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‘बाप-बेटी दोनों को एक ही अस्पताल में कैद रखो’ – इमरान खान के आदेश के बाद नवाज शरीफ को हार्ट अटैक

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दिल का दौरा पड़ा है। नवाज शरीफ पहले से ही लाहौर के सर्विसेज अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा है। दुखद यह है कि पाकिस्तान के पूर्व पीएम को दिल का दौड़ा तब पड़ा, जब इमरान सरकार ने नवाज की बेटी मरियम नवाज को भी उसी अस्पताल में ‘कैद’ रखने का आदेश दिया, जिसमें नवाज शरीफ को रखा गया है। इमरान को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि मरियम नवाज को जेल भेजने का उनकी सरकार के फैसले का जबरदस्त विरोध हुआ।

वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि दिल का दौरा पड़ने के बाद डॉक्टरों ने उन पर निगरानी और भी बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि ये दिल का दौरा माइनर है। मगर उनकी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।

नवाज शरीफ की हालत बेहद गंभीर है। शरीफ इस समय गंभीर इम्‍यून डिसऑर्डर से ग्रसित हैं और उनका प्‍लेटलेट्स भी खतरनाक स्‍तर पर पहुँच गया है। नवाज को शुक्रवार (अक्टूबर 25, 2019) को लाहौर हाई कोर्ट से जमानत दे दी गई है।

नवाज को चौधरी शक्कर मिल मामले में भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया गया है। इस मामले में उन्हें सात साल जेल की सजा सुनाई गई है। बीमारी के चलते पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने उन्हें चौधरी शक्कर मिल के मामले में जमानत दे दी है। उनका प्लेटलेट काउंट अचानक गिर गया था। जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नवाज के बेटे हुसैन नवाज ने बुधवार (अक्टूबर 23, 2019) को आरोप लगाया था कि उनके पिता को जेल में जहर दिया जा रहा है। नवाज भ्रष्टाचार के मामलों में लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद थे।

हुसैन ने आरोप लगाया है कि उनके पिता नवाज के शरीर से प्लेटलेट्स में कमी होने का कारण जहर देना भी हो सकता है। लंदन में रह रहे हुसैन ने पिता के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया। हुसैन ने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि उनके पिता की प्लेटलेट्स में कमी किसी तरह के “जहर” का परिणाम हो सकती है। उन्होंने लिखा कि अगर उनके पिता को कुछ होता है, तो आप जानते हो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? 

पीएमएल (एन) अध्यक्ष और नवाज के छोटे भाई शाहबाज शरीफ ने मंगलवार (अक्टूबर 22, 2019) को नवाज से मुलाकात करने के बाद ट्वीट किया था, “मैंने आज अपने भाई से मुलाकात की। मुझे उनकी तेजी से बिगड़ती हालत की बहुत चिंता हो रही है। सरकार को उदासीनता छोड़ उनके स्वास्थ्य को देखना चाहिए। मैं पूरे देश से मियाँ साहिब के लिए दुआ करने की अपील करता हूँ।”

सावरकर से कॉन्ग्रेस को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव भी याद आए

कॉन्ग्रेस वह पार्टी है जिसके नेता खुद को भी देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाज चुके हैं। देश के अमर क्रांतिकारियों को सत्ता में रहते हुए उसने कभी इसका हकदार ही नहीं माना। यहॉं तक कि जब महाराष्ट्र के चुनाव में बीजेपी ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने का वादा किया तो भी कॉन्ग्रेस इसकी आलोचना से पीछे नहीं रही। लेकिन, विधानसभा चुनावों की शिकस्त के बाद उसे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद आई है।

कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भारत रत्न से सम्मानित करने की माँग की है। साथ ही मोहाली स्थित हवाई अड्डे का नाम शहीद-ए-आज़म सिंह के नाम करने की भी अपील की है। उन्होंने इस पत्र को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है।

तिवारी ने पत्र में कहा है कि आगामी गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2020 के मौक़े पर इन तीनों शहीदों को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। साथ ही इन्हें आधिकारिक तौर पर ‘शहीद-ए-आज़म’ घोषित किए जाने का भी आग्रह किया है। 25 अक्टूबर के पत्र में तिवारी ने लिखा, “मैं इस तथ्य की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद का पुरज़ोर विरोध कर देशवासियों को आंदोलन के लिए प्रेरित किया। इसके बाद 23 मार्च, 1931 को तीनों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।”

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र बीजेपी ने अपने घोषणा-पत्र में वादा किया था कि अगर राज्य में सरकार बनी तो केंद्र सरकार से वीर सावरकर को भारत रत्न देने की अपील करेंगे। कॉन्ग्रेस के विरोध के बावजूद उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया में खुलकर कहा था कि सावरकर ने न केवल आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी, बल्कि वे देश के लिए जेल भी गए थे। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा,

“निजी तौर पर मैं सावरकर की विचारधारा से सहमत नहीं हूँ। लेकिन इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि वे एक काबिल व्यक्ति थे जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दलितों के अधिकार की लड़ाई लड़ी और देश के लिए जेल गए।”

सिंघवी ने स्वच्छता अभियान के प्रसार के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई कोशिशों की भी सराहना की। उन्होंने लिखा, “जहाँ हक़दार हों, वहाँ प्रशंसा की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाँधी जी के स्वच्छता के संदेशों को प्रसारित करने के लिए बॉलीवुड की मदद ली। इससे अधिकतर लोगों का ध्यान इस मुद्दे पर जाएगा।”

यह अँधकार पर प्रकाश की जीत का त्यौहार: ट्रम्प ने White House में मनाई दिवाली, हिन्दुओं को दी बधाई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हिन्दू, जैन, सिख और बौद्ध समुदायों को दिवाली की बधाई देते हुए कहा कि ये त्यौहार अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता का एक जीता-जागता उदाहरण है। ट्रम्प ने कहा कि प्रकाश का ये त्यौहार पूरे अमेरिका में मनाया जाता है और इससे पता चलता है कि धार्मिक स्वतंत्रता अमेरिका के मूल सिद्धांतों में से एक है। डोनाल्ड ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में दिवाली मनायई और दीप जलाए। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग भी पहुँचे। इस कार्यक्रम से मीडिया को दूर रखा गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुसार सभी धर्मों को अपने त्यौहार को अपनी आस्था और विश्वास से मनाने की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ख़ुद और अपनी पत्नी मेलेनिया की तरफ़ से लोगों को दिवाली की बधाई देते हुए कहा कि प्रकाश के इस त्यौहार को आप पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएँ। ट्रम्प ने कहा कि प्रकाश की अँधकार के ऊपर जीत ही इस त्यौहार के मूल में है और इसके लिए वो न सिर्फ़ अमेरिका बल्कि पूरे विश्व के हिन्दुओं, सिखों, जैनों और बौद्धों को शुभकामनाएँ देते हैं।

ट्रम्प ने दिवाली के बारे में आगे कहा कि ये ज्ञान की अज्ञानता के ऊपर और अच्छाई की बुराई के ऊपर जीत का त्यौहार है। वाइट हाउस की तरफ़ से जारी किए गए बयान में ट्रम्प ने कहा कि इस त्यौहार के दौरान लोग दिये जलाते हैं और परिवार एवं सगे-सम्बन्धियों के साथ धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेते है। उन्होंने कहा कि लोग रंग-बिरंगे प्रकाश की व्यवस्था करते हैं और पूजा करते हैं। भारत में दिवाली का त्यौहार रविवार (अक्टूबर 27, 2019) को मनाया जाएगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति प्रतिवर्ष दिवाली से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे हैं। राष्ट्रपति चुने जाने से पहले आयोजित एक दिवाली कार्यक्रम में उन्होंने हिन्दुओं को भरोसा दिलाया था कि वो वाइट हाउस में हिन्दुओं के सबसे बड़े मित्र साबित होंगे। हाल ही में जब प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था, तब ट्रम्प ने उसमें मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। इस दौरान 60,000 लोगों के समक्ष दोनों नेताओं ने अपने सम्बोधन में एक-दूसरे की प्रशंसा करते हुए अमेरिका और भारत के रिश्तों की महत्ता पर बात की थी।

इधर दिल्ली में स्थित अमेरिकी दूतावास में भी दिवाली के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम देखने को मिला। पारम्परिक वस्त्रों में महिलाओं ने दूतावास के परिसर में नृत्य किया। इस दौरान अमेरिकी महिलाएँ नेहा कक्कर के गए ‘दिलबर-दिलबर’ गाने पर जम कर थिरकीं। इस गाने में नोरा फ़तेहि ने नृत्य किया था।

कर्नाटक में एनआरसी की तैयारी, बंगलुरु से धरे गए 30 बांग्लादेशी

कर्नाटक में अवैध अप्रवासियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बंगलुरु पुलिस ने बिना वैध वीज़ा के रह रहे 30 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। कार्रवाई शनिवार (26 अक्टूबर, 2019 को) की गई है। फॉरेनर्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कर इन्हें डिपोर्ट करने की तैयारी की जा रही है। पूरी कार्रवाई बंगलुरु पुलिस की क्राइम ब्रांच (सीसीबी, सिटी क्राइम ब्रांच) द्वारा की गई है

इसी महीने बीएस येद्दियुरप्पा की कर्नाटक सरकार ने राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स, एनआरसी) का प्रस्ताव दिया था। राज्य के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने इस आशय से घोषणा भी की थी। इसके अलावा उन्होंने बंगलुरु के लिए उसका खुद का ATS (एंटी टेरर स्क्वाड) बनाने की भी घोषणा की थी। गौरतलब है कि कर्नाटक के पास पहले से ही एक एटीएस पूरे प्रदेश के लिए है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कर्नाटक की भारतीय जनता पार्टी की सरकार राज्य में पहचान किए गए अवैध प्रवासियों को रखने के लिए डिटेंशन सेंटरों के विकास के बारे में योजना बना रही है। राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता गणेश कार्णिक ने इस बाबत सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था, “नियम के मुताबिक, पुलिस कथित प्रवासियों को हिरासत में नहीं ले सकती, लेकिन उन्हें देश से बाहर निकालना ज़रूरी है। कोई देश उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होगा, इसलिए उन्हें डिटेंशन सेंटरों में रखे जाने की ज़रूरत है।”

इस निर्णय को घोषणा करते हुए बोम्मई ने बताया था कि पुलिस को राज्य में रह रहे अवैध प्रवासियों का एक डेटाबेस बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि कर्नाटक देश के उन कुछ चुनिंदा राज्यों में है जहाँ अवैध प्रवासी एक बड़ी संख्या में आ कर बस जाते हैं।

असम में इसी साल 31 अगस्त 2019 को राज्य की एनआरसी सूची जारी की गई थी। इसमें 19 लाख से अधिक लोगों के नाम नागरिकता सूची से हटा दिए गए थे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने देश भर में राष्ट्रव्यापी एनआरसी का आह्वान किया था।

गोपाल कांडा से समर्थन माँगा था कॉन्ग्रेसी भूपिंदर सिंह हुड्डा ने, प्रियंका मार रही थी BJP को ताना

हरियाणा विधानसभा चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद हरियाणा लोकहित पार्टी के प्रमुख गोपाल कांडा ने खुलेआम भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया था। जिसको लेकर विपक्षी दलों ने काफी बवाल काटा। हालाँकि, तमाम कयासों और अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ये साफ कर दिया है कि हरियाणा में पार्टी जेजपी के साथ मिलकर सरकार बनाएगी। पार्टी अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी।

वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने स्वीकार किया कि वे प्रदेश में सरकार बनाने के लिए सारे विपक्षी दलों के पास गए। इसमें हरियाणा लोकहित पार्टी के प्रमुख गोपाल कांडा का भी नाम शामिल है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “हरियाणा के लोगों का जनादेश राज्य सरकार के खिलाफ है। मैंने पहले ही पूरे विपक्ष से अपील की है कि लोगों के जनादेश का सम्मान किया जाए और हम सभी को हाथ मिलाना चाहिए – चाहे वह जेजेपी, आईएनएलडी, निर्दलीय हों या कांडा का हरियाणा लोकहित पार्टी।”

भूपिंदर सिंह हुड्डा की बातों से साफ स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस ने हरियाणा में सरकार बनाने के लिए गोपाल कांडा से समर्थन देने के लिए संपर्क किया था। खबर के मुताबिक कांडा ने कॉन्ग्रेस को समर्थन देने मना कर दिया और भाजपा को समर्थन देने का खुलेआम ऐलान कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस खुद समर्थन के लिए गोपाल कांडा के पास पहुँची थी और कांडा के भाजपा को समर्थन देने के ऐलान पर तंज कसती रही। उन्होंने भाजपा पर बलात्कारियों को शामिल करने का आरोप लगाया।

कांडा प्रकरण पर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने तो अपनी पार्टी को पाक-साफ बता दिया था। ट्वीट भी कर दिया था। देश की सारी महिलाओं को भाजपा से दूर रहने की सलाह भी दे डाली। वो भी क्यों? सिर्फ इसलिए क्योंकि कांडा ने भाजपा को समर्थन देने की बात की, न की भाजपा ने माँगी थी। लेकिन अब जमीन घोटाले में आरोपित पति रॉबर्ट वाड्रा का पत्नी प्रियंका कौन सा ट्वीट करेंगी, जब हरियाणा में उनके खुद के सबसे बड़े नेता यह मान रहे हैं कि उन्होंने सरकार बनाने के लालच में कांडा से समर्थन माँगा था।

दिलचस्प यह भी है कि कांडा के नाम पर चल रहे राजनीतिक बवाल के बावजूद एक भी ऐसा समय नहीं आया, जब किसी भाजपा नेता ने उससे समर्थन लेने की बात कही हो। बीजेपी ने कभी नहीं यह कहा कि वो कांडा के समर्थन को स्वीकार करेंगे। भाजपा नेता उमा भारती ने भी इस मसले पर पहले ही पार्टी के गोपाल कांडा से दूर होने के संकेत दिए थे।

जब भाजपा का जेजेपी के साथ गठबंधन नहीं हुआ था, तो कई निर्दलीय विधायकों ने बीजेपी को समर्थन देने की बात कही। मगर गोपाल कांडा के नाम पर काफी हंंगामा हुआ। फिलहाल बीजेपी ने जेजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला कर लिया। बीजेपी अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कहा कि हरियाणा के लोगों के बहुमत को मानते हुए बीजेपी और जेजेपी ने तय किया है कि दोनों पार्टियाँ मिलकर राज्य में सरकार बनाएँगी। बताया जा रहा है कि राज्य में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा जबकि डिप्टी सीएम जेजेपी का होगा।

उल्लेखनीय है कि विजय गोयल समेत कई नेताओं के बयानों में इस बात का दावा है कि बीजेपी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि गोपाल कांडा से उनकी पार्टी किसी भी तरह का कोई समर्थन नहीं लेगी। गोयल ने यह भी कहा कि न हमने उन्हें टिकट दिया था और न ही समर्थन की बात कही। 

बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में किसी की पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। लेकिन 40 सीटें जीतकर बीजेपी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी। अब जब 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 40 सीटें मिली हैं। और समर्थन में बहुमत के लिए ज़रूरी 6 की जगह 9 विधायक तैयार हैं तो अगर इसमें से गोपाल कांडा को हटा भी दें तो भी भाजपा आसानी से बहुमत का आँकड़ा पार कर लेगी। ऐसा करना स्वच्छ राजनीति और बीजेपी दोनों के लिए अच्छा है।

केरल नन रेप केस: आरोपित बिशप को नोटिस भेजने वाले पुलिसकर्मी का वामपंथी सरकार ने किया तबादला

केरल नन रेप मामले में बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बचाने की कोशिश् करने के आरोप राज्य की वामपं​थी सरकार और प्रशासन पर पहले भी लगते रहे हैं। अब जो खबर सामने आई है उससे इस तरह के आरोपों को बल मिलता है। मीडिया की खबरों के मुताबिक आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादल कर दिया गया।

19 अक्टूबर को पीड़िता ने मलयालम यूट्यूब चैनल क्रिश्चियन टाइम्स के ख़िलाफ़ कुराविलंगद पुलिस स्टेशन में शिक़ायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि बिशप फ्रैंको के इशारे पर चैनल उन्हें परेशान कर रहा है। कुराविलंगद पुलिस ने इस मामले का जाँच वैकोम पुलिस को सौंप दी थी।

वैकोम पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर मोहनदास ने फ्रैंको को एक नोटिस जारी कर पूछा कि पीड़िता की शिक़ायत पर क्यों नहीं उनकी ज़मानत रद्द कर दी जाए। द न्यूज़ मिनट ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि बुधवार को नोटिस जारी करने के बाद, पुलिस अधिकारी का तबादला कोट्टायम अपराध शाखा में कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार,

चैनल क्रिश्चियन टाइम्स ने पीड़िता और उनका समर्थन करने वाली अन्य नन के ख़िलाफ़ कई वीडियो जारी किए हैं। इस तरह के वीडियो के ज़रिए मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों को भी निशाना बनाया जाता है। यह अदालत और क़ानून पर सवाल उठाने वाला क़दम लगता है। पुलिस अधिकारी का तबादला शायद अदालत में उसकी पेश रोकने के लिए किया गया है। मामले की सुनवाई 11 नवंबर से शुरू होने वाली है।”

पीड़ित नन ने राज्य और राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ-साथ राज्य मानवाधिकार आयोग को भी लिखा था कि YouTube चैनल उसे और उनका साथ देने वाली कुराविलंगद कॉन्वेंट की अन्य नन को निशाना बनाकर परेशान कर रहा है।

पत्र में पीड़िता ने लिखा, “बिशप फ्रैंको के ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज करने के बाद, क्रिश्चियन टाइम्स नामक एक यूट्यूब चैनल लगातार मुझे और मेरी साथी बहनों को बदनाम कर रहा है। हमें संदेह है कि चैनल बिशप फ्रैंको और उनके साथी कार्यकर्ताओं द्वारा चलाया जाता है।”

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष एमसी जोसेफीन ने कहा है कि आयोग सोशल मीडिया के माध्यम से पीड़िता और साथी ननों को अपमानित करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेगा। जोसेफिन ने कहा, “महिला आयोग ने इस मुद्दे पर एक मामला दर्ज कर लिया है। आयोग ने राज्य के पुलिस प्रमुख और साइबर पुलिस को 10 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।”

पीड़िता नन ने बिशप फ्रैंको के ख़िलाफ़ 27 जून, 2018 को कुराविलंगद पुलिस स्टेशन में शिक़ायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया गया था कि फ्रैंको ने 2014 और 2016 के बीच 13 बार उनका बलात्कार किया।

हैदराबाद: डिलीवरी बॉय मुदस्सिर का पूछा मजहब तो युवक पर FIR

हैदराबाद में डिलीवरी बॉय का धर्म पूछकर खाने की डिलीवरी लेने से इनकार करने वाले ग्राहक अजय कुमार के ख़िलाफ़ स्थानीय पुलिस में मामला दर्ज हो गया है। इस मामले में फूड डिलीवरी बॉय मुदस्सिर ने शिक़ायत दर्ज कराई थी। फ़िलहाल मामले की जाँच की जा रही है।

दरअसल, हैदराबाद के आलियाबाद में रहने वाले ग्राहक अजय कुमार ने सोमवार (21 अक्टूबर, 2019) की रात को स्विगी के ऐप से शहर के फलकनुमा इलाक़े के ग्रैंड बावर्ची रेस्त्रां से चिकन-65 का ऑर्डर दिया था। ऑर्डर के लिए विशेष इंस्ट्रक्शन में अजय कुमार ने लिखा, “बहुत कम मसाले। और कृपया डिलीवरी करने वाले व्यक्ति के लिए हिन्दू का ही चयन करिएगा। सारी रेटिंग इसी के आधार पर होगी।” उन्होंने ऑर्डर का ऑनलाइन पेमेंट किया था।

लेकिन जब मुदस्सिर ने पूरा पता जानने के लिए फ़ोन किया तो नाराज़ अजय कुमार ने डिलीवरी लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने खाना स्वीकार करने से इनकार कर दिया और ऑर्डर कैंसिल कर रिफंड माँगा। अपनी रिपोर्ट में हिंदुस्तान टाइम्स ने दावा किया है कि इसको लेकर उनकी स्विगी के कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव से बहस हुई, जिसे स्विगी के कस्टमर केयर सेंटर ने रिकॉर्ड कर लिया। इसके अनुसार कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव ने अजय कुमार को बताया कि उन्हें कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर ₹95 भरने पड़ेंगे, जो उनके ऑनलाइन पेमेंट की राशि से काटे जाएँगे, और बाकी पैसा रिफंड होगा।

बकौल मीडिया रिपोर्ट्स, अजय ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वे चार्ज झेल लेंगे, लेकिन खाना मुदस्सिर से नहीं लेंगे। इसके बाद अगले ही दिन (मंगलवार, 22 अक्टूबर, 2019 को) मुदस्सिर मामले को लेकर हैदराबाद के राजनीतिक दल मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) के पास चला गया।

इसके बाद एमबीटी के मुखिया अमज़दुलाह खान ने न केवल मुदस्सिर को अजय कुमार के खिलाफ “हिन्दुओं और मुस्लिमों में दूरी बढ़ाने” के लिए आपराधिक शिकायत पुलिस में करने की सलाह दी, बल्कि उन्होंने खुद ही मामले का राजनीतिकरण भी शुरू कर दिया। ट्विटर पर उन्होंने लिखा:

एडिटर्स नोट: हालाँकि यहाँ पर कस्टमर अजय कुमार की इस माँग का समर्थन या बचाव नहीं किया जा सकता है, लेकिन हर समय ‘पत्रकारिता के एथिक्स’ का रोना रोने वाले पत्रकारिता के समुदाय विशेष की भूमिका का विश्लेषण भी ज़रूरी है। न केवल मीडिया ने हिन्दू ग्राहक का नाम, उसका मोहल्ला आदि खुल कर बता दिए, बल्कि द न्यूज़ मिनट ने तो ग्राहक का कस्टमर केयर के साथ कथित वार्तालाप भी प्रकाशित कर दिया

पहली बात तो ऐसी संवेदनशील ही नहीं, गोपनीय और निजता कानून से प्रोटेक्टेड जानकारी TNM को मिली कहाँ से? अगर स्विगी ने दिया तो उसने ग्राहक की निजता का उललंघन किया, और अगर नहीं तो इसकी विश्वसनीयता क्या है? इसके अलावा इसके प्रकाशन से साम्प्रदायिक माहौल पर पड़ने वाले असर का भी मसला है।

देश का माहौल वैसे ही कमलेश तिवारी हत्याकांड के बाद से तनावपूर्ण है और एक बड़ी संख्या में हिन्दू असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऊपर से मसला हैदराबाद का है-उस अकबरुद्दीन ओवैसी का गढ़ है, जो हिन्दुओं के सामूहिक हत्याकांड की धमकी का आरोपित है। ऐसे में अगर कमलेश तिवारी की तरह इस हिन्दू ग्राहक के साथ कुछ हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

‘मेरी बहन को मुस्लिम लड़के ने प्रेमजाल में फँसा लिया है’ – वो फर्जी कहानी, जिससे गई कमलेश तिवारी की जान

कमलेश तिवारी की हत्या से पहले अशफाक और मोइनुद्दीन ने उन्हें हिन्दू लड़की की मुस्लिम लड़के से शादी की झूठी कहानी सुनाई थी। कमलेश तिवारी नृशंस हत्याकांड में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक जब रोहित सोलंकी बना अशफाक और संजय बना मोइनुद्दीन कमलेश तिवारी के घर पहुँचा तो कमलेश तिवारी ने अशफाक से मोइनुद्दीन के बारे में पूछा। इस पर अशफाक ने कमलेश तिवारी को उत्तेजित करने के लिए पहले से ही गढ़ी हुई झूठी और मनगढ़ंत कहानी सुनाई।

उसने कहा कि मोइनुद्दीन की बहन को एक मुस्लिम लड़के ने प्रेम जाल में फँसा लिया है। उसे उसके जाल से कैसे निकाला जाए? अशफाक के मुँह से मुस्लिम लड़के द्वारा हिन्दू लड़की को फँसा लिए जाने की कहानी सुनकर कमलेश तिवारी काफी आवेश में आ गए और कहा कि अपनी बहन को मुस्लिम लड़के से दूर रखो और एक हिन्दू लड़का देखकर उसकी शादी करा दो। कमलेश तिवारी ने उसे आश्वासन देते हुए कहा कि अगर वह मुस्लिम युवक या उसके परिजन उसकी बहन को परेशान करेंगे तो वो उसे अपने स्तर पर देख लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर उसकी बहन या उसके पति को कोई खतरा हो तो उसे लखनऊ भेज दे। वो उसकी बहन के पति को यहाँ रोजगार उपलब्ध करा देंगे।

अमर उजाला के लखनऊ संस्करण में प्रकाशित खबर

इसके साथ ही एक और बात सामने आई है कि कमलेश तिवारी खुद दोनों आरोपितों से मिलने के लिए होटल जाने वाले थे, मगर आरोपितों ने उन्हें यह कर कर मना कर दिया कि वो परेशान न हों। इसके बाद उन्होंने दोनों को अपने कार्यालय पर ही बुला लिया। बता दें कि आरोपित 17 अक्टूबर की रात को ही कमलेश तिवारी से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्होंने रात में मिलने से मना कर दिया था। हत्यारों ने 18 अक्टूबर की सुबह फिर उन्हें मिलने के लिए फोन किया तो कमलेश तिवारी ने खुद होटल आकर मिलने की बात कही। मगर हत्यारों के इरादे तो कुछ और थे, इसलिए उन लोगों ने कहा कि वो क्यों परेशान होंगे। इसके बाद तिवारी ने 18 अक्टूबर को 12 बजे से 1 बजे के बीच उन दोनों को अपने कार्यालय में बुला लिया।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर

अशफाक के पिता ने एक और खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने अशफाक को कुरान की कमस खिलाकर कमलेश तिवारी को भूल जाने के लिए कहा था। अशफाक ने पिता के सामने तो हत्या न करने की बात कह दी थी, मगर उस पर इसका कोई असर नहीं पड़ा था। वो पिछले चार साल से कमलेश तिवारी को जान से मारने की साजिश रच रहा था। इसके बारे में अशफाक की पत्नी और पिता को मालूम था। इसलिए उसके पिता ने अशफाक से कुरान की कसम देकर कहा था कि वो कमलेश तिवारी को भूल जाए, मगर इसका उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने अपनी योजना के मुताबिक ही इस साजिश को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की अशफाक और मोइनुद्दीन ने दिन-दहाड़े गोली मार कर और गला रेत कर हत्या कर दी थी। हाल ही में आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ कि हत्यारों ने पहले उन्हें गोली मारी और फिर धारदार चाकू से सीने पर ही 7 बार वार किए गए। चाकू के वार से गर्दन पर 12 सेंटीमीटर लंबा और 3 सेंटीमीटर गहरा घाव हुआ। गला रेतने के कारण ही कमलेश की मौत हो गई। आरोपित अशफाक की तरह मोइनुद्दीन ने भी सोशल मीडिया पर संजय नाम से फर्जी अकाउंट बनाया हुआ था। 

वामपंथी कन्हैया कुमार का प्रचार करने वाले एक्टर पर FIR, रामलीला को बताया था ‘बच्चों की ब्लू फिल्म’

अभिनेता से नेता बने प्रकाश राज के ख़िलाफ़ दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में शिक़ायत दर्ज हो गई है। उनके ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाएँ भड़काने और दो समुदायों के बीच नफ़रत का बीज बोने का आरोप लगा है। प्रकाश राज के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के वकील कुलदीप राय, वरूण मिश्रा, जुगल किशोर गुप्ता, अभिनव और रूमा पाठक ने शिक़ायत दर्ज कराई है।

दरअसल, उन्होंने रामलीला की तुलना चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी से कर दी थी और कहा था कि इससे मजहब विशेष में डर की भावना आ रही है। प्रकाश राज अपनी इस विवादित टिप्पणी के चलते ट्रोल हो रहे हैं। 

इस विवादित टिप्पणी का संबंध एक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम से है, जहाँ प्रकाश राज ने रामलीला के संदर्भ में कहा था, “ये बेहूदा है कि हेलीकॉप्टर एक पुष्पक विमान है। उसमें तीन मॉडल मेकअप करके राम, लक्ष्मण और सीता बनकर आते हैं। फिर वहाँ मौजूद लोग उनकी पूजा करते हैं। मैं इस देश में ये सब नहीं देखना चाहता हूँ। ये वाहियात है।”

इस पर एंकर ने उन्हें टोकते हुए कहा कि लोग इस पर वोट दे रहे हैं, लोगों को इसमें कोई समस्या नहीं है, वो इससे सहमत हैं। इस पर प्रकाश राज ने जवाब देते हुए कहा था, “अगर लोग वोट दे रहे हैं तो छोड़ देते हैं क्या? अगर बच्चे पोर्न देखते हैं तो आप उन्हें छोड़ देते हैं? ये दोनों ही समाज के लिए हानिकारक हैं।” इस पर एंकर का सवाल था कि क्या वो (प्रकाश राज) रामलीला के मंचन की तुलना चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी से कर रहे हैं? 

इस पर प्रकाश राज ने स्पष्ट तरीके से कहा था,

“रामलीला जैसे कार्यक्रम हमारी सोसायटी के लिए सही नहीं हैं। ये अल्पसंख्यकों में डर का माहौल पैदा करते हैं, मैं इसमें कम्फर्टेबल नहीं हूँ। मैं जानता हूँ कि क्या संस्कृति है और क्या नहीं। मंदिर जाना संस्कृति है, लोगों के सामने ऐसा नाटक क्यों? राम, लक्ष्मण, सीता को हेलीकॉप्टर से लाना मेरी संस्कृति का हिस्सा नहीं है।” 

प्रकाश राज की विवादित टिप्पणी पर फ़िल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने ट्वीट कर लिखा, “नाम में प्रकाश है पर अक्ल में घोर अंधकार। नाम में राज भी है पर बातें सारी अराजकता वाली। ऐसे भड़काऊ लोगों को ही #UrbanNaxals कहा जाता है।”

सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने प्रकाश राज के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया और उनकी गिरफ़्तारी की माँग की जाने लगी। यूज़र्स ने प्रकाश राज पर देवी-देवताओं के अपमान और हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया।

कमलेश तिवारी की पत्नी ने सॅंभाली हिन्दू समाज पार्टी की कमान, हत्यारों को फाँसी देने की दोहराई मॉंग

लखनऊ में हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की नृशंस हत्या के बाद उनकी पत्नी किरण तिवारी को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया है। हिन्दू समाज पार्टी के द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, किरण तिवारी आज शाम को प्रेस कॉन्फ्रेन्स को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने यूपी पुलिस पर अपने पति को सुरक्षा न देने के लिए निशाना साधा और साथ ही आरोपितों को फाँसी पर लटकाने की माँग की। उन्होंने कहा कि परिवार ने कभी वित्तीय मदद की माँग नहीं की।

पति की हत्या के बाद पत्नी किरण तिवारी ने पुलिस को बताया था कि उनके पति को जानलेवा धमकियाँ मिलती थीं। उन्होंने अपनी तहरीर में साफ़ लिखा था कि यूपी में बिजनौर ज़िले के रहने वाले मोहम्मद मुफ़्ती नईम काज़मी और अनवारुल हक़ ने साल 2016 में उनके पति का सिर काटने के लिए डेढ़ करोड़ रुपए के ईनाम की सार्वजनिक घोषणा की थी। इस सन्दर्भ में कमलेश तिवारी की पत्नी ने पुलिस में दोनों आरोपितों के ख़िलाफ़ दफ़ा-302 के तहत मुक़दमा दर्ज करने की तहरीर दी थी। उन्होंने दावा किया था कि इन दोनों ने साज़िशन उनके पति की हत्या कराई है।

उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की थी और हत्यारों को फाँसी की सज़ा दिलाए जाने की माँग की थी। साथ ही उन्होंने यह माँग भी की थी कि उनके दिवंगत पति की हत्यारों को जेल में रोटी न खिलाई जाए।  

बता दें कि इस मामले में सभी साज़िशकर्ता और दोनों हत्यारे पकड़े जा चुके हैं। सूरत से मौलाना शेख, फैजान और रशीद पठान को गिरफ़्तार किया गया था। मंगलवार (अक्टूबर 21, 2019) को गुजरात एटीएस ने संदिग्ध हत्यारों अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन को दबोचा था। आरोपितों ने अपना गुनाह क़बूल भी कर लिया है। ये दोनों लगातार यूपी पुलिस को चकमा दे रहे थे, लेकिन इन्हें गुजरात और राजस्थान की सीमा से धर-दबोचा गया। अशफ़ाक़ एमआर का काम करता था, वहीं मोईनुद्दीन जोमाटो का डिलीवरी बॉय था।

क़रीब 6 घंटे की पूछताछ में मुख्य आरोपित अशफ़ाक और मोइनुद्दीन अपने ज़ुर्म पर बिना किसी ख़ौफ़ के बयान दिया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार (18 अक्टूबर) को सुबह क़रीब 10:30 बजे जब वो हत्या के मक़सद से भगवा कपड़े पहनकर खुर्शीदाबाद के लिए निकले थे, तो रास्ते में दरगाह में उन्होंने नामज़ पढ़ी थी।

महज़ डेढ़ मिनट के अंदर हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने अपना ज़ुर्म क़बूलते हुए कि वो लोग कमलेश तिवारी का सिर धड़ से अलग करना चाहते थे। इसके बाद सिर को हाथ में लेकर वीडियो बनाकर दहशत फैलाना चाहते थे। ऐसा करके वो लोगों को चेताना चाहते थे कि अब कोई धार्मिक विवादित टिप्पणी न करे।

गौरतलब है कि कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई थी। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में ख़ुलासा हुआ कि कमलेश तिवारी की नृशंस हत्‍या को मौलाना मोहसिन ने शरियत क़ानून के क़त्‍ल-ए-वाजिब के सिद्धांत के तहत जायज़ ठहराया था। उसने राशिद के भाई मोईनुद्दीन और अशफ़ाक़ को इसके लिए तैयार किया था।