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UPA काल के एविएशन स्कैम में यास्मीन कपूर गिरफ़्तार, एयर इंडिया को पहुँचा था नुक़सान

सीबीआई ने एविएशन स्कैम मामले में यास्मीन कपूर को गिरफ़्तार कर लिया है। यास्मीन जुलाई में गिरफ्तार किए गए दीपक तलकर की क़रीबी है। तलवार कॉर्पोरेट लॉबिस्ट है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा विनियम अधिनियम के तहत की गई है। इस वर्ष फ़रवरी में यास्मीन को अदालत ने गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की गई थी।

इसी स्कैम को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल से ईडी 3 दिनों तक पूछताछ कर चुकी है। एविएशन स्कैम में जो भी डील हुए हैं, वो सभी यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए। दीपक तलवार ने एविएशन कंपनियों, अधिकारियों और नेताओं के साथ मिल कर उन्हें फायदा पहुँचाने के लिए साज़िश रची थी और लॉबिंग की थी।

कुछ विदेशी एयरलाइन्स के लिए मनमाफिक ट्रैफिक रूल्स तय किए गए थे, जिससे एयर इंडिया को ख़ासा नुकसान हुआ था। मई में अदालत ने यास्मीन कपूर से इस स्कैम के सम्बन्ध में जवाब माँगा था। ईडी ने अदालत में यास्मीन कपूर को सभी आरोपितों के कारनामों के ख़ुलासे के लिए एक अहम लिंक बताया था। स्कैम के दौरान यास्मीन को भी काफ़ी फायदे हुए और उसकी संपत्ति में भी बहुत वृद्धि हुई।

दीपक तलवार ने एयर इंडिया को नुकसान पहुँचाते हुए वर्ष 2008-09 के दौरान विदेशी विमानन कंपनियों के लिए उनकी पसंद के यातायात अधिकार व नियमों का प्रबंध किया था। जाँच से इस बात का भी खुलासा हुआ था कि इसके बदले विमानन कंपनियों ने 2008-09 में तलवार को 272 करोड़ रुपए का भुगतान किया था। इन रुपयों के कुछ हिस्से को बैंक ऑफ सिंगापुर में एम/एस एशियाफील्ड लिमिटेड नामक कंपनी में जमा करवाया गया, जो ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड में रजिस्टर्ड दीपक तलवार के स्वामित्व वाली कंपनी है।

जवानों के हाथों किसी नागरिक की मौत नहीं, 15157 सर्जरियाँ: पटरी पर लौट रही है जम्मू-कश्मीर की गाड़ी

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बुधवार, 11 सितंबर को एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए दावा किया कि घाटी और राज्य के हालात सामान्य होने की दिशा में संतोषजनक प्रगति कर रहे हैं। “हम सामान्य के बहुत करीब हैं। अगर पूरे इलाके का हिसाब लगाएँगे, तो जम्मू के 10 जिले पूरी तरह सामान्य हो गए हैं। सारे स्कूल, कॉलेज, ऑफिस खुले हैं। लेह और कारगिल भी सामान्य हैं, वहाँ कोई बंदिशें नहीं हैं।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि 90% इलाकों में कोई बंदिशें नहीं हैं और 100% टेलीफोन एक्सचेंज काम कर रहे हैं। यहाँ तक कि दो जिलों में मोबाइल सेवाएँ भी दोबारा शुरू कर दी गईं हैं।

इसके अलावा डीजीपी ने सरकार-पुलिस-प्रशासन की अन्य उपलब्धियाँ भी गिनाईं, जिनमें सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए नागरिकों की संख्या का शून्य होना सबसे अहम है। इसके अलावा सभी लैंडलाइन चालू हो गए हैं और कुपवाड़ा में मोबाइल सेवाएँ भी उपलब्ध हैं।

स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरे ज़ोर-शोर से चल रही हैं। OPD में 5,10,870 मरीजों का पंजीकरण हुआ है, और 15,157 सर्जरियाँ हुईं हैं। पेट्रोल उत्पादों और खाद्य-पदार्थों का भंडारण संतोषजनक है। 6 अगस्त से अब तक 42,600 से अधिक ट्रक सामान लेकर जम्मू-कश्मीर से आ-जा चुके हैं।

सभी बैंक और ATM काम कर रहे हैं और ₹108 करोड़ केवल जम्मू-कश्मीर बैंक से निकाले गए हैं। बाकी बैंकों के आँकड़े जारी होना बाकी है। इसके अलावा विभागीय सेवाओं, जैसे e-tendering, स्कॉलरशिप फॉर्म जमा करना, नौकरी के आवेदन के लिए हर जिले के मुख्यालय में 10 इंटरनेट किओस्क लगाए गए हैं। इनमें से हरेक किओस्क में 5 टर्मिनल लगे हैं। आम जनता और सैलानियों की सहूलियत के लिए 12 अतिरिक्त हवाई टिकट काउंटर स्थापित किए गए हैं।

डीजीपी दिलबाग सिंह ने यह भी जानकारी दी कि जहाँ इस दौरान सुरक्षा बलों और नागरिकों के टकराव में कोई नहीं मारा गया है, वहीं आतंकियों ने तीन आम लोगों की हत्या कर दी है। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भी दो आतंकियों को भी ढेर कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल में मारे गए लश्कर आतंकी आसिफ मकबूल भट की मौत से क्षेत्र के लोग चैन की साँस ले रहे होंगे। भट हाल ही में एक नवजात को गोलियों से ज़ख़्मी करने के मामले में ज़िम्मेदार था।

तुम्हारे पूर्वज नरक में बिलख-बिलख कर रो रहे हैं: देवदत्त ‘नालायक’ ने सवाल पूछने पर दिया घटिया जवाब

देवदत्त पटनायक एक बार फिर सोशल मीडिया पर ज़हर उगलते हुए पाए गए हैं। न सिर्फ़ ज़िंदा व्यक्तियों, बल्कि अब उन्होंने मरे हुए लोगों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करनी शुरू कर दी है। दरअसल, एक ट्विटर यूजर ने पटनायक को आइना दिखाते हुए उनके द्वारा की गई आपत्तिनजक टिप्पणियों का स्क्रीनशॉट ट्वीट किया और उनसे जवाब माँगा। ट्विटर यूजर ने लिखा कि अगर आपकी माँ आज ज़िंदा होतीं तो आपकी हरकतों के कारण अपना सिर शर्म से झुका लेतीं।

इसका जवाब देते हुए देवदत्त पटनायक ने अजीबोगरीब भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने आज ही अपनी माँ (जो मर चुकी हैं) से बात की है और वह बिलकुल खुश हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनके सभी पूर्वज स्वर्ग में हैं और हँसी-ख़ुशी हैं। उन्होंने ट्विटर ट्विटर यूजर को लिखा कि तुम्हारे सारे पूर्वक नरक में बिलख-बिलख कर रो रहे हैं।

ट्विटर यूजर बाला को पटनायक ने लिखा, “एक पागल प्रेमी की तरह मेरा पीछा करने के लिए धन्यवाद।” देखें ट्वीट:

सवाल पूछने वालों से लगातार दुर्व्यवहार करने और उनके ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करने के लिए कुख्यात देवदत्त पटनायक को लोगों ने उनकी ताज़ा हरकत के बाद ‘देवदत्त नालायक’ और ‘देवदत्त खलनायक’ जैसे विशेषणों से नवाजा है।

हाल ही में देवदत्त ने हड़प्पा को लेकर विवादित ट्वीट्स किए थे। जब एक ट्विटर यूजर से उनसे सवाल किया तो उन्होंने अभद्रता के साथ जवाब दिया और उससे कहा, “I will check with . your mother ” यानी वो (देवदत्त) इस बात का पता उसकी माँ (मोहंती, यूजर) के साथ लगाएँगे।

देवदत्त पटनायक ट्विटर पर ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए कुख्यात हैं

देवदत्त सिर्फ यहीं तक नहीं रुके। पूरे थ्रेड को देखेंगे तो आप पाएँगे कि उन्होंने लोगों के माँ-बाप से लेकर हर दूसरे विचार रखने वालों को मूर्ख तक की संज्ञा दे डाली। देवदत्त ने किसी के माँ-बाप को कोसा तो किसी की पैदाइश तक पर शक कर डाला।

30 साल बाद यासीन मलिक के ख़िलाफ़ ट्रायल शुरू: वायुसेना के 4 जवानों की आतंकियों ने कर दी थी हत्या

जम्मू स्थित टाडा कोर्ट ने अलगाववादी यासीन मलिक के ख़िलाफ़ ट्रायल शुरू कर दिया है। मामला 1990 का है, जब भारतीय वायुसेना के 4 निहत्थे जवानों की हत्या कर दी गई थी। इनमें स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना भी शामिल थे।इस घटना के 30 साल बाद ट्रायल शुरू किया गया है, जिससे वीरगति को प्राप्त जवानों के परिजनों की न्याय की आस फिर से जगी है। टाडा कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक को पेश करने का भी आदेश दिया है।

Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act (TADA) कोर्ट इस मामले में 1 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। आरोप है कि जिन आतंकियों ने जवानों की हत्या की थी, वे यासीन मलिक द्वारा संचालित आतंकी संगठन के सदस्य थे। यह घटना जनवरी 25, 1990 को हुई थी। गोलीबारी की इस घटना में टाडा कोर्ट ने यासीन मालिक सहित 4 आरोपितों को पेश होने का आदेश दिया है।

1990 में इस मामले में सीबीआई ने टाडा कोर्ट के समक्ष 2 चार्जशीट दायर की थी। 1995 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने ट्रायल पर रोक लगा दी थी। यासीन मलिक टेरर फंडिंग के मामले में भी आरोपित है और फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। उसे पुलवामा हमले के बाद गिरफ़्तार किया गया था।

भारतीय वायुसेना के जवानों की हत्या तब की गई जब उनके पास कोई भी हथियार नहीं था और वे एयरपोर्ट जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे। वहाँ भारतीय वायुसेना के 14 जवान थे। तभी अचानक से एक मारुति जिप्सी और एक बाइक से 5 आतंकी वहाँ पहुँचे और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उन्होंने एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवानों के अलावा 2 कश्मीरी महिलाओं की भी हत्या कर दी गई, जो बस का इंतजार कर रही थीं। आतंकियों ने ख़ून से लथपथ जवानों के सामने डांस करते हुए जिहादी नारे भी लगाए थे।

पश्चिम बंगाल: मुहर्रम के जुलूस में जम कर लहराई गईं बंदूकें, 8 साल के बच्चे को लगी गोली

पश्चिम बंगाल के मालदा में मुहर्रम जुलूस के दौरान समुदाय विशेष के लोगों ने खुलेआम बंदूकें लहराईं। वीडियो में देखा जा सकता है कि दूसरे समुदाय के लोग सड़क पर जुलूस लेकर नाचते-गाते और नारा लगाते चल रहे हैं। इनमें से अधिकतर युवा थे और सरेआम बंदूकें लहरा रहे थे। जहाँ ये सब हो रहा था, वहाँ एक हाई स्कूल भी था। देखें वीडियो:

भाजपा के जॉइंट जनरल सेक्रेट्री सुरेंद्र जैन ने मालदा के मुहर्रम जुलूस का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि समुदाय विशेष की हर हिंसा, त्योहार में शांति संदेश मिलता है चाहे वो दहशत पैदा करने के लिए हो। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा है कि शांतिपूर्ण ढंग से की गई रामनवमी, हनुमान जयंती, दुर्गापूजा से वह क्यों आतंकित होती हैं?

विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि इस तरह की ख़बरें ‘सेक्युलर मीडिया’ द्वारा नहीं दिखाई जाती हैं और न ही कोई ‘सेक्युलर नेता’ इस तरह की वीडियो पर आपत्ति जताता है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए।

उधर, मालदा में ही एक 8 वर्षीय बच्चे को मुहर्रम के जुलूस के दौरान गोली लग गई, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया। रतुआ थाना के अंतर्गत आने वाले हाजीपुर गाँव में यह बच्चा मुहर्रम का जुलूस देख रहा था। जुलूस में शामिल कई लोग फायरिंग भी कर रहे थे। 2 गोली बच्चे को आकर लग गई। वह तुरंत ज़मीन पर गिर पड़ा। एक गोली उसके पैर में लगी और दूसरी छाती के पास से गुजर गई।

‘न्यायपालिका बिकी हुई है’: वामपंथी गिरोह का अगला नैरेटिव क्योंकि इनके बाप-दादा फँस रहे हैं

“तुम सोचते हो कि हमारी लड़ाई साल भर की है, दस साल की है या फिर बीस, पचास या सौ साल की है, जबकि हमारी लड़ाई तब तक की है, जब तक हमारी जीत नहीं हो जाती।”

ये ध्येय वाक्य एक आतंकी विचारधारा का भी है, इज़रायल वालों का भी है और लगता है कि भारत को बर्बाद करने पर तुले वामपंथियों और लिबरपंथियों के गिरोह का भी है। मतलब इससे नहीं है कि इनके हर झूठ को आप पहले से कम समय में पकड़ लें, मतलब इससे है कि ये प्रलाप करते रहेंगे, अजेंडाबाजी चलती रहेगी, प्रोपगेंडा का प्रपंच चलता रहेगा… एक के बाद एक… आप तर्क करेंगे, ये पिछले झूठ को भुला कर नए झूठ गढ़ लेंगे।

उदाहरण भरे पड़े हैं जहाँ एक भीड़ द्वारा किए गए सामाजिक अपराध को मज़हबी बता कर चुनावों के परिणाम को प्रभावित करने से लेकर आठ साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या को हिन्दू और हिन्दुस्तान से जोड़ कर पूरे विश्व में एक धर्म और राष्ट्र की छवि सिर्फ इसलिए धूमिल करने की कोशिश हुई क्योंकि सत्ता के केंद्र में विरोधी विचारधारा के लोग हैं।

चर्चों में किसी चोर ने आग लगाई, या शराबी ने कुछ तोड़ा और वामपंथी चर्चा का विषय बना कि हिन्दू अल्पसंख्यकों को जीने नहीं दे रहे। कथित चोर तबरेज की मृत्यु हृदयाघात से हुई और बवाल काटा गया कि ‘जय श्री राम’ न बोलने पर उसे मार दिया गया। इसमें दोमत नहीं कि हत्या का कारण पिटाई है, लेकिन पिटाई का कारण उसका समुदाय विशेष से होना नहीं, कथित तौर पर एक चोर होना था। लेकिन 2018 से अब तक 22 हिन्दुओं की समुदाय विशेष द्वारा की गई मज़हबी हत्या पर एक चुप्पी दिखती है।

इनकी संगठनात्मक क्षमता, डिजिटल से लेकर सड़कों तक देखते ही बनती है कि गौरी लंकेश की हत्या के आधे घंटे के भीतर हत्यारे का राइट विंगर होना पता चल जाता है इन्हें और ज़िम्मेदारी सीधे मोदी की, लेकिन राजदेव रंजन सरीखे बाईस और पत्रकारों की हत्या पर एक ट्वीट तक नहीं जाता।

पहले ये खुले सांड की तरह हर खेत में घुस जाते थे, कोई पकड़ने वाला नहीं था और सत्ता में बैठा सत्ताधीश इनकी बातों से आनंद पाता था क्योंकि अगर कुछ घटना हुई तो आसानी से उस विचारधारा पर थोप दो जो तुम्हें चैलेंज करती हो, और अगर वही सत्ता में रहे तब तो कह दो कि हर चीज पर तो इन्हीं का नियंत्रण है, तो ये मनमानी कर रहे हैं, अपराधियों को संरक्षण प्राप्त है। चित मैं जीता, पट तू हारा…

न्यायपालिका पर हमले की शुरुआत

‌अब आने वाले दिनों में आप देखेंगे कि न्यायालयों के फ़ैसलों पर सवाल उठेंगे, ये कहा जाएगा कि सब कुछ मैनेज हो गया है। चूँकि लोकतंत्र की हत्या का गन्ना पेड़ कर उसकी सिट्ठी निकाल चुके मीडिया के एंकरों, नेताओं और चिरकुट विचारधारा के समर्थकों के लिए सत्ता में बैठी विचारधारा सशक्त ही होती जा रही है, और लोग उसे प्रो-इनकम्बेन्सी के आधार पर सहमति दे रहे हैं, तो न्यायपालिका, जिस पर हर नागरिक का विश्वास है, उसे ही डीलेजिटिमाइज यानी बिका हुआ, नकारा, खोखला जैसा साबित करने पर आ गए हैं।

आप देखिए कि रवीश कुमार मनीला में अवार्ड ले रहे हैं और उनकी स्पीच पोलिटिकल से भी आगे निकल कर एक टुच्ची विरोधी पार्टी के नेता जैसी हो जाती है जिसका एक ही मकसद होता है सामने वाले की छवि खराब करना। रवीश कुमार बहुत ही सामान्य तरीके से बता देते हैं कि जुडिशरी मैनेज हो गई है, नागरिकों के शत्रु के तौर पर कार्य कर रही है।

ऐसा कहने के पीछे क्या उद्देश्य हो सकता है? जबकि मनीला तो छोड़िए अमेरिका भी अब उस स्थिति में नहीं है कि प्रतिबंधों का धमकी दे कर भारत सरकार पर दबाव बना कर किसी को बचा ले या भगा दे। भोपाल गैस कांड वाले एंडरसन की याद तो सबको होगी ही। फिर ऐसे मंचों पर क्यो रो रहे हैं लोग? प्रणय रॉय, अर्बन नक्सलियों की गिरफ़्तारी, चिदम्बरम से लेकर सोनिया तक कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं तो जरूरी है कि जहाँ से सजा मिलने की उम्मीद हो, उस संस्था को ही भ्रष्ट कह दिया जाए।

इसलिए अगला चरण न्यायपालिका पर हमले का है। अपने गिरोह के चोरों और नेताओं को सजा से या पब्लिक परसेप्शन से, उनकी छवि को सही रखने के लिए इन्हें न्यायालय पर, सरकारी संस्थाओं पर हमला बोलना ही होगा। ये जानते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया तो लम्बी चलेगी लेकिन लोगों की नज़रों में इनके तारणहारों की, चरणपादुका चटवाने वालों की, इन्हें ज़िंदा रखनेवालों की इमेज तो खराब हो जाएगी, और आज के दौर में जब पार्टी पहले से ही अपनी छवि बर्बाद कर चुकी हो, तो और आरोपों का सही साबित होते जाना, उनकी राजनैतिक करियर के लिए बिलकुल गलत होगा। अतः, रास्ता एक ही है कि ‘जुडिशरी कुछ लोगों के इशारे पर चल रही है’ कहते हुए माहौल बनाया जाए।

लेकिन माहौल बनाने से क्या होगा? माहौल बनाने का सबसे बड़ा फायदा होता है कि लोग उन्मादी होते जाते हैं। उनके पास हर दिन एक नई बात आती है जिससे उन्हें विश्वास दिलाया जाता है कि सरकार उनके ऊपर नकेल कस रही है, विरोधियों का दमन कर रही है, झूठे केस में फँसा रही है, और तो और सरकार साक्ष्य पैदा कर रही है। इससे पार्टी समर्थक तो छोड़िए, जो ग़ैर राजनीतिक व्यक्ति है, वो भी सोचने लगते हैं कि सही में लोकतंत्र का हर स्तंभ ख़तरे में है या खोखला किया जा रहा है। अगर वो हर रोज यही सुनेगा कि पार्टी सत्ता में है, विरोधी पर केस बनाया, फिर एजेंसियों को कहा कि घर से जलील कर के उठाओ, फिर जज को मैनेज कर के कहा कि इसे बेल मत दो, फिर झूठे सबूत ले आओ और उस आधार पर सजा दिलवा दो।

ऐसा एक बार हो तो आप कहेंगे कि मीडिया वाले कुछ भी दिखाते हैं, लेकिन जब राफ़ेल में ‘जाँच कराने में क्या जाता है’ हर दिन आपको कहा जाए तो आप मानने लगते हैं कि हाँ, जाँच करा ही लो। जबकि जाँच हुई और कोर्ट ने कहा सब ठीक है, फिर भी नहीं माने और कहते हैं कि एक क्लासिफाइड डाक्यूमेंट को, जो संवेदनशील जानकारियों से भरी हुई है, पब्लिक कर दिया जाए ताकि लोगों को पता लगे कि सरकार जो पैसा खर्च कर रही है, उसमें कितने मिसाइल आ रहे हैं और वो कैसे काम करते हैं। जबकि यही एंकर और विरोधी नेता यह भूल जाते हैं कि इस सरकार को प्रतिनिधि के तौर पर इसी जनता ने भेजा है।

इसलिए जब माहौल तैयार हो जाएगा तो नवंबर में राम मंदिर के फ़ैसले के बाद दंगे की स्थिति को हवा देने में सहूलियत होगी कि कथित अल्पसंख्यकों को देश की न्यायपालिका ने भी धोखा दे दिया, सारे जज संघी हो गए है। ये उस स्थिति की तैयारी है जहाँ पूरे देश के हर उन्मादी को उकसाने के प्रयत्न हो रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि अगर फ़ैसला तुम्हारे पक्ष में है तब तो ठीक है लेकिन अगर विरोध में गया तब सारा सिस्टम बिक चुका है, इस देश में तो अब तुम्हारी सुनने वाला कोई है ही नहीं।

अतः, न्यायपालिका और जज इस गिरोह का अगला निशाना हैं। पहले भी इन्होंने न्यायपालिका को धता बताते हुए उसके ख़िलाफ़ बोला है। जस्टिस लोया की मौत को उसका परिवार भूल गया लेकिन ये किसी भी तरह बताना चाहते हैं कि किसी ने उन्हें मरवा दिया। साबित कुछ न भी हो, कोई बात नहीं, लेकिन लोगों के मन में शंका का बीज छोड़ देना भी सफलता ही है।

ये गिरोह चालाक है। ये हर बात के झूठे साबित होने के बाद भी उसे अभिव्यक्ति के नाम पर बोलता जाता है। इससे पढ़ने वाला, सुनने वाला अपने अवचेतन में रखता जाता है। उस क्षण में भले ही वो उस बात को नकार दे, लेकिन एक आदमी बार-बार, नए झूठ फेंकता रहे, आप सुनते रहें, तो उसका असर होने लगता है। फिर आप बोलने लगते हैं कि ‘यार जाँच करवाने में क्या जाता है’, फिर आप कहने लगते हैं कि ‘इतनी बार बोल रहा है, कुछ को सच होगा’। जबकि इस गिरोह की यही विशेषता है कि इनका जहर बिना मिलावट का होता है, ये अपने नैरेटिव में सत्य की मात्रा शून्य रखते हैं।

यासीन मलिक पर मुकदमा खुल चुका है, 84 के दंगों पर दोबारा केस खुला है, नेशनल हेराल्ड केस है, चिदंबरम हैं, अगस्ता-वेस्टलैंड है, रामजन्मभूमि है, एनडीटीवी का प्रणय रॉय है, क्विंट का राघव बहल है, 370 का मामला सुप्रीम कोर्ट ने देखने का वादा किया है, अर्बन नक्सलियों पर मामले चल रहे हैं…

इस सरकार ने इन चोरों, डकैतों, दंगाइयों, हत्यारों और देश को तोड़ने की मंशा रखने वालों पर खौलता हुआ पानी डाला है और वो भी एक साथ, हर तरफ से। इनकी चमड़ी मोटी है, इसमें दोराय नहीं लेकिन सरकार के पास खौलता हुआ पानी बहुत ज्यादा है, क्योंकि सरकार सौर ऊर्जा में भी बहुत निवेश कर रही है और नदियों के पानी पर बाँध भी बनाए जा रहे हैं।

‘गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग हिंदुस्तानी नागरिक, पाकिस्तान का खिलौना था अनुच्छेद-370’

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले गुलाम कश्मीर (POK) स्थित गिलगित-बाल्टिस्तान के एक्टिविस्ट सेंगे सेरिंग ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन किया है। समाचार एजेंसी ANI को दिए बयान में उन्होंने साफ़ कहा कि यह पाकिस्तान में एक विशेष समूह को दूसरे सम्प्रदायों के ऊपर वीटो-पावर जैसा विशेषाधिकार देता था। यही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि इस विशेषधिकार का इस्तेमाल करने वाले पाकिस्तानी सेना के मित्र बन गए थे।

पाक के रणनीतिक हित साध रहे थे

वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) स्थित इंस्टिट्यूट फ़ॉर गिलगित-बाल्टिस्तान स्टडीज़ के निदेशक सेंगे सेरिंग के मुताबिक अनुच्छेद-370 कश्मीर के उन लोगों के हाथ का खिलौना था, जिन्हें वह प्रावधान अन्य पंथों और जातीय समूहों से इतर ‘वीटो’ देता था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस वीटो का फायदा उठाने वाले लोग पाकिस्तानी सेना के पाले में जा बैठे और पाकिस्तान के रणनीतिक हित जम्मू-कश्मीर में पूरे कर रहे थे।

पहले भी उठाते रहे हैं हिंदुस्तानी आवाज़

सेरिंग इसके पहले भी हिंदुस्तान-समर्थक आवाज़ गुलाम कश्मीर को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं। इसी साल मार्च में उन्होंने साफ किया था कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग हिंदुस्तानी नागरिक हैं। यही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के ज़मीन या लोगों पर किसी भी तरह के अधिकार को नकार दिया था। साथ ही सेरिंग पाकिस्तान के साथ हिंदुस्तान के सिंधु जल समझौते को पूरी तरह तोड़ने की वकालत करते हैं।

कश्मीर पर हमारे स्टैंड में कोई बदलाव नहीं: UN ने फिर ठुकराई पाक की मध्यस्थता की अपील

कश्मीर मुद्दे को वैश्विक पटल पर उठाकर लगातार अपनी फजीहत करवाने वाले पाकिस्तान को एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र ने झटका दे दिया हैं। जिससे साफ़ हो गया है कि यूएन कश्मीर मामले पर मध्यस्ता को लेकर पाक की अपील नहीं स्वीकारेगा।

दरअसल, इस बार यूएन के महासचिव के प्रवक्ता ने अपनी ओर से जारी बयान में स्पष्ट रूप कहा है कि दोनों देशों को ये मुद्दा आपसी सहमति के साथ सुलझाना होगा। इस मुद्दे पर मध्यस्ता को लेकर उनके स्टैंड में कोई बदलाव नहीं होगा।

यूएन के सेक्रेटरी जनरल के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया, “मध्यस्थता पर हमारा स्टैंड पहले जैसा ही है, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। महासचिव ने दोनों देशों की सरकार से संपर्क किया है। जी-7 की बैठक में भारत के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस पर चर्चा की और पाकिस्तान के विदेश मंत्री से इस पर बात हुई है।”

मीडिया खबरों की मानें तो यूएन ने बार-बार पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे को उछालने पर कहा है कि दोनो देशों को शांतिपूर्ण तरीके से इस मामले का समाधान ढूँढना होगा। इसपर उनकी ओर से मध्यस्ता का अभी कोई विचार नहीं हैं।

हालाँकि, भारत शुरुआती समय से ही कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताता आया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के आगे भी इस बात को विनम्रता से बता चुके हैं कि ये दो देशों का मामला है और वह इसमें किसी और देश को परेशान नहीं करना चाहते। लेकिन, 5 अगस्त के बाद से पाकिस्तान लगातार इस मामले में तीसरे पक्ष को दखल देने के लिए गुहार लगा रहा है और अलग-अलग मौक़ो पर सभी देशों से इसपर आवाज उठाने की माँग कर रहा हैं।

कॉन्ग्रेस की साड़ियॉं लेकर जा रहे वाहन ने मारी टक्कर, वोटरों के बीच बॉंटा जाना था

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा उपचुनाव में प्रचार अभियान के साथ ही मतदाताओं को लुभाने के हथकंडे भी जारी हैं। मंगलवार (सितंबर 10, 2019) देर शाम पुलिस ने साड़ियों से भरे एक वाहन को पकड़ा है। आरोप है कि उक्त साड़ियाँ वोटरों के बीच बाँटने के लिए कॉन्ग्रेस ने भिजवाई थी। घटना कुआकोण्डा थाना क्षेत्र की है।

जानकारी के मुताबिक, कॉन्ग्रेस कार्यालय से साड़ियों का बंडल लादकर गाड़ी रवाना हुई थी। इसी दौरान गाड़ी ने एक बाइक सवार को ठोकर मार दी। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और पिकअप वाहन के चालक से पूछताछ की।

जानकारी के मुताबिक, कुआकोण्डा थाना क्षेत्र में साड़ी से भरे वाहन क्रमांक सीजी 18 एन 2879 को पकड़ा गया। वाहन में चालक के साथ रेंगनार निवासी मासा मौजूद था। पूछताछ के दौरान मासा ने सारी सच्चाई उगल दी और साड़ियों का बंडल कॉन्ग्रेस कार्यालय से लाने की बात स्वीकार कर ली। उसने बताया कि वह कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता है और यह साड़ियाँ वो रेंगनार गाँव में बाँटने ले जा रहा था।

बता दें कि, उपचुनाव को लेकर पुलिस द्वारा जिलेभर में वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। इसके बावजूद साड़ियों से भरी गाड़ी मुख्यालय से पार होने की घटना ने पुलिस की मुस्तैदी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, वाहन चालक द्वारा दी गई जानकारी के बाद कुआकोण्डा पुलिस विस्तृत जाँच में जुट गई है।

दंतेवाड़ा में इस महीने की 23 तारीख को वोट डाले जाएँगे। बीते साल इस सीट से भाजपा के भीमा मंडावी ने जीत दर्ज की थी। उनके निधन के कारण यहॉं उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी को मैदान में उतारा है तो कॉन्ग्रेस की ओर से देवती कर्मा चुनाव लड़ रही हैं।

‘कश्मीरी पोर्न स्टार’ के साथ लगाई शेहला रशीद की फोटो, दिल्ली पुलिस से अरेस्ट करने की गुहार

सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक ट्वीट किया। इस ट्वीट के बाद शेहला भड़क गईं और उन्होंने दिल्ली पुलिस से इसकी शिकायत की। आपत्तिजनक ट्वीट में शेहला रशीद को लीजेंडरी पोर्न स्टार जॉनी सिन्स के साथ दिखाया गया है। बता दें कि ये तस्वीर फोटोशॉप्ड है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

इस एडिटेड तस्वीर में देखा जा सकता है कि पोर्न स्टार जॉनी सिन्स किसी लड़की की छाती पर स्टेथोस्कोप लगा कर ‘मेडिकल चेक-अप’ कर रहे हैं। उस लड़की के चेहरे की जगह शेहला रशीद का चेहरा लगा दिया गया है। इस ट्वीट के साथ लिखा हुआ है- “शेहला रशीद की हुई तबीयत ख़राब। एस्कॉर्ट के डॉक्टर जॉनी करेंगे इलाज।” ट्वीट में शेहला के लिए प्रार्थना करने की भी अपील की गई है।

इस ट्वीट में लिखा गया है कि प्रत्येक रीट्वीट पर शेहला के इलाज के लिए एक डॉलर दिया जाएगा। साथ ही इसमें
जॉनी सिन्स की पहचान ‘अमेरिका के डॉक्टर जनार्दन सिन्हा’ के रूप में दी गई है। साथ ही ‘जनार्दन सिन्हा उर्फ़
जॉनी सिन्स’ को अमेरिका का मशहूर आँखों का डॉक्टर भी बताया गया है। ट्वीट के अनुसार, शेहला पैलेट गन्स का शिकार बनी हैं और इसलिए उनका इलाज किया जाएगा।

शेहला रशीद ने इस आपत्तिनजक ट्वीट के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस को टैग कर कार्रवाई की माँग की। शेहला रशीद ने कहा कि उनके चेहरे के साथ छेड़छाड़ कर उसे एक अश्लील तस्वीर में लगा दिया गया है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली पुलिस ने माँग करते हुए कहा कि ऐसा करने वाले ट्विटर यूजर पर कार्रवाई की जाए।

शेहला रशीद ने दावा किया कि उक्त व्यक्ति को केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ट्विटर पर फॉलो करते हैं। उन्होंने इसे शर्मिंदगी भरा वाकया करार दिया। इससे पहले पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक अब्दुल बासित ने जॉनी सिन्स को जम्मू-कश्मीर में ‘भारतीय सेना द्वारा प्रताड़ित व्यक्ति’ समझ लिया था, जिसका ख़ुद जॉनी सिन्स ने खंडन किया और बासित का जम कर मज़ाक बना।