, वहीं उन्होंने भाजपा पर चुनाव के पहले सीटों के बँटवारे और सीएम की साझेदारी का झूठ बोलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भाजपा के लिए दरवाज़े बंद नहीं किए थे, केवल भाजपा के (कथित) झूठ के चलते खुद बात नहीं की।

साथ ही उद्धव ने, जो कि कॉन्फ़्रेंस में अपने बेटे, सेना के मुख्यमंत्री उम्मीदवार माने जा रहे युवा सेना प्रमुख आदित्य के साथ आए थे, कहा कि भाजपा को लगता होगा कि उन दोनों दलों के बीच भरोसा नहीं है, अब उन्हें अमित शाह ‘एन्ड कम्पनी’ पर भरोसा नहीं रहा।

फरवरी के बाद भी पाक रहेगा FATF की ग्रे लिस्ट में, निकलने की उम्मीद नहीं: पाकिस्तानी मंत्री

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कार्रवाई समूह (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स, एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में से निकलने की पाकिस्तान की राह मुश्किल से और मुश्किल होती जा रही है। यहाँ तक कि अब तो उसके खुद के नेतृत्व और प्रशासन को यह लगने लगा है कि फ़िलहाल फरवरी 2020 तक ग्रे लिस्ट में डाला गया उनका देश उसके बाद भी ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं निकल पाएगा।

पाकिस्तान के अखबार डॉन में पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री हम्माद अज़हर के हवाले से यह बयान प्रकाशित हुआ है कि फरवरी, 2020 के बाद भी पाकिस्तान का इस ग्रे लिस्ट से निकलना मुश्किल लग रहा है। इसका कारण मुख्यतः इस आतंकी देश की रिस्क प्रोफाइल को बताया गया है, यानि यह खतरा और अन्य सदस्य देशों को डर, है कि इस लिस्ट में से निकलते ही पाकिस्तान मनी लॉन्ड्रिंग कर जिहादियों को पैसा देना फिर से शुरू कर देगा।

पाकिस्तान को जून, 2019 में पेरिस स्थित इस संस्था ने अपनी ग्रे लिस्ट में डाला था। इसके बाद उसे एक एक्शन प्लान दिया गया था, जिसके हिसाब से पिछले महीने (अक्टूबर 2019) तक पाकिस्तान को काले धन के जिहादियों के हाथ में पहुँचने पर नियंत्रण करके दिखाना था। ऐसा न करने पर उसके नार्थ कोरिया और ईरान की तरह ब्लैक लिस्ट में चले जाने का खतरा था।

ऐसा न करने के बाद भी पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में एफएटीएफ ने डाला नहीं था, और ग्रे लिस्ट में बनाए रखा था। और अब पाकिस्तान के मंत्री यह रोना रो रहे हैं कि कुछ अन्य देशों को एफएटीएफ के नियमों का केवल 80 प्रतिशत अनुपालन पर छूट दे दी गई, जबकि पाकिस्तान को यह इजाज़त नहीं मिल रही है। पाकिस्तान पर नियमों का 100 फीसदी अनुपालन करने के लिए दबाव बनाया जाना पाकिस्तानी मंत्री को बहुत बुरा लग रहा है।

सवाल पर बवाल: शिवाजी के नाम से छत्रपति हटाने पर भड़के मराठी, केबीसी के बहिष्कार की माँग

मशहूर टीवी गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ अपनी एक छोटी सी भूल से एक राजनीतिक विवाद का केंद्रबिंदु बन गया है। गेम शो में पूछे गए एक प्रश्न में हिन्दू शासक और मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम में उपनाम ‘छत्रपति’ न लगाने, और उसी सवाल में अन्य हिन्दू राजाओं, और मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब के लिए उपयुक्त राजनीतिक उपनामों का प्रयोग करने को लेकर ट्विटर पर देश भर की जनता की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

यही नहीं, फ़िलहाल मराठा पार्टी शिव सेना से सत्ता संघर्ष में उलझी भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र इकाई ने भी इस पर आपत्ति जताई है। भाजपा के महाराष्ट्र विधायक नितेश राणे ने चैनल और आयोजकों से माफ़ी की माँग की है।

बवाल का कारण एक सवाल है जिसमें स्क्रीन पर औरंगज़ेब और शिवाजी महाराज समेत पाँच ऐतिहासिक शासकों के बारे में पूछा गया था। इसमें से शिवाजी के अलावा बाकी सभी शासकों, जैसे महाराणा प्रताप, राणा सांगा, महाराज रंजीत सिंह आदि के लिए सही उपनामों का इस्तेमाल हुआ और छत्रपति शिवाजी को केवल “शिवाजी” लिखा गया।

इसे उनका इसलिए अपमान माना जा रहा है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से भी उनकी जन्म की जाति के चलते उनके राजतिलक में अड़चन आने की बात कही जाती है। उस समय वाराणसी के सम्मानित ब्राह्मण पंडित विश्वेश्वर ‘गागा’ भट्ट ने यह ढूँढ़ कर निकाला कि वे जाति-भ्रष्ट(या कुछ विवरणों के अनुसार, पूर्वजों के कुछ कृत्यों के चलते जातिच्युत) सिसोदिया क्षत्रिय हैं। सूर्यवंशी सिसोदिया भगवान श्री राम के इक्ष्वाकु कुल के माने जाते हैं। उसके बाद ही उनका राजतिलक सम्भव हो पाया था।

इस चूक से नाराज़ लोगों के केबीसी के आयोजकों और सोनी चैनल वालों को आड़े हाथों लिया। किसी ने क्रूर जिहादी औरंगज़ेब को सम्मान देने पर आपत्ति जताई तो कुछ लोगों ने होस्ट अमिताभ बच्चन से भी माफ़ी की माँग कर डाली।

विवाद बढ़ता देख कर सोनी टीवी ने एक ट्वीट कर विवाद पर माफ़ी माँग ली है। साथ ही दावा किया है कि कल जिस एपिसोड की शूटिंग हुई है उसमें उन्होंने माफीनामे का एक ‘स्क्रॉल’ जोड़ दिया है।

ज़ाकिर ने नाबालिग के साथ किया सेक्स, बाद में वेश्या बनाने की कोशिश, पुलिस ने फोड़ा सेक्स रैकेट

आंध्र प्रदेश में एक सेक्स रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है, और उसमें शामिल ज़ाकिर हुसैन को हिरासत में ले लिया है। मामला आंध्र प्रदेश के कौवववुरु और नेल्लोर जिलों का है।

द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार कौवववुरु की रहने वाली एक लड़की दो साल पहले (वर्ष 2017 में) नेल्लोर के रहने वाले महेश उर्फ़ ज़ाकिर हुसैन से मिली। उस समय 32 साल के युवक ज़ाकिर ने अपना पेशा शार्ट फिल्मों के निर्माता का बताया था। ज़ाकिर ने उस समय 16 वर्ष आयु वाली लड़की के साथ सेक्स किया और उसे फिल्मों में काम करने का मौका दिलाने का वादा किया।

दो साल बाद, 3 दिन पहले (मंगलवार, 5 नवंबर, 2019 को) ज़ाकिर ने लड़की को एक वीडियो दिखाया जिसमें वे दोनों सेक्स करते हुए दिख रहे थे। उसने बताया कि उसने दो साल पहले यह वीडियो लड़की की जानकारी और सहमति के बिना रिकॉर्ड कर लिया था। अब जबकि वह लड़की 18 साल की हो चुकी है, तो वह उस पर वेश्यावृत्ति अपनाने (सेक्स वर्कर बनने) का दबाव डालने लगा। ज़ाकिर ने यह भी धमकी दी कि अगर उसने सेक्स वर्कर बनने से इंकार किया तो वह उस सेक्स वीडियो को सोशल मीडिया पर लीक कर देगा।

लड़की ने उसकी धमकी को दरकिनार कर पुलिस की सहायता ली। पुलिस ने उसकी शिकायत के आधार पर ज़ाकिर को गिरफ़्तार कर लिया था। “उससे (ज़ाकिर से) पूछताछ करने पर हमें पता चला कि वह कस्बे भर में फैले हुए 5 वेश्यालयों से जुड़ा हुआ है। वह अकसर इन वेश्यालयों को औरतों की सप्लाई करता था, 50 प्रतिशत कमीशन पर।” घटना की जाँच कर रहे डिप्टी सुपरिन्टेन्डेन्ट ऑफ़ पुलिस जे श्रीनिवास रेड्डी ने द न्यूज़ मिनट से बात करते हुए जानकारी दी।

इसके बाद कल (बृहस्पतिवार, 7 नवंबर, 2019 को) पुलिस ने औरतों की सेक्स वर्क (वेश्यावृत्ति) के लिए ट्रैफिकिंग करने वाले एक गिरोह के कई लोगों को छापा मारकर हिरासत में ले लिया। ज़ाकिर के अतिरिक्त पुलिस ने 8 अन्य ‘आयोजकों’ को भी हिरासत में लिया जो वेश्यालयों का प्रबंधन कर रहे थे। इसके अलावा पुलिस ने 5 ‘ग्राहकों’ को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस ने छापेमारी नेल्लोर के चिन्ना बाजार, नवाबपेट, दरगामित्ता, वाड्यापलेम और बालाजीनगर इलाकों में की है।

पुलिस ने बताया कि आयोजकों में से भी दो को ज़ाकिर द्वारा फिल्मों में काम दिलाने के झाँसे में आकर सेक्स करने और उसके बाद उन सेक्स वीडियो के ज़रिए ब्लैकमेल कर सेक्स के काम में उतारा गया है।

करतारपुर कॉरिडोर: पाक आर्मी चीफ बाजवा ने इमरान का दूसरा वादा भी तोड़ा, अब पहले दिन से वसूलेगा 20 डॉलर

करतारपुर कॉरिडोर को लेकर लगातार अपना रुख बदलने वाले पाकिस्तान ने एक बार फिर से पलटी मारी है। पाकिस्तानी सेना ने अपने प्रधानमंत्री इमरान खान का दूसरा वादा भी रद्द कर दिया है। पाकिस्तानी सेना ने साफ कर दिया कि कल यानी 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर आने वाले भारतीय श्रद्धालुओं से 20 डॉलर वसूला जाएगा।

बता दें कि इससे पहले इमरान खान ने ऐलान किया था कि करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन और गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर आने वाले श्रद्धालुओं से एंट्री फीस नहीं ली जाएगी, इसके बावजूद उन्हीं की सेना प्रमुख बाजवा ने पीएम की बात को खारिज कर दिया।

इससे पहले 7 नवंबर को पाकिस्तान ने पासपोर्ट जरूरी न होने की बात से भी पलटी खाई थी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर कहा था कि करतारपुर साहिब दर्शन के लिए आने वाले भारतीय श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत नहीं होगी, लेकिन पाकिस्तानी सेना की तरफ से अपने ही पीएम की बात को खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी सेना ने कहा, “हम सुरक्षा कारणों से पासपोर्ट में छूट नहीं दे सकते हैं।” पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा था, “हम अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के साथ समझौता नहीं कर सकते।”

इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने तीसरा ऐलान किया था कि करतारपुर साहिब दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन की जानकारी दस दिन पहले पाकिस्तान को देनी जरूरी नहीं होगी, लेकिन उन्हीं की सरकार के प्रवक्ता ने इमरान की बातों से विपरीत बयान दिया। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाह फैसल ने कहा कि 10 दिन पहले जानकारी देनी होगी। पाकिस्तान की नीयत से भारत अच्छी तरह से वाकिफ है। इसलिए उसने यहाँ से जाने वाले श्रद्धालुओं को पहले ही कह दिया था कि भारत सरकार भारतीय श्रद्धालुओं की लिस्ट पाकिस्तान को दस दिन पहले भेजा करेगी।

गुरूवार (नवंबर 7, 2019) को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान से बहुत ही विरोधाभासी खबरें आ रही हैं। कभी कहा जाता है कि पासपोर्ट चाहिए और कभी कहा जाता है कि नहीं चाहिए। उन्हें इस तरह का दिखावा करने की कोई जरूरत नहीं है कि वह इस कॉरिडोर के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। जहाँ तक भारत का सवाल है तो हम समझौते के मुताबिक चल रहे हैं। समझौते में साफ है कि पहचान पत्र के तौर पर पासपोर्ट अनिवार्य होगा।

1990 के बाद पहली बार VHP ने पत्थर तराशने का काम रोका, राम मंदिर फैसले के बाद दोबारा शुरू होगा काम

अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले से पहले विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने का काम बंद कर दिया है। विहिप ने 1990 के बाद से पहली बार पत्थरों को तराशने का काम बंद किया है। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि इस काम में लगे सभी कारीगर अपने घर वापस लौट गए हैं।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विहिप ने पत्थरों को तराशने में शामिल सभी कारीगरों को फिलहाल रुकने के लिए कहा है। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा है कि आगामी अयोध्या के फैसले को ध्यान में रखते हुए विहिप की विभिन्न गतिविधियों के सभी प्रस्तावित कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पत्थरों की नक्काशी को बंद करने का निर्णय राम जन्मभूमि न्यास द्वारा लिया गया है। बता दें कि यह एक हिंदू सांस्कृतिक संगठन है, जो राम जन्मभूमि स्थल पर भगवान राम को समर्पित एक भव्य मंदिर के निर्माण की माँग को लेकर आंदोलन में सबसे आगे रहा है।

शरद शर्मा ने कहा, “न्यास ने संगठन की विभिन्न गतिविधियों से जुड़े हमारे सभी प्रस्तावित कार्यक्रम को रोकने का फैसला किया। न्यास ने अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने का बाद फिर से काम शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा। अब राम जन्मभूमि न्यास तय करेगा कि तराशने का काम दोबारा कब शुरू किया जाएगा।”

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय 17 नवंबर से पहले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में फैसला सुना सकता है। इसी दिन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई सेवानिवृत हो रहे हैं, जिन्होंने इस मामले पर दलीलें सुनने वाली पाँच न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता की है।

बता दें कि विहिप ने राम मंदिर निर्माण कार्यशाला में 1990 में यहाँ राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थरों को तराशना शुरू किया था। उस समय समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। तब से कारीगर निर्बाध तरीके से यह काम कर रहे हैं। यह काम तब भी नहीं रूका था, जब 1992 में बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने के बाद विहिप और आरएसएस को 6 महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। यह तब भी अनवरत रूप से चल रहा था।

फैसले का समय नजदीक आने के साथ ही अयोध्या के कारसेवकपुरम में न्यास वर्कशॉप कथित तौर पर बड़ी संख्या में आगंतुकों को आकर्षित कर रही है। विहिप के अनुसार 1.25 लाख घन फुट पत्थर पहले ही तराशा जा चुका है। संगठन का दावा है कि इतना पत्थर प्रस्तावित मंदिर की पहली मंजिल के निर्माण के लिए पर्याप्त है और शेष ढाँचे के लिए 1.75 लाख घन फुट पत्थर अभी भी तराशा जाना है। 

राम जन्मभूमि न्यास के अनुसार पूरा मंदिर लाल पत्थर से बना होगा और इसमें कोई लोहे का काम नहीं होगा। विहिप ने विवादित मुद्दे पर फैसला आने से पहले अपने कार्यकर्ताओं से शांति बरतने और उन्मादी जश्न का माहौल बनाने से बचने की अपील की है। विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा, “फैसला हिंदू और दूसरे मजहब का मामला नहीं होना चाहिए। यह सच्चाई को स्वीकार करने के बारे में है। इसलिए समाज में जश्न का उन्माद पैदा न करें और किसी पर तंज न कसा जाए।”

Video: महिला IPS अधिकारी मोनिका भारद्वाज से वकीलों की भीड़ ने की थी बदसलूकी, जाँच के आदेश

तीस हज़ारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच शनिवार को हुए हंगामे के दौरान उत्तरी ज़िला पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज के साथ हुई बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले को शांत करने पहुँची महिला IPS अधिकारी को सैकड़ों वकीलों ने घेर लिया था। इसके बावजूद हिम्मत दिखाते हुए उन्होंने अंत समय तक भीड़ को समझाने-बुझाने की कोशिश की, लेकिन माहौल बिगड़ने लगा तो वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें किसी तरह से सुरक्षित बाहर निकाला।

2 नवंबर को तीस हज़ारी कोर्ट परिसर में जब यह घटना हुई तो उसका वीडियो भी वायरल हो गया। इसके अलावा, गुरुवार (7 नवंबर) को इस घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल हो गया है। क़रीब डेढ़ मिनट के इस वीडियो में यह पूरी घटना दिख रही है। इस वीडियो में हंगामे के बाद वहाँ मौजूद गाड़ियों में आग की लपटों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

दरअसल, इस वीडियो की शुरूआत में महिला अधिकारी अपने स्टाफ़ के साथ लॉकअप की तरफ भागती नज़र आ रही है। तभी लॉकअप के पास ज़ोरदार धमाका होता है और आग की लपटें व धुआँ दिखाई देता है। इसके बाद भीड़ इतनी उग्र हुई कि महिला अधिकारी अपने स्टाफ़ के साथ जान बचाते हुए कोर्ट से बाहर जाने के लिए भागती नज़र आ रही हैं। इसी दौरान उनके साथ बदसलूकी के आरोप वकीलों पर लग रहे हैं। 

ख़बर के अनुसार, महिला अधिकारी को बचाने के दौरान एक एसएचओ व कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। हालाँकि, हमलावर के बारे में अभी कुछ नहीं पता चल सका है, इसकी जाँच जारी है। इसके अलावा, दो पुलिसकर्मियों का ऑडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें एक बता रहा है कि उसने कैसे मैडम (महिला IPS अधिकारी) को बचाया और उसके साथ भीड़ ने मारपीट की। वहीं, एक महिला पुलिसकर्मी की पिस्टल घटना के बाद से ग़ायब है। 

इस घटना को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयर पर्सन रेखा शर्मा ने जाँच की माँग की है। इस वायरल हुए वीडियो के सन्दर्भ में दिल्ली पुलिस के एडिशनल पीआरओ अनिल मित्तल ने बताया कि 2 तारीख को तीस हज़ारी में हुई घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है और इसकी जाँच क्राइम ब्रांच की SIT कर रही है। हंगामें के दौरान जो भी महिला अधिकारी तैनात थीं, उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। महिला अधिकारियों के बयान के अनुसार ही इस मामले में IPC की धाराएँ जोड़ी जाएँगी।

70 वर्षों में पहली बार, त्रिपुरा के अंतिम राजा के जन्मदिन पर राजकीय अवकाश घोषित

देशी रियासत के भारतीय संघ में विलय के बाद 70 वर्षों में पहली बार, त्रिपुरा में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने राज्य के अंतिम राजा महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य के जन्मदिन 19 अगस्त को अगले साल से एक आधिकारिक राजकीय अवकाश के रूप में अधिसूचित किया है। शुक्रवार (8 नवंबर) को इसकी जानकारी अधिकारियों द्वारा दी गई।

त्रिपुरा सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के अंतिम राजा महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य के अपार योगदान के मद्देनज़र, राज्य सरकार ने अगले साल यानी 2020 से उनके जन्मदिन को (19 अगस्त को) आधिकारिक अवकाश के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।

अधिकारी ने कहा कि राजा बिक्रम (1908-1947), जिन्होंने 1923 से 17 मई, 1947 तक राज्य पर शासन किया था, उन्होंने 28 अप्रैल, 1947 को एक शाही फ़रमान जारी करके त्रिपुरा की तत्कालीन रियासत को भारतीय संघ में विलय करने का फ़ैसला किया था। बैरिस्टर गिरिजा शंकर गुहा को संविधान सभा में अपने डोमेन के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया था।

राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने पिछले साल राजा बिक्रम के नाम पर अगरतला हवाई अड्डे का नाम बदल दिया। उन्होंने 1942 में हवाई अड्डे का निर्माण करवाया था और उस हवाई पट्टी ने द्वितीय विश्व युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अगरतला हवाई अड्डा, जिसे पहले सिंगरबिल हवाई अड्डे के रूप में जाना जाता था, राजधानी से 20 किलोमीटर उत्तर में स्थित है और बांग्लादेश सीमा के साथ सटा हुआ है।

इससे पहले, अंतिम राजा के नाम पर 1947 में एक कॉलेज की स्थापना की गई थी, जबकि पिछली वाम मोर्चा सरकार ने महाराजा के नाम पर अगरतला में एक विश्वविद्यालय और एक क्रिकेट स्टेडियम की स्थापना की थी। जानकारी के लिए बता दें कि 184 राजाओं द्वारा कई सौ वर्षों के शासन के बाद, अक्टूबर 1949 में त्रिपुरा का भारतीय संघ में विलय हुआ था।

फडणवीस ने सौंपा इस्तीफा, कहा- मुझे दुख है कि शिवसेना के पास कॉन्ग्रेस और NCP से बात करने का समय

महाराष्ट्र के पिछले विधानसभा कार्यकाल का समय समाप्त होने के साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री रहे देवेंन्द्र फडणवीस ने आज (नवंबर 8, 2019) राजभवन में जाकर राज्यपाल भगत सिंह कोशयारी से मिलकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने अपना इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात की और जानकारी दी कि वे अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप चुके हैं। आगे पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “5 साल महाराष्ट्र की सेवा करने का मौका मिला इसके लिए नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा का आभारी हूँ।”

फडणवीस ने इस दौरान पिछले कार्यकाल में भाजपा की सहयोगी पार्टी रही शिवसेना का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “आपको महसूस हुआ या नहीं, मैं नहीं जानता लेकिन, मैं हमारे मित्र शिवसेना का भी आभारी हूँ।”

इसके अलावा शिवसेना द्वारा 50-50 वाले कॉन्सेप्ट पर भी फडणवीस ने साफ मना किया। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने ऐसा फैसला किया है जिसके बारे में उन्होंने पहले कभी बात ही नहीं की। इसके लिए मैंने उद्धव ठाकरे को फोन किया था, लेकिन वो मेरी कॉल नहीं उठा रहे। मुझे दुख हैं कि हमसे बात करने की जगह उनके पास कॉन्ग्रेस और एनसीपी से बात करने का समय है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, मुमकिन हैं कि शिवसेना ऐसे समय में कॉन्ग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने का फैसला लें।

शिवसेना पर इस दौरान निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि शिवसेना ने उनसे बातचीत करने के बजाए मीडिया का सहारा लिया, मीडिया पर बयान देने से सरकार नहीं बनती।

उन्होंने परिणाम आने के बाद आए उद्धव ठाकरे के बयान को भी दुर्भाग्यपूर्ण कहा। उन्होंने लिखा कि उनके पास सरकार बनाने के लिए बहुत विकल्प खुले हैं। ये हमारे लिए हैरान करने वाला था क्योंकि लोगों ने अपना मत गठबंधन को दिया था। इसलिए ये बड़ा सवाल है कि उन्होंने क्यों कहा कि उनके लिए सरकार बनाने के लिए बहुत विकल्प हैं।