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निशाने पर PM मोदी, NSA अजित डोभाल और एयरबेस: जैश ने तैयार किया विशेष दस्ता, अलर्ट जारी

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से घाटी में आतंकी गतिविधियों पर रोक लग गई है। घाटी के बदलते माहौल से बौखलाया पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल पर हमले की योजना बना रहा है। जैश ने इस हमले को अंजाम देने के लिए विशेष आतंकी दस्ता तैयार किया है। आतंकियों के निशाने पर एयरबेस भी हैं।

एक विदेशी खुफिया एजेंसी से मिले इनपुट के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का एक मेजर इस हमले की तैयारी में जैश की लगातार मदद कर रहा है। विदेशी खुफिया एजेंसी को जैश के पाकिस्तानी आतंकवादी शमशेर वानी और जैश सरगना के बीच हुई लिखित बातचीत का पता चला है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जैश सितंबर में भारत में बड़े हमले करने की तैयारी में जुटा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, जैश के आतंकी पीएम मोदी और अजित डोभाल के अलावा जम्मू, अमृतसर, पठानकोट, जयपुर, कानपुर, लखनऊ और दिल्ली समेत कुल 30 अतिसंवेदनशील शहरों को निशाना बना सकते हैं। प्राप्त इनपुट के आधार पर सभी अतिसंवेदनशील शहरों में पुलिस चौकसी बढ़ा दी गई है।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि खुफिया एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद के 8 से 10 आतंकियों वाले एक मॉड्यूल के खिलाफ एक चेतावनी जारी की है। आशंका है कि ये आतंकी भारतीय वायु सेना के ठिकानों को तबाह करने के लिए जम्मू-कश्मीर के आसपास आत्मघाती हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं। इसके मद्देनज़र श्रीनगर, अवंतीपोरा, जम्मू, पठानकोट और हिंडन में वायुसेना के ठिकानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

वरिष्ठ अधिकारी खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। एजेंसियों ने जैश के आतंकवादियों की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद अलर्ट जारी कर दिया है। इसके साथ ही एनएसए अजित डोभाल की भी सुरक्षा की समीक्षा की गई है। जैश-ए-मोहम्मद इस बात को लेकर बौखलाया हुआ है कि जम्मू-कश्मीर में उसके अधिकतर आतंकी मारे जा चुके हैं। वह भारत में फिदायीन भेज कर पुलवामा की तर्ज पर आतंकी हमला दोहराने की फिराक में है।

बताया जाता है कि डोभाल ने जिस तरह से उरी आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले के बाद एयरस्ट्राइक की रणनीति तैयार की थी, उसके बाद से पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन उन्हें मारने की योजना तैयार कर रहे हैं। जैश लगातार भारत में हमले की योजना तैयार कर रहा है। बालाकोट में जिस तरह से भारतीय वायुसेना ने घुसकर आतंकी कैंप को ध्वस्त किया था, उसके बाद से जैश की बौखलाहट बढ़ गई थी और हाल ही में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के निष्क्रिय होने के बाद से वो और भी ज्यादा तिलमिलाया हुआ है।

दिल्ली से घूमने निकली 5 लड़कियाँ, राजस्थान में युवकों से लिफ्ट ली, 2 का पता नहीं

दिल्ली से राजस्थान घूमने गईं 5 लड़कियों में 2 का सोमवार (जुलाई 23, 2019) की रात वापस आते वक्त सीकर के बस स्टॉप से अपहरण हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बदमाशों ने पहले इन पाँचों युवतियों को डिपो तिराहे से कार में बिठाया, लेकिन बाद में गोकुलपुरा इलाके के पास उनमें से 3 लड़कियों को कार से बाहर धकेल दिया और 2 लड़कियों का अपहरण करके उन्हें ले गए।

पुलिस अधिकारी ने इस मामले के संबंध में बताया कि रात का खाना खाने के बाद ये पाँचों लड़कियाँ दिल्ली के लिए बस की प्रतीक्षा कर रही थीं। लेकिन, तभी इनोवा कार में सवार कुछ युवक वहाँ आए और उन्हें लिफ्ट के लिए ऑफर दिया। जिसके बाद लड़कियों ने उन लड़कों से लिफ्ट ले ली। मगर कुछ दूर जाते ही युवकों ने उनमें से तीन को कार से बाहर धक्का दे दिया, जबकि दो का अपहरण करके उन्हें अपने साथ ले गए।

रादस्थान पत्रिका के सीकर संस्करण में प्रकाशित खबर

रोती-बिलखती लड़कियों ने पुलिस को इस संबंध में तुरंत फोन करके सूचना दी। जिसके बाद उद्योग नगर थाना पुलिस मौक़े पर पहुँचकर युवतियों को अपने साथ ले गई। पुलिस ने आधी रात में ही जिले भर में नाकाबंदी करवा दी, लेकिन बदमाशों का कोई सुराग नहीं मिला। शुरुआती जाँच में पुलिस ने इस पूरे मामले को संदिग्ध माना है।

लड़कियों के मुताबिक, चलती गाड़ी में बदमाश युवकों ने उनसे मोबाइल और पर्स लूटने की कोशिश की थी। जिस कारण उन्होंने कार में काफी संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि उन लोगों ने बहुत शोर भी मचाया था, लेकिन इलाका सुनसान होने कारण किसी ने कुछ नहीं देखा। लड़कियों के अनुसार, जिन लड़कियों का अपहरण हुआ है वह बंगाल की हैं और हिन्दी बोलना नहीं जानती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीकर के उद्योग नगर थाना के स्टेशन ऑफिसर वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि मामले की जाँच चल रही है। तीनों लड़कियों ने अलग-अलग बयान दिए हैं और मामला दर्ज भी नहीं करवाया है।

PM मोदी को ‘ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड’, बिल गेट्स ने दिया स्वच्छता को समर्पित सम्मान

भारत में स्वच्छ भारत अभियान चलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका में बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने बुधवार तड़के प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड’ से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री को मोदी को यह अवार्ड स्वयं माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने प्रदान किया।

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “ये सम्मान मेरा नहीं बल्कि उन करोड़ों भारतीयों का हैं, जिन्होंने स्वच्छ भारत के संकल्प को न केवल सिद्ध किया बल्कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ढाला भी है। महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती पर मुझे ये अवार्ड दिया जाना मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है। ये इस बात का प्रमाण है कि अगर 130 करोड़ लोगों की जनशक्ति, किसी एक संकल्प को पूरा करने में जुट जाए, तो किसी भी चुनौती पर जीत हासिल की जा सकती है।“

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी को मिला ये सम्मान, हर साल तय किए गए 17 लक्ष्यों में से किसी भी एक पर अच्छा काम करने वाले शख्स को दिया जाता है। अब चूँकि देश में स्वच्छता अभियान चलाकर प्रधानमंत्री मोदी ने हर ओर साफ-सफाई को लेकर जागरुकता फैलाई है, तो वह इसके हकदार हैं।

24 सितंबर को फाउंडेशन ने चौथे वार्षिक ‘गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स अवार्ड्स’ का आयोजन करते हुए कहा, “इस पुरस्कार का उद्देश्य ऐसे राजनीतिक नेता को विशेष सम्मान प्रदान करना है, जिन्होंने अपने देश में या विश्व स्तर पर प्रभावशाली कार्यों के माध्यम से ‘ग्लोबल गोल्स के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। “

यहाँ बता दें कि प्रधानमंत्री को यह अवार्ड देश में स्वच्छता अभियान चलाने और उसको सफल बनाने के लिए किए गए अथक प्रयासों के लिए दिया गया है। आज उनकी नीतियों के कारण ही भारत के अधिकांश गाँवों तक शौचालय की सुविधा पहुँची हैं और स्वच्छता को केंद्र में रख कर चलाए गए कई अभियानों के कारण देश में खुले में शौच करने वालों की संख्या में भारी कमी आई है। जिसका लोहा खुद गेट्स फाउंडेशन ने भी माना है।

फाउंडेशन ने पीएम मोदी को अवार्ड दिए जाने पर विरोध करने वालों से एक टूक कहा था कि वह विरोध करने वालों की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन पीएम मोदी ने 50 करोड़ लोगों तक स्वच्छता सम्बंधित सुविधाएँ पहुँचाई हैं और इसीलिए उन्हें अवॉर्ड दिया जाएगा।

चर्च स्कूल के बच्चों ने कहा जय श्री राम, 12वीं के 17 बच्चों के स्कूल आने पर पाबंदी

झारखंड के जमशेदपुर जिले के बिष्टुपुर स्थित बेल्डीह चर्च स्कूल ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को खेल-खेल में जय श्री राम का नारा लगाने पर 17 छात्रों को स्कूल से निलंबित कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निलंबित बच्चे कक्षा 12वीं के छात्र हैं। जो खेल-खेल में स्कूल परिसर में जय श्री राम का नारा लगा रहे थे। इसकी सूचना प्रिंसिपल एल पीटरसन को मिलते ही स्कूल में अनुशासन समिति की बैठक बुलवाई गई।

दैनिक जागरण में प्रकाशित पूरे मामले की खबर

बैठक के दौरान बच्चों के इस खेल को अनुशासनहीनता करार देते हुए नारा लगाने वाले 17 बच्चों को 5 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया। स्कूल प्रशासन ने इन सभी छात्रों को 5 दिन तक स्कूल नहीं आने का आदेश दिया।

दूसरी ओर, मामले की सूचना प्राप्त होते ही शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक सह भाजपा जिला प्रवक्ता अंकिता आनंद और आजसू नेता अप्पू तिवारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मामले की शिकायत की है।

दोनों ने इस मामले को समाज की धार्मिक भावना से जुड़ा मसला बताया। इन्होंने अपनी शिकायत में जय श्रीराम का नारा लगाने पर हुई कार्रवाई को अनुचित ठहराया। साथ ही स्कूल के ख़िलाफ़ एक्शन लेने की माँग की।

बता दें कि इस मामले के संबंध में स्कूल प्रिंसिपल ने परिसर में हुई घटनाओं का हवाला देकर बच्चों के निलंबन को सही ठहराने की कोशिश की।

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा, “स्कूल परिसर में इसी प्रकार नारे लगाने की घटना को लेकर पूर्व में भी एमएनपीएस स्कूल में विवाद हो चुका है। हम अपने स्कूल में कोई विवाद नहीं चाहते। बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए ही उन्हें पांच दिनों के स्टडी लीव पर भेजा गया है। वैसे भी उनकी परीक्षा एक अक्टूबर से है। “

BSNL ने सभी कर्मचारियों को दी सैलरी, ₹3300 करोड़ का किया भुगतान

भारतीय दूरसंचार निगम लिमिटेड (BSNL) पर कर्मचारियों को समय पर सैलरी न देने के आरोप लगे थे। इस सम्बन्ध में कई विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर निशाना साधा था। अब ख़बर आई है कि बीएसएनएल ने अपने सभी कर्मचारियों को अगस्त की सैलरी दे दी है। कम्पनी के चेयरमैन और एमडी पीके पुरवार ने कहा कि कॉर्पोरेशन ने सभी कर्मचारियों के अकाउंट में सैलरी ट्रांसफर कर दिया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सैलरी दे दी गई है और अब एक भी कर्मचारी का पैसा बाकी नहीं है।

पिछले कुछ समय से बीएसएनएल के घाटे में जाने की ख़बरें आ रही थी और कम्पनी पर अपने कर्मचारियों की सैलरी रोक कर रखने का आरोप लगा था। ‘डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन’ पिछले कई दिनों से बीएसएनएल और एमटीएनएल को संकट से उबारने के लिए कई विकल्पों पर मंथन कर रहा है। इसमें वित्त के लिए कम्पनी के एसेट्स का इस्तेमाल करना, कुछ कर्मचारियों को समय-पूर्व रिटायरमेंट देना और कम्पनी को 4G स्पेक्ट्रम का आवंटन देना शामिल है।

अगर वित्तीय वर्ष 2018-19 की बात करें तो बीएसएनएल को 14,000 करोड़ का घाटा हुआ है इसी वित्त वर्ष के दौरान और कम्पनी का राजस्व भी घट कर 19,308 करोड़ रुपया हो गया है। वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान पब्लिक सेक्टर कम्पनी बीएसएनएल को 4,859 करोड़ का घाटा हुआ था। वित्त वर्ष 2017-18 में यह आँकड़ा 7,993 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में बीएसएनएल का प्रोविजनल घाटा बढ़ कर 14,203 करोड़ हो गया। ये आँकड़े संसद सत्र के दौरान पेश किए गए थे।

अगर कर्मचारियों की बात करें तो बीएसएनएल में फ़िलहाल 1,65,179 कर्मचारी कार्यरत हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सभी कर्मचारियों को कुल मिला कर 3300 करोड़ रुपए भुगतान किए गए हैं। बीएसएनएल के चेयरमैन ने बताया कि कम्पनी ने सभी कर्मचारियों को उनके वेतन का भुगतान अपने आंतरिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले महीने वेतन के भुगतान में कुछ देरी हो गई थी।

बीएसएनएल के अनुसार, उसने पिछले सप्ताह ही कर्मचारियों को उनके वेतन का भुगतान कर दिया है। बीएसएनल के कई कर्मचारी पिछले वर्ष से ही नाराज़ हैं कि कम्पनी को 4G स्पेक्ट्रम का आवंटन नहीं मिला। एम्पलाई यूनियन ने कहा था कि रिलायंस जिओ के आने से बीएसएनल मार्किट में काफ़ी पिछड़ गई है। हालाँकि, कई विपक्षी नेताओं ने तिल का ताड़ बनाते हुए बीएसएनएल के मुद्दे पर ऐसे हंगामा मचाया था, जैसे कम्पनी ने कई सालों से कर्मचारियों को वेतन न दिया हो।

₹25000 करोड़ का बैंक घोटाला: ED की रडार पर NCP सुप्रीमो शरद पवार, FIR दर्ज, जाँच शुरू

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार अब प्रवर्तन निदेशालय के रडार पर आ गए हैं। मामला महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक से जुड़ा है। शरद पवार इस बैंक के चेयरमैन रहे हैं। उनके भतीजे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार बैंक के एमडी थे। मामला 25,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड से जुड़ा है। ईडी ने शरद पवार के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर उनके ख़िलाफ़ जाँच भी शुरू कर दी है। इस मामले में महाराष्ट्र के कई और भी बड़े नाम आरोपित हैं, जिनके ख़िलाफ़ जाँच शुरू की गई है।

यह लोन घोटाला चीनी मिलों से जुड़ा है। महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक ने कई कोऑपरेटिव चीनी मिलों को क़र्ज़ दिया था। आरोप है कि क़र्ज़ प्राप्त करने वाले अधिकार चीनी मिल बैंक के कई अधिकारियों व पदाधिकारियों के जान-पहचान वाले थे। बॉम्बे हाईकोर्ट के बाद महाराष्ट्र पुलिस के इकनोमिक ऑफेंस विंग ने इस सम्बन्ध में एफआईआर दर्ज की है। इस एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे शरद पवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

एनसीपी सुप्रीमो के राजनीतिक सितारे पहले से ही गर्दिश में चल रहे हैं और लोकसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। ईडी के अनुसार, यह लोन धोखाधड़ी का बहुत बड़ा मामला है और यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप की जा रही है। कई शुगर फैक्ट्रीज को आने-पौने दाम में बेच डाला गया था। कई कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज में काम ठप्प होने लगा था और उन्हें काफ़ी कम दाम पर बेच कर ख़रीदने वालों को फ़ायदा पहुँचाया गया। इस मामले में अजित पवार और बैंक के 70 पूर्व अधिकारियों पर पहले ही मामला दर्ज हो चुका है।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अपने ऊपर लगे आरोपों ने इनकार करते हुए कहा कि वे अपने ख़िलाफ़ एफआईआर का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं में भाजपा को लेकर काफ़ी आक्रोश है और उन्हें इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी। पवार ने कहा:

“यह ऐसा समय है जब विधानसभा चुनाव सामने हैं। मेरे जैसे व्यक्ति का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। जब महाराष्ट्र के लोगों को इसका एहसास होगा कि किन-किन लोगों को इसमें फँसाया गया है तो इसका प्रभाव सामने आएगा। इन सबसे किसको लाभ हो रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। जिन्होंने भी मेरे ख़िलाफ़ कार्रवाई की शुरुआत की है, मैं उन्हें धन्यवाद देता हूँ।अगर मेरे ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होती तो मुझे आश्चर्य होता।”

ईडी शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार से इन सम्बन्ध में पूछताछ करेगी कि इन शुगर फैक्ट्रीज को स्टेट कोऑपरेटिव बैंक द्वारा तय किए गए मूल्य से कम दाम में क्यों बेच दिया गया? जिन्होंने भी इन शुगर फैक्ट्रीज को ख़रीदा, उनके महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के ‘बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स’ से क़रीबी संपर्क थे। कई मामलों में तो शुगर फैक्ट्रीज के प्रबंधन से पूछे बिना ही उन्हें बेच डाला गया। शरद पवार के क़रीबी एनसीपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल पहले से ही एयर इंडिया स्कैम मामले में ईडी की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।

राहुल और सोनिया गॉंधी नहीं चाहते थे जिंदा रहें मोदी और शाह: रामदेव

दिल्ली से सटे नोएडा शहर में आए योगगुरु बाबा रामदेव ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को कॉन्ग्रेस पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि गाँधी परिवार ने साजिश करके अमित शाह को जेल भेजा था और वे चाहते थे कि शाह जेल में ही खत्म हो जाएँ।

बाबा रामदेव ने सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी का नाम लेकर साफतौर पर कहा कि ये दोनों नेता कभी नहीं चाहते थे कि अमित शाह और पीएम मोदी जिंदा रहें। उन्होंने कहा कि वे लोग चाहते थे कि अमित शाह जेल में सड़कर मर जाएँ और पीएम मोदी को फाँसी पर चढ़ा देंगे। इतना ही नहीं रामदेव ने पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह कानून मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें खुद कानूनी कार्रवाई में फँसना पड़ेगा। उन्होंने अपने कार्यकाल में कानून के साथ जमकर खिलवाड़ किया।

बाबा रामदेव का बयान (वीडियो साभार: दैनिक जागरण)

योग गुरु बाबा रामदेव ने केंद्र की मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा है कि सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती से निपटने का काम किया है। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का कानून तोड़ना और भगवान का कानून तोड़ना दोनों ही गलत है, अगर देश का कानून तोड़ेंगे तो चिदंबरम जैसा हाल हो जाएगा। रामदेव ने कहा कि कानून के शिकंजे में राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी भी हैं।  चिदंबरम के बाद अब जेल जाने का नंबर राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी का है।

साथ ही रामदेव ने मंदी से भी जल्द राहत की उम्मीद जताई। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ सेक्टरों में मंदी का माहौल है, देश की अर्थव्यवस्था एक नए दौर से गुजर रही है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही देश में हालात सुधरेंगे और मंदी के दौर से राहत मिलेगी। उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों को लेकर मोदी सरकार की तारीफ भी की।

दलित बच्ची का रेप मुस्लिम करें तो ओके है, क्योंकि वो तो अपने लोग हैं न!

इंतजार कीजिए कि किसी मुस्लिम का रेल गाड़ी में फोन का चार्जर लगाने के लिए किसी हिन्दू से झगड़ा हो जाए और बाताबाती हो। फिर उसका वीडियो वायरल हो जाए और एक प्राइम टाइम शो में बताया जाए कि मुस्लिम अब मोदी की ट्रेन में फोन भी चार्ज नहीं कर सकता। एंकर गम्भीर आवाज में, कटाक्ष करते हुए कहेगा, “हाँ मुस्लिम लोगों, ये देश तुम्हारा है भी नहीं, तुम अपना पावर बैंक ले कर चला करो, वरना कोई हिन्दू तुम्हें फोन भी चार्ज करने नहीं देगा। और फोन से ही तो सब कुछ होता है। आप लोग भी इन्ज्वॉय कीजिए इस डिजिटल इंडिया को। हें… हें… हें…”

एक बच्ची है पंद्रह साल की। मवेशी के लिए घास छीलने गई। वहाँ नाजिक, आदिल और एक अज्ञात लड़के ने उसे घेर लिया। उसके बाद उसे घसीट कर झाड़ियों में ले गए, उसके साथ जो किया वो कहने में भी आत्मा काँपती है। लेकिन इन तीनों ने उस बच्ची के पहचान लेने पर, उनके अल्लाह का वास्ता देने पर भी, उसे नहीं छोड़ा और वीडियो बनाते रहे। शायद इतना भी कम नहीं था तो उसका वीडियो इंटरनेट पर डाल दिया।

दूसरी खबर सुनिए कि केरल के चेंदामंगलम में एक चर्च है जिसके पादरी की उम्र सत्तर साल है। तीन बच्चियाँ उसके पास चर्च के काम निपटाने के बाद वो पादरी से ‘ब्लेसिंग्स’ यानी आशीर्वाद लेने गईं थीं और पादरी ने आशीर्वाद देने के बहाने, एक-एक कर, तीनों के साथ बलात्कार किया। खबर एक महीने पुरानी है और अब चर्चा में आ रही है। केरल में पादरी लोगों ने खूब कांड किए हैं, लेकिन वो खबरें बाहर आते-आते गायब हो जाती हैं।

हाल ही में चिन्मयानंद वाला कांड सामने आया था। राम रहीम का कांड हम सब जानते हैं। आसाराम जेल में है। ये लोग दरिंदे हैं जिन्होंने अपने पावर का, किसी के विश्वास का फायदा उठाया और उन्हें अपना शिकार बनाया। इस तरह की घटनाएँ जब भी होती हैं तो खूब कवरेज होता है। तब वहाँ वैचारिक स्तंभों में अपराधी गौण हो जाता है और केन्द्र में उसका धर्म आ जाता है।

लेकिन इस पादरी की तरह, केरल में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, तब आस्था या रिलीजन वैचारिक स्तंभों का विषय नहीं बन पाता। वो भीतरी पन्नों की कोई खबर बन कर गायब हो जाती है। सोशल मीडिया न होता तो शायद वो भी नहीं बनती। इस सत्तर साल के पादरी ने जो किया है वो सीधे तौर पर दूसरे के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। फ्रैंको मुलक्कल ने भी यही किया था नन के साथ और उस नन पर तमाम तरह के दबाव डाले गए कि वो केस वापस ले ले।

गैंग इसी तरह काम करता है

याद कीजिए कि कितने स्तंभकारों ने, वामपंथी या तथाकथित लिबरल पत्रकारों ने, ट्विटर पर शाब्दिक डायरिया से ग्रस्त सेलिब्रिटीज़ ने इन पादरियों पर, मजहबी अपराधियों पर, हिन्दुओं की मजहबी मॉब लिंचिंग पर, बीफ माफिया द्वारा डेढ साल में ली गई बीस हिन्दू जानों पर कितने शब्द लिखे या बोले? आप कहेंगे कि हर बार मैं यही लाइन क्यों लेता हूँ? वो इसलिए कि कोई और ये लाइन लेने को तैयार नहीं।

आज जब भीम आर्मी का गुंडा चंद्रशेखर, लिंगलहरी कन्हैया, संवेदनशील शेहला, अतिसंवेदनशील स्वरा, बहन कुमारी मायावती और तमाम वैसे लोग तो एक साथ कोरस में गाने लगते हैं, वो कौशांबी की उस बच्ची के लिए कितनी बार आवाज लगाते दिखे? क्या उस बच्ची के साथ जो हुआ, उसके विरोध में सूरत के मस्जिद से सौ लोगों की मजहबी भीड़ निकली, पुलिस के आदेश को दरकिनार करते हुए कि आदिल, नाजिक और उसके साथी आरोपित ने गलत किया और मुस्लिम होने के नाते वो शर्मिंदा हैं?

क्या भीम आर्मी ने पोस्टर चिपकाए कि मोदी और योगी सरकार के राज में पंद्रह साल की दलित बच्ची का सामूहिक बलात्कार हो रहा है? क्योंकि सरकार तो मोदी और योगी की ही है, जिम्मेदारी तो इन्हीं दोनों की है। फिर भी क्रोध क्यों नहीं उबल रहा? क्योंकि बलात्कारी खास समुदाय से हैं? यानी, संवेदना एक फ्लो चार्ट देख कर बाहर आती है कि पीड़ित कौन है, आरोपित कौन है?

नौ साल की वो बच्चियाँ किस समुदाय से थीं? ईसाई भी तो अल्पसंख्यक होते हैं। उसका पादरी जब बच्चियों के साथ ऐसे जघन्य कृत्य करता है तो पौने तीन एकड़ में फेसबुक पोस्ट लिखने वाला पत्रकार कान बंद कर लेता है या उसका पासवर्ड खो जाता है? केरल की सरकार को, उसके मुख्यमंत्री को, या मोदी को ही क्यों नहीं घेर रहे ये लोग?

क्योंकि चुनाव आने में अभी थोड़ा समय है और बलात्कारी जब अपने ही जात-बिरादरी के हों, तो उनके बारे में लिखने पर क्या पता नरक-वरक जाना पड़ जाए, या कोई पूछ ले कि क्या इसी दिन के लिए अवार्ड दिया था? क्या इसी दिन के लिए तुम्हें भीड़ दे कर खड़ा किया था, तुम्हें नेता बनाया था?

यही कारण है कि सारे चमन चम्पक सीन से गायब चल रहे हैं। ये इस इंतज़ार में बैठे हैं कि बस कोई मुस्लिम टिकटॉक पर मुँह पर लाल रंग लगा कर कह दे कि वो तो रस्ते से जा रहा था, उसे किसी ने रोक कर बोला कि वो ‘मोदी जी की जय’ बोले, उसने नहीं बोला तो तीन थप्पड़ मार कर निकल लिया। फिर ये भी नहीं देखना कि वो सच बोल रहा था या झूठ, घटना कहाँ हुई, आरोपित कौन था… कुछ नहीं! मुस्लिम ने कहा है तो वो झूठ तो नहीं ही बोलेगा, क्योंकि किताब में लिखा है झूठ बोलना पाप है, नदी किनारे साँप है, वही तुम्हारा बाप है। (सॉरी, वही तुम्हारा बाप है वाला हिस्सा फ्लो में निकल गया, हें… हें… हें…)

इसीलिए जब भी यह गिरोह एकजुट हो कर सामने आता है तो इनकी संवेदना उस बच्ची के साथ नहीं होती। ये कहते हैं कि फलाँ नेता, फलाँ पार्टी हिन्दू-मुस्लिम कर रही है, लेकिन इसके उलट जितनी बिगट्री, जितनी मजहबी घृणा और उन्माद, जिस तरह की कुत्सित चर्चा और हिन्दू-मुस्लिम, दलित-सवर्ण इन लोगों ने फैलाई है, उतनी भारत के आधुनिक इतिहास में किसी भी दौर में नहीं दिखी।

चूँकि आप टीवी पर ये कह सकते हैं कि सब हिन्दू-मुस्लिम में लगे हुए हैं और आपके चम्पक समर्थक ऐसा मान भी लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि ये पूरा गिरोह घृणा से सना हुआ है जो कि मानवीय संवेदनाओं की आड़ में अपने कलुषित हृदय के अंधेर कोठरी से कालिख निकाल कर बेच रहा है, जिसे इनके समर्थक चेहरे पर पोते घूम रहे हैं। सारी संवेदना सिर्फ और सिर्फ आरोपित का धर्म और जाति देख कर बाहर आती है।

अगर ऐसा नहीं है तो फिर इस पंद्रह साल की बच्ची का क्या दोष है? उस 19 साल की लड़की का क्या दोष है जिसे जसीम नामक लड़के ने नशा खिला कर, उसका बलात्कार किया और तस्वीरें ली, एक महीने तक ब्लैकमेल करता रहा कि वो इस्लाम कबूल कर ले? फिर इन कुकृत्यों की, इन अपराधों की खबर आप तक यही मीडिया, यही गैंग क्यों नहीं पहुँचाता? क्या ये इनके लिए अनटचेबल हैं?

एक दलित बच्ची अगर किसी समुदाय विशेष के व्यक्ति द्वारा बलात्कार का शिकार होती है तो वो ऐसे मीडिया संस्थानों के लिए, इन सेलिब्रिटीज के लिए, इन वामपंथियों और लिबरपंथियों के लिए वो अछूत क्यों हो जाती है? क्या किसी बच्ची का बलात्कार अपने आप में दिल दहलाने वाला अपराध नहीं कि इसकी रिपोर्टिंग में, चर्चा में, आरोपित का नाम और जात देखना ज़रूरी हो जाता है?

आप तय कीजिए कि हिन्दू-मुस्लिम में कौन किसको उलझा रहा है

यही चैनलों के एंकर, लिबरल गैंग, माओवंशी लाल नितम्ब समूह आपको हर ऐसी घटना पर पूछेंगे कि क्या भारत में 2014 के बाद से ‘डर का माहौल’ आ गया है! ये रोएँगे कि आपातकाल यही है। बताएँगे कि ये अंधेरा ही आज के टीवी की तस्वीर है। कहेंगे कि टीवी मत देखो, फेंक दो बाहर। जबकि हर ऐसी घटना को कवर करना संभव नहीं है, फिर भी कुछ घटनाएँ मीडिया द्वारा उठा ली जाती हैं, क्योंकि उनके पास और कुछ कवर करने के लिए होता नहीं।

24 घंटे अपनी स्क्रीनों पर लाल-नीले-काले-पीले स्ट्रिप में हर खबर को ब्रेकिंग कहने और हर बात पर चिल्लाने वाले एंकरों के पास खुद को उद्वेलित दिखाने के अलावा और कुछ आता ही नहीं। इन्हें मेन्टेन करना होता है नकली क्रोध का बहाव, इन्हें चिल्लाना होता है पार्टियों के प्रवक्ताओं पर, क्योंकि ये मुद्दे से बहुत दूर होते हैं, मुद्दे से कटे हुए, उन्हें शब्दों के झुंड की तरह ट्रीट करते हुए जहाँ किसी हीरोइन की जूती गायब होने की खबर और किसी बच्ची के रेप की खबर उन्हीं तीन सौ शब्दों में सिमट जानी है, जो टेलिप्रॉम्प्टर पर उस समय के लिए उल्टी हो कर झूलती रहती है।

आखिर, जब हर बलात्कार की घटना कवर नहीं की जा सकती तो कुछ ही क्यों कवर होती हैं? कठुआ की बच्ची की खबर में ऐसा क्या है, जो गाजियाबाद की बच्ची में नहीं! दोनों आठ साल की, एक घटना मंदिर के पास, दूसरी मस्जिद के पास, एक में हिन्दू नाम वाले, दूसरे में मौलवी… किस को कवरेज मिली? क्यों? सीधा जवाब है कि यहाँ आठ साल की बच्ची तो कैंसल आउट हो गई, दोनों जोड़-घटाव में कट कर शून्य हो गईं।

अब बचे मंदिर और मस्जिद, हिन्दू और मुस्लिम। मंदिर और हिन्दू को तय कारणों से चुन लिया गया और इंडिया की जगह हिन्दुस्तान लिखते हुए लोगों ने बताया कि हिन्दू तो बस आठ साल की बच्चियों का बलात्कार कर रहे हैं। उसके बाद मौलवियों ने मस्जिदों में दसियों बार कम उम्र की बच्चियों का यौन शोषण किया है, खबर नहीं आई।

जो व्यक्ति दिन रात फ़ेसबुक और प्राइम टाइम टीवी से हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर नफ़रत बाँट रहा है, समाज में ज़हर घोल रहा है, वो कॉलेज के बच्चों की सभा में यह बोलता पाया जा रहा है कि किसी आईटी सेल वाले से प्रेम मत कर लेना लड़कियों वो न अच्छा पति बन सकता है, न प्रेमी! अब सवाल उसी व्यक्ति से है कि क्या वो स्वयं अच्छा पति, पिता या प्रेमी है या नहीं? ऐसे लोग बात बनाने में बहुत आगे होते हैं क्योंकि इनके पास शब्द बड़े महीन वाले हैं। ये उन्माद और घृणा बाँटने वाले लोग हर रात यह सोचते हुए सोते हैं कि मोदी राज में दंगे क्यों नहीं हो रहे, मुस्लिम और हिन्दू इनके भड़काने के बाद भी तलवार ले कर एक दूसरे को क्यों नहीं काट रहा?

ये समझने के लिए आपको जीतेन्द्रीय नहीं होना पड़ेगा कि एक तरह की खबर को, एक तय समय के आस-पास, एक ही तरह के लोग और संस्थाएँ, एक तय टोन में, एक साथ क्यों कवर करते हैं। बहुत सीधी-सी बात है कि ये कहने से कि मेरी भी एक बेटी है इसी उम्र की, उसको बाहर जाते देख कर मुझे डर लगता है… इन्हें संवेदना नहीं दिखानी होती, इन्हें कंटेंट को बेचने के लिए पैकेजिंग करनी होती है और इसी में ये अपनी बेटियों और बहनों को बेच लेते हैं।

धिक्कार है ऐसे एंकरों पर और लानत है ऐसे लोगों पर जो अपनी बहन-बेटी का नाम वैसे मौकों पर लेते हैं जब उनके लिए वो आठ साल की बच्ची की कोई अहमियत है ही नहीं, क्योंकि उसका बलात्कार मात्र एक जरिया है अपने अजेंडे को हवा देने का। वरना, इनकी नाटकीय संवेदना और कथारसिस हर ऐसी घटना पर बाहर आती जहाँ पीड़िता बस बच्ची है और आरोपित बस अपराधी। उनकी पहचान, उनके साथ चल रहे विशेषणों से अगर इनकी कवरेज प्रभावित नहीं होती, चुनाव देख कर इनकी वाणी में ओज और वक्तृता में जोश न आता, तो मैं मान लेता कि ये संवेदनशील लोग हैं।

गिरोह के साथी: फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब

जब से सोशल मीडिया ने एक अनौपचारिक हलो-हाय की सीमा तोड़ कर अपने ‘मीडिया’ होने वाली बात को गम्भीरता से लेना शरू किया है, तब से इनके अपने ही मालिकों की नींद उड़ चुकी है। कभी-कभी कोई ऐसी चीज बनाता है जिसका उद्देश्य कुछ होता है और लोगों के हाथ में पहुँचते ही वो किसी और काम में आने लगता है।

वही हाल सोशल मीडिया के साथ हुआ। जो चीज फोटो शेयर करने, दोस्त बनाने, चैट करने और वीडियो शेयर करने को ले कर बनी थी, उस पर अब विचार शेयर होने लगे हैं। उस पर खबरें बँट रही हैं। उस पर घटनाओं को वीडियो बन रहे हैं और वो वीडियो लाखों लोग देख रहे हैं। जब ऐसा होने लगता है तो ऐसे संस्थानों को चलाने वालों की विचारधारा पर हमला होता दिखता है।

यही कारण है कि जब हमने शाम में इस खबर को फेसबुक पर शेयर किया, तो आधे घंटे के भीतर इसे फेसबुक ने यह कह कर हटा दिया कि यह खबर उनके ‘कम्यूनिटी गाइडलाइन्स’ के खिलाफ जाती है। जबकि, ये कोई वैचारिक स्तम्भ नहीं था, बस एक रिपोर्ट थी जहाँ हमने सत्य को, बिना लाग-लपेट के, बिना किसी घृणा का एंगल दिए, रखा था कि पंद्रह साल की दलित बच्ची अपने तीन बलात्कारियों के सामने अल्लाह का वास्ता दे कर चिल्लाती रही और आदिल, नाजिक विडियो बनाते रहे।

कमाल की बात यह है कि हेडलाइन में ‘जय श्री राम’ हो और किसी मुस्लिम के पीड़ित होने की बात हो, तब वो फेसबुक के गाइडलाइन्स के खिलाफ नहीं जाती! वो ‘अल्लाह’ और ‘बलात्कारी’ के नाम पर ही बिफर जाते हैं। इसी पर एक सोशल मीडिया यूजर ने ट्वीट के माध्यम से हमें सलाह दी कि हमें इस खबर को फेसबुक पर कुछ ऐसे शेयर करना चाहिए था:

आरोपित राम (नाम बदला हुआ है) और उसके दो दोस्तों ने एक नाबालिग दलित युवती को… लड़की चिल्लाती रही भगवान के नाम पर मुझे छोड़ दो… भीड़ ने बलात्कार के आरोपित राम (नाम बदला हुआ है) को पकड़ लिया जबकि दूसरे दो आरोपित श्याम (नाम बदला हुआ है) और एक अज्ञात व्यक्ति भागने में सफल रहे!

कल शाम ही हमने एक वीडियो बनाया जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कट्टरपंथी इस्लामी आतंक से लड़ने की बात की गई थी, उसे यूट्यूब ने पूरी तरह से अपलोड होने से पहले ही डाउनग्रेड कर दिया और उसे डीमोनेटाइज कर दिया। यानी, उससे होने वाली आमदनी हमारे चैनल को नहीं मिलेगी। क्यों? क्योंकि ये उनके ‘कम्यूनिटी गाइडलाइन्स’ के खिलाफ है!

हम आखिर ऐसी खबरें क्यों करते हैं?

ख़ैर, हमारी मंशा भी यह नहीं है कि हम हर ऐसी घटना को कवर करें। हम वो कर ही नहीं सकते। लेकिन हाँ, हम हर वैसी खबर को बाहर ले कर आएँगे जिसे सिर्फ इसलिए नकार दिया गया हो क्योंकि आरोपित किसी समुदाय विशेष का है या पीड़ित किसी जाति विशेष से ताल्लुक रखता है। क्योंकि वो ऐसी हर घटना को हिन्दू-मुस्लिम बनाएँगे। वो हर सामाजिक अपराध को ऐसे दिखाएँगे जैसे वो अपराध इसलिए हुआ क्योंकि आरोपित और पीड़ित किसी खास धर्म, जाति या मजहब के थे।

इसे कहते हैं स्पिन देना। इसे कहते हैं कि हेडलाइन लिख कर लोगों के मन में पहले ही नैरेटिव डाल देना कि ‘मुस्लिम महिला को पुलिस ने पीटा और उसका गर्भपात हो गया’ लिखते हुए बीबीसी आपको यह मानने को कह रहा है कि चूँकि महिला मुस्लिम थी, उसी कारण उसे पीटा गया और उसका गर्भपात हो गया। जबकि खबर में ऐसा कोई संदर्भ, कहीं नहीं दिखता।

ये महीन तरीके से नैरेटिव को आगे बढ़ाना है। इस नैरेटिव को काटने के लिए, इन दोगले लोगों को एक्सपोज करने के लिए, इन सेलिब्रिटीज़ को नग्न करने के लिए, ऐसी खबरों को दिखाना ज़रूरी है ताकि लोग ये तय कर सकें कि इनकी संवेदना कभी भी, एक बार भी, उस बच्ची के लिए या उस मुस्लिम नवयुवक के लिए, उस दलित के लिए थी ही नहीं। ये बहुत ही नीच किस्म के लोग हैं जो अपने गिरने की हद पर जा कर एक और गड्ढा खोद लेते हैं और आप अचंभित रह जाते हैं कि अब और कितना गिरोगे!

19 वर्ष की लड़की से जसीम ने किया बलात्कार: अश्लील वीडियो बनाकर इस्लाम कबूलने की धमकी

केरल में 19 साल की ईसाई लड़की के साथ बलात्कार, ब्लैकमेल और इस्लाम कबूलने की ज़बरदस्ती की खबर सामने आई है। आरोपित जसीम के खिलाफ पीड़िता के परिवार वालों ने नाडकावू पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि आरोपित ने पीड़िता को नशीला पेय पदार्थ पिलाया, उसके साथ बलात्कार तब तक किया जब तक वह बेहोश नहीं हो गई, और उसके बाद उसने पीड़िता की तस्वीरें लीं। इसके बाद वह उन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर डालने की धमकी देकर उस पर इस्लाम कबूल करने के दबाव डालने लगा।

कोचिंग में मिला था

पीड़िता के घर वालों के हवाले से मीडिया खबरों में प्रकाशित किया गया है कि आरोपित पीड़िता से केरल के कोझिकोड जिले के एक कोचिंग सेंटर में मिला था। वहाँ दोनों सहपाठी थे। पीड़िता 7 जुलाई को अपने दो दोस्तों के साथ सरोवरम बायो थीम पार्क में गई थी। वहाँ आरोपित से संयोगवश उसका सामना हो गया।

आरोपित उसे पार्क की एक इमारत में ले गया जहाँ उसने पीड़िता को नशीला पदार्थ पिलाया, और उसका यौन शोषण तब तक किया जब तक वह बेहोश नहीं हो गई। उसके बाद आरोपित ने कथित तौर पर उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया। बाद में वह उन्हीं वीडियो से उसे ब्लैकमेल कर इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करने लगा। धमकी दी कि यदि पीड़िता ने ऐसा नहीं किया, तो वह सोशल मीडिया पर डालकर उसका वीडियो सबको दिखा देगा।

महीने भर तक कार्रवाई नहीं, Minority Commission का हस्तक्षेप

अंत में उसकी धमकियों से आजिज़ आकर पीड़िता ने अपने परिवार वालों को सारी बात बताई, जिसके बाद 5 अगस्त को उसके पिता ने नाडकावू पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। हालाँकि, परिवार का आरोप है कि उसके बाद भी एक महीने से अधिक समय तक पुलिस मामले को दबाकर बैठी रही। इस बीच पीड़िता के परिवार ने अल्पसंख्यक आयोग से इसकी शिकायत की, जिसके बाद उसके उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर NIA को मामले की जाँच सौंपने की माँग की।

अब मामले की जाँच NIA को ही सौंप दी गई है। जनसत्ता के रिपोर्ट के अनुसार केरल के कोझिकोड इलाके से ही एक महीने में 50 ‘लव जिहाद’ के मामले सामने आए हैं। केरल के मुख्यमंत्री उम्मेन चांडी ने विधानसभा में महज़ 2006-12 के कालखंड में 7713 लोगों के इस्लाम कबूलने की बात कही थी।

370 पर उलझे इमरान, वहाँ पाकिस्तान में निकाह के लिए तरस रहे हैं आम लोग, ये है वजह

पाकिस्तान की अर्थव्यस्था मरणासन्न स्थिति में है। वहाँ दिनों-दिन आसमान छूती महँगाई ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। पाकिस्तान इस समय घोर आर्थिक संकट और बेतहाशा महँगाई से जूझ रहा है। इससे उबरने के लिए पाकिस्तान के वजीरे आज़म इमरान खान ने क्या कुछ नहीं किया। चाहे कारें बेचनी हों या गधे यहाँ तक कि वहाँ नान और टमाटर के दाम तय करने को भी राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया गया था। बाकायदा उसके लिए कैबिनेट मीटिंग तक हुई थी। लेकिन कार और गधे बेचने के बाद भी पाकिस्तान की अर्थव्यस्था सुधर नहीं रही है। आतंक की खेती करने वाले पाकिस्तान में जहाँ जेहादी हूरों के सपने दिखाकर आतंकवाद को पोषित करते आ रहे हैं। वहीं रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान के नए पाकिस्तान में अब आलम यह है कि आम लोगों के लिए अब निकाह करना भी आसान नहीं रह गया है।

पाकिस्तान के अखबार डॉन में छपी खबर के मुताबिक, वेडिंग सीजन अर्थात निकाह का मौसम आने के बाद भी वहाँ लोग निकाह को तरस जा रहे हैं। पाकिस्तान में आम लोग निकाह से बच रहे हैं जिसकी सबसे बड़ी वजह है चिकन के दाम क्योंकि वहाँ चिकन का दाम अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। ऐसे में आम लोगों का रोजमर्रा का खर्च इतना बढ़ गया है कि खाने के लाले पड़ गए हैं। चिकन ही नहीं वहाँ पेट्रोल-डीजल, फलों और सब्ज़ियों, दूध सहित कई खाद्य उत्पादों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में आम आदमी निकाह करे भी तो कैसे दावत के बिना निकाह टल रहे हैं और इमरान खान 370 के हटने के बाद कश्मीर को लेकर परेशान हैं।

बता दें कि पिछले महीने पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 117.83 रुपए (पाकिस्तानी रुपए) प्रति लीटर तक पहुँच गया था और डीजल की कीमत 132.47 रुपए प्रति लीटर तक। पाकिस्तान में दूध की कीमत 140 रुपए प्रति लीटर है अर्थात वहाँ पेट्रोल-डीजल से भी महँगा दूध बिक रहा है।

खाने-पीने से लेकर जीवन की रोजमर्रा की चीजें इस कदर महँगी हैं कि खाने के लाले ही पड़ गए हैं। आतंक पर लगाम न लगाने के कारण विदेशों से कर्ज मिलना बंद हो चुका है। खर्चे बचाने के लिए इमरान खान की विदेश यात्राएँ भी उधार के विमान से संपन्न हो रही हैं। इन्फ्लेशन बढ़ने से पाकिस्तान में कॉस्ट ऑफ़ लिविंग बेतहाशा बढ़ी है जिसका सबसे ज़्यादा असर आम लोगों के निकाह पर पड़ा है।

एक कारोबारी के हवाले से डॉन के इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि पाकिस्तान में एक किलोग्राम चिकन का दाम 480-500 रुपए (हड्डियों के साथ) हो गया है। वहीं, बोनलेस चिकन के दाम 650-700 रुपए प्रति किग्रा हो गए हैं। जहाँ आटा और मैदे का दाम भी आसमान छू रहा हो वहाँ नान का दाम बढ़ जाने से पब्लिक पर दोहरी मार पड़ रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की जनता में बढ़ते महँगाई को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जनता बेसिक सुविधाओं के लिए मुँहताज हो रही है और इमरान खान अभी भी इस समस्या से न निपटकर भारत के आतंरिक मामले कश्मीर में दखल के लिए दूसरे देशों से समर्थन न दिए जाने के बावजूद भी चक्कर लगा रहे हैं। वहाँ के मंत्री मीडिया में उल्टे-सीधे बयान दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तान का लगातार मजाक उड़ा रहे हैं। लोगों का यहाँ तक कहना है कि अभी भी वक़्त है संभाल लें इमरान कहीं ऐसा न हो कि जिहाद और आतंक की खेती के चक्कर में आम लोग विद्रोह कर बैठें। पहले अपना देश संभाल लें फिर दूसरे देश के आतंरिक मामलों में दखल देने की सोचें।