फर्जी खबरें फैलाने की उस्ताद रहीं कॉन्ग्रेस नेता दिव्या स्पंदना उर्फ रम्या के सिल्वर स्क्रीन पर लौटने की खबर सामने आ रही है। एक्टर से नेता बनी स्पंदना की कन्नड़ फिल्म ‘दिल का राजा’ का टीजर शुक्रवार को रिलीज हुआ। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह सक्रिय राजनीति से तौबा कर वापस फिल्मी दुनिया में लौटने को तैयार हैं।
हालॉंकि पूरी तरह से उनके फिल्मी दुनिया में लौटने को लेकर यकीनी तौर से कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि वे गायब होने की कला के लिए जानी जाती हैं। वैसे, रम्या कई महीनों से कॉन्ग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में नजर नहीं आई हैं। कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम की मुखिया के पद से इस्तीफा देने के बाद से सोशल मीडिया पर भी सक्रिय नहीं हैं।
बता दें कि पूर्व सांसद रम्या 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया टीम की कमान सॅंभाल रही थी। लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की बुरी हार के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद पार्टी ने गुजरात कॉन्ग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर रोहन गुप्ता को सोशल मीडिया डिपार्टमेंट का चेयरमैन बनाया है।
बता दें कि दिव्या स्पंदना गलत जानकारियाँ ट्वीट करने और भ्रामक अभियान चलाने के लिए कुख्यात रही हैं। भारत की सबसे तेज़ रफ़्तार ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ की सफलता को ख़ारिज करने के लिए दिव्या स्पंदना ने फर्जी ख़बरों का सहारा लेते हुए इसके बारे में झूठ फैलाने की कोशिश की।
कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद ने पुलवामा में आतंकी हमले के बाद असंवेदनशील बयानों को हवा देने की कोशिश की थी। हमले के मास्टरमाइंड आदिल डार के आतंकवादी बनने को शर्मनाक तरीके से सही ठहराया था। इसके अलावा दिव्या स्पंदना ने अल्ट्रा-लेफ्ट विंग वकील प्रशांत भूषण के एक ट्वीट को री-ट्वीट भी किया, जिसमें उन्होंने देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के लिए आतंकवाद में शामिल होने वाले कश्मीरी युवाओं को सही ठहराया था।
दिव्या ने इससे पहले अपने अकॉउंट पर ट्वीट करते हुए मीम शेयर किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि मोदी को वोट देने वाले तीन लोगों में एक आदमी बेवकूफ़ होता है, बिल्कुल बाक़ी दोनों की तरह।
महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों की घोषणा के चार दिनों बाद भी अगली सरकार को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। हालाँकि विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला है। बावजूद इसके मुख्यमंत्री पद पर 2.5 साल के लिए शिवसेना की दावेदारी के कारण पेंच फॅंसा हुआ है। इसे देखते हुए भाजपा निर्दलीयों और छोटे दलों को साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
इस कड़ी में दिवाली के दिन (अक्टूबर 27, 2019) उसे महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई। निर्दलीय राजेंद्र राउत, बीजेपी की बागी गीता जैन और युवा स्वाभिमान पार्टी के रवि राणा ने भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया है। 30 अक्टूबर को बीजेपी विधायक दल के नेता का चुनाव होना है। खबर है कि इस बैठक में शामिल होने के लिए भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुंबई जाएँगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद वे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिल सकते हैं।
इस बीच, सोमवार (अक्टूबर 28, 2019) को बीजेपी और शिवसेना के नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से अलग-अलग मुलाकात की। शिवसेना नेता दिवाकर राउते ने गवर्नर से मुलाकात की और उनके जाने के कुछ समय बाद ही सीएम देवेंद्र फडणवीस भी गवर्नर हाउस पहुँचे।
बता दें कि शिवसेना, भाजपा से 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी की मॉंग कर रही है। मगर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसा संभव नहीं हो पाएगा। बीजेपी इस शर्त पर अपनी सहमति नहीं देगी। महाराष्ट्र में एनडीए के घटक दल रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख रामदास अठावले ने भी इस तरफ इशारा किया और कहा कि बीजेपी तो मुख्यमंत्री का पद देने से रही। ऐसे में शिवसेना को आदित्य ठाकरे के लिए डिप्टी सीएम का पद स्वीकार कर लेना चाहिए।
Shiv Sena gets support of 2 more MLAs of Prahar Janshakti Party. Bachchu Kadu of Achalpur assembly constituency and Rajkumar Patel of Melghat assembly constituency met Shiv Sena Chief Uddhav Thackeray last night and extended their support to him. #Maharashtrapic.twitter.com/VaWe4jLQ6T
वहीं, शिवसेना को भी रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को दो विधायकों का समर्थन मिला। प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो विधायकों ने शिवसेना को समर्थन देने का पत्र उद्धव ठाकरे को सौंपा। अचलपुर विधानसभा क्षेत्र के बच्चू कडू और मेलघाट विधानसभा क्षेत्र के राजकुमार पटेल ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर समर्थन का ऐलान किया।
सीएम फडणवीस ने पहले ही कहा था कि 15 निर्दलीय विधायकों ने सरकार बनाने के लिए पार्टी को समर्थन देने का वादा किया है। दूसरी तरफ शिवसेना भी बीजेपी के सााथ मोलभाव करने की अपनी ताकत को बढ़ाने के क्रम में निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। हालाँकि अमित शाह के महाराष्ट्र जाने से इस पर जल्द ही तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
अमेरिका के अटलांटा में 25 जुलाई, 1946 को हत्या की एक ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम दिया गया था, जिसे याद करके आज भी रूह काँप उठती है। कार में दो अश्वेत किसान दंपत्ति पर श्वेत लोगों के एक समूह ने हमला कर दिया था। उनके साथ लूटपाट की गई। बंदूक की नोक पर उन्हें कार से बाहर खींचा गया, फिर क़रीब 60 गोलियाँ उनके जिस्म पर दाग कर बड़ी बेरहमी से चारों की हत्या कर दी गई। सात दशक से भी ज्यादा पुरानी इस घटना की फिर से सुनवाई होने जा रही है।
मारे गए लोगों में 24 साल के रॉजर मैलकम, उनकी पत्नी डॉरोथी मैलकम, जॉर्ज डॉर्सी और उनकी पत्नी मे मुर्रे डॉर्सी शामिल थे। दरअसल जुलाई 1946 में रॉजर मैलकम का एक दूसरे किसान से झगड़ा हुआ था, आपसी बहस हाथापाई तक पहुँच गई और रॉजर ने उस व्यक्ति को चाकू मार दिया। व्यक्ति बुरी तरह घायल हुआ और रॉजर को जेल जाना पड़ा। बाद में यह मामला दो किसानों का झगड़ा ना रह कर श्वेत और अश्वेत लोगों का विवाद बन गया। बावजूद इसके एक श्वेत किसान लॉय हैरिसन ने रॉजर को छुड़वाया और इसके लिए उस समय 600 डॉलर का जुर्माना भी भरा।
लॉय हैरिसन ही चारों लोगों को गाड़ी में ले जा रहे थे जब भीड़ ने गाड़ी को घेरा। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान लॉय को कोई चोट नहीं आई। बाद में लॉय ने एफबीआई से कहा कि वह भीड़ में किसी को भी नहीं पहचानता था। एफबीआई के रिकॉर्ड के अनुसार, लॉय अमेरिका के नस्ली संगठन केकेके (कू क्लक्स क्लेन्समैन) का सदस्य था और ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों में शामिल रहा था। हालाँकि इस मामले में एफबीआई के पास लॉय के ख़िलाफ़ कोई सुबूत नहीं था।
इस मामले को मूर की फोर्ड लिंचिंग के रूप में जाना जाता है। अमेरिका के इतिहास में इस मॉब लिंचिग के मामले को बड़े स्तर पर हुई घटना के रूप में याद किया जाता है। इस घटना के बाद जनता में भारी आक्रोश के चलते राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन को इस मामले के लिए संघीय जाँच का आदेश देना पड़ा। इसके बाद यह यह मामला नागरिक अधिकारों के आंदोलन के रूप में उभर कर सामने आया।
इस मामले के लिए एक बड़ी जूरी का गठन किया गया और गवाही का दौर भी 16 दिनों तक चला, लेकिन किसी पर भी आरोप तय न हो पाने की स्थिति में यह मामला अनसुलझा ही रह गया। दिसंबर 1946 को इस मामले की फाइल बंद कर दी गई। अदालत को कोई भी दोषी नहीं मिला था, तब से ले कर अब तक इस फाइल को कई बार खोला और बंद किया जा चुका है। शोधकर्ताओं से लेकर एक्टिविस्ट तक सबकी इसमें रुचि रही है। इतिहासकार एंथनी पिच ने इन हत्याओं पर “द लास्ट लिंचिंग: हाउ अ ग्रूसम मास मर्डर रॉक्ड अ स्मॉल जॉर्जियन टाउन” नाम से किताब भी लिखी है।
पिच के अनुरोध पर 2017 में एक निचली अदालत ने इस मामले की फाइल खोलने का आदेश दिया। लेकिन, अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने इसके ख़िलाफ़ अपील की। मंत्रालय का कहना था कि अदालत के फ़ैसले सुरक्षित रखे जाते हैं। अमेरिका में अदालत में मामलों की सुनवाई किसी एक जज के सामने नहीं, बल्कि जूरी के सामने होती है और इसमें नागरिक भी शामिल होते हैं। जूरी सदस्यों के फ़ैसलों को गुप्त रखा जाता है। सभी सदस्य आपस में मिल कर जो फ़ैसला लेते हैं, केवल उसे ही सार्वजनिक किया जाता है।
इस साल फ़रवरी में अपील कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने निचली अदालत के फ़ैसले को क़ायम रखने का निर्णय लिया, यानी पुरानी फाइल को खोलने की अनुमति मिल गई। पर साथ ही यह भी कहा कि पूरे मामले की सुनावाई एक बार फिर होगी। इससे 70 वर्ष से अधिक समय हो जाने के बाद इस मामले एक नया मोड़ आया है, इसके मुताबिक़ केस से जुड़े गवाह सार्वजनिक रूप से सामने आ सकते हैं। 22 अक्टूबर से इस मामले की सुनवाई एक बार फिर से शुरू हो गई है। इतने पुराने मामले के गुनहगार शायद ही मिलें। लेकिन, इसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या इतने पुराने मामले दोबारा खोले जाने चाहिए?
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के आरामबाग क्षेत्र में रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को एक भाजपा नेता शेख आमिर खान की नृशंस हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप भाजपा ने टीएमसी पर लगाया है। बताया जा रहा है कि मृतक पर पहले लाठी-डंडे से हमला किया गया। बाद में कथित तौर पर तलवार से उन्हें काट डाला गया। हमले में गंभीर रूप से घायल हुए बीजेपी कार्यकर्ता को अस्पताल ले जाया गया जहॉं उन्होंने दम तोड़ दिया।
गौरतलब है कि भाजपा और तृणमूल कॉन्ग्रेस के बीच लोकसभा चुनावों के बाद से ही रस्साकशी चल रही थी। जिसके चलते राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में तेजी देखी गई है। भाजपा के स्थानीय नेताओं का आरोप है, ” पश्चिम बंगाल में कानून का कोई राज नहीं हैं। हत्या के पीछे तृणमूल का ही हाथ है। जहाँ आमिर को मारा गया, वह जगह एसडीपीओ कार्यालय से ज्यादा दूर नहीं है।”
पश्चिम बंगाल: बीजेपी कार्यकर्ता की बेरहमी से हत्या, पार्टी ने TMC पर लगाया आरोप
हालाँकि, तृणमूल के लोगों ने इन अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव के समय से ही भाजपा के लोग तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हमला कर रहे हैं। भाजपा ने राजमार्ग जाम कर शेख आमिर के हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार करने की माँग की। पुलिस ने इस मामले में अब तक दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है।
इस्लामिक स्टेट का सरगना अबु बकर बगदादी अमेरिका के एक विशेष अभियान में मारा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को ह्वाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बगदादी कुत्ते की मौत मारा गया।
इस अभियान में अमेरिकी जवानों को किसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़ा। ट्रंप ने बताया कि बगदादी के साथ उसके तीन बच्चों, दो बीवी और एक सुरक्षा गार्ड भी मारा गया। इस सफल मिशन के लिए उन्होंने रूस, तुर्की और सीरिया का शुक्रिया भी अदा किया। साथ ही बताया कि इस ऑपरेशन से अमरीकी सेना को ‘बहुत सी संवेदनशील जानकारियाँ और चीज़ें’ भी मिली हैं।
संवदादाताओं से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “बगदादी को जिंदा या मुर्दा पकड़ना हमारी सरकार की सबसे पहली राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता थी। अमरीकी सेना के विशेष बलों ने उत्तर पश्चिम सीरिया में रात में एक साहसी और जोखिम भरे अभियान को अंजाम दे शानदार कामयाबी हासिल की।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने जानकारी दी कि शनिवार को स्पेशल फ़ोर्सेस के रेड (छापेमारी) के बाद बग़दादी ने पहले कायरों की तरह भागने की कोशिश की और आखिर में एक सुरंग में जाकर खुद को उड़ा लिया। धमाके में उसके तीन बच्चे भी मारे गए। धमाकों के बाद शरीर के चिथड़े उड़ गए। डीएनए टेस्ट से उसकी पहचान सुनिश्चित की गई।
ट्रंप ने कहा, “वह एक दहशतगर्द था, जिसने हमेशा लोगों को डराने की कोशिश की। लेकिन अपनी ज़िंदगी के आख़िरी लम्हों में ख़ुद बेहद डरा और घबराया हुआ था। अमरीकी सेना ने उसका पीछा किया और मौत के मुॅंह तक पहुँचाया। वह सुरंग में गिरकर कुत्ते की मौत मरा।”
#WATCH US President Donald Trump: He (Abu Bakr al-Baghdadi) will never again harm another innocent man, woman or child. He died like a dog, he died like a coward. The world is now a much safer place. pic.twitter.com/8NB69yA3b1
गौरतलब है कि अमेरिका को बगदादी की काफी लंबे समय से तलाश थी। बीते दिनों कई बार उसके मारे जाने की खबरें मीडिया की सुर्खियाँ बन चुकी हैं, लेकिन कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई थी। ट्रंप द्वारा उसे मारे जाने की पुष्टि किए जाने के बाद विभिन्न देशों के नेताओं ने इसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक मोड़ करार दिया है।
महाराष्ट्र में भाजपा से 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी मॉंग रही शिवसेना को रामदास रामदास आठवले ने खरी-खरी सुनाई है। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के प्रमुख अठावले ने कहा है कि भाजपा मुख्यमंत्री का पद अपने सहयोगी को देगी नहीं, इसलिए शिवसेना को डिप्टी सीएम का पद स्वीकार लेना चाहिए। आरपीआई एनडीए का घटक है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है। हालॉंकि अपने दम पर वह बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। नतीजों के बाद से ही उसकी सहयोगी शिवसेना 2.5 साल के लिए सीएम पद मॉंग रही है। वह इस मसले पर बकायदा लिखित आश्वासन चाहती है।
Union Minister Ramdas Athawale: I don’t think BJP will agree for rotational Chief Minister, but the position of Deputy CM can be given to Shiv Sena for 5 years. I think Shiv Sena should accept the Dy CM’s position for Aaditya Thackeray and Devendra Fadnavis should be CM. pic.twitter.com/fG2TdUTThI
आठवले ने कहा, “बीजेपी रोटेशन आधारित सीएम पद के लिए सहमत नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री का पद शिवसेना को दिया जा सकता है। आदित्य ठाकरे के लिए उपमुख्यमंत्री पद पर शिवसेना को मान जाना चाहिए। फडणवीस मुख्यमंत्री का पद सँभाले।”
आठवले ने कहा कि उनका कहना यह है कि भाजपा और शिवसेना को साथ आना चाहिए, क्योंकि जनता का जनादेश उनके साथ है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि निश्चित रूप से एनडीए (NDA) को उतनी सीटें नहीं मिलीं, जितनी अपेक्षित थीं, लेकिन फिर भी बहुमत है।
Shiv Sena should accept Deputy CM post for Aditya Thackeray for 5 years: Ramdas Athawale
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर निश्चित रूप से भाजपा का दावा बनता है। आठवले ने कहा कि वह दोनों पार्टियों से बात करेंगे और बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे को हल करने के लिए कहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले चार-पाँच दिनों में दोनों पार्टी उचित निर्णय पर पहुँच जाएगी।
Maharashtra: Independent MLA Rajendra Raut from Barshi constituency met CM Devendra Fadnavis and extended his support to Bharatiya Janata Party (BJP). pic.twitter.com/50jMG5Yrt7
इस बीच, बरसी निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय विधायक राजेंद्र राउत ने फडणवीस से मुलाकात की और भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन दिया। बीजेपी की बागी विधायक गीता जैन ने भी फडणवीस को अपना समर्थन दिया है। बता दें कि गीता ने ठाणे में भयंदर निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार नरेंद्र मेहता के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।
Maharashtra: BJP rebel MLA Geeta Jain met CM Devendra Fadnavis today and extended her support to BJP. She had contested against BJP’s candidate Narendra Mehta from Mira Bhayandar constituency in Thane. pic.twitter.com/isC7nUPdSN
इसके साथ ही युवा स्वाभिमान पार्टी ने भी फडणवीस को खत लिखकर अपना समर्थन देने की बात कही है। रवि राणा अमरावती के बडनेरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। इस चुनाव में उन्होंने शिवसेना के प्रीति संजय को 15 हजार से अधिक वोटों से हराया है।
Yuva Swabhiman Party MLA Ravi Rana writes to Devendra Fadnavis offering his unconditional support to BJP. Ravi Rana is MLA from Badnera Assembly constituency in Amravati, he defeated Shiv Sena’s Band Priti Sanjay by a margin of 15,541 votes. #MaharashtraAssemblyPollspic.twitter.com/tfUzO3ZRf6
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को पूर्ण बहुमत है। 288 सीटों पर हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी की 105 और शिवसेना 56 सीटें आई हैं, जबकि कॉन्ग्रेस ने 44 और एनसीपी ने 54 सीटों पर जीत दर्ज की।
एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म उद्योग से जुड़े मुंबई के मलाड पश्चिम के रहने वाले विश्व भानू ने फेसबुक पर अपने पड़ोसियों, जो कि दूसरे मजहब से हैं, की असहिष्णुता के बारे में लिखा। अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि दिवाली के मौक़े पर सोसायटी के लोग उन्हें और उनकी पत्नी को घर में दीये जलाकर रोशनी करने और रंगोली बनाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। भानू ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनकी सोसायटी के लोगों ने न सिर्फ उनके घर की लाइट्स को नष्ट किया बल्कि बाक़ी लगी लाइट्स को हटाने के लिए मजबूर भी किया।
इस मामले में मालवानी पुलिस स्टेशन में एक शिक़ायत दर्ज की गई है जिसे OpIndia.com द्वारा एक्सेस किया गया है।
विश्व भानु द्वारा दर्ज कराई गई शिक़ायत
OpIndia.com ने भानु से संपर्क किया और मामले की पूरी जानकारी जुटाई। भानु ने OpIndia.com को बताया कि वह मलाड पश्चिम की सोसायटी में रहते हैं, जो मालवानी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है। जिस सोसायटी में वो रहते हैं वो कथित अल्पसंख्यक बहुल इलाका है वहाँ सिर्फ़ उसी का एकमात्र हिन्दू परिवार रहता है।
कट्टरपंथियों के अत्याचार का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब भानु की पत्नी दिवाली के त्योहार पर घर सजाने के लिए नई लाइट्स ख़रीद कर लाईं। लेकिन जैसे ही उन्होंने घर सजाने के लिए लाइट्स लगाईं, वैसे ही इलाक़े के कट्टरपंथी उसी जगह पर आ गए और जलती हुई इलेक्ट्रिक लाइट्स हटा दीं। भानु की पत्नी ने दावा किया कि जिस समय लाइट्स हटाई गईं उस समय वहाँ आसपास कुछ बच्चे भी खेल रहे थे, उन्हें करंट लग सकता था।
मजहबी भीड़ लाइट्स को हटाने के लिए आगे बढ़ी और तारों को खोल दिया। ऐसा करते समय लोगों को करंट भी लग सकता था। इस दौरान महिलाओं और बच्चों ने भी भानु के परिवार को प्रताड़ित किया, उन्हें तरह-तरह के ताने और अभद्र अपशब्द भी कहे। आक्रामक हुई भीड़ ने दावा किया कि हिन्दू हर चीज में मूत्र मिलाते हैं और उनके स्थान पर भोजन नहीं करना चाहिए। हिन्दू दंपत्ति को इस मामलों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें मजबूर किया गया कि वो अपने घर से लाइट्स को हटाएँ।
विश्व भानु द्वारा दर्ज कराई गई शिक़ायत
अपनी शिक़ायत में, विश्व भानु ने लिखा:
“हर साल की तरह, मेरी पत्नी प्रियंका शर्मा को मोमबत्ती जलाने और दिवाली पर अपनी रंगोली बनाने से रोका गया है। असामाजिक तत्व जो सोसायटी में रहते हैं, जहाँ रेहान पेटीवाला, सलीम और मुस्तफा ने लाइट्स तोड़ दीं। हर साल वे ऐसा करते हैं और यहाँ तक कि हमारे भगवान और देवी-देवताओं का भी मजाक उड़ाते हैं। बकरा ईद पर, वे हमें अपना दरवाज़ा खुला रखने के लिए मजबूर करते हैं और वे हमारे घर के सामने बकरियों का वध करते हैं जबकि वो यह काम कहीं और भी जाकर कर सकते हैं। लेकिन, मैंने कभी कुछ नहीं कहा क्योंकि यह उनका त्योहार है। क्योंकि हम हिन्दू हैं, हमारा मज़ाक उड़ाया जाता है, दबाव डाला जाता है और ऐसी स्थिति बनाई जाती है कि हम जल्द ही इस क्षेत्र को छोड़ दें। छोटी-छोटी बातों के लिए, वे हमसे लड़ने आते हैं। मैं ज़्यादातर शूटिंग के लिए घर से बाहर रहता हूँ, लेकिन मैं अपनी पत्नी को लेकर काफ़ी चिंतित हूँ।”
इसी तरह की घटना का सामना उन्होंने पिछले साल भी किया था। उन्होंने एक रंगोली बनाई थी और उसे आस-पड़ोस के लोगों ने अपने पैरों से ख़राब कर दिया था। भानु ने बताया कि सिर्फ़ दिवाली ही नहीं बल्कि होली के दौरान भी वे त्योहार को ठीक से नहीं मना सकते। यही हाल दशहरा और शिवरात्रि का भी है। भानु ने ऑपइंडिया को बताया कि वे हमेशा ईद जैसे त्योहारों के दौरान अपने पड़ोसियों के साथ समझौता करते हैं, लेकिन वो हिन्दू त्योहारों के दौरान कभी अच्छा व्यवहार नहीं करते।
अपडेट: ऑपइंडिया ने मुंबई पुलिस से संपर्क साधने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद हमने फिर से विश्व भानू से संपर्क कर यह जानना चाहा कि इस मामले में पुलिस ने अब तक क्या किया है। भानू ने बताया कि पुलिस आई तो जरूर थी लेकिन पूरे घटनाक्रम को उन्होंने अपनी ओर से झूठलाने की कोशिश की। फोन पर बात करते समय भानू पुलिस स्टेशन में ही थे लेकिन आश्चर्यजनक बात यह रही कि वहाँ भी घटनाक्रम से संबंधित आरोपित पड़ोसी आकर उन्हें धमकी दे रहा था कि वो भविष्य में उनका अहित करेगा।
पुलिस स्टेशन में भानू, आरोपित और बिल्डिंग का सेक्रटरी मौजूद था। बिल्डिंग के सेक्रटरी ने भी घटना को दबाने की कोशिश की। उसका कहना था कि यह दो पड़ोसियों में बहस के कारण हुआ। सेक्रटरी ने बताया कि आरोपित का कहना था कि दिवाली में लगने वाले लाइट से इलेक्ट्रिक शॉक लगने के डर के कारण उसे लगाने से मना किया गया था। भानू ने बताया कि बिल्डिंग सेक्रटरी भला इंसान है और वह सांप्रदायिक तनाव को कम करने के लिए मामले को शांत करना चाह रहा था। भानू ने यह भी बताया कि उस पर फेसबुक पोस्ट डिलीट करने का भी दबाव बनाया जा रहा है। फोन के आखिरी में भानू ने आशंका जाहिर की कि वो शायद डर के कारण फेसबुक पोस्ट डिलीट भी कर देगा और वह व्यक्तिगत मजबूरी में उस बिल्डिंग में रहने को मजबूर है।
अयोध्या विवाद पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाने वाला है। कॉन्ग्रेस के नेता अभी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं और संभलकर बयान दे रहे हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा के राजनीति विचारों और सिद्धांतों से सुर मिलाना शुरू कर दिया है।
कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जतिन प्रसाद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि अयोध्या में राम मंदिर बने। उन्होंने कहा कि वे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होते देखना चाहते हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही सर्वोपरि है और वह सब के लिए मान्य होगा।
दिलचस्प बात यह है कि शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को दिल्ली में पार्टी अध्यक्षा सोनिया गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की बैठक हुई थी। बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि एनआरसी, अनुच्छेद 370 और अयोध्या रामजन्म भूमि मसले पर पार्टी की राय एकमत हो। लेकिन लगता है कि पार्टी नेता अब कॉन्ग्रेस के पॉलिटिकल लाइन से अलग जा कर निजी विचारों को प्राथमिकता देने का फैसला कर बैठे हैं।
हालाँकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब नेताओं के विचार अपनी ही पार्टी के मूल विचारों से इतर हो। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस नेता व असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने अयोध्या विवाद को लेकर अलग सुर में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि इसमें कोई संशय नहीं कि अयोध्या विवाद का मामला वाकई बहुत संवेदनशील है जिस पर किसी भी फैसले पर पहुँचने से पहले एक स्वस्थ बातचीत की जरूरत है।
कॉन्ग्रेस के बदले तेवर लोकसभा चुनाव के बाद से ही लगातार देखे जा रहे हैं। पार्टी अनुच्छेद 370 को और एनआरसी जैसे विषयों को लेकर यू टर्न लेने से भी नहीं चुकी है। अब अयोध्या मामले पर पार्टी के नेताओं के सुर बदले-बदले दिखाई दे रहे हैं।
कॉन्ग्रेस नेता जतिन प्रसाद ने द संडे एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि एक हिंदू होने के नाते, वह चाहते हैं कि वहाँ मंदिर बने। लेकिन उस भूमि पर कोई भी फैसला तो कानूनी तौर पर ही निकलेगा। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह सभी के लिए मान्य होगा। इस पर फैसला जितनी जल्दी संभव हो सके, आ जाए ताकि सभी वाद-विवाद और बातों पर विराम लग जाए। उन्होंने कहा कि यह समय है कि सभी समुदाय एक साथ शांति से रहें।
वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी जितिन प्रसाद के बयान से इतेफाक रखते हुए सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का पक्ष बिल्कुल साफ है। यह एक भूमि विवाद से जुड़ा मसला है और इस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही अंतिम फैसला मानना होगा। इस पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ खड़ी रहे।
मगर जब उनसे उनके निजी विचार के बारे में पूछा गया तो रावत ने कहा कि सभी भारतीय चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में हो। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप किसी मुस्लिम भाई से भी पूछेंगे तो वह भी अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर कहेगा कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो कहाँ बनेगा?
इराकी स्टेट टीवी ने एक फुटेज जारी किया है जिसमे दावा किया जा रहा है कि इस्लाममिक स्टेट के सरगना अबू-बकर-अल बगदादी को अमेरिका ने मार गिराया है। बता दें कि आज सुबह ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प ने अपने ट्वीट के ज़रिए कहा था कि आज कुछ बड़ा होने वाला है। इसके बाद समाचार एजेंसियों के हवाले से खबर आई थी कि आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के सरगना बगदादी पर अमेरिका ने कार्रवाई की है। बता दें कि आतंकवाद से निपटने के लिए अमेरिका लम्बे समय से कार्रवाई करता आ रहा है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय भी इस्लामिक आतंकवाद को रोकने के ड्रोन हमले तेज़ हुए थे।
ऐसी ही एक कार्रवाई को आज अमेरिका ने अंजाम दिया है जिसका प्रसारण इराक के एक सरकारी मीडिया ने किया। इस वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि खून से सने माँस के चीथड़े-कपड़े यहाँ वहाँ पड़े हुए हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी संगठन आईएस के सरगना बगदादी की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि यह फुटेज उसी जगह की है जहाँ अमेरिकी सेना ने रात में बम गिराए थे।
Something very big has just happened!
— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) October 27, 2019</blockquote
बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम में इराक की ख़ुफ़िया एजेंसी की मदद से बगदादी की लोकेशन ट्रेस की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी और एक अन्य सूत्र के हवाले से यह कहा गया कि बगदादी की मौत की पुष्टि होनी अभी बाकी है। हालांकि डीएनए और बायोमेट्रिक जांच पूरी हो चुकी है। एक रक्षा अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया है कि बगदादी ने हमले के दौरान खुद को उड़ा लिया। हालाँकि अमेरिका इस पर दावा ज़रूर कर रहा है मगर इसपर अभी संशय बना हुआ है। बता दें कि बगदादी ने खुद को खलीफा भी घोषित कर रखा था और वह सार्वजनिक तौर पर सिर्फ एक बार जुलाई 2014 में मोसुल के अल-नूरी मस्जिद में नजर आया था और इराक तथा सीरिया में इस्लामिक स्टेट के जन्म की घोषणा की थी, इस मस्जिद पर इराकी सुरक्षाबलों ने 2017 में कब्जा कर लिया था।
The United States has carried out an operation targeting Islamic State leader Abu Bakr al-Baghdadi: Reuters (file pic) pic.twitter.com/tH1KUmDXaG
बता दें कि यह जिहादी संगठन पूरी दुनिया में इस्लाम के प्रचार के बहाने आतंक और खून-खराबा फ़ैलाने के लिए कुख्यात है। इसी साल एक अप्रैल को जारी एक वीडियो में बगदादी को देखा गया था। यद्यपि यह स्पष्ट नहीं है कि यह वीडियो कब फिल्माया गया है मगर यह तय है कि पाँच साल में पहली बार बगदादी किसी वीडियो के ज़रिए नज़र आया है। अपने इस वीडियो में वह पूर्वी सीरिया के बगूज़ में चल रहे संघर्ष ख़त्म होने की बात कहता नज़र आ रहा है। साथ ही बता दें कि कुछ समय पहले श्रीलंका में हुए आतंकी हमले में भी इसी संगठन के संलिप्त होने की बात कही जा रही है। श्रीलंका में तीन अलग अलग शहरों में सीरियल बम धमाके हुए थे। इस दौरान करीब 500 से अधिक लोग घायल हो गए थे तो वहीं 300 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में पंजाब के फगवाड़ा से नवनिर्वाचित विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है। नवनिर्वाचित कॉन्ग्रेस विधायक के ख़िलाफ़ शिक़ायत चुनाव जीतने के दो दिन बाद सामने आई।
ख़बर के मुताबिक़, कॉन्ग्रेस विधायक धालीवाल ने कथित तौर पर पोलिंग बूथ 184 के अंदर अपनी गर्दन के चारों ओर पार्टी के प्रतीक के साथ एक दुपट्टा लपेटा हुआ था। यहीं पर उन्होंने वोट भी डाला था। नौकरशाह से राजनेता बने धालीवाल को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-130 (मतदान केंद्रों में या उसके निकट मतदान केंद्रों में निषेध) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े तेज़ी से वायरल हो रहा था। भाजपा प्रत्याशी राजेश बाघा की शिक़ायत के आधार पर चुनाव आयोग ने धालीवाल को नोटिस जारी किया और रिटर्निंग ऑफिसर को जाँच करने और रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया था।
अहमद द्वारा सौंपी गई जाँच रिपोर्ट के आधार पर, पुलिस ने अब धालीवाल के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है। फगवाड़ा के एसपी मनविंदर सिंह ने भी इसकी पुष्टि की है।
हाल ही में हुए फगवाड़ा उपचुनाव में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार बलविंदर सिंह धालीवाल ने भाजपा प्रत्याशी बाघा को 26,116 मतों के अंतर से हराया था। मई में, होशियारपुर से विधायक सोम प्रकाश के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद यह सीट अब खाली हो गई।
हाल ही में संपन्न चार विधानसभा सीटों- पंजाब में दखा, फगवाड़ा, जलालाबाद और मुकेरियन में हुए उपचुनाव में, कॉन्ग्रेस ने तीन जबकि भाजपा ने दखा सीट जीती।