उत्तराखंड के रुड़की में पटाखे जलाने पर हिन्दुओं पर पत्थरबाजी की गई। जब दीपावली के दिन हिन्दू पटाखे फोड़ रहे थे, तभी अचानक से लगभग 60 की संख्या में मुस्लिम भीड़ पहुँची और उन्होंने हिन्दुओं पर हमला कर दिया। लिब्बरहेड़ी गाँव में हुई इस घटना में पहले तो कहासुनी हुई लेकिन बाद में मुस्लिम पत्थरबाजी पर उतर आए, जिसके बाद कई लोग घायल हो गए। इस मामले में मेहरुद्दीन, सोहेल और शाहनवाज सहित 60 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।
इस घटना से पहले अनुज नामक युवक अपने चाचा के यहाँ दूध देकर वापस लौट रहा था। तभी शमीम की दुकान पर खड़े मुस्लिमों ने उस पर हमला कर दिया। अनुज बाइक पर था। उसे जान से मारने की कोशिश की गई। इसके बाद किसी तरह से जान बचा कर निकले अनुज ने इसकी सूचना अपने घर पर दी। इसके बाद दूसरे पक्ष के लोग भी आ गए।
कहा जा रहा है कि इस घटना की शुरुआत पटाखे फोड़ने के विरोध से हुई। मुस्लिमों की उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठियाँ भी चलानी पड़ी। जब मुस्लिमों ने पत्थरबाजी की तो कई लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया। पुलिस के आने के बाद भी पत्थरबाजी चालू रही।
रात में भी गाँव में पुलिस तैनात कर दी गई और दोनों समुदायों के प्रबुद्ध जनों से बातचीत कर पुलिस ने शांति बरतने की अपील की। पत्थरबाजी के दौरान घटनास्थल पर लोग अपने-अपने छतों पर जा चढ़े, जहाँ से उन्होंने वीडियो बनाए। सोशल मीडिया पर भी इस घटना के कई वीडियो सर्कुलेट हो रहे हैं। पुलिस के पास भी ये वीडियो पहुँचे हैं, जिस आधार बना कर गिरफ्तारियाँ की जा रही हैं। इस घटना के बाद कई मुस्लिम आरोपित अपने घरों से फरार हो गए, जिनमें से 3 को अगले दिन दोपहर में गिरफ़्तार किया जा सका। फरार चल रहे सुहैल को गिरफ़्तार करने के लिए पुलिस लगी हुई है।
वहीं इस मामले में जहाँ हिन्दू पक्ष ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है, मुस्लिम पक्ष की तरफ से पुलिस को कोई तहरीर नहीं मिली है। पुलिस ने वीडियो के आधार पर अन्य आरोपितों की पहचान की है। गाँव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पीएसी अभी भी तैनात है।
पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सऊदी अरब की यात्रा के लिए विमान को अपने हवाई क्षेत्र उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है। इस बार भारत ने अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के समक्ष यह मुद्दा उठाया है। संयुक्त राष्ट्र की जनरल एसेंबली में जाने के लिए भी पाकिस्तान ने पीएम नरेंद्र मोदी के विमान को हवाई क्षेत्र देने से मना कर दिया था।
दरअसल, ICAO के तय दिशा-निर्देशों के अनुसार अन्य देशों द्वारा ओवरफ्लाइट की मँजूरी माँगी जाती है और दी जाती है। भारत ने ICAO के समक्ष यह मामला उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय नियमों पर न चलने के अपने फ़ैसले पर विचार करना चाहिए। साथ ही साथ एकतरफा कार्रवाई करने के कारणों को ग़लत तरीके से पेश करने की पुरानी आदत पर भी विचार करना चाहिए।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि हमें पाकिस्तान सरकार की ओर से वीवीआईपी विशेष उड़ान के लिए ओवरफ्लाइट क्लीयरेंस से इनकार करने के फ़ैसले पर अफ़सोस है। यह तो किसी भी सामान्य देश द्वारा नियमित रूप से प्रदान किया जाता है। प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (29 अक्टूबर) को सऊदी अरब जाएँगे, जहाँ वो अंतरराष्ट्रीय व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे और खाड़ी देश के नेतृत्व से बातचीत करेंगे।
ख़बर के अनुसार, पाकिस्तानी रेडियो ने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के हवाले से कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के विमान को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कुरैशी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार के कथित उल्लंघन के मद्देनज़र यह फैसला लिया गया है।
जम्मू और कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन की उसी पुरानी बयानबाज़ी का हवाला देते हुए, पाकिस्तान ने रविवार (27 अक्टूबर) को पीएम मोदी के विमान को सऊदी अरब की यात्रा के लिए अपने हवाई क्षेत्र देने के भारत को इनकार कर दिया।
इससे पहले, पाकिस्तान ने सितंबर में पीएम मोदी की अमेरिका की उड़ान के लिए अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति से इनकार कर दिया था। तब भी, भारत ने पाकिस्तान से एकतरफ़ा कार्रवाई करने के कारणों को ग़लत बताने की अपनी पुरानी आदत पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था, लेकिन वो व्यर्थ था। कमज़ोर दिमाग वाले देश ने तब भी टस से मस होने से मना कर दिया था।
इसी तरह, पाकिस्तानी अधिकारियों ने 7 सितंबर को भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपनी निर्धारित विदेश यात्रा के लिए हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
केरल की एक विशेष अदालत द्वारा दो साल पहले पलक्कड़ में दो नाबालिग लड़कियों से कथित बलात्कार और आत्महत्या के मामले में तीन आरोपितों को बरी कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित लड़कियों की माँ ने पुलिस और प्रदेश की वामपंथी सरकार पर आरोपितों को सुरक्षा देने का आरोप लगाया।
बता दें कि आरोपित वी मधु, शिबू और एम मधु ने कथित तौर पर पलक्कड़ में एक 9 वर्षीय और एक 13 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार किया था। 13 वर्षीय लड़की ने साल 2017 में आत्महत्या कर ली थी, जबकि इसके लगभग दो महीने बाद 9 वर्षीय लड़की मृत पाई गई थी। पोस्टमॉर्टम में स्पष्ट हुआ था कि दोनों लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया गया था।
Kerala: Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Court acquitted 3 accused in alleged suicide case of 2 minors in Palakkad,citing lack of evidence. In Jan 2017,a 13-year-old was found hanging in her house&2 months later her 9-year-old sister allegedly committed suicide
पुलिस ने तब मामले में तीनों आरोपितों को गिरफ्तार किया और उन पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कई आरोप लगाए थे। चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के अलावा दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप भी लगाए गए थे। मगर शनिवार (अक्टूबर 26, 2019) को पॉक्सो कोर्ट ने सबूत के अभाव में इन आरोपितों को बरी कर दिया।
जिसके बाद पीड़िता की माँ ने रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को कहा कि पुलिस ने मामले की जाँच ठीक से नहीं की और आरोपितों को वामपंथी सरकार (LDF) का समर्थन प्राप्त है, क्योंकि वे स्थानीय स्तर पर वामपंथी दलों के लिए काम करते थे। और इसी वजह से वो छूट गए। उन्होंने कहा, “मेरी बेटियों को न्याय नहीं मिला। जिन लोगों ने उनकी हत्या की, वह खुले में घूम रहे हैं। मैंने अदालत को विस्तार से बताया था कि मेरी बेटियों के साथ क्या हुआ था।”
पीड़िता की माँ ने कहा कि उन्होंने आरोपित मधु को उनकी बड़ी बेटी के साथ दुर्व्यवहार करते देखा था। उन्होंने उसे चेतावनी भी दी थी कि वो उसके घर के आसपास नजर नहीं आना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जिस दिन उनकी लड़की मृत पाई गई थी, उस दिन उसकी बहन ने दो लोगों को घर से बाहर भागते हुए देखा था।
उनका कहना है कि उनके चेहरे कपड़े से ढके हुए थे, इसलिए उसे पहचान नहीं पाए। उन्होंने कहा, “हम इस मामले में नए सिरे से जाँच की माँग करते हैं। अपराधियों को दंडित किया जाना चाहिए।”
ये किसी से छुपा नहीं है कि रवीश कुमार पिछले पाँच सालों में स्वयं को पत्रकारिता का एकमात्र सत्यापनकर्ता मान चुके हैं। ‘धंधे’ को लेकर आलोचना करना एक बात है, लेकिन आलोचना के चक्कर में ये बताने लगना कि धंधा अगर कोई कर रहा है, तो वो स्वयं ही कर रहे हैं, बाकी तो बस ऐसे ही हैं, बताता है कि आपके दिमाग में टार भर चुका है और आप बीमार, बहुत बीमार हो चुके हैं।
आज सुबह ही मेरे बगल के गाँव रजौड़ा से आए एक मित्र ने मुझे रवीश कुमार और बिहार के एक कद्दावर जद(यू) नेता के बीच हुई बातचीत का आँखों देखा हाल सुनाया। लोकसभा चुनावों के दौरान रवीश जी उनके दरवाजे पर भी पहुँचे, नेताजी का राजनैतिक अनुभव दशकों का है, तो बातचीत हुई। अंत में नेता जी ने पूछा कि रवीश जी क्या चुनाव कवर करने आए हैं? तो रवीश जी ने हँसते हुए कहा कि वो तो ‘चुनाव प्रचार’ में आए हैं। नेता जी ने एक लाइन आगे कही, और संवाद उत्तर की कमी के कारण खत्म हो गया, “अगर देश के पत्रकार और बुद्धिजीवी भी चुनाव प्रचार करने लगें तो देश का क्या होगा?”
रवीश कुमार के पास उत्तर नहीं था क्योंकि कैमरे के सामने हर दिन पत्रकारिता की अग्नि में ‘जल रही है चंद्रकांता’ टाइप का भाव लिए रवीश कुमार देश के आदर्श पत्रकार बने फिरते हैं, लेकिन उनके लेखों से एक अलग स्तर का नैतिक पतन दिखता है। आज उन्होंने हिन्दुस्तान के एक पत्रकार की अयोध्या दीपोत्सव की रिपोर्टिंग का उपहास करते हुए, व्यंग्यात्मक लहजे में उसे एक बेकार पत्रकार कहा है।
रवीश के पास मोदी की दूसरी पारी शुरू होने और भाजपा को लगातार मजबूत होते देखने के इस दौर में अब कोने पर बैठे उस बुजुर्ग की तरह व्यवहार करने के अलावा कोई काम नहीं बचा, जो हर आते-जाते व्यक्ति पर दो लाइन बोल कर गरिया देता है कि उसका बाप भी ऐसा ही था, लेकिन उसका कोई मतलब नहीं होता। ऐसे ही गालीबाज बुजुर्गों की धोती में उद्दंड बालक दीवाली में पटाखे बाँध कर भाग जाते हैं और वो बचने के चक्कर में धोती उतार कर बगल की नाली में कूद जाता है।
रवीश कुमार अपनी ही पोस्ट के कमेंट में ऐसे ही अपने धोती में हर दिन पटाखे पा रहे हैं, और नंगे हो कर नाली में भी कूद रहे हैं, लेकिन सुधरना नहीं है। अब नाम ले कर बताने में लगे हुए हैं कि पत्रकारिता कैसे होनी चाहिए, और ये कि किसकी पत्रकारिता को पुलित्जर मिलना चाहिए। रवीश कुमार को इन्हीं मौकों पर अपना ही चलाया हैशटैग याद करना चाहिए और सोचना चाहिए कि ‘रवीश जी आपसे उम्मीद है’ कहने वालों की उम्मीद पर उन्होंने कैसे पानी फेरा है।
यह रिपोर्ट तीन पैराग्राफ की है जिसमें बताया गया है कि अयोध्या के दीपोत्सव में कैसे राम, सीता और लक्ष्मण के रूपों को हेलिकॉप्टर से उतारा गया और वहाँ कौन-कौन थे। साथ ही, रिपोर्टर ने लिखा है कि यह दृश्य ऐसा था जिसे महसूस किया जा सकता है, बयाँ करना मुश्किल है। इसी लाइन से रवीश जी की सबसे ज़्यादा सुलग गई। ‘सुलग गई’ का प्रयोग बस इस कारण कर रहा हूँ क्योंकि अयोध्या में लाखों दीपक जल रहे थे और उसके ताप को रवीश ने ऐसा महसूस किया कि इस अपमानजनक तरीके से बयाँ करने से रह नहीं पाए!
‘हिंदी का पत्रकार मजबूरी में नौकरी करता है’ – अरबी के विद्वान रवीश कुमार का यही मानना है
रिपोर्टर ने एक सपाट-से रिपोर्ट को अपनी भाषाई क्षमता से रुचिकर बनाने की कोशिश की है। पत्रकारिता में यह भी पढ़ाया जाता है कि शब्दों को कैसे पिरोएँ, कैसे उन्हें पर्याय और उपमानों की मदद से पठनीय बनाएँ। जब कोई इस तरह का भव्य आयोजन होता है तो आलंकारिक भाषा का प्रयोग आम है। ये ठीक वैसे ही है जैसे कि रवीश कुमार जब टीवी पर गोरखपुर आपदा पर आपसे कहते हैं कि उस माँ के दर्द को महसूस कीजिए जिसके हाथ में उसका मरा हुआ बच्चा है, तो आप एक लेख लिख कर रवीश का मजाक नहीं उड़ाते कि महसूस कैसे करें।
आप यह तब भी नहीं लिखते जबकि आपको पता है रवीश जैसे मीडिया गिरोह के गिरहकट पत्रकारों की संवेदना उस माँ के साथ नहीं, वो उस पार्टी और व्यक्ति के खिलाफ अपना अजेंडा चला रहा है जिसे वो सत्ता में आने से, स्टूडियो से हर रात रैली करने के बाद भी, रोक नहीं पाया। इसलिए रवीश मुख्यमंत्री के वहाँ होने को ‘मुख्यमंत्री के स्तर’ का आदमी लिख देता है। इससे मुख्यमंत्री या उस रिपोर्टर के स्तर से ज्यादा रवीश के स्तर का पता चलता है।
रवीश प्रोपेगेंडा गिरोह का सबसे बड़ा चेहरा है। इसलिए वो प्राइम टाइम से परे अब नींद में अपनी घृणा प्रसारित करता रहता है। रवीश आज भी 33 कोटि का मतलब मूर्खों की तरह 33 करोड़ ही मानता है, प्रकार नहीं। रवीश आज भी यही मानता है कि सरकारों के पास धर्म और संस्कृति के लिए अलग बजट नहीं होता इसलिए वो ऐसे लिखता है जैसे कि भारत की सारी गरीबी दीये के तेल से ही मिट जाएगी।
इसी बीच रवीश कुमार जो भूल जाता है वो यह बात है कि पाँच करोड़ दीयों और उसमें डाली गई घी न तो खुदाई से निकलते हैं, न ही बारिश में बरसती है। वो दीये किसी गरीब कुम्हार ने बनाए होंगे और वो घी किसी किसान के गाय के दूध से बनी होगी। लेकिन जब आग स्थान विशेष में लगी हो तो सामान्य ज्ञान और बुद्धि अक्सर चितरा नछत्तर के झाँट (फुहारों) में गायब हो जाती है।
रवीश को उन तस्वीरों से दिक्कत नहीं होती जहाँ हिन्दू नेता रेगुलर ‘नमाजी’ से ज्यादा ‘नमाजी’ बनने की कोशिश में बस नकली दाढ़ी ही नहीं लगाते, बाकी टोपी से ले कर कंधों पर विशेष तरह की गमछी और दुआ में बुदबुदाते होंठ तक इफ्तार पार्टियों में दिख जाते थे, और हैं। उसका बजट रवीश चाहें तो आरटीआई के माध्यम से पता कर सकते हैं।
कुल मिला कर रवीश कुमार के लिए भारत में बस एक खाद्य मंत्रालय ही होना चाहिए जो कि लोगों को भोजन बाँटता रहे। जब तक कोई भी भूखा है, तब तक न तो इसरो का रॉकेट छोड़ा जाए, न ही किसी को कार खरीदने की अनुमति होनी चाहिए। क्यों? क्योंकि देश में इतने लोग गरीब हैं और आप हैं कि कार से चल रहे हैं। रवीश का कटाक्ष इतनी ही सड़ाँध फैलाती लॉजिक पर आधारित है।
रवीश ने अपने ही व्यवसाय के एक रिपोर्टर का उपहास किया है क्योंकि वो ऐसा कर सकता है। वो ऐसा इसलिए कर सकता है क्योंकि उसे लगता है कि पत्रकारिता के अंतिम बचे घराने का अंतिम तबलची बस वही है और बाकी लोग तो फ़्यूज़न बजा कर संगीत का नाश कर रहे हैं। रवीश का यह लेख उसके द्वारा अपनी घटिया मनोवृत्ति के प्रदर्शन से उस गड्ढे में एक और सीढ़ी बनाने जैसा है, जहाँ से रवीश जब ऊपर देखेगा तो वहाँ अंधेरा दिखेगा क्योंकि खोदते-खोदते रवीश बहुत नीचे जा चुका होगा, जहाँ से उसके सुधार के उम्मीद की किरण प्रकाश के तरंग प्रकृति के सिद्धांत के बावजूद नहीं दिखेगी।
रवीश ने मजाक उड़ाते हुए लिखा है कि किस-किस कॉलेज के पाठ्यक्रम में इस रिपोर्ट को शामिल करना चाहिए। ये स्वयं को सर्वज्ञ मानने जैसा है। रवीश को लगता है कि स्कूल-कॉलेजों में उसका प्राइम टाइम चलाया जाए, और उसके फेसबुक पोस्ट पर ग्रुप डिस्कशन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ। ऐसा संभव नहीं दिखता क्योंकि रवीश कुमार बहुत कुछ हैं, लेकिन अब पत्रकारिता उनसे उतर नहीं रही।
इसके लिए अब रवीश खैनी खाएँ या बैठ कर कुथते रहें, ये कब्जियत नहीं मिटेगी। रवीश जी के दिमाग में कब्ज हो गया है। उनको कमोड में माथा घुसा कर हर रोज तीन बार फ्लश करना चाहिए। इससे होगा कुछ नहीं लेकिन ऐसा सोचने में बहुत आनंद मिलता है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों ने आतंक मचाया। ये छात्र बड़ी संख्या आए थे, जिस कारण न सिर्फ़ डीन की तबियत ख़राब हो गई, बल्कि जब उन्हें हॉस्पिटल ले जाया जाने लगा, तो इन उत्पाती छात्रों ने उनके एंबुलेंस का रास्ता भी रोका। ख़ुद जेएनयू के वाईस चांसलर जगदीश कुमार ने 5 वीडियो ट्वीट कर इस पूरे मामले को सार्वजनिक किया।
इन पाँच वीडियो में आप देख सकते हैं कि जेएनयू के छात्रों के इस दुर्व्यवहार के कारण डीन की जान भी जा सकती थी और जिस तरह से उन्हें एम्बुलेंस में हॉस्पिटल जाने से रोका गया, उससे कुछ भी हो सकता था। आइए, जानते हैं कि छात्रों ने कैसे डीन के साथ दुर्व्यवहार किया।
The committee members requested the agitating students to go out and let the meeting continue. However, due to their unruly behaviour and sloganeering, the Dean of Students Prof. Umesh Kadam fell sick with high blood pressure. pic.twitter.com/UNXxT84TBc
जेएनयू के कन्वेशन सेंटर में सोमवार (अक्टूबर 28, 2019) को इंटर हॉस्टल एडमिनिस्ट्रेशन (IHS) की बैठक प्रस्तावित थी। इसमें कई ऐसे छात्र भी पहुँच गए, जो आईएचए के सदस्य नहीं हैं और उन्होंने वहाँ हंगामा शुरू कर दिया। बैठक में सिर्फ़ आईएचए के सदस्यों को ही सम्मिलित होना था। इसके बाद कमिटी के सदस्यों ने उन हंगामेबाज छात्रों से आग्रह किया कि वो बाहर चले जाएँ और बैठक को शांतिपूर्वक चलने दें। इसके बाद बदमाश छात्रों ने तेज़ आवाज़ में नारेबाजी की। उनके द्वारा किए जा रहे दुर्व्यवहार के कारण वहाँ उपस्थित प्रोफेसर उमेश कदम की तबियत अचानक से बिगड़ गई।
प्रोफ़ेसर क़दम जेएनयू के ‘डीन ऑफ स्टूडेंट्स’ हैं। छात्रों ने ऐसा हंगामा किया कि उनका ब्लड-प्रेशर अचानक से बहुत ज्यादा हो गया और उनकी तबियत ख़राब हो गई। प्रोफेसर कदम को जेएनयू के हेल्थ सेंटर में लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उनका इलाज करना प्रारम्भ किया। हालाँकि, छात्र वहाँ भी पहुँच गए और उन्होंने बीमार प्रोफसर को बंधक बना लिया। उनकी रीढ़ में चोटें आईं और उन्हें दूसरे हॉस्पिटल में जाना था। हालाँकि, छात्रों के प्रदर्शन के कारण उन्हें ले जाना काफ़ी मुश्किल था।
The Dean, his wife and their small kid are inside the health center of JNU. Dean of students needs to be shifted to a hospital outside JNU. However, they are not letting him to be taken to an outside hospital for further check up. pic.twitter.com/FWbz6adi3K
जेएनयू के वीसी ने छात्रों की इस हरकत को निंदनीय और अशोभनीय बताया। उन्होंने बताया कि प्रोफ़ेसर कदम की पत्नी और छोटे बच्चे भी उस समय हेल्थ सेंटर में ही मौजूद थे, जब छात्र उन्हें इलाज के लिए बाहर नहीं ले जाने दे रहे थे। उनकी तबियत बिगड़ती ही जा रही थी और पत्नी लगातार तनाव में थीं। छात्र बाहर खड़े होकर किसी भी हालत में बीमार डीन को बाहर के हॉस्पिटल में जाने देने को तैयार नहीं थे।
Students blocking the Ambulance in which Dean of Students Prof. Umesh Kadam was being taken to the Health Centre in JNU. pic.twitter.com/4zz9apNEQ5
वाईस चांसलर जगदीश कुमार ने वो वीडियो भी ट्वीट किया, जिसमें छात्र डीन प्रोफेसर उमेश कदम के एम्बुलेंस को रास्ता देने से इनकार कर रहे हैं और उन्हें हेल्थ सेंटर नहीं पहुँचने दे रहे हैं। जेएनयू में स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है और वीसी लगातार ट्वीट कर मामले का अपडेट दे रहे हैं लेकिन अभी तक के हालात देख कर लग रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उद्दंड छात्रों के आगे लाचार ही नज़र आ रहा है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर एक व्यक्ति ने जम कर कोड़े बरसाए। उनके हाथ पर जोर-जोर से कोड़ों की मार पड़ी। और हाँ, ये सब मुख्यमंत्री की मर्जी से हुआ। दरअसल, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता बघेल गौरी-पूजा के एक पारम्परिक कार्यक्रम में पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने इस स्थानीय रीति-रिवाज का अनुसरण किया। जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस नेता लगातार राफेल पर ॐ लिखने और राम मंदिर पर भाजपा नेताओं के स्टैंड का विरोध करते हैं, दूसरी तरफ उसी पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा ऐसा करना चर्चा का विषय है। आप भी नीचे इस वीडियो में देख सकते हैं:
भूपेश बघेल ने अपने कुर्ते की बाँह मोड़ कर हाथ को नंगा किया, जिससे कोड़े सीधे उनके शरीर पर पड़ सकें। उसके बाद कोड़े मारने वाले आदमी ने दनादन कोड़े बरसाए। प्रक्रिया के ख़त्म होने के बाद उस व्यक्ति से सीएम को हाथ जोड़ कर उनसे माफ़ी भी माँगी। मान्यता है कि ऐसा करने से आफत दूर होती है, परेशानियों से राहत मिलती है और भविष्य अच्छा होता है। इसे ‘सोटा परंपरा’ कहते हैं, जिसमें बैगा जाति के व्यक्ति से ख़ुद को सोटे मरवाए जाते हैं।
ये कार्यक्रम दुर्ग जिले में गोवर्धन-पूजा के अवसर पर आयोजित किया गया था। यहाँ वर्षों से इस तरह की पूजा होती आ रही है। यह भी मान्यता है कि चाबुक का वार खाने वाले व्यक्ति के ऊपर देवता चढ़ते हैं। हालाँकि, इसे कई लोगों द्वारा अन्धविश्वास की संज्ञा भी दी जाती है लेकिन वहाँ के लोगों का मानना है कि इससे परिवार में खुशियाँ आती हैं। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को गोवर्धन-पूजा और ‘गौरी तिहार’ की बधाई भी दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि धर्म और परम्पराएँ हमें आगे बढ़ने में मदद करती हैं।
इस अवसर पर रायपुर के सीएम हाउस में भी कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जहाँ मुख्यमंत्री पारम्परिक पोषक में दिखे। वहाँ उन्होंने परिवार के साथ गायों को पूजा की। बघेल ने इस दौरान गायों को खिचड़ी खिला कर पूजा की परंपरा का पालन किया। सीएम हाउस में पूरे राज्य से पहुँचे लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
वाशिंगटन पोस्ट ने आईएसआईएस के सरगना बगदादी के मारे जाने के बाद उसे कुछ इस तरह से पेश किया, जैसे वो बहुत बड़ा इस्लामिक विद्वान हो और उसने मानव-सेवा के लिए अभूतपूर्व कार्य किया हो। वाशिंगटन पोस्ट के इस कृत्य से जम्मू कश्मीर का आतंकियों को लड़ाकू बताने वाले एनडीटीवी भी दुःखी हुआ। हजारों क़त्ल का गुनहगार बगदादी के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि वो कायर कुत्ते की मौत मारा गया।
The headline of this “obituary” also marks the death of reason. What are they trying to prove? Being fair to the ISIS chief by highlighting his accomplishments? Appeasement is as dangerous as antagonism & prejudice. #WaPoDeathNoticespic.twitter.com/MNC3nYHtEM
ट्रम्प के इस बयान को सोशल मीडिया पर ख़ूब शेयर किया गया। वाशिंगटन पोस्ट के इस ‘कारनामे’ को लेकर हमने उनके संपादक से बात की, यह जानने के लिए कि आतंकियों के हिमायती बनने के चक्कर में वह बॉलीवुड या हॉलीवुड के गुंडों और बलात्कारियों के मरने पर क्या हेडलाइंस देगा? बातचीत लंबी रही, दिलचस्प रही और हाँ… उन्होंने मेरे सभी सवालों के जवाब भी दिए। उनके जबाव उन्हीं के शब्दों में नीचे है, पढ़ा जाए।
बाहुबली के कालकेय के मारे जाने पर
बाहुबली के गुंडे कालकेय के मारे जाने पर वाशिंगटन पोस्ट लिख सकता है कि एक लोकप्रिय रैपर मारा गया, जो विश्व की विलुप्त होती भाषाओं का जानकर था और साथ ही अफ्रीकन लोगों के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहा था। कालकेय के बारे में वाशिंगटन पोस्ट लिखेगा कि उसे उसके काले होने के कारण रेसिस्ट लोगों ने मार डाला।
कालकेय की भाषा, उसके बाल और उसके ‘रैप’ का मुरीद होता वाशिंगटन पोस्ट
हालाँकि, कालकेय के लिए वाशिंगटन पोस्ट ‘एक महान तांत्रिक’ का दर्जा भी दे सकता है। कालकेय को उसके ‘स्टाइलिश और यूनिक बालों’ के लिए वशिंगटन पोस्ट ने उसे सम्मानित भी कर सकता है।
मोगैम्बो के लिए वाशिंगटन पोस्ट की हैडलाइन
‘मोगैम्बो ख़ुश हुआ’ डायलाग के लिए लोकप्रिय विलेन मोगैम्बो अगर असलियत में होता तो वाशिंगटन पोस्ट उसे महान केमिकल इंजीनियर साबित करने में देर नहीं लगती। फिर उसका हैडलाइन कुछ इस तरह बनता- ‘अपने स्टाइलिश ड्रेस के लिए लोकप्रिय केमिकल इंजीनियर की मौत’।
महान वैज्ञानिक और व्यापारी मोगैम्बो
वाशिंगटन पोस्ट आगे लिखता कि नृत्य और गायिकी को बढ़ावा देने वाले कलाप्रेमी मोगाम्बो 75 वर्ष की उम्र में मारा गया। या फिर यूँ- ‘टेक्नोलॉजी का जानकर वैज्ञानिक मोगैम्बो अपने व्यापारिक हितों को पूरा करने में शहीद हुआ।’
ममगरमच्छ प्रेमी शाकाल
‘अजीब जानवर है, जितना भी खाता है- भूखा ही रहता है’- शान फ़िल्म का विलेन शाकाल अगर वास्तविकता में होता और मारा जाता तो वाशिंगटन पोस्ट उसे द्वीपसमूहों का रक्षक, मगरमच्छ पालन का परमपिता और टेक्नोलॉजी प्रेमी बताने में देरी नहीं करता। वाशिंगटन पोस्ट इस बात का भी जिक्र ज़रूर करता कि कैसे उसके दफ्तर और घर की डेकोरेशन गौरी ख़ान के इंटीरियर डिज़ाइन को धता बताती है।
पशुप्रेमी शाकाल
वाशिंगटन पोस्ट ये ज़रूर लिखता कि शाकाल को कुछ लोगों ने सिर्फ़ इसीलिए मार डाला क्योंकि वो उसके चमचमाते टकले से जलते थे। इसकी हैडलाइन कुछ यूँ बनती- ‘महान पर्यावरणविद, जानवरों का प्रेमी शाकाल और मगरमच्छों की भूख का ख्याल रखने वाला शाकाल मारा गया।’
गब्बर सिंह: शूटिंग चैंपियन और मेडलिस्ट
शोले के गब्बर के बिना गुंडों की कोई भी सूची अधूरी ही रहेगी। उसके मारे जाने पर वाशिंगटन पोस्ट की हैडलाइन में कहा जाता कि शूटिंग चैंपियन और नृत्य प्रेमी गब्बर के मारे जाने से होली का त्यौहार फीका पड़ गया। अहा! उसे माँस और बेली डांस से कितना प्रेम था! बच्चों को अच्छी नींद देने में वह कई माताओं की मदद कर चुका है। वाशिंगटन पोस्ट लिखता- ’48 वर्षीय गब्बर कई चोटों के कारण मारा गया।’
बच्चों को सुलाने में माँओं की मदद करने वाला गब्बर सिंह
वाशिंगटन पोस्ट लिखता- ‘सामंतवादी ठाकुर के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाला, ठाकुर के हाथ का प्रेमी और फोक डांस को बढ़ावा देने वाला गब्बर नहीं रहा। एक महान मार्क्सवादी और पहाड़ों के सामाजिक कार्यकर्ता को एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने मार डाला।’
आवाज़ का जादूगर डॉक्टर डैंग
वाशिंगटन पोस्ट की नज़र में डॉक्टर डैंग एक आवाज़ का वैज्ञानिक होता, जो गूँज की गूँज पर एक्सपेरिमेंट करने के चक्कर में मारा गया। वाशिंगटन पोस्ट कुछ यूँ लिखता- ‘दवाओं का महान जानकार और अंतरराष्ट्रीय डॉक्टर डैंग को तीन मशहूर अपराधियों ने मार डाला।’
‘गूँज की गूँज’ एक्सपेरिमेंट करने वाला डॉक्टर डैंग
वाशिंगटन पोस्ट को डॉक्टर डैंग में रासायनिक पदार्थों का एक ऐसा विशेषज्ञ दिखता, जो दुनिया को बदलने के लिए लगातार एक्सपेरिमेंट्स कर रहा है। एक पूर्व सैन्य अधिकारी, जिसकी याद्दाश्त इतनी तेज थी कि वो कुछ भी भूलता नहीं था।
बुल्ला, जो हमेशा रखता था खुल्ला
बुल्ला का नाम तो सबने सुना होगा। ‘गुंडा’ के इस गुंडा की अगर वास्तविक जीवन में मृत्यु होती तो वाशिंगटन पोस्ट लोगों को बताता कि महान कवि और कविताओं, छंदों एवं चौपाइयों का जानकार बुल्ला मारा गया। या फिर यूँ- ‘मर्द बनाने की दावा रखने वाला विटामिन-विशेषज्ञ बुल्ला 50 वर्ष की उम्र में मारा गया।”
बुल्ला, एक कवि ह्रदय आदमी, छंदों का जानकार
बुल्ला, जो अपने आसपास भी चुटिया, इबू हथेला और लम्बू आटा जैसे कवि हृदय लोगों को अपने साथ रखता था- उससे वाशिंगटन पोस्ट ज़रूर द्रवित हो गया होता।
थानोस , जनसंख्या नियंत्रण स्पेशलिस्ट
जनसंख्या नियंत्रण स्पेशलस्ट, दुनिया की चिंता करने वाला और एक इमोशनल पिता को कैसे एक करोड़पति ने मार डाला, इससे वाशिंगटन पोस्ट न सिर्फ़ दुःखी हुआ होता बल्कि वह लोगों को इससे ज़रूर अवगत कराता।
जनसंख्या नियंत्रण विशेषज्ञ थानोस
वाशिंगटन पोस्ट लिखता, ‘वैश्विक संतुलन बनाने के चक्कर में थानोस को मार डाला गया। वह लोगों को प्रचुर मात्रा में संसाधन देकर सबकी बराबरी के लिए लड़ने वाला सामाजिक कार्यकर्ता था। वह मणियों का प्रेमी था। महान पर्यावरणविद की 1020 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई।”
वाशिंगटन पोस्ट द्वारा खूँखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के सबसे बड़े सरगने के मारे जाने के बाद इस तरह का हैडलाइन बनाने के बाद आश्चर्य नहीं कि वह उपर्युक्त गुंडों के मारे जाने पर उक्त बातें लिखता। कहने को तो हिटलर को भी पॉपुलेशन कण्ट्रोल विशेषज्ञ और वीरप्पन को दो बच्चियों का पिता बता कर उसे ‘बेचारा’ साबित किया जा सकता है। अब देखना यह है कि ‘द क्विंट’ और एनडीटीवी को टक्कर देने निकला वाशिंगटन पोस्ट इस क्षेत्र में और कितना आगे जा सकता है।
नोट:वाशिंगटन पोस्ट के संपादक ने निजी कारणों से उनका नाम न छापने के लिए आग्रह किया था। और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए हमने कहीं भी उनका नाम नहीं लिखा है।
दिल्ली में दिवाली के अवसर पर कल (अक्टूबर 27, 2019) खूब आतिशबाजी हुई। पटाखे बैन (ग्रीन पटाखों के अलावा) होने के बावजूद त्यौहार पर लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। हर ओर लोग पर्व को धूमधाम से मनाते नजर आए। बावजूद इसके कल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली वालों को बधाई देने के लिए एक ट्वीट किया और लिखा, “दीवाली की शाम और कोई पटाखे नहीं। दिल्ली वालों ने कमाल कर दिया। दीवाली की बधाई।”
दीवाली की शाम। और कोई पटाखे नहीं। दिल्ली वालों ने कमाल कर दिया। दीवाली की बधाई।
हालाँकि, लक्ष्मी पूजन के बाद दिल्ली में हर ओर से पटाखों की आवाजें सुनने को आई। लेकिन सीएम के ऐसे ट्वीट ने विपक्षी नेताओं समेत सोशल मीडिया यूजर्स को उनकी चुटकी लेने का मौक़ा दे दिया। इसमें कपिल मिश्रा और तजिंदर सिंह बग्गा ने केजरीवाल को अपने-अपने तरीके से दिल्ली में फूटते पटाखों के बारे में जानकारी दी।
कपिल मिश्रा ने केजरीवाल के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए उन्हें मूर्ख आदमी बताया और लिखा, “हिन्दू लक्ष्मी पूजा करने के बाद पटाखे फोड़ते हैं। अब हर तरफ धमाके सुने जा सकते हैं। दिल्ली के हिन्दू धुंआधार पटाखे चला रहे हैं। औकात हो तो अगली बार बकरा ईद पर ज्ञान देना घुँघरू सेठ।”
इसके बाद तजिंदर सिंह बग्गा ने केजरीवाल के ट्वीट पर लिखा, “प्रिय मुख्यमंत्री सर, मैंने आपके लिए कान के स्पेशलिस्ट की अपॉइंटमेंट बुक की है। सर, हम दोनों भले ही अलग पार्टियों से हैं, लेकिन आप हमारे मुख्यमंत्री हैं, हमें आपकी परवाह है। कृपा कल अस्पताल में जाइए और अपने कान का चेकअप कराइए।”
Dear CM sir, I booked your appointment with Ear Specialist. Sir, we are from different parties but you are our CM, We care for you. Pls go tomorrow to Hospital on time to check your Ears https://t.co/UR0vHjFM58pic.twitter.com/3q5TJfccRG
इसके अलावा सोशल मीडिया वालों ने भी उन्हें जमकर आड़े हाथों लिया। उन्हें आँख का अंधा और कान का बहरा बताया। साथ ही नसीहत मिली कि वो अपने कान खोलकर कमरे से बाहर निकल कर देख लें। हर ओर पटाखे फूट रहे हैं।
वैसे केजरी को चाहिये कि कान खोल कर , कमरे से बाहर निकल के देख लेते।।। पटाखों के नजारे दिल्ली के।।
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फ़ज़ल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर रहमान के नेतृत्व में हजारों लोग पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) सरकार को गिराने के लिए रविवार (27 अक्टूबर) को कराची से इस्लामाबाद की ओर ‘आज़ादी मार्च’ के लिए कूच कर दिया है।
डॉन के अनुसार, इस मार्च में मदरसा के छात्रों सहित हज़ारों लोग भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन), अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) समेत अन्य राजनीतिक दल भी आज़ादी मार्च में शामिल हैं।
जेयूआई-एफ नेतृत्व के अलावा, पीपीपी नेता रज़ा रब्बानी, सईद गनी, पीएमएल-एन के नेता मोहम्मद जुबैर, निहाल हाशमी, एएनपी के शाही सैयद और अन्य प्रमुख नेता भी गुरुवार को इस्लामाबाद पहुँचने वाले हैं। बता दें कि आज़ादी मार्च पाँच दिनों तक चलेगा यानी विरोध प्रदर्शन 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ मोर्चाबंदी की कोशिश की जा रही है और उनके इस्तीफ़े की माँग भी की जा रही है।
मार्च के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर रहमान ने कहा कि विपक्ष ने पीटीआई सरकार द्वारा भेजी गई बातचीत टीम की सभी माँगों का खंडन किया था और वो न्यायपालिका द्वारा किए गए निर्णयों के अनुसार अपना धरना देंगे।
उन्होंने सवालिया होते हुए कहा, “प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को इस्तीफ़ा देना होगा। कराची में हज़ारों की संख्या में लोग इकट्ठे हुए हैं। सरकार क्या करेगी जब देश भर से लोग इस्लामाबाद पहुँचेंगे?”
शुक्रवार (25 अक्टूबर) को मौलाना ने कहा था कि उनकी पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्यों और प्रांतीय नेताओं के घरों पर देश भर में छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा,
“यदि बैरिकेड्स और अन्य व्यवधानों के साथ हमारे मार्ग पर बाधाएँ उत्पन्न करने का प्रयास किया गया, तो इससे टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। चाहे एक महीने के लिए ही राष्ट्रीय राजमार्गो को बंद क्यों ना कर दिया जाए, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, हम इस्लामाबाद जाएँगे।”
फ़ज़ल ने जून में उनकी पार्टी ने सरकार को गिराने के लिए अक्टूबर के महीने में इस्लामाबाद में सरकार विरोधी लंबे मार्च का आयोजन करने का फ़ैसला किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि इमरान ख़ान झूठ के सहारे पाकिस्तान में सत्ता में आए।
पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर जहीर खान ने दिवाली की शुभकामनाएँ देते हुए अपनी पत्नी अभिनेत्री सागरिका घाटगे के साथ सोशल मीडिया में एक तस्वीर शेयर की। इसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें गालियाँ देना, ट्रोल करना शुरू कर दिया।
Muslim r esy tehwar…. Zaheer Bhai Allah ko Jaan deni hy roz mehshar kia monh dikhao gy.
उमर ने लिखा, “नहीं मिलेगा फ्लैट अब भी।” बता दें कि उमर को राणा अय्यूब, समीर हलार्णकर, निखिल वागले और सबा नकवी जैसे लिबरल पत्रकारों के साथ ही संजय निरुपम जैसे कॉन्ग्रेसी नेता भी फॉलो करते हैं। इस तरह के संदेशों को देख एक यूजर ने मजे लेते हुए लिखा कि फतवा आ ही रहा होगा।
इसी तरह से फोटो शेयरिंग वेबसाइट इंस्टाग्राम पर भी लोगों ने जहीर खान को गालियाँ दी।
जहीर खान को इंस्टाग्राम पर मिली गाली जहीर खान को इंस्टाग्राम पर मिली गाली
गौरतलब है कि इससे पहले बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को भी इस्लामिक कट्टरपंथियों ने तिलक लगाते हुए एक तस्वीर साझा करने और दिवाली की बधाई देने के लिए गाली दी थी। शाहरुख खान ने सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों को शुभकामनाएँ देते हुए ट्वीट किया था, “सभी को हैप्पी दिवाली। आपका जीवन उज्ज्वल और खुशहाल रहे।” शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने अपने परिवार के साथ तिलक लगाए हुए एक तस्वीर भी शेयर की। इस तस्वीर में उनका बेटा अबराम और पत्नी गौरी भी थीं। इसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने शाहरूख को झूठा मुस्लिम तक बता दिया।