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रिटायर होने वाले हैं आर्मी चीफ, इसलिए PoK पर कर रहे बयानबाजी: कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को आतंकवादियों के नियंत्रण वाला क्षेत्र करार दिया। उन्होंने कहा था कि PoK को पाकिस्तानी सरकार नहीं नियंत्रित नहीं करती। आतंकी और उनके संगठन इस इलाके को चलाते हैं।

रावत का यह बयान कॉन्ग्रेस के गले नहीं उतर रहा। पार्टी ने सेना प्रमुख के बयान को राजनीति से प्रेरित करार दे दिया। कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी का कहना है कि सेना प्रमुख जल्द रिटायर होने वाले हैं, इसीलिए ऐसे बयान दे रहे हैं।

अल्वी ने कहा कि जनरल रावत सेनाध्यक्ष हैं। उन्हें इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ को राजनीतिक बयान नहीं देना चाहिए। ये जिम्मेदारी सरकार की है, प्रधानमंत्री की है, रक्षा मंत्री की है। मुझे नहीं मालूम कि इस तरीके का बयान वे क्यों दे रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि आतंकवादी पीओके में सक्रिय हैं। लेकिन वे सेनाध्यक्ष हैं। सरकार से इजाजत ले वे पीओके पर हमला करें और उसे वापस कश्मीर में शामिल करें। सिर्फ बयान देने का कोई मतलब नहीं। मुझे लगता है कि उनका रिटायरमेंट शायद नजदीक है।”

अल्वी के बयान पर भाजपा ने कहा है कि गैरवाजिब सवाल उठाने की कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत है। भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी ने आर्मी चीफ के बयान को जायज बताते हुए कहा “पाक अधिकृत कश्मीर हो या बाल्टिस्तान, ये सारा भारत का हिस्सा है जिस पर 1948 में पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई कर कब्जा किया और आज तक अवैध कब्जा बनाए रखा है। ”

NDTV ने मॉंगी माफी: असम के अविवाहित CM को बताया था 6 बच्चों का बाप

ऑपइंडिया ने अपने फ़ैक्ट चेक में शुक्रवार (25 अक्टूबर) को NDTV की ग़लत रिपोर्टिंग का ख़ुलासा किया था। NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा कपूर ने असम में सरकारी नौकरियों के लिए दो-बच्चे से संबंधित ख़बर को पढ़ते हुए दावा किया था कि दो से अधिक बच्चे वाले लोग असम में सरकारी नौकरी पाने के पात्र नहीं होंगे, जबकि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के ख़ुद 6 बच्चे हैं।

वास्तव में, NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा ख़ुद सच्चाई से कोसों दूर थीं, क्योंकि उन्हें नहीं मालूम था कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के 6 बच्चे नहीं हैं। असम के मुख्यमंत्री अविवाहित हैं और एकल जीवन जीते हैं। अब इस ख़बर पर अपनी ग़लती को स्वीकारते हुए NDTV ने माफ़ी माँगी है। NDTV ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा, “हमें बेहद अफ़सोस है कि NDTV के एक एंकर ने अनजाने में कहा कि असम के मुख्यमंत्री
सर्बानंद सोनोवाल के 6 बच्चे थे, जबकि यह सर्वविदित है कि वो अविवाहित हैं।”

बता दें कि बड़े ही नाटकीय अंदाज़ में, सोनल मेहरोत्रा ​​कपूर ने दर्शकों को बताया था कि दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री के ख़ुद के 6 बच्चे हैं, लेकिन उन्होंने इस दो-बाल नीति को लागू करने का फ़ैसला किया है।

इस वीडियो को NDTV ने माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर भी शेयर किया था जिसे बाद में डिलीट कर दिया। लेकिन तकनीक के इस दौर में अगर वीडियो शेयर करने और डिलीट करने का ऑप्शन है तो समय रहते डाउनलोड करने का अवसर भी इसी तकनीक ने दिया है। ऊपर आप उसी डाउनलोड किए वीडियो को देख सकते हैं।

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब NDTV के एंकर्स ने झूठ फैलाने में दिलचस्पी ली हो। इससे पहले 2018 में NDTV ने अपने सोशल चैनल्स पर ‘असम बीजेपी सांसद के भतीजे, नागरिक सूची में नहीं हैं, ऐसा भी होता है’ हेडिंग के साथ एक न्यूज़ अपलोड और शेयर की थी। इस फ़र्ज़ी ख़बर में बीजेपी सांसद बिजोया चक्रवर्ती और जयदीप फुकन की फ़ोटो थी। तब जयदीप ने ट्विटर पर दावा किया था कि उनका नाम NRC सूची में है और वे भाजपा सांसद के भतीजे नहीं हैं। जयदीप ने NDTV को एक मेल भेज इस अप्रासंगिक न्यूज़ से अपनी फ़ोटो को तुरंत हटाने को कहा था।

22 साल पहले 11 महीने पीएम रहे देवगौड़ा नहीं रख पाएँगे 2 बंगला, वीपी हाउस खाली करना होगा

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा लुटियन दिल्ली में अब एक ही सरकारी आवास रख पाएँगे। केंद्र सरकार ने दूसरा आवास उन्हें खाली करने को कहा है। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि देवगौड़ा केवल एक सरकारी आवास रखने के ही हक़दार बताया हैं।

16वीं लोकसभा के दौरान वरिष्ठ सांसद के तौर पर देवगौड़ा को सरकारी आवास आवंटित किया गया था। 17वीं लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पूर्व सांसदों से सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा गया था, इस प्रक्रिया के तहत देवगौड़ा को भी संपदा निदेशालय ने गत सितंबर में बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया था।

हिन्दुस्तान ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि देवगौड़ा ने अपने जवाब में पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में ख़ुद को लुटियन दिल्ली में सरकारी आवास का हक़दार बताते हुए अनुरोध किया था कि उन्हें सफ़दरजंग लेन स्थित बंगले का आवंटन बरक़रार रखा जाए। निदेशालय ने देवगौड़ा के अनुरोध को तो मान लिया, लेकिन प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्हें कार्यालयी उपयोग के लिए आवंटित वीपी हाउस खाली करने को कहा है।

निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नियम कहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री केवल एक ही सरकारी आवास (टाइप 7) के हक़दार हैं, इसलिए उन्हें दूसरा सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा गया है। संयुक्त मोर्चा सरकार के दौरान देवगौड़ा जून 1996 से 21 अप्रैल 1997 तक पीएम पद पर रहे थे।

ख़बर के अनुसार, 24 अक्टूबर तक सरकारी आवास खाली करने वाले पूर्व सांसदों की संख्या 25 थी। नोटिस के बावजूद बंगला नहीं छोड़ने वालों में पूर्व सांसद तारिक अनवर, जय प्रकाश नारायण यादव, गायकवाड़ रवींद्र विश्वनाथ और धर्मेंद्र यादव समेत क़रीब दो दर्जन पूर्व सांसद शामिल हैं।

निदेशालय ने कठोरता से इनसे बंगला खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। एक अधिकारी ने बताया कि दिवाली के कारण पर्याप्त पुलिस बल न मिल पाने की वजह से दिवाली के बाद बल पूर्वक बंगले खाली कराने की कार्रवाई तेज़ की जाएगी।

ग़ौरतलब है कि 17वीं लोकसभा में चुनकर नहीं आ सके 230 सांसदों को जुलाई में सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था। लेकिन, आधे से ज्यादा पूर्व सांसदों ने पानी और बिजली कनेक्शन काट दिए जाने की चेतावनी के बाद सरकारी आवास खाली किया था।

गोपाल कांडा को बचा रही रही केजरीवाल सरकार को अदालत से फटकार, कहा- ‘अजीब स्थिति है’

हरियाणा की कॉन्ग्रेसी सरकार में मंत्री रहे गोपाल कांडा अभी काफी चर्चा में हैं। कारण है कि बिन मॉंगे उनका भाजपा को समर्थन का ऐलान करना। कांडा हरियाणा के सिरसा से विधायक चुने गए हैं। हालॉंकि भाजपा ने न तो उनसे समर्थन मॉंगा था और न ही लिया, लेकिन उनके दागदार अतीत का हवाला देकर भाजपा को घेरने की भरपूर कोशिश हुई। अब जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है उससे सवाल उठने लगा है कि क्या कांडा को दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार बचा रही है? क्या दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार सिरसा के नव-निर्वाचित विधायक गोपाल कांडा को बचा रही है?

असल में, दिल्ली की एक अदालत में गोपाल कांडा के ख़िलाफ़ एक एयर होस्टेस की आत्महत्या से जुड़ा मामला चल रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में अदालत पब्लिक प्रोसिक्यूटर की अनुपस्थिति से बेहद नाराज है। अदालत ने आपत्ति जताते कहा है कि ये अजीब स्थिति है, जहाँ सरकार अभियोजन में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखा रही है। जुलाई 25, 2013 को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद कांडा के ख़िलाफ़ बलात्कार और अप्राकृतिक यौनाचार के आरोप हटा दिए गए थे। दिसंबर 6, 2013 को ट्रायल कोर्ट ने कांडा के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने सम्बंधित मामला चलाने का फ़ैसला लिया।

इस घटना को 6 वर्ष हो गए हैं। मामला एक विशेष अदालत में चल रहा है, जहाँ केवल जनप्रतिनिधियों के ख़िलाफ़ ही आपराधिक मामले चलाए जाते हैं। इस मामले में कोर्ट में आधे-अधूरे सबूत पेश किए जा रहे हैं। गवाहों को बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद वो पेश नहीं हो रहे। अव्वल तो ये कि पब्लिक प्रोसिक्यूटर ही सुनवाई से गायब रहते हैं। 3 अक्टूबर को जस्टिस अजय कुमार ने प्रॉसिक्यूशन डायरेक्टर को समन कर के पूछा कि स्पेशल प्रोसिक्यूटर अदालत में सुनवाई के समय क्यों नहीं पेश हो रहे? उन्हें दिल्ली पुलिस के लिए पेश होना है।

अदालत ने फटकारते हुए कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त किए गए पब्लिक प्रोसिक्यूटर 23 सितम्बर के बाद से ही पेश नहीं हुए हैं। अदालत ने अपना सन्देश दिल्ली सरकार तक पहुँचाने को कहा। अदालत ने कहा कि अजीब स्थिति है जब दिल्ली सरकार इस केस में गंभीरता दिखा ही नहीं रही है। कोर्ट ने कहा, “हमें लगता है कि प्रॉसिक्यूशन डायरेक्टर ने राज्य सरकार की तरफ़ से केस लड़ने के मामले में सारी जिम्मेदारियों से हाथ धो लिया है।” अदालत का इशारा अरविन्द केजरीवाल सरकार की तरफ था, क्योंकि पब्लिक प्रोसिक्यूटर राज्य सरकार ने असाइन किया है और उसे दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश होना होता है।

अदालत ने अपनी आपत्ति प्रॉसिक्यूशन डायरेक्टर के जरिए अरविन्द केजरीवाल सरकार तक पहुँचा दी। एक गवाह तो हैदराबाद से सुनवाई में शामिल होने आया था लेकिन, पब्लिक प्रोसिक्यूटर के न आने से उसे निराश होना पड़ा। कोर्ट ने इसे लेकर नाराज़गी जताई। इस मामले में दिल्ली सरकार के साथ-साथ कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की भी खिंचाई की है। कोर्ट की फटकार के बाद ख़बरें आई थीं कि दिल्ली सरकार ने नया पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त किया है।

उधर आम आदमी पार्टी ने गोपाल कांडा का नाम लेकर भाजपा पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ वाले राज्य में भाजपा एक बलात्कार आरोपित का समर्थन ले रही है। आप ने तो यहाँ तक कहा कि दिल्ली में घर-घर जाकर बताया जाएगा कि उनकी बहू-बेटियाँ भाजपा से असुरक्षित हैं। गौरतलब है कि हरियाणा लोकहित पार्टी के एकमात्र विधायक गोपाल कांडा को सरकार में शामिल करने से भाजपा ने साफ़ इनकार कर दिया है। हरियाणा के खेल मंत्री और हालिया चुनाव में छठी बार विधायक चुने गए अनिल विज ने कहा है कि कांडा को सरकार में शामिल करने का कोई सवाल ही नहीं उठता और न ही भारतीय जनता पार्टी उनका समर्थन ले रही है।

शिव सेना को कॉन्ग्रेस बार-बार डाल रही दाना, चुगने आ ही नहीं रहे उद्धव ठाकरे

कॉन्ग्रेस ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बड़े दलों में सबसे छोटी 44 विधायकों वाली पार्टी बन कर उभरने के बाद भी सरकार बनाने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। जहाँ उससे ज़्यादा सीटें (54 विधायक) जीतने वाली राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी ने सत्ता लोलुपता छोड़ कर अगले 5 साल के लिए विपक्ष में ही रहने की घोषणा कर दी है, वहीं कॉन्ग्रेस अभी भी बीजेपी की सहयोगी शिव सेना के साथ मिल कर सरकार बनाने के सपने देख रही है।

कॉन्ग्रेस नेता बार-बार शिव सेना को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में अब पूर्व मंत्री विजय वडेट्टीवार ने इशारों-इशारों में कहा है कि कॉन्ग्रेस शिव सेना को 5 साल के लिए मुख्यमंत्री का कुर्सी सौंपने को तैयार है। बीजेपी से शिव सेना 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी माँग रही है। इस संबंध में वडेट्टीवार ने कहा, “गेंद बीजेपी के पाले में है। अब यह शिव सेना पर है कि वह 5 साल के लिए सीएम की कुर्सी चाहती है या 2.5 साल की मॉंग पर बीजेपी की प्रतिक्रिया का इंतजार करना चाहती है। यदि शिव सेना का प्रस्ताव हमारे पास आया तो हम हाईकमान से उस पर चर्चा करेंगे।”

शिव सेना को लुभाने की कोशिश करने वाले वडेट्टीवार पहले कॉन्ग्रेसी नहीं हैं। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बाला साहेब थोराट ने भी कहा था, हमें अभी तक शिव सेना की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। यदि उसका प्रस्ताव आता है तो हम पार्टी हाईकमान से इस मसले पर चर्चा करेंगे।

दिलचस्प यह है कि कॉन्ग्रेस यह दॉंव ऐसे वक्त में चल रही है जब उसकी सहयोगी एनसीपी ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि वे विपक्ष में बैठेंगे। शिवसेना के साथ सरकार नहीं बनाएँगे। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने शनिवार को कहा, “मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूॅं कि हम विपक्ष में बैठेंगे। मजबूत विपक्ष की भूमिका का निवर्हन करेंगे। सरकार गठन में हम कोई भूमिका नहीं निभाना चाहते। सरकार बनाने का जनादेश बीजेपी शिवसेना को मिला है।” उनसे पहले एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार भी सरकार में शामिल होने से मना कर चुके हैं

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि कॉन्ग्रेस की बात शिव सेना मान भी ले तो सरकार कैसे बनेगी। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत का नंबर है 145। कॉन्ग्रेस के 44 और शिवसेना के 56 विधायकों को मिलाकर यह संख्या 100 तक ही पहुॅंचती है। एनसीपी को 54 और बीजेपी को 104 सीटें मिली है। 29 अन्य जीते हैं, जिनमें ज्यादातर भाजपा के बागी हैं। बताया जा रहा है कि ये बीजेपी के साथ आने को तैयार बैठे हैं। यूॅं ही नहीं कहते बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना!

‘बाप-बेटी दोनों को एक ही अस्पताल में कैद रखो’ – इमरान खान के आदेश के बाद नवाज शरीफ को हार्ट अटैक

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दिल का दौरा पड़ा है। नवाज शरीफ पहले से ही लाहौर के सर्विसेज अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा है। दुखद यह है कि पाकिस्तान के पूर्व पीएम को दिल का दौड़ा तब पड़ा, जब इमरान सरकार ने नवाज की बेटी मरियम नवाज को भी उसी अस्पताल में ‘कैद’ रखने का आदेश दिया, जिसमें नवाज शरीफ को रखा गया है। इमरान को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि मरियम नवाज को जेल भेजने का उनकी सरकार के फैसले का जबरदस्त विरोध हुआ।

वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि दिल का दौरा पड़ने के बाद डॉक्टरों ने उन पर निगरानी और भी बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि ये दिल का दौरा माइनर है। मगर उनकी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।

नवाज शरीफ की हालत बेहद गंभीर है। शरीफ इस समय गंभीर इम्‍यून डिसऑर्डर से ग्रसित हैं और उनका प्‍लेटलेट्स भी खतरनाक स्‍तर पर पहुँच गया है। नवाज को शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को लाहौर हाई कोर्ट से जमानत दे दी गई है।

नवाज को चौधरी शक्कर मिल मामले में भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया गया है। इस मामले में उन्हें सात साल जेल की सजा सुनाई गई है। बीमारी के चलते पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने उन्हें चौधरी शक्कर मिल के मामले में जमानत दे दी है। उनका प्लेटलेट काउंट अचानक गिर गया था। जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नवाज के बेटे हुसैन नवाज ने बुधवार (अक्टूबर 23, 2019) को आरोप लगाया था कि उनके पिता को जेल में जहर दिया जा रहा है। नवाज भ्रष्टाचार के मामलों में लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद थे।

हुसैन ने आरोप लगाया है कि उनके पिता नवाज के शरीर से प्लेटलेट्स में कमी होने का कारण जहर देना भी हो सकता है। लंदन में रह रहे हुसैन ने पिता के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया। हुसैन ने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि उनके पिता की प्लेटलेट्स में कमी किसी तरह के “जहर” का परिणाम हो सकती है। उन्होंने लिखा कि अगर उनके पिता को कुछ होता है, तो आप जानते हो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? 

पीएमएल (एन) अध्यक्ष और नवाज के छोटे भाई शाहबाज शरीफ ने मंगलवार (अक्टूबर 22, 2019) को नवाज से मुलाकात करने के बाद ट्वीट किया था, “मैंने आज अपने भाई से मुलाकात की। मुझे उनकी तेजी से बिगड़ती हालत की बहुत चिंता हो रही है। सरकार को उदासीनता छोड़ उनके स्वास्थ्य को देखना चाहिए। मैं पूरे देश से मियाँ साहिब के लिए दुआ करने की अपील करता हूँ।”

सावरकर से कॉन्ग्रेस को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव भी याद आए

कॉन्ग्रेस वह पार्टी है जिसके नेता खुद को भी देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाज चुके हैं। देश के अमर क्रांतिकारियों को सत्ता में रहते हुए उसने कभी इसका हकदार ही नहीं माना। यहॉं तक कि जब महाराष्ट्र के चुनाव में बीजेपी ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने का वादा किया तो भी कॉन्ग्रेस इसकी आलोचना से पीछे नहीं रही। लेकिन, विधानसभा चुनावों की शिकस्त के बाद उसे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद आई है।

कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भारत रत्न से सम्मानित करने की माँग की है। साथ ही मोहाली स्थित हवाई अड्डे का नाम शहीद-ए-आज़म सिंह के नाम करने की भी अपील की है। उन्होंने इस पत्र को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है।

तिवारी ने पत्र में कहा है कि आगामी गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2020 के मौक़े पर इन तीनों शहीदों को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। साथ ही इन्हें आधिकारिक तौर पर ‘शहीद-ए-आज़म’ घोषित किए जाने का भी आग्रह किया है। 25 अक्टूबर के पत्र में तिवारी ने लिखा, “मैं इस तथ्य की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद का पुरज़ोर विरोध कर देशवासियों को आंदोलन के लिए प्रेरित किया। इसके बाद 23 मार्च, 1931 को तीनों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।”

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र बीजेपी ने अपने घोषणा-पत्र में वादा किया था कि अगर राज्य में सरकार बनी तो केंद्र सरकार से वीर सावरकर को भारत रत्न देने की अपील करेंगे। कॉन्ग्रेस के विरोध के बावजूद उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया में खुलकर कहा था कि सावरकर ने न केवल आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी, बल्कि वे देश के लिए जेल भी गए थे। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा,

“निजी तौर पर मैं सावरकर की विचारधारा से सहमत नहीं हूँ। लेकिन इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि वे एक काबिल व्यक्ति थे जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दलितों के अधिकार की लड़ाई लड़ी और देश के लिए जेल गए।”

सिंघवी ने स्वच्छता अभियान के प्रसार के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई कोशिशों की भी सराहना की। उन्होंने लिखा, “जहाँ हक़दार हों, वहाँ प्रशंसा की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाँधी जी के स्वच्छता के संदेशों को प्रसारित करने के लिए बॉलीवुड की मदद ली। इससे अधिकतर लोगों का ध्यान इस मुद्दे पर जाएगा।”

यह अँधकार पर प्रकाश की जीत का त्यौहार: ट्रम्प ने White House में मनाई दिवाली, हिन्दुओं को दी बधाई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हिन्दू, जैन, सिख और बौद्ध समुदायों को दिवाली की बधाई देते हुए कहा कि ये त्यौहार अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता का एक जीता-जागता उदाहरण है। ट्रम्प ने कहा कि प्रकाश का ये त्यौहार पूरे अमेरिका में मनाया जाता है और इससे पता चलता है कि धार्मिक स्वतंत्रता अमेरिका के मूल सिद्धांतों में से एक है। डोनाल्ड ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में दिवाली मनायई और दीप जलाए। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग भी पहुँचे। इस कार्यक्रम से मीडिया को दूर रखा गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुसार सभी धर्मों को अपने त्यौहार को अपनी आस्था और विश्वास से मनाने की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ख़ुद और अपनी पत्नी मेलेनिया की तरफ़ से लोगों को दिवाली की बधाई देते हुए कहा कि प्रकाश के इस त्यौहार को आप पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएँ। ट्रम्प ने कहा कि प्रकाश की अँधकार के ऊपर जीत ही इस त्यौहार के मूल में है और इसके लिए वो न सिर्फ़ अमेरिका बल्कि पूरे विश्व के हिन्दुओं, सिखों, जैनों और बौद्धों को शुभकामनाएँ देते हैं।

ट्रम्प ने दिवाली के बारे में आगे कहा कि ये ज्ञान की अज्ञानता के ऊपर और अच्छाई की बुराई के ऊपर जीत का त्यौहार है। वाइट हाउस की तरफ़ से जारी किए गए बयान में ट्रम्प ने कहा कि इस त्यौहार के दौरान लोग दिये जलाते हैं और परिवार एवं सगे-सम्बन्धियों के साथ धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेते है। उन्होंने कहा कि लोग रंग-बिरंगे प्रकाश की व्यवस्था करते हैं और पूजा करते हैं। भारत में दिवाली का त्यौहार रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को मनाया जाएगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति प्रतिवर्ष दिवाली से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे हैं। राष्ट्रपति चुने जाने से पहले आयोजित एक दिवाली कार्यक्रम में उन्होंने हिन्दुओं को भरोसा दिलाया था कि वो वाइट हाउस में हिन्दुओं के सबसे बड़े मित्र साबित होंगे। हाल ही में जब प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था, तब ट्रम्प ने उसमें मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। इस दौरान 60,000 लोगों के समक्ष दोनों नेताओं ने अपने सम्बोधन में एक-दूसरे की प्रशंसा करते हुए अमेरिका और भारत के रिश्तों की महत्ता पर बात की थी।

इधर दिल्ली में स्थित अमेरिकी दूतावास में भी दिवाली के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम देखने को मिला। पारम्परिक वस्त्रों में महिलाओं ने दूतावास के परिसर में नृत्य किया। इस दौरान अमेरिकी महिलाएँ नेहा कक्कर के गए ‘दिलबर-दिलबर’ गाने पर जम कर थिरकीं। इस गाने में नोरा फ़तेहि ने नृत्य किया था।

कर्नाटक में एनआरसी की तैयारी, बंगलुरु से धरे गए 30 बांग्लादेशी

कर्नाटक में अवैध अप्रवासियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बंगलुरु पुलिस ने बिना वैध वीज़ा के रह रहे 30 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। कार्रवाई शनिवार (26 अक्टूबर, 2019 को) की गई है। फॉरेनर्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कर इन्हें डिपोर्ट करने की तैयारी की जा रही है। पूरी कार्रवाई बंगलुरु पुलिस की क्राइम ब्रांच (सीसीबी, सिटी क्राइम ब्रांच) द्वारा की गई है

इसी महीने बीएस येद्दियुरप्पा की कर्नाटक सरकार ने राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स, एनआरसी) का प्रस्ताव दिया था। राज्य के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने इस आशय से घोषणा भी की थी। इसके अलावा उन्होंने बंगलुरु के लिए उसका खुद का ATS (एंटी टेरर स्क्वाड) बनाने की भी घोषणा की थी। गौरतलब है कि कर्नाटक के पास पहले से ही एक एटीएस पूरे प्रदेश के लिए है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कर्नाटक की भारतीय जनता पार्टी की सरकार राज्य में पहचान किए गए अवैध प्रवासियों को रखने के लिए डिटेंशन सेंटरों के विकास के बारे में योजना बना रही है। राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता गणेश कार्णिक ने इस बाबत सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था, “नियम के मुताबिक, पुलिस कथित प्रवासियों को हिरासत में नहीं ले सकती, लेकिन उन्हें देश से बाहर निकालना ज़रूरी है। कोई देश उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होगा, इसलिए उन्हें डिटेंशन सेंटरों में रखे जाने की ज़रूरत है।”

इस निर्णय को घोषणा करते हुए बोम्मई ने बताया था कि पुलिस को राज्य में रह रहे अवैध प्रवासियों का एक डेटाबेस बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि कर्नाटक देश के उन कुछ चुनिंदा राज्यों में है जहाँ अवैध प्रवासी एक बड़ी संख्या में आ कर बस जाते हैं।

असम में इसी साल 31 अगस्त 2019 को राज्य की एनआरसी सूची जारी की गई थी। इसमें 19 लाख से अधिक लोगों के नाम नागरिकता सूची से हटा दिए गए थे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने देश भर में राष्ट्रव्यापी एनआरसी का आह्वान किया था।

गोपाल कांडा से समर्थन माँगा था कॉन्ग्रेसी भूपिंदर सिंह हुड्डा ने, प्रियंका मार रही थी BJP को ताना

हरियाणा विधानसभा चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद हरियाणा लोकहित पार्टी के प्रमुख गोपाल कांडा ने खुलेआम भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया था। जिसको लेकर विपक्षी दलों ने काफी बवाल काटा। हालाँकि, तमाम कयासों और अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ये साफ कर दिया है कि हरियाणा में पार्टी जेजपी के साथ मिलकर सरकार बनाएगी। पार्टी अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी।

वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने स्वीकार किया कि वे प्रदेश में सरकार बनाने के लिए सारे विपक्षी दलों के पास गए। इसमें हरियाणा लोकहित पार्टी के प्रमुख गोपाल कांडा का भी नाम शामिल है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “हरियाणा के लोगों का जनादेश राज्य सरकार के खिलाफ है। मैंने पहले ही पूरे विपक्ष से अपील की है कि लोगों के जनादेश का सम्मान किया जाए और हम सभी को हाथ मिलाना चाहिए – चाहे वह जेजेपी, आईएनएलडी, निर्दलीय हों या कांडा का हरियाणा लोकहित पार्टी।”

भूपिंदर सिंह हुड्डा की बातों से साफ स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस ने हरियाणा में सरकार बनाने के लिए गोपाल कांडा से समर्थन देने के लिए संपर्क किया था। खबर के मुताबिक कांडा ने कॉन्ग्रेस को समर्थन देने मना कर दिया और भाजपा को समर्थन देने का खुलेआम ऐलान कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस खुद समर्थन के लिए गोपाल कांडा के पास पहुँची थी और कांडा के भाजपा को समर्थन देने के ऐलान पर तंज कसती रही। उन्होंने भाजपा पर बलात्कारियों को शामिल करने का आरोप लगाया।

कांडा प्रकरण पर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने तो अपनी पार्टी को पाक-साफ बता दिया था। ट्वीट भी कर दिया था। देश की सारी महिलाओं को भाजपा से दूर रहने की सलाह भी दे डाली। वो भी क्यों? सिर्फ इसलिए क्योंकि कांडा ने भाजपा को समर्थन देने की बात की, न की भाजपा ने माँगी थी। लेकिन अब जमीन घोटाले में आरोपित पति रॉबर्ट वाड्रा का पत्नी प्रियंका कौन सा ट्वीट करेंगी, जब हरियाणा में उनके खुद के सबसे बड़े नेता यह मान रहे हैं कि उन्होंने सरकार बनाने के लालच में कांडा से समर्थन माँगा था।

दिलचस्प यह भी है कि कांडा के नाम पर चल रहे राजनीतिक बवाल के बावजूद एक भी ऐसा समय नहीं आया, जब किसी भाजपा नेता ने उससे समर्थन लेने की बात कही हो। बीजेपी ने कभी नहीं यह कहा कि वो कांडा के समर्थन को स्वीकार करेंगे। भाजपा नेता उमा भारती ने भी इस मसले पर पहले ही पार्टी के गोपाल कांडा से दूर होने के संकेत दिए थे।

जब भाजपा का जेजेपी के साथ गठबंधन नहीं हुआ था, तो कई निर्दलीय विधायकों ने बीजेपी को समर्थन देने की बात कही। मगर गोपाल कांडा के नाम पर काफी हंंगामा हुआ। फिलहाल बीजेपी ने जेजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला कर लिया। बीजेपी अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कहा कि हरियाणा के लोगों के बहुमत को मानते हुए बीजेपी और जेजेपी ने तय किया है कि दोनों पार्टियाँ मिलकर राज्य में सरकार बनाएँगी। बताया जा रहा है कि राज्य में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा जबकि डिप्टी सीएम जेजेपी का होगा।

उल्लेखनीय है कि विजय गोयल समेत कई नेताओं के बयानों में इस बात का दावा है कि बीजेपी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि गोपाल कांडा से उनकी पार्टी किसी भी तरह का कोई समर्थन नहीं लेगी। गोयल ने यह भी कहा कि न हमने उन्हें टिकट दिया था और न ही समर्थन की बात कही। 

बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में किसी की पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। लेकिन 40 सीटें जीतकर बीजेपी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी। अब जब 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 40 सीटें मिली हैं। और समर्थन में बहुमत के लिए ज़रूरी 6 की जगह 9 विधायक तैयार हैं तो अगर इसमें से गोपाल कांडा को हटा भी दें तो भी भाजपा आसानी से बहुमत का आँकड़ा पार कर लेगी। ऐसा करना स्वच्छ राजनीति और बीजेपी दोनों के लिए अच्छा है।