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फुटपाथ पर सब्जी बेचने वाले पिता को मंच पर देख फूट-फूट कर रो पड़े BJP उम्मीदवार विजय राजभर

आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए जिन सीटों पर मतदान होना है, उनमें एक उत्तर प्रदेश का घोसी भी शामिल है। यहाँ से भाजपा ने विजय राजभर को टिकट दिया है। उनके बारे में ख़ास बात यह है कि उन्होंने काफ़ी संघर्ष कर के यहाँ तक का सफर तय किया है और बहुत नीचे से ऊपर उठे हैं। विजय राजभर के पिता फुटपाथ पर सब्जी की दुकान लगाते हैं। राजभर ने सोमवार (सितम्बर 30, 2019) को भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मऊ जिला कलेक्ट्रेट में नामांकन दाखिल किया। नामांकन के बाद भाजपा की एक सभा भी हुई।

इस सभा में विजय राजभर अपने सब्जी बेचने वाले पिता से गले मिल फूट-फूट कर रोने लगे। इस दृश्य को देख कर वहाँ मौजूद लोगों की आँखें भर आईं। जब उन्हें भाजपा उम्मीदवार बनाने की ख़बर आई थी, तभी उनके पिता ख़ुशी से झूम उठे थे। राजभर ने संगठन में भी ख़ूब काम किया है। वह मऊ में भाजपा के नगर अध्यक्ष रहे हैं। नगरपालिका के चुनाव में उन्होंने सहादतपुर से वार्ड सदस्य के रूप में जीत दर्ज की थी। उनके पिता नंदलाल राजभर फुटपाथ पर दुकान लगाते हैं और यही परिवार के पालन-पोषण का जरिया भी है।

नन्दलाल ने अपने बेटे को विधानसभा उम्मीदवारी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। भाजपा की सभा में मंत्री अनिल राजभर ने सब्जी बेचने वाले नन्दलाल राजभर को पूरे सम्मान के साथ मंच पर बिठाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा के अनुरूप काम कर रही है और विजय जैसे छोटे कार्यकर्ताओं को टिकट देना भाजपा को सबसे अलग बनाता है। पार्टी के तमाम स्थानीय वरिष्ठ नेता विजय राजभर के लिए प्रचार अभियान में जुट गए हैं।

21 अक्टूबर को 17 राज्यों की 51 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होना है। मतगणना के लिए 24 अक्टूबर की तारीख मुक़र्रर की गई है। अगर घोसी सीट की बात करें तो यह भाजपा के लिए इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से भाजपा के वरिष्ठ नेता फागू चौहान जीतते रहे हैं। उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाने जाने के बाद यह सीट खाली हुई, जिस पर उपचुनाव होना है। फागू चौहान ने पहली बार ये सीट 1985 में जीती थी। इसके बाद उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाते हुए 1996, 2002 और 2007 में जीत दर्ज की। अंतिम बार वह 2017 में जीते थे।

हालाँकि, फागू चौहान ने पहली बार यह सीट लोक दल के टिकट पर जीती थी, वहीं 2007 में उन्होंने बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। उसके बाद वह पुनः भाजपा में लौट आए। कयास लगाए जा रहे थे कि इस सीट से फागू चौहान के बेटे को टिकट दिया जाएगा लेकिन भाजपा आलाकमान ने तमाम अनुमानों को ग़लत ठहराते हुए विजय राजभर को टिकट दिया।

श्रीलंका टीम को सुरक्षित निकालने के लिए कराची में कर्फ्यू लगाने वाले पूछ रहे हैं कि कश्मीर में कर्फ्यू क्यों?

साल 2009 में श्रीलंका की टीम पर हुए आतंकवादी हमले के 10 साल बाद अब पाकिस्तान में एक बार फिर दोबारा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का आगाज हुआ है। हालाँकि, हमले के बाद पाक टीम का होम ग्राउंड दुबई शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच चल रही एक दिवसीय सीरीज ने पाकिस्तान में इस खेल की वापसी करवा दी हैं। बताया जा रहा है कि श्रीलंका टीम इस दौरे को लेकर काफ़ी डरी हुई थी, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें आला दर्जे की सुरक्षा दी जाएगी।

जानकारी के अनुसार करीब 30 से ज्यादा गाड़ियों के बीच श्रीलंकाई टीम को कराची स्टेडियम पहुँचाया गया। जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर खुद पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर द्वारा शेयर की गई। हम देख सकते हैं कि इन गाड़ियों में बख्तरबंद गाड़ियों से लेकर बुलेटप्रुफ गाड़ियाँ मौजूद हैं। गंभीर ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा कि इतना कश्मीर किया कि कराची भूल गए।

इसके अलावा खुद वीडियो बनाने वाले दो लोगों की बातचीत सुनकर ऐसा लग रहा है, जैसे पाकिस्तान की इन हरकतों ने उन्हें भी हँसने पर मजबूर कर दिया हो। वीडियो में ये लोग गाड़ियों की गिनती करते हुए कहते नजर आ रहे हैं, “आज हम आपको दिखाएँगे कर्फ्यू लगाकर मैच कैसे खेला जाता है।”

वीडियो की शुरुआत होते ही वीडियो बनाने वाले दोनों पाकिस्तानी सामने से आती बाइक को ‘धूम’ वाली बाइक बताते हैं, फिर गाड़ियों को गिनते हुए हैरान भी होते हैं और मजाक भी उड़ाते हैं। अंत में एंबुलेंस देखकर कहते हैं कि इतनी सुरक्षा के बाद भी अगर कोई मसला हो जाता है तो इनपर एंबुलेंस की भी व्यवस्‍था है। इसके बाद दोनों ठहाके मारकर पाकिस्तान की इस हरकत पर हँसने लगते हैं।

खैर, गंभीर के ट्वीट के बाद बाकी अन्य लोग इस वीडियो को देखकर पाकिस्तान के सुरक्षित जगह होने पर सवाल उठा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इतनी सुरक्षा व्यवस्था के साथ श्रीलंकाई टीम को स्टेडियम पहुँचाया जा रहा है या फिर जंग लड़ने के लिए।

इतनी सिक्योरिटी देखकर यूजर्स मजाक उड़ा रहे है कि लगता है जैसे इमरान खान की सारी सिक्योरिटी हटाकर बाजवा ने श्रीलंका टीम को दे दी हैं। वहीं कुछ गंभीर द्वारा शेयर इस वीडियो पर लिख रहे हैं कि कराची में कर्फ्यू लगाने वाले पूछ रहे हैं कि कश्मीर में कर्फ्यू क्यों है?

पाकिस्तान में असुरक्षा को लेकर लोगों का कहना है कि बिना हाई सिक्योरिटी के ये कोई आयोजन नहीं कर सकते हैं और दूसरे की जगह के लिए लड़ाई करने चले हैं। अगर ये आतंकवाद पर कोई कदम लेते तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता।

बता दें कि लोगों ने गौतम गंभीर को पाकिस्तान की हकीकत शेयर करने के लिए धन्यवाद भी किया है और कहा है कि हम देख सकते हैं पाकिस्तान कितना असुरक्षित देश हैं।

कमलनाथ के राज में भूखमरी से 7 साल के मासूम ने तोड़ा दम, परिवार के अन्य 5 सदस्यों की हालत गंभीर

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार में 7 साल के एक मासूम बच्चे की भुखमरी से मौत हो गई। घटना जिले के सेंधवा ब्‍लॉक की है, जहाँ एक परिवार के 6 सदस्यों की अचानक से तबीयत खराब हो गई, जिन्हें इलाज के लिए सेंधवा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 7 साल के अर्जुन की मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्यों की भी हालत गंभीर बनी हुई है।

दरअसल उल्टी-दस्त की शिकायत के चलते इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम इनके घर पहुँची थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि जाँच के दौरान इनके घर में खाने के लिए कोई अनाज आदि नहीं मिला। टीम में शामिल सुपरवाइजर संजय कौशल ने कहा कि इनके घर में राशन का कोई भी सामान नहीं था और तीन दिन पुरानी सूख चुकी कटी हुई भिंडी मिली थी। संजय कौशल ने कहा कि उन्हें लगता है कि भुखमरी के कारण मासूम की जान गई है।

नई दुनिया में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

अचानक तबीयत खराब होने पर परिजनों का भी कहना था कि कई दिन से भूखा रहने के कारण उनकी ये हालत हुई है। बता दें कि रतन (अर्जुन के पिता) की आर्थिक हालत बेहद ही खराब है। रतन मजदूरी करके किसी तरह से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इसके साथ ही रतन और उसके परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने की बात भी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक रतन का राशन कार्ड नहीं होने से उसे राशन भी उचित मूल्य पर नहीं मिलता है।

सेंधवा की एसडीएम अंशु जावला ने भी कहा कि शुरुआती जाँच में ऐसा लग रहा है कि पीड़ित परिवार का कई दिनों से भूखा रहने के स्वास्थ्य खराब हुआ है।

10 साल, 70000 ऑपरेशन: ₹40 लाख की रंगदारी के मामले ने खोली फ़र्ज़ी डॉक्टर की पोल, गया जेल

सहारनपुर में पुलिस ने एक फ़र्ज़ी डॉक्टर को गिरफ़्तार किया है। गिरफ़्तार डॉक्टर ओमपाल शर्मा 2 नर्सिंग होम चला रहा था और साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी कार्यरत था। ओमपाल को जेल भेज दिया गया है। वह आर्मी अस्पताल से रिटायर है और पेंशन भी ले रहा है। पिछले माह उसने 40 लाख की रंगदारी माँगे जाने का मामला दर्ज कराया था। जाँच के दौरान उसने राजेश आर नाम से एक एमबीबीएस की डिग्री भी दिखाई। साथ ही उसने कर्नाटक मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन का प्रमाणपत्र भी दिखाया। वह बंगलौर स्थित एयरफोर्स के आर्मी हॉस्पिटल से 2008 में ही रिटायर हो चुका है। वहाँ वह बतौर पैरामेडिक तैनात था।

ओमपाल ने जिन राजेश आर के नाम से फ़र्ज़ी डिग्री बनाई थी, वह बंगलौर में प्रैक्टिस करते मिले। पुलिस को तहकीकात के दौरान पता चला कि ओमपाल ने 1995 में एक शपथपत्र देकर अपना नाम राजेश रख लिया था। आरोपित ओमपाल ने दावा किया है कि अब तक वह 70,000 ऑपरेशन कर चुका है। उस पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। उसने प्रसव से लेकर गाल ब्लैडर तक के ऑपरेशन कर रखे हैं। हालाँकि, उसने अब तक कितने ऑपरेशन किए हैं, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन, इस बात की पुष्टि ज़रूर हो गई है कि वह काफ़ी ऑपरेशन करता था।

फ़र्ज़ी डॉक्टर ओमपाल जनरल लैपो सर्जरी भी किया करता था। वह बंगलौर में जब सर्जेंट के पद पर तैनात था, तभी ऐसे खुराफाती विचार उसके दिमाग में आए और उसने अपने ससुराल सहारनपुर के नागल में आकर प्रैक्टिस शुरू कर दी। वह आयुष्मान योजना के तहत भी रजिस्टर्ड है और इसके अंतर्गत 14 लाख रुपए का भुगतान भी हासिल कर चुका है। जाँच पूरी होने तक उसके ‘शिवम नर्सिंग होम’ का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है और उसे स्वास्थ्य केंद्र से भी निलंबित कर दिया गया है।

दरअसल, ओमपाल की पोल खुलने के पीछे उससे रंगदारी माँगे जीने वाली ख़बर का हाथ है। ओमपाल ने इस बाबत पुलिस में मामला दर्ज कराया था और साथ ही शक के आधार पर आरोप लगाया था कि रवि खुराना नामक एक अन्य डॉक्टर के इशारों पर यह सब हो रहा है। जब पुलिस डॉक्टर खुराना के पास पहुँची, तो उन्होंने ओमपाल की सच्चाई बाहर लाते हुए सारे दस्तावेज पुलिस के सामने रख दिए। ओमपाल के ख़िलाफ़ विभागीय जाँच भी शुरू कर दी गई है। इससे पहले उसके अस्पताल में फायरिंग की घटना भी हो चुकी है। उस वक़्त भी वह ख़बरों में आया था।

वर्ष 2016 में ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में उसके नर्सिंग होम में तोड़फोड़ की थी। एक महिला की डिलीवरी के दौरान उसकी तबियत बिगड़ गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने डॉक्टर पर आरोप लगाए थे और उसके पति ने ओमपाल के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया था।

मध्यप्रदेश: दिनदहाड़े पत्रकार पर जानलेवा हमला, कॉन्ग्रेस नेता गोविंद सिंह पर लगा आरोप, लिबरल गैंग मौन

मध्यप्रदेश के भिंड जिले में स्थानीय पत्रकार रीपू धवन से मारपीट की एक वीडियो सोशल मीडिया पर कल (सितंबर 30, 2019) वायरल हुई। वीडियो में दिखा कि दिनदहाड़े कुछ बदमाश पत्रकार को जमीन पर लिटाकर बेरहमी से लगातार मार रहे हैं। पत्रकार लाचार जमीन पर पड़ा है और उसपर चारों ओर से लाठियाँ बरस रही हैं।

हालाँकि, पूरे मामले की वीडियो कैमरे में कैद हो गई लेकिन देखा जा सकता है कि इन सभी बदमाशों ने अपने मुँह पर कपड़ा बाँधा हुआ था, जिससे इनकी पहचान नहीं हो पा रही है। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। आगे की जाँच जारी है। अभी तक पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पत्रकार का आरोप है कि उसपर ये हमला कॉन्ग्रेस नेता गोविंद सिंह के आदेश पर हुआ हैं।

गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है जब मध्यप्रदेश में पत्रकार को बेहरमी से मारा गया हो। इससे पहले मध्यप्रदेश में कॉन्ग्रेस नेता का नाम जबलपुर में पत्रकार पर हुए हमले में भी आया था। जहाँ कॉन्ग्रेस नेता एवं बिल्डर सत्यम जैन और मयूर जैन ने पत्रकार आलोक दिवाकर पर जानलेवा हमला किया था और उन्हें बुरी तरह मारा था।

पत्रकार आलोक दिवाकर पर हमला (तस्वीर साभार: पंजाब केसरी)

इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हुई थी। जिसमें देखा जा सकता था कि पत्रकार को मारने के बाद किस तरह उसे नग्न किया गया। अंत में हालत ऐसी कर दी गई कि पत्रकार सड़क पर नंगा पड़ा रहा और उसका खून बहता रहा।

बाद में पता चला कि इस हमले का कारण ये था कि दिवाकर ने सत्यम जैन के ख़िलाफ़ कोई नकारात्मक रिपोर्ट लिख दी थी। जिस कारण उसे घर लौटते समय बेरहमी से मारा गया।

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि दिनदहाड़े पत्रकार के पीटे जाने के बाद भी बात-बे-बात पर शोर मचाने वाली लिबरल गैंग मौन है क्योंकि यहाँ शासन कॉंग्रेस का है, सत्ता में कमलनाथ और आरोपित कॉन्ग्रेस नेता गोविंद सिंह। लोगों ने जल्द से जल्द आरोपितों पर कार्रवाई की अपील की है।

अर्बन नक्सल गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से अलग हुए CJI गोगोई, कहा- कोई अन्य बेंच सुने

भीमा कोरेगाँव मामले में आरोपित अर्बन नक्सली गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने ख़ुद को अलग कर लिया है। भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में आरोपित गौतम नवलखा ख़ुद को सामजिक कार्यकर्ता बताता है। बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवलखा पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उसने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब सीजेआई गोगोई ने कहा है कि इस मामले को उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिस पीठ का वह हिस्सा नहीं हों।

13 सितम्बर को हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा को 2 सप्ताह तक गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की थी। इस अवधि में उसके पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प था। सोमवार (सितम्बर 30,2019) को सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को इस मामले पर सुनवाई करनी थी। पुणे पुलिस की एफआईआर में गौतम नवलखा और नक्सलियों के बीच साँठगाँठ की बात कही गई है। इस मामले को चीफ जस्टिस गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष पेश किया गया था।

महाराष्ट्र सरकार ने अनुरोध किया था कि इस सम्बन्ध में किसी भी प्रकार का आदेश पारित करने से पहले उसकी बात सुनी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा के ख़िलाफ़ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए इसे गंभीर मामला करार दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस मामले में विस्तृत जाँच की ज़रूरत है। अर्बन नक्सलियों ने एल्गार परिषद का आयोजन किया था, जिसके बाद भीमा कोरेगाँव में हिंसा भड़क गई थी। पुलिस ने कहा है कि गौतम नवलखा और अन्य आरोपितों ने सरकार गिराने की साजिश रची।

नवलखा सहित अन्य आरोपितों पर ग़ैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत कार्रवाई की जा रही है। सुधा भरद्वाज, वरवरा राव, अरुण फरेरा और वेर्नोन गोंसाल्विस इस इस मामले के अन्य आरोपित हैं। इन सभी अर्बन नक्सलियों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने का मामला चल रहा है।

कश्मीर मुद्दे पर UN में भाव न मिलने से बौखलाए इमरान खान: स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी को हटाया

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अपनी स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी को हटा दिया है। उनकी जगह पर मुनीर अकरम को नियुक्त किया गया है। पाक ने यह बदलाव संयुक्त राष्ट्र संघ की हालिया महासभा से लौटने के महज 72 घंटों के भीतर किया है। विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, “राजदूत मुनीर अकरम को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में डॉ मलीहा लोधी की जगह पाकिस्तान का स्थायी प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है।” मलीहा लोधी को हटाने की कोई वजह नहीं बताई गई है। लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि यूएन में जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान को कोई अहमियत न मिलने और देश की किरकिरी कराने की वजह से डॉ मलीहा लोधी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

हालाँकि, इमरान खान मलीहा लोधी के काम से नाखुश बताए जा रहे थे, मगर फिर भी इमरान खान ने अमेरिका से वापस आने के बाद अपने दौरे को बेहद सफल बताया और अपनी पार्टी से खुद का स्‍वागत भी कराया। अब विपक्षी पार्टी पाकिस्‍तान पीपुल्‍स पार्टी (PPP) की नेता शेरी रहमान ने पूछा है कि जब दौरा सफल रहा तो मलीहा लोधी को हटाने की जरूरत क्‍यों पड़ी? मतलब साफ है कि इमरान पाकिस्तानी आवाम को चाहे जितना बरगला लें, लेकिन हकीकत यही है कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को किसी देश ने भाव नहीं दिया। जिससे बौखलाए पाक ने ये कदम उठाया।

बता दें कि मलीहा लोधी अभी हाल में तब चर्चा में आई थीं जब उन्होंने इमरान की अमेरिका यात्रा के दौरान एक फोटो ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को विदेश मंत्री बता दिया था। जब लोगों ने ट्रोल किया तो मलीहा ने ट्वीट डिलीट कर दिया। बाद में उन्होंने इसके लिए माफी भी माँगी थी लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। 

इससे पहले कश्मीर में अत्याचार को दिखाने की नाकाम कोशिश करते हुए मलीहा लोधी ने गाजा की एक घायल फिलीस्तीनी लड़की की तस्वीर दिखा कर कहा था कि यह कश्मीर की एक पीड़ित लड़की है। बाद में पोल खुल गई और मलीहा और पाक की काफी आलोचना हुई थी।

आजम खान की SIT के सामने पेशी, जाँच अधिकारियों ने माँगे 90 सवालों के जवाब

उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद आजम खान ने सोमवार (अक्टूबर 1, 2019) को अपने ऊपर चल रहे कई मामलों को एक के बाद एक निबटाने की जद्दोजहद की। वे अपने ख़िलाफ़ दर्ज मुकदमों की जाँच के लिए एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) के सामने पेश हुए। उनके साथ इस दौरान उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटा अब्दुल आजम भी मौजूद रहे। आजम और उनके परिजन आधे घंटे के करीब महिला थाना में रहे। उन्होंने अफसरों से कहा कि उनके ख़िलाफ़ चल रहे सभी मुकदमे झूठे है। वहीं, जाँच अधिकारियों ने आजम से 90 सवालों के जवाब माँगे हैं।

बताया जा रहा है कि सोमवार को आजम खान काफी दिनों बाद रामपुर में सार्वजनिक रूप से दिखे। उन्होंने पहले सुबह रामपुर विधानसभा सीट से सपा की उम्मीदवार और अपनी पत्नी तंजीन फाातिमा का नामांकन करवाया, फिर कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने लोगों से तंजीन को जिताने की अपील की। बाद में, वह उनके ख़िलाफ़ 84 मामलों की जाँच कर रही एसआइटी टीम के सामने पेश होने महिला थाने पहुँचे।

थाने में आजम खान एसआईटी के सीओ सत्यजीत गुप्ता से मिले। उन्होंने सीओ से कहा कि उनका राजनीतिक जीवन बेदाग है। सरकार आती-जाती रहती है। अफसर बिना किसी भय, पक्षपात के निष्पक्ष होकर जाँच करें।

पेशी के दौरान सीओ ने आजम खान से एक दो नहीं बल्कि 90 सवालों के जवाब की तलब की। उन्होंने आजम खान से जवाब देने का आग्रह किया। आजम खान ने बाताया कि उनके ख़िलाफ़ सभी मुकदमे झूठे हैं, उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस दौरान आजम खान के समर्थक दलीलें देते रहे, लेकिन अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा।

यहाँ उल्लेखनीय है कि आलियागंज के किसानों की जमीन हड़पने के मामले में दर्ज 27 मुकदमों में बयान लेने के लिए पुलिस ने सपा सांसद को नोटिस दिया था। जौहर विश्वविद्यालय को लेकर उनका (सपा सांसद आजम खान) कहना था कि इस विश्वविद्यालय का निर्माण उनका सपना था और उसे पूरा करने के लिए ही उन्होंने लोगों से चंदे माँगे। उनके मुताबिक उन्होंने किसी की जमीन नहीं हड़पी है। जो किसान आज अपने आप को पीड़ित बता रहे हैं और उनपर केस कर रहे हैं, उनकी सहमति से ही जमीनें ली गई थीं।

शाहरुख़ ने साथियों संग मिल शिवसेना नेता को चाकू से मार डाला, तनाव के बाद इलाक़े में कर्फ्यू

महाराष्ट्र के अमरावती में शिवसेना नेता की हत्या के बाद तनाव उत्पन्न हो गया। जिले के कई ग्रामीण इलाक़ों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। शिवसेना नेता की हत्या के बाद दो समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न हो गया, जिसके कारण 2 अन्य लोग भी मारे गए। परतवाड़ा क्षेत्र में शिवसेना नेता की चाकू घोंप कर हत्या कर दी गई। कहा जा रहा है कि शाहरुख़ नामक व्यक्ति से झगड़े के बाद उनकी हत्या की गई। शिवसेना नेताओं व स्थानीय लोगों का दावा है कि हत्यारे मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। स्थानीय लोगों ने मुस्लिम समुदाय के 3 लोगों को गिरफ़्तार करने की माँग की है।

अचलपुर, फरवरा और सरमासपुरा थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया है। यह निर्णय दोनों समुदायों के बीच पत्थरबाजी के बाद लिया गया। मारे गए शिवसेना नेता का नाम शमा पहलवान नंदवंशी है। कहा जा रहा है कि उनकी हत्या के बाद उपजे संघर्ष के बाद सैफ अली और अब्दुल अतीक नामक दो मुस्लिम समुदाय के लोग भी मारे गए। रूरल एसपी ने कहा कि अभी स्थिति नियंत्रण में है। पुलिस ने 6 आरोपितों को हिरासत में लिया है लेकिन फ़िलहाल उनका नाम बताए जाने से इनकार किया जा रहा है।

ये घटना सोमवार (सितम्बर 30, 2019) की है, जब नंदवंशी पर परतवाड़ा के टिम्बर मार्केट में दिनदहाड़े चाकुओं से हमला कर दिया गया। कहा जा रहा है कि शाहरुख़ और नंदवंशी की पुरानी दुश्मनी थी। शाहरुख़ ने धोखे से मामले को ठीक करने के लिए उन्हें टिम्बर मार्केट में बुलाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब शिवसेना नेता वहाँ पहुँचे तो मुगलईपुरा निवासी शाहरुख़ और उसके 5 साथियों ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में उनकी मौत हो गई, जिसके बाद समर्थक भड़क उठे।

आक्रोशित शिवसेना कार्यकर्ताओं ने जम कर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने कहा है कि आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इलाक़े में स्कूलों व कॉलेजों को 1 दिन के लिए बंद कर दिया गया है। एसआरपीएफ की टीम को मौके पर तैनात किया जा रहा है।

केजरीवाल ने नजीब के परिवार को दिए ₹5 लाख और सरकारी नौकरी, कपिल मिश्रा ने कहा- आतंकी बनो, इनाम पाओ

दिल्ली वक्फ बोर्ड ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के लापता छात्र नजीब अहमद की माँ को 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद और उसके भाई को नौकरी देने के तुरंत बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। कपिल मिश्रा ने केजरीवाल से पूछा है कि राज्य सरकार लापता हुए अन्य छात्रों के परिवार को मुआवजा क्यों नहीं दे रही है?

ट्विटर पर साझा किए गए एक वीडियो में कपिल मिश्रा ने दावा किया कि दिल्ली सरकार ने लापता जेएनयू छात्र नजीब अहमद के परिवार को 5 लाख रुपए और उनके भाई को सरकारी नौकरी प्रदान की है। मिश्रा ने सवाल किया कि राज्य सरकार ने अन्य लापता बच्चों के परिवारों को मुआवजा क्यों नहीं दिया?

कपिल मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “केजरीवाल ने लापता जेएनयू छात्र नजीब के परिवार को 5 लाख रुपए और एक सरकारी नौकरी दी। चर्चा में है कि नजीब आईएसआईएस (ISIS) में शामिल हो गया है। दिल्ली में हर साल 8,000 बच्चे लापता हो जाते हैं। उनके माता-पिता का क्या कसूर है, सिर्फ हिन्दू होना? केजरीवाल केवल जिहादी और नक्सलियों को ही पैसा देगा? ये कैसा कानून, ये कैसी सरकार।”

एक अन्य पोस्ट में कपिल मिश्रा ने लिखा, “केजरीवाल सरकार की नई स्कीम – आतंकवादी बनो, इनाम पाओ। 5 लाख रुपए और सरकारी नौकरी। दिल्ली में 5 साल में 40,000 बच्चे खोए। उनमें से केवल एक पर केजरीवाल मेहरबान। नजीब के बारे में चर्चा है कि वो आतंकवादी बन चुका है। फिर केजरीवाल सिर्फ एक परिवार पर मेहरबान क्यों?”

सोमवार (सितंबर 30, 2019) को दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और AAP विधायक अमानतुल्ला खान ने ट्वीट किया, “आज हमने दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड में 3 साल पहले JNU से ग़ायब छात्र नजीब की माँ को 5 लाख रुपए की मदद और नजीब के भाई हसीब को पक्की नौकरी दी और 200 ज़रूरतमंद परिवारों को मदद दी।”

गौरतलब है कि नजीब 15 अक्टूबर, 2016 को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। आरोप है कि जेएनयू कैंपस से गायब होने से एक दिन पहले नजीब के साथ कुछ स्टूडेंट्स की झड़प हुई थी। हालाँकि, सीबीआई का कहना है कि किसी प्रकार की आपराधिक गतिविधि के सबूत नहीं मिले।