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हम पाकिस्तान से तो बात कर सकते हैं, लेकिन ‘टेररिस्तान’ से नहीं, जिहाद नीति नहीं हो सकता: विदेश मंत्री

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान से वार्ता करने के बारे में कहा कि हिंदुस्तान को पाकिस्तान से बात करने में वैसे तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से ‘टेररिस्तान’ बन चुका है। उन्होंने पाकिस्तान पर कश्मीर में जिहाद का बाकायदा ‘उद्योग’ स्थापित करने का आरोप भी लगाया। “हिंदुस्तान को पाकिस्तान से बात करने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन हमें ‘टेररिस्तान’ से बात करने में समस्या है। और उन्हें (बात करने के लिए) पाकिस्तान होना पड़ेगा, टेररिस्तान नहीं।”

‘आतंक की फैक्ट्री केवल कश्मीर नहीं, पूरे हिंदुस्तान के लिए’

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे पर न्यूयॉर्क में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की 370 के मुद्दे पर जो प्रतिक्रिया आई, वह इसीलिए थी कि उसने जिहाद का पूरा उद्योग खड़ा किया था कश्मीर मुद्दे के जवाब में। वह यही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से तो इसका निशाना केवल कश्मीर ही नहीं, पूरा हिंदुस्तान है।

उन्होंने हर बात पर कश्मीर को घसीटने के लिए भी पाकिस्तान को लताड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है हिंदुस्तान-पाकिस्तान बाकी हर बात पर सहमत हैं, उनके बीच बाकी के रिश्ते बहुत अच्छे हैं, और केवल कश्मीर ही दोनों के अच्छे संबंधों के बीच आता है। “हमारे ऊपर मुंबई हमला हुआ। मुंबई कश्मीर का हिस्सा नहीं है। तो अगर पाकिस्तानी जिहादी उन राज्यों और क्षेत्रों पर हमला कर सकते हैं, जो कश्मीर से बहुत दूर हैं, तो हमें यह मानना होगा ही कि यह समस्या (महज़ कश्मीर से) ज़्यादा बड़ी है।”

‘जिहाद आपकी नीति नहीं हो सकता’

जयशंकर से पूछा गया कि पाकिस्तान की जिहाद से लड़ने की बातों के बारे में उनकी क्या प्रतिक्रिया है, तो उन्होंने दोटूक पाकिस्तान पर खुद ही जिहाद को अपनी सरकारी नीति बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुद्दा महज़ कश्मीर नहीं, उससे बड़ा है। “पाकिस्तान को यह मानना होगा कि उन्होंने जो मॉडल अपने लिए बनाया है (जिहाद का), वह काम नहीं कर रहा है। आज की तारीख में आप जिहाद को सरकारी तंत्र की वैधता-प्राप्त नीति नहीं बना सकते। यह मुद्दे की जड़ है।”

NRC लागू हुआ तो मनोज तिवारी को छोड़नी पड़ेगी दिल्ली: पूर्वांचल वासियों को भगाना चाहते हैं केजरीवाल

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी में ठन गई है। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में NRC लागू होने के बाद तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी। जवाब में तिवारी ने कहा कि केजरीवाल पूर्वांचल से आए लोगों को दिल्ली से भगाना चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि तिवारी असम की तरह दिल्ली में भी एनआरसी लागू करने की बात कई मौकों पर कह चुके हैं। इस संबंध में वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी पिछले दिनों मिले थे। उनका कहना है कि राजधानी में बहुत से घुसपैठिए हैं, जिन्हें बाहर किया जाना चाहिए।

इस संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा, ‘अगर दिल्ली में एनआरसी लागू हुआ तो सबसे पहले मनोज तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी।’ जवाब में तिवारी ने उनसे पूछा क्या बाहरी राज्यों के लोगों को दिल्ली छोड़ देना चाहिए?

तिवारी ने सीएम के बयान पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या केजरीवाल दिल्ली में रह रहे देश के अन्य हिस्से के लोगों को विदेशी मानते हैं? उन्होंने कहा कि जब केजरीवाल दूसरे राज्यों से आए लोगों को भगाना चाहते हैं तो उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि वह भी उन्हीं में से एक हैं। तिवारी ने दावा किया कि अरविन्द केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्होंने पूछा कि एक पूर्व आईआरएस अधिकारी को नहीं पता कि एनआरसी क्या है?

केजरीवाल को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का समर्थक करार देते हुए तिवारी ने कहा वे इतना भी नहीं जानते हैं कि एनआरसी में विदेशी घुसपैठियों को चिह्नित किया जाता है। तिवारी ने कहा कि इस तरह के बयान देने वाले केजरीवाल को शर्म आना चाहिए और उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई हक़ नहीं है। तिवारी ने केजरीवाल को समझाते हुए कहा कि एनआरसी विदेशियों के लिए है। उन्होंने पूछा कि आखिर केजरीवाल पूर्वांचल के लोगों को भगाना क्यों चाहते हैं?

आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यूपी, राजस्थान, बिहार और ओडिशा से लोग रोजगार के लिए दिल्ली आते हैं और मनोज तिवारी ने एनआरसी वाला बयान देकर दिखाया है कि वे इन लोगों के विरोध में हैं। भारद्वाज ने कहा कि ये लोग चोर नहीं हैं, बल्कि दिल्ली के विकास में बराबर के भगोदर हैं। भारद्वाज ने कहा कि अगर एनआरसी लागू होता है तो इन लोगों को दिल्ली छोड़ कर जाना पड़ेगा।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का कमलनाथ सरकार पर हमला: बाढ़ के सर्वे पर उठाए सवाल, कहा- मैं संतुष्ट नहीं

कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर से इशारों ही इशारों में कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को नीमच और मंदसौर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कराए जा रहे सर्वे पर भी सवाल उठाए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रदेश सरकार (कमलनाथ सरकार) द्वारा किसानों के फसल को हुए नुकसान को लेकर जो प्राथमिक सर्वे कराए गए हैं, वो उससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक-एक तहसीलदार, एक-एक पटवारी वापस से अपने क्षेत्र में जाए और फिर से सर्वे करवाए और उसका जो भी आकलन होगा, वो जिला कलेक्टर के पास ले जाए।

सिंधिया ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान नयागाँव में कहा, “मैंने नीमच जिले के खेतों में सीने तक पानी भरा देखा है। अन्नदाता की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। मैं यह विश्वास दिलाता हूँ कि शासन-प्रशासन को मेरे अन्नदाताओं के साथ खड़े रहना ही होगा। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है, मैं हमेशा किसानों के साथ खड़ा हूँ।”

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा, “मैंने मंदसौर, नीमच के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है जहाँ फसलें पूर्णतया बर्बाद हो गई हैं। प्रदेश सरकार से मैंने सर्वे करवाकर शत-प्रतिशत मुआवजा, राशि और केन्द्र सरकार से विशेष मेगा राहत पैकेज की माँग की है।”

सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जल्द ही एक-एक प्रभावित किसान के खाते में पैसे पहुँचाने शुरू करना चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार को भी बाढ़ प्रभावित किसानों और लोगों के लिए जल्द ही राशि स्वीकृत कर उसे जारी कर देना चाहिए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “सिंधिया परिवार का सदैव इस मालवा और निमाड़ की माटी से जुड़ाव रहा है, और मैं आपके बीच किसी राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि आपके परिवार के सदस्य होने के नाते आया हूँ। मैं आपको पूर्ण विश्वास दिलाता हूँ, आपके हक और न्याय की लड़ाई ज्योतिरादित्य सिंधिया लड़ेगा। फसल हानि के साथ जनहानि हो, पशुधन हानि हो, या मकान की हानि हो। हर एक व्यक्ति को पूर्ण रूप से मुआवजा दिलाना ही मेरा लक्ष्य रहेगा।”

तीन तलाक पीड़िताओं को योगी सरकार देगी हर साल ₹6000, विवाहेत्तर संबंध रखने वाले हिंदुओं पर भी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (सितंबर 25, 2019) को प्रदेश की महिलाओं एवं तीन तलाक पीड़िताओं के लिए बड़ी घोषणा की। उन्होंने ऐलान किया कि पति द्वारा छोड़ दी गई मुस्लिम एवं हिंदू महिलाओं को सालाना ₹6000 दिया जाएगा। ये राशि महिलाओं को न्याय मिलने तक दी जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा लखनऊ के इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में आय़ोजित तीन तलाक पीड़ित महिलाओं से संवाद कार्यक्रम के दौरान की। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन तलाक की पीड़ित राष्ट्रीय महिला ख़िलाड़ी सुमेरा जावेद को नौकरी देने की भी घोषणा की। साथ ही सुमेरा को केस लड़ने के लिए निशुल्क सुविधा देने की भी घोषणा की गई।

इस दौरान सीएम योगी ने हिन्दू महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि शादी के बाद किसी दूसरी महिला से संबंध रखने वाले हिंदू पुरुषों पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हिंदू परित्यक्ता महिलाओं को भी ऐसा ही न्याय दिलाया जाएगा।

सीएम ने कहा, “एक शादी करके दूसरी पत्नी को रखने वाले हिंदू पति पर भी इसी प्रकार की कार्रवाई करेंगे। परित्यक्ता महिलाओं के लिए भी न्याय देने की प्रक्रिया को उसी के साथ हम जोड़ेंगे, जिसमें हमने कहा था कि यह नारी गरिमा और उनके सशक्तिकरण से जुड़ी लड़ाई है।”

कार्यक्रम में ट्रिपल तलाक से पीड़ित महिलाओं को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा, “समाज का कोई हिस्सा या कोई भी व्यक्ति खुद को उपेक्षित व अपमानित महसूस न करे, इसके लिए ठोस कार्य योजना तैयार की जाएगी।”

उन्होंने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि आजादी के तत्काल बाद ही इस लड़ाई को लड़ना चाहिए था, लेकिन निजी स्वार्थ के लिए पिछली सरकारों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही तीन तलाक से मुक्ति दिला सकते थे। ऐसा करके उन्होंने नारी शक्ति को सम्मान दिया है। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में इस बात पर भी जानकारी दी गई कि बीते एक साल में 273 मामले ट्रिपल तलाक के आए हैं।

विज्ञान नहीं है पुरातत्व, राम मंदिर पर ASI की रिपोर्ट महज एक त्रुटियुक्त विचार: SC में वरिष्ठ वकील

राम मंदिर पर आज सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार ज़फ़रयाब जिलानी ने ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ का पक्ष रखा और वरिष्ठ वकील मिनाक्षी अरोड़ा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए अपनी बात रखी। जिलानी ने अदालत को बताया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड राम चबूतरे को जन्मस्थान नहीं मानता है। जिलानी ने कहा कि ऐसा हिन्दुओं की ही ऐसी आस्था है कि राम चबूतरा जन्मस्थान है, हमनें इसे स्वीकार नहीं किया है। जिलानी ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट जज ने कहा था कि चबूतरा जन्मस्थान है, हमनें अपनी ओर से ऐसा कभी नहीं कहा।

जिलानी ने सन 1862 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राम जन्मस्थान विवादित स्थल पर नहीं बल्कि कहीं और है। उन्होंने कुछ कागज़ात दिखाते हुए दावा किया कि यहाँ हिन्दुओं द्वारा पूजा नहीं की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि रामकोट किले को राम का जन्मस्थान माना जाता है। जब जज ने पूछा कि क्या वह मानते हैं कि राम का जन्मस्थान राम चबूतरे को माना जाता था, तो जिलानी ने कहा कि ऐसा हिन्दुओं का मानना है। जिलानी ने कहा कि मुख्य गुम्बद के नीचे जन्मस्थान होने की बातें 1989 के बाद की जाने लगी।

जिलानी ने कहा कि 1950 से 1989 तक फाइल किए गए किसी भी सूट में मुख्य गुम्बद के नीचे जन्मस्थान होने के जिक्र नहीं है। जिलानी द्वारा अपनी दलीलें ख़त्म करने के बाद अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने एएसआई की रिपोर्ट्स को लेकर अपनी बात रखी। अरोड़ा ने कहा कि एक अदालत ने 1863 में मंदिर की माँग को ख़ारिज करते हुए कहा था कि जब 350 सालों के बाद यथास्थिति को बदलना सही निर्णय नहीं होगा। अरोड़ा ने पूछा कि क्या अब 500 सालों के बाद यथस्थिति को बदल देना एक सही फ़ैसला होगा?

मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पुरातत्व कोई फिजिक्स या केमिस्ट्री जैसा विज्ञान नहीं है, यह सामाजिक विज्ञान है। अरोड़ा ने कहा कि कार्बन डेटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। अरोड़ा ने कहा कि चूँकि, आर्कियोलॉजी एक नेचुरल साइंस नहीं है, इसके रिपोर्ट्स में यथार्थता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पुरातत्व ने अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया है, जिसे वेरीफाई किया जा सके।

मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि पुरातत्व विशेषज्ञ सिर्फ़ अनुमान लगाते हैं, यथार्थ नहीं बताते। मीनाक्षी ने कहा कि अगर पुरातात्विक रिपोर्ट को ‘एक्सपर्ट ओपिनियन’ भी माने तो इसे एविडेंस एक्ट के सेक्शन 45 के तहत जाँचना ज़रूरी है। अरोड़ा के अनुसार, एएसआई के रिपोर्ट्स में कई त्रुटियाँ हैं, विरोधाभास हैं। उन्होंने कहा कि यह एक कमज़ोर सबूत है, जो सिर्फ़ आर्कियोलॉजिस्ट्स के विचार भर हैं।

कमलनाथ राज में शौच के लिए गए 2 दलित नाबालिगों की पंचायत बिल्डिंग के सामने लाठी से पीटकर हत्या

कमलनाथ सरकार के प्रदेश से आज इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश के शिवपुरी में आज पंचायत घर के सामने कुछ लोगों ने दो दलित बच्चों को इतना पीटा कि अस्पताल तक पहुँचते हुए उनकी मौत हो गई।

घटना भावखेड़ी गाँव में बुधवार (सितंबर 25, 2019) की सुबह घटी। बच्चों का नाम रौशनी और अविनाश है। पुलिस के मुताबिक पूरी घटना के दौरान बच्चों को काफ़ी गंभीर चोटें आईं थी। जिस कारण उन्हें जल्दबाजी में अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे दम तोड़ चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक आरोपितों ने उस वक्त पूरी घटना को अंजाम दिया जब दोनों मासूम सुबह शौच के लिए खेत में गए। इसी दौरान इन लोगों ने 12 साल की रौशनी और उसके 10 वर्षीय भतीजे को लाठियों से पीट-पीट कर मार दिया।

पुलिस ने हत्या के मामले में जाँच के दौरान दोनों आरोपितों को गिरफ्तार करके बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए शिवपुरी भेज दिया है। दोनों बच्चे रिश्ते में एक दूसरे के बुआ-भतीजा लगते थे।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद आरोपित से जब पूछताछ हुई तो वो पागल होने का ढोंग करने लगा। उसने अपनी दरिंदगी के पीछे सफाई देते हुए बताया कि उसे रात में सपना आया था, जिसमें भगवान ने उससे कहा था राक्षसों का संहार करो। जिसके कारण उसने ये अपराध किया। आरोपित का नाम हाकिम यादव है और उसके साथी का नाम रामेश्वर यादव बताया जा रहा है।

फिर पाक के काम आई कॉन्ग्रेस: UNGA में बोले इमरान- कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी कहा कि लोग 50 दिनों से घरों में कैद

कश्मीर मसले पर भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस को ढाल बनाया है। जम्मू-कश्मीर से 370 हटाए जाने के बाद से बौखलाया पाक पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के विपक्षी दल के बयानों का हवाला दे चुका है।

इमरान ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को न्यूयॉर्क में 74वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र के मौके पर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “कश्मीर में अभी तक कर्फ्यू नहीं हटा है। यहाँ तक ​​कि भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी टिप्पणी की है कि गरीब (असहाय) लोगों को 50 दिनों से घरों में बंद कर दिया गया है। यह कोई नहीं जानता कि राजनीतिक कैदियों के साथ क्या हो रहा है।”

इससे पहले, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में पत्र लिख कर कहा था कि भारत वहाँ ‘अत्याचार कर रहा है’ और अपनी इस बात को साबित करने के लिए उसने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के बयानों का सहारा लिया था। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को भेजे पत्र में लिखा था कि भारत की मुख्यधारा के राजनेताओं ने भी ‘कश्मीर में हो रही हिंसा’ को स्वीकार किया है।

पाकिस्तान ने राहुल गाँधी का हवाला देते हुए उनके उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था, “जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्वतंत्रता और नागरिक आजादी पर अंकुश लगाए हुए 20 दिन हो गए हैं। लेकिन विपक्ष के नेताओं और मीडिया को जम्मू-कश्मीर के लोगों पर किए जा रहे कठोर बल प्रयोग और प्रशासनिक क्रूरता का अहसास तब हुआ, जब हमने शनिवार को श्रीनगर का दौरा करने की कोशिश की।”

पाकिस्तान द्वारा अपने बयान का इस्तेमाल करने के बाद राहुल गाँधी ने सामने आकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहाँ हो रही हिंसा के लिए पाक ज़िम्मेदार है। राहुल गाँधी ने ट्विटर पर लिखा कि पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद का प्रमुख समर्थक के रूप में जाना जाता है। साथ ही राहुल ने यह भी लिखा कि जम्मू-कश्मीर में होने वाली हिंसा के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। राहुल गाँधी ने कहा था कि वे केंद्र सरकार से कई मसलों पर मतभेद रखते हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मामले में पाकिस्तान या किसी अन्य तीसरे देश को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।

इस बार पाकिस्तान द्वारा कॉन्ग्रेस के बयान का जिक्र करने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इमरान खान पर निशाना साधते हुए कहा, “इमरान खान की क्या हैसियत जो हमारे देश के आंतरिक मामलों में बोले? वो अपना देश सँभाले। हम अपने प्रधानमंत्री की नीतियों से सहमत-असहमत होंगे, चर्चा करेंगे, सवाल उठाएँगे, उनसे जवाब माँगेंगे। देश के बाहर प्रधानमंत्री का प्रत्येक कदम देश का कदम होता है और कॉन्ग्रेस पार्टी उसके साथ है।”

चिन्मयानंद से ₹5 करोड़ मॉंगने का मामला: ​रेप पीड़िता गिरफ्तार, 7 अक्टूबर तक जेल भेज गया

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता चिन्मयानंद पर बलात्कार और यौन शोषण का आरोप लगाने वाली 23 वर्षीय कानून की छात्रा को बुधवार (सितंबर 25, 2019) विशेष जाँच टीम (SIT) ने ब्लैकमेलिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद छात्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। एसआईटी ने छात्रा को उसके घर से गिरफ्तार किया।

पीड़िता पर अपने दो भाइयों और दोस्त के साथ मिलकर चिन्मयानंद से 5 करोड़ की फिरौती माँगने का आरोप है। उत्‍तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने बताया कि चिन्मयानंद पर बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले लॉ की छात्रा को एसआईटी ने कथित तौर पर रंगदारी माँगने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी ने पिछले हफ्ते इस मामले में पीड़ित छात्रा के दोस्त संजय सिंह, उसके चचेरे भाई विक्रम और मौसेरे भाई सचिन सेंगर को गिरफ्तार किया था।

मामले की जाँच कर रहे एसआईटी प्रमुख नवीन अरोड़ा ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि चिन्मयानंद को ब्लैकमेल करने के मामले में पीड़ित छात्रा की भी संलिप्तता मिली है। सबूत मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। नवीन अरोड़ा ने बताया कि छात्रा से मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को पूछताछ की गई थी। पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर मेडिकल जाँच कराया जा रहा है। 

हालाँकि, पीड़िता के वकील ने छात्रा को हिरासत में लेने की खबर को गलत बताते हुए कहा था कि उन्हें इस बाबत कोई नोटिस नहीं प्राप्त हुआ है और न ही उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की गई। उन्होंने पीड़िता की गिरफ़्तारी की खबर को भी गलत बताया था। बता दें कि, सोमवार (सितम्बर 23, 2019) को इलाहबाद हाई कोर्ट ने पीड़िता के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। जिस पर 26 सितम्बर को सुनवाई होनी है।

मजार में छिपा था दलित नाबालिग से रेप करने वाला मोहम्मद आदिल, पुलिस ने मुठभेड़ के बाद धर-दबोचा

उत्तर प्रदेश की कौशाम्बी में मुस्लिम युवकों द्वारा दलित नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया है। एक अन्य आरोपित नाज़िम को पहले ही ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। मोहम्मद बड़का और मोहम्मद आदिल उर्फ़ छोटका नामक 2 अन्य आरोपित फरार चल रहे थे, जिनकी धर-पकड़ के लिए पुलिस ने पाँच टीमें गठित की थी। इन दोनों के सिर पर 25,000 रुपए का इनाम भी रखा गया था। ये घटना सरायअकिल थाना क्षेत्र की है।

दूसरे आरोपित छोटका की गिरफ़्तारी पिपरी थाना क्षेत्र से हुई। घेराबंदी के दौरान आरोपित ने पुलिस पर पाँच राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी। आरोपित के पैर में गोली लगने के बाद वह घायल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उसे धर-दबोचा। फ़िलहाल उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी प्रदीप गुप्ता ने ख़ुद पहुँच कर आरोपित से पूछताछ की। बता दें कि घोसिया गाँव में घास काटने गई दलित नाबालिग लड़की के साथ नाज़िम, बड़का और छोटका ने बलात्कार किया था।

पुलिस को ख़बर मिली थी कि आरोपित छोटका रावतपुर गाँव में छिपा हुआ है। इसके बाद चार थानों की पुलिस वहाँ उसे गिरफ़्तार करने पहुँचीं। आरोपित छोटका जंगल में स्थित एक मजार में छिपा हुआ था। जैसे ही पुलिस ने उसकी घेराबंदी की, वह तमंचे से गोलीबारी करने लगा। पुलिस सादी वर्दी में हथियारों से लैस होकर पहुँची थी। पहले तो ग्रामीणों को लगा कि गैंगवार जैसी कोई स्थिति उत्पन्न हो गई है लेकिन जैसे ही उन्हें असलियत पता चली, वे सभी पुलिस की तारीफ करने लगे।

आरोपितों के सर्विलांस के लिए विशेषज्ञों को लगाया गया था। उसकी लोकेशन पर नज़र रखी जा रही थी। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें आरोपित की गिरफ़्तारी के बारे में जानकारी दी। घायल आरोपित को स्थानीय अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में भर्ती कराया गया है और हॉस्पिटल की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। पुलिस के अलावा किसी को भी उससे मिलने की इजाजत नहीं दी गई है। पुलिस को इस बात का शक था कि आरोपित को गोली लगने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग हंगामा कर सकते हैं और शांति-व्यवस्था भंग हो सकती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस लगातार गश्त लगाती रही।

रेप पीड़िता ने साफ़-साफ कहा है कि जब तक आरोपितों को फाँसी की सज़ा नहीं मिल जाती, तब तक उसे शांति नहीं मिल सकती है। पीड़िता ने मदद करने वाले नेताओं व संगठनों को धन्यवाद करते हुए लोगों से आगे आने की अपील की। पीड़िता ने कहा कि वह ख़ुद क़ानूनी लड़ाई लड़ेगी। आरोपित की गिरफ़्तारी करने वाली टीमों को 25 हज़ार रुपए का इनाम भी दिया जाएगा। वहीं पीड़िता का हालचाल जानने के लगातार नेताओं की लाइन लगी रही। दलित सेना संगठन ने एसपी से मुलाक़ात कर आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

तीनों मुस्लिम युवकों द्वारा दलित नाबालिग का रेप किए जाने का वीडियो सोशल पर वायरल होने से रोकने की भी कोशिश की जा रही है। एसपी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वीडियो वायरल न किया जाए। साइबर सेल ने फेसबुक और ट्विटर को ऐसे एकाउंट्स को बंद करने के लिए उनका विवरण भेज दिया है। पुलिस ने कहा कि आगे से ऐसा करने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि रविवार (22 सितंबर) को एक 15 वर्षीय दलित नाबालिग के साथ गैंगरेप कर उसका अश्लील वीडियो बनाया गया था। तीनों आरोपित लड़की को पकड़ कर झाड़ियों में ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान लड़की बार-बार दया की भीख माँगती रही, लेकिन आरोपितों ने उसकी एक न सुनी और पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया।

आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस से इस मामले में तेजी से कार्रवाई करने की माँग की थी। तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उच्चाधिकारियों ने गाँव में पहुँच कर ग्रामीणों को समझाया। कोतवाल मनीष पांडेय, दरोगा दिलीप गुप्ता और हेड कॉन्स्टेबल रामनाथ को आरोपतों पर कार्रवाई में ढिलाई करने पर एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया है।

बीवी के पासपोर्ट पर उड़ने की फिराक में थे पाकिस्तान के उड्डयन मंत्री, इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर रोके गए

भारत को एयरस्पेस बंद करने की धमकी देने वाले पाकिस्तान के उड्डयन मंत्री खुद ही उड़ान नहीं भर पाए। गुलाम सरवर खान को पासपोर्ट नहीं होने के कारण अधिकारियों ने इस्लामाबाद के एयरपोर्ट पर रोक लिया। उन्हें तुर्की जाना था। घटना सोमवार (सितंबर 23, 2019) की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस दौरान खान ने अपनी पत्नी का पासपोर्ट दिखाकर अधिकारियों को मनाने की कोशिश की। उनकी इस हरकत से हास्यास्पद स्थिति पैदा हो गई।

हालाँकि, इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों को तुरंत आदेश देकर उनके घर भेजा गया और यात्रा को ध्यान में रखते हुए समय से उनका पासपोर्ट मँगवा लिया गया। लेकिन, मामला सामने आते ही सोशल मीडिया में पाकिस्तानी नेता एक बार फिर से मजाक का केंद्र बन गए।

भारतीयों ने इस मामले में वहाँ की पत्रकार नायला इनायत के ट्वीट पर मंत्री की खूब चुटकी ली। महिला ढिंगरा नाम की यूजर ने कहा कि पाकिस्तान को मनोरंजन इंडस्ट्री की जरूरत ही नहीं हैं, क्योंकि इनका पूरा मंत्रालय ही काफी मनोरंजन कर देता है, और ये ऐसा सिर्फ़ ये पाकिस्तान के लिए नहीं करते बल्कि भारत के लिए भी करते हैं।

वहीं अभिषेक नाम के दूसरे यूजर ने कहा कि उन्हें इस बात की बिलकुल हैरानी नहीं होगी अगर पाक मंत्री शेख रशीद कल को ये कह दें कि पासपोर्ट गलती से अभिनंदन के पास चला गया। इसके बाद एक यूजर ने चुटकी लेते हुए सरवर खान को सलाह दी कि अगर उनके पास पासपोर्ट नहीं था तो वह हिजाब पहनकर निकल सकते थे।