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‘अयोध्या पर फ़ैसला अगर पक्ष में आए तो भी मस्जिद बनना मुमकिन नहीं, ज़मीन हिन्दुओं को दे दी जाए’

जहाँ एक तरफ़, सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए 17 अक्टूबर की तारीख तय कर रखी है, वहीं दूसरी तरफ़ इस ज़मीनी विवाद का मध्यस्थता के ज़रिए हल निकालने की एक और कोशिश शुरू की है। इसके लिए ‘इंडियन मुस्लिम फॉर पीस’ नाम के संगठन ने गुरुवार (10 अक्टूबर) को बैठक की। इस बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि करोड़ो हिन्दुओं की आस्था को देखते हुए विवादित ज़मीन राम मंदिर के निर्माण के लिए दे दी जाए। बैठक में कुल चार प्रस्ताव पारित किए गए, जिन्हें बाबरी मस्जिद के पक्षकार सुन्नी वक़्फ बोर्ड के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता कमेटी को भेजा जाएगा। 

चार प्रस्ताव इस प्रकार हैं:

  1. मंदिर-मस्जिद मसले का हल कोर्ट के बाहर हो।
  2. मस्जिद बनाने के लिए कोई अच्छी जगह दी जाए।
  3. प्रोटेक्शन ऑफ़ रिलीजन क़ानून-1991 के तहत तीन महीने की सज़ा को बढ़ाकर तीन साल या उम्र क़ैद की जाए।
  4. अयोध्या के रास्ते में जितनी भी मस्जिदें, दरगाह या इमामबाड़े हैं, उनकी मरम्मत की सरकार अनुमति दे।

ख़बर के अनुसार, संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक़ यह क़दम इसलिए उठाया जा रहा है जिससे भारत में हिन्दू-मुस्लिम एकता की पहचान बनी रहे और किसी पक्ष को नीचा ना देखना पड़े। बता दें कि इस संगठन में तमाम पदाधिकारी वही लोग शामिल थे, जो पिछले काफ़ी दिनों से आर्ट ऑफ़ लिविंग के श्री श्री रविशंकर के साथ समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं।

इस नए संगठन का गठन इन सभी लोगों ने किया है। इसमें रिटायर्ड फ़ौजी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ज़मीरउद्दीन शाह, रिटायर्ड जज, रिटायर्ड आईएएस अनीस अंसारी, रिटायर्ड आईपीएस, रिसर्च फाउंडेशन के अतहर हुसैन समेत शहर के कई गणमान्य मुस्लिम और हिंदू लोग शामिल थे।

बैठक में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के पूर्व कुलपति रिटायर्ड लेफ़्टिनेंट जनरल ज़मीरउद्दीन शाह ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला हमारे पक्ष में आ भी जाए तो मस्जिद बनना मुमकिन नहीं है। इसलिए बहुसंख्यक हिन्दुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ज़मीन उन्हें गिफ्ट कर दी जाए। इससे सौहार्द बना रहेगा। उन्होंने कहा कि इस बात पर सुन्नी सेंट्रल बोर्ड भी हमारे साथ है। हालाँकि, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों ने इस तरह की किसी भी बातचीत से इनकार किया है।

पूर्व IAS अनीस अंसारी ने कहा कि यह देश का सबसे गंभीर साम्प्रदायिक मामला है। इसका हल आपसी बातचीत के ज़रिए निकाला जाना चाहिए। हमने जो प्रस्ताव पास किया है, उसे सुन्नी वक़्फ बोर्ड के मार्फ़त शीर्ष अदालत की मध्यस्थता समिति में भेजेंगे। उन्होंने कहा कि वो मानते हैं कि शीर्ष अदालत में केस लड़ना एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन मध्यस्थता बेहतर रास्ता है।

वहीं, आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के सचिव ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा कि अयोध्या मामले पर शीर्ष अदालत जो भी फ़ैसला करेगा उसे ही माना जाएगा। इस मामले में पर्सनल लॉ बोर्ड और बाबरी एक्शन कमेटी का स्टैंड आज भी वही है।

मध्यस्थता के लिए आयोजित इस बैठक का कुछ मुस्लिम संगठनों ने विरोध भी किया। इत्तेहादुल मुस्लिम मजालिस संगठन ने होटल के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि जब 18 नवम्बर तक फ़ैसला आ जाएगा तो उससे पहले मध्यस्थता का क्या मतलब है? कुछ लोग सिर्फ़ अपनी राजनीति चमकाने के लिए आम जनता को बहकाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा इंडियन मुस्लिम लीग ने भी गाँधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। संगठन के मोहम्मद अतीक ने कहा कि बाबरी मस्जिद के नाम पर सौदेबाज़ी की जा रही है।

पीसी चाको हैं शीला दीक्षित की मौत के जिम्मेदार, कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें: संदीप दीक्षित

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मृत्यु के बाद आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी दिल्ली कॉन्ग्रेस बिना अध्यक्ष के दो हिस्सों में बँटती नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शीला दीक्षित के बेटे एवं पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने दिल्ली कॉन्ग्रेस प्रभारी पीसी चाको को कानूनी नोटिस भेजकर उन्हें अपनी माँ की मौत का जिम्मेदार ठहराया है।

उल्लेखनीय है कि शीला दीक्षित का निधन इसी वर्ष 20 जुलाई को हुआ था। जिस समय उनकी मौत हुई उस वक्त वे दिल्ली कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष थीं। संदीप दीक्षित के मुताबिक उनके निधन से कुछ दिन पहले उनके और पीसी चाको के बीच दिल्ली कॉन्ग्रेस के कामकाज को लेकर विवाद हुआ था। उनका कहना है कि चाको के मानसिक उत्पीड़न से उनकी माँ का निधन हुआ था।

संदीप दीक्षित ने पीसी चाको को नोटिस भेजकर माँग की है कि शीला को दिए गए मानसिक उत्पीड़न के लिए चाको माफी माँगे वरना वे कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। दीक्षित ने माफी न माँगने की हालत में चाको के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की भी बात अपने कानूनी नोटिस में लिखी है।

एबीपी न्यूज की खबर के अनुसार अस्वस्थ हालात में शीला दीक्षित द्वारा लिए गए दिल्ली कॉन्ग्रेस से जुड़े फैसले को पीसी चाको ने जिस प्रकार रोका, वे उससे बेहद आहत थीं। इन्हीं सब विवादों के चलते उनकी सेहत पर असर पड़ा।

खबरों के मुताबिक इस पूरे मामले की पुष्टि पीसी चाको और संदीप दीक्षित के नजदीकी सूत्रों ने की हैं। हालाँकि चाको ने कहा है कि वे नहीं बता सकते कि चिट्ठी में क्या है? लेकिन चाको की ओर से ये चिट्ठी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भेज दी गई है।

पूरा मामला

गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों में हार के बाद अस्वस्थ हालत में अस्पताल में रहते हुए भी शीला दीक्षित ने सभी ब्लॉक कमेटियों को भंग करने, तीनों कार्यकारी अध्यक्षों के कार्यभार में फेरबदल और सभी 280 ब्लॉक में आब्जर्वर नियुक्त करने का अहम फैसला लिया था। लेकिन चाको ने उनके फैसले पर रोक लगा दी और पुरानी कमेटियों को बहाल रखा। इसके बाद से ही उन दोनों के बीच मनमुटाव बढ़ गया था। फिर, पूर्व मुख्यमंत्री अस्पताल से घर लौट आईं लेकिन उनका कुछ दिनों में निधन हो गया और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद खाली हो गया।

कहा जाता है शीला दीक्षित ने अपने निधन से पहले कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को एक पत्र भी लिखा था, लेकिन उसमें क्या था इसका खुलासा अभी सार्वजनिक तौर पर नहीं हुआ। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक शीला दीक्षित ने अपने पत्र में सोनिया गाँधी से पार्टी में चल रही गुटबाजी को परेशानी का कारण बताया था। उन्होंने ये भी आरोप लगाया था कि पीसी चाको किसी वरिष्ठ नेता के इशारे पर पार्टी को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं।

इसके बाद ये जगजाहिर है कि उनके आखिरी दिनों में मानसिक तौर पर परेशान रहने की बात उनके बेटे सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। उन्होंने अपनी माँ के मौत के बाद ये भी कहा था कि पार्टी में कुछ लोग ओछी हरकत कर रहे हैं।, जिसका नुकसान पार्टी को हुआ।

ब्लैक लिस्ट होने के डर से पाक का नया पैंतरा: दिखावे के लिए हाफिज सईद के 4 टॉप आतंकी किए गिरफ्तार

आतंक के खिलाफ लड़ाई में हमेशा दोहरा चरित्र अपनाने वाले पाकिस्तान ने एक बार फिर से दुनिया को धोखा देने की साजिश रची है। जहाँ एक ओर पाकिस्तान पर फाइनैंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) की तरफ से ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है, वहीं दूसरी और पाकिस्तान ने इससे बचने के लिए फिर से एक दिखावा किया है।

दरअसल, पाकिस्तान ने आतंक के खिलाफ लड़ाई का ढोंग करते हुए गुरुवार (अक्टूबर 10, 2019) को मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा के चार टॉप आतंकियों को गिरफ्तार किया है। चारों को टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार चारों आतंकी की पहचान प्रोफेसर जफर इकबाल, याहया अजीज, मुहम्मद अशरफ और अब्दुल सलाम के रूप में हुई है। पाकिस्तान प्रशासन ने दावा किया है कि आतंकी फंडिंग के मामले में लश्कर-ए-तैयबा और हाफिज सईद के संगठन जमात उद दावा (जेयूडी) के पूरे शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई की जाएगी।

खूंखार आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान की यह कार्रवाई एफएटीएफ की बैठक से पहले सामने आई है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों एफएटीएफ से जुड़े एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) ने माना था कि पाकिस्तान ने यूएनएससीआर 1267 के प्रावधानों को उचित तरह से लागू नहीं किया। वह मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज समेत दूसरे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। ऐसे में अगले हफ्ते पेरिस में होने वाली बैठक में उसे ग्रे लिस्ट से हटाकर ब्लैक लिस्ट में रखा जा सकता है। यह बैठक 12 से 15 अक्टूूबर के बीच होनी है।

एफएटीएफ टेरर फंडिंग और आतंकवाद के चलते पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल चुका है। अब एफएटीएफ पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने की प्लानिंग बना रहा है। इससे पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ गई है। वह इससे बचने के लिए आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का नाटक कर रहा है।

काउंटर टेरोरिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैय्यबा के टॉप आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है. इन आतंकियों को सीटीडी पंजाब ने नेशनल एक्शन प्लान (NAP) के तहत टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। सीटीडी ने कहा कि लश्कर-ए-तैय्यबा और जमात-उद-दावा का सरगना हाफिज सईद पहले से ही लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। 2008 के मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ केस चलाया जा रहा है।

कॉलोनी में रहना है, तो असलम भाई कहना है, समझ गए ना, यहाँ मोदी जी नहीं आएँगे: बंद कराया भजन

सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो है महाराष्ट्र के मलाड का, जहाँ एक मुस्लिम युवक असलम अपने कुछ साथियों के साथ दुर्गा पंडाल में बज रहे भजन को न सिर्फ़ बंद करने का हुक़्म दिया बल्कि पंडाल में मौजूद लोगों को धमकीभरे लहज़े में चेतावनी देते हुए कहा, “कॉलोनी में रहना है, तो असलम भाई-असलम भाई कहना है, समझ गए ना। यहाँ मोदी जी नहीं आएँगे, यहाँ असलम भाई ही आएँगे…बस।”

महज़ 37 सेकंड के इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि असलम नाम का यह शख़्स पंडाल के लोगों पर किस तरीक़े से अपनी धौंस जमाता है। इस वीडियो को देखकर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इलाक़े के लोगों पर असलम का काफ़ी दबदबा है क्योंकि जैसे ही उसने भजन बंद करने को कहा तो उन्होंने बज रहे भजन को डरकर तुरंत बंद कर दिया। और यह पूछे जाने पर कि क्या कहना तो डरकर जवाब दिया कि ‘असलम भाई-असलम भाई कहना है’।

ख़बर के अनुसार, इस वीडियो को विश्व हिन्दू परिषद् के नेता ने भी शेयर किया और लिखा कि कुछ शांतिप्रिय गुंडों ने गरबा पंडाल में भक्ति गीत बंद कर दिए, यह मुंबई का मलाड क्षेत्र है। लेकिन, यह धर्मनिरपेक्षता है और हमारे लिबरल्स को यह ग़लत नहीं लगा।

यह सर्वविदित है कि हमारे देश में दुर्गा पूजा का उत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जहाँ एक तरफ़ भक्तजन आस्था के इस पर्व में सराबोर दिखते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ मुस्लिम समुदाय ने आस्था के इस पर्व पर हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देकर न सिर्फ़ हिन्दुओं की आस्था को तार-तार किया बल्कि उनके धार्मिक अनुष्ठानों में कई तरह के व्यवधान भी डाले। कहीं ईंट-पत्थर, तलवार और हथियार से हमले किए गए। कितनी ही मूर्तियाँ तोड़ी गईं। इतना ही नहीं, विसर्जन के दौरान मार्ग पर मांस के टुकड़े तक बिखेरे गए।

माओवादियों से संबंध के आरोप में UAPA के तहत, उस्मानिया यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर गिरफ्तार

तेलंगाना पुलिस ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के एक सहायक प्रोफेसर डॉ के जगन को कथित माओवादियों के लिंक के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। तेलंगाना पुलिस ने प्रतिबंधित माओवादी दलों के कथित संबंधों वाले व्यक्तियों पर अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में कार्यरत एक सहायक प्रोफेसर डॉ के जगन के आवास पर तलाशी ली। 

डॉ जगन के हैदराबाद के तरनाका स्थित निवास पर ली गई तलाशी के दौरान भड़काऊ सामग्री, माओवादी पार्टी के लेटरहेड और प्रतिबंधित साहित्य बरमाद हुई। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अधिकारी जोगुलाम्बा गडवाल ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा, “हमने जगन को गिरफ्तार किया है, जो उस्मानिया विश्वविद्यालय में एक सहायक प्रोफेसर है। जगन को हमने गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया है। अब तक मामले में चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें एक छात्र संगठन अध्यक्ष भी शामिल है।”

पुलिस के मुताबिक, प्रोफेसर के पास से नक्सलियों को लिखे गए पत्र भी बरामद किए गए। जोगुलाम्बा गडवाल ने कहा, “हमने उनके लैपटॉप में माओवादी पार्टी से संबंधित अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं। आरोपित लगातार माओवादी पार्टी के सदस्यों के संपर्क में थे और उनमें से एक उनके लिए भर्ती भी था।” वहीं दूसरी ओर, विप्लव रचायतुला संगम (क्रांतिकारी लेखक संघ) के सदस्यों ने गिरफ्तारी की निंदा करते हुए जगन की तत्काल रिहाई की माँग की है।

फ्रांस से लौटकर राफेल पर बोले राजनाथ, कहा- बचपन से मानता हूँ कोई महाशक्ति है, पूजा पद्धति पर सवाल ठीक नहीं

फ्राँस के तीन दिवसीय दौरे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार (गुरुवार 10, 2019) को लौट आए। यहाँ वापस आते ही उन्होंने राफेल की शस्त्र पूजा करने पर सवाल उठाने वाले लोगों पर अपना बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूजा पद्धति पर सवाल उठाना ठीक नहीं।

रक्षा मंत्री ने कहा, “जो मुझे सही लगा मैंने वही किया। यह हमारी आस्था है कि कोई प्राकृतिक शक्ति है और मैं इस पर बचपन से भरोसा करता रहा हूँ।”

उन्होंने कहा, “सभी धर्मों के लोगों को अपनी आस्था के अनुसार प्रार्थना करने का अधिकार है। यदि किसी और ने ऐसा किया होता, तब मैं इस पर कोई आपत्ति नहीं करता। मुझे लगता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी में भी इस मामले पर राय बँटी हुई होगी। जरूरी नहीं है कि हर किसी की यही राय हो।”

गौरतलब है कि वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा की गई राफेल पूजा को तमाशा बताया था। उन्होंने कहा था कि जब कॉन्ग्रेस पार्टी ने बोफोर्स तोप खरीदी थी तब कोई उसे इस तरह दिखावा करके लेने नहीं गया था। जिसपर कॉन्ग्रेस के ही नेता संजय निरूपम ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था कि शस्त्र पूजा को तमाशा नहीं कहा जा सकता हमारे देश में शस्त्र पूजा की पुरानी संस्कृति है। परेशानी ये है कि खड़गे जी नास्तिक हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी में हर कोई नास्तिक नहीं है।

गृह मंत्री अमित शाह ने भी खड़गे के इस बयान पर कॉन्ग्रेस को बुधवार को जवाब दिया था। उन्होंने कैथल में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, “क्या विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा नहीं होनी चाहिए? उन्हें (कॉन्ग्रेस) इस बात पर चिंतन करना चाहिए कि किस चीज की आलोचना करनी है, किस चीज की नहीं।”

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को पेरिस पहुँचकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 36 राफेल लडाकू विमानों की खेप के तहत पहला विमान रिसीव किया था और दशहरे का अवसर होने के कारण उसकी शस्त्र पूजा भी की थी। बाद में उन्होंने इस विमान में उड़ान भी भरी थी। लेकिन शस्त्र पूजा के दौरान उन्होंने राफेल पर जो ऊँ लिखा, उससे खड़गे और संदीप दीक्षित जैसे विपक्षी नेता भड़क गए। इन नेताओं ने पूजा पर सवाल उठाए। इन्हीं सवालों का जवाब रक्षा मंत्री ने स्वदेश लौटकर विनम्रता से दिया है।

सांसद जी को खाली करना पड़ा सरकारी बंगला, तो उखाड़ ले गए खिड़की-दरवाजे-टाइल

बिहार से आने वाले पूर्व सांसद पप्पू यादव को सरकार ने बंगला खाली करने को कहा तो वे उसे ऐसे छोड़ कर गए हैं कि बिना भारी मरम्मत के किसी ‘माननीय’ के तो दूर की बात, किसी आम-से-आम आदमी के रहने लायक नहीं बचा है। मीडिया रिपोर्टों में उनके जाने के बाद बंगले के नज़ारे की तुलना युद्ध में मची तबाही से की गई है। फर्नीचर बिखरा पड़ा है, कमरों से खिड़की-दरवाज़े तो दीवारों से टाइलें निकाल ली गईं हैं। बताया जा रहा है कि बंगले की इस हालत का कारण यहाँ हुए ‘अतिरिक्त’ निर्माण कार्य को हटाया जाना है।

‘बिहार से आए 400 लोगों का रहता था इंतज़ाम’  

पप्पू यादव का यह बंगला दिल्ली के सबसे पॉश इलाकों में से एक लुटियंस ज़ोन में स्थित था। बलवंत राय मेहता लेन स्थित 11A बंगले में मौजूद यादव के निजी सचिव अजय कुमार के मुताबिक पप्पू यादव ने यहाँ पर 400 लोगों के ठहरने की व्यवस्था स्थापित की थी। अजय कुमार बताते हैं कि यह उन लोगों के लिए थी, जो मधेपुरा (सांसद के निर्वाचन क्षेत्र) सहित बिहार से दिल्ली इलाज कराने आते हैं। बंगले के बाहर ‘सुभाष चंद्र बोस सेवाश्रम’ का बोर्ड भी लगा था।

तोड़-फोड़ की तोहमत CPWD पर

अजय कुमार ने तोड़-फोड़ की तोहमत CPWD (केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग) पर लगाया है। उनके हिसाब से सारी तोड़-फोड़ CPWD अधिकारियों की मौजूदगी में की गई। वहीं मीडिया से बात करते हुए विभाग के अधिकारी इस दावे को सिरे से नकार रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग को हाथ वहाँ लगना पड़ता है, जहाँ से बंगला जबरन खाली कराया जा रहा हो, जबकि पप्पू यादव का नाम अभी जबरिया खाली कराए जाने की सूची में था ही नहीं।

अखिलेश भी कर चुके हैं हरकत

इसके पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी ऐसी ही हरकत कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहले तो उन्होंने ये-वो बहाने कर के बंगला छोड़ा ही नहीं, और जब छोड़ा, तो उसकी टोंटियाँ तक साथ ले गए। वहीं पप्पू यादव के ही गृह राज्य बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का बंगला लंबी जद्दोजहद के बाद जब यादव का पदभार संभालने वाले सुशील मोदी को मिला तो पता चला कि तेजस्वी यादव ने बंगले में तमाम निर्माण कार्य करा रखा था। मोदी ने पत्रकारों को आलीशान बंगले का भ्रमण कराया, और उसके सौन्दर्यीकरण में तेजस्वी यादव के खर्च को करोड़ों के सरकारी धन का दुरुपयोग बताया था।

‘फूहड़’ बिग-बॉस पर प्रकाश जावड़ेकर ने दिखाई सख्ती, मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट- शो पर लटकी तलवार

हमेशा से विवादों में घिरे रहने वाला रियेलिटी शो बिग-बॉस हाल ही में अपने फूहड़ और अश्लील कारनामों के चलते लोगों के निशाने पर आ गया। इसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करने से लेकर मंत्रालय तक इस सम्बन्ध में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।

कई लोगों ने शो में पेश की जाने वाली अश्लीलता और फूहड़ कंटेंट को लेकर आपत्ति ज़ाहिर करते हुए यहाँ तक कह दिया था कि इस शो को बैन कर देना चाहिए। हाल ही में हुए इन तमाम घटनाक्रमों को लेकर इस शो ने दुबारा सुर्खियाँ बटोरी थीं। मगर सुर्ख़ियों की बीच तमाम शिकायतों और सोशल मीडिया तक पर लोगों की नाराज़गी के चलते सूचना प्रसारण मंत्रालय ने अब जो निर्णय लिया है, उसके बाद बिग-बॉस नामक इस शो और उससे जुड़े कलाकारों को धक्का लग सकता है क्योंकि फूहड़ता परोसने के लिए इस कार्यक्रम पर अब तलवार लटक रही है।

खबर है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रसार भारती से इस कार्यक्रम में फूहड़ता और तमाम तरीके का आपत्तिजनक कंटेंट परोसे जाने को लेकर जानकारी माँगी है। साथ ही करनी सेना की ओर से इसको बैन करने की भी माँग हो रही है। उनका कहना है कि यह कल्चर के खिलाफ है और एक सभ्य समाज में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखे अपने पत्र में करनी सेना ने बिग-बॉस-13 के खिलाफ शिकायत करते हुए उस पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की माँग करते हुए सलमान खान के खिलाफ भी कार्रवाई करने की बात कही है। अपने पत्र में बिग-बॉस रियेलिटी शो का उल्लेख करते हुए करनी सेना ने कहा था कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय प्रसारण पर लव जिहाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिन्दू संस्कृति का भी अपमान कर रहा है।

J&K पर जिसने उगला जहर, उसी से मिलने पहुँचा कॉन्ग्रेस प्रतिनिधिमंडल: आखिर पार्टी की मजबूरी क्या है?

भारत में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने का विरोध करने वाले ब्रिटिश संसद के नेता से मिलने गए कॉन्ग्रेस पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल की जमकर आलोचना हो रही है। ब्रिटेन के इस नेता का नाम जेरेमी कोर्बिन है, जिनकी राजनीति लेबर पार्टी से चलती है। हाल ही में कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद कोर्बिन ने कश्मीर में मानवाधिकार का मुद्दा उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि कश्मीर क्षेत्र में तनाव कम करने की हर कोशिश को अपनाया जाना चाहिए।

मामला तब सुर्ख़ियों में आया जब ब्रिटिश नेता ने ट्विटर पर अपने एकाउंट से कॉन्ग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट कर उन्हें मानवाधिकार मुद्दों पर दोनों पक्षों की चर्चा की जानकारी दी। कोर्बिन द्वारा ट्वीट की गई तस्वीर में कमल धालीवाल को साफ़ देखा जा सकता है, जो यूनाइटेड किंगडम में ओवरसीज़ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं।

यह मामला चर्चा का विषय तब बन गया जब भाजपा ने इसको लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने कश्मीर पर दिए कोर्बिन के इस बयान को आड़े-हाथों लेते हुए घटना के बारे में ट्वीट कर कहा, “घटिया”। इसके आगे बीजेपी ने लिखा, “देश की जनता कॉन्ग्रेस पार्टी से सफाई चाहती है कि उनके नेताओं ने विदेशी नेताओं से क्या बात की है? देश की जनता कॉन्ग्रेस पार्टी को उनकी इस धोखेबाजी के लिए करारा जवाब देगी।”

वैसे कश्मीर और अनुच्छेद 370 के हटने पर कॉन्ग्रेस की राजनीति कोई पहला मामला नहीं है, जिस कारण से पार्टी देशहित के खिलाफ जाने की अपनी आदत के चलते निशाने पर आई हो। साल 2017 में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था, जब भारत-चीन सीमा पर डोकलाम विवाद हुआ था। इसके बाद सीमा पर तनाव के चलते दोनों देशों के संबंधों के बीच मतभेद गहरा गए थे मगर ऐसे माहौल में अचम्भा तब हुआ था, जब राहुल गाँधी के एक चीनी राजदूत से मिलने की खबर सामने आई थी।

1 लाख से ज्यादा कुँवारे ईसाई, शादी के लिए लड़की नहीं मिल रही: चिंता में चर्च

केरल के साइरो मालाबार चर्च (सीरियाई मालाबारी चर्च) ने ईसाई समुदाय की केरल की जनसंख्या में घटती हिस्सेदारी पर चिंता प्रकट की है। उन्होंने इसे समुदाय के लिए ‘चिंताजनक स्थिति’ बताया है। इसके लिए एक कारण समुदाय के एक लाख से भी अधिक अविवाहित पुरुषों का होना बताया गया है। चर्च के मुताबिक इन 1,00,000 पुरुषों की उम्र 30 वर्ष के ऊपर है।

सभी चर्चों में पढ़ा गया आर्चबिशप का पत्र

चंगन्चेरी आर्चडायोसीस के आर्चबिशप मार जोसेफ़ पेरुमतोट्टम ने ईसाई समुदाय को इस विषय पर एक पत्र लिखा है। विगत 6 अक्टूबर को साप्ताहिक रविवार ‘मास’ के बाद सभी पादरियों ने यह पत्र पढ़ कर ईसाई समुदाय को सुनाया। इसके अनुसार जीवनसाथी न मिलने के अलावा ईसाई समुदाय गिरती जन्म दर, बेरोजगारी, कृषि संकट और यहाँ तक कि हालिया बाढ़ का भी पीड़ित है। आर्चबिशप के पत्र के अनुसार बेरोजगारी से लेकर बाढ़ तक यह सभी मुद्दे ईसाई समुदाय के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं।

‘पहले हम बहुत थे, अब तो सब छोड़-छोड़ कर भाग रहे हैं’

पत्र में ईसाईयों को याद दिलाया गया है कि कैसे जब केरल राज्य बना था तो ईसाई दूसरा सबसे बड़ा मज़हबी समुदाय था, जबकि आज महज़ 18.38% बचे हैं। हालिया वर्षों में ईसाई जन्म दर में 14% की गिरावट आई है। चर्च ने इसके अलावा युवा ईसाईयों में माँ-बाप को अकेला घर पर छोड़कर राज्य से बाहर चले जाने की प्रवृत्ति पर भी शोक व्यक्त किया। चर्च ने कहा, “अधिकांश युवा ईसाई NRI हैं। बेरोजगारी सबसे बड़ा कारण है और यह ईसाई समुदाय में बड़े पैमाने पर हो रहा है।”

छापेंगे किताब

चर्च ने तय किया है कि उसकी समस्याओं पर बाकायदा एक किताब/पाठ्यपुस्तक का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा समुदाय के सदस्यों में इन मामलों के बारे में जागरुकता के लिए एक शिक्षण समिति भी बनेगी। चर्च ने बताया, “इसके अलावा उन्हें एक हेलो डेस्क बनाकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की जानकारी दी जाएगी। यह योजना आर्चडायोसीस के अंतर्गत आने वाले एक-एक चर्च और स्कूल पर लागू होगी।”