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कॉन्ग्रेस मजबूर थी मजबूत नहीं, हम उनके खिलाफ जीतकर आएँ हैं: दिग्विजय चौटाला

हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर ने रविवार (अक्टूबर 27, 2019) हरियाणा के सीएम पद की दूसरी बार शपथ ली। वहीं जेजेपी के नेता दुष्यंत चौटाला ने राज्य के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान जननायक जनता पार्टी (JJP) के चीफ दुष्यंत चौटाला के भाई दिग्विजय चौटाला ने मीडिया से बात करते हुए कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कल तक वे (कॉन्ग्रेस) कह रही थी कि यह (BJP-JJP गठबंधन) लोगों के जनादेश के खिलाफ है। हम उनके खिलाफ भी जीतकर आए हैं। कॉन्ग्रेस संख्या नहीं जुटा सकी।” उन्होंने कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि वो ‘मज़बूर थी मज़बूत नहीं।’

हरियाणा राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में दुष्यंत चौटाला अपने परिवार के साथ पहुँचे। रविवार सुबह तिहाड़ जेल से फरलो पर रिहा हुए दुष्यंत के पिता अजय चौटाला भी इस समारोह में हिस्सा लेने पहुँचे। इसके अलावा दुष्यंत की माँ नैना चौटाला, भाई दिग्विजय चौटाला ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया। राजभवन पहुँचने पर दुष्यंत ने यहाँ तमाम नेताओं से मुलाकात की, वहीं पंजाब के पूर्व सीएम और अकाली दल नेता प्रकाश सिंह बादल ने दुष्यंत को गले लगाकर अपना आशीर्वाद दिया। इसके बाद मंच पर पहुँचे दुष्यंत ने मनोहर लाल खट्टर और राज्यपाल का अभिवादन किया।

वहीं दुष्यंत के पिता अजय चौटाला ने कहा कि दुष्यंत ने सिर्फ 11 महीनों में संगठन की स्थापना की है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “एक पिता के लिए इससे बेहतर अवसर और क्या हो सकता है? कॉन्ग्रेस जो चाहे कह सकती है, लेकिन यह सरकार 5 साल तक चलेगी और हरियाणा के विकास के लिए काम करेगी। इससे बेहतर दिवाली नहीं हो सकती थी।”

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हरियाणा में सत्ता के कई बड़े चेहरे एक साथ राजभवन में दिखाई दिए। समारोह के दौरान राज्य के पूर्व सीएम भूपेंदर सिंह हुड्डा, बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, अकाली दल नेता प्रकाश सिंह बादल, पंजाब के पूर्व डेप्युटी सीएम सुखबीर सिंह बादल समेत कई बड़े राजनेता राजभवन में मौजूद रहे।

केरल में वामपंथी और मुस्लिम आपस में भिड़े: मलप्पुरम में हुई मुस्लिम लीग कार्यकर्ता की हत्या

केरल के मलप्पुरम ज़िले के तनूर में गुरुवार (24 अक्टूबर) की रात कम्युनिस्ट और मुस्लिमों के बीच झड़पें हुईं, एक मुस्लिम लीग पार्टी के कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। ख़बर के अनुसार, 36 वर्षीय एम इशाक़ नमाज़ के बाद एक स्थानीय मस्जिद से लौट रहा था, तभी उसका पीछा करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया-मार्क्सवादी (CPI-M) के हुड़दंगियों ने उस पर हमला कर दिया। इसके बाद इशाक़ को एक अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

मुस्लिम लीग ने CPI-M के एक वरिष्ठ नेता पी जयराजन को हत्या का दोषी ठहराते हुए उनके ख़िलाफ़ जाँच की माँग उठाई है। यहाँ यह बात ग़ौर करने वाली है कि जयराजन कई हत्या के मामलों में आरोपित हैं। उनके ख़िलाफ़ हत्या की जाँच की माँग उठाते हुए, मुस्लिम लीग ने मलप्पुरम में बंद का आह्वान किया था।

यह हिंसा क्षेत्रीय हैवीवेट CPI-M और मुस्लिम लीग के बीच चल रही अशांति का परिणाम था, जो भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का दूसरा सबसे बड़ा साझेदार है।

हत्या की यह घटना गुरुवार तड़के करीब 7:30 बजे की है। प्रारंभिक जाँच से पता चला है कि हमले में तलवार और चाकू का इस्तेमाल किया गया था। पार्टी ने माकपा के 4 कार्यकर्ताओं पर इशाक़ पर हमला करने और हत्या करने का आरोप लगाया है।

तनुर पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने The News Minute को बताया, “हमने माकपा के 4 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। हम अभी भी मामले में अन्य विवरणों की जाँच कर रहे हैं।” जानकारी के अनुसार, मुस्लिम लीग के स्थानीय नेतृत्व ने आरोप लगाया है कि यह हमला बिना किसी उकसावे के हुआ और पुलिस की एक टीम जो उस समय बाहर डेरा डाले हुए थी, हमले को रोक नहीं सकी।

हालाँकि, हमले के बाद इशाक़ को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई और शव का पोस्टमार्टम कोझीकोड मेडिकल कॉलेज में अस्पताल में किया गया। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़, मलप्पुरम ज़िले की CPI (M) समिति ने इस हमले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है।

एक ने बेटी की ख़ातिर तो दूसरे ने पति के लिए लाँघी चौखट: स्वाति सिंह, किरण तिवारी जैसों से रोशन हौसले का दीया

जिस देश में आत्महत्या करने वाली महिलाओं में से करीब 37 फीसदी हालात से टूट कर मौत के गली लगती हों, उस समाज में स्वाति सिंह और किरण तिवारी जैसों का हौसला उम्मीद जगाता है। एक ने 12 साल की बेटी की सम्मान की ख़ातिर तो दूसरे ने पति को इंसाफ़ दिलाने के लिए घर की चौखट लॉंघी। मुसीबतों के पहाड़ से डरी नहींं, जबकि एक के सामने जाति की चादर ओढ़े प्रभावशाली राजनीतिक ​बिरादरी थी, तो दूसरे के सामने धर्म की खाल में लिपटे दरिंदे हैं।

18 अक्टूबर को कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या से पहले आपने शायद ही उनकी पत्नी किरण तिवारी का नाम सुना हो। उनके बारे में तब भी आपने सुना नहीं होगा जब कमलेश तिवारी सींखचों के पीछे धकेल दिए गए थे। यकीनन उस मुश्किल खड़ी में भी किरण परिवार को सॅंभालने में लगी रही होंगी। लेकिन, तक भी वे पारिवारिक दायरे से बाहर निकल पति के लिए सार्वजनिक तौर पर खड़ी नजर नहीं आईं। मुश्किलों से मोर्चा लेने का उन्होंने फैसला तब किया जब उन पर सबसे बड़ा पहाड़ टूटा। एक महिला के लिए पति की मौत से बड़ा दर्द भला क्या हो सकता है। और जिसके पति की इतने निर्मम तरीके से हत्या की जाए तो उसके मन-मस्तिष्क पर क्या चल रहा होगा, कल्पना से परे है।

दिवंगत पति की ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए पार्टी की कमान सँभाली

लेकिन, किरण टूटी नहीं। पहले पति के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए आगे आईं। फिर हत्या के हफ्ते भर बाद ही पति की जगह हिंदू समाज पार्टी की कमान सॅंभाल ली। किरण बखूबी जानती होंगी कि उनके पति की हत्या हिंदुत्ववादी तेवरों के कारण ही गई है। उनके खिलाफ जो लोग हैं उनमें यूपी का मंत्री रहा एक मुस्लिम नेता है, जिसके विवादित बयान की प्रतिक्रिया में कमलेश तिवारी ने विवादित टिप्पणी की थी।

विवादित टिप्पणी के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। वे मौलाना हैं जिन्होंने समुदाय विशेष के लोगों को कमलेश की हत्या के लिए उकसाया। उसकी हत्या को जायज ठ​हराया और फिर हत्यारों को छिपाने का भरसक प्रयास किया। उस धर्मांध पत्नी से है जो हत्यारे पति से कहती है कि अल्लाह तेरा भला करेगा। उस पिता से है जो हत्यारे बेटे से कहता है कि घर आ जा सब ठीक हो जाएगा। उन शांति दूतों से है जो कमलेश की हत्या के बाद सोशल मीडिया में हा हा कर रहे ​थे। यह ऐसा कॉकस है जिससे समुदाय विशेष के लोग धर्म के नाम पर जुड़े हैं, काफिरों के खिलाफ। ऐसे लोगों के खिलाफ खड़ा होना एक महि​ला और खासकर जिसके पति की इतने निर्मम तरीके से हत्या की गई हो, आसान नहीं होता।

12 साल की बेटी के सम्मान में चुनावी मैदान में उतरीं स्वाति सिंह

आसान तो स्वाति सिंह के लिए भी कुछ नहीं था। वह 2016 का साल था। स्वाति के पति बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर एक विवादित टिप्पणी की। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने थे। सो, दयाशंकर के बयान का मायावती ने राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की। उनके कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और दयाशंकर के परिवार की महिलाओं को सरेआम गाली दी गई।

स्वाति की 12 साल की बेटी के लिए भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। ऐसे वक्त में जब दयाशंकर भूमिगत हो गए थे, घरेलू महिला रहीं स्वाति सिंह परिवार के लिए सामने आईं। पति का बचाव नहीं किया। कहा अपने पति और मायावती के लिए समान कार्रवाई चाहती हूॅं। उनके हौसले ने बसपा को बैकफुट पर धकेल दिया। मायावती को यहॉं तक कहना पड़ा कि वे अपने कार्यकर्ताओं की भाषा का समर्थन नहीं करतीं। अगले साल जब विधानसभा चुनाव हुए तो स्वाति के इस हौसले को जनता का समर्थन भी मिला। वे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई को हरा विधानसभा पहुॅंची। आज वे योगी कैबिनेट की सदस्य हैं।

असल में, स्वाति और किरण जैसी महिलाओं से ही महिला सशक्तिकरण का दीया रोशन होता है। इन गैर राजनीतिक महिलाओं का जज्बा हर उस महिला को हौसला देता है, जिन्हें मुसीबतें अकेला कर देती हैं। तोड़ने की हर कोशिश करती है। वरना विरासत के नाम पर तो यूपी में ही नहीं देश के हर हिस्से में आप अक्सर महि​लाओं को ऊपर चढ़ते देखते ही रहते हैं। यह दूसरी बात है कि उनके सफर को ही हमारे सामने महिला सशक्तिकरण का मुलम्मा चढ़ाकर पेश किया जाता है।

लगातार दूसरी बार हरियाणा के CM बने मनोहर लाल खट्टर: दुष्यंत चौटाला ने ली डिप्टी सीएम की शपथ

हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर ने रविवार (अक्टूबर 27, 2019) हरियाणा के सीएम पद की दूसरी बार शपथ ली। वहीं जेजेपी के नेता दुष्यंत चौटाला ने राज्य के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह चंडीगढ़ स्थित राजभवन में आयोजित किया गया। आज के शपथ ग्रहण में सिर्फ सीएम और डिप्टी सीएम ने ही शपथ ली है। हालाँकि, पहले कैबिनेट मंत्रियों के भी शपथ-ग्रहण की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गौरतलब है हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने शनिवार (अक्टूबर 26, 2019) को मनोहर लाल खट्टर को प्रदेश में अगली सरकार बनाने का न्यौता दिया था। जिसके बाद भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद खट्टर ने जजपा और सात निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ प्रदेश में सरकार गठन का दावा पेश किया था। खट्टर ने बताया कि 57 विधायकों, जिनमें भाजपा के 40, जजपा के 10 और सात निर्दलीय विधायक शामिल हैं, के समर्थन के साथ सरकार गठन के लिए राज्यपाल के समक्ष दावा पेश किया।

विधानसभा चुनाव में हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी 50 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं कॉन्ग्रेस ने 31, दुष्यंत चौटाला की जेजेपी ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की है।

RBI ने सोने की बिक्री की ख़बर का किया खंडन: फर्जी साबित हुई ET और ‘मीडिया गिरोह’ की रिपोर्ट

हाल ही में, ऐसी ख़बरें सामने आई थीं कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लंबे समय में पहली बार अपने भंडार से सोना बेच रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक़, जुलाई की शुरुआत से RBI ने 5.1 बिलियन डॉलर का सोना ख़रीदा और करीब 1.15 बिलियन डॉलर येलो मेटल (सेना) की बिक्री हुई। हालाँकि, अपनी हेडलाइन को थोड़ा मोड़ते हुए, ET ने बताया कि RBI ने अपने कुछ सोने को फिर से बेचना शुरू कर दिया है, बावजूद इसके कि उनकी रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि RBI ने अपने भंडार से बेचने के बजाय अधिक सोना ख़रीदा है।

वहीं, रविवार (27 अक्टूबर) को भारतीय रिज़र्व बैंक ने सोने की ब्रिकी को लेकर स्पष्ट किया कि वह न तो सोना बेचते हैं और न ही इसमें व्यापार करते हैं। बता दें कि मीडिया में कुछ ऐसी ख़बरें थीं जिनमें कहा जा रहा था कि RBI सोने की बिक्री कर रहा है। 

केंद्रीय बैंक ने आगे कहा, “साप्ताहिक सांख्यिकीय अनुपूरक (WSS) में दर्शाए गए मूल्य में उतार-चढ़ाव मासिक से साप्ताहिक आधार पर पुनर्मूल्यांकन की आवृत्ति में परिवर्तन के कारण होता है और यह सोने और विनिमय दरों के अंतरराष्ट्रीय मूल्यों पर आधारित है।”

RBI की यह प्रतिक्रिया ET की उस ख़बर के बाद सामने आई है जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय बैंक ने बिमल जालान की रिपोर्ट को अपनाने के बाद से सोने में अधिक सक्रिय रूप से कारोबार करना शुरू कर दिया है। जालान समिति की स्थापना पिछले साल RBI की अधिशेष आय को सरकार के साथ साझा करने की बहस के मद्देनज़र की गई थी ताकि इसकी कमी को पूरा किया जा सके।

भारतीय रिज़र्व बैंक और मोदी सरकार को एक तरफ़ ले जाने की जल्दबाजी में, मीडिया के कुछ वर्गों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इस ख़बर का ग़लत इस्तेमाल कर यह भ्रम फैलाने की कोशिश की कि देश आर्थिक संकट से गुज़र रहा है और इसलिए RBI को अपने भंडार से सोना बेचना पड़ रहा है।

तथाकथित ‘अर्थशास्त्री’ और ‘पत्रकारों’ ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत इतनी ख़राब है कि भारतीय रिज़र्व बैंक मंदी से लड़ने के लिए अन्य संसाधनों का मुद्रीकरण करने के लिए देश के सोने के भंडार को बेचने पर नज़र गड़ाए हुए है।

एक पत्रकार से ट्रोल होने बनी स्वाति चतुर्वेदी ने ज़ोर देकर कहा कि RBI अपने भंडार को बेचने का सहारा ले रही है, जो स्वाति के अनुसार ख़राब आर्थिक स्थिति का संकेत है।

विवादास्पद वामपंथी वकील, प्रशांत भूषण, जो कि अक्सर फ़र्ज़ी ख़बरों के लिए भी जाने जाते हैं, ने भी कहा कि सरकार RBI के भंडार से 1.76 लाख करोड़ रुपए लेने के बाद RBI अपने स्वर्ण भंडार को बेच रही है।

अब, भारतीय रिज़र्व बैंक ने ET की ख़बर का खंडन कर दिया है, इसी के साथ यह देखना अभी बाक़ी है कि आख़िर जिन-जिन पत्रकारों ने फ़र्ज़ी ख़बरों से जनता को भ्रमित करने की कोशिश की थी। क्या वे माफ़ी माँगते हैं।

दीपावली पर राम मंदिर के लिए मोदी ने कही ये बड़ी बात: 2010 हाईकोर्ट फैसले की दिलाई याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के अवसर पर मन की बात कार्यक्रम के ज़रिए देश को सम्बोधित किया, इस दौरान उन्होंने अपने वक्तव्य में अयोध्या का भी ज़िक्र किया राम जन्‍मभूमि का भी जिक्र किया। उन्‍होंने बताया कि साल 2010 में जब राम जन्‍मभूमि पर फैसला आया था, उस समय सभी लोगों ने कोर्ट के फैसले का सम्‍मान करते हुए उसे स्‍वीकार किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सितंबर 2010 में जब राम जन्‍मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। जरा उन दिनों को याद कीजिए, कैसा माहौल था। भाँति-भाँति के कितने लोग मैदान में आ गए थे। कैसे-कैसे ‘इंटरेस्‍ट ग्रुप’ उस माहौल का अपने-अपने तरीके से फायदा उठाने के लिए खेल खेल रहे थे। माहौल में गर्माहट पैदा करने के लिए किस-किस प्रकार की भाषा बोली जाती थी। भिन्‍न-भिन्‍न स्‍वरों में तीखापन भरने का भी प्रयास होता था।”

पीएम मोदी ने कहा कि एक तरफ दो हफ्ते की गर्माहट के लिए सब कुछ हुआ था, मगर जैसे ही राम मंदिर पर फैसला आया तब सरकार, राजनीतिक दलों, सिविल सोसायटी ने सभी संप्रदाय के प्रतिनिधियों ने बहुत ही संतुलित बयान दिए थे। उस माहौल में तनाव कम करने का प्रयास किया गया था। अपने सम्बोधन में वे बोले कि हमें याद रखना चाहिए कि यह बातें बहुत ताकत देती हैं, वह पल हम सबके लिए बड़ा कर्त्तव्यबोध का है। एकता का स्वर, देश को कितनी बड़ी ताकत देता है यह उसीका उदहारण है।

बयानबाज़ों और बड़बोले लोगों की इशारा करते हुए मोदी ने कहा कि कुछ लोगों ने खुद को चमकाने के इरादे से न जाने क्या-क्या नहीं कहा। उन्होंने कितनी ही गैर-ज़िम्मेदाराना बातें कीं। हमें सब याद है, लेकिन ऐसे लोग पाँच दिन, सात दिन तक चलता रहा मगर जब फैसला आया तो पूरे देश ने एक आनंददायक आश्‍चर्यजनक बदलाव महसूस किया।

असम में उल्फा-I के 8 उग्रवादियों ने किया आत्मसमर्पण: भारी मात्रा में हथियार बरामद

असम में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (आई) को हाल के दिनों में काफी बड़ा झटका लगा है। संगठन के काफी संख्या में कैडर आत्मसमर्पण कर राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। बता दें कि अर्धसैनिक बलों और भारतीय सेना के संयुक्त अभियान के बाद उल्फा (आई) के आठ उग्रवादियों ने असम के तिनसुकिया जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने शनिवार (अक्टूबर 26, 2019) को इसकी सूचना दी।

तिनसुकिया के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आर काकोटी ने बताया कि उल्फा (आई) के आठ कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से दो कैडरों ने गुरुवार (अक्टूबर 24, 2019) को आत्मसमर्पण किया, जबकि छ: ने शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को दो अलग-अलग अभियानों में आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों की पहचान फोमन मोरन, मिंटू मोरन, प्राणजीत मोरन, राजीब मोरन, मिलनज्योति महंता, कल्याण बैरवा, प्रांजल काकती और बिजित कांति बोरा के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक उनके पास से आठ एके सीरीज राइफलें, जिंदा गोला बारूद और दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए। पुलिस उप महानिरीक्षक पीके भुइयां ने कहा कि आने वाले दिनों में और भी उल्फा (आई) कैडरों के आत्मसमर्पण करने की उम्मीद है।

पीके भुइयां का कहना है कि आत्मसमर्पण का एक बड़ा कारण यह है कि सेना द्वारा ऑपरेशन शुरू किए जाने के बाद उल्फा (आई) के कैडरों को अपने शिविरों से तितर-बितर होना पड़ा। क्योंकि इस दौरान उनके शिविरों को ध्वस्त कर दिया गया।

बता दें कि साल की शुरुआत में म्यांमार सेना ने एक ऑपरेशन को अंजाम दिया था, जिसमें उन्होंने उन शिविरों को निशाना बनाया था, जहाँ उल्फा (आई) समेत अन्य विद्रोहियों के संगठनों ने शरण ली थी।

असम पुलिस के खुफिया विंग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस साल 18 अक्टूबर तक 54 आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, जिसमें से 42 उल्फा (आई) के थे।

जवानों के बीच दिवाली मनाने J&K के राजौरी पहुँचे PM मोदी: 370 हटने के बाद उनकी पहली कश्मीर यात्रा

हर बार की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों संग दिवाली मनाएँगे। इसके लिए पीएम मोदी रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को जम्मू कश्मीर के राजौरी सेक्टर पहुँचे। पीएम आर्टिकल-370 हटने के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर पहुँचे हैं। पीएम मोदी यहाँ लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पास जवानों संग दिवाली मनाएँगे। बता दें कि पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद से अब तक हर बार जवानों संग ही दिवाली मनाई है। पीएम मोदी कह चुके हैं कि वह जवानों को ही अपना परिवार मानते हैं।

पीएम इससे पहले पाकिस्तान से लगे पंजाब बॉर्डर, सियाचिन ग्लेशियर और उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा पर जवानों के साथ दिवाली के जश्न में शामिल हो चुके हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी तीसरी बार कश्मीर में जवानों के साथ दिवाली मनाएँगे। 

2014 में उन्होंने सियाचिन में जवानों के बीच मनाई थी। इसके बाद 2015 में वे दिवाली मनाने पंजाब बॉर्डर गए थे। उनका यह दौरा भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 में लड़े गए युद्ध के 50वें साल के मौके पर था। 2016 में प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश से लगे चीन बॉर्डर के पास इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों के साथ दिवाली मनाई। प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने अपनी चौथी दिवाली का जश्न 2017 में जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सैनिकों के साथ मनाया। 2018 में, उन्होंने उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा के पास बर्फीले इलाके में सेना और आईटीबीपी के जवानों के साथ त्योहार मनाया।

संयोगवश प्रधानमंत्री इन्फैन्ट्री दिवस समारोह के दिन जम्मू कश्मीर पहुँचे। इन्फैन्ट्री दिवस समारोह 1947 में जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को मुँहतोड़ जवाब देने वाली पहले भारतीय सैनिकों की टुकड़ी को समर्पित दिवस है।

इससे पहले आज पीएम मोदी का मन की बात कार्यक्रम भी प्रसारित हुआ। इसमें मोदी ने दिवाली का जिक्र किया। पीएम ने देशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए स्थानीय लोगों, बुनकरों और कारीगरों से सामान खरीदने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने आगे कहा कि इस दिवाली प्रकाश को विस्तार देकर शत्रुता की भावना को समाप्त करना चाहिए।

पीएम नरेंद्र मोदी ने दिवाली के लिए ट्वीट कर शुभकामनाएँ दी। उन्होंने लिखा, “देशवासियों को दीपावली के पावन अवसर पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। रोशनी का यह उत्सव हम सभी के जीवन में नया प्रकाश लेकर आए और हमारा देश सदा सुख, समृद्धि और सौभाग्य से आलोकित रहे।”

अयोध्या का दीपोत्सव कार्यक्रम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज: 5 लाख 51 हज़ार दीप जलाकर तोड़ा पुराना रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में लगातार तीसरे साल भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। इस बार भी सरयू के तट पर 5 लाख 51 हजार दीप जलाकर योगी सरकार ने अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह रिकॉर्ड योगी सरकार के पर्यटन विभाग और डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के सहयोग से बना है। पिछले साल दीपोत्सव कार्यक्रम में 3 लाख 10 हज़ार दीप जलाए गए थे, वो भी रिकॉर्ड था।

इससे पहले, राम की पौड़ी पर अवध विश्वविद्यालय के 6 हज़ार वॉलिंटियर्स ने इस बार 4,04,026 लाख दीप जलाए, जबकि 1 लाख 51 हजार दीपक अयोध्या के सभी प्रमुख मंदिरों में स्कूली छात्रों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने जलाए। इस तरह से योगी सरकार के इस आयोजन में 5 लाख 51 हजार दीये जलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड की टीम मौके पर मौजूद रही। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ने प्रमाण पत्र देकर योगी सरकार को सम्मानित किया।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंँकर राम-सीता की आरती उतारी। दीपोत्सव कार्यक्रम में भाग लेने पहुँचे सीएम योगी ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी ने जाति-धर्म न देखकर सभी को बराबर का हक़ दिया और रामराज्य स्थापित किया, जब हम अयोध्या की बात करते हैं तो मस्तिष्क में राम सिया आता है। शासन की योजना जिस प्रतिबद्धता के साथ देश में लागू की गई है, ये आधुनिक राम की अवधारण है, जिसमें सभी को समान रूप से सभी तक विकास पहुँचे।”

इसके आगे उन्होंने कहा,

मोदी सरकार में बिना किसी भेदभाव के सबका विकास हो रहा है। पिछली सरकारें अयोध्या के नाम से डरती थीं। पीएम मोदी ने राम राज्य की धारणा को साकार किया है। मोदी ने भारत की परम्परा को विश्व पटल पर रखा। भारत दुनिया में विश्वगुरू के रूप में स्थापित हो रहा है।”

बता दें कि दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल भी मौजूद थीं। अयोध्या में दीपोत्सव के बीच भव्य आतिशबाज़ी भी जारी रही, इस दौरान आसमान का नज़़ारा भी अद्भुत ही था। अयोध्या घाटों पर दीप जलाने का कार्यक्रम चला, लाखों दीपो के जलने से अयोध्या नगरी का दृश्य अद्भुत होने के साथ-साथ बेहद मनमोहक भी था।

‘नेहरू ने अलोकतांत्रिक तरीके से जोड़ा था 370, मोदी सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके से हटाने का साहस दिखाया’

देश में कश्मीर को लेकर बहस नई नहीं है, पहले भी इस बहस को लेकर काफी गरमा-गर्मी हो चुकी है, वही कॉन्ग्रेस पार्टी जिसने संसद में सत्तारूढ़ भाजपा और उसका साथ देने वाले दलों पर अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सम्बन्ध में इस विषय पर विस्तृत चर्चा या बातचीत नहीं की, उसने एक समय खुद इस बात पर ध्यान नहीं दिया था कि कैसे कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए संसद में अन्य दलों को अनसुना कर इसके लिए कानून पारित कर दिया था। शनिवार को जम्मू क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर संविधान में अलोकतांत्रिक तरीके से अनुच्छेद 370 जोड़ने का आरोप लगाया।

शनिवार को जम्मू क्लब में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी न्यास की ओर से विलय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राम माधव ने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अलोकतांत्रिक तरीके से जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू करवाया था। मोदी सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके से अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने का साहस दिखाया।

राम माधव बोले कि तत्कालीन कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी के लोगों ने भी पंडित नेहरू के फैसले का विरोध किया था। मगर सरदार पटेल पर नेहरू ने दबाव बनाया और दूसरी बार कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई गई। अनुच्छेद 370 का प्रस्ताव पास करवाया गया। माधव बोले, नेहरू ने शेख अब्दुल्ला से मित्रता के चलते अलोकतांत्रिक तरीके से अनुच्छेद 370 को लागू करवाया था। इस फैसले से जम्मू-कश्मीर के लोग सात दशक तक दोहरी नागरिकता में रहे।

राम माधव ने कहा, मोदी सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित प्रेम नाथ डोगरा के सपनों को साकार किया है। महाराजा हरि सिंह की कल्पना में 370 और 35 ए कतई नहीं थे। महाराजा ने देश की अन्य 560 रियासतों की तर्ज और शर्तों पर ही देश के साथ विलय किया था।

अपने सम्बोधन में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि कश्मीरियत इंसानियत हिन्दोस्तानियत से अलग नहीं है। इस दौरान उन्होंने अपने सम्बोधन में सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि क्या घाटी के लाखों कश्मीरी पंडितों को उनके घर से बाहर निकालना कश्मीरियत है। माधव बोले कि क्या डोगरा समुदाय की उपेक्षा और एससी- एसटी और महिलाओं को उनके अधिकार नहीं देना क्या कश्मीरियत है।